Category: राजनीतिक

  • प्रियंका चतुर्वेदी को लेकर बढ़ी सियासी हलचल, आदित्य से अनबन की खबरों पर संजय राउत का जवाब

    प्रियंका चतुर्वेदी को लेकर बढ़ी सियासी हलचल, आदित्य से अनबन की खबरों पर संजय राउत का जवाब

    मुंबई
    शिवसेना के उद्धव ठाकरे गुट की नेता प्रियंका चतुर्वेदी का राज्यसभा से कार्यकाल समाप्त हो गया है और उन्हें दूसरा मौका नहीं मिला है। उनके स्थान पर दिग्गज नेता शरद पवार को उच्च सदन में भेजा जा रहा है और इसे लेकर उद्धव सेना ने भी सहमति जताई। इस बीच चर्चाएं यह भी थीं कि पार्टी के भीतर प्रियंका को भेजने या फिर मौका ना देने को लेकर मतभेद थे। आदित्य ठाकरे चाहते थे कि प्रियंका चतुर्वेदी को फिर से मौका मिले, लेकिन संजय राउत ने शरद पवार को भेजे जाने का वादा किया और अंत में उनकी ही चली। इसे लेकर चर्चाएं यहां तक शुरू हो गईं कि आदित्य ठाकरे के आगे संजय राउत की ही चली और शरद पवार को किया कमिटमेंट पार्टी को मानना पड़ गया।

    अब इस मामले में संजय राउत ने सफाई भी देने की कोशिश की है। उनका कहना है कि राजनीतिक समीकरण पक्ष में नहीं थे और शरद पवार जैसे सीनियर नेता राज्यसभा जाना चाहते थे। इसलिए प्रियंका चतुर्वेदी का नाम आगे नहीं बढ़ाया गया। यदि समीकरण अनुकूल होते और शरद पवार जैसे नेता का नाम नहीं होता तो निश्चित तौर पर पार्टी की ओर से प्रियंका को ही दोबारा राज्यसभा भेजने पर विचार किया जाता। उन्होंने कहा कि यह बात रही है कि उद्धव सेना में अंदरखाने यह इच्छा प्रबल थी कि प्रियंका चतुर्वेदी को फिर से राज्यसभा में भेजा जाए। लेकिन पार्टी के पास अपने स्तर पर नंबर कम थे और फिर जब शरद पवार जैसे सीनियर नेता ने दावा कर दिया तो प्रियंका चतुर्वेदी के लिए मुकाबले में बने रहना मुश्किल हो गया।

    संजय राउत ने कहा, 'पार्टी में यह प्रबल इच्छा थी कि प्रियंका चतुर्वेदी को एक और मौका दिया जाए। लेकिन जरूरी नंबर नहीं थे। यदि शरद पवार खुद मुकाबले में ना आना चाहते और नंबर होते तो उन्हें ही भेजा जाता। उन्हें 100 फीसदी चांस दिया जाता।' बता दें कि महाराष्ट्र में 7 राज्यसभा सीटें खाली हो रही हैं, जिनमें से 6 पर एनडीए जीतने की स्थिति में है। एकमात्र सीट विपक्ष जीत सकता है, जिस पर शरद पवार को उतारा गया है। इस एकमात्र सीट पर उद्धव सेना, कांग्रेस और एनसीपी-एसपी तीनों ही दावा कर रहे थे, लेकिन अंत में शरद पवार के नाम पर ही सहमति बनी।

    भाजपा ने रामदास आठवले और विनोद तावड़े जैसे नेताओं को चांस दिया है। संजय राउत से जब एनडीए उम्मीदवारों के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा कि आठवले के बारे में तो पहले से ही तय लग रहा था। अब विनोद तावड़े को भेजना अहम है। दरअसल विनोद तावड़े बीते कई सालों से संगठन में काम कर रहे हैं। कई राज्यों के प्रभारी रहे हैं। उन्हें महाराष्ट्र की राजनीति से दूर रखा गया और वह चुपचाप करते रहे। माना जा रहा है कि अब उसका इनाम उन्हें राज्यसभा भेजकर दिया जा रहा है।

     

  • निगम-मंडलों के 36 नामों की सूची तैयार, राजनीतिक नियुक्तियां जल्द, मंत्रिमंडल विस्तार अभी नहीं

    निगम-मंडलों के 36 नामों की सूची तैयार, राजनीतिक नियुक्तियां जल्द, मंत्रिमंडल विस्तार अभी नहीं

    भोपाल 

    प्रदेश में राजनीतिक नियुक्तियों को लेकर लंबे समय से जारी इंतजार अब खत्म होने वाला है। सत्ताधारी दल के शीर्ष नेतृत्व ने निगम-मंडलों, प्राधिकरणों और विभिन्न सरकारी संगठनों में नियुक्तियों के लिए करीब तीन दर्जन नामों का प्रस्ताव तैयार किया है। यह सूची हाल ही में दिल्ली में पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व को सौंप दी गई है। अंतिम मुहर लगने के बाद औपचारिक घोषणा की जाएगी। 

    सूत्रों के अनुसार, प्रस्तावित सूची में संगठन और सरकार से जुड़े ऐसे नेताओं को प्राथमिकता दी गई है, जो लंबे समय से सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं, लेकिन अब तक किसी महत्वपूर्ण दायित्व से वंचित रहे हैं। सामाजिक और क्षेत्रीय संतुलन को ध्यान में रखते हुए सभी वर्गों को प्रतिनिधित्व देने का प्रयास किया गया है।

