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  • चांदी की कीमत में ₹16000 की कमी, सोना भी नहीं बचा: क्या है बाजार की स्थिति?

    चांदी की कीमत में ₹16000 की कमी, सोना भी नहीं बचा: क्या है बाजार की स्थिति?

     इंदौर 

    सोना-चांदी की कीमतें क्रैश (Gold-Silver Price Crash) होने का सिलसिला जारी है. बजट के दिन भर-भराकर टूटने के बाद सोमवार को मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज में वायदा कारोबार की शुरुआत के साथ ही दोनों कीमती धातुएं और सस्ती (Gold-Silver Cheaper) हो गईं. एक ओर जहां 1 Kg Silver Price झटके में करीब 16,000 रुपये गिर गया, तो वहीं दूसरी ओर 10 Gram 24 Karat Gold का वायदा भाव एमसीएक्स पर 4000 रुपये से ज्यादा कम हो गया. 

    इतना रह गया 1 किलो चांदी का भाव
    चांदी की कीमतें बीते सप्ताह के गुरुवार को इतिहास में पहली बार 4 लाख रुपये के पार निकलने के बाद से ही लगातार क्रैश (Silver Price Crash) हो रही हैं. रविवार को Budget 2026 वाले दिन करीब 9 फीसदी से ज्यादा टूटने के बाद सप्ताह के पहले कारोबारी दिन सोमवार को जब MCX पर कमोडिटी ट्रेडिंग की शुरुआत हुई, तो चांदी खुलते ही और भी सस्ती हो गई. 

    बीते कारोबारी दिन सिल्वर प्राइस तगड़ी गिरावट और फिर रिकवरी के बाद अंत में 2,65,652 रुपये पर क्लोज हुआ था और सोमवार को जैसे ही कारोबार ओपन हुआ, तो ये गिरकर 2,55,652 रुपये प्रति किलो पर आ गया और फिर इसके कुछ ही मिनटों बाद ये 2,49,713 रुपये प्रति किलो पर पहुंच गया. इसका मतलब है कि चांदी वायदा 15,943 रुपये और सस्ती हो गई.

    अपने हाई से अब इतनी सस्ती Silver
    चांदी में जिस रफ्तार से बीते कुछ दिनों में तेजी देखने को मिली थी, उससे तेज रफ्तार इसके फिसलने की है. बता दें कि पिछले गुरुवार को एमसीएक्स पर 5 मार्च की एक्सपायरी वाली चांदी के वायदा भाव ने अपने सारे रिकॉर्ड तोड़ते 4,20,048 रुपये के नया लाइफ टाइम हाई लेवल छुआ था, लेकिन इस स्तर से अब तक Silver Price 1,70,335 रुपये कम हो चुका है. 

    सोने का भी चांदी जैसा हाल
    Silver Price Crash होने से साथ ही सोना भी धड़ाम नजर आ रहा है. बजट वाले दिन ये भी 13,000 रुपये तक टूट गया था, हालांकि फिर थोड़ी रिकवरी भी देखने को मिली थी. रविवार को ये 1,47,753 रुपये के लेवल पर क्लोज हुआ था और सोमवार को मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज पर कारोबार की शुरुआत होते ही ये फिसलकर 1,43,321 रुपये प्रति 10 ग्राम पर आ गया. यानी 10 Gram 24 Karat Gold Rate 4432 रुपये तक सस्ता हो गया. 

    हाई से अब कितना सस्ता Gold
    सोने की कीमत ने भी चांदी के कदम से कदम मिलाकर चलते हुए बीते गुरुवार को अपना नया हाई लेवल छुआ था और तूफानी तेजी के साथ 1,93,096 रुपये प्रति 10 ग्राम के लेवल पर पहुंच गई थी. इस स्तर पर पहुंचने के बाद Gold Rate बिखरता हुआ चला गया और अब तक ये 49,775 रुपये सस्ता मिल रहा है. 

  • बलोच विद्रोह की चुनौती: BLA के सामने क्यों कमजोर पड़ती दिख रही है पाकिस्तानी फौज?

    बलोच विद्रोह की चुनौती: BLA के सामने क्यों कमजोर पड़ती दिख रही है पाकिस्तानी फौज?

    लाहौर 
    बलूचिस्तान पाकिस्तान का सबसे बड़ा प्रांत है, लेकिन यहां सालों से अलगाववादी आंदोलन चल रहा है. बलूच लोग खुद को पाकिस्तानी सरकार से अलग मानते हैं. अपने संसाधनों पर ज्यादा हक मांगते हैं. इस आंदोलन की मुख्य ताकत है बलूच लिबरेशन आर्मी (BLA), जो पाक सेना के खिलाफ गुरिल्ला युद्ध लड़ रही है. बीएलए को पाकिस्तान, अमेरिका और ब्रिटेन जैसे देशों ने आतंकवादी संगठन घोषित किया है, लेकिन बलूच इसे आजादी की लड़ाई बताते हैं. 

    बलूच लिबरेशन आर्मी (BLA) क्या है?

    बलूच लिबरेशन आर्मी (BLA) एक बलूच राष्ट्रवादी सशस्त्र संगठन है, जो बलूचिस्तान को पाकिस्तान से आजाद करने के लिए लड़ रहा है. बलूचिस्तान, जो पाकिस्तान का सबसे बड़ा लेकिन सबसे कम आबादी वाला और अविकसित प्रांत है, प्राकृतिक संसाधनों जैसे गैस, खनिज और तटीय संपत्तियों से समृद्ध है.

    BLA और स्थानीय लोग दावा करते हैं कि पाकिस्तान सरकार इन संसाधनों का शोषण करती है, जिसका फायदा स्थानीय बलूच लोगों को नहीं मिलता. BLA का कहना है कि बलूचों को उनके अधिकारों और स्वायत्तता से वंचित किया जा रहा है. वे इसके खिलाफ सशस्त्र संघर्ष कर रहे हैं.

    पाकिस्तान, अमेरिका, ब्रिटेन और यूरोपीय संघ ने BLA को एक आतंकवादी संगठन घोषित किया है, जबकि BLA खुद को बलूच लोगों के लिए स्वतंत्रता की लड़ाई लड़ने वाला संगठन मानता है.

    बलूचों के पास कितने लड़ाके हैं?

    बलूच अलगाववादियों की कुल संख्या का सटीक अनुमान लगाना मुश्किल है क्योंकि ये संगठन गुप्त रूप से काम करती है. पहाड़ी इलाकों में छिपे रहते हैं. बलूचिस्तान में कई समूह सक्रिय हैं, जैसे बीएलए, बलूचिस्तान लिबरेशन फ्रंट (BLF), बलूच राष्ट्रीय सेना (BNA) और यूनाइटेड बलूच आर्मी (UBA). इनमें से बीएलए सबसे बड़ा और सक्रिय है.

