Category: उत्तर प्रदेश

  • योगी सरकार की पहल के तहत ‘प्रोजेक्ट प्रवीण’ से 5,123 छात्रों को मिलेगा प्रशिक्षण

    योगी सरकार की पहल के तहत ‘प्रोजेक्ट प्रवीण’ से 5,123 छात्रों को मिलेगा प्रशिक्षण

    लखनऊ
     उत्तर प्रदेश के जय प्रकाश नारायण सर्वोदय विद्यालयों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों को अब स्कूली शिक्षा के साथ रोजगारपरक कौशल से भी जोड़ा जाएगा। योगी सरकार की पहल के तहत ‘प्रोजेक्ट प्रवीण’ के माध्यम से बांदा मंडल के सात आवासीय सर्वोदय विद्यालयों में अध्ययनरत 5,123 विद्यार्थियों को कौशल प्रशिक्षण देने की तैयारी पूरी कर ली गई है। उत्तर प्रदेश कौशल विकास मिशन ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए योजना की तैयारियां पूरी की हैं। इसका उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों से आने वाले मेधावी विद्यार्थियों को शिक्षा के साथ ऐसा कौशल उपलब्ध कराना है, जिससे भविष्य में उनके लिए नौकरी और स्वरोजगार के विकल्प बढ़ सकें।

    7 विद्यालयों के छात्रों को मिलेगा लाभ
    समाज कल्याण विभाग की ओर से बांदा मंडल में 7 जय प्रकाश नारायण सर्वोदय विद्यालय संचालित किए जा रहे हैं। इनमें बांदा के दो, चित्रकूट के तीन तथा हमीरपुर और महोबा में एक-एक विद्यालय शामिल हैं। इन आवासीय विद्यालयों में मुख्य रूप से अनुसूचित जाति वर्ग के गरीब और मेधावी विद्यार्थियों को निशुल्क शिक्षा दी जाती है। अब कक्षा 9 से 12 तक के विद्यार्थियों को उनकी नियमित पढ़ाई के साथ कौशल विकास का प्रशिक्षण भी दिया जाएगा।

    रुचि के अनुसार ट्रेड, प्रैक्टिकल पर जोर
    प्रोजेक्ट प्रवीण के तहत विद्यार्थियों की रुचि और उपलब्ध ट्रेड के आधार पर प्रशिक्षण दिया जाएगा। तीन से छह महीने की अवधि वाले सर्टिफिकेट कोर्स संचालित होंगे। अपैरल, आईटी-आईटीईएस, रिटेल मैनेजमेंट, ब्यूटी एंड वेलनेस, इलेक्ट्रॉनिक्स और ऑटोमोबाइल जैसे क्षेत्रों में प्रशिक्षण की व्यवस्था की जाएगी। प्रशिक्षण को केवल सैद्धांतिक कक्षाओं तक सीमित नहीं रखा जाएगा। विद्यार्थियों के लिए सप्ताह में दो दिन प्रैक्टिकल क्लास भी आयोजित की जाएगी, जिससे वे सीखे हुए कौशल का व्यावहारिक इस्तेमाल कर सकें।

    विद्यालय परिसर में ही प्रशिक्षण, योगी सरकार उठाएगी खर्च
    विद्यार्थियों को प्रशिक्षण के लिए किसी दूसरे स्थान पर नहीं जाना पड़ेगा। संबंधित विद्यालय परिसरों में ही प्रशिक्षकों की तैनाती कर प्रशिक्षण की व्यवस्था की जाएगी। इससे नियमित पढ़ाई प्रभावित होने की संभावना कम रहेगी। योजना के तहत प्रशिक्षण का पूरा खर्च योगी सरकार वहन करेगी, जिससे विद्यार्थियों और उनके परिवारों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ नहीं पड़ेगा। प्रशिक्षण पूरा होने के बाद विद्यार्थियों का मूल्यांकन किया जाएगा। सफल विद्यार्थियों को उत्तर प्रदेश कौशल विकास मिशन और नेशनल स्किल डेवलपमेंट कॉरपोरेशन (एनएसडीसी) का संयुक्त प्रमाणपत्र दिया जाएगा, जो देशभर में मान्य होगा।

    रोजगार और स्वरोजगार के लिए तैयार होंगे विद्यार्थी
    इस पहल का फोकस विद्यार्थियों को केवल किसी ट्रेड का प्रशिक्षण देने तक सीमित नहीं है, बल्कि उन्हें भविष्य की रोजगार जरूरतों के अनुरूप तैयार करना है। कौशल हासिल करने के बाद विद्यार्थी निजी क्षेत्र में रोजगार के अवसर तलाशने के साथ अपनी रुचि के अनुसार स्वरोजगार की दिशा में भी आगे बढ़ सकेंगे। समाज कल्याण विभाग के अनुसार, जल्द ही विद्यालयवार विद्यार्थियों का पंजीकरण शुरू कराया जाएगा। इसके बाद रुचि के आधार पर ट्रेड आवंटित किए जाएंगे। प्रशिक्षण की गुणवत्ता, उपस्थिति और पूरी प्रक्रिया की निगरानी के लिए प्रत्येक विद्यालय में नोडल अधिकारी भी नियुक्त किया जाएगा।

  • बिना जरूरत एंटीबायोटिक लेने वालों सावधान! UP में जल्द लागू होंगे सख्त दिशा-निर्देश, सरकार ने किया ऐलान

    बिना जरूरत एंटीबायोटिक लेने वालों सावधान! UP में जल्द लागू होंगे सख्त दिशा-निर्देश, सरकार ने किया ऐलान

    लखनऊ
     प्रदेश में एंटीबायोटिक दवाओं के अंधाधुंध और अनियंत्रित इस्तेमाल से बढ़ रहे एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस (एएमआर) को रोकने के लिए यूप सरकार नई पहल करने जा रही है। अब प्रदेश में एंटीबायोटिक दवाओं के प्रयोग को लेकर एक नई गाइडलाइन तैयार की जाएगी, ताकि मरीजों को जरूरत के अनुसार ही सही एंटीबायोटिक दी जा सके और दवाओं के प्रति बैक्टीरिया में बढ़ते प्रतिरोध को रोका जा सके।

