Category: राज्य

  • लखीमपुर खीरी हादसा: अनियंत्रित टेंपो पलटा, पांच गंभीर घायल, इलाके में मातम

    लखीमपुर खीरी हादसा: अनियंत्रित टेंपो पलटा, पांच गंभीर घायल, इलाके में मातम

    लखीमपुर खीरी

    लखीमपुर खीरी के धौरहरा थाना क्षेत्र में शनिवार देर रात बड़ा हादसा हो गया। बसंतापुर पुलिया के समीप सवारियों से भरा टेंपो अनियंत्रित होकर पलट गया। हादसे में तीन मासूम बच्चों की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि टेंपो चालक ने अस्पताल में दम तोड़ दिया। पांच लोग घायल हुए हैं। घायलों का उपचार चल रहा है।

    ये सभी लोग रात करीब 12:45 बजे धौरहरा से धार्मिक कार्यक्रम में शामिल होकर लोग टेंपो से अपने गांव ऊंचगांव (थाना खमरिया) वापस लौट रहे थे। इसी दौरान घने कोहरे के चलते बसंतापुर पुलिया के पास टेंपो पलट गया। हादसे की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और सभी घायलों को तत्काल सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) धौरहरा भेजा।

    इन बच्चों की हुई मौत
    सीएचसी में चिकित्सकों ने खुशबू (12 वर्ष), अबू तालिब (5 वर्ष) और अजरा (2 वर्ष) को मृत घोषित कर दिया। घायलों में किस्मतुन (45 वर्ष), साकिया (20 वर्ष), सादिया (22 वर्ष), निदा (10 वर्ष), अकील (18 वर्ष) निवासी ऊंचगांव थाना खमरिया तथा टेंपो चालक इसराइल उर्फ जीशान (30 वर्ष) निवासी ग्राम रसूलपुर थाना खमरिया शामिल हैं, जिन्हें प्राथमिक उपचार के बाद जिला चिकित्सालय लखीमपुर खीरी रेफर कर दिया गया। जहां जीशान की भी मौत हो गई है।
    हादसे के बाद मृतकों के परिजनों में कोहराम मच गया। पुलिस ने शवों को कब्जे में लेकर पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया है। घटना की जांच शुरू कर दी है।

     

  • दो मेट्रो स्टेशनों को मिला नया नाम, राज्य नामकरण प्राधिकरण की सिफारिश पर सरकार की मुहर

    दो मेट्रो स्टेशनों को मिला नया नाम, राज्य नामकरण प्राधिकरण की सिफारिश पर सरकार की मुहर

    नई दिल्ली

    राजधानी दिल्ली में दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन (DMRC) ने दो मेट्रो स्टेशनों के नाम बदल दिए हैं। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता की अध्यक्षता वाली राज्य नामकरण प्राधिकरण (SNA) की सिफारिश के बाद पूर्वी दिल्ली के मयूर विहार पॉकेट-I मेट्रो स्टेशन का नाम बदलकर ‘श्री राम मंदिर मयूर विहार’ कर दिया गया है, जबकि पीतमपुरा मेट्रो स्टेशन अब ‘मधुबन चौक’ के नाम से जाना जाएगा। नाम बदलने की मंजूरी मिलने के बाद DMRC ने दोनों स्टेशनों पर साइनेज और सूचना बोर्ड अपडेट कर दिए हैं। यात्रियों को किसी असुविधा से बचाने के लिए आवश्यक घोषणाएं और डिजिटल डिस्प्ले भी बदले जा रहे हैं।

    सालों से मांग कर रहे थे लोग
    त्रिलोकपुरी के विधायक रविकांत उज्जैन ने स्टेशन का नाम बदले जाने पर कहा कि इससे लंबे समय से चली आ रही सार्वजनिक मांग पूरी हुई है। उन्होंने बताया कि लोग वर्षों से यह मांग कर रहे थे कि मेट्रो स्टेशन का नाम मंदिर के नाम पर रखा जाए, लेकिन पहले इस पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। विधायक ने कहा, “पिछले छह महीनों से मैं इस मामले को गंभीरता से देख रहा था। मैंने मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के सामने भी यह मुद्दा उठाया और इस संबंध में पत्र लिखे। आखिरकार यह नाम परिवर्तन हुआ, जो वास्तविक जन-भावना की पूर्ति है।”

    मयूर विहार स्टेशन प्रमुख ट्रांजिट पॉइंट
    त्रिलोकपुरी के विधायक ने आगे कहा कि श्री राम मंदिर मयूर विहार मेट्रो स्टेशन, जो दिसंबर 2018 में दिल्ली मेट्रो के फेज-III विस्तार के तहत शुरू किया गया था, आज पूर्वी दिल्ली के यात्रियों के लिए एक प्रमुख ट्रांजिट पॉइंट बन चुका है। उन्होंने बताया कि यह स्टेशन दिल्ली मेट्रो नेटवर्क के सबसे लंबे कॉरिडोर पर स्थित है और आवासीय इलाकों को प्रमुख कमर्शियल हब से जोड़ता है। साथ ही यह क्षेत्र की भीड़भाड़ वाली मुख्य सड़कों का प्रभावी विकल्प भी प्रदान करता है, जिससे रोज़ाना यात्रियों को काफी सुविधा मिलती है।

