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  • 80 साल बाद अमेरिका ने बनाई नई स्थिति, सबसे बड़ा तेल विक्रेता बना, पूरी दुनिया में संकट

    80 साल बाद अमेरिका ने बनाई नई स्थिति, सबसे बड़ा तेल विक्रेता बना, पूरी दुनिया में संकट

    वाशिंगटन

    दुनियाभर में चल रही उथल-पुथल के बीच एक बहुत बड़ी खबर सामने आई है. दूसरे विश्व युद्ध के बाद पहली बार ऐसा हुआ है कि अमेरिका दुनिया को तेल बेचने के मामले में एक नया रिकॉर्ड बनाने के करीब पहुंच गया है. असल में ईरान (Iran) के साथ जारी तनाव और युद्ध की वजह से खाड़ी देशों से होने वाली तेल की सप्लाई रुक गई है. ऐसे में पूरी दुनिया की नजरें अब अमेरिका पर टिकी हैं और उसके यहां से रिकॉर्ड मात्रा में कच्चा तेल एक्सपोर्ट हो रहा है। 

    अमेरिका और इजरायल का ईरान के साथ बढ़ता तनाव ही इसकी मुख्य वजह है, क्योंकि इसके चलते दुनिया के एनर्जी मार्केट में अब तक की सबसे बड़ी रुकावट आई है. ईरान ने समुद्र के रास्ते होने वाली सप्लाई को रोकने की धमकी दी है. स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) के रास्ते दुनिया का करीब 20 प्रतिशत तेल और गैस का व्यापार अटक गया है. जब एशिया और यूरोप के देशों को वहां से तेल मिलना बंद हुआ, तो उन्होंने अपनी जरूरत पूरी करने के लिए अमेरिका का रुख किया. अमेरिका इस समय दुनिया का सबसे बड़ा तेल उत्पादक देश है और वहां से तेल की मांग अचानक बहुत बढ़ गई है। 

    सात महीनों में सबसे ज्यादा तेल एक्सपोर्ट
    रायटर्स की एक रिपोर्ट में लेटेस्ट सरकारी आंकड़ों के मुताबिक लिखा गया है कि पिछले हफ्ते अमेरिका ने करीब 52 लाख बैरल कच्चा तेल रोजाना दूसरे देशों को भेजा. यह पिछले सात महीनों में सबसे ज्यादा है. अगर हम उसके आयात और निर्यात के अंतर को देखें, तो यह घटकर सिर्फ 66,000 बैरल रोजाना रह गया है. इसका मतलब है कि अमेरिका अब जितना तेल मंगाता है, लगभग उतना ही दुनिया को बेच भी रहा है. केवल 66,000 बैरल का फर्क है. 1943 के बाद यह पहला मौका है, जब अमेरिका कच्चे तेल का नेट एक्सपोर्टर (Net Exporter) बनने के काफी करीब है। 

  • TCS केस के पीड़ित का खुलासा: ‘बच्चा चाहिए तो पत्नी को भेज दो…’, आरोपियों की बर्बर बातें सामने आईं

    TCS केस के पीड़ित का खुलासा: ‘बच्चा चाहिए तो पत्नी को भेज दो…’, आरोपियों की बर्बर बातें सामने आईं

     नासिक

    नासिक की एक नामी कंपनी (TCS BPO) के गलियारों से एक ऐसी खबर आई है जिसे सुनकर कलेजा कांप जाए. इसे आप सिर्फ एक दफ्तर का विवाद मत कहिए, यह सीधे तौर पर एक इंसान की अस्मिता और उसके विश्वास पर हमला है. इंडिया टुडे के पास उस पीड़ित कर्मचारी का वो एक्सक्लूसिव बयान है, जिसमें उसने अपनी रूह को छलनी कर देने वाली आपबीती सुनाई है. पीड़ित का आरोप है कि उसके टीम लीडर्स ने उसे जबरन नमाज पढ़ने, कलमा बोलने और टोपी पहनने पर मजबूर किया. लेकिन हैवानियत की हद तो तब पार हो गई जब पीड़ित की निजी जिंदगी का मजाक उड़ाते हुए आरोपी टीम लीडर ने सरेआम कह दिया कि 'इलाज के बाद भी तुम्हारी पत्नी मां नहीं बन पाई, अगर बच्चा चाहिए तो अपनी पत्नी को मेरे पास भेज दो। 

    पीड़ित ने बताया कि यह मानसिक प्रताड़ना साल 2022 में शुरू हुई. जब उसने कंपनी जॉइन की, तो उसके टीम लीडर तौसीफ अत्तारी और साथी दानिश शेख ने उसे अपने टारगेट पर ले लिया. चूंकि तौसीफ टीम लीडर था, तो उसके पास ताकत थी और पीड़ित की मजबूरी थी कि उसे हर निर्देश मानना पड़ता था. तौसीफ अक्सर अपना और दानिश का काम भी उसी पीड़ित पर लाद देता ताकि वह थकान और काम के बोझ से दबा रहे. यह पीड़ित एक सीधा-साधा हिंदू है, जो रामदास स्वामी का भक्त है और नियम से रुद्राक्ष की माला पहनता है. बस उसकी यही धार्मिक पहचान तौसीफ और दानिश की आंखों में चुभने लगी। 

    कंपनी के अंदर ही मजहबी बहस का एक ऐसा सिलसिला शुरू हुआ जिसका मकसद सिर्फ नीचा दिखाना था. अक्सर काम के बीच में तौसीफ और दानिश उसे घेर लेते और हिंदू देवी-देवताओं का मजाक उड़ाते. वे सीधे सवाल करते कि 'क्या तुम्हारे हिंदू धर्म में वाकई भगवान हैं? क्या कभी देखा है? भगवान जैसा कुछ नहीं होता, सिर्फ अल्लाह ही सच है.' वे हिंदू मान्यताओं को किस्से-कहानियां बताते और महाराष्ट्र की आन-बान-शान रहे महापुरुषों तक के लिए घटिया शब्दों का इस्तेमाल करते. पीड़ित ने बताया कि वे देवी-देवताओं के स्वरूप को लेकर ऐसी अश्लील बातें करते थे, जिन्हें सुनना किसी भी भक्त के लिए असहनीय था।

    'अपनी पत्नी को मेरे पास भेज दो'- टीम लीडर
    यह टॉर्चर सिर्फ जुबानी नहीं था, डराना-धमकाना भी इस प्रताड़ना का एक हिस्सा था. पीड़ित कट्टर शाकाहारी है, लेकिन तौसीफ और दानिश उसे रात की शिफ्ट के बाद जबरन होटल ले जाते. वहां उसे डराया जाता और दबाव डालकर नॉन-वेज खाने पर मजबूर किया जाता. जब वह मना करता, तो उसके संस्कारों का मजाक उड़ाया जाता. साल 2023 की ईद के दिन तौसीफ उसे अपने घर ले गया और उसकी मर्जी के बिना उसे मजहबी टोपी पहना दी. इतना ही नहीं, उससे जबरन नमाज पढ़वाई गई और उसका फोटो खींचकर कंपनी के आधिकारिक ग्रुप में डाल दिया गया ताकि उसे मानसिक तौर पर पूरी तरह तोड़ दिया जाए। 

    लेकिन दरिंदगी की इंतहा तो तब हुई जब इन लोगों ने पीड़ित की निजी जिंदगी के जख्मों को कुरेदना शुरू किया. पीड़ित और उसकी पत्नी के घर शादी के कई साल बाद भी संतान नहीं हुई थी. इस दुख का मजाक उड़ाते हुए तौसीफ और दानिश ने जो कहा, वो किसी भी सभ्य समाज के लिए कलंक है. उन्होंने पीड़ित से कहा कि 'इतना इलाज कराने के बाद भी तुम्हारी पत्नी मां नहीं बन पाई, एक काम करो अपनी पत्नी को मेरे पास भेज दो.' यह सुनते ही पीड़ित के सब्र का बांध टूट गया और कंपनी के अंदर ही भारी हंगामा हुआ. इस दौरान आरोपी तौसीफ ने इतना आपा खोया कि पीड़ित पर टेबल फैन उठाकर फेंक दिया और उसे जान से मारने की धमकी तक दे डाली। 

    पीड़ित का आरोप है कि तौसीफ, दानिश, शाहरुख और रजा मेमन का यह पूरा गुट सिर्फ उसे ही नहीं, बल्कि कंपनी की महिला कर्मचारियों को भी अपनी गंदी नजरों से नहीं बख्शता था. ये लोग महिला सहकर्मियों के चरित्र पर भद्दे कमेंट्स करते थे. जब पीड़ित के पिता को पैरालिसिस का अटैक आया, तब भी इन लोगों ने उसकी लाचारी का सौदा करना चाहा. उन्होंने कहा कि अगर वह इस्लाम कबूल कर ले, तो उसका बाप ठीक हो जाएगा. जब पीड़ित ने उनकी जी-हजूरी बंद कर दी, तो तौसीफ ने हेड ऑफिस में उसके खिलाफ झूठी रिपोर्ट्स भेजनी शुरू कर दीं ताकि उसे नौकरी से निकलवा सके। 

