Category: राज्य

  • अब नहीं लगेगा लंबा जाम! जयपुर में स्मार्ट ट्रैफिक सिस्टम और सख्त एक्शन की तैयारी

    अब नहीं लगेगा लंबा जाम! जयपुर में स्मार्ट ट्रैफिक सिस्टम और सख्त एक्शन की तैयारी

     जयपुर

    जयपुर की सड़कों पर लगने वाले लंबे जाम और ट्रैफिक की किच-किच को खत्म करने के लिए राजस्थान सरकार ने एक बड़ा मास्टर प्लान तैयार किया है. मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के आदेश पर बनी इस योजना का मकसद सिर्फ ट्रैफिक रोकना नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम को हाई-टेक और स्मार्ट बनाना है. अब जयपुर का ट्रैफिक सिस्टम पुराने ढर्रे पर नहीं, बल्कि नई तकनीक और ज्यादा पुलिस फोर्स के साथ चलेगा.

    अफसरों की संख्या बढ़ी, हर इलाके पर होगी पैनी नजर
    शहर की ट्रैफिक व्यवस्था को संभालने के लिए सरकार ने पुलिस अधिकारियों की टीम को काफी बड़ा कर दिया है. पहले निगरानी के लिए एडीसीपी ट्रैफिक के 2 पद थे जिन्हें अब बढ़ाकर 4 कर दिया गया है. इसी तरह एसीपी ट्रैफिक के पदों को 4 से बढ़ाकर 8 और ट्रैफिक इंस्पेक्टरों की संख्या 15 से बढ़ाकर 20 कर दी गई है. इससे फायदा यह होगा कि जयपुर के हर कोने में एक बड़ा अधिकारी मौजूद रहेगा और जमीनी स्तर पर काम बेहतर होगा.

    ड्रोन कैमरों से निगरानी, 72 बीट्स का शहर को बांटा
    अब ट्रैफिक पुलिस सिर्फ चौराहों पर खड़ी नजर नहीं आएगी, बल्कि आसमान से भी ड्रोन के जरिए आप पर नजर रखी जाएगी. पूरे शहर को 72 ट्रैफिक बीट्स में बांटा गया है, जहां अलग-अलग टीमें तैनात रहेंगी ताकि पीक ऑवर्स में जाम की स्थिति न बने. इसके साथ ही ट्रैफिक पुलिस को 20 मॉडिफाइड मोटरसाइकिलें दी गई हैं, ताकि पुलिसकर्मी भीड़भाड़ वाली तंग गलियों में भी तुरंत पहुंच सकें और जाम खुलवा सकें.

    टोंक रोड को बनाया जाएगा सबसे बेहतरीन रास्ता
    इस नए प्लान के तहत सबसे पहले टोंक रोड की सूरत बदली जाएगी. यादगार से लेकर सांगानेर तक के रास्ते को एक 'मॉडल रोड' के तौर पर विकसित किया जा रहा है. यहां सड़कों के डिजाइन को इस तरह ठीक किया जाएगा कि बेवजह के कट्स बंद हों और पैदल चलने वालों के लिए फुटपाथ साफ मिले. सड़क पर यू-टर्न और क्रॉसिंग को वैज्ञानिक तरीके से सेट किया जाएगा ताकि गाड़ियों की रफ्तार न थमे.

    अतिक्रमण और गलत पार्किंग पर चलेगा डंडा
    जाम की एक बड़ी वजह सड़कों पर होने वाले कब्जे और गलत तरीके से खड़ी गाड़ियां हैं. अब सरकार इसे लेकर बहुत सख्त है. सड़कों और फुटपाथों से अवैध कब्जे हटाए जाएंगे और अवैध पार्किंग के खिलाफ अतिरिक्त क्रेनें तैनात की जाएंगी. शहर में पार्किंग और नो-पार्किंग जोन के बोर्ड साफ-साफ लगाए जाएंगे ताकि जनता को पता रहे कि गाड़ी कहां खड़ी करनी है.

    गाड़ियों की संख्या देखकर बदलेगी लाइट
    अब आपको लाल बत्ती पर बेवजह लंबा इंतजार नहीं करना पड़ेगा. सरकार 'इंटेलिजेंट ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम' लागू करने जा रही है, जिससे सिग्नल अब 'डायनेमिक' होंगे. यानी लाइटें खुद गाड़ियों की भीड़ को देखकर तय करेंगी कि किधर का रास्ता कितनी देर खोलना है. सरकार का मानना है कि अगर जनता और प्रशासन मिलकर साथ दें, तो जयपुर की सड़कों को वाकई में जाम मुक्त और सुरक्षित बनाया जा सकता है.

  • निकाय चुनाव के नए नियम: NOTA नहीं करेगा खेल खराब, दूसरे स्थान वाले को मिलेगा मौका

    निकाय चुनाव के नए नियम: NOTA नहीं करेगा खेल खराब, दूसरे स्थान वाले को मिलेगा मौका

    चंडीगढ़.

    स्थानीय निकायों के चुनाव में अगर नोटा (उपरोक्त में से कोई नहीं) सर्वाधिक वोट लेता है तो भी जीत नहीं पाएगा। ऐसी स्थिति में दूसरे स्थान पर रहने वाले प्रत्याशी को विजेता घोषित कर दिया जाएगा। नवंबर 2018 में जारी व्यवस्था को राज्य निर्वाचन आयुक्त देवेंद्र सिंह कल्याण ने निरस्त कर दिया है।

    निकाय चुनाव में पिछली बार की तरह ईवीएम (इलेक्ट्रानिक वोटिंग मशीन) पर सबसे अंत में नोटा का बटन रहेगा। लेकिन नोटा के पास इस बार चुनाव रद कराने की क्षमता नहीं होगी। राज्य चुनाव आयुक्त देवेन्द्र सिंह कल्याण ने विगत 7 अप्रैल को नया आदेश जारी कर 2018 में तत्कालीन राज्य निर्वाचन आयुक्त डॉ. दलीप सिंह द्वारा जारी पिछले आदेश को निरस्त कर दिया है। तब व्यवस्था की गई थी कि चुनावों में नोटा को कल्पित चुनावी प्रत्याशी माना जाएगा और उसके पक्ष में पड़े सभी वोट को रिकार्ड पर लिया जाएगा।

