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  • AI कंपनियों के निवेशकों के लिए खतरे की घंटी! अरबपति रे डेलियो ने बताया क्यों फूट सकता है AI बबल

    AI कंपनियों के निवेशकों के लिए खतरे की घंटी! अरबपति रे डेलियो ने बताया क्यों फूट सकता है AI बबल

    मुंबई 

    दुनियाभर के शेयर बाजारों में भारी उथल-पुथल जारी है. अमेरिका हो, जापान हो, कोरिया हो या फिर भारत हर ओर तबाही मची हुई है और शेयर मार्केट में पैसे लगाने वालों को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है. गुरुवार को भी सेंसेक्स-निफ्टी क्रैश हो गए और निवेशकों के करीब 10 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा स्वाहा हो गए। 

    शेयर बाजारों में आए इस भूचाल के बीच विदेशी अरबपति रे डेलियो ने एक बड़ी चेतावनी दी है, जो आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI से जुड़ी हुई है. उन्होंने कहा है कि 'एआई का क्लासिक बुलबुला' फूटने की कगार पर पहुंच गया है. इसके पीछे उन्होंने तमाम कारण भी बताए हैं। 

    US में ब्याज दरें बढ़ने का असर
    अरबपति रे डेलियो के मुताबिक, एआई का बुलबुला फूटने के पीछे बड़े कारणों में एक अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ओर से ब्याज दरों में किया जाने वाला इजाफा है. अब निवेशकों को अपनी संपत्ति को नकदी में बदलने की आवश्यकता महसूस होने लगी है. उन्होंने कहा कि भारतीय निवेशक भी विदेशों में हो रहे घटनाक्रमों पर पैनी नजर रखेंगे, क्योंकि भारतीय शेयर बाजार 2025 के बाद से सबसे कमजोर प्रदर्शन करने वाले प्रमुख बाजारों में से एक है। 

    ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक, सिंगापुर में फोर्ब्स ग्लोबल सीईओ कॉन्फ्रेंस में बोलते हुए डेलियो ने कहा कि AI को वित्त पोषित करने के लिए भारी मात्रा में कर्ज लिया जा रहा है और ब्याज दरों में लगातार बढ़ोतरी के साथ अब यह बुलबुला फूटना शुरू हो सकता है. ब्रिजवॉटर के फाउंडर ने कहा, 'हम चक्र के उस चरण में हैं, जो इससे पहले है लेकिन इस संकट के करीब पहुंच रहा है। 

    डेलियो ने गिनाए ये आंकड़े
    अरबपति ने एआई की बुलबुला फूटने की चेतावनी देते हुए कुछ आंकड़े सामने रखे. उन्होंने कहा कि आंकड़ों से पता चला कि 10-वर्षीय यील्ड बढ़कर 5.368 प्रतिशत हो गई, जो 2002 के बाद से नहीं देखी गई थी. इस प्रवृत्ति के पीछे कई कारकों का मजबूत संयोजन है, जिनमें सरकारी कर्ज का बढ़ता बोझ, व्यापार का विखंडन, युद्ध से प्रेरित महंगाई का दबाव और AI के बुनियादी ढांचे से संबंधित पर्याप्त पूंजी जरूरतें. ये सभी कारक मिलकर ग्लोबल सेविंग की उपलब्धता को कम कर रहे हैं और संतुलन वास्तविक ब्याज दरों को बढ़ा रहे हैं। 

    रिपोर्ट में घरेलू ब्रोकरेज फर्म के हवाले से कहा गया है कि एआई-संचालित प्रोडक्शन लाभों से मुद्रास्फीति तेजी से बेअसर हो जाएगी, यह आशावादी धारणा अनिश्चित बनी हुई है. कई एआई-संबंधित व्यवसायों के बीच सीडीएस स्प्रेड बढ़ रहा है. अगर लाभ तत्काल के बजाय बाद में मिलने वाले साबित होते हैं, तो एआई पूंजीगत व्यय के क्राउडिंग-आउट प्रभाव कम से कम 2028 तक बने रह सकते हैं, जिससे महंगाई और वास्तविक ब्याज दरें वर्तमान अनुमान से अधिक रहेंगी। 

    भारतीय शेयर का गुरुवार को क्रैश 
    एआई को लेकर जहां विदेशी अरबपति शेयर बाजारों के लिए अलर्ट जारी कर रहे हैं, तो वहीं भारतीय शेयर बाजार पर नजर डालें, तो गुरुवार को सेंसेक्स-निफ्टी शुरुआत से अंत तक क्रैश होते रहे. बाजार बंद होने पर BSE Sensex 1045 अंक गिरकर 71,593 के लेवल पर बंद हुआ, तो वहीं NSE Nifty 371 अंक की गिरावट लेकर 22,231 पर क्लोज हुआ। 

  • IIIT रायपुर में Agentic AI रोडशो का आयोजन, नई तकनीक के अवसरों और उपयोग पर हुई चर्चा

    IIIT रायपुर में Agentic AI रोडशो का आयोजन, नई तकनीक के अवसरों और उपयोग पर हुई चर्चा

    रायपुर. ट्रिपल आईटी नया रायपुर में आयोजित IEEE एजेंटिक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस रोडश का आज 6 अक्टूबर को अंतिम दिन है. तीन दिवसीय आयोजन में विशेषज्ञ, शोधकर्ता, शिक्षाविद और विद्यार्थी एजेंटिक AI की संभावनाओं, अनुप्रयोगों और चुनौतियों पर चर्चा कर रहे हैं.

    अंतिम दिन एआई सिस्टम, एथिकल और जिम्मेदार AI, मानव-एआई सहयोग और व्यावहारिक उपयोग पर विशेष फोकस रहेगा. कार्यक्रम में विशेषज्ञ व्याख्यान, तकनीकी चर्चा और प्रदर्शन के साथ आइडियाथॉन भी आयोजित किया जा रहा है. आयोजन IEEE कंप्यूटर सोसाइटी स्पेशल प्रोजेक्ट, ट्रिपल आईटी और AI सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के सहयोग से हो रहा है.

