Category: उत्तर प्रदेश

  • लेखा परीक्षक एवं सहायक लेखाकार के 1829 पदों के लिए जारी हुआ है विज्ञापन, 609 पदों के आरक्षण निर्धारण की विभाग ने स्वयं की थी पुष्टि

    लेखा परीक्षक एवं सहायक लेखाकार के 1829 पदों के लिए जारी हुआ है विज्ञापन, 609 पदों के आरक्षण निर्धारण की विभाग ने स्वयं की थी पुष्टि

    लेखा परीक्षक भर्ती में आरक्षण नियमों के उल्लंघन के दावों को आयोग ने बताया भ्रामक और तथ्यहीन

    अधीनस्थ सेवा चयन आयोग ने सोशल मीडिया पर चल रहे दुष्प्रचार का किया खंडन, कहा- नियमों का पूरी तरह किया गया पालन 

    लेखा परीक्षक एवं सहायक लेखाकार के 1829 पदों के लिए जारी हुआ है विज्ञापन, 609 पदों के आरक्षण निर्धारण की विभाग ने स्वयं की थी पुष्टि

    आयोग ने कहा, तथ्यों को तोड़-मरोड़ कर पेश करने का किया जा रहा प्रयास

    आयोग की अभ्यर्थियों से अपील, भ्रामक सूचनाओं पर ध्यान न दें और केवल आधिकारिक सूचनाओं पर ही भरोसा करें

    लखनऊ
     उत्तर प्रदेश अधीनस्थ सेवा चयन आयोग (यूपीएसएसएससी) ने लेखा परीक्षक एवं सहायक लेखाकार के 1829 पदों पर भर्ती को लेकर सोशल मीडिया और अन्य माध्यमों में प्रसारित किए जा रहे दावों को भ्रामक और तथ्यहीन बताया है। आयोग ने स्पष्ट किया है कि भर्ती प्रक्रिया में आरक्षण संबंधी सभी प्रावधानों का पूर्ण अनुपालन किया गया है तथा पदों का विज्ञापन संबंधित विभागों से प्राप्त अधियाचन और उनकी पुष्टि के आधार पर जारी किया गया है।

    आयोग द्वारा जारी विज्ञप्ति के अनुसार विभिन्न विभागों के नियंत्रणाधीन लेखा परीक्षक एवं सहायक लेखाकार के 1829 रिक्त पदों पर चयन के लिए विज्ञापन प्रकाशित किया गया है। विज्ञापन जारी होने के बाद कुछ व्यक्तियों द्वारा सोशल मीडिया पर आंतरिक लेखा एवं लेखा परीक्षा निदेशालय के सहायक लेखाकार के आरक्षित पदों को लेकर आरक्षण नीति के उल्लंघन के आरोप लगाए जा रहे हैं। आयोग ने स्पष्ट किया कि उसे आंतरिक लेखा एवं लेखा परीक्षा निदेशालय से सहायक लेखाकार के 609 पदों का अधियाचन प्राप्त हुआ था। इन पदों के संबंध में आरक्षण की गणना और श्रेणीवार वर्गीकरण शासन के प्रचलित नियमों एवं आरक्षण व्यवस्था के अनुरूप किए जाने की पुष्टि स्वयं निदेशालय द्वारा की गई थी। विभाग ने यह भी अवगत कराया था कि पदों की श्रेणीवार गणना संवर्ग में सृजित कुल पदों के आधार पर की गई है, जो पूरी तरह नियमसम्मत है।

    आयोग ने बताया कि कुल 22 अधियाचनों के आधार पर 1829 पदों का विज्ञापन जारी किया गया है, जिसमें आंतरिक लेखा एवं लेखा परीक्षा निदेशालय के 609 पद भी शामिल हैं। आयोग को प्राप्त प्रत्येक अधियाचन में आरक्षण संबंधी गणना की पुष्टि संबंधित विभागों और निदेशालयों से प्राप्त होने के बाद ही विज्ञापन प्रकाशित किया जाता है। आयोग ने कहा कि भर्ती प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी और नियमबद्ध है तथा आरक्षण नीति के उल्लंघन संबंधी दावे निराधार हैं। आयोग ने अभ्यर्थियों से अपील की है कि वे भ्रामक सूचनाओं पर ध्यान न दें और केवल आधिकारिक सूचनाओं पर ही भरोसा करें।

  • यूपी बोर्ड का बड़ा फैसला, फेल और अंक बढ़ाने के इच्छुक छात्र 27 जून तक कर सकेंगे आवेदन

    यूपी बोर्ड का बड़ा फैसला, फेल और अंक बढ़ाने के इच्छुक छात्र 27 जून तक कर सकेंगे आवेदन

    यूपी बोर्ड के विद्यार्थियों को एक और अवसर, इम्प्रूवमेंट और कम्पार्टमेंट परीक्षा के लिए 27 जून तक आवेदन

    -योगी सरकार ने दिया असफलता को सफलता में बदलने का मौका, हजारों विद्यार्थियों को मिलेगा दूसरा अवसर

    – हाईस्कूल एवं इंटरमीडिएट परीक्षार्थियों के लिए ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया शुरू

    – 6 जून से 27 जून की मध्यरात्रि तक किए जा सकेंगे आवेदन

    प्रयागराज/लखनऊ
    शिक्षा के क्षेत्र में विद्यार्थियों को अधिक अवसर उपलब्ध कराने और किसी एक परीक्षा परिणाम को उनके भविष्य की बाधा न बनने देने की दिशा में योगी सरकार ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। माध्यमिक शिक्षा परिषद, उत्तर प्रदेश (यूपी बोर्ड) ने वर्ष 2026 की हाईस्कूल इम्प्रूवमेंट/कम्पार्टमेंट तथा इंटरमीडिएट कम्पार्टमेंट परीक्षाओं के लिए ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया प्रारंभ करने की घोषणा की है। पात्र परीक्षार्थी 6 जून से 27 जून की मध्यरात्रि तक परिषद की आधिकारिक वेबसाइट पर आवेदन कर सकेंगे।

    पारदर्शी, तकनीक आधारित और विद्यार्थी हितैषी व्यवस्था के माध्यम से योगी सरकार लगातार ऐसे प्रयास कर रही है, जिससे प्रत्येक छात्र को अपनी क्षमता सिद्ध करने का अवसर मिल सके और उसका शैक्षणिक भविष्य सुरक्षित रह सके।

