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  • ऑपरेशन सिंदूर की सफलता से AI तक, एयर चीफ एपी सिंह ने गिनाईं वायुसेना की उपलब्धियां; जल्द लेंगे विदाई

    ऑपरेशन सिंदूर की सफलता से AI तक, एयर चीफ एपी सिंह ने गिनाईं वायुसेना की उपलब्धियां; जल्द लेंगे विदाई

     नई दिल्ली
    दुनिया भर में चल रहे संघर्षों को देखते हुए यह साफ हो गया है कि मजबूत सैन्य बल हर देश की जरूरत है. हाल के वर्षों में वायु शक्ति किसी भी देश की ताकत की सबसे तेज धार बन चुकी है. भारतीय वायु सेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल एपी सिंह ने अपनी सालाना प्रेस कॉन्फ्रेंसमें यही बात दोहराई।  

    उन्होंने कहा कि वायुसेना लगातार अपनी क्षमताओं को बेहतर बना रही है. हर युद्ध घटक का अपना महत्व है लेकिन संयुक्त बल की जरूरत सबसे ज्यादा है. ऑपरेशन सिंदूर में आईएएफ ने यही साबित किया. वायुसेना न सिर्फ ऑपरेशनल पंच देती है बल्कि मानवीय सहायता और आपदा राहत अभियानों में भी आगे रहती है. कई देशों में मदद पहुंचाकर वसुधैव कुटुंबकम की भावना को जीवंत किया  है। 

    एयर चीफ ने ऑपरेशन सिंदूर का जिक्र करते हुए बताया कि पाकिस्तानी विमानों को निशाना बनाया गया जो खतरा बन रहे थे. भारतीय लॉइटरिंग म्यूनिशन्स ने दुश्मन पक्ष में भारी अफरातफरी मचा दी. उन्होंने साफ कहा कि वायुसेना को अलग ड्रोन फोर्स की जरूरत नहीं है. मौजूदा ढांचे में ही ड्रोन और अन्य सिस्टम को एकीकृत किया जा रहा है। 

    संख्या की कमी को स्वीकार करते हुए उन्होंने कहा कि मिग-21 को पिछले साल चरणबद्ध तरीके से हटाया गया जबकि इसे दो-तीन साल पहले करना चाहते थे. देरी नुकसान पहुंचाती है लेकिन मौजूदा प्रगति से उम्मीद है कि अंतर भर जाएगा. कम विमान होने के बावजूद ऑपरेशनल क्षमता को लेकर वायुसेना सहज है क्योंकि खरीद प्रक्रिया चल रही है। 

    आत्मनिर्भरता अब मजबूरी बन चुकी है…
    आत्मनिर्भरता अब मजबूरी बन चुकी है. एयर चीफ ने एचएएल और एडीए को पूर्ण समर्थन देने की बात कही. स्वदेशी लड़ाकू विमान तेजस, एएमसीए के साथ मिसाइल और रडार कार्यक्रमों को आगे बढ़ाने पर जोर दिया गया. एमआरएफए सौदा इस वित्तीय वर्ष में हस्ताक्षरित होने की उम्मीद है बशर्ते दोनों पक्ष काम करें. स्क्वाड्रन ताकत बढ़ाने के लिए एचएएल हर साल 24 से अधिक विमान बनाने की बात कर रहा है। 

    एमआरएफए पूरा होने पर आवश्यक लड़ाकू विमान मिल सकेंगे. चीन के बढ़ते स्टील्थ विमान और पाकिस्तान द्वारा उन्हें हासिल करने की कोशिश चिंता का विषय है लेकिन ऑपरेशन सिंदूर में वे कुछ खास नहीं कर पाए. आधुनिक हथियार प्रणालियों को अपने प्लेटफॉर्म पर एकीकृत किया जा रहा है। 

    वायुसेना का विजन साफ है. एआई आधारित बल तैयार किया जाएगा जहां कृत्रिम बुद्धिमत्ता सहायता करेगी लेकिन फैसला इंसान के हाथ में रहेगा. अंतरिक्ष क्षेत्र में जागरूकता बढ़ाने और मुख्य ऑपरेशनों के समर्थन पर काम चल रहा है. स्पेस हथियारों पर भी शुरुआत हो चुकी है. थिएटर कमांड के बारे में एयर चीफ ने कहा कि वे इसके खिलाफ नहीं हैं. बहुपक्षीय अभ्यासों में भागीदारी जारी है जिसमें तरंग शक्ति सबसे बड़ा है. ये अभ्यास सहयोग और अनुभव साझा करने का माध्यम बनते हैं। 
      
    संगठन से बड़ा कोई व्यक्ति नहीं और व्यक्तिगत संदेश  

    एयर चीफ ने फ्लाईदुबई घटना का जिक्र करते हुए कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण था लेकिन भारतीय पायलट का साहस सराहनीय है और उन पर गर्व है. उन्होंने जोर दिया कि कोई भी व्यक्ति संगठन से बड़ा नहीं है. पिछले दो साल में जो कुछ हुआ वह पूरी वायुसेना का काम है. जो नहीं हो पाया उसकी जिम्मेदारी वे खुद लेने को तैयार हैं और संतुष्ट हैं। 

    रिश्वत और हनीट्रैप के मामलों पर संवेदनशील बनाया जा रहा है. प्रियंका सक्सेना मामले में अदालत के फैसले का पालन होगा और प्रशिक्षण के बाद उन्हें स्क्वाड्रन लीडर के रूप में शामिल किया जाएगा.  यह एयर चीफ की अंतिम प्रेस कॉन्फ्रेंस है क्योंकि वे इस माह के अंत में सेवा निवृत्त हो रहे हैं। 

    उन्होंने देशवासियों को आश्वस्त किया कि भारतीय वायुसेना हमेशा तैयार रहेगी. दिग्गज सैनिकों का भी आभार जताया. कुल मिलाकर यह वार्ता वायुसेना की मौजूदा स्थिति, चुनौतियों और भविष्य की दिशा को साफ करती है. संख्या की कमी के बावजूद तकनीक, आत्मनिर्भरता और संयुक्त अभियानों पर जोर देकर आईएएफ अपनी ताकत बनाए रखने की दिशा में आगे बढ़ रही है। 

  • MP Weather: कम बारिश से खेती पर संकट, 11 जिलों में 80% से कम बारिश; गेहूं-सोयाबीन की पैदावार घटने का अनुमान

    MP Weather: कम बारिश से खेती पर संकट, 11 जिलों में 80% से कम बारिश; गेहूं-सोयाबीन की पैदावार घटने का अनुमान

    भोपाल
    मध्य प्रदेश में इस साल मानसून की बेरुखी से राज्य के आधे हिस्से में सूखे जैसे हालात पैदा हो गए हैं। प्रदेश के 55 में से 30 जिलों में सामान्य बारिश का कोटा पूरा नहीं हो सका है, जिनमें से 11 जिलों में तो 80 प्रतिशत से भी कम बारिश दर्ज की गई है। इस अनियमित बारिश का सीधा असर फसलों, पेयजल आपूर्ति, जल विद्युत उत्पादन और राज्य की अर्थव्यवस्था पर पड़ना तय माना जा रहा है। दरअसल, प्रदेश में दक्षिण-पश्चिम मानसून की सामान्य बारिश का औसत 37.3 इंच है, जबकि इस बार केवल 35.6 इंच (95.4 फीसदी) बारिश दर्ज की गई। यह सामान्य से लगभग 4 प्रतिशत कम है।

    5 साल में सबसे सूखा मानसून
    वर्ष 2022 में सर्वाधिक 46 इंच बारिश हुई थी, जबकि 2023 में 37.2 इंच, 2024 में 40.2 इंच और 2025 में 45.2 इंच पानी गिरा था। इस बार 35.6 इंच के साथ यह बीते 5 वर्षों की सबसे कम बारिश है। मात्र 0.6 फीसदी की कमी के कारण मध्य प्रदेश सामान्य से कम बारिश वाली श्रेणी में चला गया है।प्रदेश में इस बार 5 साल की तुलना में सबसे कम बारिश रिकॉर्ड की गई है। साल 2022 में सबसे ज्यादा 46 इंच पानी गिरा था। 2023 में 37.2 इंच, 2024 में 40.2 इंच और 2025 में 45.2 इंच बारिश हुई थी। वहीं इस बार 35.8 इंच पानी ही गिरा है।

    बता दें कि इस बार मानसून 9 दिन देरी से 24 जून को पहुंचा था और अगले 9 दिन में पूरे प्रदेश को कवर कर लिया। देरी की वजह से प्रदेश में जून में 30 प्रतिशत बारिश कम हुई थी, लेकिन जुलाई के पहले सप्ताह में ये आंकड़ा प्लस में 8 प्रतिशत पर आ गया।

    अगस्त के दूसरे सप्ताह में भारी बारिश का दौर शुरू हो गया, जो आखिरी तक तक जारी रहा। सितंबर के पहले सप्ताह में भारी बारिश का दौर बना रहा। तीसरे सप्ताह पश्चिमी हिस्से में अच्छी बारिश हुई। आखिरी सप्ताह प्रदेशभर में कहीं तेज तो कहीं हल्की बारिश हुई।

    पश्चिम में कम, पूर्व में ज्यादा बारिश
    मध्यप्रदेश के पश्चिमी हिस्से (इंदौर, उज्जैन, नर्मदापुरम, ग्वालियर-चंबल संभाग) में सामान्य से 12 फीसदी कम बारिश हुई, जबकि पूर्वी हिस्से (जबलपुर, रीवा, सागर, शहडोल संभाग) में 4 प्रतिशत अधिक बारिश दर्ज की गई।

    जून का घाटा नहीं भर पाए जुलाई-सितंबर
    मानसून ने इस बार 9 दिन की देरी से 24 जून को दस्तक दी थी। जून के महीने में बारिश में 30 फीसदी की भारी कमी दर्ज की गई। जुलाई, अगस्त और सितंबर में कोटे से अधिक बारिश हुई, लेकिन यह शुरुआती घाटे की भरपाई नहीं कर सकी।

    जुलाई, अगस्त और सितंबर में कोटे से ज्यादा बारिश

    जुलाई, अगस्त और सितंबर में कोटे से ज्यादा पानी गिरा, लेकिन वह जून की भरपाई नहीं कर सका। लिहाजा, प्रदेश में सामान्य से कम बारिश रिकॉर्ड की गई। मानसूनी पीरियड 30 सितंबर तक 904 मिमी, यानी 35.6 इंच (95.4 प्रतिशत) रिकॉर्ड की गई, जो 'सामान्य बारिश' की कैटेगिरी से नीचे है।

    IMD (मौसम केंद्र) के मुताबिक, 96 से 104 प्रतिशत बारिश ही 'सामान्य बारिश' की कैटेगिरी में शामिल हैं। यदि 0.6% पानी और गिर जाता तो प्रदेश इस कैटेगिरी में पहुंच जाता, यानी इस बार प्रदेश में 'सामान्य से कम' बारिश दर्ज हुई है।

