Category: राज्य

  • लॉरेंस बिश्नोई गैंग से जुड़े मोस्ट वांटेड पर शिकंजा, 5 लाख का इनामी हिसार में गिरफ्तार

    लॉरेंस बिश्नोई गैंग से जुड़े मोस्ट वांटेड पर शिकंजा, 5 लाख का इनामी हिसार में गिरफ्तार

    हिसार

    हरियाणा पुलिस की स्पेशल टास्क फोर्स (STF) ने पंजाब के 5 लाख रुपए के इनामी मोस्ट वांटेड अपराधी और लॉरेंस बिश्नोई ग्रुप सक्रिय सदस्य को गिरफ्तार किया है। हिसार STF की टीम ने आरोपी को राजगढ़ रोड स्थित बाईपास फ्लाईओवर के पास से दबोच लिया।पकड़े गए आरोपी की पहचान पंजाब के अबोहर स्थित राजीव नगर निवासी शक्ति कुमार के रूप में हुई है। पुलिस पूछताछ में खुलासा हुआ है कि आरोपी कुख्यात लॉरेंस बिश्नोई ग्रुप से जुड़ा हुआ है। STF ने आरोपी के कब्जे से एक अवैध 32 बोर पिस्तौल और तीन जिंदा कारतूस बरामद किए हैं। आरोपी अबोहर के कारोबारी संजय वर्मा के मर्डर में शामिल रहा है।

    एनकाउंटर में मारे गए रामरतन ने दिया था हथियार..

        आरजू के कहने पर शामिल हुआ: शक्ति कुमार ने बताया कि अबोहर के राजावाली निवासी आरजू बिश्नोई उसका गहरा दोस्त है। आरजू के कहने पर ही वह लॉरेंस बिश्नोई ग्रुप में शामिल हुआ था।

        शोरूम मालिक की रेकी: 7 जुलाई 2025 को अबोहर में 'न्यू वेयरवेल शोरूम' के मालिक संजय वर्मा की हत्या से पहले आरोपी ने आरजू बिश्नोई और अक्षय डेलू के कहने पर पूरे शोरूम और संजय वर्मा की रेकी की थी। इसके बाद साथियों के साथ मिलकर वारदात को अंजाम दिया।

        हत्या के बाद मिला था पिस्टल: वारदात के बाद जब आरोपी फरार हो रहे थे, तब पटियाला निवासी रामरतन ने अबोहर बाईपास फ्लाईओवर के नीचे अपनी गाड़ी में शक्ति कुमार को यह अवैध पिस्तौल और कारतूस दिए थे। बता दें कि रामरतन बाद में पुलिस एनकाउंटर में मारा जा चुका है।

    5 लाख का इनाम और 2 राज्यों में मुकदमे
    पंजाब के अबोहर में हुई इस हत्या के मामले में थाना सिटी-1 (फाजिल्का) में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 103(3)(5) और आर्म्स एक्ट के तहत केस दर्ज था। वारदात के बाद से फरार चल रहे शक्ति कुमार पर पंजाब पुलिस ने 5 लाख रुपये का इनाम घोषित किया था।

    वहीं, हिसार में अवैध हथियार और लॉरेंस गैंग का सक्रिय सदस्य होने के नाते आरोपी के खिलाफ थाना आजाद नगर (हिसार) में 2 अक्टूबर 2026 को आर्म्स एक्ट की धारा 25(1-B)a, 25(6), 54 और 59 के तहत FIR नंबर 520 दर्ज की गई है। हिसार STF आरोपी से आगे की पूछताछ कर रही है, जिसके बाद उसे पंजाब पुलिस के हवाले किया जाएगा।

  • LPU हिंसा में पुलिस की बड़ी कार्रवाई, पेट्रोल लाने वाले की जानकारी मिली; फरहत की तलाश में छापेमारी

    LPU हिंसा में पुलिस की बड़ी कार्रवाई, पेट्रोल लाने वाले की जानकारी मिली; फरहत की तलाश में छापेमारी

    फगवाड़ा
    फगवाड़ा स्थित लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी (LPU) हिंसा मामले में पुलिस की गाड़ियां जलाने वाले 2 छात्रों की पहचान हुई है। पुलिस इनकी गिरफ्तारी कर चुकी है। इन्हें जल्द ही बाय एयर मुंबई से जालंधर लाया जाएगा।

    उधर, पुलिस की जांच में खुलासा हुआ है कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर माहौल बिगाड़ने और पुलिस की गाड़ियों पर हमला करवाने के पीछे इन्फ्लुएंसर्स मोहम्मद फरहत देव और जेम्स दहिया का मुख्य हाथ है। आरोपी फरहत को दबोचने के लिए पुलिस जम्मू-कश्मीर के किश्तवाड़ गई है।

    वहीं मुंबई से गिरफ्तार आरोपियों को लेकर पुलिस का कहना है कि कृष्ण कुमार और छात्र भविष्य को अच्छी तरह पता था कि मौके पर पेट्रोल कौन लाया था। पुलिस ने अभी दोनों के फोटो जारी नहीं किए हैं। यह दावा किया जा रहा है कि बवाल के बाद इन्होंने जलती गाड़ियों की वीडियो शेयर कर लिखा था कि हमें इंसाफ मिल गया है।
    हिंसा के दौरान पुलिस की गाड़ियों को फूंकने का आरोप कृष्ण कुमार और छात्र भविष्य पर लगा है।

    मुंबई से गिरफ्तार आरोपी फगवाड़ा कोर्ट में होंगे पेश पुलिस दोनों आरोपियों को फ्लाइट के जरिए अभी जालंधर लेकर आ रही है। पुलिस इन दोनों को फगवाड़ा कोर्ट में पेश करके रिमांड हासिल करेगी। इनसे पूछताछ में ही साफ होगा कि गाड़ियों को आग लगाने के लिए पेट्रोल कौन लेकर आया था। वहीं, वहां मौजूद छात्रों को पथराव और गाड़ी जलाने के लिए किसने भड़काया था।

    गिरफ्तारी से पहले जेम्स की वीडियो, बोला- निस्वार्थ भाव से किया सब जेम्स दहिया ने गिरफ्तारी से पहले अपने इंस्टाग्राम हैंडल पर वीडियो पोस्ट कर कहा था कि जब वहां पर आगजनी हुई थी, तब वह पास में स्थित पंप से पेट्रोल डलवाकर जा रहा था। तभी पुलिस ने उसे रोककर कहा कि तू वीडियो बना रहा था। फिर मेरे को फोन देने के लिए कहा, लेकिन मैंने दिया नहीं। फिर मुझे छोड़ दिया गया। जेम्स ने कहा कि उसने जो भी किया है, वह सब निस्वार्थ भाव से किया है। पूछताछ में आरोपी ने माना कि जब पुलिस द्वारा लाठीचार्ज किया गया, तभी जोश में पुलिस की गाड़ी पलटा दी थी।

