Category: उत्तर प्रदेश

  • उपभोक्ताओं से अतिरिक्त वसूली पर सवाल, 19 जून तक मांगा आधार का जवाब

    उपभोक्ताओं से अतिरिक्त वसूली पर सवाल, 19 जून तक मांगा आधार का जवाब

    लखनऊ
    प्रदेश के बिजली उपभोक्ताओं से जून माह में 10 फीसदी ईंधन अधिभार शुल्क वसूला जा रहा है। इस मामले में नियामक आयोग ने सख्त रुख अपनाया है। आयोग ने पॉवर कॉर्पोरेशन के प्रबंध निदेशक को दोबारा नोटिस जारी किया है।

    उन्हें 19 जून तक इस वसूली का आधार बताने वाली रिपोर्ट देने का निर्देश दिया गया है।

    विद्युत उपभोक्ताओं के बिजली बिल में 10 प्रतिशत ईंधन और बिजली खरीद लागत समायोजन (एफपीपीसीए) की वसूली हो रही है। राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने इसके विरोध में नियामक आयोग में याचिका दायर की। आयोग ने 10 प्रतिशत ईंधन अधिभार को नियम विरुद्ध बताया।

    उसने पॉवर कॉर्पोरेशन को नोटिस भेजकर दस्तावेज मांगे थे। सप्ताह भर बाद भी कॉर्पोरेशन जवाब नहीं दे पाया। प्रबंध निदेशक ने जवाब के लिए दो सप्ताह का अतिरिक्त समय मांगा। वर्मा ने इस पर आपत्ति जताई और वसूली रोकने की मांग की। इसके बाद नियामक आयोग ने बुधवार को प्रबंध निदेशक को फिर नोटिस भेजा।

    आयोग की सख्त टिप्पणी
    आयोग ने अपने नए आदेश में स्पष्ट किया है कि एफपीपीसीए के आंकड़े यूपीपीसीएल के पास होने चाहिए। यूपीईआरसी विनियमों के तहत यह जानकारी वेबसाइट पर भी सार्वजनिक होनी चाहिए थी। कॉर्पोरेशन ने आयोग द्वारा मांगी गई मूल सूचनाएं उपलब्ध नहीं कराईं। वह अन्य राज्यों में लागू व्यवस्था का अध्ययन करने की बात कर रहा है। जबकि आयोग ने केवल उत्तर प्रदेश में 10 प्रतिशत एफपीपीसीए के आंकड़ों का आधार पूछा था।

    बिना आंकड़े वसूली अवैध
    अवधेश कुमार वर्मा ने कहा कि कॉर्पोरेशन के पास एफपीपीसीए निर्धारण के आवश्यक आंकड़े उपलब्ध नहीं हैं। ऐसे में उपभोक्ताओं से की जा रही वसूली अवैध है। यह स्वयं संदेह के घेरे में आ जाती है। यह स्थिति अत्यंत गंभीर है क्योंकि लाखों उपभोक्ताओं से अतिरिक्त शुल्क लिया जा रहा है। उन्होंने आयोग से तत्काल 10 प्रतिशत की वसूली पर रोक लगाने की मांग की।

    पारदर्शिता और जवाबदेही
    परिषद अध्यक्ष ने बताया कि आयोग ने यूपीपीसीएल को 19 जून तक सभी मांगी गई सूचनाएं उपलब्ध कराने को कहा है। आयोग का यह आदेश इस बात का संकेत है कि नियामक संस्था मामले को गंभीरता से ले रही है।  उपभोक्ताओं से अतिरिक्त धनराशि वसूलने से पहले सभी गणनाएं और नियामकीय प्रक्रियाएं स्पष्ट होनी अनिवार्य हैं।  यदि नियमानुसार अभिलेख वेबसाइट पर प्रकाशित नहीं किए गए, तो यह नियामकीय प्रावधानों का उल्लंघन है। आयोग ने 1 जून को ही इस आदेश को गैर कानूनी बताया था।

     

  • 169 दिन बाद अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित, पंचायत चुनाव की तैयारियों को मिली रफ्तार

    169 दिन बाद अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित, पंचायत चुनाव की तैयारियों को मिली रफ्तार

    लखनऊ
     राज्य निर्वाचन आयोग ने बुधवार को त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव की मतदाता सूची का अंतिम प्रकाशन कर दिया। प्रदेश में कुल 29.01 लाख मतदाता बढ़ गए हैं। इसके साथ ही अब कुल मतदाताओं की संख्या बढ़कर 12.58 करोड़ हो गई है।

    मतदाता सूची का अनंतिम प्रकाशन 23 दिसंबर को हुआ था। दावे-आपत्तियों के निस्तारण के लिए आयोग ने पांच बार तारीख भी बढ़ाई थी। कुल 169 दिन बाद आयोग ने मतदाता सूची का अंतिम प्रकाशन किया है। आयोग ने पहली बार सभी मतदाताओं को स्टेट वोटर नंबर (एसवीएन) जारी किया गया है।

    राज्य निर्वाचन आयुक्त राज प्रताप सिंह ने बताया कि ड्राफ्ट मतदाता सूची में 12.29 करोड़ मतदाता थे। इसके बाद 23 दिसंबर को जारी अनंतिम मतदाता सूची में कुल 12.69 करोड़ मतदाता हो गए थे।

    इसके बाद कुल 2.32 करोड़ नाम जोड़े गए और 2.03 करोड़ नाम काटे गए। ऐसे में कुल मतदाताओं की संख्या 12.58 करोड़ हो गई है।

    मतदाता वृद्धि के मामले में बलिया प्रदेश में पहले स्थान पर रहा है, यहां 1,60,376 मतदाताओं की बढ़ोतरी हुई है। इसके बाद लखीमपुर खीरी में कुल 1,38,223, देवरिया में 1,26,771, सिद्धार्थनगर में 1,23,162 और कुशीनगर में 1,20,011 मतदाता बढ़े हैं।

    शीर्ष दस जिलों में शाहजहांपुर, प्रयागराज, गोंडा और जौनपुर भी शामिल हैं। इससे स्पष्ट है कि पूर्वांचल और तराई क्षेत्र के जिलों में मतदाताओं की संख्या में सबसे अधिक वृद्धि हुई है।

    राज्य निर्वाचन आयोग के अनुसार, पुनरीक्षण अभियान के दौरान नए मतदाताओं को जोड़ने, मृत व स्थानांतरित मतदाताओं के नाम हटाने तथा दावे-आपत्तियों के निस्तारण के बाद अंतिम मतदाता सूची तैयार की गई है, जो आगामी पंचायत चुनाव का आधार बनेगी।

