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  • सर्दी होगी कम, 2027 की गर्मी भी बढ़ा सकती है चिंता; अल-नीनो का असर

    सर्दी होगी कम, 2027 की गर्मी भी बढ़ा सकती है चिंता; अल-नीनो का असर

     नई दिल्ली
    ठंड का मौसम आने वाला है, लेकिन इस बार सर्दी कुछ कम पड़ सकती है. इसकी एक बड़ी वजह तेजी से मजबूत हो रहा अल-नीनो है. मौसम एजेंसियों के मुताबिक, प्रशांत महासागर के बीच और पूर्वी हिस्से में समुद्र का पानी सामान्य से 1 डिग्री सेल्सियस से ज्यादा गर्म हो चुका है. वैज्ञानिकों का कहना है कि अगर अल-नीनो और मजबूत हुआ तो 2026-27 की सर्दी कई जगह सामान्य से ज्यादा गर्म रह सकती है. इसका असर 2027 की गर्मी पर भी पड़ सकता है। 

    अल-नीनो में प्रशांत महासागर का पानी सामान्य से ज्यादा गर्म हो जाता है. इससे दुनिया के कई हिस्सों के मौसम में बदलाव आता है. भारत में इसका असर बारिश, मॉनसून और तापमान पर पड़ सकता है. इस बार चिंता इसलिए ज्यादा है क्योंकि अल-नीनो ऐसे समय मजबूत हो रहा है, जब क्लाइमेट चेंज के कारण दुनिया का तापमान पहले ही बढ़ा हुआ है। 

    सर्दी में तापमान कितना बढ़ सकता है?
    अल-नीनो का मतलब यह नहीं है कि हर शहर का तापमान एक तय संख्या से बढ़ेगा. तापमान पर कई दूसरी चीजों का भी असर होता है. इसे आसान उदाहरण से समझिए. अगर दिल्ली में सर्दियों में किसी समय सामान्य तापमान 10 डिग्री सेल्सियस रहता है और मौसम 2 डिग्री ज्यादा गर्म रहता है, तो तापमान करीब 12 डिग्री हो सकता है। 

    इसी तरह जहां तापमान -3 डिग्री रहता है, वहां यह -1 डिग्री के आसपास पहुंच सकता है. लेकिन ये सिर्फ उदाहरण हैं. अभी यह कहना मुश्किल है कि दिल्ली, चूरू, पटना, श्रीनगर या लद्दाख में तापमान कितने डिग्री तक बढ़ेगा. ठंडी हवाएं, बादल और दूसरे मौसम सिस्टम भी तापमान को प्रभावित करते हैं। 

    दिल्ली, चूरू और पटना में क्या असर होगा?
    दिल्ली और पटना जैसे मैदानी इलाकों में अगर तापमान सामान्य से ऊपर रहा तो ठंड कम महसूस हो सकती है. खासकर रात का तापमान सामान्य से ज्यादा रह सकता है. राजस्थान के चूरू जैसे इलाकों में भी कुछ रातें सामान्य से कम ठंडी हो सकती हैं, जहां सर्दियों में तापमान काफी नीचे चला जाता है। 

    श्रीनगर और लद्दाख में क्या होगा?
    श्रीनगर और लद्दाख जैसे ठंडे इलाकों में भी तापमान सामान्य से ऊपर रह सकता है. हालांकि वहां कितना बदलाव होगा, यह अभी साफ नहीं है. लद्दाख में ऊंचाई और जगह के हिसाब से तापमान काफी बदलता है. इसलिए अभी वहां किसी एक तय तापमान का अनुमान लगाना सही नहीं होगा। 

    2027 की गर्मी ज्यादा परेशान कर सकती है
    अल-नीनो का असर सिर्फ सर्दी तक नहीं रहेगा. वैज्ञानिकों के मुताबिक मार्च से मई 2027 के बीच गर्मी ज्यादा तेज हो सकती है. मजबूत अल-नीनो से भारत में मॉनसून कमजोर हो सकता है और बारिश भी कम या असमान हो सकती है. इससे पानी की कमी और फसलों पर असर का खतरा बढ़ सकता है. ज्यादा तापमान के कारण लू भी ज्यादा परेशान कर सकती है। 

    अभी अल-नीनो के और मजबूत होने की संभावना है. इसका सबसे ज्यादा असर अक्टूबर से दिसंबर 2026 के बीच दिख सकता है. इसके बाद 2027 में यह धीरे-धीरे कमजोर हो सकता है. हालांकि इसका भारत के मौसम पर कितना असर होगा, यह आने वाले महीनों में साफ होगा। 

    क्या रिकॉर्ड बढ़ाएगा खतरा?

    प्रशांत महासागर के निनो 3.4 इलाके में तापमान मापा जाता है और अल-नीनो की तीव्रता का आकलन किया जाता है। 3.05 डिग्री सेल्सियस तापमान आधुनिक रिकॉर्ड में सबसे ज्यादा है। यह 1982, 1997 और 2015 जैसी मजबूत घटनाओं से आगे जा चुकी है। कुछ आंकड़ों में इसकी 1877 की ऐतिहासिक घटना से भी तुलना हो रही है। इस दौरान बड़े पैमाने पर सूखा और अकाल पड़ा था। मॉडल के मुताबिक, मासिक औसत और भी ऊपर पहुंच सकता है। कुछ अनुमानों में 4 डिग्री के करीब पहुंचने की संभावना जताई गई है, लेकिन यह अभी निश्चित नहीं है। 

    यह रिकाॅर्ड इसलिए अहम है, क्योंकि अल-नीनो जलवायु परिवर्तन के साथ मिलकर प्रभाव को बढ़ा सकता है। गर्म हो रही दुनिया में समुद्र का तापमान पहले से बढ़ा हुआ है। इसके कारण नई घटनाओं की तीव्रता बढ़ सकती है। वैज्ञानिक हर दिन डेटा पर नजर रख रह हैं,  क्योंकि हर दिन डेटा में उतार-चढ़ाव होता है। 

    क्या होगा दुनिया पर प्रभाव?
    दुनिया में अल-नीनो का प्रभाव अलग-अलग क्षेत्रों में अलग होता है। अमेरिका में इस सर्दी में सबसे ज्यादा प्रभाव पड़ सकता है। उत्तरी इलाके में सामान्य से ज्यादा गर्मी, पश्चिमी-मध्य हिस्सों में ज्यादा बर्फबारी हो सकती है।दक्षिण अमेरिका में पेरू और चिली में भारी बारिश और बाढ़ की घटनाएं पहले से देखी जा रही है। मध्य अमेरिका और कैरेबियन में सूखा पड़ने की संभावना है। 

    भारत पर क्या होगा असर?
    एशिया में भारत समेत कई देशों में मॉनसून कमजोर हो सकता है। ऑस्ट्रेलिया में सूखा पड़ सकता है। अफ्रीका के कुछ इलाकों में भी बारिश के पैटर्न में बदलाव हो सकता है। कुल मिलाकर बाढ़, सूखा, गर्मी की लहरें और तूफान जैसी घटनाएं बढ़ सकती हैं। 

  • देश के प्रमुख तीर्थ स्थलों और महानगरों तक जाने के लिए भी यातायात होगा सुगम

    देश के प्रमुख तीर्थ स्थलों और महानगरों तक जाने के लिए भी यातायात होगा सुगम

    भोपाल 

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि मध्यप्रदेश के लिए 25 सितम्बर ऐतिहासिक होगा यशस्वी प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी के जन्मोत्सव के अवसर पर 17 सितंबर से 17 अक्टूबर तक चलने वाला सेवा संकल्प माह सार्थक होगा, जब एकात्म मानववाद के प्रणेता पं. दीनदयाल उपाध्याय की जयंती पर मध्यप्रदेश सरकार गत 21 साल से बंद लोक परिवहन बस सेवा पुन: शुरू करने जा रही है।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने गुरुवार की शाम बीएचईएल दशहरा मैदान पर 25 सितम्बर को हो रही मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा के शुभारंभ कार्यक्रम की तैयारियों का जायजा लने के पश्चात् मीडिया प्रतिनिधियों से चर्चा की । मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि यह एक आधुनिक और यूनिक मॉडल होगा, जिसमें ई-बसों सहित विभिन्न प्रकार की बस सेवाओं को चरणबद्ध रूप से हर नगर और हर जिले तक पहुंचाया जाएगा। यात्रियों की सुविधा के लिए बस स्टॉप, बस स्टैंड और आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक संसाधनों के साथ बेहतर कंट्रोलिंग व्यवस्था विकसित की जाएगी।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सिटी बसों से लेकर राज्य के भीतर और दूसरे राज्यों के लिए लग्जरी बस सेवाएं भी शीघ्र शुरू होंगी। इससे प्रदेश के प्रमुख शहरों के साथ देश के प्रमुख तीर्थस्थलों और महानगरों तक आवागमन सुगम हो जाएगा।

