Category: राजस्थान

  • जयपुर में नितिन नवीन ने गिनाईं योजनाओं की उपलब्धियां, बोले- जीत को सेवा का अवसर मानें

    जयपुर में नितिन नवीन ने गिनाईं योजनाओं की उपलब्धियां, बोले- जीत को सेवा का अवसर मानें

    जयपुर
    भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने शुक्रवार को जयपुर के दादिया गांव में पंडित दीनदयाल उपाध्याय की 110वीं जयंती के अवसर पर आयोजित ‘सेवा संकल्प सभा’ को संबोधित किया। उन्होंने दीनदयाल उपाध्याय की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि दी और ‘अंत्योदय’ के विचार को समाज के अंतिम व्यक्ति तक विकास पहुंचाने का माध्यम बताया। इस दौरान मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा समेत भाजपा के कई नेता और जनप्रतिनिधि मौजूद रहे।

    नितिन नवीन ने अपने संबोधन में हाल में हुए निकाय चुनावों में भाजपा के प्रदर्शन का उल्लेख करते हुए कार्यकर्ताओं को बधाई दी। उन्होंने कहा कि तीन नगर निगमों और नगर परिषदों के परिणाम भी भाजपा के पक्ष में आए हैं। उन्होंने इसे जनता के समर्थन के रूप में प्रस्तुत करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में चल रही विकास योजनाओं तथा गांव-कस्बों तक पहुंचने की कोशिशों से लोगों का ‘विकास के रथ’ पर भरोसा बढ़ा है।

    जीत को सेवा का अवसर मानकर काम करें- नितिन नवीन
    भाजपा अध्यक्ष ने कहा कि चुनाव में मिली जीत को केवल राजनीतिक उपलब्धि के तौर पर नहीं देखना चाहिए, बल्कि इसे जनता की सेवा का अवसर मानना चाहिए। उन्होंने कहा कि पंचायतीराज और निकायों के जनप्रतिनिधि पंडित दीनदयाल उपाध्याय के अंत्योदय के विचार को जमीनी स्तर तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

    नवीन ने कहा कि गरीब व्यक्ति को नारायण मानकर काम करने की भावना के साथ आगे बढ़ना चाहिए। उन्होंने कार्यकर्ताओं से जनता के साथ निरंतर जुड़ाव बनाए रखने और जनसेवा को प्राथमिकता देने की अपील की।

    राहुल गांधी के सवाल पर दिया जवाब
    नितिन नवीन ने नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के उस सवाल का भी जिक्र किया, जिसमें भाजपा की सरकारों के लगातार बनने को लेकर सवाल उठाया गया था। नवीन ने कहा कि भाजपा के नेताओं का लंबे समय तक सरकार में रहने का विश्वास जनता की सेवा और काम करने से आता है।

    उन्होंने केंद्र सरकार की योजनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि गरीबों के लिए आवास, महिलाओं के लिए शौचालय और रेहड़ी-पटरी वालों के लिए पीएम स्वनिधि जैसी योजनाओं का लाभ पहुंचने पर जनता का समर्थन मिलता है। उन्होंने कहा कि सरकार की योजनाओं का उद्देश्य गरीब और जरूरतमंद व्यक्ति तक लाभ पहुंचाना है।

    नवीन ने कांग्रेस के पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी के उस पुराने कथन का भी संदर्भ दिया, जिसमें केंद्र से भेजे गए एक रुपये में से गरीब तक कम राशि पहुंचने की बात कही गई थी। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने यह सुनिश्चित करने पर जोर दिया कि सरकारी योजनाओं का पैसा सीधे लाभार्थियों तक पहुंचे।

    सीएम भजनलाल ने गिनाईं सरकार की उपलब्धियां
    कार्यक्रम में मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने कहा कि राज्य सरकार अपने संकल्प पत्र में किए गए वादों को पूरा करने की दिशा में काम कर रही है। उन्होंने दावा किया कि संकल्प पत्र के 78 प्रतिशत काम अब तक पूरे किए जा चुके हैं।

    पंचायत चुनाव पर बोले मदन राठौड़
    वहीं भाजपा प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ ने कार्यकर्ताओं को निकाय चुनाव में मिली जीत के लिए बधाई दी। उन्होंने कहा कि अब पंचायत चुनाव की तैयारी करनी है। उन्होंने निकाय चुनाव में जीत दिलाने वाले संगठन के कार्यकर्ताओं और पदाधिकारियों की भूमिका को भी रेखांकित किया।

    सभा में नितिन नवीन ने पंडित दीनदयाल उपाध्याय के विचारों को याद करते हुए कहा कि विकास का वास्तविक अर्थ तभी है, जब उसका लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे। उन्होंने कार्यकर्ताओं से इसी भावना के साथ आगे बढ़ने का आह्वान किया।

  • कचरे से कमाई और प्रदूषण पर लगाम, राजस्थान में लागू होंगे नए वेस्ट मैनेजमेंट नियम

    कचरे से कमाई और प्रदूषण पर लगाम, राजस्थान में लागू होंगे नए वेस्ट मैनेजमेंट नियम

    जयपुर
    शहरों की स्वच्छता अब केवल कचरे के निस्तारण तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि कचरे को संसाधन में परिवर्तित करने और चक्रीय अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने की दिशा में आगे बढ़ेगी। इसी उद्देश्य से ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम, 2026 के प्रावधानों एवं उनके प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर शुक्रवार को राजस्थान राज्य प्रदूषण नियंत्रण मंडल में प्रेस इन्फॉर्मेशन ब्यूरो के सहयोग से संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित की गई।

    प्रेस कॉन्फ्रेंस में प्रेस इन्फॉर्मेशन ब्यूरो के निदेशक अनुभव बैरवा ने ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियमों की जानकारी को जन-जन तक पहुंचाने की आवश्यकता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि बेहतर कचरा प्रबंधन स्वच्छ एवं टिकाऊ भविष्य की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

    वहीं राजस्थान राज्य प्रदूषण नियंत्रण मंडल के मुख्य पर्यावरण अभियंता प्रेमालाल ने ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम, 2026 के प्रमुख प्रावधानों, उनके क्रियान्वयन तथा आमजन, स्थानीय निकायों एवं थोक अपशिष्ट उत्पादकों की भूमिका के संबंध में जानकारी देते हुए मीडिया की भूमिका पर प्रकाश डाला ।

    चार-धारा पृथक्करण बनेगा प्रभावी अपशिष्ट प्रबंधन की आधारशिला
    इस अवसर पर अतिरिक्त मुख्य पर्यावरण अभियंता भुवनेश माथुर ने बताया कि 1 अप्रैल, 2026 से प्रभावी नए नियमों में स्रोत स्तर पर कचरे के पृथक्करण को विशेष महत्व दिया गया है। इसके तहत गीले कचरे, सूखे कचरे, स्वच्छता संबंधी कचरे तथा विशेष/घरेलू खतरनाक कचरे को अलग-अलग एकत्रित एवं संग्रहित करने पर जोर दिया गया है।

