Category: मध्य प्रदेश

  • उमरिया में 7° तापमान, 10 जिलों में हल्का कोहरा, भोपाल और आसपास के क्षेत्रों में पारा लुढ़केगा

    उमरिया में 7° तापमान, 10 जिलों में हल्का कोहरा, भोपाल और आसपास के क्षेत्रों में पारा लुढ़केगा

    भोपाल
     मध्य प्रदेश में कड़ाके की ठंड ने लोगों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। प्रदेश के कई जिलों में गुरुवार रात तापमान में तेज गिरावट दर्ज की गई। इससे सर्दी का असर और गहरा हो गया है। उमरिया सबसे ठंडा शहर रहा। यहां न्यूनतम तापमान 7 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया।
    रीवा, खजुराहो, मंडला और सतना जैसे शहरों में भी पारा 10 डिग्री से नीचे दर्ज किया गया। राजधानी भोपाल, इंदौर और ग्वालियर समेत बड़े शहरों में भी सर्दी के इस नए दौर काअसर साफ नजर आ रहा है।

    करीब एक हफ्ते राहत नहीं
    मौसम विभाग के अनुसार- आने वाले दिनों में ठंड से फिलहाल राहत मिलने की उम्मीद नहीं है। 8 फरवरी से पश्चिमी हिमालय क्षेत्र में नया वेस्टर्न डिस्टरबेंस सक्रिय हो रहा है। इसका असर मध्य प्रदेश के मौसम पर भी पड़ेगा। हालांकि, 10 फरवरी से पहले बारिश या ओलावृष्टि की संभावना कम है, लेकिन कोहरा और सर्द हवाओं के चलते ठिठुरन और बढ़ सकती है। ऐसे में लोगों को सावधानी बरतने और ठंड से बचाव के उपाय अपनाने की सलाह दी गई है।

    कटनी के करौंदी में सबसे कम तापमान

    प्रदेश का न्यूनतम तापमान 5.6 डिग्री दर्ज किया गया। शहडोल के कल्याणपुर-खजुराहो में 6.6 डिग्री, रीवा में 7 डिग्री, राजगढ़-उमरिया में 8 डिग्री, शाजापुर में 8.1 डिग्री, नौगांव-पचमढ़ी में 8.6 डिग्री, सतना में 9.2 डिग्री, दमोह में 9.5 डिग्री, मंडला-सीधी में 9.8 डिग्री तापमान रिकॉर्ड किया गया है।

    उमरिया सबसे ठंडा शहर रहा, जहां पारा गिरकर 7 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया। भोपाल, इंदौर और ग्वालियर में न्यूनतम तापमान 11 डिग्री दर्ज किया गया, जबकि जबलपुर में 10.8 डिग्री और उज्जैन में 13 डिग्री सेल्सियस रहा।

    मौसम विभाग के अनुसार, उमरिया के बाद रीवा दूसरा सबसे ठंडा शहर रहा। यहां न्यूनतम तापमान 7.4 डिग्री दर्ज किया गया।

    खजुराहो में भी 7.4 डिग्री, मंडला में 7.9 डिग्री, नौगांव में 8.8 डिग्री, सतना में 8.9 डिग्री, राजगढ़ और शिवपुरी में 9 डिग्री, पचमढ़ी में 9.4 डिग्री तथा दमोह और मलाजखंड में 9.8 डिग्री तापमान रिकॉर्ड किया गया।

    इधर, प्रदेश में घने कोहरे का खास असर नहीं देखा गया। शनिवार सुबह भोपाल, उज्जैन, इंदौर, राजगढ़, रतलाम, मंडला, सतना समेत करीब 10 जिलों में मध्यम कोहरा दर्ज किया गया, जिससे सुबह के समय हल्की ठंड और दृश्यता में कमी महसूस की गई।

    कटनी के करौंदी में सबसे कम तापमान

    प्रदेश का न्यूनतम तापमान 5.6 डिग्री दर्ज किया गया। शहडोल के कल्याणपुर-खजुराहो में 6.6 डिग्री, रीवा में 7 डिग्री, राजगढ़-उमरिया में 8 डिग्री, शाजापुर में 8.1 डिग्री, नौगांव-पचमढ़ी में 8.6 डिग्री, सतना में 9.2 डिग्री, दमोह में 9.5 डिग्री, मंडला-सीधी में 9.8 डिग्री तापमान रिकॉर्ड किया गया है।

    एक नजर प्रदेश में तापमान पर
    MP में 4 दिन कड़ाके की ठंड 

    ग्वालियर-चंबल में असर ज्यादा

    भोपाल-उज्जैन में भी पारा गिरेगा

    ग्वालियर, खजुराहो समेत 11 शहरों में न्यूनतम तापमान 10 डिग्री से नीचे 

    कटनी, शहडोल और छतरपुर सबसे ठंडे 

    वेस्टर्न डिस्टरबेंस और साइक्लोनिक सकुर्लेशन की वजह से प्रदेश में ओले-बारिश

    शहडोल के कल्याणपुर-खजुराहो में 6.6 डिग्री, रीवा में 7 डिग्री

    राजगढ़-उमरिया में 8 डिग्री, शाजापुर में 8.1 डिग्री, नौगांव-पचमढ़ी में 8.6 डिग्री

    सतना में 9.2 डिग्री, दमोह में 9.5 डिग्री, मंडला-सीधी में 9.8 डिग्री रहा

  • एम्स भोपाल में मप्र में पहली बार ‘मसल ट्रांसफर’ सर्जरी, जांघ की मांसपेशी से हाथ की गति में आई सुधार

