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  • हूती विद्रोहियों पर शिकंजा कसने की तैयारी, सऊदी अरब को अमेरिका, पाकिस्तान और तुर्की से मिल सकती है मदद

    हूती विद्रोहियों पर शिकंजा कसने की तैयारी, सऊदी अरब को अमेरिका, पाकिस्तान और तुर्की से मिल सकती है मदद

    रियाद
     सऊदी अरब ने रियाद के किंग खालिद अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर 10 अक्टूबर को हुए घातक हमले का कड़ा जवाब देने की कसम खाई है। इस हमले में 12 लोग मारे गए और 309 अन्य घायल हो गए थे। यह हमला यमन में ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों का सऊदी अरब के हवाई अड्डों और नागरिक बुनियादी ढांचे को निशाना बनाकर चलाए जा रहे सैन्य अभियान का हिस्सा है। यह हमला ऐसे समय हुआ है जब यमन में लड़ाई तेज हो रही है और खाड़ी क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा संबंधी चिंताएं बढ़ रही हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि सऊदी अरब हूती विद्रोहियों के हमलों का किस तरह से जवाब दे सकता है।

    एक्सपर्ट्स का मानना है कि हूती विद्रोही अपनी रणनीति के तहत सऊदी अरब को चौतरफा घेर रहे हैं। उनकी रणनीति सऊदी अरब के रणनीतिक बुनियादी ढांचों पर हमला कर दबाव बढ़ाने की है। हूती विद्रोही नागरिक जीवन को बाधित करने का प्रयास कर रहे हैं। यह रणनीति कुछ ऐसी ही है, जैसे ईरान ने अमेरिका के खिलाफ अपनाई थी। ईरान ने मध्य पूर्व में अमेरिकी सैन्य अड्डों की मेजबानी करने वाले देशों के एयरपोर्ट, तेल के कुओं और स्टोरेज फैसिलिटी को निशाना बनाया। इसका सीधा असर अमेरिका पर पड़ा और उसे दबाव में ईरान के साथ बैकचैनल बातचीत के लिए राजी होना पड़ा है।

    हूतियों को रोकने में सऊदी अरब नाकाम
    सऊदी अरब के पास दुनिया के सबसे महंगे एयर डिफेंस सिस्टम हैं। हालांकि, ईरान और हूती विद्रोहियों ने यह साबित कर दिया है कि वे न केवल सऊदी अरब में बल्कि खाड़ी देशों और हां तक कि इजरायल के एयर डिफेंस को भेदकर हमला करने में सक्षम हैं। इसका प्रमुख कारण हूती विद्रोहियों के हथियारों के जखीरे में बड़ी संख्या में मिसाइलों की मौजूदगी है। इन मिसाइलों को अब स्थानीय स्तर पर ही बनाया जा रहा है। इससे हूतियों को हथियारों के लिए ईरान से आने वाली सप्लाई पर निर्भर नहीं रहना पड़ रहा है। इससे हूती विद्रोही अपने सैन्य अभियान को बड़े पैमाने पर और बिना किसी बाधा के अंजाम दे रहे हैं।

    हूतियों के खिलाफ कैसे कार्रवाई कर सकता है सऊदी अरब?
    सऊदी अरब की तुलना में हूथियों के पास खोने के लिए कम है। उनके पास रणनीतिक बुनियादी ढांचा बहुत कम है। रियाद 2015 से ही उनसे लड़ रहा है। सऊदी अरब के नेतृत्व वाला सैन्य गठबंधन यमन की राजधानी सना और हूती-नियंत्रित क्षेत्रों में मिसाइल लॉन्च पैड्स, ड्रोन डिपो और कमांड सेंटरों पर हवाई हमले तेज कर सकता है। इसके अलावा सऊदी समर्थित यमनी सरकारी सेना को आधुनिक हथियार और फंडिंग देकर बाब अल-मंदेब जलडमरूमध्य और लाल सागर के तटीय क्षेत्रों को हूतियों के कब्जे से छुड़ाने के लिए बड़ा जमीनी अभियान चला सकता है।

    अमेरिका-पाकिस्तान-तुर्की देंगे सऊदी का साथ?
    हूती विद्रोहियों के हमलों में अमेरिकी नागरिकों की मौत के बाद सऊदी अरब अपनी रक्षा के लिए अन्य देशों से समर्थन जुटा रहा है। ऐसी संभावना है कि हूती विद्रोहियों के खिलाफ हमलों में अमेरिका भी शामिल हो जाए। सऊदी अरब पाकिस्तान और तुर्की जैसे साझेदार देशों के साथ मिलकर रक्षा समझौते के तहत रणनीतिक व तकनीकी मदद ले सकता है। इसके अलावा वह लाल सागर और अरब सागर में समुद्री गश्त बढ़ाकर ईरान से हूतियों तक पहुंचने वाले ड्रोन, मिसाइल और घातक हथियारों की तस्करी के रास्तों को पूरी तरह सील कर सकता है।

     

  • न ईंट, न लकड़ी! कांच की बोतलों से बना यह घर बना म्यूजियम, जानें कहां है अनोखी इमारत

    न ईंट, न लकड़ी! कांच की बोतलों से बना यह घर बना म्यूजियम, जानें कहां है अनोखी इमारत

    कैनबरा
    साल 1967 में ऑस्ट्रेलिया के दूर-दराज इलाके में हजारों बेकार कांच की बोतलों से घर बनाया गया था। छह दशक बाद यह इमारत न्यू साउथ वेल्स के लाइटनिंग रिज इलाके में मौजूद है। आज यह पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र है और यहां ओपल-माइनिंग से जुड़ी चीज़ें, पुरानी बोतलें और दूसरी ऐतिहासिक वस्तुएं रखी गई हैं। बॉटल हाउस के नाम से जानी जाने वाली इस इमारत को टेक्स मोकेल ने बनाया था।

    इस इमारत की दीवारें कांच की बोतलों को जोड़कर बनाई गई हैं, जबकि इसकी ढलान वाली छत नालीदार लोहे की चादर की है। इमारत के अंदर कई छोटे कमरे और एक मचान है। 1967 में बना बॉटल हाउस शहर की खास पहचान वाली जगहों में से एक है। इसे बॉटल हाउस एंड माइनिंग म्यूजियम के तौर पर लिस्ट किया गया है और पुराने माइनिंग कैंप में अनोखी वास्तुकला का उदाहरण बताया गया है।

    बेकार बोतलें कैसे बनीं निर्माण सामग्री
    इस इमारत की दीवारें इसकी सबसे खास विशेषता हैं। कांच की बोतलों की कतारों से इसका ढांचा बना है, जिससे यह ईंट, लकड़ी या कंक्रीट से बने आम घरों से बिल्कुल अलग दिखता है। बॉटल हाउस को क्वींसलैंड बॉर्डर के पास बसे छोटे से शहर हेबेल से इकट्ठा की गई बोतलों से बनाया गया था। न्यू साउथ वेल्स सरकार की आधिकारिक पर्यटन जानकारी के अनुसार, शुरुआत में बोतलों को जोड़ने के लिए सीमेंट का इस्तेमाल किया गया था।