    इन्फ्लुएंसर को पकड़ने के लिए छापेमारी जारी पुलिस जम्मू-कश्मीर से साहिल और अंतरिक्ष को गिरफ्तार कर चुकी है। जांच में दोनों ने बताया कि इन्फ्लुएंसर फरहत के साथ उनका अटैच ग्रुप है। उसी ने तोड़-फोड़ के लिए उकसाया था। हम भी जोश में आ गए। इसके बाद उसके साथ मिलकर तोड़-फोड़ में साथ देने लग गए। फरहत की गिरफ्तारी के बाद कई खुलासे होने की संभावना है।

    अब तक इस मामले में क्या-क्या हुआ

        छात्रा के साथ बाहर से आए एक प्लंबर ने रेप किया: 26 सितंबर 2026 की रात सोशल मीडिया पर यह दावा किया गया कि LPU हॉस्टल में रहने वाली एक छात्रा के साथ बाहर से आए एक प्लंबर ने रेप किया है और प्रशासन कार्रवाई नहीं कर रहा है। इस सूचना के बाद हजारों छात्र भड़क गए।

        यूनिवर्सिटी के अंदरूनी हिस्सों को नुकसान पहुंचाया: छात्रों ने यूनिवर्सिटी के अंदरूनी हिस्सों और संपत्ति को नुकसान पहुंचाया और परिसर में बने यूनि मॉल की दुकानों में तोड़फोड़ व लूटपाट की। प्रदर्शनकारियों ने जालंधर-फगवाड़ा मार्ग पर स्थित नेशनल हाईवे-44 को 18 घंटे से अधिक समय तक जाम रखा, जिससे भारी यातायात बाधित हुआ।

        पीड़िता की पहचान अस्पष्ट, अफवाहों का खंडन हुआ: सोशल मीडिया पर जिस छात्रा के हवाले से रेप की बात कही जा रही थी, उसने खुद वीडियो जारी कर अपने सुरक्षित होने और ऐसी कोई घटना न होने की बात स्पष्ट की, जिससे पुलिस के सामने मुख्य सवाल यह है कि वास्तव में पीड़िता कौन है?

        पुलिस और SIT की कार्रवाई: पंजाब पुलिस ने तोड़फोड़, आगजनी और हिंसा के सिलसिले में कुल 4 FIR दर्ज की हैं। एक 8 सदस्यीय SIT का गठन किया है। सीसीटीवी के आधार पर पुलिस ने 3 आरोपियों को गिरफ्तार भी किया है। साथ ही, भड़काऊ व फर्जी AI वीडियो फैलाने वाले लगभग 300 सोशल मीडिया पोस्ट को हटाने के लिए साइबर क्राइम ने कार्रवाई की है।

        यूनिवर्सिटी बंद की गई: हिंसा और तनाव के माहौल को देखते हुए यूनिवर्सिटी मैनेजमेंट ने LPU कक्षाओं को 10 दिनों के लिए निलंबित कर दिया और मिड-सेमेस्टर की परीक्षाओं को स्थगित कर छात्रों को घर जाने की अनुमति दी।

       पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट भी सख्त: हाईकोर्ट ने मामले का संज्ञान लेते हुए पंजाब सरकार और पुलिस से विस्तृत स्टेटस रिपोर्ट मांगी है कि क्या घटना वास्तविक थी या महज अफवाह? अगली सुनवाई 8 अक्टूबर 2026 को तय की गई है।

        राजनीतिक प्रतिक्रियाएं आईं: विपक्षी नेताओं ने घटना की उच्चस्तरीय जांच की मांग की है और आरोप लगाया है कि इस प्रदर्शन की आड़ में बाहरी उपद्रवियों ने माहौल खराब करने की साजिश रची थी।

  • आराधना मिश्रा मोना बनीं यूपी कांग्रेस अध्यक्ष, इमरान मसूद को भी बड़ी जिम्मेदारी

    आराधना मिश्रा मोना बनीं यूपी कांग्रेस अध्यक्ष, इमरान मसूद को भी बड़ी जिम्मेदारी

     लखनऊ

    कांग्रेस ने अगले साल उत्तर प्रदेश में होने वाले विधानसभा चुनाव से ठीक पहले प्रदेश की रामपुर खास सीट से तीसरी बार विधायक आराधना मिश्रा ‘मोना’ को पार्टी का प्रदेश अध्यक्ष बनाया है। इसके साथ ही कांग्रेस अपने पारंपरिक वोटबैंक की तरफ लौटती दिख रही है। शुक्रवार देर शाम यूपी कांग्रेस संगठन में की गईं तैनातियों में कांग्रेस अपने पुराने वोटबैंक की तरफ बढ़ती दिख रही है। प्रभारी दलित हैं, जबकि प्रदेश अध्यक्ष ब्राह्मण और कार्यकारी अध्यक्ष मुस्लिम हैं। यही तीनों 80 के दशक तक कांग्रेस के बेस वोटर थे। अब लाख टके का सवाल ये है क्या 2027 के रण में इस बेस वोटर को कांग्रेस की ओर लौटाने का कमाल सचमुच हो पाएगा?

    बीते लोकसभा चुनाव में कांग्रेस 17 सीटों पर लड़कर छह सीटें जीतने में कामयाब रही थी। वहीं, सपा के साथ मिलकर इंडिया गठबंधन को यूपी में कुल 43 सीटें मिली थीं। माना गया कि ‘संविधान बचाओ’ के नाम पर दलित वर्ग का एक बड़ा हिस्सा कांग्रेस में आया और कांग्रेस के नाम पर ही उसने गठबंधन उम्मीदवार को वोट किया था। लोकसभा चुनाव के नतीजों से उत्साहित कांग्रेस अब अगले साल प्रस्तावित विधान सभा चुनाव के पहले अपना पुराना वोटबैंक सहेजती दिख रही है। यही वजह है कि लोकसभा चुनाव के वक्त यूपी कांग्रेस के प्रभारी रहे अविनाश पांडे को हटाकर पहले उसने दलित वर्ग से आने वाले राजेंद्र पाल गौतम को नया प्रभारी बनाया।

    अब शुक्रवार देर शाम जारी किए गए बदलाव के आदेशों में वह उससे और आगे बढ़कर ब्राह्मण, दलित और मुस्लिम मतदाताओं में सकारात्मक संदेश देती दिखाई दे रही है। पार्टी ने ओबीसी समुदाय को भी लुभाने के लिए कांग्रेस विधानमंडल दल का नेता ओबीसी समुदाय से आने वाले वीरेंद्र चौधरी को सौंप दिया है। इसके अलावा वरिष्ठ उपाध्यक्ष के पद पर भी पार्टी ने देवेंद्र निषाद को शामिल करके निषाद समुदाय में भी एक बड़ा संदेश दिया है। कुल मिलाकर पार्टी ने चुनाव के पहले यूपी में सांगठनिक फेरबदल के माध्यम से जातियों का बड़ा गुलदस्ता सजाया है।