    एम्स भोपाल में मप्र में पहली बार ‘मसल ट्रांसफर’ सर्जरी, जांघ की मांसपेशी से हाथ की गति में आई सुधार

    भोपाल
     एम्स भोपाल के बर्न्स एवं प्लास्टिक सर्जरी विभाग ने मध्य प्रदेश में पहली बार एक ऐसी जटिल सर्जरी को अंजाम दिया है, जिसमें शरीर के एक हिस्से की सक्रिय मांसपेशी को दूसरे हिस्से में लगाकर अंग की गति वापस लाई गई।

    'फ्री फंक्शनिंग मसल ट्रांसफर' (एफएफएमटी) नामक इस तकनीक के जरिए 55 वर्षीय एक ऐसे मरीज का हाथ सक्रिय किया गया है, जो 'पैन ब्रैकियल प्लेक्सस इंजरी' के कारण पूरी तरह लकवाग्रस्त (पैरालाइज्ड) हो चुका था।

    मरीज एक ऐसी गंभीर स्थिति से जूझ रहा था जिसमें कंधे से हाथ तक जाने वाली नसों का जाल पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया था। इसके परिणामस्वरूप उसका ऊपरी अंग पूरी तरह निष्क्रिय था और वह हाथ हिलाने तक में असमर्थ था। इस स्थिति में जीवन की गुणवत्ता बुरी तरह प्रभावित होती है क्योंकि मरीज दैनिक कार्यों के लिए दूसरों पर निर्भर हो जाता है।

    कैसे हुई जटिल माइक्रोसर्जरी?

    इस सर्जरी में मरीज की जांघ से 'ग्रैसिलिस' नामक मांसपेशी को उसकी नसों और रक्त वाहिकाओं के साथ निकाला गया। इस जीवित मांसपेशी को प्रभावित हाथ में प्रत्यारोपित किया गया। इसके बाद माइक्रोस्कोप की मदद से नसों और खून की नलियों को जोड़ा गया। इस सफल प्रक्रिया के बाद अब मरीज की कोहनी में सक्रिय लचीलापन बहाल हो सकेगा, जिससे वह हाथ मोड़ना और उठाना जैसे बुनियादी कार्य कर पाएगा।
    इन विशेषज्ञों की टीम ने रचा इतिहास

    इस ऐतिहासिक सर्जरी में बर्न्स एवं प्लास्टिक सर्जरी विभाग के डॉ. दीपक कृष्णा (अतिरिक्त प्रोफेसर), डॉ. राहुल दुबेपुरिया (एसोसिएट प्रोफेसर) की मुख्य भूमिका रही। एनेस्थीसिया टीम का नेतृत्व डॉ. अनुज जैन (अतिरिक्त प्रोफेसर) ने किया।

    जटिल सर्जरी किफायती दरों पर उपलब्ध

        प्रदेश में यह अपनी तरह की पहली और बेहद जटिल प्रक्रिया है। इस उपलब्धि ने साबित किया है कि एम्स भोपाल अब दुनिया की सबसे उन्नत माइक्रोसर्जिकल तकनीकों को अपनाने में सक्षम है। हमारा लक्ष्य गरीब और जरूरतमंद मरीजों को ऐसी महंगी और जटिल सर्जरी किफायती दरों पर उपलब्ध कराना है। – प्रो. डॉ. माधवानंद कर, कार्यपालक निदेशक, एम्स भोपाल।

     

  • एमपी में ठंड का कहर, तापमान 10 डिग्री से नीचे, उज्जैन और इंदौर में धूप, 8 फरवरी से बारिश की संभावना

    एमपी में ठंड का कहर, तापमान 10 डिग्री से नीचे, उज्जैन और इंदौर में धूप, 8 फरवरी से बारिश की संभावना

    भोपाल 

    वेस्टर्न डिस्टरबेंस और साइक्लोनिक सिस्टम का असर खत्म होते ही मध्य प्रदेश में सर्दी ने दोबारा जोर पकड़ लिया है। उत्तरी हवाओं के तेज होने से दिन में ठिठुरन बढ़ गई है, वहीं रात का तापमान कई इलाकों में 10 डिग्री से नीचे चला गया। ओले-बारिश से मिली राहत के बाद अब ठंड और कोहरे ने लोगों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं।मौसम विभाग के मुताबिक, बीते एक हफ्ते से सक्रिय सिस्टम के कमजोर पड़ते ही गुरुवार को प्रदेश के अधिकतम और न्यूनतम तापमान में गिरावट दर्ज की गई। बुधवार-गुरुवार की रात ग्वालियर समेत 8 शहरों में न्यूनतम तापमान 10 डिग्री से नीचे रहा, जबकि 30 से ज्यादा जिलों में हलके से घने कोहरे ने सुबह की रफ्तार थाम दी। 

    एमपी में अगले दो दिन ऐसा रहेगा मौसम
    मौसम विभाग ने 7 फरवरी को प्रदेश में हल्का कोहरा रहने का अनुमान जताया है लेकिन बारिश की कोई चेतावनी नहीं है. इस बीच तेज ठंडी हवाओं का असर प्रदेश के ऊपर बना रहेगा. इसके साथ ही 8 फरवरी को कई जिलों में हल्का से मध्यम कोहरा छाने की संभावना है. इस दिन भी बारिश का कोई अलर्ट जारी नहीं किया गया है.