    चरणबद्ध  होंगी नियुक्तियां
    बताया जा रहा है कि नियुक्तियां चरणबद्ध तरीके से की जाएंगी। कुछ प्रमुख निगमों और प्राधिकरणों में पहले चरण में नियुक्ति आदेश जारी हो सकते हैं, जबकि शेष पदों पर बाद में निर्णय लिया जाएगा। पार्टी के वरिष्ठ नेताओं का मानना है कि इन नियुक्तियों से संगठन में उत्साह बढ़ेगा और जमीनी स्तर पर कार्यकर्ताओं को नई ऊर्जा मिलेगी।

    लंबे समय से टल रहा निर्णय
    बता दें, कि लोकसभा चुनाव के बाद से ही इन नियुक्तियों को लेकर चर्चा चल रही थी। कई बार सूची तैयार होने की बात सामने आई, लेकिन अंतिम निर्णय टलता रहा। अब माना जा रहा है कि इसी माह कभी भी इस संबंध में आधिकारिक रूप से सूची जारी की जा सकती है। भाजपा बचे हुए मोर्चो की कार्यकारिणी, जिला कार्यकारिणी, मंडल पदाधिकारियों, एल्डर मैन समेत अन्य पदों पर नियुक्ति के आदेश जल्द जारी करेगी। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि आगामी नगरीय निकाय और अन्य चुनावों को देखते हुए संगठनात्मक संतुलन बनाना पार्टी की प्राथमिकता है। ऐसे में इन नियुक्तियों को रणनीतिक दृष्टि से भी अहम माना जा रहा है।

    मंत्रिमंडल विस्तार अभी नहीं, प्रदेश कार्यसमिति की बैठक अगले माह
    उधर, मोहन यादव के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार में मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर अटकलें जारी हैं। सूत्रों के अनुसार मंत्रिमंडल का विस्तार तय माना जा रहा है, लेकिन यह प्रक्रिया अभी नहीं होगी और इसके लिए करीब दो से तीन महीने का समय लग सकता है। वहीं, मध्य प्रदेश भारतीय जनता पार्टी की प्रदेश कार्यसमिति की बैठक अप्रैल में होने की संभावना है। सूत्रों का कहना है कि इसके बाद प्रदेश कार्यसमिति की बैठक हर तीन महीने में नियमित रूप से आयोजित की जा सकती है।

  • उद्धव सेना में सत्ता खेल: आदित्य ठाकरे की योजना नहीं चली, संजय राउत ने प्रियंका चतुर्वेदी को दी प्राथमिकता

    उद्धव सेना में सत्ता खेल: आदित्य ठाकरे की योजना नहीं चली, संजय राउत ने प्रियंका चतुर्वेदी को दी प्राथमिकता

    मुंबई 

    महाराष्ट्र में राज्यसभा चुनाव में विपक्ष महज एक सीट ही जीतने की स्थिति में है। इसके लिए वरिष्ठ नेता शरद पवार का नाम तय हुआ है। 85 वर्षीय लीडर के नाम के ऐलान के लिए जो प्रेस कॉन्फ्रेंस हुई थी, उसमें उद्धव सेना का कोई नेता शामिल नहीं था। इसे लेकर कयास लगने लगे तो शरद पवार की बेटी सुप्रिया सुले खुद सामने आईं और कहा कि उद्धव सेना की नाराजगी के सारे दावे गलत हैं। उन्होंने कहा कि इस संबंध में संजय राउत पहले ही आए थे और शरद पवार से मिलकर भरोसा दे गए थे कि यदि आप उम्मीदवार होते हैं तो हम आपके साथ होंगे।

    इसके बाद संजय राउत ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट भी लिखा, 'कांग्रेस ने आखिर राज्यसभा में उम्मीदवार फाइन कर लिया। महाविकास अघाड़ी एक है और हम सभी साथ रहेंगे।' यह बात सही है कि संजय राउत लगातार कहते रहे हैं कि शरद पवार को राज्यसभा जाना चाहिए। हालांकि उनके सुर आदित्य ठाकरे से अलग रहे हैं, जो चाहते थे कि प्रियंका चतुर्वेदी को एक मौका और मिलना चाहिए। प्रियंका चतुर्वेदी का कार्यकाल समाप्त हो गया है और उन्हें फिर से मौका नहीं मिला है। वह राज्यसभा में अपने कार्यकाल के आखिरी दिन भावुक भी नजर आई थीं।

    इस तरह पूरे प्रकरण को आदित्य ठाकरे और संजय राउत के बीच खींचतान के तौर पर देखा जा रहा है और इसके आधार पर लोग यह भी रहे हैं कि प्रियंका के नाम पर संजय राउत ने वीटो लगा दिया और इस तरह शरद पवार का रास्ता साफ हो गया। पूरे मामले की जानकारी रखने वालों का कहना है कि संजय राउत एक तरह से विजेता बनकर उभरे और उन्होंने उद्धव सेना का एजेंडा तय कर दिया। अब कहा जा रहा है कि उद्धव सेना के खाते में विधान परिषद की सीट आ सकती है। लेकिन पार्टी के एक वर्ग का मानना है कि सबसे बड़ा दल विपक्ष में उद्धव सेना ही है। फिर भी राज्यसभा की सीट एनसीपी-एसपी के खाते में जाना दुखद है।

    कांग्रेस का भी था दावा, पर खरगे ने खुद ही किया पीछे हटने का ऐलान

    राज्यसभा सीट के लिए तो कांग्रेस ने भी दावा किया था। इस संबंध में राहुल गांधी से भी बात की गई थी, लेकिन अंत में पार्टी शरद पवार के नाम पर ही सहमत हो गई। अब देखना होगा कि एमएलसी सीट पर क्या होता है। अगले महीने ही उद्धव ठाकरे का एमएलसी का कार्यकाल समाप्त होगा। ऐसे में नजरें इस बात पर हैं कि वह रिपीट होंगे या फिर किसी और नेता को उनके स्थान पर मौका दिया जा सकता है।

