Category: मध्य प्रदेश

  • मध्यप्रदेश में निवेश बढ़ाने CM यादव की बड़ी पहल, मुंबई में उद्योग जगत से करेंगे सीधा संवाद

    मध्यप्रदेश में निवेश बढ़ाने CM यादव की बड़ी पहल, मुंबई में उद्योग जगत से करेंगे सीधा संवाद

    मुंबई में उद्योग जगत से सीधा संवाद करेंगे मुख्यमंत्री डॉ. यादव

    मध्यप्रदेश में निवेश अवसरों पर प्रमुख उद्योगपतियों के साथ वन-टू-वन बैठकें

    मुंबई में होगा उच्चस्तरीय निवेश संवाद
    जनवरी 2027 में प्रस्तावित ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट से पहले उद्योग समूहों के साथ संपर्क बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल

    भोपाल 

    मध्यप्रदेश में निवेश के लिए उपलब्ध अवसरों और औद्योगिक संभावनाओं को देश के प्रमुख उद्योग समूहों तक सीधे पहुंचाने के उद्देश्य से मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव 8 अक्टूबर को मुंबई में उद्योग जगत के प्रमुख प्रतिनिधियों के साथ संवाद करेंगे। द सेंट रेजिस, लोअर परेल में आयोजित होने वाले मध्यप्रदेश में निवेश अवसरों पर संवादात्मक सत्र में मुख्यमंत्री डॉ. यादव उद्योगपतियों के साथ वन टू वन बैठकें करेंगे और प्रदेश में निवेश की संभावनाओं पर चर्चा भी करेंगे।

    मुंबई देश के प्रमुख औद्योगिक, वित्तीय और कारोबारी समूहों का महत्वपूर्ण केंद्र है। ऐसे में मुख्यमंत्री डॉ. यादव का उद्योग जगत के साथ सीधा संवाद मध्यप्रदेश में निवेश की संभावनाओं को लेकर चल रहे संपर्क अभियान का महत्वपूर्ण चरण होगा। संवाद के दौरान प्रदेश की औद्योगिक नीति, निवेश के लिए उपलब्ध अवसरों तथा विभिन्न क्षेत्रों में विकसित हो रहे औद्योगिक आधार से उद्योग समूहों को अवगत कराया जाएगा।

    निवेशकों से सीधे संवाद पर होगा फोकस

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव प्रमुख उद्योगपतियों के साथ वन-टू-वन बैठक करेंगे । इसके बाद मध्यप्रदेश में निवेश अवसरों पर केंद्रित प्रस्तुतिकरण और विभिन्न प्रमुख क्षेत्रों में निवेश की संभावनाओं पर चर्चा होगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव का मुख्य संबोधन भी निवेशकों के साथ संवाद का प्रमुख केंद्र रहेगा।

    मध्यप्रदेश सरकार की ओर से प्रदेश में उद्योगों के लिए उपलब्ध सुविधाओं, निवेश अनुकूल नीतिगत वातावरण और विभिन्न क्षेत्रों में विकसित हो रहे औद्योगिक अवसरों को विस्तार से सामने रखा जाएगा। औद्योगिक नीति और निवेश प्रोत्साहन अपर मुख्य सचिव नीरज मंडलोई मध्यप्रदेश में निवेश के अवसरों पर प्रस्तुतीकरण देंगे। संवाद में विशेष रूप से यह रेखांकित किया जाएगा कि मध्यप्रदेश देश के मध्य में स्थित होने के कारण बड़े बाजारों से जुड़ाव, लॉजिस्टिक्स, औद्योगिक अधोसंरचना और विभिन्न क्षेत्रों में विकसित हो रहे औद्योगिक क्लस्टर्स के माध्यम से निवेशकों के लिए व्यापक संभावनाएं उपलब्ध करा रहा है। प्रदेश में उद्योगों की आवश्यकताओं के अनुरूप अधोसंरचना और निवेश सुविधा तंत्र को लगातार मजबूत किया जा रहा है।

    जनवरी 2027 के ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट से पहले बढ़ाया जा रहा सीधा संपर्क

    मध्यप्रदेश सरकार ने जनवरी 2027 में प्रस्तावित ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट की तैयारियों के साथ देश और विदेश के प्रमुख उद्योग समूहों से सीधे संपर्क की प्रक्रिया तेज की है। इसी क्रम में मुंबई का यह संवाद महत्वपूर्ण है। सरकार का प्रयास है कि समिट से पहले विभिन्न क्षेत्रों के उद्योग समूहों के साथ उनकी आवश्यकताओं, निवेश योजनाओं और प्रदेश में उपलब्ध अवसरों पर प्रत्यक्ष संवाद स्थापित हो।

    मुंबई संवाद में प्रमुख उद्योग क्षेत्रों में निवेश की संभावनाओं पर भी चर्चा होगी। इससे प्रदेश में निवेश के इच्छुक उद्योग समूहों को उनकी आवश्यकताओं के अनुरूप अवसरों और औद्योगिक क्षेत्रों की जानकारी उपलब्ध कराने के साथ संभावित निवेश प्रस्तावों को आगे बढ़ाने के लिए सीधा संवाद स्थापित करने का अवसर मिलेगा।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव की उद्योगपतियों के साथ वन टू वन बैठकें इस दृष्टि से भी महत्वपूर्ण हैं कि इनमें निवेशकों के प्रस्तावों और उनकी व्यावसायिक आवश्यकताओं को सीधे समझने का अवसर मिलेगा। प्रदेश सरकार की ओर से निवेश प्रक्रिया को सरल बनाने, आवश्यक अनुमतियों और सुविधाओं को सुगम बनाने तथा उद्योगों के लिए अनुकूल वातावरण उपलब्ध कराने की दिशा में किए जा रहे प्रयासों की जानकारी भी साझा की जाएगी।

    मुंबई में होने वाला यह निवेश संवाद मध्यप्रदेश के औद्योगिक विकास को नई गति देने और देश के प्रमुख उद्योग समूहों के साथ प्रदेश के संबंधों को और मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम होगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में आयोजित यह संवाद निवेश प्रस्तावों तक सीमित न रहकर उद्योगों की आवश्यकताओं को समझने और उन्हें मध्यप्रदेश में उपलब्ध अवसरों से जोड़ने पर विशेष रूप से केंद्रित रहेगा।

     

  • आयुर्वेद को नई पहचान देने पर जोर, राज्यपाल पटेल ने ‘नाड़ी विश्लेषण-2026’ का किया उद्घाटन

    आयुर्वेद को नई पहचान देने पर जोर, राज्यपाल पटेल ने ‘नाड़ी विश्लेषण-2026’ का किया उद्घाटन

    नाड़ी विश्लेषण, आयुर्वेद का विज्ञान और भारत का गौरव : राज्यपाल पटेल

    राज्यपाल ने किया राष्ट्रीय संगोष्ठी नाड़ी विश्लेषण- 2026 का शुभारंभ

    भोपाल 

    राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने कहा कि नाड़ी विश्लेषण विज्ञान, भारत की समृद्ध चिकित्सकीय ज्ञान परंपरा है। यह विज्ञान के साथ भारतीय ज्ञान की गौरवशाली विरासत भी है। आधुनिक तकनीक और आयुष विज्ञान के साथ नाड़ी विश्लेषण को जोड़ना और विस्तारित करना स्वस्थ, सशक्त और विकसित भारत बनाने का मार्ग है। उन्होंने संगोष्ठी के आयोजन की पहल की सराहना की। उन्होंने कहा कि “सबके लिए स्वास्थ्य” के लक्ष्य की पूर्ति में आयुर्वेद महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है, क्योंकि यह स्वस्थ जीवनशैली और स्व-देखभाल को बढ़ावा देता है। नाड़ी विश्लेषण, कम खर्चीली, बिना किसी शारीरिक नुकसान की जाँच विधि है, जिसमें जटिल उपकरणों की आवश्यकता नहीं होती है। इसलिए नाड़ी विश्लेषण ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों में सस्ती, सुलभ और निवारक स्वास्थ्य सेवाओं के द्वारा जन स्वास्थ्य को नया आयाम दे सकती है।

    राज्यपाल पटेल मंगलवार को नाड़ी विश्लेषण – 2026 पर आयोजित राष्ट्रीय संगोष्ठी को संबोधित कर रहे थे। संगोष्ठी का आयोजन, राष्ट्रीय आयुष मिशन और पं. खुशीलाल शर्मा शासकीय आयुर्वेद महाविद्यालय भोपाल के संयुक्त तत्वावधान में ''नाड़ी परीक्षा की व्यवहारिक तकनीकों की खोज एवं निदान में नाड़ी का नैदानिकी महत्व'' विषय पर किया गया था।

    स्वस्थ जीवन और वेलनेस को बढ़ाता है आयुर्वेद

    राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने कहा कि आज दुनिया आयुर्वेद केहॉलिस्टिक विजन और जीवन दर्शन की ओर लौट रही है। आयुर्वेद आरोग्य का ऐसा विज्ञान है, जो रोग के उपचार से आगे बढ़कर स्वस्थ जीवन और वेलनेस को बढ़ावा देता है। इसके बहुउद्देश्यीय महत्व के कारण आयुर्वेद का भविष्य स्वर्णिम है। उन्होंने कहा कि आयुर्वेद, हमें अनुशासन सिखाता है। मौसम के अनुसार खान-पान और जीवन शैली में परिवर्तन का मार्गदर्शन देता है। आयुष की अलग-अलग विधाएं भी अत्यंत महत्वपूर्ण है। योग, हौम्योपैथी और नैचुरोपैथी हर घर-हर व्यक्ति तक पहुँच गई है। परिणामस्वरूप आज विश्वभर में इसकी लोकप्रियता लगातार बढ़ रही है। उन्होंने विद्यार्थियों को अनुशासित जीवनशैली और संयमित खान-पान की उपयोगिता बताई। सभी को नियमित व्यायाम, पौष्टिक आहार, भरपूर नींद और पर्याप्त पानी को अपनी दिनचर्या में शामिल करने की सलाह दी।

