Category: उत्तर प्रदेश

  • उमेश पाल हत्याकांड: अरमान से पूछताछ में खुलेंगे कई राज, गुड्डू मुस्लिम-शाइस्ता परवीन से जुड़े सवालों के जवाब की उम्मीद

    उमेश पाल हत्याकांड: अरमान से पूछताछ में खुलेंगे कई राज, गुड्डू मुस्लिम-शाइस्ता परवीन से जुड़े सवालों के जवाब की उम्मीद

    प्रयागराज
    प्रयागराज के उमेश पाल हत्याकांड में पांच लाख रुपये का इनामी आरोपी अरमान अब प्रयागराज पुलिस की कस्टडी में है. करीब साढ़े तीन साल तक गया की जेल में बंद रहने के बाद उसे प्रयागराज लाया गया है. अरमान की अहमियत सिर्फ इस वजह से नहीं है कि उस पर उमेश पाल हत्याकांड में शामिल होने का आरोप है, बल्कि पुलिस के मुताबिक वारदात वाले दिन वही बाइक चला रहा था जिस पर बमबाज गुड्डू मुस्लिम बैठा था. इसके अलावा अरमान को अतीक अहमद की पत्नी शाइस्ता परवीन का बेहद करीबी बताया जाता रहा है. ऐसे में पुलिस की पूछताछ का फोकस सिर्फ उमेश पाल हत्याकांड तक सीमित रहने के बजाय गुड्डू मुस्लिम और शाइस्ता के लंबे समय से फरार रहने की कड़ी तक पहुंच सकता है। 

    43 महीने बाद खुला एक ऐसा दरवाजा, जिसके पीछे छिपे हैं कई सवाल
    24 फरवरी 2023… प्रयागराज की सड़क पर उमेश पाल और उनके दो सरकारी गनरों की हत्या हुई. कैमरों में कैद हुई तस्वीरों ने पूरे हत्याकांड को समझने की एक अहम कड़ी पुलिस को दी. बम बरसा रहा था गुड्डू मुस्लिम और बाइक चला रहा था अरमान. वारदात के बाद दोनों उसी बाइक से फरार हुए थे. अरमान अतीक अहमद के नेटवर्क से जुड़ा बताया गया और बाद में उसकी तलाश में पांच लाख रुपये का इनाम घोषित हुआ.  लेकिन कहानी में सबसे बड़ा ट्विस्ट इसके बाद आया. जिस अरमान को यूपी पुलिस तीन साल से तलाश रही थी, वह यूपी से बाहर किसी नए नाम या पहचान के साथ नहीं, बल्कि बिहार की गया जेल में बंद था. अब उसे पुलिस प्रयागराज लेकर आ रही है। 

    सबसे बड़ा सवाल, गुड्डू मुस्लिम कहां गया
    उमेश पाल हत्याकांड के बाद कई आरोपी पुलिस की गिरफ्त में आए, कुछ मुठभेड़ में मारे गए और कुछ के खिलाफ अदालत में कार्रवाई आगे बढ़ी. लेकिन गुड्डू मुस्लिम और शाइस्ता परवीन अब भी पुलिस की पकड़ से बाहर हैं. गुड्डू मुस्लिम पर पांच लाख रुपये का इनाम है, जबकि शाइस्ता परवीन पर भी इनामी राशि घोषित की गई थी. पुलिस ने दोनों की तलाश में कई राज्यों में दबिश दी, लेकिन उनका पता नहीं चल सका. अब पुलिस के हाथ ऐसा व्यक्ति लगा है जो गुड्डू मुस्लिम के बेहद करीब रहा था. अरमान ने गुड्डू को अपनी बाइक पर बैठाकर उमेश पाल के घर तक पहुंचा था. यानी पुलिस के सामने अब एक ऐसा आरोपी है जो वारदात से ठीक पहले गुड्डू के साथ था और वारदात के बाद उसके साथ ही वहां से निकला था. यही वजह है कि अरमान की पूछताछ इस मामले में बेहद महत्वपूर्ण हो सकती है। 

    क्या अरमान बता सकता है गुड्डू मुस्लिम का आखिरी ठिकाना 
    पुलिस के लिए पहला बड़ा सवाल यही हो सकता है कि 24 फरवरी 2023 की वारदात के बाद गुड्डू मुस्लिम कहां गया? दोनों साथ भागे थे. ऐसे में पुलिस यह जानना चाहेगी कि वारदात के बाद दोनों के रास्ते कब और कहां अलग हुए. क्या गुड्डू पहले से तय किसी ठिकाने पर पहुंचा था? किसने उसे वहां पहुंचाने में मदद की? क्या उसके पास पहले से सुरक्षित ठिकानों की पूरी सूची थी? क्या फरारी के दौरान उसे किसी ने आर्थिक या लॉजिस्टिक मदद पहुंचाई?

    इन सवालों के जवाब अगर अरमान की पूछताछ में मिलते हैं तो जांच की दिशा एक बार फिर बदल सकती है. हालांकि यह स्पष्ट नहीं है कि अरमान के पास वर्तमान में गुड्डू मुस्लिम के बारे में कोई ऐसी जानकारी है या नहीं. यह पुलिस की पूछताछ के बाद ही सामने आएगा. दूसरा बड़ा सवाल हो सकता है कि शाइस्ता की फरारी का नेटवर्क कौन चला रहा था ? अरमान को लेकर एक और बात उसे इस केस में महत्वपूर्ण बनाती है. पुलिस सूत्रों के हवाले से सामने आया है कि अरमान शाइस्ता परवीन के बेहद करीब रहता था और उसके मूवमेंट तथा सुरक्षा व्यवस्था में साथ रहता था। 

    गया का ही रहने वाला है अरमान 
    उमेश पाल के हत्याकांड में शामिल मुख्य आरोपी शूटर अरमान बिहार के गया जिला के कठोत्तर तालाब का रहने वाला है. और उमेश पाल के हत्या के बाद अरमान उत्तर प्रदेश से गया आ गया. गया शहर के कटारी तालाब के पास एक अंडा व्यवसाय पर गोली चलाने के पुराने मामले में गया कोर्ट में 27 फरवरी 2023 को आत्मसमर्पण कर दिया. जहां से उसको गया के सेंट्रल जेल में 27 फरवरी 2023 को भेज दिया गया था और अभी तक अरमान गया के सेंट्रल जेल में बंद है. प्रयागराज के धूमनगंज थाना की पुलिस को गुप्त सूचना मिली कि उमेश पाल का हत्याकांड में शामिल आरोपी बिहार के गया जिला के सेंट्रल जेल में बंद है तो उत्तर प्रदेश की पुलिस गया के सेंट्रल जेल पहुंची और गया के सेंट्रल जेल में बंद अरमान से पूछताछ कर उमेश पाल के हत्याकांड में शामिल आरोपी अरमान की पहचान की. यूपी पुलिस ने पांच लाख के इनामी हत्याकांड के आरोपी अरमान को अपने साथ उत्तर प्रदेश ले जाने के लिए कोर्ट में ट्रांजिट रिमांड के लिए अर्जी भी दी. अब पुलिस उसे लेकर प्रयागराज के लिए रवाना हो चुकी है। 