    सोयाबीन और गेहूं का उत्पादन घटेगा
    मालवा सहित इंदौर और नर्मदापुरम में कम बारिश से सोयाबीन उत्पादन प्रभावित होगा। इस साल प्रदेश में 52 लाख हेक्टेयर में सोयाबीन और कुल 134.31 लाख हेक्टेयर में खरीफ फसलों की बोवनी हुई है। दावा किया जा रहा है कि पश्चिमी हिस्से में पानी की कमी से सोयाबीन का उत्पादन 2 से 3 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक घट सकता है। वहीं पानी की कमी के कारण आगामी रबी सीजन में गेहूं और चने की बोवनी भी प्रभावित होगी।

    19 प्रमुख बांध रीते, पेयजल और बिजली पर खतरा
    प्रदेश के कुल 54 बड़े बांधों में से 35 बांध 90 फीसदी या उससे अधिक भरे हैं। वहीं 19 बांधों में पानी का स्तर 10 से 90 प्रतिशत के बीच अटका हुआ है। जल संसाधन मंत्री तुलसीराम सिलावट ने 90 फीसदी से अधिक भरे बांधों की विशेष निगरानी के निर्देश दिए हैं। वहीं गांधीसागर, ओंकारेश्वर, इंदिरा सागर, राजघाट और मणिखेड़ा जैसे 5 बड़े जल विद्युत गृहों में जलस्तर कम रहने से हाइड्रो पावर उत्पादन प्रभावित होने की आशंका है।

    इस बार बारिश का लंबा दौर नहीं रहा
    मौसम विशेषज्ञ शैलेंद्र कुमार नायक कहते हैं- इस बार प्रदेश में बारिश का ट्रेंड बदला हुआ देखने को मिला। कई जिलों में इतनी अतिवृष्टि हुई कि जनजीवन प्रभावित रहा। कई में अनियमित बारिश भी हुई। जैसे कभी तेज बारिश तो कभी लंबा ब्रेक। इस वजह से हालात ठीक नहीं है।

    पहले 8 से 10 दिन लगातार बारिश होती थी, लेकिन इस बार अधिकतम दो दिन तक ही लगातार पानी गिरा। पहले बंगाल की खाड़ी से डिप्रेशन, लो प्रेशर एरिया (निम्न दाब क्षेत्र) से एक्टिव होते थे और सागर क्षेत्र से होते हुए प्रदेश के कई हिस्सों में गुजरते थे। इससे अति भारी या भारी बारिश होती थी। इस बार सिस्टम इतने मजबूत नहीं रहे।

    मानसूनी सीजन में भी प्रदेश के पश्चिमी हिस्से में दिन में गर्म रहे। बारिश के अंतराल की वजह से जमीन सूखने लगी। इस वजह से पानी जमीन के अंदर नहीं उतरा। वर्तमान में तेज धूप है और जमीन सूख रही है। इससे कुछ दिनों के बाद ही भू-जल स्तर नीचे जाने लगेगा।

    माइक्रो लेवल पर काम करने की जरूरत
    विशेषज्ञ नायक कहते हैं कि जिन जिलों में 20 प्रतिशत या इससे कम पानी गिरा है, वहां पर सरकार को माइक्रो लेवल पर काम करने की जरूरत है। जब किसी इलाके में 26 प्रतिशत या उससे कम बारिश होती है तो वह इलाका सूखा घोषित होता है। इस बार सूखे के दायरे में आने वाले कई जिले हैं। यहां पर सरकार सर्वे कराकर पेयजल की स्थिति का आकलन लगाए।

    शहरों में जल संकट की आशंका
    भोपाल: सामान्य से 9 फीसदी अधिक (41 इंच से ज्यादा) बारिश दर्ज की गई। बड़ा तालाब, भदभदा और कलियासोत डैम फुल हो चुके हैं, हालांकि केरवा और कोलार में पानी की कमी है।

    इंदौर: सामान्य से 27 प्रतिशत कम (लगभग 9.5 इंच कम) बारिश हुई है। शहर की जल आपूर्ति मुख्य रूप से नर्मदा, यशवंत सागर और बिलावली तालाब पर निर्भर है।
    उज्जैन: गंभीर डैम इस मानसूनी सीजन में पूरा नहीं भर सका, जिससे शहर में पेयजल समस्या गहरा सकती है।

  • कोरोना काल का 18 महीने का DA-DR बकाया फिर चर्चा में, क्या 8वें वेतन आयोग में मिलेगा एरियर?

    कोरोना काल का 18 महीने का DA-DR बकाया फिर चर्चा में, क्या 8वें वेतन आयोग में मिलेगा एरियर?

    नई दिल्ली

    केंद्रीय कर्मचारियों के लिए गठित आठवें वेतन आयोग के सामने अलग-अलग संगठन अपनी डिमांड रख रहे हैं। इनमें से कुछ ऐसे डिमांड हैं जो लंबे समय से चर्चा के केंद्र में रहे हैं। ऐसी ही एक डिमांड कोरोना काल के 18 महीने के महंगाई भत्ते/महंगाई राहत (DA/DR) एरियर की है। आइए जानते हैं इसके बारे में।

    क्या है मामला?
    दरअसल, कोविड-19 महामारी के दौरान साल 2020 की दोनों छमाही यानी जनवरी से जून और जुलाई से दिसंबर तक के डीए बढ़ोतरी को सरकार ने होल्ड कर दिया था। इसके अलावा साल 2021 की पहली छमाही में भी केंद्रीय कर्मचारियों को डीए नहीं बढ़ाया गया था। इस तरह, केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के भत्ते में 18 महीने तक किसी तरह की बढ़ोतरी नहीं की गई। कोरोना के दौरान रोके गए 18 महीने के महंगाई भत्ते/महंगाई राहत (DA/DR) के बकाये के भुगतान की केंद्रीय कर्मचारी लंबे समय से मांग कर रहे हैं।

    हालांकि, केंद्र सरकार ने अलग-अलग समय पर संसद में दिए गए जवाबों में स्पष्ट किया है कि कोविड-19 महामारी के दौरान सरकार की वित्तीय स्थिति पर पड़े दबाव को देखते हुए जनवरी 2020, जुलाई 2020 और जनवरी 2021 की DA/DR की तीन किस्तों को फ्रीज किया गया था। सरकार ने यह भी कहा है कि महामारी के दौरान पैदा हुई असाधारण वित्तीय परिस्थितियों और सरकार की वित्तीय स्थिति को देखते हुए उस अवधि के DA/DR एरियर का भुगतान करना व्यावहारिक नहीं माना गया।

    आठवें वेतन आयोग से मांग
    हाल ही में उत्तर प्रदेश में रिटायर हो चुके कर्मचारियों और पेंशनभोगियों ने विरोध प्रदर्शन किया और 12 सूत्रीय मांगों को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ तक पहुंचाया है। प्रमुख मांग थी कि 1 जनवरी 2026 से पहले रिटायर होने वाले सरकारी कर्मचारियों को भी 8वें वेतन आयोग के दायरे में शामिल किया जाए। संगठन ने मांग की कि रिटायरमेंट की तारीख के आधार पर कोई भेदभाव न किया जाए और पुराने रिटायर लोगों की पेंशन में भी संशोधन किया जाए। उन्होंने पुरानी पेंशन व्यवस्था को बहाल करने और पेंशन से होने वाली आय को टैक्स से छूट देने की भी मांग की।

    अन्य प्रमुख मांगों में 65 साल की उम्र के बाद हर 5 साल में पेंशन में 5% की बढ़ोतरी और 10 साल बाद पेंशन कम्यूटेशन से जुड़ी कटौती को खत्म करना शामिल था। पेंशनभोगियों ने कोविड-19 महामारी के दौरान रोके गए 18 महीने के महंगाई भत्ते/महंगाई राहत (DA/DR) के बकाये के भुगतान की भी मांग की है।

    यह भी मांग की गई कि 50% से अधिक महंगाई भत्ते को मूल पेंशन में मिला दिया जाए। संगठन ने वेतन आयोग की प्रक्रिया में देरी का हवाला देते हुए कर्मचारियों, शिक्षकों और पेंशनभोगियों के लिए अंतरिम राहत की भी मांग की।

    क्या 8वें वेतन आयोग का पैनल इन मांगों पर विचार करेगा?
    यह तब पता चलेगा जब 8वां वेतन आयोग केंद्र सरकार को अपनी अंतिम रिपोर्ट सौंप देगा। बता दें कि यह 3 सदस्यों वाला आयोग है। यह एक अस्थायी निकाय है। इसकी अध्यक्षता जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई कर रही हैं। आयोग का गठन 3 नवंबर 2025 को किया गया था और उम्मीद है कि यह गठन के 18 महीनों के भीतर अपनी अंतिम रिपोर्ट सौंप देगा। ऐसे में 8वें वेतन आयोग की अंतिम रिपोर्ट मई-जून 2027 में पेश किए जाने की उम्मीद है।

  • इंदौर-दाहोद रेल लाइन से बदलेगी धार की तस्वीर, 28-29 अक्टूबर को CRS जांच के बाद शुरू होगी यात्री ट्रेन

    इंदौर-दाहोद रेल लाइन से बदलेगी धार की तस्वीर, 28-29 अक्टूबर को CRS जांच के बाद शुरू होगी यात्री ट्रेन

     धार 
    प्रदेश के धार वासियों को स्वतंत्रता के बाद पहली बार रेल सेवा मिलने जा रही है। पश्चिम रेलवे की इंदौर-दाहोद रेल लाइन परियोजना अब अपने अंतिम दौर में पहुंच गई है। रेलवे सूत्रों के अनुसार कमिश्नर रेलवे सेफ्टी (सीआरएस) 28 और 29 अक्तूबर  को इस नए 46 किलोमीटर लंबे रेल मार्ग का अंतिम निरीक्षण करेंगे। इस महत्वपूर्ण निरीक्षण के तुरंत बाद रूट पर नियमित रूप से यात्री ट्रेनों के संचालन को हरी झंडी मिल जाएगी। रेलवे प्रशासन ने आने वाले 25 दिनों में धार तक ट्रेन संचालन से जुड़े सभी शेष कार्यों को पूरा करने का लक्ष्य निर्धारित किया है।

    चार नए स्टेशनों की तैयारी
    इस नई रेल लाइन के माध्यम से मध्य प्रदेश के चार नए रेलवे स्टेशन भारतीय रेल नेटवर्क से जुड़ेंगे। इनमें पीथमपुर, सागौर, गुणावद और धार रेलवे स्टेशन शामिल हैं। ये चारों स्टेशन पूरी तरह बनकर तैयार हो चुके हैं और यहां फिनिशिंग तथा सिग्नलिंग से संबंधित काम लगभग 97 प्रतिशत तक पूरा कर लिया गया है। टीही से धार के बीच रेल लाइन बिछने के बाद यह सभी स्टेशन आपस में जुड़ जाएंगे। आजादी के बाद पहली बार धार में ट्रेन पहुंचने को लेकर स्थानीय निवासियों में भारी उत्साह देखा जा रहा है। रेलवे सुरक्षा आयुक्त के निरीक्षण के उपरांत रेलवे बोर्ड नई ट्रेनों की समय-सारणी घोषित करेगा। 

