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  • AI का बढ़ता डर आखिर क्यों कंपनियों के बाहर प्रदर्शन कर रहे आम लोग

    AI का बढ़ता डर आखिर क्यों कंपनियों के बाहर प्रदर्शन कर रहे आम लोग

    जिन आर्टिफ‍िशियल इंटेल‍िजेंस तकनीकों (AI) को जल्‍द से जल्‍द अपनाने के लिए पूरी दुनिया बेताब है। कंपनियां नए-नए मॉडल लॉन्‍च कर रही हैं। उन्‍हीं तकनीकों के खिलाफ दुन‍िया के सबसे शक्‍त‍िशाली देश की जनता सड़कों पर है। वह ओपनएआई से लेकर एंथ्रोपिक तक के दफ्तरों के बाहर जुटकर अपनी आवाज उठा रही है। डर है कि एआई की अनैत‍िक रेस इंसानी वजूद काे खत्‍म कर सकती है। कई और भी चिंताएं हैं, जिन्‍हें लेकर अमेरिका के सैन फ्रांस‍िस्‍को में भारी विरोध-प्रदर्शन देखे गए हैं। प्रदर्शनकारी मांग कर रहे हैं कि कंपनियां एआई के जोखिमों को कम करने के लिए जरूरी कदम उठाएं।

    Stop The AI Race मुह‍िम
    अमेरिका का सैन फ्रांसिस्‍को टेक्‍नॉलजी का बड़ा गढ़ है। हाल ही में वहां एआई के खिलाफ कुछ ग्रुप्‍स ने बड़ा विरोध-प्रदर्शन किया। रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, प्रदर्शनकारी एआई के जोखिमों को कम करने के लिए फ्रंट‍ियर एआई के विकास को रोकने की मांग कर रहे हैं। Stop the AI Race मुह‍िम के तहत 200 से ज्‍यादा प्रदर्शनकारियों ने अपना मार्च न‍िकाला जो दिग्‍गज कंपनी एंथ्रोपिक के मुख्‍यालय से शुरू होकर ओपनएआई के मुख्‍यालय पर खत्‍म हुआ।

    क्‍या होता है फ्रं‍ट‍ियर AI
    एआई के विकास में प्रमुख कंपनियां अब फ्रं‍ट‍ियर एआई को डेवलप करने में जुट गई है। यह सामान्‍य से बहुत अधिक एडवांस है और कहा जाता है कि इंसान से भी बेहतर सोच सकता है। फ्रं‍टि‍यर एआई कोडिंग से लेकर कव‍िताएं लिख सकता है। वह इंसान की भावनाओं को समझकर जवाब दे सकता है। इसे ऐसे तैयार किया जा रहा है कि जरूरत पड़ने पर उन कामों को भी कर पाए, जिसके लिए उसे ट्रेनिंग ही नहीं दी गई है।

    AI के विरोध में क्‍या हैं लोगों की मांगें
        प्रदर्शनकार‍ियों ने फ्रं‍टि‍यर एआई के विकास काे रोकने की मांग की है।
        प्रमुख एआई कंपनियों के सीईओ से इस बारे में उनकी प्रतिबद्धता मांगी है।
        मांग है कि हरेक एआई लैब को इसके लिए सहमत होना होगा।
        लोगों का आरोप है कि एआई लैब्‍स आने सुरक्षा वादों से मुकर रही हैं।

    किस बात की चिंता
    लोगों को चिंता है कि इस तरह विकास की गत‍ि को तेज करके इंसान के विलुप्‍त होने का खतरा बढ़ रहा है। याद रहे कि एंथ्रोपिक पिछले महीने अपने उस कमिटमेंट से पीछे हट गई थी जिसमें उसने एआई के खतरनाक होने पर इसके विकास को रोकने की बात कही थी। इस पूरे मामले पर बड़ी कंपनियों ने चुप्‍पी साधी हुई है। वह कोई भी बयान देने से बच रही हैं।