    इमरान मसूद को कार्यकारी अध्यक्ष बनाकर दिया ये संदेश
    कांग्रेस ने सहारनपुर से सांसद इमरान मसूद को पार्टी का कार्यकारी अध्यक्ष बनाया है। इससे कांग्रेस पश्चिम यूपी में दलित-मुस्लिम गठजोड़ का संदेश देना चाहती है। पश्चिम में वोटरों के लिहाज से देखें तो हिंदू मतदाताओं में सबसे बड़ा हिस्सा दलितों का है। दलितों में जाटवों की हिस्सेदारी बड़ी है। राजेंद्र पाल गौतम जाटव बिरादरी से आते हैं। पार्टी ने इमरान मसूद को कार्यकारी अध्यक्ष बनाकर पश्चिम यूपी के मुस्लिम मतदाताओं में सकारात्मक संदेश दिया है। सपा-कांग्रेस गठबंधन के लिए पश्चिम अभी भी बड़ी चुनौती है, ऐसे में यह गठजोड़ नई राजनीतिक संभावनाएं खड़ी कर सकता है।

    वरिष्ठ नेता प्रमोद तिवारी की बेटी हैं आराधना मिश्रा
    आराधना मिश्रा कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद प्रमोद तिवारी की बेटी हैं। वह उस राजनीतिक विरासत का प्रतिनिधित्व करती हैं। ऐसे में आराधना मिश्रा के बहाने सपा से समन्वय ज्यादा आसान होगा। उनके संबंध प्रियंका गांधी से भी बेहद अच्छे हैं और राहुल कैंप में भी वह फिट हैं। ऐसे में पार्टी नेतृत्व को उनपर ज्यादा भरोसा है। वह, ब्राह्मण समुदाय से आती हैं तो एक समय तक पार्टी का पारंपरिक वोटर रहे ब्राह्मणों में भी संदेश है। पार्टी आधी आबादी में भी सकारात्मक संदेश देना चाहती है।

    अजय राय के योगदान को कांग्रेस ने सराहा
    कांग्रेस ने अजय राय के पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष के तौर पर दिए गए योगदान की प्रशंसा की है। अजय राय ने भी कहा कि मुझ जैसे सामान्य कार्यकर्ता यूपी कांग्रेस अध्यक्ष बनाने के लिए मैं उनका आजीवन आभारी रहूंगा। राय ने नई प्रदेश अध्यक्ष और अन्य पदाधिकारियों को शुभकामनाएं दी हैं। अगस्त 2023 में पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष के पद पर तैनात किए गए अजय राय ने तीन वर्ष से अधिक के कार्यकाल में यूपी कांग्रेस में नई जान फूंकने का प्रयास किया। वह इस दरमियान कांग्रेस की मुखर आवाज के तौर पर सत्ता को चुनौती देते रहे। उन्होंने जिस तरह से कांग्रेस के तत्कालीन यूपी प्रभारी अविनाश पांडे के साथ मिलकर 2024 के लोकसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी के साथ हुए गठबंधन में मजबूत 'केमेस्ट्री' का संदेश दिया, वह इससे पहले पार्टी ने किसी भी गठबंधन में नहीं देखा गया था। इसी का असर रहा था कि 2019 में महज एक सीट पर सिमट गई कांग्रेस दोबारा 2024 के लोकसभा चुनाव में छह सीट जीतने में कामयाब रही। यह बात दीगर है कि अजय राय को तीन साल में पार्टी ने उनकी नई टीम नहीं दी। बावजूद इसके वह लगातार पार्टी को सक्रिय बनाए रहे। उनकी बेबाकी और सत्ता के प्रति तल्ख तेवर ने पार्टी कार्यकर्ताओं में नया उत्साह भरा था।

    अराधना मिश्रा ने जताया आभार
    आराधना मिश्रा ने प्रदेश अध्यक्ष बनाए जाने पर पार्टी के शीर्ष नेतृत्व का आभार व्यक्त किया है। उन्होंने हिन्दुस्तान से बातचीत में कहा कि मैं अपनी चौथी पीढ़ी का प्रतिनिधित्व कर रही हूं, जो कांग्रेस के साथ है। पार्टी नेतृत्व का बहुत आभार कि उसने मुझे यह जिम्मेदारी दी है। मैं, पार्टी के हर कार्यकर्ता, पूर्व और वरिष्ठों को साथ लेकर चलूंगी। 2027 में कांग्रेस की सरकार बनेगी। अब वक्त कम है, लिहाजा ज्यादा ऊर्जा के साथ काम करेंगे।

  • महिलाओं के लिए बड़ा बदलाव, दिल्ली की बसों में मुफ्त यात्रा के लिए जरूरी होगा पिंक सहेली कार्ड

    महिलाओं के लिए बड़ा बदलाव, दिल्ली की बसों में मुफ्त यात्रा के लिए जरूरी होगा पिंक सहेली कार्ड

     नई दिल्ली

    दिल्ली में डीटीसी बसों में महिलाओं के लिए यात्रा मुफ्त है. लेकिन अब उनके सफर का तरीका बदलने वाला है. अभी तक यात्रा के लिए बस कंडक्टर से मिलने वाला कागज का पिंक टिकट जल्द ही बंद हो सकता है. दिल्ली सरकार इस संबंध में जल्द नोटिफिकेशन जारी कर सकती है. इसके बाद महिलाओं को मुफ्त बस यात्रा के लिए 'पिंक सहेली स्मार्ट कार्ड' रखना जरूरी होगा। 

    दिल्ली के परिवहन विभाग पहले ही कह चुका था कि 1 अक्टूबर से मुफ्त सफर के लिए स्मार्ट कार्ड अनिवार्य किया जाएगा. हालांकि, बस में बैठने के बाद कंडक्टर से मिलने वाले पिंक टिकट की सुविधा को कई बार आगे बढ़ाया गया था. अब सरकार कागज वाले टिकट की व्यवस्था से स्मार्ट कार्ड की ओर बढ़ रही है। 

    करीब 19 लाख कार्ड पहले ही जारी
    दिल्ली सरकार के परिवहन मंत्री पंकज कुमार सिंह ने बताया कि इस संबंध में जल्द नोटिफिकेशन जारी किया जाएगा. इसके बाद पिंक सहेली कार्ड को अनिवार्य कर दिया जाएगा. उन्होंने कहा कि अब तक करीब 19 लाख पिंक सहेली कार्ड जारी किए जा चुके हैं। 