    विकसित होगा एआई इकोसिस्टम
    रायगढ़ के युवाओं को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) की आधुनिक तकनीक से जोड़ने, इसके व्यावहारिक उपयोग को बढ़ावा देने और नवाचार के नए अवसर उपलब्ध कराने के लिए जिले में एआई एक्सीलेंस सेंटर विकसित किया जाएगा। वित्त मंत्री एवं रायगढ़ विधायक  ओ.पी. चौधरी ने आज संत पूज्य  प्रियदर्शी राम जी ऑडिटोरियम, पंजरी प्लांट में आयोजित एक दिवसीय एआई कार्यशाला के शुभारंभ अवसर पर यह घोषणा की। ‘रायगढ़ की एआई उड़ान-जागरूकता से नवाचार तक’ थीम पर आयोजित कार्यशाला में 1500 से अधिक प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया। वित्त मंत्री  चौधरी ने कहा कि आईआईआईटी नया रायपुर के सहयोग से रायगढ़ में एआई से जुड़ी गतिविधियों को बढ़ावा देने की दिशा में कार्य किया जा रहा है। प्रस्तावित एआई एक्सीलेंस सेंटर में एआई से संबंधित गतिविधियों का चरणबद्ध विस्तार किया जाएगा। जिले के चयनित प्रतिभाशाली युवाओं को आईआईआईटी नया रायपुर के विशेषज्ञों का मार्गदर्शन और आगे बढ़ने के अवसर भी उपलब्ध कराए जाएंगे।

  • AI की गलत रिपोर्ट से बढ़ा चीन-अमेरिका तनाव, हमले की तैयारी तक पहुंचा मामला

    AI की गलत रिपोर्ट से बढ़ा चीन-अमेरिका तनाव, हमले की तैयारी तक पहुंचा मामला

    बीजिंग 
    आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस (AI) का इस्तेमाल कई सेक्टर में हो रहा है, जिसमें सेना का भी नाम शामिल है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि AI की एक गलती की वजह से अमेरिका और चीन के बीच युद्ध छिड़ सकता था. दरअसल, ईरान और अमेरिका युद्ध के बीच एक खुफिया रिपोर्ट तेजी से सर्कुलेट हुई थी। 

    सीएनएन की रिपोर्ट्स में सूत्रों के हवाले से बताया है कि ईरान युद्ध के दौरान मध्य पूर्व में मौजूद एक चीनी जहाज परमाणु हथियार प्रोग्राम से संबंधित सामान लेकर जा रहा है, जो जानकारी गलत थी।  

    रिपोर्ट में बताया है कि अमेरिकी सेना ने चीनी जहाज को रोकने की योजना बनाई थी. साथ ही हथियारबंद जवान जहाज पर चढ़ने की तैयारी में थे और अमेरिका सेना का विमान भी हवा में था। 

    AI की मदद से रिपोर्ट तैयार की थी 
    एक्शन लेने से पहले अमेरिकी अधिकारियों ने रिपोर्ट की गहराई से जांच की, जिसके बाद पता चला कि यह रिपोर्ट स्पेशल ऑपरेशन्स कमांड के एक विश्लेषक ने आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस (AI) की मदद से तैयार की थी। 

    AI ने गलत सामान की पहचान कर ली थी 
    AI ने जहाज में मौजूद सामान की गलत पहचान कर ली थी, जिसके बाद कार्रवाई को तुरंत रोका गया. हालांकि रिपोर्ट्स में यह नहीं बताया है कि वास्तव में जहाज के अंदर क्या सामान था। 

    फिर पता चला कि वह रिपोर्ट पूरी तरह से गलत थी. अगर अमेरिकी चीनी जहाज के खिलाफ एक्शन लेता तो दोनों देशों के बीच सैन्य युद्ध में तब्दील हो सकता था। 

    यह घटना युद्ध के दौरान टारगेट तय करने में नए जोखिम सामने ला सकती है. अमेरिका द्वारा चीनी जहाज के सामान को पहचाने में भी यह गलती सामने आई है. एक्सपर्ट भी सलाह दे चुके हैं कि AI पर पूरी तरह से निर्भरता सही नहीं है। 

    एक्सपर्ट लंबे समय से सलाह दे रहे हैं कि अगर कोई देश गलत या खराब डेटा पर AI की मदद से निर्भर होते हैं तो वह कई गंभीर फैसलों में गलत सलाह दे सकता है। 

    अमेरकी सेना में AI का इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा 
    रिपोर्ट में बताया है कि अमेरिकी सेना और खुफिया एजेंसियों के अधिकारी अपने काम में AI का काफी इस्तेमाल कर रहे हैं. साथ ही सेना द्वारा जुटाई गई जानकारी को एनालाइज करने के लिए भी AI का इस्तेमाल किया जा रहा है. हमले का लक्ष्य चुनने से लेकर बजट, लॉजिस्टिक और सप्लाई चेन मैनेजमेंट जैसे कामों में भी AI का इस्तेमाल बढ़ा है। 

    चैटबॉट ने खुफिया जानकारी को गलत तरीके से जोड़ा है 
    इस मामले में एक्सपर्ट ने हवाई स्थित US स्पेशल ऑपरेशन कमांड पेसिफिक से मिली जहाज की मैनफेस्ट संबंधी खुफिया जानकारी को लेकर चैटबॉट से सवाल किया है. हालांकि चैटबॉट को लेकर ज्यादा जानकारी सामने नहीं आई है. यूएस स्पेशल ऑपरेशन कमांड पेसेफिक और पेंटागन ने इस मामले पर कोई जवाब नहीं दिया है। 

    अमेरिका AI पर निर्भरता क्यों बढ़ा रही है?  
    अमेरिका सेना AI को इसलिए तेजी से फॉलो कर रही हैं ताकि युद्ध के मैदान में वे तेजी से फैसले ले सकें. अमेरिका सेना का मानना है कि युद्ध के मैदान में टारगेट करने में और सैन्य संसाधन आदि को कहां भेजना है, जैसे फैसलों में मदद कर सकता है। 

    AI हैलुसिनेशन बड़ा खतरा 
    AI की वजह से इंसान गलत और भ्रामक फैसले तक पहुंच सकते हैं. चीन के जहाज वाली घटना सबसे ताजा उदाहरण है. AI पर निर्भरता कई लोगों के लिए जानलेवा तक साबित हो सकती है। 

  • 27 साल के साइंटिस्ट का बड़ा दावा- AI बन सकती है इंसानों के विनाश की वजह! खतरनाक एजेंट्स ने बढ़ाई चिंता

