Category: राज्य

  • -बैंकिंग, इंश्योरेंस, फार्मा और मेडिकल से लेकर खेल पत्रकारिता तक के विकल्पों की मिली जानकारी

    -बैंकिंग, इंश्योरेंस, फार्मा और मेडिकल से लेकर खेल पत्रकारिता तक के विकल्पों की मिली जानकारी

    ग्रेटर नोएडा
    उत्तर प्रदेश इंटरनेशनल ट्रेड शो का मंगलवार को समापन हुआ तो कारोबार और निवेश के साथ युवाओं के लिए खुली करियर की नई संभावनाएं भी इसकी बड़ी उपलब्धि के रूप में सामने आईं। एक्सपो में आए युवाओं को सिर्फ उत्पादों और कंपनियों की जानकारी नहीं मिली, बल्कि विभिन्न विश्वविद्यालयों के पाठ्यक्रम, मेडिकल और फार्मा क्षेत्र के नए अवसर, बैंकिंग व बीमा क्षेत्र में करियर, इंटर्नशिप और कौशल विकास की संभावनाओं से भी परिचित होने का मौका मिला। यही वजह रही कि पांच दिन चले ट्रेड शो में बड़ी संख्या में पहुंचे युवाओं के लिए यह आयोजन ‘देखो, जानो और करियर की दिशा चुनो’ का मंच भी बन गया।

    एक्सपो में 160 से अधिक निजी व सरकारी विश्वविद्यालयों, राष्ट्रीयकृत व निजी बैंकों तथा इंश्योरेंस कंपनियों ने भागीदारी की। पंजाब नेशनल बैंक, बैंक ऑफ इंडिया और भारतीय स्टेट बैंक सहित बैंकों ने युवाओं को बैंकिंग सेवाओं के साथ इस क्षेत्र में करियर के लिए जरूरी कौशल और अवसरों की जानकारी दी। इंश्योरेंस कंपनियों ने भी युवाओं को इस क्षेत्र में रोजगार की बदलती संभावनाओं से परिचित कराया।

    ट्रेड शो आकर पास में ही मिला स्पोर्ट्स जर्नलिज्म का विकल्प
    मेजर ध्यानचंद खेल विश्वविद्यालय, मेरठ का पवेलियन युवाओं के लिए खास आकर्षण रहा। नई दिल्ली से आई उत्तरा सक्सेना ने बताया कि उन्होंने स्पोर्ट्स जर्नलिज्म को करियर विकल्प के रूप में चुना है, लेकिन यहां आकर पता चला कि घर से कुछ ही दूरी पर मेरठ में स्थित मेजर ध्यानचंद खेल विश्वविद्यालय में इससे जुड़ा पाठ्यक्रम उपलब्ध है।

    विश्वविद्यालयों के पवेलियन में राजश्री मेडिकल रिसर्च इंस्टीट्यूट, बरेली, किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी, इंटीग्रल यूनिवर्सिटी, लखनऊ समेत प्रदेश के कई संस्थानों ने अपने पाठ्यक्रमों की जानकारी दी। युवाओं को मेडिकल शिक्षा के साथ स्वास्थ्य क्षेत्र में इंटर्नशिप और रोजगार के अवसरों से भी परिचित कराया गया। फार्मा कंपनियों ने दवा उद्योग में काम करने के लिए जरूरी स्किल्स, नए क्षेत्र और रोजगार की संभावनाओं की जानकारी युवाओं को दी। इससे विद्यार्थियों को मेडिकल क्षेत्र में पारंपरिक विकल्पों के अलावा फार्मा, रिसर्च, उत्पादन और अन्य क्षेत्रों में करियर की संभावनाओं को समझने का अवसर मिला।
    ट्रेड शो की यह तस्वीर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार की उस सोच से भी जुड़ती है, जिसमें उत्तर प्रदेश को निवेश और उद्योग के साथ कौशल, शिक्षा और रोजगार के अवसरों का केंद्र बनाने पर जोर दिया जा रहा है। एक्सपो में कंपनियों और शिक्षण संस्थानों की मौजूदगी ने युवाओं को यह समझने का अवसर दिया कि पढ़ाई पूरी करने के बाद करियर के रास्ते केवल पारंपरिक क्षेत्रों तक सीमित नहीं हैं।
    समापन के दिन ट्रेड शो से लौटते युवाओं के हाथ में जहां कंपनियों और संस्थानों की जानकारी थी, वहीं कई के पास अपने भविष्य को लेकर नए विकल्प भी थे। यही इस आयोजन का वह पक्ष रहा, जिसने व्यापार मेले को युवाओं के लिए करियर और कौशल की पाठशाला का रूप दिया।

  • निवेशकों ने मत्स्य पालन, फीड मिल, कोल्ड चेन, हैचरी, बीज उत्पादन तथा वैल्यू एडिशन व निर्यात के क्षेत्र में दिखाई रुचि

    निवेशकों ने मत्स्य पालन, फीड मिल, कोल्ड चेन, हैचरी, बीज उत्पादन तथा वैल्यू एडिशन व निर्यात के क्षेत्र में दिखाई रुचि

    नोएडा
    उत्तर प्रदेश इंटरनेशनल ट्रेड शो (आईटीएस-2026) में मत्स्य विभाग को 600.20 करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए। इन प्रस्तावों में कोल्ड चेन क्षेत्र में सर्वाधिक 509.20 करोड़, फीड मिल क्षेत्र में 51 करोड़, मत्स्य पालन क्षेत्र में 13.80 करोड़, हैचरी एवं बीज उत्पादन क्षेत्र में 6.20 करोड़ तथा वैल्यू एडिशन एवं निर्यात के क्षेत्र में 20 करोड़ के निवेश प्रस्ताव शामिल हैं।

    फिश व्हाइट, बीवीजी इंडिया समेत कई निवेशकों ने दिखाई रुचि
    इंटरनेशनल ट्रेड शो-2026 में फिश व्हाइट, बीवीजी इंडिया प्राइवेट लिमिटेड, बेंगलुरु तथा पीवीआर एक्वा, व्हाइट फिश वाराणसी सहित विभिन्न प्रमुख निवेशकों एवं उद्यमियों द्वारा निवेश प्रस्ताव प्रस्तुत किए गए। निवेशकों ने उत्तर प्रदेश में मत्स्य उत्पादन, गुणवत्तापूर्ण मत्स्य बीज की उपलब्धता, आधुनिक हैचरी, फीड उत्पादन, शीत श्रृंखला तथा मूल्य संवर्धित मत्स्य उत्पादों के क्षेत्र में कार्य करने में रुचि व्यक्त की।

    मत्स्य क्षेत्र में निवेश के लिए उपलब्ध हैं अनेक अवसर
    मत्स्य विभाग की महानिदेशक धनलक्ष्मी के. ने बताया कि विभाग द्वारा निवेशकों को प्रदेश में मत्स्य क्षेत्र के विकास के लिए उपलब्ध निवेश अवसरों, विभागीय योजनाओं तथा परियोजनाओं के क्रियान्वयन के लिए आवश्यक प्रक्रियाओं के संबंध में जानकारी उपलब्ध कराई गई। विभाग का उद्देश्य निजी निवेश के माध्यम से मत्स्य उत्पादन एवं उत्पादकता में वृद्धि, गुणवत्तापूर्ण मत्स्य बीज की उपलब्धता सुनिश्चित करना, आधुनिक मत्स्य अवसंरचना का विकास करना तथा मत्स्य उत्पादों के मूल्य संवर्धन, प्रसंस्करण एवं विपणन को प्रोत्साहित करना है।