    परिवार वालों को एनकाउंटर का डर 
    वही उमेश पाल के हत्या के आरोपी अरमान के पिता समीम मलिक ने बताया की मेरा बेटा अरमान उत्तर प्रदेश के उमेश पाल हत्या में शामिल था और वहां से भाग कर वह गया आया . गया में एक पुराने मामले भोलू अंडा वाला के केश में गया कोर्ट में आत्मसमर्पण किया था. मगर तीन -चार साल के बाद उत्तर प्रदेश की पुलिस अरमान को उत्तर प्रदेश ले जाने के लिए आई थी. अब हम लोगों को डर लग रहा है की उत्तर प्रदेश की पुलिस अरमान को ले जाते समय एनकाउंटर न कर दे क्योंकि उत्तर प्रदेश की पुलिस आरोपी के हाथ में बंदूक देकर एनकाउंटर कर देती है. उन्होंने कहा कि उमेश पाल के हत्या के चार आरोपियों को उत्तर प्रदेश की पुलिस ने एनकाउंटर कर दिया है और यह पांचवां आरोपी है तो हमें लग रहा है की इसका भी एनकाउंटर न कर दें. उन्होंने कहा कि अरमान उत्तर प्रदेश में एक बर्फ फैक्ट्री में काम करता था मगर वहां से कुछ लोगों ने उसको अतीक अहमद के साथ जुड़ा दिया था. मेरा बेटा अरमान अतीक अहमद के साथ नहीं रहता था. मेरा बेटा अरमान अतीक अहमद के बीवी शाहिस्ता और मली भाई के साथ रहता था। 

  • संवाद, संकल्प और सफलता के मूलमंत्र के साथ यूपी राइज का हुआ आयोजन

    संवाद, संकल्प और सफलता के मूलमंत्र के साथ यूपी राइज का हुआ आयोजन

    झांसी

     संवाद, संकल्प और सफलता के मूलमंत्र के साथ बुंदेलखंड विश्वविद्यालय के गांधी सभागार में सोमवार को यूपी राइज कार्यक्रम का आयोजन हुआ। बुंदेलखंड विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर मुकेश पांडेय ने कार्यक्रम का उद्घाटन किया। आयोजन में नवाचारी युवाओं ने अपने स्टार्टअप आइडियाज को प्रस्तुत किया। कार्यक्रम में बुंदेलखंड विश्वविद्यालय के साथ ही आसपास के कई जिलों से आए विद्यार्थियों एवं नवाचारियों ने हिस्सा लिया। 

    इस मौके पर युवाओं और नवाचारियों को योगी सरकार की उन योजनाओं के बारे में जानकारी दी गई, जिसके माध्यम से वे अपने स्टार्टअप के लिए आर्थिक मदद या व्यवसाय के लिए ऋण प्राप्त कर सकते है। कार्यक्रम स्थल पर इन योजनाओं में पंजीकरण कराने के लिए संबंधित विभागों की ओर से काउंटर लगाए गए।

    इस आयोजन में 12 स्टार्टअप्स की टीम ने अपने आइडियाज प्रस्तुत किए। इनमें से अभिषेक और निशांत के स्टार्टअप ऑन मिंट को विनर घोषित किया गया जबकि जबकि जुनैद रिजवान और सागर के स्टार्टअप इक्षू को रनर अवार्ड दिया गया। आयोजन में बड़ी संख्या में स्टार्टअप फाउंडर, स्टूडेंट, विश्वविद्यालय के शिक्षक, स्टार्टअप मेंटोर, एक्सपर्ट उपस्थित रहे। नवाचारी युवाओं ने अपने आइडिया प्रस्तुत किए जिसे लेकर विशेषज्ञों ने सुझाव दिए और योगी सरकार की योजनाओं के माध्यम से आर्थिक मदद प्राप्त करने के तरीके बताए। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित कवि मुकुल शर्मा ने युवाओं को अपनी रचनाएं सुनाकर युवाओं का मनोरंजन किया।

    मेंटोर एवं निर्णायक मंडल के तौर पर कनेक्स्ट मारकॉम के डायरेक्टर अलाय रिजवी, स्टूफिट के सीईओ डॉ सैयद शुजात हैदर जाफरी, इंस्टीट्यूशंस इनोवेशन काउंसिल के प्रेसिडेंट डॉ नूर आलम खान उपस्थित रहे। इसके अलावा बुंदेलखंड विश्वविद्यालय के प्रोफेसर एम एम सिंह, डॉ संदीप एवं अन्य उपस्थित रहे।

    कार्यक्रम को संबोधित करते हुए बुंदेलखंड विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर मुकेश पांडेय ने कहा कि विकसित भारत 2047 की संकल्पना को पूरा करने में यूपी राइज जैसे आयोजन मददगार सिद्ध होंगे। युवाओं को अवसरों का लाभ उठाने के लिए तैयार रहना होगा। यह आयोजन अवसर, नवाचार और आत्मनिर्भरता की प्रेरणा देने का काम करेगा।

  • UP Old Age Pension: 60 साल की उम्र पर मिलेगा ₹1,500, जानें आय और दस्तावेज की शर्तें

    UP Old Age Pension: 60 साल की उम्र पर मिलेगा ₹1,500, जानें आय और दस्तावेज की शर्तें

     लखनऊ
     उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने राज्य के बुजुर्गों की आर्थिक सुरक्षा और उनके सम्मान को ध्यान में रखते हुए वृद्धावस्था पेंशन योजना में एक बेहद बड़ा और ऐतिहासिक फैसला लिया है। सरकार ने वृद्धावस्था पेंशन की राशि बढ़ाकर 1500 प्रतिमाह कर दी है।

    प्रदेश सरकार ने न केवल वृद्धजनों की मासिक पेंशन राशि में शानदार इजाफा किया है, बल्कि इस योजना को बिना किसी रुकावट के लगातार चलाने के लिए अनुपूरक बजट में 1500 करोड़ रुपये के बड़े फंड की मंजूरी भी दे दी है।

    सरकार के इस कदम से राज्य के लाखों वरिष्ठ नागरिकों को सीधा फायदा पहुंचेगा और उन्हें आर्थिक तंगी का सामना नहीं करना पड़ेगा।

    अब उत्तर प्रदेश के पात्र बुजुर्गों (Old Age Scheme) को हर महीने मिलने वाली 1000 रुपये की पेंशन को बढ़ाकर सीधे 1500 रुपये प्रति माह कर दिया गया है। यानी अब हमारे बुजुर्गों को सालाना पूरे 18,000 रुपये की वित्तीय सहायता मिलेगी, जिससे उन्हें दूसरों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा।

    पेंशन भेजने का तरीका भी हुआ आसान
    इसके साथ ही, पेंशन बांटने के तरीके को भी पहले से कहीं ज्यादा पारदर्शी और आसान बना दिया गया है। पहले जहां तीन महीने में एक साथ 3000 रुपये दिए जाते थे, वहीं अब बढ़े हुए पैसों को 1500-1500 रुपये की दो किस्तों में जारी किया जाएगा।

    सबसे अच्छी बात यह है कि पेंशन का सारा पैसा डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर यानी DBT के जरिए सीधे लाभार्थियों के बैंक खातों में भेजा जाएगा, ताकि बिना किसी बिचौलिए या झंझट के बुजुर्गों को उनका हक सीधे उनके हाथ में मिल सके।
    किसे मिलेगा पेंशन का लाभ, पात्रता और शर्तें

    पेंशन का नियमित लाभ प्राप्त करने के लिए लाभार्थियों को तकनीकी और प्रशासनिक प्रक्रियाओं का पूरा होना अनिवार्य है। जैसे कि लाभार्थी का बैंक खाता आधार से लिंक होना अनिवार्य है।

    डीबीटी (DBT) से भुगतान प्राप्त करने के लिए बैंक खाते का NPCI पोर्टल पर मैप होना जरूरी है।

    इसके अलावा सबसे जरूरी बात कि e-KYC सत्यापन। यदि किसी वृद्धजन की पेंशन रुकती है, तो उन्हें तुरंत अपना e-KYC अपडेट कराना होगा।

    यदि पेंशन खाते में न आए तो क्या करें?
    अगर किसी पात्र बुजुर्ग के खाते में बढ़ी हुई पेंशन की किस्त नहीं पहुंची है, तो सरकार के दिशानिर्देशों के अनुसार:

        सबसे पहले अपने नजदीकी जन सेवा केंद्र (CSC) या बैंक शाखा में जाकर e-KYC और NPCI मैपिंग का स्टेटस चेक कराएं।
        अपने संबंधित जनपद के समाज कल्याण विभाग के कार्यालय से संपर्क कर आवेदन विवरण और आधार विवरण का मिलान कराएं।
        योजना के आधिकारिक यूपी सामाजिक पेंशन पोर्टल पर जाकर ऑनलाइन स्टेटस ट्रैकिंग करें।