    इस व्यवस्था का उद्देश्य केवल कचरा एकत्र करना नहीं, बल्कि स्रोत पर ही पृथक्करण सुनिश्चित करते हुए पुनर्चक्रण एवं अपशिष्ट प्रसंस्करण की पूरी श्रृंखला को अधिक प्रभावी बनाना है।

    थोक अपशिष्ट उत्पादकों की जिम्मेदारी होगी और स्पष्ट
    स्थानीय स्वायत्त शासन विभाग के मुख्य अभियंता अरुण व्यास ने बताया कि नए नियमों में थोक अपशिष्ट उत्पादकों के लिए भी स्पष्ट प्रावधान किए गए हैं।

    निर्धारित सीमा के अंतर्गत आने वाले बड़े अपशिष्ट उत्पादकों—जैसे बड़े आवासीय परिसर, होटल, संस्थान एवं अन्य प्रतिष्ठानों—को अपने परिसर में ही जैविक कचरे के प्रसंस्करण के लिए कम्पोस्टिंग, जैव-मीथेनीकरण अथवा अन्य अनुमोदित तकनीकों का उपयोग करना होगा।

    साथ ही पुनर्चक्रण योग्य एवं खतरनाक अपशिष्ट का अधिकृत एजेंसियों के माध्यम से उचित प्रबंधन सुनिश्चित करना होगा।

    डिजिटल निगरानी से बढ़ेगी पारदर्शिता और जवाबदेही
    अरुण व्यास ने बताया कि नए नियमों के तहत ठोस अपशिष्ट प्रबंधन की पूरी प्रक्रिया के लिए ऑनलाइन निगरानी एवं अनुश्रवण व्यवस्था विकसित की जाएगी। इसके माध्यम से कचरे के संग्रहण, परिवहन, प्रसंस्करण एवं अंतिम निस्तारण की निगरानी को बढ़ावा मिलेगा तथा व्यवस्था में पारदर्शिता एवं जवाबदेही सुनिश्चित करने में सहायता मिलेगी।

    कचरे से संसाधन और भराव स्थलों पर निर्भरता में कमी
    नए नियमों में सामग्री पुनर्प्राप्ति केंद्रों को भी महत्वपूर्ण स्थान दिया गया है। इनके माध्यम से सूखे कचरे से पुनर्चक्रण योग्य सामग्री की अधिकतम पुनर्प्राप्ति सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया है।

    वहीं कचरा भराव स्थलों पर निर्भरता कम करने के लिए उद्योगों में अपशिष्ट-व्युत्पन्न ईंधन के उपयोग को प्रोत्साहित किया गया है। पुराने विरासत अपशिष्ट स्थलों के वैज्ञानिक उपचार एवं सुधार पर भी विशेष बल दिया गया है।

    इसके साथ ही अपशिष्ट प्रसंस्करण, कम्पोस्टिंग एवं जैव-मीथेनीकरण जैसी प्रक्रियाओं के माध्यम से कार्बन क्रेडिट अर्जित करने की संभावनाओं का लाभ उठाने की दिशा में भी प्रोत्साहन दिया गया है।

    ‘प्रदूषक भुगतान सिद्धांत’ से मजबूत होगी जवाबदेही
    नियमों में ‘प्रदूषक भुगतान सिद्धांत’ को भी शामिल किया गया है। इसके तहत अपशिष्ट प्रबंधन से संबंधित प्रावधानों का उल्लंघन करने वाले व्यक्तियों एवं संस्थाओं पर पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति लगाए जाने का प्रावधान है। इससे नियमों के अनुपालन को और अधिक प्रभावी बनाने में सहायता मिलेगी।

    स्थानीय निकायों की भूमिका अहम
    नए नियमों के प्रभावी क्रियान्वयन में शहरी स्थानीय निकायों की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया गया। अपशिष्ट प्रसंस्करण, कम्पोस्टिंग, जैव-मीथेनीकरण तथा मीथेन उत्सर्जन में कमी के माध्यम से स्वच्छ, स्वस्थ एवं टिकाऊ शहरों की दिशा में कार्य करने पर जोर दिया गया।

    प्रेस कॉन्फ्रेंस में यह भी बताया गया कि नियमों का प्रभावी क्रियान्वयन केवल सरकारी विभागों की जिम्मेदारी नहीं है। स्थानीय निकायों, प्रदूषण नियंत्रण मंडल, राज्य सरकार, उद्योगों तथा आम नागरिकों के बीच समन्वय एवं सक्रिय सहभागिता इसके सफल क्रियान्वयन की आधारशिला होगी।

    राजस्थान में क्रियान्वयन की दिशा में उठाए गए कदम
    राजस्थान में नियमों के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए अब तक की गई कार्यवाही के बारे में जानकारी देते हुए बताया गया कि

    • राज्य स्तरीय निगरानी समिति का गठन किया गया है।
    • 29 मई, 2026 को क्षेत्रीय कार्यशाला का आयोजन किया गया, जिसमें शहरी स्थानीय निकायों, जिला प्रशासन एवं अन्य संबंधित विभागों के लगभग 600 प्रतिभागियों ने भाग लिया।
    • सभी शहरी स्थानीय निकायों में नोडल अधिकारी नियुक्त किए गए हैं।
    • केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के केंद्रीकृत पोर्टल पर थोक अपशिष्ट उत्पादकों का अंतरिम पंजीकरण प्रारंभ किया गया है।
    • थोक उपभोक्ताओं एवं अपशिष्ट उत्पादकों के लिए ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम, 2026 के प्रावधानों के अनुरूप शर्तों के अनुपालन हेतु रियल एस्टेट विनियामक प्राधिकरण के साथ भी समन्वय किया जा रहा है।

    अपशिष्ट से संसाधन’ की ओर बढ़ता राजस्थान
    ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम, 2026 का प्रभावी क्रियान्वयन शहरी स्वच्छता को नई दिशा देने के साथ-साथ प्रदूषण में कमी, प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण और चक्रीय अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने में सहायक होगा।

    नए नियमों का मूल संदेश यही है कि कचरा केवल निस्तारण की वस्तु नहीं, बल्कि पुनर्चक्रण, पुनःउपयोग और संसाधन पुनर्प्राप्ति के माध्यम से आर्थिक एवं पर्यावरणीय मूल्य रखने वाला संसाधन है।

    राजस्थान में इन प्रावधानों को प्रभावी रूप से लागू करने के लिए राजस्थान राज्य प्रदूषण नियंत्रण मंडल, स्थानीय स्वायत्त शासन विभाग, प्रेस इन्फॉर्मेशन ब्यूरो, स्थानीय निकायों, उद्योगों और नागरिकों के समन्वित प्रयासों से स्वच्छ, स्वस्थ और अधिक टिकाऊ शहरी व्यवस्था की दिशा में कदम बढ़ाए जा रहे हैं।

     

