Category: मध्य प्रदेश

  • BJP सांसद हिमाद्री सिंह और नेता नरेंद्र मरावी हुए अलग, आपसी सहमति से हुआ तलाक

    BJP सांसद हिमाद्री सिंह और नेता नरेंद्र मरावी हुए अलग, आपसी सहमति से हुआ तलाक

    भोपाल
     मध्य प्रदेश में शहडोल से भाजपा सांसद हिमाद्री सिंह का भाजपा नेता नरेंद्र सिंह मरावी से विवाह विच्छेद हो गया। अनूपपुर जिले के राजेंद्रग्राम न्यायालय ने दोनों की आपसी सहमति से तीन सितंबर 2026 को हिंदू विवाह अधिनियम 1955 की धारा 13-बी के तहत विवाह विच्छेद की डिक्री पारित की है।

    उनकी शादी 23 नवंबर 2017 को हुई थी। 20 जून 2019 को बेटी का जन्म हुआ। इसके बाद छोटी-छोटी बातों को लेकर पति-पत्नी के बीच विवाद होने लगे। दोनों पांच मई 2021 से अलग रह रहे थे।

    बेटी के पालन-पोषण, शिक्षा, स्वास्थ्य और वैवाहिक खर्च की जिम्मेदारी हिमाद्री की होगी। उन्होंने मरावी से भरण-पोषण या गुजारा भत्ता नहीं मांगा है। बता दें कि कोर्ट ने दोनों को छह महीने का समय दिया था। दोनों ने कोर्ट को बताया कि पति-पत्नी के रूप में साथ रहना संभव नहीं है।

    परिवार की परंपरागत सीट, केंद्रीय मंत्री रहे पिता 38 वर्षीय हिमाद्री सिंह 2019 से लगातार सांसद हैं। उनके पिता दलबीर सिंह परस्ते भी इसी सीट से 1980, 1984 और 1991 में तीन बार लोकसभा सांसद निर्वाचित हुए और केंद्रीय मंत्री भी बने। मां राजेश नंदिनी सिंह 1993 में विधानसभा और 2009 में लोकसभा चुनाव जीत चुकी हैं।

    दिलचस्प संयोग यह है कि 2009 के लोकसभा चुनाव में राजेश नंदिनी ने भाजपा प्रत्याशी नरेंद्र सिंह मरावी को 13 हजार 415 वोटों से हराया था। पिता के निधन के बाद हिमाद्री ने 2016 में कांग्रेस के टिकट पर शहडोल लोकसभा उपचुनाव लड़ा, लेकिन भाजपा के ज्ञान सिंह से हार गईं।

    23 नवंबर 2017 को हिमाद्री और नरेंद्र का विवाह हुआ। इसके बाद लोकसभा चुनाव से ठीक पहले 20 मार्च 2019 को उन्होंने कांग्रेस छोड़ भाजपा का दामन थाम लिया।

  • भक्तों के लिए खजराना गणेश मंदिर प्रबंधन का बड़ा फैसला, 20 करोड़ का बीमा और पुख्ता सुरक्षा इंतजाम

    भक्तों के लिए खजराना गणेश मंदिर प्रबंधन का बड़ा फैसला, 20 करोड़ का बीमा और पुख्ता सुरक्षा इंतजाम

    इंदौर 

    इंदौर के खजराना गणेश मंदिर में 10 दिवसीय गणेशोत्सव के दौरान आने वाले श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिए मंदिर प्रबंधन समिति ने पहली बार 20 करोड़ रुपए की पब्लिक लायबिलिटी इंश्योरेंस पॉलिसी कराई है। महोत्सव में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने को देखते हुए बीमा को सुरक्षा व्यवस्था के अतिरिक्त कवच के तौर पर लिया गया है।

    पॉलिसी के तहत गणेशोत्सव के दौरान मंदिर परिसर में आने वाले श्रद्धालुओं को निर्धारित नियम और शर्तों के अनुसार बीमा सुरक्षा मिलेगी। किसी दुर्घटना, अप्रिय घटना या जनहानि की स्थिति में पॉलिसी के प्रावधानों के मुताबिक बीमा कंपनी की ओर से भुगतान किया जा सकेगा।

    कलेक्टर बोले- भगवान से प्रार्थना, बीमा की जरूरत न पड़े
    मंदिर समिति के अध्यक्ष और कलेक्टर शिवम वर्मा ने बताया कि इस बार श्रद्धालुओं का बीमा कराया गया है। इसकी क्लेम राशि 20 करोड़ रुपए रहेगी। उन्होंने कहा कि भगवान गणेश से यही प्रार्थना है कि इसकी जरूरत न पड़े। श्रद्धालुओं की सुविधा और सुरक्षा के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं।

    पहले करीब 2 करोड़ का था बीमा
    मंदिर के मुख्य पुजारी पंडित अशोक भट्ट ने बताया कि श्रद्धालुओं की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए यह व्यवस्था की गई है। उन्होंने कहा कि भगवान गणपति की कृपा से बीमा सुविधा का उपयोग करने की स्थिति न आए, यही कामना है।

    उन्होंने बताया कि मंदिर में पहले भी इंश्योरेंस कराया जाता था, लेकिन उस समय करीब 2 करोड़ रुपए का बीमा रहता था। इस साल पहली बार बीमा राशि बढ़ाकर 20 करोड़ रुपए की गई है।

    सीसीटीवी से निगरानी, पुलिस और गार्ड भी बढ़ाए
    गणेशोत्सव के 10 दिनों में खजराना गणेश मंदिर में बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। दर्शन व्यवस्था के साथ सुरक्षा के लिए भी अतिरिक्त इंतजाम किए गए हैं। मंदिर परिसर में सीसीटीवी कैमरों से निगरानी की जा रही है। पुलिस बल के साथ सुरक्षा गार्डों की संख्या भी बढ़ाई गई है।

    मंदिर समिति के मुताबिक श्रद्धालुओं को सुगम दर्शन कराने के साथ भीड़ प्रबंधन और सुरक्षा पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

  • धान, ज्वार और बाजरा बेचने के लिए पंजीयन की अंतिम तारीख 10 अक्टूबर, खाद्य मंत्री राजपूत ने किसानों से की अपील

    धान, ज्वार और बाजरा बेचने के लिए पंजीयन की अंतिम तारीख 10 अक्टूबर, खाद्य मंत्री राजपूत ने किसानों से की अपील