    8 फरवरी से नया मौसम सिस्टम होगा सक्रिय, फिर गिरेगा मावठा
    मौसम वैज्ञानिक डॉ दिव्या सुरेंद्रन के अनुसार, पश्चिमी हिमालय क्षेत्र में 8 फरवरी से नया वेस्टर्न डिस्टरबेंस सक्रिय होगा. इसके असर से प्रदेश के मौसम में फिर बदलाव देखने को मिल सकता है. 10 फरवरी से मावठा गिरने की संभावना जताई गई है.
    राजगढ़ प्रदेश का सबसे ठंडा इलाका
    मौसम विभाग के अनुसार, गुरुवार शुक्रवार को राजगढ़ में सबसे कम तापमान 7 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया है. इसके बाद रीवा में 7.2 डिग्री, खजुराहो में 8.2 डिग्री, दतिया में 8.4 डिग्री, दमोह और सतना में 9.6 डिग्री तापमान दर्ज हुआ है. वहीं पचमढ़ी में न्यूनतम तापमान 9.8 डिग्री रहा है.
    बड़े शहरों में भी ठंड का असर, गिरा न्यूनतम तापमान

    भोपाल और उज्जैन में न्यूनतम तापमान 13 डिग्री दर्ज किया गया. इसके अलावा इंदौर में 13.2 डिग्री, जबलपुर में 13.5 डिग्री और ग्वालियर में 9 डिग्री सेल्सियस तापमान रिकॉर्ड हुआ.

    न्यूनतम तापमान 7 डिग्री दर्ज
    प्रदेश में सबसे ठंडा राजगढ़ रहा, जहां न्यूनतम तापमान 7 डिग्री दर्ज किया गया। रीवा में 7.2, खजुराहो में 8.2, दतिया में 8.4, दमोह और सतना में 9.6 डिग्री तथा पचमढ़ी में 9.8 डिग्री सेल्सियस तापमान रहा।बड़े शहरों की बात करें तो भोपाल और उज्जैन में 13 डिग्री, इंदौर में 13.2 और जबलपुर में 13.5 डिग्री दर्ज किया गया, जबकि ग्वालियर में पारा 9 डिग्री तक लुढ़क गया।

    सुबह-सुबह कोहरे की चादर
    शुक्रवार सुबह ग्वालियर-चंबल, सागर, रीवा और उज्जैन संभाग के जिलों में हलका से मध्यम कोहरा छाया रहा। कोहरे का असर परिवहन पर भी दिखा। दिल्ली से आने-जाने वाली कई ट्रेनों की टाइमिंग प्रभावित हुई है। मालवा, सचखंड और शताब्दी जैसी ट्रेनों के यात्री देरी से परेशान नजर आए।

    अगले दो दिन का मिजाज
    7 फरवरी: हलका कोहरा, बारिश का अलर्ट नहीं, ठंड बनी रहेगी।
    8 फरवरी: कई जिलों में हलका से मध्यम कोहरा, फिलहाल बारिश नहीं।

    फिर बदलेगा मौसम
    मौसम विभाग का कहना है कि 8 फरवरी से पश्चिमी हिमालय क्षेत्र में नया वेस्टर्न डिस्टरबेंस सक्रिय होगा। इसका असर मध्य प्रदेश में भी दिखेगा और 10 फरवरी से मावठा गिरने की संभावना है। यानी ठंड के साथ बारिश का दौर एक बार फिर लौट सकता है। 

  • 15 दिनों के भीतर खातों में पहुंचेगी 2025-26 की पोस्ट मैट्रिक छात्रवृत्ति, प्रमुख सचिव डॉ. कुमार ने दिए निर्देश

    15 दिनों के भीतर खातों में पहुंचेगी 2025-26 की पोस्ट मैट्रिक छात्रवृत्ति, प्रमुख सचिव डॉ. कुमार ने दिए निर्देश

    15 दिनों के भीतर खातों में पहुंचेगी 2025-26 की पोस्ट मैट्रिक छात्रवृत्ति, प्रमुख सचिव डॉ. कुमार ने दिए निर्देश

    पिछड़ा वर्ग तथा अल्पसंख्यक कल्याण एवं अनुसूचित जाति विकास विभाग की हुई समीक्षा
    भोपाल 

    पिछड़ा वर्ग तथा अल्पसंख्यक कल्याण एवं अनुसूचित जाति विकास विभाग के प्रमुख सचिव डॉ. ई. रमेश कुमार ने  भोपाल स्थित वल्लभ भवन में विभागीय कार्यों की समीक्षा की। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित करते हुए कहा कि वर्ष 2025-26 की पोस्ट मैट्रिक छात्रवृत्ति 15 दिनों में शत-प्रतिशत वितरित करना सुनिश्चित किया जाए। प्रमुख सचिव डॉ. कुमार ने बैठक में अनुकंपा नियुक्ति से संबंधित प्रकरण तत्काल निराकृत कर नियुक्ति की प्रक्रिया पूर्ण करने के संबंध में अधिकारियों को निर्देशित किया। उन्होंने विधानसभा के प्रश्नों और कैबिनेट संक्षेपिका को लेकर भी अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। 
    बैठक में विभाग के अपर सचिव श्री अनुराग चौधरी, विभाग आयुक्‍त श्री सौरभ कुमार सुमन समेत वरिष्ठ अधिकारी और कर्मचारी उपस्थित रहे।

