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  • ब्लीचिंग पाउडर, चूने और एंटी लार्वा के छिड़काव से मच्छरजनित बीमारियों पर नियंत्रण की तैयारी

    ब्लीचिंग पाउडर, चूने और एंटी लार्वा के छिड़काव से मच्छरजनित बीमारियों पर नियंत्रण की तैयारी

    बाढ़ प्रभावित इलाकों में सफाई अभियान तेज, योगी सरकार का जलनिकासी और स्वास्थ्य सुरक्षा पर जोर

    बाढ़ का पानी उतरते ही एक्शन में लखनऊ नगर निगम, 70 एकड़ में ड्रोन से एंटी लार्वा का छिड़काव

    जीआईएस मैपिंग के आधार पर जोन-3 और जोन-6 में सेक्टरवार कार्ययोजना तैयार

    नालियों की सफाई, कीचड़ हटाने और जलनिकासी व्यवस्था सुधारने पर जोर

    ब्लीचिंग पाउडर, चूने और एंटी लार्वा के छिड़काव से मच्छरजनित बीमारियों पर नियंत्रण की तैयारी

    लखनऊ
    योगी सरकार बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में जनजीवन सामान्य बनाने और लोगों को संक्रामक व मच्छरजनित बीमारियों से बचाने के लिए राहत एवं स्वच्छता संबंधी कार्यों पर जोर दे रही है। इसी क्रम में लखनऊ नगर निगम ने बाढ़ का पानी उतरने के साथ ही प्रभावित इलाकों में सफाई, जलनिकासी और स्वास्थ्य सुरक्षा के कार्य तेज करने की तैयारी शुरू कर दी है। नगर आयुक्त गौरव कुमार ने जोन-3 के जोनल कार्यालय में अपर नगर आयुक्त अरुण कुमार गुप्त और संबंधित अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक कर अभियान को तत्काल गति देने के निर्देश दिए।

    बैठक में जोन-3 और जोन-6 के बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में जलस्तर कम होने के बाद किए जाने वाले कार्यों की समीक्षा की गई। नगर आयुक्त ने निर्देश दिए कि जिन इलाकों से पानी उतर चुका है, वहां मड पंप लगाकर डीसिल्टिंग और सफाई कराई जाए। ताकि ताकि प्रभावित गलियों और नालियों से जमा मिट्टी, कीचड़ और गंदगी को हटाया जा सके।

    जीआईएस मैपिंग से तैयार हुई सेक्टरवार कार्ययोजना

    बाढ़ प्रभावित इलाकों में सफाई अभियान को व्यवस्थित और प्रभावी बनाने के लिए नगर निगम ने जीआईएस मैपिंग के आधार पर कार्ययोजना तैयार की है। प्रभावित क्षेत्रों को अलग-अलग सेक्टरों में बांटकर प्रत्येक सेक्टर के लिए प्रभारी नियुक्त किए गए हैं। इंजीनियरिंग, स्वास्थ्य और जलकल विभाग के अधिकारियों एवं कर्मचारियों की तैनाती के साथ गलीवार सुपरवाइजरों की जिम्मेदारी भी तय की गई है। इससे विभिन्न विभागों के बीच समन्वय स्थापित करने और कार्यों की नियमित निगरानी में मदद मिलेगी।

    400 से 500 अतिरिक्त सफाई कर्मचारियों लगाए जा रहे

    बड़े पैमाने पर सफाई अभियान संचालित करने के लिए नगर निगम के अन्य जोनों से भी अतिरिक्त मानवबल बुलाया जाएगा। बैठक में एलएसए और एलएसजी से कर्मचारियों की तैनाती के निर्देश दिए गए। प्रारंभिक आकलन के अनुसार प्रभावित क्षेत्रों में सफाई कार्यों के लिए करीब 400 से 500 अतिरिक्त कर्मचारियों की आवश्यकता है। संबंधित एजेंसियों को आवश्यक मानवबल उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं। जलस्तर कम होने के अनुसार अलग-अलग क्षेत्रों में चरणबद्ध तरीके से अभियान चलाया जाएगा।

    70 एकड़ क्षेत्र में ड्रोन से एंटी लार्वा का छिड़काव

    जलभराव के बाद मच्छरों के प्रजनन और मच्छरजनित बीमारियों की आशंका को कम करने के लिए नगर निगम एंटी लार्वा का छिड़काव करा रहा है। जोन-3 और जोन-6 में कुल 70 एकड़ क्षेत्र में ड्रोन के माध्यम से दवा का छिड़काव किया गया है।

    जोन-3 के फैजुल्लागंज में 44 एकड़ क्षेत्र में ड्रोन से एंटी लार्वा का छिड़काव कराया गया। घैला रोड पर टैंकर से भी दवा का छिड़काव किया गया। दाउदनगर की 60 फीट रोड पर सोडियम हाइपोक्लोराइट और ब्लीचिंग का छिड़काव करने के साथ सफाई तथा झाड़ियों की कटाई कराई गई। गणेश बाग, सन्मंत विहार और मिल्लत नगर में भी ड्रोन से दवा का छिड़काव किया गया। मामा कॉलोनी और पुराने दाउदनगर में पानी उतरने के बाद सूख चुकी गलियों में ब्लीचिंग का छिड़काव, नालियों की सफाई और झाड़ियों की कटाई कराई गई।

    जोन-6 में भी स्वच्छता और जलनिकासी पर जोर

    जोन-6 के सैथा में 18 एकड़ और हयात नगर में 8 एकड़ क्षेत्र में ड्रोन से एंटी लार्वा का छिड़काव कराया गया। इस प्रकार जोन-6 में कुल 26 एकड़ क्षेत्र को कवर किया गया।
    हयात नगर, सैथा, टांड़खेड़ा और दौलतखेड़ा में जलभराव वाले क्षेत्रों तथा पानी के किनारे ब्लीचिंग पाउडर, चूने और एंटी लार्वा का छिड़काव किया गया। हरि नगर और मिश्री की बगिया में भी सफाई एवं स्वास्थ्य सुरक्षा संबंधी कार्य कराए गए। हयात नगर और दौलतखेड़ा में सड़क किनारे की नालियों की सफाई कर जलनिकासी व्यवस्था सुधारने पर जोर दिया गया।

    जलभराव के बाद स्वच्छता और स्वास्थ्य सुरक्षा पर विशेष ध्यान

    बाढ़ का पानी उतरने के बाद प्रभावित क्षेत्रों में जमा गंदगी, कीचड़ और मच्छरों के प्रजनन की आशंका को देखते हुए नगर निगम द्वारा सफाई एवं स्वास्थ्य सुरक्षा संबंधी कार्यों पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। एंटी लार्वा छिड़काव के साथ ब्लीचिंग पाउडर, चूने और सोडियम हाइपोक्लोराइट का प्रयोग किया जा रहा है। वहीं, नालियों की सफाई और झाड़ियों की कटाई के माध्यम से प्रभावित इलाकों को स्वच्छ बनाने के प्रयास किए जा रहे हैं। नगर निगम की टीमें प्रभावित क्षेत्रों में स्थिति के अनुसार कार्य कर रही हैं, ताकि बाढ़ के बाद स्वच्छता बनाए रखने और मच्छरजनित बीमारियों की आशंका कम करने में सहायता मिल सके।

  • नेपाल में प्राकृतिक आपदा से मची अफरा-तफरी, 40 घर तबाह और 6 पुल क्षतिग्रस्त; 150 से अधिक विदेशी पर्यटक फंसे

