Category: राज्य

  • योगी सरकार में बिजली आपूर्ति को मिली रफ्तार, 24779 मेगावाट की मांग पूरी

    योगी सरकार में बिजली आपूर्ति को मिली रफ्तार, 24779 मेगावाट की मांग पूरी

    लखनऊ,
    योगी सरकार प्रदेश में निर्बाध, सुलभ और सुरक्षित बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए लगातार प्रभावी कदम उठा रही है। बढ़ती बिजली मांग के बीच सरकार ने आपूर्ति व्यवस्था को मजबूत बनाए रखने के साथ ही उपभोक्ताओं को बेहतर विद्युत सेवाएं उपलब्ध कराने पर विशेष जोर दिया है। तीन अक्टूबर को प्रदेश में 24,779 मेगावाट की मांग के अनुरूप बिजली आपूर्ति की गई। जबकि दो अक्टूबर को 23,939 मेगावाट और एक अक्टूबर को 23,445 मेगावाट की मांग पूरी की गई। मांग के अनुरूप बिजली आपूर्ति के मामले में उत्तर प्रदेश तेलंगाना, तमिलनाडु, कर्नाटक और पंजाब जैसे राज्यों से आगे रहा।

    सितंबर के अंतिम सप्ताह में कई वर्षों की सर्वाधिक तेज आंधी-तूफान के कारण प्रदेश में बड़े पैमाने पर विद्युत ब्रेकडाउन हुए। पूर्वांचल और मध्यांचल में विशेष रूप से  100 से अधिक 33 केवी सबस्टेशन और 500 से अधिक 11 केवी फीडर प्रभावित हुए। यूपीपीसीएल के अधिकारियों और कर्मचारियों ने युद्धस्तर पर दिन-रात मेहनत कर फाल्ट दूर किए और प्रभावित क्षेत्रों में विद्युत आपूर्ति को तेजी से सामान्य किया।

    विद्युत लाइनों और संबंधित ढांचे का लगातार मेंटेनेंस
    सेवा संकल्प अभियान 2026 के तहत अनुरक्षण माह में प्रदेशभर में बिजली व्यवस्था को बेहतर और सुचारु बनाए रखने के लिए विभिन्न अनुरक्षण कार्य कराए जा रहे हैं। पीपीसीएल की फील्ड टीमें विद्युत लाइनों और संबंधित ढांचे का आवश्यक मेंटेनेंस कर रही हैं। बिजली लाइनों के संपर्क में आने वाली पेड़ों की डालियों की छंटाई, आसपास की साफ-सफाई और अन्य जरूरी कार्य किए जा रहे हैं, ताकि मौसम खराब होने की स्थिति में विद्युत व्यवधान को कम किया जा सके।

    उपभोक्ता सेवा है योगी सरकार की प्राथमिकता
    योगी सरकार का जोर केवल बिजली आपूर्ति बनाए रखने तक सीमित नहीं है, बल्कि उपभोक्ताओं को बेहतर और संवेदनशील सेवा उपलब्ध कराने पर भी है। बिजली चोरी की समस्या से निपटने के साथ उपभोक्ताओं को विभाग का विरोधी मानने के बजाय उनकी जरूरतों को समझकर उन्हें व्यवस्था का सहयोगी बनाने पर बल दिया जा रहा है।

    फाल्ट की सूचना से लेकर बहाली तक निगरानी
    निर्देश दिए गए हैं कि कहीं भी विद्युत आपूर्ति प्रभावित होने पर इसकी सूचना तत्काल काल सेंटर पर दर्ज की जाए। उपभोक्ता को आपूर्ति बाधित होने का कारण बताया जाए और बिजली बहाल होने के बाद मैसेज के माध्यम से इसकी जानकारी दी जाए। इस पूरी व्यवस्था की नियमित समीक्षा करने पर भी जोर दिया गया है। सरकार का लक्ष्य है कि अनुरक्षण, त्वरित शिकायत निस्तारण और बेहतर निगरानी के जरिए प्रदेशवासियों को सुरक्षित, विश्वसनीय और निर्बाध बिजली आपूर्ति उपलब्ध कराई जाए।

  • भीड़, जाम और माओवाद पर ड्रोन की नजर, बिहार पुलिस को मिलेंगे 50 नए हाईटेक ड्रोन

    भीड़, जाम और माओवाद पर ड्रोन की नजर, बिहार पुलिस को मिलेंगे 50 नए हाईटेक ड्रोन

     पटना
    बिहार पुलिस विधि-व्यवस्था एवं अपराधियों के साथ प्रमुख शहरों में यातायात की आसमान से निगरानी करेगी।

    इसके लिए उच्च क्षमता वाले 50 ड्रोन खरीदे जाएंगे। गृह विभाग की आरक्षी शाखा ने इसकी स्वीकृति दे दी है। इसके लिए 24 करोड़ 50 लाख रुपये खर्च होंगे।

    विभागीय जानकारी के अनुसार, विधि-व्यवस्था और ट्रैफिक मैनेजमेंट के लिए 45 लाख की कीमत वाले 40 ड्रोन खरीदे जाएंगे। इनका इस्तेमाल बिहार पुलिस की ड्रोन यूनिट करेगी।

    विरोध-प्रदर्शन, मेले पर भी रहेगी नजर
    राज्य में निकलने वाले विरोध-प्रदर्शन, भीड़ के उपद्रव, मेला-महोत्सव, त्योहार, बड़े आयोजनों आदि में इन ड्रोन का इस्तेमाल किया जाएगा।

    इसके अलावा पटना समेत प्रमुख शहरों के चौक-चौराहों, पुल आदि पर लगने वाले जाम के कारण और निदान में भी इन ड्रोन का इस्तेमाल पुलिस करेगी।

    इसके अलावा माओवाद और एंटी क्राइम ऑपरेशन आदि के लिए भी 10 ड्रोन खरीदे जाएंगे। इसके लिए इस्तेमाल होने वाला ड्रोन और भी अत्याधुनिक होगा जिसकी कीमत 65 लाख होगी।

    साढ़े छह करोड़ में आएंगे 10 ड्रोन
    करीब साढ़े छह करोड़ से ऐसे दस ड्रोन खरीदकर पुलिस को दिए जाएंगे। जंगली, दुर्गम एवं पहाड़ी इलाकों में होने वाले पुलिस आपरेशन में इन ड्रोन का सहयोग लिया जाएगा।

    विभागीय जानकारी के अनुसार, पुलिस आधुनिकीकरण के तहत 50 ड्रोन की खरीद की जा रही है। इसके लिए केंद्रीय गृह मंत्रालय के स्तर से 60 प्रतिशत जबकि राज्य सरकार के स्तर से 40 प्रतिशत की राशि दी जाएगी।

    आने वाले पर्व-त्योहार को देखते हुए पुलिस की ड्रोन यूनिट को मजबूत किया जा रहा है। नए ड्रोन के आने से भीड़ नियंत्रण एवं निगरानी में पुलिस को काफी सुविधा होगी।

  • सिल्क क्लस्टर के रूप में विकसित होंगे संत रविदास नगर, मीरजापुर और वाराणसी: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ

    सिल्क क्लस्टर के रूप में विकसित होंगे संत रविदास नगर, मीरजापुर और वाराणसी: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ

    संत रविदास नगर
    सिल्क क्लस्टर के रूप में संत रविदास नगर, मीरजापुर और वाराणसी को विकसित किया जाएगा। वाराणसी-विंध्य रीजनल डेवलपमेंट प्लान भी जल्द लागू होगा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने रविवार को इंडिया कारपेट एक्सपो के स्वर्ण जयंती संस्करण में कालीन उद्योग के निर्यातकों, विक्रेताओं और प्रमुख उद्यमियों से सीधे संवाद के दौरान यह बात कही। उद्यमियों ने कालीन उद्योग के लिए अलग नीति, कारोबार की जरूरतों और महिला उद्यमियों की भागीदारी से जुड़े विषय रखे। मुख्यमंत्री ने एक-एक कर उनकी बात सुनी और उठाए गए मुद्दों पर सरकार की ओर से संज्ञान लेने का भरोसा दिया।
     
    बेहतर कनेक्टिविटी से कारोबार को मिला लाभ
    मीरजापुर के कालीन कारोबारी अनिल कुमार ने बेहतर कनेक्टिविटी का जिक्र करते हुए योगी सरकार के कार्यों की सराहना की। उन्होंने प्राचीन शहर मीरजापुर और वहां के कालीन व्यवसाय से जुड़े विषय भी रखे। मुख्यमंत्री ने उनकी बात सुनकर उठाए गए मुद्दों पर संज्ञान लेने का आश्वासन दिया।
     
    ओडीओपी से मिला लाभ, अब कालीन नीति की मांग
    इम्तियाज अहमद ने कहा कि ओडीओपी योजना से उद्यमियों को बहुत लाभ मिला है। इसी तर्ज पर कालीन उद्योग के लिए नीति बनाई जाए तो कारोबार को और फायदा होगा और रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे। उन्होंने कहा कि तीसरी बार उन्हें मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का आशीर्वाद मिला है।
     
    हस्तनिर्मित कालीन के लिए अलग व्यवस्था का सुझाव
    पीयूष कुमार बरनवाल ने कहा कि हस्तनिर्मित कालीन में भारत नंबर वन है। कालीन तैयार होने में अधिक समय लगता है, इसलिए इसे मैन्युफैक्चरिंग श्रेणी से थोड़ा अलग रखते हुए उद्योग की जरूरतों को ध्यान में रखकर नीति बनाई जाए।
    मुख्यमंत्री ने इसे अच्छा सुझाव बताते हुए कहा कि उन बुनकरों का अभिनंदन है, जिन्होंने अपने पूर्वजों की धरोहर को जीवित रखा है। उन्होंने भरोसा दिया कि इस सुझाव पर सरकार जरूर संज्ञान लेगी।
     
    महिलाओं को सीईपीसी से जोड़ने की उठी बात
    आदर्श पूर्णिमा ने कहा कि पहले इंडिया कारपेट एक्सपो दिल्ली में लगता था। तब यह कल्पना भी नहीं की गई थी कि इसका आयोजन भदोही में होगा। अब इतना बड़ा मेला अपने ही जनपद में हो रहा है और मुख्यमंत्री लगातार दूसरी बार कालीन उद्योग का उत्साह बढ़ाने पहुंचे हैं। कालीन उद्योग में बड़ी संख्या में महिला उद्यमी और वर्कर्स हैं, लेकिन कारपेट एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल (सीईपीसी) का मौजूदा ढांचा महिलाओं को अपने साथ नहीं जोड़ पाया है। महिलाओं के लिए ऐसा प्रावधान होना चाहिए, जिससे उनकी भागीदारी बढ़े और मनोबल मजबूत हो।
     
    इस पर मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी नारी शक्ति वंदन अधिनियम लेकर आए हैं। नारी अब केवल सरकार या सरकारी भरोसे नहीं रहेगी, बल्कि अपने लिए कानून भी बनाएगी। उन्होंने सीईपीसी से महिला उद्यमियों की भागीदारी सुनिश्चित करने और उनके लिए स्थान आरक्षित करने को कहा। मुख्यमंत्री ने इस दिशा में परिवर्तन का भी भरोसा दिया।

  • पंचायती राज चुनाव से पहले शराब तस्करी पर शिकंजा, 599 पेटियां समेत बड़ी खेप जब्त

    पंचायती राज चुनाव से पहले शराब तस्करी पर शिकंजा, 599 पेटियां समेत बड़ी खेप जब्त

    सवाईमाधोपुर
     पंचायती राज चुनाव की सरगर्मी बढ़ने से पहले ही जिले में अवैध शराब की आवाजाही ने पुलिस व प्रशासन की नींद उड़ा दी है। महज चार दिन के भीतर पुलिस और आबकारी विभाग की दो अलग-अलग कार्रवाइयों में करीब 54 लाख रुपए की शराब पकड़ी। एक ओर दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे पर ट्रक में भरकर पंजाब बिक्री की अवैध अंग्रेजी शराब की बड़ी खेप लाई जा रही थी, वहीं दूसरी ओर ग्रामीण इलाके में कार के जरिए देशी शराब की पेटियां पहुंचाई जा रही थीं। लगातार पकड़ी जा रही इन खेपों ने चुनाव से पहले शराब तस्करी के नेटवर्क और संभावित खपत को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

    29 सितंबर को दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे स्थित कुश्तला टोल प्लाजा पर आबकारी विभाग ने संदिग्ध ट्रक को रोककर तलाशी ली तो उसमें पंजाब में बिक्री के लिए निर्धारित अवैध अंग्रेजी शराब की 599 पेटियां मिलीं। जब्त शराब की अनुमानित कीमत करीब 52 लाख रुपए बताई गई। कार्रवाई के दौरान ट्रक चालक मौके से फरार हो गया। इसके चार दिन बाद ही रवांजना डूंगर थाना क्षेत्र में पुलिस ने नाकाबंदी के दौरान एक कार को पकड़ा। पुलिस को देखकर चालक ने टैक्सी मोड़कर भागने का प्रयास किया, लेकिन पीछा कर वाहन को रोक लिया। तलाशी में 50 पेटियों में 2400 पव्वे देशी शराब भरी मिली। पुलिस ने शराब जब्त कर दो आरोपियों को भी गिरफ्तार किया। बरामद शराब की कीमत करीब दो लाख रुपए बताई गई।

    एक्सप्रेस-वे से गांवों तक शराब की सप्लाई
    चार दिन के अंतराल में सामने आई दोनों कार्रवाई का तरीका अलग जरूर है, लेकिन दोनों मामलों ने जिले में शराब की आवाजाही की तस्वीर सामने रख दी है। एक तरफ एक्सप्रेसवे जैसे बड़े परिवहन मार्ग का इस्तेमाल लाखों रुपए की शराब की खेप लाने के लिए किया जा रहा था, तो दूसरी तरफ ग्रामीण सड़कों से शराब की पेटियां ले जाई जा रही थीं। ऐसे में सवाल यह है कि इतनी बड़ी मात्रा में शराब आखिर जिले में कहां खपाने के लिए लाई जा रही थी।