    अगर नोटा के पक्ष में डाले गए वोट अन्य प्रत्याशियों से अधिक हैं तो किसी भी प्रत्याशी को उस वार्ड से निर्वाचित घोषित नहीं किया जाएगा। आयोग द्वारा उस चुनावी क्षेत्र में वह चुनाव रद कर दोबारा चुनाव करवाया जाएगा जिसमें पिछला चुनाव लड़ने वाले प्रत्याशियों को शामिल होने नहीं दिया जाएगा। यानी कि केवल नए प्रत्याशी ही चुनाव लड़ सकते थे। हालांकि दूसरी बार के चुनाव में भी नोटा को सर्वाधिक वोट मिलने की स्थिति में दूसरे नंबर के प्रत्याशी को विजयी घोषित करने की व्यवस्था की गई थी।

    पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट के एडवोकेट हेमंत कुमार ने बताया कि नए आदेश में स्पष्ट किया गया है कि अब अगर किसी स्थानीय चुनाव में नोटा को सर्वाधिक वोट मिलते हैं, तो भी चुनाव रद नहीं होगा। नोटा के बाद दूसरे नंबर पर सर्वाधिक वोट लेने वाले उम्मीदवार को निर्वाचित घोषित कर दिया जाएगा। नोटा को डाले गए वोटों को चुनाव लड़ रहे उम्मीदवारों द्वारा जमानत राशि बचाने के लिए जरूरी न्यूनतम 12.5 प्रतिशत वोटों की गणना में भी शामिल नहीं किया जाएगा।

    सुप्रीम कोर्ट के तीन जजों की बेंच द्वारा सितंबर 2013 में दिए गए एक निर्णय पीयूसीएल बनाम भारत सरकार में चुनावों में नोटा के विकल्प का प्रविधान डालने बारे भारतीय चुनाव आयोग को निर्देश तो दिया था, परंतु उसमें ऐसा कुछ नही था जैसा कि हरियाणा निर्वाचन आयोग ने नवंबर 2018 से व्यवस्था लागू कर रखी थी।

  • 20 साल के कार्यकाल पर विराम? नीतीश कुमार के फैसले पर सबकी नजर

    20 साल के कार्यकाल पर विराम? नीतीश कुमार के फैसले पर सबकी नजर

    पटना

     बिहार की राजनीति में मंगलवार का दिन बेहद अहम माना जा रहा है. बीते 20 साल से मुख्यमंत्री रहे नीतीश कुमार आज अपने पद से इस्तीफा दे सकते हैं. वे अब राज्यसभा सांसद बन चुके हैं. इससे पहले उन्होंने अपनी अंतिम कैबिनेट बैठक बुलाई, जिसमें सरकार को भंग करने की सिफारिश की गई.

    दोपहर 3:15 बजे इस्तीफा देंगे सीएम
    जानकारी के मुताबिक, नीतीश कुमार दोपहर 3:15 बजे राजभवन पहुंचकर राज्यपाल को अपना इस्तीफा सौंप सकते हैं. इसके साथ ही मौजूदा सरकार का कार्यकाल औपचारिक रूप से समाप्त हो जाएगा.

    कैबिनेट बैठक के बाद मंत्रियों की भावुक प्रतिक्रिया
    बैठक खत्म होने के बाद कई मंत्रियों ने इसे भावुक क्षण बताया. सभी ने नीतीश कुमार के लंबे कार्यकाल और उनके नेतृत्व की सराहना की.
    लखेंद्र पासवान बोले- बिहार को मजबूत बनाने का काम हुआ

    मंत्री लखेंद्र पासवान ने कहा कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने बिहार के लोगों का भरोसा जीता है और राज्य को सशक्त बनाने की दिशा में काम किया है. उन्होंने कहा कि आगे भी नई सरकार में उनकी भूमिका मार्गदर्शक के रूप में रहेगी.
    लेसी सिंह ने बताया भावुक और गौरव का पल

    मंत्री लेसी सिंह ने कहा कि यह पल भावुक होने के साथ-साथ गौरव का भी है. उन्होंने कहा कि नीतीश कुमार जैसे नेता के साथ लंबे समय तक काम करना उनके लिए सम्मान की बात रही.

    रामकृपाल यादव हुए भावुक
    बैठक के बाद मंत्री रामकृपाल यादव भावुक नजर आए. उन्होंने कहा कि यह पूरे बिहार के लिए भावुक क्षण है. उन्होंने नीतीश कुमार के 20 साल के कार्यकाल को राज्य के विकास में महत्वपूर्ण बताया.

    बीजेपी विधायक बोले- बिहार के इतिहास में दर्ज होगा नाम
    बीजेपी विधायक विनोद नारायण झा ने कहा कि नीतीश कुमार ने बिहार के विकास में अहम भूमिका निभाई है. उन्होंने कहा कि उनका नाम बिहार के इतिहास में हमेशा याद रखा जाएगा और वे आगे भी मार्गदर्शक की भूमिका में रहेंगे.

  • शिवराज सिंह चौहान आज बैठक में करेंगे बिहार में भाजपा के पहले सीएम के नाम का ऐलान

    शिवराज सिंह चौहान आज बैठक में करेंगे बिहार में भाजपा के पहले सीएम के नाम का ऐलान

    पटना 

    बिहार में भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के पहले मुख्यमंत्री के नाम का ऐलान आज 3 बजे भाजपा विधायक दल की बैठक में केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान करेंगे। जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) के अध्यक्ष और सीएम नीतीश कुमार कुछ देर में कैबिनेट की आखिरी बैठक के बाद राज्यपाल को इस्तीफा सौंप देंगे। राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) सरकार का नेतृत्व पहली बार भाजपा करेगी। भाजपा विधायक दल की बैठक में सीएम के नाम का ऐलान होने के बाद शाम 4 बजे एनडीए विधायक दल की बैठक में गठबंधन के पांच दलों के विधायक उस नाम का अनुमोदन करेंगे। अभी जैसे जेडीयू विधायक दल के नेता नीतीश सीएम हैं, उसी तरह आगे भाजपा विधायक दल का नेता ही एनडीए विधायक दल का नेता और मुख्यमंत्री बनेगा। भाजपा और एनडीए से पहले जेडीयू के विधायक दल की बैठक 2 बजे नीतीश लेंगे।