    मध्यप्रदेश में मेट्रो रेल सेवा की शुरुआत के बाद सड़क परिवहन के क्षेत्र में लोक परिवहन बस सेवा का पुनः शुभारंभ एक महत्वपूर्ण कदम है। मध्यप्रदेश सरकार ने बिजली, पानी, सड़क और ग्रामीण इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत किया है। अब सुगम यातायात की सुविधा को भी विस्तार मिल रहा है।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि राजधानी भोपाल में मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा के शुभारंभ अवसर पर केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री  नितिन गडकरी हमारे साथ उपस्थित रहेंगे। मैं भोपाल और मध्यप्रदेश की जनता की ओर से उनका स्वागत करता हूं। मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा प्रारंभ करने का यह निर्णय प्रदेश की जनता के लिए सुविधा, कनेक्टिविटी और बेहतर आवागमन उपलब्ध करवाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

     

  • खनन प्रशासन को मिले नए खनि निरीक्षक, मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बांटे नियुक्ति पत्र

    खनन प्रशासन को मिले नए खनि निरीक्षक, मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बांटे नियुक्ति पत्र

    भोपाल

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि मध्यप्रदेश खनिज के क्षेत्र में अग्रणी राज्य है। प्रदेश की धरती से हीरा भी निकलता है। कोयले के मामले में भी प्रदेश समृद्ध हैं। खनिज महत्वपूर्ण विभाग है जिसमें पारदर्शिता और दक्षता के साथ कार्य करने वाले प्रदेश की आर्थिक समृद्धि में भी सहायक होते हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव मुख्यमंत्री निवास में नवनियुक्त 62 खनि निरीक्षकों को नियुक्ति पत्र वितरण समारोह को संबोधित कर रहे थे। राज्य सरकार ने बीते एक वर्ष में 85 हजार युवाओं को रोजगार उपलब्ध करवाया है। कार्यक्रम में पिछड़ा वर्ग और अल्पसंख्यक कल्याण राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) मती कृष्णा गौर भी उपस्थित थी।  

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि रत्नगर्भा, वसुंधरा से जुड़कर नवनियुक्त खनि निरीक्षकों का भाग्योदय हो रहा है। आज का दिन इन युवाओं के लिए बहुत महत्वपूर्ण है, साथ ही उनके जीवन में नया प्रकाश लाने वाला दिन भी है। नवनियुक्त खनि निरीक्षक शासन से जुड़कर सिर्फ नौकरी ही प्राप्त नहीं कर रहे बल्कि सेवा का एक नया अवसर प्राप्त कर अपनी नई पहचान भी प्रारंभ कर रहे हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि नवनियुक्त खनि निरीक्षक आज जिस मुकाम पर पहुंचे हैं, उसमें उनके माता-पिता और परिजन का आशीर्वाद एवं सहयोग भी शामिल है।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री  मोदी के नेतृत्व और मार्गदर्शन में राष्ट्र आगे बढ़ रहा है। मध्यप्रदेश भी प्रगति के मार्ग पर तीव्र गति से आगे बढ़ रहा है। प्रधानमंत्री  मोदी युवाओं को शासकीय सेवा में आने पर कर्मचारी नहीं बल्कि कर्मयोगी मानते हैं। मध्यप्रदेश सरकार ने खनि निरीक्षकों को नियुक्ति पत्र के साथ ही विश्वास पत्र भी सौंपा है। सुशासन और लोक कल्याण के उद्देश्य से कार्य करते हुए ये युवा निश्चित ही सभी के लिए गर्व का कारण बनेंगे।  

    खनिज आय में वृद्धि

    प्रमुख सचिव खनिज साधन  विवेक पोरवाल ने कहा कि प्रदेश में खनिजों से होने वाली आय आठ-नौ हजार करोड़ से बढ़कर 12 हजार करोड़ रुपए हो गई है। वित्त वर्ष 2026-27 में 72 खनि निरीक्षकों की नियुक्ति की पहल की गई। नवनियुक्त खनि निरीक्षक प्रदेश के खनिज राजस्व को बढ़ाने का कार्य करेंगे। प्रमुख सचिव  पोरवाल ने बताया कि भारत सरकार ने नीलामी के माध्यम से 33 कोयला खनन ब्लॉक आवंटित किए, जिसमें से 8 ब्लॉक में कोयला का उत्पादन शुरू हो गया हैं। छह अन्य कोयला खनन ब्लॉक में उत्पादन प्रारंभ करने के लिए माइन डेवलपमेंट का कार्य प्रारंभ किया गया है। छतरपुर जिले में 2 नए क्षेत्रों में हीरे की खोज के लिए अन्वेषण कार्य चल रहा है।

    पन्ना जिले के अंतर्गत एक हीरा ब्लॉक आवंटित किया गया है। स्वर्ण अयस्क की प्रोसेसिंग के लिए सिंगरौली में ग्रीनफील्ड गोल्ड कंसंट्रेट प्रोसेसिंग यूनिट स्थापित की जा रही है। सिंगरौली और कटनी में 6 स्वर्ण ब्लॉक नीलाम किए गए हैं। भारत सरकार ने खनन क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य के लिए मध्यप्रदेश को सम्मानित किया है। नीलामी प्रक्रिया और खनन क्षेत्र में सुधारों के लिए मध्यप्रदेश ने अग्रणी राज्य की पहचान बनाई है।

    नवनियुक्त खनि निरीक्षक बोले-"हमारे लिए आज होली और दीपावली दोनों की खुशी है"

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने नवनियुक्त खनि निरीक्षकों में से 5 चयनित अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र प्रदान किया और नवनियुक्त खनि निरीक्षकों के साथ छायाचित्र खिंचवाया। कार्यक्रम में नवनियुक्त खनि निरीक्षकों ने कहा कि आज उनके लिए होली और दीपावली जैसा खुशी का दिन है। वे अपने दायित्व को पूरी लगन से पूरा करेंगे।      

  • 4520 भूखंडों के लिए पंजीकरण का शुभारंभ व 2166 करोड़ से प्रस्तावित पांच बहुमंजिला अपार्टमेंट्स का शिलान्यास

    4520 भूखंडों के लिए पंजीकरण का शुभारंभ व 2166 करोड़ से प्रस्तावित पांच बहुमंजिला अपार्टमेंट्स का शिलान्यास

    लखनऊ

    राजधानी में घर का सपना संजोने वालों को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गुरुवार को बड़ा उपहार दिया। मुख्यमंत्री ने आगरा एक्सप्रेसवे के निकट ग्राम दोना में आयोजित कार्यक्रम में वैदिक मंत्रोच्चार के बीच 12 हजार करोड़ रुपये की लागत से 10,680 एकड़ में लखनऊ विकास प्राधिकरण (एलडीए) की वरुण विहार व नैमिष नगर योजनाओं का भूमिपूजन किया। इस दौरान सीएम योगी ने 4520 भूखंडों के लिए पंजीकरण का शुभारंभ और 2166 करोड़ से प्रस्तावित पांच मल्टीस्टोरी हाउसिंग प्रोजेक्ट्स (लेक व्यू, पार्क व्यू, ऐशबाग स्क्वॉयर, अनंत नगर योजना स्थित अदिति अपार्टमेंट व शारदा नगर विस्तार स्थित वागेश्वरी अपार्टमेंट) का शिलान्यास भी किया। मुख्यमंत्री ने कार्यक्रम स्थल पर पौधरोपण भी किया। उन्होंने कहा कि पिछली सरकारों की तरह लखनऊ में अब कट्टा-बम नहीं, बल्कि ब्रह्मोस मिसाइल बन रही है। 

    वरुण विहार व नैमिष नगर योजनाओं में 10 लाख से अधिक लोगों को मिलेगी आवासीय सुविधा

    सीएम ने कहा कि किसी भी शहर के पश्चिम के दिग्पाल वरुण देवता होते हैं। वरुण विहार में 6500 एकड़ से अधिक क्षेत्रफल में छह लाख लोगों तथा 4100 एकड़ में नैमिष योजना के तहत 4 लाख लोगों को आवासीय सुविधा मिलेगी। सीएम ने नैमिषारण्य की महत्ता भी बताई, कहा कि आध्यात्मिक व सांस्कृतिक विरासत को जीवंत बनाए रखने के लिए लखनऊ व सीतापुर के सीमावर्ती क्षेत्र में नैमिष नगर के रूप में एलडीए नई योजना लेकर आया है। 

    सभी के लिए लाभकारी होगी दोनों योजनाएं
    सीएम ने कहा कि ये दोनों योजनाएं आने वाले समय में लखनऊ के विस्तार, संभावनाओं और सुरक्षित आवास की दृष्टि से लाई गई हैं। अध्ययनरत छात्रों, हेल्थकेयर में संभावनाओं को बढ़ाने वाले युवाओं, रोजगार की दृष्टि से राजधानी आने वालों और लखनऊ को भविष्य मानकर यहां जीवन व्यतीत करने का विचार रखने वाले नागरिकों के लिए ये दोनों आवासीय योजनाएं अत्यंत लाभकारी होंगी।

    वरुण विहार से मिलेगी पूर्वांचल एक्सप्रेसवे की कनेक्टिविटी 

    सीएम ने कहा कि लखनऊ व सीतापुर में अब दूरी नहीं होगी। यहां फोरलेन कनेक्टिविटी भी होगी। वरुण विहार के बीच से पूर्वांचल एक्सप्रेसवे की कनेक्टिविटी देंगे। उन्होंने स्पष्ट किया कि हमारी सरकार में एलडीए व किसानों के बीच कोई मध्यस्थ नहीं रहेगा। योजनाओं में जिन भी किसानों को जमीन आएगी, उन्हें सीधे मुआवजा मिलेगा।

