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  • कैंसर उपचार में बड़ी उम्मीद, नई तकनीक से ट्यूमर को निशाना बनाना होगा आसान; स्वस्थ अंगों को बचाने में मिलेगी मदद

    कैंसर उपचार में बड़ी उम्मीद, नई तकनीक से ट्यूमर को निशाना बनाना होगा आसान; स्वस्थ अंगों को बचाने में मिलेगी मदद

    इंदौर 

    कैंसर मरीजों के लिए राहत भरी खबर सामने आ रही है। जानकारी के लिए बता दें कि आधुनिक रेडियोथेरेपी तकनीक पर हो रहे शोध से संभावना है कि उपचार के दौरान कैंसर के ट्यूमर पर नजर रखते हुए रेडिएशन दिया जा सकेगा। इससे कैंसरग्रस्त हिस्से पर सटीक निशाना लगाने और आसपास के स्वस्थ अंगों को नुकसान से बचाने में मदद मिलेगी। भविष्य में ऐसी व्यवस्था विकसित करने का लक्ष्य है, जिसमें सुबह बीमारी की पहचान हो, दोपहर तक जांच और इलाज की प्रक्रिया शुरू हो जाए और उपचार के बाद मरीज को जल्द घर भेजा जा सके। यह बात इंग्लैंड में इंस्टीट्यूट ऑफ कैंसर रिसर्च और द रॉयल मार्सडेन एनएचएस फाउंडेशन ट्रस्ट के ज्वाइंट डिपार्टमेंट ऑफ फिजिक्स के प्रमुख प्रो. उवे ओएल्फके ने कैंसर उपचार में रेडियोथेरेपी की बदलती तकनीक पर चर्चा में कही।

    कैंसर के आधुनिक उपचार में कर रहे शोध
    वे करीब दो दशक से रेडियोथेरेपी, मेडिकल फिजिक्स और कैंसर के आधुनिक उपचार से जुड़ी तकनीकों पर शोध कर रहे हैं। वे इंटरनेशनल साइंटिफिक एक्सचेंज प्रोग्राम मीट द प्रोफेसर के तहत इंदौर पहुंचे थे। यहां उन्होंने ऑन्कोलॉजी के जटिल और अस्पष्ट पहलुओं पर काम करना, रेडिएशन थेरेपी अनुसंधान की चुनौतियां और अवसर विषय पर विचार साझा किए। उन्होंने एक दिन पहले आरआर कैट में भी विशेष सत्र लेकर इसी विषय पर चर्चा की। उनके मुताबिक, कैंसर के बेहतर उपचार के लिए आधुनिक तकनीक के साथ वैज्ञानिक शोध और अंतरराष्ट्रीय सहयोग महत्वपूर्ण है।

    भारतीय कैंसर केंद्रों की सराहना

    प्रो. ओएल्फके ने रियल टाइम ट्यूमर थेरेपी पर कहा कि इस तकनीक में उपचार के दौरान ट्यूमर की स्थिति पर लगातार नजर रखी जाती है। सांस लेने जैसी शारीरिक गतिविधियों के कारण भी कुछ ट्यूमर की स्थिति बदल सकती है। ऐसे में इमेजिंग तकनीक से ट्यूमर की वास्तविक स्थिति के अनुसार रेडिएशन देने की दिशा में काम किया जा रहा है। प्रो. ओएल्फके के शोध का प्रमुख क्षेत्र यह भी है कि रेडिएशन थेरेपी को प्रभावी कैसे बनाया जाए। उन्होंने भारत में रेडियोथेरेपी की आधुनिक सुविधाओं पर संतोष जताया। मुंबई के टाटा मेमोरियल कैंसर अस्पताल का उल्लेख करते हुए कहा कि वहां उपलब्ध सुविधाएं यूरोप के कैंसर केंद्रों के स्तर की हैं।

  • LoC पर सुरक्षा बलों की कार्रवाई, लश्कर कमांडर समेत 4 ढेर

    LoC पर सुरक्षा बलों की कार्रवाई, लश्कर कमांडर समेत 4 ढेर

    पुंछ  
    चारों आतंकियों के पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर (पीओजेके) के पुंछ जिले के हजीरा तहसील के मंडला, मदारपुर इलाके का निवासी होने की पुष्टि की गई है।  जम्मू-कश्मीर के पुंछ जिले में कृष्णा घाटी सेक्टर में नियंत्रण रेखा (एलओसी) के पास बारूदी सुरंग धमाके में लश्कर-ए-ताइबा के टॉप कमांडर समेत चार आतंकवादी मारे गए। ये सभी भारतीय क्षेत्र में घुसपैठ कर बड़ी वारदात की फिराक में थे। धमाके की आवाज दूर तक सुनी गई। इसके तुरंत बाद भारतीय सेना और सीमा सुरक्षा बलों ने अग्रिम चौकियों पर हाई अलर्ट जारी करते हुए सुरक्षा और अधिक कड़ी कर दी है।

    चारों आतंकी गुलाम कश्मीर के रहने वाले थे
    अधिकारियों ने बताया कि भीषण धमाका सोमवार को जीरो लाइन (एलओसी) पर सतवाल-नाकी गांव इलाके के पास हुआ। विस्फोट के समय पाकिस्तानी क्षेत्र से भारतीय सीमा में घुसपैठियों के एक दल की आवाजाही देखी जा रही थी। आधिकारिक तौर मारे जाने या घायल घुसपैठियों की पुष्टि नहीं की गई है, लेकिन सूत्रों ने बताया कि धमाके में मारे गए आतंकी गुलाम कश्मीर में पुंछ जिले हाजीरा तहसील के मंडला और मदारपुर गांव के रहने वाले थे। इनकी पहचान लश्कर का टॉप कमांडर मोहम्मद फैजान, मोहम्मद इश्तियाक, मोहम्मद वकास और मोहम्मद आसिम के रूप में हुई है।

    पाकिस्तान ने किया सोशल मीडिया पर दावा
    पाकिस्तान का एक सोशल मीडिया पोस्ट सामने आया है जिसमें आतंकियों के मारे जाने का दावा किया गया है। वहीं भारतीय अधिकारियों ने बताया कि धमाके के फौरन बाद सेना ने घुसपैठ की किसी भी अन्य संभावित साजिश अथवा सुरक्षा में सेंध को नाकाम करने के लिए निगरानी तंत्र को पूरी तरह सक्रिय कर दिया है।

