Category: राज्य

  • मुख्यमंत्री सेहत योजना की रिपोर्ट में खुलासा, गर्मी के साथ बढ़ रहे फेब्राइल इलनेस के मरीज

    मुख्यमंत्री सेहत योजना की रिपोर्ट में खुलासा, गर्मी के साथ बढ़ रहे फेब्राइल इलनेस के मरीज

    चंडीगढ़.

    राज्य में बदलते तापमान और उमसभरी गर्मी के आगमन के साथ एक बार फिर मौसमी बीमारियों का प्रकोप बढ़ने लगा है। 'मुख्यमंत्री सेहत योजना'' के आंकड़े बताते हैं कि पिछले चार महीनों में एक्यूट फेब्राइल इलनेस कैशलेस इलाज दावों की सबसे बड़ी श्रेणियों में शामिल रहीं।
    राज्य स्वास्थ्य एजेंसी से प्राप्त आंकड़ों के अनुसार, एक्यूट फेब्राइल इलनेस के 5,840 मामले दर्ज किए गए, जिन पर 1.31 करोड़ के दावों का भुगतान किया गया।

    एक्यूट फेब्राइल इलनेस कोई एक बीमारी नहीं, बल्कि अचानक तेज बुखार के साथ उत्पन्न होने वाली एक ऐसी स्थिति है जिसमें कई तरह की बीमारियां शामिल हो सकती हैं। यूएस सेंटर्स फार डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन (सीडीसी) के अनुसार, ऐसी स्थितियां वायरल, बैक्टीरियल या परजीवी संक्रमणों के कारण हो सकती हैं। कई बार मरीज बुखार को मुख्य लक्षण के रूप में लेकर अस्पताल पहुंचते हैं, जबकि संक्रमण का मूल कारण शुरुआती अवस्था में स्पष्ट नहीं हो पाता। इसके अलावा, पानी से फैलने वाले और श्वसन संबंधी बीमारियों के भी उल्लेखनीय मामले सामने आए। एंटरिक फीवर के 1,396 मामले दर्ज हुए, जिन पर 30.47 लाख रुपए के दावे किए गए। निमोनिया के 377 मामलों पर 11.06 लाख, जबकि एक्यूट ब्रोंकाइटिस के 326 मामलों पर 9.24 लाख रुपए खर्च हुए। वहीं मानसून के दौरान अक्सर चर्चा में रहने वाली बीमारियों के मामले अपेक्षाकृत सीमित रहे।

    डेंगू के सिर्फ 12 मामले आए सामने
    डेंगू के केवल 12 मामले दर्ज हुए, जिन पर 40,880 का दावा हुआ। मलेरिया के सिर्फ 3 मामले, चिकनगुनिया के 6 मामले, और हीट स्ट्रोक के 4 मामले सामने आए, जो अत्यधिक गर्मी से संबंधित अस्पताल भर्ती की तुलनात्मक रूप से कम संख्या को दर्शाते हैं। सिविल अस्पताल, पटियाला के मेडिकल सुपरिंटेंडेंट डा विकास गोयल ने बताया कि यह स्थिति हर वर्ष ओपीडी में दिखाई देने वाले समान्य मौसमी दबाव को दर्शाती है। उन्होंने यह भी कहा कि अधिकांश मामले प्राथमिक स्वास्थ्य देखभाल स्तर पर आसानी से संभाले जा सकते हैं। उन्होंने कहा कि अत्यधिक गर्मी के कारण एक्यूट फेब्राइल इलनेस, उल्टी,दस्त, सिरदर्द, श्वसन संक्रमण और त्वचा व आँखों से जुड़ी एलर्जी के मामले बढ़ जाते हैं। गरम मौसम के कारण लोग अक्सर इलाज में देरी कर देते हैं, जिससे स्थिति गंभीर हो सकती है।

  • पानी संकट से निपटने की तैयारी, रेलवे स्टेशनों पर लगेंगे एयर-वॉटर प्लांट

    पानी संकट से निपटने की तैयारी, रेलवे स्टेशनों पर लगेंगे एयर-वॉटर प्लांट

    प्रयागराज
     रेलवे अब पानी की कमी वाले क्षेत्रों में हवा से पीने का पानी तैयार करने वाली आधुनिक मशीनें लगाएगा। रेलवे बोर्ड ने उत्तर मध्य रेलवे समेत सभी जोनल रेलवे, उत्पादन इकाइयों और रेलवे उपक्रमों को एटमॉस्फेरिक वाटर जेनरेटर (एडब्ल्यूजी) लगाने के निर्देश जारी किए हैं।रेलवे बोर्ड के निदेशक (पर्यावरण एवं हाउसकीपिंग प्रबंधन) अजय झा की ओर से जारी पत्र में कहा गया है कि कई स्थानों पर स्वच्छ पेयजल की उपलब्धता अब भी बड़ी चुनौती है। एडब्ल्यूजी तकनीक वातावरण में मौजूद नमी से सीधे पीने योग्य पानी तैयार करती है। यह पर्यावरण के अनुकूल और टिकाऊ समाधान है।

