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  • PM मोदी ने तमिलनाडु में खोले विकास के नए रास्ते, मेट्रो-रेल और सड़क परियोजनाओं का उद्घाटन

    PM मोदी ने तमिलनाडु में खोले विकास के नए रास्ते, मेट्रो-रेल और सड़क परियोजनाओं का उद्घाटन

    चेन्नई
    चेन्नई में रविवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का दौरा मंदिर, मेट्रो और विज्ञान के इर्द-गिर्द रहा. उन्होंने तमिलनाडु में करीब 13 हजार करोड़ रुपये की विकास परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास किया. इस दौरान चेन्नई मेट्रो की फेज-2 येलो लाइन का उद्घाटन किया गया. पीएम मोदी ने IIT मद्रास परिसर में भगवान शिव के मंदिर में पूजा की, फिर इंसानी दिमाग पर रिसर्च करने वाले ब्रेन सेंटर पहुंचे. यहां विशेषज्ञों ने उन्हें चल रहे शोध के बारे में जानकारी दी.

    इस दौरान पीएम मोदी ने बताया कि भारत अपनी संस्कृति से प्रेरणा लेकर आगे बढ़ रहा है. विज्ञान में तरक्की और नई सुविधाओं से लोगों को नए मौके मिल रहे हैं. विकास के इन कामों से लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी आसान होगी और युवाओं के लिए रोजगार के नए मौके बनेंगे. इस कार्यक्रम में तमिलनाडु के राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर और मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय भी मौजूद रहे. पीएम मोदी ने अपने दौरे को भारत की विरासत, विज्ञान की तरक्की और आधुनिक सुविधाओं से जोड़ते हुए कहा कि देश की सांस्कृतिक ताकत से प्रेरणा लेकर आगे बढ़ने की जरूरत है.

    पीएम मोदी ने तमिलनाडु को दी इन योजनाओं की सौगात
    तमिलनाडु को 13 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा की विकास परियोजनाओं की सौगात मिली. पीएम मोदी ने चेन्नई मेट्रो के फेज-2 में पूनमल्ली से वडापलानी तक के रूट का उद्घाटन किया. इस परियोजना पर करीब 4,900 करोड़ रुपये खर्च हुए हैं. वहीं, करीब 3,700 करोड़ रुपये की सड़क परियोजनाओं के तहत NH-744 के वडुगपट्टी-थेरकुवेंगनल्लूर हिस्से और मदुरै रिंग रोड के एक हिस्से का उद्घाटन किया गया. तिरुवरूर बाईपास की आधारशिला भी रखी गई. रेलवे से जुड़े 750 करोड़ रुपये से ज्यादा के प्रोजेक्ट के तहत कराईकल-पेरलम रेल लाइन, कोयंबटूर के आसपास तीन रेल फ्लाईओवर और पांच अमृत भारत रेलवे स्टेशनों का उद्घाटन किया गया.

    इसके अलावा, चेन्नई पोर्ट पर सामान रखने की जगह, चार गोदाम, क्रूज टर्मिनल और नाविकों के लिए क्लब का उद्घाटन किया. वीओ चिदंबरनार पोर्ट पर आठ परियोजनाओं की शुरुआत की गई, जबकि कामराजर पोर्ट पर कोयला बर्थ-3 का उद्घाटन हुआ. चेन्नई के मणाली स्थित रिफाइनरी में करीब 1,620 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाली लुब्रिकेंट बेस स्टॉक परियोजना की आधारशिला रखी गई. इसके अलावा, पीएम मोदी ने IIT मद्रास के सुधा गोपालकृष्णन ब्रेन सेंटर को देश को समर्पित किया. यहां 100 से ज्यादा मानव दिमागों का 3D नक्शा बनाने का वैज्ञानिक मिशन शुरू किया गया. साथ ही, स्ट्रोक से प्रभावित दिमाग का विशेष एटलस भी जारी किया गया, जिससे वैज्ञानिकों को इलाज के नए तरीके खोजने में मदद मिल सकती है.

    मंदिर में पूजा के बाद ब्रेन सेंटर पहुंचे पीएम मोदी
    पीएम मोदी ने IIT मद्रास परिसर में स्थित श्री जलकंटेश्वर स्वामी मंदिर में पूजा-अर्चना की. यह भगवान शिव का सदियों पुराना मंदिर है. यहां पारंपरिक संगीत के साथ उनका स्वागत किया गया. मंदिर के पुजारियों ने उन्हें भगवान कृष्ण और श्रीराम को समर्पित एक उप-मंदिर में रखे श्रीचक्र का महत्व बताया. इसके बाद पीएम मोदी ने श्रीचक्र पर फूल चढ़ाए. मंदिर में दर्शन के बाद वह सुधा गोपालकृष्णन ब्रेन सेंटर पहुंचे. IIT मद्रास ने साल 2022 में इस सेंटर की शुरुआत की थी. यहां इंसानी दिमाग की बनावट और उसके अलग-अलग हिस्सों के बीच संबंधों को समझने पर काम किया जाता है. इसके लिए दिमाग की हाई-रेजोल्यूशन इमेजिंग तकनीक का इस्तेमाल होता है.

    संस्थान का लक्ष्य दिमाग से जुड़ा विस्तृत डेटा जुटाना, वैज्ञानिक शोध को आगे बढ़ाना और नई तकनीक विकसित करना है. पीएम मोदी को सेंटर के कामकाज और रिसर्च के बारे में विस्तार से बताया गया.

    'विरासत और भविष्य की आकांक्षाएं साथ-साथ आगे बढ़ रही हैं'
    पीएम मोदी ने कहा कि भारत अपनी सांस्कृतिक विरासत से प्रेरणा लेता है. विज्ञान में तरक्की के साथ आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर नए अवसर पैदा कर रहा है. उन्होंने कहा कि देश की विरासत और भविष्य की आकांक्षाएं साथ-साथ आगे बढ़ रही हैं. उन्होंने सार्वजनिक परिवहन को शहरों के विकास के लिए जरूरी बताया. उनके मुताबिक, बेहतर यातायात के लिए सिर्फ सड़कों को चौड़ा करना काफी नहीं है. शहरों को ऐसी सुविधाओं की जरूरत है, जिनसे लोगों का सफर आसान हो सके.

    उन्होंने बताया कि साल 2014 में देश के सिर्फ पांच शहरों में मेट्रो सेवा थी, जबकि अब 25 शहरों में मेट्रो चल रही है. पीएम मोदी ने यह भी कहा कि तमिलनाडु ने देश में मैन्युफैक्चरिंग के विकास में अहम भूमिका निभाई है. उनके मुताबिक, साल 2014 के बाद भारत के इलेक्ट्रॉनिक्स निर्यात में 11 गुना बढ़ोतरी हुई है, जबकि रक्षा निर्यात 50 गुना बढ़ा है. इंजीनियरिंग उत्पादों का निर्यात भी नए स्तर पर पहुंचा है.

    मुख्यमंत्री विजय ने रखीं कई मांगें
    मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय ने पीएम मोदी के सामने राज्य से जुड़े कई मुद्दे उठाए. उन्होंने कहा कि उनकी सरकार सामाजिक न्याय पर आधारित, भ्रष्टाचार-मुक्त और पारदर्शी शासन बनाने की दिशा में काम कर रही है. उन्होंने केंद्र और राज्य सरकारों के मिलकर काम करने को भी जरूरी बताया. विजय ने चेन्नई मेट्रो के तीसरे चरण को जल्द मंजूरी देने की मांग की. उन्होंने कोयंबटूर और मदुरै में मेट्रो रेल बनाने के प्रस्ताव पर दोबारा विचार करने की अपील की. इसके अलावा अंतरराज्यीय रेल लाइन को मंजूरी देने और राज्यों के बीच पानी का उचित बंटवारा सुनिश्चित करने की मांग भी रखी.

    मुख्यमंत्री ने समग्र शिक्षा अभियान के तहत लंबित 100 करोड़ रुपये जारी करने का मुद्दा भी उठाया. उन्होंने बताया कि तमिलनाडु विधानसभा ने मद्रास हाईकोर्ट की कार्यवाही में तमिल भाषा के इस्तेमाल के लिए प्रस्ताव पारित किया है.

