Category: पंजाब

  • पंजाब-चंडीगढ़ में कल थमेगा सरकारी क्लेरिकल काम, मिनिस्टीरियल स्टाफ सामूहिक छुट्टी पर रहेगा

    पंजाब-चंडीगढ़ में कल थमेगा सरकारी क्लेरिकल काम, मिनिस्टीरियल स्टाफ सामूहिक छुट्टी पर रहेगा

    मोहाली 
    पंजाब सरकार और सरकारी कर्मचारियों के बीच चल रही तनातना दिन प्रतिदिन बढ़ती जा रही है। साझा मुलाजिम मंच ने साफ कर दिया कि जब तक सरकार ने उनकी मांगें नहीं मानी वो अपना संघर्ष नहीं छोड़ेंगे।

    साझा मुलाजिम मंच के अध्यक्ष सुखचैन सिंह खैहरा ने कहा कि पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार मंगलवार को पंजाब भर में मिनिस्टीरियल स्टाफ सामूहिक छुट्‌टी लेकर हड़ताल पर रहेगा। वहीं चडीगढ़ व मोहाली के कर्मचारी अपने-अपने दफ्तरों के बाहर भूख हड़ताल पर बैठेंगे।

    सुखचैन सिंह खैहरा का कहना है कि साझा मुलाजिम मंच ने मुलाजिमों के खिलाफ जारी किए गए पत्र को सात सितंबर तक वापस करने का अल्टीमेटम दिया था लेकिन सरकार ने वो लेटर वापस नहीं किया। जिसके बाद मुलाजिमों ने पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के तहत विरोध शुरू करने का फैसला कर दिया है।

    उन्होंने बताया कि क्लेरिकल स्टाफ सामूहिक छुट्‌टी पर रहेगा। उन्होंने कहा कि संगरूर में मोहनजीत सिंह पर हुए हमले के विरोध में कर्मचारी अपने-अपने दफ्तरों के बाहर बैठकर भूख हड़ताल करेंगे। इस मामले में रविवार को भी यूनियन की बैठक हुई।

    बैठक में यूनियन ने क्या फैसला किया, जानिए…

        08 सितंबर को पूर्ण काम बंद और भूख हड़ताल: चंडीगढ़ के समस्त निदेशालयों, मोहाली के सरकारी कार्यालयों, पंजाब सिविल सचिवालय और एफ.सी.आर. कार्यालयों में आठ सितंबर को पूरी तरह काम बंद रखकर मोहनजीत सिंह (गांव शेरों) के हक में एक दिवसीय भूख हड़ताल की जाएगी।

        काली पट्टी और काले कपड़ों में विरोध: विरोध प्रदर्शन के दौरान सभी कर्मचारी काले कपड़े पहनकर या काले बिल्ले लगाकर सरकार की नीतियों के खिलाफ शांतिपूर्ण एवं अनुशासित ढंग से अपना रोष प्रकट करेंगे।

        रिटायर्ड साथियों की विशेष निगरानी टीम गठित: हड़ताल को सफल बनाने के लिए सेवानिवृत्त कर्मचारियों की एक विशेष टीम बनाई गई है। यह टीम आठ सितंबर को विभिन्न दफ्तरों का दौरा कर स्थिति की समीक्षा करेगी। टीम यह देखेगी कि कोई कर्मचारी दफ्तरों में काम तो नहीं कर रहे।

        अधिकतम भागीदारी की जिम्मेदारी: सभी कर्मचारी संगठनों को अपने-अपने विभागों से अधिक से अधिक कर्मचारियों की भागीदारी सुनिश्चित करने और इस एक्शन को पूरी तरह सफल बनाने का जिम्मा सौंपा गया है।

        सभी एकजुट हैं: प्रधान सुखचैन सिंह खैहरा का कहना है कि अपनी मांगों को लेकर सभी यूनियन एक जुट हैं। उन्होंने कहा कि सरकार ने डीए को लेकर सरकार ने जो बयान दिया उसे भी अभी तक लागू नहीं किया। उन्होंने कहा कि सरकार के मंत्री सिर्फ हवा में बात कर रहे हैं।

    मान भत्ता वर्कर्स साझा मोर्चा की मोहाली में रैली
    मुलाजिम नेता जरमनजीत सिंह ने बताया कि मान भत्ता वर्कर्स साझा मोर्चा द्वारा आशा कार्यकर्ताओं, फैसिलीटेटरों, मिड-डे मील वर्करों और सफाई कर्मचारियों की जायज मांगों की पूर्ति के लिए 8 सितंबर को मोहाली में रैली की जा रही है। उन्होंने कहा कि डेमोक्रेटिक मुलाजिम फेडरेशन उनकी रैली को पूरा समर्थन देगा और पंजाब सरकार से इन कर्मचारियों को तुरंत न्यूनतम वेतन के दायरे में लाने की मांग करेगा।

  • सरकार संग बातचीत से निकली उम्मीद की किरण, किसान आंदोलन जारी रहेगा या खत्म होगा? आज तय करेंगे किसान

    सरकार संग बातचीत से निकली उम्मीद की किरण, किसान आंदोलन जारी रहेगा या खत्म होगा? आज तय करेंगे किसान

    मोहाली
     मोहाली-चंडीगढ़ बार्डर पर पिछली 1 सितंबर से चल रहा किसानों का धरना सोमवार को 7वें दिन में पहुंच गया है। इससे पहले रविवार को पंजाब सरकार के दो मंत्रियों व किसान नेताओं के बीच मीटिंग पंजाब भवन चंडीगढ़ में हुई।

    सूत्रों के अनुसार मीटिंग पाजिटिव रही और कई मांगों को जो पंजाब सरकार के तहत पूरी हो सकती है उनमें से कई को मान लिया गया। सरकार की ओर से कृषि मंत्री गुरमीत सिंह मुंडिया और सेहत मंत्री डॉ. बलबीर सिंह मीटिंग में हाजिर हुए जबकि किसानाें की कई जत्थेबंदियों के नेता पहुंचे।

    सरकार की ओर से किसानों को आश्वासन दिया गया कि एक महीने के अंदर विधान सभा का विशेष सत्र बुला कर पानी के मसले पर बात की जाएगी।बाकी केंद्र से पूरी होने वाली मांगों को लेकर केंद्र से बातचीत का आश्वासन मंत्रियों ने किसान नेताओं को दिया।

    सोमवार को किसान जथेबन्दीयों के नेता आपस में मीटिंग करेंगे। उसके बाद स्टेज से सरकार-किसानों के बीच हुई मीटिंग के बारे बताया जाएगा। इस दौरान पंजाब सरकार का कोई नुमाइंदा जो मांगों काे पंजाब सरकार ने माना है उसका लिखित मसौदा लेकर मोर्चे में पहुंच सकता है। कुल मिला कर आज बार्डर पर लगा किसानों का मोर्चा खत्म हो सकता है।

    राकेश टिकैत पहुंचे मोर्चे में
    किसान नेता राकेश टिकैत रविवार को किसान मोर्चे में पहुंचे। उन्होंने कहा कि किसानों की मांगों को सरकारों को मान लेना चाहिए । उन्होंने कहा कि किसानों को उनकी फसल का सही दाम मिलना चाहिए।

    किसानों की मुख्य मांगें
    किसानों की ओर से अमेरिका के साथ ट्रेड डील न करने, पानी के मुद्दे को लेकर सेक्शन 78,79,80 रद्द करने, किसानों का पूरा कर्ज़ माफ़ करने, फसलों का दाम स्वामीनाथन रिपोर्ट के हिसाब से तय करने, बिजली बिल 2025 और बीज बिल 25 वापस लेने, गन्ने का दाम 500 रुपये प्रति क्विंटल करने, लैंड पुलिंग स्कीम रद्द करने सहित कई अन्य मांगों को लेकर मोहाली में पक्का मोर्चा लगाया गया है।