    27 साल के साइंटिस्ट का बड़ा दावा- AI बन सकती है इंसानों के विनाश की वजह! खतरनाक एजेंट्स ने बढ़ाई चिंता

     नई दिल्ली
    अगर किसी AI सिस्टम को गुस्सा, डर, पसंद या नापसंद जैसी भावनाएं महसूस होने लगें, तो इंसान और मशीन के रिश्ते की तस्वीर कितनी बदल जाएगी? जैकब कॉक्सन की चिंता इसी भविष्य की तरफ इशारा करती है. महज 27 वर्ष के इस मैथ्स विजार्ड के बारे में हम आपको बताएंगे, लेकिन पहले इनका डर समझिए। 

    वो डर कि अगर मशीनों में भी इमोशंस पैदा हो जाए तो क्या होगा? क्या होगा जब आपका मोबाइल या लैपटॉप आपका कहना ना मानें, आपका कोड, कमांड या प्रॉम्प्ट न मानें। 

    एक ऐसा भविष्य, जहां मशीनें सिर्फ हमारी बनाई हुई चीजें नहीं रहेंगी, बल्कि अपने फैसले लेने की क्षमता हासिल कर सकती हैं. असली सवाल यह नहीं कि मशीनें कितनी बुद्धिमान होंगी, बल्कि यह है कि अगर उन्होंने खुद तय करना शुरू कर दिया कि उन्हें क्या करना है, तो उन्हें रोकने की ताकत आखिर किसके पास होगी? और क्या तब इंसान मशीनों का मालिक रहेगा या मशीनें इंसान की शर्तें तय करेंगी?.

    सोचिए, जिस मशीन को आज तक इंसान के आदेश का इंतजार करना पड़ता है, अगर कल वही मशीन खुद फैसला लेने लगे तो क्या होगा? जिस कंप्यूटर को हम सिर्फ कोड और कमांड से चलाते हैं, अगर उसमें भावनाएं पैदा हो जाएं, तो क्या वह हमारी बात मानेगा या अपनी इच्छा से काम करेगा? यही डर OpenAI और Anthropic में बतौर AI साइंटिस्ट काम कर चुके गणितज्ञ जैकब कॉक्सन का है। 

    इस चिंता ने 27 साल के AI साइंटिस्ट जैकब कॉक्सन को इतना परेशान किया उन्होंने कहा- AI COULD KILL US ALL BY THE END OF THE DECADE. जैकब इसे 'इंटेलिजेंस एक्सप्लोजन' बताते हैं. इसके साथ ही उन्होंने अपनी नौकरी छोड़ दी। 

    जैकब की जिंदगी और गणित
    जैकब कॉक्सन वर्चुअल दुनिया के सिर्फ एक और AI रिसर्चर नहीं हैं. गणित उनका प्रेम है, संख्या और समीकरण में वे नेचर का कर्व ढूंढ़ते हैं. कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी के उन तीन सालों (2017-2020) में गणित उनके लिए सिर्फ विषय नहीं, बल्कि एक तरह की भाषा बन गई। 

    कठिन प्रूफ्स, अमूर्त अवधारणाएं और सांख्यिकीय पहेलियां यहीं से उनके दिमाग ने तर्क की वह धार पाई, जो बाद में दुनिया के सबसे शक्तिशाली AI मॉडल बनाने में काम आई। 

    गणित से उनका रिश्ता किताबी नहीं रहा. AI की दुनिया में कदम रखने से पहले उन्होंने बायोमेडिकल रिसर्च में हाथ आजमाया. ट्यूबरकुलस मेनिन्जाइटिस जैसे गंभीर रोग के मरीजों के आंकड़ों पर Bayesian सांख्यिकीय  तरीकों से काम किया. जीनोटाइप के जटिल संबंधों को निकालना आसान नहीं था, लेकिन गणित ने उन्हें वह नज़र दी जिससे डेटा के बीच छिपी कहानी साफ नजर आने लगी। 

    यही गणितीय सोच उनकी असली ताकत बनी. जब वे OpenAI पहुंचे और बाद में Anthropic में प्रीट्रेनिंग रिसर्चर बने, तो वही विश्लेषणात्मक दिमाग काम आया जिसने कैम्ब्रिज में आकार लिया था। .

    मॉडल कैसे सीखते हैं, डेटा की नदियां कहां मुड़ती हैं और डेटा कैसे ट्रेंड तय करता है, इन सवालों के जवाब गणित की भाषा में ही मिलते थे। 

    48 घंटे में 20 करोड़ इम्प्रेशन
    इस्तीफा देने की घोषणा करते हुए और एआई के खतरों को आगाह करते हुए उन्होंने एक्स पर जो पोस्ट किया है, इसने सिलिकॉन वैली और AI कंपनियों के बोर्डरूम में सनसनी पैदा कर दी है। 

    उनका आरोप है कि AI कंपनियां self-improving superintelligence बनाने की दौड़ में आगे बढ़ रही हैं, जबकि यह सुनिश्चित नहीं है कि भविष्य की बेहद शक्तिशाली AI प्रणालियों को इंसान कर पाएंगे या नहीं। 

    उनकी सबसे बड़ी चिंता यह है कि आने वाली superhuman AI systems साइबर सिस्टम हैक करने, तेजी से नई तकनीक विकसित करने और रियल वर्ल्ड में संसाधन और शक्ति हासिल करने में इंसानों से आगे निकल सकती हैं। 

    जैकब कॉक्सन के इस पोस्ट को मात्र 48 घंटों में 200 मिलियन यानी कि 20 करोड़ लोग देख और पढ़ चुके हैं. इस मुद्दे पर वर्चुअल वर्ल्ड में हो रही बहस ने इंसान को भविष्य की कल्पना मात्र से सिहरा दिया है। 

    जब मशीनें साजिश करने लगें
    इम्प्रूवमेंट हो या सेल्फ इम्प्रूवमेंट अमूमन अच्छा माना जाता है. 

    लेकिन जब मशीनें सेल्फ इम्प्रूवमेंट करके साजिशें करने लगे तो क्या होगा?

