Category: उत्तर प्रदेश

  • आईटीआई प्रवेश के पांचवें चरण की प्रक्रिया शुरू, 11 अक्टूबर तक होंगे ऑनलाइन आवेदन

    आईटीआई प्रवेश के पांचवें चरण की प्रक्रिया शुरू, 11 अक्टूबर तक होंगे ऑनलाइन आवेदन

    लखनऊ

    योगी सरकार की युवाओं को कौशल प्रशिक्षण, रोजगार और आत्मनिर्भरता से जोड़ने की नीति के तहत प्रदेश के राजकीय एवं निजी औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों (आईटीआई) में प्रशिक्षण सत्र 2026-27 के पंचम चरण की प्रवेश प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। चतुर्थ चरण की प्रवेश प्रक्रिया 3 अक्टूबर को पूरी होने के बाद रिक्त रह गई सीटों के सापेक्ष यह प्रक्रिया शुरू की गई है। इच्छुक अभ्यर्थी 6 अक्टूबर से 11 अक्टूबर 2026 की मध्यरात्रि तक ऑनलाइन आवेदन और विकल्प भर सकेंगे।

    राज्य व्यावसायिक प्रशिक्षण परिषद (एससीवीटी), उत्तर प्रदेश के अधिशासी निदेशक अभिषेक सिंह ने बताया कि पंचम चरण में राजकीय आईटीआई के पूर्व पंजीकृत लेकिन प्रवेश से वंचित अभ्यर्थियों को नए विकल्प भरने का अवसर दिया गया है। वहीं राजकीय एवं निजी आईटीआई में प्रवेश के लिए नए अभ्यर्थी भी ऑनलाइन आवेदन कर सकेंगे।

    पूर्व पंजीकृत अभ्यर्थी बदल सकेंगे विकल्प

    राजकीय आईटीआई की प्रवेश प्रक्रिया के प्रथम, द्वितीय एवं तृतीय चरण में अचयनित अथवा चयनित होने के बावजूद प्रवेश न ले पाने वाले अभ्यर्थी परिषद की वेबसाइट पर उपलब्ध लिंक के माध्यम से अपनी पंजीकरण संख्या और जन्मतिथि दर्ज कर रिक्त व्यवसायों एवं इच्छित संस्थानों के लिए पुनरीक्षित विकल्प भर सकेंगे। अभ्यर्थियों को लिंग, उपवर्ग एवं शैक्षिक अर्हता संबंधी विवरण भी पुनः पंजीकृत करने का अवसर मिलेगा। यदि कोई अभ्यर्थी नए विकल्प दर्ज नहीं करता है तो उसे मूल आवेदन में दिए गए विकल्पों के आधार पर ही पंचम चरण की सीट आवंटन प्रक्रिया में शामिल किया जाएगा। इसके अलावा राजकीय संस्थानों में पहले प्रवेश लेने के बाद किसी कारणवश नाम कटवा चुके अभ्यर्थी भी इस चरण में आवेदन कर सकेंगे।

    नए अभ्यर्थियों को भी मिलेगा मौका

    राजकीय एवं निजी आईटीआई में नए सिरे से आवेदन करने वाले अभ्यर्थियों को परिषद की वेबसाइट पर जाकर ऑनलाइन फॉर्म भरना होगा। आवेदन के बाद डेबिट कार्ड, क्रेडिट कार्ड, इंटरनेट बैंकिंग अथवा यूपीआई के माध्यम से यूनियन बैंक ऑफ इंडिया के पेमेंट गेटवे से शुल्क जमा किया जा सकेगा। शुल्क भुगतान के बाद अभ्यर्थी आवेदन पत्र का प्रिंट आउट प्राप्त कर सकेंगे।

    श्रेणीवार निर्धारित है आवेदन शुल्क

    सामान्य एवं पिछड़ा वर्ग के अभ्यर्थियों के लिए पंजीकरण शुल्क 300 रुपये, अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति के अभ्यर्थियों के लिए 250 रुपये तथा सभी महिला अभ्यर्थियों के लिए 100 रुपये निर्धारित किया गया है। ऑनलाइन आवेदन एवं विकल्प भरने की प्रक्रिया 6 अक्टूबर 2026 से 11 अक्टूबर 2026 की रात 12 बजे तक उपलब्ध रहेगी।

    रिक्त सीटों की जानकारी वेबसाइट पर होगी उपलब्ध

    अधिशासी निदेशक अभिषेक सिंह ने बताया कि चतुर्थ चरण के बाद बची रिक्त सीटों का जनपदवार, संस्थानवार और व्यवसायवार विवरण परिषद की अधिकृत वेबसाइट पर देखा जा सकता है। अभ्यर्थी संबंधित आईटीआई के कार्यालय से भी रिक्त सीटों की जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। प्रदेश के सभी राजकीय एवं निजी आईटीआई के प्रधानाचार्यों को निर्देश दिए गए हैं कि वे अपने संस्थानों में रिक्त सीटों की व्यवसायवार अद्यतन स्थिति अनिवार्य रूप से सूचना पट पर प्रदर्शित करें, ताकि अभ्यर्थियों को विकल्प चयन में किसी प्रकार की परेशानी न हो।

    कौशल प्रशिक्षण के जरिए रोजगार की राह आसान करने पर जोर

    योगी सरकार प्रदेश के युवाओं को पारंपरिक शिक्षा के साथ-साथ व्यावसायिक एवं कौशल प्रशिक्षण से जोड़कर रोजगार और स्वरोजगार के अवसर उपलब्ध कराने पर लगातार जोर दे रही है। आईटीआई जैसे संस्थानों में तकनीकी प्रशिक्षण युवाओं को उद्योगों की जरूरत के अनुरूप कुशल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। पंचम चरण की प्रवेश प्रक्रिया के जरिए रिक्त सीटों को भरने से अधिक से अधिक युवाओं को स्किल डेवलपमेंट और रोजगारपरक प्रशिक्षण से जुड़ने का अवसर मिलेगा।

  • यूपी होगा वैश्विक व्यापार का नया केंद्र, स्थानीय उद्योगों को मिलेगी वैश्विक बाजार की सीधी पहुंच

    यूपी होगा वैश्विक व्यापार का नया केंद्र, स्थानीय उद्योगों को मिलेगी वैश्विक बाजार की सीधी पहुंच

    यमुना एक्सप्रेसवे क्षेत्र में विकसित होगी इंटरनेशनल ट्रेड सिटी

    चीन की यीवू इंटरनेशनल ट्रेड सिटी की तर्ज पर होगा विकास, योगी सरकार की ‘लोकल से ग्लोबल’ की सोच को मिलेगी नई गति

    यूपी होगा वैश्विक व्यापार का नया केंद्र, स्थानीय उद्योगों को मिलेगी वैश्विक बाजार की सीधी पहुंच

    उत्पादों के प्रदर्शन, बिक्री और निर्यात के लिए उपलब्ध होगा समर्पित प्लेटफॉर्म

    लखनऊ, 
     उत्तर प्रदेश में औद्योगिक विकास को नई गति देने और प्रदेश के स्थानीय उत्पादों को देश-दुनिया के बाजार से जोड़ने की दिशा में योगी सरकार लगातार कदम उठा रही है। इसी क्रम में यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यीडा) क्षेत्र में चीन की यीवू (Yiwu) इंटरनेशनल ट्रेड सिटी की तर्ज पर इंटरनेशनल ट्रेड सिटी विकसित करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल की जा रही है। हाल में संपन्न यीडा की बोर्ड मीटिंग में इस परियोजना की परिकल्पना की गई है। प्रस्तावित सिटी को व्यापार, उद्योग और निर्यात के एक नए वैश्विक केंद्र के रूप में विकसित किए जाने की योजना है।