  • PM मोदी का बड़ा बयान- गांव से शहर तक पहुंची 5G कनेक्टिविटी, भारत बन रहा डिजिटल पावरहाउस

    PM मोदी का बड़ा बयान- गांव से शहर तक पहुंची 5G कनेक्टिविटी, भारत बन रहा डिजिटल पावरहाउस

    इंडिया मोबाइल कांग्रेस 2026 का आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उद्घाटन किया. IMC 2026 देश का बड़ा टेक और टेलीकॉम इवेंट है. इसका आयोजन 7 से 10 अक्टूबर तक नई दिल्ली के यशोभूमि में हो रहा है. इस बार IMC का 10वां एडिशन है.

    नरेंद्र मोदी ने IMC 2026 का उद्घाटन करते समय सबसे पहले लोगों का धन्यवाद किया. उन्होंने बताया कि आज भारत के लिए एक विशेष दिन है.  साथ ही उन्होंने बताया कि कल ही उन्हें देश की सेवा करते हुए 25 साल पूरे हुए हैं. उद्घाटन के साथ ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अभिनेता नाना पाटेकर को श्रद्धांजलि दी.

    नरेंद्र मोदी ने बताया है कि बीते 10-12 सालों में मोबाइल फोन गर्वनेंस का टूल बनकर सामने आया है. यह हमारे डिजिटल इंडिया का को रहा है. आज दूर सुदूर गांव और गरीब के बच्चे भी मोबाइल की वजब से बेहतर एजुकेशन पा रहे हैं.

    कोरोना माहामारी के दौरान भी मिला फायदा – मोदी
    मोबाइल से कोरोना महामारी के दौरान भी काम और पढ़ाई जारी रही, जो नई टेक्नोलॉजी की वजह से संभव हुआ. दूर-दराज के गांवों के बच्चे भी डिजिटल लर्निंग का फायदा उठा पा रहे हैं. उन्होंने ऑनलाइन एजुकेशन के लिए ‘दीक्षा’ प्लेटफॉर्म के बारे में भी बात की.

    प्रधानमंत्री मोदी ने बताया कि अब सरकारी योजना और सब्सिडी का लाभ आम लोगों तक आसानी से पहुंच रहा है. साथ ही उन्होंने बताया है कि भारत में टेलिकॉम सेक्टर का विस्तार हुआ है. रिमोट एरिया में भी टेलिकॉम का विस्तार हुआ और डेटा भी अफोर्डेबल हुआ है.

    आज भारत में 50 करोड़ लोग किसी ना किसी तरह से गेमिंग सेक्टर से जुड़ा है. लोग गेमिंग से जुड़ने के साथ ही ई स्पोर्ट्स में कॉन्ट्रीब्यूट भी कर रहा है. सस्ते डेटा की वजह से सभी को फायदा हुआ है. सिर्फ कंटेंट क्रिएशन की इंडस्ट्री भारत में हजारों करोड़ रुपये की हो चुकी है.

    फोन की सिक्योरिटी और नेटवर्क सिक्योरिटी हम सभी की प्राथमिकता है. अब लोगों को पता रहता है कि फोन कौन कर रहा है और मैसेज कौन कर रहा है. साथ ही लोगों को पता रहता है कि कॉल और मैसेज फेक हैं या नहीं. उन्होंने बताया है कि साइबर फ्रॉड और साइबर क्राइम सीमाएं नहीं मानते हैं. इसके लिए जरूरी कि साइबर फ्रॉड से मुकालबा करने के लिए एक ग्लोबल फ्रेम वर्क तैयार करना चाहिए. पीएम ने कहा कि ऐसे मैकेनिज्म तैयार करें जिससे साइबर फ्रॉड को रोका जा सके.

    इंडिया मोबाइल कांग्रेस की थीम ‘Scale Without Boundaries’ है. यहां 5G, 6G, AI, IoT, सैटेलाइट कम्युनिकेशन और दूसरी नई टेक्नोलॉजी देखने को मिल रही हैं. दुनियाभर की बड़ी टेक और टेलीकॉम कंपनियां, स्टार्टअप और इंडस्ट्री के बड़े नाम इस इवेंट में हिस्सा ले रहे हैं. आइए जानते हैं क्या होगा इस इवेंट में.

    फ्यूचर टेक्नोलॉजी की झलक
    IMC 2026 एशिया का बड़ा टेक्नोलॉजी शोकेस होने वाला इवेंट है. इस इवेंट में देश और दुनिया की बड़ी टेक्नोलॉजी कंपनियों से लेकर नए-नए स्टार्टअप अपने प्रोडक्ट्स और भविष्य में इस्तेमाल होने वाली टेक्नोलॉजी की झलक दिखा रहे है. इस इवेंट में टेलीकॉम को 5G से 6G तक कैसे लेकर जाया जाए, इस पर भी बात होगी.

    आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) को देश में ही कैसे बनाया जा सके और लोगों के भले के लिए इसका इस्तेमाल कैसे हो, इस पर भी चर्चा होगी. स्टार्टअप्स अपने AI प्रोडक्ट्स की झलक दिखा सकते हैं. इसके अलावा, इस साल कुछ नई चीजें भी जोड़ी गई हैं, जैसे स्मार्ट मोबिलिटी और इंडस्ट्रियल रोबोटिक्स. आने वाले समय में बड़े स्तर पर इनका इस्तेमाल किया जा सकता है.इनका डेमोंस्ट्रेशन और एग्जिबिशन भी लगाया गया है.

    कैसे हिस्सा लें इस इवेंट में
    IMC 2026 के इवेंट में जाकर नई टेक्नोलॉजी को समझने और डेमोंस्ट्रेशन देखने के लिए आप रजिस्ट्रेशन कर सकते हैं. स्टूडेंट्स और विजिटर्स के लिए फ्री एंट्री दी गई है. रजिस्ट्रेशन करने के लिए IMC के ऑफिशियल रजिस्ट्रेशन पोर्टल से रजिस्ट्रेशन किया जा सकता है.
     

  • एशियन गेम्स में भारत का दमदार प्रदर्शन, पीएम मोदी ने हर खिलाड़ी को दी बधाई

    एशियन गेम्स में भारत का दमदार प्रदर्शन, पीएम मोदी ने हर खिलाड़ी को दी बधाई

    नई दिल्ली
    एशियन गेम्स-2026 खत्म हो चुके हैं और भारत ने कुल 85 मेडल्स के साथ अपना सफर खत्म किया। हालांकि, पिछले संस्करण के मुकाबले ये संख्या काफी कम है, लेकिन मेडल टैली में भारत फिर भी चौथे स्थान पर रहने में सफल रहा। इस सफलता को देखते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सभी खिलाड़ियों को बधाई दी है।

    भारत ने चीन में खेले गए पिछले एशियन गेम्स में कुल 106 मेडल जीते थे। इस बार भारतीय खिलाड़ी 100 के आस-पास भी नहीं पहुंच सके। भारत के हिस्से कुल 21 गोल्ड, 27 सिल्वर और 37 ब्रॉन्ज मेडल आए हैं। भारत ने इस बार कई ऐतिहासिक सफलताएं हासिल कीं जिनमें आर्चरी और मुक्केबाजी सहित हॉकी ने अहम योगदान दिया।

    पीएम मोदी की बधाई
    पीएम मोदी ने एक्स पर पोस्ट करते हुए खिलाड़ियों के जुनून, जज्बे की सराहना की है और हर किसी को बधाई दी है। उन्होंने लिखा, "एशियन गेम्स-2026 खत्म हो गए हैं और ऐसे में मैं भारतीय दल के हर सदस्य को प्रतिबद्धता, जुनून और बेहतरीन खेल भावना के साथ इन खेलों में भारत का प्रतिनिधित्व करने के लिए बधाई देता हूं। सभी मेडल विजेताओं को बधाई जिनकी सफलता ने देश को खुशी के पल दिए। उम्मीद करता हूं कि इन खेलों में मिली सफलता आने वाले सालों में कई और उपलब्धियों को प्रेरित करेगी। उम्मीद करता हूं कि ये उपलब्धियां जमीनी स्तर पर खेलों को मजबूत करने में योगदान देंगी।"
     