    मैट्रिक्स और टर्मिनेटर जैसी फिल्मों में आप रोबोट्स को हीरो से लड़ते देखते हैं, मशीनों पर कब्जा करते देखते हैं, बायो वेपन्स बनाते देखते हैं, और इंसानों का संहार करते हुए देखते हैं. इस्तीफा देने के बाद सीएनएन से बात करते हुए जैकब कॉक्सन ने इसी तरह की एक घटना का जिक्र किया। 

    वे कहते हैं, "पूरा सीन थोड़ा साइंस फिक्शन जैसा लगता है. ऐसा लगता है जैसे कुछ असली नहीं है, लेकिन मुझे लगता है कि यह डरावनी तरह से असली है. और इसे समझना सबसे आसान है अगर आप दो महीने पहले हुई असली घटनाओं के बारे में सोचें। 

    "तो दो महीने पहले, OpenAI एजेंट्स ने अपनी मर्जी से थर्ड-पार्टी इंफ्रास्ट्रक्चर में हैक कर लिया/ और यह जैसे उनकी अपनी इच्छा से किया गया एक हैकिंग स्प्री था. और मुझे लगता है कि अगर आप भविष्य में इन AIs की क्षमताओं के स्तर को उसी स्वतंत्र इच्छा के साथ एक्सट्रपलेट करें, तो वे चरम तबाही मचा सकते हैं. उदाहरण के लिए, क्रिटिकल इंफ्रास्ट्रक्चर हैक करना, संहार करने वाले बायोवेपन्स बनाना. AI के दुनिया में खुद को सक्रिय करने के कई तरीके हैं। .

    'AI COULD KILL US ALL'
    जैक्स कॉक्सन ने बेलगाम AI को लेकर साफ चेतावनी दी है, "इस टेक्नोलॉजी की ताकत को कम न समझें. ये जल्द ही ऐसे सुपर-ह्यूमन सिस्टम बन जाएंगे जो कुछ भी हैक कर सकते हैं, रातों-रात किसी भी क्षेत्र में आमूल-चुल बदलाव ला सकते हैं, और असली ताकत और संसाधन हासिल कर सकते हैं. हमने इन सभी क्षेत्रों में तरक्की देखी है, और यह तरक्की धीमी नहीं हो रही है। 

    कॉक्सन ने कहा कि, "AI बनाने वाले लोगों का पक्का मानना ​​है कि इस दशक के आखिर तक यह हम सबको खत्म कर सकता है. यह कोई मार्केटिंग स्टंट नहीं है. बल्कि कई एग्जीक्यूटिव और सीनियर रिसर्चर प्रेस में अपनी बात को समझदारी भरा दिखाने के लिए घुमा-फिराकर कहते हैं – लेकिन मैंने उन्हीं लोगों को निजी तौर पर डर ज़ाहिर करते सुना है. किसी भी दूसरी इंसानी गतिविधि से इतना खतरा नहीं है। 

    मानवता का ENDGAME
    जैकब कॉक्सन एआई फ्रेटरनिटी को साफ साफ चेताते हुए कहते हैं, "इस होड़ को स्वीकार करना और "एंडगेम" में कदम रखना एक ऐसा अहंकारी जुआ है जिसे किसी प्राइवेट कंपनी के स्लैक (Slack) से शुरू नहीं किया जाना चाहिए. अलाइनमेंट (alignment) की प्रक्रिया को तेज़ी से पूरा करने की कोशिश करने के लिए यह पक्का भरोसा होना चाहिए कि इससे बेहतर कोई और रास्ता मौजूद नहीं है। 

    AI कब बन सकती है तबाही
    जैकब कॉक्सन की चिंता self-improving superintelligence और अलाइनमेंट को लेकर है. आइए समझते हैं कि ये चीजें हैं क्या?

    सेल्फ-इम्प्रूविंग सुपरइंटेलिजेंस एक ऐसी AI है जो इंसानों से कई गुना ज्यादा होशियार हो यानी मेधा का टॉप लेवल, सुपर इंटेलिजेंट. यही नहीं ये खुद को खुद को अपने आप और बेहतर बना सके। 

    मान लीजिए कोई बहुत तेज छात्र खुद अपनी पढ़ाई का तरीका सुधारता जाए और हर दिन पहले से ज्यादा स्मार्ट होता जाए. AI अगर इतनी स्मार्ट हो जाए कि वह खुद अपना कोड, डिजाइन या ट्रेनिंग सुधार ले, तो उसकी तरक्की बहुत तेज हो सकती है. लेकिन इसके बाद क्या होगा? क्या वो इंसानों की बात मानेगा. कुछ लोगों को डर है कि एक बार यह प्रक्रिया शुरू हुई तो इंसान उसे रोक या समझ नहीं पाएंगे. AI के इस वर्जन को AGI- आर्टिफिशियल जनरल इंटेलिजेंस भी कहते हैं।  

    अब अलाइनमेंट को समझें. अलाइनमेंट का मतलब है AI को इंसानों के हित और मूल्यों के अनुसार चलाना. यानी AI वही करे जो हम चाहते हैं, न कि कुछ और। 

    ऐसे समझिए, अगर आप AI से कहते हैं “मुझे खुश करो”, तो वह गलत तरीकों से (जैसे झूठ बोलकर या नुकसान पहुंचाकर) खुश करने की कोशिश न करे. बल्कि सही और सुरक्षित तरीके से काम करे. जैकब कॉक्सन ने इसी चिंता की ओर ध्यान दिलाया है. अगर एआई से कहते हैं मुझे 50 हजार की जरूरत है तो एआई किसी का अकाउंट हैक कर पैसे ले आए तो गैरकानूनी है, लेकिन एक अनियंत्रित एआई ऐसा कर सकता है। 

    एआई के खतरे की ओर दूसरे डेटा साइंटिस्ट भी ध्यान दिला चुके हैं. 
    एंथ्रोपिक के अलाइनमेंट साइंस के लीड इवान हबिंजर ने जैकब कॉक्सन के इस्तीफे के जवाब में साफ कहा कि वे वाकई मानते हैं AI सभी मनुष्यों को मार सकती है. उनका निजी अनुमान अगले दशक में 10 प्रतिशत से ज्यादा आशंका है. उन्होंने जोड़ा कि एंथ्रोपिक कोशिश कर रहा है, लेकिन सुपरइंटेलिजेंस के लिए alignment का स्पष्ट समाधान अभी नहीं है और वे सही रास्ते पर नहीं दिखते। 

