Tag: earthquake

  • पंजाब-चंडीगढ़ में महसूस हुए भूकंप के झटके, अचानक हिली धरती; लोग सुरक्षित स्थानों की ओर भागे

    पंजाब-चंडीगढ़ में महसूस हुए भूकंप के झटके, अचानक हिली धरती; लोग सुरक्षित स्थानों की ओर भागे

    चंडीगढ़
    पंजाब और चंडीगढ़ में शुक्रवार रात अचानक धरती कांपने से लोगों में कुछ देर के लिए दहशत का माहौल बन गया। रात करीब 10 बजकर 4 मिनट पर आए भूकंप के झटके कई इलाकों में महसूस किए गए। झटके महसूस होते ही लोग एहतियात के तौर पर अपने घरों और इमारतों से बाहर निकल आए। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार रिक्टर स्केल पर भूकंप की तीव्रता 4.3 दर्ज की गई है। भूकंप का केंद्र हिमाचल प्रदेश के धर्मशाला के पास बताया गया है। राहत की बात यह रही कि घटना के बाद किसी प्रकार के जान-माल के नुकसान की कोई सूचना सामने नहीं आई।

    भूकंप के झटके महसूस होने के बाद पंजाब और चंडीगढ़ के कई क्षेत्रों में लोग घरों से बाहर निकल आए। रात के समय आए इन झटकों के कारण कुछ लोगों में घबराहट देखी गई। हालांकि झटके ज्यादा देर तक नहीं रहे, लेकिन लोगों ने धरती में कंपन स्पष्ट रूप से महसूस किया। स्थानीय स्तर पर लोगों ने अपने अनुभव साझा किए और कई स्थानों पर लोग कुछ समय तक खुले स्थानों में ही रहे।

    कांगड़ा से पंचकूला तक कांपी धरती

    हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले में में शुक्रवार रात 10 बजकर 4 मिनट पर भूकंप के तेज झटके महसूस किए गए. रिक्टर स्केल पर इसकी तीव्रता 4.3 दर्ज की गई. भूकंप का केंद्र धर्मशाला से करीब 18 किलोमीटर दूर बताया गया है। 

    भूकंप के झटके महसूस होते ही लोग घरों और इमारतों से बाहर निकल आए. कई इलाकों में कुछ सेकंड तक धरती हिलती महसूस हुई, जिससे लोगों में भय और दहशत का माहौल बन गया. देर रात तक लोग खुले स्थानों पर खड़े दिखाई दिए। 

    प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक भूकंप का असर केवल कांगड़ा तक सीमित नहीं रहा. आसपास के कई जिलों और राज्यों में भी झटके महसूस किए गए। 

    धर्मशाला के पास रहा भूकंप का केंद्र
    भूकंप का केंद्र हिमाचल प्रदेश के धर्मशाला क्षेत्र के आसपास दर्ज किया गया है। धर्मशाला और उसके आसपास का इलाका भूकंपीय दृष्टि से संवेदनशील माना जाता है। इसी कारण यहां समय-समय पर हल्के और मध्यम तीव्रता के भूकंप दर्ज होते रहते हैं। इस बार आए झटकों का असर हिमाचल प्रदेश के साथ-साथ पंजाब और चंडीगढ़ तक महसूस किया गया।

    प्रशासनिक और प्रारंभिक रिपोर्टों के अनुसार भूकंप के कारण किसी भी प्रकार के जान-माल के नुकसान की जानकारी नहीं मिली है। न तो किसी बड़े हादसे की सूचना है और न ही किसी संरचनात्मक क्षति की पुष्टि हुई है। अधिकारियों द्वारा स्थिति पर नजर रखी जा रही है और लोगों से अफवाहों पर ध्यान न देने की अपील की गई है।