  • MDSU कैंपस में 100 खेजड़ी के पौधे, अब उत्पाद और उपयोगिता पर होगी रिस

    MDSU कैंपस में 100 खेजड़ी के पौधे, अब उत्पाद और उपयोगिता पर होगी रिस

    अजमेर
    महर्षि दयानंद सरस्वती विश्वविद्यालय में जल्द ही खेजड़ी के उत्पाद और उपयोगिता पर जानकारी और शोध की शुरुआत होगी। कैंपस में पर्यावरण विज्ञान विभाग लघु शोध केंद्र तैयार करने में जुटा है। इसमें शोधार्थी, शिक्षक और विद्यार्थी काम कर सकेंगे।

    खेजड़ी या शमी एक वृक्ष है, जो अजमेर सहित जोधपुर, बीकानेर, पाली, बाड़मेर, जैसलमेर, नागौर, सीकर, झुंझुनूं और अन्य क्षेत्रों में पाया जाता है। इस वृक्ष की फलियों और पत्तियों में भरपूर मात्रा में विटामिन और प्रोटीन पाया जाता है। इसकी पत्तियां पशुओं के चारे और औषधीय उपयोग के लिए उपयोगी हैं। इसकी फलियों से सांगरी तैयार की जाती है। वैज्ञानिकों के अनुसार इस वृक्ष की आयु 5000 वर्ष मानी जाती है। रेगिस्तान में जब जानवरों के लिए धूप से बचने का कोई सहारा नहीं होता, तब यह पेड़ उन्हें छाया देता है।

    विश्वविद्यालय ने समझी उपयोगिता
    विश्वविद्यालय में महर्षि चरक भवन के पीछे खेजड़ी वाटिका विकसित की गई है। इसमें खेजड़ी के 100 पौधे लगाए गए हैं। ये पौधे काफी बड़े हो चुके हैं। जल्द ही विभाग खाली पड़ी अन्य जमीन पर खेजड़ी के पौधे लगाएगा।

    तैयार हो रहा लघु शोध केंद्र
    पर्यावरण विज्ञान विभाग में लघु शोध केंद्र तैयार हो रहा है। इसमें खेजड़ी से निर्मित गोंद, केर-सांगरी की सब्जी-आचार, खोखा (सूखा फल), मींझर (फूल) और अन्य उत्पाद रखे जाएंगे। खेजड़ी को बचाने के लिए अमृता देवी के योगदान और इसकी उपयोगिता से जुड़ी जानकारी भी यहां मिलेगी। प्रोजेक्टर लगाया जाएगा। भूगोल, बॉटनी, पर्यावरण विज्ञान, माइक्रोबायोलॉजी और अन्य विषयों के विद्यार्थी, शोधार्थी और शिक्षक यहां शोध कर सकेंगे।

    मियावाकी पद्धति का इस्तेमाल
    खेजड़ी को लगाने के लिए मियावाकी पद्धति का इस्तेमाल किया गया है। पौधरोपण की यह विधि छोटे क्षेत्रों में घने, देशी और आत्मनिर्भर जंगल विकसित करने में मदद करती है। इस विधि में पारंपरिक वनीकरण की तुलना में पौधे 10 गुना तेजी से बढ़ते हैं। ये 30 गुना अधिक घने होते हैं।

    फैक्ट फाइल
        1983 में घोषित किया गया राज्य वृक्ष
        15 से ज्यादा जिलों में पाया जाता है खेजड़ी
        5 हजार वर्ष मानी जाती है खेजड़ी की आयु
        45 प्रतिशत से ज्यादा खेजड़ी वृक्ष खतरे में
        1 लाख रुपए जुर्माना है खेजड़ी को काटने पर

    इनका कहना है…
    लघु शोध केंद्र तैयार हो रहा है। भविष्य में शोधार्थी, शिक्षक और विद्यार्थी रिसर्च कर सकेंगे। इससे खेजड़ी के संरक्षण को बढ़ावा मिलेगा।

    -प्रो. प्रवीण माथुर, पूर्व पर्यावरण विज्ञान विभागाध्यक्ष, एमडीएस विश्वविद्यालय

  • बांसवाड़ा-डूंगरपुर समेत 4 जिलों में सभी सरपंच सीटें ST के लिए आरक्षित

    बांसवाड़ा-डूंगरपुर समेत 4 जिलों में सभी सरपंच सीटें ST के लिए आरक्षित

    जयपुर
    आरक्षण लॉटरी के बाद अब ग्राम पंचायतों में चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे दावेदारों की नजर अपने-अपने गांव की सीट पर है। सरपंच के कुल 14,403 पदों में से 3,058 पद अनुसूचित जनजाति (ST), 2,493 पद अनुसूचित जाति (SC) और 1,961 पद अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के लिए आरक्षित किए गए हैं।

    राजस्थान में पंचायत चुनाव को लेकर गुरुवार को बड़ा अपडेट सामने आया। प्रदेश की 14,403 ग्राम पंचायतों में सरपंच पदों के लिए आरक्षण की लॉटरी निकाली गई। इसके साथ ही प्रदेशभर में हजारों गांवों की चुनावी तस्वीर साफ हो गई है। उपखंड मुख्यालयों पर हुई लॉटरी में सरपंच के 14,403 और वार्ड पंच के 1,30,584 पदों के लिए आरक्षण तय किया गया। खास बात यह है कि प्रदेश में करीब 7,200 महिला सरपंच और करीब 65 हजार महिला वार्ड पंच चुनी जाएंगी।

    सरपंच के 14 हजार से ज्यादा पदों का आरक्षण तय
    आरक्षण लॉटरी के बाद अब ग्राम पंचायतों में चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे दावेदारों की नजर अपने-अपने गांव की सीट पर है। सरपंच के कुल 14,403 पदों में से 3,058 पद अनुसूचित जनजाति (ST), 2,493 पद अनुसूचित जाति (SC) और 1,961 पद अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के लिए आरक्षित किए गए हैं।

    महिला आरक्षण के चलते बड़ी संख्या में गांवों की कमान इस बार महिलाओं के हाथ में जाएगी। करीब 7,200 पद महिलाओं के लिए आरक्षित होंगे। ऐसे में कई गांवों में लंबे समय से चुनाव की तैयारी कर रहे पुरुष दावेदारों की उम्मीदों पर भी आरक्षण लॉटरी ने असर डाला है।

    वार्ड पंचों में भी हजारों सीटें महिलाओं के लिए
    सरपंचों के साथ-साथ 1,30,584 वार्ड पंच पदों के लिए भी आरक्षण तय कर दिया गया है। इनमें 21,962 वार्ड SC, 19,117 वार्ड ST और करीब 15 हजार वार्ड OBC के लिए आरक्षित किए गए हैं।

    वहीं, कुल आरक्षण व्यवस्था के तहत करीब 65 हजार महिला वार्ड पंच भी चुनी जाएंगी। यानी पंचायत चुनाव में इस बार महिलाओं की भागीदारी बड़े स्तर पर दिखाई देगी।

    4 जिलों में बड़ा उलटफेर, सभी सरपंच सीट ST के लिए
    आरक्षण लॉटरी में सबसे ज्यादा चर्चा बांसवाड़ा, डूंगरपुर, प्रतापगढ़ और सलूंबर जिलों की हो रही है। इन चार जिलों में सरपंच के सभी 1,253 पद ST वर्ग के लिए आरक्षित किए गए हैं।