    मोकेल को बाद में पता चला कि स्थानीय मिट्टी ज़्यादा सही थी क्योंकि इससे टूटी हुई बोतल को बदलना आसान हो जाता था। इमारत की दीवारें इसकी सबसे खास विशेषता हैं। कांच की बोतलों की कतारों से इसका ढांचा बना है, जिससे यह ईंट, लकड़ी या कंक्रीट से बने आम घरों से बिल्कुल अलग दिखता है। कांच से होकर आने वाली रोशनी एक और खास नजारा बनाती है।

    कितनी बोलतों का हुआ इस्तेमाल
    उपलब्ध ऐतिहासिक रिकॉर्ड में निर्माण में इस्तेमाल की गई बोतलों की सही संख्या नहीं बताई गई है। हालांकि इमारत की दीवारें तकरीबन पूरी तरह से बोतलों से बनी हैं, जिससे बेकार कांच इसके डिजाइन का मुख्य हिस्सा बन गया है। आज इस इमारत में एक छोटा सा म्यूजियम है, जिसमें ओपल माइनिंग और खनिजों से जुड़ी चीजें रखी गई हैं।

    बॉटल हाउस असल में खनिकों के एक कैंप से जुड़ा था, जो लाइटनिंग रिज के ओपल-माइनिंग बस्ती वाले इतिहास को दिखाता है। उत्तरी न्यू साउथ वेल्स का यह शहर अपने काले ओपल के लिए मशहूर है और यहां माइनिंग और छोटी बस्तियों का लंबा इतिहास रहा है। 1970 के दशक में कुछ समय के लिए डेव मार्टिन ने बॉटल हाउस चलाया था।

    बॉटल हाउस कहां है
    बॉटल हाउस और माइनिंग म्यूजियम, लाइटनिंग रिज, न्यू साउथ वेल्स (पोस्टकोड 2834) में ओपल स्ट्रीट पर स्थित है। न्यू साउथ वेल्स सरकार की वेबसाइट के अनुसार, यहां एंट्री फीस 2 से 10 ऑस्ट्रेलियन डॉलर के बीच है। यह जगह इलाके की माइनिंग विरासत और निर्माण के अनोखे तरीके, दोनों की झलक दिखाती है।

    1967 में टेक्स मोकेल का बनाया गया बॉटल हाउस उस समय की याद दिलाता है, जब बेकार पड़ी चीजों का इस्तेमाल करके स्थानीय इमारत बनाई जाती थी। खनिकों के कैंप के हिस्से के तौर पर शुरुआती दिनों की तुलना में अब इसका मकसद अलग है। पर्यटकों के लिए लाइटनिंग रिज के इतिहास की चीजों को सहेजकर रखना है।

  • Starlink की एंट्री पर बढ़ा विवाद, निशिकांत दुबे ने मस्क को दी अमेरिका में सस्ता इंटरनेट देने की सलाह

    Starlink की एंट्री पर बढ़ा विवाद, निशिकांत दुबे ने मस्क को दी अमेरिका में सस्ता इंटरनेट देने की सलाह

    नई दिल्ली
     भारत में एलन मस्क की सैटेलाइट इंटरनेट कंपनी 'स्टारलिंक' की एंट्री को लेकर चल रहे विवाद अब सातवें आसमान पर पहुंच गया है। ऐसे में बढ़ते विवाद के बीच भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने एलन मस्क के बयान और आरोपों पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए दो टूक जवाब दिया है।

    मस्क के आरोपों पर भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने दो टूक कहा कि स्टारलिंक भारत की सुरक्षा एजेंसियों के लिए गंभीर खतरा है और भारत किसी भी दबाव में अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा नीति नहीं बदलेगा।

    निशिकांत दुबे ने क्या कहा?
    सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए सांसद और संचार और सूचना प्रौद्योगिकी पर बनी संसदीय स्थायी समिति के अध्यक्ष निशिकांत दुबे ने कहा कि पैनल ने देश की सुरक्षा एजेंसियों के सामने आने वाली इन चुनौतियों की गहन जांच की है। उन्होंने जोर दिया कि रक्षा मंत्रालय, गृह मंत्रालय और हमारी जांच एजेंसियां इस तरह के खतरों के खतरनाक खेलों से प्रभावित हो रही हैं।

    मस्क पर निशाना साधते हुए अमेरिका को दी सलाह
    अपने पोस्ट में मस्क पर निशाना साधते हुए दुबे ने कहा कि उन्हें पहले अपने देश अमेरिका में गरीबों को किफायती दरों पर इंटरनेट देना चाहिए, उसके बाद भारत पर आरोप लगाने चाहिए। दुबे ने दो टूक कहा कि भारत एक संप्रभु लोकतांत्रिक देश है, यह किसी के दबाव या सोशल मीडिया पोस्ट के आगे झुककर अपनी सुरक्षा नीति नहीं बदलता।

    पैसे के ऊपर देश की सुरक्षा- दुबे
    इस दौरान दुबे ने साफ किया कि अगर भारत सरकार का फैसला सिर्फ पैसों या मुनाफे पर आधारित होता, तो सुरक्षा एजेंसियों के विरोध के बावजूद वे स्टारलिंक के लिए रेड कारपेट बिछा देते। उन्होंने यह भी याद दिलाया कि 2013-14 में मनमोहन सिंह की सरकार के समय भी TRAI को ऐसे खतरों से आगाह किया गया था।

    अब जानिए एलन मस्क ने क्या आरोप लगाए?
    गौरतलब है कि इससे पहले एलन मस्क ने आरोप लगाया था कि रिलायंस इंडस्ट्रीज के मुखिया मुकेश अंबानी के समर्थकों जैसे प्रभावशाली व्यापारिक समूह अपनी मोनोपॉली बचाने के लिए स्टारलिंक की राह में रोड़ा अटका रहे हैं। मस्क का दावा था कि स्टारलिंक से भारतीय आम नागरिकों को फायदा होगा।

    भारत सरकार ने मस्क को दिखाया था आईना
    हालांकि इन आरोपों को खारिज करते हुए सरकार ने साफ किया है कि स्टारलिंक के साथ कोई भेदभाव नहीं किया जा रहा है, बल्कि किसी भी कंपनी का कॉमर्शियल ऑपरेशन नियमों और सुरक्षा पर निर्भर करता है। नई दिल्ली में आयोजित 'इंडिया मोबाइल कांग्रेस 2026' में केंद्रीय संचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने भी स्पष्ट किया कि भारत किसी भी सेक्टर में एकाधिकार की अनुमति नहीं देगा।

     

  • बाल विवाह के आधे से ज्यादा मामले इन 5 राज्यों में, उत्तर प्रदेश-बिहार समेत यहां सबसे बड़ी चुनौती

    बाल विवाह के आधे से ज्यादा मामले इन 5 राज्यों में, उत्तर प्रदेश-बिहार समेत यहां सबसे बड़ी चुनौती