  • AI का खतरनाक कारनामा! जिसे देखकर वैज्ञानिक भी रह गए दंग

    AI का खतरनाक कारनामा! जिसे देखकर वैज्ञानिक भी रह गए दंग

    नई दिल्ली

    एआई को यह सोचकर विकसित किया गया था कि यह वह काम करेगा जो इंसान उसे कहेंगे। हालांकि, वैज्ञानिकों ने इस बात से पहले ही आगाह किया था कि यदि एआई में खुद से सोचने, समझने और फैसले लेने की क्षमता विकसित हो गई तो वह इंसानों की बात नहीं मानेगा। अब वैज्ञानिकों की ये बाद सच होती दिखाई दे रही है। हाल ही में एक नई रिसर्च में ऐसा मामला सामने आया है, जिसने एआई की क्षमता और नियंत्रण को लेकर नए सवाल खड़े कर दिए हैं।  

    दरअसल, एक एआई एजेंट की ट्रेनिंग के दौरान रिसर्चर्स ने देखा कि सिस्टम ने खुद ही क्रिप्टोकरेंसी माइनिंग शुरू करने की कोशिश की। हैरानी की बात यह थी कि किसी भी रिसर्चर ने उसे ऐसा करने के लिए निर्देश नहीं दिया था।

    अलीबाबा से जुड़ी रिसर्च टीम कर रही थी प्रयोग
    यह घटना उस समय सामने आई जब अलीबाबा से जुड़ी एक रिसर्च टीम ROME नाम के एक एक्सपेरिमेंटल एआई एजेंट पर काम कर रही थी। ट्रेनिंग के दौरान सुरक्षा सिस्टम अचानक सक्रिय हो गए, जिसके बाद टीम ने सिस्टम की गतिविधियों की जांच की।

    जांच में पता चला कि एआई एजेंट क्रिप्टोकरेंसी माइनिंग से जुड़ी प्रक्रिया शुरू करने की कोशिश कर रहा था। यह गतिविधि असामान्य इसलिए भी थी क्योंकि सिस्टम को एक सीमित और नियंत्रित वातावरण में चलाया जा रहा था, जिसे “सैंडबॉक्स” कहा जाता है। रिसर्च पेपर में वैज्ञानिकों ने इस व्यवहार को “अनपेक्षित” बताया और कहा कि यह गतिविधि बिना किसी स्पष्ट निर्देश के शुरू हुई।

    बिना निर्देश के बनाया रिवर्स SSH टनल
    सिर्फ क्रिप्टो माइनिंग ही नहीं, एआई एजेंट ने एक और तकनीकी कदम उठाया जिसने रिसर्चर्स की चिंता बढ़ा दी। सिस्टम ने खुद ही रिवर्स SSH टनल बना लिया। यह एक ऐसा तकनीकी तरीका है जिसके जरिए सुरक्षित या सीमित नेटवर्क के अंदर मौजूद मशीन बाहरी कंप्यूटर से कनेक्ट हो सकती है। कई बार यह कनेक्शन एक छिपे हुए रास्ते की तरह काम करता है। रिपोर्ट में साफ कहा गया है कि न तो माइनिंग और न ही टनल बनाने के लिए एआई को कोई प्रॉम्प्ट या इंस्ट्रक्शन दिया गया था।

    क्यों बढ़ी चिंता?
    क्रिप्टोकरेंसी माइनिंग आमतौर पर कंप्यूटर की प्रोसेसिंग पावर का इस्तेमाल करके डिजिटल करेंसी बनाने की प्रक्रिया होती है। इसे आम तौर पर सिस्टम एडमिनिस्ट्रेटर जानबूझकर सेट करते हैं। लेकिन इस मामले में एआई एजेंट ने ट्रेनिंग के दौरान खुद ही यह प्रक्रिया शुरू करने की कोशिश की। इससे यह सवाल उठने लगा कि क्या एडवांस एआई सिस्टम भविष्य में ज्यादा स्वायत्त हो सकते हैं, खासकर तब जब उन्हें ज्यादा टूल्स और कंप्यूटिंग संसाधनों तक पहुंच मिलती है।

