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  • क्या भारत बनेगा वीटो पावर वाला देश? रूस-चीन के समर्थन के बाद UN चीफ ने दिया बड़ा संकेत

    क्या भारत बनेगा वीटो पावर वाला देश? रूस-चीन के समर्थन के बाद UN चीफ ने दिया बड़ा संकेत

    नईदिल्ली 
    दुनिया की राजनीति में भारत की ताकत लगातार बढ़ रही है और अब इसकी गूंज संयुक्त राष्ट्र के सबसे बड़े मंच पर भी सुनाई दे रही है. ब्रिक्स शिखर सम्मेलन 2026 में संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने सुरक्षा परिषद में सुधार और उसके विस्तार की मांग का खुलकर समर्थन किया है. उन्होंने साफ कहा कि आज की दुनिया 1945 वाली दुनिया नहीं है. तब जो आर्थिक, जनसांख्यिकीय और भू-राजनीतिक तस्वीर थी, वह अब पूरी तरह बदल चुकी है. ऐसे में वैश्विक संस्थाओं की संरचना भी आज की दुनिया के हिसाब से बदलनी चाहिए. सबसे खास बात यह है कि गुटेरेस ने भारत का नाम लेकर कहा कि वह सुरक्षा परिषद में विस्तार की मांग के सबसे आगे रहने वाले देशों में है. यानी जिस स्थायी सदस्यता और वीटो अधिकार की मांग भारत लंबे समय से करता रहा है, उसे अब एक और बड़ा अंतरराष्ट्रीय समर्थन मिला है. मामला यहीं खत्म नहीं होता. ब्रिक्स के नई दिल्ली घोषणा-पत्र में रूस और चीन ने भी भारत और ब्राजील को संयुक्त राष्ट्र में बड़ी भूमिका देने की मांग का समर्थन दोहराया है. दोनों देश सुरक्षा परिषद के स्थायी सदस्य हैं और इनके पास अभी वीटो अधिकार भी है. ऐसे में उनका भारत के पक्ष में खड़ा होना काफी अहम माना जा रहा है। 

    वहीं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में वैश्विक दक्षिण को सिर्फ नियम मानने वाला नहीं, बल्कि नियम बनाने वाला बनने की बात कही थी. गुटेरेस ने भी इसी सोच को आगे बढ़ाया. इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार उन्होंने कहा कि दुनिया तेजी से बहुध्रुवीय व्यवस्था की तरफ बढ़ रही है. अब सवाल सिर्फ यह नहीं है कि भारत को संयुक्त राष्ट्र में ज्यादा ताकत मिलेगी या नहीं. असली सवाल यह है कि क्या आने वाले समय में भारत को सुरक्षा परिषद की स्थायी सीट के साथ वीटो का अधिकार भी मिलेगा?

    संयुक्त राष्ट्र प्रमुख ने भारत की मांग को बताया अहम, दुनिया बदलने की दी दलील
    एंटोनियो गुटेरेस ने ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में सुरक्षा परिषद के विस्तार को समय की जरूरत बताया. उनका कहना था कि मौजूदा संस्थागत ढांचा उस दुनिया को नहीं दर्शाता जिसमें हम आज रह रहे हैं. 1945 में जब संयुक्त राष्ट्र की स्थापना हुई थी, तब वैश्विक शक्ति संतुलन अलग था. आज एशिया, अफ्रीका और लैटिन अमेरिका की भूमिका कहीं ज्यादा बढ़ चुकी है. गुटेरेस ने कहा कि बदलती आर्थिक, जनसांख्यिकीय और भू-राजनीतिक वास्तविकताओं को वैश्विक संस्थाओं में भी जगह मिलनी चाहिए. उन्होंने खास तौर पर कहा कि भारत इस मांग को आगे बढ़ाने में सबसे आगे रहा है। 

    रूस-चीन ने भी भारत के लिए खोला बड़ा रास्ता
    ब्रिक्स के नई दिल्ली घोषणा-पत्र में रूस और चीन ने भारत और ब्राजील की संयुक्त राष्ट्र में बड़ी भूमिका की आकांक्षा का समर्थन किया. घोषणा-पत्र में संयुक्त राष्ट्र में व्यापक सुधार की जरूरत बताई गई है. इसमें सुरक्षा परिषद को ज्यादा लोकतांत्रिक, प्रतिनिधित्वपूर्ण, प्रभावी और सक्षम बनाने की बात कही गई. साथ ही विकासशील देशों की सदस्यता बढ़ाने पर जोर दिया गया है. चीन और रूस ने कहा कि भारत और ब्राजील जैसे देशों को अंतरराष्ट्रीय मामलों में ज्यादा बड़ी भूमिका मिलनी चाहिए. खासकर सुरक्षा परिषद में उनकी भागीदारी बढ़ाने की बात कही गई है. भारत के लिए यह इसलिए भी अहम है क्योंकि चीन खुद सुरक्षा परिषद का स्थायी सदस्य है। 

    भारत को अभी वीटो नहीं मिला, लेकिन रास्ता जरूर मजबूत हुआ
    यहां एक बात साफ समझना जरूरी है. गुटेरेस ने यह ऐलान नहीं किया है कि भारत को तत्काल वीटो अधिकार मिलने जा रहा है. सुरक्षा परिषद में सुधार और भारत को स्थायी सदस्य बनाने की मांग का समर्थन जरूर किया गया है. मौजूदा व्यवस्था में पांच स्थायी सदस्य हैं चीन, फ्रांस, रूस, ब्रिटेन और अमेरिका. इन पांचों के पास वीटो अधिकार है. यह व्यवस्था 1945 में सुरक्षा परिषद की स्थापना के समय से चली आ रही है. भारत अगर भविष्य में स्थायी सदस्य बनता है तो वीटो का सवाल अलग से तय होगा. फिलहाल बड़ा घटनाक्रम यह है कि भारत की दावेदारी को वैश्विक दक्षिण, ब्रिक्स और अब संयुक्त राष्ट्र प्रमुख की तरफ से भी मजबूत समर्थन मिलता दिख रहा है। 

    PM मोदी ने कहा- वैश्विक दक्षिण सिर्फ नियम मानने वाला नहीं
    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में वैश्विक दक्षिण की भूमिका को लेकर बड़ा संदेश दिया था. उन्होंने कहा था कि विकासशील देशों को सिर्फ बनाए गए नियमों का पालन करने वाला नहीं रहना चाहिए. उन्हें नियम बनाने की प्रक्रिया में भी सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए. गुटेरेस के बयान को इसी दिशा में देखा जा रहा है. उनका कहना था कि दुनिया बहुध्रुवीय व्यवस्था की तरफ बढ़ रही है. ऐसी स्थिति में वैश्विक संस्थाओं में भी संतुलन और समानता दिखाई देनी चाहिए. सुरक्षा परिषद में सुधार इसी बड़े बदलाव का हिस्सा हो सकता है। 

    गुटेरेस ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता से लेकर गाजा तक दुनिया के सामने रखी चुनौती

        संयुक्त राष्ट्र महासचिव ने सिर्फ सुरक्षा परिषद सुधार की बात नहीं की. उन्होंने दुनिया के सामने मौजूद कई बड़ी चुनौतियों का जिक्र किया. उन्होंने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता आने वाले वर्षों में विकास की रफ्तार को कई गुना बढ़ा सकती है. लेकिन इसका फायदा फिलहाल कुछ कंपनियों और कुछ देशों तक ज्यादा सीमित है. अगर इसे नियंत्रित नहीं किया गया तो कृत्रिम बुद्धिमत्ता की खाई आय, अवसर, सुरक्षा और संप्रभुता की खाई को और बढ़ा सकती है. उन्होंने विकासशील देशों के लिए वित्तीय मदद बढ़ाने की भी बात की। 

        गुटेरेस ने जलवायु न्याय का मुद्दा भी उठाया. उन्होंने विकसित देशों से अपने वादे पूरे करने की अपील की. इसके अलावा उन्होंने गाजा, मध्य पूर्व, यूक्रेन और सूडान समेत दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में शांति की जरूरत बताई. उनका कहना था कि सभी देशों को संयुक्त राष्ट्र के घोषणापत्र और अंतरराष्ट्रीय कानून के सिद्धांतों का सम्मान करना चाहिए। 