    एक वरिष्ठ डीटीसी अधिकारी के मुताबिक, अगले 10 दिनों तक महिलाओं के बीच जागरूकता अभियान चलाया जाएगा. इस दौरान महिला यात्रियों को पिंक सहेली कार्ड बनवाने के लिए जागरूक किया जाएगा, ताकि कार्ड व्यवस्था लागू होने पर उन्हें बस में सफर करने में परेशानी न हो। 

    कौन बनवा सकता है कार्ड?
    पिंक सहेली कार्ड दिल्ली में रहले वाली महिलाओं और ट्रांसजेंडर समुदाय के लिए उपलब्ध है. इसके लिए उम्र कम से कम 5 साल होनी चाहिए. कार्ड बनवाते समय आधार कार्ड, आधार से जुड़ा मोबाइल नंबर और नाम समेत जरूरी जानकारी देनी होगी. पहली बार कार्ड बनवाने के लिए कोई शुल्क नहीं देना होगा. कार्ड खो जाने या खराब होने की स्थिति में नया कार्ड बनवाने के लिए 59 रुपये देने होंगे. इसमें जीएसटी शामिल है. कार्ड जारी होने की तारीख से 5 साल तक वैध रहेगा। 

    कार्ड बनवाने के दो तरीके
    पिंक सहेली कार्ड ऑफलाइन और ऑनलाइन, दोनों तरीकों से बनवाया जा सकता है.

    ऑफलाइन आवेदन कैसे करें?
    इसके लिए डीटीसी सेंटर, डीएम ऑफिस या एसडीएम ऑफिस जाना होगा. वहां एफओएस एजेंट को नाम, मोबाइल नंबर और आधार की जानकारी देनी होगी. ओटीपी से सत्यापन पूरा होने के बाद कार्ड उसी दिन जारी किया जा सकता है। 

    ऑनलाइन आवेदन कैसे करें?
    ऑनलाइन खुद आवेदन करने के लिए MufinPay पर मोबाइल नंबर और आधार की जानकारी भरनी होगी. ओटीपी वेरिफिकेशन के बाद क्यूआर एक्नॉलेजमेंट डाउनलोड किया जा सकेगा. इसके बाद अधिकृत डीटीसी सेंटर से फिजिकल कार्ड लेना होगा। 

    मेट्रो और रैपिड रेल में भी चलेगा कार्ड
    पिंक सहेली स्मार्ट कार्ड का इस्तेमाल डीटीसी और क्लस्टर बसों में मुफ्त सफर के लिए किया जा सकेगा. इसके अलावा यह दिल्ली मेट्रो और नमो भारत रैपिड रेल में भी यात्रा कार्ड की तरह इस्तेमाल हो सकता है. हालांकि, मेट्रो और आरआरटीएस में सफर मुफ्त नहीं होगा. इन सेवाओं का इस्तेमाल करने के लिए कार्ड में पहले पैसे डालने होंगे. कार्ड के पीछे दिए क्यूआर कोड को यूपीआई ऐप से स्कैन करके इसमें रकम डाली जा सकती है. दिल्ली मेट्रो में कार्ड का बैलेंस इस्तेमाल करने के लिए मेट्रो स्टेशन की एवीएम मशीन से टॉप-अप करना होगा। 

    पिंक सहेली स्मार्ट कार्ड नहीं तो क्या करें?
    अगर आप दिल्ली में डीटीसी या क्लस्टर बसों से सफर करती हैं और मुफ्त यात्रा का लाभ जारी रखना चाहती हैं, तो पिंक सहेली कार्ड बनवाना जरूरी हो सकता है. करीब 50 अधिकृत केंद्रों पर जाकर कार्ड बनवाया जा सकता है. पहली बार कार्ड मुफ्त होने के कारण यात्रियों के लिए इसे समय रहते बनवाना आसान रहेगा। 

  • बिहार के 3 प्रस्तावित एयरपोर्ट के लिए बनेगा डिजिटल लैंड बैंक, जमीन रिकॉर्ड से खरीद तक होगी निगरानी

    बिहार के 3 प्रस्तावित एयरपोर्ट के लिए बनेगा डिजिटल लैंड बैंक, जमीन रिकॉर्ड से खरीद तक होगी निगरानी

    पटना
     बिहार में प्रस्तावित तीन ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट के लिए जमीन जुटाने की प्रक्रिया अब तेज होगी। सोनपुर (सारण), भागलपुर और मुंगेर में एयरपोर्ट के लिए जमीन की संयुक्त मापी, स्वामित्व की जांच और सीधे खरीद की प्रक्रिया में सहयोग के लिए सलाहकार नियुक्त किए जाएंगे।

    नागरिक विमानन विभाग ने इसके लिए योग्य और अनुभवी कंसल्टेंसी फर्मों से प्रस्ताव मांगे हैं। सलाहकार जमीन के रिकॉर्ड से लेकर निबंधन और दाखिल-खारिज तक की प्रक्रिया में सहयोग करेंगे।

    जमीन की खरीद से डिजिटल लैंड बैंक तक होगा काम
    चयनित कंसल्टेंसी फर्म को केवल जमीन की पहचान तक सीमित नहीं रहना होगा। वह जमीन के रिकॉर्ड की जांच, स्वामित्व सत्यापन, सीधे जमीन खरीद में सहयोग, निबंधन और दाखिल-खारिज की प्रक्रिया में भी मदद करेगी।

    इसके साथ ही तीनों प्रस्तावित एयरपोर्ट के लिए डिजिटल लैंड बैंक तैयार करने की जिम्मेदारी भी सलाहकार की होगी।

    गुणवत्ता और लागत के आधार पर होगा कंसल्टेंट का चयन
    नागरिक विमानन विभाग के अनुसार कंसल्टेंट का चयन गुणवत्ता एवं लागत आधारित चयन पद्धति से किया जाएगा। इसमें तकनीकी प्रस्ताव को 70 प्रतिशत और वित्तीय प्रस्ताव को 30 प्रतिशत अंक दिए जाएंगे।

    निविदा में भाग लेने की प्रक्रिया 30 सितंबर से शुरू हो चुकी है। इच्छुक एजेंसियां 22 अक्टूबर तक अपना प्रस्ताव जमा कर सकेंगी।

    15 अक्टूबर को होगी प्री-बिड बैठक
    विभाग की ओर से 15 अक्टूबर को प्री-बिड बैठक आयोजित की जाएगी। इसमें इच्छुक कंसल्टेंसी फर्म निविदा से जुड़े बिंदुओं पर जानकारी ले सकेंगी।

    तकनीकी प्रस्ताव 23 अक्टूबर को नागरिक विमानन विभाग के कार्यालय में खोले जाएंगे। तकनीकी रूप से योग्य पाए जाने वाले कंसल्टेंटों के वित्तीय प्रस्ताव बाद में खोले जाएंगे।

    जमीन के कागजात से खरीद तक निगरानी
    चयनित कंसल्टेंट को जमीन से जुड़े रिकॉर्ड की बारीकी से जांच करनी होगी। स्वामित्व स्पष्ट करने के बाद जमीन की खरीद और निबंधन की प्रक्रिया में सहयोग किया जाएगा।