    बीएलए के लड़ाकों की अनुमानित संख्या: 2020 में बीएलए के करीब 600 सक्रिय लड़ाके बताए जाते थे. लेकिन 2025 तक यह संख्या बढ़कर 3000 हो गई है. बीएलए के कुल सदस्य कई हजार हैं, जिसमें लड़ाके, समर्थक और भर्ती करने वाले लोग शामिल हैं. ऑपरेशन हेरोफ में 3000 से ज्यादा बलूच लड़ाके पाकिस्तानी सेना के खिलाफ लड़ रहे हैं. 

    अन्य बलूच समूहों के लड़ाके: बीएलएफ ने 2025 में दावा किया कि उसके 42 लड़ाके मारे गए, लेकिन कुल संख्या का अनुमान नहीं है. जेयश अल-अदल जैसे अन्य समूहों के 500-600 लड़ाके हैं. सभी बलूच अलगाववादी समूहों के लड़ाकों की संख्या 5000 से 10000 के बीच हो सकती है, लेकिन यह बदलती रहती है क्योंकि भर्ती और नुकसान दोनों होते हैं. पाकिस्तानी सेना का दावा है कि उसने 2025-2026 में 100 से ज्यादा लड़ाकों को मार गिराया है. 

    सही संख्या ज्यादा या कम हो सकती है क्योंकि ये छिपकर काम करते हैं. बलूच युवाओं को सोशल मीडिया के जरिए भर्ती किया जाता है, जहां वे राष्ट्रवाद और पाकिस्तान सरकार की ज्यादतियों की कहानियां सुनाते हैं.

    BLA की चोट के बाद पाकिस्तानियों का उठ गया भरोसा 

    पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत में बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी (BLA) और पाकिस्तानी सेना के बीच जारी हिंसक टकराव के बीच अब देश के भीतर से ही सेना और सरकार की रणनीति पर सवाल उठने लगे हैं. पाकिस्तानी पत्रकार ओसामा बिन जावेद ने अपने लेख में साफ कहा है कि पाकिस्तान की सेना अकेले बलूचिस्तान के लोगों की समस्या का समाधान नहीं कर सकती.

    पिछले कुछ दिनों में बलूचिस्तान के कई इलाकों में BLA के कोऑर्डिनेटेड हमलों के बाद हालात बेहद तनावपूर्ण हो गए. पाकिस्तानी सेना के मुताबिक इन झड़पों में करीब 200 लोग मारे गए, जिनमें 31 आम नागरिक, 17 सुरक्षाकर्मी और 145 BLA लड़ाके शामिल हैं. इनमें से 100 से ज्यादा लड़ाके सिर्फ एक दिन में मारे जाने का दावा किया गया. हालांकि, सेना ने BLA के उस दावे को खारिज किया है जिसमें 84 सुरक्षाकर्मियों की मौत की बात कही गई थी.

    ओसामा बिन जावेद लिखते हैं कि बलूचिस्तान की पहाड़ियों में लड़ी गई यह लड़ाई सिर्फ हथियारों की नहीं, बल्कि दशकों से चली आ रही नाराजगी, राजनीतिक भेदभाव और आर्थिक अन्याय की कहानी है. उन्होंने किसी सूत्र के हवाले से कहा है, "एक मिलिट्री एक मिलिटेंट को खत्म कर सकती है, लेकिन किसी शिकायत को खत्म नहीं कर सकती."

    BLA पाकिस्तान सरकार के लिए आतंकी नेटवर्क

    पाकिस्तानी पत्रकार का कहना है कि सरकार जहां BLA को सिर्फ एक आतंकी नेटवर्क के तौर पर देखती है, वहीं बलूच समाज के कई लोग इन्हें अपने बेटे और भाई मानते हैं जिन्होंने हथियार उठा लिए हैं.

    पत्रकार ने इस बात पर भी जोर दिया कि हालिया हिंसा में आम लोगों की मौत इस विद्रोह की सबसे दुखद सच्चाई को उजागर करती है, क्योंकि यह लड़ाई उन्हीं लोगों को नुकसान पहुंचा रही है जिनके नाम पर इसे लड़ा जा रहा है. उन्होंने पाकिस्तान सरकार की उस रणनीति की भी आलोचना की, जिसमें हर हमले के पीछे "विदेशी साजिश" और "भारत के उकसावे" की बात कही जाती है. ओसामा के मुताबिक, इस नैरेटिव से असली मुद्दे राजनीतिक हाशिए पर डालना, गरीबी और संसाधनों की लूट दब जाते हैं.

    चाय की दुकानों पर होती है गरीबी की चर्चा

    लेख में यह भी कहा गया है कि बलूचिस्तान जैसे खनिज संपन्न प्रांत में आज भी गरीबी क्यों है, यह सवाल आम लोग चाय की दुकानों पर फुसफुसाकर पूछते हैं. ग्वादर पोर्ट और 46 अरब डॉलर के CPEC प्रोजेक्ट को भी कई स्थानीय लोग विकास का वरदान नहीं, बल्कि इस्लामाबाद और बीजिंग के फायदे का सौदा मानते हैं.

    पाकिस्तानी सेना के खिलाफ BLA की रणनीति क्या है?

    बीएलए पाकिस्तानी सेना से सीधे टकराव से बचती है क्योंकि सेना की ताकत ज्यादा है. यह एसिमेट्रिक वॉरफेयर की रणनीति अपनाती है, जिसमें छोटे-छोटे हमले करके दुश्मन को थकाया जाता है. यह रणनीति अफगानिस्तान में तालिबान की तरह है, जहां हिट-एंड-रन का इस्तेमाल होता है. बीएलए की रणनीति समय के साथ विकसित हुई है. 

    गुरिल्ला युद्ध की मुख्य रणनीतियां

    हिट-एंड-रन हमले और घात: बीएलए लड़ाके पहाड़ी इलाकों का फायदा उठाकर सेना की चौकियों, गश्ती दलों और काफिलों पर अचानक हमला करते हैं. वे IED (इम्प्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस) यानी घरेलू बम, रॉकेट और छोटे हथियारों का इस्तेमाल करते हैं. फिर जल्दी भाग जाते हैं ताकि सेना जवाब न दे सके.

    आत्मघाती हमले: मजीद ब्रिगेड आत्मघाती बम हमले करती है, जिसमें पुरुष और महिलाएं दोनों शामिल हैं. ये हमले सेना के कैंपों, चेकपोस्टों और महत्वपूर्ण जगहों पर होते हैं. 2025 में ऐसे कई हमले हुए, जैसे नोशकी और पंजगुर कैंपों पर, जहां बीएलए ने तीन दिन तक इलाका कब्जे में रखा.

