Category: राज्य

  • पीडब्ल्यूएल 2026: हरियाणा थंडर की शानदार जीत, दिल्ली दंगल वॉरियर्स को फाइनल में हराया

    पीडब्ल्यूएल 2026: हरियाणा थंडर की शानदार जीत, दिल्ली दंगल वॉरियर्स को फाइनल में हराया

    नोएडा 

    हरियाणा थंडर नोएडा इंडोर स्टेडियम में दिल्ली दंगल वॉरियर्स के खिलाफ फाइनल में आखिरी बाउट तक चले मैच के बाद प्रो रेसलिंग लीग (पीडब्ल्यूएल) 2026 का चैंपियन बन गया। आठ बाउट के बाद स्कोर 4-4 से बराबर था, नतीजा आखिरी महिलाओं की 62 किलोग्राम बाउट पर निर्भर था, जिसमें पेरिस ओलंपिक की सिल्वर मेडलिस्ट इरीना कोलियाडेन्को ने दबाव में शानदार प्रदर्शन किया। उनकी शानदार टेक्निकल जीत ने हरियाणा थंडर को 5-4 से जीत दिलाई और पीडब्ल्यूएल 2026 का खिताब दिलाया, जो लीग के इतिहास के सबसे नाटकीय फाइनल में से एक था। हरियाणा थंडर पीडब्ल्यूएल 2026 ट्रॉफी के साथ 1.5 करोड़ रुपये की इनामी राशि घर ले जाएगा। रनर-अप, दिल्ली दंगल वॉरियर्स को 75 लाख रुपये मिलेंगे। व्यक्तिगत पुरस्कारों में, दिल्ली दंगल वॉरियर्स के तुरान बायरामोव ने 57 किलोग्राम पुरुष वर्ग में सभी 7 बाउट जीतकर और पीडब्ल्यूएल 2026 में कुल 59 अंक हासिल करके 2.5 लाख रुपये का 'प्लेयर ऑफ द टूर्नामेंट' खिताब जीता। पंजाब रॉयल्स के चंदरमोहन टूर्नामेंट के टॉप पॉइंट स्कोरर थे।

    नेहा सांगवान (हरियाणा थंडर) को आखिरी बाउट तक फाइनल को प्रतिस्पर्धी बनाए रखने के लिए 'प्लेयर ऑफ द मैच' का पुरस्कार मिला। रौनक (दिल्ली दंगल वॉरियर्स) को पुरुष 125 किलोग्राम वर्ग में अपने शानदार प्रदर्शन के लिए 'फाइटर ऑफ द मैच' का सम्मान मिला। 'इंपैक्ट प्लेयर ऑफ द मैच' अक्षय धेरे (हरियाणा थंडर) थे, जिन्हें 57 किलोग्राम पुरुष वर्ग में उनके मजबूत प्रदर्शन के लिए पहचाना गया।
    चैंपियनशिप की रात दिल्ली ने बढ़त के साथ शुरू की, जब अजेय तुरान बायरामोव ने 74 किलोग्राम पुरुष बाउट जीती, जल्दी ही शुरुआती बढ़त बनाई और 8-1 से जीत हासिल करने के लिए नियंत्रण बनाए रखा। हरियाणा ने 76 किलोग्राम महिला वर्ग में तुरंत जवाब दिया, जहां अंडर20 विश्व चैंपियन काजल धोचक ने यूरोपीय चैंपियन अनास्तासिया अल्पीयेवा को 3-1 से हराकर स्कोर बराबर कर दिया।

    65 किलोग्राम पुरुषों के मैच में मोमेंटम तब बदला जब दिल्ली के कप्तान सुजीत कल्कल ने शानदार वापसी करते हुए वर्ल्ड चैंपियनशिप के सिल्वर मेडलिस्ट तुमुर ओचिर तुलगा को 8-6 से हरा दिया। हरियाणा ने तुरंत अपनी स्टार और कई बार की वर्ल्ड चैंपियन यूई सुसाकी के साथ जवाब दिया, जिन्होंने सारिका पर शानदार टेक्निकल जीत हासिल करके अपना कौशल दिखाया और स्कोर 2-2 से बराबर कर दिया।
    86 किलोग्राम पुरुषों के मैच में दिल्ली ने फिर से बढ़त बना ली, जब एशियन चैंपियनशिप के ब्रॉन्ज मेडलिस्ट वफाईपुर हादी बख्तियार ने अशिरोव अशरफ को 11-0 से हरा दिया। हरियाणा ने जोरदार जवाब दिया, जिसमें अक्षय धेरे ने 57 किलोग्राम पुरुषों के इवेंट में दिल्ली के अमित कुमार को टेक्निकल सुपीरियरिटी से हरा दिया।

    हेवीवेट मैच निर्णायक था, जिसमें रौनक ने शानदार प्रदर्शन करते हुए अनिरुद्ध गुलिया को 12-2 से हराया, जिससे दिल्ली को 4-3 की बढ़त मिली। हरियाणा ने हार नहीं मानी, और नेहा सांगवान ने 57 किलोग्राम महिलाओं के मुकाबले में अंजलि को पिन करके मैच को जारी रखा, जिससे स्कोर 4-4 से बराबर हो गया।