    इसके बाद दाखिल-खारिज समेत अन्य जरूरी राजस्व प्रक्रियाओं को पूरा कराने में भी कंसल्टेंसी फर्म मदद करेगी।

    तीन शहरों में एयरपोर्ट की जमीन पर फोकस
    सोनपुर, भागलपुर और मुंगेर में प्रस्तावित ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट के लिए जमीन जुटाना इस पूरी प्रक्रिया का मुख्य लक्ष्य है। विभाग की ओर से जमीन की मापी से लेकर डिजिटल लैंड बैंक तैयार करने तक की प्रक्रिया को व्यवस्थित करने की तैयारी की जा रही है। कंसल्टेंट की नियुक्ति के बाद तीनों परियोजनाओं के लिए जमीन संबंधी काम को गति मिलने की उम्मीद है।

     

  • गेहूं से ज्यादा दलहन-तिलहन पर फोकस, रबी MSP बढ़ने से किसानों को मिलेगा फायदा

    गेहूं से ज्यादा दलहन-तिलहन पर फोकस, रबी MSP बढ़ने से किसानों को मिलेगा फायदा

    बांदा
    केंद्र सरकार ने रबी विपणन सीजन 2027-28 के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) में बढ़ोतरी का ऐलान किया है। सरकार ने इस बार गेहूं की तुलना में दलहन-तिलहन पर ज्यादा मेहरबानी दिखाई है।

    गेहूं का एमएसपी 2585 से बढ़ाकर 2610 रुपये प्रति क्विंटल किया गया है, यानी सिर्फ 25 रुपये की वृद्धि। जबकि चने में 83 रुपये, मसूर में 390 रुपये, रेपसीड-सरसों में 413 रुपये, जौ में 136 रुपये, कुसुम (तिलहन) में सबसे ज्यादा 675 रुपये बढ़ाया है। हालांकि जिले में कुसुम का उत्पादन किया ही नहीं जाता है।

    दलहन और खाद्य तेलों के आयात को कम करने पर फोकस
    सरकार की मंशा स्पष्ट है कि देश में गेहूं का बफर स्टाक पहले से ही पर्याप्त है। 2014-15 से 2025-26 के बीच 3715 लाख टन गेहूं की खरीद एमएसपी पर हुई है, जो 2004-05 से 2013-14 के 2254 लाख टन से काफी अधिक है। इसलिए अब फोकस दलहन और खाद्य तेलों के आयात को कम करने पर है। जिले के किसानों के लिए यह फैसला सीधे जेब से जुड़ा है। लेकिन गेहूं के दाम में कम बढ़ोतरी पर किसान मायूस हैं।

    जिले में 3.39 लाख किसान हैं, जो करीब 3.77 लाख हेक्टेयर खेती में रबी फसलों की पैदावार करते हैंं। इसमें से 1.94 लाख खेती में किसान गेहूं की उपज पैदा करते हैं। जिले में रबी की मुख्य फसलें गेहूं, चना, मसूर और सरसों हैं।

    अतिरिक्त लाभ का हिसाब
    कृषि विभाग के आंकड़ों के अनुसार, बीते वर्ष 2026-27 में जिले की मंडियों और सरकारी क्रय केंद्रों पर कुल 6,00,120 क्विंटल गेहूं, 1,52,051 क्विंटल चना, 41,444 क्विंटल मसूर और 23,526 क्विंटल सरसों की खरीद/उत्पादन दर्ज किया गया था।

    यदि इसी उत्पादन को आधार मानें तो नए बढ़े हुए एमएसपी से किसानों को होने वाले अतिरिक्त फायदे में गेहूं बीते वर्ष 6,00,120 क्विंटल हुआ, इसमें बढ़ोतरी धनराशि यदि 25 रुपये बढ़ा दिया जाए तो करीब 1.50 करोड़ रुपये की होगी। वहीं यदि चने की बात करें तो बीते वर्ष 1,52,051 क्विंटल का उत्पादन हुआ तो बढ़ोतरी 83 रुपये होने पर अतिरिक्त लाभ में करीब 1.26 करोड़ रुपये का सीधे लाभ होगा।

    मसूर में भी बीते वर्ष 41,444 क्विंटल का उत्पादन हुआ, यदि बढ़ोतरी 390 रुपये होने पर किसानों को होने वाले फायदे की बात करें तो करीब 1.61 करोड़ रुपये का लाभ होगा। सरसों बीते वर्ष 23,526 क्विंटल हुई, बढ़ोतरी 413 रुपये की सरकार ने की तो इस हिसाब से करीब 97 लाख रुपये का अतिरिक्त लाभ होगा।

    यानी यदि आने वाले रबी सीजन में इतना ही उत्पादन हुआ तो बांदा के किसानों की जेब में पिछले साल के मुकाबले कुल पांच करोड़ 35 लाख दो हजार 631 रुपये अतिरिक्त आएंगे। इसमें सबसे ज्यादा फायदा मसूर और सरसों के किसानों को होगा। गेहूं सबसे ज्यादा पैदा होने के बावजूद सबसे कम लाभ देगा।

        पानी की कमी के कारण दलहन-तिलहन की खेती ज्यादा फायदेमंद है। एमएसपी बढ़ने से किसान को चना-मसूर-सरसों में ज्यादा फायदा होगा, किसानों को चाहिए चना, मसूर, सरसों जैसी खेती की ओर लौटें, जिससे भूजल बचेगा और फायदा भी अधिक होगा।

        -संजय कुमार, जिला कृषि अधिकारी, बांदा

    बढ़ोतरी एक नजर में

    फसल 2026-27 2027-28 बढ़ोतरी
    गेहूं 2,585 2,610 25
    जौ 2,150 2,286 136
    चना 5,875 5,958 83
    मसूर 7,000 7,390 390
    रेपसीड-सरसों 6,200 6,613 413
    कुसुम (तिलहन) 6,540 7,215 675

     

  • ‘पूर्व की सरकारों में गांव हुए बदहाल, अराजकता और जातिवाद की आग में झोंका’- सीएम योगी का सपा पर निशाना

    ‘पूर्व की सरकारों में गांव हुए बदहाल, अराजकता और जातिवाद की आग में झोंका’- सीएम योगी का सपा पर निशाना

    गांवों को वोट बैंक समझने वालों की राजनीति से गांव पीछे रह गए- सीएम योगी

    ‘ग्राम स्वराज कोई राजनीतिक नारा नहीं, आत्मनिर्भर यूपी का संकल्प है’—सीएम योगी आदित्यनाथ

    'पूर्व की सरकारों में गांव हुए बदहाल, अराजकता और जातिवाद की आग में झोंका'- सीएम योगी का सपा पर निशाना