    मेंढर में दो लैंडमाइन बरामद
    इस बीच, पुंछ के ही मेंढर सेक्टर में सतर्क भारतीय जवानों ने एक और बड़ी अनहोनी को टाल दिया। सोमवार को बसोनी इलाके में सीमा सुरक्षा बाड़ के पास नियमित ट्रैक निर्माण कार्य चल रहा था। इसी दौरान जवानों की नजर जमीन में दबी दो बारूदी सुरंगों पर पड़ी। पहली लैंडमाइन सुबह करीब 8:25 बजे और दूसरी दोपहर लगभग 12:10 बजे देखी गई। सूचना मिलते ही बम निरोधक दस्ते ने दोनों दोनों बारूदी सुरंगों को मौके पर ही निष्क्रिय कर दिया।

     

  • ओपी माथुर केरलम, आर्लेकर तमिलनाडु के राज्यपाल नियुक्त

    ओपी माथुर केरलम, आर्लेकर तमिलनाडु के राज्यपाल नियुक्त

    नई दिल्ली
    राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने छह राज्यों में राज्यपालों की नियुक्ति और तबादले की घोषणा की है। ओम प्रकाश माथुर को केरलम से जोड़ा गया है, जबकि राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर तमिलनाडु के पूर्णकालिक राज्यपाल होंगे। सुधा यादव को कर्नाटक, ब्रज मोहन राम को ओडिशा, ढाल सिंह बिसेन को उत्तराखंड और दुष्यंत गौतम को सिक्किम की जिम्मेदारी सौंपी गई है।

    राष्ट्रपति दौपदी मुर्मु ने सोमवार को 6 राज्यों के राज्यपालों की नियुक्ति की घोषणा की। राष्ट्रपति भवन की ओर से जारी विज्ञप्ति के अनुसार, ओम प्रकाश माथुर को केरलम, सुधा यादव को कर्नाटक, ब्रज मोहन राम को ओडिशा, दुष्यंत गौतम को सिक्किम, राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर को तमिलनाडु और डॉ. ढाल सिंह को उत्तराखंड के राज्यपाल के तौर पर नियुक्त किया गया है। इन नियुक्तियों से जुड़े आदेश संबंधित राज्यपालों के अपने-अपने पदों का कार्यभार संभालने की तारीख से प्रभावी होंगे।

    राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने राज्यपालों की निम्नलिखित नियुक्तियां कीं
        सिक्किम के राज्यपाल ओम प्रकाश माथुर को केरल का राज्यपाल नियुक्त किया गया।
        केरलम के राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ अर्लेकर को तमिलनाडु का राज्यपाल नियुक्त किया गया।
        ब्रज मोहन राम को ओडिशा का राज्यपाल नियुक्त किया गया।
        डॉ. सुधा यादव को कर्नाटक का राज्यपाल नियुक्त किया गया।
        डॉ. ढाल सिंह बिसेन को उत्तराखंड का राज्यपाल नियुक्त किया गया।
        दुष्यंत गौतम को सिक्किम का राज्यपाल नियुक्त किया गया।

    आर्लेकर को तमिलनाडु का पूर्णकालिक राज्यपाल बनाया गया
    केरलम से स्थानांतरित किए गए राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर मार्च से ही तमिलनाडु के राज्यपाल के कार्यों का निर्वहन कर रहे थे। उस समय आरएन रवि को पश्चिम बंगाल का राज्यपाल नियुक्त किया गया था। ताजा आदेश के बाद आर्लेकर तमिलनाडु के नियमित राज्यपाल होंगे। गोवा विधानसभा के पूर्व अध्यक्ष आर्लेकर हिमाचल प्रदेश और बिहार के राज्यपाल के रूप में भी काम कर चुके हैं।

    ओम प्रकाश माथुर उनकी जगह केरलम के राज्यपाल का पद संभालेंगे। भाजपा के वरिष्ठ नेता और राजस्थान से पूर्व राज्यसभा सांसद माथुर ने जुलाई 2024 में सिक्किम के राज्यपाल का कार्यभार संभाला था।

    चार राज्यों को मिले नए राज्यपाल
        ब्रज मोहन राम को ओडिशा का राज्यपाल नियुक्त किया गया है। पलामू से लोकसभा के पूर्व सांसद राम हरि बाबू कंभमपति की जगह लेंगे। कंभमपति ने जनवरी 2025 में ओडिशा के राज्यपाल के रूप में शपथ ली थी।
        सुधा यादव कर्नाटक की नई राज्यपाल होंगी। महेंद्रगढ़ से भाजपा की पूर्व सांसद और राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग की पूर्व सदस्य यादव, थावरचंद गहलोत की जगह लेंगी।
         
        मध्य प्रदेश के बालाघाट से लोकसभा के पूर्व सांसद ढाल सिंह बिसेन को उत्तराखंड का राज्यपाल नियुक्त किया गया है। वह सेवानिवृत्त लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह की जगह लेंगे।
        भाजपा के पूर्व राष्ट्रीय महासचिव और पूर्व राज्यसभा सांसद दुष्यंत गौतम सिक्किम के नए राज्यपाल होंगे। वह ओम प्रकाश माथुर का स्थान लेंगे।
        राष्ट्रपति भवन की विज्ञप्ति में हरि बाबू कंभमपति, थावरचंद गहलोत और गुरमीत सिंह के लिए किसी नई जिम्मेदारी की घोषणा नहीं की गई है।

  • AI बेकाबू हुआ तो कौन रोकेगा? सत्या नडेला ने बताया इमरजेंसी ब्रेक का महत्व, सुरक्षा और निगरानी पर दिया जोर

    AI बेकाबू हुआ तो कौन रोकेगा? सत्या नडेला ने बताया इमरजेंसी ब्रेक का महत्व, सुरक्षा और निगरानी पर दिया जोर

     नई दिल्ली

    आजकल आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से फोटो बनवानी हो, सवालों के जवाब चाहिए हों या फिर ऑफिस का काम करना हो, हर जगह AI का इस्तेमाल बढ़ रहा है. लेकिन क्या होगा अगर यही एआई कोई ऐसा काम करने लगे, जिस पर इंसानों का कंट्रोल ही न रहे?