  • राज्यसभा चुनाव: कांग्रेस ने खोले पत्ते, सिंघवी-रेड्डी समेत छह नेताओं को बनाया उम्मीदवार

    राज्यसभा चुनाव: कांग्रेस ने खोले पत्ते, सिंघवी-रेड्डी समेत छह नेताओं को बनाया उम्मीदवार

    चेन्नई/नई दिल्ली
    देश के 10 राज्यों की 37 राज्यसभा सीटों के नामांकन का आज यानि गुरुवार को अंतिम दिन है. कांग्रेस ने अपने उम्मीदवारों के नाम का ऐलान कर दिया है. कांग्रेस ने तेलंगाना, तमिलनाडु, हरियाणा, हिमाचल और छत्तीसगढ़ की राज्यसभा सीट के लिए अपने पत्ते खोल दिए हैं. कांग्रेस ने राज्यसभा के लिए 6 उम्मीदवार घोषित कए हैं।

    कांग्रेस ने सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकील अभिषेक मनु सिंघवी को तेलंगाना से दुबारा राज्यसभा भेजने का फैसला किया है. तेलंगाना से कांग्रेस ने सिंघवी के अलावा वेम नरेंद्र रेड्डी को राज्यसभा भेजने का फैसला किया है. सिंघवी को जहां गांधी परिवार का करीबी माना जाता है तो वेम रेड्डी तेलंगाना सीएम रेवंत रेड्डा के भरोसेमंद माने जाते हैं. पूर्व विधायक रेड्डी तेलंगाना कांग्रेस के उपाध्यक्ष भी हैं।  

    कांग्रेस ने छत्तीसगढ़ से आदिवासी समुदाय से आने वाली फूलो देवी को दोबारा से राज्यसभा भेजने का निर्णय किया है. इसके अलावा कांग्रेस ने हरियाणा से करमवीर बौद्ध को राज्यसभा का टिकट दिया है, जो दलित समाज से आते हैं. हिमाचल प्रदेश से कांग्रेस ने अनुराग शर्मा को राज्यसभा का उम्मीदवार बनाया है तो तमिलनाडु से पार्टी ने एम क्रिस्टोफर तिलक को राज्यसभा का प्रत्याशी बनाया है। 

    हरियाणा में कर्मवीर बौद्ध के नाम पर लगी मुहर
    कांग्रेस के राज्यसभा उम्मीदवारों में सबसे चौंकाने वाला नाम है कर्मवीर सिंह बौद्ध का है, जिन्हें हरियाणा से राज्यसभा भेजा जा रहा है. दलित समाज से आने वाले कर्मवीर लो प्रोफाइल नेता हैं. अंबाला के रहने वाले कर्मवीर 2024 के हरियाणा विधानसभा चुनाव में मुलाना से टिकट के दावेदार रहे हैं, लेकिन उन्हें टिकट नहीं मिल पाया. अब कांग्रेस ने उन्हें संसद के उच्च सदन भेजने का फैसला किया है। 

    कर्मवीर बौद्ध हरियाणा सिविल सचिवालय से करीब 5 साल पहले सुपरिंटेंडेंट के पद से सेवानिवृत्त हुए थे. इनकी पत्नी लेबर डिपार्टमेंट में असिस्टेंट है. हरियाणा में दलित सामाज को संदेश देने के लिए कांग्रेस ने उनपर दांव लगाया है। 

    तेलंगाना से सिंघवी और रेड्डी को मिला मौका
    तेलंगाना की दो राज्यसभा सीटों के लिए कांग्रेस ने अपने उम्मीदवार के नाम का ऐलान किया है, जिसमें एक नाम अभिषेक मनु सिंघवी का है तो दूसरा नाम पूर्व विधायक वेम नरेंद्र रेड्डी का है. सिंघवी का नाम पहले ही तय माना जा रहा था, क्योंकि उन्हें गांधी परिवार का करीबी माना जाता है. हिमाचल से चुनाव हारने के बाद कांग्रेस नेतृत्व ने उन्हें तेलंगाना से राज्यसभा भेजा था, जिसके लिए रेवंत रेड्डी ने बीआरएस के मौजूदा राज्यसभा सांसद की सीट खाली कराई थी।

    छत्तीसगढ़ से फिर जाएंगी फूलो देवी राज्यसभा
    वहीं, कांग्रेस ने छत्तीसगढ़ में एक बार फिर से फूलो देवी नेतम को राज्यसभा भेजने का निर्णय लिया है. कांग्रेस आसानी से एक सीट जीत लेगी. फूलो देवी को दोबारा से राज्यसभा भेजने के पीछे पहला उनका अदिवासी समुदाय से होना और दूसरा पार्टी किसी भी तरह से कोई गुटबाजी नहीं चाहती है. इसीलिए किसी नए चेहरे पर भरोसा नहीं जताया है.  हालांकि, कांग्रेस ने शुरू में उनके विकल्प पर पार्टी ने विचार कर रही थी, लेकिन नेताओं की गुटबाजी से पिंड छुड़ाने के लिए फूलो देवी नेताम को ही फिर से राज्यसभा भेजने का फैसला लिया गया. 