    समर्थन मूल्य पर धान, ज्वार एवं बाजरा उपार्जन के लिये पंजीयन 10 अक्टूबर तक

    किसान निर्धारित समय पर करायें पंजीयन : खाद्य मंत्री राजपूत

    भोपाल

    खरीफ विपणन वर्ष 2026-27 में समर्थन मूल्य पर धान, ज्वार एवं बाजरा उपार्जन के लिये किसान पंजीयन प्रक्रिया का निर्धारण कर दिया गया है। किसान 10 अक्टूबर तक पंजीयन करा सकते हैं। पंजीयन 15 सितम्बर से शुरू हो रहा है। खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने किसानों से आग्रह किया है कि निर्धारित समय में पंजीयन करा लें, जिससे किसी भी प्रकार की असुविधा नहीं हो। उन्होंने बताया है कि किसान पंजीयन की व्यवस्था को सहज और सुगम बनाया गया है। प्रदेश में 1100 से अधिक पंजीयन केन्द्र बनाये गये हैं।

    पंजीयन की नि:शुल्क व्यवस्था

    पंजीयन की निःशुल्क व्यवस्था ग्राम पंचायत और जनपद पंचायत एवं तहसील कार्यालयों में स्थापित सुविधा केन्द्र पर और सहकारी समितियों एवं सहकारी विपणन संस्थाओं द्वारा संचालित पंजीयन केन्द्र पर की गई है।

    पंजीयन की सशुल्क व्यवस्था

    पंजीयन की सशुल्क व्यवस्था एम.पी. ऑनलाईन कियोस्क, कॉमन सर्विस सेन्टर कियोस्क, लोक सेवा केन्द्र और निजी व्यक्तियों द्वारा संचालित साइबर कैफे पर की गई है। प्रति पंजीयन के लिये 50 रूपये से अधिक शुल्क नहीं लिया जाएगा। किसान पंजीयन के लिए भूमि संबंधी दस्तावेज़ एवं किसान के आधार कार्ड एवं अन्य फोटो पहचान पत्रों का समुचित परीक्षण कर उनका रिकार्ड रखा जाना अनिवार्य होगा।

    सिकमी/बटाईदार/कोटवार एवं वन पट्टाधारी किसान के पंजीयन की सुविधा केवल सहकारी समिति एवं सहकारी विपणन सहकारी संस्था ‌द्वारा संचालित पंजीयन केन्द्रों पर उपलब्ध होगी। इस श्रेणी के शत-प्रतिशत किसानों का सत्यापन राजस्व विभाग द्वारा किया जाएगा।

    उपार्जित फसल के भुगतान हेतु बैंक खाता

    किसान द्वारा समर्थन मूल्य पर विक्रय उपज का भुगतान प्राथमिकता के आधार पर किसान के आधार लिंक बैंक खाते में किया जाएगा। किसान के आधार लिंक बैंक खाते में भुगतान करने में किसी कारण से समस्या उत्पन्न होने पर किसान ‌द्वारा पंजीयन में उपलब्ध कराये गए बैंक खाते में भुगतान किया जा सकेगा। किसान पंजीयन के समय किसान को बैंक खाता नंबर और IFSC कोड की जानकारी उपलब्ध करानी होगी। अक्रियाशील बैंक खाते, संयुक्त बैंक खाते एवं फिनो, एयरटेल, पेटीएम, बैंक खाते पंजीयन में मान्य नहीं होंगे। पंजीयन व्यवस्था में बेहतर सेवा प्राप्त करने के लिए यह जरूरी होगा कि किसान अपने आधार नंबर से बैंक खाता और मोबाईल नंबर को लिंक कराकर उसे अपडेट रखें।

    सभी जिला कलेक्टर्स को निर्देशित किया गया है कि जिला और तहसील स्तर पर स्थापित आधार पंजीयन केन्द्रों को क्रियाशील रखा जाए जिससे किसान वहां जाकर आसानी से अपना मोबाईल नंबर एवं बायोमेट्रिक अपडेट करा सके। इस कार्य के लिए पोस्ट ऑफिस में संचालित आधार सुविधा केन्द्र का भी उपयोग किया जा सकता है। आधार नंबर से बैंक खाता लिंक कराने के लिए बैंकों के साथ भी समन्वय आवश्यक होगा। किसान के आधार लिंक बैंक खाते के सत्यापन के लिये पंजीयन के दौरान ही 1 रूपये का ट्रांजेक्शन मध्यप्रदेश राज्य आपूर्ति निगम द्वारा ई-उपार्जन/जेआईटी पोर्टल के माध्यम से कराया जाएगा।

    आधार नंबर का वेरिफिकेशन

    पंजीयन कराने और फसल बेचने के लिए आधार नंबर का वेरिफिकेशन कराना अनिवार्य होगा। वेरीफिकेशन आधार नंबर से लिंक मोबाईल नंबर पर प्राप्त ओटीपी से या बायोमेट्रिक डिवाईस से किया जा सकेगा। किसान का पंजीयन केवल उसी स्थिति में हो सकेगा जबकि किसान के भू-अभिलेख के खाते एवं खसरे में दर्ज नाम का मिलान आधार कार्ड में दर्ज नाम से होगा। भू-अभिलेख और आधार कार्ड में दर्ज नाम में विसंगति होने पर पंजीयन का सत्यापन तहसील कार्यालय से कराया जाएगा। सत्यापन होने की स्थिति में ही उक्त पंजीयन मान्य होगा।

    किसानों को करें एसएमएस

    विगत रबी एवं खरीफ के पंजीयन में जिन किसानों के मोबाइल नंबर उपलब्ध हैं, उन्हें एसएमएस से सूचित करने के निर्देश दिये गये हैं। गांव में डोडी पिटवाकर ग्राम पंचायतों के सूचना पटल पर पंजीयन सूचना प्रदर्शित कराने तथा समिति/ मंडी स्तर पर बैनर लगवाने के निर्देश भी दिये गये हैं। किसान पंजीयन की सभी प्रक्रियाएँ समय-सीमा में पूर्ण करने के निर्देश संबंधित अधिकारियों को दिये गये हैं।

     

  • टूटी टाइल्स से विज्ञान मॉडल, पुराने टायर से गणित की बेंच; भोपाल की शिक्षिका ने कबाड़ को बनाया पढ़ाई का साधन

    टूटी टाइल्स से विज्ञान मॉडल, पुराने टायर से गणित की बेंच; भोपाल की शिक्षिका ने कबाड़ को बनाया पढ़ाई का साधन