    दो महीने पहले भी महसूस हुए थे झटके
    करीब दो महीने पहले भी पंजाब, चंडीगढ़ और हिमाचल प्रदेश में भूकंप के झटके महसूस किए गए थे। उस समय भूकंप का केंद्र अफगानिस्तान के हिंदूकुश क्षेत्र में था। रिक्टर स्केल पर उसकी तीव्रता 5.9 दर्ज की गई थी। उस भूकंप का प्रभाव उत्तर भारत के कई हिस्सों तक महसूस किया गया था।

    विशेषज्ञों के अनुसार पृथ्वी की सतह सात प्रमुख और कई छोटी टेक्टोनिक प्लेटों से बनी हुई है। ये प्लेटें लगातार गतिशील रहती हैं और समय-समय पर एक-दूसरे से टकराती या खिसकती हैं। जब प्लेटों के बीच दबाव बढ़ जाता है तो उनमें ऊर्जा जमा होने लगती है। दबाव एक सीमा से अधिक होने पर यह ऊर्जा अचानक बाहर निकलती है, जिससे धरती में कंपन पैदा होता है और भूकंप आता है। यही प्रक्रिया दुनिया के अधिकांश भूकंपों का प्रमुख कारण मानी जाती है।

  • 7.3 तीव्रता का भूकंप आया जापान में, सुनामी का अलर्ट जारी, लोग दहशत में

    7.3 तीव्रता का भूकंप आया जापान में, सुनामी का अलर्ट जारी, लोग दहशत में

    टोक्यो 

     सोमवार को जापान के पूर्वोत्तर तट पर प्रशांत महासागर में 7.4 तीव्रता का शक्तिशाली भूकंप आया। जापान मौसम विज्ञान एजेंसी ने इसकी पुष्टि की है। भूकंप का केंद्र उत्तरी इवाते प्रांत के पास समुद्र में था। भूकंप स्थानीय समयानुसार दोपहर 4:53 बजे आया। इसकी गहराई मात्र 10 किलोमीटर थी, जिससे झटके काफी तेज महसूस किए गए।

    टोक्यो तक महसूस हुए झटके
    भूकंप इतना शक्तिशाली था कि केंद्र से सैकड़ों किलोमीटर दूर टोक्यो में भी ऊंची इमारतें हिल गईं। कई इलाकों में लोगों ने तेज झटके महसूस किए। हालांकि, अभी तक किसी बड़े नुकसान या हताहत की खबर नहीं आई है, लेकिन स्थिति की निगरानी की जा रही है। 

    इसके अलावा, क्योडो के अनुसार, जापान में आए जोरदार भूकंप के बाद टोक्यो-आओमोरी बुलेट ट्रेन लाइन पर परिचालन रोक दिया गया।

    सुनामी की चेतावनी जारी
    भूकंप के बाद जापान मौसम विज्ञान एजेंसी ने सुनामी अलर्ट जारी कर दिया है। इवाते प्रांत और होक्काइडो के कुछ हिस्सों में 3 मीटर (10 फीट) तक ऊंची सुनामी लहरों की चेतावनी दी गई है।

    एजेंसी ने तटीय इलाकों के निवासियों को तुरंत ऊंचे स्थानों पर जाने की सलाह दी है। सुनामी लहरों के आने की उम्मीद जताई जा रही है, इसलिए सतर्कता बरतने का आग्रह किया गया है। जापान के मीडिया NHK के हवाले से रॉयटर्स ने बताया कि जोरदार भूकंपीय गतिविधि के कारण समुद्र तट के पास सुनामी भी आ गई।

    मौसम एजेंसी ने चेतावनी दी कि सुनामी की लहरें उत्तरी तटरेखा तक लगभग तुरंत पहुंच सकती हैं। एजेंसी ने कहा कि तटीय क्षेत्रों और नदी के किनारे वाले इलाकों से तुरंत किसी सुरक्षित जगह, जैसे कि ऊंची जमीन या किसी सुरक्षित इमारत में चले जाएं, और साथ ही यह भी चेताया कि सुनामी की लहरों से नुकसान होने की संभावना है।

    एजेंसी ने आगे कहा, "सुनामी की लहरें बार-बार आने की उम्मीद है। जब तक चेतावनी वापस नहीं ले ली जाती, तब तक सुरक्षित जगह न छोड़ें।"

