Category: विदेश

  • ईरान संकट को और न बढ़ाने की सऊदी की अपील, ट्रंप ने टाला बड़ा सैन्य कदम

    ईरान संकट को और न बढ़ाने की सऊदी की अपील, ट्रंप ने टाला बड़ा सैन्य कदम

    वॉशिंगटन
    ईरान के खिलाफ अमेरिका का साथ देने वाले सऊदी अरब ने डोनाल्ड ट्रंप को सलाह दी है कि वह युद्ध को ज्यादा ना बढ़ाएं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान पर बड़े हमले का प्लान कैंसल कर दिया है।सऊदी के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान ने वाइट हाउस से कहा था कि ईरान में संकट और बड़ा करने की जरूरत नहीं है। हालांकि वाइट हाउस की तरफ से इसपर कोई प्रतिक्रिया अब तक नहीं दी गई थी। रिपोर्ट्स में यह भी कहा जा रहा है कि अमेरिका ने ईरान पर बड़े हमले का प्लान सऊदी अरब की वजह से ही कैंसल कर दिया है।

    इससे पहले क्राउन प्रिंस ने अमेरिकी राष्ट्रपति पर फोन पर बात की थी और पूछा था कि आखिर ईरान पर कितना बड़ा हमला करने का वह प्लान बना रहे हैं। इस सप्ताह अमेरिका और सऊदी अरब ने मिलकर ईरान के कई ठिकानों पर हमले किए थे। इसके अलावा क्राउन प्रिंस ने अपने भाई और रक्षा मंत्री खालिद बिन सलमान को वॉशइंगटन भेजा था। उन्होंने राष्ट्रपति ट्रंप और उपराष्ट्रपति जेडी वेंस से मुलाकात की है।

    अमेरिका ने अपने नागरिकों को जारी कर दी चेतावनी
    ईरान के साथ बढञते तनाव के बीच अमेरिका ने पश्चिम एशिया से अपने नागरिकों को निकलने की चेतावनी जारी कर दी है। यरुशलम और पश्चिम एशिया के विभिन्न देशों की राजधानियों में स्थित अमेरिकी दूतावासों ने एक जैसे सुरक्षा अलर्ट जारी किए, जिसमें अमेरिकी नागरिकों को पश्चिम एशिया में यात्रा करने को लेकर चेतावनी दी गई।

    बता दें कि पिछले पांच महीने से अमेरिका और ईरान के बीच तनातनी चरम पर है। अब होर्मुज पर नियंत्रण को लेकर दोनों देश आमने-सामने हैं। वाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलिन लेविट ने ईरान पर अमेरिका के साथ हुए युद्धविराम समझौते का उल्लंघन करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि तेहरान ने पिछले महीने अमेरिका के साथ युद्धविराम संबंधी एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए थे, लेकिन इसके तुरंत बाद उसने उसे तोड़ दिया, वाणिज्यिक जहाजों पर हमला किया और अमेरिकी सैनिकों की हत्या की।

    लेविट ने शुक्रवार शाम एक बयान में कहा, "राष्ट्रपति ट्रंप इस तरह की आतंकवादी हरकत बर्दाश्त नहीं करेंगे। जब तक ईरान राष्ट्रपति ट्रंप के अनुसार सार्थक तरीके से बातचीत की मेज पर नहीं आता, तब तक उसे इसकी कीमत चुकानी पड़ेगी।' इस बीच कुवैत की सेना ने शनिवार को कहा कि उसके बल उन ड्रोन हमलों का जवाब दे रहे हैं, जो देश पर ईरान के हमलों का ही हिस्सा थे।

  • PoK Violence: चार दिनों में 50 लोगों की मौत के बाद पाकिस्तान में बवाल, शहबाज सरकार के खिलाफ विरोध तेज

    PoK Violence: चार दिनों में 50 लोगों की मौत के बाद पाकिस्तान में बवाल, शहबाज सरकार के खिलाफ विरोध तेज

     इस्लामाबाद
    पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) में पिछले तीन-चार दिनों से जारी हिंसा और विरोध प्रदर्शनों को लेकर बड़ा बयान सामने आया है. जम्मू-कश्मीर जॉइंट पीपुल्स एक्शन कमेटी (JAAC) के सदस्य सरदार उमर नज़ीर कश्मीरी ने कहा है कि बीते कुछ दिनों में सुरक्षा बलों की कार्रवाई में 50 से ज्यादा लोगों की जान गई है और सैकड़ों लोग घायल हुए हैं। 

    उन्होंने इसे बर्बर आतंकवाद बताया. इसी बीच पाकिस्तान के इस्लामाबाद में 31 जुलाई को एक बड़ा विरोध प्रदर्शन हुआ, जिसमें पूर्व सीनेटर मुश्ताक खान समेत कई पाकिस्तानी और कश्मीरी लोग शामिल हुए. इस प्रदर्शन को लेकर उमर नज़ीर कश्मीरी ने आभार जताया है। 

    उमर नज़ीर कश्मीरी ने बताया कि वे रावलाकोट के डी-चौक पर अपने धरना स्थल पर मौजूद हैं और यह धरना लगातार जारी है. उन्होंने कहा कि पिछले तीन-चार दिनों में बड़े पैमाने पर लोगों की जान गई है और कई साथी घायल हुए हैं. उनका आरोप है कि शांतिपूर्ण तरीके से प्रदर्शन कर रहे लोगों पर सीधी गोलीबारी की गई, जिसकी वजह से इतनी मौतें हुईं. उन्होंने यह भी बताया कि इसी तरह की घटनाएं मुज़फ्फराबाद में भी हुई हैं। 

    उन्होंने कहा कि 31 जुलाई को सीनेटर मुश्ताक साहब ने इस्लामाबाद के जी-10 मरकज़ में एक बड़ी रैली बुलाई थी. इस रैली में बड़ी संख्या में पाकिस्तानी और कश्मीरी लोग शामिल हुए और उन्होंने अपनी एकजुटता दिखाई। 