    किसान नेताओं और प्रशासन से बातचीत के बाद किसानों ने 1 से 7 सितंबर तक मोहाली से चंडीगढ़ जाने वाली मुख्य सड़क की एक तरफ मोहाली बार्डर पर लगाया है। मोर्चे में पंजाब भर से पहुंचे किसानों की ट्रैक्टर-ट्रालियां खड़ी करने में जगह न मिलने कारण किसानों ने सड़क की दूसरी तरफ भी ट्रालियां खड़ी कर दी है। फिलहाल सड़क की एक तरफ से चंडीगढ़ से मोहाली आने जाने वालों के लिए रास्ता खुला हुआ है।

  • मान सरकार की आपत्ति के बीच जस्टिस अश्वनी कुमार मिश्रा ने संभाली चीफ जस्टिस की कमान, गवर्नर हाउस में शपथ

    मान सरकार की आपत्ति के बीच जस्टिस अश्वनी कुमार मिश्रा ने संभाली चीफ जस्टिस की कमान, गवर्नर हाउस में शपथ

    चंडीगढ़ 

    पंजाब सरकार के विरोध के बीच जस्टिस अश्वनी कुमार मिश्रा ने आज पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के ताैर पर शपथ ली। शपथ समारोह पंजाब गवर्नर हाउस में हुआ। पंजाब के गवर्नर गुलाबचंद कटारिया ने मिश्रा को शपथ दिलाई। कार्यक्रम में सीएस केपी सिन्हा, हरियाणा के राज्यपाल असीम घोष और हरियाणा के सीएम नायब सैनी माैजूद रहे। 

    मिश्रा को नियुक्त करने के खिलाफ पंजाब सरकार ने रविवार को कैबिनेट में प्रस्ताव पास किया था। मुख्यमंत्री भगवंत मान की अध्यक्षता में हुई बैठक में मांग की गई कि राज्य सरकार की सहमति लिए जाने तक जस्टिस मिश्रा का शपथग्रहण न करवाया जाए।मुख्यमंत्री कार्यालय के अनुसार कैबिनेट ने आरोप लगाया कि नियुक्ति में तय प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया। राज्य सरकार से राय मांगे जाने के बावजूद उसका जवाब आने से पहले ही नियुक्ति की अधिसूचना जारी कर दी गई। सरकार ने इसे पंजाब की अनदेखी बताया। 

    पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के नए मुख्य न्यायाधीश की नियुक्ति को लेकर मुख्यमंत्री भगवंत मान सरकार ने केंद्र पर संवैधानिक प्रक्रिया की अनदेखी का आरोप लगाया है। रविवार को हुई कैबिनेट बैठक में इस संबंध में केंद्र सरकार के खिलाफ सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित किया गया।

    पंजाब की आम आदमी पार्टी (AAP) सरकार ने जस्टिस मिश्रा की नियुक्ति का विरोध किया था। CM भगवंत मान का तर्क था कि जस्टिस मिश्रा की इस नियुक्ति को लेकर उनसे सहमति नहीं ली गई। उन्होंने शपथग्रहण समारोह रोकने की भी मांग की थी।

    इसी वजह से CM भगवंत मान या पंजाब सरकार का कोई मंत्री शपथग्रहण समारोह में नहीं पहुंचा। हरियाणा के CM नायब सिंह सैनी और राज्यपाल प्रो. असीम कुमार घोष समारोह में मौजूद रहे। एक दिन पहले, रविवार (6 सितंबर) को पंजाब CM भगवंत मान ने इमरजेंसी कैबिनेट मीटिंग बुलाकर जस्टिस अश्वनी कुमार मिश्रा की नियुक्ति के खिलाफ प्रस्ताव पास किया था।

    इस प्रस्ताव में कहा गया था कि पंजाब सरकार की सहमति मिलने तक चीफ जस्टिस को शपथ न दिलाई जाए। पंजाब सरकार ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राज्यपाल गुलाब चंद कटारिया से भी इस मामले में अपील की थी।

    सीएम मान के मुताबिक, केंद्र सरकार ने राज्य सरकार की सहमति लिए बिना पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट के नए चीफ जस्टिस की नियुक्ति कर दी है।

    संवैधानिक नियमों की उल्लंघना
    मान सरकार का कहना है कि यह नियुक्ति तय प्रक्रिया ( मेमोरेंडम आफ प्रोसीजर) और संवैधानिक नियमों की सीधी उल्लंघना है। तय प्रक्रिया के तहत हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस की नियुक्ति में संबंधित राज्य सरकार से राय लेना अनिवार्य होता है। लेकिन पंजाब व हरियाणा के ताजा नियुक्त किए गए चीफ जस्टिस के मामले में ऐसा नहीं किया गया है।

    सीएम मान ने केंद्र और पंजाब के बीच टकराव का कारण रहे पुराने लंबित मामलों 9000 करोड़ के पेंडिग ग्रामीण विकास फंड और बाढ़ राहत की राशि का भी जिक्र किया। साथ ही मान सरकार ने केंद्र पर बीबीएमबी के नियमों में एकतरफा बदलाव की ही तरह अब न्यायपालिका की नियुक्तियों में सीधा दखल देने का आरोप लगाया है।

    केंद्र की दखलअंदाजी बर्दाश्त नहीं
    सीएम मान ने कहा कि केंद्र की यह दखलअंदाजी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। हमारी मांग है कि इस नियुक्ति को तुरंत रोका जाए और संवैधानिक प्रक्रिया का पालन करते हुए सूबे की राय को बनता सम्मान दिया जाए।

    ध्यान रहे कि आज दोपहर के वक्त वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने कहा था कि राज्य सरकार पंजाब के राज्यपाल को भी पत्र लिखकर आग्रह करेगी कि नव नियुक्त चीफ जस्टिस को पद की शपथ न दिलाई जाए क्योंकि यह नियुक्ति पंजाब को अनदेखा करके की गई है।

    राज्य सरकार की राय बाध्यकारी नहीं
    उधर, भारत के अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल सत्य पाल जैन ने पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के रूप में न्यायमूर्ति अश्वनी शर्मा की नियुक्ति पर पंजाब सरकार के विरोध को दुर्भाग्यपूर्ण और अनावश्यक बताया। उन्होंने कहा कि नियुक्ति राष्ट्रपति ने संविधान के अनुच्छेद 217(1) के तहत की है और न्यायाधीशों की नियुक्ति की तय प्रक्रिया का पूरी तरह पालन हुआ है।

    उनके अनुसार, छह अगस्त को सर्वोच्च न्यायालय कॉलेजियम ने नियुक्ति की सिफारिश की थी और 10 अगस्त को पंजाब व हरियाणा सरकारों से राय मांगी गई। हरियाणा ने समय पर राय दे दी, जबकि पंजाब ने अब तक अपनी राय नहीं भेजी। उन्होंने कहा कि राज्य की राय जरूरी है, लेकिन बाध्यकारी नहीं और सरकार के पास वीटो अधिकार नहीं है।

    न्यायपालिका में हस्तक्षेप पर बार नाराज
    परमप्रीत सिंह बाजवा (हैरी) ऑनरेरी सेक्रेटरी पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट बार एसोसिएशन की तरफ से जारी प्रेस विज्ञप्ति में मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति अश्वनी कुमार मिश्रा की नियुक्ति का पंजाब सरकार द्वारा विरोध किए जाने पर कड़ी आपत्ति जताई है। बार एसोसिएशन ने कहा कि न्यायपालिका की स्वतंत्रता संविधान की मूल संरचना का हिस्सा है और कार्यपालिका को न्यायिक नियुक्तियों पर राजनीतिक दबाव नहीं बनाना चाहिए।

    एसोसिएशन के अनुसार, संवैधानिक प्रक्रिया के तहत नियुक्ति होने के बाद राजनीतिक मतभेदों के आधार पर इसे विवाद का विषय बनाना उचित नहीं है। आपात बैठक में कार्यकारिणी ने पंजाब सरकार से नियुक्ति प्रक्रिया का सम्मान करने और हाईकोर्ट की गरिमा बनाए रखने की अपील की। एसोसिएशन ने न्यायपालिका के साथ मजबूती से खड़े रहने का संकल्प लिया।