    भोपाल 

    पढ़ाई के लिए हमेशा महंगे मॉडल और नई सामग्री की जरूरत नहीं होती। जरूरत है तो सिर्फ नजरिए की। भोपाल के महात्मा गांधी हायर सेकेंडरी संदीपनी स्कूल की शिक्षिका डॉ. अर्चना शुक्ला ने स्कूल में पड़े कबाड़ को ही बच्चों की पढ़ाई का जरिया बना दिया। कहीं टूटी फॉल्स सीलिंग की टाइल्स विज्ञान के मॉडल में बदल गईं तो कहीं पुराने टायर और खाली पड़ी बेंच से गणित का ऐसा मॉडल तैयार हुआ, जो बच्चों के लिए पढ़ाई से ज्यादा खेल बन गया। डॉ. अर्चना शुक्ला को 2026 का राष्ट्रीय शिक्षक सम्मान भी दिया गया है। उनका मानना है कि जब विद्यार्थी किसी चीज को सिर्फ पढ़ता नहीं, बल्कि उसे बनाता, छूता, रंगता और उसके साथ प्रयोग करता है, तो सीखना उसके लिए बोझ नहीं रहता।

    टूटी टाइल्स फेंकी नहीं, विज्ञान की प्रयोगशाला बना दी
    बारिश के दौरान एक खाली कक्षा की फॉल्स सीलिंग की टाइल्स टूट गई थीं। ये टाइल्स कबाड़ में रखी थीं। डॉ. अर्चना ने इन्हें फेंकने के बजाय बच्चों की रचनात्मकता से जोड़ दिया। हल्की और बोर्ड जैसी इन टाइल्स पर विद्यार्थियों ने रंगों के जरिए विज्ञान से जुड़े चित्र और मॉडल तैयार किए। इसका मकसद सिर्फ कबाड़ का इस्तेमाल करना नहीं था। बच्चों को परीक्षा में कॉपी पर बनाए जाने वाले चित्रों को रटने के बजाय उन्हें रंगों और रचनात्मक तरीके से तैयार करने का मौका दिया गया। इससे एक तरफ बेकार सामान का इस्तेमाल हुआ और दूसरी तरफ बच्चों की कल्पनाशक्ति भी पढ़ाई से जुड़ गई।

    मिट्टी और रंगों से विज्ञान, याद करने का तरीका बदला
    डॉ. अर्चना के अनुसार, जब बच्चा क्ले या मिट्टी से किसी वैज्ञानिक संरचना को खुद बनाता है, तो वह सिर्फ उसे देखता नहीं है। उसे छूता है, आकार देता है, रंग चुनता है और अलग-अलग हिस्सों को समझता है। यानी सीखने में कई तरह की संवेदी गतिविधियां एक साथ जुड़ती हैं। यही वजह है कि विज्ञान जैसे विषय को भी कला से जोड़ा जा रहा है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 में कला समेकित शिक्षा पर जोर दिए जाने के साथ स्कूल में इस तरीके को प्रयोग के रूप में अपनाया गया है।

    पुराने टायर और बेंच से बना 'गणित का खेल
    सबसे दिलचस्प प्रयोग गणित को लेकर किया गया। स्कूल में खाली पड़ी बेंच और बच्चों की ओर से लाए गए पुराने टायरों का इस्तेमाल कर ऐसा मॉडल तैयार किया गया, जिसमें जोड़, घटाव, गुणा और भाग जैसे सवालों को खेल से जोड़ा गया। यह मॉडल स्कूल में बाहर रखा जाता है। सुबह बच्चे आते हैं तो उस पर गणित का सवाल लगा मिलता है। बच्चे उत्सुकता से उसे हल करते हैं और अगली बार के लिए नया सवाल लगा देते हैं। यानी जिस गणित से कई बच्चों को डर लगता है, वही अब उनके लिए रोज का खेल बन गया है।

    छोटी कक्षाओं की समस्या खोजकर बड़े बच्चों ने बनाया समाधान
    डॉ. अर्चना का तरीका सिर्फ मॉडल बनाने तक सीमित नहीं है। स्कूल में परियोजना आधारित और समस्या आधारित शिक्षण पर भी काम किया जाता है। विद्यार्थियों को कहा जाता है कि वे छोटी कक्षाओं में जाकर देखें कि वहां बच्चों को किस विषय में परेशानी आती है। जब विद्यार्थियों ने पाया कि छोटी कक्षाओं के बच्चों को गणित के सवालों में दिक्कत होती है, तो उन्होंने समस्या का समाधान खोजने की कोशिश की। नतीजा पुराने टायर, खाली बेंच और दूसरे अनुपयोगी सामान से तैयार गणित का मॉडल रहा। यानी यहां बच्चे सिर्फ यह नहीं सीख रहे कि सवाल कैसे हल करना है, बल्कि यह भी सीख रहे हैं कि किसी समस्या का समाधान कैसे खोजा जाता है।

    अभाव को बनाया रचनात्मकता का मौका
    डॉ. अर्चना शुक्ला कहती हैं कि उनका उद्देश्य यही रहता है कि विद्यार्थियों के लिए पढ़ाई बोझ न बने और वे चीजों को आसानी से याद कर सकें। उनके मुताबिक स्कूल में संसाधनों की कमी को भी रचनात्मकता में बदला जा सकता है। इसी सोच का नतीजा है कि कबाड़ यहां कचरा नहीं, पढ़ाई की सामग्री है; टायर खेल का हिस्सा नहीं, गणित का मॉडल हैं और टूटी टाइल्स बेकार सामान नहीं, विज्ञान समझाने का माध्यम बन गई हैं।

     

  • इंदौर के बड़ा गणपति फ्लाईओवर को मिली रफ्तार, एक साल की देरी के बाद निर्माण शुरू; दिसंबर तक हटेंगी सभी बाधाएं

    इंदौर के बड़ा गणपति फ्लाईओवर को मिली रफ्तार, एक साल की देरी के बाद निर्माण शुरू; दिसंबर तक हटेंगी सभी बाधाएं

    इंदौर
     लंबे समय से बाधाओं में उलझे बड़ा गणपति फ्लाईओवर के निर्माण की राह अगले वर्ष तक ही साफ हो पाएगी। चौराहे पर आ रही सीवरेज और पानी की लाइन को हटाने का काम जारी है। फ्लाईओवर में सबसे बड़ी अड़चन बन रही 500 मीटर लंबी सीवरेज लाइन शिफ्टिंग के लिए अब तक 250 मीटर की नई लाइन डाली जा चुकी है। शेष 250 मीटर लंबी लाइन डालने का काम दिसंबर तक पूरा होगा।