    इसी खतरे को देखते हुए Microsoft के CEO सत्या नडेला ने एआई को लेकर एक बड़ी बात कही है. उनका कहना है कि एडवांस AI मॉडल में ऐसा सिस्टम होना चाहिए, जिससे जरूरत पड़ने पर इंसान उसे तुरंत रोक सके. यानी एआई के लिए भी इमरजेंसी ब्रेक होना जरूरी है. आइए जानते है इसके बारे में। 

    AI पर आंख बंद करके भरोसा करना पड़ सकता है भारी

    सत्या नडेला का कहना है कि कंपनियों को एआई पर सिर्फ इसलिए भरोसा नहीं करना चाहिए, क्योंकि उसे बनाने वाली कंपनी कह रही है कि सब कुछ सेफ है. AI से गलती हो सकती है या उसका सिस्टम हैक भी हो सकता है. ऐसे में पहले से तैयारी जरूरी है। 

    उन्होंने सुझाव दिया कि एआई को ऐसा बनाया जाना चाहिए, जिस पर इंसान नजर रख सके और जरूरत पड़ने पर उसके काम को बीच में ही रोक सके. AI कितना भी स्मार्ट क्यों न हो जाए, आखिरी कंट्रोल इंसान के हाथ में ही रहना चाहिए। 

    AI की हर हरकत का होना चाहिए रिकॉर्ड
    नडेला ने सिर्फ एआई को बंद करने की फीचर देने की बात नहीं कही है. उन्होंने यह भी कहा कि AI ने कौन-सा काम किया, क्या फैसला लिया और उसके पीछे क्या हुआ, इसका रिकॉर्ड भी होना चाहिए. इससे अगर एआई कोई गलती करता है, तो पता लगाया जा सकेगा कि आखिर गड़बड़ी कहां हुई। 

    इसके अलावा, जरूरी फैसलों के लिए सिर्फ एक AI मॉडल पर निर्भर रहने के बजाय अलग-अलग मॉडल का इस्तेमाल करने और एआई सिस्टम की स्वतंत्र जांच कराने पर भी जोर दिया गया है। 

    AI की गलती छिपाने के बजाय बतानी होगी
    सत्या नडेला ने यह भी कहा कि एआई से जुड़ी बड़ी गलतियों और सिक्योरिटी में गड़बड़ी लगने जैसी घटनाओं की जानकारी सामने आनी चाहिए. इससे दूसरी कंपनियां भी उन गलतियों से सीख सकेंगी और अपने सिस्टम को ज्यादा सुरक्षित बना सकेंगी। 

    एआई अब सिर्फ सवालों के जवाब देने तक सीमित नहीं है. नए AI सिस्टम खुद कई काम करने की क्षमता हासिल कर रहे हैं. ऐसे में उनकी सुरक्षा और इंसानों का कंट्रोल बनाए रखना और भी जरूरी हो जाता है। 

    कुल मिलाकर सत्या नडेला का मैसेज साफ है. एआई को आगे बढ़ाना जरूरी है, लेकिन उसके हाथ में पूरी ताकत देना समझदारी नहीं होगी. मशीन कितनी भी समझदार हो जाए, उसे रोकने का बटन इंसान के पास जरूर होना चाहिए। 

  • दिल्ली में INDIA गठबंधन के प्रदर्शन के बीच शिवसेना (UBT) को झटका, राष्ट्रीय प्रवक्ता आनंद दुबे ने पार्टी से दिया इस्तीफा

    दिल्ली में INDIA गठबंधन के प्रदर्शन के बीच शिवसेना (UBT) को झटका, राष्ट्रीय प्रवक्ता आनंद दुबे ने पार्टी से दिया इस्तीफा

    मुंबई

    INDIA गठबंधन के प्रदर्शन के बीच शिवसेना UBT को बड़ा झटका लगा है. उद्धव ठाकरे की पार्टी के प्रवक्ता और हिंदी भाषी चेहरा आनंद दुबे ने पार्टी की प्राथमिक सदस्यता और राष्ट्रीय प्रवक्ता के पद से इस्तीफा दे दिया है. बताया जा रहा है कि वह पार्टी की कार्यप्रणाली से नाराज चल रहे थे. उनके इस्तीफे को महाराष्ट्र में MVA गठबंधन के लिए भी झटका माना जा रहा है। 

    इस्तीफे के बाद आनंद दुबे ने कहा कि देश के मुद्दे पर मतभेद और असहमति हो सकती है, लेकिन राष्ट्र सबसे ऊपर होना चाहिए. उन्होंने 22 अप्रैल को पहलगाम में हुए आतंकी हमले का जिक्र करते हुए बताया कि वह 26 अप्रैल को पार्टी के सहयोगी और विधायी विंग के डिप्टी ऑर्गनाइजर गुलाबचंद मौर्य के साथ वहां गए थे. उन्होंने कहा कि उस समय इलाके में गोलीबारी का माहौल था. इस दौरान उन्होंने फारूक अब्दुल्ला और उपराज्यपाल मनोज सिन्हा से मुलाकात की और अपनी पार्टी के समर्थन का भरोसा दिलाया। 

    मैं CJP के साथ काम नहीं कर सकता- आनंद दूबे
    शिवसेना UBT को छोड़ने के बाद आनंद दुबे ने कहा- "चुनाव आयोग और SIR के मुद्दे पर शिवसेना यूबीटी की भूमिका से मैं सहमत नहीं था। मैं कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के साथ काम नहीं कर सकता।" शिवसेना यूबीटी के राष्ट्रीय प्रवक्ता आनंद दुबे ने आज मुंबई में पार्टी की प्राथमिक सदस्यता और प्रवक्ता पद से इस्तीफा देते हुए कहा कि उन्होंने भारी मन से यह फैसला लिया है। पिछले कई महीनों से वह अंदर ही अंदर परेशान थे।

    प्रेस कॉन्फ्रेंस आनंद दुबे करेंगे इस्तीफे का ऐलान!
    बताया जा रहा है कि आनंद दुबे मुंबई में आज प्रेस कॉन्फ्रेंस करेंगे. इस दौरान वो शिवसेना UBT की सदस्यता और पार्टी के प्रवक्ता पद से इस्तीफे का ऐलान करेंगे. ऐसे में सभी की नजर उनके फैसले पर टिकी है। 