    चैंपियनशिप दांव पर लगी थी, और इरीना कोलियाडेन्को ने महत्वपूर्ण 62 किलोग्राम महिलाओं के मैच में कदम रखा। अपने अनुभव और शांत स्वभाव का फायदा उठाते हुए, पेरिस ओलंपिक की सिल्वर मेडलिस्ट ने लगातार टर्न-एंड-एक्सपोजर मूव्स से अंजलि को हराया और 16-0 से टेक्निकल जीत हासिल की। ​​इस जीत ने उन्हें हरियाणा थंडरर्स के लिए खिताब दिलाया।

  • मोदी सरकार से खुश हुए तेजप्रताप, 10 में 10 अंक देकर कहा- लालू यादव का दौर अब समाप्त

    मोदी सरकार से खुश हुए तेजप्रताप, 10 में 10 अंक देकर कहा- लालू यादव का दौर अब समाप्त

    पटना

    लालू प्रसाद यादव के बड़े बेटे और जनशक्ति जनता दल (JJD) चीफ तेजप्रताप यादव अक्सर चर्चा में रहते हैं। बेबाक अंदाज और बेबाक बात तेजप्रताप यादव की पहचान रही है। अब एक पॉडकास्ट में तेजप्रताप यादव ने एक बार फिर बड़ी ही बेबाकी से अपनी बातें रखी हैं। तेजप्रताप यादव ने कहा है कि अब लालू राज खत्म हो गया है। तेजप्रताप यादव ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को 10 में से दस नंबर दिए और बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर भी खुलकर अपनी राय रखी है। राहुल गांधी और तेजस्वी यादव पर भी तेजप्रताप यादव ने अपनी बात रखी है।

    यूट्यबूर प्रियंका शर्मा के साथ एक पॉडकास्ट में तेजप्रताप यादव ने कई मुद्दों पर अपनी बात रखी है। जब तेजप्रताप यादव से पूछा गया कि बिहार चुनाव में राजद के 25 सीटों पर सिमट जाने की एक वजह यह भी है कि आप अलग हो गए? इसपर तेजप्रताप यादव ने कहा कि जब कृष्ण का सम्मान नहीं होगा तो यहीं हश्र होगा। हम मान-सम्मान के लिए लड़ते हैं। जब मान-सम्मान नहीं होगा तो हम अलग हो गए और हमने अपनी अलग लकीर खींच ली। हमारा रास्ता अलग हो गया।

    बिहार में चुनाव के वक्त टिकट बंटवारे को लेकर राष्ट्रीय जनता दल पर पैसे मांगने के आरोप भी लगे थे। इसपर तेजप्रताप यादव ने बेबाकी से कहा कि हां, तो ऐसा जयचंदों ने किया होगा। तेजप्रताप यादव ने जयचंदों का नाम बताने से इनकार किया और कहा कि 5-6 जयचंद हैं। उन्होंने कहा कि सबको पता है कि जयचंद कौन हैं। तेजप्रताप यादव ने यह भी कहा कि अभी भी वो (जयचंद) परिवार के अंदर है। आपका राजनीतिक सलाहकार परिपक्व होना चाहिए।
    तेजस्वी के विदेश दौरे पर क्या बोले तेजप्रताप

    बिहार चुनाव में हार के बाद तेजस्वी यादव के विदेश दौरे पर जाने को लेकर तेजप्रताप यादव ने कहा कि हमारी पार्टी हारी तो हमने तुरंत समीक्षा बैठक की थी। उनको भी उस समय समीक्षा बैठक करनी चाहिए थी। तेजप्रताप यादव ने राजद की हार पर कहा कि हार की वजह वहीं 5-6 लोग (जयचंद) हैं। आपका दुश्मन बाहर नहीं है घर में ही है। तेजप्रताप यादव ने कहा कि उन्हें बड़े भाई होने का जितना कर्तव्य निभाना था उन्होंने निभा दिया।
    बहन रोहिणी और मां राबड़ी पर भी बोले तेजप्रताप

    अपनी मां राबड़ी देवी को लेकर तेजस्वी यादव ने कहा कि वो अपनी मां का आशीर्वाद लेने उनके घर गए थे। उन्होंने कहा कि उनकी मां ने उस दिन उनसे घऱ वापस लौटने के लिए कहा था जिसके बाद उन्होंने कहा था कि हमने अलग लाइन बना ली है और हम आगे निकल चुके हैं। बस आपका आशीर्वाद चाहिए। रोहिणी आचार्य को लेकर तेजप्रताप यादव ने कहा कि बहन के आरोप लगाने के बाद उनकी बातचीत बहन से हुई थी। वो काफी भावुक थीं और उन्होंने कहा था कि उनके साथ ऐसी बातें हुई हैं। तेजप्रताप यादव ने कहा कि उनकी बहन रोहिणी बहुत अच्छी हैं उन्होंने पिता को किडनी दी थी।
    लालू यादव का राज खत्म

    तेजप्रताप यादव ने कहा कि वो परिवार से दूर रहते हैं और परिवार को मिस करते हैं। इस इंटरव्यू में जब तेजप्रताप यादव से कहा गया है कि आप राजा के बेटे हैं लेकिन आपके शौक सब मिडिल क्लास वाले ही हैं। इसपर तेजप्रताप यादव ने कहा कि राजा-प्रजा कुछ नहीं है। क्या राजा, क्या प्रजा। राजा गए उनका राज चला गया। राजा-प्रजा का कोई बात नहीं है।
    पीएम मोदी को 10 में से 10 नंबर – तेजप्रताप