    साल 2022 से शुरू हुआ यह सिलसिला 23 मार्च 2026 तक बदस्तूर जारी रहा. यानी पूरे चार साल तक उस कर्मचारी ने कंपनी की चारदीवारी के भीतर जिस नर्क को झेला है, उसकी दास्तां रोंगटे खड़े कर देती है. हकीकत तो यह है कि तौसीफ अत्तारी, दानिश और उनके साथियों ने पहले तो पीड़ित के साथ मेल-जोल बढ़ाकर करीबी बनाई, लेकिन जल्द ही उनका असली और खौफनाक चेहरा सामने आ गया. इस दौरान उसे न केवल जबरन कलमा पढ़ने पर मजबूर किया गया, बल्कि उसकी आस्था के प्रतीक 
    रुद्राक्ष की माला उतारने का भी भारी दबाव बनाया गया। 

    देखा जाए तो हर मोड़ पर पीड़ित के धर्म को बदलने की एक सोची-समझी साजिश रची जा रही थी. साफ तौर पर इन सबका मकसद उसे मानसिक रूप से इतना लाचार कर देना था कि वह टूटकर हार मान ले और धर्मांतरण के लिए तैयार हो जाए. इतना ही नहीं, जब पीड़ित ने उनके इस धर्मांतरण के खेल और जबरन नॉन-वेज खिलाने की कोशिशों का विरोध किया, तो उसे कंपनी में जानबूझकर निशाना बनाया जाने लगा. वे छोटी-छोटी बातों पर उससे झगड़ा करते और उसे उकसाने की कोशिश करते थे। 

    हालांकि, जुल्म की भी एक हद होती है और आखिरकार पीड़ित ने अपनी खामोशी तोड़कर कानून का दरवाजा खटखटाया. जिसके चलते अब उसने संबंधित लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग करते हुए शिकायत दर्ज कराई है. सच तो यह है कि यह पूरा मामला अब चीख-चीख कर गवाही दे रहा है कि कैसे कॉरपोरेट जगत की चमचमाती चकाचौंध के पीछे धर्मांतरण और नफरत का यह घिनौना खेल खेला जा रहा था। 

     

  • अमित शाह का सदन में हमला: ‘सपा मुस्लिम महिलाओं को दे दे टिकटें’, मुसलमानों के आरक्षण को बताया गैरसंवैधानिक

    अमित शाह का सदन में हमला: ‘सपा मुस्लिम महिलाओं को दे दे टिकटें’, मुसलमानों के आरक्षण को बताया गैरसंवैधानिक

    नई दिल्ली

     संसद का विशेष सत्र आज यानी गुरुवार 16 अप्रैल 2026 से शुरू हो रहा है. स्‍पेशल सेशन में नारी शक्ति वंदन अधिनियम यानी महिला आरक्षण कानून में संशोधन को लेकर विधेयक पेश किया जाएगा. इसके साथ ही परिसीमन से जुड़ा विधेयक भी पेश किए जाने की संभावना है. इसको लेकर सत्‍ता पक्ष और विपक्ष में लामबंदी तेज हो गई है. लोकसभा में कुल मिलाकर तीन विधेयक पेश किया जाएगा. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी लोकसभा को संबोधित कर सकते हैं. विपक्षी दल लाए जा रहे विधेयक का विरोध करने की तैयारी कर रहे हैं. विपक्ष का कहना है कि वह महिला आरक्षण के समर्थन में हैं, लेकिन इससे जुड़े परिसीमन का विरोध करते हैं. अब NDA यानी नेशनल डेमोक्रेटिक अलायंस के पास लोकसभा में संशोधन विधेयक के लिए आंकड़ा फिलहाल नहीं है. ऐसे में सत्तारूढ़ गठबंधन को संविधान (131वां संशोधन) विधेयक, 2026 के लिए विपक्ष की कड़ी चुनौती का सामना करना पड़ सकता है. दूसरी तरफ, लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण लागू करने के लिए गुरुवार को एक विधेयक संसद में पेश किया जाएगा, जिसमें संसद के निचले सदन में सदस्यों की मौजूदा संख्या 543 से बढ़ाकर 850 करने का प्रस्ताव है. इसके साथ ही सरकार परिसीमन आयोग के गठन के लिए भी एक विधेयक तथा इनसे संबंधित केंद्र शासित प्रदेश कानून (संशोधन विधेयक), 2026 लाने की तैयारी में है। 

    अमित शाह ने अखिलेश यादव के बयान पर किया पलटवार
    अमित शाह ने कहा कि, मुस्लिमों को धर्म के आधार पर आरक्षण गैर संवैधानिक है, इसका सवाल ही पैदा नहीं होता. अखिलेश यादव बोले कि आपने अनडेमोक्रेटिक बात कही है. धर्म की बात कही होगी. पूरा देश आधी आबादी को आरक्षण चाहता है. मैं जानना चाहता हूं कि मुस्लिम महिलाओं के लिए क्या. अमित शाह ने कहा- समाजवादी पार्टी पूरी टिकटें मुस्लिम महिलाओं को दे दे, हमें कहां आपत्ति है। 

    कुछ बयान चिंता पैदा कर रहे हैं – अमित शाह
    सपा सांसद अखिलेश यादव ने कहा कि जनगणना क्यों नहीं करा रहे. आप धोखा देकर ये बिल लाना चाहते हैं. इस पर अमित शाह ने कहा- अध्यक्ष जी सदन की कार्रवाई को पूरा देश देख रहा हैय कुछ बयान ऐसे किए गए जो जनता में चिंता पैदा कर रहे हैं. अखिलेश पूछ रहे हैं जनगणना क्यों नहीं हो रही है। मैं देश को बताना चाहता हूं जनगणना जारी है. उन्होंने कहा कि हम जातीय जनगणना की मांग करेंगे. मैं बताना चाहता हूं कि सरकार इसका भी निर्णय ले चुकी है। और जाति के साथ ही यह जनगणना हो रही है। 

    सपा ने किया परिसीमन बिल का विरोध

    लोकसभा में परिसीन बिल पेश होते ही हंगामा शुरू हो गया है. सपा सांसद धर्मेंद्र यादव ने बिल का विरोध करते हुए कहा कि देश के संविधान में हम संसद को पावर इस बात की दी गई है कि संविधान की रक्षा करें, सुरक्षा करें, लेकिन सभापति जी आज ऐसे बिल आए हैं कि जो हमारे संविधान को ही तोड़-मरोड़ रहे हैं और इसका हम समाजवादी पार्टी के लोग पुरजोर विरोध करते हैं.  सभापति जी जिस तरह से डिलिमिटेशन को जनगणना से पृथक किया जा रहा है. ये मैं समझता हूं कि ये संविधान की भावनाओं के पूरी तरह से विरोध में हैं. समाजवादियों से बड़ा महिलाओं का हितैषी इस देश की कोई पार्टी नहीं है. आज भी आपसे ज्यादा सदस्य हमारे पास हैं. इसलिए सभापति जी आपके माध्यम से सरकार से अनुरोध है कि इस बिल को संविधान संशोधन बिल को परिसीमन बिल को केंद्र आज संशोधन बिल को वापस लिया जाए। 

    महिला आरक्षण संशोधन विधेयक पर बयानबाजी भी बढ़ गई है. भाजपा सांसद अनुराग ठाकुर ने कहा, ‘मैं नारी शक्ति वंदन अधिनियम के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कमिटमेंट के लिए उनका शुक्रिया अदा करता हूं, ताकि भारतीय महिलाओं को उनके अधिकार मिल सकें. यह मांग लंबे समय से उठाई जा रही थी लेकिन पूरी नहीं हुई. कांग्रेस, जिसने कई सालों तक और हाल ही में 2004 से 2014 तक राज किया, उसने सिर्फ वादे किए. सोनिया गांधी और राहुल गांधी उन्हें पूरा करने में फेल रहे. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने वादे पूरे किए हैं. यह भारतीय जनता पार्टी का महिला सशक्तीकरण के लिए कमिटमेंट है. NDA के सभी घटक पूरी ताकत से एक साथ खड़े रहे हैं. पिछली बार यह बिना किसी विरोध के पास हो गया था, लेकिन इस बार कांग्रेस और दूसरी विपक्षी पार्टियां इसका राजनीतिकरण कर रही हैं. वे एक बार फिर महिलाओं को उनके अधिकार मिलने से रोकने की कोशिश कर रहे हैं। 

    विपक्ष पर क्‍या आरोप
    अनुराग ठाकुर ने कहा कि विपक्षी दल एक के बाद एक बहाने ढूंढ रहे हैं. सच तो यह है कि कांग्रेस और दूसरी पार्टियां महिला सशक्तीकरण के पक्ष में नहीं लगतीं, लेकिन कुछ भी हो महिलाओं को उनके अधिकार मिलने चाहिए. प्रधानमंत्री बनने के बाद से मोदी ने महिलाओं के लिए न्याय पक्का किया है. कांग्रेस ने हमेशा देश को बांटने की कोशिश की है, कभी जाति, धर्म और कभी इलाके के आधार पर. भाजपा सांसद ने आगे कहा कि आज भी कांग्रेस के कुछ साथी यह तर्क देते हैं कि दक्षिणी राज्यों में सीटें कम हो जाएंगी. हम बड़ी जिम्मेदारी के साथ कहना चाहते हैं कि किसी का हक, किसी की सीटें कम नहीं हो रही हैं, बल्कि सबके साथ इंसाफ हो रहा है। 

