Category: खेल

  • पाकिस्तानी खिलाड़ियों के फोन जब्त होने से मचा बवाल, PCB की कार्रवाई के पीछे क्या है वजह?

    पाकिस्तानी खिलाड़ियों के फोन जब्त होने से मचा बवाल, PCB की कार्रवाई के पीछे क्या है वजह?

     बर्मिंघम

    पाकिस्तानी क्रिकेट टीम का इंग्लैंड दौरा एक और विवाद में घिर गया है. एजबेस्टन में होने वाले सीरीज के तीसरे और आखिरी टेस्ट से पहले पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड (PCB) ने टीम के कुछ खिलाड़ियों के मोबाइल फोन अपने कब्जे में ले लिए. ये फोन आखिरी टेस्ट खत्म होने तक बोर्ड के पास ही रहेंगे. हालांकि किन खिलाड़ियों के फोन लिए गए हैं और बोर्ड ने ऐसा कदम क्यों उठाया, इसे लेकर अभी तक कोई आधिकारिक जानकारी नहीं दी गई है। 

    पाकिस्तानी समाचार चैनल 365 News की रिपोर्ट में दावा किया गया है कि टीम के सदस्यों के मोबाइल फोन पीसीबी को सौंप दिए गए हैं. पीसीबी ने भी अब तक यह स्पष्ट नहीं किया है कि फोन लेना किसी टीम प्रोटोकॉल, अनुशासनात्मक प्रक्रिया या किसी अन्य वजह से जुड़ा है. कहीं ये तो नहीं कि पीसीबी को अब मैच फिक्सिंग का डर सता रहा है। 

    इस घटनाक्रम ने सबसे बड़ा सवाल खिलाड़ियों की निजता को लेकर खड़ा किया है. खास तौर पर यह जानना अहम है कि किसी खिलाड़ी का फोन कितने समय तक अपने पास रखा जा सकता है और किन परिस्थितियों में उसमें मौजूद निजी जानकारी तक पहुंच बनाई जा सकती है। 

    ICC का नियम काफी सख्त
    इंटरनेशनल क्रिकेट में खिलाड़ियों के मोबाइल फोन के इस्तेमाल पर ICC (इंटरनेशनल क्रिकेट काउंसिल) के नियम काफी सख्त हैं. मैच के दौरान ड्रेसिंग रूम समेत प्रतिबंधित क्षेत्रों में खिलाड़ी और सपोर्ट स्टाफ मोबाइल फोन या किसी अन्य कम्युनिकेशन डिवाइस का इस्तेमाल नहीं कर सकते. ऐसे इलाकों में जाने से पहले खिलाड़ियों को अपने फोन सुरक्षित स्थान पर जमा करने होते हैं. इस नियम का मकसद मैच की अखंडता बनाए रखना और खिलाड़ियों या सपोर्ट स्टाफ के अनधिकृत संचार को रोकना है. लेकिन मैच के दौरान फोन रखने पर रोक का मतलब यह नहीं है कि बोर्ड किसी खिलाड़ी का निजी मोबाइल कई दिनों तक अपने पास रखे. दोनों परिस्थितियां अलग-अलग हैं। 

    हालंकि आईसीसी के एंट्री करप्शन कोड में इंटीग्रिटी जांच के दौरान अधिकृत अधिकारियों को फोन से जुड़ी व्यापक जानकारी मांगने का अधिकार है. अगर अधिकारियों के पास उचित आधार हो कि किसी डिवाइस में जांच के लिए जरूरी सामग्री मौजूद है, तो खिलाड़ी से मोबाइल सौंपने या उसमें मौजूद जानकारी उपलब्ध कराने को कहा जा सकता है। 

    ऐसी जांच में फोन के कॉल रिकॉर्ड, इंटरनेट रिकॉर्ड, मैसेज, चैट, फोटो, वीडियो, ऑडियो और दूसरे इलेक्ट्रॉनिक दस्तावेज तक शामिल हो सकते हैं. कुछ परिस्थितियों में खिलाड़ी से फोन का पासवर्ड या एक्सेस कोड भी मांगा जा सकता है. वैध मांग का पालन नहीं करने पर अनुशासनात्मक कार्रवाई का प्रावधान भी है. अभी तक ना तो पीसीबी ने ऐसी किसी जांच की पुष्टि की है और ना ही किसी खिलाड़ी पर सट्टेबाजी, मैच फिक्सिंग या भ्रष्टाचार से जुड़ा आरोप लगाया गया है। 

    आईसीसी के एंटी करप्शन कोड और पीसीबी के अपने अधिकार क्षेत्र में भी अंतर है. पीसीबी के पास खिलाड़ियों के कॉन्ट्रैक्ट, टीम नियमों या आंतरिक अनुशासन व्यवस्था के तहत अलग प्रावधान हो सकते हैं. लेकिन बोर्ड ने फिलहाल यह नहीं बताया है कि आखिर किस नियम के तहत खिलाड़ियों के फोन कब्जे में लिए गए हैं। 

  • भारत के खिलाफ पाकिस्तान का बुरा हाल, सिर्फ 55 रन पर ऑलआउट; नाम हुआ अनचाहा रिकॉर्ड

    भारत के खिलाफ पाकिस्तान का बुरा हाल, सिर्फ 55 रन पर ऑलआउट; नाम हुआ अनचाहा रिकॉर्ड