    तेजप्रताप यादव से जब इस साक्षात्कार में कहा गया कि नरेंद्र मोदी को जब आपको प्रधानमंत्री पद और उनके कामों के लिए 10 में से नंबर देने हों तो आप कितने नंबर देंगे? इसपर तेजप्रताप यादव ने बेबाकी से कहा कि 10 में से हम उनको 10 देंगे। वो पूजा-पाठ करते हैं और हम भी पूजा-पाठ करते हैं तो हम उनको दस ही ना देगे। अगर वो पूजा नहीं कर रहे होते तो हो सकता है कि हम उनका नंबर काट देते। इसी के साथ सीएम नीतीश को लेकर तेजप्रताप यादव ने कहा कि उनमें कोई कमी नहीं है सिर्फ बुर्का वाले विवाद की वजह से एक वीडियो वायरल हुआ था। 

  • पीएम मोदी के पंजाब दौरे के बाद भाजपा के लिए उम्मीद की किरण, क्या सिद्धू परिवार का होगा घर वापसी?

    पीएम मोदी के पंजाब दौरे के बाद भाजपा के लिए उम्मीद की किरण, क्या सिद्धू परिवार का होगा घर वापसी?

    चंडीगढ़ 

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पंजाब यात्रा के अगले ही दिन प्रदेश से शुभ संदेश आया है. इसके साथ ही कयासबाजी का दौर भी शुरू हो गया है कि क्‍या सिद्धू परिवार की घर वापसी मतलब भाजपा में वापसी होने जा रही है. पीएम मोदी के पंजाब विजिट से एक दिन पहले कांग्रेस से नाता तोड़ने वालीं नवजोत कौर सिद्धू ने प्रधानमंत्री की तारीफ करते हुए उनका दिल से स्‍वागत किया है. उन्‍होंने सोशल मीडिया पोस्‍ट में लिखा कि पंजाब की जनता भोलीभाली है, जिन्‍हें हमारी सरकार अपने हितों और स्‍वार्थ के चलते हमेशा मूर्ख बनाती रहती है. नवजोत कौर सिद्धू ने आगे लिखा – मोदीजी पंजाब में आपका दिल से स्‍वागत है. नवजोत कौर के इस सोशल मीडिया पोस्‍ट से प्रदेश की सियासत गर्मा गई है.

    नवजोत कौर सिद्धू ने एक्‍स पर पोस्‍ट शेयर कर कहा, ‘जब हमारे देश के प्रमुख हमारे राज्य को कुछ देने आते हैं, तो सभी राजनीतिक चोर उनके घर वापसी कार्यक्रम में बाधा डालने के लिए एक मंच पर क्यों इकट्ठा हो जाते हैं? हमें यह स्पष्ट समझना चाहिए कि उन्होंने वह पद और शक्ति अपने परिश्रम से अर्जित की है, ताकि वे हमारे राज्य को कुछ महान दे सकें. आभारी बनें. पंजाब के लोग भोले-भाले हैं और स्वार्थी सरकारें अपने हितों के चलते उन्हें हमेशा धोखा देती रही हैं. उन्होंने अपने परिवारों के लिए भारी संपत्ति बना ली है. पंजाब के लिए कुछ करना है नहीं. मोदी जी का प्यार भरे दिल से स्वागत है, यही पंजाबी लोगों की सच्ची प्रकृति है सच्‍चा स्‍वभाव है.’

    बीजेपी या AAP ने संपर्क तो नहीं किया?

    नवजोत कौर सिद्धू ने एक अन्‍य पोस्‍ट में लिखा, ‘मैं संभवतः उन बहुत कम लोगों में से हूं, जिन्होंने किसी भी राजनीतिक कारण से न तो बीजेपी न आप और न ही किसी अन्य पार्टी के किसी नेता से मुलाकात की है और न ही किसी पार्टी ने मुझसे संपर्क किया है. मैं अपनी व्यक्तिगत दृष्टि और चेतना से बात कर रही हूं, क्योंकि मैं केवल वाहेगुरु जी के प्रति उत्तरदायी हूं और किसी और के प्रति नहीं. मैं सिर्फ पंजाब के लोगों की सेवा करना चाहती हूं, जिसे मैं एक एनजीओ बनाकर कर सकती हूं और गुरु ग्रंथ साहिब जी की शिक्षाओं को समझकर तथा जीवित विकसित संतों के सान्निध्य में रहकर निस्वार्थ सेवा और आत्मा के विकास के बारे में थोड़ा सीखते हुए अपनी आत्मा के उत्कर्ष के लिए कार्य करना चाहती हूं. हाल ही में भगवद गीता के उपदेशों के साथ तीन दिन का अद्भुत और आनंदमय समय बिताया और प्रेमानंद महाराज जी जैसे प्रबुद्ध संतों का आशीर्वाद प्राप्त करने का सौभाग्य मिला, जिन्होंने अनेक आत्माओं को उन्नति के मार्ग पर आगे बढ़ाया है.’