    उद्यमियों के लिए सशक्त मंच बना यूपीआईटीएस
    उन्होंने बताया कि ट्रेड शो में मत्स्य विभाग की ओर से लगाई गई प्रदर्शनी/ स्टॉल निवेशकों, उद्यमियों, विद्यार्थियों एवं मत्स्य पालकों के आकर्षण का प्रमुख केंद्र रहा। प्रदर्शनी के माध्यम से प्रदेश में मत्स्य पालन तथा इससे जुड़े सहायक क्षेत्रों में उपलब्ध निवेश संभावनाओं, आधुनिक तकनीकों, उत्पादन, प्रसंस्करण, शीत श्रृंखला, हैचरी एवं गुणवत्तापूर्ण मत्स्य बीज उत्पादन तथा मूल्य संवर्धन के अवसरों की जानकारी प्रदान की गई।

    निवेश की संभावनाओं पर हुई विस्तृत चर्चा
    ट्रेड शो के दौरान विभिन्न निवेशकों एवं उद्यमियों ने मत्स्य विभाग के अधिकारियों से संवाद कर प्रदेश में मत्स्य क्षेत्र में निवेश की संभावनाओं पर विस्तृत चर्चा की। इस दौरान निवेशकों द्वारा प्रस्तावित परियोजनाओं, संभावित निवेश, तकनीकी आवश्यकताओं तथा परियोजनाओं के संभावित क्षेत्रों के संबंध में जानकारी साझा की गई। इन चर्चाओं के परिणामस्वरूप मत्स्य क्षेत्र के विभिन्न उप-क्षेत्रों में कुल 600.20 करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं।

  • उत्तर प्रदेश इंटरनेशनल ट्रेड शो-2026 के समापन समारोह में बतौर मुख्य अतिथि सम्मिलित हुए केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह

    उत्तर प्रदेश इंटरनेशनल ट्रेड शो-2026 के समापन समारोह में बतौर मुख्य अतिथि सम्मिलित हुए केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह

    ग्रेटर नोएडा
    केंद्रीय वस्त्र मंत्री गिरिराज सिंह ने कहा कि उत्तर प्रदेश की पहचान अब पुराने ‘कट्टा उद्योग’ से नहीं, बल्कि ब्रह्मोस मिसाइल और फाइटर जेट जैसे आधुनिक रक्षा उत्पादन से हो रही है। प्रदेश में कानून-व्यवस्था, बुनियादी ढांचे, एक्सप्रेसवे, हवाई संपर्क और औद्योगिक विकास में हुए बदलावों ने उत्तर प्रदेश को नई आर्थिक पहचान दी है। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश मजबूत होगा तो देश मजबूत होगा। उत्तर प्रदेश इंटरनेशनल ट्रेड शो-2026 के समापन समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित करते हुए केंद्रीय मंत्री ने कहा कि भारत की युवा शक्ति देश की सबसे बड़ी ताकत है और उत्तर प्रदेश इस शक्ति का महत्वपूर्ण केंद्र है। उन्होंने कहा कि प्रदेश की औद्योगिक क्षमता अब पारंपरिक क्षेत्रों तक सीमित नहीं है, बल्कि रक्षा उत्पादन, आधुनिक विनिर्माण, निर्यात और तकनीक के क्षेत्र में भी नई संभावनाएं सामने आ रही हैं।

    कट्टा उद्योग से ब्रह्मोस और फाइटर जेट तक बदली पहचान
    गिरिराज सिंह ने उत्तर प्रदेश की बदलती औद्योगिक पहचान का उल्लेख करते हुए कहा कि एक समय प्रदेश को ‘कट्टा उद्योग’ के संदर्भ में देखा जाता था, लेकिन आज यहां ब्रह्मोस मिसाइल और फाइटर जेट जैसे आधुनिक रक्षा उत्पादों के निर्माण की चर्चा हो रही है। उन्होंने कहा कि यह बदलाव प्रदेश में विकसित हो रहे औद्योगिक एवं रक्षा क्षेत्र की क्षमता को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि बेहतर कानून-व्यवस्था, सड़क एवं हवाई संपर्क और औद्योगिक ढांचे ने निवेश तथा कारोबार के लिए नए अवसर तैयार किए हैं। जेवर स्थित नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट, एक्सप्रेसवे और अन्य बुनियादी ढांचा परियोजनाओं का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि बेहतर कनेक्टिविटी से प्रदेश के विभिन्न हिस्सों के बीच आवागमन और कारोबारी गतिविधियों को सुविधा मिल रही है।

    ओडीओपी ने स्थानीय उत्पादों को वैश्विक बाजार से जोड़ा
    केंद्रीय मंत्री ने एक जनपद-एक उत्पाद (ओडीओपी) योजना का उल्लेख करते हुए कहा कि इसके माध्यम से जिलों के विशिष्ट उत्पादों, कारीगरों और उद्यमियों को बाजार से जोड़ने का प्रयास किया गया है। उन्होंने कहा कि यूपीआईटीएस जैसे आयोजन स्थानीय उत्पादों को देश और दुनिया के खरीदारों तक पहुंचाने के लिए मंच उपलब्ध करा रहे हैं। उन्होंने कहा कि बनारस की साड़ी, मुरादाबाद का पीतल, भदोही का कालीन, लखनऊ की चिकनकारी सहित प्रदेश के विभिन्न उत्पादों की अपनी विशिष्ट पहचान है। इन उत्पादों को आधुनिक तकनीक, बेहतर पैकेजिंग, ब्रांडिंग और वैश्विक बाजार से जोड़ने की आवश्यकता है।

    यूपीआईटीएस ने कारोबार के लिए उपलब्ध कराया वैश्विक मंच
    गिरिराज सिंह ने यूपीआईटीएस में हुई बी2बी बैठकों और कारोबारी गतिविधियों का उल्लेख करते हुए कहा कि इस आयोजन ने उत्तर प्रदेश के उद्यमियों, निर्यातकों, कारीगरों, प्रदर्शकों और देश-विदेश के खरीदारों को एक मंच पर लाने का काम किया है। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजन प्रदेश के उत्पादों को वैश्विक बाजार से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश की अर्थव्यवस्था को एक ट्रिलियन डॉलर तक ले जाने का लक्ष्य रखा गया है और निर्यात, विनिर्माण तथा एमएसएमई क्षेत्र की इसमें महत्वपूर्ण भूमिका हो सकती है।

    ऊर्जा आत्मनिर्भरता के लिए वैकल्पिक स्रोतों पर जोर
    केंद्रीय मंत्री ने भारत में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश और निर्यात में वृद्धि का उल्लेख करते हुए कहा कि देश की वैश्विक आर्थिक भूमिका बढ़ रही है। उन्होंने ऊर्जा आयात पर निर्भरता कम करने के लिए एथनॉल जैसे वैकल्पिक ईंधन को बढ़ावा देने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि ऊर्जा आयात पर होने वाले खर्च को कम करना आत्मनिर्भरता की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। भारत की बढ़ती ऊर्जा जरूरतों को देखते हुए वैकल्पिक और स्वदेशी ऊर्जा स्रोतों का विस्तार आवश्यक है।

