Category: राज्य

  • जन-मानस को विचलित करती है एक ही खबर में भिन्नता: मुख्यमंत्री

    जन-मानस को विचलित करती है एक ही खबर में भिन्नता: मुख्यमंत्री

    गोरखपुर प्रेस क्लब की नई कार्यकारिणी का शपथ ग्रहण समारोह

    पत्रकारिता के विभिन्न आयामों में समन्वय आवश्यक: मुख्यमंत्री

    जन-मानस को विचलित करती है एक ही खबर में भिन्नता: मुख्यमंत्री

    सरकार मूल्यों व आदर्शों पर आधारित पत्रकारिता के साथ: सीएम योगी

    गोरखपुर

    मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा है कि पत्रकारिता के विभिन्न आयामों प्रिंट, विजुअल, डिजिटल व सोशल मीडिया के बीच परस्पर समन्वय होना आवश्यक है। यदि किसी एक ही तथ्य को मीडिया के अलग-अलग आयाम भिन्न-भिन्न तरीके व दृष्टिकोण से प्रस्तुत करेंगे तो आम जन-मानस के सामने कन्फ्यूजन की स्थिति होगी। ऐसी स्थिति मीडिया के प्रति जन-विश्वास को भी प्रभावित करेगी। इसलिए यह आवश्यक है कि मीडिया के सभी अंग समान मानक, मूल्यों व आदर्शों के अनुरूप आगे बढ़ें।

    सीएम योगी सोमवार को गोरखपुर जर्नलिस्ट्स प्रेस क्लब की नई कार्यकारिणी के शपथ ग्रहण समारोह को बतौर मुख्य अतिथि संबोधित कर रहे थे। सिविल लाइंस स्थित गोरखपुर क्लब सभागार में आयोजित इस समारोह में मुख्यमंत्री ने कहा कि आज पत्रकारिता में विभिन्न प्रकार की चुनौतियां हैं। प्रिंट, विजुअल, डिजिटल व सोशल मीडिया के तौर पर पत्रकारिता के कई स्वरूप हैं। परिवारों में भी प्रत्येक सदस्य का रुझान मीडिया के अलग-अलग रूप के प्रति रहता है। पत्रकारिता के इन सभी रूपों को समग्रता के साथ जोड़ने की आवश्यकता है। प्रिंट व विजुअल मीडिया के अपने कुछ मानक हैं, अपनी आचार संहिता है। किंतु, सोशल मीडिया को अभी इससे जोड़ना है।

    सीएम योगी ने कहा कि पत्रकारिता को आत्म-नियमन से मूल्यों व आदर्शों के साथ आगे बढ़ना है। भारत में 200 वर्ष की पत्रकारिता का मूलभाव राष्ट्र सेवा, समाज सेवा व ‘एक भारत-श्रेष्ठ भारत’ का भाव रहा है। हमें इसी भाव के साथ आगे बढ़ना चाहिए। मीडिया में एक ऐसा भी वर्ग है, जो समाज को गुमराह करके अशांति फैलाने का कार्य करता है। हमें मीडिया के ऐसे रूप से बचने की आवश्यकता है। यदि सोशल मीडिया तथा प्रिंट मीडिया में एक ही खबर में भिन्नता होती है, तो वह जन-मानस को विचलित करती है। यह दुविधा की स्थिति खतरनाक होती है। हमें प्रयास करना चाहिए कि ऐसी स्थिति नहीं हो। सरकार मूल्यों व आदर्शों पर आधारित पत्रकारिता के साथ सदैव खड़ी है।

    आलोचना को व्यक्तिगत रंजिश नहीं मानना चाहिए
    मुख्यमंत्री ने कहा कि लोकतंत्र संवाद से चलता है। संवाद में आलोचना हो सकती है, किंतु इस आलोचना को व्यक्तिगत रंजिश नहीं मानना चाहिए। जब हम एक सूत्र की मनोस्थिति से कार्य करते हैं, तो सदैव सार्थक परिणाम सामने आते हैं। पत्रकारिता समाज का आईना होती है। पत्रकारिता जिस दृष्टि से समाज के मुद्दों को प्रस्तुत करती है, समाज उसी दृष्टि से उसे समझता है। पत्रकारिता को जन-विश्वास प्रतीक के रूप में बने रहने के लिए सही और गलत के प्रति एक भाव में रहना चाहिए। पत्रकारिता में किसी भी मुद्दे पर दो भाव नहीं होने चाहिए, क्योंकि तब यह जन-विश्वास पर कुठाराघात करता है। 

    यह वर्ष हिंदी पत्रकारिता के लिए बहुत महत्वपूर्ण
    मुख्यमंत्री ने कहा कि विपरीत परिस्थितियों में भी पत्रकारिता ने भारतीय लोकतंत्र को मजबूती दी है। यह वर्ष हिंदी पत्रकारिता के लिए बहुत महत्वपूर्ण है, क्योंकि 200 वर्ष पहले हिंदी पत्रकारिता की शुरूआत 30 मई 1826 को कोलकाता से हुई थी, जब जुगुल किशोर शुक्ल ने हिंदी के पहले समाचार पत्र उदंत मार्तण्ड का शुभारंभ किया था। जब उन्होंने पत्र निकाला, तब देश गुलाम था। उन्होंने देश की आजादी के स्वर को तेज करने के लिए पत्रकारिता को माध्यम बनाया था। 200 वर्ष से बिना रुके, बिना थके, बिना डिगे पत्रकारिता की यह शानदार यात्रा आगे बढ़ रही है। 

