Category: छत्तीसगढ़

  • गोमर्डा अभयारण्य में फिर बढ़ेगा काले हिरणों का कुनबा, प्राकृतिक आवास में छोड़े जाएंगे 25 हिरण

    गोमर्डा अभयारण्य में फिर बढ़ेगा काले हिरणों का कुनबा, प्राकृतिक आवास में छोड़े जाएंगे 25 हिरण

    सारंगढ़-बिलाईगढ़ 

     छत्तीसगढ़ के सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले के गोमर्डा अभयारण्य में बारनवापारा अभयारण्य से जल्द ही 25 काले हिरणों को स्थानांतरित कर खुले जंगल में आजाद किया जाएगा। वन विभाग ने इस विस्थापन के लिए तैयारियां तेज कर दी हैं और इसे अक्तूबर के प्रथम सप्ताह में करने की योजना है। वन मंत्री केदार कश्यप की उपस्थिति में इन हिरणों को नए प्राकृतिक आवास में छोड़ा जाएगा। वर्तमान में बारनवापारा में 80 से अधिक काले हिरण मौजूद हैं।

    छत्तीसगढ़ के जंगलों में 1970 के दशक में काले हिरण पूरी तरह विलुप्त हो गए थे। वर्ष 1980 के दशक के बाद वे केवल चिड़ियाघरों में ही दिखाई देते थे। राज्य वन्यजीव बोर्ड की नौवीं बैठक पुनर्स्थापन योजना को स्वीकृति दी गई थी। इसके उपरांत वर्ष 2019 में 77 काले हिरणों को संरक्षण के लिए लाया गया था। इनमें दिल्ली के राष्ट्रीय प्राणी उद्यान से 50 और बिलासपुर के कानन पेंडारी जूलॉजिकल उद्यान से 27 हिरण शामिल थे।

      संरक्षण के शुरुआती चरण में वन विभाग को अनेक चुनौतियों से जूझना पड़ा। दिल्ली चिड़ियाघर से लाकर जंगल में छोड़े गए हिरण जीवित नहीं बच सके। इसके अलावा निमोनिया के कारण लगभग आठ काले हिरणों की मृत्यु हो गई थी। इसके बाद प्रबंधन व्यवस्था में जरूरी बदलाव किए गए। रणनीति में परिवर्तन करते हुए बिलासपुर से लाए गए हिरणों को नियंत्रित बाड़े में अनुकूलन का पूरा समय दिया गया, जिससे वे प्राकृतिक जीवनशैली को अपना सके।
     
    राज्य में काले हिरणों की आबादी 200
    नियमित निगरानी, उचित पोषण और अनुकूल माहौल के परिणामस्वरूप काले हिरणों की संख्या स्थिर हुई और फिर उसमें लगातार वृद्धि होने लगी। राज्य में इनकी कुल आबादी बढ़कर करीब 200 तक पहुंच गई। इस सफलता का उल्लेख प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने 'मन की बात' कार्यक्रम में भी किया था। संख्या बढ़ने पर 60 काले हिरणों को बारनवापारा अभयारण्य के खुले क्षेत्र में छोड़ा गया। इसमें सबसे पहले फरवरी 2022 में 14 हिरणों को मुक्त किया गया था। इसके बाद वर्ष 2024 तथा फरवरी 2026 में 34 अन्य हिरणों को जंगल में आजाद किया गया।

     गोमर्डा अभयारण्य में विस्थापन की तैयारी
    पीसीसीएफ एवं वनबल प्रमुख अरुण कुमार पाण्डेय के अनुसार काले हिरणों को गोमर्डा अभयारण्य में भेजने के लिए तैयारियां जारी हैं। मंत्री केदार कश्यप की सहमति मिलते ही अक्तूबर के प्रथम सप्ताह में 25 हिरणों को नए स्थान पर छोड़ दिया जाएगा। लगभग पांच दशकों बाद प्राकृतिक वातावरण में हिरणों का यह पुनर्वास महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

     

  • किसानों के लिए कमाई का नया रास्ता, पारंपरिक खेती के साथ मछली पालन से मजबूत हुई आमदनी

    किसानों के लिए कमाई का नया रास्ता, पारंपरिक खेती के साथ मछली पालन से मजबूत हुई आमदनी

    बदलाव की मिसाल 

    बदली किसानों की किस्मत प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना से

    पारंपरिक खेती के साथ मछली पालन बन रहा अतिरिक्त आमदनी का मजबूत जरिया

    रायुपर
    प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी के गांव, गरीब और किसान को सशक्त बनाने के विजन के अनुरूप, केंद्र सरकार की प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले के किसानों के लिए वरदान साबित हो रही है। धान की पारंपरिक खेती से आगे बढ़कर जिले के करीब 150 किसान अब मछली पालन, हैचरी और पाउंड लाइनर जैसी आधुनिक गतिविधियों के जरिए अपनी आय और आजीविका के नए रास्ते तैयार कर रहे हैं। सरकारी अनुदान और बुनियादी सुविधाओं के विकास से ग्रामीण स्तर पर स्वरोजगार और रोजगार के नए अवसर तेजी से बढ़ रहे हैं।

    बिरकोनी के दिनेश चन्द्राकर बने मिसाल

              प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना (PMMSY) ने आधुनिक तकनीकों, वित्तीय सहायता और अनुदान के जरिए देश के हजारों किसानों और मछली पालकों की आर्थिक स्थिति को पूरी तरह बदल दिया है । पारंपरिक खेती में बढ़ती लागत से परेशान होकर बिरकोनी निवासी दिनेश चन्द्राकर ने मछली पालन की तरफ कदम बढ़ाया। योजना के तहत उन्होंने करीब 7.50 लाख रुपए की लागत से एक हेक्टेयर में तालाब खुदवाया और 14 लाख रुपए की लागत से 20 हजार वर्गफुट में मछली हैचरी स्थापित की।

    उत्पादन और कमाई

              हैचरी में तैयार बच्चे तालाब में डाले जाते हैं, जिससे 8 से 9 महीने में लगभग 15 टन मछली तैयार हो जाती है। 70 से 80 रुपए प्रति किलो की लागत आने के बावजूद बाजार में 120 से 150 रुपए प्रति किलो तक बिक्री होने से उन्हें बेहतरीन मुनाफा मिल रहा है।

    ग्राम बकमा के हिमांशु चंद्राकर को मिला स्थायी जरिया

              प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के तहत तालाब निर्माण, बायोफ्लॉक यूनिट, मछली बीज हैचरी, कोल्ड स्टोरेज और फीड प्लांट जैसी परियोजनाओं के लिए सहायता दी जाती है। ग्राम बकमा के किसान हिमांशु चंद्राकर ने लगभग 28 लाख रुपए की लागत से दो पाउंड लाइनर यूनिट तैयार कराईं। सरकार से 60 प्रतिशत अनुदान मिलने के बाद, सभी खर्च काटकर उन्हें सालाना 3 से 4 लाख रुपए की शुद्ध बचत हो रही है।

