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  • गंगा-कोसी समेत नदियां खतरे के निशान से ऊपर, पटना से भागलपुर तक बाढ़ का गंभीर संकट

    गंगा-कोसी समेत नदियां खतरे के निशान से ऊपर, पटना से भागलपुर तक बाढ़ का गंभीर संकट

    पटना  
    बिहार के 13 जिलों में बाढ़ की स्थिति गंभीर बनी हुई है। विभिन्न स्रोतों से मिली जानकारी के अनुसार 52 प्रखंडों की 270 पंचायतों की करीब 28 लाख आबादी बाढ़ से प्रभावित है। हालांकि, आपदा प्रबंधन विभाग ने लगभग 8 लाख आबादी को ही बाढ़ से प्रभावित माना है। गंगा, गंडक, सोन, कोसी समेत अन्य नदियां उफान पर हैं। पटना, भोजपुर, सारण, बेगूसराय और वैशाली जिले में कई इलाके बाढ़ की चपेट में हैं। बक्सर, जहानाबाद, अरवल, रोहतास, नालंदा और कैमूर में भी गांवों और खेतों में पानी फैल गया है। उत्तर बिहार के दरभंगा, समस्तीपुर और पश्चिम चंपारण में बाढ़ का प्रकोप जारी है। 200 सड़कों पर आवागमन बाधित है। कई जगह नाव ही आवाजाही का सहारा बनी हुई है। हजारों एकड़ में धान समेत अन्य फसलें डूब गई हैं। भोजपुर और बेगूसराय में 120 स्कूलों को बंद कर दिया गया है। भागलपुर शहर में बाढ़ का पानी घुस गया है। सुल्तानगंज के अजगैवीनाथ मंदिर में भी पानी फैल गया है।

    पटना सहित जिले के अन्य 14 स्थानों पर नदियों का पानी खतरे के निशान को पार कर गया है। इसमें केवल गंगा नदी ही 7 स्थानों पर खतरे के निशान से ऊपर बह रही है। बाढ़ की भयावहता को देखते हुए 693 नावें चलाई जा रही हैं। साथ ही सामुदायिक किचन को भी शुरू कर दिया गया है। 7107 पॉलीथीन शीट का वितरण किया गया है।

    पटना, पश्चिमी चम्पारण एवं वैशाली जिले में 1764 ड्राई राशन पैकेट का वितरण किया गया है। गंगा के जलस्तर में बढ़ोतरी होने से पटना के 9 प्रखंडों में दो लाख 32 हजार से अधिक लोग बाढ़ की चपेट में आ गए हैं।

    भोजपुर में 25 रोड और 60 स्कूल बंद
    भोजपुर जिले के 6 प्रखंडों की 45 पंचायतें बाढ़ से जलमग्न हैं। करीब दो लाख आबादी प्रभावित है। दो हजार एकड़ से अधिक में धान और करीब 500 एकड़ में भदई फसल एवं सब्जियां डूब गई हैं। 25 मुख्य एवं ग्रामीण सड़कों पर पानी के तेज बहाव के कारण आवागमन बंद है। 60 से अधिक स्कूल बंद किए गए हैं। 20 सामुदायिक रसोई में छह हजार से अधिक लोगों को भोजन दिया जा रहा है।

    छपरा में डेढ़ लाख आबादी प्रभावित
    सारण जिले के छपरा सदर, दिघवारा, रिविलगंज और सोनपुर की करीब 25 पंचायतें बाढ़ से प्रभावित हैं। लगभग डेढ़ लाख आबादी पर बाढ़ का असर है। कई लोगों ने ऊंचे बांध और रिश्तेदारों के यहां शरण ली है। ग्रामीण सड़कों पर पानी आने से यातायात प्रभावित है। अकिलपुर-दिघवारा संपर्क भी बाधित है और कई जगह नाव से आवागमन हो रहा है। दो दर्जन से अधिक स्कूलों को दूसरे विद्यालयों से टैग किया गया है।

    बेगूसराय में भी 60 स्कूल बंद
    गंगा के बढ़ते जलस्तर से बेगूसराय के मटिहानी, साहेबपुर कमाल, बखरी और बलिया की 20 पंचायतों की करीब दो लाख आबादी प्रभावित है। प्रशासन 87 नावें चला रहा है। फिलहाल बड़े पैमाने पर विस्थापन नहीं हुआ है। जलभराव और आवागमन की परेशानी के कारण 60 से अधिक स्कूलों में पढ़ाई बंद है।

    वैशाली में हालात गंभीर
    वैशाली के छह प्रखंडों की 26 पंचायतें और हाजीपुर नगर परिषद के छह वार्ड प्रभावित हैं। राघोपुर की 12, सहदेई-देसरी की छह और बिदुपुर की चार सड़कों पर पानी चढ़ा है। यानी कम से कम 22 सड़कों पर आवागमन प्रभावित है। राघोपुर की कई सड़कों पर नाव चल रही है। गनियारी जाने वाली दो सड़कें डूब गई हैं। प्रभावित लोग गांधी सेतु के पुराने टोल प्लाजा सहित ऊंचे स्थानों पर शरण लिए हुए हैं।

    बक्सर में फसलें बर्बाद
    इसी तरह बक्सर में गंगा खतरे के निशान से 19 सेंटीमीटर ऊपर बह रही है। चार अंचलों के कई गांवों में करीब दस हजार आबादी प्रभावित है। 1761 हेक्टेयर फसल बाढ़ की चपेट में है। दो प्राथमिक स्कूलों में पानी घुस गया है। प्रशासन ने 33 नाव और राहत सामग्री उपलब्ध कराई है।

    जहानाबाद शहर में आफत
    जहानाबाद में मोरहर, दरधा और बलदइया नदियों का पानी निचले इलाकों में फैल गया है। तीन प्रखंडों की 15 पंचायतें प्रभावित हैं। शहर की तीन सड़कों—हवाई अड्डा-एसएस कॉलेज रोड, सट्टी मोड़-जाफरगंज रोड और जहानाबाद-शकूराबाद मुख्य मार्ग पर पानी है। दो पुलों पर भी पानी चढ़ा है

    अरवल में पुनपुन की बाढ़
    अरवल में पुनपुन नदी के उफान से तीन प्रखंडों की 12 पंचायतों के बधार प्रभावित हैं और करीब दो हजार एकड़ फसल को नुकसान की आशंका है।

    रोहतास में दो दर्जन घर टूटे
    रोहतास जिले में लगातार बारिश से संझौली, रोहतास, नौहट्टा और चेनारी प्रभावित हैं। कृषि विभाग ने करीब एक से डेढ़ हजार हेक्टेयर भूमि प्रभावित होने का अनुमान जताया है। नौहट्टा की 9 पंचायतों में करीब 10 हजार एकड़ धान डूबने की सूचना है। चेनारी में करीब 50 एकड़ फसल बर्बाद हुई है और दो दर्जन मकान क्षतिग्रस्त हुए हैं।

    नालंदा में कटाव से दहशत
    नालंदा जिले के अस्थावां में जिरायन नदी के तटबंध का 25 फीट कटाव बढ़कर करीब 70 फीट हो गया है। पांच गांवों में पानी फैलने से ढाई हजार बीघे में धान, मक्का और सब्जियों की फसल डूब गई है। बिहारशरीफ के सोहसराय अड्डापर में छिलका के ऊपर से करीब डेढ़ फीट पानी बह रहा है।

    कैमूर में सड़कें और स्कूल डूबे
    कैमूर में दुर्गावती, कर्मनाशा और कुदरा नदियों के उफान से दुर्गावती, रामपुर, नुआंव और रामगढ़ प्रभावित हैं। 10 से 12 हजार आबादी परेशान है। कई सड़कें और स्कूल परिसर जलमग्न हैं। कुछ इलाकों में पानी कम होने से जनजीवन धीरे-धीरे पटरी पर लौटने लगा है।

    गंगा, कोसी, सोन उफान पर
    केंद्रीय जल आयोग के अनुसार गंगा नदी दीघा, गांधीघाट, हाथीदह, भागलपुर, कहलगांव, बक्सर और मुंगेर में खतरे के निशान से ऊपर बह रही है। जबकि गंडक नदी डुमरियाघाट, हाजीपुर, कोसी नदी बलतारा और कुरसेला, बूढ़ी गंडक खगड़िया, पुनपुन नदी श्रीपालपुर तो घाघरा नदी दरौली में खतरे के निशान से ऊपर बह रही है।