    नेटवर्क तक पहुंचना चुनौती
    पुलिस और आबकारी विभाग ने कार्रवाई कर शराब जब्त कर ली, लेकिन अब असली चुनौती उस नेटवर्क तक पहुंचने की है, जहां से यह शराब जिले में भेजी जा रही है और जहां इसकी सप्लाई होनी थी। खासकर 52 लाख रुपए की बड़ी खेप का जिले तक पहुंचना यह सवाल खड़ा करता है कि इसके पीछे सप्लायर से लेकर स्थानीय स्तर पर खपत कराने वाले लोग कौन हैं। चुनाव से पहले यदि ऐसे नेटवर्क की कड़ियां नहीं तोड़ी गई तो ग्रामीण क्षेत्रों में अवैध शराब की आवाजाही रोकना प्रशासन के लिए चुनौती बना रहेगा।

    चुनावी माहौल में बढ़ी चिंता
    पंचायती राज चुनाव को लेकर गांवों में राजनीतिक गतिविधियां तेज हो रही हैं। संभावित प्रत्याशी और समर्थक मतदाताओं से संपर्क में जुटने लगे हैं। ऐसे समय में लगातार शराब की बड़ी खेप पकड़ा जाना सामान्य तस्करी से आगे की चिंता पैदा करता है। चुनाव के दौरान अवैध शराब की खपत रोकना प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती रहती है। यही वजह है कि चुनाव से पहले पकड़ी गई इन खेपों ने निगरानी और नाकाबंदी व्यवस्था पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।

    इनका कहना है…
    जहां से भी शराब तस्करी के मामले सामने आए हैं, हमने कार्रवाई की है। पंचायतीराज चुनाव को लेकर डीएसटी टीम को भी निर्देश दिए है। आगे भी सूचना मिलते ही सख्त कार्रवाई की जाएगी।
    – ज्येष्ठा मैत्रेयी, पुलिस अधीक्षक, सवाईमाधोपुर

     

  • फैजुल्लागंज में नाव से डीएम-ज्वाइंट सीपी ने लिया जायजा, दाऊद नगर में अतिरिक्त कंट्रोल रूम के निर्देश

    फैजुल्लागंज में नाव से डीएम-ज्वाइंट सीपी ने लिया जायजा, दाऊद नगर में अतिरिक्त कंट्रोल रूम के निर्देश

    लखनऊ
    गोमती नदी के बढ़ते जलस्तर के बीच मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देशों के बाद लखनऊ में जिला प्रशासन ने राहत और बचाव अभियान तेज कर दिया है। रविवार को जिलाधिकारी विशाख जी. और संयुक्त पुलिस आयुक्त बबलू कुमार ने बरावन कला, सैथा, जेहटा, माल रोड और फैजुल्लागंज समेत प्रभावित क्षेत्रों का स्थलीय और नाव से निरीक्षण कर व्यवस्थाओं का निरीक्षण किया। अधिकारियों ने प्रभावित नागरिकों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए राहत एवं बचाव कार्यों को युद्धस्तर पर संचालित करने के निर्देश दिए।

    गर्भवती महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों की सुरक्षित शिफ्टिंग पर जोर
    ग्राम सैथा में निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी ने नगर मजिस्ट्रेट को निर्देश दिया कि गर्भवती महिलाओं, बच्चों और वृद्धजनों को प्राथमिकता के आधार पर तत्काल सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जाए। प्रभावित लोगों को सुरक्षित स्थानों तक ले जाने के लिए तत्काल 10 नावों की व्यवस्था सुनिश्चित करने को कहा गया। राहत शिविरों में स्वास्थ्य सेवाओं की भी जानकारी ली गई और जरूरतमंदों को पर्याप्त दवाएं उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए।

    घर-घर पहुंच रही राहत किट, भोजन और पशुओं के लिए चारे की व्यवस्था
    जिलाधिकारी विशाख जी. अय्यर ने बताया कि सुबह से ही प्रभावित क्षेत्रों में अधिकारियों और कर्मचारियों की टीमें सक्रिय हैं। नावों के माध्यम से घर-घर राहत किट पहुंचाई जा रही है। प्रभावित परिवारों के लिए भोजन और आवश्यक राहत सामग्री उपलब्ध कराने के साथ ही पशुओं के लिए पर्याप्त भूसा एवं चारे की व्यवस्था के निर्देश दिए गए हैं। स्वास्थ्य विभाग को आवश्यक दवाओं की पर्याप्त किट तैयार कर प्रभावित क्षेत्रों तक पहुंचाने को कहा गया है।

    रात में भी निगरानी, दाऊद नगर में बनेगा अतिरिक्त कंट्रोल रूम
    फैजुल्लागंज में जिलाधिकारी और संयुक्त पुलिस आयुक्त बबलू कुमार ने नाव से प्रभावित बस्तियों का निरीक्षण किया और स्थानीय लोगों से संवाद कर राहत व्यवस्था की जानकारी ली। सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए प्रभावित इलाकों में रात्रिकालीन पुलिस पेट्रोलिंग बढ़ाने के निर्देश दिए गए। दाऊद नगर में अतिरिक्त कंट्रोल रूम स्थापित करने को कहा गया है, ताकि नागरिकों की शिकायतों और जरूरतों पर तत्काल कार्रवाई हो सके। अधिकारियों को गोमती के जलस्तर और संवेदनशील इलाकों पर लगातार नजर रखने तथा मौके पर मौजूद रहकर राहत-बचाव कार्यों की निगरानी करने के निर्देश दिए गए हैं।

  • सपा के 34 साल पूरे होने पर ऋचा राजपूत लोध का हमला, राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग की सदस्य ने कहा- यूपी के लिए आज काला दिवस

    सपा के 34 साल पूरे होने पर ऋचा राजपूत लोध का हमला, राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग की सदस्य ने कहा- यूपी के लिए आज काला दिवस

    लखनऊ,
    उत्तर प्रदेश राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग की सदस्य और भाजपा की प्रदेश प्रवक्ता डॉ. ऋचा राजपूत लोध ने समाजवादी पार्टी की स्थापना के 34 वर्ष पूरे होने पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने सपा के इतिहास को कटघरे में खड़ा करते हुए कहा कि पूरे प्रदेश के लिए आज काला दिवस है।

    डॉ. ऋचा राजपूत ने कहा कि सपा के इतिहास की परतें खोली जाएं तो छेड़खानी और बलात्कार जैसे मामले स्पष्ट रूप से सामने आते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि 34 साल के इतिहास में आम जनता की बात छोड़िए, एके-47 से विधायकों की हत्याएं तक कराई गईं।

    गाजीपुर हॉस्टल और मऊ दंगों पर सपा को घेरा

    डॉ. ऋचा राजपूत ने गाजीपुर की घटनाओं का जिक्र करते हुए कहा कि दिनदहाड़े लड़कियों के हॉस्टल से अंसारी जैसे लोग लड़कियां उठाकर ले जाते थे। उन्होंने मथुरा के जवाहर बाग कांड, बदायूं कांड और मुजफ्फरनगर के दंगों का उल्लेख करते हुए तंज कसा कि ये समाजवादी पार्टी के मुकुट में चमकते हुए हीरे हैं।