    एनडीए विधायक दल की बैठक के बाद नया नेता यानी नए मुख्यमंत्री राजभवन जाकर नई सरकार बनाने का दावा पेश करेंगे। बुधवार की सुबह 11 बजे लोक भवन (राजभवन) में बीजेपी की अगुवाई में एनडीए की नई सरकार का शपथ ग्रहण समारोह होगा, जिसमें सीमित संख्या में पांच घटक दलों के मंत्री शपथ लेंगे। समारोह में दिल्ली से भाजपा और एनडीए दलों के बड़े नेता आ सकते हैं।

    नए सीएम को लेकर अटकलों का दौर चल रहा है, लेकिन खुली आंखों से जो राजनीतिक घटनाक्रम दिख रहा है और कल से जिस तरह भाजपा विधायक दल के मौजूदा नेता और उप-मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी का आवास नई सरकार के गठन को लेकर बैठकों-मुलाकातों का केंद्र बना हुआ है, उससे यह संभावना प्रबल है कि सम्राट चौधरी ही बिहार के नए और अगले मुख्यमंत्री बनेंगे। सीएम पद के लिए नित्यानंद राय, विजय सिन्हा, जनक राम, रेणु देवी, दिलीप जायसवाल, संजय जायसवाल, मंगल पांडे जैसे कई नाम चर्चा में हैं। लेकिन भाजपा का फैसला शाम 3 बजे की बैठक में सामने आने तक कुछ तय रूप से नहीं कहा जा सकता।

    पांच महीने पहले सम्राट चौधरी और विजय सिन्हा को भाजपा विधायक दल का नेता और उप-नेता चुना गया था। भाजपा के पास विकल्प है कि वो विधायक दल का नेता या उप-नेता ना बदले, लेकिन जदयू को सांसद नीतीश की जगह पर नया नेता चुनना ही होगा, जो विधानसभा या विधान परिषद का सदस्य हो। इस लिहाज से जदयू की 2 बजे की बैठक भी बहुत महत्वपूर्ण है। जदयू में नीतीश के बाद नेता बनने की रेस में विजय कुमार चौधरी का नाम सबसे आगे है।

    नीतीश कुमार सीएम आवास से निकले, आंबेडकर जयंती समारोह बतौर मुख्यमंत्री आखिरी सार्वजनिक कार्यक्रम

    नीतीश कुमार बतौर सीएम अपने अंतिम सार्वजनिक कार्यक्रम के लिए मुख्यमंत्री आवास से निकल गए। वो आंबेडकर जयंती समारोह में शामिल होने के बाद जब सीएम हाउस लौटेंगे तो अपनी कैबिनेट की आखिरी बैठक करेंगे। इसके बाद वो राजभवन जाकर इस्तीफा सौंप देंगे।

     भाई वीरेंद्र ने कहा- सम्राट चौधरी सीएम बनते हैं तो हम बधाई देंगे
    राजद विधायक भाई वीरेंद्र ने कहा है कि अगर सम्राट चौधरी सीएम बनते हैं तो वो उनको बधाई देंगे। कुछ दिन पहले तेजस्वी यादव के करीबी नेता शक्ति सिंह यादव ने भी कहा था कि अगर सम्राट चौधरी मुख्यमंत्री बनते हैं तो राजद के कार्यकर्ता खुश ही होंगे। शक्ति यादव का तर्क था कि इससे साबित होगा कि राजद से निकले कार्यकर्ता दूसरे जगह जाकर भी सीएम बन सकते हैं।

    सम्राट चौधरी बिहार सीएम संकेत नंबर 08- राज्यपाल के सचिव गोपाल मीणा सम्राट के आवास गए
    एनडीए दलों के नेता और नीतीश के प्रधान सचिव दीपक कुमार के बाद कल शाम जब राज्यपाल के सचिव गोपाल मीणा भी सम्राट चौधरी के आवास पहुंच गए, तो यह अब तक के सारे संकेतों में सबसे मजबूत इशारा हो गया कि अगला सीएम कौन हो सकता है। कहा जा रहा है कि 15 अप्रैल को शपथ ग्रहण समारोह के बारे में चर्चा करने के लिए राज्यपाल के सचिव सम्राट से मिलने गए थे।

    सम्राट चौधरी बिहार सीएम संकेत नंबर 07- सीएम के प्रधान सचिव दीपक कुमार सम्राट के आवास गए
    एनडीए के नेताओं के बाद जब कल नीतीश कुमार के प्रधान सचिव दीपक कुमार भी सम्राट चौधरी से मिलने उनके आवास पहुंचे। दीपक कुमार ही सरकार की सारी प्रशासनिक व्यवस्था पर सीएम के लिए नजर रखते हैं। दीपक कुमार हर यात्रा और कार्यक्रम में सीएम के साथ और बिल्कुल पास खड़े दिख जाते हैं। दीपक कुमार का सम्राट चौधरी के आवास जाना भी अगली सरकार के नेता का मजबूत संकेत है।

    JDU इन 5 नेताओं पर लगा सकती है दांव

    डिप्टी सीएम की रेस में कौन आगे?
    सबकी निगाहें अब इस बात पर टिकी हैं कि जेडीयू की ओर से उपमुख्यमंत्री कौन बनेगा. हाल ही में राजनीति में कदम रखने वाले नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार का नाम इस पद के लिए सबसे चर्चा में है. हालांकि, सूत्रों के अनुसार निशांत फिलहाल इस जिम्मेदारी को स्वीकार करने के लिए तैयार नहीं हैं, लेकिन उन्हें मनाने की कोशिशें जारी हैं. वहीं, दो उपमुख्यमंत्री होने की बात भी माने आ रही है. कुछ लोगों का मानना है कि नीतीश कुमार उपमुख्यमंत्री के मामले में चौका भी सकते हैं. वे निशांत के अलावा किसी अन्य नेता पर भी दाव लगा सकते हैं. इसके लिए 5 नाम सबसे प्रबल हैं. इनमें संजय झा, ललन सिंह, विजय चौधरी, अशोक चौधरी, विजेंद्र यादव शामिल हैं। 

        संजय झाः इन्हें नीतीश कुमार का करीबी माना जाता है. पार्टी के रणनीतिकार हैं. सवर्ण (ब्राह्मण) जाति से आते हैं. वे बीजेपी से जदयू में आए हैं. लिहाजा बीजेपी में भी उनकी अच्छी पकड़ है। 