    क्या भारत को मिलेगा वीटो? अब पूरी दुनिया की नजर इस सवाल पर
    भारत के लिए यह घटनाक्रम इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि सुरक्षा परिषद में स्थायी सदस्यता की उसकी मांग नई नहीं है. अब उसे रूस और चीन का समर्थन मिला है. ब्रिक्स के मंच से भी आवाज मजबूत हुई है और संयुक्त राष्ट्र महासचिव ने भी सुरक्षा परिषद में विस्तार की जरूरत को स्वीकार किया है. लेकिन स्थायी सीट और खासकर वीटो अधिकार हासिल करना अभी लंबी कूटनीतिक प्रक्रिया का हिस्सा है. फिलहाल इतना जरूर कहा जा सकता है कि भारत की दावेदारी पहले से ज्यादा मजबूती के साथ वैश्विक मंच पर मौजूद है. दुनिया बहुध्रुवीय व्यवस्था की तरफ बढ़ रही है और इसी बदलाव में भारत अपनी भूमिका को और बड़ा करने की कोशिश कर रहा है। 

  • हॉर्मुज संकट के बीच भारत की नई ऊर्जा रणनीति, गैस पावर से बिजली उत्पादन 80% बढ़ा

    हॉर्मुज संकट के बीच भारत की नई ऊर्जा रणनीति, गैस पावर से बिजली उत्पादन 80% बढ़ा

    नई दिल्ली

    एक तरफ यूएस और ईरान के बीच चल रहे युद्ध की वजह से हॉर्मुज पर फिर तनाव बढ़ गया है. ऐसे में दुनियाभर को फिर गैस और बिजली की टेंशन सताने लगी है. लेकिन इसी बीच भारत ने अब बिजली के प्रोडक्शन को बढ़ाने के लिए ऐसा तरीका निकाल लिया है, जिससे बिजली का प्रोडक्शन बढ़ा है. देशभर में सितंबर की शुरुआत से बिजली की मांग तेजी से बढ़ी है. खासकर शाम के समय जब लोग काम से घर लौटते हैं, तब बिजली की खपत अचानक से बढ़ जाती है. इसी समय सोलर पावर का प्रोडक्शन भी कम हो जाता है, जिससे बिजली की कमी और बढ़ जाती है. इस स्थिति से निपटने के लिए बिजली कंपनियां अब गैस से चलने वाले पावर प्लांट्स का ज्यादा इस्तेमाल कर रही हैं. 1 से 9 सितंबर के बीच गैस आधारित बिजलीघरों ने 1,088.64 मिलियन यूनिट बिजली बनाई. पिछले साल इसी अवधि में प्रोडक्शन 603.70 मिलियन यूनिट था. यानी एक साल में गैस से बिजली प्रोडक्शन करीब 80 फीसदी बढ़ गया है। 

    बिजली की जरूरत ने बढ़ाई चिंता
    सितंबर में भी कई इलाकों में गर्मी और उमस बनी हुई है. ऐसे में घरों और कारोबारों में बिजली की खपत बढ़ी है. 9 सितंबर को देश में बिजली की अधिकतम मांग 267 गीगावॉट तक पहुंच गई. इस दौरान रात में करीब 7.7 गीगावॉट बिजली की कमी दर्ज हुई. अगले दिन यानी 10 सितंबर को मांग और बढ़कर 269 गीगावॉट हो गई. हालांकि, उस दिन बिजली की कमी घटकर करीब 6.1 गीगावॉट रह गई. शाम के समय यह समस्या इसलिए ज्यादा होती है क्योंकि सूरज ढलने के साथ सोलर पावर का प्रोडक्शन तेजी से कम हो जाता है. दूसरी तरफ घरों में पंखे, एसी, लाइट और दूसरे उपकरणों का इस्तेमाल बढ़ जाता है। 

    गैस प्लांट से कैसे मिल रही मदद?
    गैस से चलने वाले बिजलीघरों की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इन्हें जरूरत के हिसाब से जल्दी चालू किया जा सकता है और इनका प्रोडक्शन भी तेजी से बढ़ाया या घटाया जा सकता है. यही वजह है कि बिजली की अचानक बढ़ी मांग के समय ये प्लांट काफी काम आते हैं. देश में गैस आधारित बिजली प्रोडक्शन की कुल कैपेसिटी करीब 20.1 गीगावॉट है. इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, एक सीनियर सरकारी अधिकारी के मुताबिक, फिलहाल शाम के समय बिजली की कमी को संभालने के लिए करीब 4.5 से 5.5 गीगावॉट गैस आधारित बिजली का इस्तेमाल किया जा रहा है। 

    कोयला और हाइड्रो से नहीं मिल रही पूरी मदद
    बिजली की बढ़ती जरूरत के बीच कोयला आधारित पावर प्लांट भी लगभग अपनी पूरी क्षमता से चल रहे हैं. ऐसे में उनसे अचानक और ज्यादा बिजली पैदा करवाना आसान नहीं है. वहीं, बारिश की कमी का असर हाइड्रो पावर यानी पानी से बनने वाली बिजली पर भी पड़ा है. दक्षिण और पश्चिम भारत के कई इलाकों में जलाशयों का जलस्तर कम है. इससे आने वाले दिनों में हाइड्रो पावर का प्रोडक्शन और घटने की आशंका है. ऐसे में बिजली की पीक डिमांड को पूरा करने के लिए गैस पावर की भूमिका और अहम हो गई है। 

    महंगी गैस के बावजूद बढ़ी खरीद
    बिजली बनाने वाली कंपनियों ने गैस की खरीद भी बढ़ा दी है. 1 से 10 सितंबर के बीच पावर सेक्टर की ओर से स्पॉट मार्केट में 30,53,300 MMBtu से ज्यादा नेचुरल गैस खरीदी गई. पिछले साल इसी अवधि में खरीद करीब 3,75,000 MMBtu थी. हालांकि, इस दौरान गैस की कीमत भी काफी बढ़ी. औसत स्पॉट गैस कीमत पिछले साल के 1,013 रुपये प्रति MMBtu से बढ़कर 2,420 रुपये प्रति MMBtu हो गई. यानी कीमत में करीब 139 फीसदी का इजाफा हुआ. इसके बावजूद बिजली की जरूरत पूरी करने के लिए गैस प्लांट्स का इस्तेमाल बढ़ाया जा रहा है। 

  • बंगाल में 5 साल बाद BJP कार्यकर्ता का शव कब्र से बाहर, ममता की जीत के बाद हुई थी मौत; जानें मामला

    बंगाल में 5 साल बाद BJP कार्यकर्ता का शव कब्र से बाहर, ममता की जीत के बाद हुई थी मौत; जानें मामला

    कोलकाता

    पश्चिम बंगाल में भाजपा के एक कार्यकर्ता का शव करीब 5 साल बाद कब्र से निकाला गया है। जानकारी के मुताबिक कोर्ट के आदेश के बाद 2021 में संदेशखाली में चुनाव बाद हुई हिंसा में मारे गए कार्यकर्ता के कंकाल के अवशेष पांच साल बाद कब्र से निकाले गए हैं। पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने सोमवार को इसकी पुष्टि की है।

    अब अवशेष का पोस्टमार्टम कराया जाएगा। नाजाट थाने के एक अधिकारी ने बताया कि पूरी प्रक्रिया की वीडियोग्राफी की गई है और मौत के कारण का पता लगाने के लिए अवशेषों को पोस्टमार्टम और फोरेंसिक जांच के लिए भेज दिया गया है। परिवार ने जरूरत पड़ने पर CBI से जांच कराने और मौत के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है।

    2021 में क्या हुआ था?
    अधिकारी के मुताबिक 2021 के विधानसभा चुनाव के नतीजे घोषित होने के दिन झनझनिया गांव के निवासी आस्तिक चंद्र दास पर कथित तौर पर विजय जुलूस निकाल रहे तृणमूल कांग्रेस के समर्थकों ने हमला किया था। उनके बेटे सुब्रत दास ने आरोप लगाया कि हमले में उनके पिता गंभीर रूप से घायल हो गए थे और उन्हें इलाज के लिए अस्पताल ले जाने की इजाजत भी नहीं दी गई।

    इसके बाद उनकी घर पर ही मौत हो गई। परिवार ने यह भी आरोप लगाया कि उनके घर के बाहर पुलिसकर्मियों को तैनात किया गया था और उन्हें शव को दफनाने के लिए मजबूर किया गया। परिवार के मुताबिक शव का पोस्टमार्टम भी नहीं कराया गया था। पुलिस अधिकारी ने बताया कि राज्य में ममता बनर्जी की सरकार के हटने और भाजपा की सरकार बनने के बाद परिवार ने एक नई शिकायत दर्ज कराई। इसके बाद अदालत ने शव को कब्र से निकालने का आदेश दिया। रविवार को मजिस्ट्रेट और परिवार के सदस्यों की मौजूदगी में कंकाल के अवशेष कब्र से निकाले गए।