  • रेलवे की खुशखबरी: ‘उत्तरप्रदेश’ और ‘झारखंड’ जाने वाले यात्रियों के लिए अहम अपडेट

    रेलवे की खुशखबरी: ‘उत्तरप्रदेश’ और ‘झारखंड’ जाने वाले यात्रियों के लिए अहम अपडेट

    भोपाल 

    रेलवे ने मध्यप्रदेश में रहने वाले उत्तरप्रदेश और झारखंड के यात्रियों को बड़ी खुशखबरी दी है। भोपाल रेलवे स्टेशन पर तीसरी पिट लाइन का निर्माण होने के बाद रेलवे प्रशासन ने धनबाद और चोपन के बीच दो नई एक्सप्रेस ट्रेनों के संचालन की तैयारी तेज कर दी है।

    रेलवे बोर्ड से हरी झंडी मिलने के बाद अब संबंधित जोन को इन ट्रेनों के परिचालन, रखरखाव और प्रचारप्रसार की औपचारिक प्रक्रिया पूरी करने के निर्देश दिए गए हैं। इन सेवाओं के शुरू होने से मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश और झारखंड के बीच सीधी रेल कनेक्टिविटी स्थापित होगी।
    विंध्य अंचल की राह होगी सुगम

    विंध्य क्षेत्र के यात्रियों की सुविधा के लिए भोपाल-चोपन एक्सप्रेस को भी स्वीकृति दे दी गई है। यह ट्रेन प्रत्येक रविवार रात भोपाल से रवाना होकर सोमवार सुबह चोपन पहुंचेगी। वापसी में सोमवार शाम चोपन से चलकर मंगलवार सुबह भोपाल वापस आएगी। इस ट्रेन का ठहराव सागर, कटनी, ब्योहारी, सिंगरौली और ओबरा डैम जैसे महत्वपूर्ण स्टेशनों पर रखा गया है। भोपाल से अभी चोपन के लिए दो वीकली स्पेशन चलती हैं। इस ट्रेन के बाद वीकली स्पेशन की संख्या बढ़कर 3 हो जाएगी।

    ऐसा रहेगा दोनों ट्रेन का रूट

    सीनियर डीसीएम सौरभ कटारिया ने बताया कि ट्रेन का संचालन सप्ताह में तीन दिन किया जाएगा। यह ट्रेन भोपाल-धनबाद एक्सप्रेस सप्ताह में 03 दिन चलेगी। यह ट्रेन रात 8 बजकर 55 मिनिट पर भोपाल के रानी कमलापति रेलवे स्टेशन से रवाना होगी और दूसरे दिन रात 8 बजकर 30 मिनिट पर धनबाद पहुंचेगी

    धनबाद से यह ट्रेन सुबह 7 बजे चलेगी और दूसरे दिन सुबह 7 बजकर 20 मिनट पर भोपाल पहुंचेगी। भोपाल-चोपन एक्सप्रेस रविवार को रात 8 बजकर 55 मिनिट पर चलेगी और दूसरे दिन सुबह 7 बजे चोपन पहुंचेगी. अगले दिन शाम 7 बजे चोपन से रवाना होकर दूसरे दिन सुबह 8 बजकर 35 मिनिट पर भोपाल पहुंचेगी।

     

  • एमपी का सफर प्रभावित, घने कोहरे से विजिबिलिटी कम, 12+ ट्रेनें लेट और शाजापुर में हादसे में जान गई

    एमपी का सफर प्रभावित, घने कोहरे से विजिबिलिटी कम, 12+ ट्रेनें लेट और शाजापुर में हादसे में जान गई

    भोपाल 

    मध्य प्रदेश में ओले और बारिश का दौर थमने के बाद बुधवार सुबह घने कोहरे ने जनजीवन को प्रभावित कर दिया। ग्वालियर में दृश्यता 50 मीटर से भी कम दर्ज की गई। कोहरे के कारण दिल्ली से भोपाल, इंदौर और उज्जैन आने वाली एक दर्जन से ज्यादा ट्रेनें देरी से चल रही है। 

    बुधवार सुबह ग्वालियर के अलावा दतिया, रीवा, रतलाम, उज्जैन, दमोह, नौगांव, सीधी, भोपाल, इंदौर, राजगढ़, खजुराहो, गुना, छिंदवाड़ा, जबलपुर, मंडला, सागर, टीकमगढ़, मलाजखंड, शाजापुर, छतरपुर, विदिशा, आगर-मालवा, सीहोर, भिंड और मुरैना समेत कई जिलों में मध्यम से घने कोहरे का असर देखने को मिला। कुछ इलाकों में विजिबिलिटी बेहद कम होने से सड़क और रेल यातायात प्रभावित हुआ।