     नई दिल्ली
    भारत में 2030 तक बाल विवाह समाप्त करने का लक्ष्य नजदीक आ रहा है। इसके बावजूद दुनिया की हर तीन में से एक बालिका वधु भारतीय है और देश में हर 5 में से एक लड़की की शादी 18 साल की उम्र से पहले ही हो जाती है। हालांकि, भारत में बाल विवाह की दर 1996 में 50 फीसदी से ज्यादा थी, जो अब घटकर लगभग 20 रह गई है। अंतरराष्ट्रीय बालिका दिवस के मौके पर विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि राष्ट्रीय औसत को देखकर गुमराह नहीं होना चाहिए, क्योंकि कुछ राज्यों में यह समस्या कहीं अधिक गंभीर है। यूनिसेफ और सरकार के आंकड़ों के मुताबिक, देश में होने वाले कुल बाल विवाह में से आधे से ज्यादा 5 राज्यों (उत्तर प्रदेश, बिहार, पश्चिम बंगाल, महाराष्ट्र और मध्यप्रदेश) में होते हैं। बाल विवाह पर लगाम लगाने के मामले में केरल और लक्षद्वीप अच्छी प्रगति कर रहे हैं।

    यूनिसेफ की भारत प्रतिनिधि सिंथिया मैककैफ्री ने कहा, 'इस साल अंतरराष्ट्रीय बालिका दिवस की थीम 'बाल विवाह खत्म करें और लड़कियों के अधिकारों में निवेश करें' है। यह किशोरावस्था के दौरान लगातार निवेश करने का आह्वान करती है, ताकि लड़कियां स्कूल न छोड़ें, स्वस्थ व सुरक्षित रहें, उनमें कौशल विकास हो, वे अवसरों का लाभ उठाएं और खुद के जीवन को प्रभावित करने वाले फैसलों में अपना पक्ष रख सकें।' भारत ने शिक्षा, स्वास्थ्य, पोषण, बाल सुरक्षा और सामाजिक सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में लगातार प्रयासों के जरिए लड़कियों के अधिकारों को आगे बढ़ाने और बाल विवाह में कमी लाने की दिशा में प्रगति की है। इन क्षेत्रों में निवेश बढ़ाने के साथ-साथ लड़कियों की आवाज, निर्णय लेने की क्षमता और भागीदारी को मजबूत करने से यह प्रगति और तेज होगी।

    22 करोड़ युवतियों की शादी 17 की उम्र से पहले
    सिंथिया ने कहा, 'लड़कियां सिर्फ विकास की लाभार्थी नहीं, बल्कि उसमें सक्रिय रूप से योगदान देने वाली भी हैं। जब लड़कियों के पास आत्मविश्वास, हुनर ​​और आगे बढ़कर नेतृत्व करने के लिए सुरक्षित माहौल होता है, तो वे मजबूत परिवार, समुदाय और समाज के निर्माण में मदद करती हैं।' यूनिसेफ के आंकड़ों के मुताबिक, भारत में 20-24 साल के आयु वर्ग में शामिल 22.4 करोड़ से ज्यादा युवतियों की शादी 17 साल की उम्र से पहले हो गई थी। इनमें से 9 करोड़ से ज्यादा युवतियों का विवाह 15 साल से कम उम्र में ही करा दिया गया था। यूनिसेफ का अनुमान है कि दुनिया में हर तीन सेकंड में एक लड़की की शादी होती है और ऐसी शादियों की संख्या हर दिन 1,500 तक पहुंच सकती है

    कितने परेशान करने वाले हैं आंकड़े
    क्राई-चाइल्ड राइट्स एंड यू की CEO पूजा मारवाह ने कहा कि भारत ने इस समस्या से निपटने में काफी प्रगति की है, लेकिन बाल विवाह को पूरी तरह खत्म करने में अब भी काफी समय लगेगा। उन्होंने कहा, 'भारत में बाल विवाह के मामलों में कमी आना अच्छी बात है, लेकिन देश में हर पांच में से एक लड़की की शादी अब भी बालिग होने से पहले कर दी जाती है। इससे भी अहम बात यह है कि राष्ट्रीय औसत के कारण अलग-अलग राज्यों और ग्रामीण व शहरी इलाकों के बीच के बड़े अंतर का पता नहीं चल पाता है।' जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रन के राष्ट्रीय संयोजक रविकांत ने कहा कि सरकार की कोशिशों से बाल विवाह के मामलों में कमी लाने में मदद मिली है, लेकिन कम आय वाले परिवारों में यह प्रथा अब भी काफी आम है। बेहद गरीब लोग ही अपनी बेटियों की कम उम्र में शादी करने का फैसला करते हैं, क्योंकि वे उन्हें खाना नहीं खिला सकते और उनकी रोजमर्रा जिंदगी की जरूरतें पूरी नहीं कर सकते। इसलिए इसमें सरकार की अलग-अलग योजनाओं की सफलता भी अहम भूमिका निभाती है।

  • T-90 और T-72 टैंकों को आधुनिक बनाने में मदद करेगा रूस, जानें भारतीय सेना को क्या-क्या मिलेंगी नई क्षमताएं

    T-90 और T-72 टैंकों को आधुनिक बनाने में मदद करेगा रूस, जानें भारतीय सेना को क्या-क्या मिलेंगी नई क्षमताएं

    मॉस्को
     रूस ने भारतीय सेना के T-90 टैंक को अपग्रेड करने का बड़ा ऑफर दिया है। इसके तहत T-90 टैंकों को भविष्य के खतरों से बचने के लायक बनाया जाएगा। रूस ने यह भी कहा कि वह अपग्रेडेशन के दौरान यूक्रेन युद्ध में टैंकों को हुए नुकसान से सीखे गए अनुभवों का भी इस्तेमाल करेगा। अपग्रेडेश के दौरान न केवल अंदरूनी ढांचे को अपग्रेड किया जाएगा, बल्कि बेहतरीन फायर कंट्रोल सिस्टम, ज्यादा शक्तिशाली इंजन, कई तरह के हथियारों को फायर करने की क्षमता, बाहरी ढांचे की मजबूती और पारंपरिक एंटी-आर्मर खतरों से निपटने के लिए शक्तिशाली कवच से लैस करने की योजना है। हालांकि, अमेरिका के भारी दबाव के कारण इस बात की संभावना कम है कि भारत अभी रूस के साथ कोई रक्षा समझौता करेगा।

    T-90 टैंक को अपग्रेड करने का ऑफर
    उरालवगोनजावोड के सीईओ अलेक्जेंडर पोटापोव ने कहा, "भारत 'स्पेशल मिलिट्री ऑपरेशन' के अनुभव के आधार पर अपने टैंकों को आधुनिक बनाने में दिलचस्पी रखता है। हम मदद के लिए तैयार हैं, लेकिन इसके लिए सरकार के स्तर पर फैसले लिए जाने की जरूरत है।" उन्होंने भारत के साथ मिलकर "भविष्य के टैंक" को संयुक्त रूप से विकास करने की इच्छा भी जताई है। उन्होंने कहा, "रूस भारतीय सेना के पुराने पड़ रहे T-72 (T-72) और T-90 (T-90) टैंक बेड़े को बदलने या आधुनिक बनाने में भारत की मदद करने के लिए तैयार है।"