    उन्होंने पार्टी संस्थापक और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव द्वारा लड़कियों की इज्जत पर हाथ डालने वाले लड़कों के लिए “गलती हो जाती है” जैसे शब्दों के इस्तेमाल की भी निंदा की। ऋचा राजपूत ने सवाल उठाया कि दुष्कर्मियों को ऐसे शब्दों से सुशोभित करने वाले समाज में नेता कहलाने लायक नहीं हैं।

    लव जिहाद और धर्मांतरण पर मौन दर्शाता है मानसिकता

    ऋचा राजपूत ने लव जिहाद और धर्मांतरण जैसे मुद्दों पर भी सपा को घेरा। उन्होंने कहा कि इन मुद्दों पर मौन रहने वाले और आतंकवादियों के मुकदमे वापस लेने वाले नेता बनने के लायक नहीं हैं। उन्होंने मऊ दंगों का जिक्र करते हुए आरोप लगाया कि सपा राज में वहां हिंदुओं की दुकानें चुन-चुनकर जलाई गईं।

    ब्राह्मणों और कारसेवकों के मुद्दे पर उठाए सवाल

    ऋचा राजपूत ने कन्नौज के नीरज मिश्रा हत्याकांड को याद करते हुए कहा कि ऐसी निर्मम हत्या करने वाले ब्राह्मणों को मुंह दिखाने लायक नहीं हैं। उन्होंने अयोध्या में राम मंदिर की अवहेलना का आरोप लगाया कि “कारसेवकों को मारने वाले, राम मंदिर की अवहेलना करने वाले हिंदू नहीं हो सकते।”

  • PM मोदी ने हरियाणा विधायकों को दिया मंत्र, हर विधानसभा में 30-35 गांवों तक पहुंचने पर जोर

    PM मोदी ने हरियाणा विधायकों को दिया मंत्र, हर विधानसभा में 30-35 गांवों तक पहुंचने पर जोर

    चंडीगढ़
     प्रधानमंत्री नरेंद्रे मोदी के साथ हरियाणा के भाजपा विधायकों की पहली सामूहिक मुलाकात बेहद आत्मीय माहौल में हुई। बैठक से पहले सभी मंत्री और विधायक जहां कुछ तनाव में नजर आ रहे थे, वहीं प्रधानमंत्री के शुरुआती अंदाज ने कुछ ही मिनटों में माहौल को सहज कर दिया।

    हरियाणवी अंदाज में विधायकों को उलाहना देते हुए मोदी ने उनसे कहा कहा, “हरियाणा वालों, तुमने राम-राम क्यों नहीं की।” प्रधानमंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि विधायकों को केवल परिचय के लिए बुलाया गया है। किसी तरह की टेंशन लेने की जरूरत नहीं है। इसके बाद सभी मंत्री और विधायक सहज हुए।

    बैठक में प्रदेश अध्यक्ष अर्चना गुप्ता ने सबसे पहले अपनी बात रखी। इसके बाद मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी और राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने संबोधित किया। अंत में प्रधानमंत्री मोदी ने विधायकों से संवाद किया।

    मैंने किसी का रिपोर्ट कार्ड नहीं देखा है- पीएम
    प्रधानमंत्री ने कहा कि पिछले तीन दिनों से इस बैठक को लेकर मीडिया में कई तरह की नकारात्मक बातें चल रही हैं, लेकिन ऐसा कुछ नहीं है। न मैंने किसी का रिपोर्ट कार्ड देखना है और न ही मैंने किसी को तलब किया है। यह मुलाकात बेहद सामान्य और परिचयात्मक है।

    इसके बाद प्रधानमंत्री ने विधायकों से उनके क्षेत्र और पुराने भाजपा नेताओं के बारे में भी जानकारी ली। मोदी ने हरियाणा के व्यापक प्रभाव का उल्लेख करते हुए कहा कि प्रदेश का असर पूरे देश पर पड़ता है, इसलिए हरियाणा को हर क्षेत्र में आगे रखने का प्रयास होना चाहिए।

    किसानों से जुड़ाव के संदर्भ में उन्होंने प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने पर जोर दिया और कम से कम हर किसान को एक एकड़ में प्राकृतिक खेती के लिए प्रोत्साहित करने की बात कही।

    गांवों तक पहुंचने और जनसंवाद पर जोर
    बैठक के बाद मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने इसे हरियाणा के सभी विधायकों के लिए ऐतिहासिक और प्रेरणादायक बताया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ने हरियाणा के विधायकों को लंबा समय दिया और विकास, जनसेवा तथा संगठन को लेकर विशेष मार्गदर्शन दिया।

    सैनी के मुताबिक प्रधानमंत्री ने कहा कि विकसित भारत केवल सरकार के प्रयासों से नहीं बनेगा। इसमें किसान, युवा और महिलाएं जब संकल्प के साथ जुड़ेंगे, तभी विकसित भारत के साथ विकसित हरियाणा का लक्ष्य हासिल होगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार और जनता के बीच दूरी न रहे, इसके लिए अधिक से अधिक लोगों से जुड़ने पर जोर दिया गया है।

    हर विधानसभा क्षेत्र में 30 से 35 गांवों में नियमित बैठकें
    मुख्यमंत्री के अनुसार प्रधानमंत्री ने प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र में करीब 30 से 35 गांवों में नियमित बैठकें करने की बात कही। उन्होंने गांवों में टिफिन बैठक, संवाद, स्वच्छता अभियान और स्थानीय समस्याओं पर चर्चा कर उनके समाधान की दिशा में काम करने का सुझाव दिया। प्रधानमंत्री ने कहा कि सभी विधायक, मंत्री, नेता और कार्यकर्ता जनता के बीच जाएं और समस्याओं के समाधान का माध्यम बनें।

    स्मृति इरानी और भोला सिंह से भी मिले हरियाणा के विधायक
    नायब सैनी ने कहा कि प्रधानमंत्री ने हरियाणा को परिवार की तरह मानने की बात कही और इसी भाव से विधायकों से संवाद किया। उन्होंने कहा, “राजनीति हमारे लिए सत्ता नहीं, सेवा का माध्यम है। प्रधानमंत्री ने हमें सेवा के माध्यम से राजनीति करना सिखाया है।”

    मुख्यमंत्री के मुताबिक प्रधानमंत्री ने उन क्षेत्रों में बालिका शिक्षा पर विशेष ध्यान देने को कहा, जहां उसका प्रभाव अभी अपेक्षाकृत कम दिखाई देता है। बैठक से पहले और बाद में हरियाणा के विधायकों ने नई पार्टी प्रभारी स्मृति इरानी, सह प्रभारी भोला सिंह और प्रदेश संगठन मंत्री पवन राणा से भी अलग चर्चा की।

  • एम बोले- 2017 से पहले तीर्थों के विकास का पैसा कब्रिस्तान की बाउंड्री के नाम पर जमीन कब्जाने का बनता था माध्यम, डबल इंजन सरकार ने रोकी कब्जे की प्रवृत्ति