    आखिरी दो दिन में हुआ कमाल
    भारत ने इन खेलों में आखिरी दो दिन में शानदार कमाल किया और 11 गोल्ड मेडल अपने नाम किए जिससे मेडल टैली में उसके स्थान में गजब का इजाफा हुआ। भारत पहले टॉप-10 में नहीं था, लेकिन धीरे-धीरे भारतीय खिलाड़ियों ने मेडल जीते और भारत को आगे बढ़ने का मौका दिया। चीन 341 मेडल के साथ पहले स्थान पर रहा जिसमें 169 गोल्ड, 89 सिल्वर और 83 ब्रॉन्ज मेडल हैं। उसके बाद मेजबान जापान है जिसने कुल 269 मेडल जीते हैं। इसमें से जापान के हिस्से 83 गोल्ड, 95 सिल्वर और 91 ब्रॉन्ज मेडल आए हैं। साउथ कोरिया कुल 160 मेडल के साथ तीसरे स्थान पर है। इस देश के हिस्से 39 गोल्ड, 43 सिल्वर और 68 ब्रॉन्ज मेडल आए हैं।

  • PM मोदी ने हरियाणा विधायकों को दिया मंत्र, हर विधानसभा में 30-35 गांवों तक पहुंचने पर जोर

    PM मोदी ने हरियाणा विधायकों को दिया मंत्र, हर विधानसभा में 30-35 गांवों तक पहुंचने पर जोर

    चंडीगढ़
     प्रधानमंत्री नरेंद्रे मोदी के साथ हरियाणा के भाजपा विधायकों की पहली सामूहिक मुलाकात बेहद आत्मीय माहौल में हुई। बैठक से पहले सभी मंत्री और विधायक जहां कुछ तनाव में नजर आ रहे थे, वहीं प्रधानमंत्री के शुरुआती अंदाज ने कुछ ही मिनटों में माहौल को सहज कर दिया।

    हरियाणवी अंदाज में विधायकों को उलाहना देते हुए मोदी ने उनसे कहा कहा, “हरियाणा वालों, तुमने राम-राम क्यों नहीं की।” प्रधानमंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि विधायकों को केवल परिचय के लिए बुलाया गया है। किसी तरह की टेंशन लेने की जरूरत नहीं है। इसके बाद सभी मंत्री और विधायक सहज हुए।

    बैठक में प्रदेश अध्यक्ष अर्चना गुप्ता ने सबसे पहले अपनी बात रखी। इसके बाद मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी और राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने संबोधित किया। अंत में प्रधानमंत्री मोदी ने विधायकों से संवाद किया।

    मैंने किसी का रिपोर्ट कार्ड नहीं देखा है- पीएम
    प्रधानमंत्री ने कहा कि पिछले तीन दिनों से इस बैठक को लेकर मीडिया में कई तरह की नकारात्मक बातें चल रही हैं, लेकिन ऐसा कुछ नहीं है। न मैंने किसी का रिपोर्ट कार्ड देखना है और न ही मैंने किसी को तलब किया है। यह मुलाकात बेहद सामान्य और परिचयात्मक है।

    इसके बाद प्रधानमंत्री ने विधायकों से उनके क्षेत्र और पुराने भाजपा नेताओं के बारे में भी जानकारी ली। मोदी ने हरियाणा के व्यापक प्रभाव का उल्लेख करते हुए कहा कि प्रदेश का असर पूरे देश पर पड़ता है, इसलिए हरियाणा को हर क्षेत्र में आगे रखने का प्रयास होना चाहिए।

    किसानों से जुड़ाव के संदर्भ में उन्होंने प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने पर जोर दिया और कम से कम हर किसान को एक एकड़ में प्राकृतिक खेती के लिए प्रोत्साहित करने की बात कही।

    गांवों तक पहुंचने और जनसंवाद पर जोर
    बैठक के बाद मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने इसे हरियाणा के सभी विधायकों के लिए ऐतिहासिक और प्रेरणादायक बताया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ने हरियाणा के विधायकों को लंबा समय दिया और विकास, जनसेवा तथा संगठन को लेकर विशेष मार्गदर्शन दिया।

    सैनी के मुताबिक प्रधानमंत्री ने कहा कि विकसित भारत केवल सरकार के प्रयासों से नहीं बनेगा। इसमें किसान, युवा और महिलाएं जब संकल्प के साथ जुड़ेंगे, तभी विकसित भारत के साथ विकसित हरियाणा का लक्ष्य हासिल होगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार और जनता के बीच दूरी न रहे, इसके लिए अधिक से अधिक लोगों से जुड़ने पर जोर दिया गया है।

    हर विधानसभा क्षेत्र में 30 से 35 गांवों में नियमित बैठकें
    मुख्यमंत्री के अनुसार प्रधानमंत्री ने प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र में करीब 30 से 35 गांवों में नियमित बैठकें करने की बात कही। उन्होंने गांवों में टिफिन बैठक, संवाद, स्वच्छता अभियान और स्थानीय समस्याओं पर चर्चा कर उनके समाधान की दिशा में काम करने का सुझाव दिया। प्रधानमंत्री ने कहा कि सभी विधायक, मंत्री, नेता और कार्यकर्ता जनता के बीच जाएं और समस्याओं के समाधान का माध्यम बनें।

    स्मृति इरानी और भोला सिंह से भी मिले हरियाणा के विधायक
    नायब सैनी ने कहा कि प्रधानमंत्री ने हरियाणा को परिवार की तरह मानने की बात कही और इसी भाव से विधायकों से संवाद किया। उन्होंने कहा, “राजनीति हमारे लिए सत्ता नहीं, सेवा का माध्यम है। प्रधानमंत्री ने हमें सेवा के माध्यम से राजनीति करना सिखाया है।”

    मुख्यमंत्री के मुताबिक प्रधानमंत्री ने उन क्षेत्रों में बालिका शिक्षा पर विशेष ध्यान देने को कहा, जहां उसका प्रभाव अभी अपेक्षाकृत कम दिखाई देता है। बैठक से पहले और बाद में हरियाणा के विधायकों ने नई पार्टी प्रभारी स्मृति इरानी, सह प्रभारी भोला सिंह और प्रदेश संगठन मंत्री पवन राणा से भी अलग चर्चा की।

  • मक्का समझौते पर मिस्र का साफ रुख: भारत के साथ रणनीतिक साझेदारी को दी प्राथमिकता

    मक्का समझौते पर मिस्र का साफ रुख: भारत के साथ रणनीतिक साझेदारी को दी प्राथमिकता

    नई दिल्ली
     तुर्की, पाकिस्तान और सऊदी अरब के मक्का पैक्ट में मिस्र के भी शामिल होने को लेकर चर्चाएं लगातार चल रही थीं। हालांकि, अब मिस्र ने इसे लेकर अपना रुख स्पष्ट कर दिया है। जानकारी रखने वाले लोगों के मुताबिक, ब्रिक्स समिट के दौरान जब मिस्र के राष्ट्रपति अब्देल फतह अल-सिसी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की, तो मक्का समझौते, उसके क्षेत्रीय और व्यापक असर पर चर्चा हुई। दोनों नेताओं ने द्विपक्षीय रणनीतिक साझेदारी को और बढ़ाने के उपायों पर भी चर्चा की। इस दौरान मिस्र ने तुर्की को भारत के लिए ठेंगा दिखा दिया।

    मक्का पैक्ट से मिस्र क्यों बना रहा दूरी?
    मिस्र ने भारत की चिंताओं और अन्य कारकों को ध्यान में रखते हुए सऊदी अरब, तुर्की और पाकिस्तान के बीच रक्षा समझौते में शामिल न होने का फैसला किया था। जानकारों ने बताया कि नई दिल्ली और काहिरा अरब दुनिया के एक अहम स्तंभ के तौर पर मिस्र के साथ अपनी रणनीतिक साझेदारी को और बढ़ाने के लिए काम करेंगे। मिस्र ब्रिक्स का सदस्य है और 2024 में इस समूह में शामिल हुआ था।

    भारत की बड़ी कूटनीतिक जीत
    तुर्की के बार-बार सुझावों के बावजूद मिस्र अब तक मक्का समझौते में शामिल होने से दूर रहा है। ऐसा उसने किसी का पक्ष न लेने की अपनी रणनीति और भारत के साथ बढ़ते रिश्तों के कारण किया है। पश्चिम एशिया के जानकारों का कहना है कि मक्का समझौते की उपयोगिता सीमित है क्योंकि नाटो या पुराने वारसा समझौते के विपरीत, इन तीनों देशों का कोई साझा दुश्मन या एक नेता नहीं है। इस बात की भी संभावना कम है कि भारत-पाकिस्तान युद्ध की स्थिति में सऊदी अरब सैन्य मदद के जरिए पाकिस्तान की सहायता के लिए आगे आएगा।