    आंकड़ों के मुताबिक बांसवाड़ा में 327, डूंगरपुर में 442, प्रतापगढ़ में 277 और सलूंबर में 207 सरपंच पद हैं। इन सभी पदों पर ST वर्ग के उम्मीदवार ही चुनाव लड़ सकेंगे।

    इन जिलों में आरक्षण का सीधा असर उन दावेदारों पर पड़ेगा जो लंबे समय से सरपंच चुनाव की तैयारी कर रहे थे। अब टिकट और चुनावी रणनीति भी आरक्षण के हिसाब से तय होगी।

    बाड़मेर में दोबारा निकली लॉटरी, क्यों मचा विवाद?
    इधर बाड़मेर पंचायत समिति में सरपंच पदों की आरक्षण लॉटरी के दौरान विवाद खड़ा हो गया। लॉटरी में कपूरड़ी ग्राम पंचायत को SC वर्ग के लिए आरक्षित कर दिया गया था। इस पर जनप्रतिनिधियों ने आपत्ति दर्ज कराई।

    आपत्ति करने वालों का कहना था कि ग्राम पंचायत में SC वर्ग की आबादी नहीं है। मामला सामने आने के बाद रिटर्निंग ऑफिसर ने पूरी पंचायत समिति की आरक्षण लॉटरी दोबारा निकालने के आदेश दिए। इससे बाड़मेर की पंचायत समिति में कई सीटों का आरक्षण बदलने की संभावना बन गई है।

    अब चुनाव की तारीखों का इंतजार
    सरपंच और पंच के साथ-साथ प्रधान, जिला परिषद सदस्य और पंचायत समिति सदस्यों के आरक्षण का पूरा ब्योरा राज्य निर्वाचन आयोग को भेजा जाएगा। आरक्षण की प्रक्रिया पूरी होने के बाद अब चुनाव कार्यक्रम की घोषणा का इंतजार है।

    संभावना जताई जा रही है कि शनिवार या सोमवार तक राज्य निर्वाचन आयोग पंचायत चुनाव की घोषणा कर सकता है। इसके बाद अक्टूबर के पहले सप्ताह से चुनाव की अधिसूचना जारी होने और नामांकन प्रक्रिया शुरू होने की संभावना है।

    हाईकोर्ट के निर्देशों के अनुसार पंचायत चुनाव की पूरी प्रक्रिया 15 नवंबर तक पूरी करनी है। ऐसे में आरक्षण लॉटरी के बाद अब राजस्थान के गांवों में चुनावी सरगर्मी तेज होना तय माना जा रहा है। सबसे बड़ा सवाल यही है कि किस गांव की कमान महिला के हाथ जाएगी और किस सीट पर कौन सा वर्ग मैदान में उतरेगा?

  • भरतपुर-बूंदी-अजमेर में बनेंगे RIT, गांवों में 2 हजार अटल ज्ञान केंद्रों को मंजूरी

    भरतपुर-बूंदी-अजमेर में बनेंगे RIT, गांवों में 2 हजार अटल ज्ञान केंद्रों को मंजूरी

    जयपुर
     मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने गुरुवार को मुख्यमंत्री कार्यालय में राज उन्नति की 9वीं बैठक में करीब 15 हजार करोड़ रुपए की परियोजनाओं और विभिन्न योजनाओं की प्रगति की समीक्षा की। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को विकास कार्यों में तेजी लाने, समय पर स्वीकृति, निविदा और कार्यादेश जारी करने तथा योजनाओं का लाभ आमजन तक पहुंचाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि गांव, गरीब, युवा, नारी शक्ति और किसान विकास परियोजनाओं के केंद्र में हैं। अधिकारियों को फील्ड में जाकर योजनाओं की निगरानी करने और देरी के लिए जिम्मेदारी तय करने के निर्देश दिए गए।

    राज्य के सरकारी स्कूलों में आधारभूत सुविधाओं के विकास के लिए करीब 12,500 करोड़ रुपए का निवेश किया जाएगा। प्रदेश के सभी 41 जिलों के 65,308 राजकीय विद्यालयों का तकनीकी सर्वे पूरा हो चुका है। सर्वे में 3,587 जर्जर स्कूल भवनों और करीब 71,078 कक्षा-कक्षों के साथ बिजली, पेयजल और शौचालय जैसी सुविधाओं में सुधार की जरूरत सामने आई है। पिछले दो वर्षों में 3,364 कार्य स्वीकृत किए गए, जबकि 652 नए स्कूल भवनों को प्रशासनिक स्वीकृति देकर निविदा प्रक्रिया में लिया गया है।

    2-अटल प्रगति पथों का काम नवंबर तक पूरा होगा
    5 हजार से अधिक आबादी वाले ग्रामीण कस्बों में अटल प्रगति पथों के निर्माण की समीक्षा करते हुए मुख्यमंत्री ने सार्वजनिक निर्माण विभाग को समयबद्ध तरीके से काम पूरा करने के निर्देश दिए। वर्ष 2025-26 के सभी शेष कार्य और 2026-27 के प्रथम चरण के प्रगतिरत कार्य नवंबर 2026 तक पूरे करने को कहा गया। दूसरे चरण के सभी निर्माण कार्य भी जल्द शुरू होंगे। मुख्यमंत्री ने जिलेवार टाइमलाइन तय करने और गुणवत्ता की लगातार निगरानी के निर्देश दिए। इन सड़कों से ग्रामीण क्षेत्रों में आवागमन और जनसुविधाओं तक पहुंच बेहतर होने की उम्मीद है।

    3-पंचायत मुख्यालयों पर बनेंगे अटल ज्ञान केन्द्र
    ग्रामीण युवाओं और आमजन को अध्ययन तथा डिजिटल सेवाओं की सुविधा देने के लिए अटल ज्ञान केन्द्रों के निर्माण में तेजी लाने के निर्देश दिए गए। पहले चरण में प्रदेश में 2,052 केन्द्र स्वीकृत किए गए हैं, जिनमें 628 केन्द्र पूरे हो चुके हैं। दूसरे चरण में 3 हजार अटल ज्ञान केन्द्र बनाए जाने हैं, जिनमें से 1 हजार की स्वीकृति जारी हो चुकी है। मुख्यमंत्री ने दूसरे चरण के 2 हजार केन्द्रों की स्थापना की स्वीकृति जल्द जारी करने को कहा। इन केन्द्रों में पुस्तकालय, ई-लाइब्रेरी, ई-मित्र, ऑनलाइन सेवाएं और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी की सुविधा मिलेगी।