    एम बोले- 2017 से पहले तीर्थों के विकास का पैसा कब्रिस्तान की बाउंड्री के नाम पर जमीन कब्जाने का बनता था माध्यम, डबल इंजन सरकार ने रोकी कब्जे की प्रवृत्ति

    भदोही
    मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने रविवार को संत रविदास नगर भदोही के युवाओं को उच्च शिक्षा के क्षेत्र में बड़ी सौगात देते हुए कहा कि अब यहां के नौजवानों की डिग्री पर उनके अपने जिले और अपने विश्वविद्यालय की पहचान होगी। जिले के पीजी कॉलेज को काशी नरेश विश्वविद्यालय के रूप में मान्यता दिए जाने का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि भदोही के युवाओं की वर्षों पुरानी मांग पूरी हुई है। जिले के कॉलेजों को विश्वविद्यालय से जोड़ने की कार्रवाई आगे बढ़ चुकी है। अब यहां के नौजवानों को मिलने वाली डिग्री पर काशी नरेश विश्वविद्यालय, संत रविदास नगर भदोही का नाम होगा। मुख्यमंत्री ने इसे केवल एक विश्वविद्यालय की स्थापना नहीं, बल्कि जिले की अपनी शैक्षणिक पहचान स्थापित होने से जोड़ते हुए कहा कि सरकार इस संस्था में बेहतरीन सुविधाएं भी उपलब्ध कराएगी। 

    मुख्यमंत्री भदोही, औराई एवं ज्ञानपुर विधानसभा क्षेत्रों में ₹1,340 करोड़ से अधिक की 112 विकास परियोजनाओं के लोकार्पण एवं शिलान्यास के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। इस दौरान उन्होंने विभिन्न शासकीय योजनाओं के लाभार्थियों को चेक, चाभी और नियुक्ति पत्र भी वितरित किए। इस दौरान मुख्यमंत्री ने स्पष्ट रूप से कहा कि आज जो ये पैसा इन तीर्थों के विकास के लिए खर्च हो पा रहा है, विरासत और पूर्वजों की धरोहर का संरक्षण का कार्य और उसका सुंदरीकरण हो रहा है। 2017 के पहले यह पैसा, इन तीर्थों को नहीं मिलता था। यही पैसा कब्रिस्तान की बाउंड्री वॉल के नाम पर जमीनों को कब्जा करने का माध्यम बन जाता था। डबल इंजन की सरकार ने उस कब्जे की प्रवृत्ति को रोका, विरासत का संरक्षण करते हुए तीर्थों के विकास को और आस्था को सम्मान देने का काम किया। भ्रष्टाचार पर लगाम लगाया और माफिया मुक्त, कर्फ्यू मुक्त उत्तर प्रदेश बना कर, उपद्रव मुक्त उत्तर प्रदेश बना करके अब उत्सव युक्त उत्तर प्रदेश बनाने का काम किया है।

    विश्वविद्यालय में विकसित की जाएंगी आधुनिक सुविधाएं
    मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने विश्वविद्यालय की सौगात को भदोही की वर्षों पुरानी आकांक्षा से जोड़ते हुए कहा कि प्रदेश में वर्षों से लंबित परियोजनाओं को उनकी सरकार ने फिर से आगे बढ़ाने का काम किया है। इसी क्रम में भदोही के लोग लंबे समय से अपने जिले में विश्वविद्यालय की मांग कर रहे थे। मिर्जापुर में मां विंध्यवासिनी विश्वविद्यालय की स्थापना पहले ही की जा चुकी थी, लेकिन भदोही के जनप्रतिनिधियों ने उनसे मिलकर जिले के लिए अलग विश्वविद्यालय की आवश्यकता बताई थी। मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछली बार भदोही आने पर उन्होंने यहां विश्वविद्यालय बनाने का वादा किया था। आज उन्हें यह बताते हुए प्रसन्नता है कि काशी नरेश विश्वविद्यालय के रूप में यहां के पीजी कॉलेज को मान्यता दे दी गई है। मुख्यमंत्री ने कहा कि अब भदोही के युवाओं को मिलने वाली डिग्री उनके अपने जिले के विश्वविद्यालय के नाम से होगी। उन्होंने कहा कि अपने जिले की पहचान अपने विश्वविद्यालय से, अपनी संस्थाओं से होती है। सरकार काशी नरेश विश्वविद्यालय को केवल नाम तक सीमित नहीं रखेगी, बल्कि यहां बेहतरीन सुविधाएं विकसित की जाएंगी। मुख्यमंत्री ने संकेत दिया कि विश्वविद्यालय के विकास की आगे की रूपरेखा भी तैयार है। उन्होंने कहा कि वह विश्वविद्यालय के लिए अलग से भदोही आएंगे। तब विश्वविद्यालय का विधिवत लोकार्पण होगा, उसके लोगो, कुलगीत और थीम गीत को आगे बढ़ाया जाएगा तथा नए भवन के निर्माण का शिलान्यास भी कराया जाएगा। 

    विश्वविद्यालय के बाद मेडिकल कॉलेज की दिशा में भी आगे बढ़ रहा भदोही
    मुख्यमंत्री ने भदोही के लिए उच्च शिक्षा के साथ स्वास्थ्य शिक्षा की दिशा में भी आगे बढ़ने का भरोसा दिया। उन्होंने कहा कि अब प्रदेश की पहचान ‘वन डिस्ट्रिक्ट वन माफिया’ नहीं, बल्कि ‘वन डिस्ट्रिक्ट वन मेडिकल कॉलेज’ की है। भदोही में काशी नरेश विश्वविद्यालय बन चुका है और आने वाले समय में यहां मेडिकल कॉलेज का कार्य भी आगे बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि विकास के सारे काम एक-एक कर पूरे किए जा रहे हैं। विकास के साथ विरासत का सम्मान और गरीब कल्याण की योजनाओं का लाभ बिना भेदभाव के गरीब, युवा, महिला, कारीगर और श्रमिक तक पहुंचाया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने भदोही की बदलती पहचान को उसके विश्व प्रसिद्ध कालीन उद्योग से भी जोड़ा। उन्होंने कहा कि संत रविदास नगर भदोही पहले से कालीन उद्योग के लिए जाना जाता रहा है, लेकिन अब तेजी से हो रहे विकास के साथ यह नई पहचान लेकर आगे बढ़ रहा है। इंडिया कारपेट एक्सपो के गोल्डन जुबली आयोजन का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि इसमें करीब 250 एग्जीबिटर्स और 450 विदेशी खरीदार आए हैं। इनमें 106 खरीदार ब्रिक्स देशों से हैं और कुल 65 देशों से आए खरीदार भदोही के कारीगरों के हुनर को वैश्विक पहचान दे रहे हैं। सरकार कारीगरों को टेक्नोलॉजी, ट्रेड और एक्सपोर्ट की सुविधा देने के साथ कारपेट एक्सपो जैसे आयोजनों के माध्यम से उनके उत्पादों को दुनिया के बाजार तक पहुंचा रही है। 