        ललन सिंहः ये नीतीश कुमार के पुराने साथी और बेहद भरोसेमंद हैं. ललन सिंह भी सवर्ण यानि भूमिहार जाति से आते हैं. फिलहाल लोकसभा सांसद और केंद्र में मंत्री है. इनका पार्टी पर संगठन पर मजबूत पकड़ और लंबा प्रशासनिक व राजनीतिक अनुभव है। 
        विजय चौधरीः इन्हें नीतीश कुमार के साथ साये की तरह देखा जाता है. विधानसभा अध्यक्ष रह चुके हैं और नीतीश के संकटमोचक माने जाते हैं. फिलहाल राज्य सरकार में मंत्री हैं. सवर्ण जाति से आते हैं और भूमिहार है। 

        अशोक चौधरीः इन्हें नीतीश कुमार के मानस पुत्र माना जाता है. पासी जाति यानि महादलित समुदाय से आते हैं. कांग्रेस से जदयू में आए हैं. कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष भी रह चुके हैं। 

        विजेंद्र यादवः इन्हें को नीतीश कुमार की सरकार में अहम जिम्मेदारी मिलती रही है. नीतीश के भरोसेमंद भी माने जाते हैं और प्रशासनिक कार्यों में निपुण हैं. ये पिछड़ी जाति से आते हैं। 

     

  • महिलाओं को आर्थिक सहारा: पंजाब में ₹1500 मासिक योजना लॉन्च, जालंधर से रजिस्ट्रेशन शुरू

    महिलाओं को आर्थिक सहारा: पंजाब में ₹1500 मासिक योजना लॉन्च, जालंधर से रजिस्ट्रेशन शुरू

    चंडीगढ़.

    पंजाब सरकार आज मंगलवार से अपनी प्रस्तावित 'मावां धियां सत्कार योजना' के लिए महिला लाभार्थियों का रजिस्ट्रेशन शुरू करेगा, जिसकी शुरुआत मुख्यमंत्री भगवंत मान जालंधर से करेंगे। इसके 1 जुलाई से शुरू होने की उम्मीद है। इस दिन से जनरल श्रेणी की महिलाओं को सीधे 1,000 और अनुसूचित जाति श्रेणी की महिलाओं 1,500 रुपये का मानदेय मिलना शुरू हो जाएगा।

    आप के एक प्रवक्ता ने मंगलवार को बताया कि रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया शुरू में 15 अप्रैल से नौ विधानसभा क्षेत्रों जैसे आदमपुर, मलोट, श्री आनंदपुर साहिब, दिड़बा, सुनाम, मोगा, कोटकपूरा, बटाला और पटियाला ग्रामीण में पायलट आधार पर चलाई जाएगी। उन्होंने आगे कहा कि 15 मई से इस प्रक्रिया का विस्तार बाकी 108 विधानसभा क्षेत्रों में भी कर दिया जाएगा। रजिस्ट्रेशन के समय आवेदकों को पंजाब आधार कार्ड, वोटर पहचान पत्र और बैंक पासबुक जमा करना होगा। इन दस्तावेज़ों का इस्तेमाल पात्रता की जांच करने और लाभार्थियों के खातों में सीधे लाभ ट्रांसफर करने में मदद के लिए किया जाएगा।

    यह योजना आम आदमी पार्टी (AAP) के 2022 के विधानसभा चुनावों के उस वादे को पूरा करने की दिशा में एक कदम है, जिसमें महिलाओं को वित्तीय सहायता देने की बात कही गई थी। हालांकि, पार्टी ने उस समय 18 साल से ज़्यादा उम्र की महिलाओं को हर महीने 1,000 रुपये देने की बात कही थी, लेकिन सरकार ने अब संकेत दिया है कि योजना के लागू होने के साथ-साथ इसके अंतिम स्वरूप, जिसमें लाभार्थी के लिए पात्रता के मानदंड और 1,000 से 1,500 रुपये की सीमा के भीतर मिलने वाली सटीक राशि शामिल है को भी अधिसूचित कर दिया जाएगा।

    उन्होंने बताया कि इस योजना के लिए पिछले कई महीनों से तैयारियां चल रही हैं, जिसमें लाभार्थियों का डेटाबेस तैयार करना और बैंकों के साथ समन्वय स्थापित करना शामिल है। उन्होंने कहा कि चरणबद्ध तरीके से किए जा रहे इस रजिस्ट्रेशन का उद्देश्य पूरे राज्य में योजना को लागू करने से पहले छोटे पैमाने पर इसके सिस्टम की जांच करना है। महिलाओं के लिए वित्तीय सहायता योजना शुरू करने वाला पंजाब अकेला राज्य नहीं है। पड़ोसी राज्यों—हरियाणा और हिमाचल प्रदेश—ने भी ऐसी योजनाओं की घोषणा की है।

    दिल्ली और पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों ने भी हाल के वर्षों में इसी तरह के कार्यक्रम लागू किए हैं, जिनका उद्देश्य घरेलू कल्याण और महिलाओं की आर्थिक भागीदारी को बढ़ावा देने के लिए वित्तीय सहायता प्रदान करना है। इसके साथ ही, इस योजना से राज्य के खजाने पर सालाना 10,000 करोड़ रुपये से ज़्यादा का बोझ पड़ने की संभावना है। राज्यों में पंजाब का GSDP के मुकाबले कर्ज़ का अनुपात सबसे ज़्यादा है, और नीति-निर्धारक हलकों में बार-बार होने वाले कल्याणकारी भुगतानों के लिए उपलब्ध वित्तीय गुंजाइश को लेकर सवाल उठाए गए हैं। हालाँकि, सरकारी अधिकारियों का कहना है कि इसे चरणबद्ध तरीके से लागू करने से इसका बेहतर क्रियान्वयन हो पाएगा। इस तरह इकट्ठा किया गया डेटाबेस लाभार्थियों की अंतिम संख्या तय करने में मदद करेगा।

  • Doctor Arrest Row: राजस्थान में OPD-IPD बंद, मरीजों पर संकट गहराया

    Doctor Arrest Row: राजस्थान में OPD-IPD बंद, मरीजों पर संकट गहराया

    जयपुर

    राजस्थान में  आज (14 अप्रैल) से 24 घंटे तक पूरी तरह से प्राइवेट अस्पताल बंद रहेंगे. इस दौरान प्रदेशभर के प्राइवेट अस्पतालों में ओपीडी और आईपीडी सेवाएं पूरी तरह से ठप रहेंगी. जयपुर के एक डॉक्टर की गिरफ्तारी के खिलाफ राज्य के प्राइवेट अस्पतालों के डॉक्टरों ने 24 घंटे की हड़ताल का ऐलान किया है. प्राइवेट अस्पताल के डॉक्टरों के इस ऐलान से राजस्थान में स्वास्थ्य सेवाओं पर काफी असर पड़ने वाला है और इस हड़ताल से मरीजों का भी भारी दिक्कत होगी.