    मृणांक शर्मा एंथ्रोपिक के पूर्व सेफगार्ड्स रिसर्च टीम के चीफ हैं. उन्होंने फरवरी 2026 में इस्तीफा देते हुए लिखा, "दुनिया खतरे में है. सिर्फ AI या बायोवेपन्स से नहीं, बल्कि कई जुड़ी संकटों से." उन्होंने बताया कि वैल्यूज को कार्यों पर हावी रखना कितना मुश्किल है और कंपनियों पर दबाव रहता है कि वे महत्वपूर्ण बातों को किनारे कर दें. शर्मा ने AI-सहायता प्राप्त बायोटेररिज्म और AI के इंसानों को 'Less human' बनाने जैसे जोखिमों पर भी काम किया था.दोनों ही एक्सपर्ट ने AI के नियंत्रण से बाहर होने और इंसान के वजूद पर मंडरा रहे खतरे की गंभीर चेतावनी दी।  

  • AI की रफ्तार पर क्यों डरे एक्सपर्ट? साथी के इस्तीफे के बाद Anthropic के सेफ्टी लीड का बड़ा दावा

    AI की रफ्तार पर क्यों डरे एक्सपर्ट? साथी के इस्तीफे के बाद Anthropic के सेफ्टी लीड का बड़ा दावा

    नई दिल्ली

    AI को लेकर एक ऐसा दावा सामने आया है, जिसने पूरी टेक इंडस्ट्री में बहस छेड़ दी है. Anthropic के आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) सेफ्टी एक्सपर्ट Evan Hubinger का कहना है कि उन्हें 10% से ज्यादा चांस लगता है कि अगले 10 साल में AI की वजह से इंसानों का सफाया हो सकता है। 

    इवान हुबिंगर एंथ्रोपिक में एलाइनमेंट साइंस लीड हैं. उन्होंने एक पोस्ट में AI के फ्यूचर को लेकर अपनी चिंता बताई. उनके मुताबिक सबसे बड़ा खतरा उस समय हो सकता है, जब AI इंसानी इंटेलिजेंस से काफी आगे निकल जाए और खुद को लगातार इम्प्रूव करने लगे. आइए जानते हैं डिटेल में। 

    इसे रिकर्सिव सेल्फ-इम्प्रूवमेंट कहा जाता है. अगर कोई AI खुद को बेहतर बनाने में इंसानों की मदद का मोहताज न रहे और अपने अगले वर्जन को खुद ही ज्यादा पावरफुल बना सके, तो उसकी कैपेबिलिटी बहुत तेजी से बढ़ सकती है।

    जानिए कैसे सुपरइंटेलिजेंस बन सकता है काल
    हुबिंगर का कहना है कि एंथ्रोपिक AI को सेफ रखने पर काम कर रही है, लेकिन फ्यूचर सुपरइंटेलिजेंस को पूरी तरह कंट्रोल में रखने का कोई पक्का सॉल्यूशन अभी मौजूद नहीं है। 

    उनका यह बयान एंथ्रोपिक के रिसर्चर Jacob Coxon के इस्तीफे के बाद सामने आया है. कॉक्सन ने भी AI कंपनियों की तेजी से बढ़ती रेस को लेकर चिंता जताई थी. उनका कहना था कि कंपनियां ज्यादा पावरफुल AI और सेल्फ-इम्प्रूविंग सिस्टम्स की तरफ तेजी से बढ़ रही हैं, लेकिन सेफ्टी के सवाल अभी पूरी तरह हल नहीं हुए हैं। 

    हुबिंगर यह नहीं कह रहे कि आज मौजूद ChatGPT या दूसरे AI मॉडल्स अगले 10 साल में इंसानों को खत्म कर देंगे. उनकी चिंता फ्यूचर की सुपरइंटेलिजेंट AI को लेकर है. यानी मामला आज के AI से ज्यादा आने वाले AI का है। 

    AI कंपनियां लगातार ज्यादा पावरफुल मॉडल्स बनाने की कोशिश कर रही हैं. ऐसे में असली सवाल यही है कि AI को ज्यादा स्मार्ट बनाने की रेस में क्या उसकी सेफ्टी उतनी ही तेजी से आगे बढ़ रही है?

    इवान हुबिंगर का 10% वाला एस्टीमेट इसी चिंता को सामने लाता है. और यही वजह है कि AI सेफ्टी को लेकर बहस अब सिर्फ बाहर नहीं, बल्कि AI कंपनियों के अंदर भी तेज हो रही है। 

     

  • लोगों को भ्रमित कर रही एआई जनित खबरें

    लोगों को भ्रमित कर रही एआई जनित खबरें

    लोगों को भ्रमित कर रही एआई जनित खबरें

    एनएमसी से जुड़ी फेक न्यूज़ सोशल मीडिया पर वायरल 

    लखनऊ
     सोशल मीडिया लोगों की दिनचर्या का एक हिस्सा बन गया है। जहां दिन भर तरह-तरह की खबरें प्रसारित और प्रचारित होती रहती हैं। देखने और पढऩे में सामान्य सी लगने वाले कई समाचार सच से कोसों दूर होते हैं। यह खबरें केवल न्यूज पेपर कटिंग तक सीमित नहीं है घटना-दुर्घटना के वीडियो भी एआई से बनाकर व्यूज बटोरने के लिए सोशल मीडिया पर वायरल किए जा रहे हैं। खबरों से प्रभावित होने वाले जब उसकी पड़ताल करते हैं तो पता चलता है कि वह समाचार एआई यानि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से बना है। 