    ग्रामीण अर्थव्यवस्था और मजदूरों को मिल रहा संबल

                मछली पालन से केवल यूनिट संचालकों ही नहीं, बल्कि स्थानीय मजदूरों को भी बड़ा लाभ मिला है। बिरकोनी के मजदूरों का कहना है कि अब उन्हें काम की तलाश में बाहर नहीं जाना पड़ता, बल्कि गांव में ही सालभर नियमित रोजगार मिल रहा है। करीब 9 हजार रुपए प्रतिमाह की आय से उनके परिवारों का जीवनयापन बेहद आसान हो गया है।

    योजना के मुख्य बिंदु और प्रावधान

                 बुनियादी ढांचे के विकास के लिए नए तालाबों का निर्माण, बायोफ्लॉक यूनिट, हैचरी, कोल्ड स्टोरेज और मछली दाना निर्माण को बढ़ावा दिया जा रहा है। प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के तहत महिला, अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति वर्ग के हितग्राहियों को 60  प्रतिशत तथा सामान्य वर्ग के हितग्राहियों को 40 प्रतिशत तक का अनुदान दिया जाता है। धान की पारंपरिक खेती पर निर्भर महासमुंद के किसानों के लिए अब मछली पालन आत्मनिर्भरता, समृद्धि और विकास का एक नया प्रतीक बन चुका है।

  • 6 जिलों में सड़क विकास को बड़ी सौगात, 1,093.73 करोड़ की लागत से होंगे 44 सड़क कार्य

    6 जिलों में सड़क विकास को बड़ी सौगात, 1,093.73 करोड़ की लागत से होंगे 44 सड़क कार्य

    सरगुजा संभाग में सड़क अधोसंरचना को मिलेगी ऐतिहासिक मजबूती

    6 जिलों में 44 मुख्य सड़क कार्यों के लिए 1,093.73 करोड़ रुपए की प्रशासकीय स्वीकृति

    रायपुर
    छत्तीसगढ़ शासन द्वारा सरगुजा संभाग के विकास और सुशासन को सुदृढ़ करने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया गया है। संभाग के सभी छह जिलों सरगुजा, सूरजपुर, बलरामपुर-रामानुजगंज, कोरिया, मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर और जशपुर में सड़कों के जाल को मजबूत करने के लिए 44 मुख्य सड़क कार्यों हेतु कुल 1,093.73 करोड़ रुपए की प्रशासकीय स्वीकृति प्रदान की गई है। इन परियोजनाओं के तहत नई सड़कों का निर्माण, चौड़ीकरण, डामरीकरण, सुदृढ़ीकरण, फोरलेन निर्माण और आवश्यक स्थानों पर पुल-पुलिया का निर्माण किया जाएगा।

    सरगुजा जिला

            अम्बिकापुर विधानसभा क्षेत्र में लरंगसाय चौक से रामानुजगंज मार्ग के 5 किमी हिस्से के फोरलेन चौड़ीकरण के लिए 69.10 करोड़ रुपए तथा गांधी चौक से रेलवे स्टेशन तक 5 किमी फोरलेन के लिए 61.34 करोड़ रुपए स्वीकृत। लुण्ड्रा और सीतापुर क्षेत्रों में असकला-दोरना मार्ग, सोनतराई-मैनपाट मार्ग (26.33 करोड़) सहित विभिन्न मार्गों और पुलियों के सुदृढ़ीकरण के कार्य शामिल हैं।

    सूरजपुर जिला

              भटगांव विधानसभा क्षेत्र के तारा-प्रेमनगर-रामानुजनगर-कृष्णपुर 63 किमी मार्ग के लिए 64.93 करोड़ रुपए स्वीकृत किए गए हैं। इसके अलावा कल्याणपुर-लटोरी मार्ग (40.93 करोड़), विशुनपुर-सूरजपुर-ओड़गी मार्ग (32.24 करोड़) और सूरजपुर के 17 किमी रिंग रोड के मजबूतीकरण (16.39 करोड़) सहित कई अन्य मार्ग संवरेंगे।

    बलरामपुर-रामानुजगंज जिला

             परसवार से चलगली 18 किमी उन्नयन मार्ग के लिए 38.80 करोड़ रुपए, वाड्रफनगर- जनकपुर-बलंगी मार्ग के लिए 35.32 करोड़ रुपए, तथा कामेश्वरनगर-लुरगी मार्ग के लिए 25.69 करोड़ रुपए स्वीकृत किए गए हैं। इसके साथ ही सीमावर्ती क्षेत्रों तक पहुंच आसान होगी।

    जशपुर जिला

             लुड़ेग-बागबहार-तपकरा-लवाकेरा 55.80 किमी राज्य मार्ग के सुदृढ़ीकरण के लिए 40.32 करोड़ रुपए, पत्थलगांव के पहाड़ी भागों के उन्नयन हेतु 36.85 करोड़ रुपए, और बतौली-बगीचा-चरईडांड मार्ग के लिए 34.44 करोड़ रुपए की स्वीकृति दी गई है।

    सड़कें बनेंगी विकास की जीवनरेखा

             इन व्यापक सड़क परियोजनाओं से केवल आवागमन ही सुगम नहीं होगा, बल्कि इसके दूरगामी आर्थिक और सामाजिक लाभ होंगे। कृषि और व्यापार को गति मिलेगी, किसानों के कृषि उत्पाद आसानी से बाजारों तक पहुंच सकेंगे, जिससे स्थानीय व्यापार और ग्रामीण अर्थव्यवस्था मजबूत होगी। बेहतर होगा स्वास्थ्य और शिक्षा, दूरस्थ वनांचल क्षेत्रों के विद्यार्थियों और मरीजों के लिए स्कूल, कॉलेज व स्वास्थ्य केंद्रों तक पहुंचना आसान हो जाएगा। बेहतर कनेक्टिविटी से गांवों तक सरकारी योजनाओं और प्रशासनिक सेवाओं का लाभ त्वरित गति से पहुँचेगा।

          1,093.73 करोड़ रुपए की लागत वाली ये 44 परियोजनाएं सरगुजा संभाग के समग्र विकास, निवेश और नागरिकों के जीवन स्तर को ऊंचा उठाने में मील का पत्थर साबित होंगी।

  • ‘सेवा संकल्प अभियान’ को मिलेगा व्यापक जनसेवा स्वरूप, डिप्टी CM अरुण साव ने तैयारियों का लिया जायजा

    ‘सेवा संकल्प अभियान’ को मिलेगा व्यापक जनसेवा स्वरूप, डिप्टी CM अरुण साव ने तैयारियों का लिया जायजा

    उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने ‘सेवा संकल्प अभियान’ की तैयारियों की समीक्षा की

    17 सितम्बर से 17 अक्टूबर तक चलेगा अभियान, जनभागीदारी और जनसेवा को दिया जाएगा व्यापक स्वरूप

    रायपुर. 
     उप मुख्यमंत्री तथा नगरीय प्रशासन एवं विकास मंत्री अरुण साव ने आज प्रदेश के सभी नगर निगमों के महापौरों, आयुक्तों, नगर पालिकाओं एवं नगर पंचायतों के अध्यक्षों और मुख्य नगर पालिका अधिकारियों की बैठक लेकर सेवा संकल्प अभियान की तैयारियों की समीक्षा की। उन्होंने नवा रायपुर स्थित विश्राम भवन में आयोजित वर्चुअल बैठक में अभियान के दौरान संचालित की जाने वाली विभिन्न गतिविधियों, विभागीय समन्वय, जनभागीदारी और प्रचार-प्रसार को लेकर आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। आगामी 17 सितम्बर से 17 अक्टूबर तक देशव्यापी सेवा संकल्प अभियान का आयोजन किया जा रहा है। नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग के प्रमुख सचिव सोनमणि बोरा और सूडा के मुख्य कार्यपालन अधिकारी सुमीत अग्रवाल अहमदाबाद से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से बैठक में जुड़े। 