    इन मशीनों को पानी की कमी वाले रेलवे स्टेशन, अस्पताल, रेलवे कॉलोनी, कार्यालय, लेवल क्रॉसिंग और अन्य सेवा स्थलों पर लगाया जाएगा, जहां नियमित पेयजल आपूर्ति की जरूरत है। रेलवे बोर्ड ने पूर्व निर्देशों का हवाला देते हुए इस दिशा में आगे कार्रवाई करने को कहा है। रेलवे अधिकारियों के मुताबिक, इस तकनीक से पारंपरिक जल स्रोतों पर निर्भरता कम होगी और जल संरक्षण को भी बढ़ावा मिलेगा। गर्मी और जल संकट वाले क्षेत्रों में यह पहल यात्रियों और कर्मचारियों के लिए राहत साबित हो सकती है। उत्तर मध्य रेलवे के सीपीआरओ शशिकांत त्रिपाठी ने बताया कि रेलवे बोर्ड के निर्देशों का पालन किया जाएगा।

  • प्रचंड गर्मी में योगी सरकार का पावर प्लान सफल, तय रोस्टर से ज्यादा मिल रही बिजली

    प्रचंड गर्मी में योगी सरकार का पावर प्लान सफल, तय रोस्टर से ज्यादा मिल रही बिजली

    प्रचंड गर्मी में योगी सरकार रोस्टर से ज्यादा कर रही बिजली आपूर्ति

    26/27 मई की रात 2:37 बजे 30,337 मेगावाट सर्वाधिक विद्युत आपूर्ति की गई

    गर्मी से देश बेहाल लेकिन योगी सरकार ने यूपी में बखूबी संभाली बिजली व्यवस्था

    विभाग की टीमें दिन-रात फील्ड में रहकर बिजली व्यवस्था को सुचारु बनाए रखने में जुटीं
     
    लखनऊ

     उत्तर प्रदेश समेत लगभग पूरे देश में भीषण गर्मी अपने चरम पर है। प्रदेश के कई जिलों में तापमान 47 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच रहा है। ऐसे समय में योगी सरकार प्रदेशवासियों को निर्बाध और गुणवत्तापूर्ण बिजली उपलब्ध कराने के लिए लगातार युद्धस्तर पर कार्य कर रही है। 26 मई को जहां 28,125 मेगावाट विद्युत आपूर्ति की गई, वहीं सबसे अधिक 26/27 मई की रात 2:37 बजे 30,337 मेगावाट विद्युत आपूर्ति की गई है। इस तरह प्रचंड गर्मी और लगातार बढ़ती बिजली मांग के बावजूद प्रदेश में रोस्टर से ज्यादा विद्युत आपूर्ति की जा रही है, जिससे आमजन को बड़ी राहत मिल रही है।

    महानगरों से लेकर गांव तक पहुंच रही विद्युत आपूर्ति

    योगी सरकार में जिला मुख्यालय, महानगर और तहसील क्षेत्रों में 24 घंटे बिजली आपूर्ति की जा रही है, जबकि ग्रामीण क्षेत्रों में भी 22 से 22.30 घंटे तक निर्बाध बिजली दी जा रही है। यही वजह है कि भीषण गर्मी के इस दौर में भी प्रदेश की बिजली व्यवस्था मजबूत और प्रभावी दिखाई दे रही है। योगी सरकार की प्राथमिकता साफ है कि प्रदेश के हर घर, हर गांव और हर शहर तक बिना बाधा के बिजली पहुंचे, ताकि जनता को गर्मी से राहत मिल सके और दैनिक जीवन प्रभावित न हो।

    रिकॉर्ड मांग के बीच भी नहीं डगमगाई बिजली व्यवस्था

    प्रदेश में लगातार बिजली आपूर्ति हो रही है। 26 मई की रात 7:52 बजे 28,125 मेगावाट की विद्युत आपूर्ति की गई थी। जबकि रात 10 बजे 27,515 मेगावाट और 12 बजे 26,984 मेगावाट की विद्युत आपूर्ति की गई थी। इसी क्रम में 26/27 मई की रात 1 बजे 28,043 मेगावाट विद्युत आपूर्ति की गई। जबकि रात 2:37 बजे सबसे अधिक 30,337 मेगावाट की विद्युत आपूर्ति की गई है। 27 मई की सुबह 5 बजे 29,321 मेगावाट, सुबह 7 बजे 24,738 मेगावाट, सुबह 10 बजे 26,604 मेगावाट और 12 बजे 28,048 मेगावाट विद्युत आपूर्ति की गई।

    इसी क्रम में 27 मई को दोपहर 1 बजे 28,488 मेगावाट और 2 बजे 28,790 मेगावाट विद्युत आपूर्ति की गई है। यह आंकड़े इस बात का प्रमाण हैं कि योगी सरकार बिजली व्यवस्था को लेकर कितनी गंभीर और प्रतिबद्ध है। फिलहाल विभाग की टीमें दिन-रात फील्ड में रहकर बिजली व्यवस्था को सामान्य बनाने में जुटी हुई हैं। इससे साफ है कि योगी सरकार सिर्फ दावे नहीं कर रही, बल्कि जमीन पर तेज गति से काम भी कर रही है।