     

  • 34 हजार वालंटियर संभालेंगे दीप प्रज्वलन और व्यवस्थाओं की जिम्मेदारी, प्रमुख मंदिरों की एलईडी सजावट से निखरेगा अयोध्या धाम

    34 हजार वालंटियर संभालेंगे दीप प्रज्वलन और व्यवस्थाओं की जिम्मेदारी, प्रमुख मंदिरों की एलईडी सजावट से निखरेगा अयोध्या धाम

    अयोध्या

    दीपों की कतारें, रोशनी से जगमगाते मंदिर और सरयू तट पर आस्था का अद्भुत नजारा- अयोध्या एक बार फिर भव्य दीपोत्सव की तैयारियों में जुट गई है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में इस वर्ष 10वां दीपोत्सव पांच से सात नवंबर तक आयोजित किया जाएगा। राम की पैड़ी सहित करीब दो किलोमीटर क्षेत्र में 33 लाख मिट्टी के दीप प्रज्वलित किए जाएंगे। आयोजन को भव्य और व्यवस्थित स्वरूप देने के लिए प्रशासन और संबंधित विभागों की तैयारियां तेज हो गई हैं। दीपों की निर्बाध रोशनी के लिए 65 लाख बातियों और 55 हजार लीटर तेल की व्यवस्था की जा रही है। इसके साथ ही दीप प्रज्वलन में इस्तेमाल होने वाली टी-शर्ट, मोमबत्ती, 150 किलो कपूर समेत अन्य आवश्यक सामग्री की व्यवस्था के लिए प्रक्रिया आगे बढ़ चुकी है। आयोजन की व्यवस्थाओं को लेकर पांच टेंडर जारी किए गए हैं, जिनमें दीप-सामग्री, स्टेज निर्माण, सजावट और अन्य आवश्यक व्यवस्थाएं शामिल हैं।

    राम की पैड़ी से सरयू तट तक दिखेगी दीपों की भव्य छटा

    श्री अयोध्या जी तीर्थ विकास परिषद की ओर से इस बार भी दीपोत्सव का भव्य आयोजन कराया जाएगा। राम की पैड़ी पर विशेष स्टेज तैयार किया जाएगा, जहां सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित होंगे। दीपों से सजे घाट और रोशनी से नहाए प्रमुख मंदिर अयोध्या धाम की भव्यता को और बढ़ाएंगे। प्रमुख मंदिरों की एलईडी सजावट की तैयारियां भी आगे बढ़ रही हैं। सरयू तट से लेकर विभिन्न घाटों तक रोशनी की विशेष व्यवस्था की जाएगी। दीपों और रोशनी से सजी रामनगरी आस्था के साथ अपनी सांस्कृतिक विरासत और विकास की तस्वीर भी प्रस्तुत करेगी।

    34 हजार वालंटियर संभालेंगे दीपोत्सव की जिम्मेदारी

    दीपोत्सव को सफल बनाने में इस बार 34 हजार वालंटियर महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। ये स्वयंसेवक दीप प्रज्वलन, व्यवस्थाओं को सुचारु बनाए रखने और श्रद्धालुओं की सुविधा का ध्यान रखेंगे। आयोजन में शामिल होने वाले 34 हजार छात्रों के खान-पान की भी व्यवस्था की जा रही है। इससे युवा पीढ़ी को भी इस भव्य आयोजन से जुड़ने और दीपोत्सव का हिस्सा बनने का अवसर मिलेगा।

    सुरक्षा, यातायात और स्वच्छता पर भी विशेष फोकस

    इस बार दीपोत्सव को पहले से अधिक भव्य और व्यवस्थित बनाने के साथ सुरक्षा, यातायात और स्वच्छता पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है। करीब दो किलोमीटर क्षेत्र में दीपों की पंक्तियों, फूलों की सजावट और प्रकाश व्यवस्था की तैयारियां की जा रही हैं।मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मार्गदर्शन में आयोजित होने वाला यह दीपोत्सव धार्मिक आयोजन के साथ-साथ अयोध्या की सांस्कृतिक पहचान और पर्यटन के लिए भी महत्वपूर्ण है। लाखों श्रद्धालुओं और पर्यटकों के पहुंचने की संभावना को देखते हुए सुविधाओं को बेहतर बनाने पर जोर दिया जा रहा है।

    टेंडर प्रक्रिया पूरी होते ही शुरू होगी सामग्री की आपूर्ति

    अयोध्या जी तीर्थ विकास परिषद के सीईओ जयेंद्र कुमार ने बताया कि टेंडर प्रक्रिया पूरी होने के साथ ही आवश्यक सामग्री की आपूर्ति शुरू हो जाएगी। वालंटियरों के प्रशिक्षण और छात्रों के लिए भोजन व्यवस्था की तैयारियां भी अंतिम चरण में हैं।दीपोत्सव अब अयोध्या की पहचान बन चुका है और हर वर्ष देश-विदेश में इसकी चर्चा होती है। 10वें दीपोत्सव को और अधिक भव्य स्वरूप देने की तैयारियों के बीच नवंबर में रामनगरी 33 लाख दीपों की रोशनी से जगमगाने को तैयार है।

  • बक्शी का तालाब क्षेत्र में बाढ़ प्रभावितों के बीच पहुंचकर बातचीत की, दुख-दर्द जाना और राहत सामग्री वितरित की

    बक्शी का तालाब क्षेत्र में बाढ़ प्रभावितों के बीच पहुंचकर बातचीत की, दुख-दर्द जाना और राहत सामग्री वितरित की

    लखनऊ

     मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोमवार को फैजुल्लागंज से नैमिष तक हवाई सर्वेक्षण कर बाढ़ की विभीषिका देखी, फिर बक्शी का तालाब क्षेत्र में बाढ़ प्रभावितों के बीच पहुंचकर उनका दुख-दर्द जाना और राहत सामग्री का वितरण किया। सीएम यहां स्वास्थ्य शिविर में भी पहुंचे और डॉक्टरों से दवाओं/ व्यवस्थाओं के बारे में जानकारी ली। मुख्यमंत्री कुर्सियों पर बैठे बाढ़ पीड़ित के पास पहुंचे और शासन से मिली राहत सामग्री, अन्न, चिकित्सा आदि सुविधाओं की हकीकत जानी। उन्होंने बच्चों को पास बुलाकर चॉकलेट भी दी। 

    मुख्यमंत्री ने अक्टूबर में आई इस बाढ़ विभीषिका पर चिंता जताई। कहा कि गोमती नदी पर तटबंध बनने से काफी हद तक बाढ़ की विभीषिका को रोका जा सकता है। मुख्यमंत्री ने सिंचाई विभाग के प्रमुख सचिव को फैजुल्लागंज से लेकर नैमिष तक नदी के तट का सर्वे कराते हुए तटबंध बनवाने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि जो गांव तटबंध के बाहर रहे, वहां बरसात का पानी निकालने की उचित व्यवस्था हो। तटबंध बनने के बाद नदी का जलस्तर बढ़े तो अंदर का पानी जमा होकर बीमारी न पैदा करे, बल्कि पंपिंग सेट लगाकर बाहर निकाला जाए। सिंचाई विभाग इन कार्यों का प्रस्ताव बनाकर शीर्घ कार्य प्रारंभ कराए, जिससे आने वाले समय में इस त्रासदी को रोक सकें और बाढ़ की विभीषिका पर अंकुश लगाया जा सके। 

    रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भी फोन कर जताई चिंता 

    सीएम ने आज सुबह रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के फोन आने के बारे में बाढ़ पीड़ितों को अवगत कराया। बाढ़ को लेकर रक्षा मंत्री की चिंता के विषय में भी जानकारी दी। रक्षा मंत्री ने फैजुल्लागंज से नैमिष तक तटबंध बनने से बाढ़ बचाव में मदद कराने के बारे में भी विमर्श किया। इस पर सीएम ने उन्हें बताया कि सरकार ने इसे स्वीकृत कर दिया है, धनराशि अवमुक्त करते हुए यह कार्य जल्द आगे बढ़ाएंगे। ऐसी पुख्ता व्यवस्था करेंगे तो हर सीजन में तटबंध उपयोगी होगा। बरसात में नदी का पानी उधर नहीं आएगा और इधऱ का पानी पंपिंग सेट के जरिए नदी की तरफ डाल दिया जाएगा। सीएम ने कहा कि एलडीए ने ग्रीन कॉरिडोर बनवाया है, यह सड़क और सुरक्षा दोनों का काम कर रहा है। इसी तरह तटबंध पर चलने की भी व्यवस्था कराएंगे।

    स्कूल, मैरिज हॉल आदि में रुकने, भोजन आदि की व्यवस्था करे प्रशासन

    सीएम ने बाढ़ पीड़ितों से अपील की कि संकट की इस घड़ी में हम सभी मिलकर आपदा का सामना करें। गांव से बाहर आए लोगों के लिए खुले में सोने की बजाय स्कूल, मैरिज हॉल में व्यवस्था करें। वहां गर्म भोजन, बच्चों को दूध, गर्भवती महिलाओं को पोषक आहार, पशुओं के चारे, भूसा-चोकर की व्यवस्था हो। पशुओं की सुरक्षा व संरक्षण पर जोर देते हुए सीएम ने कहा कि पानी के कारण पशुओं को होने वाली बीमारी से भी बचाव की व्यवस्था की जाए।

    नदियों के जलस्तर में हुई काफी वृद्धि
    मुख्यमंत्री ने अकड़रिया कला गांव में बाढ़ पीड़ितों से संवाद करते हुए कहाकि 10 दिन में 50 से अधिक जनपदों में भारी बारिश हुई है, जिससे तमाम नदियों के जलस्तर में काफी वृद्धि हुई है। उन्होंने कहा कि अतिवृष्टि में लखनऊ भी था, लेकिन उस दौरान गोमती नदी का जलस्तर इतना नहीं बढ़ा था, लेकिन पीलीभीत, लखीमपुर खीरी, सीतापुर व नेपाल में हुई बारिश के कारण पांच-छह दिन बाद पानी नीचे आने से गोमती नदी का जलस्तर बढ़ गया। इस कारण बख्शी का तालाब, लखनऊ उत्तर, फैजुल्लागंज से लेकर नैमिष तक यह क्षेत्र जल पलावन और बाढ़ से जूझ रहा है। 

    बाढ़ पीड़ितों के साथ खड़ी है डबल इंजन सरकार 

    मुख्यमंत्री ने बाढ़ पीड़ितों को विश्वास दिलाया कि डबल इंजन सरकार आपके साथ खड़ी है। मैं लगातार यहां की स्थिति का आकलन करते हुए इस पर नजर रखा हूं। आज पीड़ित क्षेत्रों में पहुंचकर राहत कार्यों को भी देखा है। हमारे जनप्रतिनिधि निरंतर राहत-बचाव कार्यों में जुटे हैं और प्रशासन के साथ पीड़ितों की हरसंभव मदद कर रहे हैं।  

    हर पीड़ित परिवार के लिए की गई राशन की व्यवस्था 

    मुख्यमंत्री ने बताया कि राहत-बचाव कार्य के लिए प्रशासन को पर्याप्त धनराशि उपलब्ध कराई गई है। बाढ़ से डूबे गांव- मोहल्लों में हर परिवार के लिए सूखा राशन (10 किलो चावल, 10 किलो आटा, 10 किलो आलू, दो किलो अरहर दाल, एक लीटर रिफाइंड/ सरसों का तेल, नमक, मिर्च, मसाला, बरसाती, बाल्टी, लाई-भूजा, मोमबत्ती, माचिस) आदि उपलब्ध कराया गया है। 
    गाय, बकरी, भैंस, बकरी, घोड़ा आदि पालतू पशुओं के चारे, छोटे बच्चों के दूध, स्वास्थ्य/ पशु चिकित्सालय शिविर के लिए भी प्रशासन को निर्देशित किया गया है। 

    हर स्वास्थ्य केंद्र में एंटी स्नेक वेनम, एंटी रैबीज इंजेक्शन उपलब्ध 

    सीएम ने कहा कि हर व्यक्ति की जान बचाना हमारे लिए महत्वपूर्ण है। बरसात में पानी भरने पर सांप-बिच्छू आदि के काटने का खतरा बढ़ जाता है, इसलिए हर स्वास्थ्य केंद्र में एंटी स्नेक वेनम की व्यवस्था की गई है। एंटी रैबीज इंजेक्शन भी उपलब्ध है। डूबने-आकाशीय बिजली से जनहानि पर परिवार को चार लाख की सहायता देने का निर्देश दिया गया है। उन्होंने प्रशासन को निर्देश दिया कि घर क्षतिग्रस्त होने पर प्रधानमंत्री-मुख्यमंत्री आवास, जनहानि, पशुहानि और किसानों की फसल के नुकसान पर सर्वे कराकर किसानों को मुआवजा तत्काल दिलाया जाए, जिससे किसान के साथ सरकार का संबल दिखे। 

    गांवों की सुरक्षा के लिए पुलिस की पेट्रोलिंग, चौकीदार, होमगार्ड, पीआरडी जवान तैनात हों 

    मुख्यमंत्री ने पुलिस को निर्देश दिया कि ग्रामीणों के बाहर आने पर रात में गांवों की सुरक्षा के लिए चौकीदार, होमगार्ड, पीआरडी, पुलिस की पेट्रोलिंग हो और वहां पेट्रोमैक्स जलाए जाएं। कैंप में पेट्रोमैक्स या सोलर लाइट की व्यवस्था कराई जाए, जिससे लोगों को सुविधा मिल सके। उन्होंने आश्वस्त किया कि आपदा पीड़ित चिंतित न हों, सरकार निरंतर राहत सामग्री कराएगी। उन्होंने बाढ़ पीड़ितों को विश्वास दिलाया कि आपदा की घड़ी में सरकार हरसंभव मदद करेगी। सीएम ने सभी के सुखी-स्वस्थ होने की कामना की। 

    इस अवसर पर उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक, विधायक योगेश शुक्ल, डॉ. नीरज बोरा, विधान परिषद सदस्य पवन सिंह चौहान, भाजपा जिलाध्यक्ष विजय मौर्य, इटौंजा के नगर पंचायत अध्यक्ष अखिलेश अवस्थी आदि मौजूद रहे।

  • ग्रीन कॉरिडोर की तर्ज पर फैजुल्लागंज से नैमिष तक बनेगा तटबंध: मुख्यमंत्री योगी

    ग्रीन कॉरिडोर की तर्ज पर फैजुल्लागंज से नैमिष तक बनेगा तटबंध: मुख्यमंत्री योगी

    लखनऊ 

    गोमती की बाढ़ से फैजुल्लागंज से नैमिष तक के इलाके को बचाने के लिए ग्रीन कॉरिडोर की तर्ज पर तटबंध बनाया जाएगा। तटबंध पर रास्ता भी बनेगा, जिससे यह बाढ़ से बचाव के साथ आवागमन के काम आएगा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोमवार को बख्शी का तालाब के बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों के दौरे के दौरान इसकी घोषणा की। उन्होंने कहा कि तटबंध को स्वीकृति दे दी गई है। धनराशि जारी कर मानसून समाप्त होने के बाद काम आगे बढ़ाया जाएगा।
     