    सही तथ्य से होता है मजबूत जन-विश्वास का निर्माण
    मुख्यमंत्री ने कहा कि पत्रकारिता जब एक सामान्य व्यक्ति के स्वर के साथ अपना स्वर मिलाती है, और सही तथ्यों को जनता के सम्मुख रखती है, तब एक मजबूत जन-विश्वास का निर्माण होता है। जो पत्रकारिता जन-विश्वास का प्रतीक बनती है, उसे दुनिया की कोई शक्ति विचलित नहीं कर सकती। पत्रकारिता ने कठिन मार्गों का अनुसरण करते हुए सदैव अपने लक्ष्यों को प्राप्त किया है। सीएम योगी ने स्वतंत्रता आंदोलन और देशसेवा के लिए महात्मा गांधी, बाल गंगाधर तिलक, गणेश शंकर विद्यार्थी, अटल बिहारी वाजपेयी द्वारा भी पत्रकारिता को माध्यम बनाने का जिक्र किया। उन्होंने बताया कि बाल गंगाधर तिलक ने 1916 में लखनऊ से ‘स्वराज मेरा जन्मसिद्ध अधिकार है’ के नारे को पत्रकारिता के माध्यम से जन-मानस में संचारित किया था। वर्ष 2017 में इस नारे के 100 वर्ष पूरे होने पर प्रदेश सरकार द्वारा विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए गए।
     
    विघटनकारी शक्तियों की चुनौती हमेशा सामने
    मुख्यमंत्री ने कहा कि भारतीय पत्रकारिता का आधार हमारे उपनिषदों से प्रेरित रहा है। यह प्रेरणा उपनिषदों की ‘सत्यमेव जयते’ सूक्ति से प्राप्त होती है। समाज में विघटनकारी शक्तियों की चुनौती पत्रकारिता के सामने हमेशा रही है। ये शक्तियां पत्रकारिता की स्वतंत्रता को बाधित करती रही हैं। इन बाधाओं से विचलित हुए बिना हमें इसको बढ़ाए रखना है, क्योंकि हमारी पत्रकारिता उपनिषदों के मूल्यों पर आधारित है, जहां सत्य की निश्चित विजय का भाव समाहित है।

    अपराध व भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति निरंतर जारी
    मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार ने अपराध व अपराधियों तथा भ्रष्टाचार व भ्रष्टाचारियों के प्रति जीरो टॉलरेंस की नीति को निरंतर जारी रखा है। समाज के प्रत्येक वर्ग को जन कल्याणकारी योजनाओं का लाभ प्राप्त हो रहा है। सरकार ने पत्रकारों के लिए भी विभिन्न आवासीय योजनाएं चलाई हैं। मान्यता प्राप्त पत्रकारों को कैशलेस चिकित्सा सुविधा का लाभ दिया जा रहा है। 

    तीन करोड़ की आबादी गोरखपुर पर निर्भर
    मुख्यमंत्री ने कहा कि आज तीन करोड़़ की आबादी शिक्षा, व्यापार व रोजगार हेतु गोरखपुर महानगर पर निर्भर है। पूर्वी यूपी, पश्चिमी बिहार और नेपाल की एक बड़ी आबादी गोरखपुर पर निर्भर रहती है। गोरखपुर में पत्रकारिता की दिशा, लोगों के मन में राष्ट्रभक्ति के भाव को बढ़ाने वाली होनी चाहिए। आत्मनिर्भर विकसित भारत की संकल्पना को आगे बढ़ाने में पत्रकारिता को मजबूती के साथ आगे आना चाहिए। यह बेहद महत्वपूर्ण होगा।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि गोरखपुर जर्नलिस्ट्स प्रेस क्लब की स्थापना 1998 में हुई। इसमें शामिल सदस्यों को तत्कालीन मुख्यमंत्री कल्याण सिंह का सानिध्य प्राप्त था। मुझे विगत वर्ष भी गोरखपुर प्रेस क्लब के सदस्यों के शपथ ग्रहण समारोह में शामिल होने का सौभाग्य प्राप्त हुआ था। गोरखपुर प्रेस क्लब की स्थापना में अध्यक्ष के रूप में एसपी त्रिपाठी तथा सचिव के रूप में अरविन्द शुक्ला ने महत्वपूर्ण भूमिका का निर्वहन किया था। सरकार द्वारा प्रेस क्लब को एक भव्य भवन दिया गया, जहां पत्रकारिता के कार्य को सुगमता से सम्पन्न किया जा रहा है।

    महापौर डॉ. मंगलेश श्रीवास्तव ने दिलाई शपथ
    समारोह में महापौर डॉ. मंगलेश श्रीवास्तव ने गोरखपुर जर्नलिस्ट्स प्रेस क्लब की नई कार्यकारिणी के पदाधिकारियों अध्यक्ष ओंकार धर द्विवेदी, उपाध्यक्ष धनेश कुमार, महामंत्री पंकज श्रीवास्तव, संयुक्त मंत्री महेंद्र गौड़, कोषाध्यक्ष दुर्गेश यादव, पुस्तकालय मंत्री संजय कुमार, कार्यकारिणी सदस्य मनोज कुमार मिश्रा, रजनीश त्रिपाठी और अजीत सिंह को शपथ दिलाई। कार्यक्रम में स्वागत संबोधन प्रेस क्लब अध्यक्ष ओंकार धर द्विवेदी ने, जबकि संचालन गजेंद्र त्रिपाठी और प्रेम पराया ने किया।

    इस अवसर पर सांसद रवि किशन शुक्ल, विधान परिषद सदस्य एवं भाजपा के प्रदेश उपाध्यक्ष डॉ. धर्मेंद्र सिंह, राज्य महिला आयोग की उपाध्यक्ष चारू चौधरी, कालीबाड़ी के महंत रविंद्रदास, दैनिक जागरण के स्थानीय संपादक मदन मोहन सिंह, अमर उजाला के स्थानीय संपादक विनीत सक्सेना, राष्ट्रीय सहारा के पीयूष बंका, दैनिक आज के अखिलेश चंद, स्वतंत्र चेतना के आनंद जी वैश्य सहित बड़ी संख्या में पत्रकारों की सहभागिता रही।