    कॉर्डिनेटेड अटैक: बीएलए एक साथ कई जगहों पर हमला करती है ताकि सेना की ताकत बंट जाए. जैसे ऑपरेशन हेरोफ (ब्लैक स्टॉर्म), जिसका दूसरा चरण 2026 में शुरू हुआ. इसमें 10 शहरों में हमले हुए. राजमार्ग बंद किए गए और पाकिस्तानी झंडे हटाकर बलूच झंडे लगाए गए. 2025 में बीएलए ने 521 हमलों का दावा किया, जिसमें 1060 से ज्यादा पाकिस्तानी सैनिक मारे गए. 
     
    टारगेट: बीएलए मुख्य रूप से पाकिस्तानी सेना, पुलिस, बुनियादी ढांचे (जैसे गैस पाइपलाइन, रेलवे), चीनी परियोजनाओं (सीपीईसी) और गैर-बलूच निवासियों को निशाना बनाती है. वे चीनी इंजीनियरों और मजदूरों पर हमले करते हैं क्योंकि उन्हें लगता है कि पाकिस्तान उनके संसाधनों का शोषण कर रहा है. 

    डिजिटल और प्रचार रणनीति: बीएलए सोशल मीडिया का इस्तेमाल करती है. टेलीग्राम, व्हाट्सएप और रंबल जैसे प्लेटफॉर्म पर वे हमलों के वीडियो, प्रचार सामग्री और शहीदों की कहानियां शेयर करते हैं. इससे भर्ती आसान होती है. वे स्थानीय शिकायतों का फायदा उठाते हैं, जैसे जबरन गायब करना और संसाधनों का शोषण.

    जब बढ़े हमले: 2025-2026 में बीएलए की रणनीति ज्यादा आक्रामक हुई है. ऑपरेशन हेरोफ में उन्होंने ड्रोन, टावर और वाहन नष्ट किए. पाकिस्तानी सेना का कहना है कि ये हमले भारत की मदद से हो रहे हैं, लेकिन इसका कोई सबूत नहीं दिया. बीएलए का लक्ष्य लंबे समय तक छोटे हमलों से सेना को थकाना है, फिर बड़ा हमला (ब्लिट्ज) करके इलाका कब्जा करना.

    हाल के विकास: 2025-2026 में बीएलए की रणनीति ज्यादा आक्रामक हुई है. ऑपरेशन हेरोफ में उन्होंने ड्रोन, टावर और वाहन नष्ट किए. पाकिस्तानी सेना का कहना है कि ये हमले भारत की मदद से हो रहे हैं, लेकिन इसका कोई सबूत नहीं दिया. बीएलए का लक्ष्य लंबे समय तक छोटे हमलों से सेना को थकाना है, फिर बड़ा हमला (ब्लिट्ज) करके इलाका कब्जा करना.

    क्या प्रभाव पड़ रहा है?

    यह संघर्ष बलूचिस्तान की अर्थव्यवस्था और सुरक्षा को प्रभावित कर रहा है. पाकिस्तानी सेना बड़े पैमाने पर ऑपरेशन चला रही है, लेकिन अलगाववाद रुक नहीं रहा. विशेषज्ञ कहते हैं कि सिर्फ सैन्य कार्रवाई से समस्या हल नहीं होगी; राजनीतिक बातचीत और विकास की जरूरत है.

    बलूचिस्तान में अशांति के कारण

    बलूचिस्तान में दशकों से चल रहा यह विद्रोह कई कारणों से भड़क रहा है…

        आर्थिक शोषण: बलूचिस्तान के संसाधनों का दोहन बिना स्थानीय लोगों को लाभ दिए किया जा रहा है.
        राजनीतिक हाशिए पर: बलूच लोगों को उनके अधिकारों और स्वायत्तता से वंचित रखा गया है.
        मानवाधिकार उल्लंघन: अमनेस्टी इंटरनेशनल और ह्यूमन राइट्स वॉच के अनुसार, हजारों बलूच कार्यकर्ता, पत्रकार और छात्रों को जबरन गायब किया गया या मार डाला गया.

     

     

  • जालंधर पहुंचे प्रधानमंत्री मोदी, डेरा सच्चखंड बल्लां में की अरदास; आदमपुर एयरपोर्ट का नामकरण गुरु रविदास के नाम

    जालंधर पहुंचे प्रधानमंत्री मोदी, डेरा सच्चखंड बल्लां में की अरदास; आदमपुर एयरपोर्ट का नामकरण गुरु रविदास के नाम

     जालंधर

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को आदमपुर एयरपोर्ट का नाम महान संत श्री गुरु रविदास जी के नाम पर रखने का उद्घाटन किया। इस मौके पर डेरा सचखंड बल्लां सहित विभिन्न स्थानों से पहुंची संगत और श्रद्धालुओं में खासा उत्साह देखने को मिला। जैसे ही प्रधानमंत्री ने एयरपोर्ट के नए नाम का औपचारिक ऐलान किया, पूरा परिसर रविदास शक्ति के नारों से गूंज उठा। इसके साथ ही प्रधानमंत्री ने हलवारा एयरपोर्ट का वर्चुअल उद्घाटन भी किया।

    प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि श्री गुरु रविदास जी का जीवन समरसता, समानता और सामाजिक न्याय का संदेश देता है। उन्होंने कहा कि गुरु रविदास जी ने अपने विचारों से समाज को नई दिशा दी और भेदभाव के खिलाफ आवाज बुलंद की। आदमपुर एयरपोर्ट का नाम उनके नाम पर रखना, उनकी शिक्षाओं के प्रति सम्मान और आने वाली पीढ़ियों को उनके विचारों से जोड़ने का प्रयास है।

    इस अवसर पर पंजाब के सामाजिक और धार्मिक संगठनों के प्रतिनिधि, संत समाज, संगत और बड़ी संख्या में स्थानीय लोग मौजूद रहे। संगत ने गुरु रविदास जी की तस्वीरों और झंडों के साथ प्रधानमंत्री का स्वागत किया। पूरे कार्यक्रम में धार्मिक आस्था और सामाजिक सम्मान का संगम साफ नजर आया।

    राजनीतिक जानकारों के अनुसार, आदमपुर एयरपोर्ट का नाम श्री गुरु रविदास जी के नाम पर किया जाना पंजाब की दलित राजनीति और सामाजिक चेतना के लिहाज से भी अहम माना जा रहा है। इसे राज्य में सामाजिक संतुलन और सम्मान की राजनीति के तौर पर देखा जा रहा है।

    सुबह से ही डेरा परिसर में रौनक बढ़ने लगी और दूर-दराज़ से पहुंची संगत प्रधानमंत्री के स्वागत और देखने को लेकर बेसब्री से इंतजार करती नजर आई। डेरा प्रबंधन और संगत की ओर से पूरे परिसर को भव्य रूप से सजाया गया। गुरु रविदास जी महाराज की शिक्षाओं और संदेशों से जुड़े बैनर-पोस्टर लगाए गए, वहीं सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी कड़े और चाक-चौबंद इंतजाम किए गए।