    उप मुख्यमंत्री साव ने समीक्षा बैठक में सभी नगरीय निकायों को ‘सेवा संकल्प अभियान’ को जनभागीदारी का व्यापक स्वरूप देने के निर्देश दिए। उन्होंने जनसेवा के प्रति आभार एवं जनकल्याणकारी योजनाओं की जानकारी प्रत्येक नागरिक तक पहुंचाने और विकसित भारत-2047 के संकल्प को जन-जन से जोड़ने के लिए अभियान की गतिविधियों को प्रभावी ढंग से संचालित करने को कहा। उन्होंने अभियान में समाज के सभी वर्गों की सक्रिय सहभागिता सुनिश्चित करने पर जोर दिया।

    साव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी देश के विकास और जनकल्याण के लिए विगत 25 वर्षो से अनवरत कार्य कर रहे हैं। उनके नेतृत्व में भारत की वैश्विक भूमिका मजबूत हुई है। साव ने कहा कि आज चीन भी भारत के साथ काम करना चाहता है और रूस के साथ भारत की मित्रता और मजबूत हुई है। उन्होंने कहा कि देश की विकास यात्रा को आगे बढ़ाने में जनभागीदारी की महत्वपूर्ण भूमिका है और ‘सेवा संकल्प अभियान’ इसी भावना को जन-जन तक पहुंचाने का माध्यम है।

    उप मुख्यमंत्री साव ने अभियान के दौरान किए जाने वाले कार्यों के प्रभावी दस्तावेजीकरण पर विशेष जोर दिया। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि विभिन्न गतिविधियों और जनभागीदारी से जुड़े कार्यों का व्यवस्थित रूप से दस्तावेजीकरण किया जाए। हर आयोजन की फोटो और वीडियो रिकॉर्डिंग कराई जाए तथा उनकी रील तैयार कर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर साझा की जाए, ताकि अभियान की गतिविधियों और उनके प्रभाव की जानकारी अधिक से अधिक लोगों तक पहुंच सके।

    उन्होंने कहा कि योजनाओं और अभियानों से नागरिकों के जीवन में आए वास्तविक बदलावों को भी प्रमुखता से सामने लाया जाए। इसके लिए लाभार्थियों की वास्तविक कहानियों, गतिविधियों और उपलब्धियों को रिकॉर्ड कर डिजिटल माध्यमों से प्रसारित करने पर ध्यान दिया जाए। बैठक में अभियान के अंतर्गत प्रस्तावित विभिन्न गतिविधियों की तैयारियों की समीक्षा की गई। इनमें ‘आशीर्वाद का दीया’, ‘25 करोड़ बच्चों के सपनों का भारत’, ‘नमो सेवा गाथा’, ‘आंगन का उत्सव’, ‘सेवा की कहानी’, ‘विकसित भारत संकल्प यात्रा’, ‘सेवा ज्योति यात्रा’, ‘सेवा—मेरा योगदान’, ‘सेवा सेतु अभियान’, ‘रंगोली राष्ट्र’ और ‘राष्ट्रीय इनोवेशन चैलेंज’ सहित विभिन्न गतिविधियां शामिल हैं। अभियान का समापन 17 अक्टूबर को ‘जनसेवक महाकुंभ—पंचायत से पार्लियामेंट’ के साथ प्रस्तावित है।

    साव ने विशेष रूप से ‘सेवा की कहानी’ के तहत वास्तविक लाभार्थियों की प्रेरणादायी कहानियों को सामने लाने और सोशल मीडिया के माध्यम से व्यापक स्तर पर प्रचारित करने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि जनकल्याणकारी योजनाओं से लोगों के जीवन में आए वास्तविक बदलावों को सामने लाकर अन्य लोगों को भी प्रेरित किया जाना चाहिए। उन्होंने ‘सेवा सेतु अभियान’ के माध्यम से नागरिकों को विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं से जोड़ने तथा योजनाओं की जानकारी और सुविधाएं एक स्थान पर उपलब्ध कराने की दिशा में प्रभावी कार्य करने के निर्देश दिए।

    बैठक में ‘स्वच्छता ही सेवा–2026’ से जुड़ी गतिविधियों को भी जनभागीदारी के साथ संचालित करने पर विशेष जोर दिया गया। साव ने कहा कि स्वच्छता को व्यापक जन आंदोलन का स्वरूप दिया जाए। इसके लिए नगरीय निकायों के जनप्रतिनिधियों को अपनी अगुवाई में नागरिकों, स्वयंसेवी संस्थाओं, विद्यार्थियों, युवाओं, महिलाओं और सामाजिक संगठनों को सक्रिय रूप से जोड़ने का आह्वान किया जाएगा।

    साव ने बैठक में अधिकारियों को निर्देशित किया कि ऐसे स्थानों और क्षेत्रों को चिन्हित कर विशेष स्वच्छता अभियान चलाए जाएं जहां स्वच्छता के क्षेत्र में प्रभावी परिणाम दिखाई दे सकें। उन्होंने अभियान के दौरान किए गए कार्यों की पहले और बाद की स्थिति दर्ज करने के निर्देश भी दिए, ताकि स्वच्छता प्रयासों से हुए वास्तविक बदलावों को सामने लाया जा सके।

    उप मुख्यमंत्री ने अभियान की गतिविधियों की नियमित निगरानी, समयबद्ध क्रियान्वयन और बेहतर विभागीय समन्वय सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि ‘सेवा संकल्प अभियान’ सेवा की भावना, जनभागीदारी और विकास के संकल्प को जमीनी बदलाव से जोड़ने का माध्यम बने। नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग के संचालक नीलेशकुमार क्षीरसागर और अपर संचालक पुलक भट्टाचार्य भी उप मुख्यमंत्री के साथ समीक्षा बैठक में सर्किट हाउस में मौजूद थे।

  • पीएससी परीक्षाओं में गड़बड़ी का आरोप, कॉपियां सार्वजनिक करने की मांग

    पीएससी परीक्षाओं में गड़बड़ी का आरोप, कॉपियां सार्वजनिक करने की मांग

    रायपुर

    कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव एवं पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने केंद्र सरकार पर हमला बोला है. भूपेश बघेल ने कहा कि केंद्र सरकार ने हसदेव अरण्य क्षेत्र में तारा कोल ब्लॉक की नीलामी करके आदिवासियों का जीवन आधार खत्म कर दिया. हसदेव, बांगो बांध इस इलाके का जीवनदायिनी है. यहां पर यदि उत्खनन होता है तो इस क्षेत्र में लाखों पेड़ काटे जायेंगे. हमारी सरकार ने लेमरू एलीफेंट अभ्यारण्य के लिए 1950 वर्ग किमी क्षेत्र को संरक्षित किया था. ये भाजपा की साय सरकार ने खुद केंद्र को पत्र लिख कर तारा कोल ब्लॉक की नीलामी को कहा है. एक आदिवासी मुख्यमंत्री होकर आदिवासियों और जंगल का नहीं बल्कि के हितों के खातिर काम कर रहे हैं.

