Category: राज्य

  • रेल यात्रियों के लिए जरूरी खबर, पंजाब की 69 ट्रेनें प्रभावित

    रेल यात्रियों के लिए जरूरी खबर, पंजाब की 69 ट्रेनें प्रभावित

    जालंधर.

    अगर आप अगले दो-तीन दिनों में ट्रेन से यात्रा करने की योजना बना रहे हैं या किसी सफर पर निकलने वाले हैं, तो यह खबर आपके लिए बेहद महत्वपूर्ण है। स्टेशन पहुंचने से पहले अपनी ट्रेन का स्टेटस जरूर जांच लें, क्योंकि आपकी ट्रेन रद, डायवर्ट या लेट हो सकती है।

    रेलवे प्रशासन द्वारा साहनेवाल-अमृतसर रेल सेक्शन में लूप लाइन के निर्माण कार्य को लेकर तीन दिनों का मेगा ब्लॉक लिया गया है। इस वजह से 25 सितंबर से 27 सितंबर तक कुल 69 रेल गाड़ियों का आवागमन प्रभावित रहेगा। रेलवे अधिकारियों से मिली जानकारी के अनुसार, निर्माण कार्य में किसी प्रकार की बाधा न आए और सुरक्षा व्यवस्था बनी रहे, इसलिए यह निर्णय लिया गया है।

    वैकल्पिक साधनों का उपयोग
    रेलवे डिवीजन फिरोजपुर की ओर से जारी सार्वजनिक सूचना के अनुसार ट्रेन नंबर 74686 भगतांवाला–पट्टी तथा ट्रेन नंबर 74685 खेमकरण–पट्टी–भगतांवाला की सेवा 27 सितम्बर तक रद्द रहेगी। इस मौके पर रेलवे स्टेशन मास्टर पट्टी अरुण कुमार ने बताया कि रेलवे द्वारा यात्रियों से अपील की गई है कि उक्त अवधि के दौरान अपनी यात्रा की योजना बनाते समय इस जानकारी को ध्यान में रखें कि ट्रेन सेवाएं बंद होने के कारण इस रूट पर यात्रा करने वाले यात्रियों को वैकल्पिक साधनों का उपयोग करना होगा।

    उन्होंने कहा कि पट्टी-खेमकरन रेल यात्रियों के लिए अहम सूचना है कि रेल सेवा 7 दिनों तक बंद रहेगी और पट्टी रूट पर दो ट्रेनें 21 से 27 सितंबर तक कैंसिल कर दी गई हैं। रेलवे विभाग ने यात्रियों को सूचित किया है कि वे ऊपर बताई गई तारीखों में इन ट्रेनों में यात्रा करने की योजना न बनाएं और अपनी यात्रा के लिए दूसरे उपलब्ध साधनों का इस्तेमाल करें। 

  • दीनदयाल जी ने अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति के उत्थान को दी सर्वोच्च प्राथमिकता: मुख्यमंत्री

    दीनदयाल जी ने अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति के उत्थान को दी सर्वोच्च प्राथमिकता: मुख्यमंत्री

    दीनदयाल जी ने अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति के उत्थान को दी सर्वोच्च प्राथमिकता: मुख्यमंत्री

    शुक्रवार को मनाई गई पं. दीनदयाल उपाध्याय की 110वीं जयंती 

    मुख्यमंत्री ने 'अंत्योदय' के प्रणेता पं. दीनदयाल उपाध्याय के चित्र पर किया पुष्पार्चन

    उपाध्याय जी का चिंतन आज भी समावेशी, आत्मनिर्भर एवं विकसित भारत के निर्माण का प्रेरणास्रोत: मुख्यमंत्री

    लखनऊ
     'अंत्योदय' के प्रणेता पं. दीनदयाल उपाध्याय की 110वीं जयंती शुक्रवार को मनाई गई। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने सरकारी आवास पर उनके चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर श्रद्धा निवेदित की। 

    मुख्यमंत्री ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट 'एक्स' पर पोस्ट कर पं. दीनदयाल उपाध्याय के व्यक्तित्व व कृतित्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने लिखा कि 'एकात्म मानववाद' एवं 'अंत्योदय' के प्रणेता, प्रखर राष्ट्रचिंतक एवं भारतीय जनसंघ के संस्थापक सदस्य, श्रद्धेय पंडित दीनदयाल उपाध्याय जी की जयंती पर विनम्र श्रद्धांजलि।

    पंडित दीनदयाल उपाध्याय ने भारतीय संस्कृति और जीवन मूल्यों पर आधारित विकास की ऐसी अवधारणा प्रस्तुत की, जिसमें समाज के अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति के उत्थान को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई। मुख्यमंत्री ने पं. दीनदयाल उपाध्याय के चिंतन को आज भी समावेशी, आत्मनिर्भर एवं विकसित भारत के निर्माण का प्रेरणास्रोत बताया।

  • नवंबर में खुलेगा आधुनिक नक्षत्रशाला, CM योगी देखेंगे पहला शो; जानें खासियतें

    नवंबर में खुलेगा आधुनिक नक्षत्रशाला, CM योगी देखेंगे पहला शो; जानें खासियतें

    गोरखपुर
     महंत अवेद्यनाथ ज्ञान-विज्ञान पार्क और वीर बहादुर सिंह नक्षत्रशाला के पुनरुद्धार का काम पूरा होने के बाद अब उद्घाटन की तैयारियां तेज हो गई हैं। नवंबर के पहले सप्ताह में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के हाथों नक्षत्रशाला के उद्घाटन की तैयारी है।