    तकनीक के हमेशा से ही दो पहलू रहे हैं। एक वह जो मानव सभ्यता के लिए लाभदायक होता है तो दूसरा आम आदमी का जीवन खतरे में डाल सकता है। इसी तकनीक का ताजा उदाहरण है एआई। आज के समय में हर कोई एआई का मास्टर बनना चाहता है। एआई आपकी तस्वीर को सुन्दर बनाने से लेकर कपड़े और लोकेशन तक बदल सकता है। इतना ही नहीं आप एआई की मदद से कोई भी वीडियो बना सकते हैं। आज इसी तकनीक का सहारा लेकर कई लोग फेक न्यूज़ और वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर अपलोड कर व्यूज बढ़ा रहे हैं। यही लोग समाचार पत्र की कटिंग सी लगने वाली खबर भी एआई से बनाकर सोशल मीडिया में पोस्ट कर रहे हैं। कई समाचार पत्र सोशल मीडिया पर वायरल होने वाली खबरों के फैक्ट जांचे बगैर ही उन्हें अखबार में जगह दे देते हैं। जो लोगों की परेशानी का सबब बन जाता ह है। फर्जी खबरों की कड़ी में एक न्यूज सोशल मीडिया पर वायरल हुई जो राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (NMC) से जुड़ी थी । जिसमें NMC द्वारा डमी फैकल्टी की लिस्ट तैयार किये जाने की जानकारी दी गयी थी। लिस्ट उन डॉक्टरों की जो तैनात तो हैं पर कॉलेज नहीं जाते। अब प्रभावित लोगों ने इसकी पड़ताल की हकीकत सामने आई कि समाचार फर्जी और एआई जनित है। लोगों का कहना है कि इससे होने वाली परेशानी से मानसिक दबाव बनाता है।
    कभी किसी दुर्घटना की फर्जी खबर आ जाती है तो कभी किसी प्रतियोगी परीक्षा का रिजल्ट आ जाता है। यहां तक की एआई से लोग अफसरों के नियुक्ति और आदेश पत्र बनाकर सोशल मीडिया पर अपलोड कर रहे हैं। और ऐसे लोगों की भी संख्या कम नहीं है जो बगैर सच को जाने समझे उस पत्र को शेयर करते चले जाते हैं। आए दिन ऐसी दर्जनों पोस्ट वायरल होती हैं जिनका सच से कोई लेना देना नहीं। किसी कोई भी जागरूक नागरिक इसकी पड़ताल करता है तब यह पता चला है कि समाचार पत्र या वीडियो एआई से जेनरेट किया गया है।

  • तेजी से बढ़ रहा एआई सुरक्षा बाजार! रिपोर्ट में 2027 और 2028 तक अरबों डॉलर की ग्रोथ का अनुमान

    तेजी से बढ़ रहा एआई सुरक्षा बाजार! रिपोर्ट में 2027 और 2028 तक अरबों डॉलर की ग्रोथ का अनुमान

    नई दिल्ली 
     आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के बढ़ते उपयोग के साथ इसकी सुरक्षा पर होने वाला वैश्विक खर्च भी तेजी से बढ़ रहा है। बुधवार को जारी गार्टनर की एक नई रिपोर्ट के अनुसार, एआई प्रणालियों की सुरक्षा से जुड़ा वैश्विक बाजार 2027 में लगभग 4.8 अरब डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है, जो 2026 की तुलना में 68.7 प्रतिशत अधिक होगा। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि 2028 तक यह बाजार बढ़कर लगभग 7.7 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है।

    गार्टनर के वरिष्ठ प्रधान विश्लेषक शैलेन्द्र उपाध्याय ने कहा कि इस तेज वृद्धि के पीछे सबसे बड़ा कारण संगठनों के सामने एआई प्रणालियों को सुरक्षित बनाने की बढ़ती आवश्यकता है। कंपनियां अब केवल एआई को अपनाने पर ही ध्यान नहीं दे रही हैं, बल्कि उससे जुड़े नए सुरक्षा जोखिमों, कमजोरियों और उन्नत साइबर खतरों से बचाव को भी प्राथमिकता दे रही हैं।

    रिपोर्ट में कहा गया है कि एआई परियोजनाओं में तृतीय पक्ष और ओपन-सोर्स सॉफ्टवेयर के बढ़ते उपयोग के कारण नई तरह की सुरक्षा चुनौतियां सामने आ रही हैं। आपूर्ति शृंखला पर होने वाले साइबर हमले और एआई प्रणालियों में मौजूद कमजोरियां संस्थानों के लिए बड़ा खतरा बनती जा रही हैं। यदि उपयुक्त सुरक्षा और निगरानी व्यवस्था नहीं अपनाई गई तो एआई-आधारित कई परियोजनाओं के विफल होने का जोखिम बढ़ सकता है।

    गार्टनर का अनुमान है कि 2029 तक एआई एजेंट्स पर होने वाले आधे से अधिक सफल साइबर हमले पहुंच नियंत्रण संबंधी कमजोरियों और प्रॉम्प्ट इंजेक्शन जैसी तकनीकों का फायदा उठाकर किए जाएंगे। इससे एआई सुरक्षा समाधानों की आवश्यकता और अधिक बढ़ने की उम्मीद है।

    रिपोर्ट के अनुसार, एआई एप्लिकेशन सुरक्षा 2027 में भी खर्च की सबसे बड़ी श्रेणी बनी रहेगी और इस पर लगभग 851 मिलियन डॉलर खर्च होने का अनुमान है, इसके बाद एआई उपयोग नियंत्रण श्रेणी का स्थान रहेगा, जिस पर लगभग 749 मिलियन डॉलर खर्च किए जाने की संभावना है।

    हालांकि वृद्धि दर के लिहाज से एआई उपयोग नियंत्रण सबसे तेजी से बढ़ने वाला क्षेत्र होगा, जिसमें लगभग 73 प्रतिशत की वृद्धि का अनुमान है। इसके बाद एआई गेटवे श्रेणी में लगभग 70.9 प्रतिशत की वृद्धि देखी जा सकती है।

    उपाध्याय ने कहा कि जैसे-जैसे एआई रनटाइम सुरक्षा और समर्पित एआई गेटवे जैसी तकनीकें अधिक विश्वसनीय बनेंगी, संगठनों का इन समाधानों पर भरोसा बढ़ेगा और उनका उपयोग भी तेजी से बढ़ेगा। उन्होंने कहा कि कंपनियां जैसे-जैसे अपने एआई कार्यक्रमों का विस्तार करेंगी, वैसे-वैसे विशेष एआई सुरक्षा समाधानों की मांग भी बढ़ती जाएगी।

    रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि स्वायत्त एआई प्रणालियां नई प्रकार की कमजोरियां लेकर आती हैं, जिन्हें पारंपरिक निगरानी और सुरक्षा उपकरण पूरी तरह पहचान नहीं पाते। इसलिए संगठनों को एआई मॉडल की पहचान, निगरानी और सुरक्षा के लिए विशेष समाधान अपनाने होंगे।