    इंटरनेशनल ट्रेड सिटी के माध्यम से क्षेत्र के औद्योगिक उत्पादों को एक ऐसा संगठित और स्वीकृत बाजार उपलब्ध होगा, जहां उत्पादों का प्रदर्शन, बिक्री और निर्यात एक ही प्लेटफॉर्म से किया जा सकेगा। इससे स्थानीय उद्यमियों और औद्योगिक इकाइयों को नए खरीदारों तक पहुंच बनाने के साथ ही अंतरराष्ट्रीय व्यापार के अवसर प्राप्त होंगे।

    स्थानीय उत्पादों को मिलेगा वैश्विक बाजार
    योगी सरकार की औद्योगिक नीति का प्रमुख लक्ष्य उत्तर प्रदेश को केवल बड़े निवेश का केंद्र बनाना ही नहीं, बल्कि यहां तैयार होने वाले उत्पादों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंचाना भी है। इंटरनेशनल ट्रेड सिटी इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कड़ी साबित हो सकती है। प्रस्तावित इंटरनेशनल ट्रेड सिटी में विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े औद्योगिक उत्पादों के लिए व्यवस्थित बाजार और प्रदर्शन की सुविधा विकसित किए जाने की परिकल्पना है। इससे उत्पादकों को अपने उत्पाद सीधे देश-विदेश के खरीदारों के सामने प्रस्तुत करने का अवसर मिलेगा। साथ ही निर्यातकों और संभावित विदेशी खरीदारों के बीच व्यावसायिक संपर्क बढ़ाने में भी मदद मिलेगी।

    यीवू की तर्ज पर व्यापार का बड़ा प्लेटफॉर्म
    चीन के यीवू इंटरनेशनल ट्रेड सिटी को दुनिया के प्रमुख थोक व्यापार केंद्रों में गिना जाता है, जहां बड़ी संख्या में उत्पादों के लिए एक संगठित बाजार उपलब्ध है। इसी अवधारणा को ध्यान में रखते हुए यमुना एक्सप्रेसवे क्षेत्र में प्रस्तावित इंटरनेशनल ट्रेड सिटी को विकसित करने की दिशा में पहल की जा रही है। इसका उद्देश्य एक ऐसा वन-स्टॉप ट्रेडिंग डेस्टिनेशन तैयार करना है, जहां विभिन्न औद्योगिक उत्पादों के प्रदर्शन, कारोबार और संभावित निर्यात के लिए सुविधाएं एक ही स्थान पर उपलब्ध हो सकें।

    जेवर एयरपोर्ट और औद्योगिक कॉरिडोर का मिलेगा लाभ
    यमुना एक्सप्रेसवे क्षेत्र में तेजी से विकसित हो रहे औद्योगिक एवं बुनियादी ढांचे के बीच इंटरनेशनल ट्रेड सिटी की परिकल्पना को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। विस्तार ले रहा नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट भी भविष्य में व्यापार और लॉजिस्टिक्स की संभावनाओं को मजबूत करने वाला प्रमुख आधार बन सकता है। एक्सप्रेसवे कनेक्टिविटी, औद्योगिक क्षेत्रों और एयर कार्गो जैसी सुविधाओं के विकास से उत्पादों की आवाजाही और अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंच को बेहतर बनाने में मदद मिलने की उम्मीद है। इससे क्षेत्र में व्यापारिक गतिविधियों के विस्तार के साथ नई औद्योगिक इकाइयों और निवेश की संभावनाएं भी बढ़ेंगी।

    एमएसएमई और स्थानीय उद्यमियों को सबसे बड़ा लाभ
    इंटरनेशनल ट्रेड सिटी का सबसे महत्वपूर्ण लाभ सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) और स्थानीय उद्यमियों को मिल सकता है। अक्सर छोटे उद्यमों के सामने अपने उत्पादों को बड़े बाजार और अंतरराष्ट्रीय खरीदारों तक पहुंचाने की चुनौती रहती है। प्रस्तावित ट्रेड सिटी ऐसे उद्यमियों के लिए मार्केट एक्सेस का नया माध्यम बन सकती है। यहां उन्हें अपने उत्पादों को प्रदर्शित करने, नए खरीदारों से संपर्क करने और व्यापारिक नेटवर्क का विस्तार करने का अवसर मिलेगा। इससे स्थानीय स्तर पर उत्पादन को बढ़ावा मिलने के साथ रोजगार के नए अवसर भी सृजित हो सकते हैं।

    निवेश से लेकर निर्यात तक मजबूत इकोसिस्टम
    योगी सरकार के कार्यकाल में उत्तर प्रदेश में एक्सप्रेसवे, एयरपोर्ट, औद्योगिक पार्क और लॉजिस्टिक्स इन्फ्रास्ट्रक्चर के विकास पर विशेष जोर दिया गया है। इंटरनेशनल ट्रेड सिटी की परिकल्पना को इसी व्यापक औद्योगिक इकोसिस्टम से जोड़कर देखा जा रहा है। उद्देश्य यह है कि प्रदेश में आने वाला निवेश केवल उत्पादन इकाइयों की स्थापना तक सीमित न रहे, बल्कि उत्पादन से बाजार और बाजार से वैश्विक निर्यात तक पूरी वैल्यू चेन विकसित हो। इंटरनेशनल ट्रेड सिटी इस दिशा में एक महत्वपूर्ण कड़ी के रूप में काम कर सकती है, जहां उत्पादकों, खरीदारों, निर्यातकों और व्यापारिक संस्थाओं को एक साझा मंच मिल सकेगा।

    ‘ओडीओपी’ को भी मिल सकती है नई उड़ान
    उत्तर प्रदेश के एक जनपद-एक उत्पाद (ओडी
    ओपी) जैसे अभियानों के लिए भी इस प्रकार का अंतरराष्ट्रीय व्यापार केंद्र महत्वपूर्ण साबित हो सकता है। प्रदेश के विभिन्न जिलों के विशिष्ट उत्पादों को बड़े बाजारों और अंतरराष्ट्रीय खरीदारों तक पहुंचाने के लिए यह एक अतिरिक्त मंच उपलब्ध करा सकता है। इससे स्थानीय उत्पादों की ब्रांडिंग, बाजार विस्तार और निर्यात की संभावनाओं को बल मिल सकता है। खासतौर पर ऐसे उत्पाद जिनमें अंतरराष्ट्रीय बाजार की मांग मौजूद है, उन्हें संगठित व्यापारिक प्लेटफॉर्म मिलने से नए अवसर पैदा हो सकते हैं।

    उत्तर प्रदेश को ग्लोबल ट्रेड हब बनाने की दिशा में कदम
    योगी सरकार की औद्योगिक विकास की रणनीति में उत्तर प्रदेश को निवेश, उत्पादन और निर्यात के प्रमुख केंद्र के रूप में स्थापित करने पर जोर है। इससे एक ओर जहां स्थानीय उद्योगों को नए बाजार मिलेंगे, वहीं दूसरी ओर उत्तर प्रदेश की वैश्विक व्यापार क्षमता को भी मजबूती मिल सकती है। आने वाले समय में यह क्षेत्र उद्योग, व्यापार, लॉजिस्टिक्स और निर्यात गतिविधियों के संगम के रूप में विकसित हो सकता है। यही नहीं, इसके विकास से प्रत्यक्ष रूप से व्यापारिक गतिविधियां बढ़ने के साथ ही लॉजिस्टिक्स, वेयरहाउसिंग, परिवहन, पैकेजिंग, मार्केटिंग, निर्यात सेवाओं और अन्य सहायक क्षेत्रों में भी रोजगार एवं कारोबार के अवसर पैदा होने की संभावना है।