    मुंगेर में बाढ़ में डूबा मंदिर
    सोन नदी का डिस्चार्ज पांच लाख 23 हजार क्यूसेक रहा। सोन के जलस्तर में आने वाले दिनों में कमी आने की संभावना है। गंगा नदी के जलस्तर में भी कमी का रुझान रहने का अनुमान है। प्रयागराज में गंगा के जलस्तर में कमी शुरू हो गई है, जिसका असर आगे बिहार में भी देखने को मिल सकता है।
    भागलपुर शहर में घुसा बाढ़ का पानी

    भागलपुर जिले में शुक्रवार को गंगा नदी की बाढ़ का पानी शहरी क्षेत्र में प्रवेश कर गया। तिलकामांझी भागलपुर विश्वविद्यालय (टीएमबीयू) के प्रशासनिक भवन के पोर्टिको और कैंपस में पानी फैलने लगा है। छात्राएं पीजी गर्ल्स हॉस्टल खाली कर घर वापस हो गई हैं। भागलपुर कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग (बीसीई) कैंपस में भी पानी घुस गया है। यहां सारे हॉस्टलों को बंद कर दिया गया है।

    अजगैवीनाथ मंदिर जलमग्न
    सुल्तानगंज में अजगैवीनाथ मंदिर परिसर में गंगा का पानी घुस गया है, जिससे श्रद्धालुओं को दिक्कत होने लगी है। जिला आपदा प्रबंधन कार्यालय के अनुसार खरीक प्रखंड की राघोपुर पंचायत के 1005 घरों की लगभग पांच हजार आबादी बाढ़ से प्रभावित है।

    कई स्टेट हाईवे पर चढ़ा बाढ़ का पानी
    नदियों में बढ़े जलस्तर की वजह से आई बाढ़ से डेढ़ दर्जन से अधिक जिलों में ग्रामीण सड़कें प्रभावित हुई हैं। ग्रामीण कार्य विभाग के अनुसार 200 से अधिक सड़कों पर पानी आ गया है। वहीं, 60 से अधिक सड़कें क्षतिग्रस्त भी हुई हैं। विभाग ने जिलों को निर्देश दिया है कि बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में ग्रामीण सड़कों की निरंतर निगरानी रखें। जहां, कहीं भी सड़क क्षतिग्रस्त हुई है, वहां पानी उतरने के तुरंत बाद उसकी मरम्मत करें ताकि आवागमन को फिर से सुगम बनाया जा सके।

    इन इलाकों में आवागमन प्रभावित
    जिन जिलों की सड़कें प्रभावित हुई हैं, उनमें बक्सर, भोजपुर, पटना, भागलपुर, वैशाली, बेगूसराय, किशनरंज, अररिया, कटिहार, खगड़िया और पश्चिम चंपारण आदी शामिल हैं। प्रदेश के विभिन्न जिलों में स्टेट हाईवे समेत कई अन्य सड़कों पर भी पानी चढ़ गया है। पथ निर्माण विभाग क्षतिग्रस्त सड़कों की तत्काल मरम्मत का निर्देश दिया है। औरंगाबाद, पटना, वैशाली भागलपुर आदि जिलों की सड़कें अधिक प्रभावित हुई हैं।

    निर्माण कार्य रुके
    विभाग के अनुसार बाढ़ की आशंका को देखते हुए कई जगहों पर निर्माण कार्य को भी रोक दिया गया है। बाढ़ग्रस्त इलाके में काम नहीं मिलने के कारण पलायन कर चुके लोगों को अस्थायी तौर पर जॉब कार्ड बनाने का निर्देश ग्रामीण विकास विभाग ने दिया है। बाढ़ के कारण दो दर्जन से अधिक आंगनबाड़ी केंद्र बंद कर दिए गए हैं। पशुपालन विभाग के अनुसार 70 हजार पशु भी प्रभावित है। छपरा, पूर्णिया और भागलपुर में पशु चारा का वितरण किया गया है।

     

  • चित्रकूट में बाढ़ के बाद हालात बदतर, सैकड़ों परिवारों का सामान बर्बाद; 709 घरों में लौटी बिजली

    चित्रकूट में बाढ़ के बाद हालात बदतर, सैकड़ों परिवारों का सामान बर्बाद; 709 घरों में लौटी बिजली

     चित्रकूट

    सतना के चित्रकूट में मंदाकिनी नदी के पांच दिन में तीन बार उफान पर आने के बाद अब बाढ़ का पानी उतर चुका है, लेकिन पीछे तबाही छोड़ गया है। गलियों, दुकानों और घरों में मिट्टी और कीचड़ जमा है। कई परिवारों की गृहस्थी बर्बाद हो गई, जबकि दुकानदारों का लाखों का सामान खराब हो गया। अरे भइया, हम तो रजौला से कर्वी तक किए गए अवैध कब्जों के कारण मंदाकिनी नदी के कोप का भाजन साल के 365 दिन बनते हैं। अभी बाढ़ है तो देखिए बरवारा डायवर्जन नहर दो जगह फटने से फसलें जलमग्न हैं। गर्मी में सूखा झेलते हैं। पानी बढ़ा और नहरें ओवरफ्लो हुईं तो फिर नुकसान तय है। मंदाकिनी दोहरी मुसीबत बन गई है। बाढ़ में डुबोती है तो गर्मी में रुलाती है। ये दर्द बंधोइन बंधे के पास बाढ़ की विभीषिका देखने पहुंचे ग्रामीण राजेश कुमार का है।

    यही व्यथा-कथा बंधोइन व आसपास के गांवों के हर ग्रामीण की भी है। कारण, बंधोइन बंधा ही है, जो चित्रकूट की चार पुरानी जल परियोजनाओं के साथ मंदाकिनी के जल को गर्मी में भी बचाए रखता है व 25 हजार एकड़ कृषि भूमि की सिंचित करने में मदद करता है। बाढ़ व सूखे से बचने को बंधोइन से कनकोटा गांव में मंदाकिनी के यमुना में मिलने तक आवश्यकता एक बड़े बांध की है, जो इस क्षेत्र के 60 गांवों को नया जीवन दे सकता है, जिनमें बाढ़ के पानी से अभी त्राहिमाम है। बांध बनने से बाढ़ का संकट खत्म होगा तो गर्मी में सूखा खत्म होगा व सिंचाई के लिए आत्मनिर्भरता आएगी।

    पानी इतनी तेजी से आया, घर और दुकान दोनों नहीं बचा पाई
    आरोग्यधाम में जनरल स्टोर और कपड़ों की दुकान चलाने वाली ममता शर्मा ने बताया कि बाढ़ का पानी इतनी तेजी से बढ़ा कि जरूरी सामान दूसरी मंजिल तक पहुंचाने का समय नहीं मिला। घर और दुकान में रखा सामान पानी और कीचड़ की चपेट में आकर खराब हो गया।

    पुरानी लंका तिराहे पर फुटवियर दुकान चलाने वाले जितेंद्र ने गुरुवार को शटर खोला तो अंदर टूटा काउंटर, बिखरी अलमारी और कीचड़ में सने जूते-चप्पल मिले। उनके मुताबिक करीब 3 लाख रुपए का सामान बर्बाद हुआ है।

    खाना मिल रहा, लेकिन सफाई के लिए पानी नहीं
    बाढ़ प्रभावित लोगों तक प्रशासन, मठ-मंदिरों और स्वयंसेवी संस्थाओं की ओर से भोजन-पानी पहुंचाया जा रहा है। लोगों को राहत व्यवस्था से शिकायत नहीं है, लेकिन अब सबसे बड़ी जरूरत सफाई के पानी की है।

    एमपीटी चौराहे पर चाय-नाश्ते का होटल चलाने वाली पूनम ने बताया कि बाढ़ में काफी सामान बह गया। जो सामान बचा है और होटल में जमा गंदगी, उसे साफ करने के लिए पानी उपलब्ध नहीं है।

    समाजसेवी रामशिरोमणि शर्मा ने बताया कि घरों और होटलों में कीचड़ भरा है। नदी से पानी लाकर सफाई करना संभव नहीं है और नगर परिषद के कर्मचारी भी कई जगह नहीं पहुंच पाए हैं। ऐसे में प्रभावित परिवारों के सामने सफाई की बड़ी चुनौती बनी हुई है।