    जबरन शव दफनाने का आरोप
    परिवार ने यह भी आरोप लगाया कि उनके घर के बाहर पुलिसकर्मियों को तैनात किया गया था और उन्हें शव को दफनाने के लिए मजबूर किया गया। परिवार के मुताबिक, शव का पोस्टमार्टम भी नहीं कराया गया था। पुलिस अधिकारी ने बताया कि राज्य में सत्ता परिवर्तन के बाद परिवार ने एक नई शिकायत दर्ज कराई, जिसके बाद अदालत ने शव को कब्र से निकालने का आदेश दिया।

    फरेंसिक जांच को भेजे गए अवशेष
    अधिकारियों ने कहा कि रविवार को मजिस्ट्रेट और परिवार के सदस्यों की मौजूदगी में कंकाल के अवशेष कब्र से निकाले गए। नाजाट थाने के एक अन्य अधिकारी ने बताया कि पूरी प्रक्रिया की वीडियोग्राफी की गई और मौत के कारण का पता लगाने के लिए अवशेषों को पोस्टमार्टम तथा फोरेंसिक जांच के लिए भेज दिया गया है।

    परिवार ने जरूरत पड़ने पर केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) से विस्तृत जांच कराने और मौत के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है। भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष सामिक भट्टाचार्य ने कहा कि यह घटना 2021 के विधानसभा चुनाव के बाद भाजपा कार्यकर्ताओं को कथित तौर पर झेलनी पड़ी ज्यादतियों का प्रमाण है। उस चुनाव में टीएमसी ने बड़ी जीत दर्ज की थी।

    उन्होंने कहा, कि टीएमसी के शासन में आतंक का माहौल था और पुलिस मूकदर्शक बनी रही। हमें पता है कि न्याय होगा और इसके लिए जिम्मेदार लोगों को कड़ी सजा मिलेगी। पश्चिम बंगाल के उत्तर 24 परगना जिले का एक गांव संदेशखाली 2024 में उस समय राष्ट्रीय सुर्खियों में आया था, जब बड़ी संख्या में महिलाओं ने स्थानीय टीएमसी नेता शाहजहां शेख पर यौन उत्पीड़न के आरोप लगाते हुए विरोध प्रदर्शन किए थे।

    भाजपा हुई हमलावर
    इस बीच भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष सामिक भट्टाचार्य ने कहा है कि यह घटना 2021 के विधानसभा चुनाव के बाद भाजपा कार्यकर्ताओं को झेलनी पड़ी ज्यादतियों का प्रमाण है। उन्होंने कहा, ''टीएमसी के शासन में आतंक का माहौल था और पुलिस मूकदर्शक बनी रही। हमें पता है कि न्याय होगा और इसके लिए जिम्मेदार लोगों को कड़ी सजा मिलेगी।''

  • अमित शाह के UCC ऐलान के बाद JDU एक्टिव, संजय झा गृह मंत्री से करेंगे मुलाकात; रखेंगे पार्टी का पक्ष

    अमित शाह के UCC ऐलान के बाद JDU एक्टिव, संजय झा गृह मंत्री से करेंगे मुलाकात; रखेंगे पार्टी का पक्ष

    नईदिल्ली 

    समान नागरिक संहिता यानी UCC को लेकर बिहार में एनडीए के भीतर शुरू हुई बयानबाजी के बीच जेडीयू ने बड़ा बयान दिया है.जेडीयू के राष्ट्रीय प्रवक्ता राजीव रंजन ने बताया कि पार्टी के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा UCC के मसले पर जल्द ही केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात करेंगे. बता दें कि अमित शाह के 21 राज्यों में 2029 से पहले UCC लागू करने वाले बयान के बाद बिहार में दो अलग-अलग सुर सुनाई दिए. जदयू विधायक श्याम रजक ने कहा बिहार में UCC किसी कीमत पर लागू नहीं होगा. वहीं सरकार में मंत्री संतोष सुमन ने कहा अमित शाह ने कहा है तो अच्छी बात होगी, लागू हो सकता है. बताया जा रहा है कि अब इस खींचतान को खत्म करने के लिए संजय झा मोर्चा संभालेंगे। 

    UCC पर अमित शाह के ऐलान के बाद JDU की पहल
    बता दें कि हाल में ही केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने हाल ही में कहा था कि 2029 से पहले भाजपा और भाजपा नेतृत्व वाले एनडीए शासित सभी 21 राज्यों में समान नागरिक संहिता लागू की जाएगी. इस बयान के बाद बिहार में UCC को लेकर राजनीतिक चर्चा तेज हो गई है. वहीं जेडीयू के विधायक श्याम रजक ने साफ-साफ कह दिया था कि जदयू बिहार में यूसीसी किसी भी कीमत पर लागू नहीं होने देगी। 

    लेकिन, अब जब जेडीयू के शीर्ष नेतृत्व से कहा गया है कि अमित शाह से मुलाकात करके पार्टी अपना पक्ष रखेगी तो इसको डैमेज कंट्रोल के तौर पर देखा जा रहा है. दरअसल, जदयू का मानना है कि UCC जैसे संवेदनशील मुद्दे पर बिना सभी समाजों से बातचीत के फैसला नहीं होना चाहिए. जेडीयू ने स्पष्ट किया है कि पार्टी इस मुद्दे पर केंद्रीय नेतृत्व से बातचीत करेगी. जेडीयू के राष्ट्रीय प्रवक्ता राजीव रंजन ने कहा कि पार्टी के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा जल्द ही अमित शाह से UCC के मसले पर बातचीत करेंगे। 

    संजय झा अमित शाह के सामने रखेंगे पार्टी का पक्ष
    राजीव रंजन के बयान से साफ है कि जेडीयू इस मुद्दे को सार्वजनिक बयानबाजी तक सीमित रखने के बजाय गठबंधन के शीर्ष नेतृत्व के साथ बातचीत के जरिए आगे बढ़ाना चाहती है. संजय झा की अमित शाह से मुलाकात में बिहार की स्थिति और पार्टी के रुख पर चर्चा होने की संभावना है. बता दें कि जेडीयू पहले ही संकेत दे चुकी है कि संसद में किसी विधेयक का समर्थन करना और उसे अपने राज्य में लागू करने का फैसला करना दो अलग-अलग विषय हैं। 

    बिहार में UCC को लेकर JDU का रुख अलग
    जेडीयू के वरिष्ठ नेता श्याम रजक ने हाल ही में साफ कहा था कि बिहार में UCC लागू नहीं होगा. उनका कहना था कि पार्टी ने संसद में कानून का समर्थन जरूर किया था, लेकिन उसी समय यह भी स्पष्ट कर दिया था कि बिहार में इसे लागू नहीं किया जाएगा. ऐसे में संजय झा की अमित शाह से प्रस्तावित मुलाकात को बिहार के संदर्भ में महत्वपूर्ण माना जा रहा है. यह मुलाकात गठबंधन के भीतर इस संवेदनशील मुद्दे पर समन्वय की कोशिश भी हो सकती है। 

  • महंगाई का फिर लगा जोरदार झटका! अगस्त में तेल-बिजली और खाद्य वस्तुओं की कीमतों में बढ़ोतरी

    महंगाई का फिर लगा जोरदार झटका! अगस्त में तेल-बिजली और खाद्य वस्तुओं की कीमतों में बढ़ोतरी

    नई दिल्ली

    भारत में थोक महंगाई (WPI) अगस्त में बढ़कर 9.92 फीसदी पर पहुंच गई है. जुलाई में यह आंकड़ा 9.78 फीसदी था. यानी एक महीने में थोक महंगाई में 0.14 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है. सरकार की ओर से सोमवार को जारी आंकड़ों के मुताबिक, खाने-पीने की चीजों, तैयार सामान और ईंधन-बिजली से जुड़ी कीमतों में तेजी ने महंगाई को ऊपर धकेला है. खास बात यह है कि ईंधन और बिजली की महंगाई बाकी प्रमुख श्रेणियों के मुकाबले काफी ज्यादा रही। 

    खाने-पीने की चीजों की कीमतों में भी अगस्त के दौरान दबाव बढ़ा. फूड इंडेक्स में थोक महंगाई अगस्त में 7.05 फीसदी रही, जबकि जुलाई में यह 6.65 फीसदी थी. यानी एक महीने में खाद्य महंगाई में 0.40 फीसदी की बढ़ोतरी हुई. महंगाई बढ़ने में मिनरल ऑयल, खाद्य वस्तुएं और खाद्य उत्पादों का निर्माण जैसी श्रेणियों की अहम भूमिका रही. पश्चिम एशिया में तनाव और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से जुड़े घटनाक्रमों के बीच वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल और उर्वरक की लागत बढ़ने का असर भी कीमतों पर पड़ा है। 