    उद्घाटन अवसर पर मुख्यमंत्री नक्षत्रशाला का पहला शो भी देखेंगे। इससे पहले गुरुवार को विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री अनिल कुमार ने दोनों परियोजनाओं का स्थलीय निरीक्षण कर कार्यदायी संस्था गोरखपुर विकास प्राधिकरण (जीडीए) और निर्माण में लगी तीनों फर्मों को तय समय में काम पूरा करने के निर्देश दिए।मंत्री ने स्पष्ट किया कि निर्धारित अवधि में सभी कार्य पूरे होने चाहिए, गुणवत्ता से किसी तरह का समझौता नहीं होना चाहिए।

    महंत अवेद्यनाथ ज्ञान-विज्ञान पार्क के निर्माण पर 18.60 करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं। मंत्री ने प्रमुख सचिव विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी पंधारी यादव और विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद उत्तर प्रदेश के निदेशक-सचिव रमेश चंद्र के साथ पार्क के विभिन्न हिस्सों का निरीक्षण किया।

    उन्होंने एन्सिएंट इंडियन साइंस गैलरी, इनोवेशन लैब, फन साइंस और स्पेस साइंस गैलरी के निर्माण की प्रगति देखी। इसके अलावा आउटडोर साइंस माडल, एंट्रेंस प्लाजा, कैफेटेरिया, पाथवे, ओपन एयर थिएटर, बस पार्किंग और डायनोटोरियम के माडल स्थापना कार्य का भी जायजा लिया।

    मंत्री ने एस्ट्रोनामी एंड इंडियन स्पेस प्रोग्राम गैलरी तथा एल्युमिनियम डोम की स्थापना की प्रगति भी देखी। कहा कि पार्क में इंटरैक्टिव साइंस माडल और आधुनिक वैज्ञानिक प्रदर्शनियों के माध्यम से विद्यार्थियों में वैज्ञानिक सोच और नवाचार की भावना विकसित करने का प्रयास किया गया है।

    46.88 करोड़ से नक्षत्रशाला का आधुनिकीकरण
    वीर बहादुर सिंह नक्षत्रशाला के आधुनिकीकरण पर 46.88 करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं। निरीक्षण के बाद मंत्री ने जीडीए और निर्माण में लगी मेसर्स चंद्र इवेंट्स एंड प्रोडक्शन प्राइवेट लिमिटेड, मेसर्स खुशी इंटरप्राइजेज तथा मेसर्स इंफोविजन टेक्नोलाजीज प्राइवेट लिमिटेड के प्रतिनिधियों के साथ बैठक की। शेष कार्यों की समीक्षा करते हुए समयसीमा के भीतर उन्हें पूरा करने के निर्देश दिए।

    मंत्री ने कहा कि आधुनिकीकृत नक्षत्रशाला में खगोल एवं अंतरिक्ष विज्ञान को नई तकनीक के माध्यम से सरल और रोचक ढंग से समझने का अवसर मिलेगा। निरीक्षण के दौरान जीडीए उपाध्यक्ष अभिनव गोपाल, मुख्य अभियंता किशन सिंह, सहायक अभियंता राजबहादुर सिंह, नक्षत्रशाला के वैज्ञानिक अधिकारी महादेव पांडेय समेत अन्य अधिकारी मौजूद रहे।

     

  • एक ही ई-कार्ट से केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने किया ट्रेड शो का अवलोकन

    एक ही ई-कार्ट से केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने किया ट्रेड शो का अवलोकन

    यूपी के उत्पादों पर बढ़ा दुनिया का भरोसा, निर्यात दो लाख करोड़ के पार: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ
     
    केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने किया यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो के चौथे संस्करण का शुभारंभ

    एक ही ई-कार्ट से केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने किया ट्रेड शो का अवलोकन
     
    मुख्यमंत्री बोले- जो अपनी जड़ों से जुड़कर दुनिया के साथ कदम से कदम मिलाकर चलता है, दुनिया उसे फॉलो करती है
     
    यूपी में संभावनाओं की कभी कमी नहीं थी, सही माहौल देकर हुनर को बाजार से जोड़ा: मुख्यमंत्री योगी
     
    टैलेंट और ट्रेडिशन को टेक्नोलॉजी से जोड़कर स्थानीय उत्पादों को बनाया ग्लोबल ब्रांड: मुख्यमंत्री योगी
     
    यूपी के उत्पादों की गुणवत्ता, मजबूत सप्लाई चेन और उद्यमियों की विश्वसनीयता पर दुनिया को भरोसा: मुख्यमंत्री योगी
     
    79 उत्पादों को मिला जीआई टैग, 75 और नये उत्पादों के लिए किया गया आवेदन: मुख्यमंत्री योगी
     
    90 देशों से 600 से अधिक बायर्स पहुंचे, डेढ़ लाख बी2बी विजिटर्स के शामिल होने की संभावना