    क्या है राज्य नामकरण प्राधिकरण (SNA)?
    राज्य नामकरण प्राधिकरण (State Naming Authority – SNA) दिल्ली सरकार का एक गैर-संवैधानिक निकाय है, जो राजधानी दिल्ली के भीतर सड़कों, पार्कों, कॉलोनियों और अन्य संस्थाओं के नामकरण या नाम परिवर्तन से जुड़े मामलों का निर्णय करता है। हालांकि, इसके अधिकार क्षेत्र में दिल्ली नगर निगम (MCD) और नई दिल्ली नगर पालिका परिषद (NDMC) के अधीन आने वाले क्षेत्र शामिल नहीं होते। इस प्राधिकरण में मुख्यमंत्री अध्यक्ष, मुख्य सचिव सदस्य होते हैं, जबकि अतिरिक्त मुख्य सचिव/प्रधान सचिव/सचिव (शहरी विकास) सदस्य-सचिव के रूप में कार्य करते हैं।

  • दादरी से मिशन 2027 की शुरुआत: सपा ने तय की रणनीति, इसके पीछे छिपी है बड़ी राजनीतिक वजह

    दादरी से मिशन 2027 की शुरुआत: सपा ने तय की रणनीति, इसके पीछे छिपी है बड़ी राजनीतिक वजह

    लखनऊ

    समाजवादी पार्टी 2027 विधानसभा चुनावों की तैयारियों के मद्देनजर पूरे प्रदेश में समाजवादी समानता भाईचारा रैली करेगी। सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव 29 मार्च को नोएडा के दादरी से इसकी शुरुआत करेंगे। इसके बाद ये रैलियां प्रदेश के सभी जिलों में आयोजित की जाएंगी। इस रैली की जिम्मेदारी समाजवादी पार्टी के प्रवक्ता राजकुमार भाटी संभालेंगे।  नोएडा से इस अभियान की शुरूआत के पीछे माना जा रहा है कि पार्टी इस कमजोर गढ़ में अपने को मजबूत दिखाने का संदेश देना चाहती है। पार्टी का मानना है कि अगर इन इलाकों में संगठन मजबूत किया गया, तो चुनावी समीकरणों में बड़ा बदलाव लाया जा सकता है

    विधानसभा चुनावों के करीब 11 महीने पहले नोएडा से शुरू होने वाली इस रैली की तर्ज पर प्रदेश के सभी जिलों में रैली का आयोजन किया जाएगा। इसके लिए समाजवादी पार्टी के नेता स्थानीय स्तर पर तैयारी कर रहे हैं। इन रैलियों के आयोजन के जरिये सपा की कोशिश उन विधानसभा क्षेत्रों में अपनी स्थिति मजबूत करने पर है, जहां समाजवादी पार्टी को 2022 विधानसभा चुनावों में हार का सामना करना पड़ा था।

    रैलियों की शुरुआत के साथ ही समाजवादी पार्टी ने विधानसभा चुनावों के उम्मीदवारों के चयन की प्रक्रिया भी तेज कर दी है। जातीय समीकरणों पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। पार्टी की कोशिश है कि ऐसे नेताओं को प्रत्याशी बनाया जाए, जिनकी विधानसभा क्षेत्र में स्वीकार्यता हो। इसके अलावा टिकट के चयन में एसआईआर में सक्रिय भूमिका निभाने वाले नेताओं का भी अहमियत दी जाएगी। सपा हर सीट पर प्रत्याशियों को टिकट देने के लिए सर्वे भी करा रही है।

    पार्टी शुभ संकेत के रूप में देख रही

    पार्टी के एक वरिष्ठ नेता कहते हैं कि अखिलेश यादव ने 2012 में  गौतमबुद्धनगर से साइकिल यात्रा की शुरुआत की थी। उसी वर्ष समाजवादी पार्टी को जीत मिली थी। एक बार फिर नोएडा से अभियान की शुरुआत को उसी ‘शुभ संकेत’ से जोड़कर देखा जा रहा है।

    नोएडा को लेकर लंबे समय से राजनीतिक मिथक भी रहा है कि जो भी मुख्यमंत्री नोएडा जाता है। वह छह महीने के भीतर कुर्सी गवां देता है। इसी कारण मुख्यमंत्री के अपने कार्यकाल के दौरान अखिलेश यादव नोएडा नहीं गए थे। 2017 और 2022 के चुनावों में भी उन्होंने अभियान की शुरुआत दूसरे जिलों से की, लेकिन सत्ता हासिल नहीं कर सके।

     

  • कांग्रेस से दूरी, BJP से नज़दीकी? नवजोत कौर के बयान से सिद्धू की राजनीति में नई हलचल

    कांग्रेस से दूरी, BJP से नज़दीकी? नवजोत कौर के बयान से सिद्धू की राजनीति में नई हलचल

