Category: राज्य

  • बैलगाड़ी से पहुंची बारात, देसी थीम वाली शादी ने ताजा की पुराने दिनों की यादें

    बैलगाड़ी से पहुंची बारात, देसी थीम वाली शादी ने ताजा की पुराने दिनों की यादें

    समस्तीपुर.

    शहर की सड़कों पर बुधवार की शाम कुछ अलग ही था। न डीजे की कानफोड़ू आवाज, न रोशनी की चकाचौंध, न लग्जरी गाड़ियों की कतार। अगर कुछ था तो बैलों की सधी हुई चाल, लकड़ी की बैलगाड़ियों की मद्धिम चरमराहट और लोकगीतों की कोमल तान। यह नजारा देख हर राहगीर ठिठक गया, मोबाइल कैमरे निकल आए और एक ही सवाल गूंजने लगा, अब भला बैलगाड़ी से भी कोई बरात जाता है? 

    आलोक की अनूठी शादी
    यह अनोखी और पूरी तरह देसी थीम वाली बरात शहर के जाने-माने कारोबारी प्रदीप सेठ के पुत्र आलोक की शादी की थी। गोला रोड स्थित होटल से जब शाम ढलते ही बरात निकली, तो मानो समय कुछ पल के लिए पीछे लौट गया। दूल्हा रथ पर सवार था। सिर पर सेहरा, चेहरे पर सादगी भरी मुस्कान और मन में परंपरा को जीने का संकल्प। उसके पीछे-पीछे 22 सजी-धजी बैलगाड़ियों का कारवां धीरे-धीरे आगे बढ़ रहा था। 

    बैलगाड़ी की शाही सवारी 
    इन बैलगाड़ियों पर बैठे बाराती किसी शाही सवारी का आनंद ले रहे थे। कहीं सोफा सेट लगे थे, तो कहीं गद्दों पर बैठकर लोग लोकधुनों के साथ झूम रहे थे। करीब दो किलोमीटर का यह सफर तय कर जब बरात मथुरापुर स्थित गजराज पैलेस पहुंची, तब तक यह केवल एक विवाह जुलूस नहीं रह गई थी, बल्कि चर्चा का विषय बन चुकी थी। इस बारात की खास बात यह थी कि यह पूरी तरह प्रदूषण-मुक्त थी। न धुएं का गुबार, न शोर-शराबा। सिर्फ उल्लास, अपनापन और प्रकृति के साथ सामंजस्य। बैलगाड़ी के पहियों की आवाज, फूलों की खुशबू और लोकगीतों की तान ने ऐसा दृश्य रचा, जैसे गांव की आत्मा खुद इस विवाह की साक्षी बन गई हो।

    पर्यावरण संरक्षण का संदेश
    कार्यक्रम संयोजक और पशुप्रेमी महेंद्र प्रधान बताते हैं कि इस देसी और पर्यावरण-संवेदनशील आयोजन के लिए आसपास के गांवों से 35 जोड़ी बैलगाड़ियों को बुलाया गया था। सभी को पारंपरिक अंदाज में सजाया गया। कुछ खास मेहमानों के लिए बैलगाड़ियों पर सोफा लगाए गए, जबकि बाकी में गद्दों की व्यवस्था की गई थी। जब यह अनोखी बरात सड़क पर निकली, तो देखने वालों के चेहरे पर हैरानी और मुस्कान एक साथ थी। किसी ने कहा,“यह तो असली शादी है”, तो किसी ने इसे परंपरा और आधुनिक सोच का सुंदर मेल बताया। शोर और दिखावे के इस दौर में यह देसी थीम वाली शादी यह संदेश दे गई कि सादगी, संस्कृति और पर्यावरण के साथ भी उत्सव उतना ही भव्य हो सकता है। वहीं दूल्हा आलोक ने कहा कि कुछ अलग करने की चाहत थी, लेकिन उसका यह स्वरूप होगा, सोचा नहीं था।

  • शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद के खिलाफ सबूत जुटाने में जुटी पुलिस, मामले की जांच में नई तेज़ी

    शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद के खिलाफ सबूत जुटाने में जुटी पुलिस, मामले की जांच में नई तेज़ी

    प्रयागराज

    शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के खिलाफ प्रयागराज के झूंसी थाने में दर्ज पॉक्सो एक्ट के हाई प्रोफाइल मुकदमे में मंगलवार को जांच ने रफ्तार पकड़ ली। पुलिस ने एक नाबालिग पीड़ित का मेडिकल परीक्षण कराया, जबकि दूसरे पीड़ित के बयान और साक्ष्यों के मिलान की प्रक्रिया जारी है। टीम ने माघ मेला क्षेत्र में कथित घटनास्थल का दोबारा निरीक्षण कर शिविरों की स्थिति, वहां की आवाजाही और उपलब्ध सीसीटीवी फुटेज की पड़ताल की।