    केजीएमयू में वर्ल्ड सेप्सिस डे पर शनिवार को आयोजित दो दिवसीय कान्फ्रेंस के दौरान अपर मुख्य सचिव, चिकित्सा शिक्षा एवं चिकित्सा स्वास्थ्य अमित कुमार घोष ने इस संबंध में जानकारी दी। उन्होंने कहा कि एंटीबायोटिक दवाओं के बढ़ते प्रयोग के कारण दवा प्रतिरोध एक गंभीर चुनौती बनकर सामने आ रहा है।

    इसे नियंत्रित करने के लिए प्रदेश स्तर पर प्रभावी व्यवस्था बनाने की जरूरत है। अपर मुख्य सचिव ने बताया कि नई गाइडलाइन बनाने की प्रक्रिया आखिरी दौर में है। इस माह के आखिरी सप्ताह या अक्टूबर पहले सप्ताह तक शासनादेश जारी हो जाएगा।

    एंटीबायोटिक के दुरुपयोग पर दैनिक जागरण की ओर से बड़े स्तर पर अभियान चलाया जा चुका है, जिसके बाद सरकार अब महत्वपूर्ण कदम उठाने जा रही है।
    जरूरत के मुताबिक ही होगी एंटीबायोटिक की सलाह

    अमित घोष का कहना है कि नई गाइडलाइन का उद्देश्य डाक्टरों को एंटीबायोटिक के उचित चयन और उपयोग के लिए एक स्पष्ट रोडमैप उपलब्ध कराना होगा। इससे यह सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी कि सामान्य संक्रमणों में बिना जरूरत एंटीबायोटिक न दी जाए और गंभीर संक्रमण की स्थिति में मरीज की बीमारी तथा संक्रमण की प्रकृति के अनुसार प्रभावी दवा का चयन किया जाए।

    एंटीबायोटिक का गलत इस्तेमाल कई स्तर पर हो रहा है। वायरल संक्रमण में भी कई बार एंटीबायोटिक का प्रयोग कर लिया जाता है, जबकि वायरस पर एंटीबायोटिक का प्रभाव नहीं होता।

    इसके अलावा मरीजों द्वारा बिना चिकित्सकीय सलाह के दवा लेना, निर्धारित अवधि पूरी होने से पहले दवा बंद कर देना और जरूरत से अधिक शक्तिशाली एंटीबायोटिक का इस्तेमाल भी रेजिस्टेंस बढ़ने की प्रमुख वजह है।

    दवा बेअसर होने का बढ़ रहा खतरा
    केजीएमयू में पल्मोनरी एवं क्रिटिकल केयर मेडिसिन विभाग करे अध्यक्ष प्रो. वेद प्रकाश के मुताबिक, एंटीबायोटिक रेजिस्टेंस की स्थिति में बैक्टीरिया दवाओं के खिलाफ प्रतिरोधक क्षमता विकसित कर लेते हैं। ऐसे में पहले प्रभावी रहने वाली दवाएं संक्रमण पर असर करना बंद कर देती हैं।

    इसके बाद मरीज के इलाज के लिए दूसरी और अधिक शक्तिशाली दवाओं का सहारा लेना पड़ता है। इससे इलाज जटिल होने के साथ ही खर्च और अस्पताल में भर्ती रहने की अवधि भी बढ़ सकती है। प्रदेश में भी दवा प्रतिरोध को लेकर चिंता लगातार बढ़ रही है।

    हाल के अध्ययनों में कई बैक्टीरिया में एंटीबायोटिक प्रतिरोध बढ़ने की बात सामने आ चुकी है। अस्पतालों में संक्रमण फैलाने वाले बैक्टीरिया और एंटीबायोटिक रेजिस्टेंस को गंभीर चुनौती माना गया है। अब इसको लेकर प्रभावी कदम उठाने की जरूरत है।

    डॉक्टरों के लिए भी बनेगा स्पष्ट रोडमैप
    प्रो. वेद प्रकाश के मुताबिक, प्रस्तावित गाइडलाइन के जरिए चिकित्सकों को विभिन्न प्रकार के संक्रमणों में एंटीबायोटिक के चयन और उसके उचित इस्तेमाल के संबंध में दिशा-निर्देश दिए जारी होंगे। इसका मकसद मरीजों को एक जैसी और वैज्ञानिक आधार पर इलाज की सुविधा उपलब्ध कराना होगा।

    एंटीबायोटिक शुरू करने से पहले संक्रमण की गंभीरता का आकलन, जरूरत पड़ने पर जांच और कल्चर रिपोर्ट का उपयोग तथा दवा की सही अवधि तय करना रेजिस्टेंस रोकने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

    गाइडलाइन बनने के बाद सरकारी चिकित्सा संस्थानों के साथ ही अन्य स्वास्थ्य संस्थानों में भी एंटीबायोटिक के जिम्मेदार इस्तेमाल को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।

    उन्होंने कहा, सर्दी-जुकाम, सामान्य बुखार और कई वायरल संक्रमणों में मरीज स्वयं एंटीबायोटिक लेना शुरू कर देते हैं। यह प्रवृत्ति बेहद खतरनाक हो सकती है। एंटीबायोटिक केवल बैक्टीरिया से होने वाले संक्रमण के इलाज में उपयोगी होती हैं, जबकि वायरल संक्रमण पर इनका कोई प्रभाव नहीं पड़ता।

    ऐसे में आम लोगों को भी जागरूक करने की जरूरत है कि वे डॉक्टर की सलाह के बिना एंटीबायोटिक न लें और न ही पुरानी बची हुई दवाओं का इस्तेमाल करें।

  • लखनऊ मेट्रो फेज-1B का रूट फाइनल, 6.87 KM भूमिगत और 4.28 KM एलिवेटेड; जानें कहां-कहां होंगे स्टेशन

    लखनऊ मेट्रो फेज-1B का रूट फाइनल, 6.87 KM भूमिगत और 4.28 KM एलिवेटेड; जानें कहां-कहां होंगे स्टेशन