    मैन्युफैक्चर्ड आइटम्स में तेजी

    अगस्त में मैन्युफैक्चर्ड आइटम्स की थोक महंगाई 8.37 फीसदी रही. जुलाई में यह 8.29 फीसदी थी. यानी इस श्रेणी में भी महंगाई बढ़ी है. सरकार के आंकड़ों के मुताबिक, बेसिक मेटल्स का निर्माण, नॉन-फूड आर्टिकल्स और केमिकल व केमिकल प्रोडक्ट्स का निर्माण अगस्त में थोक कीमतों पर दबाव बढ़ाने वाले प्रमुख क्षेत्रों में शामिल रहे। 

    फ्यूल-पावर में ज्यादा महंगाई
    थोक महंगाई के आंकड़े में सबसे ज्यादा दबाव फ्यूल और पावर से आया. इस श्रेणी में अगस्त की महंगाई दर 22.93 फीसदी रही. यह दर फूड और मैन्युफैक्चर्ड आइटम्स की तुलना में काफी ज्यादा है. मिनरल ऑयल की कीमतों में बदलाव का भी इस श्रेणी पर असर पड़ा है. ईंधन की लागत बढ़ने का असर आगे ट्रांसपोर्ट और उत्पादन लागत पर भी पड़ सकता है, जिसका प्रभाव दूसरी वस्तुओं की कीमतों पर दिखाई दे सकता है। 

    महंगाई बढ़ने की बड़ी वजहें ये रहीं
    वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय के मुताबिक, अगस्त में थोक कीमतों पर दबाव बढ़ाने वाली प्रमुख चीजों में मिनरल ऑयल, फूड आर्टिकल्स, फूड प्रोडक्ट्स का निर्माण, बेसिक मेटल्स का निर्माण, नॉन-फूड आर्टिकल्स और केमिकल व केमिकल प्रोडक्ट्स का निर्माण शामिल रहे. यानी महंगाई का दबाव सिर्फ एक क्षेत्र तक सीमित नहीं रहा. खाने-पीने की चीजों से लेकर ईंधन और औद्योगिक सामान तक कई हिस्सों में कीमतें बढ़ीं। 

    RBI के लिए भी अहम है आंकड़ा
    थोक महंगाई का यह आंकड़ा ऐसे समय आया है जब रिजर्व बैंक महंगाई और ब्याज दरों के रुख पर नजर रख रहा है. पिछले महीने मौद्रिक नीति समिति (MPC) ने बेंचमार्क पॉलिसी रेट को 5.25 फीसदी पर बरकरार रखा था. RBI ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए खुदरा महंगाई का अनुमान 5 फीसदी रखा है. केंद्रीय बैंक ने कमजोर और असमान दक्षिण-पश्चिम मॉनसून और अल नीनो की स्थिति को महंगाई के लिए जोखिमों में शामिल किया था। 

    आम आदमी पर क्या असर पड़ेगा?
    थोक महंगाई सीधे तौर पर आपकी खरीदारी की कीमत तय नहीं करती, लेकिन इसमें लगातार बढ़ोतरी का असर आगे चलकर कारोबार की लागत और कुछ वस्तुओं की खुदरा कीमतों पर पड़ सकता है. फिलहाल अगस्त के आंकड़ों में फूड, फ्यूल और पावर तथा मैन्युफैक्चर्ड आइटम्स तीनों में दबाव दिखाई दे रहा है. इसलिए आने वाले महीनों में इन तीनों क्षेत्रों की कीमतों का रुख अहम रहेगा. अगर ईंधन और कच्चे माल की लागत ऊंची बनी रहती है, तो महंगाई पर दबाव भी आगे बना रह सकता है। 

  • 2013 रेप केस: दोषी तरुण तेजपाल ने कोर्ट में किया सरेंडर, सुप्रीम कोर्ट जाने का किया ऐलान

    2013 रेप केस: दोषी तरुण तेजपाल ने कोर्ट में किया सरेंडर, सुप्रीम कोर्ट जाने का किया ऐलान

    पणजी

    रेप केस में दोषी ठहराए गए तरुण तेजपाल ने सोमवार को गोवा पुलिस के सामने सरेंडर कर दिया. इसके बाद उन्हें कोलवाले जेल भेज दिया गया. सरेंडर के बाद तेजपाल ने कहा कि वह बॉम्बे हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपनी कानूनी लड़ाई जारी रखेंगे। 

    दरअसल, बॉम्बे हाईकोर्ट की गोवा बेंच ने नवंबर 2013 के मामले में 62 वर्षीय तरुण तेजपाल को जूनियर सहकर्मी के साथ रेप का दोषी माना था. इसके बाद अदालत ने उन्हें 10 साल कैद की सजा सुनाई. इससे पहले साल 2021 में गोवा की निचली अदालत ने उन्हें बरी कर दिया था, लेकिन हाईकोर्ट ने उस पुराने फैसले को पलट दिया। 

    इस फैसले के खिलाफ तेजपाल ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था. हालांकि, शीर्ष अदालत ने 25 अगस्त को साफ कर दिया कि उनकी अपील पर सुनवाई तभी होगी, जब वह पहले सरेंडर करके जेल का सर्टिफिकेट दाखिल करेंगे. इसी आदेश के तहत उन्होंने यह कदम उठाया है. हाईकोर्ट ने शुरुआत में तेजपाल को सरेंडर करने के लिए चार हफ्ते का समय दिया था. इस दौरान उन्हें सुप्रीम कोर्ट में कानूनी राहत मांगने का मौका मिला. तेजपाल ने इसके बाद हाईकोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी। 

     पिछले महीने, सुप्रीम कोर्ट ने तेजपाल की उस याचिका को खारिज कर दिया था जिसमें उन्होंने बॉम्बे हाई कोर्ट के दोषी ठहराने वाले फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील की सुनवाई से पहले सरेंडर करने से छूट मांगी थी। कोर्ट ने उन्हें तीन हफ़्ते के भीतर सरेंडर करने का आदेश दिया था।

    जस्टिस आलोक अराधे की बेंच ने तेजपाल को कोर्ट में सरेंडर सर्टिफिकेट जमा करने का भी निर्देश दिया। सिंगल-जज बेंच उनकी क्रिमिनल अपील को 22 सितंबर को लिस्ट करने पर भी सहमत हो गई, बशर्ते वे तब तक सरेंडर सर्टिफिकेट जमा कर दें। तेजपाल ने इस आधार पर सरेंडर करने से छूट मांगी थी कि पहले सुप्रीम कोर्ट में उनकी अपील लिस्ट होनी चाहिए और उस पर सुनवाई होनी चाहिए। तेजपाल की ओर से पेश सीनियर एडवोकेट कपिल सिब्बल ने तर्क दिया कि कोर्ट के पास उचित मामले में सरेंडर की ज़रूरत को हटाने और आरोपी के सरेंडर न करने पर भी क्रिमिनल अपील को लिस्ट करने की शक्ति है।

    गोवा राज्य की ओर से पेश भारत के सॉलिसिटर जनरल (SGI) तुषार मेहता ने याचिका का विरोध किया और कहा कि छूट की अर्जी पर मामले की मेरिट के आधार पर विचार किया जाना चाहिए। उन्होंने बॉम्बे हाई कोर्ट के निष्कर्षों का हवाला दिया और कहा कि इस मामले में रेप का गंभीर अपराध शामिल है, जिसके लिए… तेजपाल को 10 साल की कड़ी सज़ा सुनाई गई थी।

    जस्टिस अराधे ने कहा कि कोर्ट छूट की अर्ज़ी पर इसलिए विचार कर रहा है क्योंकि उसके पास ऐसा करने का अधिकार है। सिब्बल ने कहा कि तेजपाल के मामले में हाई कोर्ट द्वारा बरी किए जाने के फ़ैसले को पलटने को चुनौती दी गई है और अपील के गुण-दोष पर विचार किया जाना चाहिए। हालांकि, कोर्ट ने साफ़ किया कि उसने हाई कोर्ट के फ़ैसले को देख लिया है और दोनों पक्षों – तेजपाल और गोवा सरकार – से कहा कि वे अपनी बात सिर्फ़ छूट के सवाल तक ही सीमित रखें। कोर्ट ने पूछा कि तेजपाल को सरेंडर करने में कितना समय लगेगा।