     जातिगत जनगणना पर अमित शाह और अखिलेश यादव में बहस
    संसद विशेष सत्र लाइव: संसद में जनगणना और आरक्षण के मुद्दे पर उस समय तीखी बहस देखने को मिली, जब समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव ने केंद्र सरकार से जनगणना में देरी को लेकर सवाल उठाया. उन्होंने पूछा कि आखिर जनगणना का इंतजार क्यों नहीं किया जा रहा है, क्योंकि उनकी पार्टी जाति आधारित जनगणना की मांग लगातार कर रही है. इस पर जवाब देते हुए केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने स्पष्ट किया कि सरकार ने जनगणना का काम शुरू कर दिया है और इसमें जाति आधारित आंकड़े भी शामिल किए जाएंगे. उन्होंने कहा कि फिलहाल हाउसलिस्टिंग का कार्य चल रहा है और जब मुख्य जनगणना शुरू होगी, तब उसमें जाति का कॉलम भी जोड़ा जाएगा. अमित शाह ने आगे कहा कि सरकार का रुख स्पष्ट है और वह जाति के आधार पर आंकड़े जुटाने के लिए प्रतिबद्ध है. हालांकि, उन्होंने यह भी दोहराया कि धर्म के आधार पर आरक्षण को किसी भी सूरत में मंजूरी नहीं दी जा सकती. उन्होंने कहा कि मुस्लिम समुदाय को धर्म के आधार पर आरक्षण देना असंवैधानिक होगा. इस मुद्दे पर सदन में सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक देखने को मिली, जो आने वाले समय में जनगणना और आरक्षण की राजनीति को और गर्मा सकती है। 

     सपा सांसद धर्मेंद्र यादव को अमित शाह ने दिया करारा जवाब
    सपा सांसद धर्मेंद्र यादव ने महिला आरक्षण संशोधन विधेयक पर बहस में हिस्‍सा लेते हुए कहा कि इसमें मुसलमान महिलाओं के लिए आरक्षण का प्रावधान हो. इसका जवाब देते हुए अमित शाह ने कहा कि मुसलमानों को धर्म के आधार पर आरक्षण देना पूरी तरह से गैरसंवैधानिक है। 

     लोकसभा में अमित शाह बोले- विपक्ष को कस कर जवाब देंगे
    महिला आरक्षण संशोधन विधेयक को 16 अप्रैल 2026 को लोकसभा में पेश किया गया. कांग्रेस की तरफ से जब केके वेणुगोपाल ने बात रखी तो केंद्रीय मंत्री अमित शाह ने उनको जवाब दिया. अमित शाह ने स्‍पीकर ओम बिरला से कहा कि वे बहुत दयालु हैं और विपक्षियों को ज्‍यादा वक्‍त दीजिएगा. साथ ही कहा कि वे विपक्ष को कस कर जवाब देंगे। 

     संसद में विपक्षी दलों के नेताओं का महाजुटान, बैठक में राहुल गांधी भी शामिल

     संसद में विपक्षी दलों के फ्लोर लीडर्स की महत्वपूर्ण बैठक शुरू हो गई है. इस बैठक में कांग्रेस नेता राहुल गांधी और पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे पहुंच चुके हैं. वहीं तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) की ओर से सागरिका घोष भी बैठक में शामिल हो रही हैं. माना जा रहा है कि बैठक में मौजूदा सत्र के दौरान सरकार को घेरने की रणनीति, विभिन्न विधेयकों पर साझा रुख और संसद के भीतर समन्वय को लेकर चर्चा होगी. विपक्षी एकता को मजबूत करने और प्रमुख मुद्दों पर संयुक्त आवाज उठाने के लिए यह बैठक अहम मानी जा रही है। 

     

     

  • राज्यपाल पटेल ने कहा: राज्य स्थापना दिवस पर मनाएं विविधता में एकता का उत्सव

    राज्यपाल पटेल ने कहा: राज्य स्थापना दिवस पर मनाएं विविधता में एकता का उत्सव

    राज्य स्थापना दिवस समारोह, विविधता में एकता की शक्ति का उत्सव : राज्यपाल पटेल

    राज्यपाल पटेल राजस्थान, ओडिशा और हिमाचल प्रदेश के स्थापना दिवस के संयुक्त कार्यक्रम में हुए शामिल
    लोक भवन में "एक भारत-श्रेष्ठ भारत" के तहत हुआ आयोजन

    भोपाल

    राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने कहा कि राज्यों का स्थापना दिवस कार्यक्रम, भारत की विविधता में एकता की शक्ति का उत्सव है। यह एक दूसरे की कला, संस्कृति, इतिहास और विकास से परिचय कराता है। सभी में आपसी सदभाव, प्रेम और भाईचारा बढ़ाता है। उन्होंने कहा कि आयोजन, देश की विभिन्नता में एकता की शक्ति को पहचानने और भावी पीढ़ी को परिचित कराने का भी माध्यम है। राज्यपाल पटेल ने कहा कि यह केवल तिथियों का आयोजन नहीं, बल्कि भारत की समृद्ध, ऐतिहासिक और सांस्कृतिक यात्रा का उत्सव भी है, जो हमें अपनी विरासत को संजोते हुए विकास के नए आयाम स्थापित करने की प्रेरणा देता है।

    राज्यपाल पटेल बुधवार को लोक भवन में राजस्थान, ओडिशा और हिमाचल प्रदेश के स्थापना दिवस के संयुक्त समारोह को संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर उन्होंने तीनों राज्यों के निवासियों को राज्य स्थापना दिवस की शुभकामनाएं दी। लोक भवन के सांदीपनि सभागार में आयोजित कार्यक्रम में राज्यपाल के प्रमुख सचिव डॉ. नवनीत मोहन कोठारी भी मौजूद थे।

    राज्यपाल पटेल ने कहा कि "एक भारत-श्रेष्ठ भारत" की संकल्पना प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की सराहनीय पहल है। यह विकसित भारत निर्माण की संकल्पना को साकार करने सभी राज्यों को एक साथ जोड़ने का प्रयास है। राज्यपाल पटेल ने तीनों राज्यों के प्रतिनिधियों से वर्ष 2047 तक भारत को विकसित बनाने में योगदान देने का आव्हान भी किया।

    स्वतंत्रता संग्राम सेनानी और महापुरूषों का किया स्मरण

    राज्यपाल पटेल ने राजस्थान, ओडिशा और हिमाचल प्रदेश के स्थापना दिवस समारोह में तीनों राज्यों के स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों और महापुरूषों का स्मरण किया। उन्होंने कहा कि स्वतंत्र भारत के निर्माण में राजस्थान के बालमुकुंद बिस्सा, अर्जुन लाल सेठी, केसरी सिंह बारहठ, विजय सिंह पथिक, जमनालाल बजाज, हीरालाल शास्त्री, सागरमल गोपा और माणिक्य लाल वर्मा जैसे सेनानियों का योगदान अमूल्य है। आजादी के संघर्ष में उड़ीसा के लक्ष्मण नाइक, मालती चौधरी, जमुनीबती पट्टनायक, सुरेंद्र साई और अटल बिहारी आचार्य का अदम्य साहस, देशभक्ति का प्रदर्शन राष्ट्र भक्तों के लिए प्रेरणा का प्रतीक है। हिमाचल प्रदेश में राम सिंह पठानिया ने अंग्रेजी शासन के खिलाफ विद्रोह का बिगुल फूंका। कांशीराम, जिन्हें “पहाड़ी गाँधी” कहा जाता है, ने जनजागरण और संघर्ष के माध्यम से स्वतंत्रता आंदोलन को नई दिशा दी। इसी प्रकार डॉ. वाई. एस. परमार, पदम देव, शिवानन्द रमौला, पूर्णानंद, सत्यदेव, सदाराम चंदेल, दौलत राम तथा ठाकुर हजारा सिंह का संघर्ष और बलिदान हर पीढ़ी के लिए प्रेरणा दायक है। राज्यपाल पटेल ने सभी नागरिकों, विशेषकर युवाओं से महान सेनानियों के त्याग, साहस और समर्पण से प्रेरणा लेने, राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भागीदारी निभाने तथा “एक भारत-श्रेष्ठ भारत” के संकल्प को साकार करने की अपील भी की।

    तीनों राज्यों की कला और संस्कृति अद्भुत

    राज्यपाल पटेल ने कहा कि राजस्थान की भक्ति परंपरा, मीरा के भजन, भव्य किले, लोक कला, संगीत, नृत्य, हस्तशिल्प, थार मरुस्थल और विभिन्न विश्व धरोहर स्थल भारत की वैश्विक पहचान है। भारत की आध्यात्मिक और स्थापत्य विरासत में भगवान जगन्नाथ की पावन भूमि ओडिशा और कोणार्क का सूर्य मंदिर हमारी सांस्कृतिक गरिमा के प्रतीक हैं। देवभूमि के रूप में प्रसिद्ध हिमाचल प्रदेश की अनुपम प्राकृतिक सुंदरता, स्वच्छ पर्यावरण, धार्मिक आस्थाएं और पौराणिक परंपराएं हमारी सांस्कृतिक विरासत को समृद्ध कर राष्ट्रीय पहचान को गौरवान्वित करती हैं।