    सालो पहले जापान में आया था प्रलय
    जापान में अक्सर भूकंप के झटके महसूस किए जाते हैं जो कई बार भयानक तबाही भी मचाते हैं। इसी वजह से यहां सरकार ने सख्त निर्माण नियम लागू किए हैं जिनका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि इमारतें मजबूत झटकों का सामना कर सकें। जापान के जहन में अभी भी 2011 की फुकुशिमा त्रासदी की काली यादें कैद हैं। सालो पहले जापान में 9.0-9.1 तीव्रता का भयानक भूकंप आया था जिसने एक घातक सुनामी को जन्म दिया जिसने फुकुशिमा परमाणु संयंत्र को बर्बाद कर दिया था। सुनामी से 18,500 लोग मारे गए थे या लापता हो गए थे। 

     

  • भूकंप से दहशत: ओडिशा के कोरापुट से बस्तर तक हिलने लगी जमीन, CCTV में कैद घटना

    भूकंप से दहशत: ओडिशा के कोरापुट से बस्तर तक हिलने लगी जमीन, CCTV में कैद घटना

    जगदलपुर.

    छत्तीसगढ़ के जगदलपुर/बस्तर संभाग में बीती रात उस वक्त अफरा-तफरी का माहौल बन गया, जब अचानक भूकंप के झटके महसूस किए गए। जगदलपुर समेत आसपास के कई इलाकों में जमीन हिलने से लोग घबरा गए और एहतियातन घरों से बाहर निकल आए। हालांकि राहत की बात यह रही कि इस घटना में किसी प्रकार की जनहानि या बड़े नुकसान की सूचना नहीं है।

    नैशनल सेंटर फॉर सीस्मोलॉजी के अनुसार, भूकंप रात 11:31 बजे आया। इसकी तीव्रता रिक्टर स्केल पर 4.4 मैग्नीट्यूड दर्ज की गई। भूकंप का केंद्र ओडिशा के कोरापुट क्षेत्र में जमीन से लगभग 5 किलोमीटर नीचे स्थित था।

    कुछ सेकंड की दहशत, फिर सामान्य हुआ माहौल
    प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, झटके कुछ सेकंड तक ही महसूस हुए, लेकिन अचानक जमीन हिलने से लोग घबरा गए। कई लोग तुरंत घरों से बाहर निकल आए और खुले स्थानों पर खड़े हो गए। झटके थमने के बाद स्थिति धीरे-धीरे सामान्य हुई।

    CCTV में कैद हुई घटना
    शहर के कई इलाकों में लगे सीसीटीवी कैमरों में भूकंप के दौरान की हलचल रिकॉर्ड हुई है। वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि झटकों के दौरान पंखे और अन्य सामान हिलते नजर आए, जिससे लोगों में डर का माहौल बन गया।

    कम जोखिम वाले क्षेत्र में भूकंप से बढ़ी चिंता
    बस्तर क्षेत्र को अब तक भूकंपीय दृष्टि से अपेक्षाकृत सुरक्षित और कम संवेदनशील माना जाता रहा है, जहां बड़े या बार-बार भूकंप आने की घटनाएं सामान्यतः दर्ज नहीं होतीं। ऐसे में अचानक झटकों का महसूस होना न केवल आम लोगों के लिए डर और आशंका का कारण बना है, बल्कि विशेषज्ञों और भूविज्ञानियों के लिए भी यह एक गंभीर संकेत के रूप में देखा जा रहा है। इस घटना ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या क्षेत्र की भूगर्भीय संरचना में कोई सूक्ष्म बदलाव हो रहा है, जिसे अब तक नजरअंदाज किया जाता रहा। भूविज्ञानियों का मानना है कि भले ही यह भूकंप तीव्रता में मध्यम था, लेकिन इसका असर और स्थान महत्वपूर्ण है, इसलिए इस तरह की घटनाओं का विस्तृत वैज्ञानिक अध्ययन जरूरी हो जाता है। भविष्य में संभावित जोखिमों का आकलन करने, भूकंपीय गतिविधियों के पैटर्न को समझने और समय रहते आवश्यक सतर्कता बरतने के लिए इस क्षेत्र में लगातार मॉनिटरिंग और रिसर्च की जरूरत महसूस की जा रही है।