    राजगढ़ सबसे ठंडा, न्यूनतम तापमान 8.8 डिग्री सेल्सियस

    कोहरे के कारण शाजापुर जिले के अकोदिया-शुजालपुर स्टेट हाईवे पर कार और बाइक की भिड़ंत हो गई, जिसमें एक युवक की मौत हो गई। वहीं विदिशा में सुबह हल्की बूंदाबांदी भी दर्ज की गई। उत्तरी मध्य प्रदेश में कोहरे के साथ सर्द हवाएं चल रही हैं, हालांकि रात के तापमान में ज्यादा गिरावट नहीं आई है। प्रदेश में राजगढ़ सबसे ठंडा रहा, जहां न्यूनतम तापमान 8.8 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया।

    बड़े शहरों की बात करें तो भोपाल और इंदौर में न्यूनतम तापमान 14 डिग्री, ग्वालियर में 13.1, उज्जैन में 14 और जबलपुर में 14.8 डिग्री सेल्सियस रहा। अन्य जिलों में पारा 10 से 16 डिग्री के बीच दर्ज किया गया है।

    मौसम विभाग के अनुसार ग्वालियर में विजिबिलिटी 50 मीटर से भी कम, दतिया और रीवा में 50 से 200 मीटर, जबकि भोपाल, इंदौर और राजगढ़ में एक किलोमीटर से ज्यादा रही। रेल यातायात पर पड़े असर के चलते पंजाब मेल 3 घंटे, शताब्दी एक्सप्रेस करीब 3 घंटे, कर्नाटक एक्सप्रेस 4 घंटे से अधिक और मालवा एक्सप्रेस 8 घंटे 15 मिनट की देरी से चल रही है।

  • नर्मदा की सुरक्षा पर हाई अलर्ट, NGT ने मध्य प्रदेश सरकार को भेजा नोटिस

    नर्मदा की सुरक्षा पर हाई अलर्ट, NGT ने मध्य प्रदेश सरकार को भेजा नोटिस

    भोपाल
    नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) की भोपाल बेंच ने पर्यावरण के प्रधान सचिव को नर्मदा नदी को साफ रखने के लिए दिए गए निर्देशों पर एक अनुपालन रिपोर्ट पेश करने का आदेश दिया है। यह रिपोर्ट विभिन्न एजेंसियों, विभागों, जिला कलेक्टरों और नगर निगम आयुक्तों से संकलित की जाएगी। NGT ने यह निर्देश एक याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया है।

    नर्मदा को जीवन रेखा बनाए रखने के लिए निर्देश
    NGT ने नर्मदा नदी के बाढ़ क्षेत्र को चिह्नित करने, उस क्षेत्र से अतिक्रमण हटाने, नदी में बिना उपचारित सीवेज और ठोस कचरा बहाने पर रोक लगाने, अवैध रेत खनन बंद करने और पूरे साल नदी के प्रवाह को स्थिर रखने जैसे कई महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए हैं। ये निर्देश नर्मदा नदी को मध्य प्रदेश की जीवन रेखा बनाए रखने के लिए हैं।

    रिपोर्ट के आधार पर होगी कार्रवाई
    यह अनुपालन रिपोर्ट 1 सितंबर, 2025 को NGT द्वारा जारी आदेश के अनुसार तैयार की जानी है। यह रिपोर्ट याचिकाकर्ता कीर्ति कुमार सदाशिव भट्ट की याचिका पर आधारित है। रिपोर्ट को NGT के रजिस्ट्रार को सौंपा जाएगा, जो इसे ट्रिब्यूनल के सामने पेश करेंगे। इसके बाद, रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

    निष्पादन याचिका पर सुनवाई
    NGT ने यह टिप्पणी जबलपुर की सामाजिक कार्यकर्ता पी.जी. नज्पांडे द्वारा दायर एक निष्पादन याचिका पर सुनवाई करते हुए की। NGT यह सुनिश्चित करना चाहता है कि उसके द्वारा जारी किए गए निर्देशों का ठीक से पालन हो रहा है या नहीं। इसी के लिए NGT ने अब मुख्य सचिव (पर्यावरण) को इस मामले में निर्देशित किया है।

     

  • मेडिकल ब्रिलियंस! एम्स भोपाल ने मरीज के लिए अंजाम दी दुर्लभ और जटिल ‘होल लंग्स लैवेज’ सर्जरी

    मेडिकल ब्रिलियंस! एम्स भोपाल ने मरीज के लिए अंजाम दी दुर्लभ और जटिल ‘होल लंग्स लैवेज’ सर्जरी

     भोपाल 

    पत्थर, सीमेंट और निर्माण से जुड़ी दुनिया जितनी मजबूत दिखती है, उतनी ही कमजोर जिंदगियां उसके पीछे काम कर रही होती हैं। इन्हीं जिंदगियों को धीरे-धीरे निगल लेने वाली एक खामोश और जानलेवा बीमारी है सिलिकोसिस। यह ऐसी बीमारी है, जिसमें फेफड़े धीरे-धीरे पत्थर जम जाता है। 

    एम्स भोपाल में मध्य भारत की पहल

    एम्स भोपाल के डॉक्टरों ने इस मरीज के इलाज के लिए ‘होल लंग्स लैवेज’ नाम की अत्यंत जटिल प्रक्रिया को अंजाम दिया। इस प्रक्रिया में फेफड़ों के अंदर जमा प्रोटीन और धूल को सलाइन वाटर से धोकर बाहर निकाला जाता है। एम्स प्रबंधन के अनुसार, मध्य भारत में यह पहला मौका है, जब सिलिकोसिस से प्रभावित फेफड़ों में जमे प्रोटीन को इस तकनीक से सफलतापूर्वक साफ किया गया हो।