    नेपाल में प्राकृतिक आपदा से मची अफरा-तफरी, 40 घर तबाह और 6 पुल क्षतिग्रस्त; 150 से अधिक विदेशी पर्यटक फंसे

     काठमांडू
     नेपाल के मनासलू ट्रेकिंग क्षेत्र में रविवार तड़के बूढ़ी गंडकी नदी में आई विनाशकारी बाढ़ ने एक बार फिर तबाई मचाई हुई है। इस भयावह हादसे में करीब 40 घर, छह पुल और पनबिजली बुनियादी ढांचा बह गए, जबकि 10 लोग लापता बताए जा रहे हैं।

    वहीं ट्रेकिंग सीजन होने के चलते इस बाढ़ के कारण 150 से अधिक विदेशी पर्यटक रास्ते में फंस गए हैं। गनीमत यह रही कि समय रहते भेजे गए SMS अलर्ट के कारण कई स्थानीय लोग सुरक्षित ऊंचे इलाकों की ओर चले गए, जिससे बड़ा जान-माल का नुकसान होने से बच गया। फिलहाल राहत बचाव का कार्य युद्धस्तर पर जारी है।

    सेना और राहत एजेंसियों ने अब तक 49 लोगों को सुरक्षित निकाला है। अधिकारियों ने लोगों को सुरक्षित जगहों पर जाने का आदेश दिया और निचले इलाकों वाले जिलों को अलर्ट जारी किया।

    रविवार सुबह 4 बजे बुढ़ी गंडक नदी में अचानक आए मलबे से लदे तेज सैलाब ने भारी तबाही मचाई है। अचानक आई बाढ़ के बाद आसपास की धाराओं से तेज आवाजें सुनते ही चुमलिंग और लोकपा जैसी बस्तियों के लोग तथा वहां ठहरे पर्यटक अपनी जान बचाने के लिए सुरक्षित स्थानों की ओर भाग खड़े हुए।

    150 से अधिक विदेशी पर्यटक फंसे
    मनासलू ट्रेकिंग क्षेत्र में 150 से अधिक विदेशी पर्यटक फंसे हुए हैं। अधिकारियों को आशंका है कि भूस्खलन के कारण किसी सहायक नदी का प्रवाह अस्थायी रूप से बाधित हो गया था, जिससे भारी मात्रा में पानी और मलबा जमा हो गया।

    बाद में रुकावट हटने पर पानी तीव्र वेग से नीचे की ओर बहा। हालांकि, प्रशासन अभी तक बाढ़ के सटीक कारणों का पता नहीं लगा पाया है। इस आपदा में उंगिलुंग नदी के पास रहने वाले पांच लोग- जिनमें दो महिलाएं और तीन पुरुष शामिल हैं और करीब चार से पांच चरवाहे अभी भी लापता हैं।

    बाढ़ के प्रकोप से लगभग 40 घर और एक प्राथमिक विद्यालय पूरी तरह नष्ट हो चुके हैं, जबकि 20 से 22 अन्य मकानों पर भी ढहने का खतरा मंडरा रहा है। बाढ़ की वजह से छह पुल बह गए, जिससे दूर-दराज के ग्रामीण इलाकों का संपर्क पूरी तरह कट गया है।

    जलविद्युत परियोजना भी प्रभावित
    सल्लेरी में निर्माणाधीन 341 मेगावाट की बूढ़ी गंडकी जलविद्युत परियोजना के निर्माण शिविर और उपकरणों को भी बाढ़ के पानी ने पूरी तरह तबाह कर दिया है। अरुघाट में बूढ़ी गंडकी नदी का जलस्तर 5 मीटर के खतरे के निशान को पार कर 8.4 मीटर तक पहुंच गया, जिसके बहाव में मॉनिटरिंग स्टेशन बह गया और जलस्तर का सटीक आंकड़ा जुटाने में बाधा आ रही है।

    प्रशासन ने जारी की चेतावनी
    प्रशासन ने धाडिंग, तनाहुन, चितवन और पूर्वी व पश्चिमी नवलपरासी जिलों में लोगों को सुरक्षित स्थानों पर जाने की चेतावनी जारी की है। साथ ही त्रिशूली और नारायणी नदियों के तटीय इलाकों में रहने वाले निवासियों को नदी के किनारों से दूर रहने की सख्त सलाह दी गई है।

     

  • जांजगीर-चांपा में बाढ़ का खतरा, महानदी के उफान के बीच कलेक्टर-SP ने संभाला मोर्चा

    जांजगीर-चांपा में बाढ़ का खतरा, महानदी के उफान के बीच कलेक्टर-SP ने संभाला मोर्चा

    रायपुर.

    मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के निर्देशानुसार महानदी के बढ़ते जलस्तर और जांजगीर-चांपा जिले के तटीय क्षेत्रों में जलभराव की स्थिति को देखते हुए जिला प्रशासन पूरी तरह अलर्ट है। कलेक्टर जन्मेजय महोबे एवं पुलिस अधीक्षक विजय कुमार पांडेय ने शिवरीनारायण पहुंचकर बैराज, पुल और महानदी के तटीय क्षेत्रों का निरीक्षण किया।

    उन्होंने नदी के जलस्तर एवं बहाव की स्थिति के साथ सुरक्षा, राहत और बचाव की तैयारियों का जायजा लिया तथा संबंधित अधिकारियों को सतत निगरानी और आवश्यकतानुसार तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए।

    राज्य प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व
    कलेक्टर-एसपी ने शिवरीनारायण बैराज और पुल के साथ तटीय क्षेत्रों तथा महंत लालदास महाविद्यालय में बनाए गए राहत शिविर का निरीक्षण किया। राहत शिविर में प्रभावित लोगों के ठहरने के साथ भोजन, स्वच्छ पेयजल, प्रकाश, स्वच्छता और शौचालय सहित सभी आवश्यक सुविधाएं सुनिश्चित की गई हैं। अधिकारियों को प्रभावित नागरिकों की सुविधा और सुरक्षा का विशेष ध्यान रखने के निर्देश दिए गए हैं।

    महानदी पुल पर आवागमन बंद, सुरक्षा व्यवस्था बढ़ाई गई
    महानदी के पुल पर पानी का बहाव बढ़ने के कारण सुरक्षा की दृष्टि से आवागमन बंद कर दिया गया है। कलेक्टर-एसपी ने पुल और आसपास के क्षेत्रों में लगातार निगरानी रखने तथा लोगों को तेज बहाव वाले पानी के पास जाने से रोकने के निर्देश दिए हैं। नदी के जलस्तर एवं बहाव को देखते हुए अन्य संवेदनशील स्थानों पर भी आवश्यक सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित की जा रही है।

    प्रभावित क्षेत्रों में स्वास्थ्य टीमें सक्रिय, नियमित स्वास्थ्य जांच
    प्रभावित क्षेत्रों में स्वास्थ्य विभाग की टीमें तैनात हैं और नागरिकों की नियमित स्वास्थ्य जांच की जा रही है। आवश्यक दवाइयों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के साथ जलभराव के कारण होने वाली संभावित बीमारियों और संक्रमण से बचाव के लिए स्वास्थ्य एवं स्वच्छता संबंधी जरूरी उपाय किए जा रहे हैं।
    कलेक्टर-एसपी ने राजस्व, पुलिस, नगर सेना, जल संसाधन और स्वास्थ्य सहित संबंधित विभागों को आपसी समन्वय के साथ कार्य करने के निर्देश दिए हैं। तटीय एवं जलभराव संभावित क्षेत्रों में लगातार निगरानी रखी जा रही है। आवश्यकता पड़ने पर प्रभावित लोगों को तत्काल सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने और राहत-बचाव कार्य शुरू करने आवश्यक मानव संसाधन एवं अन्य संसाधनों को तैयार रखा गया है।