    भारत को ऑफर किया T-14 आर्माटा टैंक
    उन्होंने T-14 आर्माटा टैंक के मॉड्यूलर डिजाइन और इसकी निर्यात संभावनाओं पर भी जोर दिया है, जिसे विदेशी ग्राहकों की खास जरूरतों के मुताबिक ढाला जा सकता है। T-14 आर्माटा की गिनती दुनिया के सबसे शक्तिशाली टैंकों में की जाती है। इसके टावर में कोई क्रू मेंबर नहीं होता। टैंक कमांडर, गनर और ड्राइवर सभी टैंक के अगले हिस्से में बने एक विशेष सुरक्षित बख्तरबंद कैप्सूल में बैठते हैं। इसमें 125 मिमी की 2A82 स्मूथबोर गन लगी है, जिससे सामान्य गोलों के अलावा लेजर गाइडेड मिसाइलें भी दागी जा सकती हैं। इसमें 1,500 हॉर्सपावर का इंजन लगा है। इसकी अधिकतम सड़क गति 80 से 90 किमी/घंटा है।

    T-90 भारत का मुख्य युद्धक टैंक
    T-90 भारत का मुख्य युद्धक टैंक है। भारतीय सेना के पास अलग-अलग वेरिएंट के लगभग 1300 T-90 टैंक मौजूद हैं। T-90 टैंक का वजन लगभग 47 टन है। यह 9.6 मीटर लंबा और 2.8 मीटर चौड़ा है। छोटे आकार के कारण यह रेगिस्तान, दलदल और पहाड़ों में 60 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से चल सकता है। T-90 टैंक 125 मिमी की स्मूथबोर तोप से लैस है। इसकी मारक क्षमता लगभग 5 किलोमीटर तक है। अपग्रेड करने के बाद यह टैंक और ज्यादा शक्तिशाली हो सकता है और इसका फायर पावर भी काफी बढ़ सकती है।

    क्या भारत करेगा रूस के साथ रक्षा समझौता?
    वर्तमान में भारत, रूस के साथ संबंधों को लेकर अमेरिका के भारी दबाव का सामना कर रहा है। ट्रंप प्रशासन ने रूस से तेल आयात करने पर भारत पर भारी-भरकम टैरिफ लगा चुका है। वह लगातार भारत को रूस से दूर करने के लिए कड़े कदम उठा रहा है। ऐसे में इस बात की बहुत कम संभावना है कि भारत वर्तमान में खुलकर रूस के साथ कोई बड़ा रक्षा समझौता करे।

  • स्टारलिंक को भारत में लॉन्च करने की मांग तेज, मस्क ने अंबानी के समर्थकों के तर्कों पर उठाए सवाल

    स्टारलिंक को भारत में लॉन्च करने की मांग तेज, मस्क ने अंबानी के समर्थकों के तर्कों पर उठाए सवाल

    नई दिल्ली
    स्पेसएक्स के चीफ एलन मस्क ने भारत में अपनी सैटेलाइट इंटरनेट सर्विस स्टारलिंक शुरू करने की मांग एक बार फिर उठाई है। उन्होंने कहा कि भारतीय बाजार में कंपटीशन बढ़ने से आम लोगों को ज्यादा विकल्प मिलेंगे और इसका फायदा ग्राहकों को होगा। मस्क ने रिलायंस इंडस्ट्रीज के चेयरमैन मुकेश अंबानी पर भी निशाना साधा। उन्होंने अंबानी के समर्थकों के तर्कों को विरोधाभासी बताते हुए उन्हें बेतुका दोहरापन और बढ़ा-चढ़ाकर पेश की गई बातें करार दिया। मस्क की यह टिप्पणी ऐसे समय आई है, जब वह भारत में स्टारलिंक की शुरुआत में हो रही देरी को लेकर लगातार सवाल उठा रहे हैं। रिलायंस देश के दूरसंचार क्षेत्र की प्रमुख कंपनियों में शामिल है।

    एलन मस्क ने रविवार को एक्स पर लिखा कि स्टारलिंक के भारत में आने से आम नागरिकों को ज्यादा विकल्प मिलेंगे। उन्होंने कहा कि इससे अंबानी का मुनाफा कम हो सकता है, लेकिन उनका कारोबार बंद नहीं होने वाला। अगर भारत में स्टारलिंक की सेवाएं महंगी होंगी तो लोग उनका इस्तेमाल नहीं करेंगे। ऐसे में कंपनी को अपनी कीमतें ग्राहकों की पहुंच के मुताबिक रखनी होंगी। उन्होंने अंबानी के इंटरनेट कारोबार का समर्थन करने वालों के तर्कों पर सवाल उठाते हुए कहा कि एक तरफ दावा किया जाता है कि स्टारलिंक भारत में अंबानी की बेहद कम कीमत वाली सेवाओं से मुकाबला नहीं कर पाएगी। दूसरी तरफ उसे इतना ताकतवर प्रतिस्पर्धी बताया जाता है कि उससे मौजूदा कारोबार को खतरा हो सकता है।

    अंबानी से जुड़े कारोबार को लेकर पोस्ट
    एलन मस्क ने शनिवार को भी अंबानी से जुड़े कारोबार को लेकर सोशल मीडिया पर पोस्ट किया था। इसमें उन्होंने कुछ मीडिया रिपोर्टों के स्क्रीनशॉट शेयर किए। इनमें आरोप लगाया गया कि रिलायंस से वित्तीय मदद पाने वाली कंपनी ने सोशल मीडिया पर भारतीय जनता पार्टी के चुनावी अभियानों को बढ़ावा देने में मदद की थी। मस्क ने साल 2022 की अल जजीरा की एक रिपोर्ट भी शेयर की, जिसका टाइटल था कि रिलायंस से फंड पाने वाली कंपनी फेसबुक पर बीजेपी के अभियानों को कैसे बढ़ावा देती है।

    इसके अलावा, मस्क ने द इंडियन एक्सप्रेस की 2024 की एक रिपोर्ट को भी शेयर किया। इसमें रिलायंस से जुड़ी कंपनी क्विक सप्लाई पर चुनावी बॉन्ड के जरिए बीजेपी को 385 करोड़ रुपये और शिवसेना को 25 करोड़ रुपये देने की बात कही गई थी। रिलायंस ने इन आरोपों पर सार्वजनिक रूप से कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है। इससे पहले मस्क ने एक्स पर व्यंग्य करते हुए अंबानी को 'प्रधानमंत्री अंबानी’ कहा था और उन पर एकाधिकार बचाने की कोशिश करने का आरोप लगाया था।

    भारत ने खारिज किया मस्क का दावा
    दूसरी ओर, भारत सरकार ने गुरुवार को मस्क के उस दावे को खारिज कर दिया था, जिसमें उन्होंने कहा कि भारत में कुछ बड़े कारोबारी स्टारलिंक की शुरुआत में बाधा डाल रहे हैं। संचार मंत्रालय ने साफ किया कि देश में सैटेलाइट संचार सेवाओं के लिए नियम निष्पक्ष हैं और किसी कंपनी के साथ भेदभाव नहीं किया जाता। मंत्रालय ने सोशल मीडिया पर प्रसारित उन आरोपों को भी निराधार और गलत बताया, जिनमें नियामक व्यवस्था या उसके लागू करने के तरीके पर सवाल उठाए गए थे।