    कांग्रेस ने राज्यसभा से साधा जातीय समीकरण
    कांग्रेस ने राज्यसभा चुनाव के लिए बहुत ही सोची-समझी रणनीति के तहत उम्मीदवारों के नाम का ऐलान किया है. कांग्रेस ने जिन पांच नेताओं को राज्यसभा भेजने का फैसला किया है, उसमें पंजाबी ब्राह्मण समुदाय से आने वाले अभिषेक मनु सिंघवी हैं तो दूसरे तेलंगाना की सबसे प्रभावी जाति रेड्डी समुदाय के वेम नरेंद्र रेड्डी हैं। 

    कांग्रेस ने हरियाणा में दलित समुदाय से आने वाले कर्मवीर सिंह बौद्ध को प्रत्याशी बनाया है तो छत्तीसगढ़ में आदिवासी समुदाय से आने वाली फूलो देवी को दोबारा राज्यसभा भेजा है. कांग्रेस ने हरियाणा में दलित समुदाय को साधे रखने की चुनौती थी, जिसके चलते ही कर्मवीर बौद्ध पर भरोसा जताया है. ऐसे ही हिमाचल प्रदेश में कांग्रेस ने ब्राह्मण समाज से आने वाले अनुराग शर्मा को प्रत्याशी बनाया है जबकि सीएम ठाकुर समुदाय से हैं. इस तरह कांग्रेस ने ब्राह्मण और ठाकुर केमिस्ट्री बनाने की कवायद की है।

  • अखिलेश की PDA बनाम बीजेपी का मास्टर प्लान, 2027 में किसकी बनेगी सरकार?

    अखिलेश की PDA बनाम बीजेपी का मास्टर प्लान, 2027 में किसकी बनेगी सरकार?

    लखनऊ
     उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव 2027 को लेकर अब सरगर्मी बढ़ने लगी है। भारतीय जनता पार्टी ने वर्ष 2027 में होने वाले विधानसभा चुनाव को लेकर रणनीति तैयार की है। इसके तहत 15 दलित महापुरुषों का कैलेंडर तैयार कराया गया है। इनकी जयंती-पूण्यतिथि के बहाने इस समाज के लोगों से सालों भर मुलाकात का कार्यक्रम तैयार किया गया है। इनमें कांशीराम से लेकर संत रविदास तक शामिल हैं। पहले ही भाजपा ने मायावती पर सीधे हमले से परहेज किया है। पार्टी किसी भी दलित महापुरुष और नेता से सीधे उलझती नहीं दिख रही है। यह संदेश जमीन तक पहुंचाने की तैयारी की जा रही है। दरअसल, अखिलेश यादव की पिछड़ा दलित अल्पसंख्यक यानी पीडीए पॉलिटिक्स की काट के तौर पर रणनीति को तैयार किया जा रहा है। योगी आदित्यनाथ सरकार भी समाज के हर वर्ग तक सरकार की योजनाओं के पहुंचाए जाने की जानकारी पहुंचाने की रणनीति में जुटी है।
    दलित वोट बैंक है जरूरी
    यूपी की राजनीति में सत्ता की सीढ़ी चढ़ने के लिए दलित वोट बैंक को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। एक तरफ अखिलेश यादव यादव, गैर यादव पिछड़ा यानी पीडीए पॉलिटिक्स के जरिए प्रदेश की सत्ता में एक बार फिर वापसी की कोशिशों में जुटे हुए हैं। दूसरी तरफ, भारतीय जनता पार्टी लगातार तीसरी बार सत्ता में वापसी का प्रयास कर रही है। इसको लेकर पार्टी की ओर से रणनीति को तैयार किया जा रहा है। इसमें दलित वोट बैंक को अहम माना जा रहा है।हाल के वर्षों में दलित वोट बैंक में बिखराव होता दिखा है। वर्ष 2014 से 2019 तक के चुनावों में प्रदेश में मोदी लहर और भाजपा के उफान के बाद भी बहुजन समाज पार्टी दलित वोट बैंक पर कब्जा जमाती दिखी थी। करीब 20 फीसदी के वोट बैंक पर मायावती का कब्जा दिखता रहा था। हालांकि, यूपी चुनाव 2022 के बाद से दलित वोट बैंक छिटकना शुरू हुआ। लोकसभा चुनाव 2024 में मायावती का वोट प्रतिशत प्रदेश में 10 फीसदी के आसपास सिमटता दिखा है।

    यूपी चुनाव 2022 में योगी-मोदी सरकार की नीतियों, कोरोना काल में अन्न योजना के प्रभाव ने दलित वोट बैंक के एक बड़े हिस्से को भाजपा से जोड़ा। ऐसे में सॉलिड गैर-यादव ओबीसी वोट बैंक में भटकाव से अधिक असर पार्टी को नहीं हुआ। हालांकि, लोकसभा चुनाव में संविधान बदलने के मुद्दे को जोरदार तरीके से उठाकर और पीडीए पॉलिटिक्स के जरिए बसपा से छिटकने वाले दलित वोट के एक बड़े हिस्से को पार्टी के साथ जोड़ने में अखिलेश यादव कामयाब रहे।

    2027 के लिए डी पॉलिटिक्स
    यूपी चुनाव 2027 के लिए भाजपा ने अब दलित पॉलिटिक्स पर जोर देना शुरू कर दिया है। लोकसभा चुनाव में छिटके दलित वोटरों को साधने की रणनीति तैयार की जा रही है। भाजपा ने इसके लिए नए सिरे से सोशल इंजीनियरिंग शुरू कर दी है। पार्टी की रणनीति के केंद्र में दलित महापुरुष, उनकी विरासत और समाज के लोगों से लगातार संवाद है। इस संवाद के जरिए समाज के निचले हिस्से तक पार्टी अपने संदेश और कार्यों को पहुंचाने की तैयारी में है।

