Category: बिहार

  • बिहार के मौसम में बड़ा बदलाव, अक्टूबर में भी रहेगी गर्मी; जानें कब से बढ़ेगी ठंड और बारिश का पूर्वानुमान

    बिहार के मौसम में बड़ा बदलाव, अक्टूबर में भी रहेगी गर्मी; जानें कब से बढ़ेगी ठंड और बारिश का पूर्वानुमान

    पटना
    मानसून की विदाई के बाद मौसम अब ठंड की ओर बढ़ रहा है, पर इसकी गति धीमी रहने के आसार हैं। अक्टूबर से दिसंबर तक प्रदेश का अधिकतम और न्यूनतम तापमान सामान्य से ऊपर रहने की संभावना है। ऐसे में कड़ाके की ठंड देर से पड़ने की संभावना है।

    मौसम विभाग के अनुसार मानसून के बाद ठंड पर अलनीनो का असर फरवरी तक बने रहने के आसार हैं। वहीं, बंगाल की खाड़ी में सक्रिय पश्चिमी विक्षोभ के प्रभाव से जनवरी-फरवरी में ठंड में वृद्धि के आसार हैं। हालांकि, स्थानीय स्तर पर पश्चिमी विक्षोभ, कोहरा, हवा की दिशा और अचानक मौसम परिवर्तन से कुछ दिनों के लिए तापमान में गिरावट की संभावना व्यक्त की गई है।

    मौसम विज्ञान केंद्र, पटना के अनुसार अक्टूबर के पहले सप्ताह में प्रदेश का अधिकतम तापमान 30-33 डिग्री सेल्सियस के बीच एवं न्यूनतम तापमान 22-24 डिग्री सेल्सियस के बीच रहने की संभावना है। इस दौरान उत्तर पूर्व भागों के एक या दो स्थानों पर हल्की वर्षा, मेघ गर्जन, वज्रपात की भी संभावना है। हवा की गति 30-40 किमी प्रतिघंटा हो सकती है

    मौसम में रहेगी गर्माहट
    दिन का तापमान अधिक रहने से सुबह-शाम की ठंडक के बावजूद मौसम में गर्माहट बने रहने के आसार हैं। मौसम में बदलाव आने के साथ रबी फसलों की बोआई और पैदावार पर भी इसका असर पड़ सकता है। अगले 24 घंटे के दौरान प्रदेश का मौसम शुष्क और सामान्य बना रहेगा। तापमान में विशेष परिवर्तन की संभावना नहीं है।

    मुंगेर में 33 किमी प्रतिघंटा हवा की रफ्तार दर्ज की गई। अगले 48 घंटे के दौरान बिहार-झारखंड, छत्तीसगढ़ व महाराष्ट्र के कुछ हिस्सों से दक्षिण पश्विम मानसून के विदा होने की अनुकूल परिस्थिति बनी हुई है। दक्षिण पूर्व उत्तर प्रदेश और उससे सटे बिहार के ऊपर हवा का चक्रवाती परिसंचरण बना हुआ है। इनके कारण कुछ भागों में बादलों की आवाजाही के साथ मौसम शुष्क और सामान्य बना रहेगा।

    पांच से सात अक्टूबर के दौरान उत्तर व दक्षिण भागों के कुछ स्थानों पर छिटपुट वर्षा की संभावना जताई गई है। गुरुवार को पटना का अधिकतम तापमान 33.0 डिग्री सेल्सियस एवं 36.8 डिग्री सेल्सियस के साथ भभुआ में सर्वाधिक तापमान दर्ज किया गया।

    प्रमुख शहरों का तापमान (डिग्री सेल्सियस में)
    शहर     अधिकतम     न्यूनतम
    पटना     33.0     25.7
    गया     32.6     23.6
    भागलपुर     32.7     24.7
    मुजफ्फरपुर     32.0     25.7

    पटना सहित कई शहरों में अधिक वर्षा
    सितंबर में पटना सहित गया, वाल्मीकि नगर एवं डेहरी में बीते वर्षों के दौरान इस बार झमाझम वर्षा दर्ज की गई।

    वर्ष        मान 1     मान 2     मान 3     मान 4
    2026     277.0     270.1     542.9     285.2
    2025     147.9     202.2     460.2     171.5
    2024     201.9     69.5     493.2     242.4
    2023     188.9     212.4     175.2     169.4
    2022     169.8     117.3     508.8     174.0

  • 100 प्रधानाचार्यों का ओरिएंटेशन कार्यक्रम, CM स्कूलों में CBSE, ICT और कौशल शिक्षा का बनेगा रोडमैप

    100 प्रधानाचार्यों का ओरिएंटेशन कार्यक्रम, CM स्कूलों में CBSE, ICT और कौशल शिक्षा का बनेगा रोडमैप

    रांची
     रांची में एक महत्वपूर्ण कार्यक्रम आयोजित किया गया. झारखंड शिक्षा परियोजना परिषद (जेईपीसी) की ओर से धुर्वा स्थित प्रेक्षागृह में नव चयनित 100 सीएम स्कूल ऑफ एक्सीलेंस (सीएम-एसओई) के प्रधानाध्यापकों और प्राचार्यों के लिए राज्यस्तरीय ओरिएंटेशन कार्यक्रम आयोजित किया गया. इन स्कूलों में अगले सत्र से पढ़ाई शुरू होगी.