    प्रधानमंत्री मोदी के आगमन को केवल एक राजनीतिक कार्यक्रम के रूप में नहीं, बल्कि श्रद्धा, सामाजिक समरसता और दलित चेतना से जुड़े बड़े संदेश के तौर पर देखा जा रहा है। डेरा सच्चखंड बल्लां, जो गुरु रविदास जी महाराज की विचारधारा का प्रमुख और प्रभावशाली केंद्र है, वहां प्रधानमंत्री की मौजूदगी को संगत ने सम्मान और मान्यता के प्रतीक के रूप में लिया। जय गुरु रविदास के उद्घोष के साथ संगत डेरा परिसर में जुटती रही और पूरा माहौल आध्यात्मिक ऊर्जा से सराबोर दिखाई दिया।

    वहीं लुधियाना के हलवारा एयरपोर्ट का भी पीएम मोदी उद्घाटन करेंगे। हलवारा एयरपोर्ट पर केंद्रीय मंत्री राम मोहन नायडू और मुख्यमंत्री भगवंत मान कुछ ही देर में पहुंचने वाले हैं, वाटर प्रूफ टेंट में विशाल मंच सज चूका है और मेहमानों का आना निरंतर जारी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आदमपुर एयरपोर्ट से 3.45 पर अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट हलवारा का वर्च्युअल उद्घाटन करेंगे।

    सुरक्षा के इंतजाम पुख्ता
    प्रधानमंत्री के दौरे के मद्देनजर सुरक्षा का कड़ा इंतजाम किया गया है। पंजाब पुलिस और एसपीजी (स्पेशल प्रोटेक्शन ग्रुप) के जवान डेरा बल्लां में तैनात हैं। डीजीपी गौरव यादव ने जालंधर में सुरक्षा व्यवस्थाओं का जायजा लिया और अधिकारियों को जरूरी दिशा-निर्देश दिए।

    एयरपोर्ट का नाम श्री गुरु रविदास के नाम पर रखा जाएगा
    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सबसे पहले जालंधर के आदमपुर एयरपोर्ट पर पहुंचेंगे। यहां वे इस एयरपोर्ट का नाम श्री गुरु रविदास जी एयरपोर्ट रखने की घोषणा करेंगे। इसके अलावा वे लुधियाना के हलवारा एयरपोर्ट के नए टर्मिनल का वर्चुअल उद्घाटन भी करेंगे। सुरक्षा कारणों से प्रधानमंत्री के दौरे का पूरा कार्यक्रम सार्वजनिक नहीं किया गया है लेकिन सूत्रों के अनुसार पीएम डेरा सचखंड बल्लां में लगभग 40 मिनट रुकेंगे। इस दौरान वे डेरा सचखंड बल्लां के प्रमुख संत निरंजन दास से मुलाकात कर करेंगे। वह एक संक्षिप्त संबोधन भी दे सकते हैं। इस दौरान राज्यपाल, मुख्यमंत्री और भाजपा के वरिष्ठ नेता भी डेरा बल्लां पहुंच सकते हैं।

    जालंधर नो फ्लाइंग जोन घोषित, डीजीपी ने लिया सुरक्षा का जायजा
    प्रधानमंत्री के दौरे के मद्देनजर सुरक्षा का कड़ा इंतजाम किया गया है। पंजाब पुलिस और एसपीजी (स्पेशल प्रोटेक्शन ग्रुप) के जवान डेरा बल्लां में तैनात हैं। डीजीपी गौरव यादव ने जालंधर में सुरक्षा व्यवस्थाओं का जायजा लिया और अधिकारियों को जरूरी दिशा-निर्देश दिए। सुरक्षा के मद्देनजर 30 जनवरी से 1 फरवरी तक जालंधर को नो फ्लाइंग जोन घोषित किया गया है। इस अवधि में जिला सीमा के भीतर ड्रोन, हेलिकॉप्टर और अन्य नागरिक विमानन गतिविधियों पर प्रतिबंध रहेगा। जालंधर-पठानकोट हाईवे पर ट्रैफिक डायवर्ट किया जाएगा।

  • ग्रामीणों के 14 लाख लेकर रफूचक्कर, ‘चमत्कारी’ बाबा की हो गई मौज

    ग्रामीणों के 14 लाख लेकर रफूचक्कर, ‘चमत्कारी’ बाबा की हो गई मौज

    चंडीगढ़/मानसा.

    मानसा जिले के गांव सिरसीवाला में श्रद्धा की आड़ में कथित ढोंगी बाबा श्रद्धालुओं के 14 लाख रुपये लेकर भाग निकला। पहले आरोपी ने कड़ाके की ठंड में डेढ़ महीने तक जलधारा कर लोगों का भरोसा जीता। बाद में श्रद्धा व पुण्य सेवा के नाम पर ऑनलाइन व नकदी रूप में श्रद्धालुओं से 14 लाख रुपये ले लिए। एक धार्मिक स्थान की यात्रा दौरान आरोपी लोगों को चकमा देकर भाग निकला।

    बाबा की ठगी का शिकार हुए लोगों ने पुलिस को शिकायत की दी है। थाना बरेटा पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। आरोपी की पहचान प्रेमनाथ के के रूप में हुई है। लोगों ने बाबा के शार्गिदों को पकड़कर पुलिस के हवाले कर दिया है जिनसे पुलिस पूछताछ कर रही है।
    रूपिंद्र सिंह ने बताया कि करीब डेढ़ माह पहले बाबा प्रेमनाथ ने अपने शार्गिदों के साथ गांव आकर डेरा लगाया और जलधारा शुरू की। जलधारा के दौरान गांव वालों को लगा बाबा चमत्कारी है। लोगों की भीड़ जुड़ने लगी तो बाबा ने प्रचार किया गया कि जलधारा करवाने से गांव में सुख-शांति व खुशहाली आएगी। पहले भी उसने कई गांवों में जाकर ऐसी तपस्या की है जहां खुशहाली ही खुशहाली है। गांव के लोग बाबा बातों से प्रभावित हो गए और धीरे-धीरे गांववासियों ने बाबा को दान दक्षिणा व पुण्य दान के रूप में रुपये देने शुरू कर दिए। गांव की खुशहाली के लिए बाबा को पैसे इकट्ठे करके दिए। चढ़ावे को लेकर बाबे पर लोगों को शक न हो इसलिए वह कुछ पैसे अपने चेले के खाते में डलवाता और कैश खुद रख लेता। बाबा लोगों को कहता था कि जो मन से दान करेगा उनके सारे दुख दर्द दूर हो जाएंगे। इस पर लोगों ने दिल खोलकर दान दिया। इससे बाबा के पास 14 लाख रुपये इकट्ठे हो गए।