    बीजेपी ने इसके लिए कांशीराम, संत रविदास, संत गाडगे, डॉ. भीमराव अंबेडकर, ज्योतिबा फुले, सावित्रीबाई फुले, उदा देवी, झलकारी बाई, वीरा पासी, लखन पासी, रमाबाई अंबेडकर और अहिल्याबाई होल्कर जैसी करीब 15 दलित और वंचित समाज के महापुरुषों का एक वार्षिक कैलेंडर तैयार किया है। इन महापुरुषों की जयंती और पुण्यतिथि पर प्रदेश भर में कार्यक्रमों की श्रृंखला तैयार की गई है।
    लगातार संपर्क पर जोर
    बीजेपी नेताओं का कहना है कि समाज के लोगों से लगातार संपर्क पर जोर दिया जा रहा है। अगर हमारे कार्यकर्ता समाज के लोगों से मिलेंगे। उनकी सुख-दुख सुनेंगे। उसको लेकर काम करेंगे तो निश्चित तौर पर स्थिति को फिर से बहाल किया जा सकेगा। भाजपा इन वोटरों के दरवाजे पर बार- बार दस्तक देकर इन्हें फिर से भाजपा के पाले में लाने की कवायद में जुट गई है। लोकसभा चुनाव 2024 में भाजपा 2017 के 62 सीटों के आंकड़े से घटकर 33 पर आ गई थी। रिजर्व सीटों पर पार्टी का प्रदर्शन खराब हुआ। इसके बाद रणनीति में बदलाव होता दिख रहा है।

  • महाराष्ट्र में राज्यसभा चुनाव का ऐलान: नामांकन से लेकर मतदान तक की पूरी जानकारी एक जगह

    महाराष्ट्र में राज्यसभा चुनाव का ऐलान: नामांकन से लेकर मतदान तक की पूरी जानकारी एक जगह

     मुंबई

    महाराष्ट्र में राजनीतिक हलचल तेज हो गई है, क्योंकि राज्य से सात राज्यसभा सीटों के लिए चुनाव की अधिसूचना बुधवार को जारी कर दी गई है। सदस्यों के चुनाव के लिए 16 मार्च को होगा। इस बात की जानकारी रिटर्निंग ऑफिसर विलास अठवाले ने दी। उन्होंने बताया कि नामांकन दाखिल करने की अंतिम तारीख 5 मार्च है। इसके बाद 6 मार्च को नामांकनों की जांच (स्क्रूटनी) होगी और 9 मार्च तक उम्मीदवार अपना नाम वापस ले सकते हैं।

    बता दें कि महाराष्ट्र विधानसभा के सदस्य इस चुनाव में मतदान करेंगे। राज्य से सात राज्यसभा सांसदों की अवधि अप्रैल में समाप्त हो रही है, जिसमें एनसीपी प्रमुख शरद पवार भी शामिल हैं। अभी तक पवार ने यह स्पष्ट नहीं किया है कि वे पुनः उम्मीदवार होंगे या नहीं। ऐसे में यदि आवश्यकता हुई, तो 16 मार्च को सुबह 9 बजे से शाम 4 बजे तक विधान भवन में मतदान होगा और उसके बाद मतगणना की जाएगी।

    राज्यसभा का चुनाव कैसे होता है?
    राज्यसभा के सदस्य का चुनाव उस राज्य की विधानसभा के चुने हुए विधायक करते हैं, जिस राज्य से वह उम्मीदवार है। राज्यसभा चुनाव की प्रक्रिया लोकसभा और विधानसभा चुनाव से काफी अलग है, क्योंकि इस सदन के लिए मतदान सीधे जनता नहीं करती, बल्कि जनता के द्वारा चुने हुए प्रतिनिधि करते हैं। राज्यसभा के सदस्यों का कार्यकाल छह साल का होता है। राज्यसभा चुनावों के नतीजों के लिए एक फॉर्मूला भी तय किया गया है।

    जीतने के लिए कितने वोट की जरूरत?
    गौरतलब है कि महाराष्ट्र के फॉर्मूला के हिसाब से यहां किसी उम्मीदवार को जिताने के लिए कम से कम 37 विधायकों के समर्थन की जरूरत होगी। विधानसभा के मौजूदा संख्याबल के मुताबिक सत्ताधारी गठबंधन सात में छह सीटों  पर आसानी से जीत दर्ज कर सकता है। विपक्ष एकजुट नहीं होता तो सातवें उम्मीदवार के लिए मुकाबला रोचक हो सकता है।  

    राष्ट्रीय गोलमेज सम्मेलन में मिलकर काम करने का संकल्प लिया
    भारत निर्वाचन आयोग और राज्य चुनाव आयोगों का राष्ट्रीय गोलमेज सम्मेलन मंगलवार 24 फरवरी 2026 को भारत मंडपम, नई दिल्ली में संपन्न हुआ। यह सम्मेलन 27 वर्षों के बाद आयोजित किया गया था और इसमें 30 राज्यों के राज्य चुनाव आयोगों ने भाग लिया। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की अध्यक्षता में हुए इस सम्मेलन में चुनाव आयुक्त डॉ. सुखबीर सिंह संधू और डॉ. विवेक जोशी भी उपस्थित रहे।

    सम्मेलन में राज्य चुनाव आयुक्तों ने इस आयोजन की सराहना की और इसे सफल बताया। सभी ने हर साल ऐसे राष्ट्रीय गोलमेज सम्मेलन आयोजित करने का संकल्प लिया। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के नेतृत्व में सभी ने राष्ट्रीय घोषणा 2026 को अपनाया। घोषणा में जोर दिया गया कि शुद्ध मतदाता सूची तैयार करना लोकतंत्र की मजबूत नींव है और चुनावों का पारदर्शी तथा सुचारू संचालन लोकतांत्रिक संस्थाओं को और मजबूत बनाता है।