    उमर नज़ीर कश्मीरी ने सीनेटर मुश्ताक खान और इस प्रदर्शन को आयोजित करने वाले सभी लोगों का शुक्रिया अदा किया. उन्होंने यह धन्यवाद जम्मू-कश्मीर जॉइंट पीपुल्स एक्शन कमेटी की पूरी कोर कमेटी और कश्मीरी जनता की तरफ से दिया। 

    साथ ही उन्होंने पाकिस्तान और कश्मीर के उन सभी लोगों का भी आभार जताया, जिन्होंने इस्लामाबाद में एकजुट होकर यह बड़ा प्रदर्शन किया. उन्होंने कहा कि यह एक ऐतिहासिक प्रदर्शन था। 

    उमर नज़ीर कश्मीरी ने उम्मीद जताई कि आगे भी लोग इसी तरह उनके साथ खड़े रहेंगे और उनकी आवाज़ को मजबूती से उठाते रहेंगे. यह पूरा मामला पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में चल रहे विरोध आंदोलन से जुड़ा हुआ है, जो लगातार तूल पकड़ता जा रहा है। 

  • Spain Border Crisis: मुस्लिम देश से घुसपैठ की कोशिश ने बढ़ाया तनाव, सेना की कार्रवाई के बीच कई लोगों की मौत

    Spain Border Crisis: मुस्लिम देश से घुसपैठ की कोशिश ने बढ़ाया तनाव, सेना की कार्रवाई के बीच कई लोगों की मौत

    मैड्रिड

    यूरोप के बॉर्डर पर एक बार फिर से बड़ा सुरक्षा खतरा पैदा हो गया है. मुस्लिम बहुल अफ्रीकी देश मोरक्‍को से हजारों की तादाद में लोग समंदर तैरकर या फिर लैंड बॉर्डर के जरिये यूरोपीय देश स्‍पेन में दाखिल हो रहे हैं. बताया जा रहा है कि पिछले कुछ दिनों में हजारों की तादाद में मोरक्‍को वासी अवैध तरीके से बॉर्डर क्रॉस कर स्‍पेन के सेउटा में दाखिल हो गए. मोरक्‍को के बेलगाम शरणार्थियों के चलते स्‍पेन के सीमावर्ती इलाके सेउटा में बवाल मच गया. स्‍थानीय सरकार ने केंद्र से आर्मी को तैनात करने और नेशनल इमरजेंसी घोषित करने की मांग की है. हालांकि, स्‍पेन सरकार की ओर से अभी तक आपातकाल की घोषणा नहीं की गई है, लेकिन हालात पर काबू पाने के लिए बॉर्डर पर आर्मी को बख्‍तरबंद गाड़ियों के साथ तैनात कर दयिा गया है. उधर, स्‍पेन के बॉर्डर पर बवाल को देखते हुए इटली की प्रधानमंत्री जियोर्जिया मेलोनी ने चेतावनी जारी की है. लीबिया और सीरिया संकट के दौरान जर्मनी की तरह इटली भी अवैध शरणार्थियों का भुक्‍तभोगी रहा था। 

    स्पेन के उत्तर अफ्रीकी क्षेत्र सेउटा (Ceuta) में मोरक्को की ओर से बड़ी संख्या में अवैध प्रवासियों के प्रवेश के बाद गंभीर मानवीय और सुरक्षा संकट पैदा हो गया है. हालात को नियंत्रित करने के लिए स्पेन सरकार ने सीमा पर सेना तैनात करने का फैसला किया है. न्‍यूज एजेंसी ‘AP’ स्थानीय प्रशासन का कहना है कि हजारों प्रवासियों के अचानक पहुंचने से सीमा सुरक्षा व्यवस्था चरमरा गई है, जबकि बॉर्डर पार करने की कोशिश के दौरान कम से कम नौ लोगों की मौत हो गई है. वहीं, बीबीसी की रिपोर्ट की मानें मो बॉर्डर क्रॉस करने के चक्‍कर में कम से कम 60 लोगों की मौत हुई है. सेउटा के क्षेत्रीय प्रमुख जुआन जीसस विवास ने कहा कि पिछले एक सप्ताह से लगातार अवैध प्रवासियों का दबाव बढ़ रहा है और स्थानीय संसाधन पूरी तरह जवाब दे रहे हैं. उन्होंने केंद्र सरकार से अतिरिक्त पुलिस बल और सैन्य सहायता भेजने की मांग की थी. इसके बाद स्पेन के प्रधानमंत्री पेड्रो सांचेज और गृह मंत्री फर्नांडो ग्रांडे मार्लास्का ने सेउटाका दौरा करने की घोषणा की। 

    समंदर तैरकर कर रहे पार
    प्रत्यक्षदर्शियों और स्थानीय मीडिया के अनुसार, बड़ी संख्या में लोग तैरकर, हवा से भरे ट्यूब और अन्य फ्लोटेशन उपकरणों की मदद से समुद्र पार कर स्यूटा पहुंचे. कई प्रवासी सीमा पर लगी बाड़ के गेट से दौड़ते हुए स्पेनिश क्षेत्र में दाखिल हुए. बॉर्डर में घुसने वाले अधिकांश प्रवासी युवा पुरुष हैं. हालांकि, महिलाओं और छोटे बच्चों वाले परिवार भी इस भीड़ में शामिल थे. स्पेन की सिविल गार्ड का प्रतिनिधित्व करने वाले अधिकारी राशिद स्बीही ने कहा कि स्थिति पूरी तरह अराजक हो चुकी है और सीमा व्यवस्था लगभग ध्वस्त हो गई है. प्रवासियों की सही संख्या को लेकर अलग-अलग दावे किए जा रहे हैं. कुछ स्पेनिश मीडिया संस्थानों ने गुरुवार को दो से तीन हजार लोगों के सीमा पार करने का अनुमान लगाया है, जबकि सरकारी ब्रॉडकास्‍टर आरटीवीई के अनुसार पिछले दो सप्ताह में 1,500 से अधिक (ज्यादातर मोरक्को के युवा) सेउटा पहुंचे हैं. स्थानीय प्रशासन ने बताया कि बिना मां-बाप वाले नाबालिगों के लिए बनाए गए आश्रय केंद्र अपनी क्षमता से कई गुना अधिक लोगों को शरण देने के लिए मजबूर हैं. हाल के महीनों में समुद्र से लगभग 60 शव बरामद किए जाने की भी जानकारी दी गई है, जिससे इस मार्ग की खतरनाक स्थिति उजागर होती है। 