    दुबई
    दुबई के अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम में भारतीय शेरनियों के सामने पाकिस्तान ने पूरी तरह से सरेंडर कर दिया. श्री चरणी और प्रेमा रावत ने स्पिन जाल का पड़ोसी बल्लेबाजों के खिलाफ कोई जवाब नहीं था. आलम यह था कि टीम के 9 बल्लेबाज दहाई का आंकड़ा भी पार नहीं कर पाए. पाकिस्तान पूरे 20 ओवर भी नहीं खेल पाई और 18.1 ओवर में सिर्फ 55 पर ऑल-आउट हो गई.  इस मुकाबले में निराशाजनक प्रदर्शन के साथ ही पाकिस्तान के नाम शर्मनाक रिकॉर्ड भी दर्ज हो गया है. 55 रन पाकिस्तान का टी20 इंटरनेशनल क्रिकेट में अब तक का न्यूनतम स्कोर है। 

    इससे पहले, साल 2024 में न्यूजीलैंड के खिलाफ पाकिस्तान की पूरी टीम 56 रन बनाकर ऑलआउट हुई थी. जबकि 2009 में टीम इंग्लैंड के खिलाफ 60 के स्कोर पर पूरी टीम सिमट गई थी. भारत के लिए श्री चरणी ने 4 ओवर में 7 रन देकर 3 विकेट झटके, जबकि प्रेमा रावत ने 4 ओवर में 9 रन देकर 3 विकेट निकाले। 

    T20I में PAK-W के सबसे कम ऑल-आउट स्कोर

        55 बनाम भारत दुबई, 2026
        56 बनाम न्यूजीलैंड, दुबई, 2024
        60 बनाम इंग्लैंड, टॉनटन, 2009
        63 बनाम भारत, ग्वांगझू, 2012
        65 बनाम वेस्टइंडीज, सेंट एंड्रयूज, 2011
        72 बनाम श्रीलंका, कोलंबो (NCC), 2018

    महामुकाबले में पाकिस्तान ने टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी करने का फैसला किया, लेकिन टीम की शुरुआत अच्छी नहीं रही. मुनीबा अली और शवाल जुल्फिकार ने पहले विकेट के लिए 27 रन जोड़े. मुनीबा 13 रन बनाकर आउट हुईं, जबकि जुल्फिकार 14 रन के निजी स्कोर पर पवेलियन लौट गईं. इसके बाद पाकिस्तान की बल्लेबाजी बुरी तरह लड़खड़ा गई. गुल फिरोजा बिना खाता खोले आउट हुईं. आयशा जफर सिर्फ 2 रन बना सकीं, जबकि सदाफ शमास 3 रन पर क्लीन बोल्ड हुईं. कप्तान फातिमा सना भी कोई रन नहीं बना पाईं और दीप्ति शर्मा का शिकार बनीं। 

    मध्यक्रम में भी कोई बल्लेबाज ज्यादा देर टिक नहीं सकी. एमान फातिमा ने 5 रन और उम्म-ए-हानी ने 6 रन बनाए. तूबा हसन 9 रन बनाकर पवेलियन लौटीं. टीम की 9 बल्लेबाज दहाई का आंकड़ा तक पार नहीं कर सकीं. और पूरी टीम सिर्फ 55 रन पर सिमट गई। 

    भारत की स्पिन गेंदबाजों ने शानदार प्रदर्शन किया। श्री चरणी ने 4 ओवर में सिर्फ 7 रन देकर 3 विकेट लिए. प्रेमा रावत ने भी 3 बल्लेबाजों को आउट किया और 9 रन दिए. दीप्ति शर्मा ने 3.1 ओवर में केवल 5 रन देकर 2 विकेट झटके. शेफाली वर्मा ने भी 1 विकेट चटकाया. भारतीय टीम ने 56 रनों के लक्ष्य को 8.4 ओवर में 3 विकेट गंवाकर हासिल किया. भारत की ओर से कप्तान हरमनप्रीत कौर 18 और दीप्ति शर्मा 12 रन बनाकर नाबाद रहीं। 

    इतिहास के पन्नों में दर्ज हुआ निराशाजनक रिकॉर्ड
    इस मुकाबले ने पाकिस्तान महिला टीम के टी20 इतिहास के सबसे निराशाजनक अध्यायों को एक बार फिर ताजा कर दिया. पाकिस्तान के महिला टी20 इंटरनेशनल क्रिकेट इतिहास में अब सबसे कम स्कोर के आंकड़े कुछ इस प्रकार दर्ज हो चुके हैं. भारत के खिलाफ 55 रन (18.1 ओवर) का यह स्कोर अब पाकिस्तान का टी20 अंतरराष्ट्रीय में सबसे कम स्कोर बन चुका है. इससे पहले, 14 अक्टूबर 2024 को इसी दुबई के मैदान पर न्यूजीलैंड की महिला टीम के खिलाफ पाकिस्तान की पूरी टीम 11.4 ओवर में केवल 56 रन बनाकर आउट हो गई थी और उन्हें हार का सामना करना पड़ा था। 

    अगर और पीछे जाएं, तो 16 जून 2009 को टॉन्टन के मैदान पर इंग्लैंड महिला टीम के खिलाफ पाकिस्तान की टीम 16.5 ओवर में 60 रन पर सिमट गई थी. इसी तरह, 31 अक्टूबर 2012 को एशियाई खेलों के दौरान गुआंगझू (Guangzhou) में भी भारत के खिलाफ पाकिस्तान की टीम 19.1 ओवर में महज 63 रन पर ऑलआउट हो गई थी. वहीं, 25 सितंबर 2023 को हांग्झू (Hangzhou) में बांग्लादेश की महिला टीम के खिलाफ पाकिस्तान ने पूरे 20 ओवर खेलकर 9 विकेट के नुकसान पर 64 रन बनाए थे। 