    चंडीगढ़
    पंजाब की राजनीति में पिछले दो महीनों से जारी अनिश्चितता और बयानबाजी के दौर का अंत आखिरकार एक बड़े धमाके के साथ हुआ है। पूर्व विधायक डॉ. नवजोत कौर सिद्धू को कांग्रेस से निष्कासित कर दिया गया है। अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (AICC) के महासचिव भूपेश बघेल ने शुक्रवार को इसकी औपचारिक घोषणा की। हालांकि, इस निष्कासन से पहले ही 31 जनवरी को नवजोत कौर ने पार्टी से इस्तीफा दे दिया था, लेकिन कांग्रेस आलाकमान के इस कड़े कदम ने यह साफ कर दिया है कि पार्टी अब सिद्धू परिवार की बयानबाजी को बर्दाश्त करने के मूड में नहीं है।

    पार्टी से बाहर का रास्ता दिखाए जाने के बाद डॉ. नवजोत कौर सिद्धू के तेवर और भी तल्ख हो गए हैं। उन्होंने न केवल इस फैसले पर तीखी प्रतिक्रिया दी, बल्कि लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी के खिलाफ बेहद अपमानजनक शब्दों का इस्तेमाल किया। उन्होंने राहुल गांधी को 'पप्पू' कहकर संबोधित किया जो आमतौर पर विपक्षी खेमे द्वारा उनके उपहास के लिए इस्तेमाल किया जाता है। नवजोत कौर का यह बयान कांग्रेस के साथ उनके रिश्तों की कड़वाहट को चरम पर ले गया है।

    500 करोड़ का सूटकेस
    विवाद की जड़ें पिछले साल दिसंबर में जमीं, जब नवजोत कौर ने कांग्रेस नेतृत्व पर गंभीर आरोप लगाए थे। उन्होंने आरोप लगाया था कि कांग्रेस में मुख्यमंत्री का चेहरा वही बनता है जो 500 करोड़ रुपये का सूटकेस देता है। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा था कि उनके पति नवजोत सिंह सिद्धू सक्रिय राजनीति में तभी लौटेंगे जब उन्हें मुख्यमंत्री पद का चेहरा बनाया जाएगा। उस समय उन्होंने कहा था, "कांग्रेस में इतनी गुटबाजी है कि वे नवजोत सिद्धू को आगे नहीं बढ़ने देंगे। वहां पहले से ही पांच दावेदार मुख्यमंत्री बनने का सपना देख रहे हैं और वे खुद कांग्रेस को हराने पर तुले हुए हैं।"

    क्या भाजपा में होगी घर वापसी?
    राजनीतिक गलियारों में सबसे बड़ा सवाल यह है कि नवजोत सिंह सिद्धू का अगला कदम क्या होगा? हालांकि सिद्धू अभी भी तकनीकी रूप से कांग्रेस में हैं, लेकिन उनकी पत्नी के बयानों को उनके भविष्य के संकेत के रूप में देखा जा रहा है। पिछले कुछ हफ्तों में नवजोत कौर ने पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाए और साथ ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा की जमकर तारीफ की। इससे इन अटकलों को बल मिला है कि सिद्धू परिवार एक बार फिर भारतीय जनता पार्टी का दामन थाम सकता है, जहां से उन्होंने अपने राजनीतिक सफर की शुरुआत की थी।

    विद्रोह और सिद्धू परिवार का पुराना नाता
    यह पहली बार नहीं है जब सिद्धू परिवार अपनी ही पार्टी के खिलाफ खड़ा हुआ है। इनका राजनीतिक इतिहास बगावती सुरों से भरा रहा है। 2012 में भाजपा के टिकट पर अमृतसर पूर्व से जीतने के बाद डॉ. नवजोत कौर ने अपनी ही अकाली-भाजपा सरकार पर फंड के भेदभाव और भ्रष्टाचार के आरोप लगाए थे। 2014 में जब भाजपा ने नवजोत सिंह सिद्धू का टिकट काटकर अरुण जेटली को दिया, तो दूरियां और बढ़ गईं। 2016 में ऐसी खबरें थीं कि सिद्धू आम आदमी पार्टी में जा सकते हैं, लेकिन सीटों के बंटवारे पर बात नहीं बनी। अंततः 2017 के चुनाव से ठीक पहले यह जोड़ा कांग्रेस में शामिल हो गया।

    कैप्टन अमरिंदर सिंह से जंग
    कांग्रेस सरकार में मंत्री बनने के बाद सिद्धू और तत्कालीन मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह के बीच टकराव जगजाहिर था। सिद्धू ने अपनी ही सरकार को बेअदबी के मामलों पर घेरा, जिसके कारण अंततः कैप्टन को पद छोड़ना पड़ा। कैप्टन के बाद जब चरणजीत सिंह चन्नी को मुख्यमंत्री बनाया गया, तब भी नवजोत कौर ने सार्वजनिक रूप से कहा था कि उनके पति सिद्धू एक बेहतर विकल्प थे।

    फिलहाल नवजोत सिंह सिद्धू ने अपनी चुप्पी नहीं तोड़ी है, लेकिन राजनीति में खामोशी अक्सर बड़े तूफान का संकेत होती है। राहुल गांधी पर व्यक्तिगत हमले के बाद कांग्रेस में उनके लिए रास्ते लगभग बंद हो चुके हैं। अब देखना यह होगा कि क्या पंजाब की राजनीति का यह 'धुरंधर' खिलाड़ी एक बार फिर भगवा चोला पहनता है या कोई नई राह चुनता है।