    जनता के ठग रही भाजपा

    कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव एवं पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा कि हसदेव अरण्य क्षेत्र के तारा कोल ब्लॉक की नीलामी के लिए साय सरकार ने कोयला मंत्रालय को पत्र लिखा था.यह पत्र 11 दिसंबर 2025 को साय सरकार ने लिखा था.हमारी सरकार ने 23 जून 2023 को तारा सहित 9 कोल ब्लाकों को नीलामी से अलग रखने के लिए पत्र लिखा था. भाजपा बताए कि उनकी सरकार ने तारा कोल ब्लॉक नीलामी के लिए अनुशंसा क्यों किया था? कांग्रेस की सरकार के समय 26 जुलाई 2022 को छत्तीसगढ़ विधानसभा ने सर्वसम्मति से एक प्रस्ताव पारित कर मांग की थी कि हसदेव-अरण्य में अब किसी भी कोल ब्लॉक का आवंटन या नीलामी न की जाए.16 जुलाई 2023 को कांग्रेस सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में एक हलफनामा दाखिल कर स्पष्ट रूप से कहा था कि हसदेव-अरण्य में किसी भी नई खदान के आवंटन या विकास की कोई आवश्यकता नहीं है. 19 अक्टूबर 2023 को केंद्रीय कोयला मंत्रालय ने तारा सहित 40 कोल ब्लॉक्स को नीलामी प्रक्रिया से वास्तव में डी-नोटिफाई कर दिया था.

    जंगल लुटा दिया

    भूपेश बघेल ने कहा कि तारा कोल ब्लाक लगभग 5000 एकड़ क्षेत्र में फैला है. जिसमें से 4000 एकड़ से अधिक घना जंगल है. इसके लिए 10 लाख से अधिक पेड़ों को पूरी तरह काट दिया जाएगा.लेमरू एलीफेंट रिजर्व के चारों ओर खनन होगी, जिससे भारत के राष्ट्रीय धरोहर पशु हाथी के आवाजाही के रास्ते पर गंभीर असर पड़ेगा, जबकि हाथियों की संख्या में कमी का संकट पहले से ही बना हुआ है.कई अन्य प्रजातियां भी इससे और अधिक खतरे में पड़ जाएंगी.

    हसदेव अरण्य वन क्षेत्र के तारा कोल ब्लाक की नीलामी केंद्र सरकार के द्वारा की गयी है.इस नीलामी में तारा कोल ब्लॉक CG Syn-Gas and Chemicals Limited नाम की कंपनी को मिला है जो कि अडानी इंटरप्राइजेस लि. की सहयोगी कंपनी मून्दड़ा सिनर्जी लिमिटेड की सब्सिडियरी कंपनी है. भाजपा की सरकार राज्य में बनने के बाद छत्तीसगढ़ के जल, जंगल, जमीन को अडानी पर लुटाया जा रहा है- भूपेश बघेल, पूर्व सीएम छग

    2024 और 2025 के पीएससी घोटाले की जांच कौन करेगा

    कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव एवं पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा कि 2024 की परीक्षा में सही उत्तर लिखने वाले और गलत उत्तर लिखने वाले को बराबर नंबर तो कही पर गलत उत्तर वाले को ज्यादा नंबर तथा सही वाले को कम नंबर दिया गया. छात्रों की उत्तर पुस्तिकाएं जो सामने आई हैं. उससे गंभीर गड़बड़ियां सामने आई हैं. छत्तीसगढ़ के विधानसभा चुनाव 2023 के पहले भाजपा ने युवाओं से वादा किया था कि उनकी सरकार बनने पर यूपीएससी की तर्ज पर पीएससी की परीक्षा करवाएंगे.लेकिन पिछले 2 सालों से छत्तीसगढ़ लोकसेवा आयोग की परीक्षाओं में गड़बड़ी की जा रही है.

    न्यूनतम नंबर लाने का आयोग दावा

    भूपेश बघेल ने कहा कि 2025 की पीएससी परीक्षा में 2025 में पीएससी के द्वारा कुल 265 पद निकाला गया. मुख्य परीक्षा में कुल पद के तीन गुना लोग उत्तीर्ण होकर साक्षात्कार में आते 265×3 = 795 इंटरव्यू में आना चाहिए. 608 लोग ही उत्तीर्ण होकर इंटरव्यू में पहुंचे. इनका तर्क है कि 187 बच्चे न्यूनतम नंबर नहीं ला पाये. आयोग साबित करे कि 187 बच्चे न्यूनतम नंबर नहीं लाये. बच्चों का दावा है कि हमारा न्यूनतम नंबर तो आया ही होगा. आयोग इंटरव्यू के पहले सभी बच्चों को कॉपी उपलब्ध कराए. 2024 की मुख्य परीक्षा में कापी जांचने में गड़बड़ी हुई है, तो 2025 में गड़बड़ी नहीं हुई होगी, इसका क्या गांरटी है?

    पिछली बार 2024 में पीएससी अध्यक्ष रीता सांडिल्य के रहते गड़बड़ी हुई थी, 2025 में उनकी ही अध्यक्षता में गड़बड़ी हुई. 2024 में पीएससी परीक्षा में उत्तर-पुस्तिका की जांच अपात्र स्कूली शिक्षकों (शिक्षक एलबी) से कराई गई, यही नहीं मूल्यांकनकर्ताओं का नाम और नंबर भी सार्वजनिक हुआ था, जो बेहद आपत्तिजनक है. भर्ती परीक्षा की गोपनियता को भंग करने वालों को सजा देने के बजाय पुरस्कृत करते हुए रीता सांडिल्य को पीएससी के कार्यकारी अध्यक्ष से प्रमोट करते हुए अध्यक्ष बना दिया गया है.बेहद स्पष्ट है कि इन गड़बड़ियों को सरकार का संरक्षण है – भूपेश बघेल, पूर्व सीएम छग

    उत्तर पुस्तिकाएं उपलब्ध कराने की मांग
    कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव एवं पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा कि सरकार मामले के निराकरण तक इंटरव्यू स्थगित करे. अभ्यर्थियों की मांग के अनुसार सभी का उत्तर-पुस्तिकायें साक्षात्कार के पहले सार्वजनिक किया जाए ताकि सभी अभ्यर्थियों को यह पता लगे कि उनकी कॉपियां सही जांची गयी है. जो लोग इंटरव्यू के लिए चयनित हुए हैं उनके अतिरिक्त शेष सभी अभ्यर्थियों की कापियां अभ्यर्थियों को निःशुल्क उपलब्ध कराया जाए. उत्तर-पुस्तिका जांचने के लिए मूल्यांकनकर्ताओं का मानदंड तय किया जाए तथा पीएससी मुख्य परीक्षा के लिए मॉडल उत्तर जारी करे.