    मिस्र हमेशा अरब देशों की गुटबाजी से रहा दूर
    अरब देशों में सबसे शक्तिशाली सेना वाला मिस्र ऐतिहासिक रूप से गुटबाजी की राजनीति से दूर रहा है। उत्तरी और पूर्वोत्तर अफ्रीका में स्थिरता के स्तंभ के तौर पर अपनी भूमिका निभाता रहा है। काहिरा के पड़ोसी देश इजरायल के साथ जटिल संबंध हैं। जिसके साथ उसके राजनयिक रिश्ते हैं। वह सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के बीच किसी एक का पक्ष नहीं लेना चाहता। इस तरह से मिस्र ने भारत के साथ अपने बढ़ते रिश्तों की वजह से मक्का समझौते पर अपना रुख स्पष्ट कर दिया।

     

  • PM मोदी को क्यों पसंद है देव आनंद की ‘गाइड’? 15 साल की उम्र में देखी फिल्म ने छोड़ा गहरा असर

    PM मोदी को क्यों पसंद है देव आनंद की ‘गाइड’? 15 साल की उम्र में देखी फिल्म ने छोड़ा गहरा असर

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज 76 साल के हो गए हैं. पीएम मोदी खुद कहते हैं कि वह फिल्मों के ज्यादा शौकीन नहीं हैं लेकिन एक फिल्म ऐसी है जिसने उन पर गहरा असर डाला है. वह कुछेक मौकों पर इस फिल्म का जिक्र भी कर चुके हैं. ऐसे में हम आपको उस फिल्म से जुड़ा पीएम मोदी का एक किस्सा बताने जा रहे हैं.

    पीएम मोदी को हिंदी फिल्मों के सदाबहार एक्टर देव आनंद साहब की क्लासिक फिल्म गाइड बहुत पसंद है. इस फिल्म में देव आनंद के साथ वहीदा रहमान ने काम किया है. खास बात यह है कि मोदी ने इस फिल्म को उस दौर में देखा था, जब उनकी उम्र महज 15 साल थी. बाद में उन्होंने बताया कि उस उम्र में देखी गई गाइड फिल्म ने उनके मन पर गहर असर डाला.

    गाइड फिल्म 1965 में रिलीज हुई थी. इसका डायरेक्शन विजय आनंद ने किया था और इसमें देव आनंद के साथ वहीदा रहमान मुख्य भूमिका में थीं. फिल्म की कहानी आरके. नारायण के 1958 में उपन्यास द गाइड पर आधारित थी. फिल्म की कहानी दरअसल राजू नाम के एक टूरिस्ट गाइड और रोजी के इर्द-गिर्द घूमती है. रोजी एक ऐसे विवाह में बंधी है जिसमें वह खुश नहीं है और आगे चलकर राजू की जिंदगी से जुड़ती है. फिल्म में व्यक्तिगत आजादी, रिश्ते, महत्वाकांक्षा, सामाजिक नजरिया और आध्यात्मिकता जैसे कई पहलू एक साथ सामने आते हैं.

    पीएम मोदी ने इस फिल्म से जुड़ी हुई जिस बात को सबसे ज्यादा याद किया. वह सिर्फ फिल्म की कहानी नहीं थी, बल्कि उसका मूल विचार था. उनके मुताबिक, गाइड का बुनियादी संदेश था कि हर व्यक्ति को मार्गदर्शन अपने अंतर्मन से ही मिलता है. वह खुद कहते हैं कि उन्होंने यह फिल्म उस समय देखी थी, जब उनकी उम्र ज्यादा नहीं थी. ऐसे में उन्होंने जब फिल्म के इस विचार को लेकर अपने दोस्तों से चर्चा की तो उस समय उनके दोस्तों ने उसे बहुत गंभीरता से नहीं लिया था.

    पीएम मोदी पर गाइड का असर सिर्फ उसके दार्शनिक विचार तक सीमित नहीं था. फिल्म में गांवों में सूखे और पानी की कमी जैसे सीन का उन पर असर हुआ यानी फिल्म में ग्रामीण भारत की वास्तविक समस्या का उन पर गहर असर हुआ.

    साल 2018 में लद्दाख के छात्रों का एक समूह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मिलने उनके आवास पहुंचा था. बातचीत के दौरान एक छात्र ने उनसे पूछा कि वह किस तरह की फिल्में देखते हैं और उनकी पसंदीदा फिल्म कौन सी है? पीएम मोदी ने जवाब दिया कि उनके पास फिल्में देखने के लिए ज्यादा समय नहीं है लेकिन बचपन और युवावस्था में उन्होंने कुछ फिल्में देखी थीं जिनमें गाइड ने उनके मन में खास जगह बनाई.

    दिलचस्प बात यह है कि गाइड अपने समय की आम हिंदी फिल्मों से अलग थी. इसमें देव आनंद का किरदार राजू शुरुआत में एक टूरिस्ट गाइड है, लेकिन परिस्थितियां उसे ऐसी जगह ले जाती हैं जहां लोग उसे आध्यात्मिक व्यक्ति के रूप में देखने लगते हैं.  वहीं वहीदा रहमान की रोजी का किरदार भी उस दौर के सामाजिक ढांचे में एक महिला की अपनी इच्छा, पहचान और स्वतंत्रता की तलाश को सामने रखता है. फिल्म का यही सफर इसे केवल रोमांटिक कहानी से आगे ले जाता है.

    फिल्म गाइड का गाना आज फिर जीने की तमन्ना है और तेरे मेरे सपने जैसे गाने काफी पॉपुलर हुए थे और आज भी लोगों की जुबां पर हैं.  गाइड एक अंग्रेजी संस्करण भी बनाया गया था, जिसे टाड डेनियल्स्की ने निर्देशित किया था.

    पीएम मोदी ने कई मौकों पर देव आनंद की काफी सराहना भी की है. 26 सितंबर 2023 को देव आनंद की 100वीं जयंती पर मोदी ने उन्हें याद करते हुए कहा कि वह एवरग्री आइकॉन थे. उनकी कहानी कहने की शैली और सिनेमा के प्रति उनका जुनून बेजोड़ था. पीएम मोदी ने यह भी कहा कि देव आनंद की फिल्मों ने सिर्फ मनोरंजन नहीं किया, बल्कि बदलते समाज और भारत की आकांक्षाओं को भी सामने रखा.

  • विदेश नीति और रणनीतिक स्वायत्तता: वैश्विक मंच पर भारत की बढ़ती प्रतिष्ठा और मजबूत होती कूटनीति के आयाम।

    विदेश नीति और रणनीतिक स्वायत्तता: वैश्विक मंच पर भारत की बढ़ती प्रतिष्ठा और मजबूत होती कूटनीति के आयाम।

    भोपाल
     प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सार्वजनिक जीवन के 25 वर्ष पूरे होने के अवसर पर मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने उनके राजनीतिक और प्रशासनिक सफर को रेखांकित करते हुए विशेष लेख लिखा है। डॉ. यादव ने गुजरात के मुख्यमंत्री से लेकर देश के प्रधानमंत्री तक की मोदी की यात्रा को सेवा, सुशासन और राष्ट्र निर्माण से जोड़ते हुए वैश्विक मंच पर भारत की बढ़ती प्रतिष्ठा का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में भारत ने राष्ट्रीय विकास के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी अपनी भूमिका और प्रभाव को मजबूत किया है। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने लिखा कि यशस्वी नरेन्द्र मोदी के गुजरात के मुख्यमंत्री से लेकर प्रधानमंत्री के रूप में ढाई दशक की गौरवपूर्ण यात्रा पर विशेष राजनीति के मैदान में ऐसे अनेक नेता और जननेता हुए हैं, जिन्होंने अपने-अपने क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान दिया। इनमें कुछ अपनी प्रशासनिक क्षमता के लिए जाने गए, तो कुछ ने अपने राजनीतिक कौशल से अलग पहचान बनाई। लेकिन ऐसे नेता विरले ही होते हैं, जो संगठन से निकलकर मुख्यमंत्री के रूप में अपनी राजनीतिक और प्रशासनिक कार्यकुशलता की मिसाल कायम करें और आगे चलकर प्रधानमंत्री के रूप में न केवल देश की राजनीति और शासन-व्यवस्था को नई दिशा दें, बल्कि वैश्विक मंच पर भारत की प्रतिष्ठा और प्रभाव को भी नई ऊंचाइयों तक पहुंचाये। 