    मुख्य सड़क साफ, अब गलियों में युद्ध स्तर पर सफाई
    गुरुवार को चित्रकूट की स्थिति में कुछ सुधार नजर आया। बाढ़ के दौरान बंद पड़ी मुख्य सड़क पर वाहनों की आवाजाही शुरू हो गई। सड़क पर जमा कचरा और कीचड़ भी काफी हद तक हटाया जा चुका है।

    जिला प्रशासन का बड़ा अमला पिछले पांच दिनों से चित्रकूट में मौजूद है। राहत और बचाव के बाद अब शहर को सामान्य स्थिति में लाने पर फोकस है। मुख्य सड़क के बाद मोहल्लों और गलियों में सफाई तेज कर दी गई है। कीचड़ हटाने के साथ मलबा उठाया जा रहा है।

    1275 में से 709 घरों की बिजली बहाल
    बाढ़ और बारिश से बिजली व्यवस्था भी प्रभावित हुई थी। चित्रकूट वितरण केंद्र के 19 ट्रांसफॉर्मर प्रभावित हुए। इनमें से 11 ट्रांसफॉर्मर गुरुवार तक ठीक कर दिए गए, जबकि बाकी 8 पर काम जारी है।

    कुल 1275 प्रभावित उपभोक्ताओं में से 709 की बिजली सप्लाई बहाल हो चुकी है। 566 उपभोक्ताओं के घरों तक बिजली पहुंचाने के लिए कर्मचारी लगातार काम कर रहे हैं। बारिश और कीचड़ के बीच बिजलीकर्मी नेटवर्क को जल्द सामान्य करने में जुटे हैं।

    पांच दिन बाद निकली धूप, लोगों को मिली उम्मीद
    गुरुवार शाम करीब 4 बजे पांच दिन बाद कुछ देर के लिए सूरज बादलों के पीछे से बाहर आया। लगातार बारिश और बाढ़ के बीच यह धूप लोगों के लिए राहत की खबर बनी। गुरुवार को बारिश नहीं होने से प्रशासन को भी सफाई और बहाली के काम में तेजी लाने का मौका मिला।

     मंदाकिनी में बाढ़ व उसके कारणों को तलाशते चार दिवसीय समाचारीय शृंखला की तीसरी कड़ी में बंधोइन से यमुना के संगम तक 38 किलोमीटर क्षेत्र में की पड़ताल की गई। बंधोइन बंधा युवाओं का बड़ा सेल्फी प्वाइंट भी है। इसलिए यहां दिन भर 50 से युवक रहते ही हैं। इस बंधे के कारण ऊपर पानी रुकने से कर्वी में इंटकवेल, मानिकपुर क्षेत्र में सुदूर फैली विंध्य पर्वतमाला में कभी डकैतों के शरणगाह रहे पाठा के पौने दो लाख कोल आदिवासियों को पानी उपलब्ध कराने वाली झांसी-मीरजापुर हाईवे पर कर्वी पुल घाट के पास वर्ष 1932 में अस्तित्व में आई पाठा जलकल योजना संचालित है।

    बनकट पंप कैनाल से निकली नहरों व बरवारा डायवर्जन नहर से गांवों की 25 हजार एकड़ जमीन सिंचित होती है। हालांकि, बंधा 60 गांवों को बाढ़ की विभीषिका देता है तो गर्मी में इन्हीं गांवों के लिए सूखे के हालात पैदा करता है, क्योंकि तब इतना पानी भी इसके ऊपर से आगे नहीं बढ़ पाता है कि जल धारा भी दिखाई पड़ सके। बुंदेली सेना के जिलाध्यक्ष अजीत सिंह कहते हैं कि ये बंधा हटाने की मांग यदाकदा उठती है पर इसे हटाना श्रेयष्कर नहीं होगा, क्योंकि तब फिर इसके माध्यम से चल रही चारों जल परियोजनाएं दम तोड़ देंगी।

    गर्मी में नदी का जल आचमन योग्य भी नहीं रहेगा। वर्तमान में बाढ़ का असर इन क्षेत्रों में है। किसान त्राहिमाम कर रहे हैं। बंधोइन माता का मंदिर भी भीषण बाढ़ में इस बार डूब गया था। मान्यता है कि मंदाकिनी की बाढ़ से बंधोइन माता ही रक्षा करती हैं। इससे साफ है कि मंदाकिनी के इस क्षेत्र में तटबंध और मजबूत करने की आवश्यकता है। बड़ा बांध अच्छा विकल्प है।

    चित्रकूट के 84 कोस में ऐसे रुक सकती जलप्रलय
    चित्रकूट के 84 कोस को जलप्रलय से बचाने के लिए डोडामाफी बांध, रसिन, बरुआ, ओहन व गुंता बांधों के साथ बरदहा, शरभंग, वाल्मीकि, झूरी नदियों व पहाड़ी नालों का पानी कुछ और बांध बनाकर संरक्षित करना चाहिए। इससे वर्ष भर मंदाकिनी को जल मिलेगा तो बाढ़ सूखा खत्म होगा।

    बरदहा-शरभंग नदियों पर स्थित शबरी (राघव) जल प्रपात वर्ष भर पानी मिलने से आकर्षण बिखेरता रहेगा। मुंबई-हावड़ा रेलमार्ग पर जलभराव रोकने में मदद मिलेगी तो मानिकपुर वाया चित्रकूटधाम कर्वी-बांदा झांसी रेलमार्ग पर मंदाकिनी पुल पर बाढ़ में ट्रेनों की गति धीमी नहीं करनी पड़ेगी।

  • मंदाकिनी ने मचाई तबाही, 400 से ज्यादा दुकानें डूबीं; 36 गांवों में अलर्ट, भारी बारिश का खतरा कायम

    मंदाकिनी ने मचाई तबाही, 400 से ज्यादा दुकानें डूबीं; 36 गांवों में अलर्ट, भारी बारिश का खतरा कायम

    सतना 
     चित्रकूट लगातार 5 दिनों से बाढ़ की चपेट में है। निचले इलाके मंदाकिनी नदी की बाढ़ में घिरे हुए है। मंदाकिनी नदीं का जल स्तर इन पांच दिनों में कई बार खतरे के निशान से ऊपर पहुंच चुका है। इससे यहां का जनजीवन अस्त व्यस्थ हो चुका है। बाजार पूरी तरह से बंद है। लोगों के घर बाढ़ के कीचड़ से रहने की स्थिति में नहीं है। दुकान होटल भी बंद पड़े हुए है।

    चित्रकूट के 60 फीसदी हिस्से में बाढ़ की तबाही का सन्नाटा फैला हुआ है। देर शाम तक मंदाकिनी का जल स्तर बढ़ कर लंका तिराहे तक पहुंच चुका है जिससे कामदगिरी मुख्य पहुंच मार्ग बंद है। रामघाट पूरी तरह डूबा हुआ है और नयागांव में डूब प्रभावित है। यहां पर 400 से ज्यादा दुकानें डूब गई हैं। सबसे ज्यादा चिंता की बात यह है कि मौसम विभाग ने एक बार फिर सतना जिले में भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है। 36 गांवों में भी अलर्ट जारी किया गया है।

    दो दिन और भारी वर्षा की चेतावनी
    मौसम विभाग ने अगले दो दिनों के लिए सतना जिले में बारिश का यलो अलर्ट बताया है जिसके अनुसार सामान्य से तेज बारिश होगी। शहर में राहत आयुक्त ने जारी किए गए वायरलेस मैसेज में भारी बारिश की संभावना जताई है। जिला मौसम कार्यालय ने बताया कि बंगाल के ऊपर बना कम दबाव का क्षेत्र झारखंड आने के बाद मध्यप्रदेश की ओर मुड़ गया। जिससे सतना जिले में झमाझम बारिश हो सकती है।

    शांत नहीं हो रहा जलस्तर
    जानकारी के अनुसार चित्रकूट और उसके ऊपरे इलाकों में जिस तरह से लगातार बारिश हो रही है उससे मंदाकिनी नदी का जल स्तर शांत होने का नाम ही नहीं ले रहा है। लगातार इसका जल स्तर खतरे के निशान के आसपास ही चल रहा है। इस वजह से यहां पर राहत कार्य करने में भारी परेशानी हो रही है। सबसे बुरी स्थिति और बीमार लोगों के सामने है, जल भराव कीचड़ के कारण वे इलाज कराने तक नहीं जा पा रहे है।