    यह मुकदमा अविमुक्तेश्वरानंद, उनके शिष्य मुकुंदानंद ब्रह्मचारी और तीन अज्ञात के खिलाफ दर्ज हुआ है। शिकायतकर्ता आशुतोष ब्रह्मचारी ने अदालत में दो नाबालिगों को बयान के लिए प्रस्तुत किया था, जिसके आधार पर पॉक्सो की विशेष अदालत के आदेश पर झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज की गई है। पुलिस सूत्रों के अनुसार, मेडिकल रिपोर्ट और पूर्व में दर्ज कराए गए बयानों का मिलान किया जा रहा है। साथ ही मोबाइल कॉल डिटेल, लोकेशन डेटा और मेला क्षेत्र के सीसीटीवी फुटेज को खंगाला जा रहा है। जांच टीम यह भी पता लगा रही है कि कथित घटनाओं के समय संबंधित लोग किस स्थान पर मौजूद थे।

    साधु-संतों और चश्मदीदों से होगी पूछताछ

    पुलिस की विवेचना अब केवल तकनीकी साक्ष्यों तक सीमित नहीं है, बल्कि सामाजिक और प्रत्यक्षदर्शी साक्ष्यों को भी जुटाया जा रहा है। जांच टीम ने उस शिविर क्षेत्र का मानचित्र तैयार किया है जहाँ कथित अनुष्ठान आयोजित होने की बात कही गई है। पुलिस अब आसपास के शिविरों के संचालकों, वहां तैनात सुरक्षाकर्मियों और नियमित आने-जाने वाले साधु-संतों से पूछताछ की तैयारी कर रही है।

    पुलिस का मुख्य उद्देश्य यह पता लगाना है कि क्या उस विशेष अवधि में नाबालिगों की उपस्थिति वहां देखी गई थी और क्या किसी संदिग्ध गतिविधि की भनक आसपास के लोगों को थी। उच्चाधिकारियों ने निर्देश दिए हैं कि जांच के हर चरण की वीडियोग्राफी कराई जाए ताकि भविष्य में किसी भी पक्ष द्वारा साक्ष्यों से छेड़छाड़ या पक्षपात का आरोप न लगाया जा सके।

    उच्चाधिकारियों की निगरानी में हो रही है जांच

    मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए उच्चाधिकारियों की निगरानी में जांच जारी है। जांच के अगले चरण में आरोपित पक्ष से भी विस्तृत पूछताछ की तैयारी है। पुलिस का कहना है कि सभी पहलुओं की निष्पक्ष और गहन जांच के बाद ही आगे की कार्रवाई तय की जाएगी। उधर, अविमुक्तेश्वरानंद ने सोशल मीडिया पर प्रयागराज के एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी और शिकायतकर्ता आशुतोष ब्रह्मचारी की केक काटते हुए फोटो वायरल की है।

    उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस और शिकायतकर्ता की मिलीभगत से उन्हें साजिश के तहत फंसाया जा रहा है। हालांकि, पुलिस अधिकारियों का कहना है कि वायरल फोटो की सत्यता और संदर्भ की जांच की जा रही है। इससे विवेचना की निष्पक्षता पर कोई असर नहीं पड़ेगा। एक वरिष्ठ अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर कहा कि ‘जांच तथ्यों और साक्ष्यों के आधार पर आगे बढ़ेगी, न कि आरोप-प्रत्यारोप के आधार पर।’

    अविमुक्तेश्वरानंद ने दाखिल की अग्रिम जमानत की अर्जी

    प्रयागराज। अविमुक्तेश्वरानंद ने पॉस्को एक्ट में मुकदमा दर्ज़ होने के बाद गिरफ्तारी से बचने के लिए हाईकोर्ट का रुख किया है। उनकी ओर से हाईकोर्ट में अग्रिम जमानत अर्जी दाखिल की गई है, जिस पर जल्दी सुनवाई होने की संभावना है। आशुतोष ब्रह्मचारी की अर्जी पर प्रयागराज में नियुक्त विशेष न्यायाधीश पॉक्सो एक्ट के आदेश के क्रम में रविवार को झूंसी थाने में पॉस्को एक्ट व बीएनएस की धाराओं में मुकदमा दर्ज़ किया गया था, जिसके बाद अविमुक्तेश्वरानंद की गिरफ्तारी की संभावना भी जताई जा रही है।

    इसे देखते हुए गिरफ्तारी से बचने के लिए उनकी ओर से अग्रिम जमानत अर्जी दाखिल की गई है। झूंसी पुलिस ने मुकदमा दर्ज़ होने के बाद विवेचना को तेज कर दिया है। पीड़ितों का बयान लेने के लिए पुलिस हरदोई गई थी। ऐसे में मुकदमे की गंभीर धाराओं को देखते हुए हाईकोर्ट में अग्रिम जमानत अर्जी दाखिल की गई है।

  • 16 मार्च को होंगे चुनाव, हरियाणा राज्यसभा की 2 सीटों पर नॉमिनेशन शुरू

    16 मार्च को होंगे चुनाव, हरियाणा राज्यसभा की 2 सीटों पर नॉमिनेशन शुरू

    पंचूकला.