    24 घंटे का हड़ताल का ऐलान
    दरअसल, जयपुर में स्थित एक प्राइवेट अस्पताल के निदेशक डॉ. सोनदेव बंसल की गिरफ्तारी हुई थी. उन्हें हाल ही में चिकित्सीय लापरवाही के एक मामले में गिरफ्तार किया गया था. अब पुलिस की इसी कार्रवाई के विरोध में 'इंडियन मेडिकल एसोसिएशन' (IMA) ने मंगलवार से प्रदेशभर के निजी अस्पतालों में 24 घंटे की संपूर्ण हड़ताल का ऐलान कर दिया.

    जानकारी के अनुसार, 14 अप्रैल सुबह 8 बजे से अगले दिन सुबह तक ओपीडी और आईपीडी सेवाएं पूरी तरह ठप रहेंगी. डॉक्टरों का आरोप है कि मेडिकल बोर्ड द्वारा लापरवाही का सबूत न मिलने के बावजूद सरकार ने मामूली अनियमितताओं के आधार पर यह दमनकारी कदम उठाया है. इस गतिरोध से राज्य की स्वास्थ्य सेवाओं पर बड़ा संकट मंडरा रहा है.

    IMA राजस्थान के अध्यक्ष डॉ. महेश शर्मा ने कहा कि पहले गठित एक मेडिकल बोर्ड ने मामले में चिकित्सीय लापरवाही का कोई सबूत नहीं पाया था.

    डॉक्टर सोनदेव बंसल की क्यों हुई गिरफ्तारी
    डीसीपी साउथ राजर्षि राज ने डॉक्टर सोनदेव बंसल से जुड़े केस के बारे में बताया कि अक्टूबर 2025 में जितेन्द्र कुमार शर्मा ने मानसरोवर थाने में रिपोर्ट दी कि उनकी मां शशि शर्मा को 01 सितंबर 2025 को निविक हॉस्पिटल में न्यूरो के इलाज के लिए भर्ती कराया था. अस्पताल ने उनकी माता का इलाज शुरू कर दिया और उनसे इलाज के नाम पर लाखों रुपये वसूल कर लिये गये, जिनका आज तक कोई हिसाब किताब बिल रशीद नहीं दी. जितेंद्र ने रिपोर्ट में कहा कि उनकी मां का इलाज कुछ समय तक RGHS से भी किया गया और उनसे लाखों रुपये नकद भी लिए गए.

    इस दौरान अस्पताल प्रशासन आश्वासन देता रहा कि उनकी मां का इलाज अच्छा चल रहा है. हालांकि, कुछ दिनों बाद जितेंद्र की मां की मौत हो गई. जब जितेंद्र ने अपनी मां के इलाज के दस्तावेज और इलाज की रशीद व बिल मांगे तो अस्पताल ने देने से इनकार कर दिया. वही फ़र्जी फर्जी रिकार्ड तैयार किया गया.

    पुलिस के अनुसार, जांच में पता चला कि अस्पताल प्रबंधक ने आरजीएचएस कार्यालय में जितेंद्र की मां को इलाज के लिए बार-बार डिस्चार्ज दिखाकर दोबारा भर्ती किया दिखाया. परिवादी की बिना सहमति से एक ही सहमति पत्र (consent form) पर कांट-छांट कर अलग-अलग डेट डालकर आरजीएचएस पोर्टल पर अपलोड किया गया. आरजीएचएस ऑफिस ने अस्पताल के खिलाफ जांच में अनियमितता के आरोप प्रमाणित माने है और एफएसएल रिपोर्ट के अनुसार भी दस्तावेजों में कांटछांट करना प्रमाणित पाया जाने पर संचालक डॉ. सोनदेव बंसल को गिरफ्तार किया गया.

  • ₹20 हजार सैलरी का दावा झूठा! योगी सरकार ने बताया नया वेतन और वेज बोर्ड का प्लान

    ₹20 हजार सैलरी का दावा झूठा! योगी सरकार ने बताया नया वेतन और वेज बोर्ड का प्लान

    लखनऊ

    उत्तर प्रदेश सरकार ने सोशल मीडिया पर तेजी से फैल रही उस खबर को पूरी तरह खारिज कर दिया है, जिसमें दावा किया जा रहा था कि राज्य में मजदूरों का न्यूनतम वेतन ₹20 हजार प्रति माह कर दिया गया है. सरकार ने इसे साफ तौर पर भ्रामक और झूठी जानकारी बताया है और लोगों से अपील की है कि वो सिर्फ आधिकारिक स्रोतों पर ही भरोसा करें.

    शासन द्वारा जारी आधिकारिक प्रेस विज्ञप्ति में स्पष्ट किया गया है कि ₹20 हजार न्यूनतम वेतन तय करने का कोई फैसला नहीं लिया गया है. सरकार ने कहा कि इस तरह की खबरें पूरी तरह मनगढ़ंत हैं और इनका वास्तविकता से कोई संबंध नहीं है. इस तरह की अफवाहों से भ्रम की स्थिति पैदा होती है, जिससे आम जनता और श्रमिक दोनों प्रभावित होते हैं.

    हालांकि, सरकार ने यह जरूर बताया कि वर्तमान आर्थिक परिस्थितियों और श्रमिकों की मांगों को ध्यान में रखते हुए न्यूनतम वेतन में अंतरिम वृद्धि करने का निर्णय लिया गया है. इस अंतरिम वृद्धि का उद्देश्य मजदूरों को तत्काल राहत देना है, ताकि उनकी आय में कुछ सुधार हो सके.

    सरकार ने कहा, केवल आधिकारिक सूचना पर करें भरोसा
    राज्य में वर्तमान न्यूनतम वेतन दरों का भी विवरण साझा किया गया है. अधिसूचित दरों के अनुसार, अकुशल श्रमिकों का मासिक वेतन ₹11,313.65 तय किया गया है, जबकि दैनिक वेतन ₹435.14 है. इसी तरह अर्धकुशल श्रमिकों के लिए मासिक वेतन ₹12,446 और दैनिक वेतन ₹478.69 निर्धारित किया गया है. वहीं कुशल श्रमिकों के लिए मासिक वेतन ₹13,940.37 और दैनिक वेतन ₹536.16 रखा गया है.