    CJP के आंदोलन को शिवसेना (UBT) का समर्थन
    दरअसल मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ मुंबई के शिवाजी पार्क इलाके में कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने आंदोलन किया था. इस आंदोलन का शिवसेना (UBT) ने भी समर्थन किया है. रविवार को पार्टी के नेता आदित्य ठाकरे और महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) के अमित ठाकरे सैकड़ों समर्थकों के साथ आंदोलन में पहुंचे थे. इस दौरान इस दौरान आदित्य ठाकरे ने कहा कि अब यह विरोध प्रदर्शन नहीं रुकेगा. उन्होंने कहा कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफा देने तक आंदोलन जारी रहेगा। 

    पार्टी के प्रवक्ता भी हैं आनंद दुबे
    आनंद दुबे शिवसेना यूबीटी के सबसे चर्चि
    त चेहरों में से एक रहे हैं. वो पार्टी के प्रवक्ता भी हैं और लगातार टीवी डिबेट में पार्टी का पक्ष रखते थे. वो उद्धव ठाकरे के करीबी नेताओं में गिने जाते हैं. वहीं अब अचानक उनके पार्टी छोड़ने की खबर से पार्टी में हलचल मच गई है. फिलहाल पार्टी की तरफ से इसको लेकर कोई बयान सामने नहीं आया है और न ही आनंद दुबे ने कुछ कहा है। 

    'जिस ट्रेन में कॉकरोच हो, उसमें सफर नहीं'
    शिवसेना यूबीटी से इस्तीफा देने के बाद आनंद दुबे ने कहा- "शरजील इमाम, उमर खालिद और ध्रुव राठी उनके आदर्श नहीं हैं। मेरे आदर्श स्मित मच्छार हैं। मेरे आदर्श शिवाजी महाराज और वीर सावरकर है।" अपने आगे के सफर को लेकर आनंद दुबे ने कहा कि "जिस ट्रेन में कॉकरोच हो मैं उस ट्रेन में सफर नहीं करूंगा। जब उचित प्लेटफार्म मिलेगा उस पार्टी को जॉइन करूंगा।"

    आनंद दुबे ने कहा कि ऐसे संकट के समय वरिष्ठ सांसदों और विधायकों को भी वहां जाना चाहिए था. उन्होंने कहा कि वह भले ही कोई बड़े नेता न हों और नगर निगम के पार्षद भी न हों, लेकिन बालासाहेब ठाकरे से प्रेरित होकर उनके अंदर एक शिवसैनिक की भावना है. उन्होंने कहा कि देश के सामने खड़ा संकट सबसे बड़ी चिंता है. पार्टी और वह खुद बाद में आते हैं, लेकिन देश सबसे पहले है. आनंद दुबे ने कहा, 'मेरा राष्ट्र पहले, मेरा भारत पहले। '

  • Virat Kohli-Anushka Sharma: एक ही मंजिल पर खरीदे 3 लग्जरी फ्लैट, जानें किसकी कितनी है कीमत

    Virat Kohli-Anushka Sharma: एक ही मंजिल पर खरीदे 3 लग्जरी फ्लैट, जानें किसकी कितनी है कीमत

    नई दिल्ली
    टीम इंडिया के पूर्व कप्तान विराट कोहली अपना रियल एस्टेट निवेश बढ़ाते जा रहे हैं, इसमें उनके साथ उनकी पत्नी बॉलीवुड अभिनेत्री अनुष्का शर्मा भी शामिल हैं. हाल ही में Virat Kohli, Anushka Sharma और एक्ट्रेस की फैमिली ने मुंबई के पॉश वर्सोवा इलाके में तीन बड़े सौदे किए हैं. यहां के एक रेजिडेंशियल प्रोजेक्ट में एक ही मंजिल पर तीन फ्लैट खरीदे गए हैं और ये सौदा करीब 44.1 करोड़ रुपये में हुआ है.

    गोदरेज स्काईशोर में खरीदे फ्लैट
    रियल एस्टेट डेटा एनालिटिक्स फर्म सीआरई मैट्रिक्स से मिली प्रॉपर्टी रजिस्ट्रेशन डॉक्युमेंट्स को देखें, तो विराट अनुष्का और उनके परिवार द्वारा खरीदे गए ये तीनों फ्लैट मुंबई के वर्सोवा में यारी रोड पर स्थित गोदरेज स्काईशोर बिल्डिंग में हैं.

    अनुष्का शर्मा का फ्लैट कितना बड़ा?
    रिपोर्ट में प्रॉपर्टी डॉक्युमेंट्स में दर्शाई गई डिटेल के आधार पर बताया गया है कि अभिनेत्री अनुष्का शर्मा ने इस बिल्डिंग में लगभग 2,153 वर्ग फुट का एक फ्लैट खरीदा है, जिसकी कीमत 14.89 करोड़ रुपये है. इसके लिए उन्होंने स्टांप शुल्क के तौर पर 74.47 लाख रुपये का पेमेंट किया है. इसमें तीन कवर्ड बेसमेंट पार्किंग स्पेस मिला है.

    अनुष्का शर्मा के माता-पिता आशिमा और अजय कुमार शर्मा ने भी यहां एक फ्लैट 10.91 करोड़ रुपये में खरीदा है. इमें दो कवर्ड बेसमेंट पार्किंग स्पेस मिला है. अभिनेत्री के माता-पिता ने 65.44 लाख रुपये का स्टांप शुल्क का भुगतान किया है. सीआरई मैट्रिक्स के मुताबिक, दोनों खरीद बीते 8 जुलाई 2026 को रजिस्टर्ड हुई हैं और इन्हें वन-स्टॉप बिजनेस सर्विसेज एलएलपी से खरीदा गया था, जिसके डेवलपर गोदरेज प्रॉपर्टीज थे.

    विराट कोहली संग तीसरा फ्लैट
    बिजनेस टुडे पर छपी रिपोर्ट के मुताबिक, अनुष्का शर्मा ने अपने पति क्रिकेट स्टार विराट कोहली के साथ मिलकर तीसरा फ्लैट खरीदा है. जिसकी कीमत 18.29 करोड़ रुपये बताई गई है. जैपकी द्वारा प्राप्त संपत्ति दस्तावेजों के अनुसार, 2,644 वर्ग फुट के इस घर का रजिस्ट्रेशन 21 जुलाई 2026 को हुआ. इसमें भी तीन कार पार्किंग का स्पेस शामिल है.