    लखनऊ
    लखनऊ मेट्रो (Lucknow Metro) का दायरा बढ़ाने की तैयारी है। पुराने लखनऊ की तंग गलियों, घने बाजारों और भीड़भाड़ वाले इलाकों के बीच अब मेट्रो दौड़ने की राह साफ हो गई है। ईस्ट-वेस्ट कॉरिडोर के फेज-1बी का भूमिगत रूट फाइनल कर लिया गया है। करीब 11.165 किलोमीटर लंबे कॉरिडोर में 6.879 किलोमीटर हिस्सा भूमिगत और 4.286 किलोमीटर हिस्सा एलिवेटेड रहेगा। भूमिगत हिस्से में सात स्टेशन बनाए जाएंगे, जबकि एलिवेटेड सेक्शन में पांच स्टेशन होंगे।

    चारबाग से बसंतकुंज तक इस नए कॉरिडोर की सबसे बड़ी खासियत इसका पुराने लखनऊ से होकर गुजरना है। यहां सड़कें अपेक्षाकृत संकरी हैं और बड़ी संख्या में बाजार, आबादी और प्रमुख धार्मिक-सांस्कृतिक स्थल आसपास हैं। ऐसे में सड़क के ऊपर मेट्रो का ढांचा खड़ा करने के बजाय बड़े हिस्से को जमीन के नीचे ले जाने की योजना बनाई गई है। इससे निर्माण के दौरान सतही यातायात और बाजारों पर असर को सीमित रखने में मदद मिलेगी। ईस्ट-वेस्ट कॉरिडोर की शुरुआत चारबाग से होगी।

    चारबाग को इंटरचेंज स्टेशन के रूप में विकसित किया जाएगा। इससे मौजूदा उत्तर-दक्षिण मेट्रो कॉरिडोर से आने-जाने वाले यात्रियों को नए ईस्ट-वेस्ट कॉरिडोर में सीधे ट्रांजिट की सुविधा मिलेगी। यानी चारबाग आने वाला यात्री मेट्रो बदले बिना नहीं, बल्कि इंटरचेंज से शहर के दूसरे हिस्सों में बढ़ सकेगा। चारबाग पहले से ही रेलवे स्टेशन, बस अड्डे और मेट्रो नेटवर्क का प्रमुख परिवहन केंद्र है। ईस्ट-वेस्ट कॉरिडोर जुड़ने के बाद इसकी भूमिका और बढ़ेगी।

    4.28 किमी हिस्सा एलिवेटेड
    भूमिगत हिस्से के बाद कॉरिडोर का 4.28 किलोमीटर हिस्सा एलिवेटेड होगा। इस पर पांच स्टेशन बनाए जाएंगे। एलिवेटेड सेक्शन वसंतकुंज को आगे बढ़ेगा और इसमें बसंतकुंज, ठाकुरगंज, बालागंज, सरफराजगंज, और मूसाबाग स्टेशन रहेंगे। कॉरिडोर का मकसद पूर्वी और पश्चिमी हिस्सों को मेट्रो से जोड़ना है। पुराने लखनऊ में सड़क नेटवर्क सीधा और चौड़ा नहीं है। बाजारों और आबादी के बीच से गुजरते हुए मेट्रो के भूमिगत ट्रैक को कई जगह मोड़ लेना पड़ेगा। यही वजह है कि नए कॉरिडोर का भूमिगत हिस्सा काफी घुमावदार रहेगा। कई जगह ऊपर पार्क और चौराहे नजर आएंगे, नीचे भूमिगत स्टेशन और ट्रैक होंगे।

    मेट्रों और रोड परियोजनाओं को तय समय में पूरा करें: मुख्य सचिव
    इससे पहले मुख्य सचिव एस.पी. गोयल ने प्रदेश में संचालित मेट्रो एवं सड़क परियोजनाओं को बेहतर समन्वय के साथ तय समय सीमा में पूरा करने के निर्देश दिया। गुरुवार को प्रोजेक्ट मॉनीटरिंग ग्रुप की बैठक की अध्यक्षता करते हुए एसपी गोयल ने कहा कि सभी संबंधित विभागों एवं कार्यदायी संस्थाओं के बीच प्रभावी समन्वय स्थापित कर लंबित कार्यों का शीघ्र निस्तारित किए जाएं ताकि विकास परियोजनाओं का लाभ आमजन को जल्द मिल सके।

  • अब नहीं लगाने होंगे तहसील के चक्कर! यूपी में जमीन और EWS से जुड़ी सेवाएं हुईं डिजिटल

    अब नहीं लगाने होंगे तहसील के चक्कर! यूपी में जमीन और EWS से जुड़ी सेवाएं हुईं डिजिटल

    लखनऊ
    मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर जमीन, नामांतरण (म्यूटेशन या दाखिल-खारिज ), पैमाइश, बंटवारे और अन्य राजस्व मामलों का निस्तारण तय समय पर होगा। राजस्व परिषद डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए आवेदन से लेकर निस्तारण तक की प्रक्रिया को ट्रैक करने की व्यवस्था की है। योगी सरकार ने शुक्रवार को धारा 116 पोर्टल, ईडब्ल्यूएस पोर्टल और सरलीकृत खतौनी का शुभारंभ किया है। इस अवसर पर ट्रेनी पीसीएस अधिकारी भी मौजूद रहे।

    राजस्व परिषद की अध्यक्ष अर्चना अग्रवाल ने बताया कि तीन नए पोर्टल से लोगों को राजस्व से जुड़ी सेवाओं के लिए अनावश्यक भागदौड़ और कागजी प्रक्रिया से राहत मिलेगी। भूमि संबंधी मामलों में पारदर्शिता बढ़ाने, अधिकारियों की जवाबदेही तय करने और प्रकरणों का समयबद्ध निस्तारण करने पर जोर दिया गया है। उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता की धारा 116 के तहत भूमि विभाजन से जुड़े मामलों के लिए नया पोर्टल शुरू किया गया है। अब सह-खातेदार भूमि बंटवारे के लिए ऑनलाइन आवेदन कर सकेंगे। इससे लोगों को विभाजन का वाद दाखिल करने के लिए बार-बार कार्यालयों के चक्कर लगाने की जरूरत कम होगी।