    ऐसे में नए साल से फ्लाईओवर का निर्माण कार्य शुरू होने की उम्मीद है। इंदौर विकास प्राधिकरण (आईडीए) द्वारा बड़ा गणपति चौराहा पर बनाए जा रहे फ्लाईओवर का निर्माण एक साल से अधिक की देरी के बावजूद शुरू नहीं हो पाया है।

    चौराहे पर आ रही लाइन को हटाने में देरी के कारण सिंहस्थ से पहले फ्लाईओवर का निर्माण पूरा करना चुनौती होगा। सीवरेज लाइन हटने के बाद चौराहे पर ही 100 से 150 मीटर लंबी पानी की लाइन भी हटाई जाएगी। दोनों लाइनें हटने के बाद ही फ्लाईओवर के फाउंडेशन का काम शुरू किया जा सकेगा।

    बड़ा गणपति चौराहा पर 600 मीटर लंबा और 12 मीटर चौड़ा फ्लाईओवर बनाया जाना है। यह अंतिम चौराहे की तरफ से शुरू होकर जिंसी की ओर उतरेगा। इसकी लागत करीब 24 करोड़ रुपये है। हालांकि चौराहे पर आ रही ड्रेनेज और पानी की लाइन को हटाने में ही करीब 10 करोड़ रुपये अतिरिक्त खर्च हो रहे हैं। आइडीए यह राशि नगर निगम को हस्तांतरित कर चुका है।

    पिलर की डिजाइन में कर रहे बदलाव
    फ्लाईओवर की राह में सिर्फ यूटिलिटी लाइनें ही नहीं, बल्कि मेट्रो का राइट आफ वे भी नई चुनौती बन गया है। राइट आफ वे की चौड़ाई बढ़ने के कारण फ्लाईओवर के पिलर की डिजाइन नए सिरे से तैयार की जा रही है। रिवाइज डिजाइन इसी महीने पूरा होने की उम्मीद है। डिजाइन में बदलाव के कारण करीब 1.36 करोड़ रुपये का अतिरिक्त खर्च आएगा, जिसकी स्वीकृति आइडीए बोर्ड बैठक में दी जा चुकी है।

    करीब एक लाख वाहनों की राह होगी आसान
    आइडीए के सर्वे में बड़ा गणपति चौराहे पर पीक आवर्स में सबसे ज्यादा ट्रैफिक दबाव सामने आया है। एयरपोर्ट रोड से आने वाले वाहनों का भी यहां भारी दबाव रहता है। फ्लाईओवर बनने के बाद एक लाख से अधिक वाहनों को रोजाना राहत मिलने की उम्मीद है। लंबे समय से अटकी परियोजना में अब पहले जमीन के नीचे की बाधाएं हटाई जा रही हैं, उसके बाद ही ऊपर फ्लाईओवर खड़ा करने का काम शुरू होगा।

  • मछली पालन को बढ़ावा, मैहर के पोड़ी केंद्र ने बेचे 53.28 लाख मत्स्य बीज; 2027 तक बिक्री का बड़ा लक्ष्य

    मछली पालन को बढ़ावा, मैहर के पोड़ी केंद्र ने बेचे 53.28 लाख मत्स्य बीज; 2027 तक बिक्री का बड़ा लक्ष्य

    मैहर
     एशिया के सबसे बड़े मैहर जिले में स्थित पोड़ी मत्स्य बीज सेंटर में इस वर्ष अच्छे परिणाम सामने हैं. कलेक्टर मैहर विदिशा मुखर्जी के निर्देशन में जिले में मत्स्य पालन को बढ़ावा देने के लिए शासकीय मत्स्य उत्पादन केंद्र पोड़ी में मछली बीज उत्पादन एवं वितरण का कार्य निरंतर किया जा रहा है. जिसका असर इस बार देखने को मिला है और 53 लाख से अधिक मछली के बीज की बिक्री की गई है। 

    पोड़ी में अलग अलग प्रकार के मिलते हैं मत्स्य बीज
    मैहर जिले के पोड़ी केंद्र पर इस वर्ष मुख्य रूप से कतला, रोहू एवं मृगल प्रजाति के मछली बीज (मिक्स फ्राई) का उत्पादन कर मत्स्य पालकों को उपलब्ध कराया जा रहा है. इन क्षेत्रों पर इस तरह के बीजों की बिक्री ज्यादा देखी जा रही है. जिसके फल स्वरूप आस पास के लोगों द्वारा इस प्रजाति की खेती ज्यादा की जाती है मैहर से लगे हुए कई जिलों में इसकी खेती चल रही है इसके साथ साथ उत्पादन भी चल रहा है। 

    2.50 करोड़ का लक्ष्य
    पोड़ी में स्थित शासकीय मत्स्य उत्पादन केंद्र में वर्ष 2026-27 के लिए 2.50 करोड़ मत्स्य बीज की बिक्री का लक्ष्य निर्धारित किया गया है. मत्स्य बीज की बिक्री अगस्त 2026 के अंतिम सप्ताह से प्रारंभ की गई है. अब तक लगभग 53 लाख 28 हजार मत्स्य बीज की बिक्री की जा चुकी है. विभाग द्वारा निर्धारित लक्ष्य को मार्च 2027 तक शत-प्रतिशत पूर्ण किए जाने की संभावना है. वर्ष 2025-26 में केंद्र को 2.25 करोड़ मत्स्य बीज बिक्री का लक्ष्य निर्धारित गया था। 

    सहायक संचालक मत्स्य तरुण कांत पटेल एवं सहायक मत्स्य अधिकारी स्वरांजन सिंह बघेल ने बताया कि, ''केंद्र पर तैयार किए जा रहे मिक्स फ्राई में मुख्य रूप से कतला, रोहू एवं मृगल प्रजाति के मछली बीज शामिल हैं. इन बीजों को निर्धारित शासकीय दर पर मत्स्य पालकों को उपलब्ध कराया जाता है. किसान इन मछली बीजों को खरीदकर अपने तालाबों एवं पोखरों में संचय करते हैं। 

    अलग-अलग जिले से कृषक पहुंच रहे मैहर
    शासकीय मत्स्य उत्पादन केंद्र पोड़ी की मछली बीज की मांग जिले के साथ-साथ प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों सागर, दमोह, पन्ना, रीवा, मऊगंज एवं जबलपुर तक है. यहां से मत्स्य पालक एवं खरीदार मछली बीज क्रय करने के लिए केंद्र पहुंच रहे हैं. जहां उन्हें बेहतर व्यवस्था के साथ मत्स्य बीज उपलब्ध कराया जा रहा है. खरीदार द्वारा चालान के माध्यम से राशि का भुगतान किया जाता है. बिक्री के समय मत्स्य बीज अंतरण प्रमाण-पत्र की पर्ची भी जारी की जाती है, जिसमें मछली बीज की प्रजाति, संख्या, निर्धारित दर एवं कुल राशि का विवरण दर्ज रहता है. इस व्यवस्था के माध्यम से मत्स्य बीज के वितरण में पारदर्शिता सुनिश्चित की जाती है जिससे कि आसानी से किसानों को मत्स्य बीज उपलब्ध हो। 

