Category: हरियाणा

  • गांव, खेत और विरासत बनेंगे पर्यटन के नए केंद्र, AI गाइड से जुड़ेगा हरियाणा टूरिज्म

    गांव, खेत और विरासत बनेंगे पर्यटन के नए केंद्र, AI गाइड से जुड़ेगा हरियाणा टूरिज्म

    चंडीगढ़
     हरियाणा अब केवल देश के एक हिस्से से दूसरे हिस्से तक जाने का मार्ग नहीं, बल्कि अपने आप में एक आकर्षक पर्यटन गंतव्य बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।

    कुरुक्षेत्र में महाभारत और गीता की विरासत, पिंजौर के ऐतिहासिक उद्यान, सूरजकुंड की समृद्ध शिल्प परंपरा, मोरनी की पहाड़ियां, नारनौल-महेंद्रगढ़ की ऐतिहासिक धरोहर और गांवों की हरियाणवी संस्कृति को एक साथ जोड़कर प्रदेश के पर्यटन को नई पहचान देने की तैयारी है।

    प्रदेश सरकार का प्रयास है कि हरियाणा से पर्यटक केवल गुजरें नहीं, बल्कि यहां रुकें, घूमें, संस्कृति और विरासत को करीब से जानें तथा ऐसे अनुभव लेकर लौटें कि वे दोबारा यहां आने के लिए लालायित रहें। इसी सोच के साथ प्रदेश सरकार का नया संदेश है ‘घूमण आओ, हरियाणा देखो।’

    पर्यटन को होटल और पर्यटन परिसरों तक सीमित रखने के बजाय स्थानीय लोगों, किसानों, शिल्पकारों, गाइड, टैक्सी संचालकों, रेस्तरां और छोटे कारोबारियों से जोड़ने पर जोर है।

    पारंपरिक हाईवे टूरिज्म से आगे बढ़कर विरासत, आध्यात्मिक एवं तीर्थ, इको, एडवेंचर, ग्रामीण एवं फार्म टूरिज्म, होमस्टे, गोल्फ और सांस्कृतिक पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए 20 पर्यटन हब एवं गंतव्य क्षेत्रों की पहचान की गई है।

    विरासत एवं पर्यटन मंत्री डॉ. अरविंद कुमार शर्मा ने बताया कि हरियाणा पर्यटन निगम के पास 42 पर्यटन परिसरों का नेटवर्क है। 42 रेस्टोरेंट, पांच फास्ट फूड सेंटर और 15 पेट्रोल पंप संचालित किए जा रहे हैं।

    पर्यटकों तक सीधी पहुंच बनाने के लिए शहीद भगत सिंह अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा मोहाली के आगमन टर्मिनल पर पर्यटक सूचना एवं सुविधा केंद्र शुरू किया गया है। यहां पर्यटकों को हरियाणा के पर्यटन एवं विरासत स्थलों, आध्यात्मिक केंद्रों, पर्यटन सर्किट, होटल-रिसॉर्ट, मेलों और उत्सवों तथा बुकिंग से संबंधित जानकारी उपलब्ध कराई जा रही है।

    एआई आधारित ‘सरस्वती’ डिजिटल गाइड से पर्यटन को तकनीक का साथ
    पर्यटन क्षेत्र में आधुनिक तकनीक का उपयोग करते हुए एआई आधारित ‘सरस्वती’ डिजिटल गाइड को पर्यटन से जोड़ा गया है। कुरुक्षेत्र को अंतरराष्ट्रीय स्तर के आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित करने के लिए ज्योतिसर में महाभारत अनुभव केंद्र और विराट स्वरूप लाइट एंड साउंड शो तैयार किया गया है।

    सूरजकुंड अंतरराष्ट्रीय शिल्प मेला को वर्षभर सक्रिय सांस्कृतिक केंद्र के रूप में विकसित करने की योजना है। मेला परिसर में विवाह एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित करने तथा सितंबर से दिसंबर के बीच अतिरिक्त मेले के आयोजन का प्रस्ताव है।

    गांव और खेत बनेंगे पर्यटन के नए केंद्र
    ग्रामीण और फार्म टूरिज्म को बढ़ावा देने के लिए 38 फार्म टूरिज्म डेस्टिनेशन और 11 होमस्टे पंजीकृत हैं। इनके माध्यम से पर्यटकों को गांव का जीवन, खेती-किसानी, स्थानीय खान-पान, लोक संस्कृति और हरियाणवी मेहमान नवाजी का अनुभव उपलब्ध कराने की दिशा में काम किया जा रहा है।