    वैश्विक मंच पर भारत की बढ़ती भूमिका
    गिरिराज सिंह ने ब्रिक्स सहित विभिन्न अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत की बढ़ती भूमिका का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि भारत वैश्विक आर्थिक और कूटनीतिक संवाद में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। उन्होंने युवाओं की क्षमता का उल्लेख करते हुए कहा कि युवा शक्ति देश के विकास को नई गति देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश की आर्थिक मजबूती का प्रभाव देश की समग्र अर्थव्यवस्था पर भी पड़ेगा। प्रदेश में उद्योग, निर्यात, एमएसएमई और स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा देकर रोजगार और आर्थिक गतिविधियों का विस्तार किया जा सकता है।

    यूपीआईटीएस की सफलता के लिए आयोजकों को दी बधाई
    केंद्रीय मंत्री ने यूपीआईटीएस-2026 के आयोजन से जुड़े अधिकारियों, विभिन्न विभागों, इंडिया एक्सपो मार्ट, उद्यमियों, कारीगरों, प्रदर्शकों और देश-विदेश से आए खरीदारों के योगदान की सराहना की। उन्होंने कहा कि पांच दिवसीय आयोजन ने उत्तर प्रदेश के उत्पादों, उद्यमशीलता, हस्तशिल्प और औद्योगिक क्षमता को वैश्विक मंच पर प्रदर्शित करने का अवसर दिया है। उन्होंने आयोजन की व्यवस्थाओं की सराहना करते हुए यूपीआईटीएस-2026 को सफल बनाने में योगदान देने वाली पूरी टीम के प्रति आभार व्यक्त किया।

    इस अवसर पर प्रदेश के एमएसएमई मंत्री भूपेंद्र चौधरी, कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही, औद्योगिक विकास मंत्री नंद गोपाल गुप्ता नंदी, राज्य मंत्री एमएसएमई हंसराज विश्वकर्मा, प्रमुख सचिव एमएसएमई शशि भूषण लाल सुशील, सचिव प्रांजल यादव, कमिश्नर उद्योग के. विजयेंद्र पांडियन, विशेष सचिव एमएसएमई शिशिर और अपर कमिश्नर उद्योग रोहित आनंद मौजूद रहे।

     

  • धालभूमगढ़ एयरपोर्ट पर आगे बढ़ी प्रक्रिया, केंद्र की मंजूरी का इंतजार

    धालभूमगढ़ एयरपोर्ट पर आगे बढ़ी प्रक्रिया, केंद्र की मंजूरी का इंतजार

     रांची
    कोल्हान की बहुप्रतीक्षित धालभूमगढ़ एयरपोर्ट परियोजना को फिर से रफ्तार मिली है। झारखंड नागर विमानन विभाग ने परियोजना को आगे बढ़ाने के लिए भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण (एएआई), वन विभाग और केंद्र सरकार के साथ समन्वय तेज कर दिया है।

    राज्य स्तर पर भूमि, वन एवं पर्यावरण से जुड़े मामलों के निपटारे के साथ केंद्र से मिलने वाली स्वीकृतियों की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जा रहा है। इसी क्रम में धालभूमगढ़ में करीब 540 एकड़ भूमि पर एयरपोर्ट विकसित करने का प्रस्ताव तैयार कर केंद्र को भेजा गया है।

    पहले करीब 240 एकड़ क्षेत्र में एयरपोर्ट विकसित करने की योजना थी। भविष्य की जरूरतों को देखते हुए अब प्रस्तावित क्षेत्र को बढ़ाकर 540 एकड़ किया गया है।

    नागर विमानन विभाग की ओर से एएआई के साथ लगातार समन्वय कर परियोजना की तकनीकी और प्रशासनिक जरूरतों को पूरा करने की दिशा में काम किया जा रहा है। एएआई की टीम और रांची एटीसी के अधिकारियों ने प्रस्तावित स्थल का निरीक्षण भी किया है।

    19 बिंदुओं के जवाब भेजे, केंद्र की मंजूरी का इंतजार
    परियोजना में वन भूमि और हाथी गलियारे से जुड़े मुद्दे सबसे महत्वपूर्ण हैं। राज्य सरकार की ओर से केंद्र सरकार के 19 बिंदुओं पर मांगी गई जानकारी का जवाब भेजा गया है।

    वन और गैर-वन भूमि का सीमांकन पूरा करने के साथ संबंधित एनओसी भी भेजी गई है। अब केंद्र स्तर से मिलने वाली आवश्यक स्वीकृतियों पर परियोजना की अगली गति निर्भर करेगी।

    नागर विमानन विभाग इस पूरी प्रक्रिया में राज्य का नोडल विभाग है। विभाग एएआई के साथ एयरपोर्ट की तकनीकी आवश्यकताओं, भूमि उपलब्धता, आधारभूत संरचना और विभिन्न विभागों से मिलने वाली मंजूरियों के बीच समन्वय कर रहा है। विभाग की कोशिश है कि अलग-अलग स्तर पर लंबित प्रक्रियाओं को एक साथ आगे बढ़ाया जाए।

    एलीफेंट कॉरिडोर का फिर होगा सर्वे
    धालभूमगढ़ क्षेत्र में एलीफेंट कॉरिडोर होने के कारण पर्यावरणीय पहलू भी महत्वपूर्ण है। राज्य सरकार ने हाथियों के प्राकृतिक आवागमन को ध्यान में रखते हुए कॉरिडोर का नए सिरे से सर्वे कराने की दिशा में पहल की है। एयरपोर्ट निर्माण की योजना में वन एवं वन्यजीव संबंधी केंद्रीय मानकों का पालन करना होगा।

    साहिबगंज में ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट की तैयारी
    धालभूमगढ़ के साथ राज्य सरकार साहिबगंज में भी ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट विकसित करने की दिशा में काम कर रही है। नागर विमानन विभाग इस प्रस्ताव को आगे बढ़ाने के लिए संबंधित विभागों के साथ समन्वय कर रहा है। साहिबगंज में एयरपोर्ट बनने से संथाल परगना को हवाई संपर्क मिलने की संभावना बढ़ेगी।

    उड़ान योजना में कई शहर
    केंद्र की संशोधित उड़ान योजना में झारखंड के कई शहरों को हवाई नेटवर्क से जोड़ने की योजना है। धालभूमगढ़, दुमका, हजारीबाग, डालटनगंज और चाईबासा को लेकर विकास और कनेक्टिविटी की योजनाओं पर काम चल रहा है।

    इसके अलावा बोकारो, देवघर और जमशेदपुर को भी क्षेत्रीय हवाई संपर्क से जोड़ने की दिशा में अलग-अलग स्तर पर काम हुआ है।

    इनमें कुछ स्थानों पर एयरपोर्ट/हवाई पट्टी का विकास पूरा हो चुका है, जबकि कुछ जगहों पर भूमि, साइट और परिचालन से जुड़ी प्रक्रियाएं चल रही हैं।