    सीएम भगवंत मान से सीधा सवाल

    नवजोत कौर सिद्धू ने एक और पोस्‍ट में लिखा, ‘पंजाब के मुख्यमंत्री जी, जब मोदी जी गुजरात के मुख्यमंत्री थे और केंद्र में कांग्रेस की सरकार थी, तब उन्होंने तीन बार स्पष्ट बहुमत से जीत हासिल की, क्योंकि वे गुजरात के हर नागरिक के प्रति जवाबदेह रहे और सभी विभागों के उपयोग प्रमाणपत्र (utilisation certificates) जमा करते थे, क्योंकि तभी केंद्र से जितनी राशि चाहिए उतनी मिल सकती है. आप पंजाब के लोगों के पैसे का इस्तेमाल शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि आदि के लिए करने के बजाय अपने फायदे के लिए मुफ्त योजनाओं में नहीं कर सकते. मुफ्त बिजली देने के बजाय आपने चंडीगढ़ और कई अन्य राज्यों की तरह सोलर पावर को अनिवार्य क्यों नहीं किया? आपकी खनन और शराब नीति कहां है? यह तो बड़े लोगों के साथ साझेदारी में सिर्फ आपकी जेब भरने के लिए है. पहले अकाली दल और कांग्रेस के साथ यह 75:25 था और अब आप और कांग्रेस/अकाली के साथ 80:20 है. हर विभाग में भ्रष्टाचार फैला हुआ है और आपके शासन में यह सबसे अधिक है, क्योंकि आप अपने निजी हितों के लिए खरीदे हुए मीडिया चैनलों की एक छोटी टीम के साथ अकेले काम कर रहे हैं, जो आपकी महिमा गान में लगे हैं. आपने आपके खिलाफ बोलने वालों की आवाज दबा दी है. हर व्यक्ति का एक समय होता है और वाहेगुरु जी ही सभी के वास्तविक न्यायाधीश हैं. आप उनसे कुछ भी नहीं छुपा सकते.’

  • भागलपुर में बर्ड फ्लू का खतरा, चिकन के शौकिनों के लिए बड़ी चेतावनी

    भागलपुर में बर्ड फ्लू का खतरा, चिकन के शौकिनों के लिए बड़ी चेतावनी

     पटना

    भागलपुर के नवगछिया अनुमंडल परिसर स्थित मैदान में बड़ी संख्या में मृत मिले कौओं की जांच रिपोर्ट में बर्ड फ्लू वायरस की पुष्टि होते ही पूरे इलाके में हड़कंप मच गया है. जिला पशुपालन पदाधिकारी अंजली कुमारी ने आधिकारिक रूप से पुष्टि करते हुए बताया कि मृत कौओं का सैंपल जांच के लिए पटना और भोपाल लैब भेजा गया था, जहां से आई रिपोर्ट में संक्रमण की पुष्टि हुई है.

    रिपोर्ट सामने आते ही जिला प्रशासन पूरी तरह अलर्ट मोड में आ गया है और प्रभावित क्षेत्र के चारों ओर 10 किलोमीटर के दायरे में सेनेटाइजेशन अभियान शुरू कर दिया गया है. वहीं इलाके के सभी पोल्ट्री फार्म से भी सैंपल इकट्ठा किया जा रहा है.

    150 से अधिक कौओं की मौत से फैली दहशत

    बता दें कि 11 जनवरी की सुबह मॉर्निंग वॉक पर निकले लोगों ने एक ही स्थान पर पेड़ के नीचे 150 से अधिक मृत कौवे पड़े देखे थे. कई कौवे तड़पती हालत में भी मिले थे. घटना के बाद स्थानीय लोगों में बर्ड फ्लू की आशंका को लेकर दहशत फैल गई थी. सूचना मिलते ही वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची और सभी मृत पक्षियों को सुरक्षित तरीके से हटाया गया.

    सैंपल जांच के बाद हुई फ्लू की पुष्टि

    वन विभाग और पशुपालन विभाग की संयुक्त टीम ने मौके पर पहुंचकर सैंपल कलेक्ट किए. मृत कौओं का सीरम जांच के लिए उच्च स्तरीय लैब भेजा गया था. भोपाल से आई रिपोर्ट में बर्ड फ्लू की पुष्टि होते ही प्रशासनिक मशीनरी सक्रिय हो गई. जिला प्रशासन का कहना है कि स्थिति नियंत्रण में है, लेकिन एहतियात के तौर पर सभी जरूरी कदम उठाए जा रहे हैं. स्वास्थ्य और पशुपालन विभाग लगातार निगरानी कर रहे हैं.

    प्रभावित इलाकों में कराया जा रहा सैनिटाइजेशन
     
    डॉक्टर अंजली ने कहा कि 11 जनवरी को कौओं की मौत हुई थी. उस समय बहुत ठंड थी. ऐसा लगा कि ये ठंड के कारण मरे हैं. लेकिन इसका सैंपल हमने बाहर भेजा, जिसके बाद सरकार से इसकी पुष्टि हुई कि कौओं की मौत बर्ड फ्लू के कारण ही हुई है. फिलहाल हम लोग प्रभावित इलाकों में सैनिटाइजेशन करवा रहे हैं. हमने 11 तारीख को भी सैनिटाइज कराया था. इसके अलावा इस इलाके में जितने भी पोल्ट्री फार्म हैं, उनका जीरो सर्विलेंस करके दोबारा भेजा जाएगा.