    गौरतलब है कि पिछले दिनों हाई कोर्ट ने पंचायत चुनाव समय पर न होने पर नाराजगी जताते हुए आयोग से अगली सुनवाई में चुनाव की तारीख मांगी है। ऐसे में अब पंचायत चुनाव की तैयारियां तेज होने की संभावना है।

    गाजीपुर में सबसे अधिक घटे मतदाता
    मतदाताओं की संख्या में कमी वाले जिलों में गाजीपुर सबसे ऊपर रहा है, जहां 94,757 मतदाता कम हुए हैं। मैनपुरी में 93,207 और आजमगढ़ में 60,347 मतदाता कम हुए हैं। आगरा में 23,294, एटा में 23,429, कानपुर देहात में 10,759 और हापुड़ में 366 मतदाता घटे हैं।

    विशेषज्ञों के अनुसार, व्यापक पुनरीक्षण अभियान के दौरान मृत, स्थानांतरित और पात्रता खो चुके मतदाताओं के नाम हटाने के कारण आंकड़ों में यह बड़ा अंतर देखने को मिला है। कई स्थानों पर गांव के परिवार अब शहर में रहने लगे हैं। ऐसे में उनके नाम गांव की मतदाता सूची से काटे गए हैं।

    सर्वाधिक मतदाता वाले टॉप 10 जिले

    जिला          जनसंख्या

    जौनपुर          36,97,376

    आजमगढ़       35,76,287

    प्रयागराज      34,95,203

    सीतापुर          31,18,029

    गोरखपुर         29,63,142

    लखीमपुर खीरी     28,87,290

    हरदोई              28,73,247

    गाजीपुर           28,11,268

    बलिया           26,97,200

    गोंडा               26,74,509

    सबसे कम मतदाता वाले 10 जिले
    जिला                       जनसंख्या
    गौतमबुद्धनगर              2,09,562
    महोबा                          5,88,137
    चित्रकूट                        7,00,457
    हमीरपुर                      7,28,518
    हापुड़                         7,47,201
    शामली                        7,48,921
    बागपत                         8,11,402
    ललितपुर                       8,57,275
    श्रावस्ती                        8,58,977
    औरैया                          9,57,338

  • यूपी की लाखों महिलाओं के लिए खुशखबरी, CM योगी देंगे मुफ्त मकान और स्वास्थ्य सुरक्षा का फायदा

    यूपी की लाखों महिलाओं के लिए खुशखबरी, CM योगी देंगे मुफ्त मकान और स्वास्थ्य सुरक्षा का फायदा

     लखनऊ

    उत्तर प्रदेश की महिलाओं के लिए योगी सरकार बड़ी तैयारी कर रही है. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर प्रदेश में पात्र महिलाओं को मुफ्त आवास और बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं से जोड़ने की योजना पर तेजी से काम शुरू हो गया है. इसके तहत प्रधानमंत्री आवास योजना, मुख्यमंत्री आवास योजना, आयुष्मान भारत और मुख्यमंत्री जन आरोग्य योजना का लाभ देने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है. महिला कल्याण विभाग लाभार्थियों का डाटा जुटाने में लगा है। 

    सरकार की योजना के तहत पात्र महिलाओं को प्रधानमंत्री आवास योजना, मुख्यमंत्री आवास योजना, आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना और मुख्यमंत्री जन आरोग्य योजना का लाभ दिया जाएगा. इसका उद्देश्य उन महिलाओं को नई शुरुआत का अवसर देना है, जो सामाजिक या पारिवारिक संकटों के कारण असुरक्षित जीवन जीने को मजबूर हैं। 

    किन महिलाओं को मिलेगा लाभ

    सरकारी तैयारी के अनुसार तीन श्रेणियों की महिलाओं को प्राथमिकता दी जाएगी. जिसमें पहले तीन तलाक से प्रभावित महिलाएं, दूसरे पर एसिड अटैक पीड़ित महिलाएं और तीसरे पर निराश्रित एवं बेसहारा महिलाएं होंगी. इन महिलाओं को आवास, स्वास्थ्य और सामाजिक सुरक्षा से जोड़ने की व्यापक योजना पर काम शुरू हो चुका है. सरकार का मानना है कि केवल आर्थिक सहायता ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि सम्मानजनक जीवन के लिए स्थायी आवास और स्वास्थ्य सुरक्षा भी उतनी ही जरूरी है। 

    मुख्यमंत्री योगी के निर्देश के बाद शुरू हुई कार्रवाई
    मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने हाल ही में एक उच्चस्तरीय बैठक में अधिका
    रियों को स्पष्ट निर्देश दिए थे कि ऐसी महिलाओं की पहचान की जाए जो गंभीर सामाजिक संकटों का सामना कर चुकी हैं और जिनके पास रहने के लिए सुरक्षित घर नहीं है. मुख्यमंत्री ने कहा था कि तीन तलाक और एसिड अटैक जैसी घटनाओं से प्रभावित महिलाओं को सरकार की कल्याणकारी योजनाओं से जोड़ना प्राथमिकता होनी चाहिए. इसके तहत पात्र महिलाओं को प्रधानमंत्री आवास योजना या मुख्यमंत्री आवास योजना के जरिए पक्का मकान उपलब्ध कराया जाएगा. साथ ही उन्हें और उनके परिवारों को आयुष्मान भारत तथा मुख्यमंत्री जन आरोग्य योजना के तहत स्वास्थ्य बीमा और उपचार की सुविधाएं भी उपलब्ध कराई जाएंगी। 

    महिला कल्याण विभाग जुटा रहा विस्तृत डाटा
    सरकार की इस महत्वाकांक्षी योजना को जमीन पर उतारने के लिए महिला कल्याण विभाग ने व्यापक स्तर पर डाटा संग्रहण अभियान शुरू कर दिया है. विभाग तीन तलाक, एसिड अटैक और निराश्रित महिलाओं का सत्यापित विवरण एकत्रित कर रहा है. इसके लिए विभिन्न विभागों के साथ समन्वय स्थापित किया जा रहा है ताकि कोई भी पात्र महिला सरकारी लाभ से वंचित न रह जाए. अधिकारियों के अनुसार लाभार्थियों की पहचान के बाद उन्हें प्राथमिकता के आधार पर विभिन्न योजनाओं से जोड़ा जाएगा. इसके लिए शासन स्तर पर आवश्यक दिशा-निर्देश और शासनादेश तैयार करने की प्रक्रिया भी चल रही है। 