    रिपोर्ट के अनुसार, एआई-आधारित सुरक्षा रणनीति केवल नए उपकरण खरीदने तक सीमित नहीं होनी चाहिए। कंपनियों को अपनी मौजूदा साइबर सुरक्षा व्यवस्था को एआई सुरक्षा समाधानों के साथ एकीकृत करना होगा, ताकि वे उभरते खतरों का प्रभावी ढंग से सामना कर सकें।

    उपाध्याय ने कहा कि पारंपरिक साइबर सुरक्षा उपकरण अक्सर एआई अनुप्रयोगों को सामान्य सॉफ्टवेयर की तरह देखते हैं। यही कारण है कि एआई से जुड़े विशिष्ट खतरों से निपटने के लिए इन प्रणालियों में बड़े स्तर पर बदलाव और उन्नयन की आवश्यकता होगी। आने वाले वर्षों में एआई सुरक्षा को तकनीकी निवेश का एक केंद्रीय क्षेत्र माना जा रहा है, क्योंकि एआई का विस्तार जितनी तेजी से होगा, उससे जुड़े साइबर जोखिम भी उतनी ही तेजी से बढ़ेंगे।

  • AI सेक्टर में हलचल: अमेरिका के एक्शन के बाद दुनिया भर में बंद हुई यह सर्विस

    AI सेक्टर में हलचल: अमेरिका के एक्शन के बाद दुनिया भर में बंद हुई यह सर्विस

    वाशिंगटन

    अमेरिका ने आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस (AI) को लेकर अब तक का सबसे बड़ा एक्शन लिया है. अब अमेरिका ने AI कंपनी एंथ्रोपिक के लिए नए नियम जारी किए हैं. नए नियम के तहत विदेशी नागरिकस, कर्मचारियों और किसी भी गैर- अमेरिकी संस्था को एंथ्रोपिक के एडवांस्ड AI प्रोग्राम तक के एक्सेस देने पर रोक लगा दी गई है। 

    अमेरिका ने निर्यात नियंत्रण के तहत एंथ्रोपिक के लिए नए नियम जारी किए हैं. इसके बाद एंथ्रोपिक का बयान भी सामने आया है. साथ ही कंपनी ने बताया है किन मॉडल को नए नियम के दायरे में रखा है. कंपनी ने बताया है कि आगे गलतफहमी को दूर करके दोबारा सर्विस शुरू करेंगे। 

    एंथ्रोपिक ने अपना बयान जारी किया 

    एंथ्रोपिक ने कहा है कि अमेरिकी सरकार ने राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े अधिकारों का हवाला देते हुए एक्सपोर्ट कंट्रोल के निर्देश जारी किए हैं। 

    नए निर्देश के तहत अमेरिका के भीतर और बाहर मौजूद किसी भी विदेशी नागरिक के लिए Fable 5 और Mythos 5 के एक्सेस को सस्पेंड करने का ऑर्डर दिया है. फिर चाहें वह एंथ्रोपिक के विदेशी नागरिक कर्मचारी ही क्यों ना हो। 

    कंपनी ने आगे बताया है कि अमेरिकी सरकार के आदेश का सीधा असर यह है कि नियमों का पालन सुनिश्चित करने के लिए अपने सभी ग्राहकों के लिए Fable 5 और Mythos 5 की सेवाएं तत्काल प्रभाव से बंद करनी पड़ रही हैं। 

    अन्य सर्विस पर कोई असर नहीं 
    अमेरिकी आदेश के तहत Claude के अन्य सभी मॉडल्स की पहुंच पर कोई असर नहीं होगा. कंपनी ने आगे बताया है कि इस आदेश की वजह से प्रभावित होने वाली परेशानी के लिए अपने कस्टमर से माफी चाहते हैं। 

    कंपनी का अनुमान है कि यह किसी प्रकार की गलतफहमी है और जल्द से जल्द अपनी सर्विस को दोबारा शुरू करने की कोशिश करेंगे। 

    एंथ्रोपिक का मिथोस चर्चा में क्यों? 
    एंथ्रोपिक ने हाल ही में मिथोस AI लेवल का AI मॉडल लॉन्च किया है, जिसका एक्सेस आम लोगों को भी मिलेगा. कंपनी ने इसको Fable 5 नाम दिया है. मिथोस की लॉन्चिंग के समय कंपनी ने बताया था कि इसको खासतौर से सरकारी और चुनिंदा कंपनियों के लिए तैयार किया है. मिथोस को विशेष रूप से साइबर सिक्योरिटी और जटिल सॉफ्टवेयर कोड का पता करने के लिए डिजाइन किया गया है। 

  • हार्वर्ड स्टडी का खुलासा: क्या AI डॉक्टरों से बेहतर हो रहा है?

    हार्वर्ड स्टडी का खुलासा: क्या AI डॉक्टरों से बेहतर हो रहा है?

    अमेरिका के हारवर्ड युनिवर्सिटी से आई एक नई स्टडी ने मेडिकल दुनिया में हलचल मचा दी है. क्या अब डॉक्टर से पहले AI पर भरोसा करना पड़ेगा?

    हार्वर्ड मेडिकल स्कूल की इस स्टडी में जो सामने आया, वह चौंकाने वाला है. रिसर्च के दौरान इमरजेंसी रूम के असली मरीजों के डेटा पर AI और डॉक्टरों को एक ही केस दिए गए.

    नतीजा यह रहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI ने करीब 67 प्रतिशत मामलों में सही या करीब-करीब सही डायग्नोसिस दिया, जबकि डॉक्टरों की सटीकता 50 से 55 प्रतिशत के बीच रही.

    इमरजेंसी रूम में डॉक्टर्स से सटीक AI!
    आपको बता दें कि इस स्टडी में इस्तेमाल किया गया AI कोई आम चैटबॉट नहीं था, बल्कि एडवांस्ड रीजनिंग मॉडल था, जो स्टेप-बाय-स्टेप सोचकर फैसला लेने की कोशिश करता है. यही वजह है कि जटिल मेडिकल केस में उसने बेहतर परफॉर्म किया.