    संशोधित उड़ान योजना के तहत केंद्र सरकार ने वित्त वर्ष 2026-27 से 2035-36 तक 28,840 करोड़ रुपये खर्च करने का प्रावधान किया है। इसके तहत देशभर में 100 नए एयरपोर्ट विकसित करने की योजना है।
    धालभूमगढ़ एयरपोर्ट परियोजना को लेकर राज्य सरकार की ओर से सभी संबंधित विभागों के साथ समन्वय किया जा रहा है। एएआई के साथ भी लगातार बातचीत हो रही है। भूमि, वन एवं पर्यावरण से जुड़े विषयों पर प्रक्रिया आगे बढ़ी है। केंद्र से आवश्यक स्वीकृति मिलने के बाद परियोजना के अगले चरण पर काम किया जाएगा।
    कैप्टन एसपी सिन्हा, निदेशक (परिचालन), नागर विमानन विभाग, झारखंड

  • युगपुरुष ब्रह्मलीन महंत दिग्विजयनाथ जी महाराज की 57वीं पुण्यतिथि पर श्रद्धाजंलि सभा में बोले गोरक्षपीठाधीश्वर योगी आदित्यनाथ

    युगपुरुष ब्रह्मलीन महंत दिग्विजयनाथ जी महाराज की 57वीं पुण्यतिथि पर श्रद्धाजंलि सभा में बोले गोरक्षपीठाधीश्वर योगी आदित्यनाथ

    गोरखपुर
    गोरक्षपीठाधीश्वर एवं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि 1949 में अयोध्या स्थित श्री रामजन्मभूमि पर रामलला का प्रकटीकरण श्रीराम मंदिर निर्माण के लिए महत्वपूर्ण पड़ाव सिद्ध हुआ। आज जब अयोध्या स्थित भगवान श्रीराम की जन्मभूमि पर भव्य मंदिर बन गया है तो रामद्रोहियों को अयोध्या का वैभव बर्दाश्त नहीं हो रहा है। सभी रामभक्तों, सनातन धर्मावलंबियों को आज के कालनेमियों से सावधान रहना होगा। हम सही दिशा में आगे बढ़ रहे हैं, इसमें किसी को किसी प्रकार का भ्रम या संशय नहीं होना चाहिए।

    मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ मंगलवार (आश्विन कृष्ण तृतीया) को गोरखनाथ मंदिर में युगपुरुष ब्रह्मलीन महंत दिग्विजयनाथ जी महाराज की 57वीं तथा राष्ट्रसंत ब्रह्मलीन महंत अवेद्यनाथ जी महाराज की 12वीं पुण्यतिथि के उपलक्ष्य में आयोजित साप्ताहिक श्रद्धाजंलि समारोह के अंतर्गत महंत दिग्विजयनाथ की पुण्यतिथि पर श्रद्धांजलि सभा को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि अयोध्या में भव्य मंदिर, काशी में बाबा विश्वनाथ का भव्य धाम, विंध्याचल में मां विंध्यवासिनी धाम का वैभव, प्रयागराज के दिव्य कुंभ और वृंदावन के वैष्णव कुंभ को देखकर सनातन से चिढ़ने वाले दुष्प्रचार करेंगे, भ्रम पैदा करेंगे। सभी सनातनियों को इसके लिए सतर्क और जागरूक रहना होगा। ये रामद्रोही व सनातनद्रोही आज के दौर के कालनेमि हैं। रामायण कालखंड में जब रामभक्त हनुमान जी संजीवनी बूटी लेने जा रहे थे तब कालनेमि ने छद्म रूप में उन्हें रोकने की कोशिश की थी। हनुमान जी ने उसे पहचान लिया था। वर्तमान दौर में भी रामभक्तों, सनातन धर्मावलंबियों को आज के कालनेमियों से सावधान रहना होगा। हम सही दिशा में आगे बढ़ रहे हैं, इसमें किसी प्रकार का भ्रम या संशय नहीं होना चाहिए। अयोध्या व काशी में आई भव्यता सही दिशा में चलने का ही परिणाम है।

    वैष्णव कुंभ पर बांके बिहारी और राधारानी की कृपा
    सीएम योगी ने 2019 में प्रयागराज के भव्य एवं दिव्य कुंभ आयोजन के बाद वृंदावन में वैष्णव कुंभ के भव्य आयोजन का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि जब यह आयोजन हुआ तो उस समय कोरोना का प्रकोप था। किंतु, बांके बिहारी लाल तथा राधारानी की कृपा से इस आयोजन में कोरोना बाल भी बांका नहीं कर पाया। आध्यात्मिक शक्ति ऐसी ही होती है।

    किसी पंथ-जाति में भेदभाव नहीं करती गोरक्षपीठ
    मुख्यमंत्री ने शैव परंपरा वाली गोरक्षपीठ को संपूर्ण सनातन के लिए समर्पित पीठ बताते हुए कहा कि यह किसी पंथ, संप्रदाय, व्यक्ति या जाति में कोई भेदभाव नहीं करती। किसी पंथ या संप्रदाय की विशिष्ट उपासना पद्धति हो सकती है, लेकिन सबका कल्याण वृहद सनातन धर्म में ही होता है। सनातन की किसी भी शाखा के व्यक्ति को गोरक्षपीठ में वही सम्मान मिलता है, जो उन्हें अपनी पावन परंपरा में मिलता होगा।

    अलग गति से चलना बनेगा दुर्गति का कारण
    सीएम योगी ने कहा कि वसुधैव कुटुंबकम को साकार करने के लिए सभी पंथों, संप्रदायों को एक भाव से, एक स्वर में, एक गति से, एक साथ आगे बढ़ना होगा। यदि 140 करोड़ भारतवासियों में एक साथ चलने का सामर्थ्य हो जाए तो दुनिया की कोई भी ताकत हमारे सामने ठहर नहीं पाएगी। लेकिन, अलग स्वर से बोलना व अलग गति से चलना, दुर्गति का कारण बनेगा।

    दूरदर्शी होते हैं संतों-महापुरुषों के कार्य
    मुख्यमंत्री ने कहा कि संतों व महापुरुषों को जानने और उनके बारे में पढ़ने से हमेशा नई प्रेरणा मिलती है। ये लोग केवल वर्तमान को नहीं जीते, बल्कि उनके कार्य दूरदर्शी होते हैं। उनके कार्य भविष्य की सुदृढ़ नींव के रूप में भावी जीवन को सुखद और उज्जवल बनाते हैं। सामान्य मनुष्य अपने लिए सोचता है, जबकि महापुरुष समूचे समाज और राष्ट्र कल्याण की भावना रखते हैं। लगभग 95 वर्ष पहले जब देश गुलाम था, साधन व संसाधनों का अभाव था, तब दिग्विजयनाथ जी ने महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद की स्थापना की। उन्होंने स्वदेश, स्वधर्म और स्वाभिमान के आदर्श महाराणा प्रताप के नाम पर शिक्षा के प्रकल्प का नामकरण किया। यूपी में पहला राज्य विश्वविद्यालय गोरखपुर में बना और शिक्षा परिषद के दो कॉलेज देकर दिग्विजयनाथ जी महाराज ने उसकी नींव को सुदृढ़ करने का काम किया। उन्हें श्रेय लेने की कोई चाह नहीं थी। तब उन्होंने कहा था कि गोरक्षपीठ हिंदू और लोक कल्याण की पीठ है। इसकी संपत्ति लोकोपयोगी कार्य के लिए ही है।