    क्यों खास है यह पहल?
    विशेषज्ञों का मानना है कि एसिड अटैक और तीन तलाक जैसी घटनाएं किसी महिला के जीवन को पूरी तरह बदल देती हैं. एसिड अटैक पीड़ित महिलाओं को लंबे समय तक इलाज, प्लास्टिक सर्जरी और पुनर्वास की आवश्यकता पड़ती है. वहीं तीन तलाक से प्रभावित कई महिलाएं अचानक आर्थिक और सामाजिक असुरक्षा के दायरे में आ जाती हैं. ऐसी परिस्थितियों में यदि उन्हें सुरक्षित आवास और स्वास्थ्य सुरक्षा मिलती है तो वे दोबारा आत्मनिर्भर जीवन की ओर बढ़ सकती हैं. यही वजह है कि सरकार केवल आर्थिक मदद तक सीमित नहीं रहना चाहती, बल्कि महिलाओं को स्थायी सुरक्षा देने के लिए बहुआयामी योजना पर काम कर रही है। 

    आवास के साथ स्वास्थ्य सुरक्षा भी
    सरकार की इस योजना का दूसरा महत्वपूर्ण पहलू स्वास्थ्य सुरक्षा है. कई बार गंभीर परिस्थितियों का सामना कर रही महिलाओं के पास इलाज के लिए पर्याप्त संसाधन नहीं होते. आयुष्मान भारत योजना के तहत पात्र परिवारों को लाखों रुपये तक के कैशलेस उपचार की सुविधा मिलती है. वहीं मुख्यमंत्री जन आरोग्य योजना भी स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है. सरकार चाहती है कि जिन महिलाओं को आवास मिलेगा, उन्हें स्वास्थ्य संबंधी सुरक्षा भी समान रूप से उपलब्ध हो ताकि वे भविष्य को लेकर निश्चिंत रह सकें। 

    जानकारी के अभाव में नहीं छूटेगा कोई लाभार्थी
    महिला कल्याण विभाग का कहना है कि अक्सर कई पात्र लोग केवल जानकारी के अभाव या जटिल प्रक्रियाओं के कारण सरकारी योजनाओं का लाभ नहीं ले पाते. इसी समस्या को देखते हुए विभाग विभिन्न जिलों से डाटा जुटा रहा है और पात्र महिलाओं तक योजनाओं की जानकारी पहुंचाने की रणनीति भी तैयार की जा रही है. सरकार का प्रयास है कि लाभार्थी महिलाओं को अलग-अलग कार्यालयों के चक्कर न लगाने पड़ें और उन्हें एकीकृत व्यवस्था के माध्यम से योजनाओं का लाभ मिल सके। 

  • 7 किलो सोना, 1 किलो चांदी और करोड़ों का माल… नौकरों ने मालिक को लगाया करोड़ों का चूना, फरारी की कहानी आई सामने

    7 किलो सोना, 1 किलो चांदी और करोड़ों का माल… नौकरों ने मालिक को लगाया करोड़ों का चूना, फरारी की कहानी आई सामने

     रामपुर
    रामपुर और तेलंगाना पुलिस के ऑपरेशन में ऐसे पति-पत्नी और साली को अरेस्ट किया गया है, जो तेलंगाना से चोरी कर नेपाल भाग रहे थे. ये चोरी कोई मामूली नहीं थी. जिस घर में तीनों नौकर बनकर पहुंचे थे, वहां से करीब 7 किलो सोना, एक किलो चांदी और कैश पर हाथ साफ किया था. टोटल चोरी करीब 12 करोड़ की थी. फिलहाल तीनों आरोपियों को पकड़ लिया गया है। 

    दरअसल, तेलंगाना के साइबराबाद कमिश्नरेट के गाचीबाउली इलाके में एक संपन्न परिवार रहता था. घर बड़ा था, जिंदगी व्यवस्थित थी और जरूरत थी कुछ मदद की. इसी जरूरत ने घर में एंट्री कराई- नेपाल से आए कमल, उसकी पत्नी विमला और उसकी साली कल्पना की। 

    शुरुआत बिल्कुल सामान्य थी. काम हुआ, व्यवहार अच्छा रहा और धीरे-धीरे ये तीनों घर के 'अंदर' आ गए- सिर्फ दीवारों के भीतर नहीं, बल्कि भरोसे के भीतर भी. घर के लोग शायद यह सोच भी नहीं सकते थे कि जिस परिवार पर वे आंख बंद करके भरोसा कर रहे हैं, वही एक दिन उनके लिए सबसे बड़ा झटका बन जाएगा। 

    कहते हैं कि बड़े घरों में सबसे बड़ी सुरक्षा दीवारें नहीं, भरोसा होता है. और इसी भरोसे को धीरे-धीरे मजबूत किया गया. कमल, विमला और कल्पना ने खुद को सिर्फ काम करने वाले लोगों तक सीमित नहीं रखा. वे घर की दिनचर्या, लोगों की आदतें, आने-जाने का समय- सब समझने लगे. और जब किसी घर की हर कमजोरी सामने हो, तो वार करना आसान हो जाता है। 
    फिर आया वो दिन, जो इस पूरी कहानी का टर्निंग पॉइंट बना. घर के मालिक परिवार समेत बाहर गए हुए थे. घर खाली था, लेकिन अंदर तीन लोग मौजूद थे- जिन्हें अब सिर्फ काम नहीं करना था, बल्कि खेल खेलना था। 

    आरोप है कि इसी मौके का फायदा उठाकर इन तीनों ने घर के अंदर रखे कीमती सामान पर हाथ साफ कर दिया. और जो माल लेकर ये निकले, वह मामूली नहीं था- 7 किलो सोना, 1 किलो चांदी और नकदी- कुल कीमत करीब 12 करोड़ रुपये. एक झटके में घर की दुनिया बदल गई, और एक घर के अंदर का भरोसा पूरी तरह टूट गया। 

    नेपाल की तरफ भाग रहे थे आरोपी
    चोरी के बाद ये तीनों अचानक गायब हो गए. कोई शोर नहीं, कोई संकेत नहीं. बस एक खाली घर और एक बड़ा सवाल- इतना बड़ा माल गया कहां? तेलंगाना पुलिस ने मामला दर्ज किया और जांच शुरू हुई. लेकिन यह केस इतना आसान नहीं था. क्योंकि चोरी के आरोपी थे, जो रोज उसी घर में खाना बनाते, सफाई करते और लोगों के बीच रहते थे। 

    जांच धीरे-धीरे आगे बढ़ी और सुराग रामपुर तक पहुंचे. तेलंगाना पुलिस ने यूपी के रामपुर पुलिस अधीक्षक से संपर्क साधा. दो राज्यों की पुलिस एक साथ आई, इनपुट शेयर हुए, चेकिंग शुरू हुई और निगाहें उन लोगों पर टिक गईं, जो नेपाल की तरफ निकलने की कोशिश में थे। 