    एकीकृत स्वास्थ्य प्रणाली का हिस्सा बनाने पर हो चिंतन

    राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी जी ने आयुर्वेद को नई पहचान दिलाई है। समय की मांग है कि नाड़ी विश्लेषण के पारंपरिक ज्ञान से जुड़े दावों का आधुनिक वैज्ञानिक मानकों और शोध पद्धतियों के आधार पर विश्लेषण तथा सत्यापन किया जाए। नाड़ी विश्लेषण की व्यक्तिपरकता और विशिष्ट आकलन के अंतरों को कम करने पर चर्चा की जाए। आधुनिक वैज्ञानिक मापदण्डों के आधार पर प्रमाणित विश्लेषण द्वारा इसे एकीकृत स्वास्थ्य प्रणाली का हिस्सा बनाने पर भी चिंतन होना चाहिए। उन्होंने कहा कि उन क्षेत्रों में जहाँ आधुनिक जाँच सुविधाएँ सीमित हैं, आयुष्मान आरोग्य मंदिरों और सामुदायिक स्वास्थ्य कार्यक्रमों में नाड़ी विश्लेषण विधि के द्वारा बड़ी संख्या में लोगों तक स्वास्थ्य परामर्श तथा प्रारंभिक स्वास्थ्य आकलन में आयुर्वेद चिकित्सक और स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं की संभावनाओं को भी खोजा जाना चाहिए।

    राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने राष्ट्रीय संगोष्ठी का शुभारंभ भगवान धन्वतरी की प्रतिमा के समक्ष दीप प्रज्ज्वलन कर किया। उनका आयुष विभाग के प्रमुख सचिव शोभित जैन ने पौधा और स्मृति चिन्ह भेंट कर अभिनंदन किया। राज्यपाल पटेल ने ''आयु वर्धनम् – सिकल सेल'' लघु पुस्तिका का लोकार्पण किया। भारत के प्रतिष्ठित नाड़ी विशेषज्ञों का सम्मान किया। महाविद्यालय परिसर में औषधीय पौधे का रोपण किया।

    कार्यक्रम में विधायक भगवानदास सबनानी ने आयुर्वेद को आगे बढ़ाने में महाविद्यालय की सतत और सक्रिय भूमिका की सराहना की। स्वागत उद्बोधन में आयुष विभाग के प्रमुख सचिव शोभित जैन ने नाड़ी विश्लेषण विज्ञान के प्राचीन और ऐतिहासिक महत्व का उल्लेख करते हुए राष्ट्रीय संगोष्ठी के आयोजन के उद्देश्य, महत्व और उपयोगिता पर विस्तार से जानकारी दी। आभार आयुष विभाग की आयुक्त सुउमा माहेश्वरी ने व्यक्त किया। संगोष्ठी का प्रारंभ और समापन राष्ट्रीय गीत एवं राष्ट्रीय गान से हुआ। कार्यक्रम में पं. खुशीलाल शर्मा शासकीय आयुर्वेद महाविद्यालय के प्राचार्य उमेश शुक्ला, नाड़ी विशेषज्ञ, महाविद्यालय के विभिन्न विभागों के संकाय प्रमुख, आचार्यगण और विद्यार्थी उपस्थित थे।

     

  • MP में चीता संरक्षण को बड़ी उड़ान, वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व में 2 चीते होंगे विमुक्त; 7 अक्टूबर को कार्यक्रम

    MP में चीता संरक्षण को बड़ी उड़ान, वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व में 2 चीते होंगे विमुक्त; 7 अक्टूबर को कार्यक्रम

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव 7 अक्टूबर को 2 चीतों को वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व में करेंगे विमुक्त

    मध्यप्रदेश में कूनो और गांधीसागर के बाद अब वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व बनेगा चीतों का तीसरा आवास

    वन्य प्राणी संरक्षण सप्ताह के समापन पर सागर और बुंदेलखंड के लिए ऐतिहासिक अवसर

    सागर

    वन्य प्राणी संरक्षण सप्ताह के समापन अवसर पर सागर और बुंदेलखंड के लिए वन्यजीव संरक्षण का एक ऐतिहासिक अध्याय जुड़ने जा रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव 7 अक्टूबर को वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व में कूनो से लाए गए दो चीतों को विमुक्त करेंगे। इसके साथ ही यह मध्यप्रदेश में चीतों का तीसरा आवास बन जाएगा।

    चीतों की मौजूदगी से सागर और बुंदेलखंड में वन्यजीव पर्यटन को बढ़ावा मिलने के साथ रोजगार और स्थानीय अर्थव्यवस्था के लिए नए अवसर सृजित होंगे। देश के विभिन्न हिस्सों से पर्यटकों के यहां पहुंचेंगे, जिससे होटल, रिसॉर्ट, होम-स्टे, परिवहन, गाइड, वाहन चालक, छोटे व्यवसाय और हस्तशिल्प से जुड़े लोगों को लाभ मिलेगा। आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में भी पर्यटन आधारित आर्थिक गतिविधियों को गति मिलेगी।

    439 हेक्टेयर क्षेत्र में चीतों के लिए विशेष व्यवस्थाएं

    कूनो राष्ट्रीय उद्यान और गांधीसागर वन्यजीव अभयारण्य के बाद वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व को मध्यप्रदेश में चीतों के तीसरे आवास के रूप में विकसित किया गया है। चीतों की सुरक्षा और अनुकूलन के लिए लगभग 439 हेक्टेयर क्षेत्र में विशेष व्यवस्थाएं की गई हैं। आधुनिक बाड़ों (बोमा) और अन्य सुविधाओं से युक्त सुरक्षित आवास तैयार किया गया है। वन विभाग द्वारा चीतों की सुरक्षा, नियमित निगरानी और स्वास्थ्य देखभाल की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित की गई है। साथ ही, क्षेत्र में मौजूद अन्य वन्यजीवों के लिए भी सुरक्षित और अनुकूल पारिस्थितिकी तंत्र विकसित किया गया है।

    प्रदेश का सबसे बड़ा टाइगर रिजर्व

    वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व, जिसे नौरादेही टाइगर रिजर्व के नाम से भी जाना जाता है, सागर, दमोह और नरसिंहपुर जिलों में लगभग 2,339 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैला प्रदेश का सबसे बड़ा टाइगर रिजर्व है। वर्ष 1997 में स्थापित इस क्षेत्र को नौरादेही वन्यजीव अभयारण्य के साथ एकीकृत करने के बाद 20 सितंबर 2023 को टाइगर रिजर्व का दर्जा दिया गया। यह क्षेत्र बाघ, तेंदुआ, चीतल, सांभर, नीलगाय और भालू सहित विविध वन्यजीवों का प्राकृतिक आवास है तथा संकटग्रस्त भारतीय गिद्ध प्रजातियों के संरक्षण के लिए भी महत्वपूर्ण है।

    चीता पुनर्स्थापना अभियान को मिला नया विस्तार

    प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 17 सितंबर 2022 को कूनो राष्ट्रीय उद्यान में नामीबिया से लाए गए चीतों को विमुक्त कर भारत में चीता पुनर्स्थापना अभियान की शुरुआत की थी। इसके बाद दक्षिण अफ्रीका से भी चीते भारत लाए गए। अब यह अभियान मध्यप्रदेश के अन्य उपयुक्त वन क्षेत्रों तक विस्तार ले रहा है। वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व में चीतों की विमुक्ति इसी व्यापक संरक्षण अभियान की महत्वपूर्ण कड़ी है।

    देश में चीतों की संख्या बढ़कर 60

    5 अक्टूबर 2026 को कूनो राष्ट्रीय उद्यान में भारत में जन्मी मादा चीता KJP21 ने पांच स्वस्थ शावकों को जन्म दिया। इसके साथ देश में चीतों की संख्या बढ़कर 60 हो गई है, जिनमें 41 भारत में जन्मे चीते शामिल हैं।

    7 अक्टूबर को कूनो से नर थोलो और मादा CCB-3 को वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व लाया जाएगा। इनके स्थानांतरण के बाद कूनो में 54 चीतें रहेंगे। गांधीसागर वन्यजीव अभयारण्य में दक्षिण अफ्रीकी मूल के नर चीते प्रभास और पावक, मादा धीरा तथा सितंबर 2026 में बोत्सवाना से लाकर विमुक्त की गई मादा राधा मौजूद हैं।

    वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व में दो चीतों की विमुक्ति के साथ मध्यप्रदेश में चीता पुनर्स्थापना अभियान एक नए चरण में प्रवेश करेगा।

  • हर घर मिले स्वच्छ और सस्ती ऊर्जा, PM सूर्यघर योजना को प्रभावी बनाने पर जोर

    हर घर मिले स्वच्छ और सस्ती ऊर्जा, PM सूर्यघर योजना को प्रभावी बनाने पर जोर

    लोगों को स्वच्छ और सस्ती ऊर्जा उपलब्ध कराने पीएम सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना का करें प्रभावी क्रियान्वयन : नवकरणीय ऊर्जा मंत्री शुक्ला