    आवेदन के बाद नोटिस और उद्घोषणा की प्रक्रिया भी डिजिटल होगी। लेखपाल की रिपोर्ट भी पोर्टल पर उपलब्ध होगी। पोर्टल में जीआईएस टेक्नोलॉजी की सुविधा जोड़ी गई है। इससे भूमि की वास्तविक भौगोलिक स्थिति देख सकेंगे। धारा 116 के तहत सह-खातेदार द्वारा होल्डिंग के विभाजन का वाद किया जा सकता है। ऐसे मामलों में खतौनी, संबंधित अभिलेख और भूमि के नक्शे की महत्वपूर्ण भूमिका होती है।

    मामलों के निस्तारण में तेजी आने की उम्मीद
    नया डिजिटल सिस्टम इन सभी प्रक्रियाओं को तकनीक के माध्यम से अधिक सरल और पारदर्शी बनाने में मदद करेगा। इससे भूमि विभाजन से जुड़े मामलों के निस्तारण में तेजी आने की उम्मीद है। आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (ईडब्ल्यूएस) प्रमाण पत्र के लिए ईडब्ल्यूएस पोर्टल पर ऑनलाइन आवेदन कर सकेंगे। लेखपाल और तहसीलदार रिपोर्ट ऑनलाइन भेजेंगे। आवेदन किस स्तर पर है और उसकी प्रगति क्या है, इसकी जानकारी डिजिटल माध्यम से दर्ज और मॉनिटर की जा सकेगी।

    लोगों को अधिक स्पष्ट जानकारी मिल सकेगी
    सरलीकृत खतौनी में भूमि का क्षेत्रफल छह दशमलव स्थानों तक प्रदर्शित किया जाएगा। इससे जमीन के क्षेत्रफल की जानकारी अधिक सटीक तरीके से उपलब्ध होगी। विशेष रूप से छोटे भूखंडों और भूमि से जुड़े मामलों में इससे लोगों को अधिक स्पष्ट जानकारी मिल सकेगी। इसके अलावा खतौनी में अभिलेखागार से संबंधित पुराने आदेशों और पुराने बंधक आदेशों की जानकारी भी व्यवस्थित रूप से उपलब्ध कराने की व्यवस्था की गई है। इससे नागरिकों और राजस्व अधिकारियों को जमीन के पुराने स्वामित्व रिकॉर्ड और उससे जुड़े आदेशों को समझने में सुविधा होगी।

     

  • चीन-जर्मनी से मशीनों के आयात पर लगेगी लगाम, कानपुर में तैयार होंगी टेक्सटाइल मशीनें

    चीन-जर्मनी से मशीनों के आयात पर लगेगी लगाम, कानपुर में तैयार होंगी टेक्सटाइल मशीनें

     लखनऊ
     खादी एवं वस्त्र उद्योग विभाग ने कानपुर के घाटमपुर में एक हजार एकड़ भूमि पर टेक्सटाइल मशीनरी पार्क की स्थापना की तैयारी शुरू कर दी है। इस संदर्भ में विभाग की तरफ से जल्द ही सरकार को प्रस्ताव भेजा जाएगा। घाटमपुर में गन्ना विभाग की एक हजार एकड़ भूमि बेकार पड़ी है। वस्त्र उद्योग विभाग की कोशिश है कि इस भूमि पर टेक्सटाइल उद्योग के लिए मशीनों का निर्माण करने वाली इकाईयों की ही स्थापना की जाए।

    राज्य में टेक्सटाइल उद्योग को बढ़ावा देने के लिए लखनऊ में एक हजार एकड़ भूमि पर पीएम मित्र वस्त्र पार्क सहित संत कबीर के नाम पर विभिन्न जिलों में 10 वस्त्र पार्कों की स्थापना की जा रही है। इन पार्कों की स्थापना के बाद राज्य के टेक्सटाइल एवं परिधान उद्योग की तस्वीर बदल जाएगी।

    टेक्निकल टेक्सटाइल की मशीनों को किया जाएगा आयात
    राज्य में टेक्सटाइल उद्योग सैकड़ों वर्ष पुराना है, लेकिन आज भी कई इकाइयों में पारंपरिक मशीनों से ही टेक्सटाइल उत्पाद तैयार किए जा रहे हैं। हालांकि बड़ी इकाइयों में टेक्सटाइल उत्पादों को तैयार करने के लिए चीन, ताइवान, जर्मनी, वियतनाम व दक्षिण कोरिया से सर्कुलर निटिंग मशीन, फ्लैट निटिंग मशीन सहित टेक्निकल टेक्सटाइल की मशीनों का आयात किया जाता है।

    कानपुर में टेक्सटाइल मशीनरी उद्योग की स्थापना के बाद उद्योगपतियों को करीब 30 से 40 प्रतिशत तक की कम कीमत पर मशीनें उपलब्ध होंगी।

    इस पार्क का उद्देश्य टेक्सटाइल मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देना है। इससे आयातित मशीनों का निर्माण स्थानीय स्तर पर किया जाएगा। साथ ही स्थानीय रोजगार के अवसर बढ़ेंगे। वित्तीय वर्ष 2025-26 में वस्त्र, परिधान व हस्तशिल्प का कुल निर्यात लगभग 35 हजार करोड़ रुपये का था।

    उत्तर प्रदेश देश में टेक्सटाइल उत्पादों का चौथा बड़ा निर्यातक राज्य है। गौतम बुद्ध नगर वस्त्र निर्यात में देश में दूसरे स्थान पर है। वस्त्र उद्योग मंत्री राकेश सचान का कहना है कि सरकार राज्य में टेक्सटाइल को हर प्रकार से बढ़ावा दे रही है।इसी सिलसिले में कानपुर में इस पार्क की स्थापना के प्रयास किए जा रहे हैं।

     

  • उत्तर प्रदेश में बनेगा ‘नीब करोरी बाबा सर्किट’, आध्यात्मिक पर्यटन को मिलेगा नया आयाम