    रामपुर में चेकिंग के दौरान पुलिस को सफलता मिली. पुलिस टीम ने तीनों- कमल, विमला और कल्पना को दबोच लिया. उनके पास से जो बरामद हुआ, उसने पूरे केस को और बड़ा बना दिया- करीब 7 किलो सोना, 1 किलो चांदी और लगभग 25 हजार रुपये नकद. पुलिस के मुताबिक, यह पूरा माल उसी घर से चोरी किया गया था, जहां वे नौकरी करते थे। 

    रामपुर पुलिस अधीक्षक सोमेंद्र मीना ने बताया कि यह एक संयुक्त ऑपरेशन था, जिसमें तेलंगाना पुलिस और रामपुर पुलिस ने मिलकर काम किया. उनके अनुसार, गाचीबाउली में दर्ज केस के आधार पर लगातार इनपुट शेयर किए जा रहे थे. चेकिंग के दौरान ही यह सफलता मिली और तीनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया. पुलिस का कहना है कि अभी इनके अन्य साथियों की भी जांच की जा रही है और नेपाल पुलिस से भी संपर्क किया जाएगा, ताकि इनके आपराधिक इतिहास की पूरी जानकारी सामने आ सके। 

  • ट्रांसफार्मर, फीडर और उपकेंद्रों की चौबीसों घंटे निगरानी, मेंटेनेंस कार्य तेज

    ट्रांसफार्मर, फीडर और उपकेंद्रों की चौबीसों घंटे निगरानी, मेंटेनेंस कार्य तेज

    भीषण गर्मी में भी बिजली आपूर्ति में उत्तर प्रदेश बना नंबर वन, 31 हजार मेगावाट से अधिक की डिमांड पूरी

    योगी सरकार की सतर्कता से निर्बाध बिजली सप्लाई, दिन-रात मैदान में डटे बिजलीकर्मी

    7 जून को 31,147 मेगावाट बिजली आपूर्ति, देश में सबसे अधिक डिमांड पूरी

    ट्रांसफार्मर, फीडर और उपकेंद्रों की चौबीसों घंटे निगरानी, मेंटेनेंस कार्य तेज

     8 जून को दोपहर 12 बजे 27,838 मेगावाट बिजली सप्लाई, हर घंटे मांग के अनुसार आपूर्ति जारी

    लखनऊ 
    उत्तर प्रदेश में इस समय प्रचंड गर्मी का दौर जारी है। प्रदेश के कई जिलों में अधिकतम तापमान 43 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंच चुका है। भीषण गर्मी के कारण बिजली की मांग में लगातार वृद्धि हो रही है, लेकिन मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर उप्र. पावर कारपोरेशन लिमिटेड (यूपीपीसीएल) उपभोक्ताओं को निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने में जुटा हुआ है। डिमांड बिजली आपूर्ति करने में उत्तर प्रदेश नंबर वन पर है। बढ़ती मांग के बावजूद प्रदेश में सुचारु बिजली व्यवस्था बनाए रखने को लेकर योगी सरकार के प्रयासों की व्यापक सराहना हो रही है।

    6 और 7 जून को यूपी में रिकॉर्ड डिमांड बिजली आपूर्ति की गई

    यूपी इस समय डिमांड बिजली आपूर्ति करने में देश के अग्रणी राज्यों में शामिल है। 7 जून को प्रदेश में 31,147 मेगावाट की रिकॉर्ड डिमांड बिजली आपूर्ति की गई, जो देश में सबसे अधिक रही। इसी तरह 6 जून को भी डिमांड बिजली आपूर्ति करने में  उत्तर प्रदेश सबसे आगे रहा है। 6 जून को 31049 मेगावाट और 5 जून को 29130 मेगावाट डिमांड बिजली आपूर्ति की गई थी। लगातार इतनी बड़ी मात्रा में बिजली उपलब्ध कराना यूपीपीसीएल की मजबूत कार्यप्रणाली और बेहतर प्रबंधन को दर्शाता है।

    8 जून को दोपहर 12 बजे 27838 मेगावाट बिजली आपूर्ति की गई

    7-8 जून की रात 1 बजे 30165 मेगावाट डिमांड बिजली आपूर्ति की गई। इसी तरह रात 3 बजे 29190 मेगावाट और रात 4 बजे 28482 मेगावाट डिमांड बिजली आपूर्ति की गई है। इसी तरह 8 जून की सुबह 6 बजे 25463 मेगावाट, सुबह 8 बजे 22666 मेगावाट, सुबह 10 बजे 26288 मेगावाट और सुबह 11 बजे 27138 मेगावाट डिमांड बिजली आपूर्ति की गई है। ऐसे ही दोपहर 12 बजे 27838 मेगावाट डिमांड बिजली आपूर्ति की गई है। 

    विभागीय टीम लगातार मेंटेनेंस कार्य में जुटी

    मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदेशवासियों को गर्मी के मौसम में निर्बाध बिजली उपलब्ध कराने के स्पष्ट निर्देश दिए हैं। इसी के अनुरूप यूपीपीसीएल की टीमें चौबीसों घंटे बिजली व्यवस्था की निगरानी कर रही हैं। प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों में बिजली मांग का लगातार विश्लेषण किया जा रहा है ताकि किसी भी स्थिति में उपभोक्ताओं को अनावश्यक परेशानी का सामना न करना पड़े। गर्मी के मौसम में बिजली की मांग बढ़ने से ट्रांसफार्मर, फीडर और अन्य विद्युत उपकरणों पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है। इसे देखते हुए विभागीय टीमें लगातार मेंटेनेंस कार्यों में जुटी हुई हैं। 

    बिजली कर्मी दिन-रात फील्ड में रहकर कर रहे कार्य

    दिन के साथ-साथ रात्रिकालीन समय में भी बिजलीकर्मी फील्ड में रहकर आवश्यक तकनीकी कार्यों को पूरा कर रहे हैं। इससे संभावित खराबियों को पहले ही दूर किया जा रहा है और बिजली आपूर्ति को निर्बाध बनाए रखने में मदद मिल रही है।
    प्रदेश के विभिन्न जिलों में बिजली विभाग के अधिकारी और कर्मचारी लगातार उपकेंद्रों तथा वितरण तंत्र का निरीक्षण कर रहे हैं। निरीक्षण के दौरान बिजली व्यवस्था की समीक्षा की जा रही है और अधिकारियों को निर्देश दिए जा रहे हैं कि उपभोक्ताओं को हर परिस्थिति में सुरक्षित, गुणवत्तापूर्ण और निरंतर बिजली आपूर्ति सुनिश्चित की जाए। इसके साथ ही शिकायतों के त्वरित निस्तारण पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है। 