    गृह मंत्रालय अलर्ट
    स्पेन के गृह मंत्रालय का कहना है कि मानव तस्करी से जुड़े गिरोह हाल ही में आए सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले का फायदा उठाकर लोगों को अवैध रूप से स्यूटा पहुंचने के लिए प्रेरित कर रहे हैं. अदालत ने इस महीने फैसला दिया था कि समुद्र के रास्ते स्यूटा या मेलिला पहुंचने की कोशिश करने वाले प्रवासियों को बिना कानूनी प्रक्रिया अपनाए तुरंत मोरक्को वापस नहीं भेजा जा सकता. हालांकि कुछ मानवाधिकार कार्यकर्ताओं का मानना है कि अधिकांश प्रवासियों को इस कानूनी फैसले की जानकारी ही नहीं थी. स्पेन और मोरक्को दोनों सरकारों ने कहा है कि वे इस संकट से निपटने के लिए मिलकर काम कर रही हैं. दोनों देशों ने अवैध रूप से सेउटा पहुंचे लोगों की जल्द वापसी सुनिश्चित करने और सीमा पर निगरानी मजबूत करने पर सहमति जताई है। 

    इटली की पीएम मेलोनी की चेतावनी
    दूसरी ओर, इटली की प्रधानमंत्री जियोर्जिया मेलोनी ने सेउटा की तस्वीरों पर चिंता जताते हुए कहा कि अनियंत्रित अवैध प्रवासन यूरोप की सीमा सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा है और आवश्यकता पड़ने पर इटली असाधारण कदम उठाने के लिए तैयार है. मेलोनी ने X पर पोस्‍ट शेयर कर कहा, ‘सेउटा से सामने आ रही तस्वीरें बेहद चिंताजनक हैं और एक बार फिर यह साबित करती हैं कि अनियंत्रित अवैध प्रवासन यूरोप की सीमाओं की सुरक्षा के लिए एक वास्तविक खतरा है. मैंने गृह मंत्री माटेओ पियांतेदोसी से बातचीत की है. इटली मूकदर्शक बनकर नहीं रहेगा. हम संबंधित अधिकारियों और संस्थाओं की बैठक बुला रहे हैं और इन बैठकों के बाद हम सीमाओं और नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए असाधारण कदम उठाने के लिए तैयार हैं. इनमें स्पेन के साथ शेंगेन क्षेत्र (Schengen Area) की व्यवस्था को निलंबित करना भी शामिल हो सकता है. अवैध प्रवासन के मुद्दे पर हम एक इंच भी पीछे नहीं हटेंगे. सीमाओं की रक्षा करना, मानव तस्करों पर सख्त कार्रवाई करना और अवैध प्रवासियों की प्रभावी वापसी (रिपैट्रिएशन) सुनिश्चित करना इस सरकार की नीति आगे भी बनी रहेगी। 

    सेउटा और मेलिला अफ्रीका में स्थित स्पेन के दो छोटे क्षेत्र हैं, जो यूरोपीय संघ और अफ्रीका के बीच एकमात्र लैंड बॉर्डर का प्रतिनिधित्व करते हैं. वर्ष 2021 में भी सेउटा में ऐसा ही बड़ा संकट सामने आया था, जब मात्र दो दिनों में लगभग 8,000 प्रवासी सीमा पार कर स्पेनिश क्षेत्र में प्रवेश कर गए थे. मौजूदा घटनाक्रम ने एक बार फिर यूरोप में अवैध प्रवासन, सीमा सुरक्षा और मानवीय संकट को लेकर नई बहस छेड़ दी है। 

  • कराची में चली गोलियां, गैंगस्टर उजैर बलोच के भाई पर हमला; गैंगवार की वापसी की अटकलें तेज

    कराची में चली गोलियां, गैंगस्टर उजैर बलोच के भाई पर हमला; गैंगवार की वापसी की अटकलें तेज

    बलूचिस्तान 

    पाकिस्तान के सबसे चर्चित गैंगस्टरों में गिने जाने वाले उजैर बलोच के भाई जुबैर बलोच पर गुरुवार शाम कराची के ल्यारी इलाके में जानलेवा हमला हुआ. डॉन न्यूज की रिपोर्ट के मुताबिक, दो हथियारबंद हमलावरों ने बाइक पर पहुंचकर जुबैर पर अंधाधुंध फायरिंग की और मौके से फरार हो गए. पुलिस के अनुसार, हमले में 40 साल के जुबैर बलोच गंभीर रूप से घायल हुए हैं. उनके सीने और पेट में कई गोलियां लगीं. उन्हें तुरंत सिविल अस्पताल कराची ले जाया गया, जहां उनकी सर्जरी की गई. गोलीबारी में दो राहगीर भी घायल हुए। 

    कैसे हुआ हमला?
    साउथ DIG सैयद असद रजा ने डॉन न्यूज को बताया कि जुबैर अपने घर के बाहर सिंगु लेन इलाके में मौजूद था, तभी मोटरसाइकिल पर आए दो हमलावरों ने उन पर फायरिंग शुरू कर दी. रिपोर्ट के मुताबिक, पास की एक दुकान के मालिक ने जवाबी फायरिंग की, जिसके बाद हमलावर चेहरा ढककर मौके से भाग निकले। 

    पुलिस किन एंगल से कर रही जांच?
    DIG रजा के अनुसार, पुलिस इस हमले की जांच कई पहलुओं से कर रही है. इसमें गैंगवार, पुरानी व्यक्तिगत दुश्मनी और दूसरे संभावित कारण शामिल हैं. एक स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ता ने नाम न बताने की शर्त पर डॉन को बताया कि जुबैर हाल ही में एक राजनीतिक दल में शामिल हुए थे और पिछले कुछ महीनों से इलाके में उस पार्टी के झंडे लगा रहे थे. उसी व्यक्ति ने यह दावा भी किया कि कराची ऑपरेशन के दौरान दुबई और ईरान भागे कुछ गैंग सदस्य हालिया अमेरिका-ईरान संघर्ष के बाद वापस लौट आए हैं. हालांकि यह स्थानीय स्तर पर चल रही चर्चा है और इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। 