    तटीय क्षेत्रों में मुनादी, लोगों को सतर्क रहने की समझाइश
    मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के निर्देशानुसार प्रभावित एवं संवेदनशील क्षेत्रों में नागरिकों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है। तटीय और पूर्व में जलभराव से प्रभावित आबादी वाले क्षेत्रों में मुनादी के माध्यम से नागरिकों को संभावित जलभराव तथा सुरक्षा संबंधी सावधानियों की जानकारी दी जा रही है। नदी के जलस्तर, पुल-पुलियों और आवागमन वाले मार्गों पर लगातार नजर रखी जा रही है, ताकि स्थिति में बदलाव होने पर तत्काल आवश्यक कदम उठाए जा सकें। कलेक्टर-एसपी ने नागरिकों से नदी, पुल, घाट और तेज बहाव वाले क्षेत्रों में अनावश्यक रूप से नहीं जाने की अपील की है। उन्होंने कहा है कि तेज बहाव वाले पानी के पास सेल्फी या वीडियो बनाने का जोखिम न उठाएं तथा प्रशासन द्वारा सुरक्षा की दृष्टि से बंद किए गए मार्गों और स्थानों पर जाने का प्रयास न करें। किसी भी आपात स्थिति की सूचना तत्काल संबंधित अधिकारियों को दें, ताकि समय पर राहत एवं बचाव कार्य सुनिश्चित किया जा सके।

    जिला प्रशासन द्वारा महानदी के तटीय क्षेत्रों की स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के निर्देशानुसार प्रभावित नागरिकों की सुरक्षा, राहत और आवश्यक सुविधाओं को प्राथमिकता देते हुए सभी संबंधित विभाग समन्वय के साथ कार्य कर रहे हैं। राहत शिविर में सभी आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित की गई हैं। स्वास्थ्य विभाग की टीमें स्वास्थ्य जांच में जुटी हैं, वहीं पुलिस, राजस्व, नगर सेना और जल संसाधन विभाग के अधिकारी-कर्मचारी राहत एवं बचाव कार्यों के लिए पूरी तरह मुस्तैद हैं। निरीक्षण के दौरान नगर पालिका शिवरीनारायण के अध्यक्ष राहुल थवाईत, एसडीएम जांजगीर सुब्रत प्रधान, एसडीएम शिवरीनारायण सुभावना साहू, कार्यपालन अभियंता शशांक सिंह सहित संबंधित विभागों के अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित रहे।

  • राहत शिविरों में सेवा और समर्पण जारी, बाढ़ प्रभावितों की मदद में जुटा जिला प्रशासन

    राहत शिविरों में सेवा और समर्पण जारी, बाढ़ प्रभावितों की मदद में जुटा जिला प्रशासन

    बाढ़ आपदा के बीच जिला प्रशासन की तत्परता और टीमवर्क से सुरक्षित किया गया रेस्क्यू अभियान

    राहत शिविरों में सेवा एवं समपर्ण से किए जा रहे कार्य

        रायपुर
     धमतरी जिले में लगातार हो रही बारिश और जलभराव के बीच जिला प्रशासन द्वारा बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में राहत एवं बचाव कार्यों को प्राथमिकता के साथ संचालित किया जा रहा है। जिला प्रशासन, पुलिस, एसडीआरएफ और स्थानीय ग्रामीणों के समन्वित प्रयासों से संकट में फंसे लोगों को सुरक्षित निकालने का सिलसिला लगातार जारी है।
        कुरुद क्षेत्र के लोमश ऋषि आश्रम में बाढ़ के पानी के बीच फंसे 9 लोगों को पुलिस प्रशासन एवं स्थानीय ग्रामीणों की मदद से सुरक्षित बाहर निकाला गया। सूचना मिलते ही जिला प्रशासन एवं पुलिस की टीम ने तत्काल मौके पर पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया और स्थानीय लोगों के सहयोग से रेस्क्यू अभियान चलाकर सभी 9 लोगों को सुरक्षित स्थान तक पहुंचाया। जिला प्रशासन द्वारा बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में लगातार निगरानी रखी जा रही है। संवेदनशील स्थानों पर राहत दल, पुलिस एवं एसडीआरएफ की टीमें तैनात हैं।

    सलोनी राहत शिविर में बेहतर व्यवस्थाएं, राजस्व अमले ने सेवा और समर्पण से किया कार्य

        सलोनी स्थित बाढ़ राहत शिविर में साफ-सफाई, स्वच्छता एवं भोजन व्यवस्था संतोषजनक और व्यवस्थित रही। मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत श्री जयंत नाहटा बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का निरंतर जायजा ले रहे हैं। राहत शिविर में प्रभावित परिवारों के लिए सुबह नाश्ते के साथ नियमित रूप से भोजन उपलब्ध कराया जा रहा है। शिविर परिसर में स्वच्छता एवं हाईजीन का विशेष ध्यान रखा जा रहा है, ताकि प्रभावित परिवारों को सुरक्षित और स्वस्थ वातावरण मिल सके।

  • छत्तीसगढ़ में भारी बारिश-बाढ़ से हालात बिगड़े, 43 राहत शिविरों में 5 हजार लोग

    छत्तीसगढ़ में भारी बारिश-बाढ़ से हालात बिगड़े, 43 राहत शिविरों में 5 हजार लोग

    रायपुरबीजापुरजीपीएमदुर्ग
    छत्तीसगढ़ में तीन दिन बारिश तबाही लेकर आई. कई जिलों में बाढ़ जैसे हालात बन गए. शहरों में पुल पुलियों के ऊपर से पानी बहने लगा. दुर्ग रायपुर का संपर्क कट गया. गरियाबंद धमतरी के कई गांवों का संपर्क जिला मुख्यालय से कट गया. ग्रामीण क्षेत्रों में कई घर बाढ़ के पानी से भर गए, लोगों को सुरक्षित जगहों पर शरण लेनी पड़ी. शनिवार देर रात से बारिश की रफ्तार कुछ कम हुई. रविवार सुबह से बारिश थम गई, जिसके बाद अब हालात पटरी पर आने लगे हैं। 

    सुकमा दौरे पर सीएम विष्णुदेव साय
    सीएम विष्णुदेव साय आज बस्तर और सुकमा जिले दौरे पर पहुंच रहे हैं. सीएम बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का दौरा करेंगे और राहत शिविरों में जाएंगे. साय प्रभावित परिवारों के घरों तक जाकर पीड़ित परिवारों से मिलेंगे और उनकी बात कर उनकी परेशानी सुनेंगे. मुख्यमंत्री अधिकारियों से नुकसान का जायजा लेंगे। 

    रायपुर, दुर्ग, राजनांदगांव समेत 12 जिलों में 30 से 40 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से हवा चलने का अनुमान है। तापमान की बात करें तो दुर्ग 31.6 डिग्री के साथ प्रदेश में सबसे गर्म रहा। वहीं अंबिकापुर और पेंड्रारोड में न्यूनतम तापमान 19 डिग्री दर्ज किया गया।

    बारिश थमने के बाद अब नदी-नालों का पानी उतर गया है। रायपुर के महादेवघाट पुल से लोगों का आना-जाना शुरू हो गया है। अमलेश्वर जाने वाला यह रास्ता पिछले दो दिन से बंद था।