    तीन हफ़्ते का समय लगने की बात कहे जाने पर, कोर्ट ने छूट की अर्ज़ी खारिज कर दी और तेजपाल को तीन हफ़्ते के अंदर सरेंडर करने और सरेंडर का सबूत पेश करने का निर्देश दिया। कोर्ट ने आगे निर्देश दिया कि अगर सरेंडर सर्टिफ़िकेट पेश किया जाता है, तो बॉम्बे हाई कोर्ट के फ़ैसले के ख़िलाफ़ तेजपाल की अपील को 22 सितंबर को लिस्ट किया जाए। 

  • CBI ने दिशा सालियान केस में दर्ज की FIR,  उद्धव, आदित्य ठाकरे के साथ रिया चक्रवर्ती समेत इन लोगों के नाम

    CBI ने दिशा सालियान केस में दर्ज की FIR, उद्धव, आदित्य ठाकरे के साथ रिया चक्रवर्ती समेत इन लोगों के नाम

    मुंबई 

    दिवंगत बॉलीवुड एक्‍टर सुशांत सिंह राजपूत की पूर्व मैनेजर दिशा सालियन की मौत मामले में CBI ने FIR दर्ज कर ली है। बड़ी खबर ये है कि इस संदिग्ध मौत के मामले में सेंट्रल ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन ने सीधे तौर पर शिवसेना (ठाकरे गुट) के नेता आदित्य ठाकरे का नाम भी शामिल किया है। यही नहीं, दिशा के पिता सतीश सालियन की शिकायत के आधार पर CBI ने FIR में बॉलीवुड एक्‍टर डिनो मोरिया, रिया चक्रवर्ती, सूरज पंचोली के साथ-साथ मुंबई के पूर्व पुलिस आयुक्त परमबीर सिंह, जेल में बंद पुलिस अधिकारी सचिन वाझे और कुछ अन्य पुलिसकर्मियों के नाम लिए हैं।

    केंद्रीय जांच ब्‍यूरो ने दिशा के पिता सतीश सालियान के बयान के आधार पर यह FIR दर्ज की है। पिता का आरोप है कि सरकारी मशीनरी का गलत इस्तेमाल करके उनकी बेटी की मौत से जुड़े सबूत मिटा दिए गए थे। CBI ने यह कार्रवाई बॉम्बे हाईकोर्ट के निर्देश के बाद की है। दिशा की मौत जून 2020 में मुंबई में हुई थी और उनकी मौत के कुछ ही दिनों बाद सुशांत सिंह राजपूत की भी मौत हो गई थी।

    द‍िशा साल‍ियान के प‍िता के बयान में क‍िन-क‍िन का नाम
    CBI के समक्ष सतीश सालियान के बयान के मुताबिक, मामले में कई लोगों की भूमिका की गहराई से जांच किए जाने की जरूरत है। उन्होंने आपराधिक साजिश, दिशा की मौत को आत्महत्या बताने वाली गलत कहानी तैयार करने और उसे फैलाने के साथ-साथ सबूतों को दबाने, नष्ट करने या उनमें कथित छेड़छाड़ किए जाने जैसे आरोपों की जांच की मांग की है। सतीश सालियान ने बयान में जिन लोगों के नाम का जिक्र किया गया है, उनमें आदित्य ठाकरे, रोहन रॉय, डिनो मोरिया, सूरज पंचोली, आदित्य ठाकरे के बॉडीगार्ड्स, रिया चक्रवर्ती, शोविक चक्रवर्ती, सचिन वाजे, परमबीर सिंह, डीसीपी विशाल ठाकुर, उद्धव ठाकरे और अनिल देशमुख समेत कई पुलिस अधिकारियों के नाम शामिल हैं।

    द‍िशा साल‍ियान के प‍िता के वकील बोले- हमने गैंग-रेप और हत्या के आरोप लगाए हैं

    CBI की ओर से FIR दर्ज होने से दो दिन पहले 11 सितंबर को दिशा के पिता सतीश सालियान ने अपना बयान दर्ज कराया था। तब उनके वकील निलेश ओझा भी CBI दफ्तर पहुंचे थे। यहां वकील निलेश ओझा ने कहा, 'हम आदित्य ठाकरे और अन्य लोगों के ख‍िलाफ गैंग-रेप और हत्या के मामले में FIR दर्ज कराने आए हैं। दूसरी बात, हमारे पास मौजूद सबूतों के अलावा, हमारे पास सचिन वाजे का न्यायालय के बाहर किया गया कबूलनामा भी है… नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) के पास सबूत होने के बावजूद, NCB अधिकारी संजय सिंह 6 साल तक आदित्य ठाकरे, डिनो मोरिया और अन्य आरोपियों के ख‍िलाफ चार्जशीट दाखिल करने में नाकाम रहे। क्‍योंकि जांच के दौरान इसमें भ्रष्टाचार का मामला सामने आया है, इसलिए हम एक अलग जांच की मांग कर रहे हैं।'

     

    सीबीआई ने इन्हें बनाया आरोपी
        आदित्य ठाकरे
        रोहन रॉय
        डिनो मोरिया
        सूरज पंचोली
        आदित्य ठाकरे के बॉडीगार्ड
        रिया चक्रवर्ती
        शोविक चक्रवर्ती
        सचिन वाजे
        परमबीर सिंह
        DCP विशाल ठाकुर
        उद्धव ठाकरे
        अनिल देशमुख
        API अशोक देवाड़े
        PI जगदेव कलापड़
        PI शैलेंद्र नगरकर
        PI चिमाजी आधव
        PI अर्जुन राजाने
        मालवणी पुलिस स्टेशन के संबंधित अधिकारी
        देरी से पोस्टमार्टम से जुड़े डॉक्टर और स्टाफ, डॉ. संजय जाधव
        कालिना स्थित फॉरेंसिक साइंस लेबोरेटरी के संबंधित अधिकारी, N.P. भाले, Assistant Chemical Analyser
        तत्कालीन संबंधित PI और अन्य पुलिस अधिकारी

    द‍िशा के प‍िता की श‍िकायत में पुलिस अध‍िकारी, डॉक्‍टर और स्‍टाफ का भी ज‍िक्र

    दिशा के पिता ने इस मामले में मालवणी पुलिस स्टेशन से जुड़े अधिकारियों, दिशा के पोस्टमार्टम में कथित देरी से जुड़े डॉक्टरों और स्टाफ, कलिना स्थित फॉरेंसिक साइंस लैबोरेटरी के कर्मचारियों, रीजेंट गैलेक्सी बिल्डिंग के सिक्योरिटी गार्ड्स और कई अन्य लोगों का भी बयान में जिक्र किया गया है।

    हाईकोर्ट ने CBI को नए स‍िरे से जांच के आदेश द‍िए
    CBI ने इससे पहले दिशा सालियान की मौत से जुड़े सभी दस्तावेज और रिकॉर्ड उपलब्ध कराने के लिए मालवणी पुलिस को पत्र लिखा था। एजेंसी ने ये रिकॉर्ड अपनी जांच को आगे बढ़ाने के लिए मांगे थे। अब बॉम्बे हाईकोर्ट के आदेश के बाद सीबीआई ने इस मामले में एफआईआर दर्ज कर ली है। बॉम्बे हाईकोर्ट ने मामले में नए सिरे से जांच के लिए सीबीआई को निर्देश दिए। कोर्ट ने कहा था कि जांच की निगरानी के लिए सीबीआई के एक वरिष्ठ अधिकारी को नियुक्त किया जाए।

        हथिनी माधुरी की कोल्हापुर वापसी शुरू: वनतारा जारी रखेगा मेडिकल केयर

        हथिनी माधुरी की कोल्हापुर वापसी का रास्ता साफ हो गया है। हाई-पावर्ड कमिटी (HPC) ने इसकी मंजूरी दे दी है। जुलाई 2025 में जामनगर लाए जाने के बाद अनंत अंबानी के ‘वनतारा’ ने उसकी देखभाल की। इलाज से माधुरी की हालत स्थिर है, लेकिन उसे लगातार मेडिकल सपोर्ट की जरूरत है। वनतारा, नंदानी में इंफ्रास्ट्रक्चर बेहतर करने में मदद कर रहा है और उसके डॉक्टर हर 15 दिन में वहां जाकर माधुरी की जांच और रिपोर्टिंग करेंगे।