    सशक्त, समृद्ध और आत्मनिर्भर भारत हमारा लक्ष्य

    राज्यपाल पटेल ने कहा कि हमारी भौगोलिक और सांस्कृतिक विशेषताएँ भले ही भिन्न हों लेकिन हमारा लक्ष्य सशक्त, समृद्ध और आत्मनिर्भर भारत होना चाहिए। उन्होंने कहा कि ओडिशा के खनिज संसाधन और औद्योगिक विकास, राजस्थान की नव-करणीय ऊर्जा, पर्यटन विकास तथा हिमाचल प्रदेश के पर्यावरणीय संरक्षण के समन्वित प्रयासों से ही ‘आत्मनिर्भर भारत’ का निर्माण संभव होगा।

    तीनों राज्यों की लोक, शास्त्रीय और संस्कृति की दिखी झलक

    राज्यपाल पटेल के समक्ष राजस्थान, ओडिशा और हिमाचल प्रदेश राज्य की लोक संस्कृति और शास्त्रीय परंपराओं पर आधारित प्रस्तुतियां दी गई। उन्होंने सभी आर्कषक सांस्कृतिक प्रस्तुतियों की सराहना की। राज्यपाल पटेल ने समारोह की सभी सांस्कृतिक प्रस्तुतियों में महिला और बेटियों की संपूर्ण सहभागिता को महिला सशक्तिकरण की मिसाल बताया। समारोह में राजस्थान सांस्कृतिक समाज की ओर से घूमर और कठपुतली नृत्य प्रस्तुत किया गया। राजस्थान राज्य के इतिहास और कला संस्कृति पर आधारित लघु फिल्म का प्रदर्शन किया गया। ओडिशा राज्य के राज्यपाल डॉ. हरि बाबू कंभम्पति का संदेश और राज्य की लघु फिल्म का प्रसारण किया गया। सांस्कृतिक प्रस्तुति के अंतर्गत शास्त्रीय नृत्य ओडिसी और उत्कल समाज की ओर से भगवान जगन्नाथ की स्तुति नृत्य हुआ। हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल कविंदर गुप्ता का लघु संदेश और लोक भवन हिमाचल प्रदेश की ऐतिहासिकता पर आधारित लघु फिल्म दिखाई गई। हिमाचल समाज जनसेवा समिति की ओर से राज्य की लोक, कला और भक्ति आधारित सांस्कृतिक प्रस्तुति दी गई।

    राज्यपाल पटेल का राजस्थान, ओडिशा और हिमाचल प्रदेश के मध्यप्रदेश में निवासरत प्रतिनिधियों ने अपने-अपने राज्यों की संस्कृति के अनुरूप पारंपरिक स्वागत किया। राज्यपाल पटेल को राजस्थानी पगड़ी, ओडिशा हस्तशिल्प, हिमाचली टोपी और फलों की टोकरी भेंट की गई। संयुक्त समारोह में पूर्व डी.जी.पी संतोष कुमार रावत, रमेश अग्रवाल, पुरूषोत्तम, तीनों राज्यों के प्रदेश में निवासरत नागरिक और लोक भवन के अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित थे।

     

  • योगी सरकार का बड़ा कदम: स्कूलों में शुरू होगा जल संरक्षण अभियान

    योगी सरकार का बड़ा कदम: स्कूलों में शुरू होगा जल संरक्षण अभियान

    योगी सरकार की पहल, स्कूलों से शुरू होगा 'जल संरक्षण अभियान'

    छात्रों और समाज में जल बचाने की व्यावहारिक आदत विकसित करना है उद्देश्य

    16 से 30 अप्रैल तक प्रदेश के सभी विद्यालयों एवं शैक्षिक संस्थानों में मनाया जाएगा ‘जल पखवाड़ा’

    – ‘जल शक्ति अभियान: कैच द रेन’ के अंतर्गत संचालित होगा अभियान, प्रत्येक दिन की गतिविधि की रिपोर्टिंग अनिवार्य

    लखनऊ
     योगी सरकार ने जल संरक्षण को लेकर निर्णायक पहल करते हुए इसे सीधे स्कूलों से जोड़ दिया है। ‘जल शक्ति अभियान’ के अंतर्गत 16 से 30 अप्रैल तक प्रदेश के सभी विद्यालयों एवं शैक्षणिक संस्थानों में ‘जल पखवाड़ा’ आयोजित किया जाएगा, जिसके माध्यम से लाखों छात्र जल संरक्षण के प्रति न केवल जागरूक होंगे, बल्कि जल बचाने की जिम्मेदारी भी सक्रिय रूप से निभाएंगे। इस पहल के जरिए जल संरक्षण को जनभागीदारी से जुड़ा अनिवार्य दायित्व बनाया जा रहा है, जिसकी शुरुआत स्कूली कक्षाओं से लेकर संपूर्ण समाज तक व्यापक प्रभाव डालेगी।

    अभियान की विशेषता इसकी सुदृढ़ मॉनिटरिंग व्यवस्था है। सभी विद्यालयों के लिए प्रतिदिन की गतिविधियों की ऑनलाइन रिपोर्टिंग अनिवार्य की गयी है। ट्रैकर के माध्यम से प्रतिभागियों की संख्या, गतिविधियों का विवरण तथा फोटो/वीडियो अपलोड करने होंगे। इसके लिए जनपद स्तर पर बेसिक शिक्षा अधिकारियों को नोडल अधिकारी नामित कर जवाबदेही सुनिश्चित की गई है।  योगी सरकार की मंशा जल संरक्षण अभियान को व्यापक जन आंदोलन का स्वरूप देने की है, ताकि समाज में जल संरक्षण के प्रति स्थायी सोच एवं व्यवहार विकसित हो सके।

    विद्यालयों की प्रार्थना सभा में 'जल शपथ'
    जल पखवाड़ा के दौरान विद्यालयों को जल संरक्षण केंद्र के रूप में विकसित किया जाएगा। इसके अंतर्गत जल संरक्षण विषय पर कार्यशालाएं आयोजित होंगी, जिनमें जल निगम, पंचायती राज, बेसिक शिक्षा और स्वास्थ्य विभाग की सहभागिता सुनिश्चित की जाएगी। साथ ही प्रतिदिन प्रार्थना सभा में ‘जल शपथ’ दिलाई जाएगी और छात्रों व अभिभावकों के बीच जल संरक्षण से जुड़ी जानकारियों का प्रसार किया जाएगा, ताकि यह अभियान घर-घर तक प्रभावी रूप से पहुंचे।

    निबंध, वाद-विवाद, प्रश्नोत्तरी, चित्रकला जैसी प्रतियोगिताओं से बढ़ाई जाएगी भागीदारी
    छात्रों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए निबंध, वाद-विवाद, प्रश्नोत्तरी, चित्रकला तथा अन्य रचनात्मक प्रतियोगिताओं का आयोजन किया जाएगा, जिससे उनमें जल संरक्षण के प्रति संवेदनशीलता और जिम्मेदारी की भावना विकसित हो सके। इसके अतिरिक्त प्रत्येक विद्यालय में पेयजल स्रोतों एवं जल भंडारण स्थलों की साफ-सफाई के लिए विशेष अभियान चलाया जाएगा। जल निगम की प्रयोगशालाओं के माध्यम से पेयजल की गुणवत्ता की जांच कर आवश्यक शुद्धिकरण भी सुनिश्चित किया जाएगा। इसके साथ ही विद्यालयों में जल संरक्षण विषयक फोटो प्रदर्शनी का आयोजन, विद्यार्थियों एवं अभिभावकों के बीच संवाद व जनजागरूकता गतिविधियों को भी शामिल किया गया है, जिससे यह अभियान व्यवहार परिवर्तन का माध्यम बन सके।

  • सेंसेक्स 78,111 पर बंद, 1263 अंक की बढ़त, निफ्टी 24,200 के पार

    सेंसेक्स 78,111 पर बंद, 1263 अंक की बढ़त, निफ्टी 24,200 के पार

    मुंबई 

    अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम होने के संकेत से भारतीय शेयर बाजार में जबरदस्त उछाल आया। बुधवार (15 अप्रैल) को सेंसेक्स-निफ्टी दिनभर हरे निशान पर थे। कारोबार के अंत में सेंसेक्स 1263.67 (1.64%) अंक की बढ़त के साथ 78,111.24 के स्तर पर बंद हुआ। वहीं निफ्टी 388.65 (1.63%) अंक की तेजी के साथ 24,231.30 के स्तर पर बंद हुआ।

    बाजार में तेजी के कारण…
    ट्रंप का बयान

    अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि ईरान के साथ युद्ध खत्म होने के करीब है, जिससे निवेशकों का भरोसा बढ़ा।

    कच्चे तेल में गिरावट
    ब्रेंट क्रूड नरम पड़ा, जिससे भारत जैसे तेल आयातक देश के लिए राहत की उम्मीद बढ़ी।