    महादेवघाट में गणेश विसर्जन के लिए केवल समितियों के सदस्यों को प्रवेश दिया जा रहा है। वहीं प्रदेश में उफनते नदी-नालों में अलग-अलग घटनाओं में कुल 12 लोग बह गए। इनमें 3 लोगों की मौत हो गई।

    इन्द्रावती नदी पार फंसे कर्मचारियों का रेस्क्यू
    बीजापुर जिले मे लगातार बारिश और बाढ़ के बीच इन्द्रावती नदी पार माड़ क्षेत्र में फंसे पटवारी एवं सर्वेयर सहित 6 कर्मचारियों को जिला प्रशासन की त्वरित कार्रवाई से एयरलिफ्ट कर सुरक्षित बीजापुर लाया गया. जिला मुख्यालय पहुंचने के बाद सभी कर्मचारियों का जिला अस्पताल में स्वास्थ्य परीक्षण कराया गया, जिसमें सभी की स्वास्थ्य स्थिति सामान्य पाई गई. बता दें कि गिरदावरी सर्वे कार्य के लिए पटवारी एवं सर्वेयर का 6 सदस्यीय दल बड़ेपल्ली और गुट्टामंगी क्षेत्र में गया था. इसी दौरान लगातार बारिश के कारण नदी-नालों में जलस्तर बढ़ गया और क्षेत्र में बाढ़ की स्थिति निर्मित होने से कर्मचारी वहीं फंस गए। 

    बीजापुर में बाढ़ में फंसे कर्मचारी एयरलिफ्ट
    कर्मचारियों के फंसे होने की जानकारी मिलते ही कलेक्टर विश्वदीप ने तत्काल रेस्क्यू की कार्रवाई के निर्देश दिए. प्रशासन ने बिना समय गंवाए एयरलिफ्ट की व्यवस्था कर सभी 6 कर्मचारियों को सुरक्षित जिला मुख्यालय पहुंचाया.जिला अस्पताल में कलेक्टर विश्वदीप की उपस्थिति में कर्मचारियों का स्वास्थ्य परीक्षण किया गया. कलेक्टर ने सभी कर्मचारियों से मुलाकात कर उनका कुशलक्षेम जाना और स्वास्थ्य संबंधी जानकारी ली. सुरक्षित लौटे कर्मचारियों के चेहरे पर राहत और अपनों से दोबारा मिलने की खुशी साफ दिखाई दी. कलेक्टर ने कठिन परिस्थितियों में अपने दायित्व का निर्वहन करने के लिए कर्मचारियों के कार्य की सराहना की। 

    कलेक्टर विश्वदीप ने कहा कि बाढ़ और आपदा की परिस्थितियों में जिला प्रशासन पूरी सजगता और तत्परता के साथ कार्य कर रहा है. प्रत्येक व्यक्ति की सुरक्षा प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है. राहत एवं बचाव दल लगातार परिस्थितियों पर नजर बनाए हुए हैं, ताकि किसी भी प्रकार की जनहानि को रोका जा सके और जरूरतमंदों तक समय पर सहायता पहुंचाई जा सके। 

    बीजापुर: सात दिनों से फंसे पटवारियों का हेलीकॉप्टर से रेस्क्यू
    बीजापुर में इंद्रावती नदी की बाढ़ के कारण सात दिनों से फंसे दो पटवारी सहित आधा दर्जन कर्मचारियों का रेस्क्यू सफल रहा। 27 सितंबर को नईदुनिया में प्रकाशित खबर का संज्ञान लेते हुए प्रशासन ने तत्परता दिखाई। कलेक्टर विश्वदीप की पहल पर रविवार शाम को हेलीकॉप्टर से इन सरकारी कर्मचारियों को सुरक्षित बाहर निकाला गया। बीजापुर हेलीपैड पर उतरते ही सभी को जिला अस्पताल के आपातकालीन कक्ष में भर्ती कराया गया।

    कर्मचारियों का दल एक सप्ताह पहले राजस्व सर्वे के कार्य से नाव से इंद्रावती नदी पार कर अंदरूनी गांवों में गया था। दल में दो पटवारी, दो चैनमेन और दो सर्वेयर शामिल थे। अचानक नदी का जलस्तर बढ़ने से वापसी का रास्ता बंद हो गया। कर्मचारियों के दो दल अलग-अलग स्थानों पर फंसे थे। SDM भैरमगढ़ विकास सर्वे ने बताया कि प्रशासन ने दो बार रेस्क्यू टीम को नदी तक भेजा, लेकिन तेज बहाव के कारण टीम लौट गई। कुछ कर्मचारियों के बीमार होने पर कलेक्टर ने वायुसेना से हेलीकॉप्टर की मांग की, जिसके बाद सभी को सुरक्षित लाया गया।

    रायगढ़: महानदी खतरे के निशान से 1.25 मीटर ऊपर, गांवों में घुसा पानी
    रायगढ़ में लगातार बारिश के चलते महानदी का जलस्तर बढ़ने से रायगढ़ और आसपास के तटीय इलाकों में बाढ़ का खतरा बढ़ गया है। पुसौर क्षेत्र के कई गांवों के साथ ही सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले के सरिया तहसील के रानीडीह-पोरथ मार्ग, कोर्रा और आसपास के गांवों में पानी घुस गया है। खेत, गलियां और सड़कें जलमग्न होने से ग्रामीणों की आवाजाही प्रभावित होने लगी है।

    महानदी में बढ़ते जलप्रवाह का असर कलमा बैराज में भी साफ दिखाई दे रहा है। 27 सितंबर की सुबह 11 बजे बैराज का जलस्तर 199.35 मीटर दर्ज किया गया, जो निर्धारित खतरे के स्तर 198.50 मीटर से 0.85 मीटर अधिक है। बैराज का पूर्ण जलस्तर 197 मीटर बताया गया है। शाम तक मिली रिपोर्ट के अनुसार जलस्तर खतरे के निशान से करीब सवा मीटर ऊपर पहुंच गया था। टाटी क्षेत्र के खेतों में पानी भर गया है और कल्याण गांव की गलियों से लेकर मुख्य सड़कों तक पानी पहुंच गया है।

    अंबिकापुर: कनहर नदी में 14 घंटे तक फंसे रहे तीन ग्रामीण
    अंबिकापुर में बलरामपुर विकासखंड के कोटपाली-खजुरी में कनहर नदी के तेज बहाव के बीच तीन ग्रामीण करीब 14 घंटे तक फंसे रहे। जिला प्रशासन, नगर सेना के गोताखोरों और स्थानीय ग्रामीणों की संयुक्त टीम ने रात करीब 12 बजे नाव के सहारे तीनों को सुरक्षित बाहर निकाला। रेस्क्यू के बाद उन्हें प्राथमिक उपचार दिया गया। तीनों की हालत सामान्य है।

    रेस्क्यू किए गए ग्रामीणों में ग्राम कोठली निवासी सरजू राम (45), उनकी पत्नी राजकुमारी (40) और ग्राम जाबगड़ी निवासी फूलमनिया (30) शामिल हैं। तीनों शुक्रवार को रिश्तेदार के यहां मेहमानी के लिए कोटपाली आए थे। शनिवार सुबह करीब 10 बजे वे अपने गांव लौटने के लिए कनहर नदी पार कर रहे थे। जलस्तर कम होने के कारण वे पैदल नदी पार करने लगे, लेकिन बीच धार में पहुंचते ही पहाड़ी क्षेत्र में हुई बारिश से जलस्तर तेजी से बढ़ गया। दोपहर बाद ग्रामीणों ने उन्हें देखा और प्रशासन को सूचना दी। तेज बहाव और अंधेरे के कारण शुरुआती दो प्रयास विफल रहे।

    बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों के दौरे पर निकले रायपुर कलेक्टर
    बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में राहत और बचाव कार्यों का जायजा लेने रायपुर कलेक्टर गौरव सिंह ने रविवार को विभिन्न इलाकों और राहत शिविरों का निरीक्षण किया. उन्होंने अधिकारियों को प्रभावित परिवारों को तत्काल आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराने और राहत कार्यों में किसी भी तरह की लापरवाही नहीं बरतने के निर्देश दिए। 

    श्रीलंका नगर बस्ती में हालात का लिया जायजा
    कलेक्टर ने नगर निगम आयुक्त संबित मिश्रा और जिला पंचायत सीईओ कुमार बिश्वरंजन सहित अधिकारियों के साथ श्रीलंका नगर बस्ती पहुंचकर बाढ़ की स्थिति का जायजा लिया. इस दौरान उन्होंने प्रभावित परिवारों से बातचीत कर उनकी समस्याएं और जरूरतें जानीं. कलेक्टर ने अधिकारियों को प्रभावित लोगों को हरसंभव सहायता उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। 
    कलेक्टर ने पूर्व माध्यमिक शाला चांदनीडीह और शासकीय प्राथमिक शाला घनश्याम नगर डिपरापारा में बनाए गए राहत शिविरों का भी निरीक्षण किया. उन्होंने शिविरों में ठहरे लोगों से बातकर भोजन, स्वास्थ्य सुविधाओं और अन्य आवश्यकताओं की जानकारी ली. प्रभावित परिवारों की राहत और पुनर्वास के लिए कार्ययोजना तैयार कर त्वरित कार्रवाई करने के निर्देश भी अधिकारियों को दिए। 

    राशन, दवाइयों और कपड़ों की पर्याप्त व्यवस्था के निर्देश
    कलेक्टर डॉ. सिंह ने कहा कि बाढ़ प्रभावित किसी भी नागरिक को परेशानी नहीं होनी चाहिए. राहत शिविरों में भोजन और राशन के साथ आवश्यक दवाइयों और कपड़ों की पर्याप्त व्यवस्था सुनिश्चित की जाए. उन्होंने संबंधित अधिकारियों को प्रभावित क्षेत्रों में हुए नुकसान का आकलन करने के निर्देश दिए. कलेक्टर ने कहा कि पात्र प्रभावित परिवारों को नियमानुसार क्षतिपूर्ति राशि प्रदान की जाएगी। 

    प्रभावितों को दिए जा रहे भोजन की गुणवत्ता भी जांची
    निरीक्षण के दौरान कलेक्टर गौरव सिंह, नगर निगम आयुक्त संबित मिश्रा, जिला पंचायत सीईओ कुमार बिश्वरंजन और डीसीपी पश्चिम रॉबिंसन गुड़िया ने राहत शिविर में प्रभावित लोगों को वितरित किए जा रहे भोजन को स्वयं खाकर उसकी गुणवत्ता की जांच की. कलेक्टर ने भोजन की गुणवत्ता और स्वच्छता का विशेष ध्यान रखने के साथ प्रभावितों को नियमित रूप से भोजन उपलब्ध कराने के निर्देश दिए.निरीक्षण के दौरान एसडीएम नंदकुमार चौबे सहित संबंधित विभागों के अधिकारी-कर्मचारी मौजूद रहे। 

    गौरेला पेंड्रा मरवाही में बरसाती झरने 
    बारिश के बाद ठाड़पथरा स्थित माई की मड़वा का झरना भी पूरे वेग से बह रहा है. यहां नदी में पानी का बहाव काफी तेज है. इसके बावजूद कुछ लोग जान जोखिम में डालकर रस्सी के सहारे नदी पार करते दिखाई दिए. तेज बहाव के बीच इस तरह नदी पार करना हादसे को न्योता दे सकता है.दुर्गाधारा जलप्रपात में भी बारिश के बाद पानी का प्रवाह बढ़ गया है. पहाड़ी से तेज गति से गिरते पानी का नजारा देखने बड़ी संख्या में लोग पहुंच रहे हैं. जलप्रपात के आसपास हरियाली और बारिश के बाद बदला प्राकृतिक वातावरण लोगों को आकर्षित कर रहा है. मरकंटक मार्ग पर कई अन्य स्थानों पर भी बरसाती झरने सक्रिय हो गए हैं, जहां सड़क से गुजरने वाले लोग अपने वाहनों को रोककर प्राकृतिक नजारों का आनंद ले रहे हैं. पर्यटक इन झरनों के साथ तस्वीरें और वीडियो बनाकर यादगार पलों को मोबाइल कैमरे में कैद कर रहे हैं। 

    बीजापुर के दुर्गम क्षेत्र में तैनात केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) के जवानों ने बारिश के बीच मानवीय संवेदनशीलता और कर्तव्यनिष्ठा का परिचय दिया. ग्राम अंड्री, थाना गंगालूर क्षेत्र की चार वर्षीय बालिका के घायल होने की सूचना मिलने पर सीआरपीएफ जवानों ने तत्काल सक्रियता दिखाते हुए उसे समय पर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने में अहम भूमिका निभाई। 

    26 सितंबर 2026 को ग्राम अंड्री की चार वर्षीय बालिका खेलते समय घायल हो गई थी. चोट के कारण बालिका को तत्काल उपचार की आवश्यकता थी. लेकिन बारिश के कारण नदी नाले उफान पर है. ऐसे समय में 199 बटालियन सीआरपीएफ के कमांडेंट आनंद कुमार एवं 85 बटालियन सीआरपीएफ के कमांडेंट सुनील कुमार राही के निर्देशन में जवानों ने बालिका को बाइक एंबुलेंस के माध्यम से 85 बटालियन सीआरपीएफ के मुतवंडी कैंप तक पहुंचाया. मुतवंडी कैंप से 85 बटालियन की एंबुलेंस के माध्यम से घायल बालिका को जिला अस्पताल बीजापुर लाया गया, जहां उसे भर्ती कर उपचार शुरू किया गया. समय पर चिकित्सा सहायता और सीआरपीएफ जवानों के समन्वित प्रयासों के चलते बालिका का इलाज हो सका. बच्ची की स्थिति अब सामान्य बताई जा रही है। 

  • बिहार में नदियों का जलस्तर अब भी उफान पर, कई इलाकों में बाढ़ का खतरा नहीं टला

    बिहार में नदियों का जलस्तर अब भी उफान पर, कई इलाकों में बाढ़ का खतरा नहीं टला

    पटना
    बिहार में गंगा समेत कई प्रमुख नदियों का जलस्तर सोमवार सुबह तक खतरे के निशान से ऊपर बना हुआ है, हालांकि गंगा के अधिकांश घाटों और जलमापक केंद्रों पर पानी में कमी दर्ज की गयी है, जबकि पुनपुन और बागमती में बढ़त ने निचले इलाकों की चिंता बढ़ा दी है। जाहिर है ऐसे में अभी बिहार में बाढ़ का खतरा टला नहीं है। जल संसाधन विभाग के आज सुबह छह बजे के जारी आंकड़ों के अनुसार गंगा पटना के दीघा में 50.81 मीटर, गांधी घाट पर 49.61 मीटर, हथिदह में 42.82 मीटर, मुंगेर में 39.38 मीटर, भागलपुर में 34.18 मीटर और कहलगांव में 32.49 मीटर पर बह रही है और इन सभी स्थानों पर जलस्तर खतरे के निशान से ऊपर है।