    लोगों ने बताया कि बाबा प्रेमनाथ ने नैना देवी जाने की इच्छा जताई। गांव के कुछ लोग बाबा को अपनी गाड़ी में लेकर साथ गए और वापसी समय पटियाला के एक ढाबे पर रोटी खाने के लिए रुके। इस दौरान बाबा लोगों को चकमा देकर भाग निकला। इस पर लोगों को अपने साथ हुई ठगी का पता लगा। गांव वालों ने बाबा के शार्गिद अजय कुमार उर्फ सोनू व अमनदीप उर्फ पंडित निवासी निरवाना को पुलिस के हवाले कर दिया। लोगों ने पुलिस से बाबा की गिरफ्तारी की भी मांग की है। थाना बरेटा की पुलिस ने बाबा प्रेमनाथ खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है। पुलिस द्वारा कुछ बैंक खातों की भी जांच की जा रही है।

  • मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय बोले – विकसित भारत की दिशा में ऐतिहासिक कदम,  केंद्रीय बजट 2026-27

    मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय बोले – विकसित भारत की दिशा में ऐतिहासिक कदम, केंद्रीय बजट 2026-27

    रायपुर,

    मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने केंद्रीय बजट 2026-27 पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि यह बजट भारत के सुनहरे और विकसित भविष्य की दिशा में एक ऐतिहासिक दस्तावेज है। कर्तव्य भवन में बना हुआ यह पहला बजट है, जिसमें देश के समग्र विकास और प्रत्येक नागरिक के कल्याण को ध्यान में रखते हुए तीन प्रमुख कर्तव्यों-आर्थिक विकास एवं रोजगार वृद्धि, जनता की अपेक्षाओं की पूर्ति तथा ‘सबका साथ, सबका विकास’ को केंद्र में रखा गया है।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि यशस्वी प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्रीय वित्त मंत्री श्रीमती निर्मला सीतारमण द्वारा प्रस्तुत यह बजट गरीब, किसान, युवा, महिला, मध्यम वर्ग और श्रमिक वर्ग के उत्थान के लिए मील का पत्थर साबित होगा। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ जैसे राज्यों को इस बजट का सीधा लाभ मिलेगा।

    कृषि और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती

    बजट में किसानों की आय बढ़ाने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त करने के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाए गए हैं। एआई और आधुनिक तकनीक के माध्यम से कृषि उत्पादकता बढ़ाने, पशुपालन एवं डेयरी उद्योग को प्रोत्साहन देने की योजना बनाई गई है। साथ ही महात्मा गांधी ग्राम स्वराज पहल के तहत स्थानीय उद्योग और हस्तशिल्प को बढ़ावा देकर ग्रामीणों के लिए रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे।

    युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर

    मुख्यमंत्री ने कहा कि इस बजट में युवाओं के लिए रोजगार सृजन पर विशेष जोर दिया गया है। स्टार्टअप, एमएसएमई, मैन्युफैक्चरिंग और पर्यटन जैसे क्षेत्रों में नए अवसर पैदा होंगे। पर्यटन को बढ़ावा देने से स्थानीय आर्थिक विकास को गति मिलेगी और युवाओं को अपने ही क्षेत्र में रोजगार मिलेगा। विदेश यात्रा और विदेशों में पढ़ाई भी पहले की तुलना में सस्ती होगी।

    स्वास्थ्य क्षेत्र में ऐतिहासिक पहल
    स्वास्थ्य क्षेत्र को लेकर बजट को ऐतिहासिक बताते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि बायोफार्मा सेक्टर के लिए 10 हजार करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है, जिससे कैंसर, डायबिटीज सहित अन्य गंभीर बीमारियों की दवाइयां सस्ती होंगी। जिला अस्पतालों के उन्नयन, हर जिले में इमरजेंसी एवं ट्रॉमा सेंटर की स्थापना, मानसिक स्वास्थ्य और आयुर्वेदिक चिकित्सा को बढ़ावा देने के साथ-साथ मेडिकल टूरिज्म के लिए राज्यों में पांच रीजनल हब स्थापित किए जाएंगे। इससे छत्तीसगढ़ सहित पूरे देश में स्वास्थ्य सेवाओं का स्तर बेहतर होगा और रोजगार के नए अवसर भी खुलेंगे।

    महिला सशक्तिकरण को नई दिशा

    लखपति दीदी योजना के विस्तार के माध्यम से महिलाओं को क्रेडिट-लिंक्ड स्वरोजगार, उद्यमिता और स्थानीय बाजार से जोड़ने की व्यवस्था की गई है। इसके अलावा हर जिले में बालिकाओं के लिए छात्रावास निर्माण की घोषणा से उन्हें उच्च शिक्षा में सहायता मिलेगी।

    उद्योग, शिक्षा और खेल को बढ़ावा

    देश की आर्थिक मजबूती के लिए 7 हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर, 20 नए जलमार्ग, बड़े टेक्सटाइल पार्क और 4 राज्यों में खनिज कॉरिडोर की घोषणा की गई है। सेमीकंडक्टर मिशन के लिए 40 हजार करोड़ रुपये के निवेश से औद्योगिक विकास और रोजगार को नई गति मिलेगी। वहीं खेलो इंडिया मिशन और शिक्षा क्षेत्र में सुधारों से बच्चों और युवाओं को बेहतर अवसर मिलेंगे।

    कर सुधार और आम जनता को राहत

    आयकर प्रक्रिया को सरल बनाया गया है और छोटे करदाताओं के लिए आसान व्यवस्था की गई है। दवाइयां, कपड़े, जूते, मोबाइल, ईवी बैटरी, सोलर उपकरण, बायोगैस-सीएनजी सहित कई रोजमर्रा की वस्तुएं सस्ती होंगी, जिससे आम जनता को सीधी राहत मिलेगी।

    अंत में मुख्यमंत्री ने कहा कि केंद्रीय बजट 2026-27 ‘सबका साथ, सबका विकास, सबका प्रयास और सबका विश्वास’ की भावना को और मजबूत करता है। यह बजट छत्तीसगढ़ सहित पूरे देश में समावेशी विकास सुनिश्चित करेगा। उन्होंने छत्तीसगढ़ की जनता की ओर से प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय वित्त मंत्री श्रीमती निर्मला सीतारमण को इस ऐतिहासिक, विकासशील और जनकल्याणकारी बजट के लिए हार्दिक धन्यवाद ज्ञापित किया।

  • यूपी आरटीई प्रवेश नियमों में बड़ा फेरबदल, कल से आवेदन लेकिन किराए पर रहने वाले बाहर

    यूपी आरटीई प्रवेश नियमों में बड़ा फेरबदल, कल से आवेदन लेकिन किराए पर रहने वाले बाहर