     
     ग्रेटर नोएडा
     उत्तर प्रदेश के परंपरागत हुनर से लेकर आधुनिक मैन्युफैक्चरिंग तक की ताकत शुक्रवार को ग्रेटर नोएडा में दुनिया के सामने दिखी। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो के चौथे संस्करण का शुभारंभ किया। इस बार 90 देशों से 600 से अधिक विदेशी खरीदार पहुंचे हैं, जबकि 2,400 से अधिक एग्जीबिटर्स अपने उत्पादों के साथ ट्रेड शो में हिस्सा ले रहे हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तर प्रदेश के उत्पादों की गुणवत्ता, मजबूत सप्लाई चेन और यहां के उद्यमियों की विश्वसनीयता पर आज पूरी दुनिया को भरोसा है। आज प्रदेश दो लाख करोड़ रुपये से अधिक का निर्यात कर रहा है।
     
    मुख्यमंत्री ने कहा कि चार वर्षों में यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो प्रदेश में तैयार होने वाले उत्पादों को दुनिया के सामने रखने का बड़ा मंच बन गया है। पिछले वर्ष 72 देशों के 550 बायर्स इसमें शामिल हुए थे। इस बार 90 देशों से 600 से अधिक बायर्स पहुंचे हैं और करीब डेढ़ लाख बी2बी विजिटर्स के आयोजन में शामिल होने की संभावना है। यह बढ़ती भागीदारी उत्तर प्रदेश के कारीगरों के हुनर, युवाओं के इनोवेशन, एमएसएमई सेक्टर और अन्नदाता किसानों की मेहनत के प्रति बढ़ते वैश्विक भरोसे को दिखाती है।
     
    मुख्यमंत्री ने कहा कि जो अपनी जड़ों से जुड़कर दुनिया के साथ कदम से कदम मिलाकर चलता है, दुनिया उसे फॉलो करती है। यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो इसका उदाहरण है। यह ट्रेडिशन और टेक्नोलॉजी, हेरिटेज और इनोवेशन के साथ हुनर और बाजार की ताकत को एक साथ देखने का अवसर है।
     
    अमित शाह ने पहचानी थी परंपरागत उद्यमों की ताकत
    मुख्यमंत्री ने अमित शाह को प्रदेश के परंपरागत उद्यमों को नई पहचान देने की सोच का प्रेरणास्रोत बताया। उन्होंने कहा कि वर्ष 2017 में भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष रहते हुए अमित शाह ने उत्तर प्रदेश के लोक कल्याण संकल्प पत्र के निर्माण के दौरान प्रदेश के परंपरागत उद्यमों की ताकत को पहचाना था। उनका मानना था कि जिस दिन उत्तर प्रदेश अपनी इस ताकत को पहचान लेगा, उसे मैन्युफैक्चरिंग के नए हब के रूप में आगे बढ़ने से कोई नहीं रोक पाएगा। सरकार बनने के बाद इसी सोच को वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट के रूप में ब्रांड दिया गया। 
     
    गांव के हुनर को मिला दुनिया का बाजार
    मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तर प्रदेश में संभावनाओं की कभी कमी नहीं थी। जरूरत उस क्षमता को पहचानने, सही माहौल देने और उसे बड़े बाजार तक पहुंचाने की थी। आजादी के बाद दशकों तक कारीगरों को जरूरी संसाधन, सही दिशा, बाजार और मंच नहीं मिला। इसका असर यह हुआ कि नई पीढ़ी अपने पुश्तैनी हुनर से दूर होने लगी। सरकार ने जिलों, गांवों और स्थानीय क्लस्टर में मौजूद हुनर को पहचानकर आगे बढ़ने का अवसर दिया।
     
    उन्होंने कहा कि टैलेंट और ट्रेडिशन को टेक्नोलॉजी से जोड़ा गया। गुणवत्ता, डिजाइन, पैकेजिंग, सर्टिफिकेशन, ब्रांडिंग और मार्केटिंग के जरिए स्थानीय उत्पादों को देश-दुनिया के बाजार के अनुरूप तैयार किया गया। एक्सप्रेसवे, हाईवे, एयरपोर्ट, फ्रेट कॉरिडोर और औद्योगिक ढांचे के विस्तार ने स्थानीय उत्पादों के लिए बड़े बाजार तक पहुंच आसान की है।
     
    79 उत्पादों को जीआई टैग, 75 और कतार में
    मुख्यमंत्री ने बताया कि उत्तर प्रदेश के एमएसएमई क्षेत्र के 79 उत्पादों को जीआई टैग मिल चुका है और 75 नए उत्पादों के लिए आवेदन किया गया है। भदोही के कालीन, मुरादाबाद के पीतल, कन्नौज के इत्र और वाराणसी की सिल्क साड़ियों का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि प्रदेश की सांस्कृतिक विरासत अब करोड़ों रुपये के कारोबार वाले ब्रांड में बदल चुकी है। ओडीओपी, पीएम विश्वकर्मा और विश्वकर्मा श्रम सम्मान जैसी योजनाओं से कारीगरों को प्रशिक्षण, टूलकिट, ऋण, ब्रांडिंग और बाजार से जोड़ा गया है। ट्रेड शो में कारीगर और उद्यमी सीधे ग्लोबल बायर्स तक पहुंच रहे हैं।
     