    सीएम योगी का दावा- 57,600 ग्राम सचिवालयों में डिजिटल सुविधाओं से बदली गांवों की तस्वीर

    'हमारे ग्राम स्वराज में परिवारवादी मॉडल की कोई जगह नहीं- मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ

    लखनऊ, 
     उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 2 अक्टूबर को गांधी जयंती के अवसर पर ग्राम स्वराज को लेकर अपनी सरकार के कामकाज और गांवों में किए गए बदलावों का जिक्र करते हुए पिछली सरकारों की कार्यशैली पर सवाल उठाए। उन्होंने सोशल मीडिया पर पोस्ट करते हुए कहा कि 2017 से पहले गांवों को विकास के बजाय सिर्फ वादे मिले और गांवों के नाम पर राजनीति होती रही। मुख्यमंत्री ने कहा कि उनकी सरकार गांवों को विकास की अंतिम सीढ़ी नहीं, बल्कि आत्मनिर्भर उत्तर प्रदेश और नए भारत की पहली इकाई मानकर काम कर रही है।

    ‘2017 से पहले गांवों को विकास नहीं, सिर्फ वादे मिले’
    मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा, "वर्ष 2017 से पहले गांवों को विकास नहीं, सिर्फ वादे मिले। गांवों के नाम पर राजनीति होती रही, लेकिन व्यवस्था में न पारदर्शिता थी, न जवाबदेही। आय और जाति प्रमाण-पत्र बनवाने के लिए तहसील, थाना और जिला मुख्यालयों के चक्कर काटने पड़ते थे।"

    उन्होंने आगे कहा, "जिन्होंने गांवों को सिर्फ अराजकता और जातिवाद की आग में झोंका, गांवों को केवल वोट बैंक समझा, उनकी राजनीति की वजह से गांव पीछे रह गए।"

    ‘गांवों को लेकर हमारी सोच अलग है’- सीएम योगी
    सीएम योगी ने कहा कि उनकी सरकार की सोच गांवों को लेकर अलग है। उन्होंने कहा, "हमारी सरकार गांव को विकास की अंतिम सीढ़ी नहीं, नए भारत के आत्मनिर्भर उत्तर प्रदेश की पहली इकाई मानकर काम कर रही है।"

    मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछले साढ़े नौ वर्षों में सरकार ने गांवों से जुड़ी व्यवस्थाओं में बदलाव किया है। उन्होंने कहा, "पिछले साढ़े नौ वर्षों में हमारी सरकार ने इस व्यवस्था को बदला है।"

    57,600 ग्राम सचिवालयों में डिजिटल सुविधा
    मुख्यमंत्री ने गांवों में डिजिटल सुविधाओं और पंचायत व्यवस्था का जिक्र करते हुए कहा, "57,600 ग्राम सचिवालयों में आज ई-ग्राम स्वराज, डिजिटल भुगतान, ऑनलाइन मॉनिटरिंग और ग्राम सचिवालयों के माध्यम से ग्राम वासियों को समस्त सुविधाएं गांव में मिल रही हैं। पंचायतों के कामकाज पारदर्शी और जवाबदेह हैं।"

    उन्होंने यह भी कहा कि ग्राम सचिवालयों के संचालन से गांवों में रोजगार के अवसर पैदा हुए हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा, "ग्राम सचिवालयों के संचालन से प्रत्येक गांव में 5 से 7 रोजगार के अवसर सृजित हुए हैं।"

    11,350 ग्राम पंचायतों में डिजिटल लाइब्रेरी
    सीएम योगी ने गांवों में शिक्षा और डिजिटल सुविधाओं का जिक्र करते हुए कहा कि 11,350 ग्राम पंचायतों में डिजिटल लाइब्रेरी स्थापित की जा रही है।
    ग्राम स्वराज की अवधारणा को लेकर मुख्यमंत्री ने कहा, "हमारे लिए ग्राम स्वराज कोई राजनीतिक नारा नहीं, महात्मा गांधी के सपनों के गांव और उसकी आत्मनिर्भरता का संकल्प है।"

    उन्होंने अपनी पोस्ट के अंत में कहा, "सशक्त पंचायत, समृद्ध गांव और आत्मनिर्भर उत्तर प्रदेश- यही हमारा ग्राम स्वराज है। हमारे ग्राम स्वराज में परिवारवादी मॉडल की कोई जगह नहीं है।"

  • 11,350 ग्राम पंचायतों में स्थापित की जा रही डिजिटल लाइब्रेरी: मुख्यमंत्री

    11,350 ग्राम पंचायतों में स्थापित की जा रही डिजिटल लाइब्रेरी: मुख्यमंत्री

    सशक्त पंचायत, समृद्ध गांव ही ग्राम स्वराज की आधारशिला, इसमें परिवारवादी मॉडल की कोई जगह नहीं: मुख्यमंत्री

    ग्राम स्वराज को आत्मनिर्भर उत्तर प्रदेश की पहली इकाई मानकर काम कर रही हमारी सरकार: मुख्यमंत्री

    सीएम योगी आदित्यनाथ ने कहा- 2017 से पहले गांवों को विकास के बजाय मिले केवल वादे, ग्रामीणों को लगाने पड़ते थे चक्कर

    गांवों को केवल वोट बैंक के रूप में देखने वाली राजनीति के कारण ग्रामीण क्षेत्रों का विकास प्रभावित हुआ: सीएम योगी

    हमारी सरकार में 57,600 ग्राम सचिवालयों में ई-ग्राम स्वराज, डिजिटल भुगतान और ऑनलाइन मॉनिटरिंग की व्यवस्था: सीएम

    11,350 ग्राम पंचायतों में स्थापित की जा रही डिजिटल लाइब्रेरी: मुख्यमंत्री

    लखनऊ,
     राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की जयंती के अवसर पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि उनकी सरकार गांव को विकास की अंतिम सीढ़ी नहीं, बल्कि नए भारत के आत्मनिर्भर उत्तर प्रदेश की पहली इकाई मानकर काम कर रही है। सशक्त पंचायत व समृद्ध गांव ही ग्राम स्वराज की आधारशिला हैं, जिसमें परिवारवादी मॉडल के लिए कोई जगह नहीं है।

    मुख्यमंत्री ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल एक्स पर साझा की गई पोस्ट में कहा कि वर्ष 2017 से पहले गांवों को विकास नहीं, केवल वादे मिले। गांवों के नाम पर राजनीति होती रही, लेकिन व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही का अभाव रहा। आय और जाति प्रमाण-पत्र जैसे सामान्य कार्यों के लिए भी ग्रामीणों को तहसील, थाना और जिला मुख्यालय के चक्कर लगाने पड़ते थे। गांवों को केवल वोट बैंक के रूप में देखने वाली राजनीति के कारण ग्रामीण क्षेत्रों का विकास प्रभावित हुआ। वर्तमान सरकार ने व्यवस्था में बदलाव करते हुए ग्राम पंचायतों को सुविधाओं और सेवाओं से जोड़ने पर काम किया है।