    विकास की नई बुलंदियां छू रहा अटलजी के सपनों का लखनऊ
    मुख्यमंत्री ने कहा कि अटलजी के सपनों का लखनऊ विकास की नई बुलंदियों को छू रहा है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के नेतृत्व में आधुनिक इन्फ्रास्ट्रक्चर, एयरपोर्ट, मेट्रो का विस्तार हो रहा है। पिछली सरकार की तरह यहां अब कट्टा और बम नहीं, बल्कि ब्रह्मोस मिसाइल बन रही है। जब हमारे जवान इसका इस्तेमाल करते हैं तो दुश्मन थर्रा उठता है। लखनऊ विकास की नई बुलंदियों को छुए, इसके लिए नई योजनाएं लाई जा रही हैं। 

    अनियोजित कार्य का परिणाम भी गलत

    सीएम ने कहा कि पिछले साल हमारी सरकार ने 785 एकड़ में अनंत नगर आवासीय परियोजना को आगे बढ़ाया और इस वर्ष 10 हजार एकड़ में वरुण विहार व नैमिष नगर के नाम से दो बड़ी आवासीय योजनाएं आकार ले रही हैं। पहले लोग जहां-तहां जमीन खरीदते थे। वहां सड़क, बिजली, पानी आदि व्यवस्था नहीं होती थी और जलजमाव के कारण नारकीय जीवन व्यतीत करना पड़ता था। जमीन के मालिक ने यदि किसी दबंग या गुंडे को जमीन बेच दी, तो भी समस्या होती थी। अनियोजित कार्य का परिणाम भी गलत होता है।

    बढ़ती आबादी के लिए नियोजित शहरी विकास आवश्यक

    मुख्यमंत्री ने लखनऊ विकास प्राधिकरण की सराहना करते हुए कहा कि बढ़ती आबादी के लिए नियोजित शहरी विकास अत्यंत आवश्यक है। अब लखनऊ एजुकेशन, हेल्थकेयर, विश्व स्तरीय इन्फ्रास्ट्रक्चर, मॉडर्न टेक्नोलॉजी, मैन्युफैक्चरिंग के नए हब के रूप में स्थापित हुआ है। चौतरफा कनेक्टिविटी, टाटा ऑटोमोबाइल व अशोका लीलैंड के ईवी मैन्युफैक्चरिंग प्लांट लखनऊ को नई पहचान दिला रहे हैं। लखनऊ से आगरा, पूर्वी उप्र समेत चारों ओर की कनेक्टिविटी बेहतर हुई है। किसान पथ, ग्रीन कॉरिडोर तथा एआई सिटी के विकास का कार्य लखनऊ को नई पहचान दिला रहा है। 

    एससीआर से आसपास के जनपदों का भी विकास
    सीएम ने कहा कि स्टेट कैपिटल रीजन (एससीआर) के रूप में लखनऊ के साथ ही उन्नाव, हरदोई, बाराबंकी, सीतापुर, रायबरेली के क्षेत्रीय विकास का भी प्लान बन रहा है। इन सभी जनपदों में पब्लिक मोबिलिटी, विश्व स्तरीय इन्फ्रास्ट्रक्चर, शिक्षा, पर्यटन व कनेक्टिविटी आदि की बेहतरी का व्यवस्थित कार्य चल रहा है। 

    हर तबके का जीवन सहज-सरल बना रहे मोदी जी

    मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी लगातार ध्यान देते हैं कि हर तबके के लिए आवासीय सुविधा हो, उनका जीवन सहज व सरल हो। 12 वर्ष में 4 करोड़ गरीबों को मिला प्रधानमंत्री आवास इसका उदाहरण है। यहां की योजनाओं में भी हर आय वर्ग के लिए आवासीय सुविधाएं (पीएम आवास, अफोर्डेबल हाउसिंग, ग्रुप हाउसिंग, प्लॉट आदि) दी जा रही हैं।

    किसानों के खाते में गया मुआवजा

    सीएम ने कहा कि जमीन देने वाले हर किसान को मुआवजा राशि खाते में भेजी गई। मुनिश्वर सिंह को 3.13 करोड़, रमदेई को 2.05 करोड़, कमलेश कुमार 2.80 करोड़, सुषमा सिंह को 2.90 करोड़, ओमप्रकाश अवस्थी को 1.96 करोड़ का मुआवजा मिला। इन सभी किसानों ने इस पैसे से दूसरी जगह जमीनें खरीद लीं और अपने भविष्य को भी संजो लिया। अवस्थी जी ने 16 बीघा जमीन खरीद ली और शेष पैसा बैंक में एफडी कर दिया है। नमरा फातिमा ने मुआवजे से जमीन खरीदी और अपनी मेडिकल की पढ़ाई के लिए भी धन सुरक्षित कर लिया। मुख्यमंत्री ने किसानों को सलाह दी कि जब पैसा मिले तो बोलेरो खरीदने के बजाय उसका सदुपयोग उद्योग या जमीन खऱीदने में कीजिए। इससे पैसा बढ़ेगा।

    नए उत्तर प्रदेश का नेतृत्व कर रहा लखनऊ 

    मुख्यमंत्री ने लखनऊ की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि भारत की विरासत के प्रतीक प्रभु श्रीराम के अनुज की स्मृतियों को संजोए लखनऊ नए भारत के नए उत्तर प्रदेश को नेतृत्व प्रदान कर रहा है। लखनऊ ने 1857 के प्रथम स्वातंत्र्य समर में ब्रिटिश हुकूमत की चूलें हिला दी थीं। 1925 में काकोरी ट्रेन एक्शन की घटना को अंजाम देकर लखनऊ ने ब्रिटिश हुकूमत के सामने चुनौती खड़ी की थी। पं. रामप्रसाद बिस्मिल, ठाकुर रोशन सिंह, अशफाक उल्ला खां, चंद्रशेखर आजाद, सचिंद्र नाथ बख्शी, सचिंद्र नाथ सान्याल, राजेंद्र नाथ लाहिड़ी जैसे युवा क्रांतिकारियों ने लखनऊ के जरिए स्वाधीनता के लिए नई हुंकार भरी थी।

    इस अवसर पर महापौर सुषमा खर्कवाल, राज्यसभा सांसद संजय सेठ, विधायक राजेश्वर सिंह, योगेश शुक्ला, डॉ. नीरज बोरा, जय देवी, ओपी श्रीवास्तव, अमरेश कुमार, विधान परिषद सदस्य महेंद्र सिंह, मुकेश शर्मा, लालजी प्रसाद निर्मल, पवन सिंह चौहान, रामचंद्र प्रधान, भाजपा जिलाध्यक्ष विजय मौर्य, महानगर अध्यक्ष आनंद द्विवेदी आदि मौजूद रहे।

  • नेपाल जैसे हादसे का खतरा! अलकनंदा के ऊपर बनीं 131 झीलें, निगरानी जरूरी

    नेपाल जैसे हादसे का खतरा! अलकनंदा के ऊपर बनीं 131 झीलें, निगरानी जरूरी

    देहरादून 

    हिमालय के ग्लेशियर तेजी से पिघल रहे हैं. वे केवल बर्फ ही नहीं खो रहे बल्कि अपने पीछे बड़ी-बड़ी झीलें छोड़ रहे हैं. इन झीलों का बढ़ता आकार पहाड़ी क्षेत्रों के लिए गंभीर खतरा बन सकता है. अलकनंदा बेसिन पर की गई एक नई स्टडी ने इस बदलते जल परिदृश्य की डरावनी तस्वीर पेश की है। 

    स्टडी के अनुसार 1994 से 2023 के बीच 24 ग्लेशियल झीलों का कुल क्षेत्रफल 0.97 वर्ग किलोमीटर से बढ़कर 1.62 वर्ग किलोमीटर हो गया. यानी तीन दशकों में करीब 67% की वृद्धि हुई. इतना ही नहीं, इस दौरान 57 नई ग्लेशियल झीलें भी बनीं. इनमें 18 झीलें ऐसी हैं जिनका क्षेत्रफल 0.01 वर्ग KM से अधिक है। 

    कुछ झीलों का विस्तार बेहद तेज रहा. वसुंधरा झील का क्षेत्रफल 261 प्रतिशत और बलबाला झील का 119 प्रतिशत बढ़ा. शोधकर्ताओं ने 27 ऐसी झीलों की पहचान की है जिनके आकार में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है. इनमें बद्रीनाथ मंदिर जैसे महत्वपूर्ण तीर्थस्थल के ऊपर स्थित एक झील भी शामिल है। 

    यह स्टडी 'अलार्मिंग ट्रेंड्स: रैपिडली ग्रोइंग एंड रिसेंटली फॉर्म्ड ग्लेशियल लेक्स इन द अलकनंदा बेसिन, नॉर्दर्न इंडियन हिमालयाज' शीर्षक से ओपन जियोसाइंसेज जर्नल में प्रकाशित हुआ है. प्राग स्थित चार्ल्स यूनिवर्सिटी से जुड़ी शोधकर्ता डॉक्टर आयुषी पांडेय के नेतृत्व में यह शोध किया गया। 

    इसमें लैंडसेट और सेंटिनल-2 सैटेलाइटों के आंकड़ों की मदद से 74 ग्लेशियल झीलों में हुए बदलावों का एनालिसिस किया गया. नतीजे बताते हैं कि अलकनंदा बेसिन में झीलों की कुल संख्या बढ़कर 131 हो गई है। 