  • राजधानी रायपुर में गणेश उत्सव के दौरान 25 लाख तक का कारोबार

    राजधानी रायपुर में गणेश उत्सव के दौरान 25 लाख तक का कारोबार

    रायपुर

    सितंबर से रायपुर सहित पूरे देश में गणेश उत्सव की शुरुआत हो गई है. अनंत चतुर्दशी के दिन भगवान गणपति को विसर्जित किया जाएगा. ऐसे में गणेश उत्सव के दौरान राजधानी रायपुर के फूल बाजार में भी फूलों के दाम आसमान छूने लगे हैं. गणेश उत्सव की वजह से कई प्रकार के फूलों की डिमांड बढ़ गई है, लेकिन बारिश और सप्लाई कम होने के कारण फूलों के दाम में लगभग 50 से 60% तक की वृद्धि हुई है. इसे लेकर ईटीवी भारत ने फूल बाजार का जायजा लिया. आइए जानते हैं फुल विक्रेता इस बार बढ़े हुए दामों को लेकर क्या कह रहे हैं.

    त्यौहारों के कारण बढ़े फूलों के दाम
    फूल दुकानदार सोनू यादव ने बताया कि गणेश उत्सव के साथ ही तीजा और आने वाले दिनों में विश्वकर्मा पूजा भी है. इस दौरान फूलों की डिमांड बढ़ गई है, लेकिन बारिश की वजह से आवक कमजोर है. जिसकी वजह से फूल के दाम में लगभग 50 से 60% की वृद्धि हुई है. पूरे भारतवर्ष में बारिश हुई एक कारण है. इससे छत्तीसगढ़ भी अछूता नहीं है. फूलों की सप्लाई बेंगलुरु, हैदराबाद, कोलकाता, नागपुर जैसे शहरों से होती है.इन शहरों में भी फूलों के दाम बढ़े हुए हैं.

    फूल दुकानदार बताया कि फूलों में महंगाई की देखने को मिल रही है. बारिश की वजह से फूलों की सप्लाई प्रभावित हुई है. इसके साथ ही गणेश उत्सव के नाम से फूलों की डिमांड बढ़ गई है. फूलों के दाम में लगभग 60 से 70% तक की वृद्धि हुई है. एक गेंदा फूल की माला पहले 30 से 35 रुपए में मिलता था, लेकिन आज उसकी कीमत बढ़कर 70 रुपए तक जा पहुंची है. 60 रुपए में जो फूल माला पहले बिकती थी. उसके दाम आज 100 रुपए पर पहुंच गए हैं. गणेश उत्सव को देखते हुए खासतौर पर दूर्वा की माला मंगाई जा रही है. दुर्वा की माला भगवान गणपति को अत्यंत प्रिय है. इसके सा थ ही गणेश उत्सव को देखते हुए जूही के फूल भी दुकानदार मंगा रहे हैं.

    जूही के फूल कोलकाता से मंगवाएं जा रहे हैं. फूलों की माला में गुलाब, गेंदा, सेवंती, रजनीगंधा, जूही के साथ ही मोती माला की बिक्री बढ़ गई है. गणेश उत्सव में डेकोरेशन के लिए पत्तियों की माला भी दुकानदार मंगा रहे हैं. इस पत्ती की माला को लोग 11 दिनों तक गणेश उत्सव में लगाकर रख सकते है. बारिश की वजह से फूलों का उत्पादन कम होने के कारण अचानक से फूलों के दाम बढ़ गए हैं. बारिश की वजह से कुछ फूल खराब भी आ रहे हैं

    1 करोड़ से ज्यादा का कारोबार

    एक अनुमान के मुताबिक पूरे प्रदेश में गणेश उत्सव के दौरान लगभग 1 करोड़ रुपए के फूलों कि बिक्री होती है. बात अगर राजधानी रायपुर की करें तो गणेश उत्सव के दौरान लगभग 20 से 25 लाख रुपए तक की फूलों की बिक्री होती है. रायपुर में फूलों की सप्लाई बेंगलुरु, पुणे, दिल्ली, कोलकाता, नागपुर के साथ ही कुछ चुनिंदा फूलों की सप्लाई थाईलैंड से होती है.

  • कपिल देव ने की छत्तीसगढ़ की खेल नीतियों की सराहना

    कपिल देव ने की छत्तीसगढ़ की खेल नीतियों की सराहना

    रायपुर
     छत्तीसगढ़ अब देश के प्रमुख स्पोर्ट्स हब के रूप में अपनी मजबूत पहचान बना रहा है। नवा रायपुर स्थित फेयरवे गोल्फ एंड कंट्री क्लब रिजॉर्ट में मंगलवार को आयोजित प्रतिष्ठित ‘डीपी वर्ल्ड नवा रायपुर ओपन 2026’ के ट्रॉफी अनावरण समारोह में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने शिरकत की। 1983 के क्रिकेट विश्व कप विजेता और 'प्रोफेशनल गोल्फ टूर ऑफ इंडिया' (PGTI) के अध्यक्ष कपिल देव की गरिमामयी उपस्थिति में हुए इस आयोजन में मुख्यमंत्री ने स्वयं गोल्फ कोर्स पर शॉट लगाकर खिलाड़ियों का उत्साहवर्धन किया।

    मुख्यमंत्री साय ने विश्वास व्यक्त किया कि नवा रायपुर जल्द ही दिल्ली, बेंगलुरु और कोलकाता की तर्ज पर देश-दुनिया का प्रमुख गोल्फ डेस्टिनेशन बनकर उभरेगा।

    प्रतियोगिता के महत्व को रेखांकित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ के लिए यह गर्व की बात है कि यहाँ इतने बड़े स्तर का प्रोफेशनल गोल्फ टूर्नामेंट आयोजित हो रहा है। इस प्रतिष्ठित टूर्नामेंट में भारत सहित दुनिया भर के 132 प्रोफेशनल गोल्फर भाग ले रहे हैं, जिनमें 18 विदेशी खिलाड़ी भी शामिल हैं।

    सीएम साय ने अपनी यादें साझा करते हुए कहा, "एक दौर था जब गोल्फ केवल फिल्मों में दिखता था या उद्योगपतियों तक सीमित माना जाता था, लेकिन आज छत्तीसगढ़ इतने बड़े अंतरराष्ट्रीय स्तर के टूर्नामेंट की मेजबानी कर रहा है।"

    देश-विदेश से आए गोल्फरों

    मुख्यमंत्री ने देश-विदेश से आए गोल्फरों का छत्तीसगढ़ की पावन धरा पर आत्मीय स्वागत किया और उन्हें खेल के साथ-साथ राज्य की प्राकृतिक व सांस्कृतिक धरोहर को देखने का न्योता दिया। उन्होंने खिलाड़ियों से भारत के नियाग्रा कहे जाने वाले बस्तर के चित्रकोट जलप्रपात और सरगुजा के वनों व संस्कृति का भ्रमण करने का आग्रह किया।

    बस्तर में बदला माहौल:

    सीएम साय ने कहा कि सुरक्षा बलों के साहस और शासन की नीतियों से बस्तर में शांति और विकास का नया सवेरा हुआ है, जिसकी मिसाल बस्तर ओलंपिक में युवाओं की व्यापक भागीदारी है।