  • दशहरा-दिवाली पर ट्रेन यात्रियों के लिए खुशखबरी, भोपाल रूट पर चलेंगी स्पेशल ट्रेनें; जानें पूरी जानकारी

    दशहरा-दिवाली पर ट्रेन यात्रियों के लिए खुशखबरी, भोपाल रूट पर चलेंगी स्पेशल ट्रेनें; जानें पूरी जानकारी

    भोपाल 

    आने वाले दिनों में दशहरा, दिवाली और छठ पूजा के दौरान रेल यात्रियों की भीड़ को नियंत्रित करने के लिए मध्य प्रदेश के भोपाल रेल मंडल से तीन राज्यों के बीच दो जोड़ी विशेष ट्रेनें चलाने का फैसला हुआ है। भारतीय रेलवे के इस कदम से त्योहारों के मौसम में घर जाने वाले लोगों को कन्फर्म सीट प्राप्त करने में काफी सुविधा मिलेगी। यात्रियों की बढ़ती संख्या को देखते हुए आईआरसीटीसी ने यात्रियों के लिए विशेष एडवाइजरी भी जारी की है।

      ट्रेनों के मार्ग और फेरों का विवरण
    रेलवे द्वारा घोषित विशेष ट्रेनों में पहली ट्रेन पुणे और गोरखपुर के बीच संचालित होगी। यह ट्रेन अक्तूबर के दूसरे सप्ताह से शुरू होकर नवंबर तक दोनों दिशाओं में कुल 44 फेरे लगाएगी। वहीं दूसरी विशेष ट्रेन मुंबई सीएसएमटी से गोरखपुर के बीच चलाई जाएगी, जो अक्तूबर से नवंबर के दौरान कुल 43 फेरे पूरे करेगी। ये दोनों ट्रेनें अपने मार्ग में इटारसी, भोपाल, बीना, झांसी, कानपुर, लखनऊ और गोंडा जैसे प्रमुख रेलवे स्टेशनों से होकर गुजरेंगी। यात्री अपनी सुविधा के अनुसार इनमें से किसी भी स्टेशन से अपना रिजर्वेशन करवा सकते हैं।

      टिकट बुकिंग और सीटों की स्थिति
    त्योहारों के समय यात्रा के लिए एडवांस टिकट बुकिंग की व्यवस्था यात्रा की तारीख से 60 दिन पहले शुरू होती है। सुबह 8 बजे जैसे ही टिकट बुकिंग विंडो खुलती है, एक मिनट के अंदर ही सीटें वेटिंग में पहुंच जाती हैं। यात्रियों को कन्फर्म सीट उपलब्ध कराने के उद्देश्य से ही दो जोड़ी विशेष ट्रेनों का संचालन करने का निर्णय लिया गया है। वरिष्ठ मंडल वाणिज्य प्रबंधक सौरभ कटारिया के अनुसार रेलवे प्रशासन त्योहारों के दौरान यात्रियों को सुगम यात्रा अनुभव प्रदान करने के लिए लगातार प्रयासरत है।

    आईआरसीटीसी की सलाह
    यात्रियों को फर्जी एजेंटों से बचाने के लिए रेलवे ने सलाह दी है कि टिकट केवल आईआरसीटीसी की आधिकारिक वेबसाइट irctc.co.in या 'आईआरसीटीसी रेल कनेक्ट' एप से ही बुक करें। किसी भी अनधिकृत दलाल या फर्जी एजेंट के झांसे में न आएं, क्योंकि उनसे लिया गया टिकट अवैध माना जा सकता है। बुकिंग के समय केवल अपना चालू मोबाइल नंबर ही दर्ज करें ताकि ट्रेन के समय और प्लेटफॉर्म की सटीक जानकारी एसएमएस पर मिलती रहे।

      वेबसाइट पर अकाउंट रजिस्टर करके यूजरनेम और पासवर्ड से लॉगिन करें। इसके बाद यात्रियों का नाम, उम्र तथा सीट की प्राथमिकता दर्ज करके क्रेडिट कार्ड, डेबिट कार्ड, नेट बैंकिंग या यूपीआई के माध्यम से भुगतान करें। भुगतान पूरा होने के बाद ई-टिकट ईमेल और एसएमएस पर प्राप्त हो जाएगा।

     

  • MP में घर बनाने का नियम बदला, 500 वर्गमीटर तक के प्लॉट के लिए स्थानीय स्तर पर ही मिलेगी अनुमति

    MP में घर बनाने का नियम बदला, 500 वर्गमीटर तक के प्लॉट के लिए स्थानीय स्तर पर ही मिलेगी अनुमति

    भोपाल / इंदौर 
    मध्य प्रदेश में 500 वर्गमीटर (करीब 5,382 वर्गफीट) तक के प्लॉट पर मकान बनाने की अनुमति अब स्थानीय निकाय के स्तर पर ही मिल सकेगी। इसके लिए T&CP से अलग डेवलपमेंट परमिशन लेने की जरूरत नहीं होगी।
    स्वीकृत लैंड यूज वाले प्लॉट का नक्शा नगर निगम, नगर पालिका या नगर परिषद 30 दिन में मंजूर कर सकेगा। पहले इस प्रक्रिया में तीन से चार महीने लगते थे। 

    500 वर्गमीटर तक के भूखंडों पर प्रक्रिया होगी सरल
    महापौर भार्गव ने कहा कि संशोधन से 500 वर्गमीटर तक के भूखंडों पर भवन निर्माण और पुनर्निर्माण की प्रक्रिया अधिक सरल और सुगम होगी। इससे आम नागरिकों को निर्माण से जुड़ी प्रक्रियाओं में राहत मिलने की उम्मीद है।

    विकास की गति बढ़ाने में मदद मिलेगी
    उन्होंने कहा कि नियमों में बदलाव से नागरिकों को सुविधा मिलेगी और शहरों में विकास की गति भी बढ़ेगी। साथ ही बेहतर शहरी नियोजन को बढ़ावा मिलेगा। उन्होंने इस निर्णय को जनसुविधा और सुगम विकास की दिशा में स्वागतयोग्य पहल बताया।