    ग्लेशियल झीलें क्यों खतरनाक हैं?
    ग्लेशियल झीलें पिघलते ग्लेशियरों से आने वाले पानी से बनती और बढ़ती हैं. इन्हें बर्फ, चट्टान या मलबे से बनी प्राकृतिक संरचनाएं रोककर रखती हैं. जब ये कमजोर पड़ते हैं या अचानक टूट जाते हैं तो झील में जमा भारी मात्रा में पानी तेज गति से नीचे की ओर बह निकलता है। 

    इस घटना को ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट फ्लड यानी GLOF कहा जाता है. यह बहाव अपने साथ चट्टानें, मिट्टी और मलबा लेकर आता है. इससे सड़कें, पुल, घर, हाइड्रोइलेक्ट्रिक प्रोजेक्ट्स और अन्य बुनियादी सुविधाएं कुछ ही समय में तबाह हो सकती हैं। 

    नेपाल में 26 अगस्त 2026 को आई विनाशकारी बाढ़ ने दिखाया कि हिमालयी क्षेत्रों में अचानक आने वाली बाढ़ कितनी बड़ी तबाही ला सकती है. हालांकि वह घटना पारंपरिक GLOF नहीं थी लेकिन उसने जोखिम की गंभीरता साफ कर दी। 

    स्टडी में जिन झीलों का तेजी से विस्तार हुआ है वे इसलिए चिंता का विषय हैं क्योंकि उनके किनारे या रोकने वाली संरचनाएं अस्थिर हो सकती हैं. बद्रीनाथ के ऊपर स्थित झील का उल्लेख इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि नीचे तीर्थस्थल और आबादी वाले क्षेत्र हैं. किसी भी अचानक बहाव का असर दूर तक पड़ सकता है। 

    सैटेलाइट निगरानी की भूमिका और सीमाएं
    शोधकर्ताओं का कहना है कि सैटेलाइट निगरानी से खतरे वाली झीलों की पहचान में मदद मिलती है. लैंडसेट और सेंटिनल-2 जैसे सैटेलाइटों से नई झीलों का पता लगाना. उनके आकार में बदलाव ट्रैक करना. तेजी से बढ़ रही झीलों को चिन्हित करना संभव है. इससे उन झीलों की सूची बनाई जा सकती है जिनकी जमीन पर विस्तृत जांच जरूरी है. लेकिन केवल सैटेलाइट डेटा पर्याप्त नहीं है। 

    झील की गहराई, उसमें मौजूद पानी की मात्रा, आसपास की ढलानों की स्थिरता, संभावित बहाव का रास्ता और ग्लेशियर-झील संबंधों का स्टडी करने के लिए मैदानी जांच बेहद जरूरी है. दुर्गम हिमालयी इलाकों में यह काम चुनौतीपूर्ण है लेकिन जोखिम आकलन के लिए अपरिहार्य है। 

    डॉक्टर आयुषी पांडेय के अनुसार हाल की बाढ़ ने याद दिलाया कि ऊंचे हिमालयी क्षेत्रों में लगातार निगरानी कितनी आवश्यक है. भारी बारिश, ग्लेशियल झीलों का विस्तार, पहाड़ी ढलानों की अस्थिरता और भूकंपीय गतिविधियां एक-दूसरे के प्रभाव को बढ़ा सकती हैं. निचले इलाकों में खतरा और गंभीर हो सकता है। 

    यह समस्या केवल अलकनंदा बेसिन तक सीमित नहीं है. पर्यावरण मंत्रालय ने भी नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल में जानकारी दी है कि हिमालय क्षेत्र में ग्लेशियल झीलें बढ़ रही हैं. GBPNIHE के एक स्टडी में पश्चिमी हिमालय की 25 ग्लेशियरों और आसपास की झीलों का 1990-2015 विश्लेषण किया गया था। 

    उसमें भी संख्या और क्षेत्रफल में भारी वृद्धि दिखी. पॉट्सडैम यूनिवर्सिटी के स्टडी में हिमालय की करीब पांच हजार झीलों पर बाढ़ का खतरा बताया गया क्योंकि उनके किनारे कमजोर हैं. भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन यानी इसरो ने अप्रैल 2024 की रिपोर्ट में कहा था कि जलवायु परिवर्तन के कारण ग्लेशियर तेजी से पिघल रहे हैं और झीलों का आकार बढ़ रहा है।  

    इसरो के अनुसार 2016-17 में 10 हेक्टेयर से बड़ी करीब 2431 ग्लेशियर झीलें दर्ज हुईं. इनमें से 676 झीलों के क्षेत्रफल में पिछले तीन दशकों में दोगुना इजाफा हुआ. ये आंकड़े साफ करते हैं कि समस्या क्षेत्रीय स्तर की है. तापमान वृद्धि ग्लेशियरों के पिघलने की मुख्य वजह है. इससे झीलें बन रही हैं और पुरानी झीलें फैल रही हैं। 

    क्षेत्रीय सहयोग और भविष्य की रणनीति
    हिमालय कई देशों में फैला है. ग्लेशियरों का पिघलना, झीलों का बढ़ना और बाढ़ का पानी राजनीतिक सीमाओं को नहीं मानता. इसलिए बदलती ग्लेशियल झीलों की निगरानी, वैज्ञानिक आंकड़ों को साझा करना और समय रहते चेतावनी व्यवस्था पूरे हिमालयी क्षेत्र की साझा जरूरत है. पर्याप्त आर्थिक और तकनीकी संसाधनों के साथ-साथ देशों के बीच मजबूत वैज्ञानिक सहयोग जरूरी है। 
    स्टडी सुझाव देता है कि केवल कुल बारिश या ग्लेशियर पिघलने पर ध्यान देना काफी नहीं. झीलों की तीव्रता, वितरण, गहराई और स्थिरता पर भी नजर रखनी होगी. स्थानीय समुदायों को जागरूक करना, प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली लगाना और जोखिम वाले क्षेत्रों में निर्माण पर नियंत्रण रखना महत्वपूर्ण कदम हो सकते हैं. जलविद्युत परियोजनाओं और सड़कों की योजना बनाते समय इन खतरों को ध्यान में रखना होगा। 

    अलकनंदा बेसिन का यह स्टडी भविष्य के लिए चेतावनी है. तेजी से बदलता हिमालयी जल परिदृश्य तैयारियों की मांग करता है. सैटेलाइट और मैदानी दोनों स्तरों पर निगरानी बढ़ाकर, आंकड़े साझा करके और सहयोग मजबूत करके जोखिम को कम किया जा सकता है. पहाड़ों में जमा पानी अचानक तबाही मचा सकता है. इसलिए समय रहते कदम उठाना पूरे क्षेत्र की जिम्मेदारी है. वैज्ञानिकों, नीति निर्माताओं और स्थानीय लोगों के संयुक्त प्रयास से ही इस चुनौती का सामना संभव है। 

  • भीषण गर्मी का बड़ा खतरा! सुपर अल-नीनो से लाखों मौतों का अनुमान, भारत भी अलर्ट

    भीषण गर्मी का बड़ा खतरा! सुपर अल-नीनो से लाखों मौतों का अनुमान, भारत भी अलर्ट

    नई दिल्ली
    भारत में आने वाले महीनों में गर्मी का असर और गंभीर हो सकता है। शिकागो यूनिवर्सिटी के एनर्जी पॉलिसी इंस्टीट्यूट की एक नई रिपोर्ट के मुताबिक, सितंबर 2026 से फरवरी 2027 के बीच देश में सामान्य साल की तुलना में करीब 15800 अतिरिक्त मौतें हो सकती हैं। रिपोर्ट में इसकी बड़ी वजह सुपर अल नीनो को बताया गया है।

    यूनिवर्सिटी की क्लाइमेट इम्पैक्ट लैब (CIL) की रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि इसके चलते तापमान में तेज बढ़ोतरी होगी। वैश्विक स्तर पर जमीन का तापमान सामान्य से 1.2 डिग्री सेल्सियस ज्यादा रह सकता है। इससे लोगों को ऐसी गर्म परिस्थितियों का सामना करना पड़ेगा-जैसी जलवायु परिवर्तन के कारण करीब 20 साल बाद देखने का अनुमान है। रिपोर्ट के अनुसार, सामान्य साल की तुलना में बेहद गर्म दिनों की संख्या 44 फीसदी अधिक हो सकती है।

    रिपोर्ट में अनुमान लगाया गया है कि दुनियाभर में जून से शुरू हुए मौजूदा अल नीनो के दौरान अब तक गर्मी से जुड़ी करीब 4.51 लाख अतिरिकत मौतें हुई हैं। इनमें से 2.39 लाख मौतें सितंबर 2026 से फरवरी 2027 के बीच के छह महीनों में होने का अनुमान है।

    सितंबर 2026 से मौसम को लेकर एक ऐसी चेतावनी सामने आई है, जिसका असर सिर्फ तापमान के रिकॉर्ड तक सीमित नहीं रह सकता. एक नए आकलन के मुताबिक, मौजूदा El Nino के दौरान दुनिया में सामान्य वर्षों की तुलना में करीब 4.51 लाख अतिरिक्त गर्मी से जुड़ी मौतें हो सकती हैं. भारत भी उन देशों में है जहां इसका असर खास तौर पर गंभीर रहने का अनुमान है। 