    पंजाब सरकार ने क्या एतराज जताए, 4 पॉइंट में पढ़िए…

        चीफ जस्टिस की नियुक्ति में स्टैंडर्ड प्रोसीजर फॉलो नहीं: पंजाब के वित्तमंत्री हरपाल चीमा ने कहा कि हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस की नियुक्ति का मामला संवेदनशील है। इस नियुक्ति में स्टैंडर्ड प्रोसीजर (मानक प्रक्रिया) को फॉलो नहीं किया गया। इससे बड़ा सवाल भारतीय जनता पार्टी की केंद्र सरकार के खिलाफ खड़ा होता है। पंजाब को इग्नोर किया गया।

        जस्टिस संधावालिया की नियुक्ति को सहमति नहीं दी थी: पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट के सीनियर मोस्ट जस्टिस जीएस संधावालिया को मध्य प्रदेश हाईकोर्ट का चीफ जस्टिस नियुक्त करने की सिफारिश 11 जुलाई 2024 को सुप्रीम कोर्ट के CJI और पूरे कॉलेजियम ने की थी। इसके बावजूद BJP की केंद्र और मध्य प्रदेश सरकार ने उनकी नियुक्ति को 2 महीने से ज्यादा समय तक मंजूरी नहीं दी। 11 जुलाई को सिफारिश के बाद 17 सितंबर तक उनकी नियुक्ति पर सहमति नहीं दी गई।

        नियुक्ति में राज्य सरकार का व्यू और सहमति जरूरी: चीमा ने कहा- नियुक्ति की प्रक्रिया के मेमोरेंडम के पैरा नंबर 6 में स्पष्ट लिखा है कि जब किसी की सिफारिश होनी है, तो संबंधित राज्य सरकार का व्यू और सहमति लेना बहुत जरूरी है। मध्य प्रदेश ने दो महीने से अधिक समय तक इसे रोक कर रखा। इसके बाद 17 सितंबर 2024 को उनकी नियुक्ति हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस के रूप में की। उनकी नियुक्ति क्यों रोकी, इसका कोई स्पष्ट कारण नहीं बताया गया।

        प्रक्रिया इग्नोर कर जस्टिस मिश्रा की नियुक्ति हुई: दूसरी तरफ जस्टिस अश्वनी कुमार मिश्रा की नियुक्ति का मामला है। 12 अगस्त 2026 को पंजाब के गवर्नर ने मुख्यमंत्री भगवंत मान को भेजे पत्र और केंद्रीय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल के पत्र में भी मेमोरेंडम के पैरा 6 का जिक्र है। इसमें संबंधित राज्य सरकार की राय और सहमति लेना जरूरी बताया गया है। इसके बावजूद केंद्र की BJP सरकार ने इस प्रक्रिया को दरकिनार करते हुए अश्वनी कुमार मिश्रा को पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट का चीफ जस्टिस नियुक्त कर दिया।

     

  • मनी लॉन्ड्रिंग केस में गिरफ्तार संजीव अरोड़ा से आज मिलेंगे CM मान, केजरीवाल भी कर चुके हैं मुलाकात

    मनी लॉन्ड्रिंग केस में गिरफ्तार संजीव अरोड़ा से आज मिलेंगे CM मान, केजरीवाल भी कर चुके हैं मुलाकात

    चंडीगढ़ 
    मुख्यमंत्री भगवंत मान 100 करोड़ रुपए से ज्यादा के मनी लॉन्ड्रिंग मामले में फंसे कैबिनेट मंत्री संजीव अरोड़ा से मिलने सोमवार को गुरुग्राम की भोंडसी जेल जाएंगे। भगवंत मान दूसरी बार मंत्री अरोड़ा से जेल में मिलने जा रहे हैं। 

    संजीव अरोड़ा को ईडी ने 9 मई को गिरफ्तार किया था। उसके बाद से वह जेल में हैं। निचली अदालत उनकी जमानत याचिका खारिज कर चुकी है, जबकि पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में संजीव अरोड़ा की जमानत याचिका पर अभी सुनवाई चल रही है। संजीव अरोड़ा के जेल जाने के बाद भी पंजाब सरकार उनके साथ खड़ी है।

    अरोड़ा चार महीने से जेल में हैं, इसके बावजूद पंजाब सरकार ने उन्हें अभी तक मंत्री पद से नहीं हटाया है। आम आदमी पार्टी और खुद मुख्यमंत्री भगवंत मान लगातार केंद्र सरकार और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पर केंद्रीय एजेंसियों के दुरुपयोग का आरोप लगाते रहे हैं।

    चंडीगढ़ स्थित सरकारी कोठी से हुई थी गिरफ्तारी
    प्रवर्तन निदेशालय ने फर्जी बिलिंग और लेनदेन से जुड़े मामले में छापेमारी के बाद संजीव अरोड़ा को 9 मई को चंडीगढ़ स्थित उनके सरकारी आवास से गिरफ्तार किया था। इस दौरान ईडी ने कई महत्वपूर्ण दस्तावेज जब्त किए थे। गिरफ्तारी और शुरुआती पूछताछ में कोर्ट के आदेशानुसार संजीव अरोड़ा को हरियाणा की भोंडसी जेल में न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। वह वहीं बंद हैं और उनकी कानूनी टीम जमानत के लिए प्रयासरत है।

    भाजपा पर राजनीतिक षड्यंत्र का आरोप
    आम आदमी पार्टी और पंजाब सरकार ने इस पूरी कार्रवाई को भाजपा की साजिश करार दिया है। पार्टी का आरोप है कि केंद्र सरकार केंद्रीय जांच एजेंसियों का गलत इस्तेमाल कर गैर-भाजपा शासित राज्यों के नेताओं और मंत्रियों को निशाना बना रही है।

    मंत्रियों के विभागों में हुआ फेरबदल
    संजीव अरोड़ा के जेल जाने के बाद उनके अधीन आने वाले सभी प्रशासनिक विभाग पंजाब सरकार ने अन्य कैबिनेट मंत्रियों में बांट दिए, ताकि राज्य के विकास कार्य और विभागीय कामकाज प्रभावित न हों। कानूनी और राजनीतिक विवादों के बावजूद पंजाब सरकार ने संजीव अरोड़ा का इस्तीफा नहीं लिया है। वह अभी भी भगवंत मान कैबिनेट में मंत्री हैं।

    मुख्यमंत्री भगवंत मान व आप का समर्थन
    मुख्यमंत्री भगवंत मान पहले भी संजीव अरोड़ा से जेल में जाकर मुलाकात कर चुके हैं। आज की मुलाकात भी इसी सिलसिले की एक कड़ी है। इसके जरिए मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी यह संदेश देना चाहते हैं कि संकट की इस घड़ी में वे अपने नेता के साथ खड़े हैं।

    संजीव अरोड़ा पर मनी लॉन्ड्रिंग का मामला क्या है?
    ED का आरोप है कि 2023-24 में संजीव अरोड़ा की कंपनी ने करीब 157.12 करोड़ रुपए के मोबाइल फोन की बिक्री दिखाई। इनमें 102.50 करोड़ रुपए के मोबाइल फोन UAE की दो कंपनियों को निर्यात किए जाने का दावा किया गया। इन लेन-देन में वास्तविक माल की आपूर्ति के बजाय फर्जी बिल, शेल/डमी कंपनियों और कागजी निर्यात का इस्तेमाल किया गया।

    ED का दावा है कि संजीव अरोड़ा ने फर्जी खरीद के बिल तैयार किए और कागजों में मोबाइल फोन का निर्यात दिखाकर सरकार से GST समेत अन्य फायदे लिए। जांच एजेंसी के अनुसार, करीब 102.50 करोड़ रुपए की रकम अवैध तरीके से कलेक्ट की गई। ED की चार्जशीट में अरोड़ा को इस मामले का ‘किंगपिन’ बताया गया है।

  • पंजाब चुनाव में नशे से लेकर बकाया DA तक पर घमासान, सरकारी कर्मचारियों का मुद्दा रहेगा अहम

    पंजाब चुनाव में नशे से लेकर बकाया DA तक पर घमासान, सरकारी कर्मचारियों का मुद्दा रहेगा अहम