    भोपाल में सेवा सेतु अभियान अन्तर्गत आयोजित शिविर का किया शुभारंभ

    भोपाल 

    प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की मंशानुसार लोगों को स्वच्छ और सस्ती ऊर्जा उपलब्ध कराने के लिए जरूरी है कि पीएम सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना का प्रभावी क्रियान्वयन किया जाये। नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा मंत्री राकेश शुक्ला ने यह बात मंगलवार को सेवा सेतु अभियान अन्तर्गत रवीन्द्र भवन भोपाल में आयोजित शिविर में कही।

    मंत्री शुक्ला ने कहा कि रूफटॉप सोलर पैनल लगाने के लिए क्षेत्रवार लक्ष्य निर्धारित कर उसकी शत-प्रतिशत पूर्ति सुनिश्चित की जाये। इस कार्य की सतत मानीटरिंग होना चाहिए। योजना के क्रियान्वयन में आ रही कमियों को भी दूर करें। उन्होंने कहा कि आगे आने वाली पीढ़ी को हरा भरा और सोलर बिजली से युक्त मध्यप्रदेश सौंपना हम सबकी जिम्मेदारी है।

    अपर मुख्य सचिव नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा मनु श्रीवास्तव ने कहा कि सोलर संयत्र से मिलने वाली बिजली 2 रूपये प्रति यूनिट है, जबकि कोयला बनने वाली बिजली 6 रूपये प्रति यूनिट है। साथ ही सोलर एनर्जी पर्यावरण के लिए पूरी तरह सुरक्षित है। अत: इस अभियान में सभी लोग सक्रिय सहभागिता करें।

    एम.डी. मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी ऋषि गर्ग ने बताया कि प्रदेश में एक लाख 88 हजार रूफटॉप सोलर पैनल लग चुके हैं। प्रदेश में 750 मेगावॉट की सेालर एनर्जी की क्षमता विकसित हो चुकी है। उन्होंने बताया कि शिविरों के माध्यम से लोगों को जागरूक किया जा रहा है।

    आर.ई.सी. के पदाधिकारी विजय कुलकर्णी ने बताया कि देश में एक करोड़ घरों में रूफटाप सोलर पैनल लगाने का लक्ष्य है। अभी तक 51 लाख लगाये गये हैं। वीडियो के माध्यम से सोलर पैनल के उपयोग की जानकारी दी गयी।

    मंत्री शुक्ला ने सोलर पैनल से संबंधित लगे स्टॉल का भी अवलोकन किया। आभार प्रदर्शन एम.डी. ऊर्जा विकास निगम अमित तोमर ने किया।

  • 12 नए मेडिकल कॉलेज और रोजगारपरक कोर्स के लिए 12 नए विश्वविद्यालय होंगे आरंभ

    12 नए मेडिकल कॉलेज और रोजगारपरक कोर्स के लिए 12 नए विश्वविद्यालय होंगे आरंभ

    भोपाल 

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि वर्ष 2027 प्रदेश में युवा वर्ष के रूप में मनाया जाएगा और एक वर्ष में मध्यप्रदेश लोक सेवा आयोग की एक नहीं, दो परीक्षाएं आयोजित की जाएंगी। इसके साथ ही प्रदेश में 12 नए मेडिकल कॉलेज और रोजगारपरक कोर्स के लिए 12 नए विश्वविद्यालय आरंभ किए जाएंगे, जो कौशल उन्नयन पर केन्द्रित होंगे। प्रदेश के एक लाख युवाओं को कौशल उन्नयन योजना से जोड़ा जाएगा। युवा वर्ष 2027 के लिए एक पोर्टल की भी शुरूआत की जाएगी, जिसमें युवा अपने विचार और सुझाव दे सकेंगे। राज्य सरकार उपयुक्त सुझावों को लागू करने की दिशा में कार्य करेगी। प्रदेश के सभी जिलों के शासकीय महाविद्यालयों में प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए नि:शुल्क कोचिंग की व्यवस्था की जाएगी। कॉलेजों में विद्यार्थियों के बेहतर प्लेसमेंट के लिए विशेष एजेंसी निर्धारित की जाएगी, जो युवाओं को रोजगार से जोड़ने के लिए काम करेगी। स्नातकोत्तर की छात्राओं को गांव की बेटी और प्रतिभा किरण योजना में शामिल किया जाएगा। सभी शासकीय महाविद्यालयों में अत्याधुनिक आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस और एडवांस कम्प्युटिंग लैब की स्थापना की जाएगी। उच्च शिक्षा में शोध को प्रोत्साहन देने के लिए शोधार्थियों को मिलने वाली राशि को 16 हजार से बढ़ाकर 25 हजार रूपए प्रतिमाह किया जाएगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने यह घोषणाएं आज सीएम यूथ कॉन्क्लेव -2026 को संबोधित करते हुए कीं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने लाल परेड ग्राउंड पर दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया।

    युवाओं के लिये लगाए गए अनेक स्टॉल्स

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव की उपस्थिति में सीएम यूथ कॉन्क्लेव में यूथ आइकॉनिक सिंगर  जुबिन नौटियाल और कबीर कैफे द्वारा मंत्रमुग्ध करने वाली सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दी गयी। 'मेरी चौखट पर चलकर आज प्रभु राम आएं हैं', 'शंकर संकट हरना', 'कृष्ण गोविंद हरे मुरारी' जैसे भजनों पर युवा झूम उठे। लाल परेड मैदान युवाओं के उत्साह, उमंग और ऊर्जा से सराबोर हो गया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कार्यक्रम स्थल पर नेशनल एआई लिटरेसी मिशन के कौशल रथ द्वारा संचालित गतिविधियों का अवलोकन किया। उन्होंने युवाओं द्वारा प्रस्तुत नुक्कड़ नाटक भी देखा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कार्यक्रम स्थल पर युवाओं के लिए मानसिक स्वास्थ्य, योग, कॅरियर गाइडेंस, भारतीय ज्ञान परम्परा, कौशल उन्नयन, आयुष और नवाचार से उद्यमिता तक की थीम पर लगाए गए स्टॉल्स का अवलोकन भी‍किया। विभिन्न विश्वविद्यालयों द्वारा भी अपने स्टॉल लगाए गए थे।

    'मुख्यमंत्री डॉ. यादव के संग-बदलाव के रंग' की रॉक प्रस्तुति ने युवाओं को किया आकर्षित

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने  जुबिन नौटियाल के साथ छात्रों पर पुष्प वर्षा कर उनका अभिवादन किया। रोबोट संग सीएम की कदमताल के अंतर्गत मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने रोबोट 'बडी' से हाथ मिलाया और उसके साथ वॉक भी की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सेवा संकल्प अभियान के अंतर्गत सेवा फर्स्ट इनोवेशन चैलेंज के पंजीकरण का शुभारंभ किया। इस अवसर पर प्रदेश के उद्योगों और विकसित भारत @2047 पर लघु फिल्म का प्रदर्शन किया गया, साथ ही 'डॉ. मोहन यादव के संग-बदलाव के रंग' की रॉक शैली में वीडियो प्रस्तुति दी गई। कार्यक्रम में उच्च शिक्षा मंत्री  इंदर सिंह परमार, पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक कल्याण राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) मती कृष्णा गौर, विधायक  भगवानदास सबनानी, विधायक  रामेश्वर शर्मा तथा अन्य जनप्रतिनिधि और अधिकारीगण उपस्थित थे।

    राज्य स्तर पर 5 करोड़ रूपए का आइडिया फंड बनाया जाएगा

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि युवाओं स्टार्टअप आइडिया को प्रोत्साहित करने के लिए राज्य स्तर पर 5 करोड़ रूपए का आइडिया फंड बनाया जाएगा। विश्वविद्यालय स्तर भी शोध को प्रोत्साहित किया जाएगा। राष्ट्रीय सेवा योजना की प्रदेश में 500 नई इकाईयां बनाई जाएंगी। प्रत्येक संभाग में कामकाजी महिलाओं के लिए हॉस्टल बनाए जाएंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन में वर्ष 2027 में पुन: ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट का आयोजन होगा, जिससे सम्पूर्ण प्रदेश में युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि एशियन गेम्स-2026 में मध्यप्रदेश के खिलाड़ियों ने 5 स्वर्ण पदक जीते हैं। बदलते दौर में भारत दुनिया का सबसे युवा देश है। युवा शक्ति के बल पर भारत आगे बढ़ेगा और इसी के साथ मध्यप्रदेश भी आगे बढ़ेगा। मध्यप्रदेश सबसे युवा प्रदेश है। यहां बेरोजगारी दर देश में सबसे कम है। हम प्रदेश की समृद्धि और युवाओं के कल्याण के लिए सभी सुविधाएं उपलब्ध करा रहे हैं।