    भारत के लिए दिसंबर से फरवरी अहम
    ‘क्लाइमेट इम्पैक्ट लैब’ (Climate Impact Lab) के अनुमान के मुताबिक सितंबर 2026 से फरवरी 2027 के बीच भारत में करीब 15,800 अतिरिक्त हीट रिलेटेड डेथ का अनुमान है. रिपोर्ट के मुताबिक भारत में इसका बड़ा हिस्सा दिसंबर से फरवरी के तीन महीनों में सामने आ सकता है. और खतरा यहीं खत्म नहीं होता. शोधकर्ताओं ने संकेत दिया है कि भारत और पाकिस्तान जैसे उत्तरी गोलार्ध के इलाकों में अगले साल गर्मियों के दौरान ‘तेज गर्मी के चलते होने वाली मौतें’ और बढ़ सकती हैं। 

    दुनिया के दूसरे हिस्सों में भी आंकड़े काफी बड़े हैं. अफ्रीका के साहेल क्षेत्र में करीब 66,800 अतिरिक्त मौतों का अनुमान है, जिनमें अकेले नाइजीरिया में 31,400 शामिल हैं. साउथ ईस्ट एशिया के फिलीपिंस, वियतनाम, थाईलैंड और कंबोडिया में मिलाकर करीब 19,400 और इंडोनेशिया में 19,300 अतिरिक्त मौतों का अनुमान लगाया गया है. ब्राजील के लिए ये आंकड़ा 13,300 बताया गया है। 

    नेपाल की बाढ़ त्रासदी से तुलना
    शोधकर्ताओं ने इस अनुमानित मौतों की संख्या की तुलना हाल ही में नेपाल में आई बाढ़ में मारे गए या लापता लोगों से की है। उनके मुताबिक, अल नीनो से जुड़ी अनुमानित मौतों की संख्या नेपाल की उस बाढ़ में मारे गए या लापता लोगों की संख्या से करीब 65 गुना ज्यादा है।

    आपको बता दें कि अल नीनो एक मौसमी घटना है जिसमें भूमध्यरेखीय प्रशांत महासागर के पानी का तापमान असामान्य रूप से बढ़ जाता है। इसका असर भारतीय मानसून पर भी पड़ता है और इससे तापमान सामान्य से ज्यादा रहने की स्थिति बन सकती है।

    रिपोर्ट की सह-लेखिका एमिली ग्रोवर-कोपेक ने बताया कि मौतों का यह अनुमान क्लाइमेट इम्पैक्ट लैब (CIL) की उस रिसर्च पर आधारित है। इसमें तापमान और गर्मी से होने वाली अतिरिक्त मौतों के बीच संबंध का अध्ययन किया गया है। इसके लिए दुनियाभर के 24378 क्षेत्रों के अलग-अलग आंकड़ों का इस्तेमाल किया गया ताकि स्थानीय जलवायु, लोगों की संवेदनशीलता और बदलते मौसम के अनुकूल ढलने की क्षमता को ध्यान में रखा जा सके।

    इसके बाद इन आंकड़ों को यूरोपियन सेंटर फॉर मीडियम-रेंज वेदर फोरकास्ट्स (ECMWF) के मौसमी मौसम पूर्वानुमान पर लागू किया गया। इससे 1996 से 2025 के औसत की तुलना में संभावित अतिरिक्त मौतों का अनुमान लगाया गया। रिपोर्ट में दिए गए अनुमान की अनिश्चितता दो मुख्य वजहों से जुड़ी है-

    इससे 1996 से 2025 के औसत की तुलना में संभावित अतिरिक्त मौतों का अनुमान लगाया गया। रिपोर्ट में दिए गए अनुमान की अनिश्चितता दो मुख्य वजहों से जुड़ी है- 51 अलग-अलग पूर्वानुमानों वाले मॉडल समूह (ensemble) में अंतर और तापमान व मौतों के बीच संबंध को लेकर मौजूद अनिश्चितता।

    ग्रोवर-कोपेक रोडियम ग्रुप में क्लाइमेट एंड एनर्जी प्रैक्टिस की निदेशक भी हैं और क्लाइमेट इम्पैक्ट लैब के साथ कंपनी के काम का नेतृत्व करती हैं। उन्होंने कहा कि यह मॉडल सख्त वैज्ञानिक तरीके से तैयार किया गया है और लगातार विकसित हो रहा है। जैसे-जैसे नए सबूत और आंकड़े सामने आएंगे, मॉडल को और बेहतर बनाया जा सकेगा।
    भारत पर कितना असर पड़ेगा?

    रिपोर्ट के मुताबिक, नाइजीरिया, सूडान, नाइजर और चाड के साहेल इलाकों में गर्मी का सबसे ज्यादा असर देखने को मिल सकता है। यहां करीब 66800 अतिरिक्त मौतों का अनुमान है।

    भारत के दुनिया के सबसे ज्यादा प्रभावित देशों में चौथे स्थान पर रहने का अनुमान है। इससे आगे नाइजीरिया, इंडोनेशिया और सूडान हैं। वहीं फिलीपींस, वियतनाम, थाईलैंड और कंबोडिया में कुल मिलाकर करीब 19400 अतिरिक्त मौतें होने का अनुमान है।

    रिपोर्ट के लेखकों माइकल ग्रीनस्टोन, टैमा कार्लटन, जेनेवीव मैरिकल और ग्रोवर-कोपेक के मुताबिक, भारत में गर्मी से होने वाली मौतें अचानक बढ़ने के बजाय धीरे-धीरे बढ़ सकती हैं। अकेले दिसंबर 2026 से फरवरी 2027 के बीच भारत में करीब 7400 अतिरिक्त मौतों का अनुमान है।

    रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि भारत में फरवरी के बाद भी गर्मी का खतरा कम होने की संभावना नहीं है। भारत और पाकिस्तान को ऐसे उत्तरी गोलार्ध के देशों के तौर पर चिन्हित किया गया है जहां गर्मियों के दौरान गर्मी से होने वाली मौतों का आंकड़ा और बढ़ सकता है।

    भारत में सर्दियों के दौरान गर्मी से होने वाली मौतों के अनुमान को लेकर ग्रोवर-कोपेक ने कहा कि उत्तर भारत में सर्दियां आमतौर पर इतनी ठंडी होती हैं कि वहां गर्मी से मौतें कम होती हैं। इसलिए सर्दियों में सामान्य से थोड़ा ज्यादा तापमान होने पर भी मौतों के आंकड़े में बहुत बड़ा बदलाव नहीं आता।

    वहीं दक्षिण भारत की स्थिति अलग है। वहां सर्दियों में भी तापमान इतना ज्यादा रहता है कि गर्मी से मौतें हो सकती हैं। ऐसे में सामान्य से ज्यादा तापमान होने पर मौतों का आंकड़ा तेजी से बढ़ सकता है। इसी वजह से इस सर्दी में भारत के दुनिया में गर्मी से होने वाली अनुमानित मौतों के मामले में चौथे स्थान पर रहने का अनुमान है।

    ग्रोवर-कोपेक ने कहा कि फरवरी तक के छह महीने के पूर्वानुमान के बाद भी भारत और पाकिस्तान में गर्मी से होने वाली मौतें बढ़ती रह सकती हैं। अगर असामान्य रूप से गर्म मौसम बना रहता है और गर्मियों की गर्मी भी जुड़ जाती है तो खतरा और बढ़ सकता है।

    CIL का कहना है कि चूंकि इन मौतों का अनुमान कई महीने पहले लगाया जा सकता है। इसलिए सरकारों और राहत संगठनों के पास तैयारी करने का समय है। हीट अलर्ट सिस्टम, कूलिंग सेंटर, पानी की व्यवस्था, कामगारों के लिए सुरक्षा उपाय और स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच बढ़ाकर लोगों को बचाने की कोशिश की जा सकती है।

    रिपोर्ट के लेखकों ने मौजूदा गर्म मौसम को ‘postcard from the future (भविष्य की एक झलक)’ बताया है। उनका कहना है कि लंबे समय में जलवायु परिवर्तन से होने वाले असर के मुकाबले पहले से चेतावनी मिलने का यह समय भारत और दूसरे प्रभावित देशों को मौतों से पहले कदम उठाने का मौका देता है।

    अल नीनो के और मजबूत होने का खतरा, अगस्त में धरती फिर 1.5°C से ज्यादा गर्म; 2026-27 में कैसा रहेगा दुनिया का मौसम?