    विंध्य एक्सप्रेसवे से भी जुड़ेगा संत रविदास नगर
    मुख्यमंत्री ने भदोही की भौगोलिक स्थिति को विकास की बड़ी संभावना बताते हुए कहा कि एक ओर बाबा विश्वनाथ की पावन नगरी वाराणसी और दूसरी ओर संगम नगरी प्रयागराज है तथा दोनों के बीच संत रविदास नगर स्थित है। यहां विरासत भी है और डबल इंजन सरकार की गति से विकास भी। उन्होंने बताया कि जब गंगा एक्सप्रेसवे के विस्तार को विंध्य एक्सप्रेसवे के रूप में आगे बढ़ाने की बात आई तो उन्होंने संत रविदास नगर को भी इससे जोड़ने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि विकास एकांगी नहीं हो सकता, विकास सबको साथ लेकर चलता है और इसी भावना के साथ सरकार काम कर रही है। मुख्यमंत्री ने भदोही की पहचान को सद्गुरु संत रविदास की विरासत से भी जोड़ा। उन्होंने कहा कि गुरु पूर्णिमा के अवसर पर ही यह बात कही गई थी कि कालीन उद्योग के लिए विख्यात भदोही आने वाले समय में समाज को जोड़ने का संदेश देने वाले सद्गुरु रविदास जी महाराज के नाम से भी जाना जाएगा। संत रविदास के समतामूलक समाज के संदेश का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि लगभग 600 वर्ष पहले उन्होंने ऐसे राज की कामना की थी, जहां सभी को अन्न मिले और बिना भेदभाव के सभी को सुविधाएं प्राप्त हों। आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश के 80 करोड़ से अधिक लोगों को मुफ्त राशन मिल रहा है। ऐसे में जिले की पहचान संत रविदास नगर भदोही के रूप में होना और उनकी विरासत को आगे बढ़ाना प्रासंगिक है। 

    सीतामढ़ी से सेमराधनाथ धाम तक संवर रहे आस्था के केंद्र
    मुख्यमंत्री ने कहा कि औराई तहसील स्थित संत रविदास कुटिया आज भी श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है। सीता समाहित स्थल सीतामढ़ी को रामायण सर्किट से जोड़ने का काम किया गया है। बाबा सेमराधनाथ धाम मंदिर परिसर का सुंदरीकरण और गंगा घाट का विकास किया गया है। तीर्थयात्रियों के लिए पेयजल, शौचालय एवं अन्य सुविधाएं विकसित हुई हैं। गोपीगंज स्थित ज्ञानानंद मंदिर के गंगा किनारे घाट का पुनर्निर्माण और सुंदरीकरण किया गया है। बाबा हरिहरनाथ मंदिर, सीता समाहित स्थल और चकवा महादेव मंदिर का पर्यटन विकास हुआ है। 52 बीघा तीर्थ क्षेत्र के विकास को भी तेजी से आगे बढ़ाया जा रहा है। बाबा बड़े शिवधाम, प्राचीन बाबा बुढ़ेनाथ मंदिर, सायरकोट और डीघ के नर्मदेश्वर महादेव मंदिर से जुड़े विकास कार्यों का भी शिलान्यास किया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने इसे सरकार की ‘विकास भी, विरासत का सम्मान भी’ की नीति से जोड़ते हुए कहा कि आज तीर्थों के विकास पर धन खर्च हो रहा है, पूर्वजों की धरोहर का संरक्षण और सुंदरीकरण हो रहा है तथा आस्था को सम्मान मिल रहा है।

    बीमारू से टॉप-थ्री राज्यों में पहुंचा उत्तर प्रदेश
    मुख्यमंत्री ने प्रदेश में आए बदलाव का उल्लेख करते हुए कहा कि अब कोई उत्तर प्रदेश को बीमारू राज्य नहीं कहता और न ही प्रदेश पर दंगाग्रस्त होने का कलंक लगाया जा सकता है। जो उत्तर प्रदेश पहले देश के निचले तीन राज्यों में गिना जाता था, आज उसकी गिनती टॉप-थ्री राज्यों में होती है। उन्होंने कहा कि अब उत्तर प्रदेश के नौजवान को प्रदेश के बाहर पहचान के संकट का सामना नहीं करना पड़ता। बेटी और व्यापारी के सामने सुरक्षा का संकट नहीं है और कारीगरों को पलायन के लिए मजबूर नहीं होना पड़ रहा। किसानों के लिए बीज से बाजार तक व्यवस्था बनाई गई है, प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि का लाभ दिया जा रहा है और युवाओं के लिए स्किल डेवलपमेंट एवं मिशन रोजगार के जरिए अवसर तैयार किए गए हैं। 

    साढ़े नौ लाख सरकारी नौकरी, छह महीने में एक लाख और देने का वादा
    समाजवादी पार्टी पर हमला बोलते हुए सीएम ने कहा कि मैंने समाजवादी पार्टी और युवाओं की नौकरी पर डकैती डालने वालों से कहा है कि गिनते रहो, अगले छह महीने के अंदर यूपी गवर्नमेंट एक लाख नौजवानों को सरकारी नौकरी और देने जा रही है। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार अब तक साढ़े नौ लाख युवाओं को सरकारी नौकरी दे चुकी है। उन्होंने भर्ती प्रक्रिया में गड़बड़ी करने वालों को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा कि जो भी व्यक्ति युवाओं की नौकरी में सेंध लगाएगा, जेल जाएगा, प्रॉपर्टी जब्त होगी और जो भी बेटी और व्यापारी की सुरक्षा पर खतरा पैदा करेगा, तो जेल और जहन्नुम के रास्ते उसके लिए खुले होंगे। उन्होंने कहा कि समाजवादी पार्टी के समय में युवा हो या कारीगर, किसान हो या महिला, ये उनके एजेंडे के हिस्से नहीं थे। उनके एजेंडे के हिस्से में केवल परिवार था, तुष्टीकरण था, अराजकता थी, दंगाई थे, उपद्रवी थे, इन्हीं का महिमामंडन और माफिया के सामने घुटने टेक करके नाक रगड़ने के सिवाय इनके पास कुछ भी नहीं था।

    हर जिले के उत्पाद से व्यंजन तक को मिलेगी पहचान
    मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार प्रत्येक जिले की विशिष्ट पहचान को आगे बढ़ा रही है। ‘वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट’ के बाद अब ‘वन डिस्ट्रिक्ट वन कुजीन’ के माध्यम से हर जिले के अपने व्यंजन को भी पहचान दिलाने की दिशा में काम किया जा रहा है। जौनपुर की इमरती का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि भदोही के उत्पादों को भी वैश्विक मान्यता दिलाई जाएगी। इससे रोजगार का सृजन होगा और युवाओं के लिए नए अवसर पैदा होंगे।  मुख्यमंत्री ने खेलों में युवाओं की बढ़ती भागीदारी का उल्लेख करते हुए कहा कि सरकार ने हर कमिश्नरी में एक स्पोर्ट्स कॉलेज उपलब्ध कराने का निर्णय लिया है। खेलो इंडिया, फिट इंडिया मूवमेंट और विभिन्न खेल प्रतियोगिताओं के माध्यम से ग्रामीण स्तर से प्रतिभाओं को आगे बढ़ाया जा रहा है।