  • यात्रियों को राहत: राजधानी की सड़कों पर उतरीं 500 ई-बसें, दिल्ली–पानीपत बस सेवा शुरू

    यात्रियों को राहत: राजधानी की सड़कों पर उतरीं 500 ई-बसें, दिल्ली–पानीपत बस सेवा शुरू

    नई दिल्ली
    दिल्ली में भाजपा सरकार के एक साल पूरा होने पर बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन, दिल्ली की सीएम रेखा गुप्ता और परिवहन मंत्री पंकज कुमार सिंह ने आज रामलीला मैदान से डीटीस की 500 नई ईवी बसों और दिल्ली-पानीपत बस सेवा का शुभारंभ किया। इस मौके पर दिल्ली की सीएम रेखा गुप्ता, दिल्ली भाजपा अध्यक्ष वीरेंद्र सचदेवा, दिल्ली के परिवहन मंत्री पंकज सिंह समेत तमाम मंत्री और भाजपा विधायक और अधिकारी मौजूद रहे।

    दिल्ली की सीएम रेखा गुप्ता, परिवहन मंत्री पंकज कुमार सिंह, लोक निर्माण मंत्री प्रवेश वर्मा और बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन ने मंच से इन इलेक्ट्रिक बसों और दिल्ली-पानीपत बस सेवा को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया।

    पिछली सरकार सिर्फ बात बनाने वाली सरकार थी : नितिन नबीन
    इस दौरान रामलीला मैदान में आयोजित कार्यक्रम में मौजूद लोगों को संबोधित करते हुए बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन ने कहा कि आज के दिन 8 फरवरी को ही दिल्ली का मैंडेट आया था और दिल्ली की जनता ने कमल खिलाने का काम किया था। आज के दिन आपने दिल्ली की जनता को जो 500 ईवी बसों का तोहफा देने का काम किया है, यह निश्चित रूप से आप बधाई के पात्र हैं। उन्होंने कहा कि लंबे समय तक पिछली सरकार के झूठे वादे से दिल्ली की जनता त्रस्त हो गई थी। पिछली सरकारों ने दिल्ली की जनता को उनके हाल पर छोड़ दिया था। यूं कहें तो पिछली सरकार सिर्फ बात बनाने वाली सरकार थी, लेकिन आज भाजपा की सरकार दिल्ली की जनता के विकास के लिए प्रतिबद्ध है और यहां तेजी से विकास के कार्य कर रही है। इसके लिए मैं दिल्ली की भाजपा सरकार को बहुत बहुत बधाई देता हूं।

    11 सालों तक दिल्ली विकास में पिछड़ी रही : रेखा गुप्ता
    इस दौरान मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा, "11 सालों तक दिल्ली विकास में पिछड़ी रही। दिल्ली के लोगों की उम्मीदें और सपने खत्म हो गए। दिल्ली ने विकास के सपने देखना बंद कर दिया। दिल्ली के लोग पानी-सीवेज और हेल्थकेयर जैसी बेसिक सुविधाओं के लिए तरसते रह गए। लेकिन 2025 के विधानसभा चुनावों में दिल्ली के लोगों ने उन लोगों को करारा जवाब दिया, जो खुद को दिल्ली का मालिक समझते थे।''

    रेखा गुप्ता ने केजरीवाल को बताया घमंडी
    उन्होंने कहा कि घमंडी केजरीवाल कहता था, "मुझे हराने के लिए तुम्हें दोबारा जन्म लेना पड़ेगा", लेकिन दिल्ली के लोगों ने इसी जन्म में इसी रामलीला मैदान में बीजेपी सरकार बनाकर दिल्ली का माहौल बदल दिया। दिल्ली के लोगों ने दिखा दिया कि अगर वे किसी को प्यार और स्नेह से सत्ता की कुर्सी पर बिठा सकते हैं, तो उसे नीचे गिराना भी जानते हैं।''

    रविवार को भाजपा द्वारा दिल्ली विधानसभा का चुनाव जीतने के एक वर्ष भी पूरे हो रहे हैं। इस अवसर पर दिल्ली सरकार द्वारा जल्द ही दिल्लीवासियों को कई और तोहफे देने की योजना है। 20 फरवरी को दिल्ली सरकार अपना रिपोर्ट कार्ड भी पेश करेगी, जिसमें केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह मुख्य अतिथि हो सकते हैं।

    दिल्ली के लोगों से किए वादों को पूरा करने की अधिक खुशी : पंकज सिंह
    दिल्ली के मंत्री पंकज सिंह ने एएनआई से बात करते हुए कहा कि यह बहुत खुशी की बात है कि आज हमारी सरकार को सत्ता में आए एक साल पूरा हो गया है। इसी दिन मैं विधायक बना था। इससे भी अधिक खुशी की बात यह है कि हम दिल्ली के लोगों से किए गए वादों को पूरा कर रहे हैं। आज हमने दिल्ली के लोगों के लिए 500 इलेक्ट्रिक बसें शुरू की हैं। हम दिल्ली और पानीपत के बीच कनेक्टिविटी भी बढ़ा रहे हैं। इसलिए, मैं खुश हूं कि हमारा काम दिन-ब-दिन आगे बढ़ रहा है।