    भोपाल और मुंबई तक कनेक्टिविटी
    इंदौर-दाहोद रेल लाइन शुरू होने से मालवा का यह पूरा क्षेत्र सीधे राजधानी भोपाल से कनेक्ट हो जाएगा। धार और पीथमपुर के लोग सीधे इंदौर से जुड़ेंगे, साथ ही आने वाले समय में दाहोद लिंक के माध्यम से वे रतलाम, झाबुआ और उज्जैन जैसे धार्मिक एवं व्यावसायिक केंद्रों से आसानी से जुड़ सकेंगे। झाबुआ के रास्ते गुजरात के दाहोद से जुड़ने के कारण मध्य प्रदेश से अहमदाबाद, वडोदरा और मुंबई जाने वाले यात्रियों को एक नया और बहुत छोटा मार्ग मिल जाएगा। इससे यात्रा के समय में करीब दो से तीन घंटे तक की बचत होगी। इसके अलावा मालगाड़ियों को भी आसानी से क्लीयरेंस मिलेगा, जिससे यात्री ट्रेनों की रफ्तार भी सुपरफास्ट हो जाएगी।

    आधुनिक सुरंग और बिना गिट्टी का ट्रैक
    इंदौर से गुजरात के दाहोद को जोड़ने वाली इस संपूर्ण रेल परियोजना की कुल लंबाई लगभग 204.76 किलोमीटर है। इस महत्वाकांक्षी परियोजना के अंतर्गत पीथमपुर के निकट तीन किलोमीटर लंबी सुरंग का निर्माण कार्य पूर्ण कर लिया गया है। टीही टनल की मुख्य विशेषता यह है कि इसका ट्रैक पूरी तरह से बैलास्टलेस बनाया गया है, यानी इसमें गिट्टी का इस्तेमाल नहीं किया गया है। सुरक्षा एवं निगरानी के दृष्टिकोण से इस सुरंग के भीतर 140 हाई-डेफिनिशन सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं।

  • 52 एकड़ में विकसित होगा नया परिसर, उन्नत अनुसंधान, नवाचार, शिक्षा और कौशल विकास को मिलेगा बढ़ावा

    52 एकड़ में विकसित होगा नया परिसर, उन्नत अनुसंधान, नवाचार, शिक्षा और कौशल विकास को मिलेगा बढ़ावा

    भोपाल

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है  कि प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में देश में अनुसंधान कार्य को निरंतर प्रोत्साहन दिया जा रहा है। अनेक क्षेत्रों में नवाचारों से विकास को तेज करने में सहायता मिली है। प्रधानमंत्री  मोदी ने विज्ञान और प्रौद्योगिकी के अधिकतम उपयोग पर जोर दिया है। प्रधानमंत्री  मोदी के इस संकल्प को मध्यप्रदेश सरकार साकार करने के प्रयास कर रही है। मध्यप्रदेश में सभी प्रकार के शोध और नवाचार को प्रोत्साहित किया जा  रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि आईसर भोपाल को  485 करोड़ रुपए लागत के नए कैंपस, आधुनिक लैब, इनोवेशन पार्क की सौगात मिली है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव भारतीय विज्ञान शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थान (आईआईएसईआर) भोपाल के विस्तारित परिसर ‘अत्रि’ के शिलान्यास समारोह को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने विस्तारित परिसर के लिए चिन्हित भूमि पर शिलापट्ट का अनावरण कर निर्माण कार्य का शुभारंभ किया और बरगद,पीपल के पौधे भी लगाये। इसके बाद आईआईएसईआर के मुख्य परिसर में स्वामी विवेकानंद की प्रतिमा का अनावरण कर पुष्प अर्पित किए और संस्थान की शैक्षणिक उपलब्धियों एवं अनुसंधान गतिविधियों पर आधारित प्रदर्शनी का अवलोकन किया। कार्यक्रम में विधायक  रामेश्वर शर्मा, संस्थान के शिक्षक, अधिकारी, कर्मचारी एवं विद्यार्थी उपस्थित रहे।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने आईआईएसईआर के नए परिसर के शिलान्यास कार्यक्रम में कहा कि मानव कल्याण के लिए वैश्विक स्तर पर सनातन संस्कृति की अनमोल धारा प्रवाहमान है। आधुनिक विज्ञान के युग में शोध और नवाचारों के लिए देश में 7 आईसर संचालित किए जा रहे हैं, जो वर्तमान दौर में हमारे लिए सप्त ऋषियों की तरह हैं। भारतीय संस्कृति में प्राचीन काल से शोध की परंपरा रही है। उन्होंने कहा कि हमारे ऋषि पारिवारिक जिम्मेदारियों को निर्वाहन करते हुए समाज कल्याण के लिए शोध को प्रोत्साहन देते हैं। मुनि आजीवन ब्रह्मचर्य का पालन करते हुए तपस्या में लीन रहते हैं। वर्तमान दौर में आईसर भोपाल संस्थान नए-नए शोध करते हुए ऋषि परंपरा को आगे बढ़ा रहा है।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि स्वामी विवेकानंद   ने भारत की गौरवशाली संस्कृति को पूरे विश्व में प्रचारित करने का कार्य किया। इस परिसर में स्वामी विवेकानंद की प्रतिमा की स्थापना सराहनीय है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि यह स्वामी विवेकानंद के जीवन की विशेषता थी कि उन्होंने भारतीय संस्कृति के अनेक पहलुओं से विश्व को अवगत करवाया लेकिन स्वयं   को कभी किसी कर्मकांड से नहीं जोड़ा। परमात्मा ने सभी मनुष्यों के लिए जीवन का एक समय निश्चित किया है। हर सांस के साथ हम सभी नया जीवन पाते हैं। प्रत्येक सांस के शरीर में प्रवेश करने और बाहर जाने का काल बाबा महाकाल का है। हम सभी मानव समाज के कल्याण के लिए नए शोध के बल पर आगे बढ़ें।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सूर्य हमारे सामने मौजूद देवता हैं, जिनसे हमें प्रकाश और पौधों को प्रकाश संशलेषण के लिए ऊर्जा मिलती है। हमारे जीवन की पंच क्रियाओं के आधार पर ही शोध आगे बढ़ रहा है। अब बायोटेक्नोलॉजी के बीच ईश्वर की कृपा से सदियों से दर्शन के साथ तर्क, ज्ञान के साथ विज्ञान और साधना के साथ अनुसंधान जुड़ा हुआ है।

    नीति आयोग के सदस्य  गोवर्धन दास ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव के मार्गदर्शन एवं सहयोग में विस्तारित परिसर का शिलान्यास और स्वामी विवेकानंद की प्रतिमा का अनावरण संस्थान की विकास यात्रा में महत्वपूर्ण अवसर है। स्वामी विवेकानंद की प्रतिमा विद्यार्थियों में युवा ऊर्जा, राष्ट्र निर्माण और उत्कृष्टता के लिए प्रेरणा का संचार करेगी।उन्होंने कहा कि आईआईएसईआर भोपाल का उद्देश्य विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और शोध के साथ बेहतर नागरिक के रूप में विकसित करना है। संस्थान के विद्यार्थी देश-विदेश के प्रतिष्ठित शैक्षणिक एवं अनुसंधान संस्थानों में अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन कर रहे हैं।

    प्रभारी निदेशक, आईआईएसईआर भोपाल  रघुवीर सिंह तोमर ने कहा कि संस्थान ने शिक्षा, अनुसंधान और नवाचार के क्षेत्र में विशिष्ट पहचान बनाई है। वर्ष 2008 में स्थापित आईआईएसईआर भोपाल ने विगत 18 वर्षों में ज्ञान-विज्ञान, अभियांत्रिकी, मानविकी एवं सामाजिक विज्ञान के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य किया है।

    52 एकड़ भूमि पर विकसित होगा आईआईएसईआर भोपाल का विस्तारित परिसर

    राज्य सरकार ने आईआईएसईआर भोपाल को नए परिसर एडवांस्ड टेक्नोलॉजी एंड रिसर्च इनोवेशन (अत्रि) के विकास के लिए 52 एकड़ भूमि आवंटित की   है। विस्तारित परिसर में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के राष्ट्रीय महत्व के उभरते क्षेत्रों में कार्य किया जाएगा। इनमें क्वांटम एवं एडवांस्ड मैटेरियल, ड्रोन टेक्नोलॉजी, सस्टेनेबल सिस्टम एवं टेक्नोलॉजी, मेडिकल डिवाइसेस एवं डायग्नोस्टिक्स और एआई एवं रोबोटिक्स प्रमुख रूप से शामिल हैं।

    संस्थान में पांच टेक्नोलॉजी वर्टिकल से विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के नए आयाम होंगे विकसित

    विस्तारित परिसर में प्रस्तावित पांचों टेक्नोलॉजी वर्टिकल से विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के उभरते क्षेत्रों में अनुसंधान, नवाचार और कौशल विकास को बढ़ावा दिया जाएगा। इन वर्टिकल में अत्याधुनिक तकनीकों के विकास के साथ उनके व्यावहारिक उपयोग पर भी कार्य किया जाएगा। क्वांटम एवं एडवांस्ड मैटेरियल, ड्रोन टेक्नोलॉजी, सस्टेनेबल सिस्टम एवं टेक्नोलॉजी, मेडिकल डिवाइसेस एवं डायग्नोस्टिक्स और  एआई एवं रोबोटिक्स के क्षेत्र में शोधकर्ताओं एवं विद्यार्थियों को नई तकनीकों पर कार्य करने के अवसर मिलेंगे।

    विज्ञान और नवाचार के नए अवसरों का आधार बनेगा ‘अत्रि’

    आईआईएसईआर भोपाल संसद के अधिनियम के तहत स्थापित राष्ट्रीय महत्व का संस्थान है और केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय के अधीन कार्य करता है। विस्तारित परिसर के माध्यम से संस्थान में अनुसंधान एवं नवाचार की सुविधाओं का विस्तार होगा तथा विद्यार्थियों और शोधकर्ताओं को उभरती प्रौद्योगिकियों पर कार्य करने के नए अवसर मिलेंगे। 

  • केन्द्रीय गृह मंत्रालय की टीम का राज्यों में आकर मार्गदर्शन और सहयोग देना एक सकारात्मक पहल

    केन्द्रीय गृह मंत्रालय की टीम का राज्यों में आकर मार्गदर्शन और सहयोग देना एक सकारात्मक पहल