    चंडीगढ़ 

    पंजाब के विधानसभा चुनाव में इस बार नशे, अपराध और भ्रष्टाचार के साथ-साथ सरकारी कर्मचारियों के बकाया डीए का मुद्दा भी खूब उछलेगा। इस मुद्दे पर सियासत खासी तेज है। विरोधी सियासी दल जहां इसे भुनाते हुए खुद को कर्मचारियों की सबसे हितैषी पार्टी बताने की होड़ में हैं। वहीं, मान सरकार इस विवाद को संभालते हुए चुनाव से पहले इसे हर हाल में खत्म कर कर्मचारियों को साधना चाहती है।

    पंजाब में करीब सवा तीन लाख सरकारी कर्मचारी हैं, जबकि चार लाख पेंशनर हैं। सरकारी कर्मचारियों व पेंशनरों का डीए विवाद वर्ष 2016 से लंबित बकाये से जुड़ा है। छठे वेतन आयोग के तहत करीब 14191 करोड़ रुपये की देनदारी थी। सरकार ने फरवरी 2025 में पांच वित्त वर्षों में भुगतान के लिए लिक्विडेशन प्लान बनाया। वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा का दावा है कि इसके तहत सरकार करीब 4500 करोड़ रुपये कर्मचारियों का बकाया चुका चुकी है। अब करीब 9691 करोड़ रुपये बाकी हैं।

    दूसरी ओर, 1 जुलाई 2021 के बाद की डीए/डीआर (महंगाई भत्ता व महंगाई राहत) की किस्तों पर भी विवाद है। हाईकोर्ट ने इसी साल तीन अगस्त को लिक्विडेशन प्लान खारिज कर पूरा बकाया 15 दिन में चुकाने, देरी पर छह प्रतिशत ब्याज और गैर-जरूरी खर्च रोकने का आदेश दिया था। सरकार ने इसे वित्तीय रूप से और वैधानिक तौर पर असंभव बताते हुए सुप्रीम कोर्ट में एसएलपी दायर की है।

    मुद्दा रहेगा असरदार
    यह मुद्दा चुनाव में खासा असरदार रहेगा। राजनीतिक मामलों के जानकार हरबंस सिंह बताते हैं कि यह मामला सीधे पंजाब के करीब सवा सात लाख सरकारी कर्मचारियों, पेंशनरों और उनके परिवारों से जुड़ा है। यह बड़ा और निर्णायक मतदाता वर्ग है। अभी विरोधी दल कर्मचारियों के आंदोलन में उनके साथ खड़े हैं। यदि मान सरकार ने इसे जल्द नहीं निपटाया तो विरोधी पार्टियां निश्चित तौर पर इसे अपने-अपने घोषणा पत्रों में शामिल करेंगी।

     

  • रनवे के पास मंडराए संदिग्ध ड्रोन, अमृतसर आने वाली 7 फ्लाइट्स दिल्ली-चंडीगढ़ भेजी गईं

    रनवे के पास मंडराए संदिग्ध ड्रोन, अमृतसर आने वाली 7 फ्लाइट्स दिल्ली-चंडीगढ़ भेजी गईं

    अमृतसर 
    अमृतसर के श्री गुरु रामदास जी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के रनवे के आसपास रविवार रात संदिग्ध ड्रोन देखे गए। इसके बाद एहतियात के तौर पर अमृतसर आने वाली सात उड़ानों को डायवर्ट किया गया। ड्रोन की गतिविधि सामने आने के बाद सीआईएसएफ, पंजाब पुलिस और अन्य सुरक्षा एजेंसियां सतर्क हो गईं।

    रात करीब 10 बजे एयरपोर्ट के आसपास संदिग्ध ड्रोन उड़ते दिखाई दिए। जानकारी के मुताबिक, ये ड्रोन गांव रुढ़ाला की तरफ से एयरपोर्ट की ओर आते नजर आए और कुछ समय तक रनवे व आसपास के संवेदनशील क्षेत्र में मंडराते रहे। सूचना मिलते ही एयर ट्रैफिक कंट्रोल ने अलर्ट जारी कर दिया।

    पहले जानिए, क्या था पूरा मामला रविवार रात करीब 10 बजे अमृतसर एयरपोर्ट के ऑपरेशनल एरिया में संदिग्ध ड्रोन जैसे उड़ते ऑब्जेक्ट्स दिखाई दिए। कुछ देर तक ऑब्जेक्ट्स रनवे और आसपास के संवेदनशील इलाके में मंडराते रहे। रनवे के आसपास संदिग्ध गतिविधि नजर आते ही एयर ट्रैफिक कंट्रोल ने तुरंत अलर्ट जारी किया। एहतियात के तौर पर अमृतसर आने वाली सात उड़ानों की लैंडिंग रोक दी गई।

    अमृतसर भारत-पाक इंटरनेशनल बॉर्डर से बेहद करीब स्थित होने के कारण इस घटना को सुरक्षा के लिहाज से गंभीर माना गया। अलर्ट मिलते ही सीआईएसएफ, पंजाब पुलिस और अन्य सुरक्षा एजेंसियां सक्रिय हो गईं। एयरपोर्ट परिसर और उसके आसपास सुरक्षा व्यवस्था को और कड़ा कर दिया गया। वहीं, यात्रियों और विमानों की सुरक्षा को देखते हुए एटीसी ने तत्काल कई उड़ानों के रूट बदल दिए।

    अब जानिए, पुलिस की जांच में क्या निकला अमृतसर के थाना राजासांसी पुलिस की जांच में पता चला है कि एयरपोर्ट के पास दिखाई दिया ड्रोन किसी संदिग्ध गतिविधि का हिस्सा नहीं थे। एयरपोर्ट से कुछ दूरी पर स्थित एक गांव में खेल टूर्नामेंट आयोजित किया जा रहा था। टूर्नामेंट की वीडियोग्राफी करने के लिए एक व्यक्ति द्वारा ड्रोन उड़ाया गया था।

    SHO बोले- पाबंदी के बावजूद कैसे उड़ाए, जांच कर रहे इस बारे में थाना राजासांसी के एसएचओ गुरप्रीत सिंह ने बताया कि ड्यूटी अधिकारी एएसआई निरंजन सिंह ने एयरपोर्ट के बाहरी क्षेत्र में पहुंचकर मामले की जांच की। जांच के दौरान इसकी पुष्टि हुई। उन्होंने कहा कि एयरपोर्ट की सुरक्षा को देखते हुए जिला प्रशासन द्वारा एयरपोर्ट के करीब 8 किलोमीटर के दायरे में ड्रोन उड़ाने पर प्रतिबंध लगाया गया है। इसके बावजूद ड्रोन उड़ाए जाने के मामले में पुलिस द्वारा आवश्यक कार्रवाई की जा रही है।

    दिल्ली और चंडीगढ़ डायवर्ट की गईं उड़ानें 
    कुआलालंपुर से अमृतसर आ रही मलेशिया एयरलाइंस की उड़ान एमएच-118 को दिल्ली डायवर्ट किया गया। शारजाह से आ रही इंडिगो की उड़ान 6ई-1428 और एयर इंडिया एक्सप्रेस की उड़ान आईएक्स-138 को भी दिल्ली भेजा गया।

    मुंबई से अमृतसर आ रही इंडिगो की उड़ान 6ई-5028 और दिल्ली से आने वाली इंडिगो की उड़ान 6ई-2045 को चंडीगढ़ भेजा गया। वहीं दिल्ली से अमृतसर आ रही एयर इंडिया की उड़ान एआई-479 और एआई-855 को वापस दिल्ली भेज दिया गया। 

    ड्रोन की तलाश में सुरक्षा एजेंसियां सक्रिय
    ड्रोन दिखाई देने की सूचना के बाद एयरपोर्ट परिसर और आसपास के क्षेत्र में सुरक्षा बढ़ा दी गई। सुरक्षा एजेंसियों ने ड्रोन की गतिविधि का पता लगाने के लिए निगरानी शुरू कर दी। सीमा क्षेत्र के नजदीक एयरपोर्ट की संवेदनशीलता को देखते हुए मामले को गंभीरता से लिया जा रहा है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि ड्रोन कहां से आए और उनका उद्देश्य क्या था। 