    धरती का तापमान एक बार फिर उस स्तर तक पहुंच गया है जिसे लेकर वैज्ञानिक लंबे समय से चेतावनी देते रहे हैं। अगस्त 2026 में दुनिया का औसत सतही तापमान औद्योगिक युग से पहले के स्तर यानी 1850-1900 के औसत से 1.65°C ज्यादा रहा। यह नवंबर 2025 के बाद पहला महीना है जब वैश्विक तापमान इस महीने के स्तर पर 1.5°C से ऊपर गया।

  • केन्द्रीय मंत्री  गडकरी होंगे मुख्य अतिथि

    केन्द्रीय मंत्री गडकरी होंगे मुख्य अतिथि

    भोपाल 

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने गुरुवार की शाम गोविंदपुरा, बीएचईएल क्षेत्र में स्थित दशहरा मैदान पहुंचकर शुक्रवार को होने वाली "मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा'' के शुभारंभ कार्यक्रम की तैयारी का जायजा लिया। प्रदेश में शहरों-गांवों में डायरेक्ट बस कनेक्टिविटी की शुरुआत के शुभारंभ का कार्यक्रम भव्य रूप में होगा। इस कार्यक्रम की तैयारियां पूर्ण हो गई हैं।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव और केंद्रीय सड़क, परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री श्री नितिन गडकरी बसों को हरी झंडी दिखाकर प्रदेशवासियों को सौगात देंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने इस अवसर पर नई बसों की विशेषताओं की जानकारी प्राप्त की और बसों में बैठकर भी आधुनिक तकनीक और यात्रियों के लिए की गई सुविधाओं का जायजा लिया। परिवहन सचिव श्री मनीष सिंह ने मुख्यमंत्री डॉ. यादव को कार्यक्रम से जुड़ी आवश्यक जानकारियों से अवगत करवाया।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने राज्य स्तरीय कार्यक्रम के लिए तैयार किए गए मंच, सभा स्थल सहित अन्य व्यवस्थाओं का जायजा लिया। इस अवसर पर भोपाल नगर निगम आयुक्त संस्कृति जैन सहित संबंधित विभागों के  उपस्थित थे।

    7 शहरों की 351 बसों को दिखाई जाएगी हरी झंडी

    मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा के शुभारंभ अवसर पर प्रदेश के 7 शहरों की 351 इंटरसिटी और इंट्रासिटी बसों को एक साथ हरी झंडी दिखाकर रवाना किया जाएगा। इसमें इंदौर, भोपाल, जबलपुर, रीवा, देवास, कटनी और भिंड शामिल हैं। शुरुआती चरण में इंदौर में 145 बसें जिसमें 50 इंटरसिटी और 95 इंट्रासिटी, भोपाल में 106 बसें जिसमें 23 इंटरसिटी और 83 इंट्रासिटी, जबलपुर के लिए 67 बसें जिसमें 14 इंटरसिटी और 53 इंट्रासिटी, रीवा में 18 इंटरसिटी बसें, देवास में 10 इंटरसिटी बसें, कटनी में 3 और भिंड में 2 इंटरसिटी बसों को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया जाएगा। 

  • PM मोदी के 25 साल के सार्वजनिक जीवन पर बोले CM यादव, सेवा भाव को बताया खास

    PM मोदी के 25 साल के सार्वजनिक जीवन पर बोले CM यादव, सेवा भाव को बताया खास

    प्रधानमंत्री मोदी ने सार्वजनिक जीवन के 25 वर्षों में सेवा भाव को भी किया चरितार्थ : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

    प्रधानमंत्री मोदी ने सेवा संकल्प बाईक यात्रा के राइडर्स से किया वर्चुअल संवाद
    प्रधानमंत्री मोदी को, प्रदेश के बाइक राइडर दीपेश गोटी ने अपनी यात्रा के साझा अनुभव
    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने देवास जिले के पुंजापुरा में किया सेवा संकल्प बाइक राइडर्स का स्वागत
    सेवा संकल्प अभियान अंतर्गत वाराणसी से वडनगर तक निकाली जा रही है यात्रा
    सामाजिक सुरक्षा पेंशन के 35 लाख से अधिक हितग्राहियों को सिंगल क्लिक से 212 करोड़ से अधिक की राशि अंतरित की

    भोपाल

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने सार्वजनिक जीवन के 25 वर्षों में निरंतर परिश्रम, अनुशासन और राष्ट्र धर्म की भावना के साथ काम किया है। वर्ष 2001 में गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में उनकी संवैधानिक जिम्मेदारी की शुरुआत हुई और आज वे देश के प्रधानमंत्री के रूप में राष्ट्र की सेवा कर रहे हैं। गरीब, किसान, महिला, युवा और वंचित वर्ग के हर व्यक्ति को विकास की मुख्य धारा से जोड़ने का प्रयास उनकी कार्यशैली में स्पष्ट दिखाई देता है। प्रधानमंत्री मोदी ने देश को भव्य और दिव्य श्रीराम मंदिर की सौगात दी। इसके साथ ही राम राज्य की संकल्पना को साकार करते हुए हर गरीब को घर, पर्याप्त भोजन और बच्चों के लिए बेहतर शिक्षा सुविधा उपलब्ध कराई। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सेवा संकल्प अभियान अंतर्गत वडनगर से वाराणसी जा रही युवाओं की बाइक यात्रा का देवास जिले के पुंजापुरा में स्वागत करते हुए यह बात कही। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सामाजिक सुरक्षा पेंशन के प्रदेश के 35 लाख 42 हजार हितग्राहियों को सिंगल क्लिक से 212 करोड़ 57 लाख रुपए की राशि उनके खातों में अंतरित की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने करणावत पुलिस सहायता केंद्र को पुलिस थाना बनाने, पुलिस जवानों के लिए आवास निर्माण करने तथा शासकीय गोदाम के लिए राशि स्वीकृत करने की घोषणा की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कार्यक्रम में सेवा संकल्प बाइक यात्रा में बाइक राइड भी की। मेधावी विद्यार्थियों को स्कूटी प्रदान की। हितग्राहियों को हितलाभ का वितरण किया। उन्होंने बाइक राइडर्स के साथ पौधरोपण भी किया। उप मुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा तथा सांसद वी.डी. शर्मा इस अवसर पर विशेष रूप से उपस्थित थे।

    शाजापुर जिले के निवासी हैं दीपेश गोटी

    प्रधानमंत्री मोदी ने वडनगर से वाराणसी के लिए निकाली गई ‘सेवा संकल्प बाइक यात्रा’ में शामिल राइडर्स से अलग-अलग स्थानों से वर्चुअली संवाद किया। देवास जिले के पुंजापुरा में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की उपस्थिति में बाइक राइडर्स दल के सेवा यात्री दीपेश गोटी ने प्रधानमंत्री से संवाद में अब तक की अपनी यात्रा के अनुभव साझा किए। शाजापुर जिले के निवासी गोटी ने बताया कि यात्रा के दौरान अन्य राज्यों के युवाओं से दूसरी भाषाएं सीखने और उनकी संस्कृति से परिचित होने का अवसर मिला है। रास्ते में पीएम आवास के हितग्राहियों से मुलाकात हुई। विभिन्न योजनाओं के हितग्राहियों को नमो ऐप से जोड़ा जा रहा है।

    प्रधानमंत्री मोदी ने मध्यप्रदेश के युवाओं की उद्यमशीलता को सराहा

    प्रधानमंत्री मोदी के वड़नगर में स्थानीय लोगों से संपर्क बढ़ाने के सवाल पर दीपेश गोटी ने बताया कि उन्होंने अपने व्यापार-व्यवसाय की दृष्टि से कुछ स्थानीय लोगों के मोबाइल नंबर लिए हैं। इस पर प्रधानमंत्री मोदी ने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि यह अच्छी बात है। अब मध्यप्रदेश का भी मिजाज बदल रहा है। मध्यप्रदेश के युवा भी जहां जा रहे है, वहां व्यापार के अवसर खोज रहे हैं, उनमें उद्यमशीलता भरी है। मध्यप्रदेश के युवाओं ने सेवा संकल्प यात्रा में 'माय प्रामिस टू मोदी जी' का नवाचार किया है, जिसमें 25 सेवा कार्य लिस्ट किए हैं और हर सेवा यात्री को किसी एक सेवा का संकल्प दिलाया जा रहा है।

    भारतीय संस्कृति में यात्राओं का विशेष महत्व

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा है कि यात्रा के दौरान सेवा, जनसंवाद और राष्ट्रीय एकता से जुड़े संदेशों को जन-जन तक पहुंचाने के लिए विभिन्न गतिविधियां आयोजित की जा रही हैं। हमारी संस्कृति में प्राचीन काल से यात्राओं का विशेष महत्व रहा है। प्रधानमंत्री मोदी ने देशवासियों की सेवा के लिए अपने संकल्प से जीवन का प्रत्येक क्षण और अपना कण-कण राष्ट्र को समर्पित किया है। प्रत्येक नागरिक के जीवन को बेहतर बनाने के लिए प्रधानमंत्री मोदी लगातार सक्रिय हैं ।

    पं. दीनदयाल उपाध्याय के जन्मदिवस 25 सितंबर से प्रदेशवासियों को मिलेगी सुगम परिवहन सुविधा

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि देवास का बागली तपोनिष्ठ नेता पूर्व मुख्यमंत्री स्व. कैलाश जोशी का कार्य क्षेत्र रहा है। समर्पित कार्यकर्ताओं के अथक परिश्रम के माध्यम से ही विकास और जनकल्याण की यात्रा निरंतर जारी है। प्रधानमंत्री मोदी के मार्गदर्शन में राज्य सरकार सेवा और जनकल्याण की सभी योजनाओं को तेजी से आगे बढ़ा रही है। उन्होंने कहा कि 25 सितंबर को पं. दीनदयाल उपाध्याय की जयंती पर मध्यप्रदेश में 20 साल से बंद राज्य परिवहन निगम की बसों के संचालन का फिर श्रीगणेश होने जा रहे हैं। मध्यप्रदेश में 5 लाख किलोमीटर का सड़क नेटवर्क है, प्रदेश में हाइवे और एक्सप्रेस-वे भी तेजी से बनाए जा रहे हैं। राज्य परिवहन निगम की बसें नगरीय निकायों, एक शहर से दूसरे शहर और दूसरे राज्यों तक भी चलाई जाएंगी। प्रदेश की ग्रामीण आबादी को भी मुख्यमंत्री सुगम परिवहन बस सेवा का लाभ मिलेगा।