    हथिनीकुंड बैराज, टिक्कर ताल और रोहतक की तिल्यार झील को एडवेंचर स्पोर्ट्स हब के रूप में विकसित किया जा रहा है। यहां वाटर स्पोर्ट्स, बोटिंग, बनाना बोट, जेट स्कीइंग और कैंपिंग जैसी गतिविधियों को बढ़ावा दिया जा रहा है। ढोसी की पहाड़ियों पर रोपवे का निर्माण भी प्रगति पर है।

    मेले और उत्सव बनाएंगे वर्षभर पर्यटन का माहौल
    पर्यटन को किसी एक मौसम या आयोजन तक सीमित न रखकर पूरे वर्ष सक्रिय रखने के लिए विभिन्न मेलों और उत्सवों को पर्यटन कैलेंडर से जोड़ा जा रहा है। इनमें सूरजकुंड अंतरराष्ट्रीय शिल्प मेला, बैसाखी उत्सव, पिंजौर आम मेला, तीज उत्सव, सूरजकुंड दीपावली मेला, भक्ति-सूफी उत्सव, अंतरराष्ट्रीय गीता महोत्सव, हरियाणवी संस्कृति उत्सव और खाद्य उत्सव शामिल हैं।

     

  • हरियाणा NMMS छात्रवृत्ति परीक्षा के आवेदन शुरू, 4 साल तक मिलेंगे ₹1000 हर माह

    हरियाणा NMMS छात्रवृत्ति परीक्षा के आवेदन शुरू, 4 साल तक मिलेंगे ₹1000 हर माह

    करनाल
    सरकारी और अनुदान प्राप्त स्कूलों में पढ़ने वाले प्रतिभाशाली, लेकिन आर्थिक रूप से कमजोर छात्रों के लिए बड़ी खबर है। शिक्षा मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा चलाई जा रही राष्ट्रीय साधन-सह-पात्रता छात्रवृत्ति योजना के तहत हरियाणा में इस बार 2337 छात्रों का चयन किया जाएगा।

    चयनित विद्यार्थियों को कक्षा 9वीं से 12वीं तक चार साल तक प्रति माह 1000 रुपये की छात्रवृत्ति दी जाएगी। जो सीधा चयनित विद्यार्थी के खाते में जाएगी। एससीईआरटी गुरुग्राम की ओर से जारी पत्र अनुसार इस परीक्षा के लिए आनलाइन आवेदन 25 सितंबर 2026 से शुरू होंगे और अंतिम तिथि 25 अक्टूबर 2026 निर्धारित की गई है। परीक्षा का आयोजन 29 नवंबर 2026 को किया जाएगा।

    कौन कर सकता आवेदन?
    इस परीक्षा में बैठने के लिए विद्यार्थी का हरियाणा के किसी सरकारी या अनुदान प्राप्त विद्यालय में कक्षा आठवीं में पढ़ना अनिवार्य है। साथ ही उसने सातवीं कक्षा भी सरकारी या अनुदान प्राप्त स्कूल से ही पास की हो। परीक्षार्थी के माता-पिता की सभी स्रोतों से कुल वार्षिक आय 3 लाख 50 हजार रुपये से कम होनी चाहिए। विद्यार्थी का नाम और जन्मतिथि आधार कार्ड के अनुसार तथा आरक्षित श्रेणी का प्रमाण पत्र स्कूल रिकार्ड के अनुसार होना जरूरी है।

    आरक्षण और जिला-वार कोटा
    इस परीक्षा में जिला स्तर पर मेरिट के अनुसार कोटे के हिसाब से चयन होगा। इसमें बीसी-ए वर्ग को 16 प्रतिशत, बीसी-बी को 11 प्रतिशत, एससी को 20 प्रतिशत और दिव्यांग वर्ग को 3 प्रतिशत आरक्षण दिया गया है।

    शेष सीटें सामान्य वर्ग के लिए हैं। जिला-वार कोटे में यमुनानगर सबसे आगे है, जहां 271 छात्रों का चयन होगा। इसमें 136 सामान्य, 43 बीसी-ए, 30 बीसी-बी, 20 एससी के साथ अन्य वर्ग शामिल हैं।