    सरकार ने कहा कि यह दरें हाल ही में अधिसूचित की गई हैं और इन्हीं के आधार पर वर्तमान में भुगतान किया जाना चाहिए. नियोक्ताओं को निर्देश दिए गए हैं कि वे इन दरों का सख्ती से पालन करें और किसी भी प्रकार की अनियमितता न करें. इसके साथ ही, सरकार ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए अगले माह वेज बोर्ड के गठन की घोषणा की है. यह वेज बोर्ड श्रमिकों के वेतन से जुड़े विभिन्न पहलुओं का अध्ययन करेगा और अपनी सिफारिशें सरकार को देगा. इन सिफारिशों के आधार पर भविष्य में न्यूनतम वेतन की नई दरें तय की जाएंगी.

    अगले महीने बनेगा वेज बोर्ड, नई दरों पर होगी सिफारिश
    सरकार का मानना है कि वेज बोर्ड के माध्यम से एक संतुलित और व्यावहारिक वेतन संरचना तैयार की जा सकेगी, जिससे श्रमिकों और उद्योग दोनों के हितों का ध्यान रखा जा सके. इससे वेतन निर्धारण प्रक्रिया में पारदर्शिता भी बढ़ेगी और सभी पक्षों को न्याय मिलेगा. राष्ट्रीय स्तर पर भी न्यूनतम वेतन को लेकर काम जारी है. केंद्र सरकार नई श्रम संहिताओं के तहत पूरे देश के लिए एक समान न्यूनतम आधार रेखा यानी फ्लोर वेज तय करने की प्रक्रिया में है. इसका उद्देश्य यह है कि देश के हर हिस्से में श्रमिकों को एक न्यूनतम स्तर का वेतन सुनिश्चित किया जा सके.

    मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस मुद्दे पर नियोक्ताओं से अपील की है कि वे श्रमिकों के हितों का ध्यान रखें और उन्हें नियमानुसार वेतन दें. उन्होंने कहा कि श्रमिकों को ओवरटाइम का भुगतान, साप्ताहिक अवकाश और बोनस जैसी सुविधाएं मिलनी चाहिए. मुख्यमंत्री ने कार्यस्थलों पर महिला श्रमिकों की सुरक्षा और सम्मान को भी प्राथमिकता देने पर जोर दिया. उन्होंने कहा कि सभी नियोक्ता यह सुनिश्चित करें कि महिला कर्मचारियों को सुरक्षित और सम्मानजनक वातावरण मिले.

    इसके अलावा, मुख्यमंत्री ने अराजक और बाहरी तत्वों द्वारा की जा रही गैर-कानूनी गतिविधियों की कड़ी निंदा की है. उन्होंने प्रशासन को निर्देश दिए हैं कि ऐसे तत्वों की पहचान कर उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए. सरकार ने साफ किया है कि किसी भी तरह की अव्यवस्था को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा. सरकार ने एक बार फिर दोहराया कि वह औद्योगिक विकास और श्रमिक कल्याण के बीच संतुलन बनाए रखने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है. श्रमिकों की भलाई और उद्योगों की प्रगति, दोनों को साथ लेकर चलने की नीति पर काम किया जा रहा है.

    नियोक्ताओं को निर्देश, नियमों के अनुसार दें वेतन और सुविधाएं
    अंत में, सरकार ने आम लोगों से अपील की है कि वे सोशल मीडिया पर फैलने वाली अपुष्ट खबरों से सावधान रहें और केवल आधिकारिक जानकारी पर ही विश्वास करें. इससे न केवल भ्रम की स्थिति से बचा जा सकता है, बल्कि सही जानकारी भी सभी तक पहुंचाई जा सकती है.

  • 20 हजार सैलरी की मांग को लेकर कर्मचारी नहीं पहुंचे काम पर, फैक्ट्री क्षेत्र में पुलिस पर हमला

    20 हजार सैलरी की मांग को लेकर कर्मचारी नहीं पहुंचे काम पर, फैक्ट्री क्षेत्र में पुलिस पर हमला

     नोएडा
        नोएडा में मंगलवार को भी प्राइवेट कंपनियों के कर्मचारी अपनी मांगों को लेकर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं. इस दौरान उनकी पुलिसकर्मियों  के साथ झड़प भी हो गई. जिसके बाद पुलिस ने हल्का बल भी प्रयोग किया. सोमवार को जहां उग्र प्रदर्शन और तोड़फोड़ के बाद यूपी सरकार ने देर रात न्यूनतम मजदूरी दरों में बढ़ोतरी कर दी है. बावजूद इसके प्राइवेट कर्मचारी संतुष्ट नहीं हैं. उनकी मांग है कि 11 हजार में दम नहीं है, न्यूनतम मजदूरी 20 हजार से कम नहीं होनी चाहिए. क्योंकि 20 हजार रुपये से कम में खुद का और परिवार का पेट पालना मुश्किल है। 

    नोएडा फेस 2 में कर्मचारियों के प्रोटेस्ट का एक वीडियो भी सामने आया है. जिसमें वे नारे लगा रहे हैं और कह रहे हैं कि 11 हजार में दम नहीं और 20 हजार से कम नहीं. आपको बता दें कि भारी विरोध कर्मचारी उत्तर प्रदेश सरकार ने मजदूरी दरों में बढ़ोतरी करने का आदेश दिया था. नए आदेश 1 अप्रैल 2026 से लागू होंगे. अलग-अलग श्रेणियां में अधिकतम करीब 3000 तक इजाफा हुआ है. यह तात्कालिक फैसला है, आगे व्यापक समीक्षा के बाद वेज बोर्ड के माध्यम से स्थाई समाधान की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। 

    फैक्ट्रियों में काम करने नहीं पहुंचे मजदूर
    प्राइवेट कर्मचारियों का कहना है कि बढ़ती महंगाई और जीवन-यापन की लागत के कारण वर्तमान वेतन में गुजारा करना मुश्किल हो गया है. उनका दावा है कि अन्य औद्योगिक इकाइयों में समान कार्य के लिए अधिक सैलरी दी जा रही है. जिससे वे खुद को असमान स्थिति में महसूस कर रहे हैं. वहीं, कुछ श्रमिक संगठनों ने भी कर्मचारियों के समर्थन में आवाज उठाई है और उचित वेतन निर्धारण की मांग की है। 