  • वैभव सूर्यवंशी रच सकते हैं इतिहास, अफगानिस्तान T20 सीरीज में वर्ल्ड रिकॉर्ड पर नजर

    वैभव सूर्यवंशी रच सकते हैं इतिहास, अफगानिस्तान T20 सीरीज में वर्ल्ड रिकॉर्ड पर नजर

    नई दिल्ली
    भारत और अफगानिस्तान के बीच टी-20 सीरीज का पहला मैच 13 सितंबर को खेला जाएगा. तीन टी-20 मैचों की सीरीज में भारत के 15 साल के युवा सनसनी वैभव सूर्यवंशी के पास एक बड़ा वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाने का मौका होगा. वैभव सूर्यवंशी के पास टी-20 इंटरनेशनल में सबसे कम उम्र में शतक जमाने का मौका होगा. इस समय  यह रिकॉर्ड साउथ अफ्रीका के लुआन ड्रे प्रीटोरियस के नाम है जिन्होंने  नामीबिया के खिलाफ महज 52 गेंदों में शतक ठोककर सबसे कम उम्र में शतक लगाने वाले बल्लेबाज बने,  प्रीटोरियस की उम्र इस समय 20 साल और 161 दिन है. ऐसे में अगर वैभव सूर्यवंशी अफगानिस्तान के खिलाफ शतक लगाने में सफल रहे तो वह टी-20 इंटरनेशनल में सबसे कम उम्र में शतक लगाने वाले बल्लेबाज बन जाएंगे। 

    T20I में सबसे कम उम्र में शतक: (फ़ुल-मेंबर टीमें)

        साउथ अफ्रीका- 20 साल 161 दिन – लुआन-ड्रे प्रेटोरियस बनाम नामीबिया, 2026
        अफगानिस्तान- 20 साल 337 दिन – हज़रतुल्लाह ज़ज़ई बनाम आयरलैंड, 2019
        भारत- 21 साल 279 दिन – यशस्वी जायसवाल बनाम नेपाल, 2023
        जिम्बाब्वे- 21 साल 324 दिन – ब्रायन बेनेट बनाम तंजानिया , 2025
        भारत- 22 साल 5 दिन – तिलक वर्मा बनाम साउथ अफ्रीका, 2024

    बता दें कि हाल ही में वैभव सूर्यवंशी दलीप ट्रॉफी में अर्धशतक जमाने वाले सबसे युवा बल्लेबाज बने थे, ऐसा कर वैभव ने 57 साल पुराना रिकॉर्ड तोड़ा था. जिस अंदाज में वैभव बल्लेबाजी कर रहे हैं. उससे कहीं न कहीं यह उम्मीद जरूर बंधी है कि 15 साल का यह बैटर टी-20 इंटरनेशनल में सबसे कम उम्र में शतक लगाने वाला बल्लेबाज बन सकता है। 

    अबतक वैभव ने 6 टी-20 इंटरनेशनल मैच खेलकर कुल 193 रन बनाए हैं जिसमें उनके नाम दो अर्धशतक दर्ज है. वैभव ने टी-20 इंटरनेशनल में 189.21 के स्ट्राइक रेट के साथ रन बनाने का कमाल कर दिखाया है। 

    टी20 सीरीज का पूरा शेड्यूल

        पहला टी20 मैच: 13 सितंबर 2026 (शाम 7:00 बजे) – अरुण जेटली स्टेडियम, नई दिल्ली 
        दूसरा टी20 मैच: 15 सितंबर 2026 (शाम 7:00 बजे) – अरुण जेटली स्टेडियम, नई दिल्ली
        दूसरा टी20 मैच: 15 सितंबर 2026 (शाम 7:00 बजे) – अरुण जेटली स्टेडियम, नई दिल्ली

  • जैवलिन में भारत का दबदबा, U-18 वर्ल्ड टॉप-5 में 3 भारतीय; कृष्ण चंद्र नंबर-2 पर

    जैवलिन में भारत का दबदबा, U-18 वर्ल्ड टॉप-5 में 3 भारतीय; कृष्ण चंद्र नंबर-2 पर

    नई दिल्ली

    भारत के युवा जैवलिन थ्रोअर्स ने वर्ल्ड लेवल पर अपनी मजबूत छाप छोड़ रहे हैं. नीरज चोपड़ा और रोहित यादव के बाद अब  कृष्ण चंद्र जैसे जैवलिन थ्रोअर अपने परफॉर्मेंस से सबके ध्यान अपनी ओर खींच रहे हैं. हाल ही में भारत में आयोजित यूथ चैंपियनशिप में  कृष्ण चंद्र ने गोल्ड मेडल जीता,  कृष्ण चंद्र ने 79.92 मीटर का थ्रेो किया जिससे वह 2026 में दुनिया के टॉप पांच U18 जैवलिन थ्रोअर में शामिल हो गए हैं. टॉप 5 जैवलिन थ्रोअर में तीन भारतीय एथलीट भी शामिल हैं. भारत के कृष्ण चंद्र जिन्होंने 3 सितंबर को 79.92 मीटर का शानदार थ्रो करके U18 कैटेगरी में वर्ल्ड नंबर 2 का स्थान हासिल किया है। 