  • पंजाब में बदला पंथक वोट का मिजाज, अकाली दल कमजोर; BJP से भी नहीं बन रही बात

    पंजाब में बदला पंथक वोट का मिजाज, अकाली दल कमजोर; BJP से भी नहीं बन रही बात

     जालंधर 

    पंजाब में अकाली दल के सामने पंथक वोट बैंक को एकजुट करने की बड़ी चुनौती है। 2024 के लोकसभा चुनाव में पार्टी का मत प्रतिशत घटकर महज 13.42 फीसदी रह गया, जबकि 2022 के विधानसभा चुनाव में उसे केवल तीन सीटें मिली थीं। यह गिरावट 2017 के बाद से लगातार जारी है, जिससे क्षेत्रीय राजनीति में उसकी पकड़ कमजोर हुई है। पार्टी को अब अपने बिखरे हुए राजनीतिक आधार को फिर से संगठित करना होगा।

    अकाली दल को 2014 में 26.30 फीसदी और 2019 में 27.45 फीसदी वोट मिले थे लेकिन 2024 में यह आंकड़ा 13.42 फीसदी पर आ गया जिससे पार्टी सिर्फ बठिंडा लोकसभा सीट जीत सकी। इस बीच, सिमरनजीत सिंह मान के नेतृत्व वाले शिरोमणि अकाली दल (अमृतसर) को 2024 में करीब 3.82 फीसदी वोट मिले। 

    निर्दलीय उम्मीदवार अमृतपाल सिंह और सरबजीत सिंह खालसा की जीत ने भी पंथक वोटों के बिखराव को दर्शाया। इन नतीजों से स्पष्ट है कि अकाली दल से दूर हुआ पंथक वोट कांग्रेस, आम आदमी पार्टी या भाजपा के पास पूरी तरह नहीं गया बल्कि इसका एक हिस्सा नई पंथक राजनीति की ओर मुड़ गया है। सुखबीर बादल के नेतृत्व वाला अकाली दल अपने पुराने संगठन को बचाने का प्रयास कर रहा है। वहीं पुनर्सुरजीत धड़ा और वारिस पंजाब दे जैसे समूह भी अपनी पहचान बना रहे हैं। यह स्थिति अकाली राजनीति के सामने विरोधी दलों से भी बड़ी चुनौती पेश करती है।

    ऐतिहासिक पृष्ठभूमि और वर्तमान संकट
    1966 में नए पंजाब के गठन के बाद अकाली दल ने क्षेत्रीय राजनीति में मजबूत जगह बनाई। पार्टी ने 1977, 1985, 1997, 2007 और 2012 में सत्ता हासिल की। हालांकि, 2017 के बाद से इसके चुनावी प्रदर्शन में लगातार गिरावट आई है। 2022 के विधानसभा चुनाव में पार्टी तीन सीटों तक सिमट गई। 2024 के लोकसभा चुनाव में मत प्रतिशत में भारी कमी ने इस संकट को और गहरा किया है।

    नई पंथक राजनीति की ओर गया वोट
    अकाली दल का वोट बैंक पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है। इसका एक बड़ा हिस्सा अब अलग-अलग पंथिक राजनीतिक धाराओं में बंट गया है। सिमरनजीत सिंह मान के नेतृत्व वाले शिरोमणि अकाली दल (अमृतसर) को 2024 में 3.82 फीसदी वोट मिले। निर्दलीय उम्मीदवार अमृतपाल सिंह और सरबजीत सिंह खालसा की जीत भी इसी बदलाव का संकेत है। यह दर्शाता है कि पंथिक वोट राष्ट्रीय दलों के बजाय नई पंथक राजनीति की ओर भी गया है।

    पुराने गठबंधन की चर्चाएं
    भाजपा और अकाली दल के पु
    राने गठबंधन को लेकर पंजाब की राजनीति में चर्चाएं जारी हैं। 2024 के लोकसभा चुनाव में भाजपा को 18.56 फीसदी और अकाली दल को 13.42 फीसदी वोट मिले थे। दोनों के मत प्रतिशत को जोड़ने पर यह आंकड़ा करीब 31.98 फीसदी होता है। हालांकि, वोटों का शत-प्रतिशत हस्तांतरण हमेशा संभव नहीं होता है। सितंबर 2026 तक भाजपा ने सभी 117 विधानसभा सीटों पर अकेले चुनाव लड़ने की बात कही है। 2027 के चुनाव से पहले अकाली दल को अपने बिखरे आधार को एकजुट करना होगा।

  • विधानसभा चुनाव से पहले पंजाब में पूरी होगी जातिगत जनगणना, 40 सवालों के जरिए जुटेगा डेटा

    विधानसभा चुनाव से पहले पंजाब में पूरी होगी जातिगत जनगणना, 40 सवालों के जरिए जुटेगा डेटा

    चंडीगढ़
     पंजाब में विधानसभा चुनाव से ठीक पहले जनगणना का काम पूरा होगा। केंद्र सरकार की ओर से तय कार्यक्रम के अनुसार Punjab Census News का मुख्य चरण एक दिसंबर 2026 से चार जनवरी 2027 तक चलेगा। इससे पहले लोगों को अपनी जानकारी स्वयं दर्ज कराने का अवसर दिया जाएगा। इसके लिए 16 से 30 नवंबर 2026 तक स्व-गणना की सुविधा उपलब्ध रहेगी।

    मुख्य चरण के बाद पांच से नौ जनवरी 2027 तक दोबारा जांच का काम किया जाएगा। इस बार की जनगणना कई मायनों में महत्वपूर्ण होगी। लोगों से कुल 40 सवाल पूछे जाएंगे। इनमें परिवार और आवास से जुड़ी जानकारी के साथ जाति, धर्म, शिक्षा, रोजगार, भाषा, प्रवास और कोविड-19 टीकाकरण सहित कई जानकारियां दर्ज की जाएंगी।

    इस दौरान 40 सवाल पूछे जाएंगे, जिसमें जाति धर्म, कोविड वैक्सीन लगाने से लेकर सारी जानकारी शामिल रहेगी। केंद्र सरकार की राजनीतिक मामलों की कैबिनेट समिति (CCPA) के फैसले के तहत इस बार जनगणना में जातिगत जनगणना को भी शामिल किया गया है। पंजाब में होने वाली जनगणना में भी जाति संबंधी जानकारी दर्ज की जाएगी।

    पंजाब सरकार के समन्वय से पूरा होगा काम

    पूरी जनगणना को डिजिटल बनाने के लिए मोबाइल एप तैयार किए गए हैं। केंद्र सरकार ने इस महाअभियान के लिए 11,718.24 करोड़ का बजट मंजूर किया है। जनगणना का काम पंजाब सरकार के समन्वय से पूरा किया जाएगा।

    केंद्र सरकार की राजनीतिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति के फैसले के बाद इस बार जातिगत आंकड़े भी जुटाए जाएंगे। ऐसे में पंजाब में भी लोगों से उनकी जाति से संबंधित जानकारी ली जाएगी।

    2011 की जनगणना 2.77 करोड़ आबादी थी

    2011 की जनगणना के अनुसार पंजाब की कुल आबादी 2.77 करोड़ थी, जिसमें 1.46 करोड़ पुरुष और 1.31 करोड़ महिलाएं थीं। राज्य की दशकीय जनसंख्या वृद्धि दर 13.89% रही, जबकि जनसंख्या घनत्व 551 व्यक्ति प्रति वर्ग किलोमीटर और लिंगानुपात 895 महिलाएं प्रति 1000 पुरुष था।

    पंजाब की कुल साक्षरता दर 75.84% थी, जिसमें पुरुष साक्षरता 80.44% और महिला साक्षरता 70.73% रही। राज्य की 62.52% आबादी ग्रामीण क्षेत्रों में, जबकि 37.48% आबादी शहरी क्षेत्रों में रहती थी।

    पहचान और परिवार से जुड़े 12 सवाल
    जनगणना में पहचान और परिवार से जुड़े 12 सवाल होंगे। इनमें व्यक्ति का नाम, लिंग, जन्मतिथि, वैवाहिक स्थिति, धर्म, अनुसूचित जाति या अनुसूचित जनजाति तथा जाति, माता-पिता का नाम आदि की जानकारी ली जाएगी। इसके अलावा परिवार के सदस्यों से संबंधित आवश्यक विवरण भी दर्ज किए जाएंगे।