    9 अप्रैल को खाली होने जा रही हरियाणा की दो राज्यसभा सीटों के लिए चुनावी प्रक्रिया शुरू हो गई है। खाली सीटों को भरने के लिए भारतीय चुनाव आयोग (ECI) द्वारा नोटिफिकेशन जारी कर दिया गया है। इसके बाद चुनावी प्रक्रिया शुरू हो गई है। अब इच्छुक और योग्य उम्मीदवार 5 मार्च तक अपना नॉमिनेशन भर सकेंगे।

    वोटिंग के लिए 16 मार्च की डेट फाइनल की गई है। भाजपा के 2 राज्यसभा सांसद किरण चौधरी और रामचंद्र जांगड़ा का कार्यकाल 9 अप्रैल तक है। अभी ये दोनों सीटें भाजपा के पास हैं। 16 मार्च को वोटिंग के बाद शाम को रिजल्ट जारी होगा। वहीं ईसीआई के जारी नोटिफिकेशन में हरियाणा के आईएएस पंकज अग्रवाल को रिटर्निंग ऑफिसर बनाया गया है। पंकज अग्रवाल अभी एग्रीकल्चर डिपार्टमेंट में प्रिंसिपल सेक्रेटरी की जिम्मेदारी देख रहे हैं। वहीं असिस्टेंट रिटर्निंग ऑफिसर की जिम्मेदारी हरियाणा विधानसभा के डिप्टी सेक्रेटरी गौरव गोयल को दी गई है।

  • CET एग्जाम में शामिल हुए लाखों युवा, मुख्यमंत्री के बेटे ने भी भरा था सरकारी नौकरी का फार्म

    CET एग्जाम में शामिल हुए लाखों युवा, मुख्यमंत्री के बेटे ने भी भरा था सरकारी नौकरी का फार्म

    पंचूकला.

    हरियाणा में तृतीय श्रेणी की नौकरियों के लिए हुई सामान्य पात्रता परीक्षा (सीईटी) की गंभीरता और महत्ता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के बेटे अनिकेत सैनी ने भी परीक्षा के लिए आवेदन फार्म भरा था अनिकेत सैनी बीए-एलएलबी की पढ़ाई कर रहे हैं और इस समय उनका द्वितीय वर्ष चल रहा है।

    अनिकेत आवेदन फार्म भरने के बाद 26 व 27 जुलाई को हुई सीईटी की परीक्षा सिर्फ इसलिए नहीं दे पाए, क्योंकि उस समय दिल्ली की एक लॉ कंपनी में उनकी इंटर्नशिप चल रही थी। मुख्यमंत्री के बेटे अनिकेत द्वारा सीईटी की परीक्षा के लिए फार्म भरने की सूचना इसलिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि समूचा विपक्ष राज्य में बाहरी युवाओं को नौकरियां देने, हरियाणवी युवाओं की अनदेखी करने तथा राज्य के युवाओं को नौकरियां नहीं मिलने के आरोप लगा रहा है। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने आंकड़ों के आधार पर विपक्ष के इन आरोपों को खारिज कर दिया है।

    हरियाणा के युवाओं को मिल रहीं नौकरियां
    उनका मानना है कि जब दूसरे राज्यों में हरियाणा के युवाओं को नौकरियां मिल सकती हैं तो फिर हरियाणा में बाहरी राज्यों के युवा मैरिट के आधार पर नौकरियां क्यों नहीं प्राप्त कर सकते। हरियाणा लोक सेवा आयोग के आंकड़ों के आधार पर दावा किया जा रहा है कि बाहरी युवाओं के नौकरी पाने का प्रतिशत दो से तीन ही है, जबकि बाकी पदों पर हरियाणवी युवा ही नौकरियां कर रहे हैं। हरियाणा कर्मचारी चयन आयोग के आंकड़ों के मुताबिक भाजपा सरकार ने हर साल 15 से 16 हजार 500 युवाओं को सरकारी नौकरियां दी हैं। इनमें हरियाणा कर्मचारी चयन आयोग की नौकरियां करीब 15 हजार और हरियाणा लोक सेवा आयोग की नौकरियां एक हजार से डेढ़ हजार प्रतिवर्ष शामिल हैं। अभी तक कर्मचारी चयन आयोग की ओर से एक लाख 60 हजार सरकारी नौकरियां प्रदान की जा चुकी हैं, जबकि राज्य लोक सेवा आयोग की ओर से करीब 18 हजार नौकरियां दी चुकी हैं। केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल जब हरियाणा के मुख्यमंत्री थे, तब साल 2022 में पहली बार सीईटी हुआ था।