    PGTI के अध्यक्ष कपिल देव ने छत्तीसगढ़ सरकार और मुख्यमंत्री साय की खेल-समर्थक नीतियों की सराहना की।कपिल देव ने इच्छा जताई कि इस टूर्नामेंट को छत्तीसगढ़ के वार्षिक स्पोर्ट्स कैलेंडर में स्थायी स्थान दिया जाए, ताकि अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी पहले से अपना शेड्यूल तय कर सकें। कपिल देव ने कहा कि छत्तीसगढ़ का वातावरण और आतिथ्य सत्कार बेहद शानदार है और आने वाले समय में राज्य देश के शीर्ष गोल्फ केंद्रों में शुमार होगा।

     

  • 17 सितंबर से प्रदेशभर में चलेगा सेवा अभियान

    17 सितंबर से प्रदेशभर में चलेगा सेवा अभियान

    रायपुर

    तेलीबांधा मरीन ड्राइव की सड़क किनारे मिट्टी के दीये बेच रही मीरा के लिए मंगलवार का दिन आम दिनों से बिल्कुल अलग था. वह रोज की तरह अपने छोटे से पसरे पर दीये सजाकर ग्राहकों का इंतजार कर रही थी. तभी अचानक मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय का काफिला उसके पसरे के पास आकर रुका. मुख्यमंत्री खुद उसके पास पहुंचे, मिट्टी के दीयों को देखा और मीरा से बातचीत की.

    सीएम ने इस दौरान सेवा संकल्प अभियान के अंतर्गत आयोजित होने वाले आशीर्वाद का दीया कार्यक्रम के लिए मीरा से एक मिट्टी का दीया खरीदा और उसे एक हजार रुपए दिए. मुख्यमंत्री का यह सहज अंदाज सिर्फ एक दीये की खरीद तक सीमित नहीं रहा, बल्कि मेहनत से अपना परिवार चलाने वाली मीरा के श्रम, स्वाभिमान और स्वावलंबन के सम्मान का भावपूर्ण संदेश भी दे गया.

    सीएम ने अचानक रुकवाया अपना काफिला

    मुख्यमंत्री साय का सड़क किनारे लगे छोटे से पसरे पर अचानक पहुंचना आसपास मौजूद लोगों के लिए भी सुखद आश्चर्य का पल बन गया. बिना किसी औपचारिकता के मुख्यमंत्री ने मीरा से उसके कामकाज और परिवार का हालचाल जाना. मिट्टी के दीयों के बीच हुई यह छोटी-सी मुलाकात उस बड़े भाव को सामने ले आई, जिसमें समाज के हर मेहनतकश व्यक्ति के श्रम और आत्मसम्मान का सम्मान शामिल है. मुख्यमंत्री का सहज व्यवहार लोगों के बीच चर्चा का विषय बना और मीरा के लिए यह मुलाकात जीवन की यादगार घटनाओं में शामिल हो गया.

    बातचीत के दौरान मुख्यमंत्री साय ने मीरा से पूछा कि उसे केंद्र और राज्य सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ मिल रहा है या नहीं. मीरा ने बताया कि प्रधानमंत्री जनधन योजना के तहत उसका बैंक खाता खुल चुका है. उसने मुख्यमंत्री को यह भी बताया कि उसे राज्य सरकार की महतारी वंदन योजना के अंतर्गत हर महीने 1 हजार की राशि प्राप्त हो रही है. मुख्यमंत्री ने कहा, सरकार की योजनाएं तभी सार्थक होती हैं, जब उनका लाभ जरूरतमंद व्यक्ति तक सीधे पहुंचे, उसे आर्थिक संबल मिले और उसके जीवन को बेहतर बनाने में सहायता हो. शासन की प्राथमिकता है कि जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ पात्र हितग्राहियों तक पूरी सहजता और पारदर्शिता के साथ पहुंचे.

    जनधन से जुड़ा बैंक खाता, महतारी वंदन से मिला आर्थिक संबल

    मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में प्रधानमंत्री जनधन योजना ने गरीब, वंचित और जरूरतमंद परिवारों को बैंकिंग व्यवस्था से जोड़कर आर्थिक समावेशन का मजबूत आधार तैयार किया है. बैंकिंग व्यवस्था से जुड़ने के कारण आज विभिन्न योजनाओं की राशि सीधे हितग्राहियों के खातों तक पहुंच रही है. उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ में महतारी वंदन योजना के माध्यम से प्रदेश की माताओं और बहनों को प्रतिमाह 1 हजार रुपए की आर्थिक सहायता प्रदान की जा रही है. यह राशि उनके छोटे-बड़े दैनिक खर्चों में सहयोग देने के साथ-साथ महिलाओं में आर्थिक आत्मविश्वास बढ़ाने में भी मददगार है.

    सीएम ने मीरा के काम की तारीफ की

    मुख्यमंत्री ने कहा कि सड़क किनारे पसरा लगाने वाले छोटे विक्रेता हों, कुम्हार हों, शिल्पकार हों अथवा स्थानीय उत्पाद तैयार करने वाली हमारी माताएं और बहनें हों, सभी के परिश्रम में आत्मनिर्भर छत्तीसगढ़ की शक्ति निहित है. अपने हुनर और मेहनत से आजीविका अर्जित करने वाले लोगों को प्रोत्साहित करना हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है. सीएम ने कहा कि स्थानीय उत्पादों को अपनाना केवल किसी वस्तु की खरीद नहीं है. उसके पीछे किसी परिवार का श्रम, किसी कारीगर का हुनर और किसी छोटे व्यवसायी के आत्मसम्मान से जुड़ी आजीविका होती है. जब हम स्थानीय विक्रेताओं और कारीगरों से सामान खरीदते हैं, तो हमारा छोटा-सा प्रयास उनके परिवार और उनकी आजीविका को संबल देने का माध्यम बन जाता है.

    मीरा के हाथों का दीया अब बनेगा ‘आशीर्वाद का दीया’

    मीरा के पसरे से मुख्यमंत्री साय द्वारा खरीदा गया मिट्टी का दीया अब एक विशेष अभियान का हिस्सा बनेगा. यह दीया ‘सेवा संकल्प अभियान’ के अंतर्गत आयोजित होने वाले आशीर्वाद का दीया कार्यक्रम में शामिल किया जाएगा. कार्यक्रम के माध्यम से सेवा, जनकल्याण और विकास के प्रति सामूहिक संकल्प को जनभागीदारी से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है.

    सीएम साय ने कहा कि हमारी संस्कृति में दीया केवल प्रकाश का माध्यम नहीं, बल्कि आशा और सकारात्मक संकल्प का प्रतीक है. मिट्टी का एक छोटा-सा दीया जब जलता है तो अपने आसपास के अंधकार को दूर करता है. उसी तरह समाज का प्रत्येक व्यक्ति जब सेवा का एक छोटा-सा संकल्प लेकर आगे बढ़ता है, तो सामूहिक प्रयास से बड़े और सकारात्मक परिवर्तन का मार्ग प्रशस्त होता है.