  • जापान भूकंप से दहला, प्रधानमंत्री ने दिए राहत-बचाव के लिए तत्काल कार्रवाई के निर्देश

    जापान भूकंप से दहला, प्रधानमंत्री ने दिए राहत-बचाव के लिए तत्काल कार्रवाई के निर्देश

    नागासाकी
    जापान के क्यूशू द्वीप पर मंगलवार को 7.1 तीव्रता का शक्तिशाली भूकंप आया. यह भूकंप कुमामोतो क्षेत्र में आया और इसके बाद सुनामी की चेतावनी जारी कर दी गई. जापान मौसम विज्ञान एजेंसी (JMA) के मुताबिक भूकंप के बाद 1 मीटर तक ऊंची लहरें उठने की आशंका जताई गई है. तटीय इलाकों में रहने वाले लोगों से सतर्क रहने और जरूरत पड़ने पर तुरंत सुरक्षित स्थानों पर जाने की अपील की गई है.

    जापान सरकार ने कुमामोतो के अलावा नागासाकी, कागोशिमा, फुकुओका, सागा, ओइता और मियाजाकी प्रान्तों में भी आपातकालीन भूकंप चेतावनी जारी की है. ये सभी इलाके क्यूशू द्वीप पर स्थित हैं. यह जानकारी न्यूज एजेंसी रॉयटर्स ने दी है.

    राहत की बात यह है कि अभी तक किसी के हताहत होने या बड़े नुकसान की कोई खबर सामने नहीं आई है. स्थानीय प्रशासन भूकंप से हुए असर का आकलन कर रहा है और साथ ही सुनामी के खतरे पर भी लगातार नजर बनाए हुए है. आपातकालीन टीमें अलर्ट पर हैं और स्थिति पर बारीकी से नजर रखी जा रही है.

    जापान दुनिया के उन देशों में शामिल है जहां भूकंप सबसे ज्यादा आते हैं. इसी वजह से यहां भूकंप और सुनामी की चेतावनी देने वाला सिस्टम दुनिया के सबसे बेहतर सिस्टम में गिना जाता है.

    यह सिस्टम कुछ ही सेकंड में लोगों को अलर्ट भेज देता है जिससे जान माल का नुकसान कम करने में मदद मिलती है. क्यूशू द्वीप पर रहने वाले लोगों को फिलहाल सतर्क रहने और अधिकारियों के निर्देशों का पालन करने की सलाह दी गई है. आने वाले घंटों में स्थिति साफ होने की उम्मीद है.

    कुमामोटो में था भूकंप का केंद्र
    भूकंप का सबसे ज्यादा असर कुमामोटो प्रांत के कई शहरों और कस्बों में देखा गया. यात्सुशिरो, उतो, मशिकी और मिसातो में शिंदो पैमाने पर 6 दर्ज किया गया. वहीं कुमामोटो शहर के मिनामी वार्ड में भी तेज झटके महसूस किए गए. जापान टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक कुमामोटो के अन्य हिस्सों के साथ-साथ नागासाकी, कागोशिमा, फुकुओका, सागा और मियाजाकी प्रांतों में भी भूकंप के तेज झटके महसूस किए गए. इन इलाकों में शिंदो स्केल पर 5 या उससे अधिक तीव्रता दर्ज की गई. जापान मौसम विभाग के मुताबिक भूकंप का केंद्र कुमामोटो शहर के दक्षिण में स्थित उकी शहर के पास था और इसकी गहराई करीब 10 किलोमीटर थी. भूकंप के कारण कुमामोटो प्रांत में लगभग 45,600 घरों की बिजली आपूर्ति बाधित हो गई. बिजली बहाल करने के लिए राहत और मरम्मत का काम शुरू कर दिया गया है। 

    कुमामोटो 2016 में झेल चुका है विनाशकारी भूकंप

    यह भूकंप अप्रैल, 2016 में आए विनाशकारी कुमामोटो भूकंपों की याद दिलाता है. उस समय आए दो बड़े भूकंपों में 278 लोगों की मौत हुई थी और करीब 2,800 लोग घायल हुए थे. जापान के कुमामोटो प्रांत में 14 और 16 अप्रैल 2016 को दो बड़े भूकंप आए थे. उन भूकंपों में ऐतिहासिक कुमामोटो किले को भी भारी नुकसान पहुंचा था. किले के पुनर्निर्माण का काम अब भी जारी है और इसके वर्ष 2052 तक पूरा होने की उम्मीद है. इसके अलावा भूकंप के चलते आसो ओहाशी ब्रिज पूरी तरह ढह गया था, सड़कें, रेलवे लाइनें, अस्पताल और बुनियादी ढांचा बुरी तरह प्रभावित हुआ था. जापान को करीब ₹2.3 लाख करोड़ का नुकसान भूकंप की वजह से हुआ था। 

    जापान के प्रधानमंत्री ने क्या कहा?
    जापान के प्रधानमंत्री कार्यालय ने कुमामोटो प्रांत में आए शक्तिशाली भूकंप के बाद सभी संबंधित एजेंसियों को तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए हैं. प्रधानमंत्री की ओर से जारी निर्देशों में कहा गया है कि सबसे पहले भूकंप से हुए नुकसान का जल्द से जल्द आकलन किया जाए.

    इसके साथ ही स्थानीय प्रशासन के साथ मिलकर राहत और बचाव अभियान तेज करने को कहा गया है. निर्देश में साफ कहा गया है कि मानव जीवन को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए और फंसे हुए लोगों को सुरक्षित निकालने तथा उनकी जान बचाने के लिए हर संभव प्रयास किए जाएं.