    प्रदेश में लगातार रिकॉर्ड स्तर पर डिमांड बिजली आपूर्ति की जा रहीः निदेशक वितरण

    यूपीपीसीएल के निदेशक वितरण ज्ञानेंद्र धर द्विवेदी ने बताया कि प्रदेश में पड़ रही भीषण गर्मी के कारण बिजली की मांग लगातार बढ़ रही है, लेकिन पावर कॉरपोरेशन उपभोक्ताओं को निर्बाध और गुणवत्तापूर्ण बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए पूरी तत्परता के साथ कार्य कर रहा है। प्रदेश लगातार रिकॉर्ड स्तर पर डिमांड बिजली आपूर्ति कर रहा है। उन्होंने बताया कि यूपीपीसीएल की टीमें हर स्थिति से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार हैं और उपभोक्ताओं को बेहतर बिजली सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए निरंतर प्रयासरत हैं।

  • 4000 से अधिक महिलाओं को मिला रोजगार, महिला स्वयं सहायता समूह संभाल रहे उत्पादन व्यवस्था

    4000 से अधिक महिलाओं को मिला रोजगार, महिला स्वयं सहायता समूह संभाल रहे उत्पादन व्यवस्था

    कुपोषण के खिलाफ जंग में यूपी बना मॉडल, 1.56 करोड़ लाभार्थियों तक पहुंच रहा पौष्टिक आहार 

    योगी सरकार की टेक होम राशन योजना से मातृ एवं शिशु पोषण को मिली नई मजबूती

    4000 से अधिक महिलाओं को मिला रोजगार, महिला स्वयं सहायता समूह संभाल रहे उत्पादन व्यवस्था
     
    जीपीएस, क्यूआर कोड और ओटीपी आधारित सिस्टम से पारदर्शी हुई पूरी वितरण प्रक्रिया

    महिला एवं बाल विकास विभाग की पहल से यूपी बना देश में पोषण सुधार का अग्रणी मॉडल

    लखनऊ
    मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मार्गदर्शन में उत्तर प्रदेश कुपोषण के खिलाफ अपनी लड़ाई में देश के लिए एक प्रभावी मॉडल बनकर उभरा है। महिला एवं बाल विकास विभाग और बाल विकास सेवा एवं पुष्टाहार विभाग की सक्रिय कार्यशैली के चलते प्रदेश में संचालित टेक होम राशन योजना मातृ एवं शिशु पोषण को नई मजबूती प्रदान कर रही है। पोषण, तकनीक, पारदर्शिता और महिला सशक्तीकरण को एक साथ जोड़ने वाली यह व्यवस्था अब राष्ट्रीय स्तर पर सराहना प्राप्त कर रही है।

    योगी सरकार ने भारत सरकार की सक्षम आंगनवाड़ी एवं पोषण 2.0 गाइडलाइन तथा राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम-2023 के अनुरूप रेसिपी आधारित अनुपूरक पुष्टाहार व्यवस्था को प्रभावी रूप से लागू किया है। उत्तर प्रदेश देश का पहला राज्य बन गया है जिसने इस नई प्रणाली को बड़े पैमाने पर धरातल पर उतारा है। वर्तमान में प्रदेश में हर महीने लगभग 1.56 करोड़ लाभार्थियों तक पौष्टिक आहार पहुंचाया जा रहा है। इनमें छह माह से छह वर्ष तक के बच्चे, गर्भवती महिलाएं, धात्री माताएं तथा अतिकुपोषित बच्चे शामिल हैं।

    नाटेपन की दर 39.7 से घटकर 31.5 प्रतिशत तक पहुंची 

    सीएम योगी के मार्गदर्शन में यह पहल केवल राशन वितरण तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका सकारात्मक असर स्वास्थ्य संकेतकों में भी स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है। राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण के आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2015-16 की तुलना में वर्ष 2019-21 के दौरान प्रदेश में बच्चों में स्टंटिंग यानी नाटेपन की दर 39.7 प्रतिशत से घटकर 31.5 प्रतिशत तक पहुंच गई। इसके अलावा अल्पवजन और दुबलापन जैसी समस्याओं में भी उल्लेखनीय सुधार दर्ज किया गया है। यह उपलब्धि दर्शाती है कि योगी सरकार की पोषण नीति जमीनी स्तर पर प्रभावी परिणाम दे रही है।

    विशेष पोषण उत्पाद किए जा रहे तैयार 

    योगी सरकार में इस योजना के तहत विभिन्न आयु वर्गों के लिए विशेष पोषण उत्पाद तैयार किए जा रहे हैं। शिशु अमृत, शिशु आहार, बाल पुष्टिकर और संपूर्ण मातृ आहार जैसे उत्पाद बच्चों और महिलाओं को संतुलित एवं पौष्टिक भोजन उपलब्ध करा रहे हैं। वहीं बच्चों के लिए आरोग्य पोषण, बाल संजीवनी और सक्षम पोषण जैसी ऊर्जा युक्त विशेष व्यवस्थाएं भी की गई हैं। योगी सरकार ने पूरी आपूर्ति व्यवस्था को आधुनिक तकनीक से जोड़कर पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित की है। जीपीएस ट्रैकिंग, क्यूआर कोड और ओटीपी आधारित सत्यापन प्रणाली के माध्यम से हर पैकेट की डिजिटल निगरानी की जा रही है। इससे वितरण प्रक्रिया अधिक पारदर्शी हुई है और लाभार्थियों तक गुणवत्तापूर्ण पोषण सामग्री समय पर पहुंच रही है।

    4000 से अधिक महिलाएं उत्पादन इकाइयों से जुड़ीं

    महिला सशक्तीकरण के क्षेत्र में भी यह योजना नई मिसाल बन रही है। टेक होम राशन के उत्पादन और आपूर्ति की जिम्मेदारी मुख्य रूप से उत्तर प्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन से जुड़े महिला स्वयं सहायता समूहों को सौंपी गई है। वर्तमान में प्रदेश की 4000 से अधिक महिलाएं इन उत्पादन इकाइयों से जुड़कर रोजगार और स्वरोजगार के अवसर प्राप्त कर रही हैं। इससे न केवल महिलाओं की आर्थिक स्थिति मजबूत हुई है, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी नई गति मिली है।

      हर्षिता माथुर, निदेशक, बाल विकास एवं पुष्टाहार तथा राज्य पोषण मिशन

  • यूपी में प्रशासनिक फेरबदल की तैयारी, PCS से IAS और PPS से IPS प्रमोशन की प्रक्रिया शुरू

    यूपी में प्रशासनिक फेरबदल की तैयारी, PCS से IAS और PPS से IPS प्रमोशन की प्रक्रिया शुरू