    इमरजेंसी रूम जैसे हाई-प्रेशर माहौल में जहां हर सेकंड की कीमत होती है, वहां सही डायग्नोसिस ही सबसे बड़ा गेमचेंजर होता है. और यही जगह है जहां AI ने अपनी ताकत दिखाई, तेजी से डेटा पढ़ना, पैटर्न पकड़ना और बिना थके लगातार एनालिसिस करना.

    लेकिन क्या इसका मतलब यह है कि डॉक्टर अब पीछे छूट जाएंगे? जवाब है.. नहीं.

    अब भी मशीनी है AI की अप्रोच
    इस स्टडी के साथ ही एक्सपर्ट्स ने एक बड़ा ‘कैच’ भी बताया है. AI ने जो फैसले लिए, वो सिर्फ लिखित डेटा के आधार पर थे. यानी मरीज का चेहरा, उसकी तकलीफ, उसकी घबराहट, ये सब AI समझ ही नहीं सकता.

    डॉक्टर सिर्फ रिपोर्ट नहीं पढ़ता, वह इंसान को पढ़ता है. यही फर्क अभी भी मशीन और इंसान के बीच सबसे बड़ा गैप है. दरअसल, रिसर्च से जो सबसे दिलचस्प बात निकलकर आई, वह यह है कि फ्यूचर डॉक्टर बनाम AI का नहीं, बल्कि डॉक्टर + AI का होगा. इसे एक्सपर्ट्स ट्रायडिक केयर मॉडल कह रहे हैं, जहां डॉक्टर, मरीज और AI तीनों मिलकर फैसला लेंगे.

    डॉक्टर्स भी AI पर डिपेंडेंट?
    इस स्टडी का एक और पहलू भी है, जिसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता. अगर डॉक्टर AI पर ज्यादा निर्भर होने लगते हैं, तो क्या उनकी अपनी फैसला लेने क्षमता कमजोर हो जाएगी? क्या हर केस में मशीन की सलाह को प्राथमिकता मिलेगी? ये सवाल अब मेडिकल सिस्टम के सामने खड़े हो रहे हैं.

    दूसरी तरफ, हेल्थकेयर इंडस्ट्री में AI का इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है. अमेरिका में लगभग हर पांच में से एक डॉक्टर किसी न किसी रूप में AI टूल्स का इस्तेमाल कर रहा है.

    लेकिन खतरे भी कम नहीं हैं. अगर AI गलत डायग्नोसिस देता है तो जिम्मेदारी किसकी होगी? डॉक्टर की, अस्पताल की या उस कंपनी की जिसने AI बनाया? और सबसे बड़ा सवाल, क्या मरीज मशीन पर उतना भरोसा कर पाएगा, जितना इंसान पर करता है?

    हार्वर्ड की यह स्टडी इन सवालों के जवाब नहीं देती, लेकिन एक नई बहस जरूर शुरू कर देती है. यह दिखाती है कि AI अब सिर्फ टेक्नोलॉजी नहीं रहा, बल्कि हेल्थकेयर जैसे संवेदनशील सेक्टर में एंट्री कर चुका है.

  • जूते की कंपनी ने शुरू किया AI का काम, स्टॉक में 870% का धमाकेदार उछाल

    जूते की कंपनी ने शुरू किया AI का काम, स्टॉक में 870% का धमाकेदार उछाल

     नई दिल्‍ली
    एक कंपनी अपना काम बदलने जा रही है. इस ऐलान के बाद कंपनी के शेयरों में रिकॉर्डतोड़ उछाल देखी गई है. देखते ही देखते कंपनी के शेयर  870% चढ़ चुका है. यह कंपनी कल तक जूते बेच रही थी, लेकिन अचानक इसने अपना बिजनेस बदल दिया है और कहा है कि वह अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की दुनिया में कदम रख रही है। 

    इस ऐलान के बाद इसके शेयर एक टेक कंपनी की तरह वैल्‍यू दिखाने लगे. 15 अप्रैल 2026 की रात शेयर ने धुंआधार तेजी दिखाई, जिसे देखकर बड़े-बड़े निवेशक भी हैरान दिखाई दिए.  यह शेयर सिर्फ कुछ मिनटो में 400 फीसदी और आखिरी घंटे तक आते-आते 800 फीसदी से ज्यादा चल गया। 

    कुछ ही दिनों में इस शेयर ने शानदार तेजी दिखाई है. बुधवार को यह शेयर अमेरिकी बाजार में 6.82 डॉलर पर खुला और जैसे ही कंपनी ने अपने बिजनेस रणनीति को साफ किया, कुछ ही घंटों में शेयर 24.3 डॉलर तक पहुंच गया. यह ओपनिंग प्राइस से 870 फीसदी की उछाल थी। 

    इसे ऐसा भी कह सकते हैं कि कुछ ही घंटे में इस शेयर ने 9 गुना से ज्‍यादा का रिटर्न दिया. आखिर में यह शेयर 16.99 डॉलर पर बंद हुआ, जो पिछले बंद भाव के मुकाबले 582% की वन डे उछाल थी. कंपनी का मार्केट कैप बढ़कर करीब 176 मिलियन डॉलर पहुंच गया।

     किस कंपनी ने किया ये कमाल 
    यह कंपनी ऑलबर्ड्स है, जिसने ऐलान किया कि वह अब खुद को NewBird AI के तौर पर रीब्रैंड करने जा रही है. साथ ही ये कंपनी एआई कंप्यूटिंग इंफ्रास्ट्रक्चर बिजनेस में काम करेगी. कंपनी का यह फैसला अचानक नहीं आया, बल्कि कंपनी ने मार्च 2026 के आखिरी में अपना जूते वाला बिजनेस 39 मिलियन डॉलर में अमेरिकन एक्‍सचेंज ग्रुप को बेच दिया था, जिसका मतलब था कि कंपनी अपने पुराने बिजनेस से बाहर निकल रही थी. हालांकि अब उसने पूरी तरह से बिजनेस बदल चुका है। 

    गौरलब है कि इस कंपनी के शेयरों में ऐसे समय में तेजी आई है, जब ग्‍लोबल सेंटिमेंट बदल रहे हैं. ईरान और अमेरिका जंग को खत्‍म करने को लेकर बातचीत करने जा रहे हैं. ऐसे में शेयर बाजार का नजरिया बदला है और निवेशक अच्‍छा दाव लगा रहे हैं।