    प्रधानमंत्री कार्यालय ने यह भी कहा है कि सरकार एकजुट होकर काम करे और लोगों को निकासी, नुकसान की स्थिति और अन्य जरूरी जानकारी समय पर और सही तरीके से उपलब्ध कराई जाए.

  • PoK में चुनाव बने खूनी संघर्ष, रावलकोट में हिंसा और धांधली के आरोपों से मचा हड़कंप

    PoK में चुनाव बने खूनी संघर्ष, रावलकोट में हिंसा और धांधली के आरोपों से मचा हड़कंप

    रावलकोट

    पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoJK) में स्थानीय चुनावों के पहले चरण के दौरान भारी हिंसा, खूनखराबा और अराजकता फैल गई है। एक ओर जहां राजनीतिक पार्टियां एक-दूसरे पर खुलेआम चुनाव में धांधली का आरोप लगा रही हैं, वहीं दूसरी ओर पाकिस्तानी सुरक्षा बलों की गोलीबारी ने रावलकोट और कोटली जैसे इलाकों को युद्धक्षेत्र में बदल दिया है।

    रावलकोट के भयावह हालात: सड़कों पर लाशें और खून
    रावलकोट में पिछले 52 दिनों से चल रहे 'जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी' (JAAC) के प्रदर्शनों को कुचलने के लिए पाकिस्तानी बलों द्वारा की गई कार्रवाई ने खौफनाक रूप ले लिया है। स्थानीय लोगों के बयान बेहद डरावने हैं। रावलकोट में मौजूद चश्मदीद और सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर अकील भाई ने वीडियो जारी कर बताया कि वहां हर तरफ लाशें और घायल लोग नजर आ रहे हैं। उन्होंने भारी हथियारों से की गई फायरिंग का जिक्र करते हुए कहा कि कश्मीरियों का खून सड़कों पर बह रहा है।

    प्रदर्शनकारियों का दावा है कि पाकिस्तानी रेंजर्स ने शांतिपूर्ण तरीके से मार्च कर रहे लोगों पर सीधे गोलियां चलाईं। एक घटना में 15 से 20 लोगों को गोली लगने की पुष्टि हुई है, जिससे हताहतों की संख्या काफी अधिक होने की आशंका है।

    अस्पतालों में एंबुलेंस और गाड़ियां कम पड़ गई हैं, और लोग अपने कंधों पर घायलों को ले जाने के लिए मजबूर हैं। स्थानीय लोगों ने अंतरराष्ट्रीय मीडिया और मानवाधिकार संगठनों से तत्काल हस्तक्षेप की गुहार लगाई है।

    एक चश्मदीद ने बताया, "हालात बहुत ज्यादा खराब हो चुके हैं। रावलकोट में लाशें ही लाशें हैं। जख्मी ही जख्मी हैं। खुदा हमारा साथ दे। अभी अपनी जान बचाकर आया हूं। जो भी नेशनल मीडिया देख रही है, प्लीज हमारा साथ दें। बेशुमार लाशें पड़ी हैं।"

    चुनाव में खुलेआम धांधली और हत्या
    मीरपुर डिवीजन की 13 विधानसभा सीटों पर हो रहे मतदान का पहला चरण बड़े पैमाने पर चुनावी अनियमितताओं और राजनीतिक हिंसा का शिकार हुआ है। कोटली जिले के निक्याल में मतदान के दौरान पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (PPP) के 35 वर्षीय कार्यकर्ता मुख्तार यूनुस की गोली मारकर हत्या कर दी गई।

    PPP के अध्यक्ष बिलावल भुट्टो-जरदारी ने चुनाव आयोग की भूमिका पर सवाल उठाते हुए हत्या और बूथ कैप्चरिंग का सीधा आरोप पाकिस्तान मुस्लिम लीग-नवाज (PML-N) के समर्थकों पर लगाया है।

    पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की पार्टी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (PTI) ने इस चुनाव का पूरी तरह बहिष्कार किया है। स्थानीय अधिकारियों का आरोप है कि इस चुनाव के नतीजे पाकिस्तान की सेना पहले ही तय कर चुकी है, ताकि क्षेत्र में उनका नियंत्रण और कड़ा हो सके।

    विरोध प्रदर्शन की मुख्य वजह
    PoJK में यह गुस्सा अचानक नहीं भड़का है। लगातार चल रहे इस जन-आंदोलन की प्रमुख वजहें इस प्रकार हैं।

        600 से अधिक नागरिक अधिकार कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार किया गया है, जिनकी रिहाई की मांग हो रही है। सरकार ने नागरिक अधिकारों की बात करने वाली समिति JAAC को प्रतिबंधित कर दिया है।

        लोग महंगाई, बिजली-पानी की कमी और संसाधनों के भारी शोषण के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं।

        विधानसभा में शरणार्थियों के लिए आरक्षित 12 सीटों को खत्म करने की मांग को लेकर भी लंबे समय से तनाव बना हुआ था, जिसे प्रशासन ने खारिज कर दिया।

    चुनाव की आड़ में पाकिस्तानी सेना और प्रशासन द्वारा नागरिक अधिकारों के दमन ने PoJK में मानवाधिकारों का गंभीर संकट खड़ा कर दिया है। धांधली और राज्य प्रायोजित हिंसा ने वहां के लोगों को बगावत पर मजबूर कर दिया है।

  • ब्राजील-अमेरिका में बढ़ा तनाव, चुनावी हस्तक्षेप के आरोपों पर आमने-सामने दोनों देश

    ब्राजील-अमेरिका में बढ़ा तनाव, चुनावी हस्तक्षेप के आरोपों पर आमने-सामने दोनों देश

    ब्रासीलिया
    ब्राजील ने दो अमेरिकी अधिकारियों के वीजा अनुरोधों को ठुकरा दिया है। ये दोनों अमेरिकी अधिकारी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के आदेश पर ब्राजील की चुनावी प्रणाली की निष्पक्षता पर सवाल उठाने के लिए वहां जाने की योजना बना रहे थे। ट्रंप कई बार ब्राजील के वर्तमान वामपंथी राष्ट्रपति लुइज इनासियो लूला डी सिल्वा की आलोचना कर चुके हैं। उन्होंने ब्राजील पर 50 प्रतिशत का टैरिफ भी लगाया था, जिसे बाद में कम कर दिया गया। अब ब्राजील के इस कदम से ट्रंप का भड़कना तय माना जा रहा है। ऐसी आशंका है कि ट्रंप एक बार फिर ब्राजील पर भारी टैरिफ लगा सकते हैं।