    एहतियात की बात है कि गंगा के जलस्तर में कमी का रुख इन प्रमुख केंद्रों पर बना हुआ है। पटना के दीघा में नदी खतरे के निशान 50.45 मीटर से 0.36 मीटर ऊपर है, जबकि गांधी घाट पर 48.60 मीटर के खतरे के निशान से 1.01 मीटर, हथिदह में 41.76 मीटर से 1.06 मीटर, मुंगेर में 39.33 मीटर से 0.05 मीटर, भागलपुर में 33.68 मीटर से 0.50 मीटर और कहलगांव में 31.09 मीटर से 1.40 मीटर ऊपर है। फरक्का में भी गंगा 23.80 मीटर पर खतरे के निशान 22.25 मीटर से 1.55 मीटर ऊपर है।

    पटना शहर और आसपास के घाटों की स्थिति भी अभी सामान्य नहीं हुई है। बाढ़ प्रबंधन सुधार सहायता केंद्र के छह बजे के आंकड़ों में गांधीघाट पर गंगा 49.61 मीटर, दीघाघाट पर 50.81 मीटर, बांकाघाट पर 48.59 मीटर और पंडारक में 43.08 मीटर दर्ज की गयी। इनमें गांधीघाट, दीघाघाट और बांकाघाट समेत कई केंद्रों पर पानी खतरे के निशान से ऊपर है। हथिदह में जलस्तर 42.82 मीटर, मुंगेर में 39.38 मीटर, सुल्तानगंज में 36.21 मीटर, भागलपुर में 34.18 मीटर, कहलगांव में 32.49 मीटर और साहेबगंज में 28.63 मीटर दर्ज किया गया।

    गंगा के बक्सर केंद्र पर जलस्तर 59.42 मीटर रहा, जो खतरे के निशान 60.32 मीटर से 0.90 मीटर नीचे है, हालांकि यह चेतावनी स्तर से ऊपर है। वाराणसी में जलस्तर 68.47 मीटर और प्रयागराज में 80.01 मीटर दर्ज किया गया, जहां जलस्तर खतरे के निशान से नीचे है। विभागीय आंकड़ों में गंगा के इन दोनों ऊपरी केंद्रों पर पानी घटने का रुख है जो आने वाले दिनों के लिए बेहतर संकेत है।

    उधर, अन्य नदियों में स्थिति मिश्रित बनी हुई है। कोसी बलतारा में 35.01 मीटर और कुरसेला में 31.32 मीटर पर है तथा दोनों स्थानों पर नदी खतरे के निशान से क्रमश: 1.16 और 1.32 मीटर ऊपर है। बूढ़ी गंडक खगड़िया में 37.96 मीटर पर खतरे के निशान से 1.38 मीटर ऊपर है। घाघरा दरौली में 61.30 मीटर पर है, जो खतरे के निशान से 0.48 मीटर ऊपर है।

    पुनपुन और बागमती की स्थिति विशेष रूप से निगरानी वाली बनी हुई है। पुनपुन श्रीपालपुर में 51.94 मीटर पर बह रही है और खतरे के निशान 50.60 मीटर से 1.34 मीटर ऊपर है। यहां जलस्तर बढ़ने का रुख दर्ज किया गया है। बागमती बेनीबाद में 49.20 मीटर पर है, जो खतरे के निशान 48.68 मीटर से 0.52 मीटर ऊपर है और इसमें भी बढ़त दर्ज की गयी है। इसके विपरीत कोसी, बूढ़ी गंडक और गंगा के अधिकांश केंद्रों पर जलस्तर घट रहा है।

    बराजों से पानी छोड़े जाने की स्थिति भी महत्वपूर्ण है। कोसी नदी के वीरपुर बराज से सोमवार सुबह आठ बजे 1,55,710 क्यूसेक पानी डाउनस्ट्रीम छोड़ा जा रहा था और इसमें बढ़ोतरी का रुख दर्ज किया गया। गंडक नदी के वाल्मीकिनगर बराज से 86,000 क्यूसेक पानी छोड़ा जा रहा था और प्रवाह स्थिर रहा। सोन नदी के इंद्रपुरी बराज से 52,097 क्यूसेक पानी छोड़ा गया, जिसमें कमी का रुख दर्ज किया गया।

  • बाढ़ पीड़ितों को एक्सपायर्ड सीरप बांटने का आरोप तथ्यहीन

    बाढ़ पीड़ितों को एक्सपायर्ड सीरप बांटने का आरोप तथ्यहीन

    बाढ़ पीड़ितों को एक्सपायर्ड सीरप बांटने का आरोप तथ्यहीन

    सीएमओ कानपुर नगर इन्द्रदेव सिंह ने जांच के बाद किया खबर का खंडन

    02 सितंबर के बाढ़ राहत कैंप में नहीं बांटा गया ट्राइमेथोप्रिम एंड सल्फामेथॉक्साज़ोल आईपी सीरप

    कानपुर

    बाढ़ पीड़ितों को एक्सपायर्ड सीरप बांटे जाने के आरोपों को कानपुर नगर के मुख्य चिकित्सा अधिकारी इन्द्रदेव सिंह ने तथ्यहीन बताया है। जांच के बाद सीएमओ ने स्पष्ट किया कि 02 सितंबर को आयोजित बाढ़ राहत कैम्प में ट्राइमेथोप्रिम एंड सल्फामेथॉक्साज़ोल आईपी सीरप का वितरण नहीं किया गया था। उन्होंने संबंधित खबर का खंडन करते हुए विभागीय रिकॉर्ड और दवा के स्टॉक की स्थिति को आरोपों के विपरीत बताया।

    रिकॉर्ड के मुताबिक उक्त सीरप वर्ष 2025 में ड्रग वेयरहाउस कानपुर नगर में प्राप्त हुआ था। इसके बाद मार्च 2025 तक सभी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में सीरप वितरित किया जा चुका था। वर्तमान में किसी भी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र या प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पर उक्त बैच की दवा उपलब्ध नहीं है। जांच के दौरान बाढ़ राहत के लिए बनाए गए स्टॉक रजिस्टर को भी देखा गया। रजिस्टर में ट्राइमेथोप्रिम एंड सल्फामेथॉक्साज़ोल आईपी सीरप की एक भी प्रविष्टि नहीं मिली। ऐसे में 02 सितंबर को बाढ़ कैंप में उक्त सीरप बांटे जाने की बात विभागीय रिकॉर्ड से पुष्ट नहीं होती है।

    मुख्य चिकित्सा अधिकारी इन्द्रदेव सिंह ने जांच के आधार पर कहा कि बाढ़ कैंप में उक्त सीरप का वितरण नहीं हुआ था और एक्सपायर्ड दवा बांटे जाने के आरोप तथ्यहीन हैं। उन्होंने संबंधित खबर का खंडन किया है। विभागीय रिकॉर्ड में दवा के वर्ष 2025 में प्राप्त होने और मार्च 2025 तक स्वास्थ्य केंद्रों को वितरित किए जाने का उल्लेख है।