    4-स्कूलों में दूध की आपूर्ति बाधित नहीं होगी
    पन्नाधाय बाल गोपाल योजना की समीक्षा के दौरान मुख्यमंत्री ने विद्यार्थियों के पोषण पर विशेष जोर दिया। उन्होंने स्कूलों में नियमित रूप से दूध उपलब्ध कराने और दूध की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। स्कूल शिक्षा विभाग को सभी जिलों में दूध पाउडर की शत-प्रतिशत आपूर्ति जल्द सुनिश्चित करने को कहा गया। स्कूल शिक्षा, गोपालन और वित्त विभाग को आपसी समन्वय से काम करने के निर्देश दिए गए, ताकि आपूर्ति में किसी तरह का व्यवधान न आए। योजना के तहत प्रदेश में करीब 46 लाख विद्यार्थियों को लाभ मिल रहा है और इसके लिए करीब 800 करोड़ रुपए का बजट प्रावधान है।

    5-ग्रामीण रोजगार में 3.29 करोड़ मानव दिवस सृजित
    वीबी-जीरामजी योजना के तहत ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार सृजन की प्रगति की मुख्यमंत्री ने समीक्षा की। उन्होंने निर्देश दिए कि प्रत्येक जरूरतमंद पात्र परिवार को आवश्यकतानुसार रोजगार उपलब्ध कराया जाए और मजदूरी का भुगतान समय पर सुनिश्चित हो। मुख्यमंत्री ने जुलाई से अब तक 3 करोड़ 29 लाख मानव दिवस रोजगार सृजित होने को योजना की महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया। ग्रामीण विकास विभाग को रोजगार और भुगतान की प्रक्रिया की निरंतर निगरानी करने के निर्देश दिए गए। सरकार का जोर यह सुनिश्चित करने पर है कि ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार की जरूरत रखने वाले पात्र परिवारों को समय पर काम मिले और भुगतान में देरी नहीं हो।

    6-वर्ष 2029 तक सभी पात्र परिवारों को पक्का आवास
    प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण की समीक्षा करते हुए मुख्यमंत्री ने वर्ष 2029 तक सभी पात्र परिवारों को आवास उपलब्ध कराने के लक्ष्य को टाइमलाइन के अनुसार पूरा करने के निर्देश दिए। दिसंबर 2026 तक सभी प्रगतिरत आवास पूरे कराने और लाभार्थियों को समय पर किस्तों का भुगतान सुनिश्चित करने को कहा गया। वर्ष 2026-27 के आवंटित लक्ष्यों की स्वीकृति भी जल्द जारी करने के निर्देश दिए गए। मुख्यमंत्री ने वन भूमि में निवासरत भूमिहीन परिवारों को प्राथमिकता के आधार पर भूमि और आवास आवंटित करने के निर्देश दिए, ताकि पात्र परिवारों को आवास सुविधा मिल सके।

    7-ग्रामीण क्षेत्रों की शिकायतों का प्राथमिकता से होगा समाधान
    ग्रामीण क्षेत्रों में नागरिक सुविधाओं से जुड़ी शिकायतों की स्थिति की समीक्षा करते हुए मुख्यमंत्री ने लंबित परिवादों के शीघ्र निस्तारण के निर्देश दिए। 1 जनवरी से 21 सितंबर 2026 तक ग्रामीण क्षेत्रों से कुल 8,97,808 शिकायतें प्राप्त हुईं, जिनमें से 8,68,425 का निस्तारण किया जा चुका है। केवल 3.27 प्रतिशत शिकायतें लंबित हैं। मुख्यमंत्री ने पेयजल, जलभराव और सड़क से जुड़ी समस्याओं को प्राथमिकता से हल करने को कहा। जिन ग्राम पंचायतों में जनसेवा शिविर नहीं हुए हैं, वहां पंचायत समिति स्तर पर शिविर आयोजित कर शिकायतों का निस्तारण करने के निर्देश दिए गए।

    8-भरतपुर, बीकानेर और अजमेर में बनेंगे RIT
    भरतपुर, बीकानेर और अजमेर के तीन इंजीनियरिंग कॉलेजों को अपग्रेड कर राजस्थान इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी यानी RIT के रूप में विकसित किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने संबंधित विभाग को इन संस्थानों की स्थापना के लिए विधानसभा में विधेयक प्रस्तुत करने की प्रक्रिया जल्द पूरी करने के निर्देश दिए। इसके लिए विधि विभाग से शीघ्र सहमति लेने को कहा गया। इन तीनों RIT की स्थापना पर करीब 300 करोड़ रुपए खर्च किए जाएंगे। मुख्यमंत्री ने इस संबंध में वित्त विभाग को आवश्यक वित्तीय स्वीकृति जारी करने के निर्देश भी दिए।

    9-प्रदेश में 6 नए ट्रोमा सेंटरों के काम में तेजी
    राज्य में चिकित्सा सुविधाओं के विस्तार के लिए छह नए ट्रोमा सेंटरों के निर्माण की समीक्षा की गई। मुख्यमंत्री ने कोलाना बांदीकुई और दलोत प्रतापगढ़ के ट्रोमा सेंटरों का काम 31 मार्च 2027 तक पूरा करने के निर्देश दिए। देसूरी पाली के ट्रोमा सेंटर को मार्च 2028 तक पूरा करने को कहा गया। RUHS जयपुर में ट्रोमा सेंटर के उन्नयन का काम मार्च 2027 तक पूरा करने के निर्देश दिए गए। साण्डेराव पाली में ट्रोमा सेंटर का निर्माण जल्द शुरू करने के लिए कार्ययोजना बनाने को कहा गया। बैठक में बताया गया कि दूदू का ट्रोमा सेंटर पूरा हो चुका है।

    10- प्रमुख योजनाएं दिसंबर तक SMART प्लेटफॉर्म पर आएंगी
    मुख्यमंत्री ने सर्विस मैनेजमेंट विद आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस एंड रियल टाइम सिस्टम यानी SMART योजना की भी समीक्षा की। उन्होंने सामाजिक सुरक्षा पेंशन, पालनहार छात्रवृत्ति, स्वयं सहायता समूहों को ऋण, लाडो प्रोत्साहन योजना, गार्गी पुरस्कार और मुख्यमंत्री युवा स्वरोजगार योजना सहित 10 प्रमुख योजनाओं को 10 दिसंबर तक SMART प्लेटफॉर्म पर लाने के निर्देश दिए। संबंधित विभागों को योजनाओं के नियमों में आवश्यक संशोधन करने को कहा गया। मुख्यमंत्री ने मुख्य सचिव को इस पूरी प्रक्रिया की निरंतर मॉनिटरिंग करने के निर्देश दिए, ताकि योजनाओं की सेवाएं डिजिटल माध्यम से अधिक प्रभावी तरीके से उपलब्ध कराई जा सकें।

  • आंगनबाड़ी केंद्र होंगे और मजबूत, जयपुर में गर्भवती महिलाओं की हुई गोद भराई

    आंगनबाड़ी केंद्र होंगे और मजबूत, जयपुर में गर्भवती महिलाओं की हुई गोद भराई

    जयपुर
    विकसित भारत जन सेवा अभियान के तहत शुक्रवार को वाटिका के सामुदायिक भवन में 'आंगन मिलन सेवा' कार्यक्रम का आयोजन उपमुख्यमंत्री तथा महिला एवं बाल विकास मंत्रीदिया कुमारी के मुख्य आतिथ्य में किया गया।