    भोपाल 

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री  अमित शाह के नशा मुक्त भारत के निर्माण के संकल्पों के अनुरूप प्रदेश में मादक पदार्थों के खिलाफ निर्णायक लड़ाई शुरू की गई है। राज्य सरकार और पुलिस अब मादक पदार्थों, सायबर अपराध, अवैध हथियारों तथा संगठित अपराध के नेटवर्क पर सतत प्रहार कर रही है। मध्यप्रदेश को 'नशा मुक्त' बनाने के लिए पूरे सिंडिकेट को ध्वस्त किया जाएगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि केन्द्रीय गृह मंत्री  अमित शाह के आहवान पर मध्यप्रदेश को वर्ष 2029 तक पूरी तरह नशामुक्त बनाने के लिये हर स्तर पर सघन प्रयास किये जायेंगे।     

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने शनिवार को केंद्रीय गृह मंत्रालय, के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ मध्यप्रदेश में कानून-व्यवस्था एवं आंतरिक सुरक्षा से जुड़े विषयों पर उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि स्थानीय प्रशासन और पुलिस को अपनी कानून व सुरक्षा व्यवस्था के कर्तव्यों का निर्वहन करते हुए सांप्रदायिक सौहार्दृ बनाए रखना चाहिए और समाज को भी इसके लिए निरंतर प्रेरित करना चाहिए। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि प्रधानमंत्री श्रो नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में वर्ष 2047 तक ‘विकसित भारत’ के लक्ष्य की प्राप्ति में मध्यप्रदेश अग्रणी भूमिका निभाएगा।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि केंद्रीय गृह मंत्रालय की टीम का राज्यों में आकर व्यवस्थाओं का बारीकी से अध्ययन करना, मार्गदर्शन देना, सहयोग करना और भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार करना एक अत्यंत सराहनीय व सकारात्मक पहल है। इस व्यवस्था से सही और दूरगामी निर्णय लेने में मदद मिलती है तथा प्रशासनिक व पुलिस तंत्र की त्वरित गति से कार्य करने की दक्षता बढ़ती है। मध्यप्रदेश में देश का एक आदर्श राज्य बनने की पूरी क्षमता है और राज्य सरकार केंद्रीय गृह मंत्रालय के सतत मार्गदर्शन व समन्वय से प्रदेश को हर दृष्टि से एक ‘मॉडल राज्य’ बनाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि केंद्र सरकार आधुनिक तकनीक और नए-नए प्रयोगों के सफल परीक्षण के बाद राज्यों को उन्हें लागू करने के अवसर उपलब्ध करा रही है और उनकी निरंतर मॉनिटरिंग भी कर रही है।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि कभी असंभव मानी जाने वाली नक्सल समस्या को प्रधानमंत्री  मोदी के मार्गदर्शन में और गृह मंत्री  शाह के अटल इरादों के कारण निर्धारित समय-सीमा में खत्म करने में मदद मिली। प्रदेश में नक्सलवाद के विरुद्ध कड़ा प्रहार कर नियंत्रण पाया गया है। अब सरकार इस क्षेत्र के विकास के लिये विस्तृत कार्य-योजना के तहत कार्य कर रही है।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि युवाओं में विश्वास जगाने के लिए वर्ष 2027 को युवा वर्ष के रूप में मनाया जायेगा। सांदीपनि विद्यालयों के जरिए उच्च गुणवत्ता की शिक्षा प्रदान की जा रही है। भवन विहीन शालाओं के लिए भवन स्वीकृत किए गए है। प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र में एक स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स बनाया जाएगा। नक्सल मुक्त हुए क्षेत्र के विकास के लिए 400 करोड़ रूपये की योजना बनाई गई है। जनजातीय समुदाय में भरोसा बढ़ाने के लिए धरती आबा ग्राम उत्कर्ष अभियान चलाया जा रहा है। वनाधिकार पत्र जारी करने में मध्यप्रदेश देश में अग्रणी राज्यों में शामिल है। प्रदेश के नागरिकों के सुलभ और त्वरित आवागमन के लिए मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा प्रारंभ की गई है। सिंहस्थ 2028 के लिए व्यापक तैयारियां की जा रही है। कर्मचारियों में विश्वास जगाने के लिए 68 हजार कर्मियों को पदोन्नति दी गई है। अग्निवीरो के लिए यूनिफॉर्म सर्विसेज में आरक्षण का प्रावधान किया गया है।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि विगत दो वर्षों में 16,895 पदों पर भर्ती की गई है। अब पद रिक्त होने पर तत्काल भर्ती की प्रक्रिया आरंभ की जा रही है। वर्ष 2026 में 9,662 पदों पर भर्ती प्रक्रिया चल रही है। पुलिस बैंड में विगत कई वर्षों से लंबित भर्ती प्रक्रिया को पुन: प्रारंभ कर पुलिस बैंड को नया स्वरूप दिया गया है। पुलिस बैंड में 648 कर्मी भर्ती किए गए हैं। अब प्रत्येक जिले में राष्ट्रीय पर्वों पर पुलिस बैंड द्वारा आकर्षक प्रस्तुतियां दी जा रही हैं। प्रदेश सरकार ने लगभग 10 वर्षों से लंबित प्रमोशन की प्रक्रिया को प्रारंभ किया। विभिन्न संवर्गों में 27 हजार से अधिक अधिकारियों एवं कर्मचारियों को पदोन्नति दी गई है। ई-एचआरएमएस में 1 लाख से अधिक पुलिसकर्मी जोड़े गए है।

    केंद्रीय गृह सचिव  गोविंद मोहन ने केंद्रीय गृह और सहकारिता मंत्री  अमित शाह के विजन से सभी को अवगत कराया। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश, राजस्थान, महाराष्ट्र, गुजरात और छत्तीसगढ़ से लगी सीमाओं को देखते हुए अपराधियों की अंतर्राज्यीय आवाजाही, हथियारों की तस्करी तथा ड्रग्स कॉरिडोर पर पड़ोसी राज्यों के साथ संयुक्त आसूचना और समन्वित कार्रवाई आवश्यक है। उन्होंने नेटग्रिड के अधिक प्रभावी उपयोग, सभी उच्च शिक्षण संस्थानों में ‘ड्रग-मुक्त कैंपस’ फ्रेमवर्क लागू करने, एनडीपीएस विशेष न्यायालयों की शीघ्र स्थापना तथा राज्य में एंटी-नारकोटिक्स टास्क फोर्स के गठन पर जोर दिया।

    मुख्य सचिव म.प्र. शासन  अशोक बर्णवाल ने केंद्रीय टीम को राज्य में कानून व्यवस्था और सभी वर्गों के सरकार के प्रति विश्वास जगाने के लिए किए जा रहे प्रयासों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि प्रदेश में कानून व्यवस्था बेहतर बनाने के लिए सभी स्तरों पर प्रयास किए गए है। सरकार द्वारा जन विश्वास अभियान चलाया जा रहा है।

    पुलिस महानिदेशक  कैलाश मकवाणा ने बताया कि राज्य में कानून-व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिये मुख्यमंत्री डॉ. यादव के मार्गदर्शन में निरंतर नवाचार किये जा रहे हैं। पुलिस विभाग के अधिकारी-कर्मचारियों के हित में भी निर्णय लिये जा रहे हैं।

    बैठक में बताया गया कि सरकार किसानों में विश्वास बढ़ाने के लिए वर्ष 2026 को कृषक कल्याण वर्ष के रूप में मना रही है। किसानों को एक लाख करोड़ रूपये की योजनाओं का सीधा लाभ दिया गया है। महिलाओं में आत्मविश्वास बढ़ाने के लिए 1 करोड़ 25 लाख महिलाओं को लाडली बहना योजना के तहत राशि हस्तांतरित की गई है। 18 लाख से अधिक बहनों को शासन की विभिन्न योजनाओं का लाभ देकर लखपति दीदी बनाया जा चुका है। वन स्टॉप सेंटर से एक लाख महिलाओं से सम्पर्क किया गया है।

    बैठक में बताया गया कि कानून-व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिये सरकार निरंतर कड़ी कार्रवाई कर रही है। पुलिस महकमे ने ड्रग्स बनाने वाली 17 गुप्त प्रयोगशालाओं का भंडाफोड़ किया है। आदतन ड्रग अपराधियों के विरुद्ध पीआईटीएनडीपीएस अधिनियम के तहत कार्रवाई तेज की गई है तथा राज्य सायबर अपराध समन्वय केन्द्र ( एस4सी) अधिसूचित किया गया है। ई-साक्ष्य का कवरेज पिछले वर्ष के 17 प्रतिशत से बढ़कर 33 प्रतिशत हो गया है तथा सभी जिलों में 57 मोबाइल फॉरेंसिक वैन उपलब्ध हैं।

    बैठक में बताया गया कि प्रदेश में "नशे से दूरी है जरूरी 2.0'' अभियान में इस वर्ष 58 करोड़ सोशल मीडिया व्यूज तथा 2 करोड़ 47 लाख नागरिकों की प्रत्यक्ष भागीदारी रही। इसी प्रकार सेफ क्लिक अभियान 2 में डिजिटल अरेस्ट को रोकने में सफलता प्राप्त हुई। पुलिसकर्मियों में तनाव को दूर करने के लिए हार्टफुलनेस के साथ एमओयू किया गया। एक हज़ार से अधिक प्रशिक्षक तैयार किए गए तथा 50 हजार पुलिसकर्मियों ने हार्टफुलनेस में भागीदारी की।

    बैठक में बताया गया कि तीन नए आपराधिक कानूनों के क्रियान्वयन में मध्यप्रदेश ने उल्लेखनीय प्रगति की है। राज्य में 90 दिनों के भीतर आरोप-पत्र दाखिल करने की दर 69 प्रतिशत रही, जो राष्ट्रीय औसत (59 प्रतिशत) से अधिक है, तथा ई-समन की सीधी डिलीवरी में राज्य देश में सबसे आगे है।

    बैठक में कानून-व्यवस्था, तीन नए आपराधिक कानूनों के क्रियान्वयन, मादक पदार्थ नियंत्रण, सायबर अपराध, आतंकवाद प्रतिरोध, विदेशियों से संबंधित विषयों, भगोड़ों के विरुद्ध कार्रवाई, पुलिस आधुनिकीकरण, पड़ोसी राज्यों के साथ सुरक्षा समन्वय, आपदा प्रबंधन तथा शत्रु संपत्ति के प्रबंधन जैसे महत्वपूर्ण विषयों की समीक्षा की गई।

    बैठक में निदेशक आईबी, विशेष सचिव (आंतरिक सुरक्षा)  आनंद स्वरूप, अपर सचिव (आपदा प्रबंधन)  अनुज्ञ शर्मा, महानिदेशक नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो  अनुराग गर्ग और राज्य की ओर से अपर मुख्य सचिव  नीरज मंडलोई, अपर मुख्य सचिव गृह  संजय कुमार शुक्ल, अपर मुख्य सचिव उच्च शिक्षा एवं संसदीय कार्य  अनुपम राजन, पुलिस महानिदेशक  वरुण कपूर, महानिदेशक होमगार्ड मती प्रज्ञा ऋचा वास्तव, विशेष पुलिस महानिदेशक अपराध अनुसंधान  पंकज कुमार वास्तव और अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक नारकोटिक्स  डी. निवास वर्मा सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। 