    यूपी माध्यमिक शिक्षा परिषद (यूपी बोर्ड) के सचिव भगवती सिंह द्वारा जारी विज्ञप्ति के अनुसार हाईस्कूल इम्प्रूवमेंट परीक्षा के अंतर्गत एक विषय में अनुत्तीर्ण विद्यार्थी परीक्षा में सम्मिलित हो सकेंगे, जबकि कम्पार्टमेंट परीक्षा के अंतर्गत दो विषयों में अनुत्तीर्ण परीक्षार्थी किसी एक विषय की परीक्षा देने के पात्र होंगे। इसके लिए परीक्षा शुल्क 256.50 रुपये निर्धारित किया गया है। इसी प्रकार इंटरमीडिएट कम्पार्टमेंट परीक्षा में मानविकी, विज्ञान एवं वाणिज्य वर्ग के ऐसे विद्यार्थी, जो किसी एक विषय के किसी एक प्रश्नपत्र में अनुत्तीर्ण हैं, आवेदन कर सकेंगे। व्यावसायिक वर्ग के ट्रेड विषयों के ऐसे परीक्षार्थी भी पात्र होंगे, जो किसी एक प्रश्नपत्र में अनुत्तीर्ण रहे हैं। इंटरमीडिएट कम्पार्टमेंट परीक्षा का शुल्क 306 रुपये निर्धारित किया गया है।

    योगी सरकार की मंशा है कि किसी भी विद्यार्थी की शैक्षणिक प्रगति केवल एक परीक्षा परिणाम के कारण बाधित न हो। इसी उद्देश्य से विद्यार्थियों को अपनी त्रुटियों को सुधारने और बेहतर प्रदर्शन का अवसर उपलब्ध कराया जा रहा है। यह व्यवस्था उन हजारों छात्र-छात्राओं के लिए महत्वपूर्ण साबित होगी, जो न्यूनतम अंतर से सफलता से वंचित रह गए हैं। परीक्षार्थियों को निर्धारित शुल्क कोषागार चालान के माध्यम से जमा करना होगा। ऑनलाइन आवेदन पत्र भरने के बाद उसकी प्रति तथा शुल्क जमा करने के चालान की मूल प्रति डाउनलोड कर अंतिम तिथि के बाद तीन दिनों के भीतर संबंधित क्षेत्रीय कार्यालय को पंजीकृत डाक से भेजना अनिवार्य होगा।

    बोर्ड ने स्पष्ट किया है कि जिन विषयों में लिखित, प्रायोगिक अथवा प्रोजेक्ट कार्य शामिल हैं, उनके लिए निर्धारित नियमों के अनुसार परीक्षा आयोजित की जाएगी। जो परीक्षार्थी किसी विषय के केवल एक भाग में अनुत्तीर्ण हैं, उन्हें उसी भाग की परीक्षा देने की सुविधा होगी। लिखित, प्रायोगिक एवं प्रोजेक्ट परीक्षाओं की तिथियां अलग से घोषित की जाएंगी।

  • संभल में बड़ी कार्रवाई: खेड़ेश्वर महादेव मंदिर के पास कथित अवैध मजार जमींदोज

    संभल में बड़ी कार्रवाई: खेड़ेश्वर महादेव मंदिर के पास कथित अवैध मजार जमींदोज

     संभल 

    उत्तर प्रदेश के संभल जिले में प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई करते हुए सरकारी भूमि पर अवैध रूप से बनी 'खेड़े वाले बाबा चमन शाह बाबा दरगाह शरीफ मजार' को बुलडोजर से ध्वस्त कर दिया है. कोर्ट से अपील खारिज होने के बाद भारी पुलिस बल की मौजूदगी में यह एक्शन लिया गया। 

    संभल के बबराला थाना इलाके के बाघऊ गांव में जिलाधिकारी अंकित खंडेलवाल और एसपी कृष्ण कुमार बिश्नोई की मौजूदगी में राजस्व विभाग की टीम ने गाटा संख्या 592 की सरकारी ऊसर भूमि पर अवैध रूप से बनी मजार को जमींदोज कर दिया. लेखपाल की जांच रिपोर्ट में 24 वर्ग मीटर क्षेत्र पर अवैध कब्जे की पुष्टि हुई थी, जिसके बाद ग्राम सभा की शिकायत पर उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता की धारा 67 के तहत यह बड़ी कार्रवाई की गई. कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए अपर पुलिस अधीक्षक दक्षिणी मनोज रावत और चार थानों की पुलिस फोर्स मौके पर मुस्तैद रही। 

    पैमाइश में हुई थी अवैध कब्जे की पुष्टि

    बीते कुछ महीने पहले राजस्व विभाग की टीम, नायब तहसीलदार और एसडीएम विकास चंद्र ने गांव पहुंचकर जमीन की पैमाइश की थी. इसमें मजार बनाकर सरकारी जमीन घेरने की बात साबित हुई, जिसके बाद मजार की देखभाल करने वाले अजीज को नोटिस दिया गया था. तहसीलदार कोर्ट ने इस अवैध निर्माण को हटाने का आदेश जारी किया था। 

    डीएम कोर्ट से अपील खारिज होते ही एक्शन
    तहसीलदार कोर्ट के फैसले के खिलाफ मजार कमेटी ने जिलाधिकारी न्यायालय में अपील दायर की थी, जिसे कोर्ट ने 3 जून को खारिज कर दिया. सभी कानूनी प्रक्रियाएं पूरी होने के बाद प्रशासन ने ध्वस्तीकरण के लिए विशेष टीम गठित की. सुरक्षा के लिहाज से बबराला थाना प्रभारी निशांत राठी सहित भारी संख्या में पुलिस और पीएसी के जवान तैनात रहे, जिससे कार्रवाई शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हो गई। 

  • बूथ से बैलेट तक फोकस: यूपी में प्रचंड जीत के लिए BJP ने बिछाया 1.76 लाख कार्यकर्ताओं का जाल

    बूथ से बैलेट तक फोकस: यूपी में प्रचंड जीत के लिए BJP ने बिछाया 1.76 लाख कार्यकर्ताओं का जाल