    भारत के संबंधों को मजबूत किया है।

    प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी का सार्वजनिक जीवन ऐसी ही असाधारण यात्रा का उदाहरण है। गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में लगभग 13 वर्षों तक उन्होंने शासन की एक ऐसी शैली विकसित की, जिसमें विकास, सुशासन और जनभागीदारी को केंद्र में रखा गया। इसके बाद वर्ष 2014 में देश के प्रधानमंत्री का दायित्व संभालने के बाद उन्होंने भारत को आत्मनिर्भर, सुरक्षित, समृद्ध और विश्व में प्रभावशाली राष्ट्र बनाने की दिशा में अनेक महत्वपूर्ण कदम उठाए। उनकी कार्यशैली की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि वे परिस्थितियों को केवल देखते नहीं, बल्कि उनमें परिवर्तन लाने का प्रयास करते हैं। दुनिया की राजनीति में कहाँ मौन रहना है, कहाँ अपनी बात स्पष्ट रूप से रखनी है और कहाँ दृढ़ता के साथ भारत के हितों की रक्षा करनी है। इसका संतुलन प्रधानमंत्री श्री मोदी जी ने अपनी विदेश नीति में लगातार प्रदर्शित किया है। भारत की रणनीतिक स्वायत्तता और राष्ट्रीय हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए उन्होंने विश्व के विभिन्न शक्ति-केंद्रों के साथ भारत के संबंधों को मजबूत किया है।
    आज भारत विश्व राजनीति में एक प्रभावशाली शक्ति के रूप में अपनी भूमिका निभा रहा है। अमेरिका और रूस जैसे देशों के साथ संबंधों में संतुलन बनाए रखना हो, पश्चिम एशिया में भारत के हितों की रक्षा करनी हो या रूस-यूक्रेन संघर्ष जैसे जटिल अंतरराष्ट्रीय विषयों पर शांति और संवाद का पक्ष रखना हो, प्रधानमंत्री जी ने भारतीय दृष्टिकोण को मजबूती से दुनिया के सामने रखा है।

    भारतीय संस्कृति की भावना का परिचायक

    प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व की एक महत्वपूर्ण विशेषता यह भी रही है कि संकट के समय भारत ने केवल अपने नागरिकों की ही चिंता नहीं की, बल्कि मानवता के प्रति अपने दायित्व को भी निभाया।कोरोना महामारी के कठिन दौर में भारत ने जिस प्रकार अपने नागरिकों की सुरक्षा और जरूरतों का ध्यान रखा, वह अभूतपूर्व था। इसके साथ ही भारत ने अनेक देशों को दवाइयाँ, वैक्सीन और अन्य आवश्यक सहायता उपलब्ध कराई। श्रीलंका, नेपाल, मालदीव और अफगानिस्तान जैसे पड़ोसी देशों से लेकर तुर्किए तक, जब भी आवश्यकता पड़ी, भारत ने सहायता का हाथ बढ़ाया।
    युद्धग्रस्त क्षेत्रों से भारतीय नागरिकों की सुरक्षित वापसी के लिए भी प्रधानमंत्री जी के नेतृत्व में अनेक अभियान चलाए गए। यूक्रेन में फंसे भारतीय विद्यार्थियों की सुरक्षित वापसी हो या संकटग्रस्त परिस्थितियों में अन्य भारतीय नागरिकों को स्वदेश लाना इन प्रयासों ने यह संदेश दिया कि भारत अपने प्रत्येक नागरिक की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देता है।भारत की मानवीय संवेदनशीलता का परिचय उस समय भी मिला, जब कठिन अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों के बावजूद पड़ोसी देश पाकिस्तान के विद्यार्थियों को भी सुरक्षित उनके देश वापस पहुँचाने के प्रयास किए गए। यह भारतीय संस्कृति की उस भावना का परिचायक है, जिसमें मानवता को सर्वोपरि माना गया है।

    प्रधानमंत्री मोदी जी ने दृढ़ इच्छाशक्ति का परिचय 

    राष्ट्रीय सुरक्षा के क्षेत्र में भी प्रधानमंत्री मोदी जी ने दृढ़ इच्छाशक्ति का परिचय दिया है। उरी हमले के बाद सर्जिकल स्ट्राइक और पुलवामा आतंकी हमले के बाद बालाकोट एयर स्ट्राइक ने यह स्पष्ट संदेश दिया कि भारत आतंकवाद को सहन करने वाला देश नहीं है।ऑपरेशन सिंदूर ने भी आतंकवाद के विरुद्ध भारत के संकल्प को दुनिया के सामने दृढ़ता से रखा। भारत ने यह स्पष्ट किया कि आतंकवाद के खिलाफ कार्रवाई उसके लिए केवल सुरक्षा का विषय नहीं, बल्कि राष्ट्रीय सम्मान और नागरिकों की सुरक्षा का प्रश्न भी है।प्रधानमंत्री जी के नेतृत्व में आतंकवाद को लेकर भारत की नीति में जो दृढ़ता आई है, उसने अंतरराष्ट्रीय समुदाय का भी ध्यान आकर्षित किया है। पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद के मुद्दे को वैश्विक मंचों पर प्रभावी ढंग से उठाने और आतंकवाद के खिलाफ व्यापक अंतरराष्ट्रीय समर्थन जुटाने में भारत को महत्वपूर्ण सफलता मिली है।
    हाल ही में दिल्ली में प्रधानमंत्री मोदी जी के नेतृत्व में दिल्ली में आयोजित ब्रिक्स (BRICS) सम्मेलन के माध्यम से भारत ने वैश्विक मंच पर स्वयं को एक संतुलित, व्यवहारिक और नीतिगत रूप से स्वायत्त राष्ट्र के रूप में मजबूती से स्थापित किया है। भारत की साख एक ऐसे देश के रूप में बनी है जो वैश्विक दक्षिण (Global South) की आकांक्षाओं का प्रतिनिधित्व करता है और पश्चिमी देशों तथा पूर्वी शक्तियों के बीच संवाद का संतुलन बनाए रखने में सक्षम है। भारत ने यह स्पष्ट संदेश दिया है कि ब्रिक्स किसी पश्चिम-विरोधी गुट के रूप में नहीं, बल्कि एक समावेशी और सुधारात्मक बहुपक्षीय मंच के रूप में कार्य करता है। इसके अतिरिक्त, भारत के डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर, आर्थिक विकास और आतंकवाद के प्रति कड़े रुख ने वैश्विक स्तर पर देश की विश्वसनीयता को और अधिक बढ़ाया है।इस पूरे परिदृश्य में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की भूमिका अत्यंत निर्णायक और प्रभावी रही है। सम्मेलनों के दौरान विभिन्न राष्ट्राध्यक्षों के साथ की गई उनकी द्विपक्षीय बैठकों ने न केवल जटिल क्षेत्रीय मुद्दों को सुलझाने में मदद की, बल्कि भारत के आर्थिक और व्यापारिक हितों को भी नई दिशा दी है।