    13.58 लाख युवाओं ने किया आवेदन
    उसके तीन साल बाद 2025 में मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के नेतृत्व में सीईटी हुआ है। अब सरकार चतुर्थ श्रेणी की नौकरियों के लिए सीईटी के आयोजन की तैयारियों में जुटी है। तृतीय श्रेणी की नौकरियों के लिए हुई सीईटी की परीक्षा के लिए 13.48 लाख युवाओं ने आवेदन भरे थे, जिनमें मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के बेटे अनिकेत सैनी भी एक अभ्यर्थी रहे हैं। इनमें से करीब 12 लाख ने परीक्षा दी और आठ लाख य़ुवा पास हुए। इन पास युवाओं के लिए सरकार ने अब तक करीब 13 हजार नौकरियों के अवसर प्रदान कर दिए हैं और करीब 10 हजार पदों पर नौकरियां जल्द निकलने वाली हैं।

    सीएम का दावा- हम योग्य युवाओं को नौकरी दे रहे सीएम के बेटे द्वारा नौकरी के लिए प्रारंभिक परीक्षा का फार्म भरने से लेकर रिक्शा चलाने वाले व ठेला खींचने वाले लोगों के घर भी सरकारी नौकरियां लगी हैं। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी का मानना है कि जिस मुहिम को केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल ने चालू किया था, वह आज भी उसी तरह से अनवरत जारी है। विपक्ष कमियां ढूंढता रहे और हम गरीब व जरूरतमंदों को मैरिट के आधार पर नौकरियां देते रहेंगे।

  • रट्टा नहीं अब तर्क और समझ से मिलेंगे अंक, CBSE Exam में अब रटने का दौर खत्म

    रट्टा नहीं अब तर्क और समझ से मिलेंगे अंक, CBSE Exam में अब रटने का दौर खत्म

    लुधियाना.

    सैंट्रल बोर्ड ऑफ सैकेंडरी एजुकेशन (सी.बी.एस.ई.) की बोर्ड परीक्षाओं में अब पारंपरिक यानी रटे-रटाए सवालों का युग समाप्त हो रहा है। बोर्ड ने अपनी मूल्यांकन पद्धति में क्रांतिकारी बदलाव करते हुए अब कॉम्पिटेंसी बेस्ड (योग्यता आधारित), केस बेस्ड और सोर्स बेस्ड इंटीग्रेटेड प्रश्नों पर अपना पूरा ध्यान केंद्रित किया है।

    इस नए बदलाव का उद्देश्य शिक्षा को केवल किताबी ज्ञान तक सीमित न रखकर उसे व्यावहारिक और विश्लेषणात्मक बनाना है। शिक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, अब प्रश्नपत्र इस तरह तैयार किए जा रहे हैं जो छात्र की सिर्फ याद्दाश्त का नहीं, बल्कि उनकी तर्क शक्ति, विश्लेषण क्षमता और किसी विशेष परिस्थिति को समझने की क्षमता का आकलन कर सकें। इस नए पैटर्न में ‘असर्शन-रीजन’ (कथन-कारण) आधारित सवालों की संख्या में भी उल्लेखनीय बढौतरी की गई है। कैमिस्ट्री, बायोलॉजी, अकाउंटेंसी और कक्षा 10वीं के अन्य महत्वपूर्ण विषयों में भी इसी तरह के चुनौतीपूर्ण और समझ पर आधारित प्रश्नों की प्रधानता रहेगी, ताकि छात्रों को विषय की गहराई तक ले जाया जा सके।

    विशेषज्ञों के अनुसार कॉम्पिटेंसी आधारित प्रश्नों को बढ़ाना आज के समय की सबसे बड़ी जरूरत है। इससे छात्र रटने के बजाय कॉन्सेप्ट को बेहतर तरीके से समझेंगे। उन्होंने छात्रों को सुझाव दिया कि वे एन.सी.ई.आर.टी. के हर सिद्धांत को गहराई से पढ़ें, सैंपल पेपर हल करते समय प्रश्नों की भाषा और तर्क को समझें तथा प्रतिदिन केस-स्टडी आधारित प्रश्नों का अभ्यास करें।

  • राजकीय सम्मान से होगा अंतिम संस्कार, मणिपुर में उग्रवादियों से लड़ते हुए सैनिक शहीद

    राजकीय सम्मान से होगा अंतिम संस्कार, मणिपुर में उग्रवादियों से लड़ते हुए सैनिक शहीद

    संगरूर.