    लखनऊ

    शिक्षा का अधिकार अधिनियम (आरटीई) के तहत निजी विद्यालयों में होने वाले प्रवेश के नियमों में बदलाव किया गया है। किराए के मकान में रहने वाले अभिभावकों के बच्चों को आरटीई के तहत प्रवेश नहीं मिलेगा। इसके लिए रजिस्ट्रार कार्यालय में घर का पंजीकरण जरूरी है। बच्चों के यूनिफार्म का पैसा सीधे अभिभावकों के खाते में अब निदेशालय स्तर से ही भेजा जाएगा। इसमें बैंक से आधार कार्ड का सत्यापन जरूरी है।

    शिक्षा का अधिकार अधिनियम के तहत राजधानी में संचालित 1576 प्राइवेट स्कूलों में करीब 21000 सीटों पर प्रवेश के लिए 2 फरवरी से ऑनलाइन आवेदन शुरू होंगे। बेसिक शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने बताया आरटीई के तहत प्रवेश लेने वाले सभी बच्चों के दस्तावेज की ऑनलाइन कॉपी विभाग के वेबसाइट पर भी अपलोड होगी। संबंधित निजी स्कूल के प्रबंधक व प्रधानाचार्य यूजर आईडी के माध्यम से संबंधित बच्चों के दस्तावेज को चेक भी कर सकते हैं। इस पहल से आर्थिक रूप से कमजोर बच्चों के प्रवेश में पादर्शिता बनी रहेगी।

    जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी विपिन कुमार के अनुसार, बीते साल 1398 निजी स्कूलों में कुल 18000 सीटों पर प्रवेश के लिए आवेदन लिए गए थे। इस बार स्कूलों की संख्या में बढ़ोतरी के साथ- साथ सीटों की संख्या में भी इजाफा हुआ है। निजी स्कूलों में प्रवेश लेने वाले बच्चों की फीस विभाग की ओर से आपूर्ति की जा रही है इसके लिए संबंधित स्कूलों से डाटा मांगा गया है।

    निजी स्कूलों में नर्सरी, एलकेजी, यूकेजी और पहली कक्षा में प्रवेश के लिए पहले चरण की 2 से 16 फरवरी तक आवेदन होंगे। 21 फरवरी से 7 मार्च तक द्वितीय चरण और 12 से 25 मार्च तक तृतीय चरण के लिए आवेदन होंगे। आवेदन और दस्तावेज जांच के बाद 18 फरवरी को पहली लॉटरी, 9 मार्च को द्वितीय लॉटरी और 27 मार्च को तृतीय चरण की लॉटरी जारी होगी।

    आईटीई प्रवेश के लिए इन दस्तावेज की होगी जरूरत

    शहर निवासी और आर्थिक रूप से कमजोर बच्चों को ही आरटीई के तहत निजी विद्यालयों में प्रवेश मिलेंगे। जिला शिक्षा परियोजना समिति की ओर से जारी आदेश के अनुसार, प्रवेश के दौरान तहसीलदार द्वारा निर्गत जाति प्रमाण पत्र, निवास प्रमाण पत्र, राशन कार्ड, ग्रामीण क्षेत्र में जॉब कार्ड,चिकित्सा प्रमाणपत्र और आधार कार्ड की जरूरत होगी। मानक के अनुसार, इनमें से जरूरी दस्तावेज होने पर ही प्रवेश आवेदन होंगे।

     

  • तेज रफ्तार ट्रक ने ऑटो को मारी जोरदार टक्कर, बिहटा में सड़क हादसे में 6 की मौत

    तेज रफ्तार ट्रक ने ऑटो को मारी जोरदार टक्कर, बिहटा में सड़क हादसे में 6 की मौत

    पटना.

    बिहार में सुबह-सुबह बड़ा सड़क हादसा हुआ है। यहां एक तेज रफ्तार ट्रक ने यात्रियों से भरी ऑटो में जोरदार टक्कर मार दी। इस हादसे में 6 लोगों की मौत हो गई है। 2 लोग घायल भी हैं। हादसे के बाद पुलिस इसकी जांच-पड़ताल में जुट गई है। सभी लोग मनेर में उर्स मेले से लौट रहे थे।

    इधर, मौसम विभाग ने बताया है कि बिहार में मौसम करवट ले सकता है। आज मुजफ्फरपुर, वैशाली, पश्चिमी चंपारण और पूर्वी चंपारण समेत कई जिलो में कोहरे का येलो अलर्ट है। इसके अलावा अगले 48 घंटे में कहीं-कहीं बूंदाबांदी का दौर भी रह सकता है।
    जहानाबाद की रहने वाली नीट छात्रा की पटना में हुई संदिग्ध मौत की जांच को लेकर अब एसआईटी का चैप्टर क्लोज हो चुका है। एसआईटी मामले की जांच कर रही थी लेकिन अब सीबीआई पूरे केस की जांच करेगी। इस केस में अब तक मुख्य आरोपी का कुछ पता नहीं चल सका है। कई सवाल अब भी अनसुलझे हैं। इधर केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार आज अपना बजट पेश करेगी। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के पिटारे में बिहार के लिए क्या-क्या है, इसपर भी सबकी निगाहें होंगी।

  • अब गैजेट खरीदना होगा आसान? सरकार के फैसले से मोबाइल से लेकर AC तक हो सकते हैं सस्ते

    अब गैजेट खरीदना होगा आसान? सरकार के फैसले से मोबाइल से लेकर AC तक हो सकते हैं सस्ते

    नई दिल्ली
    बजट 2026 में अनाउंट किए गए Semiconductor Mission 2.0 का असली फायदा यही है कि भारत की टेक्नोलॉजी विदेशी सप्लाई पर निर्भरता कम होगी। इसका सीधा मतलब है कि देश में गैजेट्स और इलेक्ट्रॉनिक्स सस्ते हो सकते हैं।

    सेमीकंडक्टर मिशन 2.0 से ये सब होगा सस्ता
    वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने रविवार को बजट 2026 पेश किया और इसमें स्थानीय मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देते हुए India Semiconductor Mission 2.0 को 40,000 करोड़ रुपये का समर्थन मिला है। इसका सीधा मतलब है कि इलेक्ट्रॉनिक्स में लगने वाले सेमीकंडक्टर चिप अब भारत में बनाए जाएंगे। सीधा मतलब है कि फोन से लेकर होम अप्लायंसेज तक अगले कुछ साल में सस्ते होने वाले हैं और इनकी कीमतें गिरेंगी। आप नीचे देख सकते हैं कि किन चीजों की कीमत में गिरावट देखने को मिल सकती है।
     
    इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) और कारें
    आज की कारों और खासकर EV में दर्जनों नहीं, बल्कि सैकड़ों चिप्स इस्तेमाल होती हैं। पिछले कुछ सालों में चिप की कमी के कारण गाड़ियां महंगी हुईं और वेटिंग बढ़ी है। देश में ऑटोमोटिव-ग्रेड चिप्स बनने से सप्लाई स्टेबल होगी और लागत घटेगी। लंबे समय में इससे EV की कीमत और मेंटिनेंस कॉस्ट कम हो सकती है।
     