    57,600 ग्राम सचिवालयों में डिजिटल सुविधाएं
    मुख्यमंत्री ने अपनी पोस्ट में लिखा कि पिछले साढ़े नौ वर्षों में प्रदेश के 57,600 ग्राम सचिवालयों के माध्यम से ग्रामीणों को ई-ग्राम स्वराज, डिजिटल भुगतान, ऑनलाइन मॉनिटरिंग जैसी विभिन्न सुविधाएं उपलब्ध कराने की व्यवस्था की गई है। इससे ग्राम पंचायतों के कामकाज में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित की गई है। ग्राम सचिवालयों के संचालन से प्रत्येक गांव में 5 से 7 रोजगार के अवसर भी सृजित हुए हैं। इसके साथ ही प्रदेश की 11,350 ग्राम पंचायतों में डिजिटल लाइब्रेरी स्थापित की जा रही हैं।

    ग्राम स्वराज को बताया आत्मनिर्भरता का संकल्प
    मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार के लिए ग्राम स्वराज कोई राजनीतिक नारा नहीं, बल्कि महात्मा गांधी के सपनों के गांव और उसकी आत्मनिर्भरता का संकल्प है। सशक्त पंचायत व समृद्ध गांव ही ग्राम स्वराज और आत्मनिर्भर उत्तर प्रदेश की आधारशिला हैं। ग्राम स्वराज की इस व्यवस्था में परिवारवादी मॉडल के लिए कोई जगह नहीं है। मुख्यमंत्री ने “सशक्त पंचायत, समृद्ध गांव और आत्मनिर्भर उत्तर प्रदेश” को ग्राम स्वराज की दिशा में सरकार के दृष्टिकोण के रूप में रेखांकित किया।

  • पंजाब कांग्रेस में नेतृत्व परिवर्तन की तैयारी, पायलट के फीडबैक के बाद बड़ा फैसला

    पंजाब कांग्रेस में नेतृत्व परिवर्तन की तैयारी, पायलट के फीडबैक के बाद बड़ा फैसला

    चंडीगढ़ 

    पंजाब में अगले साल की शुरुआत में होने वाले विधानसभा चुनावों से पहले कांग्रेस के संगठन में बड़े बदलाव की तैयारी कर ली है। मामले की जानकारी रखने वाले लोगों ने गुरुवार को बताया कि ऑल इंडिया कांग्रेस कमेटी (AICC) के नए प्रभारी महासचिव सचिन पायलट द्वारा पिछले तीन हफ्तों में जुटाए गए फीडबैक के आधार पर कांग्रेस आलाकमान ने पंजाब कांग्रेस के अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वडिंग को पद छोड़ने के लिए कह दिया है।

    आपको बता दें कि 5 सितंबर को भूपेश बघेल की जगह पंजाब प्रभारी बने सचिन पायलट ने पंजाब के वरिष्ठ नेताओं और सांसदों के साथ बैठकें की। पंजाब से कांग्रेस के 7 लोकसभा सांसदों में से बहुसंख्यक और कई वरिष्ठ क्षेत्रीय नेताओं ने नेतृत्व परिवर्तन की मांग की थी। इसके बाद पार्टी आलाकमान ने एक ऐसे नए प्रदेश अध्यक्ष की तलाश शुरू कर दी है जो सामाजिक और क्षेत्रीय समीकरणों को संतुलित कर सके तथा पंजाब के इकलौते दलित मुख्यमंत्री रहे चरणजीत सिंह चन्नी के साथ मिलकर काम कर सके। पंजाब के एक वरिष्ठ नेता ने बताया कि जैसे ही पार्टी ने भूपेश बघेल को हटाकर सचिन पायलट को कमान सौंपी कि वडिंग की स्थिति कमजोर हो गई थी।

    पिछले नतीजों से तय हो रही रणनीति
    पंजाब में अगले साल की शुरुआत में विधानसभा चुनाव होने हैं। 2022 के चुनावों में आम आदमी पार्टी (AAP) ने 117 में से 92 सीटें जीतकर प्रचंड बहुमत हासिल किया था। उस समय सत्ता में मौजूद कांग्रेस महज 18 सीटों पर सिमट गई थी, जबकि सुखबीर सिंह बादल की शिरोमणि अकाली दल को सिर्फ 3 सीटें मिली थीं। भूपेश बघेल के उलट सचिन पायलट ने संतुलन बनाए रखने के लिए चन्नी और वडिंग दोनों के साथ-साथ अन्य वरिष्ठ नेताओं से भी मुलाकात की। सचिन पायलट ने एक इंटरव्यू में कहा था, "चन्नी के साथ मेरी सौहार्दपूर्ण मुलाकात हुई और उन्होंने मुझे आश्वासन दिया है कि वह चुनावों के लिए पार्टी के प्रयासों में अपना पूरा समर्थन देंगे।"

    नेताओं से फीडबैक लेने के बाद कांग्रेस आलाकमान को सौंपी अपनी रिपोर्ट में सचिन पायलट ने प्रदेश नेतृत्व में बदलाव की सिफारिश की। उनका स्टैंड भूपेश बघेल द्वारा दी गई रिपोर्ट के बिल्कुल विपरीत था, जिसमें उन्होंने नेतृत्व परिवर्तन की संभावना को खारिज कर दिया था। पार्टी के बदलते रुख के बारे में पूछे जाने पर सचिन पायलट ने गुरुवार को कहा, "राजनीति में बदलाव के लिए कभी देर नहीं होती।"

    सिंगला का नाम सबसे आगे
    पूर्व केंद्रीय मंत्री विजय इंदर सिंगला राजा वडिंग की जगह लेने की दौड़ में सबसे आगे माने जा रहे हैं। पंजाब के एक सांसद ने कहा, "एक हिंदू चेहरा पंजाब कांग्रेस इकाई में अस्थायी शांति ला सकता है। वडिंग के हटने से चन्नी सहज महसूस करेंगे और जाट सिखों को भी इससे कोई आपत्ति नहीं होगी।" सिंगला की संभावित नियुक्ति से चुनाव से पहले गुटबाजी से जूझ रही पंजाब कांग्रेस में सुलह की उम्मीद जताई जा रही है।

    यदि सिंगला को प्रदेश अध्यक्ष बनाया जाता है तो जाट सिख समुदाय के प्रमुख चेहरों प्रताप सिंह बाजवा और सुखजिंदर सिंह रंधावा को संगठन में अधिक जिम्मेदारियां दी जा सकती हैं ताकि वे जट्ट सिख समुदाय के बीच पार्टी की पकड़ मजबूत कर सकें।