  • गंगा-गंडक-कोसी समेत कई नदियां उफान पर, बिहार के 13 जिलों में बढ़ा बाढ़ का संकट

    गंगा-गंडक-कोसी समेत कई नदियां उफान पर, बिहार के 13 जिलों में बढ़ा बाढ़ का संकट

    पटना
     बिहार में बाढ़ का दायरा लगातार बढ़ता जा रहा है। अब तक 13 जिलों की 34 लाख से अधिक आबादी बाढ़ और कटाव से प्रभावित हुई है। भागलपुर जिले के सुल्तानगंज में मंगलवार को गंगा नदी ने फ्लड मार्क को क्रॉस कर दिया। इससे निचले इलाकों में अलर्ट जारी किया गया है। गंडक, कोसी, बूढ़ी गंडक, गंगा, पुनपुन, बागमती और घाघरा सहित कई नदियां कई स्थानों पर खतरे के स्तर से ऊपर बह रही हैं।

    बिहार में बाढ़ से पटना, भागलपुर, वैशाली, सारण, बेगूसराय, खगड़िया और मुंगेर समेत 13 जिले प्रभावित हैं। इन जिलों की 480 ग्राम पंचायतों में रहने वाले लगभग 34.31 लाख लोग प्रभावित हैं। सोमवार को यह आंकड़ा 29 लाख था। मंगलवार को नए इलाकों में बाढ़ का पानी फैल गया, जिससे चिंता बढ़ गई है।

    हाजीपुर में नाव पलटी, दो लोग लापता
    हाजीपुर के तेरसिया में बाढ़ के पानी में महात्मा गांधी सेतु के नीचे पाया नंबर 9 के पास मंगलवार को नाव पलट गई। नाव में कुल 11 लोग सवार थे। गंगा ब्रिज के पास यह हादसा हुआ। नाव सवार 9 लोगों को सुरक्षित बचा लिया गया। हालांकि, दो लोगों के डूबने की सूचना है। एसडीआरएफ की टीम उनकी तलाश कर रही है। वहीं, दूसरी ओर नाव पलटने के बाद बचाए गए एक व्यक्ति को सांप ने काट लिया।
    हाजीपुर में नाव पलटने के बाद लापता लोगों की तलाश करती एसडीआरएफ टीम

    नदियां उफान पर
    डुमरियाघाट और हाजीपुर में गंडक नदी, बलतारा और कुर्सेला में कोसी, खगड़िया में बूढ़ी गंडक, दीघा, गांधी घाट, हाथीदह, भागलपुर, कहलगांव और मुंगेर में गंगा का जलस्तर खतरे के निशान से ऊपर है।

    भागलपुर में भी नाव पलटी
    भागलपुर जिले के खरीक राघोपुर के बाढ़ प्रभावित इलाके में मंगलवार सुबह एक छोटी नाव पलट गई। प्रशासन के अनुसार एसडीआरएफ के जवानों ने नाव पर सवार सभी 10 लोगों को बचा लिया।

    बाढ़ में राहत कार्य
    सरकार के अनुसार, बाढ़ प्रभावित लोगों के लिए विभिन्न जिलों में कुल 432 सामुदायिक रसोई संचालित की जा रही हैं। इसके अलावा, 14 राहत शिविर भी चलाए जा रहे हैं, जहां आवास, भोजन, चिकित्सा देखभाल और अन्य आवश्यक सेवाओं की व्यवस्था की गई है। बाढ़ पीड़ितों को अब तक लगभग 1.29 लाख पॉलिथीन शीट और 22900 सूखे राशन के पैकेट बांटे जा चुके हैं।

    आपदा प्रबंधन विभाग ने कहा कि बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में 3142 क्विंटल पशु चारा भी वितरित किया जा चुका है। जलजमाव वाली जगहों पर आवागमन के लिए 1832 नावें चलाई जा रही है। बाढ़ को देखते हुए बिहार के विभिन्न जिलों में बचाव एवं राहत कार्य के लिए एसडीआरएफ की 27 और एनडीआरएफ की 10 टीमें तैनात की गई हैं।

    गंडक और कोसी बराज से डिस्चार्ज
    गंडक बराज पर मंगलवार सुबह 10 बजे 104400 क्यूसेक पानी का डिस्चार्ज दर्ज किया गया, जिसकी प्रवृत्ति स्थिर बनी हुई है। इस साल अब तक का सबसे अधिक डिस्चार्ज 14 जुलाई को 224000 क्यूसेक दर्ज किया गया था।

    दूसरी ओर, कोसी बराज पर सुबह 10 बजे डिस्चार्ज गिरावट के क्रम में 169985 क्यूसेक था। इस साल अब तक इसका सर्वाधिक डिस्चार्ज 20 जुलाई को 255425 क्यूसेक रहा था।

    लालू यादव ने बाढ़ पर एनडीए सरकार को घेरा
    विपक्षी दल आरजेडी के सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव ने बिहार की बाढ़ को लेकर एनडीए सरकार पर तीखा हमला बोला है। सोशल मीडिया फेसबुक पर संसद का पुराना वीडियो साझा करते हुए उन्होंने कहा हमने बिहार में राहत कार्य के लिए हमने यूपीए सरकार से लड़ाई लड़ी थी।

    उन्होंने कहा कि एनडीए सरकार के दौरान बिहार के मंत्रियों ने राज्य को कुछ नहीं दिलाया। बस राज्य की हमारी सरकार बदनाम करने या काम किया। उन्होंने कहा कि आज जब बाढ़ के दौरान बिहार का खजाना खाली है तो हमें सड़क से संसद तक का अपना संघर्ष याद आ रहा है।

  • बिहार में बाढ़ का कहर, पटना हाई अलर्ट पर; 13 प्रभारी मंत्री करेंगे राहत कार्यों की निगरानी

    बिहार में बाढ़ का कहर, पटना हाई अलर्ट पर; 13 प्रभारी मंत्री करेंगे राहत कार्यों की निगरानी

    पटना
    बिहार में भारी बारिश और प्रमुख नदियों में उफान के बाद बाढ़ से हालात बिगड़ते जा रहे हैं। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने 13 मंत्रियों को अपने प्रभार वाले जिलों में बाढ़ की निगरानी का काम सौंपा है। उनके साथ प्रभारी सचिवों की भी ड्यूटी लगाई गई है। बक्सर से पटना, समस्तीपुर और भागलपुर तक कई इलाके जलमग्न हैं। पटना में बाढ़ के चलते अधिकारियों को हाई अलर्ट पर रहने का निर्देश दिया गया है। सीएम सम्राट लगातार दूसरे दिन बाढ़ प्रभावित इलाके के हवाई सर्वे पर निकले हैं। शनिवार को वह भागलपुर में बाढ़ से राहत एवं बचाव कार्य का जायजा ले रहे हैं।

    बिहार सरकार की ओर से गंगा किनारे स्थित जिलों में राहत और बचाव कार्यों की सघन निगरानी का काम प्रभारी मंत्रियों और सचिवों को सौंपा है। जिन 13 जिलों के लिए निर्देश जारी हुए हैं, उनमें बक्सर, भोजपुर, पटना, सारण, वैशाली, बेगूसराय, समस्तीपुर, लखीसराय, खगड़िया, मुंगेर, भागलपुर और कटिहार शामिल हैं। मुख्यमंत्री के निर्देशानुसार, प्रभारी मंत्री और प्रभारी सचिव संबंधित जिले में बाढ़ प्रभावित इलाकों का दौरा करेंगे और जमीन पर राहत एवं बचाव कार्य की निगरानी करेंगे।

    पटना में बाढ़ से हाई अलर्ट
    सीएम सम्राट ने पटना के शहरी क्षेत्र में गंगा के बढ़ते जलस्तर की विशेष निगरानी के आदेश दिए हैं। पटना में तटबंध और आसपास के क्षेत्र पर खास ध्यान दिया जाएगा। पटना नगर निगम, जिला प्रशासन और जल संसाधन विभाग को हाई अलर्ट पर रहने को कहा गया है।