    छह देशों के पवेलियन, कारोबार के नए रास्ते
    यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो में जापान, वियतनाम, रूस, सिंगापुर, ऑस्ट्रिया और बेलारूस पार्टनर कंट्री के रूप में जुड़े हैं। इनके विशेष पवेलियन भी लगाए गए हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि इन देशों की भागीदारी से द्विपक्षीय व्यापारिक संबंधों को नई ऊंचाई मिलेगी। रणनीतिक साझेदारी, टेक्नोलॉजी ट्रांसफर और ज्वाइंट वेंचर के रास्ते भी खुलेंगे। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में दुनिया के कई बड़े देशों के साथ हुए फ्री ट्रेड एग्रीमेंट का लाभ उठाकर उत्तर प्रदेश अंतरराष्ट्रीय कंपनियों को यहां उत्पादन करने और यहीं से वैश्विक बाजार तक पहुंचने का अवसर दे रहा है।

    एक ही ई-कार्ट से शाह और योगी ने देखा ट्रेड शो
    कार्यक्रम की शुरुआत अमित शाह और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पंडित दीनदयाल उपाध्याय के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर की। मुख्यमंत्री ने अमित शाह को फिरोजाबाद के ओडीओपी के तहत ओपल ग्लास से बनी राधा-कृष्ण की प्रतिमा भेंट की। इसके बाद दोनों नेता ई-कार्ट से ट्रेड शो में लगे स्टॉल देखने पहुंचे। अलग-अलग स्टॉल पर रुककर उत्पाद देखे और उद्यमियों से उनकी जानकारी ली। मुख्यमंत्री ने अमित शाह की मौजूदगी में ‘एक जनपद एक व्यंजन’ ओडीओसी पोर्टल का शुभारंभ भी किया।
     

    एक करोड़ से अधिक एमएसएमई दे रहीं तीन करोड़ से अधिक को रोजगार
    एमएसएमई मंत्री भूपेंद्र चौधरी ने कहा कि यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो उत्तर प्रदेश का ब्रांड बन चुका है। यहां विभिन्न देशों के खरीदारों के साथ बी2बी बैठकें होंगी और प्रदेश के छोटे उत्पादों को ग्लोबल एक्सपोजर मिलेगा। उन्होंने बताया कि प्रदेश में एक करोड़ से अधिक एमएसएमई इकाइयां तीन करोड़ से अधिक लोगों को रोजगार दे रही हैं। कृषि के बाद यह सबसे अधिक रोजगार देने वाला क्षेत्र है। ओडीओपी और विश्वकर्मा श्रम सम्मान योजना के माध्यम से अब तक छह लाख से अधिक हस्तशिल्पियों को प्रशिक्षण और उन्नत टूलकिट का लाभ मिला है। 14 नए ट्रेड जोड़कर अब 25 ट्रेड को प्रशिक्षण और उन्नत टूलकिट से जोड़ा गया है। उद्यमियों को बिना ब्याज और गारंटी के ऋण भी उपलब्ध कराया जा रहा है।
     
    कार्यक्रम में ये गणमान्य रहे मौजूद
    उद्घाटन समारोह में उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक, औद्योगिक विकास मंत्री नन्द गोपाल गुप्ता ‘नन्दी’, एमएसएमई मंत्री भूपेंद्र चौधरी, राज्य मंत्री हंसराज विश्वकर्मा, बृजेश सिंह, सांसद डॉ. महेश शर्मा और सुरेंद्र नागर समेत मंत्री और जनप्रतिनिधि मौजूद रहे। जापान के राजदूत ओनो केईची, भारत में सिंगापुर के उच्चायुक्त सायमन वोंग और बेलारूस के राजदूत मिखाइल कास्को समेत विभिन्न देशों के प्रतिनिधि, विदेशी खरीदार, एग्जीबिटर्स और उद्यमी भी समारोह में शामिल हुए।

  • रामायण से लोककला और काशी की विरासत तक, यूपी में होंगे 3 बड़े कला शिविर

    रामायण से लोककला और काशी की विरासत तक, यूपी में होंगे 3 बड़े कला शिविर

    लखनऊ
    प्रदेश में कला और संस्कृति को नई पीढ़ी से जोड़ने के लिए पर्यटन व संस्कृति विभाग की ओर से अयोध्या, लखनऊ और वाराणसी में तीन बड़े कला आयोजन होंगे।

    अयोध्या में राम और रामायण की सांस्कृतिक परंपरा, लखनऊ में देश की लोक एवं पारंपरिक कला शैलियों और वाराणसी में गंगा-काशी की विरासत को कलाकार अपनी रचनाओं के माध्यम से प्रस्तुत करेंगे। इन आयोजनों में देशभर के वरिष्ठ कलाकारों के साथ युवा कलाकार और कला विद्यार्थी भी हिस्सा लेंगे।

    अयोध्या में 22 से 26 अक्टूबर तक डॉ. राम मनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय के सहयोग से राम की पैड़ी और गुप्तार घाट पर राम, रामायण और अयोध्या राष्ट्रीय कार्यशाला एवं व्याख्यान श्रृंखला होगी। इसमें 25 कलाकार और 10 विशेषज्ञ शामिल होंगे। कार्यशाला में राम, रामायण और अयोध्या की सांस्कृतिक परंपरा को कला के माध्यम से समझने और प्रस्तुत करने पर जोर रहेगा।

    लखनऊ में 18 से 22 नवंबर तक राज्य ललित कला अकादमी की ओर से लोकधारा लोक एवं पारंपरिक कला शिविर आयोजित किया जाएगा। इसमें देश के विभिन्न हिस्सों से करीब 35 से 40 लोक एवं पारंपरिक कला साधक हिस्सा लेंगे।