    राज्य सरकार किसानों, बहनों और युवाओं के कल्याण के लिए सतत् सक्रिय

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि किसान कल्याण वर्ष में राज्य सरकार सिंचाई सुविधाओं का विस्तार करने के लिए संकल्पित है। माँ नर्मदा की कृपा से देवास जिले को भी सिंचाई के लिए पर्याप्त जल मिल रहा है। प्रदेश में अब तक सिंचित कृषि भूमि का रकबा 65 लाख हैक्टेयर तक पहुंच चुका है। वर्ष 2002-03 तक गेहूं का मूल्य 300-400 रुपए प्रति क्विंटल से आगे नहीं बढ़ा, लेकिन अब राज्य सरकार किसानों को उनकी उपज का बेहतर दाम दे रही है। इस वर्ष एमएसपी पर 40 रुपए बोनस का लाभ देते हुए किसानों से 2625 रुपए प्रति क्विंटल गेहूं खरीदा है। दूसरी ओर, लाड़ली बहनों को राशि भी हर माह बैंक खाते में भेजी जा रही है। जिन बहनों को मुख्यमंत्री लाड़ली बहना योजना का लाभ नहीं मिल रहा है, अगले वर्ष पात्रतानुसार उनके नाम भी जोडे जाएंगे। अब तक 55 हजार करोड़ से अधिक राशि लाड़ली बहनों को दी गई है।

    प्रदेश में प्राथमिक शाला स्तर पर शून्य हुई ड्रॉप आउट दर

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश के युवाओं और बच्चों को बेहतर शिक्षा और रोजगार देने के लिए सभी प्रयास किए गए हैं। शासकीय स्कूलों के मेधावी बच्चों को लैपटॉप, स्कूटी, साइकिलें, किताबें और स्कॉलरशिप दी जा रही है। प्रदेश के सरकारी प्राथमिक स्कूलों में ड्रॉप आउट दर कभी 16 प्रतिशत थी, लेकिन हमारी सरकार के प्रयासों से अब ड्रॉप आउट दर शून्य हो गई है। राज्य सरकार ने स्कूल शिक्षा का बजट 38 हजार करोड़ तय किया है।

    मध्यप्रदेश में सबसे कम है बेरोजगारी दर

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि वड़नगर से वाराणसी और वाराणसी से वड़नगर तक 35 हजार किलोमीटर से अधिक दूरी की बाइक सेवा यात्रा निकाली जा रही है। लगभग 17 हजार किलोमीटर यात्रा अर्थात आधी से अधिक दूरी मध्यप्रदेश की धरती पर तय होगी। प्रदेश का युवा जिम्मेदार और जागरुक बनें उनके आधार पर ही भविष्य का मध्यप्रदेश और देश समृद्ध बनेगा। प्रदेश सरकार ने पुलिस विभाग में 18 हजार पदों पर नई भर्ती की है। एमएसएमई सेक्टर से 1 करोड़ 20 लाख लोगों को रोजगार मिल रहा है। मध्यप्रदेश में बेरोजगारी दर देश में सबसे कम है। देवास के पुंजापुरा में हुए कार्यक्रम में क्षेत्रीय जनप्रतिनिधि तथा बड़ी संख्या में युवा उपस्थित थे।

    कार्यक्रम में सांसद ज्ञानेश्वर पाटिल, बागली विधायक मुरली भंवरा, विधायक खातेगांव आशीष शर्मा, विधायक हाटपीपल्या मनोज चौधरी, विधायक सोनकच्छ डॉ. राजेश सोनकर, जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती लीला अटारिया, राय सिंह सेंधव, राजीव खंडेलवाल, बहादुर मुकाती, राजेश यादव, मनीष सोलंकी सहित स्थानीय जनप्रतिनिधि, प्रशासनिक अधिकारीगण, सेवा संकल्प बाइक यात्रीगण, गणमान्य नागरिकों के साथ बड़ी संख्या में आमजन उपस्थित थे।

     

  • बिजनौर के हस्तशिल्प को मिलेगी ग्लोबल पहचान, 10 इकाइयां अंतरराष्ट्रीय मंच पर करेंगी प्रदर्शन

    बिजनौर के हस्तशिल्प को मिलेगी ग्लोबल पहचान, 10 इकाइयां अंतरराष्ट्रीय मंच पर करेंगी प्रदर्शन

    यूपीआईटीएस-2026: 

    वैश्विक मंच पर सजेगी बिजनौर की दस्तकारी, 10 प्रमुख इकाइयों को मिला अंतरराष्ट्रीय फलक

    नगीना की काष्ठ नक्काशी, विदुर टी, चुकंदर का गुड़ और फैशन विग का दिखेगा जलवा

    इंडिया एक्सपो मार्ट में जुटेगा अंतरराष्ट्रीय बाजार;  एमएसएमई के लिए खुलेंगे निर्यात के द्वार

    बिजनौर, 
     'उत्तर प्रदेश इंटरनेशनल ट्रेड शो' (यूपीआईटीएस-2026) के चौथे संस्करण में बिजनौर का विशिष्ट हुनर पूरी भव्यता के साथ अपनी छाप छोड़ेगा। प्रदेश सरकार के इस प्रतिष्ठित आयोजन के लिए बिजनौर जनपद से विभिन्न क्षेत्रों की कुल 10 प्रमुख औद्योगिक इकाइयों, निर्यातकों और हस्तशिल्पियों का चयन किया गया है। नगीना के ऐतिहासिक काष्ठ शिल्प से लेकर स्टोन कला, टेक्सटाइल, आध्यात्मिक पृष्ठभूमि से जुड़ी हर्बल चाय, प्राकृतिक मिठास और आधुनिक हेयर फैशन से जुड़े उत्पाद इस अंतरराष्ट्रीय महाकुंभ में विदेशी व घरेलू खरीदारों के समक्ष प्रदर्शित किए जाएंगे। दुनिया भर के आयातकों और बहुराष्ट्रीय कंपनियों की मौजूदगी वाले इस आयोजन से जिले की कुटीर इकाइयों को सीधे ग्लोबल सप्लाई चेन और बड़े व्यापारिक घरानों से जुड़ने का सीधा अवसर प्राप्त होगा।

    नगीना की विश्वविख्यात काष्ठ कला को मिलेगा अंतरराष्ट्रीय बाजार
    बिजनौर का नगीना क्षेत्र अपनी बारीक काष्ठ नक्काशी और शीशम की लकड़ी पर उकेरी जाने वाली अनुपम कलाकृतियों के लिए दुनिया भर में मशहूर है। इस ट्रेड शो में वुडन हैंडीक्राफ्ट सेक्टर का प्रतिनिधित्व तीन प्रमुख इकाइयां करेंगी। इसमें उद्यमी रोहित कुमार की इकाई 'आर०के० हैंडीक्राफ्ट' अपने उत्कृष्ट वुड क्राफ्ट उत्पादों की रेंज पेश करेगी। वहीं, विक्रम सिंह चौहान की 'जी क्राफ्ट' तथा तारिक अब्दुल्ला की फर्म 'हैंडओवर इंटरनेशनल' द्वारा नक्काशीदार वुडन हैंडीक्राफ्ट उत्पादों की विस्तृत श्रृंखला का प्रदर्शन किया जाएगा। अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप तैयार इन उत्पादों के प्रदर्शन से स्थानीय काष्ठ कारीगरों को विदेशी बायर्स से सीधे दीर्घकालिक थोक अनुबंध मिलने की उम्मीद है।

    स्टोन क्राफ्ट, टेक्सटाइल और हेयर फैशन में भी दिखेगा बिजनौर का कौशल
    शिल्प और परिधान के क्षेत्र में भी जिले की विविधता प्रदर्शनी का मुख्य आकर्षण बनेगी। स्टोन हैंडीक्राफ्ट वर्ग में अंकिता राजपूत की इकाई 'मलिहार' और शमीम अख्तर के नेतृत्व वाली 'नगीना क्राफ्ट डेवलपमेन्ट सोसाईटी' द्वारा पत्थर पर हस्तनिर्मित उत्कृष्ट उत्पादों की नुमाइश लगाई जाएगी। इसके अतिरिक्त, वस्त्र उद्योग के अंतर्गत मो० फैज की फर्म 'ए टू एफ टेक्सटाइल' अपने उच्च गुणवत्ता वाले टेक्सटाइल व हैंडलूम फैब्रिक्स का प्रदर्शन करेगी। वहीं, आधुनिक कॉस्मेटिक व लाइफस्टाइल बाजार की मांग को ध्यान में रखते हुए सलीम अहमद की इकाई 'हेयर फैशन इण्डिया' द्वारा तैयार की गई प्रीमियम हेयर विग की अंतरराष्ट्रीय रेंज पेश की जाएगी।