    महंत जी के कार्य आज भी अनुकरणीय
    शिक्षा क्षेत्र में महंत दिग्विजयनाथ जी महाराज के योगदान को याद करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि जब देश गुलाम था, तब उन्होंने बालिका महाविद्यालय की स्थापना कर दी थी। संस्कृत को बढ़ावा देने के लिए उन्होंने संस्कृत महाविद्यालय की स्थापना की। उनका मानना था कि भारत को उसकी परंपरा और विरासत के अनुसार आगे बढ़ाना है। इस निमित्त उन्होंने पीठ के महंत और सासंद के रूप में जो प्रयास किए, वह आज भी अनुकरणीय हैं। एमपी शिक्षा परिषद की 50 से अधिक संस्थाएं आज उन्हें श्रद्धांजलि देते हुए उनके आदर्शों के अनुरूप आगे बढ़ने का संकल्प ले रही हैं। सीएम ने संस्थाओं का आह्वान किया कि वे सफलता प्राप्ति के लिए संस्थापकों के आदर्शों को कार्यशैली का हिस्सा बनाएं।   

    असाधारण होते हैं संतों के कार्य: स्वामी राजेंद्रदास
    श्रद्धांजलि सभा को संबोधित करते हुए रेवासाधाम वृंदावन से पधारे श्रीमद्जगद्गुरु द्वाराचार्य अग्रपीठाधीश्वर एवं मलूकपीठाधीश्वर स्वामी श्री राजेंद्रदास देवाचार्य जी महाराज ने ब्रह्मलीन महंत दिग्विजय नाथ जी महाराज और ब्रह्मलीन महंत अवेद्यनाथ जी महाराज की पुण्यस्मृति को नमन करते हुए उन्हें वास्तविक संत बताया। उन्होंने कहा कि संत असाधारण होते हैं और इसलिए उनके द्वारा किए गए सभी कार्य भी असाधारण होते हैं। परमात्मा की कृपा से यदि धरती पर संत, सद्गुरु, ऋषि, महात्मा प्रकट नहीं होते तो मनुष्यता का बोध भी नहीं होता। गोरक्षपीठ अत्यंत पूज्य स्थान है क्योंकि ब्रह्मलीन महंत दिग्विजयनाथ जी और ब्रह्मलीन महंत अवेद्यनाथ जी के पावन श्रीचरणों के स्पर्श का लाभ इस भूमि को मिला है। यह भूमि महान मनीषियों के चरण रज से अलंकृत है।

    नाथपंथ की परंपरा के महान वाहक थे दिग्विजयनाथ जी: बालकनाथ
    इस अवसर पर मस्तनाथ पीठ अस्थल बोहर के महंत और राजस्थान विधानसभा के सदस्य बालकनाथ जी महाराज ने कहा कि नाथ परंपरा ने सदैव लोक कल्याण की भावना से समाज को एकजुट रखने का कार्य किया। महंत दिग्विजयनाथ जी महाराज इसी परंपरा के महान वाहक थे। वास्तविक संत वही है जो शिक्षा, स्वास्थ्य सहित अनेक जनकल्याणकारी संस्थाओं के माध्यम से लोगों का कल्याण करता है। इसी भाव को ब्रह्मलीन महंत दिग्विजय नाथ जी महाराज और ब्रह्मलीन महंत अवेद्यनाथ जी महाराज ने चरितार्थ किया। शिक्षा का विकास ही वास्तविक विकास है और गोरक्षपीठ ने सदैव राष्ट्रीयतापरक शिक्षा के प्रसार को आगे बढ़ाया है।  

    लोक कल्याण के प्रति समर्पित रहे दिग्विजयनाथ जी महाराज
    श्रद्धांजलि सभा में श्रीरामजानकी मंदिर वाराणसी से पधारे डॉ. रामकमलदास जी वेदांती महाराज ने कहा कि ब्रह्मलीन महंत दिग्विजयनाथ जी महाराज की साधना लोक और राष्ट्र कल्याण के प्रति समर्पित थी। समाज और राष्ट्र हित में चैतन्य पीढ़ियों के निर्माण के लिए उन्होंने महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद की नींव रखी थी। अयोध्या से पधारे जगद्गुरु स्वामी रामदिनेशाचार्य जी महाराज ने कहा कि ब्रह्मलीन महंत दिग्विजयनाथ जी महाराज ने विपरीत परिस्थितियों में भी राष्ट्रीयतापरक मूल्यों और सनातन मानबिंदुओं को प्रतिष्ठित करने का अभियान संकल्पबद्ध तरीके से आगे बढ़ाया। काशी से पधारे जगद्गुरु श्री विष्णुस्वामी सम्प्रदायाचार्य श्री संतोषाचार्य जी महाराज 'सतुआ बाबा' ने कहा कि गोरक्षपीठ के ब्रह्मलीन महंत दिग्विजयनाथ जी महाराज ने धर्म, अध्यात्म के साथ ही शिक्षा के माध्यम से समाज को एकसूत्र में जोड़ने का काम किया। श्रद्धांजलि सभा को आदिशक्ति मां पाटेश्वरी विश्वविद्यालय बलरामपुर के कुलपति प्रो. रविशंकर सिंह, महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद, गोरखपुर के सदस्य एवं पूर्व कुलपति प्रो. विजय कृष्ण सिंह ने भी संबोधित किया।

     

  • BJP की MLC चुनाव को लेकर पहली लिस्ट जारी, जानें किसे मिला टिकट

    BJP की MLC चुनाव को लेकर पहली लिस्ट जारी, जानें किसे मिला टिकट

    नई दिल्ली
    बीजेपी ने 2026 में होने वाले विधान परिषद चुनाव के लिए बिहार और उत्तर प्रदेश की ग्रेजुएट और शिक्षक सीटों पर अपने उम्मीदवारों के नामों का ऐलान कर दिया है. पार्टी ने बिहार की 4 और उत्तर प्रदेश की 6 सीटों के लिए प्रत्याशियों की लिस्ट जारी की है. इस लिस्ट में वाराणसी स्नातक सीट से केदार नाथ सिंह और पटना शिक्षक सीट से नवल किशोर यादव को टिकट दिया गया है.

    दरअसल, बिहार की चार और उत्तर प्रदेश की छह सीटों पर विधान परिषद यानी एमएलसी चुनाव होने हैं. बिहार की चार सीटों में पटना शिक्षक सीट से नवल किशोर यादव को उम्मीदवार बनाया गया है. वहीं कोसी स्नातक सीट से डॉ. एनके यादव, दरभंगा स्नातक सीट से सर्वेश कुमार और तिरहुत शिक्षक सीट से नरेंद्र प्रसाद सिंह को टिकट दिया गया है.

    बिहार की चार सीटों पर उम्मीदवार
    पटना शिक्षक सीट से नवल किशोर यादव, कोसी स्नातक से डॉ. एनके यादव, दरभंगा स्नातक से सर्वेश कुमार और तिरहुत शिक्षक सीट से नरेंद्र प्रसाद सिंह बीजेपी के उम्मीदवार होंगे.