    गंगा नदी का जलस्तर
    पटना में गांधी घाट के पास गंगा नदी खतरे के निशान ऊपर बह रही है। शनिवार सुबह 10 बजे गांधी घाट गेज साइट पर जलस्तर 50.53 मीटर दर्ज किया गया, जो 48.60 मीटर के खतरे के निशान से लगभग 1.93 मीटर ऊपर है। नदी अपने उच्चतम बाढ़ स्तर (HFL) 50.52 मीटर के करीब बह रही है। अधिकारियों ने जलस्तर में और बढ़ोतरी होने की चेतावनी दी है।

    बिहार बाढ़ की स्थिति
    बिहार में बाढ़ की वर्तमान स्थिति की जानकारी डिप्टी सीएम विजय कुमार चौधरी ने ली। वह शनिवार को फिर पटना में सिंचाई भवन स्थित जल संसाधन विभाग के कंट्रोल कमांड सेंटर पहुंचे। उन्होंने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से पूरे राज्य के विभिन्न संवेदनशील स्थलों का जायजा लिया। अधिकारियों को तटबंधों पर सतत निगरानी के निर्देश दिए।

    बिहार बाढ़ से 10 लाख आबादी प्रभावित- सरकार
    आपदा प्रबंधन विभाग ने शनिवार को कहा कि बिहार के 11 जिलों के 50 प्रखंडों की 201 पंचायतों में 10.28 लाख की आबादी बाढ़ से प्रभावित हुई है। यहां राहत एवं बचाव कार्य जारी है।

    इन जिलों में बाढ़ की निगरानी करेंगे प्रभारी मंत्री-
        बक्सर – नंद किशोर राम
        भोजपुर – अरुण शंकर प्रसाद
        पटना – विजय चौधरी
        सारण – बिजेंद्र प्रसाद यादव
        वैशाली – निशांत कुमार
        बेगूसराय – रामकृपाल यादव
        समस्तीपुर – दामोदर रावत
        लखीसराय – सुनील कुमार
        खगड़िया – मदन सहनी
        मुंगेर – संजय पासवान
        भागलपुर – नीतीश मिश्रा
        कटिहार – प्रमोद चंद्रवंशी

  • चित्रकूट में बाढ़ से भारी नुकसान, 709 घरों की बिजली बहाल; 566 कनेक्शन पर काम जारी

    चित्रकूट में बाढ़ से भारी नुकसान, 709 घरों की बिजली बहाल; 566 कनेक्शन पर काम जारी

    चित्रकूट 

    सतना के चित्रकूट में मंदाकिनी नदी के पांच दिन में तीन बार उफान पर आने के बाद अब बाढ़ का पानी उतर चुका है, लेकिन पीछे तबाही छोड़ गया है। गलियों, दुकानों और घरों में मिट्टी और कीचड़ जमा है। कई परिवारों की गृहस्थी बर्बाद हो गई। 

    पानी इतनी तेजी से आया, घर और दुकान दोनों नहीं बचा पाई
    आरोग्यधाम में जनरल स्टोर और कपड़ों की दुकान चलाने वाली ममता शर्मा ने बताया कि बाढ़ का पानी इतनी तेजी से बढ़ा कि जरूरी सामान दूसरी मंजिल तक पहुंचाने का समय नहीं मिला। घर और दुकान में रखा सामान पानी और कीचड़ की चपेट में आकर खराब हो गया।

    पुरानी लंका तिराहे पर फुटवियर दुकान चलाने वाले जितेंद्र ने गुरुवार को शटर खोला तो अंदर टूटा काउंटर, बिखरी अलमारी और कीचड़ में सने जूते-चप्पल मिले। उनके मुताबिक करीब 3 लाख रुपए का सामान बर्बाद हुआ है।

    खाना मिल रहा, लेकिन सफाई के लिए पानी नहीं
    बाढ़ प्रभावित लोगों तक प्रशासन, मठ-मंदिरों और स्वयंसेवी संस्थाओं की ओर से भोजन-पानी पहुंचाया जा रहा है। लोगों को राहत व्यवस्था से शिकायत नहीं है, लेकिन अब सबसे बड़ी जरूरत सफाई के पानी की है।

    एमपीटी चौराहे पर चाय-नाश्ते का होटल चलाने वाली पूनम ने बताया कि बाढ़ में काफी सामान बह गया। जो सामान बचा है और होटल में जमा गंदगी, उसे साफ करने के लिए पानी उपलब्ध नहीं है।

    समाजसेवी रामशिरोमणि शर्मा ने बताया कि घरों और होटलों में कीचड़ भरा है। नदी से पानी लाकर सफाई करना संभव नहीं है और नगर परिषद के कर्मचारी भी कई जगह नहीं पहुंच पाए हैं। ऐसे में प्रभावित परिवारों के सामने सफाई की बड़ी चुनौती बनी हुई है।

    मुख्य सड़क साफ, अब गलियों में युद्ध स्तर पर सफाई
    गुरुवार को चित्रकूट की स्थिति में कुछ सुधार नजर आया। बाढ़ के दौरान बंद पड़ी मुख्य सड़क पर वाहनों की आवाजाही शुरू हो गई। सड़क पर जमा कचरा और कीचड़ भी काफी हद तक हटाया जा चुका है।

    जिला प्रशासन का बड़ा अमला पिछले पांच दिनों से चित्रकूट में मौजूद है। राहत और बचाव के बाद अब शहर को सामान्य स्थिति में लाने पर फोकस है। मुख्य सड़क के बाद मोहल्लों और गलियों में सफाई तेज कर दी गई है। कीचड़ हटाने के साथ मलबा उठाया जा रहा है।

    1275 में से 709 घरों की बिजली बहाल
    बाढ़ और बारिश से बिजली व्यवस्था भी प्रभावित हुई थी। चित्रकूट वितरण केंद्र के 19 ट्रांसफॉर्मर प्रभावित हुए। इनमें से 11 ट्रांसफॉर्मर गुरुवार तक ठीक कर दिए गए, जबकि बाकी 8 पर काम जारी है।

    कुल 1275 प्रभावित उपभोक्ताओं में से 709 की बिजली सप्लाई बहाल हो चुकी है। 566 उपभोक्ताओं के घरों तक बिजली पहुंचाने के लिए कर्मचारी लगातार काम कर रहे हैं। बारिश और कीचड़ के बीच बिजलीकर्मी नेटवर्क को जल्द सामान्य करने में जुटे हैं।

    पांच दिन बाद निकली धूप, लोगों को मिली उम्मीद
    गुरुवार शाम करीब 4 बजे पांच दिन बाद कुछ देर के लिए सूरज बादलों के पीछे से बाहर आया। लगातार बारिश और बाढ़ के बीच यह धूप लोगों के लिए राहत की खबर बनी। गुरुवार को बारिश नहीं होने से प्रशासन को भी सफाई और बहाली के काम में तेजी लाने का मौका मिला।

    हालांकि बाढ़ का असर अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। कई घरों में गृहस्थी मिट्टी में सनी है और दुकानों में नुकसान का हिसाब लगाया जा रहा है। लोगों के सामने अब घर-कारोबार को दोबारा खड़ा करने की चुनौती है।

    पांच दिन की आफत के बाद आसमान साफ होने लगा है। अब चित्रकूट के लोग बाढ़ की तबाही से बाहर निकलकर अपनी जिंदगी को फिर से पटरी पर लाने में जुट गए हैं।