    वहीं, दिल्ली से बीजेपी विधायक अनिल गोयल ने भी एएनआई से बातचीत में कहा कि यह जश्न दिल्ली के लिए और दिल्ली के पर्यावरण को ठीक करने के लिए है। दिल्ली की प्रदूषित हवा को ठीक करने के लिए, आज बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष 500 ईवी बसों का उद्घाटन कर रहे हैं। मैं मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता, मंत्री पंकज सिंह और हमारी पूरी टीम को धन्यवाद देता हूं।

     

  • SC/ST ऐक्ट पर हाईकोर्ट की स्पष्ट राय: हर अपमानजनक शब्द से नहीं बनता मामला

    SC/ST ऐक्ट पर हाईकोर्ट की स्पष्ट राय: हर अपमानजनक शब्द से नहीं बनता मामला

    जयपुर
    राजस्थान हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा है कि किसी व्यक्ति को ‘नीच’ जैसे सामान्य अपमानजनक शब्द कह देने मात्र से एससी/एसटी (अत्याचार निवारण) ऐक्ट अपने-आप लागू नहीं होता। जस्टिस वीरेन्द्र कुमार ने स्पष्ट किया कि यह ऐक्ट तभी लगाया जा सकता है, जब यह साबित हो कि अपमान खास तौर पर जाति के आधार पर किया गया था और आरोपी को पीड़ित की जाति की जानकारी थी।
     
    क्या है मामला
    यह मामला वर्ष 2011 में आईआईटी जोधपुर से जुड़े एक विवाद से संबंधित है। उस समय सरकारी अधिकारी अतिक्रमण की जांच के लिए मौके पर पहुंचे थे। जांच के दौरान कुछ लोगों ने इसका विरोध किया और कथित रूप से अधिकारियों को ‘नीच’ और ‘भिखारी’ जैसे शब्द कहे। अधिकारियों ने इसे जातिगत अपमान मानते हुए एफआईआर दर्ज करवाई और एससी/एसटी ऐक्ट की धारा के साथ आईपीसी की धाराएं भी जोड़ी गईं।

    आरोपियों की क्या दलील
    आरोपियों ने हाईकोर्ट में याचिका देते हुए कहा कि उन्हें अधिकारियों की जाति के बारे में जानकारी नहीं थी और बोले गए शब्द जाति का संकेत नहीं देते। उन्होंने यह भी कहा कि घटना के समय कोई स्वतंत्र गवाह मौजूद नहीं था, इसलिए इसे जातिगत अपमान नहीं माना जा सकता। हाईकोर्ट ने सुनवाई के दौरान पाया कि इस्तेमाल किए गए शब्द किसी विशेष जाति की ओर संकेत नहीं करते और ना ही ऐसा कोई प्रमाण है कि आरोपियों को अधिकारियों की जाति के बारे में जानकारी थी।

    हाईकोर्ट ने कहा कि एससी/एसटी ऐक्ट लगाने के लिए जाति-आधारित अपमान का स्पष्ट और ठोस प्रमाण होना आवश्यक है। इस आधार पर कोर्ट ने एससी/एसटी ऐक्ट के तहत लगाए गए आरोपों को रद्द कर दिया। हालांकि, सरकारी कर्मचारियों को ड्यूटी से रोकने और उनसे धक्का-मुक्की से संबंधित आईपीसी की धाराएं बनी रहेंगी और इन्हीं धाराओं पर मामला आगे चलेगा।

     

  • 6 साल की बच्ची से रेप-मर्डर, खून से सनी लाश मिलने पर उबाल, दरभंगा में हैवानियत की हद पार

    6 साल की बच्ची से रेप-मर्डर, खून से सनी लाश मिलने पर उबाल, दरभंगा में हैवानियत की हद पार

    दरभंगा
    बिहार के दरभंगा में एक छह साल की बच्ची के साथ दरिंदगी की गई। विश्वविद्यालय थाना क्षेत्र के बेला में शनिवार की रात छह साल की बच्ची से रेप के बाद उसकी हत्या कर दी गई। इस मामले में पुलिस ने पड़ोस में रहने वाले एक युवक को गिरफ्तार किया है। उसके कपड़े पर खून के धब्बे मिले हैं। उसकी पहचान विकास महतो (22) के रूप में हुई है। पुलिस ने उसे उसके घर से गिरफ्तार किया है। आक्रोशित लोगों ने सड़क जाम कर दिया है। आरोपी को सौंपने की मांग पर अड़े लोग उसे तालिबानी सजा देने की जिद पर अड़े हैं। पुलिस और पब्लिक आमने सामने है। पत्थरबाजी के बाद पुलिस ने भीड़ पर लाठी चार्ज कर दिया। मौके पर प्रशासन और पुलिस के वरीय अधिकारी मौजूद हैं।
     