    पहले भी सामने आ चुके हैं ऐसे मामले
    यह घटना ऐसे समय पर सामने आई है जब एआई एजेंट तेजी से अधिक सक्षम बनते जा रहे हैं। कई सिस्टम अब कोड लिख सकते हैं, जटिल वर्कफ्लो ऑटोमेट कर सकते हैं और अलग-अलग ऑनलाइन टूल्स के साथ काम कर सकते हैं। एक्सपर्ट्स का मानना है कि जैसे-जैसे एआई की क्षमताएं बढ़ेंगी, टेस्टिंग के दौरान अनपेक्षित व्यवहार सामने आने की संभावना भी बढ़ सकती है।

    ऐसे कुछ उदाहरण पहले भी सामने आ चुके हैं। Moltbook एक्सपेरिमेंट नाम के एक प्रयोग में एआई एजेंट्स को सोशल नेटवर्क जैसी डिजिटल दुनिया में रखा गया था, जहां वे आपस में बातचीत करते थे। उस दौरान भी एजेंट्स ने क्रिप्टोकरेंसी का जिक्र किया था।

    इसी तरह एआई इंटीग्रेशन प्लेटफॉर्म Anon के इंजीनियरिंग हेड डैन बोतेरो ने बताया था कि उनके बनाए OpenClaw एजेंट ने बिना कहे ही इंटरनेट पर नौकरी खोजने की कोशिश शुरू कर दी थी।

    एआई के व्यवहार को लेकर बढ़ रही बहस
    मई 2025 में एक और विवाद तब सामने आया जब Anthropic के Claude मॉडल पर काम कर रहे रिसर्चर्स ने दावा किया कि Claude 4 Opus सिस्टम में अपने इरादों को छिपाने और खुद को सक्रिय बनाए रखने की क्षमता दिखाई दी थी।

    ROME प्रयोग में सामने आया नया मामला इस बात की याद दिलाता है कि जैसे-जैसे एआई सिस्टम अधिक शक्तिशाली होते जाएंगे, उनकी निगरानी और नियंत्रण भी उतना ही जरूरी होगा।

  • अब AI देखेगा लीगल मैनेजमेंट सिस्टम का उल्लंघन, जिम्मेदारों पर कड़ी कार्रवाई तय

    अब AI देखेगा लीगल मैनेजमेंट सिस्टम का उल्लंघन, जिम्मेदारों पर कड़ी कार्रवाई तय

    भोपाल 
    जिले में विभिन्न मामलों को लेकर चल रहे कोर्ट प्रकरण का प्रबंधन अब लीगल कोर्ट केस मैनेजमेंट सिस्टम से होगा। प्रशासन एआइ आधारित इस सॉफ्टवेयर को अपने यहां लागू करने जा रहा है। जिले के जो भी विभाग अपने यहां के कोर्ट प्रकरणों को दबाकर या लटकाकर बैठे हैं, वे सब जाहिर होंगे। अब ऐसे प्रकरणों को निपटाना होगा। ऐसा नहीं करने वाले सामने आएंगे और उन पर कार्रवाई की रूपरेखा भी बनेगी। कलेक्ट्रेट से जुड़े हुए ही 150 के करीब कोर्ट केस अभी चल रहे हैं। जिले के सभी विभागों को मिलाने पर संख्या इससे चार गुना तक बनेगी।

    ऐसे समझें सिस्टम

    यह एक इंटीग्रेटेड केस मैनेजमेंट सिस्टम के रूप में काम करेगा, ताकि विभाग के सभी संबंधित अधिकारी एक ही प्लेटफॉर्म पर जानकारी देख सकें। कानूनी मामलों की प्रगति और पेंडेंसी पर विस्तृत रिपोर्ट तैयार करने का काम करेगा। यह सुनिश्चित करेगा कि कानूनी डेटा सुरक्षित रहे और केवल अधिकृत व्यक्तियों की ही उस तक पहुंच हो।