    लखनऊ
    उत्तर प्रदेश में पीसीएस से आईएएस के पदों पर पदोन्नति देने के लिए 10 जून को डीपीसी दिल्ली में होगी। इसमें वर्ष 2010, 2011 व 2012 बैच के पीसीएस अफसरों के नामों पर विचार होगा। नियुक्ति विभाग ने इसके लिए तैयारियां शुरू कर दी है। केंद्र सरकार ने चयन वर्ष 2025 के लिए उत्तर प्रदेश को भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) में पदोन्नति कोटे के 33 पद आवंटित किए हैं। इससे वर्ष 2010 और 2011 बैच के पीसीएस अधिकारियों के आईएएस बनने का रास्ता साफ हो गया है। नियुक्ति विभाग ने केंद्र से आवंटित पदों के आधार पर संभावित अधिकारियों की वार्षिक गोपनीय प्रविष्टियां (एसीआर) और सेवा अभिलेख जुटाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।

    इस बार पीसीएस से आईएएस में पदोन्नति होने वाले पदों की संख्या बढ़ने की वजह से 2010 और 2011 के साथ 2012 बैच के भी कुछ अफसरों को मौका मिल सकता है। वर्ष 2010 और 2011 बैच में अधिकारियों की संख्या कम है। वर्ष 2010 बैच में पीसीएस सेवा के आठ अधिकारी हैं, 2011 बैच में 21 हैं। दोनों बैच की संख्या मिलाकर 29 होती है। इसके बाद भी चार पद रिक्त बचते हैं। इसीलिए 2012 बैच के भी कुछ अफसरों को मौका मिल सकता है।

    इन नामों पर विचार
    वर्ष 2010 बैच के डा. विश्राम, अशोक कुमार कन्नौजिया, पुष्पराज सिंह, राजकुमार द्विवेदी, राकेश कुमार पटेल, आलोक कुमार, सुशीला, संजय कुमार सिंह। वर्ष 2011 में पूनम निगम, संतोष बहादुर सिंह, पंकज वर्मा, प्रदीप कुमार यादव, योगानंद पांडे, विजय कुमार सिंह, अतुल कुमार-11, डा. सुनील कुमार वर्मा, हर्ष देव पांडे, शैलेंद्र कुमार सिंह, डा. नितिन मदान, प्रियंका सिंह, अमित कुमार-प्रथम, रिंकी जायसवाल, अमित सिंह, अमित कुमार-द्वितीय, विवेक श्रीवास्तव, वैभव मिश्रा, नरेंद्र बहादुर सिंह, संदीप कुमार, गरिमा स्वरूप हैं।

    पीपीएस से आईपीएस की प्रक्रिया भी जारी
    पुलिस महकमे में भी बड़ा प्रशासनिक बदलाव देखने को मिल सकता है। प्रदेश के 29 पीपीएस अधिकारियों को IPS में प्रमोट करने की भी प्रक्रिया तेज हो गई है। शासन की ओर से आईपीएस कैडर में रिक्त पड़े 29 पदों को भरने के लिए नियमों के तहत तीन गुना अधिक पीपीएस अधिकारियों के नाम संघ लोक सेवा आयोग को भेज दिए गए हैं। यूपीएससी इन अधिकारियों के सेवा रिकॉर्ड, गोपनीय प्रविष्टियों और लंबित जांचों की समीक्षा करेगा।

    यूपी में आईपीएस कैडर के 29 पद लंबे समय से रिक्त हैं। इन्हें भरने के लिए सरकार और डीजीपी मुख्यालय ने प्रमोशन प्रक्रिया को तेज किया। प्रस्ताव तैयार कर यूपीएससी को भेजा गया है। नियमों के मुताबिक, जितने पद रिक्त होते हैं, उससे तीन गुना अधिक अधिकारियों के नाम विचार के लिए भेजे जाते हैं।

  • एनकाउंटर में खत्म हुआ भानु प्रताप सिंह का खेल, 24 घंटे में 6 कार्रवाइयों से अपराधियों में खौफ

    एनकाउंटर में खत्म हुआ भानु प्रताप सिंह का खेल, 24 घंटे में 6 कार्रवाइयों से अपराधियों में खौफ

     लखनऊ
    उत्तर प्रदेश में अपराधियों के खिलाफ पुलिस और एसटीएफ का एक्शन लगातार जारी है. अयोध्या से लेकर झांसी, लखनऊ, हापुड़ और चंदौली तक पुलिस ने मुठभेड़ों और छापेमारी के जरिए कई बड़े अपराधियों को या तो गिरफ्तार किया है या तो ढेर किया है. इस कार्रवाई से अपराधियों में दहशत का माहौल है. आइए जानते हैं कि 24 घंटे में कहां-कहां मुठभेड़ हुई…

    अयोध्या
    सबसे बड़ी कार्रवाई अयोध्या में हुई, जहां प्रयागराज एसटीएफ यूनिट और कुख्यात अपराधी भानु प्रताप सिंह के बीच मुठभेड़ हुई. मुठभेड़ में घायल भानु प्रताप सिंह की अस्पताल में इलाज के दौरान मौत हो गई. भानु पर आजमगढ़ से एक लाख, अंबेडकर नगर से पचास हजार और गोरखपुर से पंद्रह हजार रुपये का इनाम घोषित था. पुलिस के मुताबिक वह कॉन्ट्रैक्ट किलर और डकैत था व उसके खिलाफ हत्या और डकैती समेत 40 से अधिक गंभीर मुकदमे दर्ज थे। 

    झांसी
    उधर झां
    सी में हत्या के मामले में वांछित दो आरोपियों को पुलिस ने आधी रात के बाद मुठभेड़ में घेर लिया. पुलिस की गोली लगने से एक आरोपी घायल हो गया, जबकि दूसरे ने सरेंडर कर दिया. दोनों पर 24 घंटे पहले हुई हत्या में शामिल होने का आरोप है. पुलिस अन्य फरार आरोपियों की तलाश कर रही है। 

    लखनऊ
    लखनऊ के गाजीपुर थाना क्षेत्र में महिला से छेड़छाड़, मारपीट और हत्या के प्रयास के मामले में भी पुलिस को बड़ी सफलता मिली है. सीसीटीवी फुटेज और तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर आरोपी सुमित कश्यप को गिरफ्तार किया गया. पूछताछ में उसके साथी सनी उर्फ शनि कश्यप का नाम सामने आया. पुलिस मुठभेड़ के बाद दूसरे आरोपी को भी गिरफ्तार कर लिया गया है। 