    लखनऊ और आसपास के संस्थानों के 25 चयनित वरिष्ठ कला विद्यार्थी भी शिविर में शामिल होंगे। शिविर में गोंड, भील, गोदना, पिथौरा, राजस्थानी, कोहबर और मधुबनी जैसी कला शैलियों को एक मंच पर प्रस्तुत किया जाएगा।

    वाराणसी में दिसंबर के दूसरे सप्ताह में गंगा तट पर चार दिवसीय काशी फ्लो अंतरराष्ट्रीय कला शिविर एवं प्रदर्शनी होगी। इसका आयोजन गंगा महासभा और राज्य ललित कला अकादमी के संयुक्त सहयोग से किया जाएगा।

  • झारखंड में पेयजल योजनाओं को लेकर सख्ती, 2 अक्टूबर तक पूरा होगा ये काम

    झारखंड में पेयजल योजनाओं को लेकर सख्ती, 2 अक्टूबर तक पूरा होगा ये काम

    रांची
    पेयजल एवं स्वच्छता विभाग के सचिव अबु इमरान ने गुरुवार को देवघर में संताल परगना प्रमंडल के छह जिलों, देवघर, दुमका, गोड्डा, साहिबगंज, जामताड़ा और पाकुड़ में जल जीवन मिशन के कार्यों की समीक्षा की।

    पेयजल योजनाओं तथा स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) की समीक्षा करते हुए सचिव ने निर्देश दिया कि सभी संबंधित विभाग आपसी समन्वय स्थापित कर समस्याओं का निराकरण करें। उन्होंने विभागीय अधिकारियों को टोल फ्री नंबर हमेशा एक्टिव रखने का निर्देश दिया।

    खनन और बालू उठाव पर पूर्ण रूप से रोक
    सचिव ने कहा कि पेयजल योजनाओं में लापरवाही बरतने वाले संवेदकों पर कार्रवाई होगी। विभागीय सचिव अबू इमरान ने जल जीवन मिशन के तहत दो अक्टूबर को जल अर्पण दिवस के रूप में मनाने और सभी पूर्ण हो चुकी योजनाओं के लिए हर घर जल सर्टिफिकेशन के कार्य को सर्वोच्च प्राथमिकता देने का निर्देश दिया।

    जल स्रोतों की सुरक्षा को देखते हुए उन्होंने इंटेकवेल के आसपास किसी भी प्रकार के खनन और बालू उठाव पर पूर्ण रूप से रोक लगाने का निर्देश अधिकारियों को दिया।

    समीक्षा बैठक के दौरान स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) में ग्रामीण क्षेत्रों को स्वच्छ और सुंदर बनाने के लिए विशेष अभियान चलाने की बात कही गई। सचिव ने शौचालय निर्माण एवं उनकी स्वीकृति की प्रक्रिया में तेजी लाने का निर्देश भी दिया।

     

  • ‘फाइव स्टार रथ में घूम रहे, दलित-पिछड़ों से हाथ नहीं मिलाते’, अखिलेश पर ओमप्रकाश राजभर का हमला

    ‘फाइव स्टार रथ में घूम रहे, दलित-पिछड़ों से हाथ नहीं मिलाते’, अखिलेश पर ओमप्रकाश राजभर का हमला

    ‘दलित-पिछड़ों को अछूत मानते हैं अखिलेश’, ओमप्रकाश राजभर ने सपा की रथयात्रा पर साधा निशाना

    अखिलेश के रथ पर राजभर का तंज- ‘दलित-पिछड़ों को अछूत मानते हैं, सत्ता में जनता स्पेस नहीं देगी’

    ‘फाइव स्टार रथ में घूम रहे, दलित-पिछड़ों से हाथ नहीं मिलाते’, अखिलेश पर ओमप्रकाश राजभर का हमला

    ‘2027 का सपना देखिए, 2032 तक संघर्ष कीजिए’, अखिलेश की रथयात्रा पर राजभर का तीखा तंज

    'संघर्ष के नाम पर लग्जरी का पूरा इंतजाम', अखिलेश की रथयात्रा पर राजभर का तंज

    लखनऊ
    सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश सरकार में कैबिनेट मंत्री ओमप्रकाश राजभर ने समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव की रथयात्रा पर तीखा हमला बोला है। राजभर ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए अखिलेश यादव के रथ को लेकर तंज कसा और दलितों-पिछड़ों से उनके जुड़ाव पर सवाल उठाए।

    'रथ में कितने दलितों-पिछड़ों से हाथ मिलाया?'

    ओमप्रकाश राजभर ने अखिलेश यादव को संबोधित करते हुए लिखा, 'महाराज, आपका रथ तो एकदम फाइव स्टार है। ये बताइए कल रथ में बैठकर कितने दलितों और कितने पिछड़ों से आपने हाथ मिलाया?'उन्होंने आगे तंज कसते हुए लिखा कि अखिलेश यादव दलितों और पिछड़ों से हाथ नहीं मिलाना चाहते और उन्हें अछूत मानते हैं।

    'संघर्ष के नाम पर लग्जरी का पूरा इंतजाम'

    राजभर ने अखिलेश यादव के रथ को लेकर भी निशाना साधा। उन्होंने लिखा कि अखिलेश यादव रथ के नाम पर 'हॉलीवुड वाली वैनिटी वैन' या 'पहियों पर बने फाइव स्टार सुइट' में घूम सकते हैं, लेकिन उत्तर प्रदेश की दलित, अति पिछड़ी और गरीब जनता उन्हें सत्ता में कोई 'स्पेस' नहीं देने वाली।