  • स्वच्छ और हरित स्कूलों की दिशा में यूपी ने रचा नया रिकॉर्ड, SHVR में 1.62 लाख विद्यालयों की भागीदारी

    स्वच्छ और हरित स्कूलों की दिशा में यूपी ने रचा नया रिकॉर्ड, SHVR में 1.62 लाख विद्यालयों की भागीदारी

    योगी सरकार में स्वच्छ-हरित विद्यालयों का बढ़ा कारवां, एसएचवीआर में 1.62 लाख स्कूलों ने दर्ज कराई भागीदारी

    स्वच्छ एवं हरित विद्यालय रेटिंग में प्रदेश के 2.66 लाख स्कूलों में 1.86 लाख में शुरू हुई प्रक्रिया, 1.79 लाख का पंजीकरण

    1,62,054 विद्यालयों ने दर्ज कराई सहभागिता, प्रदेश का अंतिम पूर्णता प्रतिशत 60.83 प्रतिशत

     कानपुर देहात 83.17% के साथ प्रदेश में शीर्ष पर, मुजफ्फरनगर 82.24% और भदोही 77.62% के साथ टॉप-3 में

    कौशांबी 75.22% और ललितपुर 73.78% के साथ टॉप-5 में शामिल 

    – स्वच्छता, हरित परिवेश और पर्यावरणीय चेतना को विद्यालयी गतिविधियों से जोड़ने पर जोर

    लखनऊ,
     मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश के विद्यालयों में स्वच्छता, हरित परिवेश और पर्यावरणीय चेतना को बढ़ावा देने की दिशा में व्यापक सहभागिता सामने आई है। ‘स्वच्छ एवं हरित विद्यालय रेटिंग’ यानी एसएचवीआर (SHVR—स्वच्छ एवं हरित विद्यालय रेटिंग) 2026-27 में 5 अक्टूबर तक प्रदेश के कुल 2,66,408 विद्यालयों में 1,86,196 में प्रक्रिया शुरू, 1,79,793 विद्यालयों का पंजीकरण और 1,62,054 विद्यालयों द्वारा सहभागिता पूर्ण की गई है। प्रदेश का अंतिम पूर्णता प्रतिशत 60.83 प्रतिशत दर्ज हुआ है।

    एसएचवीआर 2026-27 की यह स्थिति उत्तर प्रदेश के विद्यालयों में स्वच्छता, हरित परिवेश और पर्यावरणीय चेतना के प्रति व्यापक सहभागिता को रेखांकित करती है। प्रदेश के अनेक जनपदों ने उल्लेखनीय प्रदर्शन करते हुए स्वच्छ एवं हरित विद्यालयों की दिशा में अपनी सक्रिय भागीदारी दर्ज कराई है।

    स्वच्छता से हरित चेतना तक विद्यालयों की भागीदारी
    एसएचवीआर के माध्यम से विद्यालयों में स्वच्छ एवं हरित वातावरण को प्रोत्साहित करने के लिए निर्धारित गतिविधियों और मानकों में विद्यालयों की सहभागिता को दर्ज किया जाता है। जनपदवार रिपोर्ट प्रदेश के सभी 75 जनपदों के विद्यालयों की स्थिति को दर्शाती है।

    कानपुर देहात प्रदेश में शीर्ष पर
    जनपदवार आंकड़ों में कानपुर देहात 83.17% अंतिम पूर्णता प्रतिशत के साथ प्रदेश में प्रथम स्थान पर है। जनपद के कुल 2,876 विद्यालयों में से 2,392 विद्यालयों ने पूर्णता दर्ज की है। मुजफ्फरनगर 82.24% के साथ दूसरे और भदोही 77.62% के साथ तीसरे स्थान पर है। इसके बाद कौशांबी 75.22% और ललितपुर 73.78% के साथ शीर्ष पांच में शामिल हैं।

    टॉप-10 में शामिल जनपद
    अंतिम पूर्णता प्रतिशत के आधार पर टॉप-10 में कानपुर देहात (83.17%), मुजफ्फरनगर (82.24%), भदोही (77.62%), कौशांबी (75.22%), ललितपुर (73.78%), बाराबंकी (73.52%), रामपुर (71.90%), मऊ (71.50%), बुलंदशहर (70.25%) और सहारनपुर (68.90%) शामिल हैं।

    पूर्वांचल से पश्चिमी उत्तर प्रदेश तक सहभागिता
    पूर्वांचल से पश्चिमी उत्तर प्रदेश तक विद्यालयों की व्यापक सहभागिता दर्ज हुई है। वाराणसी में 67.58%, मिर्जापुर में 68.29%, सोनभद्र में 68.51%, गोरखपुर में 60.83%, बुलंदशहर में 70.25% और सहारनपुर में 68.90% अंतिम पूर्णता प्रतिशत दर्ज किया गया है। इन आंकड़ों से विभिन्न क्षेत्रों में स्वच्छ एवं हरित विद्यालयों की दिशा में विद्यालयों की सक्रिय भागीदारी सामने आती है।

    1.86 लाख विद्यालयों में शुरू हुई भागीदारी
    प्रदेश के कुल 2,66,408 विद्यालयों में 1,86,196 विद्यालयों में एसएचवीआर की प्रक्रिया शुरू हुई, जबकि 1,79,793 विद्यालयों ने पंजीकरण कराया और 1,62,054 विद्यालयों ने इसे पूर्ण किया। यह आंकड़ा प्रदेशभर में एसएचवीआर 2026-27 के प्रति विद्यालयों की व्यापक और सक्रिय सहभागिता को रेखांकित करता है।

    कोट:
    स्वच्छ एवं हरित विद्यालय स्वस्थ और जागरूक पीढ़ी की आधारशिला हैं। एसएचवीआर के माध्यम से विद्यालयों में स्वच्छता, हरित परिवेश और पर्यावरणीय चेतना को और मजबूत किया जा रहा है।
    संदीप सिंह, राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार), बेसिक शिक्षा

    कोट:
    एसएचवीआर विद्यालयों को स्वच्छता और पर्यावरणीय मानकों के प्रति सक्रिय बनाने का प्रभावी माध्यम है। व्यापक सहभागिता से स्वच्छ एवं हरित विद्यालयों की दिशा में सकारात्मक बदलाव को गति मिलेगी।
    मोनिका रानी, महानिदेशक, स्कूल शिक्षा

  • यूपी में 2100 से अधिक कैंटीन बनीं आत्मनिर्भरता की ‘प्रेरणा’, दस हजार परिवारों का बनीं सहारा

    यूपी में 2100 से अधिक कैंटीन बनीं आत्मनिर्भरता की ‘प्रेरणा’, दस हजार परिवारों का बनीं सहारा

    लखनऊ

    सरकारी दफ्तरों में आने-जाने वाले लोगों की रोजाना की आवाजाही अब ग्रामीण महिलाओं की कमाई का जरिया बन रही है। उत्तर प्रदेश में 2100 से अधिक प्रेरणा कैंटीन स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं के लिए रोजगार और कारोबार का नया मंच बन चुकी हैं। इसके साथ ही आज ये दस हजार परिवारों का सहारा बन गई हैं। 