  • लखनऊ में 69000 शिक्षक भर्ती के विरोध में प्रदर्शन, भविष्य की उम्मीदें बंधी!

    लखनऊ में 69000 शिक्षक भर्ती के विरोध में प्रदर्शन, भविष्य की उम्मीदें बंधी!

     लखनऊ

    उत्तर प्रदेश में 69000 शिक्षक भर्ती मामले ने एक बार फिर से तूल पकड़ लिया है. इसे लेकर आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थी आज यानी 2 फरवरी 2026 को लखनऊ में अपनी मांगो को पूरा करवाने के लिए को धरना प्रदर्शन करेंगे. इस मामले में अभ्यर्थियों का आरोप है कि ने कोई पहल नहीं कर रही जिस कारण से मामला इतना आगे चला गया है. इस केस की पहली सुनवाई सुप्रीम कोर्ट में साल 2024 में सितंबर के महीने में हुई थी. उसके बाद से लगातार के इस मामले में तारीख पर तारीख मिल रही है.

    इस केस को लेकर अगली सुनवाई 4 फरवरी को होगी. लेकिन उससे पहले आरक्षित वर्ग के लोग अपना गुस्सा जाहिर करने के लिए आज प्रदर्शन करने वाले हैं. 

    कौन कर रहा है प्रदर्शन का नेतृत्व 

    ऐसे में आंदोलन का नेतृत्व कर रहे धनंजय गुप्ता ने इसे लेकर बयान दिया है. उन्होंने कहा की इस केस को सुलझाने के लिए सरकार की ओर से कोई पहल नहीं की जा रही है. जिसके चलते सुप्रीम कोर्ट से केवल तारीखें मिल रही हैं. इस दौरान उन्होंने बताया कि वे दो फरवरी से आंदोलन करेंगे. आंदोलन के शुरुआत में बनाए गए सभी जिला कोऑर्डिनेटर से ब्लाक लेवल पर संपर्क कर आने वाले अभ्यर्थियों और उनके परिजनों की लिस्ट बनाने को कहा गया है. 

    प्रदर्शकारियों का फूटा गुस्सा 

    ऐसे में इस केस को लेकर प्रदर्शकारियों में गुस्सा भरा पड़ा है. उन्होंने कहा कि ओबीसी आयोग और लखनऊ हाईकोर्ट का फैसला हमारे पक्ष में है. इस केस पर राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग की रिपोर्ट, मुख्यमंत्री की ओर से गठित जांच समिति की रिपोर्ट और लखनऊ हाई कोर्ट डबल बेंच का फैसला सब हमारे पक्ष में है, लेकिन हमारे साथ अन्याय इसलिए हो रहा है क्योंकि हम पिछड़े और दलित समाज से आते हैं. 

    इतने सालों से चल रहा है संघर्ष

    वहीं, दूसरे प्रदर्शनकारी ने कहा कि  वो पिछले 6 सालों  से संघर्ष कर रहे हैं.सरकार से मांग करते हैं, लेकिन हमारी बातों को नहीं सुना जाता है. सुनवाई न होने के कारण सभी अभ्यर्थी आहत हैं. 

  • नेशनल डेस्टिनेशन डिजिटल नॉलेज ग्रिड और टूरिज्म ट्रेनिंग सेंटर की होगी स्थापना

    नेशनल डेस्टिनेशन डिजिटल नॉलेज ग्रिड और टूरिज्म ट्रेनिंग सेंटर की होगी स्थापना

    सारनाथ और हस्तिनापुर का होगा वैश्विक पर्यटन स्थल के रूप में विकास, केंद्रीय बजट में यूपी टूरिज्म को मिली बड़ी सौगात

    पूर्वी और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में विश्व स्तरीय पर्यटन स्थलों का विकास, यूपी टूरिज्म को मिलेगा बढ़ावा

    नेशनल डेस्टिनेशन डिजिटल नॉलेज ग्रिड और टूरिज्म ट्रेनिंग सेंटर की होगी स्थापना

    लखनऊ
    केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने  संसद में पेश किए गए 2026-27 के केंद्रीय बजट में उत्तर प्रदेश के सारनाथ और हस्तिनापुर के पुरातात्विक स्थलों को वैश्विक पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित करने की घोषणा की। साथ ही नेशनल डेस्टिनेशन डिजिटल नॉलेज ग्रिड, टूरिज्म ट्रेनिंग सेंटर की स्थापना और नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हॉस्पिटैलिटी को अपग्रेड करने की घोषणाए भी की गई हैं। वहीं आईआईएम के सहयोग से 10,000 टूरिस्ट गाइडों को प्रशिक्षित करने की घोषणा, उत्तर प्रदेश जैसे पर्यटन समृद्ध राज्य में रोजगार और अर्थव्यवस्था को भी बढ़ावा देगी।  