    उपभोक्ताओं को निर्बाध बिजली देने का प्रयासः निदेशक वितरण

    निदेशक वितरण ज्ञानेंद्र धर द्विवेदी ने बताया कि ग्रामीण क्षेत्रों में रोस्टर के हिसाब से ज्यादा बिजली आपूर्ति की जा रही है। निदेशक वितरण ने बताया कि हमारा प्रयास है कि उपभोक्ताओं को निर्बाध बिजली मिले। ऊर्जा विभाग की टीमें लगातार फील्ड में काम कर रही हैं और बिजली व्यवस्था की मॉनिटरिंग उच्च स्तर पर की जा रही है। हालांकि 25 और 26 मई की रात आए तेज आंधी-तूफान ने कई जिलों की विद्युत व्यवस्था को प्रभावित किया था। लेकिन मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर बिजली विभाग की टीमों ने तत्काल मोर्चा संभाला और युद्धस्तर पर मरम्मत कार्य शुरू कर दिया था।

  • रेखा गुप्ता की पहल: पुराने कपड़ों को मिलेगा नया जीवन, मेट्रो स्टेशनों पर शुरू होगी नई सुविधा योजना

    रेखा गुप्ता की पहल: पुराने कपड़ों को मिलेगा नया जीवन, मेट्रो स्टेशनों पर शुरू होगी नई सुविधा योजना

    नई दिल्ली

     घरों में बेकार पड़े पुराने कपड़े अब कचरे में नहीं जाएंगे, बल्कि उनसे नए और उपयोगी उत्पाद तैयार किए जाएंगे। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता की पहल पर दिल्ली में पर्यावरण संरक्षण और विकास को बढ़ावा देने के लिए नई योजना शुरू की जा रही है। इसके तहत DMRC राजधानी के 10 प्रमुख मेट्रो स्टेशनों पर पुराने कपड़ों के लिए विशेष कलेक्शन बॉक्स लगाएगा, जहां लोग अपने पुराने कपड़े जमा कर सकेंगे।

    सरकार का कहना है कि तेजी से बढ़ता कपड़ा अपशिष्ट (Waste) पर्यावरण के लिए बड़ी चुनौती बनता जा रहा है। ऐसे में इस पहल के जरिए पुराने कपड़ों की वैज्ञानिक तरीके से रिसाइक्लिंग और उनका दोबारा उपयोग सुनिश्चित किया जाएगा। इससे कचरे में कमी आने के साथ-साथ लोगों में पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी की भावना भी मजबूत होगी। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता और प्रभावशीलता सुनिश्चित की जाएगी, ताकि लोगों का भरोसा बना रहे और ज्यादा से ज्यादा लोग इस अभियान से जुड़ें।

    इन 10 स्टेशनों पर कलेक्शन बॉक्स
    जिन स्टेशनों को इस योजना के लिए चुना गया है, उनमें शाहदरा, मोहन एस्टेट, रोहिणी वेस्ट, लाजपत नगर, मालवीय नगर, मयूर विहार फेज-I, हौज खास, पंजाबी बाग वेस्ट, द्वारका और शालीमार बाग मेट्रो स्टेशन शामिल हैं।

    मेट्रो स्टेशन पर बिकेंगे ये प्रोडक्ट्स
    इस पहल के तहत जमा किए गए कपड़ों को अलग-अलग श्रेणियों में बांटा जाएगा। इसके बाद प्रतिष्ठित गैर सरकारी संगठनों और स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से इसे दोबारा उपयोग लायक बनाया जाएगा। साथ ही इनकी अपसाइक्लिंग (उपयोगी उत्पादों में बदलना) भी की जाएगी। पुराने कपड़ों से बैग, दरी और अन्य प्रोडक्ट तैयार किए जाएंगे। खास बात यह है कि इन प्रोडक्ट के प्रदर्शन और बिक्री के लिए चयनित मेट्रो स्टेशनों पर विशेष स्थान भी उपलब्ध कराया जाएगा।

    रिसाइक्लिंग यूनिट में भेजे जाएंगे कपड़े
    जो कपड़े दोबारा उपयोग के योग्य नहीं होंगे, उन्हें रिसाइक्लिंग यूनिट में भेजा जाएगा, जहां उनसे रिसाइक्ल्ड यार्न, फाइबर और नॉन-वोवन फेल्ट जैसे उत्पाद तैयार किए जाएंगे। सरकार का दावा है कि इससे न्यूनतम अपशिष्ट सुनिश्चित किया जा सकेगा।