    इलेक्ट्रॉनिक्स और होम अप्लायंसेज
    टीवी, फ्रिज, AC, वॉशिंग मशीन, आज हर अप्लायंस 'स्मार्ट' हो चुका है और इन स्मार्ट फीचर्स के लिए माइक्रोचिप्स जरूरी हैं। लोकल सेमीकंडक्टर सप्लाई मिलने पर कंपनियों का खर्च घटेगा, जिसका असर स्मार्ट टीवी, इन्वर्टर AC और एनर्जी-एफिशिएंट अप्लायंसेज की कीमतों पर दिख सकता है।
     
    स्मार्टफोन और टैबलेट
    स्मार्टफोन में प्रोसेसर, कैमरा, नेटवर्क और बैटरी मैनेजमेंट, सब कुछ चिप्स पर निर्भर करता है। अभी ये चिप्स ज्यादातर बाहर से मंगाई जाती हैं, जिससे लागत बढ़ जाती है। ये चिप्स भारत में बनने लगती हैं, तो मैन्युफैक्चरिंग कॉस्ट घटेगी। इसका फायदा सबसे पहले बजट और मिड-रेंज स्मार्टफोन में दिख सकता है।

    लैपटॉप, राउटर और स्मार्ट गैजेट्स
    लैपटॉप, Wi-Fi राउटर, स्मार्टवॉच और IoT डिवाइस कई तरह की चिप्स के साथ काम करते हैं। अभी इन्हें इंपोर्ट करना पड़ता है, जिससे कीमतें बढ़ती हैं। Semiconductor Mission 2.0 में चिप पैकेजिंग और टेस्टिंग पर भी जोर है, जिससे इन गैजेट्स की लागत कम हो सकती है। ऐसे में पहले एंट्री-लेवल लैपटॉप और नेटवर्किंग डिवाइसेज को फायदा मिलेगा।

    मेडिकल और हेल्थकेयर डिवाइसेज
    BP मशीन, ECG, ऑक्सीमीटर और कई डायग्नोस्टिक टूल्स भी चिप्स पर चलते हैं। देश में चिप्स बनने से मेडिकल डिवाइस का प्रोडक्शन सस्ता होगा और इलाज से जुड़े टूल्स अफऑर्डेबल बन सकते हैं।

    पावर, सोलर और चार्जिंग सिस्टम
    स्मार्ट मीटर, सोलर इन्वर्टर, EV चार्जर और पावर कंट्रोल सिस्टम में सेमीकंडक्टर बड़ी भूमिका निभाते हैं। Mission 2.0 के साथ पावर-चिप्स को बढ़ावा मिलने से ऊर्जा और चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर की लागत कम हो सकती है, जिसका सीधा फायदा आम लोगों को मिलेगा।

  • 50 रुपये महंगा हुआ एलपीजी सिलेंडर, बजट से पहले बड़ा झटका

    50 रुपये महंगा हुआ एलपीजी सिलेंडर, बजट से पहले बड़ा झटका

    नई दिल्ली.

    आज बजट से पहले ही LPG सिलेंडर के उपभोक्ताओं को झटका लगा है। कॉमर्शियल एलपीजी (लिक्विफाइड पेट्रोलियम गैस) सिलेंडर और घरेलू सिलेंडर के रेट आज 1 फरवरी 2026 अपडेट हुए हैं। कॉमर्शियल सिलेंडर के उपभोक्ताओं को दिल्ली से पटना तक करीब 50 रुपये का तेज झटका लगा है। जबकि, घरेलू एलपीजी सिलेंडर के दाम में कोई बदलाव नहीं हुआ है।

    दिल्ली में 19 किलो वाला एलपीजी सिलेंडर आज से 1691.50 रुपये की जगह 1740.50 में मिलेगा। कोलकाता में पहले 1795 रुपये का था और अब 1844.50 रुपये का हो गया है। मुंबई में कॉमर्शियल सिलेंडर अब 1642.50 की जगह 1692 रुपये में मिलेगा। चेन्नई में अब आज से कॉमर्शियल सिलेंडर 1899.50 रुपये में मिलेगा पहले यह 1849.50 रुपये का था।

    घरेलू एलपीजी के रेट
    भारत में इंडियन ऑयल के डेटा के आधार पर एलपीजी (लिक्विफाइड पेट्रोलियम गैस) की कीमतों की बात करें तो आज 14.2 किग्रा वाला घरेलू सिलेंडर दिल्ली में ₹853 में मिल रहा है। जबकि, पटना में इसकी कीमत ₹951 है। मुंबई में ₹852.50 और लखनऊ में ₹890.50 में मिल रहा है। कारगिल में ₹985.5, पुलवामा में ₹969, बागेश्वर में ₹890.5 का है।

    बजट डे पर कैसे रहा है ट्रेंड
    इंडियन ऑयल की वेबसाइट पर दिए गए आंकड़ों के मुताबिक पिछले 5 साल में बजट के दिन घरेलू एलपीजी सिलेंडर के दाम में कोई बदलाव नहीं हुआ। जबकि, कॉमर्शियल सिलेंडर के दाम बढ़े और घटे भी हैं।
    2022 में बजट डे के दिन 1 फरवरी को कॉमर्शियल सिलेंडर के उपभोक्ताओं को बड़ी राहत मिली थी। इस दिन दिल्ली में 19 किलो वाला नीला सिलेंडर 91.50 रुपये, कोलकाता में 89 रुपये, मुंबई में 91.50 रुपये और चेन्नई में 91 रुपये सस्ता हुआ था।
    2023 में न तो घरेलू एलपीजी सिलेंडर के रेट बदले और न ही कॉमर्शियल के।
    2024 में बजट डे के दिन घरेलू एलपीजी सिलेंडर के उपभोक्ताओं की जेब पर तो कोई असर नहीं पड़ा, लेकिन कॉमर्शियल एलपीजी सिलेंडर के उपभोक्ताओं को 18 रुपये तक झटका लगा था।
    2025 में बजट डे के दिन कॉमर्शियल एलपीजी सिलेंडर उपभोक्ताओं को ऊंट के मुंह में जीरा जितनी राहत मिली। सिलेंडर के दाम महज 6.50 रुपये कम हुए।

  • सुपरजेट की जगह Su-57? भारत में आने वाला दुनिया का सबसे चर्चित फाइटर जेट, तैयारियों की खबर

    सुपरजेट की जगह Su-57? भारत में आने वाला दुनिया का सबसे चर्चित फाइटर जेट, तैयारियों की खबर

    नई दिल्ली

    हाल ही में HAL (हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड) और रूस की UAC (यूनाइटेड एयरक्राफ्ट कॉर्पोरेशन) के बीच SJ-100 (सुखोई सुपरजेट 100) विमानों के भारत में उत्पादन को लेकर हुए समझौते ने रक्षा गलियारों में हलचल तेज कर दी है। अब सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि क्या नागरिक विमानों के बाद अब 'खतरनाक' सुखोई Su-57 लड़ाकू विमान भारतीय वायु सेना (IAF) के बेड़े का हिस्सा बनेंगे?