    ब्राजील के चुनाव को प्रभावित कर रहा अमेरिका?
    ब्राजील के अधिकारियों ने आरोप लगाया है कि अमेरिका की योजना देश में अक्तूबर में होने वाले चुनाव को प्रभावित करने की है। इस चुनाव में मौजूदा राष्ट्रपति लुइज इनासियो लूला डी सिल्वा का मुकाबला दक्षिणपंथी झुकाव वाले सीनेटर फ्लेवियो बोल्सोनारो से होगा। फ्लेवियो बोल्सोनारो ट्रंप के सहयोगी और पूर्व राष्ट्रपति जायर बोल्सोनारो के बेटे हैं। जायर बोल्सोनारो पिछला चुनाव लूला से हार गए थे।

    ब्राजील ने किन अमेरिकी अधिकारियों का वीजा ठुकराया
    ब्राजील ने जिन अमेरिकी अधिकारियों का वीजा अनुरोध ठुकराया है, उनमें विदेश विभाग के 'ब्यूरो ऑफ डेमोक्रेसी, ह्यूमन राइट्स एंड लेबर' की असिस्टेंट सेक्रेटरी राइली एम बार्न्स और डिप्टी असिस्टेंट सेक्रेटरी सैमुअल सैमसन शामिल थे। उन्होंने कहा कि वीजा को खारिज करने का फैसला ऐसे सबूतों पर आधारित था, जो हालात का राजनीतिक फायदा और ब्राजील की चुनाव प्रणाली को कमजोर करने की एक नई कोशिश की ओर इशारा करते हैं।

    अमेरिकी विदेश विभाग ने ब्राजील के आरोपों को खारिज किया
    इससे पहले शनिवार को, अमेरिकी विदेश विभाग के एक प्रवक्ता ने कहा कि बार्न्स और सैमसन 27 जुलाई से 30 जुलाई तक ब्रासीलिया का दौरा करेंगे। वे सरकारी अधिकारियों, धार्मिक नेताओं और नागरिक समाज के प्रतिनिधियों से मिलकर चुनाव की निष्पक्षता, धार्मिक स्वतंत्रता और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर चर्चा करेंगे। प्रवक्ता ने ब्राज़ील के चुनावों को कमज़ोर करने की किसी भी "साज़िश" की बात को खारिज कर दिया। उन्होंने ऐसे दावों को "बेबुनियाद" बताया और कहा कि यह दौरा सामान्य है और 'ब्यूरो ऑफ़ डेमोक्रेसी, ह्यूमन राइट्स एंड लेबर' के कानूनी अधिकार क्षेत्र के अनुरूप है।

    पूरी दुनिया में चुनावों को प्रभावित कर रहा अमेरिका
    अमेरिका पूरी दुनिया में चुनावों को प्रभावित करने की कोशिश कर रहा है। इसका ताजा सबूत लैटिन अमेरिका में देखने को मिला है। ट्रंप ने कोलंबिया के कोलंबिया के चुनाव में नवनिर्वाचित राष्ट्रपति एबेलार्डो डी ला एस्प्रिएला को पूरी तरह समर्थन का ऐलान किया था। इसके अलावा अमेरिका ने अर्जेंटीना के राष्ट्रपति जेवियर माइली की जीत के लिए एड़ी-चोटी का जोर लगा दिया था। ट्रंप चिली के राष्ट्रपति जोस एंटोनियो कास्ट का भी समर्थन करते हैं।

    जायर बोल्सोनारो ने चुनाव प्रणाली पर उठाए सवाल
    जायर बोल्सोनारो ने 2022 के चुनाव से पहले ब्राजील की चुनावी प्रणाली पर भरोसा कम करने की बार-बार कोशिश की थी। उनका यह काम ठीक वैसा ही था, जैसा डोनाल्ड ट्रंप ने पिछले अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव में जो बाइडन की जीत के वक्त किया था। उस समय बाइडन के कार्यकाल में अमेरिकी सेंट्रल इंटेलिजेंस एजेंसी के निदेशक ने बोल्सोनारो प्रशासन से कहा था कि वे ब्राजील की वोटिंग प्रणाली पर शक करना बंद करें। फिर भी 2022 के चुनावों में हार के बाद बोल्सोनारो ने विदेशी राजनयिकों को बुलाकर बिना किसी सबूत के आरोप लगाए कि ब्राजील की इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग प्रणाली में धोखाधड़ी हो सकती है।

    बोल्सोनारो के चुनाव लड़ने पर प्रतिबंध, जेल की सजा
    उनकी यह चाल उल्टी पड़ गई। ब्राजील में चुनावों की देखरेख करने वाली सुपीरियर इलेक्टोरल कोर्ट ने बाद में फैसला सुनाया कि बोल्सोनारो ने अपने पद का गलत इस्तेमाल किया है और उन्हें 2030 तक किसी भी सार्वजनिक पद के लिए चुनाव लड़ने से रोक दिया। बाद में बोल्सोनारो को चुनाव नतीजों को पलटने और सत्ता में बने रहने की साजिश रचने के लिए दोषी ठहराया गया और 27 साल की जेल की सजा सुनाई गई। वे अभी नजरबंदी (हाउस अरेस्ट) में अपनी सजा काट रहे हैं। अब, उनके बेटे फ्लावियो बोल्सोनारो ने देश की चुनावी प्रणाली पर फिर से शक पैदा कर दिया है, जो सोशल मीडिया पर फैल रहा है।

     