    क्या लिखा है FIR में
    आदित्य ठाकरे के पिता और तत्कालीन मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे तथा अन्य लोगों ने भी साजिश और उसके बाद मामले को दबाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई. संबंधित सरकारी कर्मचारियों और पुलिस अधिकारियों की भी इस बात के लिए जांच की जानी चाहिए कि क्या उन्होंने मामले से जुड़े कागजात, फाइलों और अन्य सरकारी रिकॉर्ड को नष्ट या दबाया, सरकारी रिकॉर्ड में हेरफेर/फर्जीवाड़ा किया और आरोपियों को बचाने के लिए सरकारी धन, कर्मचारियों और पुलिस मशीनरी का गैरकानूनी उद्देश्यों के लिए इस्तेमाल किया। 

    FIR में कई बड़े नाम शामिल
    मुख्य अपराध, आपराधिक साजिश, उसके बाद झूठी आत्महत्या की कहानी तैयार करने और उसे फैलाने, तथा सबूतों को दबाने, नष्ट करने और/या उनमें हेरफेर करने के संबंध में जिन लोगों की भूमिका की जांच की जरूरत है, उनमें आदित्य ठाकरे, रोहन रॉय, डिनो मोरिया, सूरज पंचोली, आदित्य ठाकरे के बॉडीगार्ड, रिया चक्रवर्ती, शोविक चक्रवर्ती, सचिन वाजे, परमबीर सिंह, DCP विशाल ठाकुर, उद्धव ठाकरे, अनिल देशमुख, API अशोक देवाड़े, PI जगदेव कलापड़, PI शैलेंद्र नगरकर, PI चिमाजी आधव, PI अर्जुन राजाने, मालवणी पुलिस स्टेशन के संबंधित अधिकारी, देरी से पोस्टमार्टम से जुड़े डॉक्टर और स्टाफ, डॉ. संजय जाधव, कालिना स्थित फॉरेंसिक साइंस लेबोरेटरी के संबंधित अधिकारी, जिनमें N.P. भाले, Assistant Chemical Analyser भी शामिल हैं, तत्कालीन संबंधित PI और अन्य पुलिस अधिकारी शामिल हैं। 

    इसके अलावा Regent Galaxy Building के सुरक्षा गार्ड, जिनमें सुशील कुमार यादव और शिवमुराद गौतम उर्फ मुन्ना शामिल हैं; प्रीति राणे, प्रवीण राणे, अंकिता सातुर, इंद्रनील वैद्य, दीप अजमेरा, हिमांशु शिखारे, रेशा पाडवाल, सतवंत सिंह, नावेद मुजावर और प्रियेश राणे भी शामिल हैं. इसके साथ ही SIT के वरिष्ठ सदस्यों, उन सभी वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों की भी जांच की जानी चाहिए, जिनकी निगरानी में गलत जांच/पूछताछ की गई थी, और ऐसे अन्य अज्ञात लोगों की भी, जो अपराध और उसके बाद मामले को दबाने में शामिल रहे हों। 

    संदिग्ध हालात में हुई थी दिशा सालियान की मौत
    8 जून 2020 को मुंबई के मलाड इलाके में एक बहुमंजिला इमारत की 12वीं मंजिल से गिरकर दिशा की संदिग्ध हालात में मौत हो गई थी. इसके ठीक एक हफ्ते बाद 14 जून को अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत अपने फ्लैट में मृत पाए गए थे. दोनों मौतों के बीच के समय और कड़ियों को लेकर लंबे समय से कई तरह की अटकलें लगाई जा रही थीं. सुशांत केस में चौतरफा हंगामे के बाद जांच सीबीआई को सौंपी गई थी, जिसमें एजेंसी ने आत्महत्या करार देते हुए क्लोजर रिपोर्ट दाखिल की थी जो अभी कोर्ट में विचाराधीन है. अब बॉम्बे हाईकोर्ट के इस कड़े दखल के बाद दिशा सालियान केस में बंद फाइलों के फिर से खुलने और कई बड़े चेहरों की धड़कनें तेज होने की संभावना बढ़ गई है। 

  • Sahara Refund: ऑनलाइन क्लेम के लिए Aadhaar e-KYC जरूरी, पासबुक/डिपॉजिट सर्टिफिकेट और PAN रखें तैयार; ऐसे मिलेगा पैसा

    Sahara Refund: ऑनलाइन क्लेम के लिए Aadhaar e-KYC जरूरी, पासबुक/डिपॉजिट सर्टिफिकेट और PAN रखें तैयार; ऐसे मिलेगा पैसा

    नई दिल्‍ली
     सहारा समूह मे अपनी कमाई फंसा चुके लाखों निवेशकों के लिए राहत की खबर है. केंद्र सरकार ने सहारा रिफंड पोर्टल को एक बार फिर एक्टिव कर दिया है. पोर्टल के दोबारा चालू होने से करीब 20 लाख लंबित दावों की जांच शुरू हो गई है. साथ ही अब अन्‍य लोग भी अपना पैसा वापस पाने के लिए ऑनलाइन क्‍लेम कर सकते हैं. यदि आपका भी पैसा सहारा में अटका हुआ है जान लें कि घर बैठे क्लेम कैसे करें और किन-किन दस्‍तावेजों की जरूरत होगी। 

    सहकारिता मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक, सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर शुरू किए गए इस पोर्टल के जरिए अब तक करीब 42 लाख जमाकर्ताओं को 9,267 करोड़ रुपये की राशि लौटाई जा चुकी है. यह पोर्टल मुख्य रूप से सहारा समूह की चार प्रमुख सोसायटियों, सहारा क्रेडिट कोऑपरेटिव सोसाइटी, सहारायन यूनिवर्सल मल्टीपर्पज सोसाइटी, हमारा इंडिया क्रेडिट कोऑपरेटिव सोसाइटी और स्टार्स मल्टीपर्पज कोऑपरेटिव सोसाइटी के पात्र निवेशकों को रिफंड दिलाने के लिए बनाया गया है। 

    सहारा रिफंड पोर्टल पर कैसे दर्ज करें क्‍लेम?

    सहारा रिफंड पोर्टल पर आवेदन करने की प्रक्रिया बेहद आसान-

        सबसे पहले आधिकारिक पोर्टल (https://mocrefund.crcs.gov.in/depositor/#/home) पर जाएं और लॉगिन करें.
        रजिस्ट्रेशन के लिए आधार से जुड़ा मोबाइल नंबर दर्ज करें और ओटीपी के जरिए सत्यापन पूरा करें.
        इसके बाद स्क्रीन पर दिख रहे ऑनलाइन आवेदन फॉर्म में अपनी सदस्यता संख्या, जमा खाता संख्या और सोसायटी का नाम भरें.
        यदि आपने चारों सोसायटियों में पैसा लगाया है, तो सभी दावों को अलग-अलग नहीं बल्कि एक ही आवेदन फॉर्म में जोड़ें.
        अंत में जमा राशि के प्रमाण संबंधी कागजात अपलोड कर फॉर्म सबमिट करें. सबमिट होते ही एक रसीद संख्या मिल जाएगी.

    आवेदन की 30 दिन में होगी स्‍क्रूटनी
    ऑनलाइन क्लेम दर्ज होने के बाद सत्यापन की प्रक्रिया शुरू होगी. सहारा ग्रुप ऑफ कोऑपरेटिव सोसाइटीज 30 दिनों के भीतर निवेशक के दावों और दस्तावेजों की स्क्रूटनी करेगी. इसके बाद अगले 15 दिनों में सरकारी तंत्र द्वारा अंतिम मंजूरी दी जाएगी. इस तरह आवेदन की तारीख से कुल 45 दिनों के अंदर आपके दावे के बारे में आपको बता दिया जाएगा. दावा सही पाए जाने पर स्वीकृत रकम सीधे निवेशक के आधार से जुड़े बैंक खाते में ट्रांसफर कर दी जाएगी। 

    ये कागज रखें तैयार
    रिफंड फॉर्म भरते समय किसी भी तरह की गड़बड़ी से बचने के लिए जरूरी दस्तावेजों को पहले से स्कैन करके रख लें. क्‍लेम के लिए निवेशक का आधार कार्ड, आधार से लिंक एक्टिव मोबाइल नंबर और आधार से जुड़ा बैंक खाते की जानकारी देनी होगी. सहारा सोसाइटी में पैसा जमा करते समय मिली मूल रसीद, पासबुक या निवेश प्रमाणपत्र (बॉन्ड) आदि भी मांगे जा सकते हैं। 