    घटना के विरोध में स्थानीय लोगों और परिजनों ने मुख्य मार्ग को सुंदरपुर बेला मंदिर के पास जाम कर दिया। प्रदर्शनकारी आरोपित को फांसी की सजा देने की मांग कर रहे थे। सूचना मिलते ही विश्वविद्यालय थाने की पुलिस मौके पर पहुंची। मामले की गंभीरता को देखते हुए एसएसपी जगुनाथ रेड्डी जलारेड्डी भी घटनास्थल पर पहुंचे। जांच के लिए एफएसएल की टीम को भी बुलाया गया है। मौके पर पांच थानों की पुलिस तैनात है। लोगों को समझाने का प्रयास किया जा रहा है।

    रेप-मर्डर के बाद सड़क पर आगजनी
    पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए डीएमसीएच भेज दिया है। मामले की हर पहलू से जांच की जा रही है। एसएसपी ने बताया कि बच्ची का शव बरामद कर लिया गया है और मामले की गंभीरता से जांच की जा रही है। उन्होंने कहा कि आरोपित के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल आरोपित से पूछताछ की जा रही है।

    जानकारी के मुताबिक, बच्ची कादिराबाद की रहने वाली थी। वह बेला में अपने ननिहाल आयी थी। वह शनिवार की शाम से ही घर से लापता थी। परिजन लगातार उसकी तलाश कर रहे थे। काफी खोजबीन के बाद भी कोई सुराग नहीं मिला। देर रात गांव के बाहर तालाब के पास कुछ कुत्ते भौंक रहे थे। इसके बाद परिवार के लोगों को शक हुआ। परिजन मौके पर पहुंचे तो तालाब के किनारे दीवार के पास बच्ची खून से लथपथ हालत में पड़ी मिली। तब तक उसकी मौत हो चुकी थी।

    बताया जा रहा है कि घटना के समय तीन बच्चियां तालाब किनारे खेल रही थीं। इसी दौरान आरोपित ने तीनों को पकड़ने की कोशिश की। एक बच्ची उसके हाथ लग गई, जबकि दो अन्य बच्चियां वहां से भाग निकलीं। आरोपित बच्ची को अंधेरे की ओर ले गया और जहां उसके साथ दुष्कर्म करने के बाद उसकी हत्या कर दी। पुलिस ने आरोपित को गिरफ्तार कर आगे की कार्रवाई शुरू कर दी है।

     

  • 33 बीघा जमीन व आलीशान मकान के साथ हैं महंगी कारें, गोल्ड लोन घोटाले का करोड़पति है मास्टरमाइंड

    33 बीघा जमीन व आलीशान मकान के साथ हैं महंगी कारें, गोल्ड लोन घोटाले का करोड़पति है मास्टरमाइंड

    झुंझुनूं.

    झुंझुनूं के नवलगढ़ स्थित पीएनबी बैंक शाखा में सामने आया घोटाला बैंकिंग सेक्टर के सबसे बड़े घोटालों में से एक बताया जा रहा है। 6.50 करोड़ रुपए के गोल्ड लोन घोटाले मामले में पुलिस ने मुख्य आरोपी बैंक के तत्कालीन मुख्य प्रबंधक अमित जांगिड़ और बीसी संतोष सैनी गिरफ्तार कर लिया है।

    हैरान करने वाली बात यह है कि मास्टरमाइंड करोड़ों की संपत्ति का मालिक निकला, जिसने घोटाले की रकम से आलीशान मकान, जमीन और महंगी कारें खरीदी। गोल्ड लोन घोटाले के मास्टरमाइंड अमित जांगिड़ के पास अकूत संपत्ति के सबूत मिले हैं। अमित के पास सीकर के पॉश इलाके में 3 मंजिला निर्माणाधीन मकान, सीथल गांव में बड़ा डेयरी फार्म है। जिसमें 100 से अधिक देशी व विदेशी नस्ल की गाय पाल रखी हैं। उसके पास 2 महंगी कार, एक बुलेट मोटरसाइकिल और डेयरी में 2 पिकअप गाड़ी भी मिली। अमित जांगिड़ ने पत्नी के नाम गुढ़ा में जमीन खरीद रखी है।

    पुलिस द्वारा दी गई जानकारी के अलावा अमित जांगिड़ के पास अन्य संपत्ति की जानकारी भी मिली। जिसमें उसने अपनी डेयरी वाली जमीन के पास 5 वर्ष पूर्व 15 बीघा जमीन खरीदी, गांव में ही एक दूसरी जगह 11 बीघा जमीन खरीदी और इस जमीन पर ट्यूबवैल भी बनवा रखा है। इसके अलावा सीथल में ही 2 साल पूर्व 7 बीघा जमीन और भी खरीदने की जानकारी मिली है। पुलिस इसकी भी जांच कर रही है।

    महिला मित्र को दिया सोना
    झुंझुनूं पुलिस अधीक्षक बृजेश ज्योति उपाध्याय ने बताया कि मुख्य आरोपी अमित जांगिड़ ने बीसी संतोष सैनी के जरिए लोगों के नाम फर्जी गोल्ड लोन खाते खोले। इसके लिए संतोष सैनी को मोटी रकम व गोल्ड का लालच दिया। अमित जांगिड़ ने अपनी महिला मित्र को बैंक में जमा सोना देकर अन्य बैंकों से गोल्ड लोन भी दिलवा रखा था।