    पंजाब के संगरूर जिले के गांव महलां चौक के रहने वाले सैनिक गुरप्रीत सिंह मणिपुर में ड्यूटी के दौरान उग्रवादियों के साथ हुई मुठभेड़ में शहीद हो गए। बताया जा रहा है कि वे भारतीय सेना में तैनात थे और पिछले 21 वर्षों से देश की सेवा कर रहे थे। मणिपुर में चल रहे एक ऑपरेशन के दौरान आतंकियों की ओर से हुई।

    अचानक फायरिंग में वे गंभीर रूप से घायल हो गए। साथियों ने उन्हें बचाने का हर संभव प्रयास किया, लेकिन उन्होंने मातृभूमि की रक्षा करते हुए वीरगति प्राप्त की। शहादत की खबर मिलते ही गांव महलां चौक सहित पूरे क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई। बड़ी संख्या में ग्रामीण, सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि और आसपास के इलाकों के लोग परिवार के घर पहुंचकर संवेदना जता रहे हैं। शहीद अपने पीछे पत्नी, एक पुत्र और एक पुत्री छोड़ गए हैं।

    परिवार में छाया मातम
    परिवार का रो-रोकर बुरा हाल है। ग्रामीणों ने बताया कि गुरप्रीत सिंह मिलनसार, बहादुर और कर्तव्यनिष्ठ सैनिक थे, जिन्हें गांव का हर व्यक्ति सम्मान देता था। इस बीच शहादत को लेकर मुआवजे और सरकारी सहायता को लेकर चर्चा तेज हो गई है। नंबरदार यूनियन पंजाब के नेता रण सिंह मैहलां ने राज्य सरकार से मांग की है कि शहीद के परिवार को उचित मुआवजा दिया जाए, परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी दी जाए और गांव में उनकी याद में स्मारक बनाया जाए। उन्होंने कहा कि यदि सरकार शीघ्र घोषणा नहीं करती तो संगठन स्तर पर आवाज उठाई जाएगी।

    लोग वीर सपूत को अंतिम विर्दा देने की तैयारी में जुटे
    प्रशासन की ओर से एसडीएम दिड़बा ने जानकारी दी कि शहीद का अंतिम संस्कार पूरे राजकीय सम्मान के साथ किया जाएगा। क्षेत्र के लोग अपने वीर सपूत को अंतिम विदाई देने की तैयारी में जुटे हैं। गुरप्रीत सिंह की शहादत ने एक बार फिर देश की सुरक्षा में तैनात जवानों के साहस और बलिदान को उजागर किया है।

  • राजधानी का नाम बदलेगा? बीजेपी सांसद की मांग से छिड़ी नई बहस

    राजधानी का नाम बदलेगा? बीजेपी सांसद की मांग से छिड़ी नई बहस

    नई दिल्ली
    केरल का नाम बदलकर केरलम किए जाने के फैसले पर केंद्र सरकार की मुहर लगने के बाद अब दिल्ली की नई पहचान की मांग भी उठ गई है। भाजपा के सांसद प्रवीन खंडेलवाल ने दिल्ली का नाम बदलकर 'इंद्रप्रस्थ' करने की मांग की है। उन्होंने इसके लिए गृहमंत्री अमित शाह और मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता को लेटर लिखकर अपनी दलीलें पेश की हैं।

    दिल्ली के चांदनी चौक से भाजपा सांसद प्रवीन खंडेलवाल ने केंद्र सरकार से राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली का नाम बदलकर इंद्रप्रस्थ करने पर विचार करने का आग्रह किया है। उनका कहना है कि ऐसा कदम भारत की राजधानी की ऐतिहासिक और सभ्यतागत पहचान को पुनर्स्थापित करेगा। उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि दिल्ली में किसी स्थान पर,संभवतः पुराना किला में पांडवों की प्रतिमाएं स्थापित की जाएं, जिससे दिल्ली की प्राचीन सांस्कृतिक और ऐतिहासिक पहचान को पुनर्जीवित किया जा सके।

    विधानसभा में प्रस्ताव पारित करने का सुझाव
    खंडेलवाल ने दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता को भी लेटर लिखा है और उनसे अनुरोध किया है कि दिल्ली विधानसभा में दिल्ली का नाम 'इंद्रप्रस्थ' करने के लिए एक प्रस्ताव पारित किया जाए। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को लिखे एक लेटर में खंडेलवाल ने कहा कि भारत विश्व की सबसे प्राचीन जीवित सभ्यताओं में से एक है और उसकी राष्ट्रीय राजधानी का नाम भी उसके गहरे ऐतिहासिक और सांस्कृतिक मूल्यों को प्रतिबिंबित करना चाहिए।

    और क्या दलीलें
    खंडेलवाल ने कहा कि ऐतिहासिक साहित्य, पुरातात्विक साक्ष्य और दीर्घकालिक सभ्यतागत परंपराएं यह स्थापित करती हैं कि वर्तमान दिल्ली ही प्राचीन इंद्रप्रस्थ का स्थल है, जो पांडवों द्वारा स्थापित भव्य राजधानी थी, जैसा कि महाकाव्य महाभारत में वर्णित है। महाभारत में इंद्रप्रस्थ को यमुना नदी के तट पर बसा एक समृद्ध और भव्य नगर बताया गया है, जो आज की दिल्ली के भौगोलिक स्वरूप से पूरी तरह मेल खाता है।