      India VIX में बड़ी गिरावट
    वोलैटिलिटी इंडेक्स 17% से ज्यादा गिरा यानी बाजार में डर कम हुआ और जोखिम लेने की भूख बढ़ी।
      शेयर बाजार के आंकड़ों के मुताबिक, विदेशी संस्थागत निवेशक (एफआईआई) सोमवार को बिकवाल रहे थे और उन्होंने 1,983.18 करोड़ रुपए के शेयर बेचे। हालांकि घरेलू संस्थागत निवेशकों (डीआईआई) ने 2,432.30 करोड़ रुपए के शेयर खरीदे। सेंसेक्स सोमवार को 0.91 प्रतिशत जबकि निफ्टी 0.86 प्रतिशत की गिरावट के साथ बंद हुआ था। बाबासाहेब आंबेडकर जयंती के उपलक्ष्य में मंगलवार को शेयर बाजार बंद थे। 

  • TCS केस का पर्दाफाश, 9 FIR में यौन उत्पीड़न और धार्मिक दबाव के आरोप –  HR निदा खान और धर्मांतरण मामले में नया मोड़

    TCS केस का पर्दाफाश, 9 FIR में यौन उत्पीड़न और धार्मिक दबाव के आरोप – HR निदा खान और धर्मांतरण मामले में नया मोड़

    नासिक
    नासिक की एक प्रमुख आईटी कंपनी में महिलाओं के साथ यौन उत्पीड़न का चौंकाने वाला मामला अब मानव तस्करी और जबरन धर्मांतरण तक पहुंच गया है. पुलिस ने कंपनी की एचआर अधिकारी समेत कुल छह लोगों को गिरफ्तार किया है. कुल नौ मामले दर्ज किए गए हैं. आरोपियों पर नौकरी, प्रेम और मदद का लालच देकर युवतियों का यौन शोषण करने का आरोप है। 

    पुलिस सूत्रों के अनुसार, आरोपी 2022 से दोस्ती के नाम पर युवतियों के साथ जाल बुन रहे थे. उन्होंने मानसिक और भावनात्मक दबाव बनाकर उनका शोषण किया. अब जांच में नया मोड़ आया है. पुलिस को पता चला है कि आरोपी पीड़ित युवतियों को मलेशिया बेचने की योजना बना रहे थे. वीडियो कॉल पर मलेशिया भेजने की चर्चा हुई थी. एक पीड़िता को सीधे मलेशिया भेजने की तैयारी चल रही थी, जिसमें पासपोर्ट बनाने की प्रक्रिया भी शुरू हो चुकी थी. मामले की जांच कर रही एसआईटी को महत्वपूर्ण सुराग मिले हैं. जांच में विदेशी फंडिंग, वित्तीय लेन-देन और बड़े रैकेट की आशंका जताई जा रही है. कुछ अधिकारियों को संदेह है कि इस पूरे मामले का राष्ट्रीय सुरक्षा से भी संबंध हो सकता है. पुलिस का मानना है कि अन्य कई महिलाओं को भी इसी तरह निशाना बनाया गया होगा। 

    कौन है निदा खान?
    निदा खान इस पूरे मामले की केंद्र बिंदु बन गई है. वह नासिक स्थित कंपनी की HR मैनेजर हैं और कंपनी की इंटरनल कमिटी (POSH एक्ट के तहत यौन उत्पीड़न रोकथाम समिति) का हिस्सा थीं. आरोप है कि कई शिकायतें उनके पास पहुंचीं, लेकिन उन्होंने उन्हें नजरअंदाज कर दिया या ऊपर नहीं भेजा. जांचकर्ताओं के मुताबिक POSH प्रोटोकॉल का पालन नहीं किया गया. निदा खान सावित्रीबाई फुले पुणे यूनिवर्सिटी (SPPU) की पूर्व छात्रा हैं. उनके लिंक्डइन प्रोफाइल के अनुसार वे HR मैनेजर के पद पर काम कर रही थीं. पुलिस के अनुसार निदा खान और तौसिफ अत्तर को इस मामले का मास्टरमाइंड माना जा रहा है. कुछ रिपोर्ट्स में कहा गया है कि निदा खान फिलहाल फरार है और पुलिस उसकी तलाश में तकनीकी और खुफिया जानकारी का इस्तेमाल कर रही है. पुलिस ने अंडरकवर ऑपरेशन चलाया था. सात महिला पुलिसकर्मी हाउसकीपिंग स्टाफ बनकर कंपनी में काम करती रहीं और आरोपियों की गतिविधियों पर नजर रखी. इसी ऑपरेशन के आधार पर कई शिकायतें सामने आईं और नौ एफआईआर दर्ज हुईं। 

    आरोपों की गंभीरता
    आरोपियों पर यौन उत्पीड़न, जबरन धर्मांतरण, मानव तस्करी और वित्तीय धोखाधड़ी जैसे गंभीर आरोप लगे हैं. पीड़ित युवतियों का कहना है कि उन्हें नामाज पढ़ने, गोमांस खाने और धर्म बदलने के लिए दबाव डाला गया. कंपनी के अंदर ही कुछ कर्मचारियों ने इस जाल को फैलाया. TCS कंपनी ने आरोपी कर्मचारियों को सस्पेंड कर दिया है. एसआईटी आरोपियों के बैंक लेन-देन, विदेशी संपर्क और संभावित रैकेट की गहराई से जांच कर रही है. पुलिस ने पीड़ितों के बयान दर्ज किए हैं. मामले में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं और SC/ST एक्ट की धाराओं के तहत कार्रवाई हो रही है। 

    TCS मामले में साजिश का खुलासा
    नासिक के TCS BPO कैंपस में कथित धर्म परिवर्तन और यौन उत्पीड़न का मामला लगातार गंभीर होता जा रहा है. अब तक इस मामले में 9 अलग-अलग एफआईआर दर्ज की जा चुकी हैं, जिनमें कई चौंकाने वाले आरोप सामने आए हैं. यह पूरा मामला एक पैटर्न की तरफ इशारा करता है, जिसमें महिला कर्मचारियों को निशाना बनाकर उनके साथ यौन शोषण और धार्मिक दबाव बनाया गया। 

    9 FIR में खुली साजिश की परतें
    पहली एफआईआर के अनुसार जुलाई 2022 से फरवरी 2026 के बीच आरोपियों दानिश शेख, तौसीफ अत्तर और निदा खान ने एक महिला कर्मचारी की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाई. आरोप है कि हिंदू देवी-देवताओं के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणी की गई. साथ ही तौसीफ अत्तर ने शादी का झांसा देकर कई बार शारीरिक संबंध बनाए. दानिश शेख पर भी कार्यालय में जबरन छूने और नजदीकी बढ़ाने की कोशिश करने का आरोप है। 

    सरी एफआईआर में मई 2023 से मार्च 2026 के बीच रजा मेमन और शाहरुख कुरैशी पर एक महिला कर्मचारी को घूरने, छूने और उसकी निजी जिंदगी पर आपत्तिजनक टिप्पणी करने का आरोप है. पीड़िता ने कई बार शिकायत की, लेकिन कंपनी के अधिकारी ने कोई कार्रवाई नहीं की, जिससे आरोपियों को बढ़ावा मिला। 

    तीसरी एफआईआर में शफी शेख पर मीटिंग के दौरान महिला कर्मचारी को घूरने और अश्लील व्यवहार करने का आरोप है. इसके अलावा तौसीफ अत्तर ने भी निजी जीवन को लेकर अपमानजनक टिप्पणियां कीं और शारीरिक नजदीकी बढ़ाने की कोशिश की। 

    चौथी एफआईआर के अनुसार मई 2025 से दिसंबर 2025 के बीच तौसीफ अत्तर ने महिला कर्मचारी से उसकी निजी जिंदगी से जुड़े सवाल पूछे और अश्लील इशारे किए. इसके अलावा हिंदू देवी-देवताओं को लेकर अपमानजनक टिप्पणी भी की गई, जिससे पीड़िता और अन्य कर्मचारी आहत हुए। 

    पांचवीं एफआईआर में आरोप है कि 2022 से मार्च 2026 के बीच तौसीफ अत्तर, दानिश, शाहरुख शेख और रजा मेमन ने मिलकर पीड़िता पर नमाज पढ़ने का दबाव बनाया और उसे मांस खाने के लिए मजबूर किया. साथ ही हिंदू धर्म और देवी-देवताओं का अपमान किया गया और धर्म परिवर्तन के लिए दबाव बनाया गया। 

    छठी एफआईआर में सितंबर 2024 से फरवरी 2026 के बीच आसिफ अंसारी और शफी शेख पर महिला कर्मचारी के शरीर को लेकर अश्लील टिप्पणी करने और गलत तरीके से छूने का आरोप है. इसके साथ ही तौसीफ अत्तर पर धार्मिक भावनाएं आहत करने का भी आरोप लगा है। 

    सातवीं एफआईआर के अनुसार जून 2025 से मार्च 2026 के बीच आसिफ अंसारी, शाहरुख कुरैशी, रजा मेमन, तौसीफ अत्तर और शफी शेख ने महिला कर्मचारी का पीछा किया, अश्लील टिप्पणियां कीं और छेड़छाड़ की। साथ ही धार्मिक भावनाओं को आहत करने के आरोप भी लगाए गए। 

    आठवीं एफआईआर में जनवरी 2025 से अब तक रजा मेमन और शफी शेख पर महिला कर्मचारी से उसकी इच्छा के खिलाफ निजी बातें करने, शादी का प्रस्ताव देने और शरीर को लेकर आपत्तिजनक टिप्पणी करने का आरोप है. दोनों पर बार-बार शारीरिक संपर्क बनाने की कोशिश करने का भी आरोप है। 