    उनसे आगे सिर्फ फिनलैंड के जेरे मुर्टो हैं, जिन्होंने 22 अगस्त को 82.88 मीटर का थ्रो किया था. कृष्ण के इस प्रदर्शन ने 700 ग्राम वाले जैवलिन के साथ एक नया भारतीय U18 रिकॉर्ड भी बनाया, जो उनकी जबरदस्त क्षमता को दिखा रहा है. भारत का दबदबा यहीं खत्म नहीं हुआ हैं. अंडर 19 में पुष्पक नेलवाड़े 76.09 मीटर के साथ तीसरे नंबर पर हैं, जबकि मंजीत कुमार 74.45 मीटर के साथ चौथे नंबर पर अपनी जगह बना पाने में सफल रहे हैं.  इटली के एंटोनियो डि पाल्मा 73.28 मीटर के साथ टॉप पांच में शामिल हैं। 

    दुनिया के टॉप पांच खिलाड़ियों में तीन भारतीयों का होना देश में जैवलिन थ्रो के तेजी से बढ़ते चलन को दिखाता है, यह ट्रेंड नीरज चोपड़ा की इंटरनेशनल लेवल पर मिली सफलता के बाद और तेज़ हुआ है. कृष्ण चंद्र, पुष्पक नेलवाड़े और मंजीत कुमार जैसे होनहार खिलाड़ियों के सामने आने से, पुरुषों के जैवलिन थ्रो में भारत का भविष्य पहले से कहीं ज़्यादा उज्ज्वल दिख रहा है। 

    अंडर 18 में साल 2026 में सबसे दूर भाला फेंकने वाले दुनिया के टॉप 5 जैवलिन थ्रोअर

        जेरे मुर्तो, फिनलैंड- 82.88 22 AUG 2026
        कृष्ण चंद्रा, भारत 79.92 03 SEP 2026
        पुष्पक नेलवाडे, भारत 76.09 03 SEP 2026
        मनजीत कुमार, भारत 74.45 03 SEP 2026
        एंटोनियो डि पाल्मा, इटली, 73.28 18 JUL 2026

    इन सबके अलावा रोहित यादव और यशवीर सिंह  सीनियर लेवल पर नीरज चोपड़ा के बाद अपना परचम लहरा रहे हैं. वहीं, अब एशियन गेम्स में यशवीर सिंह और रोहित यादव नीरज चोपड़ा की जगह भारत के लिए गोल्ड मेडल लाने की कोशिश करेंगे. 

  • जसप्रीत बुमराह के बैकअप के लिए तैयार ये 3 पेसर, कौन मारेगा बाजी?

    जसप्रीत बुमराह के बैकअप के लिए तैयार ये 3 पेसर, कौन मारेगा बाजी?

    नई दिल्ली
    भारतीय क्रिकेट टीम के स्टार तेज गेंदबाज जसप्रीत बुमराह इस समय अपनी इंजरी से उबर रहे हैं और 13 सितंबर से अफगानिस्तान के खिलाफ शुरू हो रही तीन मैचों की T20I सीरीज के लिए उन्हें टीम इंडिया के स्क्वाड में शामिल किया गया है। हालांकि, बुमराह का खेलना पूरी तरह 9 सितंबर को बीसीसीआई के सेंटर ऑफ एक्सीलेंस में होने वाले फिटनेस ट्रायल मैच पर निर्भर करेगा। अगर बुमराह इस फिटनेस टेस्ट में पूरी तरह खरे नहीं उतरते हैं, तो चयनकर्ताओं को उनके बैकअप के रूप में एक मजबूत विकल्प चुनना होगा। ऐसे में आइए जानते हैं कि वे तीन खिलाड़ी कौन हैं जो बुमराह को रिप्लेस कर सकते हैं।

    प्रिंस यादव
    IPL 2026 में अपनी घातक गेंदबाजी और सटीक लाइन-लेंथ से सुर्खियों में आए प्रिंस यादव बुमराह के रिप्लेसमेंट के रूप में सबसे प्रबल दावेदार माने जा रहे हैं। भारत के लिए अब तक खेले 6 T20I मैचों में 9 विकेट चटकाकर उन्होंने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी उपयोगिता साबित की है। शुरुआती स्क्वाड से बाहर रहने के बावजूद, अपनी मौजूदा फॉर्म और टी20 फॉर्मेट में विकेट चटकाने की क्षमता के कारण चयनकर्ता बुमराह के बाहर होने पर प्रिंस यादव को सबसे पहले मौका दे सकते हैं।

    मोहम्मद सिराज
    अगर चयनकर्ता बुमराह जैसे दिग्गज गेंदबाज की जगह किसी युवा खिलाड़ी के बजाय एक स्थापित और अनुभवी गेंदबाज पर दांव लगाना चाहते हैं, तो मोहम्मद सिराज सबसे मजबूत नाम हैं। हालांकि सिराज हाल के दिनों में टी20 प्रारूप से बाहर चल रहे हैं, लेकिन उनके पास नई गेंद को दोनों तरफ स्विंग कराने का बेहतरीन अनुभव है। बड़े मैचों का अनुभव और पावरप्ले में शुरुआती झटके देने की काबिलियत सिराज को बुमराह का सबसे भरोसेमंद बैकअप बनाती है।