    डॉक्टरों का कहना है कि यह सिर्फ एक मरीज का इलाज नहीं, बल्कि उन हजारों मजदूरों के लिए उम्मीद की किरण है, जो रोजाना पत्थरों और धूल के बीच काम करते हुए अपनी सांसें दांव पर लगा देते हैं।

    स्टोन क्रशर की धूल ने बिगाड़ी हालत एम्स के पल्मोनोलॉजी विभाग के प्रोफेसर डॉ. अल्केश खुराना और असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. अभिनव खुराना ने बताया कि मरीज लंबे समय से स्टोन क्रशर में काम कर रहा था। वहां उड़ने वाली बारीक सिलिका धूल सांस के साथ उसके फेफड़ों में पहुंचती रही और धीरे-धीरे वहां जमती चली गई।

    इस स्थिति को मेडिकल भाषा में डिफ्यूज एल्वियोलर प्रोटीनोसिस कहा जाता है। इसमें फेफड़ों की हवा वाली थैलियों में प्रोटीन भर जाता है, जिससे ऑक्सीजन का आदान-प्रदान रुकने लगता है। यही कारण था कि मरीज को सांस लेने में अत्यधिक परेशानी हो रही थी और उसका ऑक्सीजन स्तर लगातार गिरता जा रहा था।

    6 घंटे चली बेहद जोखिमभरी प्रक्रिया डॉ. खुराना के अनुसार, होल लंग्स लैवेज एक बेहद जटिल और जोखिमभरी प्रक्रिया है। इसमें फेफड़ों के अंदर 6 से 8 लीटर तक सलाइन वाटर डाला जाता है और फिर उसे बाहर निकाला जाता है, ताकि जमा प्रोटीन साफ हो सके।

    यह प्रक्रिया इसलिए भी खतरनाक होती है क्योंकि ज्यादा मात्रा में पानी फेफड़ों में जाने से मरीज की जान को सीधा खतरा हो सकता है। इसी वजह से पूरी प्रक्रिया को अत्यंत सावधानी के साथ करीब 6 घंटे में पूरा किया गया। डॉक्टरों की एक पूरी टीम लगातार मरीज के ऑक्सीजन स्तर, हृदय गति और ब्लड प्रेशर पर नजर रखे हुए थी।

    कार्डियक ओटी में हुआ ऑपरेशन इस जटिल प्रक्रिया को कार्डियक ओटी में किया गया, जिसमें कार्डियक थोरेसिक सर्जन डॉ. योगेश निवारिया भी शामिल थे। उन्होंने बताया कि इस इलाज की सबसे बड़ी चुनौती यह थी कि जब एक फेफड़े को साफ किया जा रहा होता है, तब मरीज को दूसरे फेफड़े के सहारे ही सांस लेनी पड़ती है।

    इस मरीज के मामले में मुश्किल और बढ़ गई थी, क्योंकि दूसरा फेफड़ा भी काफी कमजोर हो चुका था। ऐसे हालात में कई बार मरीज को हार्ट-लंग मशीन यानी आर्टिफिशियल लंग्स पर रखना पड़ता है। हालांकि, डॉक्टरों की सतर्कता और सही रणनीति के चलते इस मरीज को मशीन पर डालने की जरूरत नहीं पड़ी और प्रक्रिया सफलतापूर्वक पूरी हो गई।

    क्या है सिलिकोसिस और क्यों है यह जानलेवा सिलिकोसिस सिलिका नामक बेहद बारीक धूल के कणों से होने वाली बीमारी है। ये कण सांस के साथ फेफड़ों में पहुंच जाते हैं और वहां जमा होकर फेफड़ों की कोमल झिल्लियों को नुकसान पहुंचाते हैं। धीरे-धीरे फेफड़े स्पंज जैसे नरम रहने के बजाय पत्थर की तरह सख्त हो जाते हैं।

    जैसे-जैसे बीमारी बढ़ती है, मरीज को सांस लेने में तकलीफ, लगातार खांसी, थकान और ऑक्सीजन की कमी महसूस होने लगती है। अंतिम चरण में शरीर को पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं मिल पाती और मरीज की मौत तक हो सकती है।

    मजदूर सबसे ज्यादा चपेट में सिलिकोसिस का सबसे बड़ा शिकार वे मजदूर होते हैं, जो खदानों, स्टोन क्रशर, पत्थर की पाउडर मिलों, सीमेंट फैक्ट्रियों और कांच-सिरेमिक उद्योगों में काम करते हैं। इनमें से ज्यादातर मजदूर गरीब तबके से आते हैं और सुरक्षा उपकरणों की कमी या जानकारी के अभाव में इस जानलेवा धूल के संपर्क में रहते हैं।

    डॉक्टरों का कहना है कि सिलिकोसिस से बचाव ही सबसे बड़ा इलाज है। इसके लिए कार्यस्थलों पर धूल नियंत्रण, मास्क और नियमित स्वास्थ्य जांच बेहद जरूरी है।