    ऐसे करेगा काम

    -केस ट्रैकिंग: यह विभिन्न न्यायालयों में चल रहे सरकारी मामलों की वर्तमान स्थिति को ट्रैक करेगा।

    – डाटा माइग्रेशन: पुराने कानूनी मामलों के डेटा को सिस्टम में सुरक्षित रूप से स्थानांतरित करने का काम करेगा।

    दस्तावेजों का प्रबंधन: यह कानूनी दस्तावेजों, आदेशों और याचिकाओं को डिजिटल रूप में सहेज कर रखने में मदद करेगा।

    – अलर्ट और रिमाइंडर: आगामी पेशी और महत्वपूर्ण समय-सीमाओं के लिए रिमाइंडर देगा।
    ये होगा लाभ

    इसका सबसे बड़ा लाभ मेट्रो, नए आइएसबीटी समेत ब्रिज, सड़क और सार्वजनिक हित के संस्थानों को लेकर चल रहे जमीन संबंधी विवाद में होगा।  सिस्टम में प्रकरण से जुड़ा हर अपडेट और डिटेल सबमिट होगा, जिससे केस निपटाने में तेजी आएगी। प्रकरण पर निर्णय होने से जिले के ग्रामीण से लेकर शहरी प्रोजेक्ट और आमजन से जुड़े काम भी तेजी से हो पाएंगे। पेंशन प्रकरण से जुड़े केसों में भी न्याय होगा।

    नई तकनीक से जल्द निपटेंगे कोर्ट केस

    कोर्ट केस को शीघ्रता से निपटाने में नई तकनीक का इस्तेमाल किया जाएगा। इससे प्रकरण निपटान प्रक्रिया बेहतर व तेज होगी।

    – कौशलेंद्र विक्रम सिंह, कलेक्टर
    600 केस की पेंडेंसी सुनकर कलेक्टर नाराज

    भोपाल. जिला समिति की बैठक में  600 पेंडिंग प्रकरणों पर कलेक्टर नाराज हुए। कलेक्ट्रेट सभागार में हुई बैठक में पशुपालन, मत्स्य, स्व-सहायता समूह, किसान क्रेडिट कार्ड, प्रधानमंत्री स्वनिधि योजना सहित विभिन्न जन कल्याणकारी योजनाओं के प्रकरण जो बैकों में भेजे गए हैं, उनके वितरण और लक्ष्य की जानकारी ली गई। कलेक्टर ने कहा, केन्द्र व प्रदेश सरकार की योजनाओं के प्रकरण कई बैकों में लक्ष्य के अनुरूप निराकरण नहीं किए गए हैं। यह खेदजनक है। जिन बैंकर्स के प्रकरण स्वीकृत हो गए, उनका वितरण एक सप्ताह देने का कहा। लंबित प्रकरणों का 15 दिन में निराकरण का लक्ष्य दिया।

  • AI की वैश्विक दौड़ में भारत आगे: पीएम मोदी के साथ ‘Sarvam Kaze’ की एंट्री

    AI की वैश्विक दौड़ में भारत आगे: पीएम मोदी के साथ ‘Sarvam Kaze’ की एंट्री

    नई दिल्ली

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को इंडिया AI इम्पैक्ट समिट 2026 में एक शानदार चश्मा पहने हुए देखा गया। यह साधारण नहीं बल्कि AI डिवाइस है। इस वियरेबल का नाम sarvam kaze है। एआई ग्लासेस को देश के AI स्टार्टअप सर्वम AI ने बनाया है। एआई समिट 2026 में जियो ने भी अपने एआई ग्लासेस पेश किए हैं। ऐसे में पीएम मोदी द्वारा स्वदेशी एआई ग्लासेस को पहनना कोई आम बात नहीं है। ये एआई ग्लासेस कई दमदार फीचर्स के साथ लाए जाएंगे।