  • AI कंपनियों के निवेशकों के लिए खतरे की घंटी! अरबपति रे डेलियो ने बताया क्यों फूट सकता है AI बबल

    AI कंपनियों के निवेशकों के लिए खतरे की घंटी! अरबपति रे डेलियो ने बताया क्यों फूट सकता है AI बबल

    मुंबई 

    दुनियाभर के शेयर बाजारों में भारी उथल-पुथल जारी है. अमेरिका हो, जापान हो, कोरिया हो या फिर भारत हर ओर तबाही मची हुई है और शेयर मार्केट में पैसे लगाने वालों को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है. गुरुवार को भी सेंसेक्स-निफ्टी क्रैश हो गए और निवेशकों के करीब 10 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा स्वाहा हो गए। 

    शेयर बाजारों में आए इस भूचाल के बीच विदेशी अरबपति रे डेलियो ने एक बड़ी चेतावनी दी है, जो आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI से जुड़ी हुई है. उन्होंने कहा है कि 'एआई का क्लासिक बुलबुला' फूटने की कगार पर पहुंच गया है. इसके पीछे उन्होंने तमाम कारण भी बताए हैं। 

    US में ब्याज दरें बढ़ने का असर
    अरबपति रे डेलियो के मुताबिक, एआई का बुलबुला फूटने के पीछे बड़े कारणों में एक अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ओर से ब्याज दरों में किया जाने वाला इजाफा है. अब निवेशकों को अपनी संपत्ति को नकदी में बदलने की आवश्यकता महसूस होने लगी है. उन्होंने कहा कि भारतीय निवेशक भी विदेशों में हो रहे घटनाक्रमों पर पैनी नजर रखेंगे, क्योंकि भारतीय शेयर बाजार 2025 के बाद से सबसे कमजोर प्रदर्शन करने वाले प्रमुख बाजारों में से एक है। 

    ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक, सिंगापुर में फोर्ब्स ग्लोबल सीईओ कॉन्फ्रेंस में बोलते हुए डेलियो ने कहा कि AI को वित्त पोषित करने के लिए भारी मात्रा में कर्ज लिया जा रहा है और ब्याज दरों में लगातार बढ़ोतरी के साथ अब यह बुलबुला फूटना शुरू हो सकता है. ब्रिजवॉटर के फाउंडर ने कहा, 'हम चक्र के उस चरण में हैं, जो इससे पहले है लेकिन इस संकट के करीब पहुंच रहा है। 

    डेलियो ने गिनाए ये आंकड़े
    अरबपति ने एआई की बुलबुला फूटने की चेतावनी देते हुए कुछ आंकड़े सामने रखे. उन्होंने कहा कि आंकड़ों से पता चला कि 10-वर्षीय यील्ड बढ़कर 5.368 प्रतिशत हो गई, जो 2002 के बाद से नहीं देखी गई थी. इस प्रवृत्ति के पीछे कई कारकों का मजबूत संयोजन है, जिनमें सरकारी कर्ज का बढ़ता बोझ, व्यापार का विखंडन, युद्ध से प्रेरित महंगाई का दबाव और AI के बुनियादी ढांचे से संबंधित पर्याप्त पूंजी जरूरतें. ये सभी कारक मिलकर ग्लोबल सेविंग की उपलब्धता को कम कर रहे हैं और संतुलन वास्तविक ब्याज दरों को बढ़ा रहे हैं। 

    रिपोर्ट में घरेलू ब्रोकरेज फर्म के हवाले से कहा गया है कि एआई-संचालित प्रोडक्शन लाभों से मुद्रास्फीति तेजी से बेअसर हो जाएगी, यह आशावादी धारणा अनिश्चित बनी हुई है. कई एआई-संबंधित व्यवसायों के बीच सीडीएस स्प्रेड बढ़ रहा है. अगर लाभ तत्काल के बजाय बाद में मिलने वाले साबित होते हैं, तो एआई पूंजीगत व्यय के क्राउडिंग-आउट प्रभाव कम से कम 2028 तक बने रह सकते हैं, जिससे महंगाई और वास्तविक ब्याज दरें वर्तमान अनुमान से अधिक रहेंगी। 

    भारतीय शेयर का गुरुवार को क्रैश 
    एआई को लेकर जहां विदेशी अरबपति शेयर बाजारों के लिए अलर्ट जारी कर रहे हैं, तो वहीं भारतीय शेयर बाजार पर नजर डालें, तो गुरुवार को सेंसेक्स-निफ्टी शुरुआत से अंत तक क्रैश होते रहे. बाजार बंद होने पर BSE Sensex 1045 अंक गिरकर 71,593 के लेवल पर बंद हुआ, तो वहीं NSE Nifty 371 अंक की गिरावट लेकर 22,231 पर क्लोज हुआ। 

  • मां ब्रह्मचारिणी की पूजा में लगाएं मखाना खीर का भोग, दूध और मेवों से बनाएं स्वादिष्ट प्रसाद

    मां ब्रह्मचारिणी की पूजा में लगाएं मखाना खीर का भोग, दूध और मेवों से बनाएं स्वादिष्ट प्रसाद

    Sharadiya Navratri:
    शारदीय नवरात्र के पावन दिन चल रहे हैं और इसके दूसरे दिन यानी 12 अक्टूबर को मां दुर्गा के द्वितीय स्वरूप, यानी मां ब्रह्मचारिणी की पूजा की जाएगी। मां ब्रह्मचारिणी को सादगी और तपस्या की देवी माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, माता को सफेद रंग की चीजें और दूध से बनी मिठाइयां बहुत प्रिय हैं।

    ऐसे में माता का आशीर्वाद और कृपा पाने के लिए आप उन्हें घर पर बनी शुद्ध 'मखाना खीर' का भोग लगा सकते हैं। मखाने की खीर न सिर्फ खाने में बेहद स्वादिष्ट होती है, बल्कि व्रत के दौरान यह आपको भरपूर ऊर्जा भी देती है। इसे बनाना बहुत ही आसान है। आइए जानते हैं मां के लिए मखाना खीर बनाने की स्टेप-बाय-स्टेप रेसिपी।

    मखाना खीर बनाने के लिए जरूरी सामग्री
        मखाना – 1 से 2 कप
        फुल क्रीम दूध – आधा लीटर
        देसी घी – 1 चम्मच
        चीनी या मिश्री – 3-4 बड़े चम्मच
        हरी इलायची पाउडर – आधा छोटा चम्मच
        बारीक कटे हुए मेवे (काजू, बादाम, पिस्ता और किशमिश) – 2 बड़े चम्मच