  • होर्मुज तनाव के बीच ईरान पर खाड़ी देशों के सैन्य हमले तेज

    होर्मुज तनाव के बीच ईरान पर खाड़ी देशों के सैन्य हमले तेज

    नई दिल्ली
    ईरान और अमेरिका में युद्ध के बीच पहली बार ऐसा हुआ है जब खाड़ी के कई देशों ने सीधा सैन्य हमला शुरू कर दिया है। द वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट के मुताबिक बहरीन और कुवैत ईरान पर सीधे हमले कर रहे हैं। इन दोनों देशों ने सऊदी अरब की मदद से ईरान के मिसाइल स्टोरेज और सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया है। सऊदी अरब उन्हें इंटेलिजेंस और डिफेंसिव एयर कवर देकर मदद कर रहा है। बता दें कि ईरान लंबे समय से उन देशों को निशाना बना रहा है जिनमें अमेरिका के बेस हैं।

    खाड़ी देश देने लगे ईरान को जवाब
    इससे पहले खाड़ी के देश केवल आत्मरक्षा का प्रयास करते थे और ईरान की तरफ से छोड़ी गई मिसाइलों और ड्रोन को निष्ट कर देते थे। खाड़ी के देशों ने युद्ध बढ़ने की आशंका से कभी सीधे युद्ध में भाग नहीं लिया। हालांकि ईरान के लगातार हमलों को देखते हुए अब खाड़ी देशों ने भी युद्ध के लिए कमर कस ली है। फिलहाल दो देशों ने ही ईरान के खिलाफ अभियान शुरू किया है। रिपोर्ट्स में कहा जा रहा है कि ओमान और कतर जैसे देशों ने अभी हमले नहीं शुरू किए हैं।

    रिपोर्ट के मुताबिक ईरान के खिलाफ यूएई के अभियान में सऊदी अरब भी शामिल था। वहीं बहरीन और कुवैत ने तो अपना मोर्चा ही खोल दिया है। दोनों की खाड़ी देशों पर हाल के दिनों में ईरान की तरफ से ताबड़तोड़ हमले किए गए हैं। ईरान खाड़ी देशों में अमेरिकी बेस और उनके सैन्य उपकरणों को निशाना बनाने की कोशिश करता है। वह बहरीन, कुवैत और जॉर्डन में ज्यादा हमले करता है। इसके अलावा यूएई के कई शहरों में ईरान ने तबाही मचाने की कोशिश की। इन खाड़ी देशों में अकसर सायरन बजाए जाते हैं।

    कुवैत में अमेरिकी ठिकानों पर हमला
    ईरान का कहना है कि कुवैत में उसने अमेरिकी ठिकानों, जैसे कि कैंप उडैरी, कैंप दोहा और कैंप आरिफजान पर हमला किया है। इसके अलावा अली अल सलेम एयरबेस को भी निशाना बनाया गया है। बहरीन के गृह वि भाग का कहना है कि शनिवार को भी देश में सायरन बजाए गए और लोगों से सुरक्षित जगहों पर ही रुकने को कहा गया है।

    बता दें कि एक दिन पहले ही ईरान ने उत्तरी ईराक के एक शहर को भी निशाना बनाया है। ये घटनाएं अमेरिकी सेना द्वारा ईरान के खिलाफ लगातार 13वीं रात हमले करने की घोषणा के कुछ घंटों बाद हुईं। गौरतलब है कि होर्मुज पर नियंत्रण को लेकर ईरान और आमेरिका में तनाव लगातार बढ़ता ही जा रहा है। वहीं दुनियाभर में ऊर्जा संकट गहरा रहा है। यह जलडमरूमध्य दुनिया भर में ऊर्जा आपूर्ति के लिए एक अहम मार्ग है और ताजा लड़ाई का केंद्र भी यही है। ईरानी हमलों से यह जलमार्ग बंद हो सकता है, जिससे दुनिया भर में ईंधन की कीमतें तेजी से बढ़ सकती हैं और भारी आर्थिक उथल-पुथल मच सकती है।

  • स्वास्थ्य कारणों का हवाला देकर बांग्लादेश राष्ट्रपति मोहम्मद शहाबुद्दीन ने दिया इस्तीफा

    स्वास्थ्य कारणों का हवाला देकर बांग्लादेश राष्ट्रपति मोहम्मद शहाबुद्दीन ने दिया इस्तीफा

    नई दिल्ली
    बांग्लादेश के राष्ट्रपति मोहम्मद शहाबुद्दीन ने अपने कार्यकाल के खत्म होने से दो साल पहले ही शुक्रवार को इस्तीफा दे दिया। वह अपदस्थ प्रधानमंत्री शेख हसीना के पूर्व सहयोगी थे। कुछ वक्त पहले ऐसी खबरें आई थीं कि शहाबुद्दीन ने शेख हसीना को फोन किया था। इसको लेकर काफी ज्यादा बवाल मचा था। बता दें कि बांग्लादेश की वर्तमान बीएनपी सरकार के मुखिया तारिक रहमान और शेख हसीना के बीच छत्तीस का आंकड़ा है। ऐसे में प्रधानमंत्री रहमान को यह बात काफी नागवार गुजरी थी। बता दें कि शेख हसीना ने कुछ दिन पहले ही बांग्लादेश वापसी की बात कही थी।

    ‘द डेली स्टार’ अखबार के अनुसार, 76 वर्षीय नेता ने अपने इस्तीफे की वजह के बारे में पूछे गए एक सवाल का जवाब देते हुए कहाकि मैं स्वास्थ्य संबंधी कई दिक्कतों से जूझ रहा हूं। राष्ट्रपति भवन ‘बंगभवन’ के एक प्रवक्ता ने बताया कि शहाबुद्दीन के प्रतिनिधि उनका त्यागपत्र लेकर संसद के लिए निकल चुके हैं। त्यागपत्र संसद के अध्यक्ष हफीजुद्दीन अहमद को सौंपा जाएगा, जो बांग्लादेश के संविधान के अनुसार नए राष्ट्रपति के चुने जाने तक कार्यवाहक राष्ट्रपति के तौर पर काम करेंगे।