    इस तरह होगी ब्रैंडिंग
    डीएमआरसी के अनुसार, इस परियोजना की ब्रैंडिंग 'दिल्ली मेट्रो लेडीज वेलफेयर ऑर्गनाइजेशन' के नाम से की जाएगी। फिलहाल कलेक्शन बॉक्स लगाने, ब्रैंडिंग और एमओयू से जुड़ी औपचारिक प्रक्रियाएं पूरी की जा रही हैं। प्रक्रिया पूरी होने के बाद इस योजना का शुभारंभ किया जाएगा।

  • स्वामित्व योजना में बदलाव: हरियाणा सरकार ने शिकायत निपटान प्रक्रिया को बनाया आसान

    स्वामित्व योजना में बदलाव: हरियाणा सरकार ने शिकायत निपटान प्रक्रिया को बनाया आसान

    रोहतक

     हरियाणा सरकार ने लाल डोरा और स्वामित्व योजना से संबंधित शिकायतों के त्वरित एवं प्रभावी समाधान के लिए नई व्यवस्था लागू की है। विकास एवं पंचायत विभाग द्वारा सभी जिला उपायुक्तों को जारी निर्देशों में स्पष्ट किया गया है कि अब हरियाणा आबादी देह (स्वामित्व अधिकारों का निहितकरण, अभिलेखीकरण एवं समाधान) अधिनियम-2025 के तहत आने वाली शिकायतों का निपटारा केवल अधिकृत राजस्व अधिकारी ही करेंगे।

    सरकार के इस फैसले को ग्रामीण क्षेत्रों में भूमि स्वामित्व संबंधी विवादों के समाधान की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है, जिससे आमजन को अधिक पारदर्शी और जवाबदेह व्यवस्था का लाभ मिलेगा।

    विकास एवं पंचायत विभाग, चंडीगढ़ की ओर से जारी पत्र के अनुसार यह अधिनियम 19 जनवरी 2026 को अधिसूचित किया गया था, जबकि इसे 26 नवंबर 2025 से प्रभावी माना गया है। विभाग के संज्ञान में आया था कि लाल डोरा और स्वामित्व योजना से जुड़ी शिकायतें अब तक कई स्थानों पर बीडीपीओ (खंड विकास एवं पंचायत अधिकारी) तथा डीडीपीओ (जिला विकास एवं पंचायत अधिकारी) कार्यालयों को भेजी जा रही थीं, जबकि अधिनियम में इन अधिकारियों की कोई निर्धारित भूमिका नहीं है।

    इससे शिकायतों के निस्तारण में अनावश्यक देरी और फाइलों की आवाजाही बढ़ रही थी। नए निर्देशों के तहत अब ऐसे सभी मामलों का निस्तारण केवल अधिनियम के तहत नियुक्त नायब तहसीलदार (एसी द्वितीय श्रेणी) और तहसीलदार (एसी प्रथम श्रेणी) जैसे राजस्व अधिकारियों की ओर से किया जाएगा। विभाग ने स्पष्ट किया है कि शिकायतों का समाधान अधिनियम की धारा 15 और 16 के प्रावधानों के अनुरूप किया जाना अनिवार्य होगा

    जिला विकास एवं पंचायत अधिकारी राजपाल चहल ने कहा कि विभागीय निर्देशों के अनुसार अब लाल डोरा व स्वामित्व योजना से संबंधित मामलों को बीडीपीओ या डीडीपीओ कार्यालयों में नहीं भेजा जाएगा, बल्कि शिकायतकर्ता सीधे संबंधित राजस्व अधिकारियों के समक्ष अपनी शिकायत प्रस्तुत कर सकेंगे। इससे न केवल प्रक्रिया सरल होगी, बल्कि शिकायतों के समाधान में तेजी आएगी और लोगों को समय पर राहत मिल सकेगी।

  • बकरीद से पहले दिल्ली में हाई अलर्ट, अफवाहों पर नजर और गश्त बढ़ाई गई

    बकरीद से पहले दिल्ली में हाई अलर्ट, अफवाहों पर नजर और गश्त बढ़ाई गई

    नई दिल्ली

     बकरीद यानी ईद-उल-अजहा पर राजधानी में सौहार्दपूर्ण वातावरण बनाए रखने के लिए सभी संवेदनशील इलाकों में पुलिस ने पैरामिलिट्री फोर्सेस के साथ फ्लैग मार्च शुरू कर दिया है। खुफिया यूनिट स्पेशल ब्रांच एक्टिव हो चुकी है। नाइट पेट्रोलिंग में इजाफा कर दिया गया है।

    पुलिस अफसरों के मुताबिक, थाने से लेकर जिला लेवल पर सभी समुदायों के मौज़ूज़ शख्सियतों की मौजूदगी में अमन कमिटियों, रेजिडेंट्स वेलफेयर एसोसिएशंस (RWA) और मार्केट वेलफेयर एसोसिएशंस (MWA) की मीटिंग हो चुकी हैं। सांप्रदायिक सद्भावना बनी रहे और त्योहार के दौरान माहौल ना बिगड़े, इसके लिए जरूरी हिदायतें दी गई हैं। संदिग्ध गतिविधि का पता चलने पर तुरंत पुलिस को सूचना देने को कहा गया है। अफवाहों से बचने और उन्हें फैलाने वालों से अलर्ट रहने को कहा गया है।