    मुख्यमंत्री बख्शी का तालाब तहसील क्षेत्र में बाढ़ प्रभावित परिवारों से भेंट एवं राहत सामग्री वितरण कार्यक्रम में शामिल हुए। प्रभावित परिवारों को राहत सामग्री बांटी और उनकी समस्याएं सुनीं। राहत एवं बचाव कार्यों में लगी टीमों से बात कर स्थिति जानी और स्वास्थ्य विभाग के शिविर का जायजा लिया। इससे पहले उन्होंने फैजुल्लागंज से नैमिष तक प्रभावित इलाकों का हवाई सर्वे भी किया।
     
    तटबंध के साथ जल निकासी का भी इंतजाम

    मुख्यमंत्री ने सिंचाई विभाग के प्रमुख सचिव को फैजुल्लागंज से नैमिष तक गोमती किनारे सर्वे कर तटबंध का प्रस्ताव तैयार करने के निर्देश दिए। कहा कि तटबंध के बाहर बारिश का पानी जमा न हो, इसका भी इंतजाम किया जाए। इसके लिए पंपिंग सेट लगाए जाएंगे, ताकि नदी का जलस्तर बढ़ने पर आबादी की ओर जमा पानी को नदी में निकाला जा सके। तटबंध को हर मौसम में उपयोगी बनाने के साथ उस पर आवागमन की व्यवस्था भी की जाएगी।
     
    पांच-छह दिन बाद पहुंचा बारिश का पानी

    मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछले 10 दिनों में प्रदेश के 50 से अधिक जिलों में भारी बारिश हुई है। पीलीभीत, लखीमपुर खीरी, सीतापुर और नेपाल में हुई बारिश का पानी पांच-छह दिन बाद नीचे पहुंचने से गोमती का जलस्तर बढ़ा। इससे बख्शी का तालाब, लखनऊ उत्तर और फैजुल्लागंज से नैमिष तक के इलाके में बाढ़ जैसे हालात बने। मुख्यमंत्री ने कहा कि वह लगातार स्थिति और राहत एवं बचाव कार्यों की निगरानी कर रहे थे और जमीनी स्थिति देखने पहुंचे हैं।
     
    प्रभावित परिवारों को 26 जरूरी वस्तुएं
    बाढ़ प्रभावित परिवारों को चावल, दाल, आटा, च
    ना और तिरपाल समेत 26 जरूरी वस्तुओं की राहत सामग्री दी जा रही है। इसमें 10 किलो चावल, 10 किलो आटा, 10 किलो आलू, दो किलो अरहर दाल और एक लीटर सरसों या रिफाइंड तेल के साथ नमक, मिर्च-मसाला, बाल्टी, लाई-भुजा, मोमबत्ती, माचिस और बरसाती समेत अन्य सामान शामिल है।
     
    मुख्यमंत्री ने प्रभावित लोगों को खुले में रहने के बजाय स्कूलों और मैरिज हॉल में बनाए गए राहत शिविरों में ठहराने के निर्देश दिए। शिविरों में दोनों समय गर्म भोजन की व्यवस्था होगी। छोटे बच्चों को दूध और गर्भवती महिलाओं को पोषक आहार दिया जाएगा। पशुओं के लिए सूखे भूसे के साथ चोकर भी उपलब्ध कराया जाएगा।
     
    जनहानि पर तत्काल ₹4 लाख

    मुख्यमंत्री ने कहा कि बाढ़ में डूबने या आकाशीय बिजली से जनहानि होने पर परिवार को तत्काल ₹4 लाख की सहायता दी जाएगी। बारिश से मकान पूरी तरह क्षतिग्रस्त होने पर पात्र परिवार को प्रधानमंत्री या मुख्यमंत्री आवास योजना से घर मिलेगा। पशुहानि की भी भरपाई होगी। राहत एवं बचाव कार्यों के बाद फसलों का समय से सर्वे कर किसानों को नुकसान का मुआवजा दिया जाएगा।
     
    स्वास्थ्य केंद्रों पर रहेगा एंटी स्नेक वेनम

    बाढ़ के दौरान सांप-बिच्छू और अन्य जीवों के खतरे को देखते हुए स्वास्थ्य केंद्रों पर एंटी स्नेक वेनम उपलब्ध रखने के निर्देश दिए गए हैं। कुत्ते या अन्य जानवर के काटने पर एंटी रेबीज इंजेक्शन भी उपलब्ध रहेगा। प्रभावित क्षेत्रों में मेडिकल और पशु चिकित्सा शिविर लगाए जाएंगे।
     
    राहत शिविरों में बिजली न होने पर पेट्रोमैक्स या सोलर लाइट की व्यवस्था होगी। घर छोड़कर शिविरों में आने वाले परिवारों की संपत्ति की सुरक्षा के लिए गांव के चौकीदार, होमगार्ड, पीआरडी और पुलिस के जवान रात में पेट्रोलिंग करेंगे।
     
    राजनाथ ने फोन कर ली बाढ़ की जानकारी

    मुख्यमंत्री ने बताया कि रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने सोमवार सुबह फोन कर बाढ़ की स्थिति की जानकारी ली। उन्होंने भी फैजुल्लागंज से नैमिष तक तटबंध बनने से बाढ़ की समस्या से राहत मिलने की बात कही। मुख्यमंत्री ने बताया कि तटबंध को स्वीकृति दे दी गई है और इसके लिए तत्काल धनराशि जारी कर काम आगे बढ़ाया जाएगा।
     
    मुख्यमंत्री योगी ने प्रभावित परिवारों को भरोसा दिलाया कि आपदा की इस घड़ी में डबल इंजन सरकार उनके साथ खड़ी है। राहत एवं बचाव कार्य युद्ध स्तर पर चलाए जा रहे हैं और प्रशासन को इसके लिए पर्याप्त धनराशि उपलब्ध कराई गई है।
     
    कार्यक्रम में ये रहे मौजूद

    उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक, मुख्यमंत्री के मुख्य सलाहकार अवनीश अवस्थी, विधायक योगेश शुक्ला व डॉ. नीरज बोरा, विधान परिषद सदस्य पवन सिंह चौहान, भाजपा जिलाध्यक्ष विजय मौर्य और नगर पंचायत इटौंजा अध्यक्ष अखिलेश कुमार अवस्थी समेत प्रशासन, पुलिस और सिंचाई विभाग के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।

  • गांवों के ऐसे नाम नहीं सुने होंगे! यूपी में ‘कोरोना’ से ‘पनौती’ तक अजब नामों

    गांवों के ऐसे नाम नहीं सुने होंगे! यूपी में ‘कोरोना’ से ‘पनौती’ तक अजब नामों

     लखनऊ
     उत्तर प्रदेश में ऐसे कई गांव हैं जिनके नाम इतने अटपटे हैं कि लोग अपनी हंसी नहीं रोक पाते। इन गांवों में रहने वाले लोग अपने गांव के नामों को लेकर इतने परेशान हैं कि नाम बदलने के लिए कई प्रयास कर चुके हैं। आज हम आपको इन्हीं अजब-गजब गांवों के बारे में बताने वाले हैं, जिनके नाम सुनकर आप भी अपनी हंसी नहीं रोक पाएंगे।

    कोरोना
    सीतापुर जिले की मिश्रित तहसील में स्थित इस गांव का नाम महामारी कोरोना से काफी पहले से रखा गया है। लेकिन ये गांव कोरोना संक्रमण के दौरान ही चर्चा में आया था। इस नाम की वजह से ग्रामीणों को कई बार अजीब स्थिति का सामना करना पड़ता है।

    पनौती
    पनौती का अर्थ अक्सर हम बूरी किस्मत वाले को कहते हैं, लेकिन उत्तर प्रदेश में ऐसा भी एक गांव है जिसका नाम ही पनौती है। चित्रकूट जिले में स्थित इस गांव के लोग अपने गांव के नाम से ही परेशान हैं। यहां के ग्रामीण अपने गांव का नाम बदलने की मांग लंबे समय से कर रहे हैं।