    इसके बाद हिसार में 170, गुरुग्राम में 134, कैथल व कुरुक्षेत्र में 132-132 और करनाल में 127 का कोटा है। वहीं, सबसे कम कोटा फरीदाबाद में 32, पंचकूला में 54 और चरखी दादरी में 58 है।

    अंबाला में 104, भिवानी में 100, फतेहाबाद में 106, रोहतक में 100, सोनीपत में 105 और सिरसा में 107 छात्रों का चयन किया जाएगा। कुल 2337 में से 1167 सामान्य, 373 बीसी-ए, 260 बीसी-बी, 360 एससी, 467 पीएच और 70 दिव्यांग कोटे में चयनित होंगे।

    इच्छुक विद्यार्थी आनलाइन करें आवेदन
    डीएमएस सुमित मान ने बताया कि इच्छुक छात्र हरियाणा विद्यालय शिक्षा बोर्ड की वेबसाइट बीएसईएच.ओआरजी.इन तथा एससीईआरटी की वेबसाइट एससीईआरटीएचएआरवाईएएनए.जीओवी.आइएन पर आनलाइन आवेदन कर सकते हैं।

    आरक्षित वर्ग के छात्रों को सक्षम अधिकारी द्वारा जारी प्रमाण पत्र की छायाप्रति भी अपलोड करनी होगी। विस्तृत जानकारी विवरण पुस्तिका में उपलब्ध है। अधिक जानकारी के लिए हेल्पलाइन नंबर 0124-4066243 पर संपर्क किया जा सकता है।

  • हरियाणा के आश्रम में नाबालिग से दुष्कर्म का आरोप, पुलिस ने आरोपी को पकड़ा

    हरियाणा के आश्रम में नाबालिग से दुष्कर्म का आरोप, पुलिस ने आरोपी को पकड़ा

     गोहाना
    सोनीपत के गांव धनाना स्थित सतलोक आश्रम में पिता के साथ सेवा करने आए 11 वर्षीय बच्चे के साथ कुकर्म का मामला सामने आया है।

    जिला बाल कल्याण समिति और पुलिस की टीम पहुंची। बच्चे की काउंसलिंग कराई गई और उसे मेडिकल परीक्षण के लिए भगत फूल सिंह राजकीय महिला मेडिकल कालेज के अस्पताल ले जाया गया।

    बच्चे के पिता ने मेडिकल परीक्षण से किया मना
    वहां पर पिता ने बेटे का मेडिकल परीक्षण कराने से मना कर दिया। बरोदा थाना में केस दर्ज किया गया। इस घटना को लेकर समिति की अध्यक्ष समेत सभी सदस्यों और पुलिस ने चुप्पी साध रखी है।

    जानकारी के अनुसार कुछ दिन पहले उत्तर प्रदेश का एक व्यक्ति अपने दो बच्चों के साथ आश्रम में सेवा करने के लिए आया था। आरोप है कि 22-23 सितंबर की रात को उसके 11 वर्षीय बच्चे के साथ यह घटना हुई। एक अन्य सेवादार पर दुष्कर्म का आरोप लगा।

    पाक्सो एक्ट के तहत दर्ज हुआ केस
    पुलिस आश्रम गई और बाल कल्याण समिति की टीम भी पहुंची। बच्चे की काउंसलिंग कराई। इसके बाद बच्चे को भगत फूल सिंह राजकीय महिला मेडिकल कालेज के अस्पताल ले जाया गया, जहां पिता ने मेडिकल कराने से इनकार कर दिया।

    पुलिस ने इस मामले में पाक्सो एक्ट सहित संबंधित धाराओं के तहत केस दर्ज किया है। आरोपित सचिन को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। बाल कल्याण समिति की अध्यक्ष अनीता शर्मा व सदस्य संगीता गौड़ ने कुछ कहने से इनकार कर दिया।

    अध्यक्ष शर्मा ने इतना जरूर कहा कि सूचना पर समिति की टीम आश्रम जरूर गई थी। संत रामपाल अप्रैल 2026 में जमानत पर जेल से बाहर आए थे और गांव धनाना स्थित सतलोक आश्रम में रह रहे हैं।