  • कैप्टन स्मित मच्छर के सम्मान में बड़ा ऐलान, फार्मा कंपनी देगी ₹1 करोड़ का पुरस्कार

    कैप्टन स्मित मच्छर के सम्मान में बड़ा ऐलान, फार्मा कंपनी देगी ₹1 करोड़ का पुरस्कार

    नई दिल्ली

    देश की एक बड़ी दवा निर्माता कंपनी ने कैप्‍टन स्मित मच्‍छर को 10000000 रुपये का इनाम देने का ऐलान किया है. फर्मा कंपनी ने कैप्‍टन स्मित मच्‍छर को असली हीरो बताया है. फ्लाईदुबई की फ्लाइट 174 यात्रियों के साथ इजरायल जा रही थी. विमान जब ऊंचे आसमान में था, तब को-पायलट ने कैप्‍टन मच्‍छर पर जानलेवा हमला कर दिया. प्रारंभिक जांच में यह बात सामने आई है कि आरोपी को-पायलट 9/11 की तर्ज पर विमान को इजरायल में क्रैश कराना चाहता था. लेकिन आरोपी के मंसूबे के बीच भारतीय पायलट और विमान के कैप्‍टन स्मित मच्‍छर आ गए. जानलेवा हमला होने के बाद भी उन्‍होंने हिम्‍मत नहीं हारी और कॉकपिट का दरवाजा खोल दिया. इसके बाद विमान में सवार यात्रियों और क्रू-मेंबर के अन्‍य सदस्‍यों ने आरोपी को-पायलट को अपने कब्‍जे ले लिया। 

    फार्मा कंपनी मैनकाइंड ने कैप्‍टन स्मित मच्‍छर की बहादुरी को सलाम करते हुए एक करोड़ रुपये के इनाम का ऐलान किया है. कंपनी ने अपने बयान में कहा कि आप हमारे समय के असली हीरो हैं. कंपनी ने कहा, ‘आपने पूरी दुनिया के सामने जिस साहस, शौर्य और जिम्‍मेदारी का परिचय दिया है, उसे देखते हुए एक भारतीय के तौर पर हमें अत्‍यंत गर्व हो रहा है. यही वजह है कि मैनकाइंड फार्मा ने आपको और आपके परिवार को एक करोड़ रुपये का योगदान करने का फैसला लिया है। 

    पीएम मोदी ने खुद की बात
    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने फ्लाईदुबई के पायलट कैप्टन स्मित मच्छर से फोन पर बात कर उनके साहस और सूझबूझ की सराहना की. पीएम मोदी ने शुक्रवार को उनसे बातचीत के दौरान बताया कि देशभर में उनकी लंबी उम्र और जल्द स्वस्थ होने की प्रार्थना हो रही है. उन्होंने कहा कि कैप्टन स्मित ने गंभीर चोटों के बावजूद यात्रियों की जान बचाने के लिए जो फ़ैसला लिया, उस पर पूरे देश को गर्व है. प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, ‘पूरा देश आपके लिए प्रार्थना कर रहा है. महामृत्युंजय का जाप सब जगह चल रहा है. आपकी हिम्मत, धैर्य और सूझबूझ ने इतने लोगों की जान बचाई. आपने दिखाया कि भारतीय जान लेने वाले नहीं, जान बचाने वाले लोग हैं। 

    जांच में चौंकाने वाले खुलासे
    यूएई की सरकारी समाचार एजेंसी डब्ल्यूएएम के मुताबिक़, संयुक्त अरब अमीरात के प्रॉसिक्युटर जनरल ने शनिवार को कहा कि फ्लाईदुबई की उड़ान FZ1073 के को-पायलट ने उड़ान के दौरान आतंकवादी हमला करने की कोशिश की थी. प्रॉसिक्युटर जनरल ने कहा कि को-पायलट ने कॉकपिट के अंदर क्रैश ऐक्स से पायलट पर हमला किया और विमान का नियंत्रण अपने हाथ में लेने की कोशिश की. क्रैश ऐक्स आम तौर पर कॉकपिट में रखा जाता है और दुर्घटना जैसी आपात स्थितियों में इसका इस्तेमाल किया जाता है. उन्होंने कहा कि घटना की परिस्थितियों, हमले के मक़सद और इससे जुड़े किसी भी संबंध का पता लगाने के लिए जांच जारी है. इसके साथ ही फिजिकल और डिजिटल साक्ष्यों की भी जांच की जा रही है। 

  • अपराध की सूचना से अंतिम न्याय तक की सम्पूर्ण प्रक्रिया को सजीव प्रस्तुत किया गया प्रदर्शनी में

    अपराध की सूचना से अंतिम न्याय तक की सम्पूर्ण प्रक्रिया को सजीव प्रस्तुत किया गया प्रदर्शनी में

    भोपाल 

    केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री  अमित शाह और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने नवीन न्याय संहिताओं पर आधारित भव्य प्रदर्शनी का भेल दशहरा मैदान पर शुभारंभ कर प्रदर्शनी के विभिन्न ज़ोन का अवलोकन किया। प्रदर्शनी में भारतीय न्याय व्यवस्था में हुए महत्वपूर्ण बदलावों, नवीन न्याय संहिताओं के प्रावधानों तथा अपराध की सूचना प्राप्त होने से लेकर विवेचना, फॉरेंसिक जाँच, अभियोजन, न्यायालयीन कार्यवाही और अंतिम न्याय तक की संपूर्ण प्रक्रिया को 14 अलग-अलग ज़ोन में सजीव मॉडल, डिजिटल तकनीक, वीडियो, चार्ट एवं लाइव प्रदर्शन के माध्यम से प्रदर्शित किया गया है। सात अक्टूबर तक चलने वाली यह पांच दिवसीय प्रदर्शनी, नवीन न्याय संहिताओं के प्रति आम नागरिकों को जागरूक करने के उद्देश्य से केंद्रीय गृह मंत्रालय के मार्गदर्शन में आयोजित की गई है। मुख्‍यमंत्री डॉ. यादव ने केंद्रीय गृह मंत्री  शाह को प्रदेश में नवीन न्‍याय संहिताओं के क्रियान्‍वयन की दिशा में संचालित गतिविधियों, सायबर सुरक्षा एवं जागरूकता, मध्‍यप्रदेश पुलिस के सामाजिक अभियानों और नवाचारों से अवगत कराया। उद्घाटन अवसर पर वरिष्ठ विधायक एवं अध्‍यक्ष  हेमंत खंडेलवाल, अपर मुख्य सचिव गृह  संजय शुक्ला और पुलिस महानिदेशक  कैलाश मकवाना उपस्थित थे।

    आपातकालीन नंबर डायल-112 की कार्यप्रणाली का किया गया सजीव प्रदर्शन

    प्रदर्शनी का जोन एक नवीन न्याय संहिताओं के परिचय पर केंद्रित है। भारतीय न्याय संहिता (BNS), भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) और भारतीय साक्ष्य अधिनियम (BSA), 2023 के प्रमुख प्रावधानों तथा उनके व्यावहारिक उपयोग की जानकारी दी गई है। आपातकालीन सेवाओं एवं कंट्रोल रूम पर केंद्रित जोन दो में ‘एक देश, एक आपातकालीन नंबर’ की अवधारणा के अंतर्गत डायल-112 प्रणाली के एकीकरण तथा आधुनिक स्टेट कमांड सेंटर की तकनीकी क्षमताओं का सजीव प्रदर्शन किया गया है। क्राइम सीन और फॉरेंसिक जाँच से संबंधित ज़ोन-3 में अपराध स्थल के वास्तविक 3D मॉडल के माध्यम से घटनास्थल पर फॉरेंसिक टीम की भूमिका, वैज्ञानिक साक्ष्य संकलन तथा साक्ष्यों की अनिवार्य वीडियो रिकॉर्डिंग की प्रक्रिया प्रदर्शित है। जोन-4 थाना प्रणाली एवं प्रारंभिक जाँच पर केंद्रित है। इसमें पुलिस थाने के मॉडल के माध्यम से विवेचना के प्रारंभिक चरण, ई-एफआईआर, जीरो एफआईआर एवं CCTNS से संबंधित सेवाओं और प्रक्रियाओं की जानकारी इस जोन में दी गई है। चिकित्सा सेवाओं एवं मेडिकल साक्ष्य को समर्पित जोन-5 में पीड़ितों के उपचार, मेडिकल परीक्षण, पोस्टमार्टम तथा समयबद्ध मेडिकल रिपोर्ट के माध्यम से आपराधिक न्याय प्रणाली में स्वास्थ्य विभाग की भूमिका को दर्शाया गया है।

    चार्जशीट तैयार करने से लेकर न्यायालय में प्रभावी पैरवी तक की दी गई है जानकारी

    न्याय प्रक्रिया में फॉरेंसिक साइंस लैब के महत्व को जोन 6 में प्रदर्शित किया गया है। इस जोन में DNA, फिंगरप्रिंट, बैलिस्टिक एवं डिजिटल फॉरेंसिक जैसी वैज्ञानिक जाँच तकनीकों के माध्यम से अपराध के वैज्ञानिक अनुसंधान और साक्ष्यों की विश्वसनीयता बढ़ाने की प्रक्रिया दिखाई गई है। जोन-7 में अभियोजन की भूमिका पर केंद्रित है।विवेचना के बाद चार्जशीट तैयार करने से लेकर न्यायालय में प्रभावी पैरवी तक अभियोजन की भूमिका और कार्यप्रणाली को यहां प्रदर्शित किया गया है। जोन-8 में जिला न्यायालय पर केंद्रित है। इस जोन में जिला न्यायालय का मॉडल एवं न्यायालयीन कार्यवाही में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग जैसी आधुनिक तकनीकों के उपयोग का प्रदर्शन किया गया है। ज़ोन-9 जेल सुधार एवं ई-प्रिजन व्यवस्था को समर्पित है।यहां जेल सुधार, जेल मैनुअल में हुए बदलाव, पैरोल, बंदियों के पुनर्वास कार्यक्रम तथा ई-प्रिजन प्रणाली की कार्यप्रणाली का लाइव डिस्प्ले किया है। ज़ोन-10 उच्च न्यायालय की गरिमापूर्ण पीठ को दर्शाता है।यहां मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय, जबलपुर के मुख्य कोर्ट रूम का स्वरूप प्रदर्शित किया गया है। यह ज़ोन पुलिस थाने में दर्ज एफआईआर से लेकर उच्चतर न्यायपालिका के स्तर पर न्याय की प्रक्रिया तक की संपूर्ण यात्रा प्रदर्शित है।