    विकास भवन, कलेक्ट्रेट और ब्लॉक कार्यालयों जैसे सरकारी परिसरों में संचालित इन कैंटीनों ने समूहों के लिए स्थानीय स्तर पर स्थायी बाजार तैयार किया है। उत्तर प्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन (UPSRLM) के सहयोग से संचालित इस पहल के जरिये महिलाओं को अपने ही क्षेत्र में कारोबार का अवसर मिल रहा है।

    रोज की फुटफॉल बन रही कमाई का आधार

    प्रेरणा कैंटीनों के लिए सरकारी कार्यालयों की रोजाना की फुटफॉल कारोबार का आधार बन रही है। कर्मचारियों और आगंतुकों की आवाजाही से कैंटीनों को स्थानीय ग्राहक मिल रहे हैं। इससे स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं को रोजगार के साथ कारोबार चलाने का अनुभव भी मिल रहा है। खास बात यह है कि इसके लिए समूहों को दूर बाजार तलाशने के बजाय सरकारी परिसरों में ही कारोबार का मंच उपलब्ध कराया जा रहा है।

    गांव के समूहों के लिए खुला नया बाजार

    प्रेरणा कैंटीनों का विस्तार विकासखंड स्तर तक होने से गांव के स्वयं सहायता समूहों को स्थानीय स्तर पर कारोबार का अवसर मिल रहा है। सरकारी परिसरों को ग्रामीण आजीविका से जोड़ते हुए यहां समूहों के उत्पादों और सेवाओं के लिए नया बाजार तैयार हुआ है। इस पहल से महिलाओं को केवल कैंटीन संचालन तक सीमित न रखकर उन्हें उद्यमिता से जोड़ने पर भी जोर दिया जा रहा है।

    कलेक्ट्रेट से स्वास्थ्य केंद्रों तक नेटवर्क

    प्रेरणा कैंटीनों का नेटवर्क सरकारी कार्यालयों के साथ स्वास्थ्य केंद्रों तक पहुंच चुका है। विकास भवन, कलेक्ट्रेट और ब्लॉक कार्यालयों के अलावा पीएचसी और सीएचसी परिसरों में भी कैंटीन संचालित की जा रही हैं। इससे सरकारी कार्यालयों में आने वाले कर्मचारियों और आगंतुकों के साथ स्वास्थ्य केंद्रों में आने वाले लोगों को भी भोजन और नाश्ते की सुविधा मिल रही है। इस विस्तार ने स्वयं सहायता समूहों के लिए रोजगार के दायरे को और बढ़ाया है। कैंटीनों को व्यवस्थित रूप देने और महिलाओं को बेहतर सुविधाओं के साथ कारोबार संचालित करने का अवसर देने पर जोर है। मॉडल कैंटीन के माध्यम से रोजगार को आगे कारोबार और उद्यमिता से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है।

    किफायती भोजन के साथ सेवा भी : अरुण कुमार

    उत्तर प्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के मिशन निदेशक अरुण कुमार ने बताया कि प्रेरणा कैंटीनों के माध्यम से कर्मचारियों और आगंतुकों को स्वच्छ, पौष्टिक और घर जैसा किफायती भोजन व नाश्ता उपलब्ध कराया जा रहा है। इस तरह कैंटीनें एक ओर सरकारी परिसरों की जरूरत पूरी कर रही हैं तो दूसरी ओर स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं के लिए रोजगार का माध्यम बन रही हैं।

    रोजगार, सेवा और बाजार तीनों को एक मंच

    मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के आत्मनिर्भरता और महिला सशक्तीकरण के विजन के अनुरूप प्रेरणा कैंटीनों का यह विस्तार ग्रामीण महिलाओं को स्थानीय स्तर पर रोजगार और कारोबार से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है। सरकारी परिसरों की नियमित जरूरत और ग्रामीण महिलाओं की आजीविका को जोड़कर तैयार हुआ यह मॉडल रोजगार, सेवा और बाजार तीनों को एक साथ मंच दे रहा है।

  • पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना में उत्तर प्रदेश बना देश में नंबर-1

    पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना में उत्तर प्रदेश बना देश में नंबर-1

    लखनऊ

    प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना के क्रियान्वयन में उत्तर प्रदेश ने ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल करते हुए 8,76,500 से अधिक रूफटॉप सोलर प्लांट स्थापित कर संचयी इंस्टॉलेशन के मामले में गुजरात को पीछे छोड़ दिया है। इसके साथ ही योजना के तहत संचयी रूफटॉप सोलर इंस्टॉलेशन में उत्तर प्रदेश देश में प्रथम स्थान पर पहुंच गया है। प्रदेश की यह उपलब्धि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में सौर ऊर्जा को जन-जन तक पहुंचाने के लिए किए जा रहे निरंतर एवं समन्वित प्रयासों का परिणाम है। 

    उत्तर प्रदेश में पिछले कई महीनों से प्रधानमंत्री सूर्य घर योजना के तहत रूफटॉप सोलर इंस्टॉलेशन की गति लगातार तेज रही है। जिला स्तर पर नियमित समीक्षा, डिस्कॉम स्तर पर निरीक्षण एवं मीटरिंग की निगरानी, बैंकिंग फॉलोअप, वेंडर समन्वय तथा लंबित प्रकरणों के समाधान को प्राथमिकता दी जा रही है। योजना मे यूपीनेडा द्वारा 8000 से अधिक वेंडर्स को इमपैनल्ड कर एक लाख से अधिक लोगों को रोजगार भी दिया गया जिसका प्रत्यक्ष प्रभाव जनपदों की राष्ट्रीय रैंकिंग मे देखा जा रहा है। प्रदेश के कुल 15 जनपद देश के टॉप 100 मे शामिल है जिसमे उल्लेखनीय रूप से जनपद लखनऊ देश मे प्रथम स्थान एवं जनपद वाराणसी देश मे दसवे स्थान पर है।

    प्रतिदिन 1.32 करोड़ यूनिट से अधिक स्वच्छ बिजली

    प्रदेश में स्थापित रूफटॉप सोलर क्षमता 2,942 मेगा वॉट से अधिक हो चुकी है। 4.5 यूनिट प्रति किलोवाट प्रतिदिन के मानक के आधार पर यह क्षमता प्रतिदिन 1.32 करोड़ यूनिट से अधिक स्वच्छ बिजली पैदा करने की क्षमता रखती है। ₹6.50 प्रति यूनिट के समतुल्य मूल्य पर यह बिजली ₹8.5 करोड़ से अधिक प्रतिदिन तथा ₹3,100 करोड़ से अधिक वार्षिक बिजली के बराबर है। इससे लाखों परिवारों को बिजली खर्च में राहत मिलने के साथ प्रदेश की ऊर्जा अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिल रही है।

    11,700 एकड़ से अधिक भूमि की बचत

    रूफटॉप सोलर की सबसे बड़ी विशेषताओं में से एक यह है कि बिजली उत्पादन के लिए अलग से बड़े भू-भाग की आवश्यकता नहीं होती क्योंकि यह घरों की छत पर लगाया जाता है। 4 एकड़ प्रति मेगा वॉट के मानक के आधार पर प्रदेश में स्थापित वर्तमान रूफटॉप सोलर क्षमता से 11,700 एकड़ से अधिक भूमि की बचत होती है। इस प्रकार घरों की छतों और उपलब्ध भवन संरचनाओं पर सौर संयंत्र लगाकर बड़े भू भाग के उपयोग की आवश्यकता कम की जा रही है, जिनका उपयोग अन्य व्यावसायिक गतिविधियों के लिए किया जा सकेगा।