    प्रशासन सतर्क, स्थिति पर नजर
    भूकंप के बाद स्थानीय प्रशासन ने स्थिति पर नजर बनाए रखी है। अधिकारियों ने बताया कि किसी भी तरह की आपात स्थिति से निपटने के लिए टीमों को सतर्क रहने के निर्देश दिए गए हैं। प्रशासन और विशेषज्ञों ने लोगों से अपील की है कि भूकंप के दौरान घबराएं नहीं, बल्कि सुरक्षित स्थानों पर जाएं। साथ ही भविष्य में इस तरह की किसी भी घटना के लिए जागरूक और तैयार रहने की सलाह दी गई है।

    भूवैज्ञानिकों के लिए अध्ययन का विषय
    बस्तर जैसे अपेक्षाकृत सुरक्षित माने जाने वाले क्षेत्र में भूकंप के झटके महसूस होना वैज्ञानिकों के लिए अध्ययन का विषय बन गया है। विशेषज्ञ अब इस क्षेत्र की भूगर्भीय गतिविधियों पर और गहन नजर रखेंगे, ताकि भविष्य में संभावित जोखिम का आकलन किया जा सके।

  • 7.4 तीव्रता का भूकंप और सुनामी से इंडोनेशिया में मची तबाही, दर्जनों की मौत

    7.4 तीव्रता का भूकंप और सुनामी से इंडोनेशिया में मची तबाही, दर्जनों की मौत

    जकार्ता

    इंडोनेशिया में भयंकर भूकंप आया है. इंडोनेशिया में भूकंप के बाद एक और खतरा मंडरा रहा है. वह खतरा है सुनामी का. जी हां इंडोनेशिया में जलजले के बाद अब सुनामी ने कहर बरपाना शुरू कर दिया है. इंडोनेशिया के जलक्षेत्र में आज यानी गुरुवार की सुबह जोरदार भूकंप आया. रिक्टर स्केल पर इस भूकंप की तीव्रता 7.4 मापी गई. इसके बाद भूकंप से सुनामी की छोटी लहरें उठीं. इस भूकंप-सुनामी के डेडली कॉम्बिनेशन में एक व्यक्ति की मौत हो गई और घरों एवं इमारतों को नुकसान पहुंचा। 

    दरअसल, यूएसजीएस यानी संयुक्त राज्य अमेरिका के भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण ने बताया कि गुरुवार तड़के पूर्वी इंडोनेशिया के तट से दूर समुद्र में शक्तिशाली भूकंप आया. इसके बाद एक अमेरिकी निगरानी एजेंसी ने भूकंप के केंद्र से 1,000 किलोमीटर के दायरे में सुनामी की संभावना को लेकर चेतावनी जारी की. अमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण के अनुसार भूकंप की तीव्रता 7.4 थी और इसका केंद्र मोलूका सागर में 35 किलोमीटर की गहराई पर था. भूकंप के केंद्र से 1,000 किलोमीटर के दायरे में खतरनाक सुनामी लहरें उठ सकती हैं, खासकर इंडोनेशिया, फिलीपींस और मलेशिया के तटीय इलाकों में. यूएसजीएस ने भी भूकंप के केंद्र से उतनी ही दूरी पर स्थित क्षेत्रों में खतरनाक सुनामी लहरों की संभावना के संबंध में चेतावनी दी। 