    रण्डौली
    उत्तर प्रदेश के सुल्तानपुर जिला की जयसिंहपुर तहसील के अंतर्गत आने वाला रण्डौली गांव अपने नाम बदलने की वजह से काफी चर्चा में रहा है। इस गांव का नाम अजीब होने के कारण यहां के निवासियों को दूसरों को अपने गांव का नाम बताने में शर्मिंदगी महसूस होती थी। हालांकि लंबे प्रयास के बाद इस गांव का नाम वर्ष 2017 में बदलकर अन्नपूर्णा नगर कर दिया गया है।

    मुंहकुचवां
    यूपी के मीरजापुर जिले में मुहकुचवां गांव का नाम अजीबोगरीब है। जब भी लोग इस गांव के नाम को सुनते हैं तो अपनी हंसी नहीं रोक पाते। मुहकुचवां गांव की कुल आबादी करीब दो हजार है। ये गांव मीरजापुर शहर से लगभग 3 किलोमीटर दूर है।

    लोलपुर
    उत्तर प्रदेश के गोंडा जिले की तरबगंज तहसील में स्थित लोलपुर गांव का नाम Lol (लाफ ऑफ लाउड) से मिलता-जुलता है, जो सुनने में काफी अनोखा लगता है। अपने इस अनोखे नाम की वजह से ये गांव भी काफी चर्चा में रहा है।

    गंज्हेड़ी
    सुल्तानपुर जिले में स्थित इस गांव का नाम भी काफी अजीब और हास्यास्पद माना जाता है। यहां के लोग अपने गांव के नाम को लेकर काफी परेशान हैं। बाहरी लोग अक्सर इस गांव के नाम का मजाक बनाते हैं।

    भैंसा
    मथुरा जिले में 'भैंसा' नाम का गांव है। जानवर से जुड़े नाम वाले इस गांव के बारे में पहली बार सुनने वाले लोग अक्सर हैरान रह जाते हैं।

    बालमपुर
    सुल्तानपुर जिले के भदैयां ब्लॉक में स्थित बालामपुर गांव अपने नाम को लेकर काफी प्रसिद्ध है। यहां कि महिलाएं अपने गांव का नाम बताने में अक्सर शर्मा जाती हैं।

  • आईटीआई प्रवेश के पांचवें चरण की प्रक्रिया शुरू, 11 अक्टूबर तक होंगे ऑनलाइन आवेदन

    आईटीआई प्रवेश के पांचवें चरण की प्रक्रिया शुरू, 11 अक्टूबर तक होंगे ऑनलाइन आवेदन

    लखनऊ

    योगी सरकार की युवाओं को कौशल प्रशिक्षण, रोजगार और आत्मनिर्भरता से जोड़ने की नीति के तहत प्रदेश के राजकीय एवं निजी औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों (आईटीआई) में प्रशिक्षण सत्र 2026-27 के पंचम चरण की प्रवेश प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। चतुर्थ चरण की प्रवेश प्रक्रिया 3 अक्टूबर को पूरी होने के बाद रिक्त रह गई सीटों के सापेक्ष यह प्रक्रिया शुरू की गई है। इच्छुक अभ्यर्थी 6 अक्टूबर से 11 अक्टूबर 2026 की मध्यरात्रि तक ऑनलाइन आवेदन और विकल्प भर सकेंगे।

    राज्य व्यावसायिक प्रशिक्षण परिषद (एससीवीटी), उत्तर प्रदेश के अधिशासी निदेशक अभिषेक सिंह ने बताया कि पंचम चरण में राजकीय आईटीआई के पूर्व पंजीकृत लेकिन प्रवेश से वंचित अभ्यर्थियों को नए विकल्प भरने का अवसर दिया गया है। वहीं राजकीय एवं निजी आईटीआई में प्रवेश के लिए नए अभ्यर्थी भी ऑनलाइन आवेदन कर सकेंगे।

    पूर्व पंजीकृत अभ्यर्थी बदल सकेंगे विकल्प

    राजकीय आईटीआई की प्रवेश प्रक्रिया के प्रथम, द्वितीय एवं तृतीय चरण में अचयनित अथवा चयनित होने के बावजूद प्रवेश न ले पाने वाले अभ्यर्थी परिषद की वेबसाइट पर उपलब्ध लिंक के माध्यम से अपनी पंजीकरण संख्या और जन्मतिथि दर्ज कर रिक्त व्यवसायों एवं इच्छित संस्थानों के लिए पुनरीक्षित विकल्प भर सकेंगे। अभ्यर्थियों को लिंग, उपवर्ग एवं शैक्षिक अर्हता संबंधी विवरण भी पुनः पंजीकृत करने का अवसर मिलेगा। यदि कोई अभ्यर्थी नए विकल्प दर्ज नहीं करता है तो उसे मूल आवेदन में दिए गए विकल्पों के आधार पर ही पंचम चरण की सीट आवंटन प्रक्रिया में शामिल किया जाएगा। इसके अलावा राजकीय संस्थानों में पहले प्रवेश लेने के बाद किसी कारणवश नाम कटवा चुके अभ्यर्थी भी इस चरण में आवेदन कर सकेंगे।

    नए अभ्यर्थियों को भी मिलेगा मौका

    राजकीय एवं निजी आईटीआई में नए सिरे से आवेदन करने वाले अभ्यर्थियों को परिषद की वेबसाइट पर जाकर ऑनलाइन फॉर्म भरना होगा। आवेदन के बाद डेबिट कार्ड, क्रेडिट कार्ड, इंटरनेट बैंकिंग अथवा यूपीआई के माध्यम से यूनियन बैंक ऑफ इंडिया के पेमेंट गेटवे से शुल्क जमा किया जा सकेगा। शुल्क भुगतान के बाद अभ्यर्थी आवेदन पत्र का प्रिंट आउट प्राप्त कर सकेंगे।

    श्रेणीवार निर्धारित है आवेदन शुल्क

    सामान्य एवं पिछड़ा वर्ग के अभ्यर्थियों के लिए पंजीकरण शुल्क 300 रुपये, अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति के अभ्यर्थियों के लिए 250 रुपये तथा सभी महिला अभ्यर्थियों के लिए 100 रुपये निर्धारित किया गया है। ऑनलाइन आवेदन एवं विकल्प भरने की प्रक्रिया 6 अक्टूबर 2026 से 11 अक्टूबर 2026 की रात 12 बजे तक उपलब्ध रहेगी।

    रिक्त सीटों की जानकारी वेबसाइट पर होगी उपलब्ध

    अधिशासी निदेशक अभिषेक सिंह ने बताया कि चतुर्थ चरण के बाद बची रिक्त सीटों का जनपदवार, संस्थानवार और व्यवसायवार विवरण परिषद की अधिकृत वेबसाइट पर देखा जा सकता है। अभ्यर्थी संबंधित आईटीआई के कार्यालय से भी रिक्त सीटों की जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। प्रदेश के सभी राजकीय एवं निजी आईटीआई के प्रधानाचार्यों को निर्देश दिए गए हैं कि वे अपने संस्थानों में रिक्त सीटों की व्यवसायवार अद्यतन स्थिति अनिवार्य रूप से सूचना पट पर प्रदर्शित करें, ताकि अभ्यर्थियों को विकल्प चयन में किसी प्रकार की परेशानी न हो।

    कौशल प्रशिक्षण के जरिए रोजगार की राह आसान करने पर जोर

    योगी सरकार प्रदेश के युवाओं को पारंपरिक शिक्षा के साथ-साथ व्यावसायिक एवं कौशल प्रशिक्षण से जोड़कर रोजगार और स्वरोजगार के अवसर उपलब्ध कराने पर लगातार जोर दे रही है। आईटीआई जैसे संस्थानों में तकनीकी प्रशिक्षण युवाओं को उद्योगों की जरूरत के अनुरूप कुशल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। पंचम चरण की प्रवेश प्रक्रिया के जरिए रिक्त सीटों को भरने से अधिक से अधिक युवाओं को स्किल डेवलपमेंट और रोजगारपरक प्रशिक्षण से जुड़ने का अवसर मिलेगा।