    34 लाख टन से अधिक कार्बन उत्सर्जन में कमी

    रूफटॉप सोलर से उत्पादित स्वच्छ बिजली के आधार पर प्रदेश में 34 लाख टन से अधिक वार्षिक CO₂ उत्सर्जन में कमी का अनुमान है। इस पर्यावरणीय लाभ को वृक्ष-समतुल्यता के रूप में देखें तो यह 15 करोड़ से अधिक पेड़ों द्वारा एक वर्ष में अवशोषित कार्बन के बराबर बैठता है। यह वृक्ष-समतुल्यता एक अनुमानात्मक पर्यावरणीय तुलना है।

     8,000 से अधिक वेंडर्स, 1 लाख से अधिक को प्रत्यक्ष रोजगार

    प्रधानमंत्री सूर्य घर योजना ने प्रदेश में बड़े पैमाने पर ग्रीन जॉब इकोसिस्टम तैयार किया है। 8,000 से अधिक यूपीनेडा वेंडर्स के माध्यम से सोलर सिस्टम की बिक्री, डिजाइन, इंजीनियरिंग, इंस्टॉलेशन, इलेक्ट्रिकल कार्य, कमीशनिंग और आफ्टर-सेल्स सर्विस से जुड़े क्षेत्रों में 1 लाख से अधिक प्रत्यक्ष रोजगार के अवसर सृजित हो रहे हैं। वहीं योजना का रोजगार प्रभाव केवल वेंडर्स और इंस्टॉलेशन तक सीमित नहीं है। लॉजिस्टिक्स, ट्रांसपोर्टेशन, वेयरहाउसिंग, पैकेजिंग, लोडिंग-अनलोडिंग, सामग्री आपूर्ति, स्ट्रक्चर फैब्रिकेशन, सर्वेक्षण, साइट असेसमेंट, ग्राहक सेवा, मरम्मत एवं रखरखाव जैसे क्षेत्रों में भी बड़ी संख्या में अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर पैदा हुए हैं। इस प्रकार योजना ने प्रदेश में युवाओं के लिए ग्रीन स्किल और ग्रीन जॉब्स का एक नया बाजार तैयार किया है।

    केंद्र और राज्य की सब्सिडी से सीधे लाभार्थियों को लाभ

    इस योजना के तहत उत्तर प्रदेश में केन्द्रीय सब्सिडी ₹5,722 करोड़ से अधिक तथा राज्य सब्सिडी ₹2,000 करोड़ से अधिक की वित्तीय सहायता का प्रभाव सामने आया है। केंद्र और राज्य सरकार की वित्तीय सहायता का प्रत्यक्ष लाभ लाभार्थियों तक पहुंचने से घरेलू उपभोक्ताओं के लिए रूफटॉप सोलर अपनाना अधिक सुलभ हुआ है। रूफटॉप सोलर अब केवल पर्यावरण संरक्षण का माध्यम नहीं, बल्कि परिवार के बिजली खर्च में कमी, ऊर्जा आत्मनिर्भरता और घरेलू आर्थिक सशक्तीकरण का प्रभावी साधन बन रहा है।

    सूर्य घर से बदल रही है उत्तर प्रदेश की ऊर्जा अर्थव्यवस्था

    8,76,500 से अधिक रूफटॉप सोलर प्लांट, 2,942 मेगा वॉट से अधिक स्थापित क्षमता, प्रतिदिन 1.32 करोड़ से अधिक यूनिट स्वच्छ बिजली, 11,700 एकड़ से अधिक भूमि-संरक्षण का प्रभाव, 34 लाख टन से अधिक संभावित वार्षिक कार्बन बचत, 8,000 से अधिक वेंडर्स और 1 लाख से अधिक प्रत्यक्ष रोजगार प्रधानमंत्री सूर्य घर योजना उत्तर प्रदेश में अब एक व्यापक ग्रीन इकोनॉमिक ट्रांसफॉर्मेशन का आधार बन चुकी है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मार्गदर्शन में उत्तर प्रदेश ने रूफटॉप सोलर को जनभागीदारी, रोजगार, उद्योग, ऊर्जा बचत और पर्यावरण संरक्षण से जोड़ते हुए देश के सामने एक प्रभावी मॉडल प्रस्तुत किया है।

  • जमीन का Land Use बदलवाने के नियम बदले, 6000 वर्गमीटर तक बोर्ड देगा मंजूरी; फीस

    जमीन का Land Use बदलवाने के नियम बदले, 6000 वर्गमीटर तक बोर्ड देगा मंजूरी; फीस

    लखनऊ
    यूपी में लैंड यूज बदलवाना अब आसान और सस्ता हो गया है। अगर आप 6000 वर्ग मीटर तक के क्षेत्रफल का भू-उपयोग परिवर्तन कराना चाहते हैं तो आपको लखनऊ का चक्कर नहीं लगाना होगा। योगी सरकार ने 6000 वर्ग मीटर क्षेत्रफल सीमा तक के भू-उपयोग परिवर्तन का अधिकार विकास प्राधिकरणों के बोर्ड को दे दिया है। शासन ने एक और बड़ी राहत यह दी है कि अब भू-उपयोग परिवर्तन का शुल्क भी काफी कम कर दिया है। ये दरें पांच प्रतिशत से 50 प्रतिशत तक की गईं हैं। हालांकि इस बड़ी राहत के साथ यह भी शर्त रखी है कि किसी भी मौजूदा भू-उपयोग का सिर्फ एक प्रतिशत तक ही परिवर्तन बोर्ड कर सकता है।

    अभी तक भू-उपयोग परिवर्तन कराने के लिए सारी फाइलों को शासन को ही भेजना पड़ता था। केडीए बोर्ड बस इसकी संस्तुति करता था। जब तक भू-उपयोग परिवर्तन होता था या इसके आवेदनों की फाइलों को निरस्त कर दिया जाता था तब तक विकास कार्यों से संबंधित सामग्रियों की दरें भी काफी बढ़ चुकी होती थीं। शासन ने 6000 वर्ग मीटर तक की जमीनों के आवेदकों को प्राधिकरण बोर्ड स्तर से ही हरी झंडी देने का अधिकार दे दिया है। इस संबंध में प्रमुख सचिव पी. गुरुप्रसाद का आदेश कानपुर विकास प्राधिकरण (केडीए) में भी पहुंच गया है। इसकी अधिसूचना भी जारी हो गई है।

    परिवर्तन शुल्क की किस्तों में भी राहत
    अब भू-उपयोग परिवर्तन शुल्क की किश्तों में भी राहत दी गई है। पहले इस शुल्क को चार तिमाही किस्तों में 12 प्रतिशत वार्षिक ब्याज की दर से साधारण ब्याज के साथ एक वर्ष में दिया जा सकता था मगर अब चार तिमाही किश्तों में एमसीएलआर प्लस वन प्रति वर्ष की दर से भुगतान किया जा सकेगा। उपाध्यक्ष को आवेदन करने पर यह अवधि एक वर्ष और बढ़ सकती है।