    शिक्षा और भाषा से जुड़े सवालों में व्यक्ति की साक्षरता के साथ डिजिटल साक्षरता की जानकारी भी ली जाएगी। इसके अलावा उच्चतम शैक्षणिक योग्यता और अध्ययन की शाखा से संबंधित जानकारी दर्ज होगी। रोजगार की स्थिति जानने के लिए पिछले एक वर्ष में काम किया या नहीं, आर्थिक गतिविधि की श्रेणी, व्यवसाय, उद्योग या व्यापार का प्रकार तथा काम की जगह तक पहुंचने के लिए की जाने वाली यात्रा से जुड़े सवाल पूछे जाएंगे।

    बच्चों और प्रवास का भी बनेगा आंकड़ा
    जन्म और प्रवास से संबंधित जानकारी में वर्तमान में जीवित बच्चों की संख्या, अब तक जन्मे कुल बच्चों की संख्या और पिछले एक वर्ष में जन्मे बच्चों की संख्या दर्ज की जाएगी। इससे राज्य में जन्म दर और आबादी में हो रहे बदलाव की तस्वीर सामने आएगी।

    जनगणना के दौरान आधार संख्या, मतदाता पहचान पत्र संख्या, पासपोर्ट संख्या और वाहन चलाने के लाइसेंस की उपलब्धता से संबंधित जानकारी भी मांगी जाएगी। इसके साथ कुल बैंक खातों, मोबाइल नंबर और कोविड-19 टीकाकरण की जगह की जानकारी भी दर्ज की जाएगी।

    पंजाब सरकार से होगा तालमेल
    पूरे अभियान को डिजिटल तरीके से संचालित करने की तैयारी है। इसके लिए मोबाइल आधारित अनुप्रयोग तैयार किए गए हैं। केंद्र सरकार ने जनगणना के लिए 11,718.24 करोड़ रुपये का बजट मंजूर किया है। पंजाब में जनगणना का काम राज्य सरकार के समन्वय से पूरा किया जाएगा।

    यूपी समेत इन राज्यों में शुरू होने वाली है जनगणना

    लद्दाख के बाद अब चार अन्य राज्यों में 1 दिसंबर से जनगणना 2027 की शुरुआत होने जा रही है। गोवा, उत्तर प्रदेश, पंजाब और उत्तराखंड के कुछ हिस्सों में जनसंख्या की गणना एक दिसंबर, 2026 से चार जनवरी, 2027 तक की जाएगी। अगले साल की शुरुआत में जिन राज्यों में चुनाव होने की संभावना है, वहां जनगणना की यह प्रक्रिया पहले शुरू की जा रही है।
    16 नवंबर से खुल जाएगी स्व-गणना

    भारत के महापंजीयक (RGI) एवं जनगणना आयुक्त मृत्युंजय कुमार नारायण ने राजपत्र अधिसूचना में कहा कि इन क्षेत्रों के नागरिक 16 नवंबर से 30 नवंबर 2026 तक स्व-गणना का विकल्प अपना सकते हैं। अधिसूचना में कहा गया है, ''गोवा, उत्तर प्रदेश, पंजाब और उत्तराखंड राज्य के बर्फबारी से प्रभावित क्षेत्रों को छोड़कर बाकी इलाकों में जनसंख्या की जनगणना एक दिसंबर 2026 से चार जनवरी 2027 तक की जाएगी। इसके बाद पांच जनवरी 2027 से नौ जनवरी 2027 तक पुनरीक्षण चरण आयोजित किया जायेगा।'
    लद्दाख और जम्मू-कश्मीर में बर्फ वाले इलाकों में चल रही जनगणना

    इसमें कहा गया कि गोवा, उत्तर प्रदेश, पंजाब और उत्तराखंड के बर्फबारी से प्रभावित क्षेत्रों को छोड़कर राज्य के अन्य हिस्सों के लिए जनगणना 2027 की संदर्भ तिथि पांच जनवरी 2027 की रात 12 बजे होगी। इसके अलावा केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख और केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर के बर्फ से ढके गैर-समकालिक क्षेत्रों तथा हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड के बर्फ से ढके गैर-समकालिक क्षेत्रों के लिए संदर्भ तिथि एक अक्टूबर 2026 की रात 12 बजे होगी।'' पिछले महीने जारी एक राजपत्र अधिसूचना के अनुसार, लद्दाख तथा जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड के बर्फ से ढके गैर-समकालिक क्षेत्रों में जनसंख्या की गणना एक सितंबर से 30 सितंबर तक की जाएगी।
    मई में खत्म हो रहा इन विधानसभाओं का कार्यकाल

    जून 2025 को जारी एक सरकारी बयान में कहा गया था कि लद्दाख, केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर के बर्फ से ढके गैर-समकालिक क्षेत्रों तथा हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड के बर्फ से ढके गैर-समकालिक क्षेत्रों को छोड़कर देश के बाकी हिस्सों के लिए संदर्भ तिथि एक मार्च 2027 होगी। गोवा, मणिपुर, पंजाब, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड की विधानसभा का कार्यकाल मई 2027 तक समाप्त हो जायेगा।

    एक अधिकारी ने कहा कि बड़ी संख्या में सरकारी कर्मचारी, मुख्य रूप से शिक्षक, जनगणना और चुनावी कार्यों में लगे हुए हैं। ऐसे में इन दोनों प्रक्रियाओं को एक साथ संचालित करना मुश्किल हो जाता है। शनिवार को आरजीआई द्वारा जारी एक अन्य अधिसूचना में कहा गया कि केंद्र सरकार ने मणिपुर में जनगणना 2027 के लिए मकान-सूचीकरण का कार्य भी स्थगित कर दिया है। स्वतंत्रता के बाद होने वाली आठवीं जनगणना दो चरणों में कराई जा रही है-पहले चरण को मकान-सूचीकरण और आवास जनगणना कहा जाता है, जबकि दूसरे चरण को जनसंख्या की गणना कहा जाता है।

    2011 में साक्षरता 75.84% थी
    पंजाब में पिछली जनगणना वर्ष 2011 में हुई थी। उस समय राज्य की आबादी करीब 2.77 करोड़ थी। इसमें 1.46 करोड़ पुरुष और 1.31 करोड़ महिलाएं थीं। दशकीय जनसंख्या वृद्धि दर 13.89 प्रतिशत रही थी। जनसंख्या घनत्व 551 व्यक्ति प्रति वर्ग किलोमीटर और लिंगानुपात 895 महिलाएं प्रति 1000 पुरुष था।

    वर्ष 2011 में पंजाब की साक्षरता दर 75.84 प्रतिशत थी। पुरुष साक्षरता 80.44 प्रतिशत और महिला साक्षरता 70.73 प्रतिशत रही। राज्य की 62.52 प्रतिशत आबादी ग्रामीण और 37.48 प्रतिशत आबादी शहरी क्षेत्रों में रहती थी। नई जनगणना से पंजाब की वर्तमान आबादी, सामाजिक संरचना, जातिगत स्थिति, शिक्षा, रोजगार और अन्य महत्वपूर्ण आंकड़ों की नई तस्वीर सामने आएगी। 

  • सोशल मीडिया दोस्ती का खौफनाक अंजाम, मोहाली की ब्लॉगर ने गन पॉइंट पर दुष्कर्म का लगाया आरोप

    सोशल मीडिया दोस्ती का खौफनाक अंजाम, मोहाली की ब्लॉगर ने गन पॉइंट पर दुष्कर्म का लगाया आरोप

    मोहाली 

    मोहाली की सोशल मीडिया ब्लॉगर एवं बिजनेस वुमन के रेप केस की शिकायत कॉपी सामने आई है।‌ शिकायत के मुताबिक आरोपी सोशल मीडिया के जरिए उसके संपर्क में आया और धीरे-धीरे विश्वास जीतकर नजदीकियां बढ़ाईं। इसके बाद उसके फ्लैट पर आया और गन पॉइंट पर रेप किया।