  • शिवराज ने रायसेन के लिए सुनाई उम्मीद की खबर, भारत सरकार से मिली रोप-वे मंजूरी

    शिवराज ने रायसेन के लिए सुनाई उम्मीद की खबर, भारत सरकार से मिली रोप-वे मंजूरी

    भोपाल

    मध्य प्रदेश के विदिशा-रायसेन संसदीय क्षेत्र में पिछले 100 दिनों से जारी सांसद खेल महोत्सव का समापन हो गया। इस मौके पर स्थानीय सांसद और केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान क्षेत्र को बड़ी सौगात देते हुए एक बड़ी जानकारी दी। उन्होंने बताया कि वे रायसेन में स्थित किले तक रोप-वे बनाने की अनुमति लेकर आए हैं। साथ ही उन्होंने इस बारे में जारी आदेश को समारोह में मौजूद रायसेन के विधायक प्रभुराम चौधरी को सौंप दिया। इसके अलावा केंद्रीय कृषि मंत्री ने बताया कि रोप-वे बनने के साथ ही किले पर एक म्यूजियम भी बनाया जाएगा, जिसमें इलाके के गौरवशाली इतिहास को बताते हुए इससे जुड़ी धरोहरों को वहां संजोया जाएगा। साथ ही इलाके के किसानों की भलाई के लिए लगने वाले मेले की जानकारी देते हुए शिवराज ने कहा कि यहां पर अप्रैल महीने में तीन दिनों के लिए किसान कुंभ और किसानों का मेला लगेगा। जिसमें उन्हें खेती का प्रशिक्षण दिया जाएगा।

    अप्रैल महीने में तीन दिन लगेगा किसान कुंभ और मेला

    कार्यक्रम के दौरान किसानों को संबोधित करते हुए शिवराज ने कहा, 'रायसेन वालों, अभी डॉ प्रभुराम चौधरी जी कह रहे थे कि किला बहुत ऊपर है, तो प्रभुरामजी आज आप ये आदेश ले लीजिए, जो हमारा रायसेन के किले में रोपवे की अनुमति भारत सरकार से मैं लेकर आया हूं रायसेन वालों। मैं आपको आदेश की कॉपी दे रहा हूं, अब रायसेन रोप-वे जाएगा और किले के ऊपर एक शानदार म्यूजियम भी बनाया जाएगा। ऊपर वाले किले को भी शानदार बनाया जाएगा। रायसेन में मेडिकल कॉलेज तो खुलेगा ही, उसकी घोषणा माननीय मुख्यमंत्री कर चुके हैं और किसानों के लिए 12, 13 और 14 अप्रैल को किसान कुंभ और किसानों का मेला लगेगा। जिसमें खेती के लिए किसानों को प्रशिक्षण देने का काम किया जाएगा। रायसेन अब हिंदुस्तान में आइडियल बनेगा।' इसके आगे शिवराज ने कहा, 'मैं फिर आपको वचन देता हूं कि आपकी मुस्कुराहत ही मेरी जिंदगी है, आपके चेहरे पर खुशी लाने के लिए मामा कोई कसर नहीं छोड़ेगा।'
    MLA बोले- नई ऊंचाई तक ले जाना हमारा संकल्प

    वहीं कार्यक्रम में मौजूद रायसेन के विधायक व पूर्व मंत्री प्रभुराम चौधरी ने इस बारे में जानकारी देते हुए सोशल मीडिया पर लिखा, ‘रायसेन के मेरे प्रिय भाई-बहनों, आज हमारे लिए ऐतिहासिक क्षण है। माननीय केंद्रीय मंत्री शिवराज चौहान जी के प्रयासों से रायसेन किले में रोप-वे निर्माण की अनुमति भारत सरकार से प्राप्त हुई है। यह आदेश पत्र प्राप्त कर मैं आप सभी के साथ इस सुखद समाचार को साझा कर रहा हूं। अब श्रद्धालु और पर्यटक रोप-वे के माध्यम से किले तक सहज और सुरक्षित रूप से पहुंच सकेंगे। साथ ही, किले में एक भव्य संग्रहालय (म्यूजियम) का निर्माण भी किया जाएगा, जिससे रायसेन की गौरवशाली विरासत को नई पहचान मिलेगी। रायसेन के विकास और पर्यटन को नई ऊंचाइयों तक ले जाने का हमारा संकल्प निरंतर जारी रहेगा।’
    बहुत ऊंची पहाड़ी पर बना है 11वीं शताब्दी का किला

    रायसेन के जिस किले तक पहुंचने के लिए शिवराज ने रोपवे बनाने की अनुमति मिलने की जानकारी दी है, वह किला राजधानी भोपाल से लगभग 40 किलोमीटर दूर है और एक ऊंची पहाड़ी की चोटी पर स्थित है। साथ ही मध्यप्रदेश के प्रमुख किलों में से एक है। इसका निर्माण 11वीं शताब्दी में किया गया था और यह पहले हिंदू राजाओं का गढ़ था। बाद में यह किला अफगान और मुग़ल शासकों के अधीन रहा। इस किले में हिंदू और मुगल वास्तुकला का मिश्रण दिखा देता है। इस किले के अंदर बादल और रानी महल, जलाशय, मंदिर, और हजरत पीर फतेह उल्लाह शाह बाबा की दरगाह स्थित हैं, जहां प्रतिवर्ष उर्स के मौके पर हजारों श्रद्धालु दर्शन के लिए आते हैं, जिसमें सभी धर्मों के लोग शामिल होते हैं।