    मयंक यादव
    अपनी तूफानी रफ्तार और आक्रामक यॉर्कर के लिए जाने जाने वाले मयंक यादव भारतीय गेंदबाजी आक्रमण को अतिरिक्त गति प्रदान करते हैं। हाल ही में जिम्बाब्वे के खिलाफ खेली गई T20I सीरीज में मयंक ने शानदार प्रदर्शन करते हुए 3 मैचों में 5 विकेट झटके थे और अपनी तेजी से विरोधी बल्लेबाजों को खासा परेशान किया था। अगर टीम प्रबंधन बुमराह की अनुपस्थिति में पावरप्ले और डेथ ओवरों के लिए एक विशुद्ध एक्सप्रेस पेसर तलाशता है, तो मयंक यादव एक परफेक्ट विकल्प साबित होंगे।

  • ईस्ट-साउथ जोन फाइनल पर अगरकर की नजर, वैभव सूर्यवंशी समेत स्टार खिलाड़ियों पर फोकस

    ईस्ट-साउथ जोन फाइनल पर अगरकर की नजर, वैभव सूर्यवंशी समेत स्टार खिलाड़ियों पर फोकस

     नई दिल्ली
    दलीप ट्रॉफी 2026-27 के फाइनल में ईस्ट जोन और साउथ जोन की टीम्स भिड़ने के लिए तैयार हैं. 6 सितंबर (रविवार) से चेन्नई के एमए चिदंबरम स्टेडियम में ये हाई वोल्टेज मुकाबला खेला जाएगा. खिताबी मुकाबले में वैभव सूर्यवंशी, ईशान किशन और तिलक वर्मा भी मैदान पर उतरेंगे. वहीं साउथ जोन के सबसे अनुभवी बल्लेबाजों में शामिल केएल राहुल फाइनल का हिस्सा नहीं हैं. तेज गेंदबाज मोहम्मद सिराज और युवा बल्लेबाज देवदत्त पडिक्कल को जरूर साउथ जोन की टीम में शामिल किया गया है और वो खिताबी मैच में नजर आएंगे l

    ईस्ट जोन के कप्तान ईशान किशन ने फाइनल से पहले अपनी टीम के सभी प्रमुख खिलाड़ियों की उपलब्धता की पुष्टि की. उधर साउथ जोन के कप्तान तिलक वर्मा ने भी साफ कर दिया कि केएल राहुल इस मुकाबले का हिस्सा नहीं होंगे. वैभव सूर्यवंशी, ईशान किशन और तिलक वर्मा के दलीप ट्रॉफी फाइनल में खेलने को लेकर असमंजस बना हुआ था क्योंकि ये तीनों खिलाड़ी अफगानिस्तान के खिलाफ आगामी टी20 सीरीज का भी हिस्सा हैं l

    15 वर्षीय वैभव सूर्यवंशी के लिए दलीप ट्रॉफी का खिताबी मुकाबला बेहद खास होगा. आईपीएल और इंटरनेशनल क्रिकेट में अपनी धाक जमा चुके वैभव ने दलीप ट्रॉफी में भी अपनी बल्लेबाजी से सुर्खियां बटोरी हैं. ईस्ट जोन के लिए ईशान किशन और वैभव की मौजूदगी टीम की बल्लेबाजी को मजबूत करेगी. दूसरी तरफ तिलक वर्मा की अगुवाई में साउथ जोन के पास भी मजबूत बल्लेबाजी लाइनअप है. दोनों टीमों ने सेमीफाइनल में शानदार प्रदर्शन कर फाइनल का टिकट हासिल किया है l

    अजीत अगरकर भी फाइनल देखेंगे
    दलीप ट्रॉफी के इस मुकाबले पर चयनकर्ताओं की भी नजर रहेगी. भारतीय क्रिकेट टीम के मुख्य चयनकर्ता अजीत अगरकर चेन्नई में फाइनल देखने पहुंचेंगे. अगरकर की मौजूदगी इसलिए भी अहम है क्योंकि बीसीसीआई (भारतीय क्रिकेट नियंत्रण बोर्ड) में उनके भविष्य को लेकर अभी स्थिति स्पष्ट नहीं है. हालिया बीसीसीआई समीक्षा बैठक में वह पारिवारिक कारणों से शामिल नहीं हो सके थे. उनका मौजूदा अनुबंध 4 अक्टूबर तक है. ऐसे में चेन्नई में बीसीसीआई सचिव देवजीत सैकिया के साथ उनकी संभावित बातचीत भी अहम मानी जा रही है l

    दलीप ट्रॉफी के साथ ही बीसीसीआई एशियन गेम्स को लेकर भी अपनी तैयारियों को अंतिम रूप दे रहा है. भारतीय मेन्स टीम के अभ्यास के लिए मयंक यादव, कार्तिक त्यागी और बाएं हाथ के तेज गेंदबाज मोहसिन खान को नेट गेंदबाज के तौर पर जापान भेजने की तैयारी है. यह योजना मुख्य कोच वीवीएस लक्ष्मण के सुझाव के बाद बनाई गई है. टीम मैनेजमेंट चाहता है कि जापान में अभ्यास के दौरान भारतीय बल्लेबाजों को अलग-अलग तरह के तेज गेंदबाजों के खिलाफ पर्याप्त तैयारी का मौका मिले l