    उन्होंने आगे बताया कि भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) द्वारा पुराना किला में की गई खुदाई में लगभग 1000 ईसा पूर्व के प्राचीन बसावट के प्रमाण मिले हैं, जिनमें पेंटेड ग्रे वेयर (PGW) संस्कृति के अवशेष भी शामिल हैं, जिन्हें महाभारत काल से जोड़ा जाता है। उनके अनुसार ये खोजें इस ऐतिहासिक धारणा को मजबूत करती हैं कि प्राचीन इंद्रप्रस्थ इसी स्थान पर स्थित था जहां आज दिल्ली है। खंडेलवाल ने कहा कि 'दिल्ली' नाम अपेक्षाकृत बाद के मध्यकालीन दौर में प्रचलन में आया, जिसे इतिहासकार ढिल्लिका या देहली जैसे नामों से जोड़ते हैं। लेकिन यह इसकी मूल और प्राचीन सभ्यतागत पहचान का प्रतिनिधित्व नहीं करता।

    सांसद ने बताया क्या होगा फायदा
    खंडेलवाल ने कहा, 'इंद्रप्रस्थ राजधानी की मूल सभ्यतागत पहचान का प्रतीक है, जबकि दिल्ली इतिहास के एक बाद के चरण को दर्शाता है। राजधानी का नाम इंद्रप्रस्थ करना भारत की प्राचीन विरासत से उसके संबंध को पुनर्स्थापित करेगा और भारत की सांस्कृतिक निरंतरता को मजबूत करेगा।' खंडेलवाल ने यह भी कहा कि भारत में कई शहरों के ऐतिहासिक नाम पुनर्स्थापित किए जा चुके हैं, जिनमें मुंबई, कोलकाता, चेन्नई और प्रयागराज प्रमुख उदाहरण हैं।

    उन्होंने कहा कि इंद्रप्रस्थ नाम पहले से ही दिल्ली के कई प्रमुख संस्थानों और स्थानों में प्रचलित है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि इस ऐतिहासिक नाम को समाज में स्वाभाविक स्वीकृति प्राप्त है। खंडेलवाल ने कहा कि दिल्ली का नाम इंद्रप्रस्थ करना भारत की राजधानी की सभ्यतागत पहचान को पुनर्स्थापित करने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम होगा, जिससे राष्ट्रीय गौरव मजबूत होगा और विश्व के सामने भारत की प्राचीन विरासत और भी प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत होगी।

    औपचारिक प्रक्रिया शुरू करने की मांग
    उन्होंने गृह मंत्री श्री अमित शाह से आग्रह किया कि इतिहासकारों, पुरातत्वविदों और अन्य विशेषज्ञों से परामर्श कर इस प्रस्ताव पर औपचारिक प्रक्रिया शुरू की जाए। खंडेलवाल ने कहा, 'यह कदम न केवल एक ऐतिहासिक विसंगति को दूर करेगा, बल्कि भारत की महान सभ्यता की विरासत को सम्मान देने और उसे संरक्षित रखने की हमारी प्रतिबद्धता को भी सशक्त करेगा।'

     

  • दिल्ली सरकार की नई पहल, मददगारों को 25 हजार का कैश रिवार्ड

    दिल्ली सरकार की नई पहल, मददगारों को 25 हजार का कैश रिवार्ड

    नई दिल्ली

    दिल्ली सरकार ने केंद्र सरकार की ‘राहवीर’ योजना को दिल्ली में लागू करने का फैसला लिया है। जल्द ही योजना को लागू किया जा सकता है। योजना के तहत सड़क दुर्घटनाओं में गंभीर रूप से घायलों की मदद करने वाले नागरिकों को 25 हजार रुपये की नकद पुरस्कार राशि और प्रशस्ति पत्र दिया जाएगा। आप सरकार में यह योजना मात्र दो हजार रुपये की थी। साथ ही, कुछ समय से यह योजना बंद भी थी।
    मानवता का परिचय दे सकें

    मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने यह जानकारी देते हुए कहा कि केंद्र सरकार ने इस मानवीय पहल को प्रोत्साहन देने के लिए आर्थिक पुरस्कार की व्यवस्था की है ताकि आम नागरिक बिना किसी भय के दुर्घटना पीड़ितों की सहायता कर सकें और मानवता का परिचय दे सकें।

    लोगों को आगे आने के लिए प्रोत्साहित करेगी

    मुख्यमंत्री ने कहा कि इस योजना का उद्देश्य आम जनता को सड़क दुर्घटना के पीड़ितों को गोल्डन आवर के भीतर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने के लिए प्रेरित करना है।

    केंद्र सरकार के सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय का मानना है कि अगर ज्यादा लोग आगे आकर मदद करेंगे तो सड़क दुर्घटनाओं में होने वाली मृत्यु दर में कमी लाई जा सकती है।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि अक्सर लोग कानूनी झंझट या पुलिस कार्रवाई के भय से मदद करने से बचते हैं, लेकिन यह योजना उस भय को दूर कर लोगों को आगे आने के लिए प्रोत्साहित करेगी।