    जनता से अपील है कि सौहार्दपूर्ण वातावरण बनाए रखें। संवेदनशील इलाकों में कड़ी निगरानी है। माहौल बिगाड़ने की कोशिश करने वालों पर सख्त कार्रवाई होगी।

    अफ्रीका समिट रद्द होने के बाद दिल्ली में बढ़ाई गई सुरक्षा
    भारत-अफ्रीका फोरम समिट कैंसिल हो चुकी है। इसके लिए राजधानी में पैरामिलिट्री फोर्सेस की 60 कंपनियां बुलाई गई थीं। लिहाजा इन कंपनियों को अब दिल्ली के सभी जिलों में भेज दिया गया है। धार्मिक रूप से संवेदनशील रहे इलाकों में ज्यादा फोर्स दी गई है। इस बीच, धार्मिक स्थलों की भी सुरक्षा बढ़ाई गई है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर निगरानी के लिए भी स्पेशल टीमें बनाई गई हैं।

    शांति बनाए रखने की अपील
    आउटर-नॉर्थ जिले में डीसीपी हरेश्वर स्वामी, नॉर्थ ईस्ट जिले के डीसीपी राहुल अलवर, द्वारका जिले के डीसीपी कुशल पाल सिंह, साउथ वेस्ट जिले के डीसीपी अमित गोयल और नॉर्थ-वेस्ट जिले के एडिशनल डीसीपी सिकंदर सिंह ने अपने-अपने जिलों की अमन कमिटी और धार्मिक प्रतिनिधियों के साथ बैठकें कीं। जामा मस्जिद एरिया में डीसीपी (सेंट्रल) रोहित राजबीर सिंह और रोहिणी जिले के प्रेम नगर में एसएचओ विक्रम सिंह ने पैरामिलिट्री फोर्सेस के साथ मार्च निकाला।

  • VAT और नीतियों के खिलाफ राजस्थान में पंप बंद का अल्टीमेटम

    VAT और नीतियों के खिलाफ राजस्थान में पंप बंद का अल्टीमेटम

     जयपुर

    राजस्थान में 1 जून से आम लोगों को पेट्रोल-डीजल के संकट का सामना करना पड़ सकता है. ऐसा नहीं है कि प्रेट्रोल-डीजल की आवक रुकने वाली है, बल्कि प्रदेशभर के पेट्रोल-पंप संचालकों ने 1 जून से अनिश्चितकालीन पंप को ठप करने की चेतावनी दी है. पंप संचालकों ने सरकार और तेल कंपनियों की नीतियों के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जाने का अल्टीमेटम दे दिया है. इसे लेकर पेट्रोलियम डीलर एसोसिएशन ने सीएम भजनलाल शर्मा को पत्र लिखकर समस्याओं से अवगत कराया है. इसके साथ ही चेतावनी दी है कि अगर समस्या का समाधान नहीं किया गया तो प्रदेश के सभी पेट्रोल पंप पर ताले लटक जाएंगे और पूरे प्रदेश में पहिया थम सकता है.

    WhatsApp और मौखिक आदेश से तेल देने की सीमा निर्धारित
    बताया जा रहा है कि इस हड़ताल का कारण पेट्रोल-डीजल को लेकर तेल कंपनियों द्वारा लगाई गई पाबंदियां है. एसोसिएशन के अध्यक्ष राजेंद्र सिंह भाटी का आरोप है कि प्रदेश के कई इलाकों में पेट्रोल पंप तेल खत्म होने की कगार पर पहुंच रहे हैं. जबकि इंडियन ऑयल जैसी बड़ी कंपनियों ने WhatsApp मैसेज और मौखिक आदेशों के जरिए ग्राहकों तेल देने की सीमा निर्धारित कर दी है.

    भाटी ने बताया कि अगर तेल कंपनी के नियमों के खिलाफ अगर कोई पंप ग्राहक को एक बार में 50 हजार रुपये से अधिक का डीजल और 5000 रुपये से अधिक का पेट्रोल नहीं दिया जा सकता है. दूसरी ओर भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम ने भी अपनी सप्लाई बेहद सीमित कर दी है. अगर जरूरतमंद को सीमा से ज्यादा तेल दिया जाता है तो कंपनियां एकतरफा कार्रवाई करते हुए सप्लाई रोक देती है. जो नियमों का सरासर उल्लंघन है. वहीं तेल नहीं देने पर अनावश्यक लोगों में भ्रम फैलता है और लोगों की भीड़ उमड़ पड़ती है.

    VAT कम करने की मांग
    एसोसिएशन की ओर से राजस्थान में ईंधन पर लगाए जा रहे भारी VAT का भी विरोध किया है. इस वजह से पूरे देश में सबसे महंगा पेट्रोल-डीजल राजस्थान में बिक रहा है. डीलरों की मांग है कि राजस्थान में भी अन्य राज्यों की तरह 5 प्रतिशत VAT कटौती की जाए. इसके अलावा अलग-अलग जिलों में कीमतों के भारी अंतर और हरियाणा-पंजाब की तुलना में राज्य में CNG की अत्यधिक कीमतों को लेकर भी उपभोक्ताओं और डीलर्स में भारी असंतोष है.