    'एक दीया, जो सेवा और जनभागीदारी का संदेश देगा'

    मुख्यमंत्री ने कहा कि आशीर्वाद का दीया सेवा और विकास के प्रति हमारे संकल्प तथा जनभागीदारी के सामर्थ्य का प्रतीक है. प्रदेश के नागरिक जब इस भावना से जुड़ेंगे, तो सेवा का यह संकल्प घर-घर और जन-जन तक पहुंचेगा. मीरा के छोटे से पसरे से खरीदा गया यह दीया इसलिए भी खास है, क्योंकि इसमें एक साथ कई भाव जुड़े हैं. सीएम ने कहा, इस दीये में एक मेहनतकश महिला के श्रम का सम्मान, स्थानीय उत्पाद को प्रोत्साहन, जनकल्याणकारी योजनाओं की जमीनी पहुंच और समाज को सेवा के लिए प्रेरित करने का संकल्प जुड़ा है.

    17 सितंबर से 17 अक्टूबर तक चलेगा सेवा संकल्प अभियान

    मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने सार्वजनिक जीवन के 25 वर्ष राष्ट्र और जनसेवा को समर्पित किए हैं. प्रधानमंत्री के जन्मदिवस 17 सितंबर से 17 अक्टूबर तक सेवा संकल्प अभियान आयोजित किया जा रहा है. यह अभियान सेवा, सुशासन, गरीब कल्याण और विकास के प्रति प्रतिबद्धता को जनभागीदारी के माध्यम से और मजबूत करने का अवसर है. मुख्यमंत्री ने प्रदेशवासियों से इस अभियान से पूरे उत्साह और आत्मीयता के साथ जुड़ने का आह्वान किया. उन्होंने लोगों से अपने गांव, शहर और आसपास स्वच्छता के कार्यों में सहभागी बनने, पर्यावरण संरक्षण के लिए आगे आने, जरूरतमंदों की सहायता करने और अपनी क्षमता के अनुरूप जनसेवा का कोई न कोई संकल्प लेने की अपील की.

    'सेवा के लिए बड़ा काम नहीं, छोटी-सी पहल भी काफी'

    मुख्यमंत्री ने कहा कि सेवा का कोई कार्य छोटा नहीं होता, किसी जरूरतमंद की सहायता करना, अपने आसपास स्वच्छता रखना, एक पौधा लगाकर उसकी देखभाल करना, स्थानीय कारीगर से कोई वस्तु खरीदना जनसेवा का महत्वपूर्ण माध्यम बन सकता है.

  • पर्यटन के नक्शे पर छत्तीसगढ़ की बड़ी छलांग, IATO सम्मेलन में मिला ‘Best Emerging Tourist Destination’ सम्मान

    पर्यटन के नक्शे पर छत्तीसगढ़ की बड़ी छलांग, IATO सम्मेलन में मिला ‘Best Emerging Tourist Destination’ सम्मान

    रायपुर 

    छत्तीसगढ़ ने एक बार फिर राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पर्यटन क्षमता का लोहा मनवाया है. विशाखापट्टनम में आयोजित इंडियन एसोसिएशन ऑफ टूर ऑपरेटर्स (IATO) के 41वें वार्षिक सम्मेलन में प्रदेश की प्राकृतिक सुंदरता, जनजातीय संस्कृति, ऐतिहासिक धरोहरों और धार्मिक पर्यटन स्थलों को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया. इस दौरान छत्तीसगढ़ को ‘Best Emerging Tourist Destination' सम्मान से नवाजा. यह उपलब्धि न केवल प्रदेश के बढ़ते पर्यटन विकास की पहचान है, बल्कि देश और दुनिया के पर्यटकों के बीच छत्तीसगढ़ की मजबूत होती मौजूदगी का भी संकेत है। 

    विशाखापट्टनम के नोवोटेल वरुण बीच में 10 से 13 सितंबर तक आयोजित चार दिवसीय सम्मेलन में देशभर के पर्यटन विशेषज्ञ, ट्रैवल एजेंट्स, टूर ऑपरेटर्स और पर्यटन विभागों के प्रतिनिधि शामिल हुए. इस दौरान छत्तीसगढ़ ने अपनी पर्यटन विविधता को प्रमुखता से सामने रखा. सम्मेलन का मुख्य विषय भारत को वैश्विक पर्यटन का प्रमुख केंद्र बनाने पर केंद्रित रहा, जिसमें नए पर्यटन स्थलों और संभावनाओं पर विस्तृत चर्चा हुई। 

    पर्यटन विकास के विजन को मिली नई पहचान
    सम्मेलन के विभिन्न सत्रों में छत्तीसगढ़ के पर्यटन विकास की योजनाओं और संभावनाओं को विस्तार से प्रस्तुत किया. प्रदेश के प्राकृतिक स्थलों, ऐतिहासिक धरोहरों, धार्मिक केंद्रों और जनजातीय संस्कृति को पर्यटन की दृष्टि से महत्वपूर्ण बताते हुए इसकी व्यापक संभावनाओं पर प्रकाश डाला. वीडियो प्रेजेंटेशन के जरिए प्रदेश की खूबसूरती और विविधता को देशभर से आए प्रतिनिधियों तक पहुंचाया। 

    देशभर के टूर ऑपरेटर्स को दिया आमंत्रण
    सम्मेलन के दौरान ट्रैवल एजेंट्स और टूर ऑपरेटर्स को छत्तीसगढ़ को अपनी यात्रा योजनाओं में शामिल करने का आमंत्रण दिया. पर्यटन बोर्ड की ओर से प्रदेश में चल रही विभिन्न पर्यटन परियोजनाओं और भविष्य की योजनाओं की जानकारी भी साझा की गई. साथ ही यह बताया गया कि पर्यटन के माध्यम से स्थानीय समुदायों को रोजगार और आर्थिक अवसरों से जोड़ने का लगातार प्रयास किया जा रहा है। 

    केंद्रीय मंत्री समेत कई प्रमुख हस्तियां रहीं मौजूद
    सम्मेलन में केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री किंजरापु राम मोहन नायडू, आंध्र प्रदेश के पर्यटन मंत्री कंदुला दुर्गेश और विभिन्न राज्यों के पर्यटन विभागों के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे. छत्तीसगढ़ पर्यटन मंडल के अध्यक्ष नीलू शर्मा ने भी सम्मेलन में प्रदेश का प्रतिनिधित्व किया और राज्य की पर्यटन संभावनाओं को राष्ट्रीय स्तर पर मजबूती से रखा। 

    झरनों, जंगलों और संस्कृति की अनूठी पहचान
    छत्तीसगढ़ की पहचान केवल प्राकृतिक सौंदर्य तक सीमित नहीं है. बस्तर के जलप्रपात, घने जंगल, सिरपुर की ऐतिहासिक धरोहर, दंतेवाड़ा की धार्मिक आस्था और जनजातीय संस्कृति प्रदेश को एक विशिष्ट पर्यटन गंतव्य बनाती है. यही विविधता सम्मेलन में आकर्षण का केंद्र रही और इसे छत्तीसगढ़ की सबसे बड़ी ताकत बताया। 