  • बाजरे की कीमत पर सरकार की गारंटी, बाजार भाव कम हुआ तो मिलेगा भावांतर का लाभ

    बाजरे की कीमत पर सरकार की गारंटी, बाजार भाव कम हुआ तो मिलेगा भावांतर का लाभ

    चंडीगढ़
    हरियाणा सरकार इस बार भावांतर भरपाई योजना के तहत बाजरा उत्पादक किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) 2900 रुपये प्रति क्विंटल का लाभ देना सुनिश्चित करेगी। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने शुक्रवार को बाजरा और धान खरीद की समीक्षा बैठक में अधिकारियों को इसके लिए आवश्यक प्रबंध करने के निर्देश दिए।

    सरकार बाजरे की खरीद 2300 रुपये प्रति क्विंटल की दर से करेगी। वहीं, खुले बाजार में इससे अधिक भाव मिलने पर किसान अपनी उपज बाजार में बेच सकेंगे और एमएसपी 2900 रुपये तक पहुंचाने के लिए निर्धारित नियमों के अनुसार भावांतर की भरपाई सरकार करेगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि किसानों को बाजरे का 2900 रुपये प्रति क्विंटल का भाव देना सुनिश्चित किया जाएगा।

    उदाहरण के तौर पर यदि किसी किसान को खुले बाजार में बाजरे का भाव 2500 रुपये प्रति क्विंटल मिलता है तो 2900 रुपये के एमएसपी और बिक्री मूल्य के बीच 400 रुपये प्रति क्विंटल के अंतर की भरपाई सरकार की ओर से की जाएगी।

    वहीं, यदि खुले बाजार में भाव 2300 रुपये से कम रहता है तो सरकार 2300 रुपये प्रति क्विंटल की दर से बाजरा खरीदेगी और बाकी छह सौ रुपये प्रति क्विंटल की दर से भाव के अंतर की भरपाई करेगी। बैठक में अधिकारियों ने बताया कि पिछले वर्ष बाजरे की खरीद के लिए सरकार ने पहले 2150 और बाद में 2200 रुपये प्रति क्विंटल की दर निर्धारित की थी। ।

     

  • हांसी में धान खरीद की तैयारी पूरी, 17% तक नमी वाली फसल ही होगी सरकारी खरीद

    हांसी में धान खरीद की तैयारी पूरी, 17% तक नमी वाली फसल ही होगी सरकारी खरीद

    हांसी
     जिले के खेतों में लहलहा रही धान की फसल अब मंडियों की ओर बढ़ने वाली है। इस बार एक लाख 79 हजार 300 एकड़ में धान की बिजाई हुई है। रकबा बढ़ने के कारण हांसी की मुख्य अनाज मंडी और सिसाय सब यार्ड में पिछले वर्षों के मुकाबले अधिक आवक होने की संभावना है।

    खरीफ विपणन सत्र 2026-27 के तहत सरकारी खरीद एक अक्टूबर से शुरू होकर 15 नवंबर तक चलेगी। खरीद की जिम्मेदारी खाद्य एवं आपूर्ति विभाग, हैफेड और हरियाणा वेयरहाउसिंग कारपोरेशन को सौंपी गई है। तीनों एजेंसियां निर्धारित दिनों में धान खरीदेंगी।

    हांसी मंडी में मुख्य रूप से 1509, पीआर और 1121 किस्म का धान पहुंचता है। इनमें पीआर धान को सरकारी एजेंसियां खरीदेंगी, जबकि बासमती श्रेणी की 1509 और 1121 किस्म की खरीद व्यापारी करेंगे। बढ़े हुए रकबे को देखते हुए मंडी प्रशासन के सामने खरीद, तुलाई और समय पर उठान की बड़ी चुनौती रहेगी। किसानों को गेट पास के लिए मंडी के बाहर कतार में खड़ा न होना पड़े, इसके लिए ई-खरीद एप की सुविधा दी गई है। सरकारी खरीद का लाभ लेने के लिए किसान का मेरी फसल-मेरा ब्यौरा पोर्टल पर पंजीकरण होना अनिवार्य रहेगा।