    हापुड़
    हापुड़ में व्यापारी नरेंद्र कबाड़ी के घर हुई लूटकांड की वारदात का पुलिस ने खुलासा कर दिया है. मुठभेड़ के दौरान दो बदमाशों के पैर में गोली लगी, जबकि वारदात में शामिल कुल पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है. मामले का विस्तृत खुलासा एसपी कुंवर ज्ञानंजय सिंह करेंगे। 

    चंदौली
    वहीं चंदौली में 24 घंटे पहले हुए हत्याकांड के मुख्य शूटर को पुलिस ने मुठभेड़ के दौरान गिरफ्तार कर लिया. आरोपी के दोनों पैरों में गोली लगी है और उसका अस्पताल में इलाज चल रहा है. पुलिस का कहना है कि आरोपी ने पुलिस टीम पर फायरिंग की थी, जिसके जवाब में की गई कार्रवाई में वह घायल हुआ। 

    अयोध्या एनकाउंटर में मारे गए इनामी बदमाश भानु प्रताप सिंह की क्राइम कुंडली 

    गोरखपुर के बेलघाट थाना क्षेत्र के बिखनापुर गांव का निवासी भानु प्रताप सिंह पूर्वांचल के कई जिलों में आतंक का पर्याय बना हुआ था. प्रयागराज एसटीएफ के इंस्पेक्टर जेपी राय के नेतृत्व में टीम ने सूचना के आधार पर घेराबंदी की, जिसके बाद हुई फायरिंग में भानु गोली लगी, जिसके बाद उसकी मौत हो गई. भानु पर आजमगढ़, अंबेडकरनगर और गोरखपुर समेत विभिन्न जनपदों से कुल मिलाकर 1 लाख रुपये, 50 हजार रुपये और 15 हजार रुपये के इनाम घोषित थे. वह लंबे समय से फरार चल रहा था और पुलिस की मोस्ट वांटेड सूची में शामिल था। 

    15 सालों का खौफनाक आपराधिक इतिहास
    पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक, भानु प्रताप सिंह का आपराधिक इतिहास बेहद खौफनाक था. साल 2010 से लेकर 2025 तक उसके खिलाफ लगातार मुकदमे दर्ज होते रहे. उस पर गोरखपुर, आजमगढ़, संतकबीरनगर, मऊ, बस्ती, देवरिया और अंबेडकरनगर सहित कई जिलों में 40 से अधिक संगीन मुकदमे दर्ज थे. वह पूर्वांचल के संगठित अपराध गिरोहों से जुड़ा हुआ था और सुपारी लेकर हत्या करने वाले शातिर कॉन्ट्रैक्ट किलर के रूप में सक्रिय था। 

    हत्या, डकैती और गैंगस्टर एक्ट समेत दर्जनों धाराएं
    भानु के खिलाफ दर्ज मुकदमों में कानून की सबसे गंभीर धाराएं शामिल थीं. उसके अपराध इतिहास में- 

    हत्या और साजिश: हत्या (302 IPC), हत्या का प्रयास (307 IPC) और हत्या की साजिश (120B IPC)

    लूट और अपहरण: डकैती (395, 397 IPC), लूट (392, 394 IPC) और अपहरण (363, 366 IPC)

    संगठित अपराध व अन्य: गैंगस्टर एक्ट, गुंडा एक्ट, आर्म्स एक्ट, एनडीपीएस एक्ट, धोखाधड़ी (420 IPC) और सार्वजनिक संपत्ति क्षति निवारण अधिनियम। 

    ध्वस्त हुआ पूर्वांचल का नेटवर्क
    भानु के खिलाफ सबसे ज्यादा मुकदमे गोरखपुर, आजमगढ़ और संतकबीरनगर में दर्ज थे. आजमगढ़ के महाराजगंज, अहरौला और अतरौलिया थानों के मामलों में वह वांछित था. दर्शन नगर चौकी प्रभारी बृजभूषण ने भानु की मौत की मौत की पुष्टि की है. एसटीएफ का मानना है कि इस एनकाउंटर से पूर्वांचल का एक बड़ा आपराधिक नेटवर्क पूरी तरह ध्वस्त हो गया है। 

    आपको बता दें कि यूपी में अपराधियों के खिलाफ पुलिस का अभियान लगातार जारी है. अलग-अलग जिलों में हुई इन कार्रवाइयों को कानून-व्यवस्था के मोर्चे पर बड़ी सफलता माना जा रहा है. फिलहाल सभी मामलों में आगे की जांच जारी है। 

  • प्रतियोगी परीक्षाओं के नाम पर वसूली करने वाला फर्जी गैंग बेनकाब

    प्रतियोगी परीक्षाओं के नाम पर वसूली करने वाला फर्जी गैंग बेनकाब

    लखनऊ

    प्रतियोगी परीक्षा का पेपर लीक कराने का दावा कर छात्रों से पैसे वसूलने वाले एक फर्जी रैकेट का खुलासा हुआ है. यूपी STF ने लखनऊ से ओम कुमार नाम के आरोपी को गिरफ्तार किया है. आरोप है कि वह टेलीग्राम पर 'पेपर लीक' जैसे चैनल बनाकर परीक्षा से एक दिन पहले प्रश्नपत्र और उत्तर पुस्तिका देने का झांसा देता था. इसके बदले हर परीक्षार्थी से करीब 2 हजार रुपये लिए जाते थे.

    सरकारी नौकरी की तैयारी करने वाले लाखों छात्र हर साल प्रतियोगी परीक्षाओं में बैठते हैं. इसी भरोसे का फायदा उठाकर कुछ लोग उन्हें आसान रास्ता दिखाने का लालच देते हैं. ऐसा ही एक मामला उत्तर प्रदेश में सामने आया है, जहां टेलीग्राम के जरिए कथित ‘पेपर लीक’ का खेल चलाया जा रहा था.

    यूपी STF के मुताबिक, आरोपी ओम कुमार को लखनऊ से गिरफ्तार किया गया. वह मूल रूप से बिहार के पटना जिले का रहने वाला बताया गया है. जांच एजेंसियों का कहना है कि आरोपी उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड, मध्य प्रदेश समेत कई राज्यों में होने वाली प्रतियोगी परीक्षाओं के नाम पर फर्जी दावा करता था कि उसके पास परीक्षा का प्रश्नपत्र पहले से मौजूद है.

    न्यूज एजेंसी के अनुसार, आरोपी ने टेलीग्राम पर कई चैनल बना रखे थे. इनमें 'पेपर लीक' जैसे नाम इस्तेमाल किए जाते थे ताकि छात्रों को भरोसा हो जाए. UP CNET परीक्षा को लेकर भी कुछ ऐसे चैनल चलाए जा रहे थे. दावा किया जाता था कि परीक्षा से एक दिन पहले असली प्रश्नपत्र और उसके जवाब दिए जाएंगे.