  • लखीमपुर जा रहा 308 पहियों का विशाल ट्रेलर, रास्ते में काटना पड़ा फुट ओवरब्रिज; लोग लेने लगे सेल्फी

    लखीमपुर जा रहा 308 पहियों का विशाल ट्रेलर, रास्ते में काटना पड़ा फुट ओवरब्रिज; लोग लेने लगे सेल्फी

    लखीमपुर खीरी
    लखीमपुर खीरी जिले के ग्राम कुंभी में लगने वाली शुगर मिल के लिए जा रहे इस भारी भरकम बॉयलर से ज्यादा 308 पहियों वाले बाहुबली ट्रक की चर्चा हो रही है। सोशल मीडिया पर ये ट्रक छाया है। इस ट्रक को पास कराने के लिए साथ में पुलिस भी चल रही है। बेल्जियम से समुद्र के रास्ते आए बॉयलर और बाहुबली ट्रक को देखने के लिए लोगों की सड़कों पर लाइनें लग रही हैं। लोग वीडियो और सेल्फी लेने के लिए उमड़ रहे हैं, जिसके चलते ट्रक आगे नहीं बढ़ पा रहा है। इसको लेकर देखते हुए अब ट्रक का रूट बदलना पड़ गया है। पहले जिस रूट से होकर ट्रक को लखीमपुर पहुंचना था, अब उस रास्ते से ट्रक नहीं जाएगा। गुरुवार को 308 पहियों वाला ट्रेलर हरहुआ से रिंग रोड फेज-1 होते हुए संदहा के पास पहुंचा था, यहां स्वर्वेद मंदिर के पास फुट ओवरब्रिज को देर शाम तक काटा गया। इसके बाद ट्रक को फुट ओवरब्रिज को काटकर नीचे से गुजारा गया।

    हरहुआ से चलकर उमरहां के पास जैसे ही 200 टन वजनी बॉयलर लेकर चल रहे 308 पहियों वाला विशाल ट्रेलर पहुंचा, स्वर्वेद महामंदिर के सामने बना पैदल फुट ओवरब्रिज बाधा बन गया। ट्रेलर को सुरक्षित निकालने के लिए फुट ओवरब्रिज को काटकर हटाना शुरू कर दिया गया। स्थानीय लोगों की निगाहें भी इस विशाल ट्रेलर पर टिकी रहीं। संभावना जताई गई कि ट्रेलर गुरुवार देर रात उमरहां पहुंचेगा। इसके बाद गाजीपुर से होते हुए आगे रवाना होगा। उधर वाहन के गुजरने के दौरान हरहुआ, संदहा, उमरहा आदि जगहों पर रीलबाज जमा थे। सभी वीडियो, फोटो, सेल्फी ले रहे थे।

    डाफी प्लाजा पर ट्रक का कटा 693 रुपये का टोल
    लखीमपुर खीरी की शुगर मिल के लिए वेसल बॉयलर लेकर जा रहा 308 पहियों वाला मल्टी एक्सल वैक्यूम ट्रेलर बुधवार दोपहर 12 बजे के बाद डाफी टोल प्लाजा से आगे बढ़ा। वह उल्टे लेन से होता हुआ रखौना से रिंग रोड गया। गंजारी स्टेडियम के पास वह अपने लेन में आ गया और देर शाम कोईराजपुर के पास पहुंचा। यहां से गुरुवार सुबह संदहा होते हुए गाजीपुर के लिए रवाना हुआ। डाफी प्लाजा पर इसका 693 रुपये का टोल कटा। बॉयलर बुधवार को डाफी टोल प्लाजा से चलकर अखरी, लठिया, कन्नाडाड़ी, मोहनसराय होते हुए राजातालाब पहुंचा।

    ट्रक के लिए काटना पड़ा ओवरब्रिज
    308 पहियों वाला 200 टन वजनी यह ‘बाहुबली’ ट्रेलर वॉयलर लेकर 1:30 बजे मोहनसराय पहुंचा। मोहन सराय में संकेतक बोर्ड खोला गया जबकि मोहन सराय-गंगापुर मोड़ पर फुट ओवर ब्रिज पहले से काट दिया गया था। ट्रेलर के पहुंचने पर जेसीबी से संकेतक एवं एफओबी के हिस्से को ऊपर उठाया गया। ट्रेलर के गुजरने के पुन: एफओबी को सही किया गया। ट्रेलर रखौना होते हुए रिंग रोड फेज-2 से आगे बढ़ा। उसके गुजरने के दौरान संबंधित मार्गों पर आम ट्रैफिक रोकी जाती रही।

    एक दिन पहले बदला गया था सर्विस लेन
    बेल्जियम से समुद्र के रास्ते ओडिशा पहुंची ओवर डायमेंशन कार्गो बॉयलर मशीन बीते शुक्रवार को बिहार से जिले के नौबतपुर बार्डर पर पहुंच गई थी। करीब दो सौ टन वजनी मशीन को 308 पहियों वाले ट्रेलर पर लादकर ओडिशा से सड़क मार्ग से लाया जा रहा है। इस मशीन को यूपी के लखीमपुर खीरी जिले के बलरामपुर में बन रहे प्लांट में लगाया जाना है। शुक्रवार को नौबतपुर से रवाना ट्रेलर के कटसिला के पास हाइवे पर शाम होने की वजह से रोक दिया गया था। शनिवार को पचफेड़वा के पास हाइवे पर रिंग रोड का पुल होने के कारण वैकल्पिक मार्ग के रूप में उसे पहले रिंग रोड पर ले जाया जाना था। लेकिन ऐसा नहीं हो सका।

    दलदल में फंस चुका है 308 पहियों वाला ट्रक
    रविवार को मशीन रेवसा के पास रिंग रोड की पूर्वी सर्विस लेन पर पहुंची। लेकिन आगे जमीन दलदली होने से मशीन को सर्विस लेन पर ही रोक दिया गया था। लेकिन देर शाम ट्रेलर रिंग रोड पार करके पश्चिमी लेन पर पहुंच गया। दो दिनों से ये ट्रक चंदौली में ही फंसा था। ट्रक को निकालने के लिए रास्ता बनाया जा रहा है। बतादें कि लखीमपुर खीरी जिले के ग्राम कुम्भी में मैसर्स बलराम चीनी मिल लिमिटेड द्वारा निर्मित हो रहे देश के पहले बायोप्लास्टिक (पॉलीलैक्टिक एसिड) मैन्युफैक्चरिंग प्लांट के लिए यह बॉयलर लाया जा रहा है। इस अति-विशिष्ट व भारी-भरकम इक्विपमेंट की लंबाई 41 मीटर, चौड़ाई 6 मीटर, ऊंचाई 7 मीटर और वजन 164.28 मीट्रिक टन है। ट्रैफिक पुलिस ने इस ट्रक को चंदौली की सीमा से पार कराकर जनपद वाराणसी में प्रवेश कराया है।