    ग्रीन वर्ज और सार्वजनिक सुविधाओं में बदलाव नहीं
    शासन ने यह भी शर्त रख दी है कि ग्रीन वर्ज और सार्वजनिक सुविधाओं के लिए निर्धारित की गई जमीन का उपयोग नहीं बदला जाएगा। मसलन जो जमीन एसटीपी, पावर स्टेशन, बिजली घर, बस अड्डा, बस स्टॉप और पार्क आदि के लिए मास्टर प्लान में निर्धारित की गई है उसमें कोई बदलाव नहीं होगा। यह भी देखा जाएगा कि जिस भू-उपयोग के मद की जमीन का भू-उपयोग परिवर्तित किया जाना है उसमें भी मास्टर प्लान में उस मद में दी गई कुल जमीन का एक प्रतिशत से ज्यादा आवेदन न हो।

    लैड यूज बदलने के लिए इस तरह से देना होगा चार्ज
    केडीए के सचिव अभय कुमार पांडेय के अनुसार शासन का आदेश आ चुका है। नोटिफिकेशन में दिए गए नियमों और संशोधित किए नियमों का पालन कराने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। केडीए बोर्ड को 6000 वर्ग मीटर तक के क्षेत्रफल का भू उपयोग बदलने का अधिकार मिल गया है। इसके अनुपालन की प्रक्रिया की तैयारी की जा रही है।

  • UP राज्यसभा चुनाव में BJP का बड़ा दांव, 8 उम्मीदवारों की सूची जारी; हरदीप सिंह पुरी को नहीं मिली जगह

    UP राज्यसभा चुनाव में BJP का बड़ा दांव, 8 उम्मीदवारों की सूची जारी; हरदीप सिंह पुरी को नहीं मिली जगह

    लखनऊ 

    भारतीय जनता पार्टी ने उत्तर प्रदेश में राज्यसभा चुनाव के लिए अपनी लिस्ट जारी कर दी है। इसमें कुल आठ उम्मीदवारों के नाम शामिल हैं। हालांकि इसमें हरदीप सिंह पुरी का नाम शामिल नहीं है। इस लिस्ट में दो ब्राह्मण चेहरे हैं, जबकि एक राजपूत चेहरा भी है। वहीं, दो महिलाओं को भी जगह दी गई है।

    उत्तर प्रदेश से राज्यसभा चुनाव के लिए बीजेपी ने 8 उम्मीदवारों के नामों का ऐलान किया है. पार्टी ने धर्मपाल सिंह, राधाकांत ओझा, प्रकाश पाल, विद्यासागर सोनकर, गोपी कृष्ण पांडेय, प्रियंका सिंह रावत, राम प्रताप सिंह चौहान और श्रुति गंगवार को उम्मीदवार बनाया है. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सभी प्रत्याशियों को जीत की अग्रिम शुभकामनाएं दी हैं। 

    बीजेपी की ओर से जारी सूची में 3 OBC, 2 SC और 3 सामान्य वर्ग के उम्मीदवार शामिल हैं. इनमें 2 महिलाएं भी हैं. वहीं, उम्मीदवारों में 2 ब्राह्मण और 1 राजपूत शामिल हैं. OBC वर्ग में 1 लोधी, 1 पाल और 1 कुर्मी उम्मीदवार हैं। 

    भाजपा के केंद्रीय कार्यालय की ओर से जारी आधिकारिक विज्ञप्ति में इन आठ नामों की घोषणा की गई। पार्टी ने उम्मीदवारों के चयन में संगठनात्मक अनुभव के साथ क्षेत्रीय और सामाजिक समीकरणों को भी साधने की कोशिश की है। भाजपा की ओर से घोषित उम्मीदवारों में धर्मपाल सिंह का नाम प्रमुख है। इसके अलावा राधाकांत ओझा, प्रकाश पाल, विद्यसागर सोनकर, गोपी कृष्ण पांडेय, प्रियंका सिंह रावत, राम प्रताप सिंह चौहान और श्रुति गंगवार को उम्मीदवार बनाया गया है।

    धर्मपाल सिंह लोधी बिरादरी से आते हैं. वह योगी सरकार में कैबिनेट मंत्री हैं. प्रकाश पाल संगठन में क्षेत्रीय मंत्री हैं और पाल बिरादरी से आते हैं. ओबीसी समुदाय में पाल को गडेरिया बिरादरी माना जाता है. विद्यासागर सोनकर दलित बिरादरी से हैं और पार्टी के अहम पदों पर रह चुके हैं. वह पूर्व MLC और मछलीशहर से पूर्व सांसद रह चुके हैं. इसके अलावा वह पार्टी के पूर्व महामंत्री भी हैं. इस लिस्ट में  मंत्री हरदीप पुरी-बीएल वर्मा का नाम नहीं का नाम नहीं आया है। 

    16 अक्टूबर को वोटिंग
    उत्तर प्रदेश में राज्यसभा की 10
    सीटों के लिए 16 अक्टूबर को मतदान होना है। इन सीटों पर मौजूदा सदस्यों का कार्यकाल नवंबर में पूरा हो रहा है। चुनाव कार्यक्रम के मुताबिक नामांकन की अंतिम तिथि छह अक्टूबर है। 403 सदस्यीय उत्तर प्रदेश विधानसभा में मौजूदा संख्या बल के आधार पर भाजपा और उसके सहयोगी दलों की स्थिति मजबूत है। चुनाव में एक राज्यसभा सीट जीतने के लिए करीब 37 विधायकों के मतों की जरूरत है। भाजपा गठबंधन के पास आठ सीटों पर जीत की स्थिति बनाने के लिए पर्याप्त संख्या बल है, हालांकि मौजूदा राजनीतिक समीकरणों में आठवीं सीट को लेकर मुकाबला दिलचस्प माना जा रहा है।

    धर्मपाल सिंह
    धर्मपाल सिंह बरेली के आंवला से बीजेपी के वरिष्ठ नेता हैं. वह कई बार विधायक रह चुके हैं और फिलहाल यूपी सरकार में कैबिनेट मंत्री हैं. उनके पास पशुपालन और डेयरी विकास विभाग की जिम्मेदारी है। 

    विद्यासागर सोनकर
    विद्यासागर सोनकर जौनपुर और पूर्वी यूपी के वरिष्ठ बीजेपी नेता हैं. वह 1996 में 11वीं लोकसभा के लिए सैदपुर (SC) से सांसद चुने गए थे। 

    प्रियंका सिंह रावत
    प्रियंका सिंह रावत बीजेपी की पूर्व लोकसभा सांसद हैं. उन्होंने 2014 का लोकसभा चुनाव बाराबंकी से जीता था. उन्होंने कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पीएल पुनिया को हराया था। 

    राम प्रताप सिंह चौहान
    राम प्रताप सिंह चौहान यूपी बीजेपी के वरिष्ठ संगठन नेता हैं. जून 2026 में यूपी बीजेपी में हुए बदलाव के दौरान उन्हें प्रदेश महामंत्री बनाया गया था. अगस्त 2026 में उन्हें पश्चिमी यूपी के संगठनात्मक क्षेत्र की जिम्मेदारी दी गई। 

    प्रकाश पाल
    प्रकाश पाल बीजेपी के वरिष्ठ संगठन नेता और यूपी बीजेपी OBC मोर्चा के अध्यक्ष हैं. वह पहले बीजेपी के कानपुर-बुंदेलखंड संगठनात्मक क्षेत्र की जिम्मेदारी भी संभाल चुके हैं। 

    इस बार नए चेहरों को मिला मौका
    इस बार बीजेपी ने राज्यसभा चुनाव के लिए सभी नए चेहरों को मौका दिया है. पुराने चेहरों को इस बार उम्मीदवार नहीं बनाया गया है. इनमें अरुण सिंह, सीमा द्विवेदी, बीएल वर्मा, हरदीप सिंह पुरी, नीरज शेखर, बृजलाल, दिनेश शर्मा और गीता शाक्य शामिल हैं. दिनेश शर्मा अब अंडमान और निकोबार द्वीप समूह के उपराज्यपाल हैं। 