    मखाना खीर बनाने की विधि

    • सबसे पहले गैस पर एक कड़ाही या पैन रखें और उसमें 1 चम्मच देसी घी डालें। घी गर्म होने पर उसमें मखाने डाल दें और धीमी आंच पर 3-4 मिनट तक कुरकुरा होने तक भून लें।
    • जब मखाने अच्छे से भुन जाएं और ठंडे हो जाएं, तो उनमें से आधे मखानों को मिक्सी में या बेलन की मदद से हल्का दरदरा पीस लें। आधे मखानों को साबुत ही रहने दें। ऐसा करने से खीर बहुत ही गाढ़ी और रबड़ीदार बनती है।
    • अब एक गहरे बर्तन में दूध निकालें और उसे गैस पर उबलने के लिए रख दें। जब दूध में एक अच्छा उबाल आ जाए, तो गैस की आंच धीमी कर दें।
    • उबलते हुए दूध में भुने हुए साबुत और दरदरे किए हुए दोनों तरह के मखाने डाल दें। अब इसे चम्मच से अच्छी तरह मिलाएं और 10 से 15 मिनट तक धीमी आंच पर पकने दें। बीच-बीच में इसे चलाते रहें ताकि खीर बर्तन के तले में न लगे।
    • जब आपको लगे कि दूध गाढ़ा हो गया है और मखाने पूरी तरह से नरम होकर दूध में घुल-मिल गए हैं, तब इसमें स्वादानुसार चीनी या मिश्री डाल दें। साथ ही इलायची पाउडर और बारीक कटे हुए सूखे मेवे (काजू, बादाम, पिस्ता) भी डाल दें।
    • सभी चीजों को मिलाने के बाद खीर को 2 मिनट तक और पकाएं, जिससे चीनी अच्छी तरह घुल जाए। अब गैस बंद कर दें। आपकी स्वादिष्ट और पौष्टिक मखाना खीर बनकर बिल्कुल तैयार है!
    • खीर को एक सुंदर कटोरी में निकालें और ऊपर से कुछ कटे हुए मेवों से गार्निश करें। पूजा के समय पूरी श्रद्धा के साथ मां ब्रह्मचारिणी को इस मखाना खीर का भोग लगाएं और फिर प्रसाद के रूप में पूरे परिवार को बांटें।

     

  • मां ब्रह्मचारिणी की पूजा से मिलती है सुख-समृद्धि? जानें पूजा विधि, प्रिय भोग और धार्मिक मान्यताएं

    मां ब्रह्मचारिणी की पूजा से मिलती है सुख-समृद्धि? जानें पूजा विधि, प्रिय भोग और धार्मिक मान्यताएं

    Sharadiya Navratri: शारदीय नवरात्रि का पर्व मां दुर्गा के 9 स्वरूपों की आराधना के साथ मनाया जाता है. इस पर्व की शुरुआत हो चुकी है. 9 दिनों तक चलने वाले इस उत्सव में दूसरे दिन मां ब्रह्मचारिणी की पूजा-अर्चना की जाती है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, विधि-विधान से माता की उपासना करने से भक्तों को सुख-समृद्धि और शांति का आशीर्वाद मिलता है. इस दौरान देवी को प्रिय वस्तुओं का भोग लगाने और श्रद्धापूर्वक पूजा करने का विशेष महत्व बताया गया है. उज्जैन के आचार्य पंडित आनंद भारद्वाज के अनुसार, नवरात्रि के दूसरे दिन कुछ खास बातों का ध्यान रखकर माता की आराधना की जा सकती है.

    मां ब्रह्मचारिणी के नाम का महत्व
    ‘ब्रह्म’ यानी तप और ‘चारिणी’ यानी आचरण करने वाली अर्थात मां ब्रह्मचारिणी तप का आचरण करने वाली आदि स्रोत शक्ति हैं. मां ब्रह्मचारिणी सदैव शांत और संसार से विरक्त होकर तपस्या में लीन रहती हैं. कठोर तप के कारण इनके मुख पर अद्भुत तेज होता है. मां के हाथों में अक्ष माला और कमंडल होता है और इन्हें साक्षात ब्रह्म का स्वरूप माना जाता है. मां ब्रह्मचारिणी की उपासना करने से सहज ही सिद्धि प्राप्त होती है.

    विद्यार्थी जरूर करें पूजा
    शास्त्रों के अनुसार, मां ब्रह्मचारिणी ने भगवान शिव को पति रूप में प्राप्त करने के लिए कठोर तपस्या की थी और इसी वजह से उनका नाम ‘ब्रह्मचारिणी’ पड़ा. नवरात्रि के दूसरे दिन देवी के इसी स्वरूप की पूजा की जाती है. इनकी साधना और उपासना से जीवन की हर समस्या और संकट दूर हो जाते हैं. विद्यार्थियों के लिए मां ब्रह्मचारिणी की पूजा बहुत ही फलदायी मानी जाती है.

    मां ब्रह्मचारिणी का प्रिय भोग
    नवरात्रि के दूसरे दिन मां ब्रह्मचारिणी की पूजा-अर्चना का विशेष महत्व माना जाता है. इस दिन भक्तों को माता रानी की विधि-विधान से पूजा करके उन्हें चीनी या गुड़ का भोग अर्पित करना चाहिए. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां ब्रह्मचारिणी को इन चीजों का भोग लगाने से अकाल मृत्यु का भय दूर होता है. साथ ही माता अपने भक्तों को सुख-समृद्धि, उत्तम स्वास्थ्य और लंबी आयु का आशीर्वाद प्रदान करती हैं.

  • शाइनिंग छत्तीसगढ़ ‘शक्ति स्वरूपा’ कार्यक्रम में शामिल हुए मुख्यमंत्री, विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय योगदान देने वाली महिलाओं का किया सम्मान

    शाइनिंग छत्तीसगढ़ ‘शक्ति स्वरूपा’ कार्यक्रम में शामिल हुए मुख्यमंत्री, विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय योगदान देने वाली महिलाओं का किया सम्मान

    रायपुर
    मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने कहा है कि छत्तीसगढ़ की मातृशक्ति प्रदेश की सबसे बड़ी ताकत है और महिला सशक्तिकरण विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण का मजबूत आधार है। महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने के साथ शिक्षा, स्वास्थ्य, सुरक्षा, रोजगार, उद्यमिता और नेतृत्व के क्षेत्र में आगे बढ़ाना राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में है। हमारा लक्ष्य महिलाओं को केवल शासकीय योजनाओं का लाभार्थी बनाना नहीं, बल्कि परिवार, समाज और प्रदेश की विकास यात्रा में सक्रिय भागीदार और नेतृत्वकर्ता बनाना है।

    मुख्यमंत्री श्री साय आज राजधानी रायपुर में हिंदी खबर द्वारा आयोजित शाइनिंग छत्तीसगढ़ ‘शक्ति स्वरूपा’ कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री ने विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय योगदान देकर प्रदेश का गौरव बढ़ाने वाली महिलाओं का सम्मान किया और उनसे संवाद भी किया।

    मुख्यमंत्री ने शारदीय नवरात्रि की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि हमारी सनातन संस्कृति में नारी को शक्ति स्वरूपा माना गया है। नवरात्रि मातृशक्ति की आराधना का महापर्व है। हमारी परंपरा में कहा गया है कि जहां नारी का सम्मान होता है, वहीं देवताओं का वास होता है। इसी भावना को आत्मसात करते हुए राज्य सरकार महिलाओं के सम्मान, सुरक्षा, स्वावलंबन और उनके उज्ज्वल भविष्य के लिए निरंतर कार्य कर रही है।