    सारनाथ और हस्तिनापुर की ऐतिहासिक धरोहर को मिलेगी वैश्विक पहचान
    वित्तीय वर्ष 2026-27 के केंद्रीय बजट में देश के 15 प्रमुख पुरातात्विक स्थलों को जीवंत अनुभव-आधारित वैश्विक पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने का प्रस्ताव रखा गया है, जिसमें उत्तर प्रदेश के दो प्रमुख पुरातात्विक स्थल सारनाथ और हस्तिनापुर शामिल हैं। वाराणसी स्थित सारनाथ, बौद्ध धर्म का पवित्र स्थल होने के साथ देश का प्रमुख ऐतिहासिक स्थल भी है। यहां धमेख स्तूप, चौखंडी स्तूप और सिंह शीर्ष वाला अशोक स्तंभ भी स्थित है, जिससे भारत का राष्ट्रीय प्रतीक चिह्न लिया गया है। साथ ही यहां से मौर्य, गुप्त और पाल युगीन मूर्तियों और बौद्ध विहारों के अवशेष भी मिले हैं। इसी क्रम में मेरठ जिले में स्थित महाभारत कालीन हस्तिनापुर को भी शामिल किया गया है। यहां से महाभारत और हड़प्पा कालीन पॉटरी और पुरातात्विक अवशेष भी मिले हैं। साथ ही यहां स्थित पांडव टीला और कर्ण मंदिर भी प्रमुख पुरातात्विक महत्व के साक्ष्य हैं। इन स्थलों को वैश्विक पर्यटन केंद्रों के रूप में विकास करने से एक ओर पूर्वी यूपी में वाराणसी और दूसरी ओर मथुरा-मेरठ क्षेत्र के साथ पश्चिमी यूपी के पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा।  

    केंद्रीय बजट की घोषणाओं से खुलेंगे टूरिज्म में रोजगार के नए अवसर

    केंद्रीय बजट की एक अन्य प्रमुख घोषणा आईआईएम के सहयोग से 10,000 टूरिस्ट गाइडों को प्रशिक्षित करने की भी है। जिसके तहत देश के 20 आइकॉनिक पर्यटन स्थलों पर पायलट प्रोग्राम चलाकर टूरिस्ट गाइडों को प्रशिक्षण दिया जाएगा। जिसमें टूरिस्ट गाइड़ों के प्रोफेशनल स्किल्स, भाषा और डेस्टिनेशन नॉलेज पर फोकस होगा। यह प्रशिक्षण प्रोग्राम उत्तर प्रदेश जैसे पर्यटन-समृद्ध राज्य में इससे हजारों युवाओं को स्किल डेवलपमेंट के साथ रोजगार के अवसर भी उपलब्ध कराएगा। इसके अलावा बजट में नेशनल डेस्टिनेशन डिजिटल नॉलेज ग्रिड की स्थापना उत्तर प्रदेश की सांस्कृतिक, आध्यात्मिक और ऐतिहासिक विरासत के स्थलों का डिजिटल डॉक्यूमेंटेशन कर पर्यटन को बढ़ावा देगी। साथ ही टूरिज्म ट्रेनिंग सेंटर की स्थापना और नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हॉस्पिटैलिटी को अपग्रेड करने की भी घोषणा भी बजट में की गई है। इससे टूरिस्ट गाइड्स, हॉस्पिटैलिटी स्टॉफ, ट्रैवल मैनेजमेंट से जुड़े युवाओं का स्किल डेवलपमेंट होगा जो न केवल पर्यटन सुविधाओं को बढ़ावा देगा साथ ही प्रदेश के युवाओं को रोजगार के नए अवसर भी उपलब्ध कराएगा।

  • राजस्थान में ₹2,585 प्रति क्विंटल है समर्थन मूल्य,  शुरू हुई गेहूं की सरकारी खरीद

    राजस्थान में ₹2,585 प्रति क्विंटल है समर्थन मूल्य, शुरू हुई गेहूं की सरकारी खरीद

    जयपुर.

    राजस्थान के लाखों किसानों के लिए बड़ी राहत की खबर है। रबी विपणन सीजन 2026-27 के तहत गेहूं की सरकारी खरीद प्रक्रिया आज 1 फरवरी से औपचारिक रूप से शुरू हो गई है। भारत सरकार ने इस वर्ष गेहूं का न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) ₹2,585 प्रति क्विंटल निर्धारित किया है, जिससे किसानों को उनकी उपज का बेहतर और सुनिश्चित मूल्य मिल सकेगा।

    राज्य सरकार ने खरीद व्यवस्था को पारदर्शी, सरल और डिजिटल बनाते हुए ऑनलाइन पंजीकरण प्रणाली लागू की है, ताकि किसानों को किसी तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े। खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग के अनुसार किसान 1 फरवरी से 25 जून 2026 तक गेहूं बिक्री के लिए ऑनलाइन पंजीकरण करवा सकेंगे। इसके लिए “गेहूं खरीद के लिए किसान रजिस्ट्रेशन पोर्टल” शुरू किया गया है। किसान घर बैठे मोबाइल या कंप्यूटर से स्वयं पंजीकरण कर सकते हैं या फिर नजदीकी ई-मित्र केंद्र की सहायता ले सकते हैं। पंजीकरण के लिए अद्यतन जन आधार कार्ड अनिवार्य रखा गया है।