    इस अवसर पर सांसद डॉ. विनोद बिंद, जिला पंचायत अध्यक्ष अनिरुद्ध त्रिपाठी, विधायक औराई दीनानाथ भास्कर, विधायक ज्ञानपुर विपुल दुबे, भारतीय जनता पार्टी के जिलाध्यक्ष दीपक मिश्रा, पूर्व सांसद गोरखनाथ पांडे, पूर्व मंत्री रंगनाथ मिश्र, पूर्व विधायक रविंद्रनाथ त्रिपाठी, पूर्व जिलाध्यक्ष वंशीलाल मौर्य, पूर्व जिलाध्यक्ष संतोष पांडे, पूर्व जिलाध्यक्ष हौसला प्रसाद पाठक मौजूद रहे। 

    मुख्यमंत्री ने विभिन्न योजनाओं के लाभार्थियों को किया सम्मानित 
    एक जनपद-एक उत्पाद (ओडीओपी) वित्त पोषण योजना के अंतर्गत विनीत राय को कालीन व्यवसाय के लिए ₹2 करोड़ के ऋण का डेमो चेक
    मुख्यमंत्री युवा उद्यमी विकास अभियान के अंतर्गत पवन कुमार को हैंडल बैग एवं पेपर बैग निर्माण के लिए ₹5 लाख का डेमो चेक 
    प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्योग उन्नयन योजना के अंतर्गत गौरव सिंह को ऑयल मिल के लिए ₹10 लाख का डेमो चेक 
    प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्योग उन्नयन योजना के अंतर्गत संतोष तिवारी को मशरूम उत्पादन के लिए ₹16 लाख 30 हजार रुपये का डेमो चेक
    राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के अंतर्गत काजल गौतम को आरएफ एवं सीआईएफ के लिए ₹4 करोड़ 46 लाख का डेमो चेक 
    मुख्यमंत्री आवास योजना के अंतर्गत जयदेव को उनके आवास की चाबी प्रदान की गई 
    कृषि यांत्रिकीकरण योजना के अंतर्गत अभिषेक सिंह को कंबाइन हार्वेस्टर हेतु चाबी
    नव-नियुक्त आंगनबाड़ी कार्यकर्ता नेहा को आंगनवाड़ी केंद्र सरायभान सिंह के लिए नियुक्ति पत्र
    नवनियुक्त आंगनवाड़ी कार्यकर्ता प्रिंसी को नियुक्ति पत्र 
    आयुष्मान भारत योजना के अंतर्गत यमुना देवी को आयुष्मान भारत योजना का डेमो कार्ड ।

  • ‘संत रविदास नगर भदोही’ से दलित-राजभर दोनों को संदेश, योगी ने एक नाम में जोड़ी दो विरासत

    ‘संत रविदास नगर भदोही’ से दलित-राजभर दोनों को संदेश, योगी ने एक नाम में जोड़ी दो विरासत

     भदोही
    मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भदोही को ‘संत रविदास नगर भदोही’ नाम देने की बात दोहराकर इतिहास के साथ राजनीतिक संदेश भी दिया है। संत रविदास का नाम जिले की पहचान में वापस लाने से दलित समाज की आस्था और सम्मान जुड़ा है, वहीं ‘भदोही’ को बरकरार रखने से भार राज से जुड़ी ऐतिहासिक पहचान भी कायम रहेगी। पूर्वांचल के सामाजिक समीकरण में अहम दलित और राजभर समाज के लिहाज से भी इस फैसले के मायने हैं।
     
    मुख्यमंत्री योगी ने पहली बार 29 जुलाई 2026 को वाराणसी में भदोही का नाम बदलने की घोषणा की थी। रविवार को भदोही की धरती से उन्होंने एक बार फिर स्पष्ट किया कि जनपद ‘संत रविदास नगर भदोही’ के नाम से जाना जाएगा। मुख्यमंत्री ₹1,340 करोड़ से अधिक की 112 परियोजनाओं के लोकार्पण और शिलान्यास कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे।
     
    मुलायम ने बनाया जिला, मायावती ने बदला नाम
    तत्कालीन मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव ने 30 जून 1994 को वाराणसी से अलग कर भदोही को नया जनपद बनाया। इसके तीन साल बाद 4 दिसंबर 1997 को तत्कालीन मुख्यमंत्री मायावती ने संत शिरोमणि गुरु रविदास के सम्मान में भदोही का नाम बदलकर ‘संत रविदास नगर’ करने का नोटिफिकेशन जारी किया।
     
    करीब 17 साल बाद 6 दिसंबर 2014 को तत्कालीन मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने कैबिनेट की बैठक के माध्यम से ‘संत रविदास नगर’ का नाम बदलकर फिर ‘भदोही’ कर दिया। अब मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने ‘संत रविदास नगर’ और ‘भदोही’ दोनों को जिले के नाम में स्थान दिया है।
     
    भार राज्य की राजधानी से जुड़ा भदोही
    भदोही का इतिहास जिला बनने से सदियों पुराना है। जिला प्रशासन के आधिकारिक इतिहास के अनुसार इसका नाम यहां के ‘भार राज्य’ से पड़ा, जिसने भदोही को अपनी राजधानी बनाया था। क्षेत्र में भार शासकों से जुड़े पुराने टीले और तालाब भी बताए गए हैं।
     
    अकबर के शासनकाल में भदोही को दस्तुर बनाकर इलाहाबाद (प्रयागराज) सरकार में शामिल किया गया। बाद में यह अलग-अलग शासकों के अधीन रहा। वर्ष 1911 में बनारस रियासत का हिस्सा बना और आजादी के बाद वाराणसी जिले में शामिल रहा।
     
    नामकरण में सामाजिक समीकरण का भी संदेश
    संत रविदास दलित समाज के बड़े आराध्य और सामाजिक समरसता के प्रतीक हैं। उनका नाम जिले से दोबारा जुड़ना दलित समाज के लिए सम्मान के संदेश के रूप में देखा जा रहा है। वहीं भार राज से जुड़े ‘भदोही’ नाम को कायम रखना राजभर समाज की ऐतिहासिक विरासत को भी स्थान देता है।
     
    मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में संत रविदास के उस संदेश का भी उल्लेख किया, जिसमें सभी को अन्न मिलने और छोटे-बड़े के बिना भेदभाव साथ रहने की कल्पना की गई है। इसे उन्होंने केंद्र और प्रदेश सरकार की बिना भेदभाव योजनाओं से जोड़ा।
     
    इस तरह करीब तीन दशक में जिले के नाम की यह चौथी महत्वपूर्ण कड़ी है। मुलायम सिंह यादव ने भदोही को अलग जिला बनाया, मायावती ने इसे संत रविदास नगर किया और अखिलेश यादव ने फिर भदोही कर दिया। अब मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने दोनों नामों को जोड़कर ‘संत रविदास नगर भदोही’ की पहचान सामने रखी है।