    हसीना सरकार के समय से पद पर थे
    प्रवक्ता ने कहाकि जब तक संसद के अध्यक्ष को त्यागपत्र नहीं मिल जाता, मैं इस्तीफे पर कोई आधिकारिक टिप्पणी नहीं कर सकता। साल 1971 के मुक्ति संग्राम में भूमिका निभाने वाले और निचली अदालत के न्यायाधीश रहे शहाबुद्दीन ने अप्रैल 2023 में पांच साल के कार्यकाल के लिए राष्ट्रपति के तौर पर शपथ ली थी। उन्हें देश की पिछली संसद ने सर्वोच्च पद के लिए चुना था और वह एकमात्र ऐसे व्यक्ति थे, जो जुलाई-अगस्त 2024 में छात्रों के हिंसक विरोध-प्रदर्शनों के बाद भी अपने संवैधानिक पद पर बने हुए थे। इन विरोध-प्रदर्शनों के बाद हसीना की अवामी लीग सरकार गिर गई थी। हसीना भारत चली गई थीं और पांच अगस्त 2024 से वहीं रह रही हैं।

    लंदन में इलाज के दौरान क्या हुआ था
    बताया जाता है कि इसी साल मई में राष्ट्रपति शहाबु्द्दीन इलाज के लिए लंदन गए थे। इसी दौरान उन्होंने निर्वासित प्रधानमंत्री शेख हसीना के साथ संपर्क करने की कोशिश की थी। इसके बाद काफी ज्यादा बवाल मचा था। बताया जा रहा है कि यह मामला सामने आने के बाद ही बांग्लादेश के राष्ट्रपति पर दबाव बढ़ने लगा था। गुरुवार को एक बैठक के दौरान उन्होंने पद छोड़ने की बात कही थी। बता दें कि बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना बांग्लादेश में हुए आंदोलन के बाद से ही देश छोड़ चुकी हैं। वह भारत भारत में रह चुकी हैं। हालांकि उन्होंने हाल ही में कहा था कि वह इसी साल दिसंबर में बांग्लादेश लौटेंगी।

    पहले भी हुई थी हटाने की मांग
    पांच अगस्त 2024 को हुए राजनीतिक तख्तापलट के बाद भेदभाव विरोधी छात्र आंदोलन में और समेत कई राजनीतिक दलों ने उन्हें पद से हटाने की मांग की थी। हालांकि, उस समय अंतरिम सरकार ने संवैधानिक कारणों का हवाला देते हुए उन्हें नहीं हटाया था और बाद में यह मुद्दा शांत हो गया था।

    12 फरवरी को हुए राष्ट्रीय संसदीय चुनावों में बंगलादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) की जीत और सरकार गठन के बाद राष्ट्रपति बदलने की चर्चाएं एक बार फिर शुरू हो गई थीं। हालांकि बीएनपी नेताओं ने मार्च में कहा था कि राष्ट्रपति का कार्यकाल बाकी होने के कारण पार्टी के भीतर इस पर कोई चर्चा नहीं हुई है, लेकिन इसके चार महीने बाद शहाबुद्दीन के इस्तीफे की खबर सामने आ गई।

  • ढाका में सियासी भूचाल, राष्ट्रपति के इस्तीफे के पीछे हसीना को फोन कॉल बना बड़ा मुद्दा

    ढाका में सियासी भूचाल, राष्ट्रपति के इस्तीफे के पीछे हसीना को फोन कॉल बना बड़ा मुद्दा

    ढाका 
    बांग्लादेश के राष्ट्रपति मोहम्मद शहाबुद्दीन ने अपने पद से इस्तीफ़ा दे दिया है. बांग्लादेश के संविधान के अनुच्छेद 50(3) के तहत राष्ट्रपति स्पीकर को संबोधित एक हस्ताक्षरित पत्र सौंपकर इस्तीफ़ा दे सकते हैं. मोहम्मद शहाबुद्दीन  तब विवादों में आ गए थे जब उन्होंने कुछ दिन पहले लंदन यात्रा के दौरान उन्होंने शेख हसीना के साथ संपर्क साधने की कोशिश की थी. बांग्लादेश में सत्ता परिवर्तन के बाद शेख हसीना भारत में रह रही हैं. रिपोर्ट के अनुसार मई में सेहत कारणों की वजह से लंदन गए राष्ट्रपति मोहम्मद शहाबुद्दीन ने शेख हसीना से बात करने की कोशिश की थी.  इसके बाद उनकी राजनीतिक निष्ठा को लेकर बांग्लादेश की राजनीति में सवाल उठने खड़े हो गए थे। 

    बांग्लादेश में अभी BNP की सरकार है और पूर्व पीएम खालिदा जिया के बेटे तारिक रहमान वहां के प्रधानमंत्री हैं. शेख हसीना और तारिक रहमान बांग्लादेश के कट्टर राजनीतिक प्रतिद्वंदी हैं। 

    हाल ही में शेख हसीना ने बांग्लादेश लौटने की घोषणा की है. सत्ता परिवर्तन के दौरान ढाका छोड़कर भारत आईं शेख हसीना ने कहा था कि वे दिसंबर 2026 में बांग्लादेश लौटेंगी। 

    पिछले कुछ दिनों से राजनीतिक हलकों में राष्ट्रपति मोहम्मद शहाबुद्दीन के इस्तीफ़े की संभावना को लेकर अटकलें तेज़ हो गई थीं। 

    गुरुवार को जानकारी रखने वाले सूत्रों ने संकेत दिया कि वे पद छोड़ने के लिए मानसिक रूप से तैयार हो गए थे. मामले की जानकारी रखने वाले एक सूत्र ने यह भी दावा किया कि बंगभवन में वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठक के दौरान राष्ट्रपति ने पद छोड़ने की तैयारी करने की बात कही थी। 

    मोहम्मद शहाबुद्दीन ने अवामी लीग सरकार के कार्यकाल के दौरान 24 अप्रैल 2023 को बांग्लादेश के 22वें राष्ट्रपति के रूप में पांच साल के संवैधानिक कार्यकाल के लिए पद संभाला था. उनका कार्यकाल अप्रैल 2028 में समाप्त होने वाला था, लेकिन उन्होंने अपना कार्यकाल पूरा होने से लगभग दो साल पहले ही इस्तीफ़ा दे दिया है।