    राज्य सरकार तकनीक और नवाचार के क्षेत्र में लगातार कदम उठा रही है

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री  मोदी के सार्वजनिक जीवन के 25 वर्ष 7 अक्टूबर को पूर्ण हो रहे हैं। सेवा और देश की प्रगति को समर्पित प्रधानमंत्री  मोदी के नेतृत्व और मार्गदर्शन में प्रदेश में कई असंभव कार्य पूर्ण हुए हैं। मध्यप्रदेश को पहले केवल कृषि आधारित प्रदेश माना जाता था, लेकिन पिछले ढाई साल में हमारा प्रदेश उद्योग, टेक्नोलॉजी, इनोवेशन, मेडिकल एजुकेशन और आईटी सेक्टर में तेजी से आगे बढ़ा है। प्रदेश सरकार ने सभी शासकीय विभागों में 85 हजार युवाओं को नौकरी दी। उन्होंने युवा साथियों में जोश भरते हुए कहा कि यही समय है – सही समय है। राज्य सरकार युवाओं के लिए तकनीक और नवाचार के क्षेत्र में लगातार कई नए कदम उठा रही है। राज्य में नॉलेज सिटी और साइंस सिटी आकार ले रही हैं। हमारा प्रयास है‍कि राज्य के युवा नौकरी पाने वाले नहीं, नौकरी देने वाले बने, इसीलिए आईटी पार्क इंदौर, रीवा, उज्जैन सहित हम देश का सबसे बड़ा टेली कम्यूनिकेशन केन्द्र ग्वालियर में बनाने जा रहे हैं।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने युवाओं से बड़े भाई के रूप में बातचीत की। वे रैम्प पर चलते हुए छात्रों के बीच पहुंचे, छात्रों से हाथ मिलाया और उनसे अनौपचारिक लहजे में संवाद किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने युवाओं को मंच पर बुलाकर उनसे, उनके सपनों, आकांक्षाओं और राज्य सरकार से अपेक्षाओं पर चर्चा की।

    भोपाल के ओरिएंटल कॉलेज की छात्रा सु आयशा खान ने मुख्यमंत्री डॉ. यादव से पूछा कि – राज्य सरकार युवाओं को कृषि क्षेत्र में प्रोत्साहित करने के लिए क्या कर रही है ?

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि – कृषि क्षेत्र में समृद्धि के लिए सरकार ने पूरा वर्ष 2026 कृषक कल्याण को समर्पित किया है। हमारी सरकार फूड प्रोसेसिंग को लेकर वैल्यू चेन तैयार करने के लिए कार्य कर रही है। युवा साथी जैविक खेती के साथ नई फसलों की खेती भी कर रहे हैं। इसी वर्ष सरकार ने पौने 14 लाख किसानों से 104 लाख मीट्रिक टन गेहूं खरीदा। यह देश में सबसे अधिक है। अब किसानों को दिन में भी 10 घंटे बिजली मिलेगी। सरकार कॉन्ट्रैक्ट फॉर्मिंग और दूध उत्पादन को भी प्रोत्साहन दे रही है।

    एलएनसीटी कॉलेज की छात्रा सु नीशा वारस्कर ने पूछा कि मध्यप्रदेश सरकार एआई और स्टार्टअप फील्ड में क्या बदलाव ला रही है ?

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि- राज्य सरकार लगातार इनोवेशन के बल पर युवाओं को आगे बढ़ा रही है। भोपाल में एआई और नॉलेज सिटी बन रही है। उज्जैन में साइंस सिटी पर काम चल रहा है। अब सेमीकंडक्टर और नवाचारों को भी प्रोत्साहन दिया जा रहा है। युवाओं को स्टार्टअप के लिए 5 लाख रुपए तक अनुदान की व्यवस्था है। हमारे युवा रोजगार देने वाले बनें इस दिशा में प्रदेश सरकार काम कर रही है।

    स्कोप ग्लोबल यूनिवर्सिटी के छात्र  लक्ष्य वास्तव ने पूछा कि प्रदेश के युवाओं का रुझान तेजी से खेलों की ओर बढ़ा है। प्रदेश को स्पोर्ट्स हब बनाने के लिए क्या कार्य हो रहे हैं ?

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि- भोपाल में वर्ल्ड क्लास स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स तैयार हो चुका है। जहां प्रशिक्षण ले रहे मध्यप्रदेश के खिलाड़ियों ने एशियन गेम्स में 11 पदक जीते, जिसमें 5 स्वर्ण पदक भी शामिल हैं। उच्च शिक्षा में स्पोर्ट्स को एक कोर्स के रूप में शामिल किया गया है। सभी कॉलेजों में स्पोर्ट्स कोच की नियुक्ति की है। प्रदेश की सभी 230 विधानसभाओं में युवाओं के लिए स्पोर्ट्स स्टेडियम तैयार किए जा रहे हैं। हमारे खिलाड़ी कुश्ती, कबड्डी, हॉकी, क्रिकेट के साथ अब हमारे खिलाड़ी आर्चरी और शूटिंग में भी गोल्ड मेडल जीत रहे हैं। युवा वर्ष में स्पोर्ट्स सेक्टर को हम सबसे अधिक प्राथमिकता देंगे।

    सरोजनी नायडू महाविद्यालय की छात्रा सु अपर्णा ने सवाल किया कि सोशल मीडिया के दौर में हम भारतीय और सनातन संस्कृति से कैसे जुड़े रहें और इस दिशा में सरकार क्या प्रयास करेगी ?

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि- हम नदी, प्रकृति और पहाड़ सभी से प्रेम करते हैं। हम जियो और जीने दो की संस्कृति के आधार पर चलते हैं। भारतीय मूल के युवा पायलट कैप्टन स्मित ने इसी का उदाहरण पेश किया है। उन्होंने फ्लाइट में 200 यात्रियों की जान बचाई। सिंहस्थ 2028 में करीब 30 करोड़ श्रद्धालु देश-दुनिया से उज्जैन आएंगे। इसमें भीड़ प्रबंधन के लिए एआई टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल किया जाएगा। महाकाल के लड्डू अब कार्ड के जरिए मिल रहे हैं। बाबा महाकाल के दर्शन ही नहीं, तीर्थाटन से रोजगार के अवसर भी मिल रहे हैं। अगले वर्ष 12 करोड़ श्रद्धालुओं के उज्जैन आने का अनुमान है।

    उत्कृष्ट महाविद्यालय भोपाल के छात्र  अनिकेत तिवारी का प्रश्न था कि प्रधानमंत्री  मोदी ने विकसित भारत के लिए खेल, रोड, रेल के विकास की बात कही है। राज्य सरकार इसमें कैसे योगदान देगी ?

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री  मोदी पूरे देश को परिवार मानते हैं। उनके मार्गदर्शन में प्रदेश हर क्षेत्र में विकास कर आगे बढ़ रहा है। हमारी सरकार हवाई सुविधाएं बढ़ाने के लिए काम कर रही है। पिछले ढाई साल में सतना, रीवा और दतिया में नए एयरपोर्ट शुरू हुए हैं। राज्य सरकार प्रत्येक 150 किलोमीटर पर एक एयरपोर्ट बनाएगी। आगामी वर्षों में कुल 15 एयरपोर्ट बनाए जाएंगे, जिसमें से 10 इसी वर्ष तैयार करने का प्रयास रहेगा। हेली सर्विस और नई टेक्नोलॉजी को प्रोत्साहन के साथ अब हाइड्रोजन ट्रेन भी संचालित हो रही है। हम राज्य को नई तकनीक के बल पर आगे बढ़ाएंगे।

    चिरायु मेडिकल कॉलेज भोपाल की छात्रा सु नीरा चटर्जी का सवाल था कि – युवाओं को नशे की बुराई से कैसे बचाएंगे ?

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा‍कि प्रधानमंत्री  मोदी के नेतृत्व में हमारी सरकार वर्ष 2029 तक प्रदेश को नशे से मुक्त कराएंगे। पिछले दिनों केंद्रीय गृहमंत्री  अमित शाह ने राज्य सरकार के साथ अभियान को लेकर समीक्षा बैठक की है। नशे से समाज और परिवार बर्बाद हो जाता है। ड्रग्स के नशे के रोग से युवा पीढ़ी को बचाने के लिए राज्य सरकार कठोर कार्रवाई करेगी।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव के प्रयासों से प्रदेश में राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 का सफल क्रियान्वयन हुआ

    उच्च शिक्षा मंत्री  इंदर सिंह परमार ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव के अथक प्रयासों से मध्यप्रदेश सरकार राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 को क्रियान्वित करने में सफल हो पाई है। सीएम यूथ कॉन्क्लेव में शैक्षणिक संस्थान, व्यापारी, उद्योगपति, छात्र, शिक्षाविद् सहित समाज के सभी वर्गों के लोग मिलकर देश के भावी निर्माण के संकल्प को पूरा करने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। प्रधानमंत्री  मोदी ने राष्ट्र के पुनर्निमाण के लिए विकसित भारत@2047 का सपना देखा है। विश्व में देश को सबसे शक्तिशाली बनाने में युवा शक्ति का योगदान महत्वपूर्ण रहेगा। कार्यक्रम में अपर मुख्य सचिव उच्च शिक्षा  अनुपम राजन तथा अन्य अधिकारी उपस्थित थे। आयुक्त उच्च शिक्षा विभाग  प्रबल सिपाहा ने आभार व्यक्त किया।

     

  • अधोसंरचना विकास को रफ्तार देने की तैयारी, एक लाख करोड़ से अधिक खर्च का लक्ष्य

    अधोसंरचना विकास को रफ्तार देने की तैयारी, एक लाख करोड़ से अधिक खर्च का लक्ष्य

    भोपाल 

    इस वित्तीय वर्ष 2026-2027 में मध्यप्रदेश सरकार ने बजट प्रावधानों और उपलब्ध वित्तीय संसाधनों के आधार पर सड़क, बांध, बिजली, नहर निर्माण सहित विभिन्न अधोसंरचना परियोजनाओं पर एक लाख करोड़ रुपये से अधिक व्यय का लक्ष्य रखा है। इस राशि में राज्य की अपनी आय, विभिन्न निगमों के संसाधन और भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के माध्यम से जुटाए जाने वाले ऋण सहित अन्य वित्तीय स्रोत शामिल हैं। वास्तविक उपलब्धता और व्यय बजट दस्तावेजों तथा वर्ष के दौरान जारी आधिकारिक वित्तीय आंकड़ों से स्पष्ट होंगे।