    मयंक यादव, कार्तिक त्यागी और मोहसिन खान भारतीय एशियन गेम्स दल में शामिल नहीं होंगे. उन्हें सिर्फ नेट गेंदबाज के तौर पर टीम के साथ रखा जाएगा. भारतीय टीम के 20 सितंबर को दिल्ली से जापान रवाना होने की उम्मीद है, जबकि मेन्स टीम का पहला मुकाबला 28 सितंबर को निर्धारित है. बीसीसीआई ने तीनों तेज गेंदबाजों के जापानी वीजा के लिए आवेदन भी कर दिया है l

  • पिता की सीख को आगे बढ़ाएंगे सचिन, युवा डॉक्टरों की मदद के लिए शुरू की मेमोरियल फेलोशिप

    पिता की सीख को आगे बढ़ाएंगे सचिन, युवा डॉक्टरों की मदद के लिए शुरू की मेमोरियल फेलोशिप

    नई दिल्ली
    टीचर्स डे के खास मौके पर क्रिकेट के दिग्गज सचिन तेंदुलकर ने एक दिल छू लेने वाली पहल की है. अपने दिवंगत पिता और जिंदगी के पहले गुरु रमेश तेंदुलकर की याद में सचिन ने प्रोफेसर रमेश तेंदुलकर मेमोरियल फेलोशिप शुरू करने का ऐलान किया है l

    इस फेलोशिप का मकसद मेडिकल फील्ड में युवा और होनहार डॉक्टरों की मदद करना है. इसके तहत हर साल एक युवा डॉक्टर (MD) को आर्थिक मदद दी जाएगी. यह मदद श्रीनगर में क्लिफ्ट और क्रैनियोफेशियल केयर की स्पेशल ट्रेनिंग के लिए होगी l

    एक साल का यह खास प्रोग्राम पूरा होने पर डॉक्टर को सचिन तेंदुलकर फाउंडेशन की तरफ से एक सर्टिफिकेट भी दिया जाएगा. यह शानदार पहल इंगा हेल्थ फाउंडेशन के साथ मिलकर शुरू की गई है, जो लंबे समय से सचिन के फाउंडेशन का हेल्थ केयर पार्टनर है l
       
    पिता को याद कर भावुक हुए सचिन
    इस मौके पर सचिन अपने पिता को याद करते हुए काफी भावुक नजर आए. उनके पिता रमेश तेंदुलकर एक प्रोफेसर, लेखक और कवि थे. 1999 में उनका निधन हो गया था. सचिन ने कहा कि जब भी मैं अपने सफर के बारे में सोचता हूं, तो उसकी शुरुआत किसी क्रिकेट मैदान या कोच से नहीं, बल्कि मेरे घर से होती है. मेरे पिता ने ही सबसे पहले मेरे टैलेंट को पहचाना था. उन्होंने कभी मुझे यह नहीं बताया कि मुझे क्या बनना चाहिए, बल्कि मुझे अपने रास्ते खुद चुनने की पूरी आजादी दी l

    पिता की वो सीख जो सचिन कभी नहीं भूले
    सचिन ने बचपन का एक किस्सा शेयर करते हुए बताया कि उनके पिता ने उन्हें सफलता से ज्यादा अच्छे चरित्र की अहमियत सिखाई थी. सचिन ने बताया कि मेरे पिता की एक बात हमेशा मेरे साथ रही है- उन्होंने कहा था कि फेल होना ठीक है, लेकिन बेईमानी करना नहीं. जिंदगी में कभी शॉर्टकट मत लेना l

    सचिन और उनकी पत्नी अंजलि का मानना है कि भारत में टैलेंट की कोई कमी नहीं है, बस बच्चों को सही गाइडेंस, कोच और स्वास्थ्य सुविधाएं मिलने की देरी है. इसी सोच के साथ उन्होंने अपना फाउंडेशन शुरू किया था l

    अपनी नई फेलोशिप के बारे में बात करते हुए सचिन ने कहा कि मेरे लिए यह सिर्फ एक फेलोशिप नहीं है. यह मेरे पिता की उस सोच को आगे बढ़ाने का एक तरीका है, जिसमें वो मानते थे कि शिक्षा से मौके बनते हैं, और वो मौके तब सबसे ज्यादा मायने रखते हैं जब उनका इस्तेमाल दूसरों की मदद के लिए किया जाए l

  • पाकिस्तान टीम को ‘रिमोट कंट्रोल’ से चला रहा PCB? राशिद लतीफ ने उठाए बड़े सवाल

    पाकिस्तान टीम को ‘रिमोट कंट्रोल’ से चला रहा PCB? राशिद लतीफ ने उठाए बड़े सवाल

    नई दिल्ली
     पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड (पीसीबी) में जारी उथल-पुथल और अजीबोगरीब फैसलों को लेकर पूर्व विकेटकीपर बल्लेबाज राशिद लतीफ ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। इंग्लैंड के खिलाफ शुरुआती दो टेस्ट मैचों में मिली शर्मनाक हार के बाद खिलाड़ियों और सपोर्ट स्टाफ को बीच सीरीज वापस भेजने के कदम पर सवाल उठाते हुए उन्होंने पीसीबी के रवैये की कड़े शब्दों में आलोचना की है।