  • राज्यसभा चुनाव: नितिन नवीन को टिकट, BJP की घोषणा के बाद बिहार के दूसरे कैंडिडेट पर नजर

    राज्यसभा चुनाव: नितिन नवीन को टिकट, BJP की घोषणा के बाद बिहार के दूसरे कैंडिडेट पर नजर

    नई दिल्ली
    भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन राज्यसभा जाएंगे। वे भाजपा के बिहार से राज्यसभा उम्मीदवार बनाए गए हैं। वहीं, भाजपा के बिहार से दूसरे कैंडिडेट के नाम चौंकाने वाला है। नितिन नवीन के साथ पार्टी ने दलित नेता शिवेश कुमार राम को प्रत्याशी बनाया है। दोनों नेता 5 मार्च को अपना नामांकन करेंगे। पटना के रहने वाले नितिन नवीन हाल ही में भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष चुने गए थे। वे अभी पटना की बांकीपुर सीट से विधायक हैं। राज्यसभा चुनाव की घोषणा होने के बाद से उनके संसद जाने की चर्चा तेज थी। अब भाजपा ने उम्मीदवार सूची जारी कर स्थिति साफ कर दी है।

    दूसरी सीट पर भाजपा का दलित दांव
    वहीं, भाजपा ने बिहार से अपने कोटे की दूसरी सीट से शिवेश राम को उम्मीदवार बनाया है। वे दलित वर्ग के नेता हैं। पार्टी ने उन्हें लोकसभा चुनाव 2024 में सासाराम से टिकट दिया था। मगर वे चुनाव हार गए थे। अब उन्हें राज्यसभा भेजा जा रहा है। इससे पहले, भोजपुरी स्टार पवन सिंह को भी राज्यसभा उम्मीदवार बनाए जाने की अटकलें चल रही थीं, मगर उनका नाम कैंडिडेट लिस्ट में नहीं आया।

    उपेंद्र कुशवाहा का भी फिर से राज्यसभा जाना तय
    भाजपा के बिहार अध्यक्ष संजय सरावगी ने मंगलवार को मीडिया से बातचीत में कहा कि नितिन नवीन और शिवेश राम के अलावा राष्ट्रीय लोक मोर्चा के चीफ उपेंद्र कुशवाहा भी एनडीए के राज्यसभा उम्मीदवार होंगे। जबकि दो अन्य सीटों पर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की पार्टी जेडीयू से नाम आना अभी बाकी है। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने बिहार की सभी 5 सीटों पर एनडीए प्रत्याशियों की जीत का दावा किया है।

    16 मार्च को राज्यसभा चुनाव की वोटिंग
    बिहार की 5 समेत देश भर की 37 राज्यसभा सीटों पर नामांकन की प्रक्रिया चल रही है। 5 मार्च को नॉमिनेशन का आखिरी दिन है। 16 मार्च को राज्यसभा चुनाव के लिए मतदान होगा। बिहार में जो 5 राज्यसभा सीटें खाली हो रही हैं, उनपर अभी 3 एनडीए और दो आरजेडी के सांसद हैं। हालांकि, बिहार विधानसभा में मौजूदा संख्याबल के हिसाब से एनडीए की चार सीटों पर जीत पक्की है। पांचवीं सीट जीतने के लिए उसे 3 अतिरिक्त विधायकों का समर्थन चाहिए। विपक्ष से आरजेडी ने भी उम्मीदवार उतारने की घोषणा कर दी है। महागठबंधन के पास भी पर्याप्त संख्याबल नहीं है। ऐसे में 16 मार्च को मतदान के दौरान क्रॉस वोटिंग के आसार नजर आ रहे हैं।

  • कांग्रेस के LoP पद पर संकट, ठाकरे से 1 सीट को लेकर रार, पीछे हटने की अपील

    कांग्रेस के LoP पद पर संकट, ठाकरे से 1 सीट को लेकर रार, पीछे हटने की अपील

    मुंबई 

    महाराष्ट्र में विपक्ष के पास जीतने योग्य एक ही राज्यसभा सीट है, जिसपर कांग्रेस और शिवसेना यूबीटी दोनों ही दावा पेश कर चुके हैं। अब खबरें हैं कि कांग्रेस ने उद्धव ठाकरे से सीट पर दावेदारी छोड़ने की अपील की है। हालांकि, इसे लेकर आधिकारिक तौर पर कुछ नहीं कहा गया है। कहा जा रहा है कि कांग्रेस के लिए यह सीट राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष का पद बनाए रखने के लिए बेहद जरूरी है। राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष कांग्रेस सांसद मल्लिकार्जुन खरगे हैं।

    रिपोर्ट के अनुसार, महाराष्ट्र कांग्रेस प्रभारी और केरल विधायक रमेश चेन्नीथला ने ठाकरे से बात की थी। उन्होंने ठाकरे से कहा कि यह सीट कांग्रेस को दी जानी चाहिए, जिसके बदले में शिवसेना यूबीटी को एमएलसी सीट दी जाएगी। खास बात है कि राज्यसभा सीट पर नामांकन की आखिरी तारीख 5 मार्च है। इसपर नतीजों का ऐलान 16 मार्च को होगा।
    इन नेताओं का पूरा हो रहा कार्यकाल