    पश्चिम बंगाल और असम में हुए हालिया विधानसभा चुनाव नतीजों से गदगद भाजपा अब देश के सबसे बड़े राज्य उत्तर प्रदेश में न सिर्फ जीत की हैट्रिक लगाने का ख्वाब देख रही है बल्कि बंगाल जैसी प्रचंड जीत की कोशिशों में जुट गई है। हालांकि, यूपी में विधानसभा चुनाव होने में अभी करीब एक साल बाकी हैं, लेकिन पार्टी ने अभी से ही तैयारियां शुरू कर दी हैं। पश्चिम बंगाल और असम चुनावों में 'माइक्रो-मैनेजमेंट' मॉडल की सफलता से उत्साहित भाजपा अब इसे उत्तर प्रदेश में बड़े पैमाने पर लागू करने जा रही है। इसी रणनीति के तहत पार्टी ने राज्यभर में लगभग 1.76 लाख "बूथ पालक" नियुक्त करने और जमीनी स्तर पर संगठन को सक्रिय करने का फैसला किया है।

    हाल ही में राज्य की राजधानी लखनऊ में भाजपा के 98 संगठनात्मक जिलों के अध्यक्षों की एक उच्च स्तरीय बैठक आयोजित की गई, जिसमें प्रदेश भाजपा अध्यक्ष पंकज चौधरी और संगठन महामंत्री धर्मपाल सिंह ने सभी जिला अध्यक्षों को स्पष्ट निर्देश दिया कि राज्य में 'बंगाल चुनाव मॉडल' को दोहराएं। यानी बंगाल की ही तरह बूथ लेवेल तक प्रबंधन करें। इसके तहत बूथ समितियों, पन्ना प्रमुखों और शक्ति केंद्रों पर नए सिरे से ध्यान केंद्रित करने का निर्देश दिया गया है।

    जिलाध्यक्षों को क्या निर्देश?
    पार्टी सूत्रों के मुताबिक, पार्टी ने सभी जिला प्रमुखों को निर्देश दिया है कि वे बूथ समितियों, पन्ना प्रमुखों, शक्ति केंद्रों और स्थानीय स्तर के राजनीतिक अभियानों पर नए सिरे से ध्यान देते हुए उत्तर प्रदेश में बंगाल चुनाव मॉडल को अपनाएं। बीजेपी का लक्ष्य आगामी महीनों में राज्य के सभी 1,62,459 विधानसभा बूथों का आकलन करना है, जिसमें 1,918 मंडलों में फैले 27,633 शक्ति केंद्र भी शामिल हैं। इस कवायद में मतदाता सूची के विशेष गहन संशोधन (SIR) के बाद बनाए गए लगभग 14,000 नए बूथ भी शामिल होंगे। पार्टी नेताओं ने जिला इकाइयों को निर्देश दिया कि वे तुरंत बूथ समितियां बनाएं और इन नए जुड़े मतदान केंद्रों के लिए बूथ अध्यक्ष और बूथ देखभाल करने वाले (बूथ पालक) नियुक्त करें।

    बीजेपी का क्या मेगा प्लान?
    पार्टी ने प्रचंड जीत की रणनीति बनाते हुए चार प्रमुख बातों पर ध्यान दिया है। इसके तहत पन्ना प्रमुखों की नियुक्ति करने, शक्ति केंद्रों की स्थापना करने, बूथों का वर्गीकरण करने और हाइपर-लोकल लेवेल पर चुनाव प्रचार करने का फैसला किया गया है। बता दें कि पन्ना प्रमुख प्रणाली में हरेक पन्ना प्रमुख को मतदाता सूची के एक पन्ने पर दर्ज 30 से 35 मतदाताओं की जिम्मेदारी दी जाएगी, जिनसे वे नियमित संपर्क बनाए रखेंगे। इसके अतिरिक्त शक्ति केंद्र प्रणाली में 5 से 7 बूथों के समूहों को मिलाकर एक शक्ति केंद्र बनाने और उसके लिए एक समन्वयक तैनात किए जाने की योजना है, जो अनिश्चित मतदाताओं को प्रभावित करने का काम करेंगे।

    हाइपर-लोकल लेवेल पर चुनाव प्रचार
    इन दोनों उपायों के अलावा सूक्ष्म स्तर तक मतदाताओं को प3भावित करने के लिए भाजपा ने बूथों का वर्गीकरण करने का भी फैसला किया है। इसके तहत सभी बूथों को 'मजबूत', 'प्रतिस्पर्धी' और 'कमजोर' श्रेणियों में बांटा जाएगा ताकि कमजोर क्षेत्रों में अतिरिक्त संसाधन और निगरानी तैनात की जा सके। इसके अतिरिक्त भाजपा हाइपर-लोकल लेवेल पर चुनाव प्रचार करने की योजना पर भी काम कर रही है। इसके तहत स्थानीय मुद्दों के आधार पर बूथ स्तर पर विशेष प्रचार अभियान चलाया जाएगा। लखनऊ से दिल्ली तक बैठकों के दौर में सांगठनिक कामकाज को धार देने के लिए 'जोन वाइज' प्रभारियों की नियुक्ति पर भी विचार चल रहा है।

    पुरानी गलतियों से सबक
    सूत्रों ने बताया कि बैठक में 2024 के लोकसभा चुनावों के दौरान सामने आई कमियों को दूर करने पर भी ध्यान दिया गया। इस कड़ी में भाजपा उन 61 विधानसभा क्षेत्रों पर विशेष ध्यान दे रही है, जिन्हें पार्टी ने 2017 में जीता था लेकिन 2022 के चुनावों में हार गई थी। जिला अध्यक्षों को इन क्षेत्रों में बूथवार समीक्षा करने और हार के कारणों की पहचान कर सुधारात्मक कदम उठाने को कहा गया है। उन क्षेत्रों में नए सामाजिक समीकरण बनाने के बी निर्देश दिए गए हैं। इसके अलावा, विपक्षी दल समाजवादी पार्टी के 'PDA' (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) फॉर्मूले का मुकाबला करने के लिए भी भाजपा विभिन्न सामाजिक समूहों के बीच अपनी पैठ मजबूत करने की कोशिशों में जुट गई है।