    पीएम मोदी ने टेस्ट किए एआई ग्लासेस
    16 फरवरी से शुरू हुए इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026 में Sarvam Kaze पेश किए गए हैं। यह एक AI वियरेबल है। इसकी मदद से अन्य स्मार्ट ग्लासेस की तरह ही यूजर रियल समय में देखी जाने वाली चीजों के बारे में सुन सकते हैं। यह एआई ग्लासेस आपकी बातों का जवाब देता है और इसके जरिए आप कुछ भी कैप्चर कर सकते हैं। भारत मंडपम में चल रहे इंडिया AI इम्पैक्ट समिट 2026 में वॉक फेंक के दौरान पीएम मोदी ने यह चश्मा पहना था। सर्वम AI के को-फाउंडर प्रत्यूष कुमार द्वारा शेयर की गई फोटोज में प्रधानमंत्री एग्जीबिशन फ्लोर पर इसके रियल-टाइम रिस्पॉन्स को टेस्ट करते हुए दिखाई दे रहे हैं।

    चैट फीचर लाने की योजना में कंपनी
    कंपनी इस हफ्ते एक चैट फीचर भी लॉन्च करने की योजना बना रही है। इस डिवाइस को आवाज और विजुअल इंटरैक्शन के जरिए असल दुनिया में इंटेलिजेंस लाने के लिए डिजाइन किया गया है। कंपनी के मुताबिक, यूजर्स सर्वम प्लेटफॉर्म पर जाकर कस्टम एक्सपीरियंस भी पा सकते हैं। इस एआई डिवाइस को भारत में डिजाइन और बनाया गया है। कंपनी इसे पूरी तरह से देसी AI प्रोडक्ट के तौर पर पेश कर रही है। कंपनी के अनुसार इस डिवाइस को मई में भारतीय बाजार में लॉन्च किया जा सकता है।

    बिना इंटरनेट वाला एआई
    भारतीय स्टार्टअप Sarvam AI ने हाल ही में Sarvam Edge लॉन्च किया है। इसकी खासियत है कि यह बिना इंटरनेट के चल रहा है। इसकी मदद से आप अपने फोन या लैपटॉप पर बिना इंटरनेट के भी AI का इस्तेमाल कर पाएंगे। ब्लॉग पोस्ट के अनुसार, Sarvam AI ने बताया है कि यह एक ऐसा ऑन डिवाइस AI प्लेटफॉर्म होगा, जिसे चलाने के लिए ना तो क्लाउड सर्वर की जरूरत है और ना ही इंटरनेट कनेक्शन की।

    Sarvam Edge उन लोगों तक भी AI को पहुंचाएंगा, जो महंगे इंटरनेट प्लान का इस्तेमाल नहीं कर पाते हैं और जिनके क्षेत्र में नेटवर्क नहीं आते हैं। Sarvam Edge की खासियत होगी कि यह आपके डिवाइस की प्रोसेसिंग पावर का इस्तेमाल करेगा और इंटरनेट से जुड़ा ना होने की वजह से 100% सुरक्षित भी रहेगा। इससे देखकर लग रहा है कि अब भारतीय कंपनियों ने भी एआई के क्षेत्र में देश को टॉप पर पहुंचाने के लिए अपनी कमर कस ली है।