    पंजीकरण नंबर डालकर घर बैठे बनेगा ई-गेट पास
    किसान को मोबाइल में ई-खरीद एप डाउनलोड कर मेरी फसल-मेरा ब्यौरा का पंजीकरण नंबर दर्ज करना होगा। इसके बाद एप पर किसान और उसकी पंजीकृत फसल का पूरा रिकार्ड दिखाई देगा। किसान विभागीय शेड्यूल के अनुसार मंडी में फसल लाने का दिन चुनकर ई-गेट पास तैयार कर सकेगा। मंडी पहुंचने पर क्यूआर कोड स्कैन करने के बाद प्रवेश मिलेगा। एप का इस्तेमाल नहीं करने वाले पंजीकृत किसान मंडी में मोबाइल नंबर बताकर भी गेट पास बनवा सकेंगे। इस व्यवस्था से मंडी के प्रवेश द्वार पर लगने वाली लंबी कतारों से राहत मिलने की उम्मीद है।

    हांसी और सिसाय में तीन एजेंसियां संभालेंगी खरीद
    सरकारी खरीद के लिए हांसी में मुख्य यार्ड और सिसाय में सब यार्ड बनाया गया है। सिसाय केंद्र पर केवल धान खरीदा जाएगा। खाद्य एवं आपूर्ति विभाग, हैफेड और हरियाणा वेयरहाउसिंग कारपोरेशन को निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार खरीद की जिम्मेदारी दी गई है।

    मंडी प्रशासन खरीद एजेंसी और दिन की जानकारी किसानों तक पहुंचाएगा। ढेरी की खरीद से पहले पंजीकरण, गेट पास और गुणवत्ता की जांच होगी। संबंधित विभागों को मंडियों में सफाई, बिजली, पेयजल, तुलाई और उठान की व्यवस्था समय रहते पूरी करने के निर्देश दिए गए हैं।

    धान में 17, बाजरे में 13 प्रतिशत नमी स्वीकार
    किसानों से धान और बाजरे की फसल अच्छी तरह सुखाकर मंडी लाने की अपील की गई है। धान में अधिकतम 17 प्रतिशत और बाजरे में 13 प्रतिशत तक नमी स्वीकार की जाएगी। निर्धारित सीमा से अधिक नमी मिलने पर सरकारी खरीद नहीं होगी और किसान को फसल सुखाकर दोबारा लानी पड़ेगी।

    मंडी में गुणवत्ता की जांच के बाद ही ढेरी खरीद के लिए स्वीकृत होगी। किसानों के लिए अटल कैंटीन में 15 रुपये में भोजन की थाली उपलब्ध रहेगी। मंडी प्रशासन ने स्वच्छ पेयजल और सुलभ शौचालय की व्यवस्था करने का भी दावा किया है।

  • किसानों के खाते में सीधे आएगी सब्सिडी, आवेदन के लिए मेरी फसल-मेरा ब्यौरा पंजीकरण जरूरी

    किसानों के खाते में सीधे आएगी सब्सिडी, आवेदन के लिए मेरी फसल-मेरा ब्यौरा पंजीकरण जरूरी

     चंडीगढ़
     हरियाणा में नए बाग लगाने वाले किसानों को 24 हजार 500 रुपये से लेकर 1.40 लाख रुपये प्रति एकड़ तक अनुदान दिया जाएगा। इसके अलावा सब्जियों, मसालों, फूलों और खुशबूदार पौधों की खेती के लिए भी अलग-अलग दरों के आधार पर आर्थिक सहायता मिलेगी। अनुदान राशि सीधे किसान के बैंक खाते में डाली जाएगी।

    बागवानी विभाग की योजना का लाभ उठाने के लिए किसान का मेरी फसल-मेरा ब्योरा में पंजीकरण और होर्टनेट पर पंजीकरण जरूरी है। फूलों के नए बाग और मसालों की खेती के लिए अधिकतम पांच एकड़ तक आवेदन किया जा सकता है। सब्जियों की खेती के लिए सामान्य वर्ग के किसान पांच एकड़ तक, जबकि अनुसूचित वर्ग के किसान एक एकड़ तक आवेदन कर सकते हैं। फूलों और खुशबूदार पौधों की खेती के लिए भी अधिकतम पांच एकड़ तक पर लाभ दिया जाएगा।

    सब्जियों की खेती पर सामान्य वर्ग के लिए 15 हजार रुपये प्रति एकड़ और अनुसूचित वर्ग के लिए 25 हजार 500 रुपये प्रति एकड़ अनुदान दिया जाएगा। यह सहायता एकीकृत माडल के तहत मल्चिंग, लो-टनल, ड्रिप तथा बांस की स्टेकिंग जैसी व्यवस्थाएं अपनाने पर दी जाएगी।