    अप्रैल में राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एसपी) के प्रमुख शरद पवार, शिवसेना यूबीटी नेता प्रियंका चतुर्वेदी, राकांपा (एसपी) की फौजिया खान, आरपीआई (आठवले) के रामदास आठवले, भाजपा के भागवत कराड, कांग्रेस की रजनी पाटिल और राकांपा के धैर्यशील पाटिल का राज्यसभा कार्यकाल समाप्त हो जाएगा। सत्तारूढ़ महायुति के पक्ष में भारी बहुमत को देखते हुए एमवीए संसद के ऊपरी सदन और विधान परिषद में केवल एक-एक सदस्य को निर्वाचित कराने में सफल हो सकती है।
    क्या बात हुई

    रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से बताया गया कि चेन्नीथला ने ठाकरे को बताया कि महाराष्ट्र की यह एकमात्र सीट कांग्रेस के लिए बेहद जरूरी है। क्योंकि अगर कांग्रेस को यह सीट नहीं मिलती है, तो संभावनाएं हैं कि पार्टी नेता प्रतिपक्ष के पद पर दावा गंवा सकती है।

    सूत्र ने कहा, 'राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष के पद के लिए किसी भी विपक्षी दल को कुल सीटों का 10 फीसदी या कम से कम 25 सदस्य रखने होते हैं। मौजूदा स्थिति है कि कांग्रेस के पास संख्या बल 27 का है, लेकिन कई सांसद ऐसे हैं जिनका कार्यकाल समाप्त हो रहा है।ऐसे में 25 का आंकड़ा बनाए रखना चुनौती हो सकता है। ऐसे में एक राज्यसभा सीट भी अहम साबित हो सकती है।'

    उन्होंने कहा, 'इसके चलते कांग्रेस नेतृत्व ने उद्धव ठाकरे से इस मुद्दे पर नहीं अड़ने का अनुरोध किया है। इसके बदले में कांग्रेस शिवसेना यूबीटी को एक एमएलसी सीट देने के लिए तैयार है।'
    MVA के तीनों दलों की नजर

    खास बात है कि इस सीट पर महाविकास अघाड़ी के तीनों बड़े दलों की नजर है। एक ओर जहां आदित्य ठाकरे ने एक पोस्ट में कहा, 'राज्यसभा चुनाव के लिए हो रही वार्ता में कोई गतिरोध नहीं है; सभी दल एक-दूसरे के संपर्क में हैं। हमने एक राज्यसभा सीट पर अपना दावा पेश किया है, क्योंकि संख्यात्मक ताकत और एमवीए के लिए तय 'रोटेशन' नीति के अनुसार इस सीट पर शिवसेना यूबीटी को चुनाव लड़ना चाहिए।'

    वहीं, कांग्रेस की महाराष्ट्र इकाई के अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल ने 'पीटीआई-भाषा' से बातचीत में कहा कि उनकी पार्टी इस सीट से चुनाव लड़ने के अपने दावे पर अडिग है, लेकिन साथ ही उन्होंने कहा कि बातचीत चल रही है और विचार-विमर्श के बाद निर्णय लिए जाएंगे।

    इधर, वरिष्ठ राजनेता शरद पवार भी इस सीट के दावेदारों में शामिल बताए जा रहे हैं। खबर है कि उनकी बेटी और लोकसभा सांसद सुप्रिया सुले ने गठबंधन के साथियों से पिता का समर्थन करने की अपील की है।
    किसके पास कितनी संख्या

    शिवसेना यूबीटी के पास 20, कांग्रेस के पास 16 और राकंपा शरद पवार के पास 10 विधायकों का समर्थन है। हाल ही में शिवसेना यूबीटी के वरिष्ठ नेता संजय राउत ने कहा कि 16 मार्च को होने वाले चुनावों से पहले राज्यसभा की एकमात्र सीट को लेकर एमवीए के भीतर चर्चा हो रही है, लेकिन सबसे बड़ी विपक्षी पार्टी होने के नाते शिवसेना यूबीटी का रुख इस फैसले के लिए अहम होगा।

  • 4 उम्मीदवारों के नाम का हुआ ऐलान, जानें किसे मिला टिकट और कौन हैं कोयल मल्लिक

    4 उम्मीदवारों के नाम का हुआ ऐलान, जानें किसे मिला टिकट और कौन हैं कोयल मल्लिक

    कलकत्ता

     पश्चिम बंगाल की सत्ताधारी पार्टी तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने आगामी राज्यसभा चुनावों के लिए अपने चार उम्मीदवारों के नामों की घोषणा कर दी है। इस सूची में राजनीति, प्रशासनिक सेवा, कानून और सिनेमा जगत की जानी-मानी हस्तियों को जगह दी गई है। पार्टी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'X' पर जानकारी देते हुए बताया कि पूर्व डीजीपी राजीव कुमार, अभिनेता से नेता बने बाबुल सुप्रियो, मशहूर वकील मेनका गुरुस्वामी और बंगाली अभिनेत्री कोयल मल्लिक को संसद के उच्च सदन के लिए चुना गया है। यह घोषणा राज्य में होने वाले विधानसभा चुनावों से ठीक पहले की गई है, जिसे ममता बनर्जी का एक बड़ा मास्टरस्ट्रोक माना जा रहा है।

    कौन हैं TMC के ये 4 दिग्गज उम्मीदवार?