    सरकार ने भुगतान प्रक्रिया को भी पूरी तरह डिजिटल कर दिया है। किसानों द्वारा बेचे गए गेहूं का पैसा सीधे जन आधार से जुड़े बैंक खाते में ट्रांसफर किया जाएगा। इससे बिचौलियों की भूमिका समाप्त होगी और भुगतान में देरी की समस्या भी नहीं आएगी। विभाग ने किसानों को सलाह दी है कि वे समय रहते अपने बैंक खाते को जन आधार से लिंक करा लें।

    राज्य में गेहूं की खरीद 10 मार्च से 30 जून 2026 तक की जाएगी। इसके लिए प्रदेशभर में 383 क्रय केंद्र स्थापित किए गए हैं। इन केंद्रों पर भारतीय खाद्य निगम (FCI), राजफेड, तिलम संघ, नाफेड, एनसीसीएफ तथा इस वर्ष से राजस्थान राज्य खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति निगम के माध्यम से खरीद की जाएगी। सभी केंद्रों पर सुचारु व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।

    किसानों को पंजीकरण, खरीद तिथि और अन्य सूचनाएं एसएमएस के माध्यम से भी भेजी जाएंगी। किसी भी समस्या या जानकारी के लिए टोल फ्री हेल्पलाइन नंबर 14435 जारी किया गया है। सरकार का लक्ष्य है कि हर किसान को उसकी उपज का सही मूल्य समय पर मिले और खरीद प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी रहे।

  • खुलने वाला है राज! साध्वी प्रेम बाईसा मौत केस में आश्रम पहुंची SIT-FSL टीम

    खुलने वाला है राज! साध्वी प्रेम बाईसा मौत केस में आश्रम पहुंची SIT-FSL टीम

    जोधपुर

    साध्वी प्रेम बाईसा की मौत से जुड़े मामले में जांच तेज हो गई है। इस मामले की तह तक जाने के लिए गठित SIT की टीम पूरी सक्रियता के साथ जांच में जुटी हुई है। इसी कड़ी में एफएसएल (फॉरेंसिक साइंस लैब) की टीम भी आज एक बार फिर साध्वी के आश्रम पहुंची, जहां घटनास्थल का बारीकी से निरीक्षण किया जा रहा है। सूत्रों के मुताबिक, आश्रम परिसर से अहम साक्ष्य जुटाए जा रहे हैं, ताकि मौत की असल वजह का पता लगाया जा सके।

    पोस्टमार्टम रिपोर्ट में कारण का नहीं हुआ खुलासा

    पोस्टमार्टम रिपोर्ट में साध्वी की मौत का साफ कारण नहीं निकल पाया है। मगर मेडिकल सूत्रों के मुताबिक उनकी छोटी और बड़ी आंत में लाल निशान मिले हैं, जो अक्सर जहर के असर से होते हैं। अगर सच में जहर का शक सही है, तो आगे की जांच में यह साफ होगा। अब उनके आंतरिक अंगों (जैसे फेफड़े, यकृत, गुर्दा, आंत) की रासायनिक जांच हो रही है। FSL की रिपोर्ट आने के बाद ही पता चलेगा कि शरीर में कोई जहरीला पदार्थ था या नहीं और अगर था, तो वह कैसे पहुंचा।

    पुलिस ने आश्रम के बाहर दो अस्थालाइन की बोतलें भी बरामद की हैं। इसके चलते सवाल उठ रहे हैं कि क्या साध्वी को अस्थमा की दिक्कत थी। अस्थमा के मरीजों को अक्सर डेक्सोना इंजेक्शन दिया जाता है, जो स्टेरॉयड है और फेफड़ों की सूजन कम करता है। लेकिन ज्यादा मात्रा में यह खतरनाक भी हो सकता है।

  • ‘संस्कृति की पहचान और अपनत्व का प्रतीक है गोहाना का जलेबा’, सूरजकुंड मेले में उपराष्ट्रपति ने चखा स्वाद

    ‘संस्कृति की पहचान और अपनत्व का प्रतीक है गोहाना का जलेबा’, सूरजकुंड मेले में उपराष्ट्रपति ने चखा स्वाद

    फरीदाबाद.

    सूरजकुंड अंतरराष्ट्रीय आत्मनिर्भर शिल्प महोत्सव के पहले दिन ही गोहाना का जलेबा ने मेले की चौपाल पर मिठास भर दी। मुख्यमंत्री नायब सैनी ने मंच पर उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्ण को जलेबा का स्वाद लेने के लिए जलेबा परोसा। सीएम ने कहा कि इसकी मिठास अपनत्व का प्रतीक है।

    उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने जलेबा का स्वाद लेते हुए का कि यह मिठाई नहीं बल्कि हरियाणा की संस्कृति की पहचान और आत्मनिर्भरता की गौरव गाथा है। क्योंकि यह खास जलेबा सिर्फ इसी प्रदेश में मिल सकती है। उपराष्ट्रपति की इस बात पर मुख्यमंत्री ने कहा कि जलेबी हमारे प्रदेश की लोकसंस्कृति से भी जुड़ी है। मंच पर मौजूद पर्यटन मंत्री ने कहा कि जलेबा का स्वाद ही ऐसा हैं। जो इसको पूरे देश में खास बना देता हैं। सूरजकुंड मेला हर प्रोडेक्ट को लोकल टू ग्लोबल बना देता हैं। इस मेले में आकर ही गोहाना का जलेबा राष्ट्रीय से अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंचा।