    कार्यक्रम में आदर्श विद्यालय योजना के विजन और मिशन को लागू करने, स्कूलों को सीबीएसई से जोड़ने की प्रक्रिया, शैक्षणिक व भौतिक सुविधाओं को बेहतर बनाने और पहले से चल रहे सीएम स्कूलों के अनुभवों पर चर्चा हुई.

    विद्यार्थियों को केंद्र में रखकर अपनाएं शिक्षण पद्धति
    जेईपीसी के स्टेट प्रोजेक्ट डायरेक्टर (एसपीडी) शशि रंजन ने सरकारी स्कूलों को उत्कृष्ट शिक्षण संस्थानों के रूप में विकसित करने की रणनीति की जानकारी दी. उन्होंने नये 100 स्कूलों के प्रधानाध्यापकों और प्राचार्यों से नेतृत्व की जिम्मेदारी लेने, विद्यार्थियों को केंद्र में रखकर शिक्षण पद्धति अपनाने और सीबीएसई संबद्धता के लिए निर्धारित समय सीमा के अनुसार कार्य करने पर जोर दिया.

    CBSE संबद्धता के लिए 90 दिन का एक्शन प्लान
    जेईपीसी के विशेषज्ञों ने स्कूलों के संचालन और विकास से जुड़े विषयों पर कार्ययोजना प्रस्तुत की. पीएमयू के प्रोग्राम स्पेशलिस्ट डॉ मनोहर लाल ने सीबीएसई संबद्धता के लिए जरूरी मानकों, दस्तावेजों और शैक्षणिक मापदंडों की जानकारी दी. उन्होंने तीन माह की कार्ययोजना के तहत चरणबद्ध तरीके से आवश्यक तैयारियां पूरी करने की जानकारी दी.

    मजबूत होगी स्कूलों की आधारभूत संरचना
    सिविल वर्क मैनेजर किरण सिन्हा ने कक्षा-कक्षों के आधुनिकीकरण, सुरक्षा मानकों, चारदीवारी और अन्य संरचनात्मक सुधारों की जानकारी दी. सीएम स्कूल ऑफ एक्सीलेंस के निर्धारित मानकों के अनुरूप आधारभूत संरचना विकसित करने पर जोर दिया गया.

    स्मार्ट क्लास और ICT पर जोर
    एसीपी संजीव कुमार गुप्ता ने स्कूलों में डिजिटल संसाधनों के उपयोग और तकनीक आधारित शिक्षण व्यवस्था की जानकारी दी. स्मार्ट क्लास, ICT लैब, डिजिटल कंटेंट और तकनीक आधारित शिक्षण पद्धति को प्रभावी तरीके से लागू करने की रणनीति बतायी गयी.

    व्यावसायिक शिक्षा और लैब विकसित करने की योजना
    व्यावसायिक शिक्षा के नोडल पदाधिकारी अमित कुमार ने स्कूलों में विशेष व्यावसायिक लैब स्थापित करने और रोजगारोन्मुखी कौशल पाठ्यक्रम शुरू करने की जानकारी दी. इसका उद्देश्य विद्यार्थियों को नियमित शिक्षा के साथ कौशल आधारित शिक्षा उपलब्ध कराना है.

    पुराने सीएम स्कूलों के प्राचार्यों ने साझा किये अनुभव
    कार्यक्रम में पहले से संचालित सीएम स्कूल ऑफ एक्सीलेंस के प्रधानाध्यापकों ने अपने अनुभव साझा किये. उन्होंने स्कूल के विकास के दौरान सामने आयी चुनौतियों, समुदाय की भागीदारी और संस्थागत बदलाव से जुड़े अनुभव नये स्कूलों के प्रधानाध्यापकों के साथ साझा किये.

    जेसी बोस सीएम स्कूल ऑफ एक्सीलेंस, गिरिडीह के प्रधानाध्यापक मुन्ना प्रसाद कुशवाहा, बीपीएम सीएम स्कूल ऑफ एक्सीलेंस, बर्मामाइंस, जमशेदपुर की प्रधानाध्यापिका रंजिता गांधी और जिला सीएम स्कूल ऑफ एक्सीलेंस, लातेहार की प्रधानाध्यापिका तृप्ति भारती ने अपने अनुभव बताये.

    100 प्रधानाध्यापकों ने पूछे सवाल
    कार्यक्रम के दौरान 100 नये सीएम स्कूलों के प्रधानाध्यापकों और प्राचार्यों के साथ संवाद सत्र आयोजित किया गया. इसमें सीबीएसई संबद्धता में आने वाली समस्याओं, प्रशासनिक प्रबंधन, आधारभूत संरचना और कार्यों की समय सीमा से जुड़े सवालों का समाधान किया गया.

    कार्यक्रम के समापन पर जेईपीसी के डिप्टी डायरेक्टर सह सीएम स्कूल ऑफ एक्सीलेंस के नोडल पदाधिकारी आशीष कुमार पांडेय ने संबोधन किया और धन्यवाद ज्ञापन दिया. उन्होंने आदर्श विद्यालय योजना के तहत गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराने को मुख्य उद्देश्य बताते हुए सभी प्रधानाध्यापकों और प्राचार्यों से स्कूलों को बेहतर बनाने की दिशा में पूरी जिम्मेदारी के साथ काम करने का आह्वान किया.