  • इस्टीमेट भिजवाएं, इलाज में सरकार करेगी भरपूर मदद: सीएम योगी

    इस्टीमेट भिजवाएं, इलाज में सरकार करेगी भरपूर मदद: सीएम योगी

    जनता दर्शन: गोरखनाथ मंदिर में 200 लोगों से मुलाकात कर उनकी समस्याएं सुनीं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने

    जरूरतमंद बिटिया की स्कूल फीस जमा कराने का निर्देश दिया सीएम ने

    इस्टीमेट भिजवाएं, इलाज में सरकार करेगी भरपूर मदद: सीएम योगी

    अधिकारियों को दिए त्वरित व संतुष्टिपरक निस्तारण के निर्देश

    गोरखपुर
    मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की बेटियों के प्रति संवेदनशीलता का एक और उदाहरण  जनता दर्शन में देखने को मिला। सीएम से मिलने पहुंची एक बेटी ने जब उन्हें बताया कि पैसों की दिक्कत के चलते वह अपनी फीस नहीं जमा कर पा रही है, मुख्यमंत्री ने अविलंब अधिकारियों को बिटिया की फीस जमा कराने का निर्देश दिया। सीएम ने गंभीर बीमारियों के इलाज के लिए आर्थिक सहायता की मांग करने पहुंचे लोगों को भी आश्वस्त किया कि वे उच्चीकृत अस्पताल से इस्टीमेट मंगवा लें, इलाज के खर्च में सरकार भरपूर मदद करेगी।

     सुबह गोरखनाथ मंदिर में आयोजित जनता दर्शन में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने करीब 200 लोगों से मुलाकात की। मंदिर परिसर के महंत दिग्विजयनाथ स्मृति भवन के सभागार में कुर्सियों पर बैठाए गए लोगों तक मुख्यमंत्री पहुंचे और एक-एक कर सबकी समस्याएं सुनीं। सीएम ने सभी को आश्वस्त किया कि उनकी समस्याओं का उचित, विधिसम्मत, समयबद्ध एवं संतुष्टिपरक निस्तारण कराया जाएगा। मुख्यमंत्री ने जनता दर्शन में आए लोगों के प्रार्थना-पत्रों को संबंधित अधिकारियों को हस्तगत करते हुए इस संबंध में निर्देश भी जारी किए। मुख्यमंत्री ने कहा कि किसी को भी परेशान होने या घबराने होने की आवश्यकता नहीं है। सरकार हर मुश्किल में आपके साथ खड़ी है। हर समस्या का प्रभावी समाधान कराया जाएगा। 

    जरूरतमंद बिटिया की स्कूल फीस की व्यवस्था होगी
    जनता दर्शन में एक बेटी ने मुख्यमंत्री को बताया कि वह पढ़ना चाहती है, लेकिन परिवार की कमजोर आर्थिक स्थिति की वजह से फीस जमा करने में बाधा आ रही है। इस पर त्वरित संवेदनशीलता दिखाते हुए सीएम योगी ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि अविलंब बिटिया की स्कूल फीस की व्यवस्था की जाए। मुख्यमंत्री ने कहा कि आर्थिक दिक्कत की वजह से किसी बेटी की पढ़ाई नहीं रुकनी चाहिए। हर बेटी को सुरक्षा के साथ-साथ उसका सर्वांगीण विकास राज्य सरकार की शीर्ष प्राथमिकताओं में शामिल है। जब एक बेटी शिक्षित होती है तो पूरे समाज पर सकारात्मक असर पड़ता है।

    मुख्यमंत्री ने जनता दर्शन में अधिकारियों को निर्देशित किया कि हर पीड़ित के साथ संवेदनशील रवैया अपनाया जाए और उसकी समस्या का समाधान कर उसे संतुष्ट किया जाए। इसमें किसी भी तरह की कोताही नहीं होनी चाहिए। यदि कोई पात्र व्यक्ति शासन की कल्याणकारी योजनाओं के लाभ से वंचित है तो उसे तत्काल योजनाओं का लाभ उपलब्ध कराया जाए। कैंसर से पीड़ित अपने परिजन के इलाज के लिए आर्थिक सहायता की गुहार लेकर पहुंची एक महिला से मुख्यमंत्री ने कहा कि उच्चीकृत सरकारी अस्पताल में मरीज को दिखाकर इस्टीमेट मंगवा लीजिए। इलाज में पूरी मदद की जाएगी।

    सीएम योगी ने इसे लेकर अफसरों को निर्देशित भी किया कि जिन लोगों को उपचार में आर्थिक सहायता की आवश्यकता है, उनके इस्टीमेट की प्रक्रिया को जल्द से पूरा कराकर शासन को उपलब्ध कराया जाए। हर जरूरतमंद को मुख्यमंत्री विवेकाधीन कोष से पर्याप्त सहायता राशि उपलब्ध कराई जाएगी। मुख्यमंत्री ने सिद्धार्थनगर से आई एक गरीब महिला को पेंशन और अन्य योजनाओं का लाभ दिलाने के लिए भी अधिकारियों को निर्देश दिए।

  • सॉलिसिटर जनरल ने केजरीवाल की दलीलों पर उठाए सवाल, अदालत में वकील को हटाने की अपील

    सॉलिसिटर जनरल ने केजरीवाल की दलीलों पर उठाए सवाल, अदालत में वकील को हटाने की अपील

    नई दिल्ली

    अरविंद केजरीवाल सोमवार को शराब नीति मामले में दिल्ली हाईकोर्ट में हाजिर हुए और न्यायमूर्ति स्वर्ण कांता शर्मा से आग्रह किया कि वह मामले में उन्हें बरी किए जाने के खिलाफ CBI की याचिका पर होने वाली सुनवाई से वह खुद को अलग कर लें। दिल्ली हाईकोर्ट ने न्यायमूर्ति शर्मा ने सुनवाई से खुद को अलग करने के अनुरोध वाली केजरीवाल की याचिका को रिकॉर्ड में लिया। अदालत ने इस मामले में सीबीआई से जवाब भी मांगा और सुनवाई 13 अप्रैल को सूचीबद्ध की।