    उत्तर प्रदेश की छह सीटों पर प्रत्याशी
    उत्तर प्रदेश की छह सीटों में वाराणसी स्नातक से केदार नाथ सिंह, मेरठ स्नातक से दिनेश गोयल, इलाहाबाद-झांसी स्नातक से अशोक कुमार राठौर को उम्मीदवार बनाया गया है. वहीं वाराणसी शिक्षक सीट से डॉ. प्रमोद मिश्रा, आगरा शिक्षक सीट से इंजीनियर हरि किशोर तिवारी और गोरखपुर-फैजाबाद शिक्षक सीट से ध्रुव त्रिपाठी को टिकट दिया गया है.

    बिहार विधान परिषद चुनाव 2026
    पटना शिक्षक – नवल किशोर यादव
    कोसी स्नातक – डॉ. एन.के. यादव
    दरभंगा स्नातक – सर्वेश कुमार
    तिरहुत शिक्षक – नरेंद्र प्रसाद सिंह

    उत्तर प्रदेश विधान परिषद चुनाव 2026
    वाराणसी स्नातक – केदार नाथ सिंह
    मेरठ स्नातक – दिनेश गोयल
    इलाहाबाद-झांसी स्नातक – अशोक कुमार राठौर
    वाराणसी शिक्षक – डॉ. प्रमोद मिश्रा
    आगरा शिक्षक – इंजीनियर हरि किशोर तिवारी
    गोरखपुर-फैजाबाद शिक्षक – ध्रुव त्रिपाठी

  • योगी सरकार के प्रयास से गन्ने की खेती में बढ़ेगी ‘मिठास’, 100 टन प्रति हेक्टेयर तक उपज देंगी चार नई किस्में

    योगी सरकार के प्रयास से गन्ने की खेती में बढ़ेगी ‘मिठास’, 100 टन प्रति हेक्टेयर तक उपज देंगी चार नई किस्में

    ग्रेटर नोएडा
     इंटरनेशनल ट्रेड शो में चीनी उद्योग एवं गन्ना विकास विभाग के स्टॉल पर गन्ने की नवीन उन्नत चार किस्मों का प्रदर्शन किया गया है। उत्तर प्रदेश गन्ना अनुसंधान परिषद (UPCSR) द्वारा विकसित इन किस्मों का उद्देश्य प्रदेश में गन्ने की उत्पादकता और चीनी परता बढ़ाने के साथ किसानों की आय में वृद्धि करना तथा लाल सड़न रोग के प्रभाव को कम करना है। अब योगी सरकार के प्रयास से गन्ने की खेती में ‘मिठास’ बढ़ेगी।

    ट्रेड शो में को.शा. 19231, को.शा. 18231, को.शा. 13235 और को.शा. 17231 किस्मों को प्रदर्शित किया गया है। इन किस्मों की उपज क्षमता लगभग 90 से 100 टन प्रति हेक्टेयर है। इन उन्नत किस्मों में गन्ने के प्रमुख रोग लाल सड़न (रेड रॉट) के प्रति रोगरोधी या प्रतिरोधी प्रवृत्ति भी पाई जाती है। इसके साथ ही इनमें अंकुरण और शुरुआती बढ़वार अच्छी होती है। मिल में पेराई योग्य गन्नों की संख्या भी अधिक होने से गन्ने की उत्पादकता और चीनी उत्पादन बढ़ने की संभावना रहती है।

    इन किस्मों की एक अन्य खासियत अच्छी पेड़ी क्षमता है। पेड़ी फसल का बेहतर उत्पादन होने से किसानों को अगली फसल तैयार करने में लागत कम करने के साथ अच्छा उत्पादन प्राप्त करने में मदद मिल सकती है। नवीन उन्नत किस्मों के इस्तेमाल से किसानों को बेहतर उत्पादन के साथ गन्ने की खेती को अधिक लाभकारी बनाने में सहायता मिल सकती है।

  • नए ई-चालान सिस्टम में कई नए विकल्प, शराब और मॉडिफाइड साइलेंसर पर भी कार्रवाई

    नए ई-चालान सिस्टम में कई नए विकल्प, शराब और मॉडिफाइड साइलेंसर पर भी कार्रवाई

    शामली
    ई-चालान एप्लीकेशन के नए वर्जन नेक्स्ट जेन 2.0 में हेलमेट नहीं लगाने पर पीछे बैठी सवारी का चालान काटने के साथ ही कई विकल्प जोड़े गए हैं। अब वाहन स्वामी को चालान भरने के लिए किसी कार्यालय नहीं जाना होगा। वाहन स्वामी के वाट्सएप नंबर पर चालान के साथ ही क्यूआर कोड भी भेजा जाएगा। इस पर जुर्माना राशि का भुगतान किया जा सकेगा।

    ई-चालान एप्लीकेशन अपडेशन के चलते प्रदेश में तीन दिन तक एक भी वाहन का ई-चालान नहीं काटा जा सका। सोमवार शाम से एप्लीकेशन का नया वर्जन चार दिन के ट्रायल के साथ शुरू हो गया है। शुक्रवार सुबह से ही ई-चालान एप्लीकेशन बंद हो गई थी।

    आमतौर पर मेरठ और आसपास के जिलों में यातायात पुलिस और थानों की पुलिस रोजाना औसतन करीब 500 वाहनों के चालान काटकर कार्रवाई करती थी, लेकिन पिछले तीन दिनों से एप्लीकेशन न चलने के कारण चालान प्रक्रिया पूरी तरह शून्य पर आ टिकी है।

    बिजनौर के एसपी कृष्ण कुमार विश्नोई ने बताया कि नेक्स्ट जेन 2.0 एप का नया वर्जन अपलोड किया गया है। अभी तक आनलाइन माध्यम से होने वाले चालान पुराने साफ्टवेयर पर आधारित थे। अब सरकार ने उसे अपडेट करके नेक्स्ट जेन 2.0 के नाम से लांच किया है। मेरठ के एसपी ट्रैफिक राजेश श्रीवास्तव ने बताया कि नए अपडेट वर्जन का सोमवार शाम से चार दिन का ट्रायल शुरू हो गया है।

    इसके बाद इसे लागू कर दिया जाएगा। इसमें चालान के साथ ही वाहन स्वामी के वाट्सएप नंबर पर क्यूआर कोड भी आएगा। क्यूआर कोड के माध्यम से चालान राशि जमा की जा सकेगी। वाहन स्वामी को किसी भी कार्यालय के चक्कर काटने की आवश्यकता नहीं होगी। पहली एप्लीकेशन में पीछे बैठी बिना हेलमेट की सवारी का चालान काटने का विकल्प नहीं था।

    नए वर्जन में यह विकल्प जोड़ दिया गया है। इसके साथ ही शराब पीकर गाड़ी चलाने और माडिफाई साइलेंसर का चालान काटने का भी नया विकल्प शामिल किया गया है। मेरठ में सोमवार को 80 चालान काटे गए, जिनमें आठ हेलमेट न लगाने पर पीछे बैठी सवारियों के शामिल हैं।

     

  • गांवों तक पहुंचेगी इलाज की सुविधा, राजस्थान में खुलेंगे 600 नए स्वास्थ्य केंद्र