    तत्काल अस्पताल पहुंचाने का साहस करेंगे

    उन्होंने कहा कि दिल्ली जैसे महानगर में प्रतिदिन हजारों वाहन सड़कों पर चलते हैं, गोल्डन आवर के भीतर चिकित्सा सहायता उपलब्ध होना जीवन और मृत्यु के बीच निर्णायक साबित हो सकता है। यह योजना कई परिवारों को असमय शोक से बचाने में सहायक हो सकती है। मदद करने वाले को प्रोत्साहन राशि और कानूनी संरक्षण मिलने से ज्यादा लोग दुर्घटना पीड़ितों को तत्काल अस्पताल पहुंचाने का साहस करेंगे, जिससे अनमोल जीवन बचाए जा सकेंगे।

    संकटग्रस्त व्यक्ति की स्वेच्छा से सहायता

    मुख्यमंत्री ने विश्वास जताया कि दिल्ली सरकार इस योजना को प्रभावी ढंग से लागू कर सड़क सुरक्षा और मानवीय संवेदनशीलता दोनों को मजबूत करेगी। इन नियमों के तहत ऐसे नागरिकों को कानूनी संरक्षण प्रदान किया गया है जो किसी घायल, असहाय या संकटग्रस्त व्यक्ति की स्वेच्छा से सहायता करते हैं।

    गोल्डन ऑवर के भीतर अस्पताल पहुंचाने पर पुरस्कार के पात्र होंगे

    मुख्यमंत्री ने कहा कि योजना के तहत कोई भी व्यक्ति, जिसने किसी गंभीर सड़क दुर्घटना में घायल व्यक्ति को तत्काल सहायता दी हो और उसे गोल्डन आवर के भीतर अस्पताल या ट्रामा सेंटर पहुंचाया हो, वह पुरस्कार के लिए पात्र होगा।

    ऐसे प्रत्येक मामले में राह-वीर को 25 हजार रुपये की नकद राशि प्रदान की जाएगी। यदि कोई व्यक्ति एक ही दुर्घटना में एक से अधिक पीड़ितों की जान बचाता है, तो भी उसे अधिकतम 25 हजार रुपये ही प्रदान किए जाएंगे।

    इस योजना के तहत वर्ष भर में चयनित 10 सर्वश्रेष्ठ राह-वीरों को राष्ट्रीय स्तर पर एक-एक लाख रुपये का विशेष पुरस्कार भी दिया जाएगा। प्रत्येक पुरस्कार के साथ प्रशस्ति पत्र भी दिया जाएगा।

    यहां बता दें इससे पहले दिल्ली में केजरीवाल सरकार के समय सड़क दुर्घटना पीड़ितों की मदद के ही उद्देश्य से फरिश्ते योजना लागू की गई थी। इसमें केवल 2000 की सम्मान राशि दिए जाने का प्रविधान था। मगर यह योजना कुछ सालों बाद बंद हो गई थी।

    योजना के क्रियान्वयन को जिलास्तर पर मूल्यांकन समिति बनेगी

    योजना के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए जिला स्तर पर मूल्यांकन समिति गठित की जाएगी। इस समिति में जिला मजिस्ट्रेट, वरिष्ठ पुलिस अधिकारी, मुख्य चिकित्सा अधिकारी और क्षेत्रीय परिवहन अधिकारी शामिल होंगे। चयनित राह-वीरों को पुरस्कार राशि सीधे उनके बैंक खाते में आनलाइन ट्रांसफर की जाएगी। इसके लिए अलग बैंक खाता रखा जाएगा और पूरी प्रक्रिया को डिजिटल प्लेटफाॅर्म पर दर्ज किया जाएगा। केंद्र राज्यों को प्रारंभिक अनुदान भी प्रदान करेगा।

     

  • नाथद्वारा में मनाया कोकिलाबेन का 92वां जन्मदिन, अंबानी परिवार ने श्रीनाथजी के किए दर्शन

    नाथद्वारा में मनाया कोकिलाबेन का 92वां जन्मदिन, अंबानी परिवार ने श्रीनाथजी के किए दर्शन

    जयपुर.