    परिक्रमा मार्ग से पानी की निकासी
    चित्रकूट के परिक्रमा मार्ग में जमा पानी को पंप के माध्यम से निकाला जा रहा है। नगर परिषद द्वारा जल निकासी एवं साफ-सफाई के कार्य लगातार कराए जा रहे हैं। वार्डों और जलभराव वाले क्षेत्रों में नालियों की सफाई कर पानी की निकासी सुनिश्चित की जा रही है। नगर परिषद चित्रकूट के शेड में राहत एवं आवश्यक कार्यों के लिए दो ट्रक सुखी लकड़ी रखवाई गई है, जिसका उपयोग ईंधन की आवश्यकता के लिए किया जाएगा।

    चित्रकूट में चुनौती बना राहत और बचाव कार्य
    चित्रकूट में बाढ़ की समस्या विकट स्थितियों में पहुंच गई है। यहां पर राहत और बचाव कार्य करना काफी चुनौती पूर्ण हो गया है। इसकी मुख्य वजह मंदाकिनी नदी का लगातार बढ़ता और घटना जल स्तर है। कुछ ही घंटों में यह खतरे के निशान तक पहुंच कर कस्बे को अपने आगोश में ले लेती है और अगले कुछ घंटो में इसका जल स्तर फिर नीचे हो जाता है। सबसे बड़ी समस्या यहां सफाई कार्य हो गया है। यहां जैसे ही सफाई कार्य पूरा होता है फिर से बारिश और बाढ़ स्थिति वापस वैसी ही कर देते हैं। हालात की गंभीरता को देखते हुए लगातार चार दिन से कलेक्टर डॉ सतीश कुमार एस, पुलिस अधीक्षक हंसराज सिंह, जिला पंचायत सीईओ शैलेन्द्र सिंह सहित अन्य अधिकारी चित्रकूट में ही डेरा डाले हुए है और स्वयं राहत कार्यों की निगरानी कर रहे हैं।

    इस तरह रहा मंदाकिनी का जल स्तर
    लगातार हो रही बारिश के कारण मंदाकिनी नदी का जलस्तर बुधवार की प्रातः 7 बजे 126 मीटर रिकार्ड किया गया था। वह अपरान्ह 3.30 बजे तक बढकर 129.15 मीटर तक पहुंच गया है। शाम 5 बजे की स्थिति में मंदाकिनी नदी का जल स्तर 129 मीटर पर स्थिर रिकार्ड किया गया है। चित्रकूट के शहरी क्षेत्रों में बाढ का पानी उतरने से जिला प्रशासन द्वारा प्रभावित नागरिकों को राहत एवं आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराने के साथ-साथ साफ-सफाई, जल निकासी, स्वास्थ्य जांच, पेयजल शुद्धिकरण और पुनर्वास कार्यों को प्राथमिकता से कराया जा रहा है।

    खजुराहो में 7 इंच से ज्यादा वर्षा
    मौसम विज्ञान केंद्र से मिली जानकारी के मुताबिक पिछले 24 घंटों के दौरान गुरुवार सुबह साढ़े आठ बजे तक खजुराहो में सर्वाधिक 178.2 मिमी यानी 7 इंच से ज्यादा वर्षा हुई। वहीं सतना में 88.2, नौगांव में 87.8, जबलपुर में 70.6, सागर में 70.5, मंडला में 61.1, बालाघाट जिले के मलाजखंड में 58, सीधी में 54.2, उमरिया में 51.6 और रीवा में 42.8 मिलीमीटर बरसात हुई। कुछ अन्य जिलों में भी मध्यम से हल्की बरसात हुई।

    निम्न दाब का क्षेत्र, तीन ट्रफ लाइन हैं एक्टिव
    मौसम विज्ञानी प्रमेंद्र कुमार ने बताया कि झारखंड और उत्तर-पश्चिम मध्य प्रदेश के ऊपर बना निम्न दाब का क्षेत्र गुरुवार को आगे बढ़ते हुए दक्षिणी उत्तर प्रदेश और उत्तरी मध्य प्रदेश से गुजरेगा। साथ ही बंगाल की खाड़ी तक फैली मानसून ट्रफ लाइन के चलते प्रदेश में वर्षा की गतिविधियां तेज होंगी। इसके अलावा अन्य दो ट्रफ लाइन भी सक्रिय हैं। चार और पांच सितंबर को भोपाल में तेज वर्षा हो सकती है।

    इन जिलों के लिए अलर्ट जारी
    रेड अलर्ट: नर्मदापुरम और छिंदवाड़ा में अत्यधिक भारी वर्षा।
    ऑरेंज अलर्ट: रायसेन, बैतूल, नरसिंहपुर, सिवनी, सागर, छतरपुर में अति भारी वर्षा।
    येलो अलर्ट (भारी वर्षा): विदिशा, सीहोर, राजगढ़, आगर, गुना, अशोकनगर, शिवपुरी, दतिया, सतना, डिंडौरी, कटनी, जबलपुर, मंडला, बालाघाट, पन्ना, दमोह, टीकमगढ़, निवाड़ी, मैहर और पांढुर्णा में भारी वर्षा के आसार।
    येलो अलर्ट (हल्की व मध्यम वर्षा): भोपाल, हरदा, बुरहानपुर समेत कुछ अन्य जिलों में।

     

  • चित्रकूट में बाढ़ जैसे हालात! मंदाकिनी उफान पर, सड़क बंद और रामघाट में घुसा पानी

    चित्रकूट में बाढ़ जैसे हालात! मंदाकिनी उफान पर, सड़क बंद और रामघाट में घुसा पानी

    सतना /चित्रकूट 

    सतना जिले में लगातार बारिश से नदी-नाले उफान पर हैं। निचले इलाकों में जलभराव की स्थिति है। सिमरावल नदी के बढ़ते जलस्तर को देखते हुए 36 गांवों को अलर्ट किया गया है।मझगवां के पालदेव में घरों और सड़कों में पानी भर गया है, जबकि डेंगरहट-खोड़री पुल धंसने और मझगवां-पहाड़ीखेड़ा संपर्क मार्ग अवरुद्ध होने से आवागमन प्रभावित हुआ है।

    चित्रकूट में मंदाकिनी नदी खतरे के निशान से करीब दो मीटर ऊपर बह रही है। रामघाट की करीब 300 दुकानें पानी में डूब गई हैं। प्रशासन और पुलिस की टीमें प्रभावित इलाकों में लगातार निगरानी कर रही हैं।

    मैहर में भारी बारिश और नदी-नालों के उफान को देखते हुए आज यानी 1 सितंबर को सभी स्कूलों में अवकाश घोषित किया गया है।

    इस मानसूनी सीजन में मध्य प्रदेश में 74% यानी, औसत 27.7 इंच बारिश हो चुकी है। अकेले अगस्त महीने में ही 12 इंच पानी गिरा। अब सितंबर में 9.6 इंच पानी की जरूरत है। इसके बाद प्रदेश की सामान्य बारिश 37.3 इंच का आंकड़ा पार होगा। हालांकि, अगले 4 दिन प्रदेश के कई जिलों में अति भारी और भारी बारिश का अलर्ट है। ऐसे में आंकड़े में बढ़ोतरी की उम्मीद है।

    IMD (मौसम केंद्र) भोपाल के अनुसार, बंगाल की खाड़ी में लो प्रेशर एरिया (निम्न दाब क्षेत्र) और ट्रफ की वजह से 4 सितंबर तक जबलपुर, रीवा, शहडोल, सागर, भोपाल, नर्मदापुरम, उज्जैन और ग्वालियर-चंबल संभाग में तेज बारिश होगी।

    आज इन जिलों में अलर्ट
    मौसम विभाग ने मंगलवार को उमरिया और बालाघाट में अति भारी बारिश का ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। पन्ना, सतना, रीवा, मऊगंज, सीधी, सिंगरौली, कटनी, मैहर, शहडोल, अनूपपुर, डिंडौरी, जबलपुर, मंडला, सिवनी और छिंदवाड़ा में भारी बारिश हो सकती है।