    उन्होंने कहा कि गोहाना विधानसभा क्षेत्र से विधायक हैं। गोहाना की जलेबी से उनका भावनात्मक जुड़ाव है। इस दौरान इजिप्ट के एंबेसडर कामिल जायद गलाल और डिप्टी एंबेसडर दालिया तांतवे ने भी जलेबा का स्वाद लिया। कार्यक्रम में मौजूद अतिथियों और दर्शकों ने इसे हरियाणा की सांस्कृतिक विरासत का जीवंत उदाहरण बताया।

  • हरियाणा को टूरिज्म हब बनाने की तैयारी, राखीगढ़ी 15 आइकॉनिक पुरातात्विक स्थलों में शामिल

    हरियाणा को टूरिज्म हब बनाने की तैयारी, राखीगढ़ी 15 आइकॉनिक पुरातात्विक स्थलों में शामिल

    चंडीगढ़/हिसार.

    हरियाणा की धरती पर बसी सिंधु घाटी सभ्यता की सबसे बड़ी पहचान राखीगढ़ी अब एक बार फिर राष्ट्रीय फलक पर है। केंद्रीय बजट में किए गए एलान के बाद राखीगढ़ी को देश के 15 ‘आइकॉनिक पुरातात्विक स्थलों’ की सूची में शामिल करने की घोषणा हुई है। इस फैसले के साथ ही राखीगढ़ी केवल खुदाई और शोध का केंद्र नहीं रहेगी, बल्कि इसे संरक्षित पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने की दिशा में ठोस पहल मानी जा रही है।

    केंद्रीय वित्त मंत्री ने बजट भाषण में कहा कि ऐतिहासिक और सांस्कृतिक धरोहरों को आम लोगों से जोड़ने के लिए चयनित पुरातात्विक स्थलों पर विशेष फोकस किया जाएगा। इसी नीति के तहत हिसार जिले की राखीगढ़ी को आइकॉनिक साइट के रूप में विकसित किया जाएगा। यहां पर्यटकों की सुविधा के लिए पाथ-वे, सूचना तंत्र और गाइड की व्यवस्था की जाएगी, ताकि आने वाले लोग सभ्यता के अवशेषों के साथ उसका ऐतिहासिक संदर्भ भी समझ सकें।

    बजट से पहले भी बनी थी जमीन
    यह पहला मौका नहीं है जब बजट में राखीगढ़ी का जिक्र हुआ हो। केंद्रीय बजट 2025-26 में पहले ही राखीगढ़ी को वैश्विक धरोहर केंद्र के रूप में विकसित करने के लिए 500 करोड़ रुपये के आवंटन की घोषणा की जा चुकी है। उस घोषणा के बाद से भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण द्वारा यहां खुदाई और संरक्षण के कार्यों को गति मिली, जिससे इसके ऐतिहासिक महत्व को और मजबूती मिली है।

    इन बिंदुओं से समझें बजट के बाद राखीगढ़ी को मिलने वाली नई पहचान को

    1. – देश के 15 आइकॉनिक पुरातात्विक स्थलों में शामिल किया जाएगा
    2.  – संरक्षित टूरिज्म साइट के रूप में विकास, पाथ-वे और गाइड की व्यवस्था
    3. – पहले से घोषित 500 करोड़ के आवंटन से संरक्षण और खुदाई को बल
    4. – सिंधु घाटी सभ्यता के सबसे बड़े केंद्र को अंतरराष्ट्रीय पहचान की दिशा

    टूरिज्म के नजरिये से क्या बदलेगा
    बजट के बाद राखीगढ़ी में केवल खोदाई स्थल नहीं, बल्कि सुनियोजित पर्यटन ढांचा विकसित करने की योजना है। परिसर के भीतर पाथ-वे बनने से पर्यटकों की आवाजाही आसान होगी। प्रशिक्षित गाइड नियुक्त किए जाएंगे, जो सभ्यता, खुदाई और ऐतिहासिक पृष्ठभूमि की जानकारी देंगे। इसके साथ ही सांस्कृतिक कार्यक्रमों के जरिए प्राचीन जीवन-शैली को समझाने का प्रयास किया जाएगा।

    क्यों खास है राखीगढ़ी
    राखीगढ़ी को हड़प्पाकालीन सभ्यता की सबसे बड़ी साइट माना जाता है। यहां अब तक हजारों साल पुराने मानव कंकाल, मकानों की दीवारें, कच्ची ईंटें, तांबा, मनके, मोहरें और जल निकासी व्यवस्था के प्रमाण मिल चुके हैं। इन अवशेषों से संकेत मिलता है कि यह नगर सुव्यवस्थित शहरी योजना और तकनीकी समझ के साथ विकसित हुआ था।

    नदी से नगर तक की कहानी
    इतिहासकारों के अनुसार राखीगढ़ी प्राचीन सरस्वती नदी प्रणाली के किनारे बसा था। माना जाता है कि इसी नदी की सहायक धाराओं के सूखने के बाद इस नगर का पतन हुआ। खुदाई में मिले सूखे नदी-तल, कुएं और जल संरचनाएं इस थ्योरी को मजबूती देती हैं।