    इस अवसर पर उपमुख्यमंत्री दिया कुमारी ने आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं, सहायिकाओं और आशा सहयोगिनियों को माला पहनाकर, पौधा एवं माननीय प्रधानमंत्री जी द्वारा प्रेषित पत्र प्रदान कर सम्मानित किया। साथ ही इस अवसर पर उपमुख्यमंत्री द्वारा गर्भवती महिलाओं की गोद भराई और धात्री माताओं के बच्चों का अन्नप्राशन करवाया गया।

    अपने संबोधन में दिया कुमारी ने कहा कि आंगनबाड़ी सिर्फ एक केंद्र नहीं, बल्कि बच्चों के भविष्य निर्माण की पहली पाठशाला है। आंगनबाड़ी बहनें हर बच्चे की मुस्कान और हर माँ के विश्वास की जिम्मेदारी पूर्ण मुस्तैदी से निभा रही हैं। यह सम्मान उस ममता, मेहनत और समर्पण का सम्मान है, जिससे नई पीढ़ी का भविष्य संवर रहा है।

    दिया कुमारी ने कहा कि आंगनबाड़ी में आयोजित यह कार्यक्रम बच्चों के स्वस्थ भविष्य के लिए परिवार और समाज को जोड़ने का प्रयास है। पोषण के क्षेत्र में निःस्वार्थ भाव से काम करने वाली कार्यकर्ता, सहायिका ही हमारे लोकल हीरो हैं।

    उपमुख्यमंत्री दिया कुमारी ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने आंगनबाड़ी बहनों के समर्पण की सराहना करते हुए उन्हें पत्र प्रेषित किया है। पोषण ट्रैकर जैसी डिजिटल व्यवस्था से पोषण की निगरानी अधिक प्रभावी हुई है, जिसकी G20, UNICEF, WHO तक में सराहना हुई है।

    उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री जी के नेतृत्व में राज्य सरकार द्वारा आंगनबाड़ी केंद्रों को सुदृढ़ और अपग्रेड किया जा रहा है, नए केंद्र बनाए जा रहे हैं और आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के मानदेय में बढ़ोतरी की गई है। इसका उद्देश्य बच्चों के पोषण में सुधार और उनका उज्जवल भविष्य सुनिश्चित करना है।

    उन्होंने आह्वान किया कि हर स्वस्थ बच्चा हमारी जिम्मेदारी है, हम सभी हर बच्चे को सही पोषण, स्नेह और संस्कार देने का संकल्प लें। आंगनबाड़ी केंद्र विकसित राजस्थान की नई कहानी लिखने का मंच बनेंगे।

    कार्यक्रम में निदेशक समेकित बाल विकास सेवाएं वासुदेव मालावत,  जनप्रतिनिधियों, संस्था प्रधानों, महिला मोर्चा की सदस्यों, राजीविका समूहों तथा बड़ी संख्या में लाभार्थी माताओं और बच्चों ने भाग लिया।

  • राजस्थान में ड्रग्स के हॉटस्पॉट जिलों पर खास निगरानी, नशा मुक्ति और जागरूकता अभियान तेज

    राजस्थान में ड्रग्स के हॉटस्पॉट जिलों पर खास निगरानी, नशा मुक्ति और जागरूकता अभियान तेज

    जयपुर
     मुख्य सचिव  वी. निवास की अध्यक्षता में शुक्रवार को शासन सचिवालय में प्रदेश में मादक पदार्थों की तस्करी एवं दुरुपयोग की रोकथाम के लिए तैयार किए गए ‘नारकोटिक्स कंट्रोल विजन 2026-29’ के संबंध में बैठक आयोजित हुई। बैठक में विजन के तहत निर्धारित लक्ष्यों, राज्य के रोडमैप तथा विभिन्न विभागों एवं केंद्रीय एजेंसियों के मध्य समन्वय की प्रगति की समीक्षा की गई।

    मुख्य सचिव ने कहा कि केंद्रीय विजन के अनुरूप प्रदेश में प्रशासनिक एवं विभागीय समन्वय के लिए विस्तृत रोडमैप तैयार किया गया है। उन्होंने इस विजन के चार प्रमुख स्तंभों—प्रवर्तन (Enforcement), पूर्ववर्ती रसायन एवं सिंथेटिक ड्रग्स पर रोक, मांग एवं हानि न्यूनीकरण तथा क्षमता निर्माण एवं समन्वय के तहत निर्धारित लक्ष्यों पर विस्तार से

    चर्चा की और संबंधित अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए
     मुख्य सचिव ने विजन के तहत प्रवर्तन के क्षेत्र में आसूचना आधारित कार्रवाई को सुदृढ़ करने, तस्करी नेटवर्क का पूर्ण विघटन करने तथा अंतरराष्ट्रीय एवं अंतर्राज्यीय मार्गों को सुरक्षित बनाने के संबंध चर्चा कर आवश्यक निर्देश दिए। इसी प्रकार पूर्ववर्ती रसायनों (Precursor Chemicals) का कड़ा विनियमन सुनिश्चित करते हुए सिंथेटिक ड्रग्स के अवैध निर्माण पर प्रभावी रोक लगाने के संबंध में भी निर्देश दिए। उन्होंने मांग एवं हानि न्यूनीकरण के अंतर्गत नशा मुक्त भारत अभियान (NMBA) के माध्यम से व्यापक जन-जागरूकता, उपचार, परामर्श एवं पुनर्वास सेवाओं के विस्तार तथा क्षमता निर्माण एवं समन्वय के तहत एनसीबी की जनशक्ति, अत्याधुनिक अवसंरचना और विभिन्न एजेंसियों के मध्य बेहतर तालमेल को मजबूत करने पर भी चर्चा की।

    मुख्य सचिव ने प्रदेश के संवेदनशील जिलों पर विशेष फोकस करते हुए नशा मुक्ति शिविर आयोजन की जानकारी ली, साथ ही हॉटस्पॉट जिलों में निगरानी व्यवस्था को और मजबूत के निर्देश दिए। सीमावर्ती एवं अफीम खेती वाले जिलों में मादक पदार्थ सेवन के विरुद्ध बहु-माध्यम जन-जागरूकता अभियान चलाकर समुचित प्रचार प्रसार सुनिश्चित करने पर विशेष जोर दिया।

    मुख्य सचिव ने राज्य रोडमैप के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए सभी संबंधित विभागों एवं एजेंसियों के मध्य निरंतर समन्वय बनाए रखने तथा निर्धारित लक्ष्यों की नियमित समीक्षा करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि समन्वित प्रयासों एवं प्रभावी क्रियान्वयन से प्रदेश में अवैध मादक पदार्थों की तस्करी पर प्रभावी अंकुश लगाने के साथ ही युवाओं के लिए सुरक्षित, स्वस्थ एवं नशा मुक्त वातावरण तैयार करने में मदद मिलेगी।