    विदुर हर्बल टी, बीटरूट गुड़ और पारंपरिक मिठास का सजेगा संसार
    कृषि-आधारित नवाचार और पारंपरिक स्वाद को बढ़ावा देने के उद्देश्य से जिले के तीन प्रमुख खाद्य प्रसंस्करण उद्यमियों को इस मंच पर जगह मिली है। जिले की पौराणिक व ऐतिहासिक विरासत से जुड़ी 'विदुर हर्बल टी' का प्रदर्शन वासुदेव सिंह की इकाई 'वीएस ग्रुप' द्वारा किया जाएगा। इसके साथ ही, प्राकृतिक व पौष्टिक मिठास के नवाचार को प्रस्तुत करते हुए विजेन्द्र कुमार की कंपनी 'क्रिएटिव फार्मिंग प्रोड्यूसर कम्पनी लि०' द्वारा व्हाइट बीटरूट जैगरी (चुकंदर से बना गुड़) और साइलेज प्रदर्शित किया जाएगा। वहीं, स्थानीय मिष्ठान परंपरा को आगे बढ़ाते हुए नवनीत कुमार की फर्म 'चतुर्वेदी फूड प्रा०लि०' द्वारा तैयार बतीसा, सोहनपापड़ी और खस्ता गजक का स्वाद देश-विदेश के आगंतुकों को आकर्षित करेगा।

    सीधी मार्केट लिंकेज से बिजनौर के ग्रामीण व लघु उद्योगों को मिलेगी रफ्तार
    यूपीआईटीएस-2026 जिले के सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) की आर्थिकी को मजबूत करने का एक ठोस जरिया बनेगा। इस आयोजन के जरिए बिजनौर के छोटे शिल्पकारों और उद्यमियों को बिना बिचौलियों के सीधे संस्थागत निवेशकों, कॉर्पोरेट बायर्स और विदेशी व्यापारिक प्रतिनिधिमंडलों के साथ बिजनेस-टू-बिजनेस (B2B) संवाद स्थापित करने का अवसर मिलेगा। इससे न केवल काष्ठ और स्टोन शिल्प से जुड़े पारंपरिक कारीगरों को नियमित काम मिलेगा, बल्कि कृषि-खाद्य प्रसंस्करण और हथकरघा क्षेत्रों में ग्रामीण स्तर पर रोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे।

    वैश्विक फलक पर बिजनौर के हुनर को स्थापित करने का स्वर्णिम अवसर: उपायुक्त उद्योग
    जिला उद्योग प्रोत्साहन तथा उद्यमिता विकास केन्द्र, बिजनौर के उपायुक्त उद्योग अमित कुमार ने कहा कि यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो जनपद के पारंपरिक दस्तकारों, आधुनिक उद्यमियों और खाद्य प्रसंस्करण इकाइयों के लिए अपनी वैश्विक साख स्थापित करने का एक ऐतिहासिक मंच है। उन्होंने बताया कि नगीना का काष्ठ शिल्प हो या जिले की समृद्ध मिष्ठान व हर्बल उत्पाद, बिजनौर की सभी चयनित 10 इकाइयों में अंतरराष्ट्रीय गुणवत्ता मानकों को पूरा करने की पूरी क्षमता है। विभाग का प्राथमिक लक्ष्य इन सभी इकाइयों को बड़े निर्यातकों और अंतरराष्ट्रीय खरीदारों से जोड़कर ठोस व्यापारिक समझौते कराना है।

  • कॉकरोच ड्रोन से जासूसी तक? इजरायल के रोबोटिक कीड़ों पर रिसर्च ने खींचा ध्यान

    कॉकरोच ड्रोन से जासूसी तक? इजरायल के रोबोटिक कीड़ों पर रिसर्च ने खींचा ध्यान

    तेल अवीव
     भविष्य में लड़ी जाने वाली लड़ाइयों में जीत उसी की होगी जो टेक्नोलॉजी का अत्यधिक इस्तेमाल करे। शायद फायटर जेट या भारी भरकम हथियार जंग का रूख ना बदलें और छोटे छोटे हथियार दुश्मन के खेमे में तबाही मचा दे। नये युद्ध की शुरूआत ऐसी छोटी मशीनों से हो सकती है जो देखने में कीड़ों जैसी लगती हैं। इजरायल की बायो-इंस्पायर्ड रोबोटिक्स, माइक्रो-ड्रोन, ऑटोनॉमस सिस्टम और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस में बढ़ती दिलचस्पी एक ऐसे युद्धक्षेत्र की ओर इशारा करती है जहां जानकारी जुटाने का काम सिर्फ ऊपर उड़ने वाले विमानों तक ही सीमित नहीं रहेगा।

    भविष्य के मिलिट्री ऑपरेशन में ऐसी छोटी मशीनें शामिल हो सकती हैं जो तंग जगहों से उड़ सकती हैं, मलबे पर रेंग सकती हैं, सुरंगों में जा सकती हैं और ऐसी जगहों पर काम कर सकती हैं जहां आम मशीनें नहीं पहुंच सकतीं।

    'कॉकरोच ड्रोन' का आइडिया भले ही काल्पनिक लगे लेकिन कॉकरोच जैसे रोबोट पर सैन्य रिसर्च शुरू हो चुका है। ये रिसर्च मिलिट्री रिसर्च के एक बहुत बड़े इकोसिस्टम का हिस्सा है जिसमें इजराइल का रक्षा मंत्रालय, अमेरिकी यूनिवर्सिटीज और रक्षा-तकनीक संस्थान शामिल हैं।

    इजरायल कर रहा है कॉकरोच ड्रोन बनाने की कोशिश
    2009 से अब तक इजरायली रक्षा मंत्रालय के साथ मिलकर कम से कम 30 अमेरिकी विश्वविद्यालयों के साथ कम से कम 70 रिसर्च प्रोजेक्ट्स पर काम शुरू किया गया है। इन प्रोजेक्ट्स में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, ड्रोन झुंड जैसी चीजें शामिल हैं। मिसाइल गाइडेंस, क्वांटम सेंसिंग, ऑटोनॉमस सिस्टम और बायो-इंस्पायर्ड रोबोटिक्स। सबसे दिलचस्प क्षेत्रों में से एक है कीड़ों से प्रेरित रोबोटिक सिस्टम का विकास। कॉकरोच का आकर्षण उसके रूप-रंग में नहीं बल्कि उसकी बायोलॉजी में है। कॉकरोच बहुत तंग जगहों से निकल सकते हैं, ऊबड़-खाबड़ रास्तों पर चल सकते हैं और ऐसे माहौल में भी काम करते रह सकते हैं जो पारंपरिक रोबोटिक सिस्टम के लिए मुश्किल साबित हो सकते हैं।

    इजरायल कर रहा है 'माइक्रो-ड्रोन स्वार्म' पर काम
    यूनिवर्सिटी ऑफ मैरीलैंड के रिसर्चर्स ने इजरायली रक्षा मंत्रालय के एक वैज्ञानिक के साथ मिलकर इंचवर्म यानि एक तरह का कीड़ा से प्रेरित रेंगने वाले रोबोट पर भी काम किया है। इनके इस्तेमाल के कई और तरीके हो सकते हैं जो सिर्फ युद्ध तक सीमित नहीं हैं। ऐसे रोबोट का इस्तेमाल जासूसी, आपदा के समय मदद, खोज और बचाव, सुरंगों की जांच और गिरी हुई इमारतों के निरीक्षण के लिए किया जा सकता है।

    लेकिन शहरी इलाकों में होने वाली लड़ाई में इनकी सैन्य अहमियत बहुत बढ़ जाएगी क्योंकि वहां इमारतें, जमीन के नीचे बने रास्ते, गुफाएं और मलबे ऐसे हालात पैदा करते हैं जिनमें आम गाड़ियां और बड़े ड्रोन ज्यादा काम नहीं आते। इजरायल के लिए ये अहम इसलिए भी होंगे क्योंकि हमास ने गाजा में सुरंगों का जो नेटवर्क तैयार कर रखा है उसे भेदना अत्यंत मुश्किल है।

    इजरायल के कॉकरोच ड्रोन युद्ध का मैदान बदल देंगे?
    यानि असली इनोवेशन ऐसा रोबोट नहीं है जो कॉकरोच जैसा दिखता हो। बल्कि यह युद्ध की एक नई सोच है जिसमें छोटा आकार, ऑटोनॉमी, नेटवर्किंग, कम लागत और संख्या उतनी ही जरूरी हो जाती है जितनी रफ्तार, रेंज और पेलोड। पारंपरिक ड्रोन ने युद्ध का तरीका बदल दिया था इसने सेनाओं को दुश्मन के इलाके के ऊपर सीधे पायलट भेजे बिना निगरानी करने और हमला करने की क्षमता दी है। माइक्रो-ड्रोन इस बदलाव को ऐसी जगहों तक ले जा सकते हैं जहाँ पारंपरिक ड्रोन काम नहीं कर सकते।

        एर्दोगन की वीटो पावर खत्म करने की मांग खारिज, UNSC सुधार पर रूस का बड़ा बयान, भारत को करता है समर्थन

        तुर्की के राष्ट्रपति रेचेप तैयप एर्दोगन ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में स्थायी सदस्यता और वीटो की व्यवस्था खत्म करने की मांग की है। एर्दोगन की इस मांग को रूस से झटका मिला है। क्रेमलिन UNSC में सुधारों पर बड़ा बयान दिया है।