    ऑनलाइन ई-जीरो एफआईआर की प्रक्रिया की जानकारी नागरिकों को उपलब्ध कराई गई

    इसी क्रम में ज़ोन-11 में नक्सल उन्मूलन में उपलब्धियाँ प्रदर्शित हैं। यहां प्रदेश में नक्सलवाद के उन्मूलन के लिए किए जा रहे प्रयासों तथा पुलिस की उपलब्धियों को फोटोग्राफिक एवं डिजिटल माध्यम से प्रदर्शित किया गया है। ज़ोन-12 साइबर सुरक्षा एवं जागरूकता से संबंधित है। यह जोनसाइबर अपराधों से बचाव के लिए संचालित ‘सेफ क्लिक अभियान’ तथा ऑनलाइन ई-जीरो एफआईआर की प्रक्रिया की जानकारी नागरिकों को उपलब्ध कराने पर केंद्रित है। नवीन संहिताओं के प्रभावी क्रियान्वयन में राज्य की उपलब्धियाँ जोन तेरह में प्रदर्शित है।यहां नवीन न्याय संहिताओं के प्रभावी क्रियान्वयन, आवश्यक ढांचागत सुधारों तथा राज्य में अब तक हुई प्रगति को डिजिटल चार्ट और डिस्प्ले के माध्यम से प्रस्तुत किया गया है। ज़ोन-14 में सामाजिक पहल के प्रदर्शन के साथ ही लाइव क्विज़ रखा गया है। इस ज़ोन में ऑपरेशन मुस्कान, महिला हेल्प डेस्क एवं ‘Say No to Drugs’ जैसे सामाजिक अभियानों की जानकारी के साथ नवीन न्याय संहिताओं पर आधारित लाइव डिजिटल क्विज़ काउंटर आकर्षण का प्रमुख केंद्र है।

    त्वरित, पारदर्शी, तकनीक-सक्षम और पीड़ित-केंद्रित न्याय प्रणाली की दिशा में महत्वपूर्ण पहल

    प्रदर्शनी आम नागरिकों, विद्यार्थियों, युवाओं और कानून के प्रति रुचि रखने वालों के लिए उपयोगी है। यहां लोगों को नवीन न्याय संहिताओं की व्यावहारिक जानकारी प्राप्त होगी। केंद्रीय गृह मंत्रालय के मार्गदर्शन में आयोजित इस जागरूकता अभियान का उद्देश्य नागरिकों को भारतीय न्याय व्यवस्था में हुए महत्वपूर्ण बदलावों से परिचित कराना तथा यह बताना है कि नवीन न्याय संहिताओं के माध्यम से त्वरित, पारदर्शी, तकनीक-सक्षम एवं पीड़ित-केंद्रित न्याय प्रणाली को सुदृढ़ करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाए गए हैं। प्रदर्शनी के उद्घाटन में सचिव गृह मती शिल्पा गुप्ता, केंद्र सरकार के अधिकारी तथा प्रदेश पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

     

  • केंद्रीय मंत्री  शाह ने राज्यस्तरीय गौपालक सम्मेलन में 100 करोड़ रुपये से अधिक के विकास कार्यों का किया भूमि-पूजन एवं लोकार्पण

    केंद्रीय मंत्री शाह ने राज्यस्तरीय गौपालक सम्मेलन में 100 करोड़ रुपये से अधिक के विकास कार्यों का किया भूमि-पूजन एवं लोकार्पण

    भोपाल 

    राज्यस्तरीय गौ-पालक सम्मेलन

    केंद्रीय सहकारिता एवं गृह मंत्री  अमित शाह ने कहा है कि पशुधन (लाईव स्टॉक) और दुग्ध उत्पादन देश के किसानों और गौवंश पालकों की समृद्धि का प्रमुख आधार है। पशुधन जितना होगा, उतनी ही होगी समृद्धि। देश के किसानों और पशुपालकों की आर्थिक समृद्धि ही हमारा लक्ष्य है। पशुधन से दुग्ध उत्पादन और दुग्ध उत्पादन से ही गौपालकों के घर समृद्धि आती है। उन्होंने कहा कि दुग्ध उत्पादन किसानों और पशुपालकों की आय का बड़ा जरिया है। केंद्र सरकार देश में दुग्ध उत्पादन तेजी से बढ़ाने के लिए पशुपालकों को कई प्रकार की सहायता भी उपलब्ध करा रही है। सहकारिता मंत्री  शाह ने कहा कि भोपाल में हुआ यह विशाल गौपालक सम्मेलन मध्यप्रदेश में हो रही श्वेत क्रांति का एक शुभ संकेत है। सहकारिता मंत्री  शाह ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव स्वयं एक गौपालक हैं, उनके नेतृत्व में मध्यप्रदेश पूरे देश में दुग्धोत्पादन क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ रहा है। केन्द्रीय मंत्री  शाह ने प्रदेश के सभी गौपालकों से मप्र में प्रतिदिन 50 लाख लीटर दूध उत्पादन का बड़ा लक्ष्य लेकर चलने की अपील करते हुए कहा कि सब मिल-जुलकर एक साथ आगे बढ़ेंगे, तभी यह लक्ष्य हासिल होगा। मंत्री  शाह शनिवार को भेल दशहरा मैदान में आयोजित विशाल राज्य स्तरीय गौ-पालक सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे।

    प्रदेश को दीं कई सौगातें

    'सहकार से समृद्धि' की थीम पर केंद्रित राज्य स्तरीय सम्मेलन में केन्द्रीय सहकारिता मंत्री  शाह ने उज्जैन में 255 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाले 3 लाख लीटर प्रतिदिन क्षमता वाले मिल्क प्रोसेसिंग प्लांट का डिजिटल भूमि-पूजन किया। उन्होंने भोपाल में 16.50 करोड़ रुपये की लागत से नव निर्मित 40 हजार लीटर प्रतिदिन क्षमता के फर्मेटेड प्रोडक्ट डेयरी प्लांट, भोपाल में ही 12.42 करोड़ रुपये से नव निर्मित राज्य स्तरीय केंद्रीय गुणवत्ता प्रयोगशाला तथा शिवपुरी जिले में 6.50 करोड़ रुपये की लागत से मिनी डेयरी प्लांट के सुदृढ़ीकरण कार्य का लोकार्पण किया। केंद्रीय मंत्री ने सम्मेलन में भोपाल एवं इंदौर दुग्ध संघों से जुड़े पशुपालक सदस्यों को 15.10 करोड़ रुपये की लाभांश (बोनस) राशि तथा प्रदेश की गौशालाओं को गौवंश के संरक्षण एवं आहार आदि के लिए 88 करोड़ रुपये की सहायता राशि सिंगल क्लिक से अंतरित की। केंद्रीय गृह मंत्री  शाह ने मंच से 5 गौपालक दीदियों और सर्वश्रेष्ठ दुग्ध उत्पादन करने वाली समिति के सदस्यों को प्रशस्ति-पत्र देकर सम्मानित किया। साथ ही 2 पशुपालकों को राज्य सरकार की डॉ. भीमराव अम्बेडकर कामधेनु योजना के हितग्राहियों को स्वीकृति आशय-पत्र भी प्रदान किए।

    एमओयू भी हुआ

    भोपाल में मोरवन प्रोजेक्ट के तहत नगर वन विकसित करने कृभको एवं म.प्र. बॉयोडायवर्सिटी बोर्ड के मध्य समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर कर परस्पर आदान-प्रदान किया गया। इसका उद्देश्य भोपाल में हरित क्षेत्र का विस्तार करने के साथ जैव विविधता संरक्षण, पर्यावरण संवर्धन और नागरिकों के लिए बेहतर प्राकृतिक वातावरण विकसित करना है। नगर वन के विकास से स्थानीय जैव विविधता को संरक्षण मिलेगा तथा शहर में हरित आवरण को बढ़ावा मिलेगा। सम्मेलन में मप्र में वर्तमान में मनाये जा रहे कृषक कल्याण वर्ष 2026 (बलराम कृषि महोत्सव) पर केंद्रित लघु फिल्म तथा 'मप्र में दुग्ध क्रांति का सूत्रपात' विषयक एक आकर्षक लघु फिल्म का प्रदर्शन भी किया गया।

    देश को नक्सलवाद से मिली निजात

    केंद्रीय मंत्री  शाह ने कहा कि देश को नक्सलवाद की समस्या से हमेशा के लिए निजात मिल गई है। अब बारी पूरे देश को नशामुक्त बनाने की है। भारत को वर्ष 2029 के अंत तक नशामुक्त बनाना हमारा लक्ष्य है। मंत्री  शाह ने नागरिकों से मध्यप्रदेश को 31 दिसम्बर 2029 तक पूर्णतः नशामुक्त प्रदेश बनाने का संकल्प लेकर आगे बढ़ने और इस दिशा में सरकार द्वारा किए जा रहे प्रयासों में सहयोग करने की अपील की। केन्द्रीय मंत्री  शाह ने कहा कि नशामुक्ति के लिए सभी संभव योजनाएं तैयार की जाएंगी। इससे देश-प्रदेश के युवाओं को नई दिशा मिलेगी। उन्होंने मध्यप्रदेश में करीब 50 एकड़ भूमि में गौवंश एवं भैंसों की नस्ल सुधार का काम प्रारंभ करने के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे कारगर उपायों से ही मप्र अगले तीन साल में 50 लाख लीटर प्रतिदिन दूध उत्पादन का लक्ष्य हासिल करेगा।

    न्याय संहिता प्रदर्शनी का किया शुभारंभ

    केंद्रीय मंत्री  शाह ने कहा है कि आज यहां न्याय संहिता प्रदर्शनी का भी शुभारंभ हुआ है। प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भारत सरकार ने अंग्रेजी दौर के कई कानूनों को समाप्त कर अपनी न्याय संहिता लागू की है। हमारी न्याय व्यवस्था की पहचान कभी तारीख-पे-तारीख से होती थी, लेकिन अब भारतीय न्याय संहिता में एफआईआर के बाद 3 वर्ष में दोषी को सजा दिलाने का प्रावधान किया गया है। अंग्रेजों ने अपनी सरकार को बचाने के लिए कानून बनाए थे। उन्होंने कहा कि नई न्याय संहिता के मूल में न्याय दिलाना है, दंड नहीं। दंड सिर्फ अपराध रोकने के लिए ही है। इससे हर भारतीय के सम्मान की रक्षा होगी। इस नवीन न्याय संहिता से भारतीय न्यायपालिका शीघ्र ही दुनिया का सबसे आधुनिक न्याय तंत्र बन जाएगी। इसमें ऑनलाइन एफआईआर, वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग, एफएसएल के प्रावधान और कई आधुनिक वैज्ञानिक प्रावधान इसमें जोड़े गए हैं। महिला सुरक्षा, आतंकवाद, लिंचिंग तक से प्रोटेक्शन की व्यवस्था की गई है।