    केजरीवाल की याचिका पर सोमवार को सुनवाई में जोरदार दलीलें रखी गईं। मामले में अरविंद केजरीवाल ने खुद दलीलें रखनी शुरू की। केजरीवाल ने कहा कि उन्होंने रिक्यूजल याचिका दाखिल की है। इसे रिकॉर्ड में लिया जाए। याचिका में न्यायमूर्ति स्वर्ण कांता शर्मा से आग्रह किया गया है कि वह मामले में उन्हें बरी किए जाने के खिलाफ सीबीआई की याचिका पर सुनवाई से खुद को अलग कर लें।

    अदालत कोई नौटंकी का मंच नहीं- एसजी
    इस पर सीबीआई की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने केजरीवाल की अपील का विरोध किया। उन्होंने कहा कि केजरीवाल के आरोप बेबुनियाद और अपमानजनक हैं। केजरीवाल के आरोप बेबुनियाद और कोर्ट की अवमानना ​​करने वाले हैं। अदालत कोई नौटंकी का मंच नहीं है। यदि अरविंद केजरीवाल खुद पेश होकर बहस करना चाहते हैं तो उनको अपने वकील को हटा देना चाहिए।

    7 अन्य आरोपियों ने भी जज को हटाने की लगाई गुहार
    सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को यह भी बताया कि बरी किए गए 7 अन्य आरोपियों ने भी जज को सुनवाई से हटाने की याचिका दी है। वहीं जस्टिस शर्मा ने कहा कि यदि कोई और भी ऐसी अर्जी देना चाहता है तो दे सकता है ताकि मैं सभी अर्जियों पर एक ही बार में कोई फैसला ले सकूं।

    क्या है पूरा मामला?
    बता दें कि 27 फरवरी को ट्रायल कोर्ट ने अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया और 21 अन्य लोगों को बरी कर दिया था। अदालत ने CBI को फटकार लगाते हुए कहा था कि उसका केस न्यायिक जांच में बिल्कुल भी टिकने लायक नहीं है। केस पूरी तरह से खारिज हो चुका है। फैसले के खिलाफ मामला जब हाईकोर्ट पहुंचा तो 9 मार्च को जस्टिस शर्मा ने CBI की याचिका पर सभी 23 आरोपियों को नोटिस जारी किया। सीबीआई ने आरोपियों को बरी किए जाने के फैसले को चुनौती दी है।

    जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा ने भेजा था नोटिस
    न्यायमूर्ति स्वर्ण कांता शर्मा ने नोटिस जारी करने के साथ ही कहा था कि आरोप तय करने के चरण में ट्रायल कोर्ट की कुछ टिप्पणियां और निष्कर्ष पहली नजर में गलत मालूम पड़ रहे हैं। इसके साथ ही न्यायमूर्ति स्वर्ण कांता शर्मा ने मामले में CBI के जांच अधिकारी के खिलाफ विभागीय कार्रवाई शुरू करने की ट्रायल कोर्ट की सिफारिश पर रोक लगा दी थी। इसके बाद केजरीवाल की ओर से एक याचिका में मामला किसी दूसरे जज के हवाले करने की मांग की गई।

    मुख्य न्यायाधीश भी ठुकरा चुके हैं गुजारिश
    बाद में दिल्ली हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश डीके उपाध्याय ने जस्टिस शर्मा से किसी दूसरे जज को सौंपने की केजरीवाल की गुजारिश को ठुकरा दिया था। उन्होंने साफ कहा था कि खुद को सुनवाई से हटाने का फैसला संबंधित जज को ही लेना होता है। फिर अरविंद केजरीवाल ने सीबीआई की ओर से दाखिल याचिका की सुनवाई से न्यायमूर्ति स्वर्ण कांता शर्मा को खुद को अलग करने का अनुरोध करते हुए अदालत का रुख किया। मामले में केजरीवाल ने खुद पेश होकर अपनी ओर से दलीलें रखीं।

  • दिल्ली विधानसभा में अज्ञात कार का प्रवेश, स्पीकर के कमरे के बाहर गुलदस्ता छोड़कर हुआ फरार

    दिल्ली विधानसभा में अज्ञात कार का प्रवेश, स्पीकर के कमरे के बाहर गुलदस्ता छोड़कर हुआ फरार

     नई दिल्ली

    दिल्ली विधानसभा की सुरक्षा में बड़ी चूक सामने आई है, जब एक अज्ञात कार गेट तोड़कर अंदर घुस गई. घटना से सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं. कार कैसे अंदर पहुंची, इसकी जांच की जा रही है. पुलिस सीसीटीवी फुटेज खंगाल रही है और वाहन चालक की पहचान करने की कोशिश जारी है. दोपहर 2 बजकर 5 मिनट पर यूपी नंबर की सफेद Tata Sierra कार मॉल रोड स्थित बंद रहने वाले गेट को तोड़कर VIP एंट्री से अंदर घुसी.  कार सवार स्पीकर रूम के बाहर गुलदस्ता रखकर मौके से फरार हो गया. घटना के बाद हड़कंप मच गया. जांच के लिए विधानसभा परिसर में दिल्ली पुलिस के आला अधिकारी मौजूद हैं और सीसीटीवी फुटेज के आधार पर आरोपी की तलाश जारी है। 

    मौके पर मौजूद एक चश्मदीद ने बताया कि गेट नंबर 2 के पास मेट्रो के पास खड़े दो लोगों ने पूरी घटना अपनी आंखों से देखी. पीली टी-शर्ट पहने एक युवक, जिसका नाम रवित बताया जा रहा है, उसने कहा कि कार तेज़ी से गेट तोड़कर अंदर आई, कुछ देर परिसर में घूमी और फिर बाहर निकल गई. चश्मदीदों के मुताबिक, घटना के दौरान वहां अफरा-तफरी का माहौल बन गया और लोगों में शोर मच गया। 