    नौवीं एफआईआर में जनवरी 2026 से 1 अप्रैल 2026 के बीच रजा मेमन और शाहरुख कुरैशी पर अश्लील टिप्पणियां करने, इशारे करने और पीड़िता की निजी जिंदगी में दखल देने का आरोप है. इसके अलावा लगातार नजर रखने और मानसिक दबाव बनाने की भी बात सामने आई है। 

    अब तक सामने आए आरोपियों में दानिश शेख, शफी शेख, तौसीफ अत्तर, शाहरुख हुसैन शौकत कुरैशी, रजा रफीक मेमन, आसिफ अंसारी, अश्विनी चैनानी और निदा खान के नाम शामिल हैं. इनमें से अश्विनी चैनानी को 15 अप्रैल तक पुलिस कस्टडी में भेजा गया है, जबकि निदा खान अभी फरार है. पुलिस उसे पकड़ने के लिए जगह-जगह छापेमारी कर रही है। 

    ऑफिस के अंदर महिलाओं को बनाया गया टारगेट
    13 अप्रैल को नासिक कोर्ट ने अश्विनी चैनानी की पुलिस कस्टडी बढ़ा दी. जांच में यह भी सामने आया है कि कंपनी के सर्वर से उसे भेजे गए 78 ईमेल की जांच की जा रही है. यह पता लगाने की कोशिश हो रही है कि ये ईमेल आधिकारिक थे या किसी साजिश का हिस्सा। 

    इसके अलावा जांच में यह भी सामने आया है कि अश्विनी चैनानी और तौसीफ अत्तर के बीच पिछले दो सालों में 38 बार बातचीत हुई थी. सरकारी वकीलों का आरोप है कि एक पीड़िता की शिकायत पर चैनानी ने कार्रवाई करने के बजाय उसे दबाने की कोशिश की और कहा कि तुमको क्या फेमस होना है। 

    मुख्य आरोपी फरार, SIT को बड़े नेटवर्क का शक
    जांच एजेंसियां अब इस मामले में विदेशी फंडिंग के एंगल की भी जांच कर रही हैं. संदिग्धों के बैंक खातों, ईमेल, कॉल रिकॉर्ड और व्हाट्सएप चैट की गहन जांच की जा रही है. यह मामला अब एक बड़े नेटवर्क की तरफ इशारा कर रहा है, जिसमें यौन शोषण और कथित धर्म परिवर्तन के आरोप जुड़े हुए हैं. जांच जारी है और आने वाले समय में और खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है। 

     

  • सम्राट चौधरी बने बिहार के मुख्यमंत्री, शपथ ग्रहण के साथ बीजेपी ने पहली बार बनाई अपनी सरकार

    सम्राट चौधरी बने बिहार के मुख्यमंत्री, शपथ ग्रहण के साथ बीजेपी ने पहली बार बनाई अपनी सरकार

    पटना 

    नीतीश कुमार के इस्तीफे के बाद बिहार की राजनीति में आज से सम्राट चौधरी का युग शुरू हो गया है. पहली बार बिहार में बीजेपी का मुख्यमंत्री बना है. सम्राट चौधरी बिहार के 24वें मुख्यमंत्री हैं. इस शपथ ग्रहण समारोह में बीजेपी अध्यक्ष नितिन नवीन, जेपी नड्डा और चिराग पासवान समेत कई बड़े नेताओं ने भाग लिया। 

    पटना के लोकभवन में बिहार के 24वें मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ग्रहण कर ली है. राज्यपाल सैय्यद अता हसनैन उन्हें पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई. बिहार के राजनीतिक इतिहास में ये पहली है, जब भारतीय जनता पार्टी का कोई नेता मुख्यमंत्री पद की जिम्मेदारी संभाली है. सम्राट चौधरी के साथ जेडीयू कोटे से विजय कुमार चौधरी और बिजेंद्र प्रसाद यादव डिप्टी सीएम के तौर पर शपथ ली. आज केवल इन तीन नेताओं का ही शपथ ग्रहण हुआ, जबकि नई एनडीए सरकार के गठन के बाद भी कैबिनेट में अभी 33 मंत्री पद खाली हैं. इस भव्य शपथग्रहण समारोह में बीजेपी अध्यक्ष नितिन नवीन, केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा, चिराग पासवान और जीतन राम मांझी विशेष रूप से मौजूद रहे। 

    सम्राट चौधरी की नई सरकार में बिजेंद्र प्रसाद यादव ने ली शपथ
    बिहार की नवनिर्वाचित सरकार में जेडीयू के कद्दावर और वरिष्ठ नेता बिजेंद्र प्रसाद यादव ने मंत्री पद की शपथ ली। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के नेतृत्व वाली इस नई टीम में बिजेंद्र यादव का शामिल होना सरकार के प्रशासनिक अनुभव को मजबूती प्रदान करेगा। वे दशकों से बिहार की राजनीति और सरकार का अहम हिस्सा रहे हैं, और उनके पास ऊर्जा जैसे महत्वपूर्ण विभागों को संभालने का लंबा अनुभव है।

    बिहार में भाजपा के लिए ऐतिहासिक पल, पहली बार बीजेपी का मुख्यमंत्री
    बिहार की राजनीति में आज एक नया युग शुरू हो रहा है, जहां पहली बार भाजपा का कोई नेता मुख्यमंत्री पद की कमान संभालने जा रहा। सम्राट चौधरी लोकभवन में शपथ लेकर ये ऐतिहासिक कीर्तिमान स्थापित करेंगे। हालांकि यह समारोह संक्षिप्त होगा, लेकिन इसका राजनीतिक महत्व काफी बड़ा है। सरकार के नए स्वरूप में जेडीयू कोटे से बिजेंद्र यादव और विजय चौधरी उपमुख्यमंत्री के रूप में शपथ लेंगे। बिहार के इतिहास में ये पहली बार होगा जब जदयू कोटे से दो उपमुख्यमंत्री सरकार का हिस्सा बनेंगे।

    डिप्टी सीएम के नाम पर संजय सरावगी ने लगाई मुहर
    बिहार भाजपा अध्यक्ष संजय सरावगी ने कहा कि बिहार को पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के 20 साल के कार्यकाल के बाद आज नए मुख्यमंत्री के रूप में सम्राट चौधरी और उपमुख्यमंत्री के रूप में विजय चौधरी और विजेंद्र यादव मिल रहे हैं। विकास की जो रेखा नीतीश कुमार ने खींची थी उसी रेखा को आगे बढ़ाने का काम सम्राट चौधरी के नेतृत्व में होगा।

    BJP का 46 साल का संघर्ष, पहली बार सीएम
    इससे पहले नीतीश कुमार ने अपना इस्तीफा सौंपा। महज 9 साल पहले बीजेपी में शामिल हुए सम्राट चौधरी बेहद मुखर और आक्रामक नेता माने जाने जाते हैं। 26 साल पहले विधायक चुने गए, 2024 में डिप्टी सीएम बने और 2025 में बीजेपी की प्रचंड जीत के बाद फिर डिप्टी सीएम की शपथ ली। अब उनके पास सीएम के तौर पर पूरे बिहार का शासन चलाने के साथ पार्टी और NDA गठबंधन को साथ रखने की भी चुनौती होगी। वहीं, बिहार की राजनीति में पहले जनसंघ और फिर बीजेपी हमेशा सक्रिय रही। बीजेपी पहले भी दो बार बड़ी पार्टी बनी लेकिन सीएम हमेशा नीतीश कुमार ही बने। ये पहला मौका है जब बीजेपी के पास सीटें भी ज्यादा हैं और सम्राट चौधरी के तौर पर उन्हें सीएम भी अपना मिला है। 

    डिप्टी सीएम बिजेंद्र यादव का सफरनामा

    सुपौल से 1990 से लगातार विधायक, 'कोसी का विश्वकर्मा' के नाम से मशहूर
    1991 में लालू सरकार में पहली बार बने मंत्री, 2005 में नीतीश के CM बनने के समय JDU के प्रदेश अध्यक्ष
    नीतीश कैबिनेट में कई बार बिजली मंत्री रहे
    वित्त, वाणिज्य कर जैसे विभाग भी संभाला, 2025 में लगातार नौवीं बार जीत दर्ज की
    2025 में कांग्रेस के मिन्नतुल्लाह रहमानी को हराया

        JDU के सबसे सीनियर नेताओं में एक, नीतीश के करीबी और थिंक टैंक में शामिल
        1982 से लगातार बिहार विधानसभा के सदस्य, दलसिंहसराय सीट से पहली बार चुनाव जीते
        सरायरंजन सीट से पहली बार 2010 में जीत दर्ज की, 2025 में सरायरंजन सीट से चुनाव जीते
        वित्त, शिक्षा, कृषि, ग्रामीण विकास जैसे विभाग संभाले
        2015 से 2020 तक विधानसभा के स्पीकर 
        साफ-सुथरी इमेज और कुशल प्रशासक की छवि