    वहीं, भोपाल, रायसेन, सीहोर, राजगढ़, विदिशा, इंदौर, धार, आलीराजपुर, बुरहानपुर, बड़वानी, खंडवा, खरगोन, झाबुआ, उज्जैन, नीमच, आगर-मालवा, मंदसौर, शाजापुर, देवास, रतलाम, नर्मदापुरम, बैतूल, हरदा, ग्वालियर, गुना, शिवपुरी, दतिया, अशोकनगर, मुरैना, भिंड, श्योपुर, नरसिंहपुर, पांढुर्णा, सागर, दमोह, छतरपुर, टीकमगढ़ और निवाड़ी में कहीं तेज तो कहीं हल्की बारिश होगी।

  • पहाड़ों में उठा धुएं का गुबार और मच गई तबाही, नेपाल बाढ़ के 4 डरावने VIDEO वायरल

    पहाड़ों में उठा धुएं का गुबार और मच गई तबाही, नेपाल बाढ़ के 4 डरावने VIDEO वायरल

    काठमांडू 

     नेपाल में तिब्बत की सीमा से लगे इलाके में अचानक आई जबरदस्त बाढ़ ने कई गांवों और प्रोजेक्ट साइट्स को तबाह दिया। इस घटना में सात लोगों की मौत हो गई और चीन सीमा के पास 9 जवान तापता हैं। अधिकारियों ने भारी जान-माल के नुकसान की आशंका जताते हुए नदी के किनारे रहने वाले लोगों से ऊंचे स्थानों पर जाने की अपील की।

    सरकारी अधिकारियों ने बताया कि रसुवा के पहाड़ी जिले में स्याप्रु बेसी और तिमुरे इलाके बुरी तरह प्रभावित हुए हैं। साथ ही उन्होंने भोटे कोशी नदी के किनारे रहने वाले लोगों से ज्यादा सावधानी बरतने को कहा है।

    प्रशासन के पास अभी पक्की जानकारी नहीं
    जिला प्रशासक नरेंद्र परियार ने रॉयटर्स को बताया, "हमें गांवों और इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट साइट्स के बह जाने की खबरें मिली हैं।" उन्होंने आगे कहा कि अभी जान-माल के नुकसान का कोई पक्का अनुमान उपलब्ध नहीं है। उन्होंने कहा, "काफी जान-माल का नुकसान हो सकता है लेकिन अभी मैं पक्के तौर पर कुछ नहीं कह सकता।"

    काठमांडू पोस्ट ने रसुवा के प्रमुख जिला अधिकारी नरेंद्र परियार के हवाले से कहा है कि बाढ़ का कारण फिलहाल स्पष्ट नहीं है। उन्होंने बताया कि जिला मुख्यालय और आसपास के इलाकों में बिल्कुल बारिश नहीं हुई है और मौसम साफ है। आशंका जताई जा रही है कि ऊपरी क्षेत्र में कोई ग्लेशियर झील के फटने या कोई अस्थायी बांध टूटने के कारण नदी में अचानक बाढ़ आई है। प्रशासन का कहना है कि लोगों से संपर्क स्थापित करने की कोशिश की जा रही है। शुरुआती रिपोर्ट्स से भारी नुकसान की बात सामने आ रही है।

    हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट्स को भारी नुकसान
    स्थानीय निवासी अजय श्रेष्ठ ने बताया कि पानी का बहाव इतना तेज था कि मानो अचानक कोई बांध टूट गया हो। इस बाढ़ में चिलिमे हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट समेत कई अन्य जलविद्युत परियोजनाओं को नुकसान पहुंचा है। नदी के बहाव को देखते हुए नुवाकोट और धाडिंग जिलों के निचले इलाकों पर भी बाढ़ का खतरा मंडरा रहा है।

    काठमांडू वापस लौटा रेस्क्यू हेलीकॉप्टर
    बाढ़ और भूस्खलन के कारण तिमुरे में फंसे लोगों को बचाने के लिए भेजा गया एल्टीट्यूड एयर का एक हेलीकॉप्टर बिना लैंड किए ही वापस काठमांडू लौट आया। पायलट ने बताया कि बाढ़ के तेज बहाव में तिमुरे का स्थानीय हेलीपैड पूरी तरह बह गया है, जिससे वहां उतरने के लिए कोई सुरक्षित जगह नहीं बची। आसमान से देखने पर पूरा तिमुरे गांव बाढ़ और मलबे के कारण लगभग दिखाई ही नहीं दे रहा था।

    पुलिस और सेना की टीमें राहत और बचाव कार्य में लगीं
    प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह ने कहा कि बचाव और राहत टीमों के साथ-साथ पुलिस और सेना को भी मदद के काम में लगाया गया है। उन्होंने कहा, "निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को सुरक्षित जगहों पर ले जाने के निर्देश दिए गए हैं।" सरकार ने अपने बयान में कहा, "नदी के किनारे रहने वाले लोगों को सलाह दी जाती है कि वे ज्यादा सावधानी बरतें और सतर्क रहें।"

    28 पुलिसकर्मी लापता
    इस बाढ़ के कारण सुरक्षा बल के 28 जवान लापता हो गए हैं। जिन 28 सुरक्षाकर्मियों से संपर्क नहीं हो पा रहा है, उनमें से 19 नेपाल पुलिस के हैं और नौ आर्म्ड पुलिस फोर्स (APF) के हैं।

    बागमती प्रांत पुलिस कार्यालय के अनुसार, रसुवागढ़ी पुलिस पोस्ट पर तैनात 22 पुलिसकर्मियों में से 13 से संपर्क नहीं हो पा रहा है, जबकि नौ से संपर्क हो गया है। स्याब्रूबेसी इलाके में नौ पुलिसकर्मियों में से तीन से संपर्क हो गया है, जबकि छह से अभी भी संपर्क नहीं हो पाया है।

    इसी तरह तिमुरे बॉर्डर आउटपोस्ट (BOP) पर तैनात एपीएफ के नौ जवान भी संपर्क से बाहर हैं।

    भोटे कोशी नदी तिब्बत से निकलती है और नेपाल की त्रिशूली नदी में मिलती है, जो आगे चलकर भारत में गंडक नदी के रूप में बहती है। पिछले साल भोटे कोशी नदी में आई बाढ़ से नौ लोगों की मौत हो गई थी और 24 लोग लापता हो गए थे। साथ ही नेपाल और चीन को जोड़ने वाला फ्रेंडशिप ब्रिज भी बह गया था, जिससे कई महीनों तक ट्रांसपोर्ट और व्यापार ठप रहा था।

    बचाव अभियान शुरू
    नेपाल सेना ने त्रिशूली नदी के आसपास के इलाकों में खोज एवं बचाव अभियान चलाने के लिए दो हेलीकॉप्टर भेजे हैं। सेना ने एक बयान में बताया कि इमरजेंसी मेडिकल बचाव दल से लैस एक MI-17 हेलीकॉप्टर को त्रिशूली स्थित जिला अस्पताल की ओर रवाना किया गया है। हालांकि, नेपाल सेना ने कहा कि भीषण बाढ़ से हुए नुकसान का पूरा ब्योरा अभी उपलब्ध नहीं हुआ है। नुकसान से संबंधित आंकड़े जुटाने का काम जारी है।

    नेपाल सरकार ने बचाव कार्यों को तेज कर दिया है। प्रधानमंत्री कार्यालय के अनुसार, बचाव और राहत कार्यों में मदद के लिए नेपाल सेना, आर्म्ड पुलिस फोर्स और नेपाल पुलिस के जवानों को रसुवा और आसपास के जिलों में तैनात किया गया है। आपको बता दें कि इससे ठीक एक साल पहले भोटेकोशी में आई बाढ़ में भारी तबाही हुई थी। रसुवा में कम से कम 10 लोगों की मौत हुई थी।

    शांत नदी ने अचानक लिया रौद्र रूप

    पहले वीडियो में नदी का बहाव शुरुआत में बेहद सामान्य और शांत नजर आता है. पहाड़ों के बीच बह रही नदी को देखकर अंदाजा भी नहीं लगाया जा सकता कि कुछ ही देर में यहां कितना खतरनाक सैलाब आने वाला है.अचानक नदी का जलस्तर और बहाव तेजी से बढ़ता दिखाई देता है. देखते ही देखते पानी का वेग इतना बढ़ जाता है कि उसके रास्ते में आने वाली चीजें टिक नहीं पातीं। 