  • यूपी में महिला ई-रिक्शा पायलटों का उद्घाटन, अयोध्या और अन्य 5 जिलों में हुई शुरुआत

    यूपी में महिला ई-रिक्शा पायलटों का उद्घाटन, अयोध्या और अन्य 5 जिलों में हुई शुरुआत

    लखनऊ
     उत्तर प्रदेश में महिला सुरक्षा और सशक्तीकरण को नई ऊंचाई देने की दिशा में योगी सरकार ने एक और बड़ा कदम उठाया है। ‘सेफ मोबिलिटी प्रोग्राम’ के तहत प्रदेश में महिला ई-रिक्शा पायलटों की फौज तैयार की जा रही है, जिससे बालिकाओं और महिलाओं को विद्यालय, कार्यस्थल और अन्य जरूरी स्थानों तक सुरक्षित, सुलभ और सम्मानजनक परिवहन मिल सकेगा। इस योजना के तहत शुरुआत में स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं को 1000 ई-रिक्शा उपलब्ध कराए जा रहे हैं। अयोध्या, गोरखपुर, वाराणसी, कौशांबी और झांसी में इस सुविधा की शुरुआत कर दी गई है, जबकि लखनऊ, प्रयागराज, मिर्जापुर, भदोही, सोनभद्र, देवरिया, लखीमपुर खीरी और सीतापुर में इसे जल्द शुरू किया जाएगा। योगी सरकार की यह पहल इसलिए भी खास है, क्योंकि इसका सीधा रिश्ता महिला सुरक्षा से जुड़ा है। ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं और बालिकाओं के लिए अब महिला चालकों द्वारा संचालित ई-रिक्शा सेवा बेहतर समाधान बनकर उभर रही है।

    उत्तर प्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत डेवलपमेंट अल्टरनेटिव्स के तकनीकी सहयोग से चल रहे इस कार्यक्रम ने अब तक प्रभावी परिणाम दिए हैं। पांच जनपदों में 119 महिलाओं को ई-रिक्शा देकर उद्यमी बनाया जा चुका है। वहीं, 629 महिलाओं को संचालन का प्रशिक्षण दिया गया है और 244 महिलाओं को ड्राइविंग लाइसेंस उपलब्ध कराया गया है। इस पहल से जुड़ी महिलाएं अब सिर्फ वाहन ही नहीं चला रहीं, बल्कि अपने परिवार की आर्थिक धुरी भी बन रहीं हैं। योजना से जुड़ी महिलाओं की औसत वार्षिक आय 3 लाख रुपए से अधिक पहुंचने की बात इस मॉडल की सफलता को और मजबूत बनाती है।

    ‘सेफ मोबिलिटी’ का असर केवल सड़क तक सीमित नहीं है। इससे बेटियों की स्कूल तक पहुंच आसान होगी, कामकाजी महिलाओं का सफर सुरक्षित बनेगा, गांवों में रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे और स्वयं सहायता समूहों की महिलाएं आत्मनिर्भरता की नई मिसाल बनेंगी।

    महिला सुरक्षा, सम्मानजनक परिवहन और स्वरोजगार इन तीनों मोर्चों पर एक साथ असर डालने वाली यह पहल उत्तर प्रदेश को नई पहचान दे रही है। यही वजह है कि महिला सुरक्षा में यूपी अब मॉडल स्टेट के रूप में अपनी अलग छाप छोड़ता दिख रहा है और ई-रिक्शा महिला पायलटों की यह नई फौज गांवों के सामाजिक-आर्थिक परिदृश्य को बदलने की तैयारी में है।

  • केंद्र ने एयरलाइंस को सब्सिडी अवधि बढ़ाने का किया फैसला, इंदौर, भोपाल, अहमदाबाद और पुणे की उड़ानें फिर जुड़ सकती हैं

    केंद्र ने एयरलाइंस को सब्सिडी अवधि बढ़ाने का किया फैसला, इंदौर, भोपाल, अहमदाबाद और पुणे की उड़ानें फिर जुड़ सकती हैं

    उदयपुर

    उदयपुर की हवाई कनेक्टिविटी को लेकर अब नई उम्मीद जगी है। केंद्र सरकार की संशोधित उड़ान योजना में वायबिलिटी गैप फंडिंग (वीजीएफ) की अवधि 3 साल से बढ़ाकर 5 साल कर दी गई है। इससे एयरलाइंस कंपनियां की ओर से इंदौर, भोपाल, अहमदाबाद और पुणे जैसे हाई-डिमांड रूट। 

    लंबे समय तक मिलने वाली सब्सिडी एयरलाइंस के लिए जोखिम कम करेगी और मेवाड़ को फिर से बेहतर हवाई नेटवर्क से जोड़ सकती है। केंद्र सरकार की यह पहल उदयपुर के पर्यटन और मार्बल उद्योग के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं। यदि राज्य सरकार चैलेंज मोड के तहत इन बंद रूट्स की डिमांड केंद्र को भेजती है तो इन रूट्स को प्राथमिकता मिल सकती है।

    एविएशन एक्सपर्ट्स का मानना है कि बड़े विमान और किफायती किराया मॉडल के साथ इन रूट्स पर पैसेंजर लोड और बढ़ सकता है। पहले से ही इन रूट्स पर करीब 80 फीसदी सीटें भरी जा रही थीं। जो इनके व्यावसायिक रूप से व्यवहार्य होने का संकेत है। सांसद डॉ. मन्नालाल रावत सहित क्षेत्र के जनप्रतिनिधि भी लगातार इन फ्लाइट्स को बहाल करने की मांग कर रहे हैं, जिससे केंद्र स्तर पर इस दिशा में पहल की संभावना और मजबूत हो गई है।