    ‘सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास

    प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी की राजनीति का सबसे महत्वपूर्ण पक्ष गरीब और वंचित वर्गों के जीवन में बदलाव लाने का प्रयास है। जनकल्याण की योजनाओं में जाति, क्षेत्र या धर्म के आधार पर किसी प्रकार का भेदभाव नहीं किया गया। प्रधानमंत्री आवास योजना, प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना, किसान सम्मान निधि, फसल बीमा, उज्ज्वला योजना और आयुष्मान भारत जैसी योजनाओं का लाभ देश के करोड़ों परिवारों तक पहुँचा है।गरीबों को सम्मानजनक जीवन उपलब्ध कराने के लिए केवल आर्थिक सहायता ही नहीं, बल्कि उनके जीवन की मूलभूत आवश्यकताओं को पूरा करने पर भी विशेष ध्यान दिया गया। पक्का घर, शौचालय, बिजली, गैस कनेक्शन, बैंक खाता, स्वास्थ्य सुरक्षा और खाद्यान्न की उपलब्धता जैसे विषयों को जनकल्याण की मुख्यधारा में लाया गया।
    आयुष्मान भारत योजना ने गरीब और असहाय परिवारों के लिए गंभीर बीमारियों के उपचार को आर्थिक रूप से अधिक सुलभ बनाया। इसी प्रकार प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना के माध्यम से करोड़ों जरूरतमंद परिवारों को खाद्यान्न उपलब्ध कराया गया।प्रधानमंत्री जी के लिए ‘सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास’ केवल नारा नहीं, बल्कि शासन का मूल मंत्र रहा है।
    प्रधानमंत्री के रूप में दायित्व संभालते ही मोदी जी ने स्वच्छता को राष्ट्रीय अभियान का रूप दिया। उन्होंने स्वयं हाथ में झाड़ू लेकर स्वच्छता का संदेश दिया और देशवासियों से स्वच्छ भारत के निर्माण में भागीदारी का आह्वान किया।इस अभियान ने देश की सोच में परिवर्तन लाने का काम किया। गांवों से लेकर शहरों तक स्वच्छता जनआंदोलन बनी। मध्यप्रदेश ने भी इस अभियान में उल्लेखनीय भूमिका निभाई। इंदौर का लगातार स्वच्छ शहरों में अग्रणी रहना इस जनभागीदारी का प्रेरक उदाहरण है।
    प्रधानमंत्री मोदी जी ने भारत की अर्थव्यवस्था को नई ऊंचाइयों तक ले जाने का संकल्प लिया। आज भारत दुनिया की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में अपनी मजबूत स्थिति बना चुका है और तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।मेक इन इंडिया, आत्मनिर्भर भारत, डिजिटल इंडिया और स्टार्टअप इंडिया जैसे अभियानों ने उत्पादन, तकनीक और नवाचार के क्षेत्र में नई संभावनाएँ पैदा की हैं। रक्षा उत्पादन और निर्यात में भारत की बढ़ती क्षमता इसका प्रमाण है।भारत ने अंतरिक्ष विज्ञान के क्षेत्र में भी ऐतिहासिक उपलब्धियाँ हासिल की हैं। चंद्रयान-3 की सफलता और चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव के निकट सफल सॉफ्ट लैंडिंग ने पूरी दुनिया का ध्यान भारत की वैज्ञानिक क्षमता की ओर आकर्षित किया।

    प्रधानमंत्री जी का मानना है कि भारत की सबसे बड़ी शक्ति उसकी युवा आबादी है। युवाओं को कौशल, रोजगार, स्वरोजगार, स्टार्टअप और तकनीकी नवाचार के अवसर उपलब्ध कराने के लिए अनेक योजनाएँ संचालित की गई हैं।मुद्रा योजना ने छोटे उद्यमियों को वित्तीय सहायता उपलब्ध कराकर लाखों युवाओं को अपने पैरों पर खड़े होने का अवसर दिया। कौशल विकास और स्टार्टअप संस्कृति ने युवाओं में नौकरी खोजने के साथ-साथ रोजगार देने की भावना को भी मजबूत किया है।

     महिलाओं के आर्थिक सशक्तीकरण का कार्यक्रम 

    महिलाओं के सशक्तीकरण के लिए भी प्रधानमंत्री जी ने अनेक महत्वपूर्ण कदम उठाए। उज्ज्वला योजना ने करोड़ों महिलाओं को रसोई के धुएँ से राहत दिलाई। प्रधानमंत्री आवास योजना ने महिलाओं को परिवार की संपत्ति में अधिक सम्मानजनक भागीदारी का अवसर दिया। महिला आरक्षण कानून ने राजनीति में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने की दिशा में ऐतिहासिक कदम रखा है।‘लखपति दीदी’ अभियान के माध्यम से ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने का प्रयास किया जा रहा है। यह केवल महिलाओं के आर्थिक सशक्तीकरण का कार्यक्रम नहीं, बल्कि ग्रामीण भारत के सामाजिक और आर्थिक परिवर्तन की दिशा में एक बड़ा कदम है।
    प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी ने विकास के साथ-साथ भारत की सांस्कृतिक विरासत के प्रति समाज में आत्मविश्वास जगाने का कार्य किया है। ‘विरासत के साथ विकास’ की भावना के अनुरूप उन्होंने आधुनिक भारत को उसकी प्राचीन सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ने का प्रयास किया है।योग, जो भारत की हजारों वर्ष पुरानी जीवन पद्धति है, उसे वैश्विक स्तर पर प्रतिष्ठा दिलाने में प्रधानमंत्री जी की भूमिका उल्लेखनीय रही है। उनके प्रयासों से संयुक्त राष्ट्र ने 21 जून को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के रूप में मान्यता दी। आज दुनिया के अनेक देशों में करोड़ों लोग योग को अपने स्वस्थ जीवन का हिस्सा बना रहे हैं।

    यशस्वी मोदी जी के प्रयासों से अयोध्या में श्रीरामलला की प्राण-प्रतिष्ठा ने करोड़ों भारतीयों की आस्था और सांस्कृतिक चेतना को नई ऊर्जा दी। इसी प्रकार जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 के प्रावधानों को समाप्त करने का निर्णय राष्ट्रीय एकता और अखंडता की दृष्टि से ऐतिहासिक माना गया।

    ‘मन की बात’

    ‘मन की बात’ के माध्यम से प्रधानमंत्री जी ने देश के सामान्य नागरिकों से सीधे संवाद की एक अनूठी परंपरा विकसित की। देश के दूरदराज के गांवों, छोटे शहरों और सामान्य परिवारों से जुड़े अनेक लोगों के कार्यों को राष्ट्रीय मंच मिला।यह संवाद प्रधानमंत्री जी के उस दृष्टिकोण को दर्शाता है, जिसमें भारत का विकास केवल सरकार के प्रयासों से नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक की भागीदारी से संभव माना गया है।

    यशस्वी नरेंद्र मोदी जी के सार्वजनिक जीवन के 25 वर्ष केवल सत्ता में रहने की अवधि नहीं, बल्कि सेवा, संघर्ष, परिश्रम और राष्ट्र निर्माण की निरंतर यात्रा हैं। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के माध्यम से समाज और राष्ट्र सेवा का संकल्प लेकर शुरू हुई यह यात्रा गुजरात के मुख्यमंत्री से होते हुए देश के प्रधानमंत्री तक पहुँची। उनके लिए राष्ट्र प्रथम है और यही भावना उनके प्रत्येक निर्णय में दिखाई देती है। उन्होंने भारत को आत्मविश्वासी, आत्मनिर्भर, सुरक्षित और समृद्ध राष्ट्र बनाने का लक्ष्य सामने रखा है।उनके जन्मदिवस पर हम सभी का यह संकल्प होना चाहिए कि हम राष्ट्रहित को सर्वोच्च प्राथमिकता देंगे और विकसित भारत के निर्माण में अपनी भूमिका निभाएँगे।
    कहा गया है……

    “परिश्रम में जो तपा है, उसने ही तो इतिहास रचा है। जिसने फौलादी चट्टानों को तोड़ा है, उसने ही समय को मोड़ा है।

    समय को मोड़ देने का भी यही समय है, सही समय है।” यह उद्घोष आज भारत के उस नेतृत्व के प्रति हमारे विश्वास को व्यक्त करता है, जिसने सेवा को साधना और राष्ट्र निर्माण को अपना ध्येय बनाया है। आइए, प्रधानमंत्री जी की 25 वर्षों की सेवा यात्रा के अवसर पर हम भी राष्ट्र निर्माण के इस महायज्ञ में अपनी आहुति देने का संकल्प लें। देश के लिए नई उम्मीदों का दीप जलाएँ, अपने सामर्थ्य के अनुसार योगदान दें और उस भारत के निर्माण में सहभागी बनें, जिसका सपना हमारे स्वतंत्रता सेनानियों और राष्ट्रनायकों ने देखा था।