    इसी तरह मसालों की खेती पर 15 हजार से 30 हजार रुपये प्रति एकड़, फूलों की खेती पर आठ हजार रुपये से 40 हजार रुपये प्रति एकड़ तथा खुशबूदार पौधों की खेती पर आठ हजार रुपये प्रति एकड़ अनुदान दिया जाएगा।
    अनुदान के लिए किसानों को आवेदन और व्यक्तिगत विवरण, मेरी फसल-मेरा ब्योरा पोर्टल पर पंजीकरण, परिवार पहचान-पत्र तथा अपने बैंक खाते का पूरा विवरण देना होगा। बैंक विवरण में खाता संख्या, बैंक का नाम, शाखा और आइएफएससी कोड शामिल हैं। जरूरत होने पर अनुसूचित वर्ग का प्रमाण-पत्र भी प्रस्तुत करना होगा। अधिक जानकारी के लिए किसान जिला उद्यान अधिकारी या टोल फ्री नंबर 1800-180-2021 पर भी संपर्क कर सकते हैं।

  • हरियाणा के बाजरा किसानों को ₹2900 का भाव

    हरियाणा के बाजरा किसानों को ₹2900 का भाव

    चंडीगढ़.

    हरियाणा सरकार इस बार भावांतर भरपाई योजना के तहत बाजरा उत्पादक किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) 2900 रुपये प्रति क्विंटल का लाभ देना सुनिश्चित करेगी।

    मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने शुक्रवार को बाजरा और धान खरीद की समीक्षा बैठक में अधिकारियों को इसके लिए आवश्यक प्रबंध करने के निर्देश दिए। सरकार बाजरे की खरीद 2300 रुपये प्रति क्विंटल की दर से करेगी। वहीं, खुले बाजार में इससे अधिक भाव मिलने पर किसान अपनी उपज बाजार में बेच सकेंगे और एमएसपी 2900 रुपये तक पहुंचाने के लिए निर्धारित नियमों के अनुसार भावांतर की भरपाई सरकार करेगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि किसानों को बाजरे का 2900 रुपये प्रति क्विंटल का भाव देना सुनिश्चित किया जाएगा।

  • न लैब की जरूरत, न रिपोर्ट का इंतजार; दूध में फार्मेलिन बताएगी नई स्ट्रिप

    न लैब की जरूरत, न रिपोर्ट का इंतजार; दूध में फार्मेलिन बताएगी नई स्ट्रिप

     करनाल
    दूध में मिलावट की जांच के लिए अब हर बार नमूना प्रयोगशाला भेजने और रिपोर्ट का इंतजार करने की जरूरत नहीं होगी। राष्ट्रीय डेयरी अनुसंधान संस्थान करनाल ने दूध में फार्मेलिन की मौजूदगी का मौके पर पता लगाने के लिए विकसित पेपर आधारित स्ट्रिप तकनीक के व्यावसायिक उपयोग की दिशा में कदम बढ़ाया है।

    संस्थान ने अहमदाबाद की एवरेस्ट इंस्ट्रूमेंट्स प्राइवेट लिमिटेड के साथ इसके लिए समझौता ज्ञापन किया है। तकनीक में दूध के नमूने में फार्मेलिन होने पर स्ट्रिप के रंग में बदलाव के आधार पर प्राथमिक स्तर पर इसकी पहचान की जा सकती है।

    शुक्रवार को एनडीआरआइ में अयोजित राष्ट्रीय सेमिनार में इस तकनीक का हस्तांतरण किया गया। एनडीआरआइ के शोध के मुताबिक जांच में करीब सात से आठ मिनट का समय लगता है और तकनीक की पहचान सीमा 0.05 प्रतिशत तक बताई गई है।

    स्ट्रिप की न्यूनतम शेल्फ लाइफ छह महीने है। खास बात यह है कि इसके लिए किसी बड़े उपकरण या जटिल प्रयोगशाला व्यवस्था की जरूरत नहीं पड़ती। यही वजह है कि इसे दूध संग्रह केंद्रों, डेयरी प्रतिष्ठानों और उपभोक्ताओं के स्तर पर प्राथमिक जांच के लिए उपयोगी माना जा रहा है।