    इस अवसर पर पुलिस महानिदेशक  राजीव कुमार शर्मा, गृह विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव  भास्कर ए. सावंत, अतिरिक्त महानिदेशक पुलिस एटीएस, एजीटीएफ  दिनेश एम.एन., गृह विभाग से संयुक्त सचिव मती अंजलि राजोरिया, उप सचिव मती सोविला माथुर  सहित संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

  • Rajasthan Mayor Result: जयपुर में 29, कोटा में 30 वोट से जीत; बीकानेर में कांग्रेस का मेयर

    Rajasthan Mayor Result: जयपुर में 29, कोटा में 30 वोट से जीत; बीकानेर में कांग्रेस का मेयर

    जयपुर
    राजस्थान के 10 नगर निगमों में महापौर चुनाव की प्रक्रिया अब पूरी हो गई है। शुक्रवार को जयपुर, जोधपुर और कोटा में हुए चुनाव के साथ प्रदेश के सभी 10 नगर निगमों के मेयर का फैसला हो गया। इन चुनावों में भाजपा के प्रत्याशियों ने 9 नगर निगमों में जीत दर्ज की, जबकि बीकानेर में कांग्रेस का मेयर चुना गया।

    जयपुर में भाजपा के सुनील कोठारी ने कांग्रेस की सुनीता मावर को 29 वोट से हराया। कोटा में अनुसुईया गोस्वामी ने सुनीता सुमन को 30 वोट से हराया। जोधपुर में प्रसन्नचंद मेहता ने राजेंद्र सोलंकी को 6 वोट से शिकस्त दी।

    इससे पहले अजमेर, अलवर, पाली और उदयपुर में भाजपा प्रत्याशी विजयी हुए थे। भरतपुर और भीलवाड़ा में भाजपा प्रत्याशी निर्विरोध मेयर चुने गए, जबकि बीकानेर में कांग्रेस के अनिल कल्ला ने भाजपा प्रत्याशी को 20 वोट से हराया।

    1-अजमेर: भाजपा की अनामिका शर्मा को 43 और कांग्रेस की किरण गढ़वाल को 37 वोट मिले।

    2-उदयपुर: पारस सिंघवी ने 55 वोट हासिल किए और कांग्रेस की पूनम कुंवर राठौड़ को 25 वोट मिले।

    3-अलवर: सुमनलता अग्रवाल को 42 और कांग्रेस की कमलेश शर्मा को 23 वोट मिले।

    4-पाली: भाजपा की नमिता बुबकिया 33 वोट लेकर मेयर बनीं। यहां निर्दलीय राजबाला हिंगड़ को 29 वोट मिले, जबकि कांग्रेस की अधिकृत प्रत्याशी सुमित्रा जैन को सिर्फ 3 वोट मिले। इसलिए सबसे नजदीकी प्रतिद्वंद्वी के आधार पर जीत का अंतर 4 वोट रहा।

    5-भरतपुर: यहां निर्विरोध निर्वाचन हुआ और भाजपा की जसवंत कंवर महापौर बनी।

    6—भीलवाड़ा: भाजपा की अनुराधा सिंह निर्विरोध मेयर चुनी गईं।

    7-बीकानेर: कांग्रेस के अनिल कल्ला ने 50 वोट हासिल किए तो भाजपा के सुरेंद्र सिंह को 30 वोट मिले।

    8-जयपुर: भाजपा के सुनील कोठारी को 89 वोट मिले, जबकि कांग्रेस की सुनीता मावर को 60 वोट मिले। कोठारी 29 वोट के अंतर से विजयी रहे।

    9-कोटा: भाजपा की अनुसुईया गोस्वामी ने 65 वोट हासिल किए, जबकि कांग्रेस की सुनीता सुमन को 35 वोट मिले। यहां जीत का अंतर 30 वोट रहा।

    10-जोधपुर: भाजपा के प्रसन्नचंद मेहता को 53 और कांग्रेस के राजेंद्र सिंह सोलंकी को 47 वोट मिले। मेहता ने 6 वोट के अंतर से चुनाव जीता।

    इस तरह 10 नगर निगमों में भाजपा के 9 और कांग्रेस का 1 महापौर है। दस में से सात नगर निगमों में मेयर का चुनाव 21 सितंबर को हो चुका था, जबकि जयपुर, जोधपुर और कोटा में चुनाव 25 सितंबर को हुए।

    नगर निगम    विजेता      पार्टी          विजेता को वोट    दूसरे प्रत्याशी को वोट       जीत का अंतर
    जयपुर    सुनील कोठारी    भाजपा        89                     सुनीता मावर 60             29 वोट
    जोधपुर    प्रसन्नचंद मेहता    भाजपा      53                    राजेंद्र सोलंकी 47            6 वोट
    कोटा    अनुसुईया गोस्वामी    भाजपा      65                     सुनीता सुमन 35           30 वोट
    बीकानेर    अनिल कल्ला    कांग्रेस            50                     सुरेंद्र सिंह 30                 20 वोट
    अजमेर    अनामिका शर्मा    भाजपा        43                      किरण गढ़वाल 37           6 वोट
    उदयपुर    पारस सिंघवी    भाजपा            55                    पूनम कुंवर राठौड़ 25         30 वोट
    अलवर    सुमनलता अग्रवाल    भाजपा    42                      कमलेश शर्मा 23             19 वोट
    पाली    नमिता बुबकिया    भाजपा           33                    राजबाला हिंगड़ 29                4 वोट
    भरतपुर    अनुराधा सिंह    भाजपा          निर्विरोध                —                                    निर्विरोध
    भीलवाड़ा    जसवंत कंवर    भाजपा       निर्विरोध                  —                                     निर्विरोध

  • सरिस्का में 22 KM एलिवेटेड रोड की तैयारी, वन्यजीव नीचे से गुजरेंगे; 8 गांवों की जमीन होगी अधिग्रहित

    सरिस्का में 22 KM एलिवेटेड रोड की तैयारी, वन्यजीव नीचे से गुजरेंगे; 8 गांवों की जमीन होगी अधिग्रहित

    जयपुर
    सरिस्का एलिवेटेड रोड एक बार फिर फाइलों से बाहर आया है। इस बार नटनी का बारा से मंडावरा तक 22 किलोमीटर लंबा एलिवेटेड रोड बनाने का प्रस्ताव बनाया गया है। करीब 2200 करोड़ रुपए की लागत से बनने वाली इस परियोजना के लिए पीडब्ल्यूडी एनएच ने डीपीआर केंद्र सरकार को भेज दी है। प्रस्तावित एलिवेटेड रोड के नीचे से वन्यजीवों के गुजरने की व्यवस्था होगी, जबकि रोड के बीच में आने वाले आठ गांवों की जमीन का अधिग्रहण किया जाएगा।

    सेंट्रल एम्पावर्ड कमेटी के भ्रमण के दौरान सामने आया था कि सरिस्का के मध्य से गुजर रहे राष्ट्रीय राजमार्ग 248ए पर आए दिन वाहनों की चपेट में वन्यजीव आ रहे हैं। इसका रास्ता एलिवेटेड रोड निकाला गया। करीब चार साल से इस पर मंथन चल रहा है। दो बार इस एलिवेटेड का रूट तय हो चुका है। एक बार पीडब्ल्यूडी एनएच ने प्रदेश स्तर पर डीपीआर तैयार की, लेकिन उसे रिजेक्ट कर दिया गया। दूसरे प्रस्ताव में यह सामने आया कि थानागाजी के थैंक्यू बोर्ड के आगे यह रोड उतारा जाएगा, जिसका विरोध काफी दिन तक चला और उसके बाद नया प्रस्ताव बनाया गया।