    उन्होंने आगे लिखा कि उन्होंने अखिलेश यादव को रथयात्रा के दौरान देखा कि वह 'लग्जरी रथ' में सवार थे और हाइड्रोलिक ट्रॉली से निकलकर हाथ हिला रहे थे। राजभर ने इसे लेकर तंज किया कि संघर्ष के नाम पर लग्जरी का पूरा इंतजाम था, लेकिन सत्ता में स्पेस का इंतजाम नहीं हो पा रहा।

    '2027 का सपना देखिए, 2032 तक संघर्ष कीजिए'

    ओमप्रकाश राजभर ने अपनी पोस्ट में अखिलेश यादव के राजनीतिक भविष्य को लेकर भी कटाक्ष किया। उन्होंने लिखा, '2027 का सपना देखिए, 2032 तक संघर्ष कीजिए। उसके बाद भी कुछ होने नहीं वाला है।'

  • 26 साल पुराने मर्डर केस में 5 दोषियों को राहत नहीं

    26 साल पुराने मर्डर केस में 5 दोषियों को राहत नहीं

    चंडीगढ़.

    नारायणगढ़ में करीब 26 वर्ष पहले युवक संजीव कुमार की चाकू से हमला कर हत्या करने के मामले में पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने पांच दोषियों को बड़ी राहत देने से इन्कार करते हुए उनकी उम्रकैद की सजा बरकरार रखी है।

    हालांकि, अदालत ने मृतक के स्वजन की ओर से दायर वह याचिका भी खारिज कर दी, जिसमें दोषियों की उम्रकैद को मृत्युदंड में बदलने की मांग की गई थी। जस्टिस अर्चना पुरी और जस्टिस मनदीप पन्नू की पीठ ने स्पष्ट किया कि मामले की परिस्थितियों को देखते हुए मृत्युदंड देने का आधार नहीं बनता।

    26 साल पुराना है मामला
    मामला 16 सितंबर 2000 का है। अभियोजन के अनुसार संजीव कुमार नारायणगढ़ में खेल देखने के बाद अपने गांव लौट रहा था। हुसैनी रोड पार करते समय उसने देखा कि पांच युवक उसके साथ मारपीट कर रहे थे। गंभीर रूप से घायल संजीव को पहले नारायणगढ़ के सिविल अस्पताल ले जाया गया और वहां से पीजीआइ चंडीगढ़ रेफर किया गया। पीजीआइ में रात करीब 7:45 बजे उसकी मौत हो गई।

  • GIS और रिमोट सेंसिंग से होगा जल प्रबंधन, बिहार में नया निगम करेगा काम

    GIS और रिमोट सेंसिंग से होगा जल प्रबंधन, बिहार में नया निगम करेगा काम

    पटना
     बिहार सरकार के नवगठित बिहार जल संसाधन विकास निगम लिमिटेड को जल परियोजनाओं के साथ राजस्व संग्रह का महत्वपूर्ण आधार बनाने की तैयारी है। निगम गाद प्रबंधन, सतही जल को पेयजल के रूप में उपयोग करने के लिए स्रोत एवं संरचनाओं का विकास और जलस्रोतों के पुनर्स्थापन जैसे काम करेगा। कैबिनेट की मंजूरी के बाद जल संसाधन विभाग ने निगम को सक्रिय करने की प्रक्रिया तेज कर दी है।

    रिवर फ्रंट से भूमि-भवन तक संभालेगा निगम
    निगम को रिवर इंटरलिंकिंग, रिवर फ्रंट डेवलपमेंट और विभागीय भूमि, भवन, निरीक्षण भवन समेत अन्य परिसंपत्तियों के प्रबंधन एवं रखरखाव की जिम्मेदारी भी दी जाएगी

    इन गतिविधियों के जरिए निगम सेवाएं उपलब्ध कराने के साथ आय अर्जित करेगा। लक्ष्य है कि समय के साथ निगम अपने खर्च के लिए खुद राजस्व जुटाने में सक्षम हो।

    DPR से इंजीनियरिंग कंसल्टेंसी तक सेवाएं
    निगम के माध्यम से डीपीआर तैयार करने, इंजीनियरिंग कंसल्टेंसी, परियोजना प्रबंधन, निर्माण और तकनीकी सेवाएं उपलब्ध कराने का प्रविधान किया गया है।

    इन सेवाओं से मिलने वाले राजस्व को निगम की आर्थिक आत्मनिर्भरता से जोड़ा गया है। कंपनी अधिनियम-2013 के तहत गठित होने वाला निगम पूरे बिहार में काम करेगा और आवश्यकता पड़ने पर राज्य के बाहर भी परियोजनाएं ले सकेगा।

    सिंचाई और बाढ़ नियंत्रण से आगे बढ़ेगा दायरा
    निगम सिंचाई, बाढ़ नियंत्रण और जल निकासी जैसे पारंपरिक कार्यों के साथ गैर-पारंपरिक जल परियोजनाओं पर भी काम करेगा। जल परियोजनाओं के सूत्रीकरण, तकनीकी परामर्श और क्रियान्वयन में भी इसकी भूमिका रहेगी।

    जलवायु परिवर्तन और अनियमित वर्षा के बीच जल प्रबंधन को आधुनिक बनाने के उद्देश्य से यह पहल की गई है।