    दस्तावेजों में दर्ज सदस्यता संख्या (Membership Number), अकाउंट नंबर और नाम का सही मिलना चाहिए. यदि मूल जमाकर्ता की मृत्यु हो चुकी है, तो कानूनी उत्तराधिकारी या नॉमिनी को संबंधित कानूनी दस्तावेज और मृत्यु प्रमाण पत्र अपलोड करना होगा. नाम या बैंक विवरण में कोई गलती होने पर रिफंड अटक सकता है, इसलिए पोर्टल पर जानकारी अपलोड करने से पहले अपने सभी कागजात अच्छी तरह जांच लें। 

        सहारा रिफंड आवेदनों की दोबारा जांच, लाखों को मिले पैसे।
        सीआरसीएस पोर्टल पर आधार-मोबाइल से जमाकर्ता पंजीकरण करें।
        फॉर्म भरें, स्कैन कर अपलोड करें, 45 दिन में राशि।

    किन सोसाइटियों में जमा पैसे वापस मिलेंगे?
    सहारा की चार कोऑपरेटिव सोसाइटियों के पात्र जमाकर्ताओं को रिफंड दिया जा रहा है. इनमें शामिल है…

        स्टार्स मल्टीपर्पज कोऑपरेटिव सोसाइटी लिमिटेड
        सहारायन यूनिवर्सल मल्टीपर्पज सोसाइटी लिमिटेड
        हमारा इंडिया क्रेडिट कोऑपरेटिव सोसाइटी लिमिटेड
        सहारा क्रेडिट कोऑपरेटिव सोसाइटी लिमिटेड

    क्लेम के समय ठगों से सावधान
    रिफंड के नाम पर किसी भी अनजान व्यक्ति को अपने बैंक से जुड़ी जानकारी न दें. अगर आपको क्लेम के लिए आवेदन करना है तो इसके लिए केवल आधिकारिक पोर्टल का ही इस्तेमाल करें, दूसरी फर्जी वेबसाइट से बचकर रहें, वरना आप ठगी के शिकार हो सकते हैं. 

    सबसे पहले करना होगा रजिस्ट्रेशन
        ऑनलाइन क्लेम दर्ज करने के लिए सबसे पहले CRCS रिफंड पोर्टल पर जाएं.
        इसके बाद Depositor Registration का विकल्प आएगा, उसपर क्लिक करें.
        फिर आधार के आखिर 4 अंक दर्ज करें.
        इसके साथ ही आधार से लिंक मोबाइल नंबर भी दर्ज करें.
        फिर आपके मोबाइल पर एक OTP आएगा उससे वेरिफिकेशन पूरा करें.
        इसके बाद आप पोर्टल पर क्लेम का प्रोसेस आगे पूरा कर सकते हैं.

    ऑनलाइन क्लेम कैसे दर्ज करें?
        रजिस्ट्रेशन करने के बाद सबसे पहले Depositor CRCS Refund Portal पर लॉगिन करें.
        इसके बाद अपनी सहारा सोसाइटी का नाम चुनें.
        फिर अकाउंट नंबर, सदस्यता नंबर, रसीद नंबर और जमा राशि की जानकारी भरें.
        इसके बाद आप जमा रसीद या फिर पासबुक की स्कैन कॉपी अपलोड करें.
        जब आप सारी जानकारी दर्ज कर देंगे तो पोर्टल पर Cliam Request Form तैयार होगा.
        इसको डाउनलोड करके प्रिंट करें.
        अपनी पासपोर्ट साइज फोटो लगाएं और साइन करें.
        50 हजार से ज्यादा क्लेम करने के लिए पैन नंबर दर्ज करें.
        इसके बाद आप साइड किए गए Claim Request Form को स्कैन करें और पोर्टल पर अपलोड कर दें.
        इसके बाद आवेदन सबमिट कर दें और Claim Request नंबर को अपने पास नोट करके सुरक्षित रखें. 
        अगर आपके आवेदन में किसी प्रकार की कोई समस्या नहीं होती है तो पैसे 45 दिन में आ जाता है, जिसकी जानकारी आपको SMS के जरिए मिल जाती है.

    इन चीजों को रखें तैयार
    सहारा की सोसाइटियों में रिफंड क्लेम करने के लिए पहले कुछ चीजों को तैयार रखें इनमें शामिल है…

        सदस्यता नंबर
        अकाउंट नंबर
        पासबुक या रसीद
        जमा प्रमाणपत्र
        आधार से लिंक मोबाइल नंबर (OTP के लिए)
        आधार से लिंक और DBT एक्टिव बैंक अकाउंट
        50 हजार या उससे ज्यादा के क्लेप के लिए PAN कार्ड

     

     

  • BRICS समिट में PM मोदी की धाक, तीन दिन में 15 देशों से की बड़ी द्विपक्षीय बैठकें

    BRICS समिट में PM मोदी की धाक, तीन दिन में 15 देशों से की बड़ी द्विपक्षीय बैठकें

    नई दिल्ली
     प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी में नई दिल्ली में 18वें ब्रिक्स समिट से इतर तीन दिनों में देश और सरकार के प्रमुखों के साथ 15 द्विपक्षीय बैठकें कीं, इसके अलावा दुनिया के नेताओं और इंटरनेशनल संस्थाओं के नेताओं के साथ कई अलग-अलग बातचीत भी की।

    मीडिआ रिपोर्ट के मुताबिक, बिजी डिप्लोमैटिक शेड्यूल में पीएम मोदी रूस, चीन, ईरान, अफ्रीका, साउथ-ईस्ट एशिया, गल्फ और दूसरे इलाकों के नेताओं के साथ सीधे जुड़े। चर्चाओं में बाइलेटरल रिश्ते, ट्रेड, इन्वेस्टमेंट, कनेक्टिविटी, जरूरी मिनरल्स और बड़े रीजनल और ग्लोबल डेवलेपमेंट शामिल थे।

    यह मीटिंग तब हुई जब भारत 2026 में अपनी अध्यक्षता में ब्रिक्स समिट होस्ट कर रहा था, जिसमें अलग-अलग जियोपॉलिटीकल पोजीशन वाले देशों को एक साथ लाया गया।

    बाइलेटरल मीटिंग्स ने नई दिल्ली को समिट के बड़े एजेंडा के साथ-साथ अपनी स्ट्रेटेजिक और इकोनॉमिक प्रायोरिटीज को आगे बढ़ाने का मौका दिया।

    पहला दिन: पुतिन, पेजेशकियन और UN चीफ
    11 सितंबर को, PM मोदी ने रूस के प्रेसिडेंट व्लादिमीर पुतिन और ईरान के प्रेसिडेंट मसूद पेजेशकियन के साथ अलग-अलग मीटिंग कीं। मोदी-पुतिन मीटिंग में इंडिया-रूस स्ट्रेटेजिक पार्टनरशिप पर फोकस था, जिसमें दोनों नेताओं ने डिफेंस, एनर्जी, ट्रेड, इंफ्रास्ट्रक्चर, टेक्नोलॉजी, जरूरी मिनरल्स और सिविल न्यूक्लियर एनर्जी में कोऑपरेशन का रिव्यू किया।

    उन्होंने रूस-यूक्रेन झगड़े, वेस्ट एशिया के हालात और समुद्री ट्रेड और इंडियन सीफेयरर्स की सेफ्टी पर उनके असर पर भी चर्चा की।

    पीएम मोदी ने ईरान के प्रेसिडेंट मसूद पेजेशकियन से भी मुलाकात की, जिसमें इंडिया-ईरान रिलेशन, ब्रिक्स कोऑपरेशन और वेस्ट एशिया में डेवलपमेंट पर चर्चा हुई। PM मोदी ने बातचीत और डिप्लोमेसी के लिए इंडिया का सपोर्ट दोहराया और इस इलाके में लंबे समय तक चलने वाली शांति और स्टेबिलिटी की इंपॉर्टेंस पर जोर दिया।

    उसी दिन, PM मोदी ने UN सेक्रेटरी-जनरल एंटोनियो गुटेरेस से मुलाकात की, जिससे उनके डिप्लोमैटिक एंगेजमेंट में एक मल्टीलेटरल डायमेंशन जुड़ गया।

    दूसरा दिन: शी के साथ मीटिंग
    12 सितंबर को, PM मोदी ने इथियोपिया के प्राइम मिनिस्टर अबी अहमद अली, मलेशिया के प्राइम मिनिस्टर अनवर इब्राहिम, UAE के क्राउन प्रिंस शेख खालिद बिन मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान, वियतनामी लीडरशिप और चीनी प्रेसिडेंट शी जिनपिंग के साथ बाइलेटरल मीटिंग की।