    ये रूट बंद हुए, यही प्राथमिकता पर
        इंदौर रूट (29 मार्च 2026 से बंद) – इसी समर शिड्यूल में कनेक्टिविटी टूटी। व्यापारिक और धार्मिक पर्यटन के लिहाज से यह सबसे ज्यादा मांग वाला रूट था।

        भोपाल एवं अहमदाबाद (पिछले शिड्यूल से बंद) – मध्य प्रदेश की राजधानी और गुजरात के सबसे बड़े व्यापारिक केंद्र से सीधा हवाई संपर्क कटा हुआ है। इससे यात्रियों को सड़क मार्ग पर निर्भर होना पड़ रहा है।

        पुणे रूट (2020 से बंद) – पिछले 6 सालों से सीधी उड़ान का इंतजार है। पुणे में रहने वाले हजारों मेवाड़ी छात्र और आईटी प्रोफेशनल्स के लिए यह कनेक्टिविटी सबसे जरूरी है।

    भास्कर सुझाव – संशोधित उड़ान में बड़े विमान-सस्ता किराया यात्रियों का लोड बढ़ाने में रहेगा कारगार संशोधित उड़ान में बड़े विमान-सस्ता किराया का फार्मूला इन रूट्स पर पैसेंजर लोड बढ़ाने में कारगर हो सकता है। क्योंकि, अब 5 साल तक सरकार वित्तीय घाटे की भरपाई करेगी। इससे उनपर वित्तीय भार भी नहीं पड़ेगा। उदयपुर सांसद डॉ. मन्नालाल रावत सहित मेवाड़ के बड़े जनप्रतिनिधि इन बंद हुई इन फ्लाइट्स को वापस बहाल कराने की लगातार मांग कर रहे हैं।

    नए शिड्यूल पर सवाल – जो फ्लाइटें छीनी, उनमें था 80 फीसदी यात्रीभार टूरिस्ट सिटी उदयपुर की हवाई कनेक्टिविटी पिछले कुछ समय से लैंडिंग मोड पर चल रही है। चौंकाने वाली बात यह है कि समर शिड्यूल में उदयपुर-भोपाल, उदयपुर-इंदौर और उदयपुर-अहमदाबाद के बीच चलने वाली जिन फ्लाइट्स का बंद किया गया, उनमें करीब 80 फीसदी सीट्स फुल चल रही थीं। वहीं, पुणे जैसा बड़ा आईटी और एजुकेशन हब तो साल 2020 से ही उदयपुर के हवाई नक्शे से गायब है। अभी मुंबई के लिए 6, दिल्ली 4 फ्लाइट, जयपुर 2, और बेंगलुरु व हैदराबाद के लिए 1-1 फ्लाइट का संचालन हो रहा है।

     

  • हरियाणा में सरकारी कर्मचारियों की मौज, घर और गाड़ी के लिए आसान लोन सुविधा शुरू

    हरियाणा में सरकारी कर्मचारियों की मौज, घर और गाड़ी के लिए आसान लोन सुविधा शुरू

    चंडीगढ़.

    हरियाणा में सरकारी कर्मचारियों को अब मकान, वाहन, कंप्यूटर और विवाह के लिए ऋण लेने की खातिर बैंकों के धक्के नहीं खाने पड़ेंगे। प्रदेश सरकार ने साढ़े नौ साल पुराने आदेश को बदलते हुए फिर से पुराना सिस्टम लागू कर दिया है। सरकारी कर्मचारियों को ऋण दिलाने की जिम्मेदारी सरकार की होगी।

    वित्त विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव अरुण कुमार गुप्ता ने इस संबंध में आदेश जारी कर दिए हैं। चार नवंबर 2016 को जारी आदेशों को वापस लिया गया है, जिसके तहत हरियाणा सरकार के कर्मचारियों को दिए जाने वाले गृह ऋण, वाहन ऋण, कंप्यूटर ऋण और विवाह ऋण के संबंध में ऋण पोर्टफोलियो को पंजाब नेशनल बैंक में स्थानांतरित कर दिया गया था। अब हरियाणा सरकार की पूर्व की नीति और समय-समय पर जारी निर्देशों के अनुसार ऋण प्रदान किए जाएंगे। डायरेक्ट लोन व्यवस्था को फिर से लागू करने से कर्मचारियों को सीधा लाभ मिलेगा। राज्य सरकार अपने कर्मचारियों को मेजर हेड-7610 के अंतर्गत वार्षिक बजट प्रविधान के माध्यम से सीधे ऋण या अग्रिम राशि प्रदान करेगी।

    लास्ट पे सर्टिफिकेट का प्रारूप भी बदलेगा
    प्रदेश सरकार हरियाणा ट्रेजरी नियम के अंतर्गत निर्धारित लास्ट पे सर्टिफिकेट (एलपीएसी) के प्रारूप में भी संशोधन करने जा रही है। सरकारी कर्मचारियों से संबंधित वित्तीय अभिलेखों की प्रणाली को आधुनिक एवं अधिक सुदृढ़ बनाने के लिए यह निर्णय लिया गया है। इसका उपयोग विशेष रूप से किसी सरकारी कर्मचारी का एक कार्यालय से दूसरे कार्यालय में स्थानांतरण के समय होता है। लास्ट पे सर्टिफिकेट एक महत्वपूर्ण दस्तावेज होता है, जिसमें कर्मचारी के वेतन, भत्तों, कटौतियों, ऋणों एवं अग्रिमों से संबंधित विस्तृत जानकारी होती है।

    इससे विभागों के बीच वित्तीय प्रक्रिया का सुचारू संचालन सुनिश्चित होता है। लास्ट पे सर्टिफिकेट के संशोधित प्रारूप में हालिया प्रशासनिक एवं वित्तीय सुधारों के अनुरूप कई नए प्रविधान शामिल किए गए हैं। नए प्रारूप में विशेष रूप से यूनिक कोड पेयी तथा स्थायी सेवानिवृत्ति खाता नंबर को शामिल करने का प्रविधान किया गया है, जो हाल के वर्षों में कर्मचारी के वित्तीय अभिलेखों का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुके हैं। इसके अतिरिक्त सेवा की पूरी अवधि के सत्यापन से संबंधित एक नया कालम भी जोड़ा गया है, जिससे पारदर्शिता और जवाबदेही को बढ़ावा मिलेगा।