    प्रधानमंत्री जी के जन्मदिन 17 सितंबर को हम सभी अपने घरों और प्रतिष्ठानों में आशीर्वाद का एक दीप जलाएँ और उनकी दीर्घायु, स्वस्थ एवं यशस्वी जीवन की कामना करें। यह दीप उस विश्वास का प्रतीक बने कि भारत की विकास यात्रा निरंतर आगे बढ़ती रहे, देश आत्मनिर्भर एवं शक्तिशाली बने और वर्ष 2047 तक विकसित भारत का संकल्प साकार हो। ‘सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास’ की भावना के साथ विकसित और आत्मनिर्भर भारत के निर्माण की यात्रा निरंतर आगे बढ़े, यही प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के जन्मदिवस पर हमारी सबसे बड़ी शुभकामना है।
    “जिसने जीवन संवारा, उसको नमन हमारा।”

  • BRICS समिट में PM मोदी की धाक, तीन दिन में 15 देशों से की बड़ी द्विपक्षीय बैठकें

    BRICS समिट में PM मोदी की धाक, तीन दिन में 15 देशों से की बड़ी द्विपक्षीय बैठकें

    नई दिल्ली
     प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी में नई दिल्ली में 18वें ब्रिक्स समिट से इतर तीन दिनों में देश और सरकार के प्रमुखों के साथ 15 द्विपक्षीय बैठकें कीं, इसके अलावा दुनिया के नेताओं और इंटरनेशनल संस्थाओं के नेताओं के साथ कई अलग-अलग बातचीत भी की।

    मीडिआ रिपोर्ट के मुताबिक, बिजी डिप्लोमैटिक शेड्यूल में पीएम मोदी रूस, चीन, ईरान, अफ्रीका, साउथ-ईस्ट एशिया, गल्फ और दूसरे इलाकों के नेताओं के साथ सीधे जुड़े। चर्चाओं में बाइलेटरल रिश्ते, ट्रेड, इन्वेस्टमेंट, कनेक्टिविटी, जरूरी मिनरल्स और बड़े रीजनल और ग्लोबल डेवलेपमेंट शामिल थे।

    यह मीटिंग तब हुई जब भारत 2026 में अपनी अध्यक्षता में ब्रिक्स समिट होस्ट कर रहा था, जिसमें अलग-अलग जियोपॉलिटीकल पोजीशन वाले देशों को एक साथ लाया गया।

    बाइलेटरल मीटिंग्स ने नई दिल्ली को समिट के बड़े एजेंडा के साथ-साथ अपनी स्ट्रेटेजिक और इकोनॉमिक प्रायोरिटीज को आगे बढ़ाने का मौका दिया।

    पहला दिन: पुतिन, पेजेशकियन और UN चीफ
    11 सितंबर को, PM मोदी ने रूस के प्रेसिडेंट व्लादिमीर पुतिन और ईरान के प्रेसिडेंट मसूद पेजेशकियन के साथ अलग-अलग मीटिंग कीं। मोदी-पुतिन मीटिंग में इंडिया-रूस स्ट्रेटेजिक पार्टनरशिप पर फोकस था, जिसमें दोनों नेताओं ने डिफेंस, एनर्जी, ट्रेड, इंफ्रास्ट्रक्चर, टेक्नोलॉजी, जरूरी मिनरल्स और सिविल न्यूक्लियर एनर्जी में कोऑपरेशन का रिव्यू किया।

    उन्होंने रूस-यूक्रेन झगड़े, वेस्ट एशिया के हालात और समुद्री ट्रेड और इंडियन सीफेयरर्स की सेफ्टी पर उनके असर पर भी चर्चा की।

    पीएम मोदी ने ईरान के प्रेसिडेंट मसूद पेजेशकियन से भी मुलाकात की, जिसमें इंडिया-ईरान रिलेशन, ब्रिक्स कोऑपरेशन और वेस्ट एशिया में डेवलपमेंट पर चर्चा हुई। PM मोदी ने बातचीत और डिप्लोमेसी के लिए इंडिया का सपोर्ट दोहराया और इस इलाके में लंबे समय तक चलने वाली शांति और स्टेबिलिटी की इंपॉर्टेंस पर जोर दिया।

    उसी दिन, PM मोदी ने UN सेक्रेटरी-जनरल एंटोनियो गुटेरेस से मुलाकात की, जिससे उनके डिप्लोमैटिक एंगेजमेंट में एक मल्टीलेटरल डायमेंशन जुड़ गया।

    दूसरा दिन: शी के साथ मीटिंग
    12 सितंबर को, PM मोदी ने इथियोपिया के प्राइम मिनिस्टर अबी अहमद अली, मलेशिया के प्राइम मिनिस्टर अनवर इब्राहिम, UAE के क्राउन प्रिंस शेख खालिद बिन मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान, वियतनामी लीडरशिप और चीनी प्रेसिडेंट शी जिनपिंग के साथ बाइलेटरल मीटिंग की।

    शी के साथ मीटिंग समिट की सबसे ज्यादा देखी जाने वाली मीटिंग्स में से एक थी। दोनों लीडर्स ने इंडिया-चाइना रिलेशनशिप, बाउंड्री क्वेश्चन, बॉर्डर पर शांति, इकोनॉमिक और ट्रेड रिलेशन, सप्लाई चेन और पीपल-टू-पीपल एक्सचेंज पर चर्चा की।

    PM मोदी ने जोर दिया कि मतभेद विवाद नहीं बनने चाहिए और बाइलेटरल रिलेशन को गाइड करने में आपसी सम्मान, सेंसिटिविटी और इंटरेस्ट के महत्व को अंडरलाइन किया। मलेशिया के प्राइम मिनिस्टर अनवर इब्राहिम के साथ मीटिंग में ट्रेड, इन्वेस्टमेंट, डिफेंस, सेमीकंडक्टर, इंफ्रास्ट्रक्चर, डिजिटल इकोनॉमी, एनर्जी और फिनटेक जैसे एरिया शामिल थे।

    इथियोपिया के प्रधानमंत्री अबी अहमद अली के साथ PM मोदी की मीटिंग में बाइलेटरल कोऑपरेशन को मज़बूत करने और अफ्रीका के साथ भारत के जुड़ाव पर फोकस रहा।

    उन्होंने UAE के क्राउन प्रिंस शेख खालिद बिन मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान के साथ भी बातचीत की, जिसमें भारत-UAE स्ट्रेटेजिक पार्टनरशिप और डिफेंस, टेक्नोलॉजी, एनर्जी, जरूरी मिनरल्स और कनेक्टिविटी जैसे एरिया में सहयोग पर चर्चा हुई।

    तीसरा दिन: अफ्रीका, सेंट्रल एशिया और साउथ-ईस्ट एशिया
    13 सितंबर को, PM मोदी ने साउथ अफ्रीका के प्रेसिडेंट सिरिल रामफोसा, कजाख प्रेसिडेंट कसीम-जोमार्ट टोकायेव, फिलीपींस के प्रेसिडेंट फर्डिनेंड आर. मार्कोस जूनियर, मिस्र के प्रेसिडेंट अब्देल फत्ताह अल-सिसी और बुरुंडी के प्रेसिडेंट एवरिस्टे नदायिशिमिये के साथ बाइलेटरल मीटिंग कीं।

    बाइलेटरल मीटिंग के शेड्यूल के मुताबिक, उन्होंने युगांडा और नाइजीरिया की लीडरशिप के साथ भी मीटिंग की। इन मीटिंग्स ने अफ्रीका, सेंट्रल एशिया और साउथ-ईस्ट एशिया में भारत की डिप्लोमैटिक पहुंच को बढ़ाया, जिसमें बाइलेटरल पार्टनरशिप को मज़बूत करने और आपसी फायदे वाले एरिया में सहयोग बढ़ाने पर फोकस रहा।

    साउथ अफ्रीका के प्रेसिडेंट सिरिल रामफोसा के साथ बातचीत ब्रिक्स ग्रुप के लिए खास तौर पर जरूरी थी, क्योंकि साउथ अफ्रीका इस बड़े ब्लॉक के फाउंडिंग मेंबर्स में से एक है और ग्लोबल साउथ के हितों को आगे बढ़ाने में भारत का एक जरूरी पार्टनर है।

    मिस्र और बुरुंडी के साथ मीटिंग्स ने अफ्रीकी पार्टनर्स के साथ भारत के जुड़ाव को और मजबूत किया, जबकि कजाकिस्तान के साथ बातचीत ने सेंट्रल एशिया में भारत की पहुंच को बढ़ाया।

    मलेशिया के साथ उनकी पिछली मीटिंग के साथ-साथ फिलीपींस की बातचीत ने PM मोदी के डिप्लोमैटिक शेड्यूल में एक और जरूरी साउथईस्ट एशियाई पहलू जोड़ा।