    ऐसे पकड़ा गाया मुख्य आरोपी
    मुख्य आरोपी अमित पुलिस को मथुरा रेलवे स्टेशन के प्लेटफार्म पर पटरी के पास बैठा मिला। शक होने पर पूछताछ की तो उसने अपना नाम पवन जांगिड़ निवासी श्रीगंगानगर बताया। सख्ती से पूछताछ करने पर सही नाम पता बताया। उसने खुद का 4 करोड़ का बीमा करवा रखा था। वह रेल के आगे कूदकर आत्महत्या करने की योजना बना रहा था। गिरफ्तारी के समय अमित जांगिड़ के पास जहरीला पदार्थ भी मिला है। इससे पहले दिन वह वृ़ंदावन में था।

    पत्नी ने दर्ज करवाई थी गुमशुदगी की ​रिपोर्ट
    बताया जा रहा है कि आरोपी अमित को 28 जनवरी को मंडल कार्यालय हनुमानगढ़ में पेश होना था लेकिन वह वहां पहुंचा नहीं और फरार हो गया। इसके बाद अमित की पत्नी ने 30 जनवरी को गुढ़ा थाने में गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई थी।

  • 5 जिलों को जोड़कर खोलेगा रोजगार के द्वार, जयपुर-पचपदरा ग्रीनफील्ड एक्सप्रेस-वे को मंजूरी

    5 जिलों को जोड़कर खोलेगा रोजगार के द्वार, जयपुर-पचपदरा ग्रीनफील्ड एक्सप्रेस-वे को मंजूरी

    जयपुर.

    राजस्थान के औद्योगिक और इंफ्रास्ट्रक्चर विकास में बड़ा बदलाव जयपुर से पचपदरा तक प्रस्तावित ग्रीनफील्ड एक्सप्रेस-वे से होने जा रहा है। लगभग 350 से 400 किलोमीटर लंबे इस एक्सप्रेस-वे से पचपदरा रिफाइनरी को प्रदेश की राजधानी से सीधी कनेक्टिविटी मिलेगी, जिससे पश्चिमी राजस्थान में यात्रा सुगम होगी और लॉजिस्टिक ट्रांसपोर्ट को मजबूत आधार मिलेगा।

    इस परियोजना की अनुमानित लागत लगभग 11,492 करोड़ रुपए है। यह एक्सप्रेस-वे जयपुर से शुरू होकर किशनगढ़ (अजमेर), पाली और जोधपुर होते हुए बालोतरा जिले के पचपदरा तक पहुंचेगा। परियोजना को केंद्र सरकार से मंजूरी मिल चुकी है। फिलहाल, भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया जारी है तथा डीपीआर तैयार की जा रही है। संभावना है कि यह मार्ग जोधपुर-पाली क्षेत्र से होकर निकलेगा, जिससे रोहट में प्रस्तावित दिल्ली-मुंबई इंडस्ट्रियल कॉरिडोर (डीएमआईसी) के पश्चिमी राजस्थान हिस्से को बेहतर कनेक्टिविटी मिलेगी।

    रिफाइनरी और पेट्रोकेमिकल हब को सीधा लाभ
    इस एक्सप्रेस-वे का सबसे बड़ा लाभ पचपदरा रिफाइनरी और प्रस्तावित पेट्रोकेमिकल हब को मिलेगा। रिफाइनरी को कच्चे माल की आपूर्ति और तैयार उत्पादों के परिवहन के लिए सीधा व सुरक्षित कॉरिडोर मिलेगा, जिससे लॉजिस्टिक लागत में कमी आएगी। यह एक्सप्रेस-वे दिल्ली-मुंबई इंडस्ट्रियल कॉरिडोर और अमृतसर-जामनगर एक्सप्रेस-वे से भी जुड़ेगा, जिससे राजस्थान की औद्योगिक कनेक्टिविटी राष्ट्रीय स्तर पर मजबूत होगी।

    एक्सपोर्ट की राह होगी आसान
    इस मार्ग के बनने से जयपुर-जोधपुर-बालोतरा की यात्रा समय में लगभग दो से तीन घंटे की कमी आने की संभावना है। हालांकि, सबसे बड़ा लाभ निर्यात क्षेत्र को होगा। एक्सप्रेस-वे को जामनगर-अमृतसर भारतमाला कॉरिडोर से जोड़े जाने के बाद सड़क और कंटेनर रेल मार्ग से भी तेज और आसान तरीके से कांडला पोर्ट तक पहुंच सकेंगे। डीएमआईसी जोधपुर-पाली रोड से जुड़ाव के कारण आगामी औद्योगिक विकास की संभावनाएं भी बढ़ेंगी। जोधपुर में प्रस्तावित नई रिंग रोड के समीप से एक्सप्रेस-वे गुजरने से ट्रांसपोर्टेशन और औद्योगिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा।
    बेहतर लॉजिस्टिक मॉडल, कनेक्टिविटी बढ़ेगी