    हालांकि फैक्ट्री प्रबंधन का कहना है कि अचानक इतनी बड़ी वेतन वृद्धि संभव नहीं है, क्योंकि इससे उत्पादन लागत पर सीधा असर पड़ेगा. प्रबंधन ने संकेत दिया है कि वे कर्मचारियों से बातचीत के लिए तैयार हैं, लेकिन किसी भी निर्णय के लिए समय की आवश्यकता होगी। 

     'बाहरी' लोगों ने भड़काई हिंसा
    गौतम बुद्ध नगर की पुलिस कमिश्नर लक्ष्मी सिंह ने सोमवार रात पत्रकारों को बताया कि बाहरी जिलों से आए एक ग्रुप ने पड़ोसी जिलों की सीमाओं पर हंगामा किया. उन्होंने कहा, 'मजदूरों के शांतिपूर्वक चले जाने के बाद, बाहर से आए इस समूह ने लोगों को उकसाया और हिंसा भड़काने की कोशिश की.' पुलिस ने इनमें से कुछ लोगों को हिरासत में ले लिया है और बाकी की पहचान की जा रही है। 

    आहूजा फैक्ट्री के कर्मचारियों की मांगें
    नोएडा में आहूजा फैक्ट्री के कर्मचारी फैक्ट्री के बाहर शांतिपूर्ण तरीके से प्रदर्शन कर रहे हैं. कई मजदूर नई बढ़ोतरी पर सहमत नहीं है. कुछ मजदूर चाहते हैं सरकार के नए रेट कंपनी के मेन गेट पर नोटिस के रूप में लगाए जाए. मजदूरों का कहना है कि कंपनियों में कुशल और अकुशल कारीगरों का एक समान भत्ता हो. उनका आरोप है कि नौ महीनों में ही नौकरी टर्मिनेट करके दोबारा जॉइन कराई जाति है ताकि भत्ता ना बढ़ाना पड़े. अप्रेंटिस के दौरान 90 रुपए प्रति घंटे का भत्ता दिया जाता है लेकिन साल भर बाद घटकर 50 रुपए हो जाता है. मजदूरों की चिंता है अगर सरकारी भत्ता बढ़ाकर लागू किया गया तो कंपनियां कई मजदूरों को नौकरी से भी निकालेंगी। 

     नोएडा-सेक्टर 80 में पत्थरबाजी
    नोएडा के सेक्टर 80 में भी मजदूरों ने प्रदर्शन शुरू कर दिया है. कुछ मजदूरों ने पुलिस पर पत्थरबाजी भी की है. पुलिस हालात को काबू करने की कोशिश कर रही है। 

    हिंसक प्रदर्शन मामले में 7 पर FIR
    सोमवार को हुए जोरदार प्रदर्शन को लेकर पुलिस का दावा है कि कर्मचारियों के प्रदर्शन बंद करने के बाद कुछ 'बाहरी' लोगों ने अशांति फैलाने की कोशिश की. इस मामले में पुलिस ने सख्त कार्रवाई करते हुए अब तक 7 एफआईआर दर्ज की हैं और कई लोगों को हिरासत में भी लिया है। 

    प्रदर्शन के चलते उत्पादन हुआ ठग
    इस विवाद के कारण कई फैक्ट्रियों में उत्पादन ठप हो गया है, जिससे आपूर्ति पर भी असर पड़ने की आशंका है. स्थानीय प्रशासन और श्रम विभाग ने मामले को गंभीरता से लेते हुए दोनों पक्षों से बातचीत कर समाधान निकालने की पहल शुरू कर दी है. हालांकि अभी भी यह विवाद सुलझा नहीं है। 

    वहीं नोएडा में सोमवार को हुए हिंसा के मामले में अब तक 350 को गिरफ्तार किया गया है. गिरफ्तार लोगों को जेल भी भेज दिया गया है. वहीं प्रदर्शन में शामिल कई को हिरासत में लेकर भी पूछताछ की जा रही है. वबाल करने वाले अन्य की सीसीटीवी से पहचान की जा रही है। 

    फैक्ट्री के बाहर टूटे पड़े हैं वाहन
    नोएडा सेक्टर 63 में आगजनी के निशान अभी भी मौजूद हैं. सड़क के किनारे जली हुई कारें और फैक्टरियों के शीशे टूटे हुए पड़े हैं. एक पुलिसकर्मी ने बताया कि करीब 1 बजे लोग आए, बाहर सीसीटीवी तोड़ा फिर कूद के अंदर चले गए. 400 से 500 की भीड़ थी. सभी लोग अंदर दरवाजा बंद कर लिए और तोड़फोड़ करने लगे। 

  • बैसाखी के दिन आनंदपुर साहिब जा रही संगत पर गोलियों की बौछार, दहशत का माहौल

    बैसाखी के दिन आनंदपुर साहिब जा रही संगत पर गोलियों की बौछार, दहशत का माहौल

    आनंदपुर साहिब/कीरतपुर साहिब

     बैसाखी के पावन अवसर पर जहां एक ओर नगर कीर्तन निकाले जा रहे थे, वहीं दूसरी ओर देर रात कीरतपुर साहिब और आनंदपुर साहिब के बीच फायरिंग की घटना से हड़कंप मच गया।

    जानकारी के अनुसार, जालंधर से आनंदपुर साहिब जा रही संगत जब उक्त स्थान पर पहुंची, तो कुछ हमलावरों ने गोलियां चला दीं। अचानक हुई फायरिंग से मौके पर अफरा-तफरी का माहौल बन गया। गनीमत रही कि इस घटना में किसी प्रकार का जानी नुकसान नहीं हुआ। हालांकि, घटना ने श्रद्धालुओं में दहशत जरूर पैदा कर दी। पुलिस मामले की जांच में जुट गई है और हमलावरों की पहचान करने के प्रयास किए जा रहे हैं।

    जानें कैसे शुरू हुई बैसाखी पर्व मनाने की परंपरा

    14 अप्रैल का दिन आते ही मन में एक अलग ही उमंग भर जाती है, क्योंकि यही वह दिन है जब हम सब मिलकर बैसाखी का त्योहार मनाते हैं. इस साल 2026 में भी यह त्योहार खुशियों की नई सौगात लेकर आ रहा है. सौर कैलेंडर के हिसाब से देखें तो यह नए साल का पहला दिन है, जब सूर्य मेष राशि में कदम रखते हैं. उत्तर भारत में तो इस दिन की रौनक देखते ही बनती है. किसान अपनी लहलहाती सुनहरी फसल को देखकर फूले नहीं समाते और भगवान का शुक्रिया अदा करते हैं. नदियों में आस्था की डुबकी लगाना और दान-पुण्य करना इस दिन को और भी पवित्र बना देता है, जिससे मन बिल्कुल शांत और सकारात्मक हो जाता है। 