  • यूपी होगा वैश्विक व्यापार का नया केंद्र, स्थानीय उद्योगों को मिलेगी वैश्विक बाजार की सीधी पहुंच

    यूपी होगा वैश्विक व्यापार का नया केंद्र, स्थानीय उद्योगों को मिलेगी वैश्विक बाजार की सीधी पहुंच

    यमुना एक्सप्रेसवे क्षेत्र में विकसित होगी इंटरनेशनल ट्रेड सिटी

    चीन की यीवू इंटरनेशनल ट्रेड सिटी की तर्ज पर होगा विकास, योगी सरकार की ‘लोकल से ग्लोबल’ की सोच को मिलेगी नई गति

    यूपी होगा वैश्विक व्यापार का नया केंद्र, स्थानीय उद्योगों को मिलेगी वैश्विक बाजार की सीधी पहुंच

    उत्पादों के प्रदर्शन, बिक्री और निर्यात के लिए उपलब्ध होगा समर्पित प्लेटफॉर्म

    लखनऊ, 
     उत्तर प्रदेश में औद्योगिक विकास को नई गति देने और प्रदेश के स्थानीय उत्पादों को देश-दुनिया के बाजार से जोड़ने की दिशा में योगी सरकार लगातार कदम उठा रही है। इसी क्रम में यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यीडा) क्षेत्र में चीन की यीवू (Yiwu) इंटरनेशनल ट्रेड सिटी की तर्ज पर इंटरनेशनल ट्रेड सिटी विकसित करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल की जा रही है। हाल में संपन्न यीडा की बोर्ड मीटिंग में इस परियोजना की परिकल्पना की गई है। प्रस्तावित सिटी को व्यापार, उद्योग और निर्यात के एक नए वैश्विक केंद्र के रूप में विकसित किए जाने की योजना है।

    इंटरनेशनल ट्रेड सिटी के माध्यम से क्षेत्र के औद्योगिक उत्पादों को एक ऐसा संगठित और स्वीकृत बाजार उपलब्ध होगा, जहां उत्पादों का प्रदर्शन, बिक्री और निर्यात एक ही प्लेटफॉर्म से किया जा सकेगा। इससे स्थानीय उद्यमियों और औद्योगिक इकाइयों को नए खरीदारों तक पहुंच बनाने के साथ ही अंतरराष्ट्रीय व्यापार के अवसर प्राप्त होंगे।

    स्थानीय उत्पादों को मिलेगा वैश्विक बाजार
    योगी सरकार की औद्योगिक नीति का प्रमुख लक्ष्य उत्तर प्रदेश को केवल बड़े निवेश का केंद्र बनाना ही नहीं, बल्कि यहां तैयार होने वाले उत्पादों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंचाना भी है। इंटरनेशनल ट्रेड सिटी इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कड़ी साबित हो सकती है। प्रस्तावित इंटरनेशनल ट्रेड सिटी में विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े औद्योगिक उत्पादों के लिए व्यवस्थित बाजार और प्रदर्शन की सुविधा विकसित किए जाने की परिकल्पना है। इससे उत्पादकों को अपने उत्पाद सीधे देश-विदेश के खरीदारों के सामने प्रस्तुत करने का अवसर मिलेगा। साथ ही निर्यातकों और संभावित विदेशी खरीदारों के बीच व्यावसायिक संपर्क बढ़ाने में भी मदद मिलेगी।

    यीवू की तर्ज पर व्यापार का बड़ा प्लेटफॉर्म
    चीन के यीवू इंटरनेशनल ट्रेड सिटी को दुनिया के प्रमुख थोक व्यापार केंद्रों में गिना जाता है, जहां बड़ी संख्या में उत्पादों के लिए एक संगठित बाजार उपलब्ध है। इसी अवधारणा को ध्यान में रखते हुए यमुना एक्सप्रेसवे क्षेत्र में प्रस्तावित इंटरनेशनल ट्रेड सिटी को विकसित करने की दिशा में पहल की जा रही है। इसका उद्देश्य एक ऐसा वन-स्टॉप ट्रेडिंग डेस्टिनेशन तैयार करना है, जहां विभिन्न औद्योगिक उत्पादों के प्रदर्शन, कारोबार और संभावित निर्यात के लिए सुविधाएं एक ही स्थान पर उपलब्ध हो सकें।

    जेवर एयरपोर्ट और औद्योगिक कॉरिडोर का मिलेगा लाभ
    यमुना एक्सप्रेसवे क्षेत्र में तेजी से विकसित हो रहे औद्योगिक एवं बुनियादी ढांचे के बीच इंटरनेशनल ट्रेड सिटी की परिकल्पना को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। विस्तार ले रहा नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट भी भविष्य में व्यापार और लॉजिस्टिक्स की संभावनाओं को मजबूत करने वाला प्रमुख आधार बन सकता है। एक्सप्रेसवे कनेक्टिविटी, औद्योगिक क्षेत्रों और एयर कार्गो जैसी सुविधाओं के विकास से उत्पादों की आवाजाही और अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंच को बेहतर बनाने में मदद मिलने की उम्मीद है। इससे क्षेत्र में व्यापारिक गतिविधियों के विस्तार के साथ नई औद्योगिक इकाइयों और निवेश की संभावनाएं भी बढ़ेंगी।

    एमएसएमई और स्थानीय उद्यमियों को सबसे बड़ा लाभ
    इंटरनेशनल ट्रेड सिटी का सबसे महत्वपूर्ण लाभ सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) और स्थानीय उद्यमियों को मिल सकता है। अक्सर छोटे उद्यमों के सामने अपने उत्पादों को बड़े बाजार और अंतरराष्ट्रीय खरीदारों तक पहुंचाने की चुनौती रहती है। प्रस्तावित ट्रेड सिटी ऐसे उद्यमियों के लिए मार्केट एक्सेस का नया माध्यम बन सकती है। यहां उन्हें अपने उत्पादों को प्रदर्शित करने, नए खरीदारों से संपर्क करने और व्यापारिक नेटवर्क का विस्तार करने का अवसर मिलेगा। इससे स्थानीय स्तर पर उत्पादन को बढ़ावा मिलने के साथ रोजगार के नए अवसर भी सृजित हो सकते हैं।

    निवेश से लेकर निर्यात तक मजबूत इकोसिस्टम
    योगी सरकार के कार्यकाल में उत्तर प्रदेश में एक्सप्रेसवे, एयरपोर्ट, औद्योगिक पार्क और लॉजिस्टिक्स इन्फ्रास्ट्रक्चर के विकास पर विशेष जोर दिया गया है। इंटरनेशनल ट्रेड सिटी की परिकल्पना को इसी व्यापक औद्योगिक इकोसिस्टम से जोड़कर देखा जा रहा है। उद्देश्य यह है कि प्रदेश में आने वाला निवेश केवल उत्पादन इकाइयों की स्थापना तक सीमित न रहे, बल्कि उत्पादन से बाजार और बाजार से वैश्विक निर्यात तक पूरी वैल्यू चेन विकसित हो। इंटरनेशनल ट्रेड सिटी इस दिशा में एक महत्वपूर्ण कड़ी के रूप में काम कर सकती है, जहां उत्पादकों, खरीदारों, निर्यातकों और व्यापारिक संस्थाओं को एक साझा मंच मिल सकेगा।

    ‘ओडीओपी’ को भी मिल सकती है नई उड़ान
    उत्तर प्रदेश के एक जनपद-एक उत्पाद (ओडी
    ओपी) जैसे अभियानों के लिए भी इस प्रकार का अंतरराष्ट्रीय व्यापार केंद्र महत्वपूर्ण साबित हो सकता है। प्रदेश के विभिन्न जिलों के विशिष्ट उत्पादों को बड़े बाजारों और अंतरराष्ट्रीय खरीदारों तक पहुंचाने के लिए यह एक अतिरिक्त मंच उपलब्ध करा सकता है। इससे स्थानीय उत्पादों की ब्रांडिंग, बाजार विस्तार और निर्यात की संभावनाओं को बल मिल सकता है। खासतौर पर ऐसे उत्पाद जिनमें अंतरराष्ट्रीय बाजार की मांग मौजूद है, उन्हें संगठित व्यापारिक प्लेटफॉर्म मिलने से नए अवसर पैदा हो सकते हैं।