    किसानों के लिए स्थिति होने वाली है गंभीर
    डीलरों का कहना है कि संकट अभी और बढ़ने वाली है जिससे किसान परेशान होने वाले हैं. क्योंकि आगामी बुवाई के सीजन को देखते हुए खेतों में डीजल की मांग बढ़ने वाली है. जबकि तेल कंपनियां नियमों का हवाला देकर ड्रमों में डीजल देने पर सख्त पाबंदी लगा रखी है. ऐसे में किसान अपने बड़े कृषि उपकरणों को बार-बार शहरों के पंप तक नहीं ला सकते और अब हालात गंभीर हो सकते हैं.

    पीएम दौरे और सरकारी रैलियों के उधार लिया गया लाखों का ईंधन
    डीलर्स ने तेल वितरण प्रणाली में पारदर्शिता लाने के लिए तेल डिपो और पेट्रोल पंपों पर आधुनिक 'फ्लोमीटर' लगाने की मांग भी दोहराई है, ताकि हर बूंद का सही हिसाब मिल सके और कमी के लिए केवल डीलर्स को जिम्मेदार न ठहराया जाए. एसोसिएशन ने तेल कंपनियों द्वारा महंगे 'ब्रांडेड फ्यूल' को जबरन बेचने के दबाव और राज्य में चल रहे अवैध बायोडीजल के काले कारोबार पर सरकार की चुप्पी को लेकर भी तीखी नाराजगी जताई है. आर्थिक मोर्चे पर घिरे डीलर्स ने यह मुद्दा भी उठाया है कि प्रधानमंत्री के दौरों और सरकारी रैलियों के दौरान गाड़ियों में जो लाखों रुपये का ईंधन उधार दिया गया था, उसका भुगतान सरकार ने लंबे समय से अटका रखा है, जिससे उन पर वित्तीय दबाव बढ़ गया है.

    मामले की गंभीरता के बावजूद, एसोसिएशन का आरोप है कि शीर्ष नौकरशाही का रवैया बेहद उदासीन बना हुआ है. लगातार ईमेल और पत्र भेजने के बाद भी प्रमुख शासन सचिव स्तर पर कोई बैठक नहीं बुलाई जा रही है और न ही अधिकारी उनके फोन कॉल्स का जवाब दे रहे हैं. अब देखना यह होगा कि क्या मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा इस मामले में खुद हस्तक्षेप कर 1 जून से पहले कोई बीच का रास्ता निकालते हैं, या फिर राजस्थान एक बड़े चक्काजाम और ईंधन संकट की तरफ बढ़ने को मजबूर होगा.

  • गेस्ट फैकल्टी शिक्षकों को मिली बड़ी राहत, 20 साल की सेवा पर हाईकोर्ट ने मांगी नियमित नियुक्ति

    गेस्ट फैकल्टी शिक्षकों को मिली बड़ी राहत, 20 साल की सेवा पर हाईकोर्ट ने मांगी नियमित नियुक्ति

    चंडीगढ़.

    हरियाणा के सरकारी स्कूलों में करीब दो दशक से गेस्ट फैकल्टी शिक्षक और व्याख्याता के तौर पर सेवाएं दे रहे शिक्षकों को पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। जस्टिस संदीप मोदगिल की पीठ ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए राज्य सरकार को निर्देश दिया है कि वर्ष 2014 की नियमितीकरण नीति के तहत याचिकाकर्ताओं की सेवाओं को नियमित किया जाए और उन्हें सभी परिणामी सेवा एवं सेवानिवृत्ति लाभ दिए जाएं।

    मामला सुखविंदर सिंह एवं अन्य द्वारा दायर याचिका से जुड़ा था, जिसमें उन्होंने हरियाणा सरकार की 18 जून 2014 की नियमितीकरण नीति के आधार पर अपनी सेवाएं नियमित करने की मांग की थी।

    याचिकाकर्ताओं ने क्या कहा?
    याचिकाकर्ताओं का कहना था कि उन्हें वर्ष 2005-06 में सरकारी स्कूलों में रिक्त पदों के विरुद्ध गेस्ट फैकल्टी शिक्षक और व्याख्याता के रूप में नियुक्त किया गया था। नियुक्ति प्रक्रिया विज्ञापन जारी करने, चयन समितियों के गठन, आवेदनों की जांच और मेरिट सूची तैयार करने के बाद पूरी की गई थी। राज्य सरकार ने अदालत में दलील दी कि याचिकाकर्ताओं की नियुक्ति केवल अस्थायी व्यवस्था के तौर पर की गई थी और वे नियमित भर्ती प्रक्रिया के तहत नियुक्त नहीं हुए थे, इसलिए वे नियमितीकरण के पात्र नहीं हैं। हालांकि हाई कोर्ट ने इस तर्क को खारिज कर दिया। अदालत ने कहा कि यदि सरकार की दलील स्वीकार कर ली जाए तो नियमितीकरण नीति का उद्देश्य ही समाप्त हो जाएगा, क्योंकि संविदा कर्मचारी स्वाभाविक रूप से नियमित भर्ती प्रक्रिया से बाहर ही नियुक्त होते हैं। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि याचिकाकर्ताओं की नियुक्तियां “बैकडोर एंट्री” या गुप्त तरीके से नहीं हुई थीं, बल्कि सार्वजनिक प्रक्रिया के तहत योग्य उम्मीदवारों का चयन किया गया था।