    फॉर्मल समिट एजेंडा से आगे बाइलेटरल मीटिंग्स
    15 फॉर्मल मीटिंग्स के साथ-साथ दूसरे विजिटिंग लीडर्स और इंटरनेशनल इंस्टीट्यूशन्स के रिप्रेजेंटेटिव्स के साथ कई छोटी बातचीत भी हुईं। इस कूटनीतिक गतिविधि से पता चलता है कि भारत ने अपनी ब्रिक्स अध्यक्षता के दौरान द्विपक्षीय बातचीत को कितना महत्व दिया।

    जहां इस समिट ने बढ़े हुए ग्रुप के बीच सामूहिक चर्चा के लिए एक मंच दिया, वहीं अलग से हुई मुलाकातों ने पीएम मोदी को अलग-अलग नेताओं के साथ संबंधित देशों की खास प्राथमिकताओं पर सीधे बातचीत करने का मौका भी दिया।

    ये बैठकें ऐसे समय में हुईं जब भू-राजनीतिक अनिश्चितता का माहौल था। पश्चिम एशिया और यूक्रेन में चल रहे संघर्षों का असर ऊर्जा बाजार, समुद्री व्यापार और ग्लोबल सप्लाई चेन पर पड़ रहा था।

    इसलिए, 15 द्विपक्षीय बैठकों और उनके अलावा हुई अनौपचारिक मुलाकातों ने भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता के दौरान पीएम मोदी की कूटनीतिक कोशिशों में एक अहम भूमिका निभाई।

  • नई दिल्ली डिक्लेरेशन से BRICS को मिलेगी नई दिशा, PM मोदी ने चीन को दी बधाई

    नई दिल्ली डिक्लेरेशन से BRICS को मिलेगी नई दिशा, PM मोदी ने चीन को दी बधाई

    नई दिल्ली
    नई दिल्ली में आयोजित 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन का समापन हो गया। समापन सत्र को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा क‍ि 'ब्रिक्स' सिर्फ देशों का समूह नहीं बल्कि समाधान का इकोसिस्टम है। उन्‍होंने उम्मीद जताई कि 'नई दिल्ली डिक्लेरेशन' साझा विजन को नई दिशा देगा। पीएम ने आयोजन को सफल बनाने के ल‍िए सभी सदस्य देशों का आभार जताया।

    प्रधानमंत्री मोदी ने सम्‍मेलन में शाम‍िल सभी सदस्‍यों का आभार जताया। पीएम मोदी ने कहा क‍ि आपके महत्वपूर्ण विचारों और सुझावों ने हमारे सहयोग को व्यापकता भी दी है और गहराई भी दी है। आप सबकी मौजूदगी ब्रिक्स की बढ़ती उपयुक्तता, उदारता और समावेशिता का प्रमाण है।

    'ब्रिक्स समाधान का एक इकोसिस्टम'
    पीएम मोदी ने कहा, पिछले दो दिनों की हमारी चर्चाओं ने हमारा विश्वास और मजबूत किया है कि ब्रिक्स केवल देशों का समूह नहीं, समाधान का एक इकोसिस्टम है। हम आशा करते हैं इस समिट से उसमें जोड़े गए 'नई दिल्ली डिक्लेरेशन' हमारे साझा विजन और भविष्य के सहयोग को स्पष्ट दिशा देगा। हमें सभी परिणाम को समयबद्ध एक्शन और अंतिम पायदान पर प्रभाव से जोड़ना होगा।
    उन्‍होंने कहा हमारे फ्रेमवर्क फाइल्स से आगे बढ़कर वास्तविक जीवन में प्रभाव पैदा करें, इसके लिए हम सब मिलकर काम करेंगे। उन्होंने कहा, ब्रिक्स अपने तीसरे दशक में प्रवेश करने जा रहा है। अब दुनिया हमसे केवल विचार और प्रतिबद्धता नहीं, कंक्रीट पर‍िणाम की अपेक्षा करती है। मुझे विश्वास है कि हम साझा प्रयासों से इन अपेक्षाओं पर जरूर खरे उतरेंगे।

    पीएम मोदी ने अगले होस्ट के तौर पर चीन को दी बधाई
    इस मौके पर पीएम मोदी ने ब्रिक्स के अगले होस्ट के तौर पर चीन को एक बार फिर बहुत-बहुत शुभकामनाएं दीं। उन्‍होंने कहा, नई दिल्ली समिट को सफल बनाने के लिए मैं आप सभी का और आप सबकी टीम्स का विशेष रूप से अभिनंदन करता हूं। आप सभी की सुखद और सुरक्षित यात्रा की कामना करता हूं। आप सबका बहुत-बहुत धन्यवाद।

  • BRICS Summit 2026: मोदी ने दिया ‘सबको साथ’ का मंत्र, बोले- कोई भी संकट अब एक क्षेत्र तक सीमित नहीं रहता

    BRICS Summit 2026: मोदी ने दिया ‘सबको साथ’ का मंत्र, बोले- कोई भी संकट अब एक क्षेत्र तक सीमित नहीं रहता

    नई दिल्ली
    विविधता और सहयोग को सेलिब्रेट करते हुए ब्रिक्स समिट पूरी हुई। इस बार ब्रिक्स की अध्यक्षता भारत ने की। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि BRICS में ग्लोबल साउथ के देशों का विश्वास बढ़ा है, क्योंकि BRICS में उनकी आवाज सुनी जाती है, उनके अनुभव का सम्मान होता है और समाधान उनके लिए नहीं, उनके साथ मिलकर बनाए जाते हैं।

    टेक्नॉलजी और क्रिटिकल मिनरल्स को लेकर ये बोले पीएम मोदी
    पीएम मोदी ने कहा कि BRICS की शक्ति हमारी विविधता और सहयोग में है। ब्रिक्स के पार्टनर देश और आउटरीच के लिए आमंत्रित विशेष प्रतिनिधियों के साथ एक सत्र को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि टेक्नॉलजी और क्रिटिकल मिनरल्स का वेपनाइजेशन हमारी साझा प्रगति में बाधा बन सकता है।

    'कोई भी संकट एक क्षेत्र तक सीमित नहीं रहता'
    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि आज की इंटरकनेक्टेड दुनिया में कोई भी संकट एक क्षेत्र तक सीमित नहीं रहता। चुनौतियों को समय रहते पहचानना, उनके लिए तैयार रहना और तुरंत कार्रवाई करना भी उतना ही जरूरी है। उन्होंने कहा कि आज विश्व में तनावों की संख्या लगातार बढ़ रही है और लोगों के जीवन पर इसका बहुत नकारात्मक असर प्रभाव भी हो रहा है और व्यापक प्रभाव भी हो रहा है।

    पीएम मोदी का सबको साथ लेकर चलने पर जोर
    पीएम ने कहा कि महामारियों, क्लाइमेट डिजास्टर और सप्लाई चेन में गतिरोध ने दिखाया है कि आज की इंटरकनेक्टेड दुनिया में कोई भी संकट एक क्षेत्र तक सीमित नहीं रहता। इसलिए हमने ब्रिक्स समूह में कई कदम उठाए हैं। मोदी ने कहा कि टेक्नॉलजी और क्रिटिकल मिनरल्स का वेपनाइजेशन हमारी साझा प्रगति में बाधा बन सकता है। इसलिए हमने टेक्नॉलजी को अपनाने में सबको साथ लेकर चलने पर जोर दिया है।

    मित्रता, सहभागिता और सहयोग… ब्रिक्स समिट का ऐसे हुआ समापन
    उन्होंने कहा कि भारत ने ब्रिक्स के मंच से मित्रता, सहभागिता और सहयोग को आगे बढ़ाया है। हमारी कोशिश है कि ब्रिक्स सहयोग सिर्फ सरकारों तक सीमित ना रहे। हमारे उद्यमी, किसान, रिसर्चर, महिलाएं, युवा इसके सक्रिय भागीदार बनें। पीएम मोदी ने कहा कि हमारा मानना है कि BRICS में विकसित सल्यूशन का लाभ सिर्फ ब्रिक्स तक सीमित नहीं रहना चाहिए। इन्हें ग्लोबल साउथ की जरूरतों के अनुरूप अपनाने की जरूरत है।