    विकास परियोजनाओं के लिए इतनी बड़ी राशि का प्रावधान इसीलिए संभव हो सका है, क्योंकि सकल राज्य घरेलू उत्पाद (जीएसडीपी) में हर वर्ष निरंतर वृद्धि हो रही है। जीएसडीपी में बढ़ोतरी होने से राज्य सरकारों की ऋण लेने की क्षमता भी बढ़ जाती है, हालांकि ऋण की वास्तविक सीमा केंद्र सरकार के नियमों, राजकोषीय उत्तरदायित्व प्रावधानों और अन्य वित्तीय मानकों पर निर्भर करती है। मध्यप्रदेश सरकार इस बढ़ी हुई वित्तीय क्षमता का उपयोग उपरोक्त विकास परियोजनाओं के लिए कर रही है।

    इस लक्ष्य का उद्देश्य प्रदेश में चल रही बड़ी विकास परियोजनाओं को वित्तीय सहायता देना और उनके क्रियान्वयन में तेजी लाना है। मध्यप्रदेश में सड़क क्षेत्र की कई परियोजनाओं के साथ केन-बेतवा नदी जोड़ो परियोजना और पार्वती-कालीसिंध-चंबल नदी जोड़ो परियोजना से संबंधित कार्य भी विभिन्न चरणों में संचालित हैं। इन परियोजनाओं की लागत, वित्तपोषण व्यवस्था और प्रगति का आकलन संबंधित विभागों तथा केंद्र और राज्य सरकार के आधिकारिक दस्तावेजों के आधार पर किया जाना चाहिए।
    इन परियोजनाओं के अंतर्गत बांध, नहर और अन्य जल-संरचनाओं के निर्माण से जुड़े कार्य शामिल हैं। इसके अलावा बिजली, सड़क और अन्य आधारभूत संरचनाओं के विकास के लिए भी विभिन्न क्षेत्रों में परियोजनाएं संचालित की जा रही हैं। इन कार्यों पर होने वाला व्यय परियोजना-विशिष्ट स्वीकृतियों, चरणबद्ध बजट प्रावधानों और उपलब्ध वित्तीय संसाधनों पर निर्भर करेगा।

    इतने बड़े निवेश कार्यक्रम की सफलता का एक महत्वपूर्ण पैमाना यह होगा कि बजट में किए गए प्रावधान वास्तविक परिसंपत्तियों में कितनी तेजी और दक्षता से परिवर्तित होते हैं। परियोजनाओं में समय और लागत की वृद्धि को नियंत्रित करना, भुगतान व्यवस्था को सुव्यवस्थित रखना तथा प्रत्येक परियोजना के परिणामों की नियमित निगरानी करना वित्तीय प्रबंधन की दृष्टि से उतना ही महत्वपूर्ण है जितना धन की व्यवस्था करना।
    इस लिहाज से सरकार के सामने दोहरी जिम्मेदारी है—एक ओर विकास परियोजनाओं के लिए पूंजीगत व्यय बढ़ाना और दूसरी ओर राजकोषीय स्थिरता बनाए रखना। 

    यदि राजस्व संसाधनों में वृद्धि, ऋण प्रबंधन, व्यय की प्राथमिकता और परियोजनाओं के कुशल क्रियान्वयन के बीच संतुलन कायम रहता है, तो एक लाख करोड़ रुपये से अधिक का प्रस्तावित निवेश प्रदेश की दीर्घकालीन अधोसंरचना क्षमता को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

    सरकार के निर्धारित निवेश लक्ष्य का प्रमुख उद्देश्य प्रदेश की अधोसंरचना क्षमता को मजबूत करना और प्राथमिकता वाली परियोजनाओं के लिए आवश्यक धन उपलब्ध कराना है। हालांकि, एक लाख करोड़ रुपये से अधिक की राशि लक्ष्य या बजट अनुमान को दर्शाती है; इसे वास्तविक व्यय नहीं माना जा सकता। निर्धारित प्रावधान, ऋण से प्राप्त राशि और परियोजनावार वास्तविक खर्च का अंतिम आकलन वित्तीय वर्ष समाप्त होने के बाद उपलब्ध आधिकारिक लेखा और वित्तीय रिपोर्टों के आधार पर किया जाना अधिक उपयुक्त होगा।

    "हर जगह, हरसंभव—प्रदेश विकास में सहभागिता” की भावना के साथ अधोसंरचना निर्माण, रोजगार सृजन और आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देने वाली परियोजनाओं को प्राथमिकता दी जा रही है। इन प्रयासों से विकास की गति तेज होगी और प्रदेश की अर्थव्यवस्था को नई मजबूती मिलेगी।
    एक लाख करोड़ रुपये के विकास कार्यों पर व्यय से एक लाख से अधिक प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर सृजित होने की संभावना है।

  • बाल विवाह मुक्त मध्यप्रदेश की परिकल्पना को साकार करने मिलकर करें प्रभावी प्रयास : मंत्री  निर्मला भूरिया

    बाल विवाह मुक्त मध्यप्रदेश की परिकल्पना को साकार करने मिलकर करें प्रभावी प्रयास : मंत्री निर्मला भूरिया

    भोपाल 

    मध्यप्रदेश में बाल विवाह की रोकथाम को प्रभावी बनाने के लिए 35 हजार से अधिक बाल विवाह प्रतिषेध अधिकारियों (CMPOs) का व्यापक मैदानी तंत्र तैयार किया गया है। अब बाल विवाह के हॉटस्पॉट क्षेत्रों की पहचान कर स्थानीय परिस्थितियों और उपलब्ध आंकड़ों के आधार पर लक्षित कार्रवाई की जाएगी। प्रशासन अकादमी में आयोजित एक दिवसीय राज्य स्तरीय प्रशिक्षण कार्यशाला में बाल विवाह रोकथाम की रणनीति, कानून के प्रभावी क्रियान्वयन और विभिन्न विभागों के समन्वय पर मंथन हुआ।

    महिला एवं बाल विकास मंत्री  निर्मला भूरिया ने कहा है कि बाल विवाह मुक्त मध्यप्रदेश की परिकल्पना को साकार करने के लिए शासन, प्रशासन और समाज को मिलकर प्रभावी एवं समन्वित प्रयास करने होंगे। बाल विवाह केवल एक सामाजिक कुरीति नहीं, बल्कि बालिकाओं के शिक्षा, स्वास्थ्य, सुरक्षा और सम्मानजनक जीवन के अधिकार का गंभीर उल्लंघन है। उन्होंने कहा कि बाल विवाह की रोकथाम के लिए तैनात बाल विवाह प्रतिषेध अधिकारी (CMPO) केवल कानून के क्रियान्वयनकर्ता नहीं, बल्कि सामाजिक परिवर्तन के अग्रदूत हैं।

    मंत्री  भूरिया मंगलवार को बाल विवाह प्रतिषेध अधिकारियों के राज्य स्तरीय प्रशिक्षण कार्यक्रम को संबोधित कर रही थीं। उन्होंने कहा कि इस प्रशिक्षण का उद्देश्य अधिकारियों को बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम (PCMA), 2006 के प्रभावी क्रियान्वयन के साथ ही बाल विवाह के मामलों में समयबद्ध हस्तक्षेप, समन्वय और संवेदनशील कार्रवाई के लिए सक्षम बनाना है। उन्होंने कहा कि प्रशिक्षण से प्राप्त ज्ञान और कौशल का वास्तविक प्रभाव मैदानी स्तर पर दिखाई देना चाहिए।

    मंत्री  भूरिया ने कहा कि मध्यप्रदेश ने बाल विवाह रोकथाम की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति की है। राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण-6 (NFHS-6) के अनुसार 20-24 वर्ष की महिलाओं में 18 वर्ष की आयु से पहले विवाह का अनुपात NFHS-5 के 23.1 प्रतिशत से घटकर 20 प्रतिशत रह गया है। उन्होंने कहा कि भारत सरकार के ‘बाल विवाह मुक्त भारत अभियान’ से बाल विवाह उन्मूलन को राष्ट्रीय प्राथमिकता मिली है। मध्यप्रदेश में भी बाल विवाह की रोकथाम के लिए प्रभावी, समन्वित और सतत प्रयासों को मजबूत किया जा रहा है।

    35 हजार से अधिक अधिकारियों को का दायित्व

     भूरिया ने बताया कि प्रदेश में 35 हजार से अधिक बाल विवाह प्रतिषेध अधिकारियों (CMPOs) को विभिन्न विभागों से नामित किया गया है। यह व्यवस्था ग्राम स्तर तक निगरानी और बाल विवाह की सूचना मिलने पर त्वरित हस्तक्षेप कर कार्रवाई करने के लिए है । जिला स्तर से लेकर अनुभाग, तहसील, विकासखंड, सेक्टर, ग्राम और नगरीय क्षेत्रों तक अधिकारियों की मौजूदगी का उद्देश्य यही है कि बाल विवाह की सूचना मिलने के बाद कार्रवाई प्रशासन के किसी दूरस्थ स्तर तक पहुंचने का इंतजार न करे, बल्कि स्थानीय स्तर पर ही त्वरित हस्तक्षेप संभव हो। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री लाड़ली लक्ष्मी योजना में 18 वर्ष से पहले विवाह होने पर लाभ नहीं मिलने का प्रावधान बालिकाओं को शिक्षा से जोड़े रखने और परिवारों को बाल विवाह से दूर रखने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है।

