सोया उत्पादन से दुनिया में पहचान बना रहा मध्य प्रदेश: सीएम

प्रदेश का सोया खेतों से निकलकर दुनिया के बाजारों में बना रहा है अपनी पहचान : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

किसानों की आय बढ़ने के साथ ही उद्योगों को भी मिल रही है गति

भोपाल
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि कृषक कल्याण वर्ष में किसानों के लिए खेत में खाद-बीज, बिजली-पानी की बेहतर व्यवस्था करने से लेकर राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय बाजार में उनके उत्पाद का उचित मूल्य दिलाने के लिए राज्य सरकार प्रयास कर रही है। वर्तमान में देश-दुनिया में न्यूट्रिशन बेस्ड फूड की मांग लगातार बढ़ रही है ऐसे में मध्यप्रदेश विशेष लाभ की स्थिति में है। प्रदेश अन्न उत्पादन में दूसरे और दुग्ध उत्पादन में देश में तीसरे स्थान पर है। दलहन, मिलेट और मत्स्य उत्पादन में भी मध्यप्रदेश, देश में अग्रणी है। प्रदेश का खाद्य उत्पादन से लेकर खाद्य प्रसंस्करण तक मजबूत इको-सिस्टम है। प्रदेश में बड़े पैमाने पर हो रहा सोयाबीन का उत्पादन हमारे किसानों के साथ-साथ प्रदेश और देश की अर्थव्यवस्था के लिए विशेष महत्व रखता है। सोयाबीन हमारे किसानों की गाढ़ी कमाई होने के साथ-साथ घर-घर का पोषण और उद्योगों के लिए कच्चा माल है। प्रदेश का सोया खेतों से निकलकर दुनिया के बाजारों में अपनी पहचान बना रहा है। इससे किसानों की आय भी बढ़ रही है, साथ ही प्रदेश में उद्योगों को भी गति मिल रही है।

देश में सोयाबीन की कुल खेती का 45 प्रतिशत क्षेत्रफल मध्यप्रदेश में है। देश के कुल उत्पादन में मध्यप्रदेश का हिस्सा 35 प्रतिशत से अधिक है। प्रदेश के 50 से अधिक जिलों में सोयाबीन का उत्पादन होता है। प्रदेश के सोयाबीन किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य और मेहनत का पूरा सम्मान दिलाने के लिए अक्टूबर 2025 में राज्य सरकार ने सोयाबीन भावांतर योजना की शुरूआत की थी। पिछले वर्ष सोयाबीन उत्पादक लगभग 7 लाख 17 हजार किसानों के खाते में 1 हजार 475 करोड़ रूपए की भावांतर राशि का अंतरण किया गया। इस वर्ष भी पंजीयन की व्यवस्था की जा रही है। वर्ष 2025-26 में सोयाबीन का समर्थन मूल्य 5 हजार 328 रूपए प्रति क्विंटल किया गया था। खेतों में सोयाबीन उत्पादन को प्रोत्साहित करने के साथ ही प्रदेश में सोयाबीन से जुड़ी फूड प्रोसेसिंग इकाइयों तथा संबंधित उद्योगों पर सब्सिडी भी दी जा रही है।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव का मानना है कि सोयाबीन की वास्तविक ताकत इससे जुड़ी वैल्यू एडेड चेक में है। खेत में सोयाबीन का उत्पादन, उद्योगों में इसका प्रसंस्करण और खाद्य तेल तथा प्रोटीन उत्पादों का निर्माण और उनकी देश-दुनिया के बाजारों तक पहुंच, किसानों को समृद्धि और देश की अर्थव्यवस्था को मजबूती प्रदान करते हैं। किसानों की आय, देश की पोषण सुरक्षा और अर्थव्यवस्था को शक्ति देने की इस प्रक्रिया को सशक्त करने की दिशा में राज्य सरकार निरंतर प्रयासरत है। सोयाबीन से संबंधित वैज्ञानिक अनुसंधान और उद्योगों में आधुनिक तकनीक तथा निवेश को प्रोत्साहित किया जा रहा है। किसानों की मेहनत को पूरा सम्मान देने के लिए समन्वित रूप से संचालित इन गतिविधियों से अन्नदाता किसानों की समृद्धि का नया अध्याय आरंभ होगा।

 

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