    50 करोड़ रुपये होगी अधिकृत पूंजी
    बिहार जल संसाधन विकास निगम की अधिकृत पूंजी 50 करोड़ रुपये निर्धारित की गई है। शुरुआती स्थापना और संचालन खर्च के लिए राज्य सरकार छह लाख रुपये की सदस्यता पूंजी देगी।

    प्रारंभिक चरण में विभागीय अधिकारियों और कर्मचारियों को प्रतिनियुक्ति या पदस्थापन के जरिए निगम में लगाया जाएगा, जिससे सरकार पर अतिरिक्त वित्तीय भार सीमित रखने की योजना है।

    GIS और रिमोट सेंसिंग से होगा जल प्रबंधन
    निगम में निजी क्षेत्र की तकनीक और विशेषज्ञता का उपयोग किया जाएगा। GIS, रिमोट सेंसिंग और वाटर डाटा एनालिटिक्स जैसी तकनीकों को जल प्रबंधन से जोड़ा जाएगा

    राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय संस्थानों के सहयोग से नए प्रयोगों को बढ़ावा देने की योजना है। निगम का संचालन निदेशक मंडल करेगा, जबकि दैनिक कामकाज की जिम्मेदारी प्रबंध निदेशक पर होगी।

     

  • UPITS से वैश्विक पहचान की ओर बढ़ता उत्तर प्रदेश

    UPITS से वैश्विक पहचान की ओर बढ़ता उत्तर प्रदेश

    यूपीआईटीएस: आत्मविश्वास की वैश्विक यात्रा

    लखनऊ 
    कोई सोच, कोई दृष्टि या विजन की सार्थकता तब है जब वह विचार से निकलकर व्यवहार में आए, संकल्प से निकलकर परिणाम में आए और संभावना से निकलकर सामर्थ्य में बदल जाए। आज जब हम उत्तर प्रदेश इंटरनेशनल ट्रेड शो (यूपीआईटीएस) के चौथे संस्करण को साकार रूप में देखते हैं तो इसकी सार्थकता को भी स्वीकार करना होगा। यह इस बात का प्रतीक है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने ‘वोकल फॉर लोकल’ और ‘लोकल फॉर ग्लोबल’ के रूप में भारत की स्थानीय शक्ति को वैश्विक पहचान देने का जो विजन रखा, उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उसे एक मिशन के रूप में आगे बढ़ाया।

    योगी ने एमएसएमई की उद्यमशीलता, ओडीओपी की स्थानीय विशिष्टता और स्टार्टअप की नवाचार ऊर्जा को एक सूत्र में पिरोकर प्रदेश के आर्थिक सामर्थ्य को एक नई दिशा दी। ग्रेटर नोएडा में शुरू हो रहा उत्तर प्रदेश इंटरनेशनल ट्रेड शो राज्य की वह यात्रा है, जिसमें एक सरकार अपनी शक्ति को पहचान कर उसे दुनिया के समक्ष रखने जा रही है। यह राज्य के आत्मविश्वास की वैश्विक यात्रा है। 
    कौटिल्य ने लिखा था- ‘कोष मूलो दंडः' अर्थात राज्य की समस्त शक्ति उसके कोष यानी संपदा पर टिकी होती है। संपदा के मूल में व्यापार और उद्यम ही हैं। आज विकास का सूत्र यह है कि राज्य अपनी संपदा को विश्व व्यापार तक पहुंचाने में सक्षम हो। इसी कसौटी पर यूपीआईटीएस का महत्व समझा जाना चाहिए। 25 से 29 सितंबर तक ग्रेटर नोएडा स्थित इंडिया एक्सपो सेंटर एंड मार्ट में इसका चौथा संस्करण होने जा रहा है। इसके पहले तीन संस्करणों को देखें तो पहला संस्करण एक प्रयोग था, दूसरा और तीसरा उस प्रयोग की सफलता की पुष्टि और अब चौथा संस्करण उत्तर प्रदेश पर अंतरराष्ट्रीय व्यापार जगत के भरोसे का प्रतीक है।
     
    प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के ‘लोकल फॉर ग्लोबल’ के आह्वान को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जिस गंभीरता से एक शासकीय मिशन में बदला है,  उसकी शाखाओं में सबसे प्रमुख एमएसएमई का विस्तार है। पिछले नौ सालों में किए गए सरकारी प्रयासों का परिणाम है कि आज प्रदेश की लगभग एक करोड़ एमएसएमई इकाइयां चार करोड़ लोगों को रोजगार दे रही हैं और विश्व बाजार से सीधे जुड़कर उत्तर प्रदेश की आर्थिकी को मजबूत कर रही हैं। ओडीओपी योजना योगी के मिशन की दूसरी और अत्यंत महत्वपूर्ण शाखा है, जिसकी सबसे बड़ी विशेषता यह है कि उसने विकास की कहानी को लखनऊ, नोएडा या कानपुर जैसे बड़े केंद्रों तक सीमित नहीं रखा। उसने 75 जिलों की अपनी-अपनी आर्थिक पहचान को सामने रखा।