    ‘बाल विवाह मुक्त ग्राम’ पहल को गति देने पर जोर

     भूरिया ने कहा कि विभाग द्वारा ‘बाल विवाह मुक्त ग्राम’ पहल शुरू की गई है। इसके तहत ऐसे ग्रामों को मान्यता दी जा रही है, जहां पिछले एक वर्ष में कोई बाल विवाह नहीं हुआ है। यह पहल केवल बाल विवाह रोकने तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे समुदाय को बच्चों के अधिकारों की रक्षा और बाल विवाह मुक्त समाज के निर्माण के लिए प्रेरित करने का माध्यम है।उन्होंने कहा कि किशोरियों के लिए जीवन कौशल शिक्षा, स्वास्थ्य जागरूकता, डिजिटल साक्षरता और नेतृत्व विकास जैसे कार्यक्रम उन्हें अपने जीवन से जुड़े निर्णयों में सक्षम बना रहे हैं।

    मंत्री  भूरिया ने प्रशिक्षण में शामिल अधिकारियों से कहा कि देवउठनी ग्यारस जैसे संवेदनशील अवसरों को देखते हुए बाल विवाह की रोकथाम के लिए अभी से तैयारियां तेज करना जरूरी है।उन्होंने कहा कि बाल विवाह के जोखिम वाले परिवारों तक केवल कानूनी दृष्टिकोण से नहीं, बल्कि संवेदनशीलता और सहानुभूति के साथ पहुंचना होगा। गरीबी, सामाजिक दबाव, असुरक्षा और अवसरों की कमी कई बार बाल विवाह के पीछे कारण बनते हैं। ऐसे में कानून के साथ परामर्श, शिक्षा, सामाजिक सहयोग और आजीविका के अवसर उपलब्ध कराना भी जरूरी है।

    बाल विवाह रोकथाम के लिए हॉटस्पॉट क्षेत्रों में लक्षित कार्रवाई जरूरी : आयुक्त संदीप जी.आर.

    आयुक्त महिला बाल विकास  संदीप जी.आर. ने कहा है कि मध्यप्रदेश को बाल विवाह मुक्त बनाने के लिए अब सामान्य प्रयासों से आगे बढ़कर बाल विवाह प्रभावित क्षेत्रों में हॉटस्पॉट आधारित और लक्षित कार्रवाई पर विशेष ध्यान देना होगा। जिन ग्राम पंचायतों, विकासखंडों और जिलों में बाल विवाह की घटनाएं अधिक हैं, वहां उपलब्ध आंकड़ों और साक्ष्यों के आधार पर योजनाबद्ध एवं समयबद्ध कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। उन्होंने बताया कि बाल विवाह की रोकथाम के प्रयासों को जमीनी स्तर तक पहुंचाने के लिए जिला, अनुभाग, तहसील, विकासखंड, सेक्टर, ग्राम और शहरी निकाय स्तर तक अधिकारियों की नियुक्ति की गई है, ताकि बाल विवाह की पहचान, रोकथाम और आवश्यक कार्रवाई के लिए स्थानीय स्तर पर प्रभावी तंत्र विकसित हो सके।  संदीप ने कहा कि महिला एवं बाल विकास विभाग के साथ राजस्व, पंचायत एवं ग्रामीण विकास तथा नगरीय विकास एवं आवास विभाग भी इस अभियान में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। लेकिन पुलिस विभाग और जिला प्रशासन के सक्रिय सहयोग के बिना बाल विवाह की रोकथाम के प्रयास पूर्ण नहीं हो सकते। इसी व्यापक समन्वय को मजबूत करने के उद्देश्य से राज्य स्तरीय प्रशिक्षण आयोजित किया गया है। उन्होंने सभी प्रतिभागियों से बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ (BBBP) योजना की जिला कार्ययोजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन तथा बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम, 2006 (PCMA) के सुदृढ़ प्रवर्तन पर विशेष ध्यान देने का आग्रह किया।

    संचालक पंचायत एवं ग्रामीण विकास  छोटे सिंह ने कहा कि पंचायतों की भूमिका केवल निर्माण कार्यों तक सीमित नहीं है, बल्कि सामाजिक सरोकार भी उनकी जिम्मेदारी का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। पंचायत विकास योजनाओं और ग्राम सभाओं में बाल विवाह रोकथाम को प्रमुखता से शामिल किया जाए तथा ग्राम सभा में चर्चा हो कि बाल विवाह बच्चों के भविष्य के लिए सही है या गलत। विशेष पुलिस महानिदेशक  अनिल कुमार ने कहा कि प्रयास होना चाहिए कि प्रत्येक ब्लॉक और क्षेत्र में बाल विवाह पूरी तरह रोका जाए। बाल विवाह प्रतिषेध अधिकारियों के कार्यों की नियमित समीक्षा के साथ उनकी जिम्मेदारियां भी स्पष्ट रूप से तय की जानी चाहिए।

    यूनिसेफ ने किशोर सशक्तिकरण को बताया स्थायी बदलाव की कुंजी

    यूनिसेफ के राज्य प्रमुख  विलियम हेनलोन जूनियर ने कहा कि किशोरावस्था भविष्य निर्माण का महत्वपूर्ण चरण है। बाल विवाह रोकने के लिए जरूरी है कि किशोर-किशोरियां शिक्षा से जुड़े रहें, सुरक्षित रहें, जीवन कौशल सीखें और अपने जीवन से जुड़े निर्णयों में उनकी भागीदारी हो। इससे बाल विवाह की रोकथाम के साथ समाज के विकास को भी गति मिलेगी।

    इस अवसर पर मंत्री  भूरिया ने यूनिसेफ द्वारा प्रकाशित बाल विवाह के प्रभावी रोकथाम पर आधारित मार्गदर्शिका तथा प्रशिक्षण मोड्यूल का विमोचन किया। साथ ही उन्होंने परिसर में लगे प्रदर्शनी का अवलोकन भी किया। इस अवसर पर यंग चैम्पियंस  हुमा ख़ान और आशु सुंदरी ने अपने अनुभव साझा किये।

     

  • लाड़ली बहना की 41वीं किस्त इस महीने, ₹1,500 मिलेंगे; अब तक 40 किस्तों में ₹65,396 करोड़ ट्रांसफर

    लाड़ली बहना की 41वीं किस्त इस महीने, ₹1,500 मिलेंगे; अब तक 40 किस्तों में ₹65,396 करोड़ ट्रांसफर

    भोपाल 

    फिलहाल 1.25 करोड़ से ज्यादा महिलाओं को हर महीने 1,500 रुपये मिलते हैं। अक्टूबर यानी इसी महीने में 41वीं किस्त आने वाली है, जिसकी राशि अब भी 1,500 रुपये ही तय है। योजना की शुरुआत से लेकर अब तक, यानी जून 2023 से सितंबर 2026 तक 40 किस्तों में महिलाओं के खातों में कुल 65,396 करोड़ रुपये जा चुके हैं।

    आमतौर पर लाड़ली बहना योजना की राशि महीने में एक बार पात्र महिलाओं के आधार लिंक बैंक खाते में 10 से 15 तारीख के बीच DBT के जरिए भेजी जाती है. इसी वजह से अक्टूबर की किस्त को लेकर 10 से 15 अक्टूबर के आसपास राशि आने की उम्मीद जताई जा रही है. लेकिन जब तक सरकार की ओर से तारीख का ऐलान नहीं होता, इसे पक्की तारीख नहीं माना जा सकता. मौजूदा सरकारी जानकारी के मुताबिक पात्र महिला को 1,500 रुपये प्रति माह उसके स्वयं के आधार लिंक और DBT सक्रिय बैंक खाते में दिए जाते हैं। 

    किस्त से पहले ये काम जरूर जांच लें
    किस्त आने से पहले लाभार्थी महिलाओं को अपने बैंक खाते और योजना की जानकारी जरूर जांच लेनी चाहिए. सरकारी पोर्टल के मुताबिक, महिला के नाम पर अपना बैंक खाता होना जरूरी है. संयुक्त बैंक खाता मान्य नहीं है. बैंक खाते में आधार लिंक होना चाहिए और डीबीटी भी चालू होना जरूरी है. इसके अलावा समग्र पोर्टल पर आधार की ई-केवाईसी भी पूरी होनी चाहिए. अगर बैंक खाते, आधार, मोबाइल नंबर या समग्र की जानकारी में कोई गलती है, तो उसे समय रहते ठीक करा लेना चाहिए. इससे किस्त आने के समय परेशानी नहीं होगी। 

    ऐसे चेक करें 41वीं किस्त का स्टेटस
        सबसे पहले लाड़ली बहना योजना की आधिकारिक वेबसाइट (cmladlibehna.mp.gov.in) खोलें.
        वहां ‘आवेदन एवं भुगतान की स्थिति’ विकल्प पर क्लिक करें.
        अब अपना आवेदन नंबर या समग्र आईडी डालें
        इसके बाद कैप्चा भरें.
        रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर पर आए ओटीपी को डालकर वेरिफिकेशन करें.
        वेरिफिकेशन पूरा होने के बाद स्क्रीन पर आवेदन और किस्त से जुड़ी जानकारी दिखाई देगी.
        लाड़ली बहना योजना की 41वीं किस्त कब आएगी? जानें लेटेस्ट अपडेट