  • 20 साल की ‘जीविका’ ने बदली गांवों की तस्वीर, महिलाओं को मिला रोजगार और आत्मनिर्भरता का रास्ता

    20 साल की ‘जीविका’ ने बदली गांवों की तस्वीर, महिलाओं को मिला रोजगार और आत्मनिर्भरता का रास्ता

    पटना
    वर्ष 2006 में गांधी जयंती पर शुरू हुई ‘जीविका’-बिहार ग्रामीण आजीविका संवर्धन सोसाइटी (बीआरएलपीएस) की पहल शुक्रवार को 20 साल पूरे कर रही है। इस दौरान ग्रामीण महिलाओं ने जीविका समूह से जुड़कर स्वावलंबन की नई कहानी लिखी। दो दशक की इस निरंतर यात्रा ने बिहार के गांवों की तस्वीर बदल दी है।

    घर की चहारदीवारी एवं चूल्हे-चौके तक जो महिलाएं सीमित थीं, वे आज न सिर्फ वित्तीय रूप से सक्षम हुई हैं, बल्कि सामाजिक बदलाव एवं स्थानीय नेतृत्व की धुरी भी बन चुकी हैं

    राज्य में लगभग 11.85 लाख स्वयं सहायता समूह
    विश्व बैंक की सहायता से कुछ जिलों में पायलट प्रोजेक्ट के रूप में शुरू हुआ यह अभियान आज पूरे राज्य में वटवृक्ष बन चुका है। वर्तमान में राज्य में लगभग 11.85 लाख स्वयं सहायता समूह (एसएचजी) संचालित हैं, जिनसे करीब 1.81 करोड़ परिवार जुड़े हैं।

    इसमें भी अनुसूचित जाति व जनजाति के 72 प्रतिशत ग्रामीण परिवारों को सम्मिलित किया गया है। सबसे खास बात यह है कि इन समूहों में 35 प्रतिशत महिलाएं नेतृत्व की भूमिका निभा रही हैं।

    साप्ताहिक बचत आज करीब 2,693 करोड़ रुपये
    महिलाओं की आर्थिक मजबूती के आंकड़े बेहद प्रभावकारी हैं। जीविका दीदियों की साप्ताहिक बचत आज करीब 2,693 करोड़ रुपये तक पहुंच चुकी है। बैंकों से 69,000 करोड़ रुपये से अधिक का संस्थागत ऋण समूहों को उपलब्ध कराया गया है, जिसकी वापसी दर 99 प्रतिशत के आसपास है। इस संस्थागत व्यवस्था ने ग्रामीण इलाकों में साहूकारों और महाजनों के शोषणकारी चक्र को ध्वस्त कर दिया है।

    जीविका ने महिलाओं को कृषि और उद्यमिता के नये आयामों से जोड़ा है। लगभग 42 लाख महिला किसान आधुनिक खेती से जुड़ी हैं और 61 महिला किसान उत्पादक कंपनियां (एफपीसी) करोड़ों का कारोबार कर रही हैं। लखपति दीदी अभियान के तहत लाखों महिलाएं सालाना एक लाख से अधिक कमा रही हैं। इतना ही नहीं, महिलाएं पारंपरिक बंधनों को तोड़कर राज मिस्त्री की तर्ज पर रानी मिस्त्री की प्रसिद्धि बटोर रहीं हैं।

  • अपराध रोकने के लिए बिहार पुलिस का नया प्लान, नाइट स्टे से लेकर ‘गुड मॉर्निंग वॉक’ तक पर जोर

    अपराध रोकने के लिए बिहार पुलिस का नया प्लान, नाइट स्टे से लेकर ‘गुड मॉर्निंग वॉक’ तक पर जोर

    पटना
    राज्य में बेहतर विधि-व्यवस्था और पुलिसिंग को लेकर गुरुवार को गृह विभाग के प्रधान सचिव पंकज कुमार और प्रभारी डीजीपी प्रीता वर्मा ने पुलिस मुख्यालय में वरीय पुलिस अधिकारियों के साथ विस्तृत समीक्षा बैठक की।

    इस दौरान शुक्रवार से सोमवार तक अलग-अलग जिलों में भेजे गए एडीजी से लेकर आइजी-डीआइजी स्तर के 36 पुलिस अफसरों की रिपोर्ट भी साझा की गई।

    समीक्षा बैठक के दौरान बताया गया कि सभी जिलों में संवेदनशील स्थलों को क्राइम स्पाट के रूप में चिह्नित कर अतिरिक्त सतर्कता बरती जा रही है।

    प्रभारी डीजीपी ने सभी जिलों में पर्यटन स्थलों एवं सेल्फी प्वाइंट पर पुलिस की तैनाती बढ़ाते हुए प्रभावी निगरानी के लिए 'सुपर पेट्रोलिंग' की व्यवस्था करने का निर्देश दिया।

    पुलिस महानिदेशक के स्तर से सभी नोडल पदाधिकारियों को थानों में जनसंवाद के लिए बैठक आयोजित करने का निदेश भी दिया गया।

    नारकोटिक्स तथा साइबर क्राइम की रोकथाम को प्राथमिकता देते हुए प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित करने को कहा गया। सीसीटीएनएस, सीसीटीवी, पुलिस कंट्रोल रूम, जिला नियंत्रण कक्ष एवं वायरलेस सिस्टम को सक्रिय एवं प्रभावी रूप से संचालित रखने पर विशेष जोर दिया गया।