    बता दें कि पिछले सौ दिनों से विदिशा-रायसेन संसदीय क्षेत्र में सांसद खेल महोत्सव चल रहा था। जिसका समापन सोमवार को हो गया। इस मौके पर मुख्य अतिथि के रूप में यहां पर भारतीय टीम के स्टार क्रिकेटर रविंद्र जडेजा पहुंचे थे और उन्होंने रोड शो में हिस्सा लेते हुए खेल महोत्सव में हिस्सा लेने वाले खिलाड़ियों को संबोधित भी किया।

  • मध्यप्रदेश में बारिश और कोहरे का प्रभाव, 25 जिलों में अलर्ट, ग्वालियर में बूंदाबांदी, सीहोर-मुरैना में 50 मीटर विजिबिलिटी

    मध्यप्रदेश में बारिश और कोहरे का प्रभाव, 25 जिलों में अलर्ट, ग्वालियर में बूंदाबांदी, सीहोर-मुरैना में 50 मीटर विजिबिलिटी

    भोपाल 

    मध्य प्रदेश में मौसम एक बार फिर करवट लेने जा रहा है। प्रदेश में अगले तीन दिन तक मावठे की बारिश सक्रिय रहने के आसार हैं। मौसम विभाग ने सोमवार को ग्वालियर से लेकर विंध्य क्षेत्र तक 25 जिलों में बारिश का अलर्ट जारी किया है। सुबह के समय कई इलाकों में घना कोहरा भी देखने को मिला, जिससे ठंड और बढ़ गई है। रविवार को भी मौसम ने जमकर रंग दिखाया। नीमच और मंदसौर में तेज आंधी-बारिश के साथ ओले गिरे, वहीं ग्वालियर, धार, मुरैना और उज्जैन सहित कई जिलों में हल्की से मध्यम बारिश दर्ज की गई।

    मध्य प्रदेश में एक बार फिर से आंधी, ओले और बारिश वाला मौसम है। सोमवार सुबह अशोकनगर, आगर-मालवा, टीकमगढ़ में बारिश हुई। वहीं, कई जिलों में घना कोहरा छाया रहा। हालांकि, ठंड का असर कम है और न्यूनतम तापमान 10 डिग्री से ऊपर ही चल रहा है।

    मौसम विभाग ने सोमवार को 25 जिलों में बारिश का अलर्ट जारी किया है। इनमें ग्वालियर, नीमच, मंदसौर, आगर-मालवा, राजगढ़, विदिशा, गुना, अशोकनगर, शिवपुरी, दतिया, श्योपुर, मुरैना, भिंड, सागर, दमोह, निवाड़ी, टीकमगढ़, छतरपुर, पन्ना, सतना, मैहर, रीवा, मऊगंज, सीधी और सिंगरौली शामिल हैं।

    इससे पहले दतिया, ग्वालियर, नर्मदापुरम, उज्जैन, खजुराहो, रीवा, सतना, भोपाल, गुना, रायसेन, राजगढ़, रतलाम, श्योपुर, जबलपुर, दमोह, मंडला, नरसिंहपुर, नौगांव, मलाजखंड, टीकमगढ़ समेत कई जिलों में कोहरे का असर भी देखा गया।

    अगले 3 दिन ऐसा रहेगा मौसम

        3 फरवरी– ग्वालियर, भिंड, मुरैना, दतिया, निवाड़ी, टीकमगढ़, छतरपुर, पन्ना, सतना, मैहर, कटनी, उमरिया, शहडोल, रीवा, मऊगंज, सीधी और सिंगरौली में बारिश होने के आसार है।
        4 फरवरी- ग्वालियर, भिंड, मुरैना, श्योपुर, दतिया, शिवपुरी, गुना, अशोकनगर, निवाड़ी, टीकमगढ़ और छतरपुर में कहीं-कहीं बारिश हो सकती है।
        5 फरवरी- आंधी-बारिश का अलर्ट नहीं है। ठंड का असर बढ़ सकता है।

    कई जिलों में बारिश का दौर, कोहरा भी छाया इससे पहले रविवार को प्रदेश में बारिश, आंधी और घने कोहरे वाला मौसम रहा। ग्वालियर, उज्जैन, धार और मुरैना में रात और सुबह बारिश हुई। वहीं, सुबह कई शहरों में घना कोहरा छाया रहा।

    दतिया और खजुराहो में विजिबिलिटी 50 से 200 मीटर तक रही। खजुराहो, राजगढ़ और नौगांव में ही पारा 10 डिग्री से नीचे रहा। भोपाल में सुबह 9 बजे तक कोहरे का असर देखा गया। शाम को नीमच और मंदसौर में मौसम बदल गया। तेज आंधी-बारिश के साथ ओले गिरने लगे। इससे कई गांवों में बर्फ की सफेद चादर बिछ गई।

    बारिश की वजह से गेहूं की फसलें आड़ी हो गई। इससे नुकसान होने की आशंका है। मौसम विभाग के अनुसार, दतिया, खजुराहो, ग्वालियर, नौगांव, सतना, ग्वालियर, रीवा, उज्जैन, श्योपुर, राजगढ़, रतलाम, गुना, दमोह, मंडला, टीकमगढ़, मलाजखंड में कोहरे का असर अधिक रहा। बड़े शहरों में रात का तापमान 12 डिग्री से ऊपर ही रहा।