    बिहार के नए 'सम्राट' का सफरनामा

        RJD के साथ सियासी करियर की शुरुआत
        1999 में राबड़ी सरकार में मंत्री बने
        2000 में पहली बार परबत्ता से बने विधायक
        2013 में RJD से बगावत, JDU में एंट्री
        2 जून 2014 में मांझी सरकार में मंत्री बने
        मांझी को हटाने पर बगावत, JDU से सस्पेंड
        2017 में BJP में शामिल 2023 में बिहार BJP अध्यक्ष
        2021 में नीतीश कैबिनेट में बने मंत्री
        2024 में नीतीश सरकार में डिप्टी सीएम का जिम्मा
        तारापुर से जीता 2025 विधानसभा का चुनाव
        2025 में दूसरी बार डिप्टी सीएम बने
        15 अप्रैल 2026 को सीएम पद की शपथ

    967 में कर्पूरी बने थे मुख्‍यमंत्री 
    करीब 59 वर्षों बाद वे इस उपलब्धि को दोहराएंगे-इससे पहले 1967 में उप मुख्यमंत्री बने जननायक कर्पूरी ठाकुर ने 1977 में मुख्यमंत्री पद संभाला था।

    भाजपा के राज्यसभा सदस्य डॉ. भीम सिंह के अनुसार, बिहार की राजनीति में उप मुख्यमंत्री का पद हमेशा से सत्ता संतुलन का प्रतीक रहा है।

    1957 में श्रीकृष्ण सिंह की सरकार में पहली बार यह पद बनाया गया था, जब अनुग्रह नारायण सिन्हा को उप मुख्यमंत्री नियुक्त किया गया था।

    तब से अब तक लगभग 10 नेता इस पद पर रह चुके हैं, लेकिन कर्पूरी ठाकुर ही ऐसे नेता थे, जो आगे चलकर मुख्यमंत्री बने। अब सम्राट चौधरी इस सूची में दूसरा नाम जोड़ने जा रहे हैं।

    नीतीश युग में उप मुख्यमंत्रियों की भरमार
    नीतीश कुमार के दो दशक लंबे राजनीतिक दौर में बिहार में सबसे अधिक उप मुख्यमंत्री बनाए गए। इस सूची में सुशील कुमार मोदी, तारकिशोर प्रसाद, रेणु देवी, तेजस्वी यादव, विजय कुमार सिन्हा और सम्राट चौधरी जैसे नाम शामिल हैं।
    इनमें सुशील कुमार मोदी का कार्यकाल (2005–2013) सबसे लंबा रहा, लेकिन वे भी मुख्यमंत्री पद तक नहीं पहुंच सके।

     

     

  • लोकसभा में 850 सांसद होंगे, 3 नए बिलों के मसौदे पर सांसदों से चर्चा शुरू

    लोकसभा में 850 सांसद होंगे, 3 नए बिलों के मसौदे पर सांसदों से चर्चा शुरू

    नई दिल्ली
     केंद्र सरकार ने देश
    के लोकतांत्रिक ढांचे में बड़े बदलाव लाने वाले तीन प्रमुख विधेयकों का मसौदा सांसदों को दिया है. केंद्र सरकार संविधान (131वां संशोधन) विधेयक, परिसीमन विधेयक और केंद्र शासित प्रदेश कानून (संशोधन) विधेयक, 2026 जल्‍द पास कराने की तैयारी कर रही है. ये विधेयक आगामी जनगणना के आधार पर लोकसभा सीटों की संख्या बढ़ाकर अधिकतम 850 करने, निर्वाचन क्षेत्रों के नए सिरे से निर्धारण (Delimitation) और महिला आरक्षण को प्रभावी ढंग से लागू करने का वैधानिक मार्ग प्रशस्त करते हैं. सरकार के इस कदम के साथ ही दशकों से लंबित सीटों के पुनर्गठन और भाषाई व क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व की नई व्यवस्था पर औपचारिक मुहर लगने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। 

    वर्ष 2026 में पेश किए गए ये तीनों विधेयक भारत के चुनावी ढांचे और सीटों के पुनर्निर्धारण (Delimitation) में व्यापक बदलाव का प्रस्ताव करते हैं:

        संविधान (131वां संशोधन) विधेयक, 2026 (Bill 107): यह विधेयक लोकसभा में सीटों की संख्या को अधिकतम 815 (राज्यों से) और 35 (केंद्र शासित प्रदेशों से) तक बढ़ाने का प्रावधान करता है . इसके अलावा, यह ‘जनसंख्या’ की परिभाषा में बदलाव करता है ताकि निर्वाचन क्षेत्रों का पुनर्निर्धारण संसद द्वारा निर्धारित नवीनतम जनगणना के आधार पर किया जा सके। 

        परिसीमन विधेयक, 2026 (Bill 108): यह नवीनतम जनगणना के आंकड़ों के आधार पर लोकसभा और राज्य विधानसभाओं की सीटों के आवंटन और निर्वाचन क्षेत्रों के विभाजन के लिए एक परिसीमन आयोग के गठन का प्रावधान करता है . आयोग में सुप्रीम कोर्ट के वर्तमान या पूर्व न्यायाधीश अध्यक्ष होंगे। 

        केंद्र शासित प्रदेश कानून (संशोधन) विधेयक, 2026 (Bill 109): यह विधेयक पुडुचेरी, दिल्ली और जम्मू-कश्मीर के कानूनों में संशोधन करता है ताकि उन्हें नए परिसीमन नियमों और महिला आरक्षण (संविधान के अनुच्छेद 334A) के अनुरूप बनाया जा सके . इसके तहत पुडुचेरी में नामांकित सदस्यों की संख्या बढ़ाकर पांच करने का प्रस्ताव है, जिनमें से दो महिलाएं होंगी। 

    सांसदों को सौंपे गए तीनों विधेयक (संविधान संशोधन, परिसीमन, और केंद्र शासित प्रदेश कानून) यह स्पष्ट करते हैं कि भारत की चुनावी राजनीति अब तक के सबसे बड़े बदलाव की दहलीज पर है. इन दस्तावेजों के आधार पर मुख्य निष्कर्ष निम्नलिखित हैं:

    1. लोकसभा का ऐतिहासिक विस्तार (850 सीटें)
    विधेयकों का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा लोकसभा की सदस्य संख्या में भारी वृद्धि है। 

    ·         नई संरचना: संविधान (131वां संशोधन) विधेयक, 2026 के अनुसार, लोकसभा की सदस्य संख्या बढ़ाकर अधिकतम 850 करने का प्रस्ताव है. इसमें 815 सदस्य राज्यों से और 35 सदस्य केंद्र शासित प्रदेशों से होंगे। 

    ·         क्यों है यह बड़ा: वर्तमान में लोकसभा की अधिकतम संख्या 550 (प्रभावी 543) है. 300 से अधिक सीटों की यह वृद्धि पिछले कई दशकों का सबसे बड़ा लोकतांत्रिक विस्तार है। 

    2. ‘जनसंख्या’ की नई परिभाषा और जनगणना का आधार
    अब तक सीटों का आवंटन 1971 की जनगणना के आधार पर अटका हुआ था। 

    ·         नया फॉर्मूला: बिल 107 के माध्यम से अनुच्छेद 82 और 170 में संशोधन प्रस्तावित है. इसके तहत जनसंख्या का अर्थ अब वह नई जनगणना होगी जिसके आंकड़े संसद द्वारा निर्धारित किए जाएंगे। 

    ·         तात्पर्य: यह स्पष्ट संकेत है कि 2026 के बाद होने वाली पहली जनगणना ही नई सीटों के आवंटन का आधार बनेगी। 

    3. परिसीमन आयोग
    परिसीमन विधेयक, 2026 (Bill 108) एक शक्तिशाली परिसीमन आयोग के गठन का मार्ग प्रशस्त करता है। 

    ·         कार्य: यह आयोग तय करेगा कि जनसंख्या के अनुपात में किस राज्य को कितनी अतिरिक्त सीटें मिलेंगी। 

      संतुलन: इसमें न्यायिक और प्रशासनिक पारदर्शिता बनाए रखने के लिए सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीशों और चुनाव आयोग को शामिल किया गया है. यह आयोग उत्तर और दक्षिण भारत के राज्यों के बीच जनसंख्या आधारित प्रतिनिधित्व के असंतुलन को भी संबोधित करेगा। 

    4. महिला आरक्षण का व्यावहारिक क्रियान्वयन
    तीसरा विधेयक (Bill 109) केंद्र शासित प्रदेशों (दिल्ली, पुडुचेरी, जम्मू-कश्मीर) के कानूनों में बदलाव लाता है। 
     आरक्षण का लिंक: यह सुनिश्चित करता है कि 106वें संविधान संशोधन (नारी शक्ति वंदन अधिनियम) के तहत प्रस्तावित 33% महिला आरक्षण नए परिसीमन के साथ ही लागू हो.