    24वीं मंजिल पर तीनों फ्लैट
    विराट कोहली, अनुष्का शर्मा और उनकी फैमिली द्वारा खरीदे गए ये तीनों फ्लैट गोदरेज स्काईशोर के टावर-A की 24वीं मंजिल पर हैं. प्रोजेक्ट अभी भी अंडर कंस्ट्रक्शन है और रजिस्ट्रेशन डिटेल के अनुसार अनुष्का और उनके माता-पिता के अपार्टमेंट का पजेशन 30 जून 2031 को या उससे पहले मिलने की उम्मीद है.

    विराट-अनुष्का ने यहां भी किया निवेश
    विराट और अनुष्का की ये मुंबई में पहली खरीदारी नहीं है. उन्होंने अलीबाग में भी संपत्ति में निवेश किया है. खबरों की मानें, तो इस सेलिब्रिटी कपल ने इसी साल जनवरी 2026 में वहां दो एक दूसरे से जुड़े हुए प्लॉट खरीदे थे और इनकी कीमत 37.86 करोड़ रुपये थी. 13 जनवरी को रजिस्टर हुए इस सौदे के लिए करीब 2.27 करोड़ का स्टांप शुल्क चुकाया गया था.

    इससे पहले भी अलीबाग में कथित तौर पर उनकी एक प्रॉपर्टी खरीद थी. 2022 में विराट-अनुष्का ने दो लेन-देन के माध्यम से इस क्षेत्र में लगभग आठ एकड़ जमीन 19.24 करोड़ रुपये में खरीदी और बाद में वहां एक आलीशान हॉलिडे होम बनाया.

  • डिजिटल पेमेंट को लेकर IIT बॉम्बे का बड़ा सुझाव, UPI MDR चार्ज में 80% तक कटौती का प्रस्ताव चर्चा में

    डिजिटल पेमेंट को लेकर IIT बॉम्बे का बड़ा सुझाव, UPI MDR चार्ज में 80% तक कटौती का प्रस्ताव चर्चा में

    नई दिल्ली

    IIT बॉम्बे की एक स्टडी में UPI पेमेंट सिस्टम को चलाने के लिए मर्चेंट डिस्काउंट रेट यानी MDR घटाने, बैंकों को इससे मिलने वाला हिस्सा खत्म करने और बड़े कारोबारियों से डिजिटल पेमेंट फीस लेने जैसे सुझाव दिए गए हैं। चाय की दुकान हो या शॉपिंग मॉल, सब्जी वाला हो या ऑनलाइन शॉपिंग, UPI ने पैसे देने का तरीका बदल दिया है. मोबाइल निकाला, QR कोड स्कैन किया और पेमेंट हो गया. लेकिन इस सुविधा को चलाने वाले पेमेंट ऐप, बैंक और दूसरे सर्विस प्रोवाइडर्स का खर्च कौन उठाएगा, यह सवाल अहम हो गया है. IIT बॉम्बे के प्रोफेसर आशीष दास और RBI की पूर्व अधिकारी प्रज्ञा दास की स्टडी UPI at a Crossroads: Reintroducing the MDR में इसी सवाल का जवाब तलाशने की कोशिश की गई है। 

    MDR घटाकर 0.08% करने का सुझाव
    स्टडी में UPI के कुछ मर्चेंट ट्रांजैक्शन पर MDR की दर मौजूदा घोषित 0.40 फीसदी से घटाकर 0.08 फीसदी करने की सिफारिश की गई है. इसके साथ ही पेमेंट सिस्टम में अलग-अलग कंपनियों और बैंकों की हिस्सेदारी को नए सिरे से तय करने का सुझाव दिया गया है. स्टडी की प्रमुख सिफारिशों के मुताबिक PhonePe और Google Pay जैसे थर्ड पार्टी ऐप प्रोवाइडर्स पर 0.06 फीसदी MDR लगाया जाए. वहीं पेमेंट सर्विस प्रोवाइडर्स जिसमें मुख्य रूप से बैंक शामिल हैं, उनकी सेवाओं के लिए 0.02 फीसदी हिस्सा दिया जाए. इसके साथ ही MDR से मिलने वाली रकम में बैंकों को मिलने वाला हिस्सा खत्म करने का सुझाव भी दिया गया है।  

    बैंकों की CASA कमाई से चले UPI सिस्टम
    स्टडी में बैंकों को MDR का हिस्सा देने पर सवाल उठाया गया है. इसकी वजह करंट अकाउंट और सेविंग्स अकाउंट यानी CASA में जमा पैसे से बैंकों को मिलने वाला ब्याज मार्जिन है. रिपोर्ट के मुताबिक कारोबारी साल 2025-26 में बैंकों का CASA डिपॉजिट से नेट इंटरेस्ट मार्जिन 4.85 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा रहा. स्टडी का तर्क है कि बैंकों को UPI सिस्टम को चलाने और बेहतर बनाने के लिए इसी स्रोत से योगदान देना चाहिए। 

    क्या सुझाव दिए गए?
    IIT बॉम्बे की स्टडी में CASA डिपॉजिट से जुड़े फंड का करीब 3 फीसदी, यानी लगभग 15,000 करोड़ रुपये, UPI सिस्टम के लिए इस्तेमाल करने का प्रस्ताव दिया गया है. वहीं UPI को बैंकिंग कारोबार के लिए जरूरी सर्विस बनाने की सिफारिश भी की गई है. इसके साथ ही डिजिटल पेमेंट सिस्टम के रखरखाव और विस्तार के लिए बैंकों की जिम्मेदारी तय करने का सुझाव भी दिया गया है। 

    स्टडी में ये भी कहा गया है कि UPI सिस्टम को चलाने का खर्च निकालने के लिए बड़े कारोबारियों की भूमिका बढ़ाई जा सकती है. इसके लिए सालाना 50 करोड़ रुपये या उससे ज्यादा टर्नओवर वाले कारोबारियों के लिए UPI पेमेंट स्वीकार करना अनिवार्य बनाने का सुझाव दिया गया है. स्टडी के मुताबिक ऐसे कारोबारियों से ऑनलाइन मर्चेंट पेमेंट पर उचित डिजिटल पेमेंट फीस ली जा सकती है। 