    उत्तर प्रदेश को ग्लोबल ट्रेड हब बनाने की दिशा में कदम
    योगी सरकार की औद्योगिक विकास की रणनीति में उत्तर प्रदेश को निवेश, उत्पादन और निर्यात के प्रमुख केंद्र के रूप में स्थापित करने पर जोर है। इससे एक ओर जहां स्थानीय उद्योगों को नए बाजार मिलेंगे, वहीं दूसरी ओर उत्तर प्रदेश की वैश्विक व्यापार क्षमता को भी मजबूती मिल सकती है। आने वाले समय में यह क्षेत्र उद्योग, व्यापार, लॉजिस्टिक्स और निर्यात गतिविधियों के संगम के रूप में विकसित हो सकता है। यही नहीं, इसके विकास से प्रत्यक्ष रूप से व्यापारिक गतिविधियां बढ़ने के साथ ही लॉजिस्टिक्स, वेयरहाउसिंग, परिवहन, पैकेजिंग, मार्केटिंग, निर्यात सेवाओं और अन्य सहायक क्षेत्रों में भी रोजगार एवं कारोबार के अवसर पैदा होने की संभावना है।

  • स्वच्छ और हरित स्कूलों की दिशा में यूपी ने रचा नया रिकॉर्ड, SHVR में 1.62 लाख विद्यालयों की भागीदारी

    स्वच्छ और हरित स्कूलों की दिशा में यूपी ने रचा नया रिकॉर्ड, SHVR में 1.62 लाख विद्यालयों की भागीदारी

    योगी सरकार में स्वच्छ-हरित विद्यालयों का बढ़ा कारवां, एसएचवीआर में 1.62 लाख स्कूलों ने दर्ज कराई भागीदारी

    स्वच्छ एवं हरित विद्यालय रेटिंग में प्रदेश के 2.66 लाख स्कूलों में 1.86 लाख में शुरू हुई प्रक्रिया, 1.79 लाख का पंजीकरण

    1,62,054 विद्यालयों ने दर्ज कराई सहभागिता, प्रदेश का अंतिम पूर्णता प्रतिशत 60.83 प्रतिशत

     कानपुर देहात 83.17% के साथ प्रदेश में शीर्ष पर, मुजफ्फरनगर 82.24% और भदोही 77.62% के साथ टॉप-3 में

    कौशांबी 75.22% और ललितपुर 73.78% के साथ टॉप-5 में शामिल 

    – स्वच्छता, हरित परिवेश और पर्यावरणीय चेतना को विद्यालयी गतिविधियों से जोड़ने पर जोर

    लखनऊ,
     मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश के विद्यालयों में स्वच्छता, हरित परिवेश और पर्यावरणीय चेतना को बढ़ावा देने की दिशा में व्यापक सहभागिता सामने आई है। ‘स्वच्छ एवं हरित विद्यालय रेटिंग’ यानी एसएचवीआर (SHVR—स्वच्छ एवं हरित विद्यालय रेटिंग) 2026-27 में 5 अक्टूबर तक प्रदेश के कुल 2,66,408 विद्यालयों में 1,86,196 में प्रक्रिया शुरू, 1,79,793 विद्यालयों का पंजीकरण और 1,62,054 विद्यालयों द्वारा सहभागिता पूर्ण की गई है। प्रदेश का अंतिम पूर्णता प्रतिशत 60.83 प्रतिशत दर्ज हुआ है।

    एसएचवीआर 2026-27 की यह स्थिति उत्तर प्रदेश के विद्यालयों में स्वच्छता, हरित परिवेश और पर्यावरणीय चेतना के प्रति व्यापक सहभागिता को रेखांकित करती है। प्रदेश के अनेक जनपदों ने उल्लेखनीय प्रदर्शन करते हुए स्वच्छ एवं हरित विद्यालयों की दिशा में अपनी सक्रिय भागीदारी दर्ज कराई है।

    स्वच्छता से हरित चेतना तक विद्यालयों की भागीदारी
    एसएचवीआर के माध्यम से विद्यालयों में स्वच्छ एवं हरित वातावरण को प्रोत्साहित करने के लिए निर्धारित गतिविधियों और मानकों में विद्यालयों की सहभागिता को दर्ज किया जाता है। जनपदवार रिपोर्ट प्रदेश के सभी 75 जनपदों के विद्यालयों की स्थिति को दर्शाती है।

    कानपुर देहात प्रदेश में शीर्ष पर
    जनपदवार आंकड़ों में कानपुर देहात 83.17% अंतिम पूर्णता प्रतिशत के साथ प्रदेश में प्रथम स्थान पर है। जनपद के कुल 2,876 विद्यालयों में से 2,392 विद्यालयों ने पूर्णता दर्ज की है। मुजफ्फरनगर 82.24% के साथ दूसरे और भदोही 77.62% के साथ तीसरे स्थान पर है। इसके बाद कौशांबी 75.22% और ललितपुर 73.78% के साथ शीर्ष पांच में शामिल हैं।

    टॉप-10 में शामिल जनपद
    अंतिम पूर्णता प्रतिशत के आधार पर टॉप-10 में कानपुर देहात (83.17%), मुजफ्फरनगर (82.24%), भदोही (77.62%), कौशांबी (75.22%), ललितपुर (73.78%), बाराबंकी (73.52%), रामपुर (71.90%), मऊ (71.50%), बुलंदशहर (70.25%) और सहारनपुर (68.90%) शामिल हैं।

    पूर्वांचल से पश्चिमी उत्तर प्रदेश तक सहभागिता
    पूर्वांचल से पश्चिमी उत्तर प्रदेश तक विद्यालयों की व्यापक सहभागिता दर्ज हुई है। वाराणसी में 67.58%, मिर्जापुर में 68.29%, सोनभद्र में 68.51%, गोरखपुर में 60.83%, बुलंदशहर में 70.25% और सहारनपुर में 68.90% अंतिम पूर्णता प्रतिशत दर्ज किया गया है। इन आंकड़ों से विभिन्न क्षेत्रों में स्वच्छ एवं हरित विद्यालयों की दिशा में विद्यालयों की सक्रिय भागीदारी सामने आती है।

    1.86 लाख विद्यालयों में शुरू हुई भागीदारी
    प्रदेश के कुल 2,66,408 विद्यालयों में 1,86,196 विद्यालयों में एसएचवीआर की प्रक्रिया शुरू हुई, जबकि 1,79,793 विद्यालयों ने पंजीकरण कराया और 1,62,054 विद्यालयों ने इसे पूर्ण किया। यह आंकड़ा प्रदेशभर में एसएचवीआर 2026-27 के प्रति विद्यालयों की व्यापक और सक्रिय सहभागिता को रेखांकित करता है।

    कोट:
    स्वच्छ एवं हरित विद्यालय स्वस्थ और जागरूक पीढ़ी की आधारशिला हैं। एसएचवीआर के माध्यम से विद्यालयों में स्वच्छता, हरित परिवेश और पर्यावरणीय चेतना को और मजबूत किया जा रहा है।
    संदीप सिंह, राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार), बेसिक शिक्षा

    कोट:
    एसएचवीआर विद्यालयों को स्वच्छता और पर्यावरणीय मानकों के प्रति सक्रिय बनाने का प्रभावी माध्यम है। व्यापक सहभागिता से स्वच्छ एवं हरित विद्यालयों की दिशा में सकारात्मक बदलाव को गति मिलेगी।
    मोनिका रानी, महानिदेशक, स्कूल शिक्षा