    पुष्टिमार्गीय वल्लभ सम्प्रदाय की प्रधान पीठ नाथद्वारा में श्रीनाथजी मंदिर मंडल की उपाध्यक्ष कोकिला बेन ने अपने जन्मदिन के अवसर पर पूरे परिवार के साथ श्रीजी प्रभु के दर्शन किए। पूरे परिवार ने युवाचार्य विशाल बावा से आशीर्वाद लिया। कोकिला बेन के 92वें जन्मदिन के अवसर पर पूरा अंबानी परिवार अपने ईष्ट प्रभु श्रीनाथजी के दर्शन करने पहुंचा।

    रिलायंस इंडस्ट्रीज के चैयरमेन मुकेश अंबानी, उनके भाई अनिल अंबानी, पुत्र आकाश अंबानी, बहु श्लोका अंबानी, पुत्र अनंत अंबानी, बहु राधिका अंबानी, अंशुल अंबानी, अनमोल अंबानी, नीना बेन कोठारी, दीप्ति सालगांवकर सहित पूरे अंबानी परिवार एवं धनराज नाथवानी ने श्रीजी प्रभु की संध्या आरती के दर्शन किए। दर्शन पश्चात युवाचार्य विशाल बावा ने अंबानी परिवार के सभी सदस्यों का फेंटा बांधकर, रजाई व ऊपरना ओढ़ाकर एवं प्रसाद प्रदान कर मंदिर की परंपरानुसार समाधान किया। सभी ने विशाल बावा का आशीर्वाद लिया। वल्लभ कुल की दीक्षिता बहू ने भी आशीर्वाद एवं शुभकामनाएं दीं।

    इस दौरान पूरे परिवार ने गोस्वामी तिलकायत इंद्रदमन (राकेश) महाराज और राजेश्वरी गोस्वामी से वीडियो कॉल पर आशीर्वाद लिया। तिलकायत ने कोकिला बेन को जन्मदिन पर आशीर्वाद और शुभकामनाएं दीं। महाप्रभुजी की बैठक में 51 वेदपाठी ब्राह्मणों ने स्वस्ति वाचन एवं मंगलाचरण के पाठ किए। मोती महल चौक में भजन गायन कर शुभकामनाएं प्रेषित कीं।

    अंबानी परिवार के दर्शन सहित सभी कार्यक्रमों के दौरान श्रीनाथजी मंदिर के अधिकारी सुधाकर उपाध्याय, तिलकायत के मुख्य सलाहकार अंजन शाह, बोर्ड सदस्य समीर चौधरी, सहायक अधिकारी अनिल सनाढ्य, मंदिर मंडल के सीईओ जितेंद्र पांडेय, तिलकायत सचिव लीलाधर पुरोहित, समाधानी उमंग मेहता, जमादार विट्ठल सनाढ्य, कैलाश पालीवाल, मोती महल निगरा गोपी वर्मा, सेवा विभाग सहित सेवादार मौजूद रहे।

  • ‘रॉयल डिलीवरी’ का मजेदार वीडियो, Blinkit वाले अंकल घोड़े पर बैठकर ऑर्डर लेकर पहुंचे

    ‘रॉयल डिलीवरी’ का मजेदार वीडियो, Blinkit वाले अंकल घोड़े पर बैठकर ऑर्डर लेकर पहुंचे

    जयपुर

    राजस्थान की रंगीन संस्कृति और शाही अंदाज की झलक दिखाता एक अनोखा वीडियो इन दिनों सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है. वीडियो में एक बुजुर्ग व्यक्ति घोड़े पर सवार नजर आता है और उसकी पीठ पर ब्लिंकिट का चमकीला पीला डिलीवरी बैग टंगा हुआ है. पारंपरिक सवारी और आधुनिक डिलीवरी सिस्टम का यह मेल लोगों का ध्यान खींच रहा है.

    वीडियो में दिख रहा है कि बुजुर्ग व्यक्ति आराम से घोड़े पर बैठकर सड़क से गुजर रहा है. उसके पीछे लटका ब्लिंकिट का बैग साफ दिखाई देता है, जो आमतौर पर कंपनी के डिलीवरी पार्टनर्स इस्तेमाल करते हैं. हालांकि यह साफ नहीं हो पाया है कि वह सच में किसी ग्राहक का ऑर्डर पहुंचाने जा रहे थे या सिर्फ मजाकिया अंदाज में बैग लेकर निकले थे.

    इस अनोखे दृश्य ने सोशल मीडिया यूजर्स को खूब मनोरंजन दिया. कई लोगों ने इसे 'राजस्थान स्टाइल एक्सप्रेस डिलीवरी' करार दिया तो कुछ ने इसे 'रॉयल डिलीवरी सर्विस'का नाम दे डाला. एक यूज़र ने टिप्पणी की कि जहां देशभर में बाइक और स्कूटर से डिलीवरी होती है, वहीं राजस्थान में घोड़े से ऑर्डर पहुंचाना भी संभव है.

    कुछ लोगों ने इस वीडियो को परंपरा और आधुनिकता के सुंदर संगम के रूप में देखा. उनका कहना है कि यह दृश्य दिखाता है कि तकनीक और संस्कृति साथ-साथ चल सकती हैं. वहीं कई यूजर्स ने बुजुर्ग की ऊर्जा और आत्मविश्वास की भी तारीफ की.

    हालांकि कंपनी की ओर से इस वीडियो पर कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है, लेकिन यह क्लिप इंटरनेट पर चर्चा का विषय बन चुकी है.