    स्टडी की बाकी सिफारिशें
    IIT बॉम्बे की स्टडी में कहा गया है कि UPI के लिए एड-वैलोरम यानी ट्रांजैक्शन की रकम के अनुपात में चार्ज तय किया जाए और इसकी अधिकतम सीमा 40 रुपये प्रति ट्रांजैक्शन रखी जाए. वहीं क्रेडिट कार्ड MDR घटाने पर विचार किया जाए जिससे डिजिटल पेमेंट के अलग-अलग तरीकों के बीच चार्ज का अंतर कम हो जाए. इसके साथ ही ATM से मुफ्त कैश निकालने की तय सीमा पर दोबारा विचार करने की बात स्टडी में कही गई है. उधर पेमेंट इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट फंड को जारी रखने का जिक्र किया गया है जिससे नए कारोबारियों को डिजिटल पेमेंट सिस्टम से जोड़ने में मदद मिल सकेगी. IIT बॉम्बे की स्टडी डिजिटल पेमेंट सिस्टम की कमाई और खर्च के बंटवारे पर बहस को आगे बढ़ाती है. अंतिम फैसला सरकार और संबंधित नियामकों का होगा. आम लोगों के लिए चुनौती यही है कि UPI की सुविधा बनी रहे और इसे चलाने का खर्च भी टिकाऊ तरीके से पूरा हो सके। 

    आम लोगों पर क्या होगा असर?
    सबसे अहम सवाल है कि क्या UPI पेमेंट करने पर आम लोगों को भी चार्ज देना पड़ेगा. स्टडी का मकसद डिजिटल पेमेंट सिस्टम के खर्च को टिकाऊ तरीके से पूरा करना है. इसमें आम लोगों के रोजमर्रा के पेमेंट पर सीधे चार्ज लगाने की सिफारिश नहीं की गई है. 15 सितंबर 2026 को घोषित सरकारी व्यवस्था के मुताबिक, चुनिंदा मर्चेंट UPI ट्रांजैक्शन पर 0.40 फीसदी MDR तय किया गया था. हालांकि ये चार्ज कारोबारियों पर लागू किया जाएगा और ग्राहकों पर इसका बोझ नहीं डाला जा सकता है. इसके अलावा पर्सन टू पर्सन के बीच होने वाले पेमेंट और तय छूट वाली श्रेणियां भी इससे बाहर हैं। 

    15 अक्तूबर की डेडलाइन से मिलेगी छूट!
    फिनटेक कंपनियां और कारोबारी इस सिस्टम को लागू करने की तारीख आगे बढ़ाकर जनवरी 2027 किए जाने की मांग कर रहे हैं. कई कारोबारी संगठनों का कहना है कि नियम पूरी तरह साफ किए बिना इसे लागू करना मुश्किल होगा. इंडस्ट्री की सबसे बड़ी चिंता अलग-अलग तरह के ट्रांजैक्शन पर अलग नियमों को लेकर है. इसकी वजह है कि UPI का सिस्टम कार्ड पेमेंट की तुलना में ज्यादा जटिल माना जा रहा है क्योंकि यूटिलिटी पेमेंट के लिए अलग नियम हैं. वहीं लोन रिपेमेंट के लिए अलग व्यवस्था है और कैपिटल मार्केट ट्रांजैक्शन की अलग कैटेगरी है। 

    शेयर बाजार से जुड़ी कंपनियों का कहना है कि ग्राहक जब अपने ब्रोकिंग अकाउंट में पैसा जोड़ता है तो उससे कंपनी को सीधे कोई कमाई नहीं होती, इसलिए उस पर MDR लागत लगाने को लेकर सवाल हैं. ऐसे में इंडस्ट्री ने रेगुलेटर्स के सामने ये मुद्दा उठाया है. पेमेंट इंडस्ट्री का तर्क है कि कई ऐसे ट्रांजैक्शन हैं जो क्रेडिट कार्ड से किए ही नहीं जा सकते. पहले ऐसे भुगतान नेट बैंकिंग, IMPS, NEFT और RTGS के जरिए होते थे. इसलिए UPI पर MDR लागू करने से पहले हर कैटेगरी के लिए साफ नियम जरूरी हैं. ऐसे में मांग की जा रही है कि फेस्टिव सीजन के बीच इसे लागू ना किया जाए. वहीं बैंक, एग्रीगेटर और कारोबारियों को तैयारी का समय मिलना चाहिए और जनवरी 2027 तक इसकी डेडलाइन बढ़ाने की मांग की गई है। 

  • गन्ना रिकवरी से भुगतान तक के विवाद सुलझाएगी कमेटी, शिवराज सिंह चौहान ने दिए निर्देश

    गन्ना रिकवरी से भुगतान तक के विवाद सुलझाएगी कमेटी, शिवराज सिंह चौहान ने दिए निर्देश

    गन्ना किसानों के हितों की रक्षा के लिए केंद्र सरकार का बड़ा कदम: 1 हफ्ते में उच्चस्तरीय कमेटी बनाने का ऐलान

    मोदी सरकार की प्राथमिकता में अन्नदाता: गन्ना रिकवरी में हेराफेरी और समस्याओं पर कड़ा रुख, शिवराज सिंह चौहान ने दिए ठोस व्यवस्था के निर्देश

    नई दिल्ली
    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व और मार्गदर्शन में केंद्र सरकार किसानों के सर्वांगीण कल्याण, उनकी उपज के पारदर्शी मूल्यांकन और आय सुरक्षा के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ ठोस कदम उठा रही है। इसी क्रम में कर्नाटक और महाराष्ट्र से आए गन्ना किसानों के प्रतिनिधिमंडलों के साथ केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान और केंद्रीय उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्री प्रह्लाद जोशी ने एक अत्यंत महत्वपूर्ण एवं संवेदनशील उच्चस्तरीय बैठक की।

    इस बैठक में कर्नाटक सरकार के संबंधित मंत्रीगण तथा केंद्र व राज्य सरकारों के सचिव स्तर के वरिष्ठ अधिकारी विशेष रूप से उपस्थित रहे। बैठक में गन्ना किसानों की जमीनी समस्याओं, शुगर मिलों द्वारा रिकवरी के आंकड़ों में अंतर, वजन, वेस्टेज, प्रयोगशाला जांच और फसल बीमा से जुड़े विभिन्न विषयों पर बिंदुवार व विस्तार से सार्थक चर्चा हुई।

    केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी के साथ किसानों की बात को बेहद गंभीरता और आत्मीयता से सुनते हुए स्पष्ट किया कि मोदी सरकार के लिए किसानों की सेवा ही भगवान की पूजा के समान है। अन्नदाता का शोषण किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। किसानों द्वारा रखे गए रिकवरी डिफरेंस, वजन में कटौती और मिलों द्वारा वास्तविक रिकवरी छिपाने जैसी विसंगतियों को उन्होंने बेहद संवेदनशील विषय बताया। चौहान ने कहा कि इन विसंगतियों का कोई भी तात्कालिक या आधा-अधूरा समाधान निकालने के बजाय एक पारदर्शी और वैज्ञानिक प्रणाली स्थापित करना आवश्यक है, ताकि भविष्य में कोई भी मिल किसानों के हक पर डाका न डाल सके।

    किसानों को तत्काल और प्रभावी राहत देने के उद्देश्य से केंद्रीय मंत्री चौहान ने प्रह्लाद जोशी के साथ बड़ी घोषणा करते हुए कहा कि एक सप्ताह के भीतर एक विशेष उच्चस्तरीय संयुक्त कमेटी का गठन किया जाएगा। इस कमेटी में केंद्र सरकार, संबंधित राज्य सरकारों (कर्नाटक व महाराष्ट्र), किसान संगठनों के अधिकृत प्रतिनिधि, शुगर मिलों के प्रतिनिधि और विषय विशेषज्ञ वैज्ञानिकों को शामिल किया जाएगा। यह कमेटी गन्ने की कटाई के समय, रिकवरी के साइंटिफिक मापदंड, आधुनिक लैब टेस्टिंग व्यवस्था और वजन की शुद्धता से जुड़े हर तकनीकी पहलू की बारीकी से जांच करेगी और एक निश्चित समय-सीमा में अपनी व्यावहारिक सिफारिशें सरकार को सौंपेगी। इस संबंध में राज्य सरकार से भी सहयोग की अपेक्षा की गई है, ताकि किसानों की भलाई के लिए और तेजी से कार्यवाही की जा सकें।

    शिवराज सिंह द्वारा प्रह्लाद जोशी के साथ आयोजित इस बैठक में यह भी तय किया गया कि समस्याओं के समाधान को दो चरणों- अल्पकालिक (शॉर्ट टर्म) और दीर्घकालिक (लॉन्ग टर्म) में विभाजित कर नीतिगत फैसले लिए जाएंगे। तात्कालिक प्रशासनिक सुधारों को लागू करने के साथ ही नीतिगत व तकनीकी व्यवस्थाओं को वैज्ञानिक आधार पर स्थायी रूप से सुदृढ़ किया जाएगा।

    किसानों के प्रति अपनी जिम्मेदारी को सर्वोपरि रखते हुए शिवराज सिंह चौहान ने पूरी बैठक में स्वयं उपस्थित रहकर संवाद को निष्कर्ष तक पहुंचाया। उन्होंने किसानों को भरोसा दिलाया कि केंद्र सरकार बिना किसी भेदभाव के पूरी संवेदनशीलता के साथ उनके सुझावों पर अमल करेगी और मोदी सरकार किसानों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के लिए हरसंभव सहयोग, सहायता और ठोस व्यवस्था निरंतर जारी रखेगी।

    केंद्रीय उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्री प्रह्लाद जोशी ने भी बैठक में गन्ने के उचित एवं लाभकारी मूल्य (FRP) निर्धारण की वैज्ञानिक प्रक्रिया और लागत आकलन के तौर-तरीकों की जानकारी देते हुए आश्वस्त किया कि केंद्र सरकार राज्यों और किसानों के समन्वय से हर स्तर पर पारदर्शिता सुनिश्चित कर रही है।

     

  • कृषि मंत्री ने कहा-योगी सरकार ने किसानों को समय पर बीज, बिजली और पर्याप्त उर्वरक उपलब्ध कराने की व्यवस्था की

    कृषि मंत्री ने कहा-योगी सरकार ने किसानों को समय पर बीज, बिजली और पर्याप्त उर्वरक उपलब्ध कराने की व्यवस्था की

    योगी सरकार ने किसानों के लिए मायावती-अखिलेश से तीन गुना ज्यादा बजट जारी किया : कृषि मंत्री

    खुद को धरतीपुत्र और किसानपुत्र कहने वालों ने कुछ नहीं किया, योगी सरकार ने किसानों के लिए खोला खजाना : सूर्य प्रताप शाही 

    कृषि मंत्री ने कहा-योगी सरकार ने किसानों को समय पर बीज, बिजली और पर्याप्त उर्वरक उपलब्ध कराने की व्यवस्था की

    लखनऊ, 
     बाढ़, अतिवृष्टि, ओलावृष्टि और चक्रवात से फसल क्षति से प्रभावित प्रदेश के नौ लाख से अधिक किसानों को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने राहत राशि सौंपी। गोरखपुर में आयोजित कार्यक्रम में कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने कहा कि योगी सरकार ने किसानों के लिए खजाना खोल दिया है। उन्होंने कहा कि खुद को धरतीपुत्र और किसानपुत्र कहने वाली पिछली सरकारों ने किसानों के लिए अपेक्षित काम नहीं किया, जबकि योगी सरकार ने उनके मुकाबले तीन गुना से अधिक राशि खर्च की है।

    शाही ने कहा कि 2017 में सरकार बनने के बाद पहली कैबिनेट में 86 लाख किसानों के 36 हजार करोड़ रुपए के कर्ज माफ करने का निर्णय लिया गया। उन्होंने कहा कि वर्ष मायावती की सरकार ने किसानों पर 10,207 करोड़ रुपए और अखिलेश यादव सरकार ने करीब 12 हजार करोड़ रुपए खर्च किए, जबकि योगी सरकार अब तक किसानों पर ₹69,163 करोड़ खर्च कर चुकी है।

    कृषि मंत्री ने कहा कि योगी सरकार ने किसानों को समय पर बीज, बिजली और पर्याप्त उर्वरक उपलब्ध कराने की व्यवस्था की है। पिछले वर्ष प्रदेश में रिकॉर्ड 752 लाख मीट्रिक टन खाद्यान्न उत्पादन हुआ। उन्होंने बताया कि पिछली सरकार के समय आपदा राहत के लिए केंद्र सरकार से मिले 3,200 करोड़ रुपए में से केवल 800 करोड़ रुपए वितरित किए गए थे। योगी सरकार बनने के बाद शेष राशि में से 1,200 करोड़ रुपए सात दिनों के भीतर किसानों के खातों में भेजे गए।