    गांवों तक पहुंचेगी इलाज की सुविधा, राजस्थान में खुलेंगे 600 नए स्वास्थ्य केंद्र

    जयपुर
    राजस्थान के राजनीतिक गलियारों में जहां एक तरफ आगामी पंचायती राज चुनावों को लेकर सियासी पारा चढ़ने लगा है, वहीं दूसरी तरफ भजनलाल सरकार ने ग्रामीण अंचलों की सूरत बदलने के लिए एक बड़ी प्रशासनिक कवायद शुरू कर दी है। राज्य के गांवों और दूरदराज की ढाणियों में रहने वाले आम नागरिकों को अब छोटी-मोटी बीमारी या प्राथमिक जांच के लिए मीलों दूर कस्बों या जिला अस्पतालों के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे। भारत सरकार के सहयोग से राजस्थान सरकार प्रदेश के हर 10 किलोमीटर के दायरे में मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं सुलभ कराने जा रही है जिसके तहत अब ग्रामीण इलाकों में 600 नए सब-सेन्टर (छोटे स्वास्थ्य केंद्र) स्थापित किए जा रहे हैं।

    चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री गजेंद्र सिंह खींवसर ने सोमवार को जयपुर स्थित स्वास्थ्य भवन में प्रदेश के सभी जिलों के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारियों (CMHO) की एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक ली। इस बैठक में ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता, मानव संसाधन के प्रभावी प्रबंधन, दवा व जांच सुविधाओं के साथ-साथ मौसमी बीमारियों की रोकथाम पर विस्तार से चर्चा की गई।

    राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में इस कदम को रणनीतिक रूप से देखा जा रहा है। ग्रामीण मतदाताओं और जमीनी स्तर के आम आदमी को सीधे तौर पर प्रभावित करने वाले स्वास्थ्य सेक्टर में यह कवायद ऐसे समय पर तेज हुई है जब राज्य में पंचायत चुनावों की सुगबुगाहट जोरों पर है।

    सरकार यह संदेश देने की पूरी कोशिश में है कि ग्रामीण विकास के साथ-साथ बुनियादी चिकित्सा ढांचे को मजबूत करना उसकी प्राथमिकता सूची में सबसे ऊपर है, ताकि चुनाव से ठीक पहले हर गांव तक गवर्नेंस और राहत का सीधा असर पहुंच सके।

    50 हजार नई नियुक्तियों के बाद अब ग्राउंड पर एक्शन
    सरकार का यह फैसला केवल कागजी घोषणा तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके पीछे एक मजबूत प्रशासनिक तैयारी नजर आ रही है। हाल ही में स्वास्थ्य विभाग के विभिन्न संवर्गों में लगभग 50 हजार पदों पर नई नियुक्तियां दी जा चुकी हैं। अब सरकार का पूरा फोकस इस बात पर है कि इन तमाम डॉक्टरों, नर्सिंग स्टाफ और मेडिकल प्रोफेशनल्स को सही जगह पर तैनात किया जाए।

    चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री गजेंद्र सिंह खींवसर ने हाल ही में बुलाई गई उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में साफ निर्देश दिए हैं कि मानव संसाधन का उपयोग केवल कागजी पदों के आधार पर नहीं, बल्कि उस इलाके की वास्तविक जरूरत, भौगोलिक स्थिति और मरीजों के भार को देखकर किया जाना चाहिए।

    इस नई व्यवस्था के तहत सरकार का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों में रहने वाले हर नागरिक को बुनियादी स्वास्थ्य सेवाओं के लिए ज्यादा दूर न भटकना पड़े।

    600 नए सब-सेन्टर: भारत सरकार के सहयोग से ग्रामीण क्षेत्रों में नए सब-सेन्टर खोले जाएंगे, जिन्हें एक तरह से स्थानीय स्तर पर छोटे अस्पतालों के रूप में विकसित किया जाएगा।

    विशेष जरूरत वाले केंद्र: ट्रोमा सेंटर, प्रसव की सुविधा वाले स्वास्थ्य केंद्र और दूरदराज के ग्रामीण अस्पतालों में विशेष तौर पर प्रशिक्षित स्टाफ की तैनाती अनिवार्य की जाएगी।

    सुरक्षा और पारदर्शिता: चिकित्सा संस्थानों के भवनों की सुरक्षा और जवाबदेही तय करने के साथ-साथ आगामी तीन महीनों में सभी अस्पतालों में सीसीटीवी कैमरे लगाने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि जमीनी स्तर पर कामकाज की नियमित मॉनिटरिंग हो सके।

    क्या होते हैं सब-सेंटर्स
    सामान्य बोलचाल की भाषा में 'सब-सेन्टर' को ग्रामीण स्तर का छोटा अस्पताल या स्वास्थ्य केंद्र ही माना जाता है। सब-सेन्टर स्वास्थ्य सेवा प्रणाली की सबसे शुरुआती और जमीनी इकाई होती है, जो अमूमन ग्रामीण इलाकों में बस्तियों या गांवों के पास बनाई जाती है। यहाँ डॉक्टर नहीं बल्कि प्रशिक्षित एएनएम (ANM) या स्वास्थ्य कार्यकर्ता बैठते हैं। यहाँ गर्भवती महिलाओं की जांच, टीकाकरण, बच्चों के टीके, सामान्य बीमार जैसी बुनियादी और प्राथमिक चिकित्सा सुविधाएं मुफ्त मिलती हैं।

    इसलिए, जब हर 10 किलोमीटर पर नए सब-सेन्टर खोलने की बात कही जा रही है, तो इसका सीधा मतलब यही है कि सरकार गांवों के पास छोटे स्वास्थ्य केंद्र (अस्पताल) स्थापित कर रही है ताकि ग्रामीणों को छोटी-मोटी बीमारी या जांच के लिए दूर शहर न जाना पड़े।

    प्रशासनिक कसावट और भविष्य की तैयारी
    स्वास्थ्य विभाग की प्रमुख शासन सचिव गायत्री राठौड़ ने भी स्पष्ट किया है कि आरयूएचएस के माध्यम से हजारों चिकित्सा अधिकारियों की भर्ती प्रक्रिया पूरी की जा चुकी है और दिसंबर में होने वाली नई परीक्षाओं के जरिए महकमे को और मजबूती मिलेगी। इसके अलावा, जिन स्वास्थ्य केंद्रों के नए भवन बनकर तैयार हो चुके हैं, वहां तत्काल प्रभाव से सेवाएं शुरू करने के निर्देश दिए गए हैं ताकि आम जनता को तुरंत फायदा मिल सके। गांवों की चौखट तक बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं पहुंचाने का यह कदम निश्चित रूप से राजस्थान के चिकित्सा ढांचे की तस्वीर बदलने वाला साबित हो रहा है।

     

  • मुख्यमंत्री योगी ने कहा- 140 करोड़ लोग एक स्वर में हुंकार भरेंगे तो दुनिया की कोई ताकत सामने नहीं ठहर सकती

    मुख्यमंत्री योगी ने कहा- 140 करोड़ लोग एक स्वर में हुंकार भरेंगे तो दुनिया की कोई ताकत सामने नहीं ठहर सकती

    गोरखपुर
     मुख्यमंत्री एवं गोरक्षपीठाधीश्वर योगी आदित्यनाथ ने मंगलवार को कहा कि सनातन धर्म की एकता में ही हमारी सुरक्षा और मजबूती है। पंथ और संप्रदाय की उपासना पद्धति अलग हो सकती है, लेकिन सभी का कल्याण वृहद सनातन धर्म की मजबूती में है। 140 करोड़ लोग एक स्वर में हुंकार भरेंगे तो दुनिया की कोई ताकत सामने नहीं ठहर सकती। अलग-अलग गति प्रगति नहीं, दुर्गति और अलग-अलग स्वर ताकत नहीं, पराजय का कारण बनेंगे।
     