    पहाड़ों से निकला ‘धुआं’ और फिर सैलाब
    दूसरे वीडियो में पहाड़ों के बीच का इलाका दिखाई देता है. शुरुआत में सब कुछ शांत नजर आता है, लेकिन अचानक पहाड़ों के बीच से धुएं जैसी सफेद परत निकलती दिखाई देती है. कुछ ही पलों में यह धुंधनुमा दृश्य तेज पानी के बहाव में बदल जाता है. पानी तेजी से नीचे की ओर आता है और अपने रास्ते में मौजूद क्षेत्र को अपनी चपेट में लेता दिखाई देता है. वीडियो बाढ़ की अचानक शुरुआत और उसकी रफ्तार को बेहद करीब से दिखाता है। 

    ताश के पत्तों की तरह बहती इमारतें
    इस वीडियो में बाढ़ के बाद की तबाही दिखाई देती है. तेज पानी के बीच घर और दूसरी इमारतें बुरी तरह क्षतिग्रस्त नजर आती हैं. कुछ संरचनाएं ऐसे बहती दिखाई देती हैं, जैसे वे ताश के पत्तों से बनी हों. आवाज से ऐसा प्रतीत होता है कि आसपास मौजूद लोग घबराए हुए हैं. पानी के तेज बहाव के कारण पूरा इलाका मलबे में तब्दील होता नजर आता है. ये दृश्य बताते हैं कि अचानक आई बाढ़ ने सिर्फ नदी किनारे के इलाकों को ही नहीं, बल्कि बाजार और रिहायशी क्षेत्रों को भी प्रभावित किया है। 

     

  • नेपाल बाढ़ का भयावह मंजर: कैलाश मानसरोवर जा रहे 400 टूरिस्ट लापता, 105 भारतीय भी शामिल

    नेपाल बाढ़ का भयावह मंजर: कैलाश मानसरोवर जा रहे 400 टूरिस्ट लापता, 105 भारतीय भी शामिल

    काठमांडू 

    नेपाल-चीन सीमा पर रसुवा जिले में बुधवार को आई भीषण बाढ़ और भूस्खलन ने भारी तबाही मचाई है। इस आपदा के कारण सड़कों को गंभीर नुकसान पहुंचा है, जिससे कैलाश मानसरोवर यात्रा पर निकले करीब 400 तीर्थयात्री रसुवागढ़ी इलाके में फंस गए हैं और उनका संपर्क पूरी तरह टूट गया है। काठमांडू स्थित टच कैलाश ट्रेवल्स एंड टूर्स के एमडी बासु कुमार अधिकारी ने बताया कि बुधवार को 93 नेपाली नागरिकों सहित कुल 390 श्रद्धालुओं को चीन की सीमा पार करनी थी। हालांकि दोपहर 3 बजे तक इनमें से कुछ ही लोगों से संपर्क हो पाया है, जबकि अधिकांश यात्रियों के बारे में कोई सटीक जानकारी नहीं मिल सकी है।

    ये तीर्थयात्री विभिन्न ट्रेवल एजेंसियों के माध्यम से यात्रा पर निकले थे, जिनमें सम्राट टूर्स एंड ट्रेवल्स के 71 यात्री, ट्रेकर्स सोसाइटी के 92, हिमालयन ग्लेशियर के 62, लीफ हॉलीडेज के 55, कैलाश जर्नी के 31, फिशटेल टूर एंड ट्रेवल्स के 27, काठमांडू हॉलीडेज के 17, अल्पाइन इको ट्रेक के 16, रिचा टूर्स के 12 और एक्सप्लोर वेकेशन के सात यात्री शामिल हैं।

    ट्रेकिंग एजेंसीज एसोसिएशन ऑफ नेपाल के अध्यक्ष सागर पांडे ने बताया कि प्रभावित क्षेत्र में फंसे तीर्थयात्रियों से संपर्क स्थापित करने और उनकी स्थिति का सही आकलन करने के लिए युद्ध स्तर पर प्रयास किए जा रहे हैं।

    तिब्बत सीमा से करीब 125 किलोमीटर दूर आई बाढ़
    नेपाल की सेना ने एक बयान में बताया कि पानी के अचानक बढ़ने से रसुवा जिले के तिमुरे और समीपवर्ती स्याफ्रुबेसी इलाके में भारी नुकसान हुआ तथा वाहन, सामान और अन्य संपत्ति बह गई। रसुवा जिला काठमांडू के उत्तर-पूर्व में स्थित है और तिब्बत सीमा से करीब 125 किलोमीटर दूर है। नेपाल के राष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण एवं प्रबंधन प्राधिकरण (एनडीआरआरएमए) ने रसुवा, नुवाकोट, धादिंग, चितवन और गोरखा के नदी किनारे रहने वाले लोगों से अगले आदेश तक अत्यधिक सर्तक रहने और सुरक्षा उपाय करने की अपील की है।

    कितने तीर्थयात्री संपर्क से बाहर हैं?
    काठमांडो पोस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक वहां स्थित टच कैलाश ट्रैवल्स एंड टूर्स के प्रबंध निदेशक बाशु कुमार अधिकारी के अनुसार, 390 तीर्थयात्रियों को बुधवार को सीमा पार करनी थी। दोपहर तीन बजे तक कुछ यात्रियों को छोड़कर बाकी से संपर्क स्थापित नहीं हो सका था। अलग-अलग यात्रा एजेंसियों के ये यात्री रसुवागढ़ी इलाके में मौजूद थे। ट्रेकिंग एजेंसियों एसोसिएशन ऑफ नेपाल के अध्यक्ष सागर पांडे ने कहा कि यात्रियों से संपर्क करने और उनकी स्थिति का पता लगाने के प्रयास किए जा रहे हैं।

    देश/राष्ट्रीयता लापता यात्रियों की संख्या
    भारत 105
    नेपाल 93
    मलेशिया 17
    ब्रिटेन 12
    दक्षिण अफ्रीका 4
    अमेरिका 3
    ऑस्ट्रेलिया 1
    नीदरलैंड 1
    एनआरआई 37
    राष्ट्रीयता की पुष्टि बाकी 111
    कुल 384

    कौन-कौन सी एजेंसियों के यात्री शामिल हैं?
    इन तीर्थयात्रियों में अलग-अलग ट्रैवल एजेंसियों के ग्राहक शामिल हैं। इनमें सम्राट टूर्स एंड ट्रैवल्स के 71, लीफ हॉलीडेज के 55, काठमांडू हॉलीडेज के 17, कैलाश जर्नी के 31, एक्सप्लोर वेकेशन के सात, ट्रेकर्स सोसाइटी के 92, रिचा टूर्स के 12, फिशटेल टूर्स एंड ट्रैवल्स के 27, हिमालयन ग्लेशियर के 62 और एल्पाइन इको ट्रेक के 16 यात्री शामिल हैं। उपलब्ध जानकारी के अनुसार इन सभी यात्रियों की स्थिति जानने के लिए संपर्क की कोशिश जारी है।

    लापता लोगों पर नेपाल पर्यटन ने क्या बताया?
    नेपाल पर्यटन बोर्ड की 26 अगस्त 2026 की प्रारंभिक सूची के अनुसार, भोटे कोशी नदी में अचानक आई बाढ़ के बाद कुल 384 पर्यटकों और यात्रियों के लापता होने की सूचना है। इनमें 291 विदेशी नागरिक और 93 नेपाली नागरिक शामिल हैं। जानकारी के आधार पर 59 और 46 भारतीय नागरिकों के साथ 37 एनआरआई भी सूची में हैं। इसके अलावा कुछ यात्रियों की राष्ट्रीयता अभी स्पष्ट नहीं हुई है। इन आंकड़ों में कैलाश मानसरोवर वाले तीर्थ यात्रियों का आंकड़ा नहीं शामिल है। 

    असमान्य रूप से अधिक था बाढ़ का स्तर
    रसुवा के सहायक मुख्य जिला अधिकारी ध्रुव प्रसाद अधिकारी ने कहा कि बाढ़ का स्तर असामान्य रूप से अधिक था और दोनों बस्तियों को काफी नुकसान हुआ है। रसुवा के मुख्य सीमा शुल्क अधिकारी राजेंद्र ढुंगाना ने बताया कि सीमा शुल्क परिसर में रखे कई वाहन और सामान पानी में बह गए। हाल में बनाया गया एक पुल भी बह गया।