    भारत-नेपाल के सीमावर्ती जिलों में नारकोटिक्स गतिविधियों के संबंध में विशेष जानकारी एकत्रित करने तथा आवश्यक कार्रवाई के लिए संबंधित इकाइयों एवं जिलों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने का निर्देश दिया गया।

    किशनगंज पुलिस की गुड मार्निंग वॉक को मिली सराहना
    समीक्षा बैठक के दौरान अपराध नियंत्रण, गश्ती व्यवस्था, नारकोटिक्स एवं साइबर क्राइम की रोकथाम से संबंधित बिंदुओं पर भी चर्चा की गई। इस दौरान किशनगंज पुलिस की ओर से संचालित 'गुड मार्निंग वाक' पहल की सराहना की गई।

    इसमें वरीय पुलिस पदाधिकारियों की तरफ से आमजनों के साथ सुबह भ्रमण कर उनसे संवाद स्थापित किया जाता है। अन्य जिलों को भी स्थानीय स्तर पर इस प्रकार के सकारात्मक पहल संचालित करने के लिए प्रोत्साहित किया गया।

    गृह सचिव की चेतावनी- लापरवाही पर नपेंगे एसडीपीओ-इंस्पेक्टर
    गृह विभाग के प्रधान सचिव ने अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी (एसडीपीओ), अंचल पुलिस निरीक्षक एवं थाना अध्यक्ष (एसएचओ) को अपने-अपने दायित्वों के निर्वहन में किसी भी प्रकार की लापरवाही नहीं बरतने की सख्त हिदायत दी।

    उन्होंने स्पष्ट किया कि कार्यों में लापरवाही पाए जाने पर संबंधित पदाधिकारी के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। बैठक में निर्देश दिया गया कि जिन जिलों से वरीय पदाधिकारियों को टैग किया गया है, वे संबंधित जिलों में रात्रि प्रवास (नाइट स्टे) सुनिश्चित करते हुए पुलिसिंग एवं कानून-व्यवस्था की स्थिति की नियमित समीक्षा करें।

    सभी दोपहिया एवं चारपहिया पुलिस वाहनों को डायल-112 से जोड़ने की दिशा में आवश्यक प्रयास करने का निर्देश दिया गया, ताकि आपातकालीन पुलिस सेवा एवं त्वरित प्रतिक्रिया व्यवस्था को और प्रभावी बनाया जा सके। बैठक में न्यायालय से प्राप्त किसी भी कुर्की आदेश को अनावश्यक रूप से लंबित न रखने का निर्देश दिया गया।

  • खुले में बकरा-मुर्गा बेचने पर लगेगी रोक, झारखंड सरकार ने जारी किए नए रेगुलेशन

    खुले में बकरा-मुर्गा बेचने पर लगेगी रोक, झारखंड सरकार ने जारी किए नए रेगुलेशन

    रांची
    झारखंड हाईकोर्ट में खुले में कटे हुए बकरे और मुर्गे की बिक्री के खिलाफ दायर जनहित याचिका पर गुरुवार को सुनवाई हुई।

    सुनवाई के दौरान सकार की ओर से बताया गया कि झारखंड में मीट दुकानों और स्लाटर हाउस के संचालन को नियंत्रित करने के लिए राज्य सरकार ने नया रूल एवं रेगुलेशन प्रकाशित किया है। सरकार का पक्ष सुनने के बाद अदालत ने जनहित याचिका को निष्पादित कर दी।

    सरकार की ओर से अदालत को बताया गया कि नगर विकास विभाग ने राज्य में संचालित मीट दुकानों और स्लाटर हाउस को रेगुलेट करने के लिए नया रेगुलेशन प्रकाशित किया है।

    इसके तहत सभी मीट दुकानों और स्लाटर हाउस को फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड रेगुलेशन, 2011 तथा प्रिवेंशन आफ क्रुएल्टी टू एनिमल्स (स्लाटर हाउस) रूल्स, 2001 के प्रविधानों का पालन करना होगा।

    नगर निकाय से एनओसी लेना होगा अनिवार्य
    नए रेगुलेशन के तहत प्रत्येक मीट दुकान और स्लाटर हाउस के लिए संबंधित नगर निगम या नगर निकाय से एनओसी लेना अनिवार्य होगा।

    एनओसी जारी करने से पहले संबंधित नगर निगम या नगर निकाय की ओर से मीट दुकान और स्लाटर हाउस का निरीक्षण किया जाएगा। निरीक्षण के बाद निर्धारित मानकों का अनुपालन पाए जाने पर एनओसी की प्रक्रिया पूरी की जाएगी।

    खुले में मीट बिक्री के खिलाफ दायर हुई थी याचिका
    राजधानी रांची सहित पूरे राज्य में दुकानों के बाहर खुलेआम कटे हुए बकरे और मुर्गे की बिक्री किए जाने के खिलाफ प्रार्थी श्यामानंद पांडेय ने झारखंड हाई कोर्ट में जनहित याचिका दायर की थी।

    याचिका में कहा गया था कि रांची शहर सहित राज्य के विभिन्न हिस्सों में मीट विक्रेता खुले में कटे हुए बकरे और चिकन को प्रदर्शित कर बिक्री करते हैं।

    प्रार्थी ने इसे खाद्य सुरक्षा से जुड़े नियमों और सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों के विपरीत बताया था। राज्य सरकार की ओर से नए रेगुलेशन की जानकारी दिए जाने के बाद अदालत ने याचिका को निष्पादित कर दिया।