  • योगी सरकार में यूपी के निर्यात को लगे पंख, कालीन उद्योग बना वैश्विक पहचान

    योगी सरकार में यूपी के निर्यात को लगे पंख, कालीन उद्योग बना वैश्विक पहचान

    लखनऊ,
    मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश की अर्थव्यवस्था को निर्यात के मोर्चे पर नई रफ्तार मिली है। प्रदेश का निर्यात अब पारंपरिक उत्पादों तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि इलेक्ट्रॉनिक्स, इंजीनियरिंग, खाद्य-डेयरी और अन्य क्षेत्रों के उत्पादों ने भी वैश्विक बाजार में अपनी मजबूत जगह बनाई है। इसी बदलती तस्वीर में पूर्वांचल का कालीन उद्योग भी यूपी की निर्यात पहचान को दुनिया के बाजार तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभा रहा है। भदोही में आयोजित 50वां इंडिया कारपेट एक्सपो इस वैश्विक पहचान का बड़ा मंच बनकर सामने आया है।

    प्रदेश के निर्यात में बीते वर्षों में आए बदलाव का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि वित्त वर्ष 2016-17 में यूपी का निर्यात 84,283 करोड़ रुपये था, जो वित्त वर्ष 2025-26 में बढ़कर 2,01,241 करोड़ रुपये पहुंच गया। यानी निर्यात मूल्य में करीब ढाई गुना वृद्धि दर्ज हुई। इससे पहले 2012-17 के दौरान निर्यात की औसत वार्षिक वृद्धि दर 4.1 प्रतिशत थी, जो 2017 के बाद बढ़कर लगभग 7.3 प्रतिशत हो गई। इस तरह निर्यात वृद्धि की रफ्तार करीब 1.8 गुना तेज हुई है।

    भदोही के कालीन की दुनिया में मजबूत पकड़
    उत्तर प्रदेश के कालीन उद्योग की बात हो तो संत रविदास नगर (भदोही) का नाम सबसे आगे आता है। वित्त वर्ष 2024-25 में प्रदेश के कुल कालीन निर्यात में अकेले भदोही की हिस्सेदारी 70 प्रतिशत से ज्यादा रही। वहीं भदोही-मीरजापुर-वाराणसी का कालीन क्लस्टर मिलकर यूपी के करीब 88 प्रतिशत कालीन निर्यात में योगदान देता है। राष्ट्रीय परिप्रेक्ष्य में देखें तो भारत के कुल हस्तनिर्मित कालीन निर्यात में उत्तर प्रदेश (विशेषकर भदोही-मीरजापुर क्लस्टर) की हिस्सेदारी ऐतिहासिक रूप से 55 से 60 प्रतिशत के बीच रही है। 2017 से पहले नीतिगत उपेक्षा, बिजली संकट, जटिल टैक्स प्रक्रियाओं और बुनियादी ढांचे के अभाव के कारण यह क्लस्टर भारी मंदी झेल रहा था। उस समय यूपी से विनिर्माण या वैश्विक निर्यात में बड़े उछाल की उम्मीद करना 'कल्पना से परे' माना जाता था। निर्यातक और उद्योग राज्य से पलायन कर रहे थे, जबकि आज अकेले भदोही-मीरजापुर-वाराणसी क्लस्टर से करीब ₹5,000 करोड़ का कालीन निर्यात वैश्विक बाजारों (यूएस, यूरोप, मिडिल ईस्ट) में हो रहा है।

    करीब पांच लाख श्रमिक, कारीगर और बुनकर जुड़े
    कालीन उद्योग सिर्फ निर्यात का आंकड़ा नहीं, बल्कि बड़ी संख्या में लोगों की आजीविका का आधार भी है। भदोही के कालीन उद्योग से करीब पांच लाख श्रमिक, कारीगर और बुनकर जुड़े हैं। हस्तनिर्मित कालीन के क्षेत्र में भारत दुनिया के प्रमुख निर्यातकों में शामिल है और भदोही की पहचान इस वैश्विक कारोबार में खास है। ओडीओपी योजना, टूलकिट वितरण, मुद्रा लोन, आधुनिक लूम और सोलर लूम की व्यवस्था ने स्थानीय कारीगरों/बुनकरों की आय और कार्य परिस्थितियों में बड़ा सुधार किया है। बिचौलियों पर उनकी निर्भरता घटी है और स्थानीय स्तर पर रोजगार सृजन से युवाओं का पलायन रुका है।

    बदली यूपी की एक्सपोर्ट बास्केट
    2012-17 के दौरान प्रदेश की निर्यात टोकरी में मात्र चमड़ा, हस्तशिल्प, कालीन-दरी की प्रमुख हिस्सेदारी थी। अब तस्वीर अधिक विविध हो चुकी है। वित्त वर्ष 2024-25 में इलेक्ट्रॉनिक्स 24 प्रतिशत, इंजीनियरिंग 20 प्रतिशत और खाद्य-डेयरी 11 प्रतिशत हिस्सेदारी के साथ प्रमुख निर्यात क्षेत्रों में शामिल हैं। इससे यूपी के निर्यात आधार के विस्तार का भी पता चलता है। 2017 से पहले यूपी के पारंपरिक हस्तशिल्प को कोई वैश्विक ब्रांडिंग या संगठित बाजार नहीं मिलता था, जबकि आज देश के हैंडीक्राफ्ट एक्सपोर्ट में यूपी का हिस्सेदारी 16.56 फीसदी है। 'एक जिला, एक उत्पाद' (ओडीओपी) और निर्यात प्रोत्साहन नीति के बाद हस्तशिल्प और संबंधित पारंपरिक उत्पादों का निर्यात दोगुने से अधिक स्तर पर पहुंच चुका है। बेहतर कनेक्टिविटी (पूर्वांचल एक्सप्रेसवे, बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे, डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर, जेवर एयरपोर्ट), निर्बाध बिजली, और 'ईज ऑफ डूइंग बिजनेस' में शीर्ष रैंकिंग ने प्रदेश की तस्वीर बदल दी है उत्तर प्रदेश आज सिर्फ पारंपरिक हस्तशिल्प ही नहीं, बल्कि मोबाइल/इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग, डिफेंस कॉरिडोर और टेक्सटाइल का प्रमुख राष्ट्रीय केंद्र बन चुका है।

    कारपेट एक्सपो मार्ट से वैश्विक बाजार तक पहुंच
    भदोही में 7.5 एकड़ में विकसित कारपेट एक्सपो मार्ट का उद्घाटन दिसंबर 2020 में किया गया था। इस अत्याधुनिक मंच ने कालीन कारोबार को वैश्विक खरीदारों से सीधे जोड़ने में अहम भूमिका निभाई है। इसी कड़ी में 4 से 7 अक्टूबर 2026 तक भदोही में 50वां इंडिया कारपेट एक्सपो आयोजित हो रहा है। इस एक्सपो में लगभग 250 एग्जीबिटर्स और 65 देशों के 450 से अधिक विदेशी बायर्स हिस्सा ले रहे हैं। इनमें ब्रिक्स देशों के 106 बायर्स भी हैं। ऐसे में भदोही के कालीनों के रंग और हुनर को एक बार फिर दुनिया के बाजार में नई चमक मिलने जा रही है।