    इस काम के लिए आरोपी छात्रों से 2 हजार रुपये लेता था. टेलीग्राम चैनल पर QR कोड भेजे जाते थे, जिन पर पैसे ट्रांसफर कराए जाते थे. STF का कहना है कि कम रकम होने की वजह से कई छात्र जल्दी भरोसा कर लेते थे और शिकायत भी कम करते थे. जांच में सामने आया कि परीक्षा वाले दिन चैनल बंद कर दिए जाते थे. इसके बाद दूसरी परीक्षा के नाम पर नया चैनल बना लिया जाता था. पूछताछ में आरोपी ने माना कि वह साल 2022 से अपने कुछ साथियों के साथ ऐसा कर रहा था.

    इस मामले की जानकारी मिलने के बाद STF ने जांच शुरू की थी. अटल बिहारी वाजपेयी मेडिकल यूनिवर्सिटी, लखनऊ की ओर से शिकायत भी दर्ज कराई गई थी. इसके बाद पुलिस ने तकनीकी जांच और मोबाइल से मिले सबूतों के आधार पर आरोपी को गिरफ्तार किया.

    फिलहाल पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि इस रैकेट में और कौन-कौन लोग शामिल हैं. साथ ही ऐसे दूसरे गैंगों की भी तलाश की जा रही है, जो सोशल मीडिया पर पेपर लीक की अफवाह फैलाकर छात्रों से पैसे ऐंठते हैं.
     

  • रेलवे में जीरो टॉलरेंस नीति लागू करने और तकनीक आधारित निगरानी बढ़ाने के निर्देश

    रेलवे में जीरो टॉलरेंस नीति लागू करने और तकनीक आधारित निगरानी बढ़ाने के निर्देश

    लखनऊ

    मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शनिवार रात राजकीय रेलवे पुलिस (जीआरपी) के कार्यों की गहन समीक्षा की। उन्होंने खासकर भर्ती परीक्षाओं व बड़े आयोजनों के दौरान यात्रियों की सुविधा का पूरा ध्यान रखे जाने का कड़ा निर्देश दिया। प्रदेश में आठ, नौ व 10 जून को सिपाही भर्ती की बड़ी परीक्षा होनी है। मुख्यमंत्री ने कहा कि रेलवे सुरक्षा व्यवस्था को और अधिक आधुनिक, तकनीक-सक्षम तथा परिणामोन्मुख बनाया जाए। यूपी देश का सबसे बड़ा रेल यातायात वाला राज्य है, जहां प्रतिदिन लाखों यात्री रेल सेवाओं का उपयोग करते हैं। ऐसे में यात्रियों की सुरक्षा, महिला सम्मान, अपराध नियंत्रण और त्वरित पुलिस सहायता को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जानी चाहिए।

    समीक्षा बैठक मुख्यमंत्री ने कहा कि रेलवे नेटवर्क में अपराध और असामाजिक गतिविधियों के लिए कोई स्थान नहीं होना चाहिए तथा जीरो टालरेंस की नीति को पूरी दृढ़ता के साथ लागू किया जाए। रेलवे परिसरों, प्लेटफार्मों और ट्रेनों में सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत करने के लिए आधुनिक तकनीक का अधिकतम उपयोग किया जाए। बैठक में बताया गया कि वर्ष 1867 में स्थापित जीआरपी उत्तर प्रदेश वर्तमान में छह अनुभागों, 65 थानों तथा 89 अस्थायी चौकियों के माध्यम से कार्य कर रही है। प्रतिदिन 3031 से अधिक ट्रेनों, लगभग 1550 रेलवे स्टेशनों तथा 30 लाख से अधिक रेल यात्रियों की सुरक्षा का दायित्व जीआरपी निभा रही है। उन्होंने हरिद्वार में अर्द्धकुंभ 2027 को लेकर अभी से तैयारियां शुरू किए जाने और विस्तृत कार्ययोजना बनाए जाने का भी निर्देश दिया।

    रेलवे ट्रैक की हो नियमित निगरानी
    मुख्यमंत्री ने रेलवे ट्रैक और ट्रेन सुरक्षा की समीक्षा के दौरान रेलवे प्रशासन, आरपीएफ और स्थानीय पुलिस के साथ समन्वय और बेहतर करने का निर्देश दिया। बताया गया कि रेलवे ट्रैक सुरक्षा के लिए संयुक्त गश्त, ड्रोन एवं सीसीटीवी आधारित निगरानी, डिजिटल सत्यापन, निरीक्षण एप के माध्यम से संदिग्ध व्यक्तियों की जांच, मुखबिर तंत्र को सुदृढ़ बनाने तथा कबाड़ बाजारों एवं संवेदनशील स्थलों की निगरानी जैसे उपाय किए जा रहे हैं।

    पत्थरबाजी की घटनाएं पूरी तरह रुके
    मुख्यमंत्री ने रेलवे परिसरों और ट्रेनों पर पत्थरबाजी की घटनाओं को पूरी तरह समाप्त करने के लिए विशेष अभियान चलाने का निर्देश दिया। बैठक में बताया गया कि जनजागरूकता, सुरक्षा चौपाल, अभिभावकों और युवाओं की काउंसिलिंग, रेल मित्र नेटवर्क, त्वरित अभियोजन तथा प्रभावी निगरानी के परिणामस्वरूप विभिन्न रेल मंडलों में पत्थरबाजी की घटनाओं में कमी दर्ज की गई है। मुख्यमंत्री ने कहा कि रेलवे स्टेशन के प्रवेश व निकास नियंत्रण, कतार प्रबंधन, सार्वजनिक घोषणाओं, 24 घंटे सीसीटीवी निगरानी तथा रेलवे प्रशासन के साथ समन्वय के माध्यम से भीड़ नियंत्रण को प्रभावी बनाया जाए।

    महिला सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता
    मुख्यमंत्री ने कहा कि महिला सुरक्षा सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। रेलवे नेटवर्क में महिलाओं को सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराया जाए। मानव तस्करी और गुमशुदा बच्चों की बरामदगी से जुड़े मामलों की समीक्षा करते हुए मुख्यमंत्री ने इन अभियानों को और प्रभावी बनाने के निर्देश भी दिए। अधिकारियों ने बताया कि आपरेशन मुस्कान के तहत एक जनवरी से 26 मई 2026 तक 860 बच्चों को बरामद किया गया। विभिन्न अभियानों के माध्यम से अब तक 2325 व्यक्तियों को उनके परिवारों से मिलाने में सफलता प्राप्त हुई है। बैठक में यह भी बताया गया कि हरदोई जीआरपी थाना उत्तर भारत का पहला आईएसओ 9001 प्रमाणित जीआरपी थाना बन चुका है।