    दूध की शेल्फ लाइफ बढ़ाने के लिए इस्तेमाल होता है फार्मेलिन
    फार्मेलिन का इस्तेमाल दूध को लंबे समय तक खराब होने से बचाने और उसकी संरक्षण अवधि बढ़ाने के लिए किया जा सकता है, लेकिन खाद्य सुरक्षा के लिहाज से दूध में इसका इस्तेमाल स्वीकार्य नहीं है। ऐसे में इसकी मौके पर पहचान की सुविधा दूध की गुणवत्ता जांच व्यवस्था को मजबूत कर सकती है।

    एनडीआरआइ की तकनीक में दूध की बूंद या नमूने के साथ पेपर स्ट्रिप की प्रतिक्रिया के आधार पर फार्मेलिन की मौजूदगी का संकेत मिलता है। शोध में स्ट्रिप पर अन्य सामान्य मिलावटकारकों की मौजूदगी के बावजूद फार्मेलिन की पहचान प्रभावित नहीं होने की बात सामने आई है। इसका अर्थ है कि जांच केवल प्रयोगशाला तक सीमित न रहकर प्राथमिक स्तर की स्क्रीनिंग में भी इस्तेमाल की जा सकती है।

    दूध में सार्बिटोल की पहचान के लिए पेपर आधारित डिस्क
    संस्थान के निदेशक डॉ. धीर सिंह के अनुसार इस समझौते की एक और खास बात यह है कि 2025 से अब तक एवरेस्ट इंस्ट्रूमेंट्स को एनडीआरआइ की हस्तांतरित होने वाली यह 10वीं तकनीक है।

    इससे पहले संस्थान ने कंपनी को दूध में न्यूट्रलाइजर, यूरिया, ग्लूकोज, हाइड्रोजन पेराक्साइड, माल्टोडेक्सट्रिन, सुक्रोज और सोडियम क्लोराइड की पहचान से जुड़ी स्ट्रिप तकनीकें हस्तांतरित की थीं। इसके अलावा दूध में सार्बिटोल की पहचान के लिए पेपर आधारित डिस्क और पशुओं में सब-क्लिनिकल व क्लिनिकल मास्टाइटिस की शुरुआती पहचान से जुड़ी स्ट्रिप तकनीक भी कंपनी को दी गई थी।

     

  • सोनीपत में जमीन मालिकों को ₹1.28 करोड़ का मुआवजा

    सोनीपत में जमीन मालिकों को ₹1.28 करोड़ का मुआवजा

    सोनीपत.

    हरियाणा में एक्सप्रेसवे और हाईवे की वजह से गांव की तस्वीर बदल रही है. इससे गांव के आसपास भी प्रॉपर्टी के दामों में खासा उछाल देखने को मिल रहा है.ऐसे में जिन जमीनों के दामल छह-सात साल पहले एक करोड़ रुपये प्रति एकड़ के आसपास थे, अब सात से 10 करोड़ रुपये प्रति एकड़ तक कीमत जा पहुंची है.

    गोहाना में 1 करोड़ की जमीन अब 10 करोड़ में-
    हरियाणा में एक्सप्रेसवे और हाईवे की वजह से गांव की तस्वीर बदल रही है. दरअसल, रोहतक-पानीपत हाईवे के साथ हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण (एचएसवीपी)  की ओर से दो सेक्टर विकसित किए जा रहे हैं और इस वजह से आसपास की जमीन के रेट ब़ढ़ गए हैं. अब बाईपास और दो हाईवे के साथ कनेक्टिंग की वजह से नगर, बड़ौता, सिकंदरपुर माजरा और आसपास के गांवों की जमीन पर प्रापर्टी डीलरों की नजर है. यहां पर दीनदयाल आवासीय क्षेत्र भी विकसित किया जा रहा है. इस वजह से लोग भी जमीन की खरीद फरोख्त में रुचि दिखा रहे हैं. इसके अलावा, पानीपत-रोहतक हाईवे के बाईपास और गोहाना- सोनीपत हाईवे के आसपास एग्रीकल्चर लैंड है. लेकिन हाईवे और बाइपास और सेक्टरों के चलते अब जमीन की कीमतें बढ़ी हैं. क्योंकि प्राइम लोकेशन के तौर पर यह इलाका उभर रहा है. अहम बात है कि रजिस्ट्री के दौरान कीमत कम दिखाई जाती है, लेकिन नकद में कैश लिया जाता है. लोकेशन के अनुसार सात से 10 करोड़ रुपये प्रति एकड़ तक जमीन के रेट पहुंच रहे हैं. हैं। हाईवे से नजदीकी, सड़क की पहुंच और प्रस्तावित शहरी विकास के कारण जमीन के भाव में अंतर है. कुछ जगह हाईवे से दूरी और जमीन की स्थिति के अनुसार भाव कम हैं.