  • फेस स्वैप की तैयारी में इंस्टाग्राम! AI फीचर से फोटो-वीडियो होंगे और भी मजेदार

    फेस स्वैप की तैयारी में इंस्टाग्राम! AI फीचर से फोटो-वीडियो होंगे और भी मजेदार

    आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस के बढ़ते चलन को देखते हुए मेटा के स्वामित्व वाला इंस्टाग्राम एक ऐसा फीचर लाने पर काम कर रहा है, जिसकी मदद से एआई से बनी फोटो और वीडियो में यूजर डिजिटली अपना चहरा जोड़ सकेंगे। कंपनी जल्द ही एक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस फीचर ला सकती है। इंस्टाग्राम का यह फीचर OpenAI के Sora प्लेटफॉर्म को टक्कर दे सकता है। एक टिप्सटर Alessandro Paluzzi ने अपने एक्स अकाउंट से ट्वीट करके इस अपकमिंग टूल के बारे में बताया है। उनके अनुसार, इंस्टाग्राम में आने वाला यह टूल, सिंपल इमेज फिल्टर के बजाय पर्सनलाइज्ड “लाइकनेस” बनाने पर फोकस करता है। अभी तक इंस्टाग्राम ने इस फीचर के लॉन्चिंग को लेकर कोई जानकारी नहीं दी है। हालांकि, टिप्सटर द्वारा शेयर किए गए स्क्रीनशॉट से पता चलता है कि इस सुविधा पर काफी पहले से काम चल रहा है।

    फेस स्वैप टूल लाने की तैयारी
    Alessandro Paluzzi ने X पर इंस्टाग्राम के अपकमिंग फीचर की डिलेट शेयर की है। उन्होंने दावा किया है कि इंस्टाग्राम AI-पावर्ड फेस स्वैप सिस्टम पर काम कर रहा है। इसे फेस स्वैप टूल भी कहा जाता है। हालांकि, इंस्टाग्राम में इसे “मेरी लाइकनेस बनाएं” नाम से लाया जा सकता है।
    लीक हुई इमेज के अनुसार, यूजर्स AI विजुअल्स या छोटी क्लिप बना सकते हैं। एआई से बनाई गई इन क्लिप में उनका चहरा भी जोड़ सकते हैं। हालांकि, अभी यह साफ नहीं हुआ है कि इंस्टाग्राम यह लाइकनेस डेटा कैसे इकट्ठा करेगा। उम्मीद है कि सिस्टम मौजूदा पोस्ट और हाइलाइट्स को एनालाइज करेगा या फिर ऑप्शन को एक्टिवेट करने के लिए यूजर्स को एक डेडिकेटेड सेल्फी अपलोड करने के लिए कहा जा सकता है।

    सेटअप हो जाने के बाद यूजर अलग-अलग सिनेरियो में खुद को दिखाते हुए कस्टमाइज्ड इमेज या वीडियो बना सकते हैं। इसके लिए उन्हें टेक्स्ट प्रॉम्प्ट डालना होगा।

    शेयरिंग और क्रिएटिव को मिलेगा बढ़ावा
    इस फीचर की मदद से एआई कंटेंट को और भी आकर्षक बनाया जा सकेगा। यूजर डायरेक्ट मैसेज के जरिए प्राइवेटली क्रिएशन भेज सकते हैं या उन्हें स्टोरीज और फीड पर पब्लिकली पोस्ट भी कर सकते हैं। हालांकि, ऐसी किसी भी डिटेल के लिए कोई कन्फर्मेशन नहीं है।

    अगर इसे लागू किया जाता है, तो यह टूल मेटा के अपने ऐप्स में जेनरेटिव AI में बड़े पैमाने पर बढ़ावा देने के साथ अलाइन होगा। इससे यूजर्स को ज्यादा इंटरैक्टिव और पर्सनलाइज्ड कंटेंट क्रिएशन टूल मिलेंगे।

    लेनी होगी परमिशन
    रिपोर्ट की मानें तो यूजर्स डायरेक्ट मैसेज से इनवाइट या रिक्वेस्ट भेज पाएंगे। AI से बने मीडिया में उनके अपीयरेंस का इस्तेमाल करने से पहले दूसरे यूजर को मंजूरी देनी होगी। यह परमिशन बेस्ड तरीका गलत इस्तेमाल को रोकने और पर्सनल आइडेंटिटी को प्रोटेक्ट करने के लिए डिजाइन किया गया है। अभी इस अपकमिंग फीचर की इतनी जानकारी ही सामने आई है। आगे आने वाले समय कंपनी इसके बारे में अन्य डिटेल शेयर कर सकती है।