    मां के संघर्ष और संस्कारों ने सिखाया सेवा और संवेदनशीलता का महत्व

    मुख्यमंत्री श्री साय ने अपने जीवन से जुड़े अनुभव साझा करते हुए कहा कि उनका जन्म एक साधारण किसान परिवार में हुआ। बचपन में ही पिता का साया उठ जाने के बाद उन्होंने अपनी माता को अनेक कठिनाइयों के बीच परिवार को संभालते और खेती-बाड़ी करते हुए देखा। उनकी माता ने कठिन परिस्थितियों में भी बच्चों की शिक्षा और संस्कारों में कोई कमी नहीं आने दी।
    मुख्यमंत्री ने कहा कि मां के संघर्ष, सेवाभाव, सनातन मूल्यों के प्रति आस्था और परिवार के प्रति समर्पण ने उनके व्यक्तित्व को गहराई से प्रभावित किया। जनसेवा और जरूरतमंद के प्रति संवेदनशीलता की प्रेरणा उन्हें अपने परिवार और विशेष रूप से अपनी माता से मिली। आज मुख्यमंत्री के रूप में दायित्व निभाते हुए भी वे उन्हीं संस्कारों को लेकर आगे बढ़ रहे हैं।

    महतारी वंदन ने बढ़ाया महिलाओं का आत्मविश्वास और आर्थिक स्वावलंबन

    मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि महतारी वंदन योजना प्रदेश की माताओं-बहनों के जीवन में सकारात्मक बदलाव का महत्वपूर्ण माध्यम बनी है। योजना के अंतर्गत 68 लाख से अधिक महिलाओं को प्रतिमाह एक हजार रुपए की आर्थिक सहायता दी जा रही है। अब तक 32 किस्तों में 20 हजार 700 करोड़ रुपए से अधिक की राशि महिलाओं के खातों में सीधे अंतरित की जा चुकी है।
    उन्होंने कहा कि महतारी वंदन योजना केवल आर्थिक सहायता की योजना नहीं है। इस राशि ने महिलाओं को अपनी छोटी-छोटी जरूरतों के लिए आर्थिक स्वतंत्रता देने के साथ परिवार की निर्णय प्रक्रिया में उनकी भागीदारी और आत्मविश्वास को भी मजबूत किया है। महिलाएं इस राशि का उपयोग बच्चों की पढ़ाई, दवाइयों, पोषण, घरेलू आवश्यकताओं और बचत जैसे कार्यों में कर रही हैं।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार का प्रयास है कि योजना की पात्र कोई भी महिला इसके लाभ से वंचित न रहे। तकनीकी कारणों, दस्तावेजों, आधार अथवा बैंक खाते से जुड़ी त्रुटियों के कारण जिन पात्र महिलाओं को लाभ नहीं मिल पाया है, उनके प्रकरणों का परीक्षण कर आवश्यक समाधान किया जा रहा है।

    लक्ष्य से लगभग दोगुनी उपलब्धि, 14 लाख महिलाएं बनीं लखपति दीदी

    मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि महिलाओं को नियमित आर्थिक संबल देने के साथ उन्हें स्थायी आजीविका और उद्यमिता से जोड़ना सरकार की प्राथमिकता है। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की ‘लखपति दीदी’ पहल के अंतर्गत छत्तीसगढ़ ने निर्धारित लक्ष्य से आगे बढ़कर उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल की है। प्रदेश में 7.82 लाख के लक्ष्य के मुकाबले 14 लाख ग्रामीण महिलाएं लखपति दीदी बन चुकी हैं। प्रदेश की 32.39 लाख ग्रामीण परिवार 2.98 लाख स्व-सहायता समूहों से जुड़कर आर्थिक गतिविधियां संचालित कर रही हैं। इन समूहों की महिलाओं को कृषि आधारित व्यवसाय, खाद्य प्रसंस्करण, हस्तशिल्प, लघु वनोपज, डेयरी, मशरूम उत्पादन, मिलेट प्रसंस्करण, सिलाई और रेडीमेड वस्त्र निर्माण सहित विभिन्न आजीविकामूलक गतिविधियों से जोड़ा जा रहा है।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि महिलाओं के उत्पादों की गुणवत्ता, बेहतर पैकेजिंग, ब्रांडिंग और बाजार तक पहुंच पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है। हमारा प्रयास है कि छत्तीसगढ़ की महिलाएं केवल स्वरोजगार से न जुड़ें, बल्कि सफल उद्यमी बनकर दूसरे लोगों को भी रोजगार देने की स्थिति में आएं।

    481 महतारी सदन बनेंगे महिला समूहों की गतिविधियों के केंद्र

    मुख्यमंत्री ने बताया कि महिला स्व-सहायता समूहों और सामुदायिक गतिविधियों के लिए बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से प्रदेश में 481 महतारी सदनों के निर्माण को मंजूरी दी गई है। ये महतारी सदन ग्रामीण महिलाओं के सामाजिक और आर्थिक सशक्तिकरण की गतिविधियों के महत्वपूर्ण केंद्र बनेंगे। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के माध्यम से प्रदेश की 39.73 लाख महिलाओं को एलपीजी कनेक्शन प्रदान किए गए हैं। रानी दुर्गावती योजना के लिए 15 करोड़ रुपए का बजट प्रावधान किया गया है, जिसके अंतर्गत पात्र बालिकाओं के 18 वर्ष की आयु पूरी करने पर डेढ़ लाख रुपए की सहायता का प्रावधान है।

    बस्तर में लौटी शिक्षा की रोशनी, नक्सल हिंसा से बंद 421 स्कूल फिर खुले

    मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि किसी भी बेटी के सपनों की राह में दूरी, गरीबी या असुरक्षा बाधा न बने, इसके लिए सरकार शिक्षा के अवसरों का लगातार विस्तार कर रही है। विशेष रूप से दूरस्थ जनजातीय क्षेत्रों में छात्रावासों, आश्रमों, आवासीय विद्यालयों और प्रयास संस्थानों के माध्यम से गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं।उन्होंने कहा कि बस्तर में लंबे समय तक नक्सल हिंसा के कारण अनेक गांवों में शिक्षा व्यवस्था प्रभावित हुई और स्कूल बंद हो गए थे। शांति और विश्वास की स्थापना के साथ राज्य सरकार ने ऐसे 421 स्कूलों को दोबारा शुरू किया है। वर्षों बाद इन स्कूलों में बच्चों की चहल-पहल और पढ़ाई की आवाज लौटना बदलते बस्तर की सबसे सुखद तस्वीरों में से एक है।

    मुख्यमंत्री ने बताया कि ओरछा और जगरगुंडा जैसे दूरस्थ क्षेत्रों में एजुकेशन सिटी विकसित की जा रही हैं, ताकि आदिवासी अंचलों के बच्चों, विशेषकर बेटियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लिए अपने परिवार और गांव से बहुत दूर न जाना पड़े।