    मुख्यमंत्री और मंत्री का जताया आभार
    पुष्यमित्र भार्गव ने इस संशोधन के लिए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और नगरीय प्रशासन मंत्री कैलाश विजयवर्गीय का हृदय से धन्यवाद दिया। उन्होंने कहा कि जनसुविधा को प्राथमिकता देते हुए लिए गए ऐसे फैसले नागरिकों के लिए महत्वपूर्ण हैं।

    डिजिटल दस्तावेज ही होंगे मान्य

    मध्य प्रदेश के शहरी क्षेत्रों में अब घर या अन्य भवन बनाने की अनुमति लेना पहले से आसान होगा। राज्य सरकार ने बिल्डिंग परमिशन के लिए कई विभागों से अनिवार्य रूप से अनापत्ति प्रमाण-पत्र (NOC) लाने की बाध्यता खत्म कर दी है।

    अब हाउसिंग सोसायटी, नजूल और बिजली विभाग समेत कई मामलों में आवेदकों को अलग-अलग विभागों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। साथ ही भवन अनुज्ञा की पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन होगी और केवल डिजिटल दस्तावेज ही स्वीकार किए जाएंगे।

    नगरीय विकास एवं आवास विभाग ने इस संबंध में सभी नगरीय निकायों को निर्देश जारी किए हैं। अपर मुख्य सचिव संजय दुबे द्वारा जारी आदेश के मुताबिक, भवन अनुज्ञा प्रक्रिया को सरल, तेज और पारदर्शी बनाने के लिए यह बदलाव किए गए हैं। सरकार का कहना है कि इससे आम नागरिकों के साथ निवेशकों, बिल्डर्स और निर्माण एजेंसियों को भी राहत मिलेगी।

    कई विभागों की NOC से मिली राहत
    नई व्यवस्था के तहत सहकारिता विभाग एवं गृह निर्माण सहकारी समितियों, नजूल और बिजली विभाग से मांगी जाने वाली कई प्रकार की NOC की अनिवार्यता समाप्त कर दी गई है। रक्षा प्रतिष्ठानों, मध्यप्रदेश गृह निर्माण एवं अधोसंरचना विकास मंडल तथा विकास प्राधिकरणों से जुड़े मामलों में भी अब आवेदकों को स्वयं NOC लाने के लिए बाध्य नहीं किया जाएगा।

    यदि किसी मामले में संबंधित विभाग की राय आवश्यक होगी तो सक्षम प्राधिकारी आवेदन मिलने के सात दिन के भीतर प्रकरण संबंधित विभाग को भेजेगा। विभाग को 21 दिन के भीतर अपनी अनापत्ति या आपत्ति देनी होगी। तय समय में जवाब नहीं मिलने पर भवन अनुमति की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा सकेगी।

    इन मामलों में अब भी NOC जरूरी
    सरकार ने स्पष्ट किया है कि एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया (AAI), राष्ट्रीय स्मारक प्राधिकरण (NMA) और हेरिटेज क्षेत्रों से संबंधित NOC केवल उन्हीं मामलों में जरूरी होगी, जहां ऑनलाइन GIS आधारित जांच में भूखंड प्रतिबंधित या प्रभावित क्षेत्र में पाया जाएगा। अन्य मामलों में इनकी जरूरत नहीं होगी।

    पर्यावरण और फायर नियमों में भी स्पष्टता
    निर्धारित क्षेत्रफल से बड़े भवनों और परियोजनाओं के लिए ही पर्यावरणीय स्वीकृति जरूरी होगी। वृक्ष कटाई की अनुमति भी केवल उन्हीं मामलों में लेनी होगी, जहां वास्तव में पेड़ काटे जाने हों। अग्निशमन (फायर) अनापत्ति के नियम राष्ट्रीय भवन संहिता के अनुसार लागू रहेंगे।

    नियमों में 5 बड़े बदलाव

        दायरा: छूट 500 वर्गमीटर (5,382 वर्गफीट) तक के प्लॉट पर ही लागू होगी।
        T&CP की अनुमति खत्म: भवन निर्माण के लिए T&CP से अलग ‘डेवलपमेंट परमिशन’ लेने की जरूरत नहीं होगी।
        मंजूरी का अधिकार: नक्शा पास करने और निर्माण की अनुमति देने का अधिकार स्थानीय निकाय-नगर निगम, नगर पालिका या नगर परिषद के पास होगा।
        अनिवार्य शर्त: प्लॉट का लैंड यूज स्वीकृत डेवलपमेंट प्लान (मास्टर प्लान) के मुताबिक होना जरूरी है।
        प्रक्रिया: सरकार ने 28 अगस्त को संशोधन का ड्राफ्ट जारी कर 5 दिन में आपत्तियां और सुझाव मांगे थे। अब फाइनल नोटिफिकेशन जारी किया जा रहा है।

    इंदौर में 3 साल से अटकी भवन अनुमतियों की प्रक्रिया फिर शुरू होने की उम्मीद

    मंत्रालय सूत्रों के अनुसार, इस बदलाव की पृष्ठभूमि इंदौर की भवन अनुमति से जुड़ी समस्या रही। महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने यह मुद्दा मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के सामने उठाया था।

    बाणगंगा, भागीरथपुरा, न्यू देवास रोड और परदेशीपुरा समेत एक दर्जन से अधिक इलाकों में खसरा भूमि और प्लॉटों के लेआउट T&CP से स्वीकृत नहीं थे।

    यहां पहले ‘डाटा फॉर्म’ के आधार पर प्लॉट तैयार कर भवन अनुमति दी जाती थी, लेकिन जुलाई 2023 में इस व्यवस्था पर रोक लग गई। इसके बाद इन इलाकों में मकानों के नक्शे पास होने की प्रक्रिया रुक गई।

    नए नियम से इंदौर समेत प्रदेश के ऐसे भूखंड मालिकों को राहत मिलने की उम्मीद है।

  • भारत भवन में गूंजा मातृभाषाओं का गौरव, दो दिवसीय भारतीय मातृभाषा अनुष्ठान का आगाज

    भारत भवन में गूंजा मातृभाषाओं का गौरव, दो दिवसीय भारतीय मातृभाषा अनुष्ठान का आगाज