    SJ-100 समझौता: एक नया मोड़

    भारत और रूस के बीच नागरिक विमानन के क्षेत्र में हुआ यह समझौता 'मेक इन इंडिया' की दिशा में एक बड़ा कदम है। SJ-100 एक क्षेत्रीय जेट है, और इसके स्थानीय उत्पादन से भारत में एयरोस्पेस ईकोसिस्टम मजबूत होगा। विशेषज्ञों का मानना है कि यह साझेदारी भविष्य के सैन्य समझौतों के लिए एक 'टेस्ट केस' साबित हो सकती है।
    क्या बोले रूसी अधिकारी?

    खुद रूसी एरोस्पेस कंपनी के एक शीर्ष अधिकारी ने यह दावा किया कि भारत और रूस पांचवीं पीढ़ी के सुखोई एसयू-57ई लड़ाकू विमान के भारत में संयुक्त उत्पादन की संभावना तलाशने के लिए तकनीकी पहलुओं पर चर्चा कर रहे हैं। हालांकि, भारत की ओर से अधिकारी के दावे पर कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है। रूस के यूनाइटेड एयरक्राफ्ट कॉर्पोरेशन (यूएसी) के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) वादिम बदेखा ने हैदराबाद के बेगमपेट हवाई अड्डे पर विंग्स इंडिया एयर शो से इतर रूसी संवाददाताओं से कहा- हम इस कॉन्ट्रैक्ट पर तकनीकी बातचीत के उन्नत चरण में हैं। हमारे अनुभव को देखते हुए, ऐसे कॉन्ट्रैक्ट होने वाले हैं जो कई दशकों तक हमारे सहयोग की दिशा तय करेंगे हैं।’ रूस ने इस प्रदर्शनी के दौरान अपने नवीनतम क्षेत्रीय परिवहन विमान – इल्यूशिन आईएल-114-300 और सुखोई एसजे-100 – को प्रदर्शित किया था। बदेखा ने दावा किया कि दोनों पक्ष वर्तमान में भारत में एसयू-30 विमानों के उत्पादन के लिए उपयोग की जाने वाली सुविधाओं में एसयू-57 लड़ाकू विमानों के लाइसेंस प्राप्त उत्पादन और इसके लिए भारतीय उद्योग और भारतीय प्रणालियों के अधिकतम उपयोग पर भी चर्चा कर रहे हैं।
    Su-57 'Felon': रूस का सबसे घातक योद्धा

    Su-57 रूस का पहला 5वीं पीढ़ी का सटील्थ लड़ाकू विमान है। इसकी कुछ प्रमुख विशेषताएं इसे खास बनाती हैं। जैसे-

    स्टेल्थ तकनीक: यह रडार की नजरों से बचने में सक्षम है।

    सुपरक्रूज: बिना आफ्टरबर्नर के ध्वनि की गति से तेज उड़ने की क्षमता।

    हथियार: इसके इंटरनल वेपन बे में आधुनिक मिसाइलें छिपी होती हैं, जो इसके स्टेल्थ को बरकरार रखती हैं।
    भारत और Su-57 का इतिहास (FGFA प्रोग्राम)

    आपको याद होगा कि भारत पहले रूस के साथ FGFA (Fifth Generation Fighter Aircraft) प्रोग्राम का हिस्सा था, जो Su-57 पर ही आधारित था। लेकिन 2018 में भारत इस प्रोजेक्ट से पीछे हट गया था। इसके मुख्य कारण थे:

        इंजन की तकनीक में कमी।
        स्टेल्थ फीचर्स पर असंतोष।
        लागत और तकनीक हस्तांतरण (ToT) के मुद्दे।

    क्या अब पासा पलट रहा है?

    SJ-100 समझौते के बाद Su-57 की चर्चा फिर से शुरू होने के तीन मुख्य कारण हैं-

        नया इंजन (AL-51F1)- रूस ने अब Su-57 के लिए नया 'स्टेज 2' इंजन विकसित कर लिया है, जो भारत की पुरानी शिकायतों को दूर कर सकता है।
        युद्ध का अनुभव- यूक्रेन युद्ध में रूस ने Su-57 का सीमित उपयोग किया है, जिससे इसकी परिचालन क्षमता के वास्तविक आंकड़े सामने आए हैं।
        चीन की चुनौती- चीन के पास J-20 जैसे 5वीं पीढ़ी के विमानों की बढ़ती संख्या को देखते हुए भारतीय वायुसेना को जल्द ही एक सटील्थ फाइटर की जरूरत है।

    चुनौतियां और 'आत्मनिर्भर भारत'

    भले ही रूस भारत को Su-57 ऑफर कर रहा हो, लेकिन भारत के सामने कुछ कठिन विकल्प हैं। दरअसल भारत अपना स्वदेशी 5वीं पीढ़ी का विमान AMCA विकसित कर रहा है। Su-57 खरीदने से इस स्वदेशी प्रोजेक्ट के बजट और प्राथमिकता पर असर पड़ सकता है। इसके अलावा, रूस से बड़े रक्षा सौदे करने पर अमेरिका के CAATSA प्रतिबंधों का खतरा हमेशा बना रहता है। भारत अब केवल 'खरीदने' में नहीं, बल्कि 'भारत में बनाने' और 'पूर्ण तकनीक' प्राप्त करने में रुचि रखता है।

    रूस की सरकारी समाचार एजेंसी आरआईए नोवोस्ती के मुताबिक इससे पहले, सरकारी हथियार निर्यातक कंपनी रोसोबोरोनएक्सपोर्ट के सीईओ अलेक्जेंडर मिखीव ने घोषणा की थी कि कंपनी नई दिल्ली को नवीनतम पांचवीं पीढ़ी के एसयू-57ई लड़ाकू विमानों की आपूर्ति के साथ-साथ भारत में उनके उत्पादन और स्वदेशी एएमसीए स्टील्थ लड़ाकू विमान के विकास में सहायता की पेशकश कर रही है।

    कुल मिलाकर SJ-100 समझौता यह दर्शाता है कि भारत और रूस के बीच औद्योगिक संबंध अभी भी गहरे हैं। यदि रूस Su-57 के लिए पूर्ण तकनीक हस्तांतरण (ToT) और स्वदेशी AMCA में सहयोग का प्रस्ताव देता है, तो 'Felon' भारत के आकाश की सुरक्षा करते हुए दिखाई दे सकते हैं। हालांकि, अभी वायु सेना का मुख्य ध्यान राफेल के अगले बैच और स्वदेशी विमानों पर है।