    टीम को रिमोट कंट्रोल से चला रहे हैं- लतीफ
    एक्स पर अपनी भड़ास निकालते हुए राशिद लतीफ ने बोर्ड की मंशा और कार्यशैली को घेरा। लतीफ ने सवाल उठाया, 'अगर टीम को रिमोट कंट्रोल से ही चलाना था तो फिर सरफराज और उमर गुल को वापस क्यों भेजा गया? गैरी कर्स्टन और जेसन गिलेस्पी से चयन के अधिकार क्यों छीन लिए गए?' उनका मानना है कि विदेशी कोचों और सहयोगी स्टाफ को दरकिनार कर बोर्ड खुद ही सारे फैसले थोप रहा है।

    अगला नंबर बाबर आजम का है
    टीम के अंदर कप्तानी और अनुशासन को लेकर चल रही खींचतान पर लतीफ ने बोर्ड से सीधा सवाल पूछा। उन्होंने लिखा, 'और अगर कप्तान बाबर आजम बात नहीं मान रहे थे तो उन्हें पद से हटाया जाना चाहिए था। उनकी जगह सरफराज और उमर गुल को वापस क्यों भेजा गया? क्या अब बाबर आजम ही अगला निशाना हैं?' लतीफ का यह इशारा साफ तौर पर दिखाता है कि पीसीबी में मैनेजमेंट के इस फेरबदल के बाद बाबर की कप्तानी पर तलवार लटक रही है।

    7 खिलाड़ियों को भेजा गया घर
    इंग्लैंड दौरे के बीच में ही 7 खिलाड़ियों को अचानक बदलने और मोहम्मद रिजवान व सलमान अली आगा को स्वदेश वापस भेजने के फैसले पर पूरी दुनिया के क्रिकेट जगत में रोष है। तीसरे और अंतिम टेस्ट के लिए अचानक माइक हेसन को कमान सौंपने पर रमीज राजा, बासित अली और शाहिद अफरीदी के अलावा माइकल एथरटन और नासिर हुसैन जैसे दिग्गजों ने भी चिंता जताई है। पूर्व खिलाड़ियों का मानना है कि इस तरह के उतावले फैसलों से पाकिस्तान क्रिकेट में अस्थिरता और ज्यादा बढ़ेगी।

  • प्रिटोरियस के शतक से दक्षिण अफ्रीका की जीत, अब वैभव सूर्यवंशी से होने लगी तुलना

    प्रिटोरियस के शतक से दक्षिण अफ्रीका की जीत, अब वैभव सूर्यवंशी से होने लगी तुलना

    नई दिल्ली
    साउथ अफ्रीका के युवा बल्लेबाज लुआन-ड्रे प्रिटोरियस ने नामीबिया के खिलाफ धमाकेदार शतक जड़कर इतिहास रच दिया. विंडहोक में शुक्रवार (4 सितंबर) को ट्राई सीरीज के मुकाबले में प्रिटोरियस ने महज 53 गेंदों पर 101 रनों की पारी खेली. उनकी विस्फोटक बल्लेबाजी के दम पर साउथ अफ्रीका ने नामीबिया को 11 रनों से हराया.

    लुआन-ड्रे प्रिटोरियस ने अपनी पारी में 5 चौके और 8 छक्के लगाए. उनका स्ट्राइक रेट 190.57 रहा. यह टी20 इंटरनेशनल में उनका पहला शतक था और इसी पारी के साथ उन्होंने एक खास रिकॉर्ड अपने नाम कर लिया. प्रिटोरियस फुल मेम्बर टीम के लिए टी20 इंटरनेशनल शतक लगाने वाले सबसे कम उम्र के बल्लेबाज बन गए. उन्होंने अफगानिस्तान के हजरतुल्लाह जजई का रिकॉर्ड तोड़ा. जजई ने 2019 में आयरलैंड के खिलाफ 20 साल और 337 दिन की उम्र में यह उपलब्धि हासिल की थी. वहीं प्रिटोरियस ने 20 साल और 161 दिन की उम्र में शतक जड़ा है.

    लुआन-ड्रे प्रिटोरियस की इस पारी के बाद उनकी तुलना भारत के युवा स्टार वैभव सूर्यवंशी से भी होने लगी है. दोनों के बीच एक दिलचस्प कनेक्शन यह है कि वे आईपीएल (इंडियन प्रीमियर लीग) में राजस्थान रॉयल्स (RR) के लिए खेलते हैं. सिर्फ 15 साल की उम्र में वैभव पहले ही कई बड़े रिकॉर्ड अपने नाम कर चुके हैं. वह भारत के लिए इंटरनेशनल क्रिकेट खेलने वाले सबसे कम उम्र के क्रिकेटर हैं. साथ ही टी20 इंटरनेशनल में अर्धशतक लगाने वाले सबसे कम उम्र के भारतीय भी हैं.

    अंतरराष्ट्रीय शतक के करीब भी वैभव सूर्यवंशी पहुंच चुके हैं. जिम्बाब्वे के खिलाफ उन्होंने 49 गेंदों पर 81 रनों की तूफानी पारी खेली थी. हालांकि वह शतक पूरा नहीं कर सके. अब उनकी नजरें उस उपलब्धि पर होगी. आगामी अफगानिस्तान टी20 सीरीज और एशियन गेम्स वैभव के लिए खुद को साबित करने के दो बड़े मौके हो सकते हैं.

    रोमांचक मुकाबले में जीता साउथ अफ्रीका
    मुकाबले में साउथ अफ्रीका ने टॉस हारकर पहले बल्लेबाजी करते हुए 20 ओवर में 228 रन बनाए. लुआन-ड्रे प्रिटोरियस ने कॉनर एस्टरहुइजन के साथ पहले विकेट के लिए 156 रनों की शानदार साझेदारी की. एस्टरहुइजन ने 88 रनों की तेजतर्रार पारी खेली.