  • सड़क निर्माण में नदी की गाद का होगा इस्तेमाल, गडकरी ने बिहार की नीति को बताया मॉडल

    सड़क निर्माण में नदी की गाद का होगा इस्तेमाल, गडकरी ने बिहार की नीति को बताया मॉडल

    पटना
    केंद्रीय सड़क, परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने सड़क निर्माण में नदी की गाद (सिल्ट) के उपयोग को लेकर बिहार सरकार द्वारा बनाई गई नीति की सराहना की। उन्होंने कहा कि बिहार की यह नीति पूरे देश के लिए एक मॉडल साबित हो सकती है। इस नीति से सड़क निर्माण में उपलब्ध प्राकृतिक संसाधनों के उपयोग को बढ़ावा मिलेगा और निर्माण कार्यों को अधिक प्रभावी बनाने में मदद मिलेगी।

    मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और नितिन गडकरी ने गुरुवार को लोक सेवक आवास में बिहार में राष्ट्रीय राजमार्गों एवं भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण की विभिन्न परियोजनाओं की प्रगति की समीक्षा की। इस दौरान नितिन गडकरी ने स्पष्ट किया कि निर्माण कार्यों की गुणवत्ता से किसी भी प्रकार का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा। परियोजनाओं की प्रभावी निगरानी के लिए एआई तकनीक का उपयोग किया जा रहा है। निर्धारित मानकों के अनुरूप कार्य नहीं करने वाले संवेदकों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

    उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि सड़क परियोजनाओं को समय सीमा के अंदर तेजी से पूरा करें। बैठक में राज्य में पटना-पूर्णिया ग्रीनफील्ड एक्सप्रेस-वे, गोरखपुर-सिलीगुड़ी एक्सप्रेस-वे, मुजफ्फरपुर-बरौनी फोरलेनिंग, डुमरिया घाट पुल, दरभंगा-सुपौल हाई-वे, खगड़िया-पूर्णिया, मुजफ्फरपुर- सोनबर्षा, एनएच-22 और एनएच- 31 के अनीसाबाद-दीदारगंज खंड में सर्विस रोड के साथ छह लेन एलिवेटेड रोड, दानापुर-बिहटा कॉरिडोर,छह लेन ग्रिनफिल्ड वाराणसी-रांची-कोलकाता हाईवे, पटना रिंग रोड सहित प्रमुख परियोजनाओं पर विस्तृत चर्चा हुई। बैठक में उपमुख्यमंत्री विजय चौधरी, उपमुख्यमंत्री बिजेंद्र प्रसाद यादव, पथ निर्माण मंत्री कुमार शैलेंद्र मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत, आदि मौजूद थे।

    इस दौरान औरंगाबाद एवं अंबा बाईपास के साथ एनएच-139 को फोरलेन बनाने तथा एनएच-333 के बरियारपुर-गंगटा जमुई को फोरलेन करने के लिये डीपीआर बनाने का निर्देश दिया गया।

    सुरक्षित सड़क नेटवर्क के लिए सरकार प्रतबद्ध : मुख्यमंत्री
    बैठक में सीएम ने कहा कि निर्माणाधीन और स्वीकृत सड़क परियोजनाओं के पूरा होने पर संबंधित क्षेत्रों में सड़क संपर्क, आवागमन एवं आर्थिक गतिविधियों को गति मिलेगी। बिहार सरकार राज्य में आधुनिक, सुरक्षित एवं गुणवत्तापूर्ण सड़क नेटवर्क के विकास के लिए प्रतिबद्ध है। राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन से राज्य में आवागमन सुगम होगा तथा व्यापार, पर्यटन, उद्योग और आर्थिक विकास को नई गति मिलेगी।

    मुख्यमंत्री ने बिहार में केंद्र सरकार की परियोजनाओं को तेजी गति से पूरा कराने के लिये प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और नितिन गडकरी के प्रति आभार व्यक्त किया।
    गुरुवार को पटना आए थे गडकरी

    नितिन गडकरी गुरुवार को पटना के एक होटल में बिहार इन्वेस्टर मीट 2026 में बोल रहे थे। गडकरी ने कहा कि आने वाले समय में बिहार की सड़क परियोजनाओं पर केंद्र सरकार सवा तीन लाख करोड़ रुपये खर्च करेगी। 440 किलोमीटर लंबी रामजानकी पथ का निर्माण तेजी से चल रहा है, जो नवंबर 2028 में पूरा होगा। 45 हजार 190 करोड़ की लागत से रक्सौल-हल्दिया एक्सप्रेस-वे का निर्माण किया जा रहा है, जिसमें 400 किलोमीटर का हिस्सा बिहार में है। वाराणसी-कोलकाता एक्सप्रेस-वे का निर्माण चल रहा है।

  • रांची में अनधिकृत कट और अवैध पार्किंग पर सख्ती, सड़क बहाली में लापरवाही पर होगी कार्रवाई

    रांची में अनधिकृत कट और अवैध पार्किंग पर सख्ती, सड़क बहाली में लापरवाही पर होगी कार्रवाई

     रांची
     सड़क पर किसी भी तरह का काम पूरा होने के बाद गड्ढे छोड़ना संबंधित एजेंसी और संवेदक को भारी पड़ेगा। जिला दंडाधिकारी सह उपायुक्त रांची मंजूनाथ भजंत्री ने गेल के अधिकारियों और संबंधित संवेदकों को निर्देश दिया कि कार्य पूरा होते ही सड़क को अनिवार्य रूप से पूर्व स्थिति में लाएं।