    SIR के मद्देनजर विशेष निर्देश
    इन सबसे अलग विशेष गहन मतदाता पुनरीक्षण (SIR) को ध्यान में रखते हुए प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी ने पार्टी कार्यकर्ताओं को खास निर्देश दिया है कि वे उन पात्र मतदाताओं की पहचान करें, जिनके नाम मतदाता सूची से गायब हैं। प्रदेश अध्यक्ष ने निर्देश दिया है कि कार्यकर्ता फॉर्म-6 के माध्यम से उन मतदाताओं के नाम जुड़वाने में उनकी मदद करें। साफ है कि 2027 के महा रण में भाजपा उत्तर प्रदेश की सत्ता में बने रहने के लिए कोई कसर नहीं छोड़ना चाह रही।

  • एमओयू के तहत अगले पांच वर्ष में हज़ारों युवाओं को हरित कौशल प्रशिक्षण प्रदान किया जाएगा

    एमओयू के तहत अगले पांच वर्ष में हज़ारों युवाओं को हरित कौशल प्रशिक्षण प्रदान किया जाएगा

    UPCAMP प्राधिकरण और 15 क्षेत्रीय ज्ञान केंद्र के बीच एमओयू

    हरित कौशल विकास के लिए हुई ऐतिहासिक पहल

    एमओयू के तहत अगले पांच वर्ष में हज़ारों युवाओं को हरित कौशल प्रशिक्षण प्रदान किया जाएगा

    यह पहल प्रदेश को वायु प्रदूषण से निपटने और हरित अर्थव्यवस्था की दिशा में अग्रणी राज्य के रूप में स्थापित करने में मील का पत्थर साबित होगी

    लखनऊ,
    विश्व बैंक के सहयोग से क्रियान्वित उत्तर प्रदेश क्लीन एयर मैनिज्मन्ट प्रोजेक्ट (UPCAMP) अथॉरिटी और 15 क्षेत्रीय ज्ञान केंद्रों के बीच बुधवार को पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन निदेशालय में एमओयू हुआ। इसका उद्देश्य राज्य में क्षमता निर्माण, प्रशिक्षण और हरित कौशल बल के विकास को सुदृढ़ करना है। यह एमओयू पर्यावरण संरक्षण और टिकाऊ विकास की दिशा में उत्तर प्रदेश सरकार की प्रतिबद्धता को रेखांकित करता है। 

    इस एमओयू के तहत अगले पांच वर्ष में हज़ारों युवाओं को हरित कौशल प्रशिक्षण प्रदान किए जाने की योजना है। साथ ही, सरकारी अधिकारियों और स्थानीय निकायों के लिए नियमित क्षमता निर्माण कार्यशालाओं का आयोजन किया जाएगा। यह पहल उत्तर प्रदेश को वायु प्रदूषण से निपटने और हरित अर्थव्यवस्था की दिशा में अग्रणी राज्य के रूप में स्थापित करने में मील का पत्थर साबित होगी।

    पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग की प्रमुख सचिव वी हेकाली झिमोमी की अध्यक्षता में यह आयोजन हुआ। इसमें विभिन्न क्षेत्रीय ज्ञान केंद्र (विभिन्न विश्वविद्यालय एवं इंस्टीट्यूट) अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी, मदन मोहन मालवीय विश्वविद्यालय, बुंदेलखंड यूनिवर्सिटी, हरकोर्ट बटलर टेक्निकल यूनिवर्सिटी, चौधरी चरण सिंह यूनिवर्सिटी, डॉ. भीमराव अंबेडकर यूनिवर्सिटी, महात्मा ज्योतिबा फुले रुहेलखंड यूनिवर्सिटी, इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्नॉलाजी, दिल्ली इंस्टिट्यूट ऑफ एनवायरनमेंट एण्ड सस्टैनबल डेवलपमेंट, बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय, इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्नॉलाजी रूड़की, राजकीय इंजीनियरिंग कॉलेज अकबरपुर, राजकीय इंजीनियरिंग कॉलेज बिजनौर, मोतीलाल नेहरू नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्नॉलाजी प्रयागराज के साथ UPCAMP की मुख्य कार्यकारी अधिकारी बी चंद्रकला ने एमओयू पर हस्ताक्षर किए। इन केंद्रों की भागीदारी से पूरे प्रदेश में हरित अर्थव्यवस्था के लिए कुशल मानव संसाधन तैयार करने का मार्ग प्रशस्त होगा। UPCAMP के उपमुख्य कार्यकारी अधिकारी मोहम्मद राहिब ने परियोजना के बारे मे सभी संस्थानों को जानकारी दी|

    मुख्य उद्देश्य
    क्षमता निर्माण: राज्य के विभिन्न क्षेत्रों में पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन से संबंधित विषयों पर सरकारी अधिकारियों, स्थानीय निकायों एवं समुदायों की क्षमता का विकास करना।

    हरित कौशल बल का विकास: युवाओं को हरित रोज़गार के अवसरों के लिए तैयार करते हुए सक्षम एवं प्रशिक्षित हरित कौशल बल (ग्रीन स्किल फोर्स) का निर्माण करना।

    ज्ञान साझाकरण: क्षेत्रीय ज्ञान केंद्रों के माध्यम से शोध, नवाचार और सर्वोत्तम प्रथाओं का प्रसार करना।

  • मक्का खरीद नीति को मंजूरी, 15 जून से 31 जुलाई तक 25 जिलों में होगी एमएसपी पर खरीद

    मक्का खरीद नीति को मंजूरी, 15 जून से 31 जुलाई तक 25 जिलों में होगी एमएसपी पर खरीद

    मोहनलालगंज में बनेगा नया उप निबंधक कार्यालय

    लखनऊ
     योगी कैबिनेट
    ने जनपद लखनऊ के मोहनलालगंज में नए उप निबंधक कार्यालय के निर्माण हेतु भूमि हस्तांतरण के प्रस्ताव को मंजूरी दी है। इस निर्णय से क्षेत्रीय नागरिकों को भूमि, भवन, विवाह, किरायानामा, गिफ्ट डीड तथा अन्य दस्तावेजों के पंजीकरण संबंधी सेवाएं अधिक सुविधाजनक और व्यवस्थित ढंग से उपलब्ध हो सकेंगी।