    प्रधानमंत्री कार्यालय ने बताया कि भीषण बाढ़ को देखते हुए बचाव और राहत अभियान तेज करने के लिए रसुवा और आसपास के इलाकों में नेपाल सेना, सशस्त्र पुलिस बल और नेपाल पुलिस के जवानों को तैनात किया गया है। प्रधानमंत्री कार्यालय के अनुसार, बाढ़ के बाद की स्थिति पर चर्चा करने और उससे निपटने के लिए जरूरी कदम उठाने को लेकर एक उच्च स्तरीय बैठक बुलाई जा रही है।

    नेपाल सेना ने त्रिशूली नदी के आसपास के इलाकों में खोज एवं बचाव अभियान चलाने के लिए दो हेलीकॉप्टर भेजे हैं। सेना ने एक बयान में बताया कि आपातकालीन चिकित्सा बचाव दल से लैस एक एमआई-17 हेलीकॉप्टर को त्रिशूली स्थित जिला अस्पताल की ओर रवाना किया गया है। हालांकि, नेपाल सेना ने कहा कि भीषण बाढ़ से हुए नुकसान का पूरा ब्योरा अभी उपलब्ध नहीं हुआ है और नुकसान से संबंधित आंकड़े जुटाने का काम जारी है।

    सबसे ज्यादा कौन सा क्षेत्र प्रभावित हुआ? 
    अधिकारियों का कहना है कि बाढ़ का पानी तिब्बत की ओर से आया प्रतीत होता है। सबसे ज्यादा प्रभावित क्षेत्रों में तिमुरे और स्याब्रुबेसी की सीमावर्ती बस्तियां शामिल हैं। अधिकारियों ने अभी तक विनाश की पूरी सीमा का पता नहीं लगाया है और न ही हताहतों की पुष्टि की है।  क्योंकि आकलन दल अभी भी प्रभावित क्षेत्रों से जानकारी एकत्र कर रहे हैं। रसुवा जिले के प्रशासन नरेंद्र परियार ने रॉयटर्स को बताया कि हमें गांवों और बुनियादी ढांचा परियोजना स्थलों के बह जाने की खबरें मिली हैं। उन्होंने आगे कहा कि भारी जानमाल का नुकसान हो सकता है। लेकिन मैं अभी निश्चित रूप से कुछ नहीं कह सकता। हालांकि नेपाल के साथ-साथ चीन में हालात ठीक नहीं है।

    शी जिनपिंग का 'ऑल-आउट' रेस्क्यू ऑपरेशन 
    चीन में अचानक बाढ़ आने के बाद राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने लापता लोगों की तलाश के लिए हरसंभव प्रयास करने के निर्देश दिए। उन्होंने 'ऑल-आउट' रेस्क्यू ऑपरेशन के जरिए खतरे में पड़े लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने और घायलों का तुरंत इलाज कराने को कहा। साथ ही निगरानी और चेतावनी व्यवस्था मजबूत करने तथा दूसरे हादसों को रोकने पर जोर दिया। चीन के प्रधानमंत्री ली कियांग ने भी प्रभावित और लापता लोगों की संख्या का जल्द पता लगाने और राहत कार्य तेज करने के निर्देश दिए। 

     

  • बिहार बाढ़ पर CM सम्राट चौधरी की हाईलेवल बैठक, अधिकारियों को अलर्ट रहने और मरम्मत के निर्देश

    बिहार बाढ़ पर CM सम्राट चौधरी की हाईलेवल बैठक, अधिकारियों को अलर्ट रहने और मरम्मत के निर्देश

    पटना
     मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के आग्रह पर पश्चिम बंगाल की सरकार ने फरक्का बराज के सभी गेट खोल दिये हैं। मुख्यमंत्री ने रविवार को गंगा के बढ़ते जलस्तर को देखते हुए पश्चिम बंगाल से सीएम शुभेंदु अधिकारी से फोन पर बात कर सभी गेट खोलने का आग्रह किया था। इधर मुख्यमंत्री ने सोमवार को बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का हवाई सर्वेक्षण किया। अधिकारियों को अविलंब मरम्मती कार्य कराने तथा संवेदनशील क्षेत्रों की लगातार निगरानी का निर्देश दिया।

    मुख्यमंत्री ने गंगा नदी के बढ़ते जलस्तर एवं बाढ़ की स्थिति को देखते हुए नवगछिया राघोपुर दियारा, कोसी-गंगा संगम क्षेत्र, बेगूसराय एवं बख्तियारपुर सहित विभिन्न क्षेत्रों का हवाई निरीक्षण किया। इस दौरान मुख्यमंत्री ने गंगा नदी एवं इसकी सहायक नदियों के जलस्तर, दियारा एवं निचले इलाकों में उत्पन्न स्थिति तथा प्रभावित क्षेत्रों में राहत एवं बचाव कार्यों की स्थिति का जायजा लिया। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया कि बाढ़ की स्थिति पर लगातार नजर रखी जाए और संवेदनशील क्षेत्रों में प्रशासन पूरी तरह अलर्ट रहे। प्रभावित लोगों तक भोजन, पेयजल, राहत सामग्री एवं अन्य आवश्यक सुविधाएं समय पर पहुंचाना सुनिश्चित किया जाए।

    एयरपोर्ट पर उच्चस्तरीय बैठक
    हवाई सर्वेक्षण के बाद मुख्यमंत्री ने भागलपुर एयरपोर्ट पर उच्च अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक की। इस दौरान बाढ़ की स्थिति, जलस्तर, राहत एवं बचाव कार्यों तथा प्रभावित क्षेत्रों में प्रशासनिक तैयारियों की विस्तृत समीक्षा की। अधिकारियों ने मुख्यमंत्री को बताया कि तेजी से पानी का दवाब कम हो रहा है। बहुत जल्द स्थिति में सुधार होगा।

    बाढ़ प्रभावितों की सुरक्षा प्राथमिकता
    मुख्यमंत्री ने कहा कि बाढ़ प्रभावित लोगों की सुरक्षा राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। किसी भी आपात स्थिति में लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने के लिए सभी आवश्यक तैयारियां पूरी रखी जाएं तथा राहत एवं बचाव कार्यों में किसी प्रकार की कमी नहीं होनी चाहिए। उन्होंने जिला प्रशासन एवं संबंधित विभागों को आपसी समन्वय के साथ कार्य करने तथा जलस्तर एवं बाढ़ की स्थिति में होने वाले किसी भी बदलाव की लगातार निगरानी करने का निर्देश दिया।

    लगातार निगरानी करें अधिकारी
    मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को अविलंब मरम्मत कार्य कराने का निर्देश दिया। कहा कि जल संसाधन विभाग पूरी तरह मुस्तैद रहे। लगातार निगरानी करते रहे। बाढ़ प्रभावितों को पूरी सहायता उपलब्ध कराते रहें। राहत और बचाव कार्य पूरी मुस्तैदी से करें। हवाई सर्वेक्षण के दौरान उपमुख्यमंत्री विजय कुमार चौधरी भी थे। वहीं, बैठक में ऊर्जा मंत्री शैलेश कुमार उर्फ बुलो मंडल, मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव दीपक कुमार, मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत, पुलिस महानिदेशक, अभियान कुंदन कृष्णन, जल संसाधन विभाग के सचिव डॉ. चंद्रशेखर सिंह आदि उपस्थित थे।

  • प्रयागराज में बारिश बनी आफत! रेलवे ट्रैक डूबे, घरों में घुसा पानी, स्कूलों में रेनी-डे

    प्रयागराज में बारिश बनी आफत! रेलवे ट्रैक डूबे, घरों में घुसा पानी, स्कूलों में रेनी-डे

    प्रयागराज
    यूपी के प्रयागराज में लगातार बारिश से स्थिति बाढ़ जैसी हो गई है। रेलवे स्टेशन, गली-मोहल्ले, पॉश एरिया हर जगह लबालब पानी भरा है। कई घरों में बारिश से पानी घुस गया है। लगातार दूसरे दिन जलभराव की परेशानी झेल रहे लोगों नाराजगी है। वहीं, लगातार हो रही मूसलाधार वर्षा और जलभराव को देखते हुए जिले में बुधवार को सभी स्कूलों में रेनी-डे घोषित किया गया है।