    खोदी गई सड़क और बनाए गए गड्ढों को तत्काल भरकर सुरक्षित एवं सुगम आवागमन के अनुरूप सड़क को बहाल करें। सड़क की स्थिति खराब रहने या गड्ढे खुले छोड़ने पर संबंधित एजेंसी की जवाबदेही तय करते हुए नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

    समाहरणालय सभागार में विकास योजनाओं, अतिक्रमण मुक्त शहर, विधि-व्यवस्था और यातायात व्यवस्था को लेकर समीक्षा बैठक हुई। उपायुक्त ने लंबित योजनाओं में तेजी लाने और सभी विभागों को आपसी समन्वय के साथ निर्धारित समय सीमा में गुणवत्तापूर्ण कार्य पूरा करने का निर्देश दिया।

    उन्होंने कहा कि सरकारी योजनाओं का वास्तविक लाभ समय पर आम लोगों तक पहुंचाना जिला प्रशासन की प्राथमिकता है। योजनाओं के क्रियान्वयन में किसी प्रकार की बाधा आने पर संबंधित विभाग आपसी समन्वय से उसका तत्काल समाधान करें। पदाधिकारी अपने-अपने विभागों के कार्यों की नियमित निगरानी करते हुए लंबित मामलों को प्राथमिकता के आधार पर पूरा करें।

    दोबारा अतिक्रमण नहीं हो, नियमित निगरानी करें
    उपायुक्त ने शहरी क्षेत्रों में अतिक्रमण हटाने के बाद संबंधित स्थानों पर दोबारा अतिक्रमण नहीं होने देने का निर्देश दिया। इसके लिए नियमित निगरानी और आवश्यक कार्रवाई करने को कहा गया।

    अनधिकृत कट हटाने का निर्देश
    यातायात व्यवस्था की समीक्षा के दौरान प्रमुख चौक-चौराहों, व्यस्त मार्गों और जाम वाले क्षेत्रों पर विशेष ध्यान देने को कहा गया। प्रमुख मार्गों को चिन्हित कर यातायात में बाधा डालने वाले अनावश्यक और अनधिकृत कट हटाने की कार्रवाई का निर्देश दिया गया। शहर के सभी वार्डों में वेंडर मार्केट के लिए उपयुक्त स्थान चिन्हित करने को कहा गया।

    नगर निगम को संबंधित अंचल अधिकारियों के साथ समन्वय कर कार्रवाई करने का निर्देश दिया गया, ताकि फुटपाथ और सड़क किनारे अनियमित रूप से दुकान लगाने की समस्या को नियंत्रित किया जा सके।

    अवैध पार्किंग और यातायात उल्लंघन पर कार्रवाई
    बैठक में यातायात नियमों का उल्लंघन करने वाले वाहन चालकों के विरुद्ध स्वचालित चालान की व्यवस्था की भी समीक्षा की गई। प्रमुख चौक-चौराहों और व्यस्त मार्गों पर अवैध पार्किंग, सड़क किनारे अनधिकृत कब्जे तथा यातायात नियमों के उल्लंघन पर नियमानुसार कार्रवाई करने का निर्देश दिया गया।

    बेतरतीब केबल पर भी सख्ती
    उपायुक्त ने शहर की सड़कों पर बेतरतीब तरीके से बिछाए गए केबल और विभिन्न एजेंसियों द्वारा काम के बाद सड़क की खराब स्थिति को गंभीरता से लिया। उन्होंने संबंधित पदाधिकारियों को सड़कों पर चल रहे कार्यों की नियमित निगरानी करने तथा काम पूरा होने के बाद सड़क की स्थिति का सत्यापन करने का निर्देश दिया।

    बैठक में रांची नगर निगम के आयुक्त सुशांत गौरव, पुलिस अधीक्षक यातायात राकेश सिंह, अपर नगर आयुक्त संजय कुमार, अनुमंडल पदाधिकारी सदर कुमार रजत, प्रोबेशनर आइएएस आस्था शरण, अपर जिला दंडाधिकारी विधि-व्यवस्था धनंजय, उप समाहर्ता भूमि सुधार मुकेश कुमार, जिला नजारत समाहर्ता सुदेश कुमार, जिला परिवहन पदाधिकारी अखिलेश कुमार सहित विभिन्न विभागों के वरीय पदाधिकारी उपस्थित थे।

  • झारखंड में राजस्व लक्ष्य से पिछड़ा विभाग, सितंबर तक 1564 करोड़ कम हुआ कुल संग्रह

    झारखंड में राजस्व लक्ष्य से पिछड़ा विभाग, सितंबर तक 1564 करोड़ कम हुआ कुल संग्रह

    रांची
     वित्तीय वर्ष के छह माह बीतने के बाद वाणिज्य कर विभाग के माथे पर बल पड़ने लगा है। आंकड़ों को देखें तो राजस्व में उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई है। वाणिज्य कर विभाग द्वारा जारी नवीनतम आंकड़ों के अनुसार, वित्तीय वर्ष 2026-27 के छह महीने बीतने के बाद सितंबर महीने तक कुल राजस्व संग्रह में पिछले वर्ष की तुलना में गिरावट दर्ज की गई है।