    इंडोनेशिया में भूंकप
    इंडोनेशिया की मौसम विज्ञान, जलवायु विज्ञान एवं भूभौतिकी एजेंसी के अनुसार, भूकंप के आधे घंटे से भी कम समय में कई निगरानी केंद्रों में सुनामी की लहरें दर्ज की गईं. इनमें बिटुंग में आंठ इंच और पश्चिम हलमाहेरा में एक फुट ऊंची लहरें शामिल हैं. होनोलुलु स्थित प्रशांत सुनामी चेतावनी केंद्र ने कहा कि दक्षिणी फिलीपीन के दावाओ में दो इंच ऊंची लहरें उठीं लेकिन दूरदराज के क्षेत्रों के लिए सुनामी का कोई खतरा नहीं है। 

    इंडोनेशिया की आपदा प्रबंधन एजेंसी के अनुसार उत्तरी सुलावेसी प्रांत के तटीय शहर बिटुंग और आसपास के इलाकों के साथ-साथ पड़ोसी प्रांत उत्तर मलुकु के टेरनेट शहर में 10 से 20 सेकंड तक भूकंप के तेज झटके महसूस किए गए। 

    भूकंप-सुनामी से कितनी तबाही
    प्रारंभिक आकलन से पता चला है कि टेरनेट के कुछ हिस्सों में थोड़ा नुकसान हुआ है. स्थानीय आपदा प्रबंधन अधिकारियों ने बताया कि बटांग दुआ द्वीप जिले में एक गिरजाघर प्रभावित हुआ है और दक्षिण टेरनेट में दो घर क्षतिग्रस्त हुए हैं. बिटुंग में नुकसान का आकलन अभी जारी है. इंडोनेशिया की खोज और बचाव एजेंसी ने बताया कि उत्तरी सुलावेसी के मिनाहासा जिले में 70 वर्षीय महिला की मौत हो गई और एक अन्य निवासी घायल हो गया। 

    तटीय इलाके में खतरा बरकरार
    आपदा प्रबंधन एजेंसी के प्रवक्ता अब्दुल मुहरी ने एक बयान में कहा, ‘‘इस समय सावधानी बरतने की जरूरत है, खासकर तटीय इलाकों में रहने वाले लोगों को. उन्होंने लोगों से आग्रह किया कि जब तक अधिकारी अनुमति न दें तब तक वे जलक्षेत्र में नहीं जाएं. भूकंप के बाद समुद्र तट से दूर कम से कम दो झटके और महसूस किए गए. अधिकारियों ने बताया कि दोनों झटकों से सुनामी का खतरा नहीं है। 

    क्यों खतरा मंडरा रहा
    इंडोनेशिया दुनिया के सबसे अधिक भूकंपीय रूप से सक्रिय क्षेत्रों में से एक है, क्योंकि यह ‘प्रशांत अग्नि वलय’ पर स्थित है. यह ज्वालामुखियों और भ्रंश रेखाओं का एक विशाल 40,000 किलोमीटर लंबा चाप है, जो टेक्टोनिक प्लेटों की आपसी हलचल से बना है. प्रशांत महासागर को घेरने वाली यह घोड़े की नाल के आकार की बेल्ट दुनिया के लगभग 90 प्रतिशत भूकंपों का कारण बनती है और यह अपनी लगातार होने वाली भूकंपीय और ज्वालामुखी गतिविधियों के लिए जानी जाती है। 

    यहां पिछले महीने में भी आया था भूकंप
    यूएसजीएस के अनुसार, अभी पिछले महीने ही 3 मार्च को सुमात्रा के तट से दूर समुद्र में 6.1 तीव्रता का भूकंप आया था. इससे वहां के लोग सहम गए थे, लेकिन कोई बड़ा नुकसान नहीं हुआ था. वह भूकंप सुमात्रा के उत्तर-पूर्वी सिरे के पास समुद्र में उत्पन्न हुआ था, जिसके कारण उस क्षेत्र में, जहां अक्सर भूकंप के झटके आते रहते हैं, कई लोग घबराकर अपने घरों से बाहर भाग निकले थे. इसी बीच, इंडोनेशिया की मौसम विज्ञान, जलवायु विज्ञान और भूभौतिकी एजेंसी ने इस भूकंप की तीव्रता 6.4 दर्ज की और बताया कि यह 13 किलोमीटर की गहराई पर आया था।