    नामांकन: पुडुचेरी जैसे क्षेत्रों में महिला प्रतिनिधित्व बढ़ाने के लिए विशेष प्रावधान किए गए हैं। 

    5. एक नया राजनीतिक युग
    इन बिलों का विश्लेषण बताता है कि यह केवल सीटों की संख्या बढ़ाना नहीं है बल्कि:

    ·         प्रतिनिधित्व में सुधार: बढ़ती जनसंख्या के बावजूद एक सांसद पर कम आबादी का बोझ होगा, जिससे जमीनी स्तर पर काम बेहतर होगा। 

    ·         आधुनिक संसद: नई संसद की क्षमता (करीब 888 सीटें) के अनुरूप यह ढांचा तैयार किया गया है। 

    ·         चुनौती: उत्तर और दक्षिण के राज्यों के बीच सीटों के वितरण को लेकर होने वाली राजनीतिक बहस के लिए सरकार ने कानूनी ढाल तैयार कर ली है। 

  • MP Board Result 2026: लड़कियों की जीत, मेरिट लिस्ट में छात्राओं का राज, लड़के फिर रहे पीछे

    MP Board Result 2026: लड़कियों की जीत, मेरिट लिस्ट में छात्राओं का राज, लड़के फिर रहे पीछे

    भोपाल 
    मध्य प्रदेश माध्यमिक शिक्षा मंडल (MPBSE) ने शैक्षणिक सत्र 2025-2026 के लिए 10वीं और 12वीं बोर्ड परीक्षा का रिजल्ट आज, 15 अप्रैल को जारी कर दिया है. बता दें कि इस साल एमपी बोर्ड में 10वीं के लिए 9 लाख से ज्यादा और 12वीं के लिए 7 लाख से अधिक छात्रों ने हिस्सा लिया था. छात्र अपना परीक्षा परिणाम ऑफिशियल वेबसाइट mpbse.nic.in और mpresults.nic.in पर जाकर चेक कर सकते हैं। 

    माध्यमिक शिक्षा मंडल, मध्य प्रदेश ने वर्ष 2026 की 10वीं (हाईस्कूल) परीक्षा का परिणाम जारी कर दिया है। इस बार कुल 73.42% नियमित छात्र पास हुए हैं।पन्ना जिले की प्रतिभा सिंह सोलंकी ने 500 में से 499 अंक हासिल कर प्रदेश में पहला स्थान प्राप्त किया है।

    हाई स्कूल परीक्षा 13 फरवरी से 6 मार्च 2026 के बीच हुई थी। इसमें कुल 8,97,061 विद्यार्थी शामिल हुए, जिनमें 7,87,733 नियमित और 1,09,328 प्राइवेट परीक्षार्थी थे।

    छात्राओं का प्रदर्शन बेहतर
    इस बार भी छात्राओं का प्रदर्शन छात्रों से बेहतर रहा। छात्राओं का पास प्रतिशत 77.52% रहा, जबकि छात्रों का 69.31% दर्ज किया गया।

    सरकारी स्कूल आगे, परिणाम 76.80%
    शासकीय स्कूलों का परिणाम 76.80% रहा, जो निजी स्कूलों के 68.64% से अधिक है। इससे सरकारी स्कूलों के बेहतर प्रदर्शन का संकेत मिलता है।

    टॉपर्स में छात्राओं का दबदबा
    मेरिट लिस्ट में 378 विद्यार्थियों ने जगह बनाई, जिनमें 235 छात्राएं और 143 छात्र शामिल हैं।

    जिलावार प्रदर्शन: अनूपपुर 93.85% के साथ पहले स्थान पर
    जिलावार परिणाम में अनूपपुर 93.85% के साथ पहले और आलीराजपुर 92.14% के साथ दूसरे स्थान पर रहा।

    पूरक की जगह द्वितीय अवसर परीक्षा
    इस वर्ष पूरक परीक्षा की जगह द्वितीय अवसर परीक्षा का प्रावधान किया गया है। मुख्य परीक्षा में फेल, अनुपस्थित या अंक सुधारने वाले छात्र 7 मई 2026 से होने वाली इस परीक्षा में शामिल हो सकेंगे।

    2.89 लाख छात्र फेल
    कुल 2,89,693 छात्र फेल घोषित किए गए हैं, जबकि परीक्षा के दौरान 47 नकल के मामले सामने आए।

    इतने छात्र हुए पास
    मध्य प्रदेश बोर्ड ने इस साल का पास प्रतिशत भी जारी कर दिया है. पिछले साल के मुकाबले इस बार नतीजों में सुधार देखने को मिला है:

    10वीं बोर्ड: 78.14% छात्र पास हुए.

    12वीं बोर्ड: 76.22% छात्र सफल रहे। 

    यहां पर भी चेक कर सकते हैं रिजल्ट
    mpbse.nic.in
    mpbse.mponline.gov.in
    mpresults.nic.in

    डिजिलॉकर (DigiLocker) और MPBSE मोबाइल ऐप

    पिछले 5 सालों का रिकॉर्ड (12वीं बोर्ड)
    इस साल (2026) का कुल पास प्रतिशत 76.22% रहा है. पिछले सालों का रिकॉर्ड इस प्रकार है:

    2026: 76.22% 
    2025: 74.48%
    2024: 64.48%
    2023: 55.28%
    2022: 72.72%
    2021: (कोविड-19 की वजह से प्रमोटेड)
    2020: 68.81%

    मंत्री बोले- रिजल्ट 'फुलप्रूफ' रखा गया
    स्कूल शिक्षा मंत्री उदय प्रताप सिंह के अनुसार, रिजल्ट से पहले क्रॉस चेकिंग और वैरिफिकेशन तेजी से पूरा किया गया। हर स्तर पर जांच की गई, ताकि कोई गलती न रहे। रिजल्ट 'फुलप्रूफ' रखा गया है, जिससे छात्रों को परेशानी न हो।

    16 लाख से ज्यादा छात्र हुए शामिल इस वर्ष प्रदेश में 10वीं और 12वीं की बोर्ड परीक्षाओं में करीब 16 लाख से अधिक छात्र शामिल हुए हैं। इनमें लगभग 9 लाख 7 हजार विद्यार्थी 10वीं और करीब 7 लाख छात्र 12वीं की परीक्षा में बैठे। इतनी बड़ी संख्या को देखते हुए परीक्षा संचालन के लिए प्रदेशभर में 3856 परीक्षा केंद्र बनाए गए थे।

    MP Board 10th Result 2026: स्टूडेंट्स का पास प्रतिशत

    विद्यार्थी एमपी बोर्ड पास प्रतिशत
    रेगुलर स्टूडेंट्स कितने पास हुए 76.01%
    रेगुलर छात्रों का पास प्रतिशत 72.39%
    रेगुलर छात्राओं का पास प्रतिशत 79.41%
    कुल पास प्राइवेट स्टूडेंट्स 30.60%
    प्राइवेट छात्रों का पास परसेंट 31.27%
    प्राइवेट छात्राओं का पास परसेंट 30%

    कितने बच्चों ने दिया था पेपर
    एमपी बोर्ड 10वीं की परीक्षा इस साल कुल 897061 स्टूडेंट्स शामिल हुए थे। इसमें से रेगुलर बच्चे 787733 और स्वाध्यायी परीक्षार्थियों की संख्या 109328 थी।

    रिट लिस्ट में कितने स्टूडेंट्स
    मध्य प्रदेश हाई स्कूल रिजल्ट 2026 की मेरिट लिस्ट में इस बार 235 छात्राओं और 143 छात्रों ने जगह बनाई है। कुल मिलाकर 378 स्टूडेंट्स टॉप पर रहे हैं। जिनमें लड़कियां लड़कों से ज्यादा हैं।

     हाई स्कूल टॉपर प्रतिभा के मार्क्स कितने?
    एमपी बोर्ड 10वीं कक्षा में इस साल सरस्वती ज्ञान मंदिर हाई स्कूल गुनौर पन्ना की कुमारी प्रतिभा सिंह सोलंकी ने पहला स्थान हासिल किया है। उन्होंने 500 में से 499 अंक प्राप्त किए हैं।

    ऐसे चेक करें रिजल्ट 
    सबसे पहले बोर्ड की ऑफिशियल वेबसाइट mpresults.nic.in पर जाएं.
    होमपेज पर 'HSC (Class 10th)' या 'HSSC (Class 12th)' रिजल्ट लिंक पर क्लिक करें.
    अपना 9 अंकों का रोल नंबर और एप्लीकेशन नंबर दर्ज करें.
    कैप्चा कोड भरने के बाद 'Submit' बटन पर क्लिक करें.
    आपका रिजल्ट स्क्रीन पर होगा, इसे डाउनलोड करें.फेल होने पर निराश न हों, आ गई 'सेकंड मुख्य परीक्षा'
    बता दें कि मध्य प्रदेश बोर्ड के नियमों के अनुसार हर सब्जेक्ट में पास होने के लिए 33 प्रतिशत मार्क्स (पहले 35% का चर्चा थी, लेकिन बोर्ड नियम 33% है) लाने होंगे. जो छात्र एक या दो विषयों में असफल रहे हैं, उनके लिए 7 मई 2026 से 'सेकंड मुख्य परीक्षा' (पूरक परीक्षा का नया रूप) आयोजित की जाएगी. इसके लिए छात्र आज से ही आवेदन कर सकते हैं। 

    एक्सपर्ट की सलाह- तनाव से बचें छात्र
    परीक्षा के दौरान छात्रों की सेहत को लेकर भी विशेषज्ञों ने अहम सलाह दी है। डॉक्टरों और काउंसलर्स ने अभिभावकों से अपील की है कि वे बच्चों पर अनावश्यक दबाव न डालें और उन्हें मानसिक रूप से सहयोग दें। सही दिनचर्या, पर्याप्त नींद और संतुलित आहार से बेहतर प्रदर्शन संभव है।