    पैसा नहीं आए तो क्या करें?
    अगर किस्त जारी होने के बाद भी खाते में पैसा नहीं पहुंचता है तो महिला लाड़ली बहना योजना के हेल्पडेस्क नंबर 0755-2700800 पर संपर्क कर सकती है. योजना के आधिकारिक पोर्टल पर भी हेल्पडेस्क की जानकारी दी गई है। 

    इसके अलावा भुगतान से जुड़ी शिकायत मुख्यमंत्री हेल्पलाइन 181 के जरिए भी दर्ज कराई जा सकती है. इसलिए किस्त जारी होने के बाद सबसे पहले बैंक खाते की स्थिति और योजना के भुगतान स्टेटस की जांच जरूर करें। 

    40वीं किस्त में ट्रांसफर हुए ₹1,835 करोड़ से ज्यादा
    13 सितंबर 2026 को जारी की गई 40वीं किस्त में 1 करोड़ 25 लाख 10 हजार 150 महिलाओं के खातों में 1,835 करोड़ रुपये से ज्यादा गए। मौजूदा दर पर यह खर्च सालाना करीब 22,000 करोड़ रुपये बैठता है।

    राज्य के कुल बजट का 5.4% हिस्सा योजना के नाम
    वित्त वर्ष 2026-27 के बजट में इस योजना के लिए 23,883 रुपये करोड़ रखे गए हैं। यह राशि राज्य के कुल बजट (4.38 लाख करोड़ रुपये) का करीब 5.4 प्रतिशत है।

    शुरुआती अनुमान से दोगुना हुआ खर्च
    घोषणा के वक्त योजना का अनुमान इससे आधा था। फरवरी 2023 में जब शुरुआती गणना की गई थी, तब सालाना खर्च करीब 12,000 करोड़ रुपये आंका गया था, क्योंकि उस समय सहायता राशि 1,000 रुपये तय की गई थी।

  • BHEL दशहरा मैदान में न्याय व्यवस्था का सजीव प्रदर्शन, डायल-112 से वैज्ञानिक साक्ष्य तक समझाया पूरा सिस्टम

    BHEL दशहरा मैदान में न्याय व्यवस्था का सजीव प्रदर्शन, डायल-112 से वैज्ञानिक साक्ष्य तक समझाया पूरा सिस्टम

    डायल-112 से क्राइम सीन और वैज्ञानिक साक्ष्य तक—न्याय की पूरी प्रक्रिया का सजीव प्रदर्शन

    बीएचईएल दशहरा मैदान में 14 विशेष ज़ोन में नवीन न्याय संहिताओं की दी जा रही है जानकारी
    नाट्य मंचन से समझाई जा रही पुलिस और न्याय व्यवस्था की कार्यप्रणाली

    भोपाल 

    केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह द्वारा 03 अक्टूबर को भेल दशहरा मैदान में शुभारंभ की गई नवीन न्याय संहिताओं पर आधारित भव्य प्रदर्शनी में मध्यप्रदेश पुलिस द्वारा आधुनिक पुलिसिंग और न्याय प्रक्रिया को आमजन के लिए सरल एवं सहज तरीके से प्रस्तुत किया जा रहा है। प्रदर्शनी में अपराध की सूचना प्राप्त होने से लेकर पुलिस रिस्पॉन्स, घटनास्थल की जांच, वैज्ञानिक साक्ष्य संकलन, फॉरेंसिक जांच, अभियोजन और न्यायालयीन प्रक्रिया तक की पूरी यात्रा को 14 विशेष ज़ोन में मॉडल, डिजिटल तकनीक, वीडियो और सजीव नाट्य मंचनके माध्यम से समझाया जा रहा है।नागरिकों, विद्यार्थियों और अन्य आगंतुकों को पुलिस अधिकारियों एवं कर्मचारियों द्वारा इस व्यवस्था की कार्यप्रणाली की जानकारी दी जा रही है।

    07 अक्टूबर तक चलने वाली इस पांच दिवसीय प्रदर्शनी में प्रतिदिन सुबह 11:30 बजे, दोपहर 1:00 बजे, 3:30 बजे तथा शाम 5:00 बजेस्थानीय रंगकर्मियों, पुलिस अधिकारियों, डॉक्टर्स एवं अभियोजन अधिकारियों द्वारा सजीव नाट्य मंचन किया जा रहा है। संजीव नाट्य मंचन के माध्यम से यह बताया जा रहा है कि किसी घटना की सूचना मिलने के बाद पुलिस किस प्रकार कार्रवाई करती है और विभिन्न चरणों से गुजरते हुए मामला न्यायालय तक कैसे पहुंचता है।

    डायल-112—एक कॉल से पुलिस रिस्पॉन्स तक की पूरी प्रक्रिया लाइव

    प्रदर्शनी में मध्यप्रदेश पुलिस कीडायल-112 की प्रर्दशनी प्रमुख आकर्षण बनी हुई है। इसमें आपातकालीन कॉल प्राप्त होने से लेकर पुलिस टीम के घटनास्थल तक पहुंचने की पूरी प्रक्रिया को लाइव डेमो के माध्यम से प्रदर्शित किया जा रहा है।

    कंपनी प्रतिनिधियों द्वाराकॉल टेकरकी भूमिका निभाते हुए आपातकालीन कॉल प्राप्त करने, कॉलर से आवश्यक जानकारी लेने और घटना का विवरण दर्ज करने की प्रक्रिया दिखाई जा रही है। इसके बाद पुलिस कर्मचारियों द्वाराडिस्पैचरकी भूमिका में सूचना का विश्लेषण कर संबंधित पुलिस टीम को घटनास्थल के लिए रवाना करने की प्रक्रिया समझाई जा रही है।

    प्रदर्शनी में यह भी बताया जा रहा है कि डायल-112 पर प्राप्त सूचना की रिसीविंग, सूचना संकलन, डिस्पैच, पुलिस रिस्पॉन्स और वरिष्ठ अधिकारियों की मॉनिटरिंग किस प्रकार एक समन्वित व्यवस्था के तहत की जाती है। प्रदेश स्तर से लेकर संभागीय एवं जिला स्तर तक 1200 FRV वाहनोंकी गतिविधियों की निगरानी और समीक्षा की व्यवस्था को भी प्रदर्शित किया गया है।

    डायल-112 के माध्यम से आधुनिक संचार एवं सूचना प्रौद्योगिकी प्रणालियों, त्वरित पुलिस रिस्पॉन्स और विभिन्न स्तरों के बीच समन्वय को सरल भाषा में समझाया जा रहा है।

    क्राइम सीन से न्यायालय तक—हर साक्ष्य की अपनी भूमिका

    प्रदर्शनी के एक अन्य महत्वपूर्ण हिस्से में 3D क्राइम सीन मॉडलके माध्यम से गंभीर अपराध के घटनास्थल की वैज्ञानिक जांच को सजीव रूप में प्रदर्शित किया जा रहा है।

    नाट्य मंचन के माध्यम से ग्रामीण परिवेश में एक झोपड़ी के सामने का घटनास्थल दिखाया गया है, जहां गोली चलने और चाकू से हमला किए जाने की सूचना प्राप्त होती है। घटनास्थल पर चाकू, बोतल, बटन, कारतूस का खोखा और रक्त के संभावित निशान जैसे साक्ष्यों को प्रदर्शित किया गया है।

    घटना की सूचना मिलने के बाद पुलिस द्वारा सबसे पहले घटनास्थल को सुरक्षित किए जाने और साक्ष्यों के संरक्षण पर ध्यान देने की प्रक्रिया समझाई जा रही है। इसके बाद आवश्यकता के अनुसार FSL टीम, फिंगरप्रिंट विशेषज्ञ और डॉग स्क्वाडकी सहायता लेकर वैज्ञानिक जांच किस प्रकार आगे बढ़ाई जाती है, इसे रोल-प्ले के माध्यम से प्रदर्शित किया जा रहा है।

    घटनास्थल कीस्केल फोटोग्राफी एवं वीडियोग्राफी, संभावित फिंगरप्रिंट और जैविक साक्ष्यों का परीक्षण, कारतूस के खोखे के आधार पर आसपास के क्षेत्र की व्यवस्थित सर्च तथा अन्य भौतिक साक्ष्यों के वैज्ञानिक संकलन की प्रक्रिया को भी सरल भाषा में बताया जा रहा है।

    यदि घटना की परिस्थितियों के अनुसार किसी संदिग्ध की पहचान होती है, तो मोबाइल फॉरेंसिक वैन में उपलब्ध GSR परीक्षण किटसे प्राथमिक परीक्षण की प्रक्रिया भी प्रदर्शित की जा रही है। प्राथमिक परीक्षण का परिणाम प्राप्त होने के बाद अंतिम वैज्ञानिक निष्कर्ष के लिए आवश्यक नमूनों को कन्फर्मेटरी परीक्षण हेतु राज्य न्यायालय विज्ञान प्रयोगशाला भेजने की प्रक्रिया समझाई जा रही है।

    इसी प्रकार फिंगरप्रिंट विशेषज्ञ द्वारा संभावित फिंगरप्रिंट विकसित एवं लिफ्ट किए जाने तथा उन्हें नियमानुसार सुरक्षित रखने की प्रक्रिया बताई जा रही है।

    साइबर सुरक्षा—सतर्क रहें, सुरक्षित रहें

    प्रदर्शनी में साइबर अपराधों से बचाव और ठगी की स्थिति में तत्काल उठाए जाने वाले कदमों की जानकारी दी जा रही है। नागरिकों को बताया जा रहा है कि साइबर फ्रॉड होने पर तुरंत 1930 पर कॉल करें अथवा www.cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज करें। साइबर ठगी के मामलों में ‘गोल्डन ऑवर’ का विशेष महत्व है। घटना की सूचना जितनी जल्दी मिलेगी, ठगी की रकम को ट्रैक करने और उपलब्ध प्रक्रिया के माध्यम से उसे फ्रीज कराने के प्रयास उतने ही प्रभावी हो सकते हैं।