    सूचना के अनुसार यह गिरावट लगभग 14 प्रतिशत की है। दूसरी ओर, गैर-जीएसटी मदों में सुधार देखने को मिला है। आंकड़े बताते हैं कि चालू वित्तीय वर्ष में राजस्व संग्रह की गति काफी धीमी रही है। खासकर जीएसटी कलेक्शन में आई गिरावट चिंता का विषय है।

    पिछले वर्ष की तुलना में 1564 करोड़ कम राजस्व संग्रह
    वाणिज्य कर विभाग की रिपोर्ट देखें तो सितंबर 2026 तक कुल संग्रह (जीएसटी एवं गैर जीएसटी) 9,715.35 करोड़ रुपये रहा, जो पिछले वर्ष की समान अवधि (11,279.18 करोड़ रुपये) की तुलना में 13.86% कम है। आंकड़ों के हिसाब से देखें तो राजस्व संग्रह में 1564 करोड़ रुपये से अधिक की कमी आई है।

    राज्य में कुल जीएसटी संग्रह (सेटलमेंट को मिलाते हुए) में भारी गिरावट देखी गई है। सितंबर 2026 तक यह 5,736.25 करोड़ रुपये रहा, जो पिछले वर्ष के 7,405.22 करोड़ रुपये से 22.54% कम है। विशेष रूप से आइजीएसटी सेटलमेंट में 56.98% की भारी गिरावट आई है।

    गैर-जीएसटी में मामूली वृद्धि
    गैर-जीएसटी राजस्व में 2.71% की मामूली वृद्धि हुई है, जो पिछले वर्ष के 3,873.96 करोड़ से बढ़कर 3,979.10 करोड़ रुपये हो गई है। यह वृद्धि मुख्य रूप से वैट संग्रह (13.30% की वृद्धि) के कारण हुई है।

    वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए कुल वार्षिक लक्ष्य 24,000 करोड़ रुपये निर्धारित किया गया है। छह महीने बीतने के बाद सितंबर तक कुल लक्ष्य का केवल 40.48% ही प्राप्त हो पाया है। जीएसटी लक्ष्य (14,563.74 करोड़) का 39.39% और गैर-जीएसटी लक्ष्य (9,436.26 करोड़) का 42.17% हासिल हुआ है।

  • बिहार में बाढ़ का संकट गहराया, गंडक के उफान से हजारों लोग बेघर; राहत-बचाव के लिए हेलीकॉप्टर भी तैनात

    बिहार में बाढ़ का संकट गहराया, गंडक के उफान से हजारों लोग बेघर; राहत-बचाव के लिए हेलीकॉप्टर भी तैनात

    पटना
    गंगा और कोसी की बाढ़ से अभी बिहार उबरा भी नहीं था कि गंडक नदी का कहर बरपा है। गंडक की बाढ़ से पूर्वी व पश्चिम चंपारण, गोपालगंज, सारण और वैशाली जिले के बड़ी संख्या में गांव घिर गए हैं। चार दिनों के भीतर 14 जगहों पर गंडक के तटबंध या बांध टूटने से हालात भयावह है। पटना जिले के दियारा इलाके में भी परेशानी बढ़ गई है। भयावह होती बाढ़ की स्थिति को देखते हुए बाढ़ प्रभावित इलाकों में आपदा राहत बल की 41 टीमें तैनात की गई हैं। राहत व बचाव के लिए एनडीआरएफ की 14 और एसडीआरएफ की 27 टीमें की प्रतिनियुक्ति की गई है।

    सीएम सम्राट चौधरी के निर्देश पर गुरुवार को मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत ने आपदा प्रबंधन विभाग में वीडियो कांफ्रेंसिंग से बाढ़ प्रभावित और संवेदनशील जिलों में संचालित राहत और बचाव कार्य की समीक्षा की। बैठक में पश्चिम चंपारण, पूर्वी चंपारण, गोपालगंज, सारण, वैशाली एवं मुजफ्फरपुर के जिला पदाधिकारी, एसएसपी एवं एसपी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से शामिल हुए। बैठक में आपदा प्रबंधन विभाग के प्रधान सचिव संतोष कुमार मल्ल भी उपस्थित रहे। मुख्य सचिव ने संबंधित डीएम को बाढ़ की स्थिति पर लगातार निगरानी बनाए रखने और प्रभावित क्षेत्रों में राहत एवं बचाव कार्यों को पूरी तत्परता के साथ संचालित करने का निर्देश दिया।

    गंडक का पानी इस बार तेज गति से और भारी मात्रा में प्रवाहित हो रहा है। गंडक, कोसी, बागमती, गंगा की बाढ़ से करीब 1200 गांव प्रभावित हैं। इन गांवों के हजारों लोग घर छोड़़ ऊंचे स्थानों पर शरण लिये हुए हैं। सबसे ज्यादा दिक्कत भोजन, दवाइयां और पशुओं के लिए चारे का है। सारण और गोपालगंज की स्थिति यह है कि प्रभावित परिवार जरूरी सामान लेकर बांध पर पहुंचे हैं। महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों के साथ उन्हें खुले आसमान या प्लास्टिक के टेंट में समय गुजारना पड़ रहा है। घरों में पानी घुसने से घरेलू सामान और जरूरी वस्तुओं को सुरक्षित स्थान तक पहुंचाना भी चुनौती बना हुआ है। ग्रामीणों ने बताया कि पानी बढ़ने के बाद घरों में रहना मुश्किल हो गया।