    संशोधित प्रारूप में कर्मचारियों से संबंधित विस्तृत जानकारी शामिल करने का भी प्रविधान किया गया है। इसके अंतर्गत कर्मचारी का पैन, मोबाइल नंबर, पे-लेवल, बेसिक पे, अलाउंस विवरण दर्ज किया जाएगा। इसके साथ ही इनकम टैक्स, जीपीएफ, सब्सक्रिप्शन, एडवांस और रिकवरी सहित पूरी कटौती लेने का भी प्रविधान शामिल किया गया है।

  • फिरोजपुर कोर्ट में मचा हड़कंप, बम की धमकी मिलते ही प्रशासन ने खाली कराया परिसर

    फिरोजपुर कोर्ट में मचा हड़कंप, बम की धमकी मिलते ही प्रशासन ने खाली कराया परिसर

    फिरोजपुर.

    पंजाब के फिरोजपुर की अदालत को एक बार फिर से धमकी भरी ईमेल मिलने के बाद सोमवार को कोर्ट परिसर को खाली करवा लिया गया है। पता चला है कि राज्य में फिरोजपुर अमृतसर की जिला अदालतों को यह धमकी मिली है। बेशक अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

    रोजाना की भांति जैसे ही कोर्ट स्टाफ वकील सहित अन्य लोग कोर्ट में पहुंचे तो अचानक से कोर्ट को खाली करवाने के आदेश आए। सुबह 9:45 पर कोर्ट परिसर को खाली करवाना शुरू कर दिया गया। एडवोकेट रोहित अरोड़ा और एडवोकेट अर्शदीप सिंह रंधावा ने बताया कि ऐसा दूसरी बार हुआ है कि जब 2महीने के भीतर कोर्ट में धमकी आई हो।

    ज्ञात होकि गाठ दिवस भी पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट परिसर में बम धमकी मिलने के बाद अफरा-तफरी का माहौल बन गयाथा। प्रारंभिक रिपोर्टों के अनुसार, चंडीगढ़ के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) कार्यालय को एक ईमेल भेजा गया, जिसमें हाईकोर्ट के भीतर बम लगाए जाने की चेतावनी दी गई थी। पुलिस टीम तुरंत मौके पर पहुंची और परिसर को खाली कराना शुरू किया। इस दौरान आसपास के क्षेत्र में यातायात प्रभावित हुआ। बम निरोधक दस्ते और स्निफर डॉग्स भी मौके पर पहुंचे और तलाशी अभियान शुरू किया।

    यह धमकी ठीक एक दिन बाद आई है, जब सेक्टर-37 स्थित पंजाब भाजपा कार्यालय के बाहर ग्रेनेड हमला हुआ था। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आ चुके हैं। पिछले साल मई में हाईकोर्ट रजिस्ट्रार कार्यालय को धमकी भरा ईमेल मिला था और इसी साल फरवरी में जिला अदालत को भी इसी तरह की धमकी दी गई थी। अधिकारियों ने ईमेल के स्रोत की जांच शुरू कर दी है और अदालत परिसरों में सुरक्षा कड़ी कर दी गई है।

  • जालंधर में बढ़ी सुरक्षा, DPS और मेयर वर्ल्ड समेत कई स्कूलों को बम से धमकी

    जालंधर में बढ़ी सुरक्षा, DPS और मेयर वर्ल्ड समेत कई स्कूलों को बम से धमकी

    जालंधर 
     पंजाब के जालंधर में आज यानी सोमवार को कई स्कूलों को बम से उड़ाने की धमकी मिलने से प्रशासन में हड़कंप मच गया। जालंधर के डीपीएस स्कूल, मेयर वर्ल्ड स्कूल और एक अन्य डीपीएस स्कूल को ईमेल के जरिए धमकी भेजी गई। ईमेल मिलते ही स्कूल प्रबंधन ने तुरंत पुलिस को सूचना दी। पुलिस टीमें बम स्क्वॉड और डॉग स्क्वॉड के साथ मौके पर पहुंचीं और स्कूल परिसरों की जांच शुरू कर दी गई है। इस घटना के बाद अभिभावकों और छात्रों में डर का माहौल बन गया है।

    जालंधर के स्कूलों को बनाया निशाना
    जालंधर के प्रमुख निजी स्कूलों को भेजी गई धमकी भरी ईमेल ने सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। डीपीएस और मेयर वर्ल्ड स्कूल जैसे संस्थानों को सीधे निशाना बनाया गया। ईमेल में आपत्तिजनक भाषा का उपयोग करते हुए बच्चों को लेकर चेतावनी दी गई, जिससे स्कूल प्रशासन तुरंत सक्रिय हुआ और स्थानीय पुलिस को सूचना दी गई।

    पुलिस और सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट
    धमकी मिलने के बाद पुलिस ने बिना देर किए कार्रवाई शुरू की। बम स्क्वॉड और डॉग स्क्वॉड की टीमों ने स्कूलों में सर्च ऑपरेशन चलाया। अधिकारियों के अनुसार, हर कोने की जांच की जा रही है ताकि किसी भी संभावित खतरे को समय रहते टाला जा सके। फिलहाल किसी संदिग्ध वस्तु की पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन सतर्कता बढ़ा दी गई है।

    फिरोजपुर कोर्ट में दोपहर दो बजे तक काम बंद 
    फिरोजपुर कोर्ट काम्प्लेक्स को एक फिर बम से उठाने की धमकी मिली है। दोपहर दो बजे तक कामकाज बंद कर दिया है। पुलिस ने मौके पर पहुंच कोर्ट खाली करवाई और छानबीन शुरू कर दी है।