    सपा का तीसरी सीट पर जोर
    समाजवादी पार्टी ने पहले ही प्रो. रामगोपाल यादव और धनराज परिमल नाथवानी को उम्मीदवार बनाया है। सपा के पास अपने संख्या बल के आधार पर दो सीटें जीतने की स्थिति है। हालांकि पार्टी तीसरी सीट के लिए भी प्रयास कर सकती है, जिससे चुनाव में राजनीतिक जोड़-तोड़ और क्रॉस वोटिंग की संभावनाओं को लेकर चर्चाएं तेज हैं। राज्यसभा चुनाव को अगले वर्ष होने वाले उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा और सपा के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। दोनों दलों की नजर अपने-अपने विधायकों को एकजुट रखने के साथ-साथ दूसरे खेमे में सेंध लगाने पर भी है।

    मजबूत संख्याबल का संकेत
    भाजपा ने आठ उम्मीदवार उतारकर जहां अपने मजबूत संख्या बल का संकेत दिया है, वहीं उम्मीदवारों के चयन में अलग-अलग सामाजिक और क्षेत्रीय समूहों को प्रतिनिधित्व देने की कोशिश भी दिखाई दे रही है। अब निगाहें नामांकन प्रक्रिया पूरी होने और सपा की आगे की रणनीति पर हैं। राज्यसभा चुनाव में यदि सभी 10 सीटों पर मुकाबला होता है तो 16 अक्टूबर को मतदान के बाद ही तस्वीर पूरी तरह साफ होगी। फिलहाल भाजपा ने अपने आठ उम्मीदवारों के नाम घोषित कर चुनावी मैदान को औपचारिक रूप से सजा दिया है।

  • इगलास से अतरौली तक बदलेगी बस स्टेशनों की पहचान, महापुरुषों के नाम पर होंगे नए नाम

    इगलास से अतरौली तक बदलेगी बस स्टेशनों की पहचान, महापुरुषों के नाम पर होंगे नए नाम

    अलीगढ़
    यूपी के अलीगढ़ के आठ प्रमुख बस स्टेशनों को अब नई पहचान मिलने जा रही है। आजादी के अमृत महोत्सव के तहत जिले के इतिहास में महत्वपूर्ण योगदान देने वाले शहीदों और महापुरुषों के नाम पर बस स्टेशनों के नामकरण की प्रक्रिया शुरू की गई है। चार साल बाद एक बार फिर बस स्टेशनों के नाम बदलने की कवायद तेज हुई है। क्षेत्रीय प्रबंधक (आरएम) रोडवेज की ओर से आठ बस स्टेशनों के नए नामों की संस्तुति शासन को भेज दी गई है। शासन से मंजूरी मिलने के बाद इन बस स्टेशनों की पहचान उनके नए नाम से होगी।

    इस पहल का उद्देश्य स्थानीय इतिहास के उन नायकों को नई पीढ़ी तक पहुंचाना है, जिनका योगदान महत्वपूर्ण होने के बावजूद समय के साथ लोगों की स्मृतियों से दूर होता गया। बस स्टेशन जैसे सार्वजनिक स्थानों के नामकरण के माध्यम से इनके संघर्ष और योगदान को आम लोगों के बीच पहुंचाने की योजना है। इससे रोजाना हजारों यात्रियों को इन महापुरुषों और शहीदों के नामों से रूबरू होने का अवसर मिलेगा। प्रस्ताव के मुताबिक इगलास बस स्टेशन का नाम राजा अमानी जी बस स्टेशन रखा जाएगा। इसी तरह अकराबाद बस स्टेशन का नाम अमर शहीद ठाकुर मंगल सिंह-महताब सिंह बस स्टेशन करने की संस्तुति की गई है।

    मसूदाबाद बस स्टेशन का नाम नारायण पंडित जी बस स्टेशन प्रस्तावित है। शहर के महत्वपूर्ण सैटेलाइट बस स्टेशन, सूतमील चौराहा का नाम मोहनलाल गौतम बस स्टेशन रखने का प्रस्ताव है। वहीं गभाना बस स्टेशन का नाम छोटे लाल गौतम बस स्टेशन किया जाना प्रस्तावित है। शहर के गांधीपार्क बस स्टेशन को राष्ट्रपिता महात्मा गांधी बस स्टेशन के नाम से पहचान देने की संस्तुति भेजी गई है। इसी क्रम में खैर बस स्टेशन का नाम ठाकुर टोडर सिंह बस स्टेशन और अतरौली बस स्टेशन का नाम बनारसी दास बस स्टेशन किए जाने का प्रस्ताव शासन को भेजा गया है। इन नामों के जरिए जिले के अलग-अलग क्षेत्रों से जुड़े ऐतिहासिक व्यक्तित्वों को सार्वजनिक पहचान देने का प्रयास किया गया है।

    चार साल बाद फिर बदलेगी पहचान
    बस स्टेशनों के नाम बदलने की प्रक्रिया जिले में करीब चार साल बाद फिर सामने आई है। प्रस्ताव तैयार कर शासन को भेजे जाने के बाद अब निगाहें स्वीकृति पर टिकी हैं। शासन की मंजूरी मिलने के बाद रोडवेज स्तर पर नए नामों को रिकॉर्ड, साइन बोर्ड और अन्य संबंधित व्यवस्थाओं में दर्ज किया जाएगा।

    यात्रियों के साथ नई पीढ़ी को भी मिलेगा संदेश
    बस स्टेशनों पर रोजाना बड़ी संख्या में यात्री पहुंचते हैं। ऐसे में इन स्थानों का नाम महापुरुष व शहीदों के नाम पर रखने से उनके योगदान की जानकारी व्यापक स्तर पर पहुंचने की उम्मीद है। खासतौर पर स्थानीय इतिहास से जुड़े व्यक्तित्वों को सार्वजनिक स्थलों के माध्यम से पहचान मिलने से नई पीढ़ी में उनके बारे में जानने की रुचि बढ़ सकती है। शासन से प्रस्ताव को मंजूरी मिलने के बाद अलीगढ़ के आठ बस स्टेशनों की पहचान उनके नए नामों के साथ इतिहास व वर्तमान को जोड़ने वाली नजर आएगी।

  • किसानों को मिलेगा फायदा! कारखियाव पैक हाउस के संचालन में तेजी के निर्देश, निदेशक ने किया निरीक्षण

    किसानों को मिलेगा फायदा! कारखियाव पैक हाउस के संचालन में तेजी के निर्देश, निदेशक ने किया निरीक्षण

    राज्य कृषि उत्पादन मंडी परिषद के निदेशक इंटीग्रेटेड पैक हाउस, कारखियाव का किया स्थलीय निरीक्षण

    इंटीग्रेटेड पैक हाउस के संचालन में किसी प्रकार की न हो अनावश्यक देरीः जितेन्द्र प्रताप सिंह 

    लखनऊ
                राज्य कृषि उत्पादन मंडी परिषद के निदेशक  जितेंद्र प्रताप सिंह ने आज इंटीग्रेटेड पैक हाउस, कारखियाव, वाराणसी का स्थलीय निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान उन्होंने परिसर में उपलब्ध सुविधाओं, निर्माण कार्यों की स्थिति एवं संचालन से संबंधित व्यवस्थाओं का जायजा लिया तथा संबंधित अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।