    लगातार बारिश के कारण रामबाग रेलवे स्टेशन पर जलभराव की स्थिति मंगलवार को और गंभीर हो गई। ट्रैक पर पानी भरने के कारण प्लेटफॉर्म नंबर एक, दो, तीन और चार से ट्रेनों का संचालन ठप हो गया। स्थिति बिगड़ने पर दोपहर से बनारस की ओर जाने वाली पैसेंजर और मेमू ट्रेनों का संचालन रामबाग के बजाए झूंसी स्टेशन से कराया गया। इससे यात्रियों को काफी परेशानी हुई।

    रेलवे ट्रैक पानी से लबालब भरा
    लगातार बारिश के कारण रामबाग रेलवे स्टेशन पर जलभराव की स्थिति मंगलवार को और गंभीर हो गई। ट्रैक पर पानी भरने के कारण प्लेटफॉर्म नंबर एक, दो, तीन और चार से ट्रेनों का संचालन ठप हो गया। स्थिति बिगड़ने पर दोपहर से बनारस की ओर जाने वाली पैसेंजर और मेमू ट्रेनों का संचालन रामबाग के बजाए झूंसी स्टेशन से कराया गया। उधर, प्रयाग रेलवे स्टेशन परिसर में भी जलभराव की स्थिति बनी रही। प्लेटफॉर्म नंबर एक पर पानी जमा रहा, जबकि स्टेशन के बाहर भी कई स्थानों पर पानी भरा रहा। संगम स्टेशन के बाहर पार्किंग की ओर जाने वाले रास्ते पर भी जलभराव हो गया।

    जलभराव से लोगों को परेशानी
    बारिश से बेहाल शहर में दूसरे दिन हालात और दयनीय हो गई। कई इलाकों से पहले दिन का पानी निकल भी नहीं पाया था कि सोमवार रात हुई तेज बारिश ने मुसीबत को और विकराल कर दिया। देखते ही देखते सड़कें और गलियां फिर पानी में डूब गईं और कई घरों में दोबारा पानी घुस गया। लगातार दूसरे दिन जलभराव की परेशानी झेल रहे लोगों का गुस्सा अब चरम पर पहुंच गया।

    गली-मोहल्लों में भरा पानी
    सड़कें लगातार दूसरे दिन तालाब बनी रहीं और लोगों के लिए घर से बाहर निकलना तक मुश्किल हो गया। सीएमपी चौराहा, संगम पेट्रोल टंकी मार्ग, लिडिल रोड सीवाई चिंतामणि रोड, भारती भवन पुस्तकालय के अलावा बाई का बाग के बंगाली टोला में दूसरे दिन भी लोग घरों में कैद रहे। सड़कों और गलियों में आवागमन बंद था। दो दिन से जलभराव की मार झेल रहे लोगों ने कहा कि जलभराव पहले भी होता था, लेकिन इस बार जैसी स्थिति कभी नहीं हुई, जबकि बारिश पहले जैसी नहीं हुई।

    प्रयागराज में आज स्कूलों की छुट्टी
    लगातार हो रही मूसलाधार बारिश और जलभराव को देखते हुए जिले में बुधवार को सभी स्कूलों में रेनी-डे घोषित किया गया है। जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी अनिल कुमार की ओर से जारी आदेश के अनुसार, विद्यार्थियों और शिक्षकों की सुरक्षा को देखते हुए प्री-प्राइमरी से कक्षा 12 तक के सभी परिषदीय, माध्यमिक और मान्यता प्राप्त व सहायता प्राप्त विद्यालय बंद रहेंगे। इनमें अंग्रेजी और हिंदी माध्यम के विद्यालय भी शामिल हैं।

    बाढ़ के पानी में डूबा एसयूवी
    संगम नगरी प्रयागराज में गंगा और यमुना नदियों के बढ़ते जलस्तर के बीच मंगलवार को दारागंज स्थित गंगा रिवर फ्रंट का हिस्सा बाढ़ के पानी में डूब गया। इसी दौरान फाफामऊ से रिवर फ्रंट मार्ग होते हुए संगम की ओर जा रही एक कार गहरे पानी में समा गई। हालांकि कार में सवार सातों लोगों ने समय रहते बाहर निकलकर अपनी जान बचा ली।

  • मानसून का प्रहार: केरल बाढ़ से बेहाल, कर्नाटक में भूस्खलन ने छीनी जिंदगी

    मानसून का प्रहार: केरल बाढ़ से बेहाल, कर्नाटक में भूस्खलन ने छीनी जिंदगी

    नई दिल्ली
     दक्षिण भारत के राज्यों में भारी बारिश ने भारी तबाही मचाई है। केरलम में बारिश से जुड़ी घटनाओं में आठ लोगों की मौत हो गई है और हजारों लोगों को अपना घर छोड़ना पड़ा है। वहीं, पड़ोसी राज्य कर्नाटक के शिवमोगा में हुए भूस्खलन में एक ही परिवार के तीन लोगों की जान चली गई है।

    केरल में बारिश से 8 की मौत
    केरलम में बारिश से जुड़ी घटनाओं में अब तक 8 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 8 अन्य लापता हैं। इसके अलावा 13 लोग घायल हुए हैं। हालात को देखते हुए राज्यभर में 5,792 लोगों को सुरक्षित निकालते हुए 209 राहत शिविरों में भेजा गया है।

    आधिकारिक विज्ञप्ति के अनुसार, मुख्यमंत्री वीडी सतीशन राज्य में बारिश की स्थिति को लेकर विभिन्न जिलों के प्रभारी मंत्रियों और जिला प्रशासनों के लगातार संपर्क में हैं।

    पिछले दिन की तुलना में बारिश में थोड़ी कमी आई है, जिससे लोगों को आंशिक राहत मिली है। बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में सफाई और स्वच्छता अभियान शुरू कर दिया गया है। आपदा में 27 घर पूरी तरह नष्ट हो गए हैं, जबकि 196 घरों को आंशिक नुकसान पहुंचा है।

    सबरीमाला तीर्थयात्रियों के लिए चेतावनी
    राज्य सरकार ने आश्वासन दिया है कि जान गंवाने वालों के परिवारों के साथ-साथ बेघर हुए और अपनी फसलें व आजीविका खोने वाले लोगों को पर्याप्त वित्तीय सहायता प्रदान की जाएगी। घायलों को बेहतर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है।

    सरकार ने पहाड़ी क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को सतर्क रहने का निर्देश दिया है। इस बीच, त्रावणकोर देवासम बोर्ड ने 2 और 3 अगस्त को निरपुथरी के अवसर पर सबरीमाला जाने की योजना बना रहे श्रद्धालुओं को अपनी यात्रा पर पुनर्विचार करने की सलाह दी है। भारी बारिश, पंपा नदी में बाढ़ और भूस्खलन की आशंका को देखते हुए क्षेत्र में सुरक्षा अलर्ट जारी किया गया है।

    कर्नाटक में एक ही परिवार के 3 लोगों की मौत
    कर्नाटक के मलनाड क्षेत्र में हो रही लगातार बारिश के कारण शिवमोगा जिले के इंदिरा नगर इलाके में रविवार तड़के करीब 2:30 बजे भूस्खलन हुआ। इस हादसे में एक अस्थायी शेड मलबे में दब गया, जिससे उसमें रह रहे एक प्रवासी मजदूर परिवार के तीन सदस्यों की मौत हो गई।

    मृतकों की पहचान मल्लिकार्जुन (35), उनकी पत्नी नागवेणी (28) और उनके तीन वर्षीय बेटे के रूप में हुई है। यह परिवार कोप्पल जिले के गंगावती तालुक स्थित कोक्करेगारू गांव का रहने वाला था और पिछले दो वर्षों से इस शेड में रह रहा था।

    पुलिस और अग्निशमन व आपातकालीन सेवा विभाग ने मौके पर पहुंचकर रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया और तीनों शवों को मलबे से बाहर निकाला। पास के शेड में रहने वाला एक अन्य मजदूर इस घटना में गंभीर रूप से घायल हो गया है, जिसे तीर्थहल्ली के जयचामराजेंद्र अस्पताल में भर्ती कराया गया है।

    पुलिस ने मामला दर्ज कर हादसे की जांच शुरू कर दी है। इस घटना ने एक बार फिर मानसून के दौरान भूस्खलन संभावित क्षेत्रों में रहने वाले प्रवासी मजदूरों के जोखिम को उजागर कर दिया है।