    बनारस का वस्त्र, मुरादाबाद का पीतल, भदोही का कालीन, कन्नौज का इत्र, फिरोजाबाद का कांच, सहारनपुर की लकड़ी की नक्काशी, आगरा का फुटवियर और लखनऊ की चिकनकारी, अब ये उत्पाद नहीं, बल्कि उत्तर प्रदेश की आर्थिक और सांस्कृतिक पूंजी हैं। ये वही स्थानीय उद्योग हैं जो एक दशक पहले के परिदृश्य में दम तोड़ते दिखाई देते थे, लेकिन आज वे पूरे गर्व से इंटरनेशनल ट्रेड शो के भागीदार हैं। हर जिले की पहचान को संगठित और वैश्विक ब्रांड में बदलना योगी सरकार के नीतिगत हस्तक्षेप का प्रतिबिंब है। वस्तुतः यह स्वदेशी-चिंतन की अवधारणा का वह विस्तार है, जिसमें सच्ची स्वतंत्रता को गांव की आत्मनिर्भरता से जोड़ा जाता है।

    आंकड़ों की दृष्टि से यूपीआईटीएस की वृद्धि-रेखा स्पष्ट है। 2025 के तीसरे संस्करण में 80 देशों से अंतराष्ट्रीय खरीदार आए थे तो चौथे संस्करण में यह संख्या 85 देशों तक पहुंच चुकी है। यह भी स्वीकार करना आवश्यक है कि स्थानीय उत्पाद को वैश्विक बाज़ार तक पहुंचाना केवल एक प्रदर्शनी-स्थल उपलब्ध कराने भर से पूरा नहीं होता। अंतरराष्ट्रीय व्यापार की अपनी कठोर शर्तें हैं—गुणवत्ता प्रमाणन, पर्यावरणीय व श्रम मानक, वैश्विक आपूर्ति-श्रृंखला में समय पर डिलीवरी की क्षमता, और मुद्रा तथा शुल्क संबंधी जटिलताओं से निपटने की दक्षता। एक कुम्हार या बुनकर, जिसने जीवन भर स्थानीय मंडी के लिए काम किया हो, उसे इन जटिलताओं के लिए तैयार करना आसान नहीं था लेकिन सरकार की दीर्घकालिक, धैर्यपूर्ण और संस्थागत नीतियों ने इसे संभव बनाया।

    ट्रेड शो के आयोजन की संरचना में इसकी गंभीरता झलकती है। यह अब केवल उत्पाद-प्रदर्शनी नहीं रह गया, बल्कि इसमें व्यापारिक संवाद, नीति-गोष्ठियां, बी2बी वार्ताएं और निवेश-समझौतों की प्रक्रिया शामिल है। नीति-निर्माता, उद्योगपति और छोटे उद्यमियों का एक मंच पर आना ही इसकी सबसे बड़ी सार्थकता है। उत्तर प्रदेश ने अपनी आर्थिक नीति में उत्सवधर्मिता से आगे बढ़कर संस्थागत परिपक्वता प्राप्त की है। आने वाले वर्षों में यह आयोजन वास्तविक निर्यात-मूल्य, स्थायी अंतरराष्ट्रीय साझेदारियों और एमएसएमई क्षेत्र की संरचनात्मक क्षमता-वृद्धि में और परिणत होता दिखाई देगा, जो 'लोकल टू ग्लोबल' की मूल सोच है। उत्तर प्रदेश की ‘लोकल’ अवधारणा भी बदल रही है। लोकल का मतलब अब केवल हस्तशिल्प या पारंपरिक उत्पाद नहीं है। किसी जिले का टेक स्टार्टअप भी लोकल है, किसी कस्बे की फूड-प्रोसेसिंग यूनिट भी लोकल है, किसी युवा का एग्रीटेक समाधान भी लोकल है और किसी छोटे शहर की इंजीनियरिंग इकाई भी लोकल है।

    अब बड़ा सवाल है कि उत्तर प्रदेश इंटरनेशनल ट्रेड शो राज्य को वन ट्रिलियन डॉलर इकॉनमी तक ले जाने में कितना सहायक होगा? सबसे पहले तो यह स्पष्ट होना चाहिए कि वन ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने का लक्ष्य केवल एक आर्थिक आंकड़ा मात्र नहीं है। राज्य की निर्यात संवर्धन नीति 2025-30 में भी एक ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था के लक्ष्य को व्यापक आर्थिक परिवर्तन से जोड़ा गया है। इसका सीधा अर्थ है कि ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था केवल बड़े निवेश और बड़े उद्योगों से नहीं बनेगी। उसके लिए प्रदेश के लाखों छोटे उद्यमों को अधिक उत्पादक, अधिक प्रतिस्पर्धी और अधिक निर्यातक्षम बनाना होगा। एक करोड़ के आसपास एमएसएमई इकाइयों और उनसे जुड़े करोड़ों रोजगार की क्षमता को वैश्विक मांग से जोड़ दिया जाए तो यह संख्या अपने आप में एक विशाल आर्थिक शक्ति बन जाती है।

    एमएसएमई, ओडीओपी, स्टार्टअप तथा पहली बार निर्यात करने वालों को वैश्विक बाजार से जोड़ना ही होगा, जो ग्रेटर नोएडा में हो रहे ट्रेड शो के रूप में एक बड़े मंच के रूप में सामने है। यूपीआईटीएस अब सिर्फ व्यापार का मंच नहीं है। यह उस विचार का मंच है जिसमें ओडीओपी स्थानीय पहचान को वैश्विक ब्रांड में बदलता है, एमएसएमई रोजगार को आर्थिक शक्ति में बदलता है और वैश्विक बाजार उत्तर प्रदेश की ट्रिलियन डॉलर की आकांक्षा को गति देने का माध्यम बनता है।

    – हरिशंकर मिश्र, वरिष्ठ पत्रकार