    उत्तर प्रदेश में बनेगा ‘नीब करोरी बाबा सर्किट’, आध्यात्मिक पर्यटन को मिलेगा नया आयाम

    लखनऊ
     यूपी में अब नीब करोरी बाबा के जीवन और विरासत से जुड़े प्रमुख स्थलों को जोड़कर आध्यात्मिक पर्यटन का नया सर्किट विकसित किया जा रहा है. फिरोजाबाद के अकबरपुर को बाबा नीब करौरी की जन्मस्थली के रूप में विकसित किया जा रहा है. इस सर्किट में वृंदावन स्थित समाधि मंदिर शामिल है, जहां 1973 में बाबा ने महासमाधि ली थी. फिरोजाबाद का अकबरपुर गांव, फर्रुखाबाद का नीब करौरी बाबा आश्रम धाम मंदिर और लखनऊ का प्रसिद्ध हनुमान सेतु मंदिर भी सर्किट का हिस्सा हैं। 

    सर्कि‍ट के पहले फेज के तहत पर्यटन सुविधाओं के विकास पर 8.65 करोड़ रुपये खर्च किए जा चुके हैं. यूपी सरकार के बयान के मुताबिक, 2.22 करोड़ रुपये की दूसरे चरण की परियोजना का 60 प्रतिशत से अधिक काम पूरा हो चुका है. इसे दिसंबर 2026 तक पूरा करने का लक्ष्य है। 

    अकबरपुर में 55.44 लाख रुपये की ग्रामीण पर्यटन परियोजना भी होगी शुरू
    अधिकारियों ने बताया कि अकबरपुर में 55.44 लाख रुपये की ग्रामीण पर्यटन परियोजना भी जल्द शुरू की जाएगी, जबकि फर्रुखाबाद में नीब करौरी आश्रम के विकास पर 1.51 करोड़ रुपये की परियोजना पूरी हो चुकी है. इन सभी कार्यों का उद्देश्य बाबा से जुड़े स्थलों को बेहतर सुविधाओं के साथ एक व्यवस्थित आध्यात्मिक पर्यटन अनुभव में बदलना है। 

    पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने कहा कि 2017 से पहले बाबा के जीवन और विरासत से जुड़े स्थलों की पर्यटन क्षमता पर अपेक्षित ध्यान नहीं दिया गया था, लेक‍िन मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश सरकार अब उनकी विरासत को संरक्षित करने और व्यापक स्तर पर लोगों तक पहुंचाने का काम कर रही है. उन्होंने कहा कि बाबा की विरासत को जीवंत रखने के साथ राज्य में आध्यात्मिक और सांस्कृतिक पर्यटन के नए अवसर भी तैयार किए जा रहे हैं।  

    ये मंद‍िर हैं सर्क‍ि‍ट में शामि‍ल
    उन्‍होंने बताया क‍ि बाबा की आध्यात्मिक यात्रा से जुड़े प्रमुख स्थलों को अब ‘नीब करौरी बाबा सर्किट' के रूप में जोड़ा जा रहा है. उन्होंने बताया कि इस सर्किट में वृंदावन स्थित समाधि मंदिर शामिल है, जहां 1973 में बाबा ने महासमाधि ली थी. उन्होंने कहा कि फिरोजाबाद का अकबरपुर गांव, फर्रुखाबाद का नीब करौरी बाबा आश्रम धाम मंदिर और लखनऊ का प्रसिद्ध हनुमान सेतु मंदिर भी सर्किट का हिस्सा हैं। 

    बाबा की आध्यात्मिक, सांस्कृतिक एवं स्थानीय विरासत को करीब से जानने का म‍िलेगा अवसर
    पर्यटन महानिदेशक अमृत अभिजात ने बताया कि नया 'नीब करोरी बाबा सर्किट' उत्तर प्रदेश के प्रसिद्ध आध्यात्मिक पर्यटन परिपथों में एक महत्वपूर्ण नया आयाम जोड़ेगा. उन्होंने कहा कि बाबा से जुड़े प्रमुख स्थलों को एक साथ जोड़ने से श्रद्धालुओं और पर्यटकों के लिए इन स्थानों तक पहुंच आसान होगी और उन्हें बाबा की आध्यात्मिक, सांस्कृतिक एवं स्थानीय विरासत को करीब से जानने का अवसर मिलेगा। 

  • 2027 चुनाव से पहले भाजपा की नई रणनीति, युवाओं और महिलाओं पर नजर

    2027 चुनाव से पहले भाजपा की नई रणनीति, युवाओं और महिलाओं पर नजर

    लखनऊ
    उत्तर प्रदेश में 2027 में होने वाले विधानसभा चुनाव में सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (BJP) के पास सत्ता बचाने की चुनौती है। हाल के दिनों में युवाओं के बढ़ते आक्रोश को ध्यान में रखते हुए भाजपा ने अपनी तैयारी शुरू कर दी है। भगवा पार्टी के द्वारा देश के सबसे बड़े राज्य यूपी में माहौल बदलने की कोशिश की जा रही है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इसकी जिम्मेदारी खुद अपने कंधों पर ले ली है। भाजपा का एक धड़ा युवाओं में असंतोष, बेरोजगारी और जातिगत तनाव जैसे मुद्दों को लेकर चिंतित दिख रहा है।

    भाजपा के लिए राहत की बात यह है कि लगातार दो बार मुख्यमंत्री की गद्दी संभाल रहे योगी आदित्यनाथ की लोकप्रियता अभी भी बरकरार है। यही कारण हैं कि इस चुनाव में उन्होंने खुद माहौल बदलने की जिम्मेदारी अपने कंथों पर ले ली है।

    इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, योगी आदित्यनाथ ने युवाओं तक पहुंचने बनाने और नौकरियों से जुड़ी चिंताओं को दूर करने के लिए कई कदम उठाए हैं। उन्होंने उत्तर प्रदेश कॉर्पोरेशन फॉर आउटसोर्सिंग सर्विसेज (UPCOS) लॉन्च किया। इसका मकसद राज्य में 3.5 लाख आउटसोर्स कर्मचारियों और उनके परिवारों के हितों की रक्षा करना और उन्हें लाभ पहुंचाना है।

    मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने हाल ही में कहा कि उनकी सरकार ने अब तक के अपने साढ़े नौ साल के कार्यकाल में 9.3 लाख से अधिक नौकरियां दी हैं। उनकी सरकार ने पुलिस और शिक्षकों की भर्ती के लिए एक बड़ा अभियान शुरू किया है। यूपी में कारोबार को बढ़ावा देने के लिए मुख्यमंत्री युवा उद्यमी विकास अभियान की शुरुआत की है। इसके अलावा, छात्रों के लिए स्टाइपेंड वाली इंटर्नशिप भी शुरू की है। यूपी सरकार ने सेंट्रलाइज्ड फैमिली कार्ड भी पेश किए हैं, ताकि उन परिवारों की पहचान की जा सके जिनके किसी भी सदस्य के पास सरकारी या निजी नौकरी नहीं है।

    सवर्णों की नाराजगी कर सकती भाजपा को परेशान
    UGC के इक्विटी नियमों पर भले ही इस साल की शुरुआत में सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगा दी, लेकिन इनसे सवर्णों के एक वर्ग में नाराजगी पैदा हुई है। यही वजह है जंतर-मंतर पर हाल ही में आरक्षण हटाओ आंदोलन के दौरान सवर्णों की नाराजगी देखने को मिली थी। उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनाव से पहले यह बीजेपी के लिए एक नई समस्या खड़ी हो सकती है। आपको बता दें कि ये नियम देश भर के उच्च शिक्षण संस्थानों में जातिगत भेदभाव के खिलाफ सुरक्षा को मजबूत करने के इरादे से लाए गए थे।

    लॉ एंड ऑर्डर पर योगी के साथ महिलाएं
    इन तमाम निराशाओं और विरोध के बावजूद योगी आदित्यनाथ की सबसे बड़ी ताकत कानून-व्यवस्था का उनका रिकॉर्ड और महिलाओं के बीच उनकी लोकप्रियता है।प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ दोनों ही महिला वोटरों के बीच बहुत लोकप्रिय हैं। खबर है कि विधानसभा चुनाव से पहले सरकार महिलाओं के लिए और भी योजनाएं घोषित करने वाली है और इससे उनका समर्थन आधार और मजबूत होगा।

  • CM योगी बोले- हर बच्चे को पढ़नी चाहिए ‘एग्जाम वॉरियर्स’, किताबों से दूर नहीं है आज का युवा

    CM योगी बोले- हर बच्चे को पढ़नी चाहिए ‘एग्जाम वॉरियर्स’, किताबों से दूर नहीं है आज का युवा

    लखनऊ
    मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि हर बच्चे को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की पुस्तक ‘एग्जाम वॉरियर्स’ जरूर पढ़नी और आत्मसात करनी चाहिए। यह कहना अन्याय होगा कि युवा किताब नहीं पढ़ता, जरूरत किताबों को उन तक पहुंचाने की थी। ज्ञान को संकुचित दायरे में सीमित करने के दुष्परिणाम समाज और राष्ट्र, दोनों को भुगतने पड़ते हैं। 10 वर्ष पहले उत्तर प्रदेश को ‘बीमारू’ राज्यों की श्रेणी में खड़ा कर दिया गया था। यूपी के नौजवान के सामने पहचान का संकट था और नागरिक अपनी पहचान बताने से बचते थे। सकारात्मक प्रयासों के परिणामस्वरूप आज प्रदेश की तस्वीर बदली है। डिजिटल युग ने शहर और गांव की दूरी को कम किया है।

    मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ शनिवार को लखनऊ विश्वविद्यालय में आयोजित 5वें गोमती पुस्तक महोत्सव-2026 का शुभारंभ करने के उपरांत युवाओं को संबोधित कर रहे थे। इससे पहले उन्होंने विश्वविद्यालय परिसर में लगी प्रदर्शनी का अवलोकन किया। सीएम ने वहां मौजूद बच्चों को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की पुस्तक ‘एग्जाम वॉरियर्स’ वितरित की। उन्होंने कहा कि हर बच्चे को यह पुस्तक पढ़नी और आत्मसात करनी चाहिए। यह केवल स्कूली छात्रों के लिए नहीं, बल्कि हर युवा और नागरिकों के लिए भी उपयोगी है। जीवन में हर व्यक्ति को किसी न किसी परीक्षा से गुजरना पड़ता है। कभी डिग्री के लिए, कभी सर्टिफिकेट कोर्स के लिए और कभी जीवन की विभिन्न परिस्थितियों में। जब मुश्किल समय में व्यक्ति की हिम्मत जवाब देने लगती है, तब ‘एग्जाम वॉरियर्स’ उसका संबल और मार्गदर्शक बन सकती है। सीएम के हाथों पुस्तक पाने वाले बच्चों के चेहरे खिल उठे। मुख्यमंत्री ने छात्राओं के साथ तस्वीर भी खिंचवाई।

    युवा किताब नहीं पढ़ता, यह कहना अन्याय
    मुख्यमंत्री ने कहा कि यह कहना कि युवा पुस्तकों से दूर हो गया या सोशल मीडिया पर अपना समय खराब कर रहा, पूरी तरह सही नहीं। ऐसा कहना युवा के साथ अन्याय होगा। जरूरत पुस्तकों को उसके पास पहुंचाने की व्यवस्था करने की है। जब पहली बार युवराज मलिक ने लखनऊ में पुस्तक महोत्सव आयोजित करने का प्रस्ताव रखा था, तब मैंने तत्कालीन अपर मुख्य सचिव अवनीश अवस्थी से चर्चा की। इसे प्रोत्साहित करने की बात कही। इसके बाद लखनऊ में पुस्तक महोत्सव शुरू हुआ। इसका जब अच्छा परिणाम मिला तो मैंने गोरखपुर में भी पुस्तक महोत्सव आयोजित करने का सुझाव दिया। वहां लखनऊ से भी ज्यादा लोग पहुंचे और अधिक पुस्तकों की बिक्री हुई। इससे यह धारणा पूरी तरह गलत साबित हुई कि आज का युवा पुस्तक नहीं पढ़ता।