    कैबिनेट के निर्णय के अनुसार ग्राम मऊ, परगना एवं तहसील मोहनलालगंज स्थित कुल 953 वर्गमीटर भूमि राजस्व विभाग से स्टाम्प एवं रजिस्ट्रेशन विभाग को हस्तांतरित की जाएगी। इस भूमि पर आधुनिक सुविधाओं से युक्त उप निबंधक कार्यालय भवन का निर्माण किया जाएगा, जिसमें सब-रजिस्ट्रार कक्ष, रजिस्ट्रेशन कक्ष, अभिलेखागार, प्रतीक्षालय, पेयजल एवं महिला-पुरुष शौचालय जैसी सुविधाएं उपलब्ध होंगी। प्रदेश सरकार के अनुसार स्टाम्प एवं रजिस्ट्रेशन विभाग राज्य का प्रमुख राजस्व अर्जित करने वाला विभाग है और प्रतिवर्ष लगभग 50 लाख विलेखों का पंजीकरण करता है।

    बढ़ती जनसंख्या और पंजीकरण कार्यों की संख्या को देखते हुए नए कार्यालय की आवश्यकता महसूस की जा रही थी। कैबिनेट ने यह भी निर्णय लिया कि राजस्व विभाग द्वारा स्टाम्प एवं पंजीकरण विभाग को उक्त भूमि हस्तांतरण से संबंधित पट्टा विलेख पर स्टाम्प शुल्क तथा पंजीकरण शुल्क से पूर्ण छूट प्रदान की जाएगी। इससे विभागीय प्रक्रिया सरल होगी और भवन निर्माण का मार्ग प्रशस्त होगा।

    राज्य विधि अधिकारियों की फीस बढ़ाने के प्रस्ताव को स्वीकृति

    उच्चतम न्यायालय से लेकर जिला न्यायालयों तक पैरवी करने वाले अधिवक्ताओं को मिलेगा लाभ

    कैबिनेट बैठक में राज्य विधि अधिकारियों को दी जाने वाली रिटेनरशिप एवं प्रति सुनवाई फीस में वृद्धि के प्रस्ताव को मंजूरी प्रदान की गई। यह निर्णय उत्तर प्रदेश सरकार से संबंधित मुकदमों और वादों की प्रभावी पैरवी सुनिश्चित करने के उद्देश्य से लिया गया है।

    प्रदेश सरकार की ओर से विभिन्न जिला न्यायालयों, इलाहाबाद उच्च न्यायालय, लखनऊ खंडपीठ तथा उच्चतम न्यायालय, नई दिल्ली में आबद्ध राज्य विधि अधिकारी राज्य के हितों की रक्षा और प्रभावी विधिक प्रतिनिधित्व का महत्वपूर्ण दायित्व निभाते हैं। वर्तमान में उन्हें देय रिटेनरशिप एवं बहस शुल्क का निर्धारण 10 से 15 वर्ष पूर्व जारी शासनादेशों के आधार पर किया जा रहा था। बदलते समय, बढ़ती पेशेवर जिम्मेदारियों और न्यायिक प्रक्रियाओं की जटिलताओं को देखते हुए राज्य सरकार ने इन शुल्कों में वृद्धि का निर्णय लिया है।

    योगी सरकार के इस फैसले से अनुभवी एवं दक्ष अधिवक्ताओं को प्रोत्साहन मिलेगा तथा विभिन्न न्यायालयों में राज्य सरकार के पक्ष की और अधिक प्रभावी पैरवी सुनिश्चित हो सकेगी। कैबिनेट के निर्णय के अनुसार इस संबंध में आवश्यक कार्यवाही न्याय विभाग द्वारा की जाएगी।

    मक्का खरीद नीति को मंजूरी, 15 जून से 31 जुलाई तक 25 जिलों में होगी एमएसपी पर खरीद

    खरीदे गए मक्का का मूल्य यथासंभव 48 घंटे के भीतर किसानों को हस्तांतरित किया जाएगा

     कैबिनेट बैठक में खरीफ विपणन वर्ष 2025-26 (रबी फसल) के लिए मूल्य समर्थन योजना के अंतर्गत मक्का खरीद नीति को मंजूरी प्रदान की गई। सरकार ने मक्का का न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) 2400 रुपये प्रति क्विंटल निर्धारित किया है। कैबिनेट के निर्णय के अनुसार प्रदेश में मक्का खरीद 15 जून 2026 से 31 जुलाई 2026 तक की जाएगी।

    इसके लिए फिरोजाबाद, आगरा, मैनपुरी, अलीगढ़, कासगंज, हाथरस, एटा, बदायूं, शाहजहांपुर, रामपुर, संभल, बुलंदशहर, हापुड़, कानपुर नगर, औरैया, इटावा, कन्नौज, फर्रुखाबाद, हरदोई, उन्नाव, बहराइच, बलिया, गोंडा, फतेहपुर और मिर्जापुर कुल 25 जनपदों में 150 क्रय केंद्र स्थापित किए जाएंगे। खरीफ विपणन वर्ष 2025-26 के लिए प्रदेश में 25 हजार मीट्रिक टन मक्का खरीद का कार्यकारी लक्ष्य निर्धारित किया गया है। किसानों से खरीद कंप्यूटरीकृत सत्यापित खतौनी, आधार कार्ड एवं फोटोयुक्त पहचान पत्र के आधार पर की जाएगी।

    इसके साथ ही भूमि और बोए गए रकबे का सत्यापन भूलेख पोर्टल से ऑनलाइन कराया जाएगा। योगी सरकार ने किसानों को त्वरित भुगतान सुनिश्चित करने के लिए व्यवस्था की है कि क्रय एजेंसियों द्वारा खरीदे गए मक्का का मूल्य पीएफएमएस पोर्टल के माध्यम से किसानों के आधार लिंक एवं एनपीसीआई मैप्ड बैंक खातों में यथासंभव 48 घंटे के भीतर हस्तांतरित किया जाएगा।