    केंद्रीय मंत्री  शाह ने कहा कि देश में सहकारिता से जुड़े लोग 75 साल से सहकारिता मंत्रालय बनाने की मांग कर रहे थे, लेकिन विपक्षी दल की सरकारों ने कभी इस पर ध्यान नहीं दिया। प्रधानमंत्री  मोदी ने पहली बार देश में प्रथक से सहकारिता मंत्रालय की शुरुआत की। इसका सबसे अधिक लाभ देश के गौपालकों भाई-बहनों को हुआ है। उन्होंने बताया कि बिचौलियों को दूध बेचने से दुग्ध उत्पादकों को केवल 35 रुपए लीटर दाम मिलता है, लेकिन सहकारी समितियों को दूध बेचने पर पहले दिन से 55 रुपए लीटर दाम मिलेगा। हमारी सरकार मिल्क प्रोसेसिंग कर दही, मक्खन, पनीर जैसे उत्पाद करने के लिए इको सिस्टम तैयार कर रही है। आज उज्जैन में 255 करोड़ लागत के दूध प्रसंस्करण संयंत्र का भूमि-पूजन हुआ है। भोपाल में 17 करोड़ की लागत से सांची दुग्ध संघ का संयंत्र बनकर तैयार हो गया है। भोपाल में 12 करोड़ की लागत से अत्याधुनिक राज्य स्तरीय प्रयोगशाला बनाई गई है। शिवपुरी में साढ़े 6 करोड़ की लागत से मिनी डेयरी यूनिट को भी बनाया जाएगा। भोपाल और इंदौर दुग्ध संघ से जुड़े पशुपालकों को 12 करोड़ रुपए बोनस की सौगात दी गई है। गौपालक दीदियों का सम्मान भी हुआ है। प्रदेश में 50 एकड़ भूमि पर गाय और भैंस की नस्ल सुधार का कार्यक्रम शुरू किया जा रहा है इससे गौमाता बीमार नहीं होगी। दूध उत्पादन बढ़ेगा। नई प्रजनन तकनीक से गाय केवल बछिया ही जनेगी। अगले तीन साल में मध्यप्रदेश सरकार दूध उत्पादन क्षमता को 10 लाख लीटर से बढ़ाकर 50 लाख लीटर प्रतिदिन तक ले जाने के लिए काम कर रही है। यह एक बड़ा लक्ष्य है। गुजरात ने इसे कर दिखाया है।

    भारत कर रहा है दुनिया में सर्वाधिक दूग्ध उत्पादन

    केंद्रीय मंत्री  शाह ने कहा कि देश की आजादी के बाद वर्ष 2013-14 तक देश में कुल दूध उत्पादन 14 करोड़ 7 लाख टन था। प्रधानमंत्री  मोदी के सत्ता संभालने के बाद 10 साल में ही यह 25 करोड़ टन से अधिक हो गया है। केंद्र और हमारी राज्य सरकारों की गौपालकों के लिए प्रतिबद्धता से यह लक्ष्य हासिल होता है। प्रति व्यक्ति दूध उत्पादन में 58 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है, जो अब 485 ग्राम प्रति व्यक्ति प्रति दिन हो गया है। भारत अब दुनिया में सबसे अधिक दुग्ध उत्पादन कर रहा है। देश के दूग्ध उत्पादक अग्रणी 5 राज्यों में उत्तर प्रदेश, राजस्थान, मध्यप्रदेश, गुजरात और महाराष्ट्र शामिल हैं।

    नई डेयरी समितियों के लक्ष्य प्राप्ति में सबसे बड़ा योगदान होगा म.प्र. का

    केन्द्रीय मंत्री  शाह ने कहा कि प्रधानमंत्री  मोदी ने वर्ष 2047 तक भारत को हर क्षेत्र में नंबर 1 बनाने का संकल्प लिया है। हमारा निर्यात आज बढ़कर 5000 करोड़ तक पहुंच गया है। यूएई, अमेरिका, बांग्लादेश, सऊदी अरब और भूटान सहित कई देशों में भारत निर्यात करता है। उन्होंने कहा कि हमने अब श्वेत क्रांति 2.0 का शुभारंभ किया है। केंद्र सरकार ने गांवों में 75 हजार डेयरी सहकारी समितियां बनाने का लक्ष्य रखा है। इसके साथ ही 46 हजार डेयरियों को और भी मजबूत किया जाएगा। नई डेयरी समितियों के लक्ष्य प्राप्ति में सबसे बड़ा योगदान मध्यप्रदेश का होगा। केंद्र सरकार ने नेट जीरो और चक्रीय अर्थव्यवस्था तैयार करने को गति दी है। पशुओं की नस्ल सुधार, पशु आहार तैयार करने, गोबर से बायोगैस, गोबर से उत्पाद तैयार करने, चारा प्रबंधन, कृत्रिम गर्भधान के लिए सरदार पटेल को-ऑपरेटिव डेयरी फेडरेशन की स्थापना की है। गोबर का वैज्ञानिक संग्रह, स्वच्छ ऊर्जा निर्माण और ग्रामीण रोजगारी के लिए 5 मॉडल बनाए गए हैं। मध्यप्रदेश के प्रत्येक गांव तक गोबर के उत्पाद तैयार करने का मॉडल भी तैयार किया जाएगा। केन्द्रीय मंत्री  शाह ने कहा कि डेयरी आधारित अर्थव्यवस्था से देश की महिलाएं आर्थिक रूप से सशक्त हो रही हैं। इससे ग्रामीण और आर्थिक विकास का मॉडल भी जुड़ता है। देश में कुपोषण से लड़ाई में भी डेयरी अहम भूमिका निभा रही है। केन्द्रीय मंत्री  शाह ने सम्मेलन में आए सभी गौपालकों को देश में नई श्वेत क्रांति 2.0 से जुड़ने की बधाई देने के साथ ही मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को आश्वस्त किया कि दूध उत्पादन के लिए 50 लाख लीटर प्रतिदिन का लक्ष्य कठिन जरूर है, लेकिन केंद्र सरकार हर कदम पर प्रदेशवासियों के साथ खड़ी है।

    दूध उत्पादन में अब देश का तीसरा सबसे बड़ा राज्य है मध्यप्रदेश : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश नई दुग्ध क्रांति की ओर बढ़ रहा है। हमारा लक्ष्य बिल्कुल स्पष्ट है कि देश का अधिकतम दुग्ध उत्पादन म.प्र. की धरती पर हो। उन्होंने कहा कि आज स्वयं केंद्रीय सहकारिता मंत्री की उपस्थिति में यहां अद्भुत राज्य स्तरीय गौपालक सम्मेलन आयोजित किया गया है। प्रदेश में 80 लाख से अधिक गौपालकों का विशाल समृद्ध परिवार है। राज्य सरकार ने गरीब युवा महिला और नारी शक्ति के कल्याण के लिए अनेक महत्वपूर्ण कार्य किए हैं। किसान कल्याण वर्ष में हमने 17 विभागों को एक साथ जोड़ा है। किसानों की समृद्धि और उनकी आय बढ़ाने के लिए हमारी सरकार ने सभी तरह के प्रयास शुरू किए हैं। प्रदेश के प्रत्येक जिले में कृषि मेले, कृषि यंत्रों की प्रदर्शनी, उन्नत कृषि के उपाय किसान भाइयों को बताए जा रहे हैं। किसान भाइयों की आय गौपालन, दूध उत्पादन, पशुपालन, मुर्गी पालन, बकरी पालन और मत्स्य पालन से बढ़ाने के प्रयास किया जा रहे हैं। किसानों की सबसे अधिक आय दूध उत्पादन से होती है। मध्यप्रदेश दूध उत्पादन में अब देश का तीसरा सबसे बड़ा राज्य है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि हम प्रदेश के हर गांव-कस्बे की सभी दुग्ध सहकारी समितियों को और भी सशक्त करने के लिए सभी जरूरी कदम उठा रहे हैं। इस दिशा में प्रदेश में कई नवाचारी कदम उठाये जा रहे हैं।

    गोवर्धन पूजा से पहले सरकार के तीन नए संकल्प, मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने की तीन घोषणायें

    सम्मेलन में मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने गौपालकों और दुग्ध उत्पादकों के हित में चलाई जा रही विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं का जिक्र करते हुए अगले माह गोवर्धन पूजा से पहले सरकार के तीन नए संकल्पों की जानकारी दी। उन्होंने इस संकल्पों की पूर्णता के लिए घोषणा करते हुए कहा कि प्रदेश के सभी 313 ब्लॉक्स में स्थित वृंदावन ग्रामों में उत्कृष्ट गौपालकों की प्रतियोगिता कराई जाएगी। इसमें विजेताओं को नगद पुरस्कार दिए जाएंगे। प्रथम विजेता को एक लाख रुपए, द्वितीय को 50 हजार रुपए एवं तृतीय पुरस्कार के रूप में 25 हजार रुपए दिए जाएंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि अभी प्रदेश में 406 गौ-एम्बुलेन्स चल रही हैं। इसमें वृद्धि करते हुए अब प्रदेश में 168 नई गौ-एम्बुलेन्स चलाईं जायेंगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि उन्नत दुधारू नस्ल के पशु अधिक दूध उत्पादन करते हैं, इसीलिए उन्नत नस्ल पशुपालन के प्रोत्साहन के लिए प्रदेश में जगह-जगह पशुपालकों के वृहद् मेले लगाये जायेंगे।

    म.प्र. देश में सबसे पहले हुआ नक्सल मुक्त

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि केंद्रीय मंत्री  शाह के अटल इरादों से ही देश नक्सलवाद की समस्या से हमेशा के लिए मुक्त हो गया है। मप्र देश में सबसे पहले दशकों पुरानी इस समस्या से मुक्त हुआ है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश की प्रत्येक केन्द्रीय योजना में शत्-प्रतिशत परिणाम देने के लिए केन्द्र सरकार के साथ कदम से कदम मिलाकर आगे बढ़ रहा है। पहले दुग्ध उत्पादकों से बिचौलिए लाभ कमाते थे। लेकिन केंद्रीय सहकारिता मंत्री  शाह के प्रयासों से अब नेशनल डेयरी डेवलपमेंट बोर्ड के साथ एमओयू हो गया है। केंद्रीय मंत्री  शाह के करकमलों से आज मध्यप्रदेश को दूध उत्पादन और डेयरी क्षेत्र में कई बड़ी सौगातें मिली हैं। उन्होंने कहा कि दुनिया में प्रतिदिन प्रति व्यक्ति 330 ग्राम दूध का प्रोडक्शन होता है। यह आंकड़ा भारत में 485 ग्राम है और मध्यप्रदेश में राष्ट्रीय औसत से अधिक 750 ग्राम है। आज प्रदेश में श्वेत क्रांति 2.0 की शुरुआत हो रही है। उन्होंने कहा कि हमारी सरकार ने दुग्ध समितियां की संख्या बढ़कर दूध कलेक्शन को 50 लाख लीटर प्रतिदिन करने का लक्ष्य रखा है। जिन गांवों में समितियाँ नहीं बनी है, वहाँ भी समितियाँ गठित की जाएगी। मध्यप्रदेश में भोपाल, इंदौर, ग्वालियर, उज्जैन सहित कुल 6 दुग्ध सहकारी संघ संचालित हैं। इनके श्रेष्ठ प्रदर्शन, पारदर्शी नीतियों और डेयरी वैल्यू चेन को बढ़ाते हुए कार्य करेंगे। उन्होंने बताया कि प्रदेश में 6 करोड़ से अधिक पशुधन हैं। राज्य में गिर, साहीवाल जैसी गायों और दूध देने वाले पशुओं की संख्या बढ़ाने की आवश्यकता है। प्रदेश की गौशालाओं में उन्नत नस्ल की गायों से दूध उत्पादन बढ़ेगा। हमारे किसान भाइयों ने सहकारिता और पशुपालन के माध्यम से अपनी जिंदगी बदली है। प्रदेश में 3500 गौशाला है, इनमें 5 लाख से अधिक गौवंश का संरक्षण हो रहा है। उन्होंने कहा कि प्रदेश के प्रत्येक ब्लॉक में वृंदावन ग्राम विकसित किए जा रहे हैं। वृंदावन ग्रामों में उन्नत नस्ल के पशुपालन, दुग्ध उत्पादन, प्राकृतिक खेती को बढ़ावा दिया जा रहा है।

