टैरिफ राहत के बाद PM मोदी का प्रेरक संदेश, श्लोक के जरिए दिया आत्मविश्वास का मंत्र

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नई दिल्ली

भारत और अमेरिका के बीच संभावित ट्रेड डील पर सहमति के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने महाभारत का एक श्लोक शेयर किया है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोमवार रात में एक पोस्ट कर इसकी घोषणा की. पीएम मोदी ने भी एक पोस्ट में इस घोषणा पर खुशी जाहिर की है. अब भारतीय निर्यात पर अमेरिकी टैरिफ घटकर 18 फीसदी हो गया है. अमेरिका में भारत पर रूसी तेल खरीदने की वजह से लागू 25 फीसदी की पेनाल्टी को खत्म कर दिया है. पीएम मोदी ने जो श्लोक साझा किया है वह इस प्रकार है-

श्रीर्मङ्गलात् प्रभवति प्रागल्भ्यात् सम्प्रवर्धते।
दाक्ष्यात् तु कुरुते मूलं संयमात् प्रतितिष्ठति॥

यह श्लोक महाभारत के उद्योगपर्व (विदुर नीति) से लिया गया है, जिसमें विदुर ने धृतराष्ट्र को सफलता/समृद्धि (श्री/लक्ष्मी) के रहस्य बताए हैं.

श्लोक का अर्थ

इस श्लोक का सरल हिंदी में व्याख्या कुछ इस प्रकार है. श्री (समृद्धि, लक्ष्मी, सफलता, वैभव) शुभ/मंगल कार्यों से उत्पन्न होती है, प्रगल्भता (परिपक्व बुद्धि, आत्मविश्वास, वाक्पटुता) से बढ़ती है, दाक्ष्य (चतुराई, कुशलता, दक्षता) से मजबूत जड़ (मूल) बनाती है और संयम (अनुशासन, आत्मसंयम, संयम) से स्थिर/स्थायी होकर टिकी रहती है.

श्लोक की व्याख्या
श्रीर्मङ्गलात् प्रभवति- लक्ष्मी/समृद्धि शुभ कर्मों, अच्छे कार्यों और मंगल (शुभ) से जन्म लेती है.
प्रागल्भ्यात् सम्प्रवर्धते- प्रगल्भता (बुद्धि की परिपक्वता, आत्मविश्वास, बोलने की कला) से वह बहुत बढ़ती है.
दाक्ष्यात् तु कुरुते मूलं- दक्षता/कुशलता/चतुराई से वह मजबूत आधार/जड़ पकड़ लेती है.
संयमात् प्रतितिष्ठति- संयम/अनुशासन से वह स्थायी रूप से स्थापित/टिकी रहती है.

सारांश
कुल मिलाकर प्रधानमंत्री इस श्लोक के जरिए यह कहना चाहते हैं कि समृद्धि और सफलता पहले अच्छे कर्मों से शुरू होती है, फिर आत्मविश्वास और परिपक्वता से बढ़ती है, कुशलता से मजबूत होती है और अंत में संयम/अनुशासन से हमेशा के लिए बनी रहती है. यह श्लोक जीवन में सफलता के चार चरणों को बहुत सुंदर तरीके से दर्शाता है. शुरूआत अच्छे कर्म से, विकास आत्मविश्वास से, मजबूती कुशलता से और स्थिरता संयम से. बहुत प्रेरणादायक श्लोक है!

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