    पहले संकुचित दायरे में बांधने का प्रयास किया गया
    मुख्यमंत्री ने कहा कि किसी व्यक्ति की तरह ही समाज और राष्ट्र भी तब बीमार होता है, जब उसकी क्षमता समाप्त होने लगती है और वह अपनी विरासत से दूरी बनाने लगता है। पहले भारत की प्राचीन ज्ञान परंपरा को संकुचित दायरे में बांधने का प्रयास किया गया, जिसके परिणाम सहने पड़े। उत्तर प्रदेश की धरती भारतीय ज्ञान परंपरा की महत्वपूर्ण केंद्र रही है। लखनऊ से करीब 70 किलोमीटर दूर नैमिषारण्य में ऋषियों ने चिंतन और ज्ञान की परंपरा को आगे बढ़ाया। काशी ज्ञान और संवाद की भूमि रही है। इसी प्रदेश के मुजफ्फरनगर स्थित शुक्रतीर्थ में करीब 5 हजार वर्ष पहले श्रीमद्भागवत महापुराण की पहली कथा के वाचन की परंपरा जुड़ी है।

    पुस्तक मेला ज्ञान और विचारों के आदान-प्रदान का मंच
    सीएम योगी ने कहा कि पुस्तक महोत्सव युवाओं, छात्रों, लेखकों और प्रकाशकों को मंच उपलब्ध कराता है। यहां युवा विभिन्न ज्ञानवर्धक, मनोरंजक और रोचक पुस्तकों को देख सकते हैं, उनके बारे में जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। अगले 9 दिनों तक चलने वाले गोमती पुस्तक महोत्सव-2026 में पुस्तकों के विमोचन के साथ लेखकों से संवाद और उनकी रचनात्मक यात्रा को समझने का अवसर भी मिलेगा। आत्मकथाओं के माध्यम से महापुरुषों के जीवन संघर्ष को जाना जा सकता है। वैज्ञानिकों के शोध और उनकी यात्राओं को पुस्तकों के माध्यम से समझा जा सकता है। यह रचनात्मकता को आगे बढ़ाने और जीवन में नई दिशा देने का माध्यम बन सकता है।

    ज्ञान को सीमित मत करें, सभी रास्ते खुले रखें
    मुख्यमंत्री ने भारतीय ऋषि परंपरा का जिक्र करते हुए कहा कि ज्ञान को सीमित नहीं किया जाना चाहिए। हमारी परंपरा ज्ञान को चारों ओर से आने देने के लिए द्वार खुले रखने की पक्षधर रही है। केवल स्कूल, कॉलेज या विश्वविद्यालय जाकर पाठ्यक्रम पढ़ लेना ही व्यक्ति को पूर्ण रूप से ज्ञानवान नहीं बनाता। समाज, देश और दुनिया को समझने के लिए अलग-अलग विषयों और विचारों से परिचित होना जरूरी है। भारत की ज्ञान परंपरा श्रुति और स्मृति से आगे बढ़कर शास्त्रों, पांडुलिपियों, ताम्रपत्रों और विभिन्न अभिलेखों के माध्यम से पीढ़ी-दर-पीढ़ी आगे बढ़ी। लखनऊ साहित्य की पुरानी भूमि है और यहां से अनेक साहित्यकारों ने अपनी कालजयी रचनाओं के माध्यम से देश-समाज को दिशा दी है

    डिजिटल युग ने घटाई गांव-शहर की दूरी
    मुख्यमंत्री ने कहा कि डिजिटल युग ने गांव और शहर की दूरी कम करने का काम किया है। उन्होंने ग्राम सचिवालयों का उदाहरण देते हुए कहा कि पहले ग्राम प्रधान गांव की व्यवस्था अपने घर से संचालित करता था। सरकार ने ग्राम सचिवालय की व्यवस्था विकसित की और उसमें केवल प्रधान व ग्राम पंचायत अधिकारी के बैठने की व्यवस्था नहीं की, बल्कि ग्रामीणों के लिए कॉन्फ्रेंस रूम और डिजिटल लाइब्रेरी भी बनाई। प्रदेश की 57,600 ग्राम पंचायतों में पुस्तकालय की व्यवस्था की गई है। इनमें नेशनल बुक ट्रस्ट की पुस्तकें उपलब्ध कराई गई हैं। पहले सरकारों ने युवाओं और ग्रामीणों को प्लेटफार्म नहीं दिया, इसके बावजूद प्रतिभा के कम उपयोग के लिए उनके बारे में गलत शब्दों का इस्तेमाल किया जाता था। सुविधा मिलने पर वही युवा और ग्रामीण अपनी क्षमता का बेहतर प्रदर्शन कर रहे हैं।

     

  • स्कूली बच्चों की सुरक्षा और निगरानी पर योगी सरकार का फोकस, चाइल्ड ट्रैकिंग के लिए मिला 6.55 करोड़ का बजट

    स्कूली बच्चों की सुरक्षा और निगरानी पर योगी सरकार का फोकस, चाइल्ड ट्रैकिंग के लिए मिला 6.55 करोड़ का बजट

    योगी सरकार ने परिषदीय स्कूलों में निगरानी और चाइल्ड ट्रैकिंग को दी रफ्तार, 6.55 करोड़ रुपये का बजट स्वीकृत

    – एमआईएस और चाइल्ड ट्रैकिंग सिस्टम के प्रभावी संचालन के लिए विद्यालय स्तर पर खर्च होगी धनराशि

    – यू-डायस प्लस के आंकड़ों से बच्चों की शैक्षिक स्थिति और नामांकन की होगी बेहतर निगरानी