                निरीक्षण के दौरान निदेशक  सिंह ने इंटीग्रेटेड पैक हाउस को तत्काल संचालित किए जाने के निर्देश दिए, ताकि स्थापित सुविधा का निर्धारित उद्देश्यों के अनुरूप प्रभावी उपयोग सुनिश्चित किया जा सके। उन्होंने स्पष्ट किया कि पैक हाउस का संचालन शीघ्र प्रारंभ होने से संबंधित गतिविधियों को गति मिलेगी तथा उपलब्ध अवस्थापना का बेहतर उपयोग सुनिश्चित किया जा सकेगा।

                निरीक्षण के दौरान परिसर में स्थापित सेनेटरी वेयर की गुणवत्ता संतोषजनक नहीं पाई गई। इस पर निदेशक ने संबंधित अधिकारियों एवं कार्यदायी संस्था को गुणवत्ता में आवश्यक सुधार सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कार्यों की गुणवत्ता पर विशेष ध्यान देते हुए निर्धारित मानकों के अनुरूप कार्य सुनिश्चित किए जाने पर जोर दिया।

                परिसर की आंतरिक सड़कों की सतह निरीक्षण के दौरान संतोषजनक पाई गई। हालांकि, यह तथ्य संज्ञान में आया कि सड़क के माध्यम से वर्षा का पानी परिसर में आने की समस्या उत्पन्न हो रही है। निदेशक ने इस समस्या को गंभीरता से लेते हुए इसके स्थायी समाधान के लिए आवश्यक कार्यवाही सुनिश्चित करने के निर्देश दिए, ताकि भविष्य में परिसर में जलभराव की स्थिति उत्पन्न न हो।

                निदेशक  जितेंद्र प्रताप सिंह ने मुख्य अभियंता को निर्देशित किया कि निरीक्षण में सामने आई समस्याओं के संबंध में आवश्यक परीक्षण एवं तकनीकी निरीक्षण कराते हुए उनके निराकरण के लिए प्रभावी कार्यवाही सुनिश्चित की जाए। साथ ही, समस्त बिंदुओं पर की गई कार्यवाही एवं प्रस्तावित समाधान से संबंधित विस्तृत रिपोर्ट 10 दिवस के भीतर निदेशालय को प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए।

                निरीक्षण के दौरान निदेशक ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि इंटीग्रेटेड पैक हाउस से संबंधित सभी व्यवस्थाएं निर्धारित मानकों के अनुरूप सुनिश्चित करते हुए इसके संचालन में किसी प्रकार की अनावश्यक देरी न हो। उन्होंने गुणवत्ता, उपयोगिता एवं स्थायी समाधान को प्राथमिकता देते हुए सभी आवश्यक कार्य समयबद्ध ढंग से पूर्ण कराने पर विशेष जोर दिया।

     

  • वृंदावन में दीपक की मौत का रहस्य गहराया, नए CCTV में चौथी मंजिल की ओर जाते दिखे शिष्य

    वृंदावन में दीपक की मौत का रहस्य गहराया, नए CCTV में चौथी मंजिल की ओर जाते दिखे शिष्य

    मथुरा

    मथुरा के वृंदावन स्थित प्रेमानंद महाराज के गुरु कृपा कुंज आश्रम में रसिक दुलारी शरण उर्फ दीपक लोधी की मौत का मामला लगातार उलझता जा रहा है. अब घटना से जुड़ा एक और CCTV वीडियो सामने आया है, जिसने कई सवाल खड़े कर दिए हैं. वीडियो में दीपक लोधी अपना प्राइवेट पार्ट काटने के बाद सीढ़ियों से ऊपर की ओर जाता दिखाई दे रहा है. दावा किया जा रहा है कि इसके तुरंत बाद उसने चौथी मंजिल से छलांग लगा दी थी। 

    हालांकि, CCTV फुटेज सामने आने के बाद लगाए जा रहे इन दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है. पूरे घटनाक्रम की तस्वीर पुलिस जांच पूरी होने के बाद ही साफ हो सकेगी. फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही बना हुआ है कि आखिर दीपक लोधी ने ऐसा खौफनाक कदम क्यों उठाया। 

    प्राइवेट पार्ट काटने के बाद कहां गया दीपक?
    सामने आए CCTV फुटेज में दीपक लोधी सीढ़ियों से ऊपर की ओर जाता नजर आ रहा है. बताया जा रहा है कि यह फुटेज उस घटना के बाद का है, जिसमें उसने कथित तौर पर अपना प्राइवेट पार्ट काट लिया था. इसके बाद उसके चौथी मंजिल तक पहुंचने और वहां से नीचे गिरने की बात कही जा रही है. अगर यह घटनाक्रम जांच में सही पाया जाता है तो यह वीडियो उसकी मौत से पहले के आखिरी पलों की अहम कड़ी साबित हो सकता है। 

    मौत के पीछे की वजह अब भी रहस्य
    दीपक लोधी ने आखिर ऐसा कदम क्यों उठाया, इसका जवाब अभी तक नहीं मिल पाया है. परिवार और उसके करीबियों की ओर से लगातार सवाल उठाए जा रहे हैं. उसकी मौत के बाद से ही आश्रम के बाहर लोगों का आक्रोश भी देखने को मिल रहा है. लोग मामले की निष्पक्ष जांच और घटना की पूरी सच्चाई सामने लाने की मांग कर रहे हैं। 

    9 दिन बाद आया ट्रस्ट का बयान
    इस बीच राधा केलि कुंज ट्रस्ट की ओर से सोशल मीडिया पर एक अपील जारी की गई है. आश्रम प्रबंधन ने पुष्टि की है कि यह अपील उसी की ओर से जारी की गई है. बयान में कहा गया है कि हाल में हुई घटना से पूज्य महाराज जी और समस्त परिकर अत्यंत आहत हैं. ट्रस्ट ने मृतक के परिवार के प्रति सहानुभूति जताई है और पुलिस प्रशासन के साथ घटना की निष्पक्ष एवं तथ्यात्मक जांच में पूर्ण सहयोग देने की बात कही है। 

    ट्रस्ट ने श्रद्धालुओं, साधकों और आम लोगों से अपुष्ट जानकारी, अफवाह और अनुमान के आधार पर आश्रम या पूज्य महाराज जी की छवि को धूमिल करने वाला प्रचार नहीं करने की अपील की है. ट्रस्ट ने भरोसा जताया है कि पुलिस की निष्पक्ष जांच के बाद घटना के वास्तविक तथ्य सामने आएंगे। 

    पुलिस जांच पर भी उठ रहे सवाल
    घटना के करीब 9 दिन बाद ट्रस्ट की ओर से बयान आने को लेकर भी चर्चा तेज है. सवाल उठ रहा है कि अगर घटना के तुरंत बाद स्थिति स्पष्ट की जाती तो क्या विवाद इतना बढ़ता? दूसरी तरफ पुलिस की कार्रवाई को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं. लोगों का कहना है कि आत्महत्या के मामले में अब तक मुकदमा दर्ज क्यों नहीं किया गया। 

    फिलहाल नया CCTV फुटेज सामने आने के बाद दीपक लोधी की मौत का रहस्य और गहरा गया है. उसने अपना प्राइवेट पार्ट क्यों काटा, चौथी मंजिल तक कैसे पहुंचा और मौत से पहले उसके साथ क्या हुआ, इन सवालों के जवाब पुलिस जांच के बाद ही सामने आ सकेंगे।