    स्वस्थ महिला से स्वस्थ परिवार और स्वस्थ छत्तीसगढ़ का निर्माण

    मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि महिला और बाल स्वास्थ्य को राज्य सरकार ने अपनी प्रमुख प्राथमिकताओं में रखा है। गर्भवती महिलाओं, माताओं, किशोरियों और बच्चों के स्वास्थ्य तथा पोषण की बेहतर व्यवस्था के लिए आंगनबाड़ी सेवाओं को सुदृढ़ किया जा रहा है। गर्भवती महिलाओं की नियमित स्वास्थ्य जांच, बच्चों के पोषण और किशोरियों में एनीमिया की रोकथाम के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं।
    उन्होंने बताया कि आयुष्मान भारत योजना के अंतर्गत प्रदेश में लगभग 2.49 करोड़ आयुष्मान कार्ड जारी किए जा चुके हैं। 70 वर्ष और उससे अधिक आयु के वरिष्ठ नागरिकों के लिए 6.21 लाख वय-वंदना कार्ड जारी किए गए हैं।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि दूरस्थ जनजातीय अंचलों तक गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच बढ़ाने पर सरकार का विशेष ध्यान है। आर्थिक स्थिति अथवा गांव की दूरी किसी महिला के उपचार में बाधा न बने, इसी सोच के साथ स्वास्थ्य सुविधाओं का लगातार विस्तार किया जा रहा है।

    आईटी, एआई और आधुनिक उद्योगों में महिलाओं के लिए खुलेंगे नए अवसर

    मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि तेजी से बदलती अर्थव्यवस्था और रोजगार के स्वरूप को देखते हुए महिलाओं को पारंपरिक आजीविका के साथ भविष्य की तकनीकों और आधुनिक उद्योगों से जोड़ना भी आवश्यक है।राज्य की नई औद्योगिक नीति में महिलाओं के रोजगार और स्वरोजगार को विशेष प्रोत्साहन दिया जा रहा है। सूचना प्रौद्योगिकी, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, शिक्षा, चिकित्सा, खाद्य प्रसंस्करण, टेक्सटाइल सहित विभिन्न क्षेत्रों में महिलाओं के लिए नए अवसर सृजित करने पर सरकार का विशेष जोर है।
    उन्होंने कहा कि महिला सशक्तिकरण का अर्थ केवल आर्थिक आत्मनिर्भरता नहीं है। निर्णय लेने और नेतृत्व करने में महिलाओं की बराबर भागीदारी भी उतनी ही आवश्यक है। पंचायतों और स्थानीय निकायों से लेकर प्रशासन और उद्यमिता तक महिलाओं को नेतृत्व के अधिक अवसर मिलने चाहिए। प्रदेश के विभिन्न जिलों में महिला कलेक्टर प्रशासन का नेतृत्व कर रही हैं, जो बदलते और सशक्त छत्तीसगढ़ की प्रेरणादायक तस्वीर है।

    छत्तीसगढ़ की बेटियां खेलों में बढ़ा रही प्रदेश का गौरव

    मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ की बेटियां आज राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय खेल मंचों पर प्रदेश का गौरव बढ़ा रही हैं। राज्य सरकार का संकल्प है कि संसाधनों, प्रशिक्षण अथवा आर्थिक कठिनाइयों के कारण किसी भी प्रतिभाशाली खिलाड़ी को अपने सपनों से समझौता न करना पड़े।उन्होंने कहा कि राष्ट्रमंडल खेलों में देश का गौरव बढ़ाने वाली ज्ञानेश्वरी यादव को डीएसपी पद पर पदोन्नति के साथ 30 लाख रुपए की सम्मान राशि प्रदान की गई है। कोरबा जिले की संजू देवी रावत ने भारतीय महिला कबड्डी टीम की स्वर्णिम उपलब्धियों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। राज्य सरकार ने उन्हें 50 लाख रुपए की प्रोत्साहन राशि प्रदान की है।
    छत्तीसगढ़ की किरण पिस्दा का भारतीय सीनियर महिला फुटबॉल टीम में चयन हुआ है। उन्होंने रायपुर की आवासीय बालिका फुटबॉल अकादमी में प्रशिक्षण प्राप्त किया है।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि बस्तर ओलंपिक, सरगुजा ओलंपिक और खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स जैसे आयोजनों से ग्रामीण और जनजातीय अंचलों की बेटियों को अपनी प्रतिभा दिखाने के नए अवसर मिल रहे हैं। वर्ष 2026-27 के बजट में खेल उत्कर्ष मिशन के लिए 100 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है।

    बेटियां बड़े सपने देखें, सरकार अवसर उपलब्ध कराने के लिए उनके साथ है

    मुख्यमंत्री श्री साय ने प्रदेश के युवाओं और बेटियों से बड़े सपने देखने और उन्हें पूरा करने के लिए मेहनत करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि आज का छत्तीसगढ़ संभावनाओं से भरा प्रदेश है। युवाओं को अपनी रुचि और क्षमता पहचानकर शिक्षा के साथ कौशल विकास पर विशेष ध्यान देना चाहिए।
    उन्होंने कहा कि डिजिटल टेक्नोलॉजी, उभरते उद्योगों, कृषि आधारित व्यवसायों, खाद्य प्रसंस्करण, डेयरी, वनोपज, पर्यटन और सेवा क्षेत्र में रोजगार एवं स्वरोजगार की व्यापक संभावनाएं बन रही हैं। सरकार युवाओं और महिलाओं को इन नए अवसरों से जोड़ने के लिए कौशल विकास और प्रशिक्षण की व्यवस्था को लगातार मजबूत कर रही है।

    मातृशक्ति की भागीदारी से बनेगा विकसित और समृद्ध छत्तीसगढ़

    मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ की वास्तविक शक्ति यहां की माताएं, बहनें और बेटियां हैं। नवरात्रि का पर्व हमें शक्ति की आराधना के साथ समाज के कमजोर और जरूरतमंद लोगों का सहारा बनने की प्रेरणा भी देता है।
    उन्होंने कहा कि राज्य सरकार गरीब, महिला, किसान और युवा को सशक्त बनाने के संकल्प के साथ कार्य कर रही है। महिलाओं की शिक्षा, सुरक्षा, स्वास्थ्य और आर्थिक आत्मनिर्भरता सुनिश्चित करने के साथ निर्णय प्रक्रिया और नेतृत्व में उनकी भागीदारी बढ़ाकर ही विकसित एवं समृद्ध छत्तीसगढ़ का सपना साकार होगा।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारी माताएं-बहनें आत्मनिर्भर होंगी, हमारी बेटियां शिक्षित और सक्षम होंगी तथा प्रदेश के विकास में नेतृत्वकारी भूमिका निभाएंगी, तभी ‘विकसित छत्तीसगढ़’ का संकल्प अपनी पूर्णता को प्राप्त करेगा।

    इस अवसर पर उपमुख्यमंत्री श्री अरुण साव, कैबिनेट मंत्री गुरु खुशवंत साहेब, हिंदी खबर की ब्यूरो हेड सुश्री निशा द्विवेदी सहित जनप्रतिनिधि, गणमान्य नागरिक तथा बड़ी संख्या में महिलाएं उपस्थित थीं।