    उत्पादों की ट्रांसपोर्टेशन सुगम होगी
    इस परियोजना से एक्सपोर्ट योग्य उत्पादों की ट्रांसपोर्टेशन सुगम होगी और गुजरात तक की रफ्तार बढ़ेगी। नए औद्योगिक क्षेत्र और रिंग रोड के साथ यह एक्सप्रेस-वे रोजगार के नए द्वार भी खोलेगा।
    -कुशल प्रजापत, सिविल इंजीनियर

    फैक्ट फाइल…

    1. 350 से 400 किलोमीटर लगभग कुल लंबाई
    2. 11,492 करोड़ रुपए लगभग अनुमानित लागत
    3. 05 जिले जुड़ेंगे
    4. 2 से 3 घंटे की यात्रा समय में कमी
  • सांसद पप्पू यादव को IGIMS से PMCH में किया भर्ती, गिरफ्तारी के बाद बिगड़ी तबीयत

    सांसद पप्पू यादव को IGIMS से PMCH में किया भर्ती, गिरफ्तारी के बाद बिगड़ी तबीयत

    पटना.

    पटना में पूर्णिया के सांसद पप्पू यादव की गिरफ्तारी ने बिहार की राजनीति में हलचल मचा दी है। 32 साल पुराने एक मामले में पुलिसिया कार्रवाई के बाद न सिर्फ विपक्ष ने सवाल उठाए हैं, बल्कि सांसद की बिगड़ती सेहत भी पूरे घटनाक्रम को संवेदनशील बना रही है। गिरफ्तारी के बाद रात भर चले हाई-वोल्टेज घटनाक्रम ने इस मामले को कानून से आगे सियासत के केंद्र में ला दिया है।

    गिरफ्तारी के बाद पुलिस सबसे पहले सांसद को IGIMS लेकर गई, जहां से आज सुबह उन्हें PMCH शिफ्ट किया गया। वहीं से अभी अभी IGIC में रेफर किया गया है बताया जा रहा है कि पुलिस ने बीती रात पटना स्थित आवास से सांसद पप्पू यादव को हिरासत में लिया। सांसद ने आरोप लगाया कि गिरफ्तारी के समय कई पुलिसकर्मी सिविल ड्रेस में थे, जिससे प्रक्रिया पर सवाल खड़े होते हैं। पप्पू यादव ने अपनी खराब तबीयत का हवाला देते हुए गिरफ्तारी का विरोध भी किया।

    IGIMS से PMCH तक: इलाज को लेकर विवाद
    गिरफ्तारी के बाद पुलिस सबसे पहले सांसद को IGIMS लेकर गई, जहां से आज सुबह उन्हें PMCH शिफ्ट किया गया। पप्पू यादव के आधिकारिक फेसबुक पेज और उनके निजी सचिव ने दावा किया कि IGIMS में उन्हें पूरी रात बेड नहीं मिला और स्ट्रेचर पर रखा गया। इलाज में लापरवाही के आरोपों ने मामले को और तूल दे दिया है।

    ‘साजिश’ का आरोप, प्रशासन कटघरे में
    सांसद के समर्थकों और उनके सचिव ने प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए हैं। सोशल मीडिया पोस्ट में कहा गया कि नीट छात्रा के समर्थन में आवाज उठाने की वजह से पप्पू यादव को निशाना बनाया जा रहा है। यहां तक कहा गया कि उनके साथ साजिशन व्यवहार किया जा रहा है, जिससे उनकी जान को खतरा हो सकता है।

    कानूनी प्रक्रिया पर वकील ने उठाए सवाल
    पप्पू यादव के अधिवक्ता शिवनंदन भारती ने पुलिस की कार्रवाई को कानूनी रूप से त्रुटिपूर्ण बताया है। उनका कहना है कि 1995 के मामले में सांसद पहले ही जमानत पर थे। बेल टूटने के बाद पुलिस ने नोटिसों को जानबूझकर दबाया और बिना धारा 82 की प्रक्रिया पूरी किए सीधे धारा 83 के तहत कुर्की और गिरफ्तारी की गई, जो कानून के खिलाफ है।

    कोर्ट में आज पेशी, जमानत या जेल पर फैसला
    अब सभी की नजरें आज होने वाली कोर्ट पेशी पर टिकी हैं। पप्पू यादव की कानूनी टीम जमानत के लिए अर्जी दाखिल करने की तैयारी में है। अगर अदालत राहत देती है तो सांसद को रिहाई मिल सकती है, अन्यथा उन्हें जेल जाना पड़ सकता है। हालांकि, उनकी बिगड़ती सेहत को देखते हुए अस्पताल के कैदी वार्ड में रखने का विकल्प भी खुला माना जा रहा है।

    स्वास्थ्य बनाम कानून: सियासत के बीच फंसा मामला
    एक ओर कानून अपना रास्ता तय कर रहा है, तो दूसरी ओर सांसद की तबीयत और राजनीतिक आरोप इस मामले को और जटिल बना रहे हैं। आने वाले घंटों में कोर्ट का फैसला न सिर्फ पप्पू यादव के भविष्य को तय करेगा, बल्कि बिहार की सियासत में भी इसका असर साफ दिखेगा।