    1460 करोड़ रुपये से पांच नए जिला कारागारों का होगा निर्माण

    योगी सरकार की कैबिनेट बैठक में प्रदेश के पांच जनपदों- मुरादाबाद, कानपुर नगर, औरैया, ललितपुर और भदोही में नवीन जिला कारागारों के निर्माण की परियोजनाओं को मंजूरी प्रदान की गई। इन परियोजनाओं पर 1460 करोड़ रुपये से अधिक की लागत आएगी। सरकार का उद्देश्य कारागारों में भीड़भाड़ कम करना, बंदियों के लिए बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराना तथा कारागार प्रशासन को अधिक आधुनिक और व्यवस्थित बनाना है।

    निर्णय के अनुसार मुरादाबाद में 2000 बंदी क्षमता का नया जिला कारागार 386.91 करोड़ रुपये की लागत से, कानपुर नगर में 2030 बंदी क्षमता का कारागार 384.05 करोड़ रुपये की लागत से तथा औरैया में 1056 बंदी क्षमता का कारागार 264.96 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित किया जाएगा। इसी प्रकार ललितपुर में 552 बंदी क्षमता की नई जेल 225.06 करोड़ रुपये तथा भदोही में 574 बंदी क्षमता की नई जेल 209.18 करोड़ रुपये की लागत से बनाई जाएगी। नए कारागारों के निर्माण से बंदियों के आवास, सुरक्षा, स्वास्थ्य और सुधारात्मक गतिविधियों के लिए बेहतर वातावरण उपलब्ध होगा। 

    इन प्रस्तावों को भी मिली मंजूरी

    झांसी में गोआश्रय और पशु सेवा केंद्र के लिए एमओयू को मंजूरी, पशुपालन विभाग की 5 एकड़ भूमि पर निजी संस्था के सहयोग से संचालित होंगी पशु कल्याण गतिविधियां

    कानपुर में ईएसआई अस्पतालों के हस्तांतरण को मंजूरी, राज्य सरकार द्वारा संचालित पांडुनगर अस्पताल भारत सरकार को और भारत सरकार द्वारा संचालित जाजमऊ अस्पताल राज्य सरकार को सौंपा जाएगा

  • गोरखपुर में सीएम योगी का एक्शन मोड, जनता दर्शन में दिए अहम निर्देश

    गोरखपुर में सीएम योगी का एक्शन मोड, जनता दर्शन में दिए अहम निर्देश

     गोरखपुर

    सीएम योगी आदित्यनाथ ने बुधवार को गोरखनाथ मंदिर में फरियादियों से मुलाकात कर उनकी समस्याएं सुनीं। गोरखपुर प्रवास के तीसरे दिन बुधवार को गोरखनाथ मंदिर में आयोजित जनता दर्शन में सीएम योगी ने कहा कि मामलों का निस्तारण 15 दिन के अंदर करें। इसके साथ ही पीड़ित से फीडबैक भी लें। कहा कि शिकायतों के निस्तारण में लापरवाही नहीं होनी चाहिए। जमीन विवाद को लेकर आए फरियादियों को सुन दबंगों से सख्ती से निपटने के निर्देश दिए। इसके साथ ही इलाज के लिए आए लोगों को आश्वासन दिया कि सभी का इलाज होगा। उन्होंने अफसरों को निर्देश दिया कि एस्टीमेट मंगवाएं ताकि धन उपलब्ध कराया जा सके। जनता दर्शन में सीएम ने 200 से अधिक लोगों की फरियाद सुनी और कहा कि किसी को भी चिंता करने की जरूरत नहीं, हर समस्या का समाधान होगा।

    बता दें कि सीएम योगी जब कभी गोरखपुर में होते हैं तो वह गोरखनाथ मंदिर परिसर में सुबह फरियादियों से मुलाकात कर उनकी समस्याएं सुनते और समाधान के निर्देश देते हैं। मंगलवार को भी उन्होंने फरियादियों से मुलाकात की थी। इस दौरान उन्होंने अधिकारियों को जनशिकायतों के समाधान के निर्देश दिए थे। सीएम योगी ने कहा था कि समयबद्ध और पारदर्शी तरीके से जनशिकायतों का निस्तारण सुनिश्चित करें। इसमें किसी तरह की लापरवाही क्षम्य नहीं होगी। सीएम योगी ने फरियाद लेकर आए लोगों को आश्वस्त किया कि किसी को भी चिंता करने की जरूरत नहीं है, हर समस्या का समाधान होगा।

    अधिकारियों को निर्देश दिए कि शासन की कल्याणकारी योजनाओं का लाभ हर पात्र नागरिक तक पहुंचाना सुनिश्चित किया जाए। समाज के हर जरूरतमंद के लिए आवास से लेकर इलाज तक, बिटिया की पढ़ाई, विवाह से लेकर निराश्रित, बुजुर्ग के पेंशन तक सरकार की अनेक योजनाएं हैं। सभी पात्र लोगों से आवेदन कराकर इन योजनाओं का लाभ उन तक पहुंचाया जाए। साथ ही जनशिकायतों के निस्तारण में कोई लापरवाही नहीं होनी चाहिए। कहा कि भूमाफिया की पहचान कर उन्हें सूचीबद्ध करें और केस दर्ज कर जेल भेजें। इलाज के लिए मदद की गुहार लेकर पहुंचे लोगों को मुख्यमंत्री ने भरपूर सहायता देने का आश्वासन दिया। इस संदर्भ में अधिकारियों से एस्टीमेट उपलब्ध कराने को कहा।

  • अच्छे नंबरों के लिए छात्रा की अनोखी अपील, कॉपी में लिखी अपनी मजबूरी

    अच्छे नंबरों के लिए छात्रा की अनोखी अपील, कॉपी में लिखी अपनी मजबूरी

    रुहेलखंड

    नंबर बढ़ाने के लिए कॉपी में तरह-तरह की गुजारिशें लिखी मिलने का मामला नया नहीं है। दसवीं-बारहवीं बोर्ड परीक्षा से लेकर यूनिवर्सिटी तक की परीक्षा में कई छात्र और छात्राओं की ऐसी अपीलें लिखी दिख जाती हैं। कई बार तो कॉपियों में रुपए रखे भी मिले हैं। ऐसी गुजारिशों को अक्सर परीक्षक मुस्कुराकर टाल जाते हैं लेकिन रुहेलखंड विश्वविद्यालय की बीए थर्ड इयर की एक छात्रा ने अपनी कॉपी पर ऐसी बात लिख दी कि कॉपी जांचने वाले परीक्षक भी हैरान रह गए और थोड़ी देर के लिए सोच में पड़ गए।