    साइबर सेल कर रही जांच
    पुलिस अधिकारियों ने बताया कि धमकी भरे ईमेल के स्रोत का पता लगाने के लिए साइबर सेल को भी जांच में शामिल किया गया है। ईमेल कहां से भेजा गया, इसका तकनीकी विश्लेषण किया जा रहा है। पिछले कुछ समय से इस तरह की धमकियों की घटनाएं बढ़ी हैं, जिससे एजेंसियां और ज्यादा सतर्क हो गई हैं।

    ईमेल में लिखी गई गंभीर धमकियां
    धमकी भरी ईमेल में जालंधर के स्कूलों में बम ब्लास्ट की बात कही गई है और बच्चों को बचाने की चेतावनी दी गई है। इसमें कुछ राजनीतिक और अलगाववादी बयान भी शामिल हैं। ईमेल में बम और ग्रेनेड से हमले का जिक्र करते हुए समय भी लिखा गया है, जिससे स्थिति और गंभीर हो गई है।

    बड़े नेताओं और अमृतसर का भी जिक्र
    ईमेल में पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान और आम आदमी पार्टी के नेता अरविंद केजरीवाल को भी निशाना बनाने की धमकी दी गई है। इसके अलावा अमृतसर में डॉ. भीमराव अंबेडकर की प्रतिमा को 14 अप्रैल को नुकसान पहुंचाने की बात कही गई है। इस कारण पूरे पंजाब में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है।

  • शाही लीची की तकनीक से बढ़ेगी किसानों की आय, मुजफ्फरपुर के वैज्ञानिकों ने सिखाए रोग नियंत्रण और पौध प्रबंधन के आधुनिक तरीके

    शाही लीची की तकनीक से बढ़ेगी किसानों की आय, मुजफ्फरपुर के वैज्ञानिकों ने सिखाए रोग नियंत्रण और पौध प्रबंधन के आधुनिक तरीके

    मुजफ्फरपुर

    बिहार का मुजफ्फरपुर, जिसे ‘स्वीट सिटी’ के नाम से जाना जाता है, अब सिर्फ अपनी मशहूर शाही लीची के लिए ही नहीं बल्कि किसानों के प्रशिक्षण केंद्र के रूप में भी पहचान बना रहा है.

    खेती के क्षेत्र में अग्रणी राज्य पंजाब से 22 किसानों का एक दल इन दिनों मुजफ्फरपुर पहुंचा है. ये किसान यहां की प्रसिद्ध 'शाही लीची' की उन्नत खेती तकनीक सीख रहे हैं, ताकि अपने राज्य में उत्पादन बढ़ाकर बेहतर मुनाफा कमा सकें.

    पठानकोट से आए ये किसान राष्ट्रीय लीची अनुसंधान केंद्र में वैज्ञानिकों से विशेष प्रशिक्षण ले रहे हैं. प्रशिक्षण के दौरान उन्हें लीची की उन्नत किस्मों, पौध प्रबंधन, रोग नियंत्रण, सिंचाई तकनीक और आधुनिक खेती के तरीकों की जानकारी दी जा रही है.

    खास बात यह है कि किसानों को हाई डेंसिटी प्लांटेशन मॉडल सिखाया जा रहा है. इस तकनीक में 10×15 फीट की दूरी पर पौधे लगाए जाते हैं, जिससे कम जगह में ज्यादा उत्पादन संभव होता है. साथ ही नियमित छंटाई से पेड़ छोटे रहते हैं और फल अधिक लगते हैं.

    पंजाब से आए किसान यशपाल सिंह, अजीत सिंह, हड़पाल सिंह और भूपेंद्र सिंह का कहना है कि वे पहले भी मुजफ्फरपुर की तकनीक अपनाकर अच्छा मुनाफा कमा चुके हैं. लेकिन इस बार उन्हें और उन्नत तरीके सीखने का मौका मिला है, जिससे उनकी आमदनी और बढ़ सकती है.

    दिलचस्प बात यह भी है कि पंजाब में मुजफ्फरपुर की लीची को ‘देहरादून लीची’ के नाम से बेचा जाता है, जहां इसकी मांग काफी ज्यादा है. सीमित उत्पादन के कारण किसानों को बाजार में बेहतर कीमत मिलती है.

    पंजाब कृषि विश्वविद्यालय से जुड़े फल वैज्ञानिक डॉ. मनु त्यागी के मुताबिक, मुजफ्फरपुर की लीची की पहचान अंतरराष्ट्रीय स्तर पर है और बिहार इस उत्पादन में अग्रणी है. ऐसे में पंजाब जैसे राज्यों में इसकी खेती का विस्तार किसानों के लिए फायदेमंद साबित हो सकता है.

    वहीं पौध संरक्षण विशेषज्ञ डॉ. विनय पठानिया ने बताया कि किसानों को सैद्धांतिक और व्यावहारिक दोनों तरह का प्रशिक्षण दिया जा रहा है, ताकि वे अपने क्षेत्र में बेहतर उत्पादन और रोग नियंत्रण कर सकें.

    यह प्रशिक्षण कार्यक्रम राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक द्वारा प्रायोजित है.
    विशेषज्ञों का मानना है कि हाई डेंसिटी प्लांटेशन जैसी तकनीकों ने पारंपरिक खेती को बदल दिया है. पहले जहां 40-50 फीट की दूरी पर पौधे लगाए जाते थे, वहीं अब कम जमीन में ज्यादा उत्पादन
    संभव हो रहा है. इससे किसानों की आय में भी उल्लेखनीय वृद्धि हो रही है.

    कुल मिलाकर, मुजफ्फरपुर की ‘शाही लीची’ अब बिहार तक सीमित नहीं रही, बल्कि देशभर के किसानों के लिए एक नया अवसर बनती जा रही है.