    शी के साथ मीटिंग समिट की सबसे ज्यादा देखी जाने वाली मीटिंग्स में से एक थी। दोनों लीडर्स ने इंडिया-चाइना रिलेशनशिप, बाउंड्री क्वेश्चन, बॉर्डर पर शांति, इकोनॉमिक और ट्रेड रिलेशन, सप्लाई चेन और पीपल-टू-पीपल एक्सचेंज पर चर्चा की।

    PM मोदी ने जोर दिया कि मतभेद विवाद नहीं बनने चाहिए और बाइलेटरल रिलेशन को गाइड करने में आपसी सम्मान, सेंसिटिविटी और इंटरेस्ट के महत्व को अंडरलाइन किया। मलेशिया के प्राइम मिनिस्टर अनवर इब्राहिम के साथ मीटिंग में ट्रेड, इन्वेस्टमेंट, डिफेंस, सेमीकंडक्टर, इंफ्रास्ट्रक्चर, डिजिटल इकोनॉमी, एनर्जी और फिनटेक जैसे एरिया शामिल थे।

    इथियोपिया के प्रधानमंत्री अबी अहमद अली के साथ PM मोदी की मीटिंग में बाइलेटरल कोऑपरेशन को मज़बूत करने और अफ्रीका के साथ भारत के जुड़ाव पर फोकस रहा।

    उन्होंने UAE के क्राउन प्रिंस शेख खालिद बिन मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान के साथ भी बातचीत की, जिसमें भारत-UAE स्ट्रेटेजिक पार्टनरशिप और डिफेंस, टेक्नोलॉजी, एनर्जी, जरूरी मिनरल्स और कनेक्टिविटी जैसे एरिया में सहयोग पर चर्चा हुई।

    तीसरा दिन: अफ्रीका, सेंट्रल एशिया और साउथ-ईस्ट एशिया
    13 सितंबर को, PM मोदी ने साउथ अफ्रीका के प्रेसिडेंट सिरिल रामफोसा, कजाख प्रेसिडेंट कसीम-जोमार्ट टोकायेव, फिलीपींस के प्रेसिडेंट फर्डिनेंड आर. मार्कोस जूनियर, मिस्र के प्रेसिडेंट अब्देल फत्ताह अल-सिसी और बुरुंडी के प्रेसिडेंट एवरिस्टे नदायिशिमिये के साथ बाइलेटरल मीटिंग कीं।

    बाइलेटरल मीटिंग के शेड्यूल के मुताबिक, उन्होंने युगांडा और नाइजीरिया की लीडरशिप के साथ भी मीटिंग की। इन मीटिंग्स ने अफ्रीका, सेंट्रल एशिया और साउथ-ईस्ट एशिया में भारत की डिप्लोमैटिक पहुंच को बढ़ाया, जिसमें बाइलेटरल पार्टनरशिप को मज़बूत करने और आपसी फायदे वाले एरिया में सहयोग बढ़ाने पर फोकस रहा।

    साउथ अफ्रीका के प्रेसिडेंट सिरिल रामफोसा के साथ बातचीत ब्रिक्स ग्रुप के लिए खास तौर पर जरूरी थी, क्योंकि साउथ अफ्रीका इस बड़े ब्लॉक के फाउंडिंग मेंबर्स में से एक है और ग्लोबल साउथ के हितों को आगे बढ़ाने में भारत का एक जरूरी पार्टनर है।

    मिस्र और बुरुंडी के साथ मीटिंग्स ने अफ्रीकी पार्टनर्स के साथ भारत के जुड़ाव को और मजबूत किया, जबकि कजाकिस्तान के साथ बातचीत ने सेंट्रल एशिया में भारत की पहुंच को बढ़ाया।

    मलेशिया के साथ उनकी पिछली मीटिंग के साथ-साथ फिलीपींस की बातचीत ने PM मोदी के डिप्लोमैटिक शेड्यूल में एक और जरूरी साउथईस्ट एशियाई पहलू जोड़ा।

    फॉर्मल समिट एजेंडा से आगे बाइलेटरल मीटिंग्स
    15 फॉर्मल मीटिंग्स के साथ-साथ दूसरे विजिटिंग लीडर्स और इंटरनेशनल इंस्टीट्यूशन्स के रिप्रेजेंटेटिव्स के साथ कई छोटी बातचीत भी हुईं। इस कूटनीतिक गतिविधि से पता चलता है कि भारत ने अपनी ब्रिक्स अध्यक्षता के दौरान द्विपक्षीय बातचीत को कितना महत्व दिया।

    जहां इस समिट ने बढ़े हुए ग्रुप के बीच सामूहिक चर्चा के लिए एक मंच दिया, वहीं अलग से हुई मुलाकातों ने पीएम मोदी को अलग-अलग नेताओं के साथ संबंधित देशों की खास प्राथमिकताओं पर सीधे बातचीत करने का मौका भी दिया।

    ये बैठकें ऐसे समय में हुईं जब भू-राजनीतिक अनिश्चितता का माहौल था। पश्चिम एशिया और यूक्रेन में चल रहे संघर्षों का असर ऊर्जा बाजार, समुद्री व्यापार और ग्लोबल सप्लाई चेन पर पड़ रहा था।

    इसलिए, 15 द्विपक्षीय बैठकों और उनके अलावा हुई अनौपचारिक मुलाकातों ने भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता के दौरान पीएम मोदी की कूटनीतिक कोशिशों में एक अहम भूमिका निभाई।

  • पश्चिम बंगाल में मदरसों पर सरकार की सख्ती, मंजूरी-इंफ्रास्ट्रक्चर की कमी पर कार्रवाई

    पश्चिम बंगाल में मदरसों पर सरकार की सख्ती, मंजूरी-इंफ्रास्ट्रक्चर की कमी पर कार्रवाई

    कोलकाता
    पश्चिम बंगाल की शुभेंदु सरकार का राज्य के मदरसों पर कहर टूटा है। 252 मदरसों को बंद करने का आदेश दिया गया है और करीब 100 दूसरे मदरसों को कारण बताओ नोटिस भेजा है। यह आदेश राज्य भर में हुए सर्वे के बाद दिया गया है, जिसमें पाया गया कि ऐसे कई संस्थानों के पास जरूरी मंजूरी और बेसिक इंफ्रास्ट्रक्चर की कमी है। अधिकारियों ने रविवार को यह जानकारी दी। अल्पसंख्यक मामलों और मदरसा शिक्षा विभाग के मंत्री क्षुदीराम टुडू ने कहा कि जिन मदरसों के पास जरूरी मंजूरी है, वे चलते रहेंगे।

    जून की शुरुआत से पश्चिम बंगाल के सभी जिलों में सरकारी और प्राइवेट मदरसों के इंफ्रास्ट्रक्चर, मंज़ूरी की स्थिति और मैनेजमेंट सिस्टम का आकलन करने के लिए विभाग ने फील्ड-लेवल सर्वे किया था। अधिकारियों ने कहा कि मदरसों को कारण बताओ नोटिस दिया गया है। उन्होंने कहा कि उनके जवाबों की जांच के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।

    टुडू ने कहा कि मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के निर्देशों के बाद यह काम शुरू किया गया था ताकि अलग-अलग जिलों में अधिकृत और अनधिकृत मदरसों की संख्या का पता लगाया जा सके। मंत्री ने आगे कहा, "252 मदरसों को बंद करने का आदेश दिया गया है, जबकि 100 अन्य को जरूरी मंजूरी और बुनियादी ढांचे की कमी के लिए कारण बताओ नोटिस भेजा गया है।"

    बार-बार मिल रही थी शिकायतें
    राज्य के पंचायती राज मंत्री दिलीप घोष ने कहा कि मदरसों को लेकर कई विवाद हुए हैं और दावा किया कि कई मामलों में चरमपंथी गतिविधियों में कथित रूप से शामिल होने के आरोप में गिरफ्तार किए गए लोग ऐसे कुछ संस्थानों में शिक्षक के तौर पर काम करते पाए गए। उन्होंने कहा, "मदरसों के खिलाफ बार-बार शिकायतें मिल रही थीं। मदरसों से देश विरोधी गतिविधियां करने वाले लोगों के मामले सामने आए हैं।"

    उन्होंने आगे कहा कि कानून के हिसाब से और सरकारी इजाजत से चलने वाले मदरसे चलते रहेंगे। लेकिन सरकार मदरसों को बिना सोचे-समझे खोलने और परेशानी खड़ी करने की इजाजत नहीं देगी।" विपक्षी तृणमूल कांग्रेस के विधायक कुणाल घोष ने कहा कि सभी मदरसों को एक जैसा नहीं देखना चाहिए।