    ब्लॉगर के बताया कि आरोपी ने अश्लील वीडियो-फोटो वायरल करने की धमकी देकर उसे ब्लैकमेल किया। इसके बाद उसने पुलिस को शिकायत दी। शनिवार (5 सितंबर) को ब्लॉगर मोहाली कोर्ट में पेश हुई। उसने पुलिस जांच पर नाराजगी जताई है।

    उसका आरोप है कि अदालत के निर्देशों के बावजूद जांच के दौरान उससे संपर्क नहीं किया गया। ब्लॉगर का कहना है कि उसे कानून और न्याय व्यवस्था पर पूरा भरोसा है। ब्लॉगर के वकील एचएस धनोआ ने कहा कि हमने केस की अनट्रेस कॉपी लेने के लिए अप्लाई किया है। अब इस मामले में कानूनी जंग लड़ेंगे।

    शिकायत में सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर की 5 अहम बातें…

        सोशल मीडिया पर हुई दोस्ती: पुलिस को दी शिकायत में पीड़िता ने बताया कि मैं बिजनेस वुमन और सोशल मीडिया ब्लॉगर हूं। आरोपी गुरविंदर सिंह उर्फ गुरी चहल मुझसे सोशल मीडिया पर संपर्क में आया था। मेरे ब्लॉग में धीरे-धीरे दिलचस्पी बढ़ाकर मेरे से नजदीकियां बढ़ाईं और विश्वास जीता।

        ऑर्डर देने के बहाने आकर रेप किया: 27 नवंबर 2025 को आरोपी सामान ऑर्डर करने के बहाने मेरे फ्लैट पर आया। इसके बाद मेरे इनकार करने के बाद आरोपी ने गन पॉइंट मेरे से जबरदस्ती शारीरिक संबंध बनाए। विरोध करने पर उसने मुझे व मेरे परिवार को जान से मारने की धमकियां दीं। इसके बाद मैं डर गई। मैंने इस संबंधी शिकायत दर्ज नहीं करवाई। मैंने उससे अपने आप को बहुत दूर कर लिया।

        अश्लील वीडियो वायरल करने की धमकी: 2 महीने बाद जनवरी 2026 में आरोपी ने मुझे दोबारा फोन व स्नैपचैट पर ब्लैकमेल करना शुरू कर दिया। साथ ही धमकी दी कि उसके पास मेरे अश्लील वीडियो व फोटो हैं। अगर मैंने उसकी बातें नहीं मानीं तो उसे वायरल कर देगा।

        वर्क प्लेस पर पहुंचा, गालियां दीं: इसके बाद आरोपी अपने अज्ञात साथियों, ड्राइवरों व बॉडीगार्ड व सरकारी सिक्योरिटी मुलाजिमों सहित मेरे वर्क प्लेस पर आया। आरोपी ने मुझे गालियां निकालीं, डराया और जान से मारने की धमकियां दीं।

        दोबारा फिर तंग किया तो पहुंची पुलिस तक: 25 अप्रैल को आरोपी ने स्नैपचैट पर कॉल कर मुझे अपने फ्लैट पर जाने व शारीरिक संबंध बनाने के लिए मजबूर किया। साथ ही उसने अपने पुराने आपराधिक रिकॉर्ड, गैंगस्टरों से संबंधी धमकी दी। इसके बाद उसी दिन शाम को आरोपी ने मेरी ईमेल आईडी पर धमकी भरे अश्लील मैसेज भेजे। इसके बाद मैंने हिम्मत कर अपनी सारी बात वकील को बताई। इसलिए उसके खिलाफ बनती कार्रवाई की जाए।

    जांच की सर्टिफाइड कॉपी की मांग की पुलिस ने 24 जुलाई को अदालत में अनट्रेस रिपोर्ट दाखिल की थी। पुलिस के अनुसार, पीड़िता अदालत में बयान दर्ज करवाने के लिए पेश नहीं हो रही थी। अब पीड़िता ने अदालत पहुंचकर अपने बयान दर्ज करवाए हैं। उसके वकील धनौआ के अनुसार, पुलिस जांच की सर्टिफाइड कॉपी मांगी गई है। कॉपी मिलने के बाद अनट्रेस रिपोर्ट पर जवाब दाखिल किया जाएगा। मामले की अगली सुनवाई 19 सितंबर को होगी।

    कोर्ट ने जून में गाड़ी रिलीज करने के दिए थे आदेश मामले में अदालत ने 16 जून को उस गाड़ी को रिलीज करने के आदेश जारी किए थे, जिसे पुलिस ने केस प्रॉपर्टी बनाया था। मोहाली पुलिस की ओर से अदालत में दलील दी गई थी कि जांच के दौरान अब इस गाड़ी की जरूरत नहीं है। अदालत ने शर्तों के साथ गाड़ी रिलीज करने के आदेश दिए थे।

    इसमें कहा गया था कि जांच अधिकारी या अदालत जब भी गाड़ी पेश करने को कहे, उसे तत्काल पेश करना होगा। इसके अलावा गाड़ी की ऑनरशिप, रंग या किसी अन्य तरह का बदलाव नहीं किया जा सकेगा।

  • चंडीगढ़ में सुखना चो पर बनेगा हाईलेवल ब्रिज, निर्माण के दौरान एक साल तक ट्रैफिक डायवर्ट

    चंडीगढ़ में सुखना चो पर बनेगा हाईलेवल ब्रिज, निर्माण के दौरान एक साल तक ट्रैफिक डायवर्ट

    पंचकूला
     चंडीगढ़ के सेक्टर 26 स्थित बापूधाम कॉलोनी-शास्त्री नगर के सुखना चो पर बने कॉज-वे को हाई लेवल ब्रिज बनाने के पहले चरण की बिड प्रक्रिया पूरी कर ली गई है. हालांकि, चंडीगढ़ प्रशासन के इंजीनियरिंग विंग को फिलहाल प्राप्त हुई बिड के मूल्यांकन का कार्य पूरा करना है. इसके बाद ही प्रक्रिया आगे बढ़ सकेगी. जबकि सभी प्रक्रियाएं पूरी होने के बाद भी इस हाई लेवल ब्रिज के लिए लोगों को और एक साल का इंतजार करना होगा. वहीं, लोगों ने ईटीवी भारत से बातचीत में चंडीगढ़ प्रशासन के खिलाफ रोष प्रकट करते हुए कहा कि वे बीते कई वर्षों से ऐसे आश्वासन सुनते आ रहे हैं। 

    नाजुक पुल से गुजरते हैं हजारों वाहन: दरअसल, रोजाना हजारों गाड़ियां इस नाजुक पुल से आवाजाही करती हैं. क्योंकि इस रास्ते से होकर चंडीगढ़ के कई नामचीन कॉन्वेंट स्कूल, गोल्फ क्लब, मुख्य पर्यटन स्थल सूखना झील, हाईकोर्ट, हरियाणा व पंजाब विधानसभा, कैपिटल कॉम्प्लेक्स, चंडीगढ़ पुलिस मुख्यालय, पंजाब पुलिस मुख्यालय, पीजीआई, रोज गार्डन समेत अन्य कई महत्वपूर्ण कार्यालय, पर्यटन स्थल व मुख्य मार्केट हैं. यही कारण है कि इस मार्ग पर बापूधाम-शास्त्री नगर के नाजुक कॉज-वे से रोजाना हजारों वाहनों में लाखों लोग आवाजाही करते हैं. पंचकूला से लोग चंडीगढ़ में प्रवेश के लिए इस मार्ग का इस्तेमाल करते हैं, मनीमाजरा से भी सुबह से रात तक आवाजाही बनी रहती है. इसी तरह चंडीगढ़ से मनीमाजरा और पंचकूला जाने वाले वाहन चालक भी इसी मार्ग का इस्तेमाल करते हैं। 

    जानिए लोगों ने क्या कहा:

        इस पुल से रोजाना आवाजाही करने वाले मनीमाजरा निवासी जय धीमान ने बताया कि, "सबसे अधिक परेशानी बरसात के दिनों में होती है. जल भराव की समस्या होने से इस मार्ग पर पुल को पार करना एक चुनौती बना रहता है. कुछ समय पहले यह पुल टूट भी गया था. पुल पर जलभराव होने से लोगों को वैकल्पिक मार्गों का इस्तेमाल करने को मजबूर होना पड़ता है, जिस कारण उनका सफर काफी लंबा हो जाता है. रोड छोटा होने से हादसे होते रहते हैं। 
        वहीं, इस मार्ग से रोजाना आवाजाही करने वाले अमित ने कहा कि, "सबसे अधिक परेशानी सूखना झील से पानी छोड़े जाने के दौरान होती है. क्योंकि पानी का तेज बहाव पुल से ओवरफ्लो होता है. इस कारण एक-एक किलोमीटर का ट्रैफिक जाम लग जाता है. लेकिन जब पानी का बहाव काफी तेज हो तो पुलिस-प्रशासन मार्ग बंद कर देता है, जिससे लोगों को काफी घूमकर जाना पड़ता है. ऐसे में कुछ मिनटों का सफर ही करीब एक घंटे का हो जाता है. क्योंकि वैकल्पिक मार्गों पर पहले ही रोजाना आवाजाही करने वाला काफी ट्रैफिक रहता है. कई बार इस मार्ग पर एम्बुलेंस और आपात स्थिति के दौरान अन्य कई वाहन फंसते हैं. बापूधाम-शास्त्री नगर कॉज-वे के पास रात के समय स्ट्रीट लाइट काम नहीं करती. ऐसे में अंधेरा होने के चलते जानलेवा हादसे होने का खतरा बना रहता है, क्योंकि इस पुल से कई बार गाड़ियां नीचे गिर चुकी हैं. इस मार्ग से आवाजाही करने वाले वाहन चालकों/यात्रियों को अपनी सुरक्षा का ध्यान खुद ही रखना पड़ता है. नतीजतन, हर कोई सँभल संभल कर पुल से निकलता है, क्योंकि मोड़ काफी घुमावदार होने लेकिन सड़क संकीर्ण होने से हादसे होने का खतरा बना रहता है। 

    निर्माण शुरू होने से पहले ट्रैफिक प्लान जरूरी
    पुल का निर्माण शुरू होने में करीब एक महीने का समय लग सकता है। निर्माण के दौरान सड़क बंद रहने से पंचकूला, मनीमाजरा और आईटी पार्क की ओर से आने-जाने वाले वाहनों पर असर पड़ेगा। पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट, हरियाणा सिविल सचिवालय, सुखना झील और चंडीगढ़ के उत्तरी सैक्टरों की ओर जाने वाले लोगों को भी वैकल्पिक रास्तों का इस्तेमाल करना पड़ेगा।

    यूटी के मुख्य अभियंता सीबी ओझा ने बताया कि ट्रैफिक पुलिस समेत संबंधित विभागों के साथ चर्चा कर वैकल्पिक ट्रैफिक प्रबंधन योजना तैयार की जाएगी। उन्होंने कहा कि मनीमाजरा-सैक्टर 26 लिंक बंद होने के बाद मध्य मार्ग पर ट्रैफिक का बड़ा दबाव आ सकता है।

    किशनगढ़ रोड को भी विकल्प के तौर पर देखा जा रहा
    विभाग के अनुसार किशनगढ़ से सुखना चो के किनारे जाने वाली सड़क का इस्तेमाल वैकल्पिक मार्ग के रूप में किया जा सकता है। इसके अलावा सैक्टर 26 से भी ट्रैफिक डायवर्ट करने पर विचार किया जा रहा है। हालांकि गांव से गुजरने वाली संकरी सड़क पर अतिरिक्त ट्रैफिक संभालने की क्षमता सीमित है।

    फिलहाल निर्माण के दौरान लागू होने वाली अंतिम ट्रैफिक प्रबंधन योजना तैयार नहीं हुई है। ऐसे में रोजाना पंचकूला और चंडीगढ़ के बीच सफर करने वाले लोगों को अगले एक साल तक ट्रैफिक जाम की समस्या का सामना करना पड़ सकता है।

        वहीं, स्थानीय निवासी अमन त्रिपाठी ने कॉज-वे के हाई लेवल ब्रिज में बदलने की बात पर मायूसी प्रकट करते कहा कि, "मैं सालों से ऐसा कुछ सुनते आ रहा हूं, लेकिन कभी कुछ नहीं हुआ. कॉज-वे पर लाइटिंग की कोई व्यवस्था नहीं है, जबकि हर साल आम लोगों को समस्याओं का सामना करना पड़ता है. स्थानीय या आसपास के लोग रोजाना कई तरह की मुश्किल झेलते हैं लेकिन हरियाणा से लोगों के आने के कारण ट्रैफिक अधिक होने से परेशानी कई गुणा बढ़ जाती है. ऐसे में लोगों को दूसरे मार्गों से होकर निकलना पड़ता है, जिससे दूरी अधिक बढ़ जाती है और समय भी काफी खराब होता है. हम सालों से इस पुल को देख रहे हैं, जो तीन-चार बार टूट चुका है. लेकिन हर बार काम चलाऊ मरम्मत कर दी जाती है.यहां कई हादसे हुए और कई होते होते रह गए, अब पुल के किनारे ग्रिल लगाई गई हैं. लेकिन जब कभी सूखना झील से पानी छोड़ा जाता है तो तेज बहाव सबकुछ साथ बहाकर ले जाता है। 

    17 करोड़ रुपये का टेंडर जारी : प्रशासन के इंजीनियरिंग विभाग ने बापूधाम-शास्त्री नगर कॉज-वे को हाई लेवल ब्रिज में बदलने के लिए करीब 17 करोड़ रुपये का टेंडर जारी किया गया. इसके अंतर्गत प्रशासन को अलग अलग बिड प्राप्त हुई हैं, जिनके मूल्यांकन का की प्रक्रिया पूरी किया जाना शेष है. चंडीगढ़ प्रशासन के चीफ इंजीनियर सीबी ओझा ने कहा कि टेंडर प्रक्रिया पूरी होने के बाद कॉज-वे पर हाई लेवल ब्रिज के निर्माण में करीब नौ महीने से एक वर्ष का समय लगेगा। 

    500 मीटर लंबा और 27 मीटर चौड़ा: बापूधाम-शास्त्री नगर कॉज-वे पर बनने वाला प्रस्तावित पुल करीब 500 मीटर लंबा और 27 मीटर चौड़ा रहेगा. यह फोर लेन होगा और दोनों ओर साइकिल ट्रैक व पैदल पथ भी बनाए जाएंगे. यह पुल सेक्टर 26 टी-पॉइंट को मनीमाजरा के शास्त्री नगर से जोड़ेगा. इस जंक्शन को करीब दो मीटर ऊंचा रखे जाने का प्रस्ताव है. साथ ही स्टॉर्म वाटर लाइन और पानी की पाइपलाइन शिफ्ट होगी. यहां ईडब्ल्यूएस लाइट पॉइंट के समीप ट्रांसपोर्ट चौक के लिए बाईं ओर का मार्ग वर्तमान की तरह ही रहेगा. वहीं, सड़क चौड़ीकरण और परियोजना के निर्माण के लिए 27 पेड़ भी काटे जा सकते हैं। 

    इन तीन कॉज-वे को लेकर तैयारी नहीं: चंडीगढ़ के गांव किशनगढ़ के कॉज-वे, इंडस्ट्रियल एरिया फेज-1 के कॉज-वे और मक्खनमाजरा कॉज-वे के लिए फिलहाल चंडीगढ़ प्रशासन की कोई मजबूत तैयारी नहीं है. इन कॉज-वे को हाई लेवल ब्रिज में बदलने का प्रशासन का फिलहाल कोई इरादा नहीं है. नतीजतन इन तीनों कॉज-वे पर तेज बारिश के दौरान सुखना लेक के फ्लड गेट खुलने पर इन मार्गों को बंद किए जाने की स्थिति बनती रहेगी. हालांकि, बापूधाम-शास्त्री नगर कॉज-वे पर भी फिलहाल और एक वर्ष यह स्थिति बनी रह सकती है, जब तक हाई लेवल ब्रिज का निर्माण कार्य पूरा नहीं हो जाता।