    शाही ने कहा कि गन्ना किसानों के हित में गन्ने का मूल्य बढ़ाकर ₹400 प्रति क्विंटल किया गया। पिछली सरकार ने पांच वर्षों में करीब ₹62 हजार करोड़ का गन्ना भुगतान किया था, जबकि योगी सरकार ने दस वर्षों में ₹3.25 लाख करोड़ का भुगतान किया है। उन्होंने बताया कि प्रदेश की 105 चीनी मिलें 15 दिनों के भीतर भुगतान कर रही हैं।

    कृषि मंत्री ने कहा कि वर्ष 2017-18 से अब तक प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत किसानों को ₹6,125 करोड़ की क्षतिपूर्ति दी गई है। वर्ष 2025-26 में आपदा से प्रभावित 7.31 लाख किसानों को इस योजना के माध्यम से ₹812.76 करोड़ दिए गए। उन्होंने बताया कि इस वर्ष बीमा कराने वाले किसानों की संख्या पिछले वर्ष के लगभग 18 लाख से बढ़कर 23 से 24 लाख हो गई है। मुख्यमंत्री ने इनके सर्वे और क्षतिपूर्ति वितरण में तेजी लाने के निर्देश दिए हैं। शाही ने कहा कि जालौन में भी प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत करीब ₹5 करोड़ किसानों को अंतरित किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि पिछली सरकारों ने किसानों के लिए ऐसे प्रयास किए होते तो उन्हें गरीबी और बदहाली का सामना नहीं करना पड़ता।

  • मुख्यमंत्री की चेतावनी- अराजकता और असंवैधानिक कृत्यों से कांग्रेस को बचा-खुचा जनसमर्थन भी गंवाना पड़ेगा

    मुख्यमंत्री की चेतावनी- अराजकता और असंवैधानिक कृत्यों से कांग्रेस को बचा-खुचा जनसमर्थन भी गंवाना पड़ेगा

    देश में अराजकता-अव्यवस्था का पर्याय बनी कांग्रेस: सीएम योगी

    मुख्यमंत्री ने कहा- यूपी की जनता ने 1985 से कांग्रेस को नकारा, देशभर में जनाधार खो चुकी है कांग्रेस

    हार छिपाने के लिए संवैधानिक संस्थाओं व न्यायपालिका को भी कठघरे में खड़ा कर रही कांग्रेस: सीएम योगी

    चुनाव जीत जाएं तो पुरुषार्थ, हार जाएं तो ईवीएम दोषी, भारत की जागरूक जनता स्वीकार नहीं करेगी अराजकता: सीएम योगी

    मुख्यमंत्री की चेतावनी- अराजकता और असंवैधानिक कृत्यों से कांग्रेस को बचा-खुचा जनसमर्थन भी गंवाना पड़ेगा

    गोरखपुर, 
     मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कांग्रेस पर तीखा हमला करते हुए कहा कि पिछले कई दिनों से देश की राजधानी दिल्ली में लगातार देखा जा रहा है कि कांग्रेस व इंडिया गठबंधन न केवल आम जन को परेशान, बल्कि अव्यवस्था व अराजकता पैदा कर देश की संवैधानिक संस्थाओं को भी कठघरे में खड़ा करने का कुत्सित प्रयास कर रहे हैं। पहचान का संकट खड़ा करने और भ्रष्ट मंसूबों के कारण कांग्रेस और उसके सहयोगी दल अपनी साख पूरी तरह खो चुके हैं और उनके इस गैर-राजनीतिक व्यवहार को देश की जनता भली-भांति देख रही है।

    चुनाव जीते तो पुरुषार्थ और हारने पर ईवीएम दोषी
    इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के प्रतिनिधियों से बातचीत में सीएम योगी ने कहा, आश्चर्य है कि चुनाव जीतने पर इनका पुरुषार्थ और हारने पर ईवीएम और इलेक्शन कमीशन दोषी हो जाता है। न्यायालय अगर मेरिट के आधार पर कोई फैसला देता है, तो माननीय न्यायालय को भी कठघरे में खड़ा करने का कुत्सित प्रयास किया जाता है। तमाम प्रकार की धमकियां देने का प्रयास होता है। ऐसे ही तमाम अन्य संवैधानिक संस्थाओं को कठघरे में खड़ा करना, गाली-गलौच करना और अव्यवस्था फैलाना कांग्रेस की नियति का हिस्सा बन चुका है।

    कांग्रेस के लोग अपने नेतृत्व को बदलें
    मुख्यमंत्री ने कहा कि कांग्रेस नेतृत्व को यह समझना चाहिए कि जनता उन्हें हर बार क्यों ठुकरा रही है। 1985 के बाद से यूपी में कांग्रेस फिर नहीं आ पाई। यूपी की जनता ने कांग्रेस को 41 वर्ष पहले ही विदा कर दिया था। देश के अन्य राज्यों में भी लोगों का कांग्रेस से मोहभंग हो चुका है और वे इससे मुक्ति पा चुके हैं। कांग्रेस के लोगों को चाहिए कि वे अपने अकर्मण्य, भ्रष्टाचारी और जनता का विश्वास खो चुके नेतृत्व को बदलें। भारत में अराजकता न फैलाने और भारत की संवैधानिक संस्थाओं को कठघरे में खड़ा करने का कुत्सित प्रयास न करें।

    अराजकता स्वीकार नहीं करेगी जनता
    सीएम योगी ने कहा कि भारत की जनता लोकतांत्रिक दृष्टि से बड़ी जागरूक है। वह इस अराजकता को स्वीकार नहीं करेगी। ऐसा नहीं है कि जनता बहुत दिनों और बहुत देर तक यह सब बर्दाश्त करेगी। अगर कांग्रेस व उनके सहयोगी दलों ने अपने असंवैधानिक और अलोकतांत्रिक कृत्य बंद नहीं किए तो उन्हें बचा-खुचा जनाधार भी गंवाना पड़ेगा।

    युवाओं को गुमराह करने से बाज आए
    मुख्यमंत्री ने कहा कि कांग्रेस देश में अराजकता फैलाने से बाज आए। जनता-जनार्दन और युवाओं को गुमराह करने से बाज आए। मेरिट के आधार पर और मुद्दों पर चर्चा कर के स्वस्थ लोकतांत्रिक व्यवस्था का हिस्सा बने। यह देश के लोकतंत्र और जनता के हित में भी होगा।