    229 रनों के लक्ष्य का पीछा करते हुए नामीबिया ने भी मुकाबले को रोमांचक बनाए रखा. जान फ्राइलिंक ने 72 और लॉरेन स्टीनकैंप ने 61 रन बनाए. दोनों ने पहले विकेट के लिए 119 रन जोड़कर टीम को मजबूत शुरुआत दी, लेकिन नामीबिया की टीम 20 ओवर में 217 रनों तक ही पहुंच सकी. ट्राई सीरीज का फाइनल रविवार को दक्षिण अफ्रीका और जिम्बाब्वे के बीच खेला जाएगा.

  • एशियाई खेलों से पहले भारतीय शूटर्स का आखिरी चरण, तकनीक और मानसिक मजबूती पर फोकस

    एशियाई खेलों से पहले भारतीय शूटर्स का आखिरी चरण, तकनीक और मानसिक मजबूती पर फोकस

    नई दिल्ली
    भारतीय निशानेबाज एशियाई खेलों में एक बार फिर शानदार प्रदर्शन दोहराने के इरादे से मैदान में उतरेंगे। हांगझू में 2022 एशियाई खेलों में भारतीय निशानेबाजों ने कुल 22 पदक जीतकर अपनी प्रतिभा का दमदार प्रदर्शन किया था।

    अब 19 सितंबर से जापान के आईची-नागोया में शुरू होने वाले एशियाई खेल 2026 के लिए खिलाड़ी तैयारियों को अंतिम रूप देने में जुटे हैं।

    कहां लगेंगे कैंप
    खिलाड़ियों की तैयारी के लिए नई दिल्ली और भोपाल में विशेष शिविर आयोजित किए जा रहे हैं। भोपाल स्थित मध्य प्रदेश राज्य निशानेबाजी अकादमी और दिल्ली के कर्णी सिंह निशानेबाजी परिसर में ये कैंप लगाए जाएंगे। पिस्टल और राइफल निशानेबाज पांच से 14 सितंबर तक भोपाल में अभ्यास करेंगे।

    वहीं, स्कीट निशानेबाजों का शिविर कर्णी सिंह परिसर में शुरू हो चुका है, जबकि ट्रैप निशानेबाजों का कैंप 10 से 18 सितंबर तक चलेगा।

    मानसिक मजबूती और तकनीकी सुधार पर फोकस
    भारतीय राष्ट्रीय राइफल संघ (एनआरएआई) के हाई परफार्मेंस निदेशक पियरे ब्यूशां ने बताया कि इन शिविरों में खिलाड़ियों की मानसिक तैयारी के साथ-साथ तकनीकी दक्षता को और निखारने पर विशेष जोर दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि इस चरण में हमारा ध्यान अधिक अभ्यास की जगह सटीकता, मानसिक मजबूती और तकनीकी सुधार पर है।

    अंतिम चरण के इन शिविरों की रूपरेखा इस तरह तैयार की गई है कि खेल विज्ञान और कोचिंग टीमें प्रत्येक खिलाड़ी के प्रदर्शन से जुड़े आंकड़ों पर बारीकी से नजर रख सकें और यह सुनिश्चित कर सकें कि एशियाई खेलों की निशानेबाजी परिसर में उतरते समय खिलाड़ी अपने सर्वश्रेष्ठ स्तर पर हों

    एशियाई खेलों के लिए भारतीय निशानेबाजी दल
    राइफल और पिस्टल दल
        10 मीटर एयर राइफल पुरुष – पार्थ राकेश माने, हिमांशु ढिल्लों, रुद्रांक्ष बालासाहेब पाटिल
        10 मीटर एयर राइफल महिला – एलावेनिल वलारिवन, सोनम उत्तम मास्कर, विदार्सा के. विनोद
        50 मीटर राइफल थ्री पोजीशन पुरुष – ऐश्वर्य प्रताप सिंह तोमर, नीरज कुमार, रुद्रांक्ष बालासाहेब पाटिल
        50 मीटर राइफल थ्री पोजीशन महिला – आशी चौकसे, विदार्सा के. विनोद, तिलोत्तमा सेन
        10 मीटर एयर पिस्टल पुरुष – केदारलिंग बी. उचगांवकर, गौरव, कमलजीत
        10 मीटर एयर पिस्टल महिला – सुरुचि, ईशा सिंह, मनु भाकर
        25 मीटर रैपिड फायर पिस्टल पुरुष – अनीश
        25 मीटर स्पोर्ट्स पिस्टल महिला – ईशा सिंह, मनु भाकर, राही सरनोबत
        10 मीटर एयर राइफल मिक्स्ड टीम – पार्थ राकेश माने-एलावेनिल वलारिवन
        10 मीटर एयर पिस्टल मिक्स्ड टीम – केदारलिंग बी. उचगांवकर-सुरुचि

    शॉटगन दल
        ट्रैप पुरुष – किनान चेनाई, अहवार रिजवी, शपथ भारद्वाज
        ट्रैप महिला – नीरू, मनीषा कीर, आशिमा अहलावत
        स्कीट पुरुष – अनंतजीत सिंह नरुका, भवतेघ सिंह गिल, मैराज अहमद खान
        स्कीट महिला – परिनाज धालीवाल, राइजा ढिल्लों, महेश्वरी चौहान