    राहत सामग्री के वितरण में कोई कोताही न बरतें :सम्राट
    मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने गुरुवार को पटना के श्रीकृष्ण मेमोरियल हॉल में सूखा राशन पैकेजिंग सेंटर का निरीक्षण किया। पैकेजिंग किये जा रहे खाद्य पदार्थों एवं उसकी गुणवत्ता की जानकारी ली। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि राहत सामग्रियों के वितरण में कोताही न बरती जाए। बाढ़ पीड़ितों को समय पर खाद्य पदार्थों के साथ ही सभी जरूरत के सामान मुहैया कराए जाएं। पैकेट में चूड़ा, चना, सत्तू, चीनी, मसाला, ओआरएस, माचिस, मोमबत्ती सहित जरूरत की अन्य सामग्रियों को रखा गया है। एयरफोर्स के दो हेलीकॉप्टर से राहत सामग्री को लोगों के बीच वितरित किया जाएगा।

    बाढ़ की स्थिति गंभीर, तटबंधों पर भी दबाव : विजय चौधरी
    उप मुख्यमंत्री सह जल संसाधन मंत्री विजय कुमार चौधरी ने कहा कि राज्य में बाढ़ की स्थिति गंभीर बनी हुई है। गंडक सहित अन्य नदियों के तटबंधों पर दवाब की स्थिति है। चार-पांच जगह बगहा, लालगंज में नया उच्चतर बाढ़ स्तर बना हुआ है। अब तक के इतिहास में यह सबसे अधिक ऊंचा पानी पहुंचा है। इस कारण तटबंधों पर दबाव है। उन्होंने कहा कि कठिन परिस्थिति के साथ बाढ़ की प्रचंडता बढ़ गई है। तीन-चार दिनों में यूपी और उत्तराखंड में बारिश से गंगा का जलस्तर बढ़ गया है। पटना के गांधी घाट में पानी खतरे के निशान से ऊपर बह रहा है।

  • भारतीय पासपोर्ट कैसे बनवा रहे विदेशी नागरिक? बिहार में 31 अफगानियों का मामला सामने आया

    भारतीय पासपोर्ट कैसे बनवा रहे विदेशी नागरिक? बिहार में 31 अफगानियों का मामला सामने आया

    पटना
     बिहार से पासपोर्ट को लेकर बड़ी खबर सामने आई. पुलिस मुख्यालय के सूत्रों के मुताबिक, 31 अफगानी नागरिकों ने बिहार के अलग-अलग पतों का इस्तेमाल कर भारतीय पासपोर्ट बनवा लिया. इनमें 30 अफगानी नागरिकों के पटना के पते पर पासपोर्ट जारी होने की जानकारी सामने आई है. वहीं एक अफगानी नागरिक ने दरभंगा के पते पर अपना पासपोर्ट बनवाया है. इसके अलावा दो बांग्लादेशी नागरिकों के भी बिहार के पते पर भारतीय पासपोर्ट बनवाए जाने की खबर है। 

    मामला सामने आने के बाद पुलिस मुख्यालय ने जांच शुरू कर दी है. बताया जा रहा है कि विदेश मंत्रालय और गृह मंत्रालय से मिली रिपोर्ट के बाद पुलिस मुख्यालय ने संबंधित जिलों के डीएम और एसएसपी-एसपी को मामले की जांच के निर्देश दिए हैं. अधिकारियों से पूरे मामले की जांच कर विधि सम्मत कार्रवाई करने और उसकी रिपोर्ट पुलिस मुख्यालय को भेजने को कहा गया है। 

    आखिर कैसे जारी हुए पासपोर्ट?
    पुलिस मुख्यालय के स्तर पर सामने आई जानकारी के अनुसार, 30 अफगानी नागरिकों ने पटना के पते का इस्तेमाल कर भारतीय पासपोर्ट बनवाया. वहीं एक मामला दरभंगा जिले से जुड़ा है. जांच का मुख्य बिंदु यह होगा कि इन लोगों ने बिहार का पता किस आधार पर हासिल किया और पासपोर्ट बनवाने के दौरान कौन-कौन से दस्तावेज लगाए गए थे। 

    दो बांग्लादेशी नागरिक भी शामिल
    अफगानी नागरिकों के अलावा दो बांग्लादेशी नागरिकों के भी बिहार के पते पर भारतीय पासपोर्ट बनवाए जाने की सूचना मिली है. पुलिस मुख्यालय ने संबंधित जिलों के अधिकारियों को इन मामलों की भी जांच करने को कहा है. जांच के दौरान पासपोर्ट आवेदन, पते से जुड़े दस्तावेज और संबंधित रिकॉर्ड की पड़ताल की जाएगी। 

    DM और SSP-SP से मांगी गई रिपोर्ट
    विदेश मंत्रालय और गृह मंत्रालय की रिपोर्ट मिलने के बाद पुलिस मुख्यालय ने संबंधित जिलों के डीएम और एसएसपी-एसपी को कार्रवाई के निर्देश दिए हैं. अधिकारियों से मामले की पूरी जांच कर विधि सम्मत कार्रवाई करने और रिपोर्ट पुलिस मुख्यालय को उपलब्ध कराने को कहा गया है. जांच पूरी होने के बाद यह स्पष्ट होगा कि पासपोर्ट बनवाने में किन दस्तावेजों का इस्तेमाल किया गया और प्रक्रिया में कहीं गड़बड़ी हुई या नहीं।