    पार्टी ने अलग-अलग क्षेत्रों के विशेषज्ञों को चुनकर एक संतुलित टीम बनाने की कोशिश की है:

    राजीव कुमार: राजीव कुमार बंगाल के प्रभावशाली पुलिस अधिकारी रहे हैं। उन्होंने जुलाई 2024 से लेकर 31 जनवरी 2026 को अपनी सेवानिवृत्ति तक राज्य के पुलिस महानिदेशक के रूप में कार्य किया। उनके प्रशासनिक अनुभव का लाभ पार्टी को दिल्ली में मिलेगा।

    बाबुल सुप्रियो: पूर्व केंद्रीय मंत्री और मशहूर गायक बाबुल सुप्रियो पहले भाजपा में थे, लेकिन बाद में उन्होंने TMC का दामन थाम लिया था। वे अपनी प्रखर वक्ता शैली के लिए जाने जाते हैं।

    कोयल मल्लिक: बंगाली सिनेमा की मशहूर अभिनेत्री कोयल मल्लिक को उम्मीदवार बनाकर TMC ने ग्लैमर और जन-अपील का कार्ड खेला है। उनके पिता रंजीत मल्लिक भी बंगाल के दिग्गज अभिनेता रहे हैं।

    मेनका गुरुस्वामी: सुप्रीम कोर्ट की वरिष्ठ वकील मेनका गुरुस्वामी ने IPAC मामले में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का प्रतिनिधित्व किया था। उनकी कानूनी समझ संसद में पार्टी के पक्ष को मजबूती देगी।

    विधानसभा चुनाव से पहले बड़ा संदेश

    TMC ने अपने उम्मीदवारों को बधाई देते हुए कहा है कि उन्हें इन नेताओं की नेतृत्व क्षमता और समर्पण पर पूरा भरोसा है। पार्टी ने उम्मीद जताई है कि ये चारों उम्मीदवार हर भारतीय के अधिकारों और सम्मान की रक्षा के लिए TMC की विरासत को आगे बढ़ाएंगे। विशेषज्ञों का मानना है कि चुनाव से ठीक पहले इन नामों का चयन करके ममता बनर्जी ने यह संदेश दिया है कि उनकी पार्टी हर वर्ग प्रशासन, कला और कानून के बुद्धिजीवियों को साथ लेकर चलने में विश्वास रखती है।

  • कर्नाटक सरकार पर योजनाओं का दबाव, डिप्टी सीएम शिवकुमार ने किया खुलासा

    कर्नाटक सरकार पर योजनाओं का दबाव, डिप्टी सीएम शिवकुमार ने किया खुलासा

    कर्नाटक
    कर्नाटक की कांग्रेस सरकार की पांच योजनाओं को लेकर उपमुख्यमंत्री शिवकुमार ने स्वीकार किया है कि यह सरकारी खजाने के ऊपर बोझ हैं। उन्होंने कहा कि इन योजनाओं को इस गारंटी के साथ तैयार किया गया था कि पैसा नागरिकों के हाथों में रहे, ताकि कठिन समय में उनका आत्मविश्वास कम न हो। उपमुख्यमंत्री ने जोर देकर कहा कि भले ही सरकार पर बोझ पड़ता हो, लेकिन वह इन योजनाओं को जारी रखेंगे।

    बेंगलुरू में मीडिया से बात करते हुए डिप्टी सीएम ने कहा कि राज्य की इन पांच गारंटी योजनाओं का मुख्य उद्देश्य राज्य की जनता को मानसिक रूप से मजबूत बनाना है। हालांकि उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि इन योजनाओं में से अपात्र और मृत लोगों को हटाए जाने की जरूरत है। सरकार लगातार इस संबंध में काम कर रही है। गौरतलब है कि उप मुख्यमंत्री जिन योजनाओं का जिक्र कर रहे थे उनमें गृह ज्योति योजना, जिसके अंतर्गत हर परिवार को 200 यूनिट बिजली मुफ्त दी जाती है। इसके अलावा, गृह लक्ष्मी, अन्न भाग्य, युवा निधि और शक्ति योजना जैसी योजनाएं शामिल हैं। यह योजनाएं मुख्यतः जनता को सीधा लाभ देती हैं। शिवकुमार ने स्वीकार कहा, "यह योजनाएं सरकार पर भले ही वित्तीय बोझ डाल सकती हैं, लेकिन सार्वजनिक कल्याण से समझौता नहीं किया जाएगा।"

    इसी बीच, परिवहन और मुजरा मंत्री रामलिंगा रेड्डी ने कहा कि विभाग ने आगामी राज्य बजट में 3,000 नई बसों की मांग की है ताकि बेड़े को मजबूत किया जा सके। यह मांग ‘शक्ति’ योजना के लागू होने के बाद बसों में यात्रियों की संख्या में तेज वृद्धि के बीच की गई है। रेड्डी ने सुझावों को खारिज किया कि मुफ्त यात्रा कार्यक्रम परिवहन कंपनियों के घाटे का कारण है। उन्होंने कहा, “शक्ति योजना परिवहन कंपनियों के घाटे का कारण नहीं है। परिवहन कंपनी भाजपा सरकार के दौरान भी घाटे में थी।” उन्होंने कहा कि सार्वजनिक परिवहन को लाभ कमाने के बजाय सेवा के रूप में चलाया जा रहा है।

    उन्होंने यह भी कहा, “हम 35% लाभ कमा रहे हैं। अगर घाटा भी होगा तो हम बसें चलाएंगे। यहां लाभ कमाने का कोई उद्देश्य नहीं है। निजी कंपनियां लाभ न होने पर बसें नहीं चलातीं।” आपको बता दें, कर्नाटक सरकार द्वारा कई लाभकारी योजनाएं चलाई जा रही हैं। मुख्य तौर पर शक्ति जैसी योजनाएं, जिसमें गैर लग्जरी सरकारी बसों में महिलाओं को फ्री टिकट की व्यवस्था है। विपक्ष का आरोप है कि सरकार की इस स्कीम से राज्य परिवहन विभाग को घाटा हुआ है।