    अवैध कब्जे के भी मामले
    उधर नगर और बड़ौता के क्षेत्र में अवैध प्लाटिंग के मामले सामने आने पर जिला नगर योजनाकार (डीटीपी) विभाग कार्रवाई कर चुका है. कई जगह अवैध रास्तों और निर्माणों पर बुलडोजर भी चलाया गया. क्योंकि लोग जमीन पर इसलिए भी अवैध निर्माण करने की फिराक में हैं, ताकि बाद में उंचे दाम पर खरीदफरोख्त कर सकते हैं.

    क्विक आंसर्स
    हरियाणा के गोहाना क्षेत्र में एक्सप्रेसवे और हाईवे के विकास के कारण छह-सात साल पहले जो जमीनें एक करोड़ रुपये प्रति एकड़ बिकती थीं, उनके दाम अब बढ़कर सात से 10 करोड़ रुपये प्रति एकड़ तक पहुंच गए हैं। रोहतक-पानीपत हाईवे के साथ हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण द्वारा सेक्टरों के विकास, बाईपास निर्माण, दो हाईवे की कनेक्टिविटी और दीनदयाल आवासीय क्षेत्र के विकसित होने से यह इलाका प्राइम लोकेशन बन गया है, जिससे जमीन के दाम बढ़े हैं। जिला नगर योजनाकार विभाग ने नगर और बड़ौता क्षेत्रों में अवैध प्लॉटिंग के मामलों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की है, जिसके तहत बुलडोजर चलाकर अवैध सड़कों और निर्माण कार्यों को गिराया गया है।

  • दूध की मिलावट जांच होगी ऑन-द-स्पॉट, 7 मिनट में रिपोर्ट

    दूध की मिलावट जांच होगी ऑन-द-स्पॉट, 7 मिनट में रिपोर्ट

    करनाल.

    दूध में फॉर्मेलिन जैसे हानिकारक रसायनों की मिलावट की जांच अब आसान बनाने की दिशा में आईसीएआर-राष्ट्रीय डेयरी अनुसंधान संस्थान (एनडीआरआई) ने अहम कदम उठाया है।

    एनडीआरआई ने दूध में फॉर्मेलिन का पता लगाने वाली पेपर आधारित स्ट्रिप तकनीक के व्यावसायिक उपयोग के लिए अहमदाबाद की एवरेस्ट इंस्ट्रूमेंट्स प्राइवेट लिमिटेड के साथ समझौता ज्ञापन (एमओयू) किया है। संस्थान के अनुसार वर्ष 2025 से अब तक कंपनी को हस्तांतरित की जाने वाली यह उसकी 10वीं तकनीक है। यह समझौता सतत एवं जलवायु-अनुकूल डेयरी व खाद्य मूल्य श्रृंखला पर आयोजित 13वें राष्ट्रीय सेमिनार के उद्घाटन सत्र में हुआ। उद्घाटन सत्र में एनडीआरआई निदेशक डॉ. धीर सिंह ने पूर्व छात्रों की सक्रिय भागीदारी के लिए तीन सूत्रीय एजेंडा रखा।

    कार्यक्रम में एनडीआरआई और एनजीएए के बीच अगले पांच वर्षों के लिए संयुक्त शैक्षणिक एवं विकासात्मक गतिविधियों को जारी रखने के एमओयू का नवीनीकरण भी किया गया। वहीं एनजीएए ने नवनिर्मित सेंटर ऑफ एक्सीलेंस इन डेयरी औपचारिक रूप से संस्थान को सौंप दिया। सेमिनार में डायमंड और गोल्डन जुबली बैच के पूर्व छात्रों को परिजनों की मौजूदगी में सम्मानित किया गया।