    छात्रा ने अपनी आंसर कॉपी में बेहद संवेदना भरे मैसेज लिखकर शिक्षक से अपील की। छात्रा ने लिखा कि प्लीज मुझे बेहतर नंबर दे दीजिए, नहीं तो घर वाले मेरी शादी करा देंगे। उसने कॉपी में यह भी लिखा कि मुझे मालूम है कि ये गलत है पर भविष्य का सवाल है। मैं अभी शादी नहीं करना चाहती। छात्रा ने यह भी लिखा कि उसे मालूम है कि यह गलत है लेकिन वह अभी शादी नहीं करना चाहती है और ऐसी स्थिति में वह अच्छे नंबर देने की गुजारिश कर रही है।

    छात्रा द्वारा कॉपी में लिखी गई पूरी बात
    बता दें कि इस समय रुहेलखंड विश्वविद्यालय की कॉपियों के मूल्यांकन का काम चल रहा है। ऐसे में बीए तृतीय वर्ष का छात्रा की आदरणीय मैम, सर को संबोधित यह मैसेज ऑनलाइन कॉपी चेकिंग के दौरान सामने आया। मुरादाबाद के एक केंद्र पर ऑनलाइन कॉपी चेकिंग के दौरान सामने आए इस मैसेज में बीए तृतीय वर्ष की छात्रा ने कहा कि घर वाले मेरी शादी कराना चाहते हैं। मैं आगे पढ़ना चाहती हूं। मैं अभी सिर्फ 21 साल की हूं। दो साल का रिजल्ट बहुत अच्छा नहीं हैं।

    किसी गर्वनमेंट यूनिवर्सिटी में दाखिले के लिए 60 प्रतिशत अंक चाहिए। इसे पूरा करने के लिए कम से कम 35 या 40 नंबर दे दीजिए, जिससे 60 प्रतिशत प्लस रिजल्ट बन जाए। कॉपी पर लिखे मैसेज में छात्रा ने 50 नंबर के पेपर में 40 नंबर की मांग की है। उसने यह भी लिखा कि ये गलत है मैं ये जानती हूं, पर प्लीज ज्यादा नंबर देकर मेरी मदद कीजिए।

  • शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने की पहल, राज्य स्तरीय मास्टर ट्रेनर प्रशिक्षण कार्यक्रम का आज से आगाज

    शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने की पहल, राज्य स्तरीय मास्टर ट्रेनर प्रशिक्षण कार्यक्रम का आज से आगाज

    गुणवत्तापूर्ण शिक्षा एवं बेहतर अधिगम परिणामों के लिए राज्य स्तरीय मास्टर ट्रेनर का प्रशिक्षण आज  से

    प्रदेश सरकार के राज्य शैक्षिक प्रबंधन एवं प्रशिक्षण संस्थान (SIEMAT) तथा लोक 

    शिक्षण संचालनालय के असेसमेंट सेल के संयुक्त तत्वावधान में AICUF (ऑल इंडिया कैथोलिक यूनिवर्सिटी फेडरेशन) में होगा प्रशिक्षण कार्यक्रम

    प्रदेश के सभी जिलों से चयनित शिक्षकों को राज्य स्तरीय मास्टर ट्रेनर के रूप में दिया जाएगा प्रशिक्षण

    भोपाल

    प्रदेश के शासकीय स्‍कूलों में पढ़ाई कर रहे व‍िद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराने एवं बेहतर अधिगम परिणामों के लिए शिक्षकों को प्रशिक्षित किया जाएगा। यह प्रशिक्षण 2 जून से शुरू होगा। इसमें प्रदेश के सभी जिलों से चयनित शिक्षकों को राज्य स्तरीय मास्टर ट्रेनर के रूप में प्रशिक्षण दिया जाएगा।

    उल्लेखनीय है कि प्रदेश सरकार के राज्य शैक्षिक प्रबंधन एवं प्रशिक्षण संस्थान (SIEMAT) तथा लोक शिक्षण संचालनालय के असेसमेंट सेल के संयुक्त तत्वावधान में राज्य के सभी जिलों से चयनित शिक्षकों को प्रशिक्षण दिया जाएगा। राज्य स्तरीय मास्टर ट्रेनर प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुभारंभ 2 जून 2026 से AICUF (ऑल इंडिया कैथोलिक यूनिवर्सिटी फेडरेशन) में किया जा रहा है। यह प्रशिक्षण कार्यक्रम समग्र शिक्षा अभियान के अंतर्गत आयोजित किया जा रहा है।

    प्रदेश के 1,872 शिक्षक प्रशिक्षण कार्यक्रम में होंगे शामिल

    प्रशिक्षण कार्यक्रम में प्रदेश के 1,872 शिक्षक शामिल होंगे। 12 विषयों में प्रत्येक जिले से चयनित 3-3 शिक्षकों को मास्टर ट्रेनर के रूप में प्रशिक्षित किया जाएगा। प्रशिक्षण प्राप्त करने के उपरांत ये शिक्षक अपने-अपने जिलों में अन्य शिक्षकों को प्रशिक्षित करते हुए मूल्यांकन एवं अधिगम सुधार की गतिविधियों को और अधिक प्रभावी बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।

    प्रशिक्षण का उद्देश्य विद्यालयी शिक्षा में मूल्यांकन प्रणाली को अधिक प्रभावी, वैज्ञानिक एवं विद्यार्थी-केंद्रित बनाना है। प्रशिक्षण के माध्यम से शिक्षकों को आधुनिक मूल्यांकन तकनीकों, उच्च गुणवत्ता वाले (Diagnostic Assessment), प्रश्नपत्र निर्माण, परीक्षा परिणामों के विश्लेषण तथा Values, Aptitude and Behaviour Test के निर्माण संबंधी व्यावहारिक प्रशिक्षण प्रदान किया जाएगा।

    सटीक आकलन होगा संभव

    प्रशिक्षण कार्यक्रम में हिंदी, अंग्रेजी, संस्कृत, गणित, रसायन विज्ञान, भौतिक विज्ञान, जीव विज्ञान, इतिहास, भूगोल, अर्थशास्त्र, राजनीति विज्ञान एवं कॉमर्स सहित कुल 12 विषयों के लिए प्रत्येक जिले से चयनित शिक्षकों को मास्टर ट्रेनर के रूप में प्रशिक्षित किया जाएगा।