    मुख्यमंत्री योगी गोरखनाथ मंदिर में युगपुरुष ब्रह्मलीन महंत दिग्विजयनाथ की 57वीं और राष्ट्रसंत ब्रह्मलीन महंत अवेद्यनाथ की 12वीं पुण्यतिथि पर आयोजित सप्त दिवसीय समारोह के तहत व्याख्यान को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने दोनों आचार्यों को श्रद्धांजलि अर्पित कर उनके योगदान को याद किया।
     
    रामभक्तों को पहचानना होगा कालनेमि
    मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि अयोध्या में भगवान राम और सनातन का वैभव जिन्हें बर्दाश्त नहीं है, वे दुष्प्रचार और भ्रम पैदा करेंगे। जिस तरह संजीवनी बूटी लेने जाते समय हनुमान जी ने कालनेमि को पहचान लिया था, उसी तरह रामभक्तों को भी भ्रम फैलाने वालों को पहचानना होगा।
     
    उन्होंने कहा कि महंत दिग्विजयनाथ भारत की आजादी को केवल राजनीतिक स्वतंत्रता तक सीमित नहीं मानते थे। संपूर्ण स्वाधीनता के लिए सांस्कृतिक स्वतंत्रता भी जरूरी थी। उनका मानना था कि सोमनाथ मंदिर की पुनर्प्राण प्रतिष्ठा हो सकती है तो अयोध्या में भी यह कार्य होना चाहिए
     
    मुख्यमंत्री ने कहा कि 1949 में रामलला के प्रकटीकरण के समय महंत दिग्विजयनाथ, बाबा अभिराम दास और महंत रामचंद्र दास परमहंस सक्रिय थे। इसकी रणनीति देवीपाटन में महंत दिग्विजयनाथ, महाराजा बलरामपुर और तत्कालीन गोंडा जिलाधिकारी केके नायर के बीच बनी थी। आज 500 वर्षों बाद अयोध्या में भगवान श्रीराम का भव्य मंदिर सनातन धर्मावलंबियों को गौरव की अनुभूति करा रहा है।
     
    मोदी के नेतृत्व में दिख रहा सनातन का वैभव
    मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में काशी विश्वनाथ धाम, अयोध्या में श्रीराम जन्मभूमि और विंध्यवासिनी धाम का भव्य स्वरूप सामने है। प्रयागराज महाकुंभ ने दुनिया के सामने सनातन परंपरा का सामर्थ्य रखा है। उन्होंने वृंदावन के वैष्णव कुंभ का भी उल्लेख किया।
     
    उन्होंने कहा कि महंत दिग्विजयनाथ ने बिखरे नाथ संप्रदाय को अखिल भारतीय भेष बारह पंथ योगी महासभा के रूप में एकजुट किया। अपनी परंपरा का पालन करते हुए वृहद सनातन धर्म की एकता को मजबूत करना होगा।
     
    दोनों आचार्यों ने रखी भविष्य की मजबूत नींव
    मुख्यमंत्री योगी ने युगपुरुष ब्रह्मलीन महंत दिग्विजयनाथ और अपने पूज्य गुरुदेव राष्ट्रसंत ब्रह्मलीन महंत अवेद्यनाथ को नमन करते हुए कहा कि दोनों आचार्यों ने जिन विषयों के लिए जीवन समर्पित किया, उन्हें नई पीढ़ी तक पहुंचाना जरूरी है। महापुरुषों के दूरदर्शी कार्य भविष्य की मजबूत नींव तैयार करते हैं। गोरक्षपीठ और महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद दोनों आचार्यों के आदर्शों को आगे बढ़ा रहे हैं।
     
    गुलामी के दौर में रखी शिक्षा की नींव
    मुख्यमंत्री ने कहा कि देश गुलाम था और संसाधनों का अभाव था, तब महंत दिग्विजयनाथ ने 1932 में महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद की स्थापना की। महाराणा प्रताप को आदर्श बनाने के पीछे स्वदेश, स्वाभिमान और स्वधर्म का भाव था।
     
    उन्होंने कहा कि गोरखपुर विश्वविद्यालय की स्थापना में भी महंत दिग्विजयनाथ की महत्वपूर्ण भूमिका रही। विश्वविद्यालय के लिए मठ की संपत्ति और दो संस्थाएं सरकार को देने में उन्होंने श्रेय की चिंता नहीं की। आज महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद के अंतर्गत 50 से 55 संस्थाएं संचालित हैं। इनमें विश्वविद्यालय, मेडिकल कॉलेज, आयुर्वेद कॉलेज, इंजीनियरिंग कॉलेज, पॉलिटेक्निक, विद्यालय, अस्पताल और कृषि विज्ञान केंद्र शामिल हैं
     
    मुख्यमंत्री ने कहा कि महंत दिग्विजयनाथ ने उस दौर में बालिका शिक्षा के लिए विद्यालय और महाविद्यालय स्थापित किए। गोरखपुर में फर्टिलाइजर कारखाने और बीआरडी मेडिकल कॉलेज की स्थापना के प्रयासों को आगे बढ़ाने में भी उनकी भूमिका रही।
     
    गोरक्षपीठ में जाति-पंथ का भेदभाव नहीं
    मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि गोरक्षपीठ नाथ परंपरा की पीठ होते हुए भी पूरे सनातन धर्म के लिए समर्पित है। यहां जाति, पंथ या संप्रदाय के आधार पर भेदभाव नहीं होता। सभी जातियों के लोग एक पंक्ति में अन्न ग्रहण करते हैं और सभी आचार्यों व संतों को समान सम्मान मिलता है।
     
    वक्ताओं ने भी याद किया योगदान
    अयोध्या से आए जगद्गुरु स्वामी रामदिनेशाचार्य ने कहा कि महंत दिग्विजयनाथ ने शिक्षा, स्वास्थ्य और भारतीय परंपरा को आगे बढ़ाया। गोरखनाथ मंदिर आज सामाजिक समरसता का भी केंद्र है। काशी से आए जगद्गुरु रामानंदाचार्य डॉ. रामकमल दास वेदांती ने कहा कि संत की साधना तभी सार्थक है, जब उससे लोककल्याण का मार्ग खुले। महायोगी गोरखनाथ विश्वविद्यालय के कुलपति लेफ्टिनेंट जनरल डॉ. भूपेश कुमार गोयल ने कहा कि 1932 में बोया गया शिक्षा का बीज आज विशाल स्वरूप ले चुका है।
     
    कार्यक्रम में डॉ. रामनरेश पांडे की पुस्तक श्री हनुमत् कथा पूजनम् का मुख्यमंत्री योगी और संतों ने विमोचन किया।
     
    कार्यक्रम में ये रहे मौजूद
    कार्यक्रम में जगद्गुरु द्वाराचार्य स्वामी राजेंद्र दास देवाचार्य, महंत बालकनाथ योगी, महंत योगी चेताईनाथ, जगद्गुरु संतोषाचार्य सतुआ बाबा और महंत मिथिलेशनाथ उपस्थित रहे।