    हाई कोर्ट ने क्या कहा?
    हाई कोर्ट ने यह भी कहा कि सरकार स्वयं मान चुकी है कि स्कूलों में शिक्षकों की भारी कमी के कारण इन शिक्षकों को नियुक्त किया गया था और लगभग 20 वर्षों तक उनकी सेवाएं लगातार ली जाती रहीं। अदालत ने टिप्पणी की कि यदि इतने लंबे समय तक शिक्षकों की सेवाएं ली गईं तो उन्हें केवल “स्टॉप गैप अरेंजमेंट” बताना पूरी तरह आत्मविरोधी और अनुचित है। कोर्ट ने अपने फैसले में शिक्षकों की भूमिका पर भी विस्तृत टिप्पणी की। अदालत ने कहा कि शिक्षक समाज और राष्ट्र निर्माण की आधारशिला होते हैं तथा उन्हें मनमाने ढंग से “स्पेयर” की तरह इस्तेमाल नहीं किया जा सकता। न्यायालय ने कहा कि लगातार 20 वर्षों तक संविदा पर कार्य लेने के बाद राज्य अब यह नहीं कह सकता कि ये केवल अस्थायी कर्मचारी थे।

    फैसले में सुप्रीम कोर्ट के “मदन सिंह बनाम हरियाणा राज्य” मामले का भी उल्लेख किया गया, जिसमें सर्वोच्च अदालत ने 2014 की नियमितीकरण नीतियों की वैधता को बरकरार रखा था। हाई कोर्ट ने कहा कि अब नीति की वैधता पर विवाद समाप्त हो चुका है और याचिकाकर्ता नीति की शर्तों को पर्याप्त रूप से पूरा करते हैं। अंततः हाई कोर्ट ने याचिका स्वीकार करते हुए हरियाणा सरकार को निर्देश दिया कि दो महीने के भीतर याचिकाकर्ताओं की सेवाओं को नियमित किया जाए और उन्हें सभी सेवा एवं रिटायरल लाभ प्रदान किए जाएं। गेस्ट टीचर एसोसिएशन के नेता रघु वत्स ने बताया कि राज्य में इस समय 12,700 के करीब गेस्ट टीचर लगभग 20 साल से सेवा दे रहे है। कोर्ट के इस फैसले से उनकी वर्षों की लड़ाई सफल रही है और उनको एक टीचर के तौर पर सम्मान मिला है।

     

  • जयपुर को स्वच्छ हेरिटेज शहर बनाने पर जोर, गंदगी पर सीधे जिम्मेदारी तय करेगा हाईकोर्ट

    जयपुर को स्वच्छ हेरिटेज शहर बनाने पर जोर, गंदगी पर सीधे जिम्मेदारी तय करेगा हाईकोर्ट

    जयपुर

    राजस्थान हाईकोर्ट ने शहर की बदहाल सफाई व्यवस्था पर नगर निगम को कड़ी फटकार लगाते हुए बड़ा आदेश जारी किया है. एक्टिंग चीफ जस्टिस संजीव प्रकाश शर्मा और जस्टिस आशुतोष कुमार की खंडपीठ ने साफ कहा कि सफाई कर्मचारियों से दफ्तर के अन्य काम कराने के बजाय सिर्फ सफाई का मूल काम ही लिया जाए. कोर्ट ने चेतावनी दी कि यदि किसी क्षेत्र में गंदगी मिली, तो सीधे संबंधित जमादार और स्वास्थ्य निरीक्षक की जिम्मेदारी तय होगी. इसके साथ ही, जयपुर को अंतरराष्ट्रीय स्तर का हेरिटेज शहर बनाए रखने के लिए कोर्ट ने खुले में कचरा फेंकने वालों पर तुरंत जुर्माना लगाने और पर्याप्त डस्टबिन रखने के निर्देश दिए हैं.

    उचित स्थानों पर डस्टबिन लगाने के निर्देश
    अदालत ने सफाई की एक निश्चित प्रक्रिया तय करने की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि आवासीय कॉलोनियों के निकट उचित स्थानों पर पर्याप्त डस्टबिन लगाए जाएं और उनकी नियमित सफाई की जाए. कोर्ट ने कड़ी चेतावनी दी है कि यदि किसी क्षेत्र में नियमित सफाई नहीं पाई जाती है, तो इसके लिए सीधे तौर पर संबंधित जमादार और
    स्वास्थ्य निरीक्षक की जिम्मेदारी तय की जाएगी.