    – हर बच्चे की विशिष्ट अपार आईडी को चाइल्ड ट्रैकिंग सिस्टम से जोड़ने पर जोर

    लखनऊ
     मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रदेश सरकार परिषदीय विद्यालयों में बच्चों से जुड़ी सूचनाओं की निगरानी, विद्यालयी प्रबंधन और शैक्षिक व्यवस्था को अधिक व्यवस्थित एवं जवाबदेह बनाने की दिशा में आगे बढ़ रही है। इसी क्रम में वर्ष 2026-27 के लिए एमआईएस (यू-डायस प्लस) और चाइल्ड ट्रैकिंग सिस्टम के प्रभावी संचालन एवं उपयोग के लिए 6.55 करोड़ रुपये का बजट निर्धारित किया गया है।

    महानिदेशक, स्कूल शिक्षा एवं राज्य परियोजना निदेशक मोनिका रानी की ओर से सभी जिला बेसिक शिक्षा अधिकारियों को धनराशि के उपयोग और निगरानी के संबंध में दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। ज्ञात हो कि इस व्यवस्था के माध्यम से योगी सरकार विद्यालयी आंकड़ों को अधिक व्यवस्थित, बच्चों की शैक्षिक प्रगति की निगरानी को अधिक प्रभावी तथा स्कूल प्रबंधन को अधिक जवाबदेह बनाने की दिशा में डिजिटल प्रणालियों के उपयोग को मजबूत कर रही है।

    निर्देशों के अनुसार कुल 655.01 लाख रुपये की धनराशि निर्धारित की गई है। इसमें एमआईएस (यू-डायस प्लस) के लिए 262.00 लाख रुपये तथा चाइल्ड ट्रैकिंग सिस्टम के लिए 393.01 लाख रुपये शामिल हैं। यह धनराशि विद्यालय स्तर पर एसएमसी के माध्यम से निर्धारित गतिविधियों पर व्यय की जाएगी। 

    हर बच्चे की जानकारी को व्यवस्थित करने पर जोर
    निर्देशों में यू-डायस प्लस पर विद्यालयों एवं विद्यार्थियों से संबंधित आंकड़ों के संकलन और उनके उपयोग को महत्वपूर्ण माना गया है। साथ ही चाइल्ड ट्रैकिंग सिस्टम के माध्यम से बच्चों की शैक्षिक स्थिति पर नजर रखने की व्यवस्था को मजबूत करने पर जोर दिया गया है। पत्र में अपार आईडी और चाइल्ड ट्रैकिंग सिस्टम के बीच समन्वय स्थापित करने की दिशा में भी निर्देश दिए गए हैं, जिससे प्रत्येक विद्यार्थी की विशिष्ट पहचान के साथ उसकी शैक्षिक जानकारी को व्यवस्थित रूप से ट्रैक किया जा सके। 

    मॉनिटरिंग को बनाया जाएगा अधिक प्रभावी
    निर्देशों में जिला स्तर से लेकर विद्यालय स्तर तक धनराशि के उपयोग की निगरानी के लिए जिम्मेदारियां तय की गई हैं। जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी को एसएमसी स्तर पर हुए व्यय की प्रगति की समीक्षा करने तथा निर्धारित पोर्टल पर उपलब्ध सूचनाओं के आधार पर निगरानी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।  

    योगी सरकार विद्यालयी व्यवस्था को अधिक पारदर्शी और जवाबदेह बनाने के साथ हर बच्चे की शैक्षिक प्रगति पर प्रभावी नजर सुनिश्चित कर रही है। एमआईएस और चाइल्ड ट्रैकिंग सिस्टम से बच्चों से जुड़ी जानकारी के बेहतर उपयोग को नई मजबूती मिलेगी।
    संदीप सिंह, राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार), बेसिक शिक्षा

    एमआईएस, यू-डायस प्लस और चाइल्ड ट्रैकिंग सिस्टम का प्रभावी उपयोग सुनिश्चित किया जाए। अपार आईडी के माध्यम से विद्यार्थियों की जानकारी को व्यवस्थित रूप से जोड़ते हुए एसएमसी स्तर पर स्वीकृत धनराशि का निर्धारित मद में पारदर्शी उपयोग और नियमित मॉनिटरिंग सुनिश्चित हो।
    मोनिका रानी, महानिदेशक, स्कूल शिक्षा

  • 15 से 17 सितंबर तक बढ़ेगी बारिश, यूपी में गरज-चमक का भी अनुमान

    15 से 17 सितंबर तक बढ़ेगी बारिश, यूपी में गरज-चमक का भी अनुमान

    लखनऊ
    भारत मौसम विज्ञान विभाग द्वारा जारी अपडेट के अनुसार, पूर्वी उत्तर प्रदेश और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में आगामी सप्ताह के दौरान हल्की से मध्यम बारिश और आंधी-तूफान की संभावना जताई गई है।

    पूर्वी उत्तर प्रदेश में कैसा रहेगा मौसम
    मौसम विभाग की रिपोर्ट के अनुसार, पूर्वी उत्तर प्रदेश में 12 से 14 सितंबर तक और 18 सितंबर को राज्य के पूर्वी हिस्सों में कहीं-कहीं छिटपुट बारिश होने का अनुमान है। हालांकि, 15 से 17 सितंबर के दौरान बारिश की गतिविधि में थोड़ा इजाफा हो सकता है और कुछ स्थानों पर हल्की से मध्यम बारिश की जा सकती है।

    पश्चिमी उत्तर प्रदेश में ऐसा रहेगा मौसम का हाल
    12 से 14 सितंबर के दौरान पश्चिमी उत्तर प्रदेश में केवल कुछ स्थानों पर ही बारिश पड़ने की संभावना है। इसके बाद 15 और 16 सितंबर को बारिश का दायरा बढ़ेगा और कुछ स्थानों पर बौछारें पड़ सकती हैं। 17 सितंबर को फिर से कहीं-कहीं बारिश और 18 सितंबर को मौसम शुष्क रहने का अनुमान जताया गया है।

    किसानों के लिए एडवाइजरी
    मौसम विभाग ने उत्तर प्रदेश के निवासियों और किसानों को सलाह दी है कि वे बिजली चमकने या गरज-चमक के समय सतर्क रहें और सुरक्षित स्थानों पर आश्रय लें। फसलों को जलभराव से सुरक्षित रखें।