    इस पहल से विद्यालयों में आयोजित मासिक, त्रैमासिक, अर्धवार्षिक, प्री-बोर्ड एवं वार्षिक परीक्षाओं की गुणवत्ता में सुधार होगा। साथ ही विद्यार्थियों की सीखने की उपलब्धियों का अधिक सटीक आकलन संभव हो सकेगा, जिससे उनकी शैक्षणिक आवश्यकताओं के अनुरूप सुधारात्मक योजनाएं तैयार की जा सकेंगी।

    प्रशिक्षण के दौरान शिक्षकों को परीक्षा परिणामों के विश्लेषण के आधार पर शैक्षणिक नियोजन एवं अधिगम सुधार रणनीतियों का भी प्रशिक्षण दिया जाएगा। इससे विद्यार्थियों की विषयगत समझ, अधिगम स्तर और परीक्षा प्रदर्शन में सकारात्मक सुधार होने की संभवनाएं रहेंगी।

    यह प्रशिक्षण कार्यक्रम राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 की भावना के अनुरुप विद्यालयी शिक्षा में गुणवत्ता संवर्धन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम सिद्ध होगा। प्रशिक्षित मास्टर ट्रेनर राज्य में मूल्यांकन सुधार की मजबूत शैक्षणिक टीम के रूप में कार्य करेंगे तथा विद्यार्थियों को बेहतर सीखने के अवसर उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण योगदान देंगे।

     

  • UP Power Consumers के लिए खुशखबरी! 10% बिजली दर बढ़ाने का प्रस्ताव खारिज, आयोग ने लगाई रोक

    UP Power Consumers के लिए खुशखबरी! 10% बिजली दर बढ़ाने का प्रस्ताव खारिज, आयोग ने लगाई रोक

    लखनऊ

    उत्तर प्रदेश में बिजली उपभोक्ताओं के लिए बड़ी खुशखबरी है. यूपी पावर कारपोरेशन लिमिटेड द्वारा फ्यूल सरचार्ज के नाम पर बिजली के दाम बढ़ाने के प्रयासों पर रोक लग गई है. विद्युत नियामक आयोग ने 10% टैरिफ को अवैध बताया है. नियामक आयोग ने बढ़े टैरिफ पर रोक लगा दी है. UPPCL ने इसी महीने से 10 फीसदी फ्यूल सरचार्ज वसूली की योजना बनाई थी. हर 100 रुपये पर 10 रुपये तक बढ़ोतरी की आशंका थी. उपभोक्ता परिषद की आयोग की दलीलों पर आयोग ने ये आदेश सुनाया है। 

    यूपी पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड ने बिजली की कीमतें बढ़ाने का पिछले हफ्ते फैसला किया था. UPPCL ने फ्यूल सरचार्ज 10 प्रतिशत जून से वसूलने का आदेश दिया था. मार्च में 10 प्रतिशत बकाया वसूली शुरू होनी थी. यूपी पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड ने प्रति 100 रुपये के बिजली बिल पर बिजली ग्राहकों को 10 रुपये अतिरिक्त चुकाने की बात थी. ये शुल्क हर महीने बिजली के बिल में ऐड करना होता है. इस बार जून महीने में ये शुल्क 10 फीसदी आएगा. UPPCL जून के बाद के महीनों में भी शुल्क बढ़ा सकता है। 

    यूपीपीसीएल का कहना था कि मार्च 2026 महीने के लिए 10% ‘फ्यूल एंड पावर परचेस एडजस्टमेंट सरचार्ज' (FPPAS) अब जून के बिल में जोड़ा जाएगा. उसका कहना था कि उत्तर प्रदेश विद्युत नियामक आयोग ने अधिसूचना के जरिये नियम बनाया था कि किसी एक महीने का फ्यूल सरचार्ज चौथे महीने के बिल में जोड़ा जाएगा। 

    किस आधार पर बढ़ाया गया है बोझ?
    बता दें कि बीते सोमवार को विद्युत नियामक आयोग ने यूपी पावर कारपोरेशन लिमिटेड से जवाब तलब किया था. आयोग ने प्रारंभिक तौर पर इस शुल्क वृद्धि पर सवाल उठाते हुए इस फैसले को नियमों के विपरीत बताया था. साथ ही यूपीसीएल को सात दिन के अंदर स्पष्ट करने को कहा गया था कि आखिर किस आधार पर उपभोक्ताओं पर यह अतिरिक्त बोझ डाला गया है। 

    हर हाल में यूपीपीसीएल को यह फैसला लेना होगा वापस
    भीषण गर्मी के बीच बढ़े हुए बिजली बिलों को लेकर पहले से ही उपभोक्ताओं में नाराजगी थी. ऐसे में आयोग की इस सख्त टिप्पणी के बाद करोड़ों उपभोक्ताओं को राहत मिलने की उम्मीद बढ़ गई है. हालांकि आयोग की इन टिप्पणियों के बाद यह तो साफ हो गया है कि यूपीपीसीएल को अपना यह फैसला वापस लेना होगा। 

    हालांकि उत्तर प्रदेश पावर कारपोरेशन का कहना है कि पावर टैरिफ यानी बिजली की दरों में कोई बढ़ोतरी नहीं की गई थी. यह फ्यूल सरचार्ज है और इसका ज्यादा अंतर बिजली के बिल में नहीं पड़ेगा। 

    उत्तर प्रदेश विद्युत उपभोक्ता परिषद ने फ्यूल सरचार्ज को चुनौती देते हुए जनहित में एक प्रस्ताव पेश किया था. उसने इसे उपभोक्ताओं पर पड़ने वाला अतिरिक्त बोझ अनुचित है. परिषद ने नियामक आयोग से दखल देने की मांग की थी. उत्तर प्रदेश पावर कार्पोरेशन लिमिटेड (UPPCL) को अब 10 प्रतिशत फ्यूल सरचार्ज लगाने के अपने फैसले को वापस लेना होगा. इस फैसले से पूरे राज्य में लाखों बिजली उपभोक्ताओं को फायदा होगा।