    यह रहेगा मार्ग, किसानों को मिली राहत
    अब एलिवेटेड रोड नटनी का बारा से शुरू होकर धर्मपुरा, कुशालगढ़ से मंडावरा तक पहुंचेगा। यह मार्ग आगे जाकर जयपुर मार्ग पर मिलेगा। इसके बीच आठ गांव आएंगे। इन गांवों की जमीन अधिग्रहण की जाएगी। साथ ही, वन विभाग से भी जमीन ली जाएगी। इस मार्ग पर थैंक्यू बोर्ड नहीं आएगा, जिससे विरोध करने वाले किसानों को राहत मिलेगी।

    26 किमी दूरी हो जाएगी कम
    नटनी का बारा से मंडावर की दूरी करीब 48 किमी है। आठ गांवों की जमीन व फॉरेस्ट लैंड से एलिवेटेड गुजरेगा, तो दूरी करीब 26 किमी कम हो जाएगी और जयपुर की राह आसान होगी। करीब 45 मिनट समय बच सकेगा।

    वन्यजीव नीचे से निकल सकेंगे
    एलिवेटेड रोड पिलर पर खड़ा होगा, जिसके नीचे से वन्यजीव आसान से निकल सकेंगे। पिलर की ऊंचाई इतनी होगी कि वाहनों का शोर भी अधिक दूर तक नहीं जाएगा।

    आठ गांवों की जमीन अधिग्रहण करेंगे
    भू प्रबंधन कार्यालय से रिटायर्ड नायब तहसीलदार बनवारी सिंह ने बताया कि उनकी कंसल्टेंट कंपनी ने सर्वे किया है। एलिवेटेड रोड नटनी का बारा से मंडावर तक जाएगा। इस बीच आठ गांवों की जमीन अधिग्रहित होगी और कुछ वन विभाग की जमीन भी ली जाएगी। इस पर तेजी से काम कर रहे हैं।

    एलिवेटेड रोड का प्रस्ताव बनाकर केंद्र सरकार को भेज दिया है। इस पर करीब 2200 करोड़ रुपए खर्च होंगे। वहां से मंजूरी के बाद इस पर आगे काम होगा – वेद प्रकाश शर्मा, एक्सईएन, पीडब्ल्यूडी एनएच जयपुर

     

  • राजस्थान में 500 खदानें सवालों के घेरे में, वन्यजीव संरक्षण फंड भी अटका

    राजस्थान में 500 खदानें सवालों के घेरे में, वन्यजीव संरक्षण फंड भी अटका

    जयपुर
     राजस्थान के बाघ अभयारण्यों, कॉरिडोर और इको-सेंसिटिव जोन में खनन की मंजूरी के बीच वन्यजीव संरक्षण की व्यवस्था सवालों में है। विभागीय दस्तावेजों के अनुसार, 2008 से अब तक चीफ वाइल्डलाइफ वार्डन कार्यालय ने एक भी 'वाइल्डलाइफ कंजर्वेशन प्लान' (डब्ल्यूसीपी) को अंतिम मंजूरी नहीं दी। इस वजह से वन्यजीव विकास, हैबिटेट सुधार और वाटर होल निर्माण के लिए करीब 300 करोड़ रुपए फाइलों में अटके हैं। पर्यावरण मंजूरी देने वाले राज्य पर्यावरण प्रभाव आकलन प्राधिकरण (सिया) ने इस बारे में वन विभाग को कई पत्र लिखे, लेकिन कोई ठोस जवाब नहीं मिला। दूसरी ओर, खदान मालिकों को एडवांस फंड जमा करने की बाध्यता से छूट दे दी गई।

    आदेश वापस लिया
    सिया ने 17 जुलाई 2025 को वन्यजीव संरक्षण मद की राशि अग्रिम जमा कराना अनिवार्य किया था और 3 नवंबर 2025 को नया कार्यालय आदेश (संख्या 1361) जारी कर यह आदेश वापस ले लिया। अब कंपनियों को सरकार को एडवांस पैसा नहीं देना है। उन्हें सिर्फ 'पर्यावरण प्रबंधन योजना' में लिखकर देना है कि वन्यजीवों के लिए बजट रखा गया है। प्रोजेक्ट को मंजूरी न मिलने पर कंपनी पर पैसा खर्च करने की बाध्यता नहीं रहती और कंपनियां इसी का फायदा उठाती हैं।

    चीफ वाइल्डलाइफ वार्डन केसी अरुण प्रसाद ने कहा, हम इन सभी कंजर्वेशन प्लान्स को रिवाइज कर रहे हैं। इनमें जरूरी संशोधन ला रहे हैं, ताकि प्रक्रिया पारदर्शी और व्यावहारिक बन सके।

    टाइगर टेरिटरी-इको-सेंसिटिव जोन में अनुमति
    जिला स्तरीय कमेटियों (डीईआईएए) ने शुरुआत में इको-सेंसिटिव जोन और टाइगर टेरिटरी के दायरे में 50 से 60 माइनिंग प्रोजेक्ट्स को खनन की अनुमति दे दी थी। सिया ने बाद में इन फाइलों की पुनर्समीक्षा की, तब यह चूक पकड़ में आई। सूत्रों के अनुसार, अब भी करीब 500 खदानें बिना उचित अनुमति के चल रही हैं।

    ग्राउंड स्टडी की जगह रेडीमेड रिपोर्ट
    राजस्थान में किसी भी खनन या प्रोजेक्ट को पर्यावरणीय मंजूरी से पहले केंद्र के पोर्टल से टीओआर जारी होता है। इसकी अहम शर्त है कि प्रोजेक्ट के 10 किमी दायरे में वन्यजीवों का अध्ययन कराया जाए, जिसे संबंधित डीएफओ सत्यापित करता है। इसके बाद कंजर्वेशन प्लान बनता है, जिसे चीफ वाइल्डलाइफ वार्डन से मंजूर कराना होता है। मंजूरी के बाद ही कंपनी को अधिकतम राशि जमा करनी होती है।

    अधिकांश मामलों में ग्राउंड रिपोर्ट के बजाय कंसल्टेंट से तैयार रिपोर्ट ली जाती है। कागजात के मुताबिक, फाइलें डीएफओ स्तर पर सत्यापन के लिए जाती हैं और वहीं अटक जाती हैं। मुख्यालय स्तर पर कोई फॉलो-अप नहीं होता। कुछ अधिकारियों के अनुसार, सीमेंट और इंफ्रास्ट्रक्चर की बड़ी कंपनियां अपने प्रभाव से काम जल्दी करा लेती हैं, जबकि छोटे खननकर्ताओं के प्लान पास नहीं होते।