    प्रदर्शनी में ₹25,000 से अधिक की साइबर वित्तीय धोखाधड़ी में E-Zero FIR, ऑनलाइन जॉब स्कैम, ऑनलाइन शॉपिंग फ्रॉड एवं इन्वेस्टमेंट फ्रॉड जैसे मामलों से सावधान रहने की जानकारी दी जा रही है।

    नागरिकों को म्यूल अकाउंट के प्रति भी जागरूक किया जा रहा है—किसी अन्य व्यक्ति को अपना बैंक खाता उपयोग करने देना अथवा अनजान लोगों से खाते में राशि लेकर नकद देना साइबर अपराध में संलिप्तता का कारण बन सकता है।

    साथ ही ‘डिजिटल अरेस्ट’ के नाम पर होने वाली ठगी के प्रति सचेत करते हुए बताया जा रहा है कि पुलिस में डिजिटल अरेस्ट का कोई प्रावधान नहीं है। किसी भी संदिग्ध कॉल, वीडियो कॉल या धनराशि की मांग पर घबराएं नहीं और तत्काल संबंधित माध्यम से शिकायत करें।

    आज नाट्य मंचन से आगे बढ़ेगी प्रदर्शनी की कहानी

    प्रदर्शनी मेंआज 06 अक्टूबर को वैज्ञानिक अनुसंधान चरणका विशेष रूप से नाट्य मंचन किया जाएगा। इस चरण में घटनास्थल से प्राप्त साक्ष्यों को वैज्ञानिक जांच के लिए आगे बढ़ाने की प्रक्रिया को FSL विशेषज्ञों, फोरेंसिक विशेषज्ञों तथा डॉक्टर/मेडिकल टीमकी भूमिका के माध्यम से समझाया जाएगा।

    इसके अतिरिक्‍त प्रदर्शनी में ‘ऑपरेशन मुस्कान’को विशेष फीचर के रूप में प्रस्तुत किया जाएगा। इसके माध्यम से गुम हुए बालक-बालिकाओं की तलाश, विभिन्न स्थानों पर पुलिस टीमों की कार्रवाई, पहचान एवं सत्यापन तथा उन्हें सुरक्षित रूप से परिजनों तक पहुंचाने की प्रक्रिया को संवेदनशील तरीके से प्रदर्शित किया जाएगा।

    आमजन के सवालों का समाधान, पुलिस व्यवस्था की जानकारी एक ही स्थान पर

    प्रदर्शनी मेंहेल्प डेस्कभी स्थापित किया गया है, जहां आने वाले नागरिकों एवं विद्यार्थियों को प्रदर्शनी के विभिन्न ज़ोन, पुलिस की आधुनिक व्यवस्थाओं तथा प्रदर्शित प्रक्रियाओं के संबंध में आवश्यक जानकारी उपलब्ध कराई जा रही है। हेल्प डेस्क के माध्यम से आगंतुकों को उनकी जिज्ञासाओं का समाधान प्राप्त करने और प्रदर्शनी के विभिन्न हिस्सों को समझने में सहायता मिल रही है।

     

  • MP में बदलेगा मौसम का मिजाज, पहाड़ों पर एक्टिव होगा पश्चिमी विक्षोभ; इन राज्यों में बारिश संभव

    MP में बदलेगा मौसम का मिजाज, पहाड़ों पर एक्टिव होगा पश्चिमी विक्षोभ; इन राज्यों में बारिश संभव

    भोपाल 
    उत्तरी हवा से वातावरण में ठंडक का अहसास अब धीरे-धीरे होने लगा है। सर्दी के आगमन के बीच सुबह की गुनगुनी धूप अब लोगों को भाने लगी है। मौसम के इस बदलते मिजाज से ये संभावना जताई जा रही है आगामी दिनों में ठंड का असर बढ़ सकता है।

    मौसम विभाग के अनुसार, पहाड़ों में नया पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय होने वाला है। इसके प्रभाव से पंजाब, हरियाणा, दिल्ली, राजस्थान एवं पश्चिमी उत्तर प्रदेश में बारिश की संभावना है। जबलपुर सहित आस-पास का मौसम भी आंशिक रूप से प्रभावित हो सकता है। इसके बाद जबलपुर सहित मप्र में भी ठंड का असर तेजी से बढ़ सकता है।

    फिलहाल मौसम पूरी तरह से शुष्क है। सुबह और रात में हल्की ठंडक का अहसास हो रहा है वहीं दिन में धूप निकल रही है। सात से 12 अक्टूबर तक आंशिक रूप से मौसम में बदलाव देखा जा सकेगा।

    इंदौर में रात का तापमान सबसे कम प्रदेश से 3 अक्टूबर को ही मानसून लौट चुका है, लेकिन चक्रवात, पश्चिमी विक्षोभ की वजह से बारिश का दौर जारी रहने का अनुमान है। हालांकि, दिन में तेज धूप खिल रही है। इससे अधिकतम तापमान 37 डिग्री से ऊपर चल रहा है। दूसरी ओर, रात में ठंडक बढ़ गई है। बीती रात इंदौर में सबसे कम 17.2 डिग्री, बैतूल में 17.5 डिग्री, छिंदवाड़ा में 17.6 डिग्री, पचमढ़ी में 18 डिग्री और अमरकंटक में 18.2 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया।

    मौसम विशेषज्ञ शैलेंद्र कुमार नायक ने बताया, पिछले 10 साल के आंकड़ों पर नजर दौड़ाए तो अक्टूबर में बारिश, गर्मी और ठंड का ट्रेंड है। इस बार भी ऐसा ही होने का अनुमान है। अक्टूबर की शुरुआत में ही मौसम साफ हो गया और धूप खिल गई। वहीं, रात में ठंडक है।

    इस बार सामान्य से कम हुई बारिश बता दें कि इस बार प्रदेश में दक्षिण-पश्चिम मानसून 100 दिन सक्रिय रहा। 24 जून को यह एंटर हुआ था और 3 अक्टूबर को पूरे प्रदेश से विदाई ले ली।

    इस बार कम पानी गिरा, 30 जिलों में असर दक्षिण-पश्चिम मानसून के दौरान प्रदेश में कुल 908.4 मिमी यानी, 35.8 इंच (95.9 प्रतिशत) बारिश हुई। यह सामान्य बारिश 37.3 इंच (949.5 मिमी) की तुलना में 1.5 इंच कम है। वहीं, ओवरऑल 4 प्रतिशत कम पानी गिरा। पूर्वी हिस्से में 4% ज्यादा और पश्चिमी हिस्से में औसत से 12% बारिश कम हुई है।

    प्रदेश के पूर्वी हिस्से- जबलपुर, रीवा, सागर और शहडोल संभाग में आंकड़ा चार प्रतिशत ज्यादा है। अधिकांश जिलों में कोटे से ज्यादा पानी गिर चुका है, लेकिन बालाघाट, छिंदवाड़ा, दमोह, जबलपुर, नरसिंहपुर, पांढुर्णा, रीवा, सागर, सिवनी में 5% से 21% तक कम बारिश हुई है।

    वहीं, पश्चिमी हिस्से के आलीराजपुर, अशोकनगर, बड़वानी, बैतूल, देवास, धार, हरदा, इंदौर, झाबुआ, खंडवा, मंदसौर, मुरैना, नर्मदापुरम, नीमच, रायसेन, रतलाम, सीहोर, शाजापुर, उज्जैन और विदिशा में औसत से 9% से 51% कम पानी गिरा है।

    इन 25 जिलों में कोटा फुल भोपाल, राजगढ़, बुरहानपुर, खरगोन, कटनी, मंडला, डिंडौरी, ग्वालियर, गुना, दतिया, पन्ना, छतरपुर, टीकमगढ़, निवाड़ी, मैहर, आगर-मालवा, भिंड, श्योपुर, सिंगरौली, सीधी, सतना, मऊगंज, शहडोल, उमरिया और अनूपपुर में बारिश का कोटा पूरा हो चुका है।

    बाकी 30 जिलों में कम बारिश हुई। इनमें नरसिंहपुर, दमोह, बालाघाट, अशोकनगर, मुरैना, मंदसौर, खंडवा, बड़वानी, नीमच, जबलपुर, रीवा, सागर, देवास, सिवनी, सीहोर, शिवपुरी, रायसेन, छिंदवाड़ा, विदिशा, शाजापुर, पांढुर्णा, इंदौर, उज्जैन, बैतूल, हरदा, नर्मदापुरम, रतलाम, झाबुआ, धार और आलीराजपुर शामिल हैं।

    तापमान 21 डिग्री के आसपास

    फिलहाल दिन का तापमान जहां 32 डिग्री के ऊपर बना हुआ है वहीं रात का न्यूनतम तापमान 20-21 डिग्री के आसपास बना हुआ है। सोमवार को हवा का रुख उत्तर-पश्चिमी रहा। अधिकतम तापमान 34.0 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जबकि न्यूनतम तापमान 21.5 डिग्री सेल्सियस रहा।

    मौसम का पूर्वानुमान

    मौसम शुष्क रहेगा

    सूर्योदय- 6: 04

    सूर्यास्त- 5: 53

    तापमान अधिकतम -34.0

    न्यूनतम – 21.5

    आर्दता-66 -45