    आनंदपुर साहिब में खालसा पंथ की नींव
    सिख धर्म में बैसाखी का जिक्र आते ही दिल गर्व और श्रद्धा से भर जाता है. इसी खास दिन साल 1699 में गुरु गोविंद सिंह जी ने आनंदपुर साहिब में ‘खालसा पंथ’ की नींव रखकर एक नया इतिहास लिख दिया था. उन्होंने पांच प्यारों को अमृत चखाकर एक ऐसी निडर कौम तैयार की, जो किसी भी जुल्म के आगे झुकना नहीं जानती. आज के दिन गुरुद्वारों में होने वाले कीर्तन और अरदास की गूंज सीधे रूह को छू लेती है. सड़कों पर सजे नगर कीर्तन और पांच प्यारों की वह आन-बान देखकर हर किसी का सिर फख्र से झुक जाता है. यह पावन पर्व हमें याद दिलाता है कि मानवता की सेवा और सच्चाई की राह पर डटे रहना ही इंसान का असली धर्म है। 

    फसलों का त्योहार और प्रकृति का आभार
    बैसाखी का असली मतलब ही है खुशियों से भर जाना और प्रकृति के करीब आना. जब खेतों में सुनहरी गेहूं की फसल कटने को तैयार होती है, तो किसानों का दिल झूम उठता है और वे ढोल की थाप पर भांगड़ा और गिद्धा पाकर अपनी खुशी मनाते हैं. हर घर से पकवानों की सोंधी खुशबू आने लगती है और लोग पुराने गिले-शिकवे भुलाकर एक-दूसरे को गले लगाकर नए साल की बधाई देते हैं. लंगर में एक साथ बैठकर प्रसाद ग्रहण करना भाईचारे की सबसे सुंदर तस्वीर पेश करता है. शाम ढलते ही मोहल्लों में नाच-गाना और हंसी-मजाक का जो दौर चलता है, वह हमें याद दिलाता है कि मेहनत का फल वाकई बहुत मीठा होता है. यह त्योहार अपनों के साथ मिलकर जिंदगी का जश्न मनाने का एक प्यारा सा मौका है। 

    दान का पुण्य और सात्विक स्वाद की मिसाल
    पुरानी मान्यताओं की मानें तो बैसाखी पर किए गए दान का फल कभी खत्म नहीं होता. किसी प्यासे को पानी पिलाना या किसी जरूरतमंद को अन्न देना इस दिन का सबसे बड़ा पुण्य है. घर की रसोई में जब मां अपने हाथों से गुड़ वाले चावल या मीठी खीर बनाती हैं, तो उस सात्विक स्वाद की तुलना किसी भी बाजार की मिठाई से नहीं की जा सकती. शुद्ध घी और प्यार से बने इस भोग को ईश्वर को अर्पित करने से घर में हमेशा बरकत बनी रहती है. अपनों के बीच बैठकर सादा और शुद्ध भोजन करना ही असली सुख है. यह दिन हमें सिखाता है कि ईश्वर की भक्ति और अपनों का साथ ही जीवन की असली पूंजी है। 

  • समता रन मैराथन का आयोजन अंबेडकर जयंती पर, सीएम सैनी ने झंडी दिखाकर किया शुभारंभ

    समता रन मैराथन का आयोजन अंबेडकर जयंती पर, सीएम सैनी ने झंडी दिखाकर किया शुभारंभ

    पंचकूला
    बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर की जयंती के अवसर पर हरियाणा के पंचकूला में मंगलवार को 'समता रन' मैराथन का आयोजन किया गया। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने मैराथन को झंडी दिखाई। इस कार्यक्रम में हरियाणा सरकार के कई मंत्री और विधायकों ने हिस्सा लिया। मुख्यमंत्री सैनी ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि बाबा साहेब शिक्षा को सबसे बड़ा हथियार मानते थे। उन्होंने हमें यह संदेश दिया और कहा कि 'शिक्षित बनो, संगठित बनो और संघर्ष करो।' हमें इन शब्दों को अपने जीवन में अपनाना चाहिए। सीएम योगी ने कहा कि शिक्षा, जागरुकता और एकता के माध्यम से समाज में सकारात्मकता और परिवर्तन लाया जा सकता है।

    उन्होंने कहा कि मैराथन में भाग लेने वाले सभी प्रतिभागियों को शुभकामनाएं देता हूं। आप इस मैराथन में पूरे उत्साह और ऊर्जा के साथ दौड़े। सीएम सैनी ने कहा, "समाज में समानता और न्याय के संदेश के फैलाने का एक संदेश हमें देना चाहिए। यह दौड़ सिर्फ आपके पैरों की गति नहीं, बल्कि आपके विचारों की शक्ति को भी प्रदर्शित करेगी।"
    मुख्यमंत्री सैनी ने आगे कहा, "मैं एक बार फिर बाबासाहेब को नमन करता हूं। सभी से आह्वान करता हूं कि उनके दिखाए हुए मार्ग पर हम निरंतर आगे बढ़ते रहें। हम सभी मिलकर एक ऐसे भारत का निर्माण करें, जो समता, न्याय और बंधुत्व के मूल्यों पर आधारित हो। इसी विश्वास और संकल्प के साथ हम सभी मिलकर समता मैराथन को सफल बनाएं और समाज में सकारात्मक बदलाव की एक नई शुरुआत करें।

    इससे पहले, मुख्यमंत्री नायब सैनी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर पोस्ट के जरिए भीमराव अंबेडकर को श्रद्धांजलि दी। उन्होंने लिखा, "भारतीय संविधान निर्माता एवं सामाजिक समरसता के प्रतीक भारत रत्न बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर जी की जयंती पर उन्हें कोटि-कोटि नमन। बाबासाहेब की ओर से स्थापित सामाजिक न्याय और समानता की सुदृढ़ नींव आज भी राष्ट्र को एकजुट, सशक्त और आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में हमारा मार्गदर्शन कर रही है।"