    भोपाल 

    “मातृभाषा केवल संवाद का माध्यम नहीं, बल्कि हमारे भाव, विचार, संस्कार और संस्कृति की अभिव्यक्ति है। अपनी भाषा और जड़ों से जुड़कर ही युवा सशक्त राष्ट्र के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।” यह बात सहकारिता, खेल एवं युवा कल्याण मंत्री विश्वास कैलाश सारंग ने सोमवार को भारत भवन में आयोजित दो दिवसीय ‘भारतीय भाषा अनुष्ठान’ के शुभारंभ सत्र में कही। इस अवसर पर 19 पुस्तकों का लोकार्पण भी किया गया। कार्यक्रम में अपर मुख्य सचिव संस्कृति शिवशेखर शुक्ला, संस्कृति संचालनालय के संचालक एन.पी. नामदेव, माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय के कुलगुरु विजय मनोहर तिवारी एवं दत्तोपंत ठेंगडी शोध संस्थान के निदेशक डॉ. मुकेश मिश्रा उपस्थित रहे।

    वीर भारत न्यास एवं संस्कृति संचालनालय द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम को संबोधित करते हुए सारंग ने कहा कि किसी भी समाज और संस्कृति की मूल पहचान उसकी मातृभाषा में निहित होती है। भाषा के माध्यम से व्यक्ति अपनी परंपराओं, ज्ञान और सांस्कृतिक विरासत से जुड़ता है। उन्होंने औपनिवेशिक काल की शिक्षा व्यवस्था का उल्लेख करते हुए कहा कि विदेशी शिक्षा पद्धति के प्रभाव से भारतीय ज्ञान परंपरा और सांस्कृतिक दृष्टि को कमजोर करने का प्रयास हुआ। उन्होंने राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 को मातृभाषा आधारित शिक्षा की दिशा में महत्वपूर्ण पहल बताते हुए मध्यप्रदेश में हिंदी माध्यम से एमबीबीएस की पढ़ाई शुरू किए जाने का उल्लेख किया। मंत्री सारंग ने युवाओं से अपनी भाषा, बोली और संस्कृति को आत्मसात कर वर्ष 2047 तक विकसित और सशक्त भारत के निर्माण का संकल्प लेने का आह्वान किया।

    भारतीय भाषाओं में सुरक्षित हैं हमारी सभ्यता और संस्कृति की स्मृतियाँ: शिव शेखर शुक्ला

    स्वागत संबोधन में अपर मुख्य सचिव संस्कृति शिवशेखर शुक्ला ने कहा कि आज गणेश चतुर्थी का पावन अवसर भी है। ज्ञान, बुद्धि और शुभारंभ के प्रतीक भगवान गणेश के पर्व पर भारतीय भाषाओं, साहित्य और ज्ञान परंपरा के इस अनुष्ठान का शुभारंभ होना अत्यंत मंगलकारी संयोग है। उन्होंने कहा कि भारत की सभ्यता और संस्कृति की स्मृतियाँ हमारी मातृभाषाओं, बोलियों और लिपियों में सुरक्षित हैं। यह आयोजन भारतीय भाषाओं की विविधता, सांस्कृतिक विरासत और राष्ट्रीय एकता की भावना को अभिव्यक्त करने का महत्वपूर्ण प्रयास है। उन्होंने कहा कि संवाद, प्रदर्शनी, पुस्तक लोकार्पण और सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ अनुष्ठान को व्यापक सांस्कृतिक अनुभव प्रदान करेंगी।

    इन 19 पुस्तकों का लोकार्पण

    इस अवसर पर भारतीय ज्ञान, साहित्य और संस्कृति से जुड़ी 19 महत्वपूर्ण पुस्तकों का लोकार्पण भी किया गया। जिसमें वीर भारत न्यास की भारत निधि श्रृंखला अंतर्गत महर्षि पाणिनि, भोजदेव, महर्षि पतंजलि, भर्तृहरि और सम्राट राजेंद्र चोल शामिल है। इसके साथ ही दस गीताएँ- ‘अष्टावक्रगीता’, ‘नारदगीता’, ‘गर्भगीता’,‘ब्राह्मणगीता’, ‘उत्तरगीता’, ‘परमहंसगीता’, ‘वृत्रगीता’, ‘हंसगीता’, ‘चंद्रगीता’, ‘जानकीगीता’ , मध्यकालीन परिदृश्य में मध्य भारत के नगर, बस्तियाँ, मंदिर और तालाब, ‘युग-युगीन जल’, ‘उड़ चल अपने देश’, ‘सूर्यकांत त्रिपाठी निराला—हिंदी साहित्य के प्रकाश पुंज’ जैसी कृतियाँ शामिल हैं।

    भाषाओं में भारत की आत्मा को समझने का माध्यम है मातृभाषा

    भारतीय मातृभाषा अनुष्ठान में ‘मातृभाषा से राष्ट्रभाषा : भाषाओं में भारत की आत्मा’ विषय पर सार्थक विमर्श हुआ। वक्ताओं ने कहा कि मातृभाषाएँ भारत की सांस्कृतिक स्मृति और विविधता की संवाहक हैं। बांग्ला के स्नेहाशीष सूर और कश्मीरी के आसिम मोहिउद्दीन ने विचार रखे। सत्र का समन्वय कुलगुरु विजय मनोहर तिवारी ने किया। दूसरे सत्र में भाषाई पत्रकारिता पर जयदीप कर्णिक, गिरीश उपाध्याय और नारायण व्यास ने विचार साझा किए। संचालन मुकेश मिश्रा ने किया।

    राष्ट्रीय कवि सम्मेलन में गूंजे काव्य के विविध स्वर

    भारतीय मातृभाषा अनुष्ठान के अंतर्गत राष्ट्रीय कवि सम्मेलन का आयोजन हुआ। इसमें डॉ. कीर्ति काले, स्वयं श्रीवास्तव, दिनेश दिग्गज, शैलेन्द्र मधुर, अज़हर इकबाल और रामायणधर द्विवेदी ने अपनी रचनाओं का काव्य पाठ कर श्रोताओं को भाव-विभोर किया। विविध रसों से सजी प्रस्तुतियों को श्रोताओं की सराहना मिली।

    शब्द से चित्र तक: भारत भवन में सजी चित्रित पांडुलिपियों की प्रदर्शनी

    भारत भवन में ‘शब्द से चित्र तक’ प्रदर्शनी आयोजित की गई। इसमें भारतीय भाषाओं के साथ तिब्बत, नेपाल और दक्षिण-पूर्व एशिया की चित्रित पांडुलिपि परंपराओं को प्रदर्शित किया गया। प्रदर्शनी ने अक्षर, लिपि, रंग और चित्रों के माध्यम से सांस्कृतिक विरासत की समृद्ध यात्रा को साकार किया।