    खंडपीठ ने याद दिलाया कि जयपुर एक ऐतिहासिक हेरिटेज शहर है और इसे इस तरह साफ रखा जाना चाहिए कि यह राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्वच्छता का एक बेहतरीन उदाहरण पेश कर सके. चूंकि पर्यटन उद्योग राजस्थान का सबसे बड़ा उद्योग है, इसलिए अदालत ने इस तरह के स्वच्छता प्रयासों को प्रदेश के अन्य शहरों में भी लागू करने की आवश्यकता जताई है.

    अतिरिक्त महाधिवक्ता जीएस गिल को मिली दिशा-निर्देश की जिम्मेदारी
    इस संबंध में प्रदेश के सभी नगर निगमों को आवश्यक दिशा-निर्देश देने की जिम्मेदारी अतिरिक्त महाधिवक्ता जीएस गिल को सौंपी गई है. साथ ही, अदालत ने आम शहरवासियों और स्वयंसेवी संगठनों (NGOs) से भी अपनी-अपनी कॉलोनियों को साफ रखने और नगर निगम की मदद करने की अपील की है. सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता विमल चौधरी ने कोर्ट को बताया था कि सालों पहले हाईकोर्ट द्वारा जारी किए गए 16 बिंदुओं के निर्देशों की नगर निगम ने आज तक पालना नहीं की है, जिस पर कड़ा संज्ञान लेते हुए अदालत ने यह नया आदेश पारित किया.

  • अमृतसर पुलिस की बड़ी कार्रवाई, ड्रोन से हथियार मंगाने वाले पांच तस्कर गिरफ्तार

    अमृतसर पुलिस की बड़ी कार्रवाई, ड्रोन से हथियार मंगाने वाले पांच तस्कर गिरफ्तार

    अमृतसर.

    सीमा पार पाकिस्तान से भारत में ड्रोन के जरिए पंजाब में हथियार और नशा पहुंचाने वाले एक बड़े गिरोह को अमृतसर कमिश्नरेट पुलिस ने पकड़ने में सफलता हासिल की है। पुलिस ने कार्रवाई करते हुए पांच आरोपितों को गिरफ्तार किया है। आरोपितों के कब्जे से आठ आधुनिक पिस्तौल और कई जिंदा कारतूस बरामद किए गए हैं।

    शुरुआती जांच में सामने आया है कि यह गिरोह विदेश में बैठे एक तस्कर के संपर्क में था और वर्चुअल नंबरों के जरिए आपस में बातचीत करता था। पुलिस अधिकारियों के अनुसार यह गिरोह सीमा पार से ड्रोन के माध्यम से भेजे गए हथियारों और नशीले पदार्थों की खेप प्राप्त करता था। इसके बाद पंजाब के अलग-अलग इलाकों में सक्रिय अपराधियों और असामाजिक तत्वों तक इनकी सप्लाई की जाती थी। जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि इस नेटवर्क से और कौन-कौन लोग जुड़े हुए हैं तथा पहले कितनी खेप पंजाब में पहुंचाई जा चुकी है।कमिश्नरेट पुलिस ने इस मामले में छेहरटा थाना में मामला दर्ज कर लिया है।

    मोबाइल फोन खोलेगा राज
    डीजीपी पंजाब गौरव यादव की तरफ से साझा की गई जानकारी के अनुसार, गिरफ्तार आरोपितों से पूछताछ जारी है और कई अहम खुलासे होने की संभावना है। जांच टीम आरोपितों के मोबाइल फोन, वर्चुअल नंबर और इंटरनेट आधारित संपर्क माध्यमों की भी गहराई से जांच कर रही है, ताकि पूरे नेटवर्क की कड़ियां जोड़ी जा सकें। पुलिस सूत्रों के मुताबिक सीमा पार बैठे तस्कर लगातार ड्रोन तकनीक का इस्तेमाल कर पंजाब में हथियार और नशा भेजने की कोशिश कर रहे हैं।

    ड्रोन मूवमेंट बनी बड़ी चुनौती
    सुरक्षा एजेंसियों के लिए ड्रोन तकनीक  एक बड़ी चुनौती बनता जा रहा है। हालांकि पंजाब पुलिस लगातार ऐसे नेटवर्क पर कार्रवाई कर रही है और कई मॉड्यूल पहले भी ध्वस्त किए जा चुके हैं। पंजाब पुलिस ने साफ कहा है कि राज्य में नशे, अवैध हथियारों और संगठित अपराध के खिलाफ जीरो टॉलरेंस नीति के तहत कार्रवाई जारी रहेगी। पुलिस अधिकारियों ने दावा किया कि इस कार्रवाई से सीमा पार से संचालित हथियार तस्करी नेटवर्क को बड़ा झटका लगा है। आने वाले दिनों में इस मामले में और गिरफ्तारियां भी हो सकती हैं।