    गौपालकों को बनायेंगे समृद्ध

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि हम गौपालकों को समृद्ध और गौपालन को प्रकृति एवं पर्यावरण के प्रति प्रेम का अनुपम उदाहरण बनाएंगे। दूध उत्पादन को व्यक्तिगत स्तर और गौशालाओं के जरिए भी बढ़ाया जा रहा है। नगर निगम क्षेत्र में स्थित गौशालाओं को भी अनुदान 20 रू. प्रति गाय से बढ़ाकर 40 रू. प्रति गाय कर दिया गया है। राज्य में डॉ. भीमराव अंबेडकर कामधेनु योजना की शुरुआत की गई है। इसके अंतर्गत 40 लाख रुपए ऋण लेकर 25 गाय पालने पर सरकार 10 लाख रुपए की सब्सिडी दे रही है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेशवासियों को 21 साल बाद मप्र सुगम परिवहन बस सेवा की सौगात मिली है। मध्यप्रदेश में स्वामित्व अधिकार अभिलेख निष्पादन योजना के अंतर्गत 50 लाख से अधिक पट्टेधारियों की पक्की रजिस्ट्रियां कराकर उन्हें नि:शुल्क रजिस्ट्रियाँ प्रदान की जा रही हैं।

    वरिष्ठ विधायक एवं प्रदेशाध्यक्ष  हेमन्त खंडेलवाल ने कहा कि केंद्रीय मंत्री  शाह ने देश में सहकारिता को एक नई दिशा दे दी है। मध्यप्रदेश में नई दुग्ध क्रांति की शुरुआत की गई है। अब तक 1700 से अधिक दुग्ध सहकारी समितियां बनाई जा चुकी हैं। सांची और नेशनल डेयरी डेवलपमेंट बोर्ड के बीच हुए एमओयू के बाद प्रदेश में दूध का कलेक्शन 12 लाख लीटर प्रतिदिन पर पहुंच गया है। प्रदेश के गौपालकों को अब दूध का 8.50 रूपए प्रति लीटर अधिक दाम मिल रहा है। दूध उत्पादन से पशुपालकों की आय बढ़ी है। गोबर से बायोगैस एवं खाद और सहकार से समृद्धि आए, केन्द्रीय मंत्री  शाह के मार्गदर्शन में राज्य सरकार इसी उद्देश्य से कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि हम सब मिलकर मध्यप्रदेश में भी दूध से आय आधारित अर्थव्यवस्था बनाएंगे। इससे युवाओं को बड़ी मात्रा में रोजगार भी मिलेगा।

    खेल एवं युवा कल्याण तथा सहकारिता मंत्री  विश्वास कैलाश सारंग ने सभी का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि सहकारिता हमारा धर्म है और हमारी सरकार इसी धर्म के पालन में केन्द्र सरकार के नेतृत्व में आगे बढ़ रही है।

    सम्मेलन में उप मुख्यमंत्री  जगदीश देवड़ा, उप मुख्यमंत्री  राजेन्द्र शुक्ल, कृषि कल्याण किसान एवं विकास मंत्री  एदल सिंह कंषना, पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक कल्याण राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) मती कृष्णा गौर, भोपाल सांसद  आलोक शर्मा, विधायकगण  रामेश्वर शर्मा,  भगवान दास सबनानी,  विष्णु खत्री, महापौर मती मालती राय, एमडी कृभको  एसएस यादव, अन्य जनप्रतिनिधिगण तथा भोपाल सहित निकटवर्ती रायसेन, सीहोर, विदिशा, राजगढ़, नर्मदापुरम एवं हरदा जिले की सभी दुग्ध सहकारी समितियों से जुड़े हजारों गौपालक सदस्य उपस्थित थे।

    केंद्रीय मंत्री  शाह ने किसान कल्याण वर्ष पर केन्द्रित प्रदर्शनी का किया अवलोकन

    केन्द्रीय मंत्री  अमित शाह ने राज्य स्तरीय गौपालक सम्मेलन में सहभागिता करने से पहले मौके पर ही राज्य सरकार द्वारा मनाए जा रहे किसान कल्याण वर्ष 2026 पर केन्द्रित विकास प्रदर्शनी का भी अवलोकन किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने केन्द्रीय सहकारिता मंत्री को वर्तमान में मनाए जा रहे कृषक कल्याण वर्ष और बलराम कृषि महोत्सव के माध्यम से प्रदेश के किसानों की बेहतरी के लिए किए जा रहे प्रयासों की जानकारी दी। 

  • सोने के दाम में तेज गिरावट, ग्लोबल मार्केट में 3.4% की टूट; भारत में कितना है 22-24 कैरेट का भाव?

    सोने के दाम में तेज गिरावट, ग्लोबल मार्केट में 3.4% की टूट; भारत में कितना है 22-24 कैरेट का भाव?

    मुंबई 
    सोने की कीमतों में इन दिनों एक दिलचस्प तस्वीर देखने को मिल रही है. अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमत इस हफ्ते करीब 3.4% नीचे आ चुकी है, लेकिन भारत के कई बड़े शहरों में 3 अक्टूबर की सुबह सोने के भाव अब भी ऊंचे स्तर पर बने हुए हैं. दिल्ली में 24 कैरेट सोना ₹1,50,460 प्रति 10 ग्राम और 22 कैरेट ₹1,37,910 प्रति 10 ग्राम पर है। 

    मुंबई, कोलकाता और चेन्नई में 3 अक्टूबर को 24 कैरेट सोने का भाव ₹1,50,290 प्रति 10 ग्राम रहा, जबकि 22 कैरेट सोना ₹1,37,760 प्रति 10 ग्राम पर रहा. बड़े शहरों में सोने के भाव में बहुत ज्यादा अंतर नहीं दिख रहा है, लेकिन दिल्ली समेत कुछ शहरों में रेट थोड़ा ऊपर है। 

    पुणे, बेंगलुरु और हैदराबाद में भाव

    पुणे, बेंगलुरु और हैदराबाद में 24 कैरेट सोना ₹1,50,290 प्रति 10 ग्राम पर रहा. वहीं 22 कैरेट का भाव ₹1,37,760 प्रति 10 ग्राम रहा। 

    अहमदाबाद और भोपाल में क्या भाव
    अहमदाबाद में 24 कैरेट सोने का भाव ₹1,50,360 प्रति 10 ग्राम रहा. 22 कैरेट सोना ₹1,37,810 प्रति 10 ग्राम पर रहा. भोपाल में भी 24 कैरेट सोना ₹1,50,360 और 22 कैरेट ₹1,37,810 प्रति 10 ग्राम रहा। 

    जयपुर, लखनऊ और चंडीगढ़ में रेट
    जयपुर, लखनऊ और चंडीगढ़ में 24 कैरेट सोना ₹1,50,460 प्रति 10 ग्राम पर रहा. वहीं 22 कैरेट का भाव ₹1,37,910 प्रति 10 ग्राम रहा। 

    ग्लोबल बाजार में सोना 3.4% नीचे
    अब अंतरराष्ट्रीय बाजार पर नजर डालें तो यहां तस्वीर थोड़ी अलग है. 3 अक्टूबर की सुबह हाजिर सोना (Spot Gold) 4,140.06 डॉलर प्रति औंस पर रहा. इस हफ्ते अब तक इसकी वैश्विक कीमत करीब 3.4% गिर चुकी है. ग्लोबल बाजार में सोने पर दबाव है, लेकिन भारत में भाव अभी भी काफी ऊंचे हैं. इसकी वजह यह है कि घरेलू सोने की कीमत सिर्फ अंतरराष्ट्रीय भाव से तय नहीं होती. डॉलर-रुपया एक्सचेंज रेट, आयात लागत, टैक्स और स्थानीय मांग जैसे कई दूसरे कारक भी घरेलू रेट को प्रभावित करते हैं। 

    HSBC ने घटाया सोने का अनुमान
    न्यूज एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक, HSBC ने 2026 और 2027 के लिए सोने की औसत कीमत के अपने अनुमान में कटौती की है. बैंक ने 2026 के लिए औसत कीमत का अनुमान 4,490 डॉलर प्रति औंस और 2027 के लिए 4,825 डॉलर प्रति औंस रखा है. HSBC का मानना है कि निकट भविष्य में सोने की कीमत पर और दबाव आ सकता है. हालांकि, अगर कीमतें नीचे आती हैं तो खरीदारी भी लौट सकती है। 

    HSBC के मुताबिक, अगर अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमत करीब 4,000 डॉलर प्रति औंस या उससे नीचे आती है, तो केंद्रीय बैंकों की तरफ से सोने की खरीदारी फिर बढ़ सकती है. यानी बाजार के लिए 4,000 डॉलर का स्तर आगे महत्वपूर्ण रह सकता है. कीमत वहां तक जाती है या नहीं और अगर जाती है तो खरीदारी कितनी लौटती है, इस पर नजर रहेगी। 

    चांदी का क्या हाल है?
    सोने के साथ चांदी के भाव में भी बदलाव देखने को मिल रहा है. 3 अक्टूबर की सुबह देश में चांदी का भाव ₹2,34,900 प्रति किलोग्राम रहा. अंतरराष्ट्रीय बाजार में हाजिर चांदी करीब 60.36 डॉलर प्रति औंस पर रही. इसी साल जनवरी में देश में चांदी ₹4 लाख प्रति किलोग्राम के रिकॉर्ड स्तर तक पहुंची थी. मौजूदा भाव उस रिकॉर्ड ऊंचाई से काफी नीचे है।