    पूर्व रंग में भारतीय भाषाओं एवं बोलियों के गीतों की प्रस्तुति

    ‘भारतीय मातृभाषा अनुष्ठान’ की सांस्कृतिक गरिमा को बढ़ाते हुए पूर्वरंग में उमेश तरकसवार एवं दल द्वारा भारतीय भाषाओं और विभिन्न लोकबोलियों के गीतों की मनोहारी प्रस्तुति दी गई। विविध भाषाओं के सुरों ने भारत की सांस्कृतिक एकता और भाषाई विविधता का सुंदर भाव प्रस्तुत करते हुए वातावरण को भावपूर्ण बना दिया।

    सहभागी संस्थाएँ

    वीर भारत न्‍यास एवं संस्कृति संचालनालय, मध्यप्रदेश शासन, संस्कृति विभाग द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम में भारत भवन, माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय, दत्तोपंत ठेंगड़ी शोध संस्थान तथा मातृभाषा मंच की सहभागिता रही।

     

  • डुप्लेक्स से करोड़ों की साइबर ठगी का कारोबार! ग्वालियर पुलिस की बड़ी कार्रवाई, नेटवर्क के 5 आरोपी गिरफ्तार

    डुप्लेक्स से करोड़ों की साइबर ठगी का कारोबार! ग्वालियर पुलिस की बड़ी कार्रवाई, नेटवर्क के 5 आरोपी गिरफ्तार

    भोपाल 

    ग्वालियर पुलिस ने साइबर अपराध, ऑनलाइन सट्टा, ऑनलाइन गेम्बलिंग एवं बैंक खातों की खरीद-फरोख्त से जुड़े संगठित नेटवर्क का पर्दाफाश करते हुए पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया है। विंडसर हिल्स स्थित किराए के डुप्लेक्स से संचालित इस नेटवर्क से 23 मोबाइल फोन, 37 सिम कार्ड, 11 एटीएम कार्ड, तीन लैपटॉप, छह पासबुक सहित अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरण जब्त किए गए हैं। प्रारंभिक जांच में नेटवर्क के माध्यम से प्रतिमाह लगभग 7 से 8 करोड़ रुपए तथा वार्षिक स्तर पर करीब 100 करोड़ रुपए के वित्तीय लेन-देन का अनुमान सामने आया है। आरोपियों के दुबई एवं श्रीलंका से जुड़े नेटवर्क के संपर्क में होने की जानकारी भी मिली है।

    वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक ग्वालियर श्री धर्मवीर सिंह के निर्देश पर साइबर अपराधों एवं साइबर फ्रॉड में बैंक खातों का उपयोग करने वाले व्यक्तियों के विरुद्ध कार्रवाई के क्रम में 12 सितम्बर को साइबर क्राइम विंग को विंडसर हिल्स स्थित एक डुप्लेक्स में ऑनलाइन सट्टा, बैंक खातों की खरीद-फरोख्त एवं ऑनलाइन गेम्बलिंग संचालित किए जाने की सूचना मिली। सूचना की पुष्टि के बाद पुलिस टीम ने मौके पर कार्रवाई करते हुए पांच व्यक्तियों को पकड़ा। पूछताछ एवं प्रारंभिक जांच में उनके उक्त गतिविधियों में संलिप्त होने की जानकारी सामने आई। आरोपियों के विरुद्ध क्राइम ब्रांच ग्वालियर में अपराध पंजीबद्ध कर विवेचना की जा रही है।

    ‘100 पैनल’ वेबसाइट से संचालित हो रहा था नेटवर्क

    प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि आरोपी ‘100 पैनल’ नामक वेबसाइट के माध्यम से ऑनलाइन सट्टे का संचालन कर रहे थे। आरोपियों के मोबाइल फोन से बड़ी संख्या में बैंक खातों से संबंधित विवरण प्राप्त हुए हैं। संबंधित बैंकों से इन खातों की जानकारी प्राप्त कर यह पता लगाया जा रहा है कि इनका उपयोग साइबर ठगी सहित अन्य अपराधों में किस प्रकार किया गया।

    करोड़ों रुपए के वित्तीय लेन-देन की जांच

    प्रारंभिक जांच के अनुसार नेटवर्क में प्रतिमाह करीब 7 से 8 करोड़ रुपए का लेन-देन होने का अनुमान है। पुलिस द्वारा बैंक खातों में हुए संदिग्ध लेन-देन, धनराशि के स्रोत, लाभार्थियों तथा पूरे वित्तीय नेटवर्क की जांच की जा रही है।

    दुबई और श्रीलंका से जुड़े नेटवर्क की भी जांच

    पूछताछ में आरोपियों द्वारा व्हाट्सएप के माध्यम से दुबई एवं श्रीलंका से जुड़े नेटवर्क के संपर्क में होने की जानकारी दी गई है। पुलिस जब्त मोबाइल फोन, सिम कार्ड, लैपटॉप एवं अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों से प्राप्त डेटा का तकनीकी विश्लेषण कर रही है। इससे नेटवर्क से जुड़े अन्य व्यक्तियों, बैंक खातों एवं वित्तीय लेन-देन के संबंध में महत्वपूर्ण जानकारी मिलने की संभावना है।

    डुप्लेक्स मालिक की भूमिका की भी जांच

    जिस डुप्लेक्स में गतिविधियां संचालित की जा रही थीं, उसे किराए पर देने वाले मकान मालिक की भूमिका की भी जांच की जा रही है। पुलिस यह पता लगा रही है कि डुप्लेक्स में संचालित गतिविधियों की जानकारी मकान मालिक को थी अथवा नहीं।

    जब्त सामग्री

    आरोपियों से 23 मोबाइल फोन, 37 सिम कार्ड, 11 एटीएम कार्ड, तीन लैपटॉप, छह पासबुक एवं अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरण जब्त किए गए हैं।

    मध्यप्रदेश पुलिस साइबर अपराधों एवं ऑनलाइन अवैध गतिविधियों के विरुद्ध निरंतर प्रभावी कार्रवाई कर रही है। पुलिस द्वारा ऐसे संगठित नेटवर्क की पहचान कर उनके वित्तीय एवं तकनीकी नेटवर्क को खंगाला जा रहा है, ताकि साइबर ठगी, ऑनलाइन सट्टा, गेम्बलिंग तथा बैंक खातों के दुरुपयोग में संलिप्त अन्य व्यक्तियों तक पहुंच बनाई जा सके। साथ ही नागरिकों से अपील है कि वे अपने बैंक खाते, एटीएम कार्ड, सिम अथवा अन्य डिजिटल संसाधन किसी भी व्यक्ति को उपयोग के लिए उपलब्ध न कराएं और साइबर अपराध से संबंधित किसी भी घटना की तत्काल सूचना पुलिस को दें।