    पर्यटन कारोबार को मिला बढ़ावा
    सम्मेलन के दौरान छत्तीसगढ़ टूरिज्म बोर्ड के पवेलियन में बड़ी संख्या में ट्रैवल एजेंट्स और टूर ऑपरेटर्स पहुंचे. यहां बी-टू-बी बैठकों के माध्यम से पर्यटन पैकेज, नए डेस्टिनेशन और व्यापारिक साझेदारी की संभावनाओं पर चर्चा हुई. इससे प्रदेश में पर्यटन निवेश और पर्यटकों की संख्या बढ़ाने की दिशा में नए अवसरों के द्वार खुलने की उम्मीद है। 

    प्रतिष्ठित सम्मान से बढ़ा प्रदेश का गौरव
    सम्मेलन के समापन अवसर पर छत्तीसगढ़ को ‘Best Emerging Tourist Destination' पुरस्कार से सम्मानित किया. यह सम्मान राज्य की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, पर्यटन क्षेत्र में किए जा रहे नवाचारों और सतत विकास के प्रयासों की मान्यता के रूप में देखा जा रहा है. इस उपलब्धि ने छत्तीसगढ़ को राष्ट्रीय पर्यटन मानचित्र पर और अधिक मजबूती से स्थापित किया है। 

    पर्यटन के लिए खुलेंगी नई संभावनाएं
    पर्यटन विशेषज्ञों का मानना है कि इस सम्मान और राष्ट्रीय मंच पर मिली पहचान से छत्तीसगढ़ में पर्यटन गतिविधियों को नई गति मिलेगी. इससे न केवल देश और विदेश से अधिक पर्यटक आकर्षित होंगे, बल्कि पर्यटन क्षेत्र में निवेश बढ़ने और स्थानीय लोगों के लिए रोजगार के अवसर सृजित होने की भी संभावना है। 

    नई ऊंचाइयों की ओर बढ़ता छत्तीसगढ़
    प्राकृतिक सौंदर्य, सांस्कृतिक विरासत, धार्मिक स्थलों, वन्यजीव संपदा और जनजातीय परंपराओं का अनूठा मेल छत्तीसगढ़ को देश के प्रमुख पर्यटन राज्यों की श्रेणी में लाने की क्षमता रखता है. राष्ट्रीय पर्यटन मंच पर मिली यह पहचान और ‘Best Emerging Tourist Destination' का सम्मान प्रदेश के पर्यटन क्षेत्र के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है, जो आने वाले समय में छत्तीसगढ़ को वैश्विक पर्यटन मानचित्र पर नई पहचान दिला सकता है। 

     

  • पीएम-जुगा के तहत जशपुर को बड़ी मंजूरी, जनजातीय पर्यटन के लिए बनेगा क्लस्टर होमस्टे

    पीएम-जुगा के तहत जशपुर को बड़ी मंजूरी, जनजातीय पर्यटन के लिए बनेगा क्लस्टर होमस्टे

    जशपुर में जनजातीय पर्यटन को बड़ी सौगात, पीएम-जुगा के तहत क्लस्टर होमस्टे परियोजना को मिली मंजूरी

    बगीचा-मयाली-जशपुर क्षेत्र के 6 जनजातीय गांवों में विकसित होंगे 30 होमस्टे, स्थानीय परिवारों को पर्यटन से मिलेगा सीधा रोजगार और आय के नए अवसर

    जनजातीय संस्कृति और स्थानीय आजीविका को पर्यटन से जोड़ना सरकार की प्राथमिकता-पर्यटन मंत्री राजेश अग्रवाल

    रायपुर
    छत्तीसगढ़ में जनजातीय पर्यटन को नई ऊंचाई देने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को पर्यटन से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल हुई है। प्रधानमंत्री जनजातीय उन्नत ग्राम अभियान (PM-JUGA) के अंतर्गत जशपुर जिले के बगीचा-मयाली-जशपुर क्लस्टर में क्लस्टर आधारित होमस्टे परियोजना को स्वीकृति प्रदान की गई है। इस परियोजना के माध्यम से जनजातीय अंचल के गांवों में पर्यटन की संभावनाओं को विकसित करने के साथ-साथ स्थानीय परिवारों को पर्यटन गतिविधियों से सीधे जोड़ने का प्रयास किया जाएगा।

    परियोजना के तहत किंकेल, कमतरा, डंगरी, महनई, सरुधाप और पंडरापाठ सहित 6 जनजातीय गांवों में कुल 30 नए होमस्टे विकसित किए जाएंगे। प्रत्येक गांव में 5 होमस्टे तैयार किए जाने का प्रस्ताव है। इस क्लस्टर के विकास पर लगभग 1.80 करोड़ रुपये व्यय प्रस्तावित है। इसमें होमस्टे निर्माण के साथ गांव स्तर पर आवश्यक सामुदायिक सुविधाओं के विकास का भी प्रावधान किया गया है।

    पर्यटक जशपुर को सिर्फ देखेंगे नहीं, यहां के जीवन को भी अनुभव करेंगे

    यह परियोजना पारंपरिक होटल आधारित पर्यटन से आगे बढ़कर कम्यूनिटी बेस्ड को प्रोत्साहित करेगी। होमस्टे के माध्यम से पर्यटकों को स्थानीय परिवारों के बीच रहकर जशपुर की जनजातीय संस्कृति, खान-पान, लोक परंपराओं, प्राकृतिक सौंदर्य और ग्रामीण जीवन को करीब से जानने और अनुभव करने का अवसर मिलेगा। इससे पर्यटन से होने वाली आय का सीधा लाभ स्थानीय परिवारों तक पहुंचेगा। स्थानीय स्तर पर रोजगार और स्वरोजगार के अवसर बढ़ने से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी।

    प्रस्तावित होमस्टे स्थानीय परिवेश और पर्यटकों की सुविधाओं को ध्यान में रखकर विकसित किए जाएंगे। इसके साथ ही प्रत्येक गांव में सामुदायिक स्तर की सुविधाओं के लिए 5 लाख रुपये तक के कार्य प्रस्तावित हैं। इन सुविधाओं से पर्यटकों को बेहतर अनुभव मिलने के साथ गांवों में सामूहिक उपयोग की आधारभूत सुविधाएं भी विकसित होंगी।

    प्राकृतिक और सांस्कृतिक पर्यटन स्थलों से जुड़ेगा होमस्टे क्लस्टर

    क्लस्टर का चयन क्षेत्र की पर्यटन क्षमता को ध्यान में रखते हुए किया गया है। प्रस्तावित गांव बगीचा और जशपुर नगर के साथ-साथ कैलाश गुफा, खुड़ियारानी गुफा, बादलखोल अभयारण्य, रानीदाह जलप्रपात, देशदेखा पहाड़, लोरोघाट सहित अनेक प्राकृतिक एवं सांस्कृतिक पर्यटन स्थलों के निकट स्थित हैं। होमस्टे सुविधा विकसित होने से पर्यटकों के लिए इन क्षेत्रों में ठहरने के बेहतर विकल्प उपलब्ध होंगे। इससे जशपुर में पर्यटकों की ठहरने की अवधि बढ़ने की संभावना है और पर्यटन गतिविधियों का लाभ स्थानीय स्तर पर व्यापक रूप से पहुंच सकेगा।

    गाइडिंग से लेकर स्थानीय व्यंजन और हस्तशिल्प तक बढ़ेंगे रोजगार के अवसर

    होमस्टे क्लस्टर का प्रभाव केवल आवास सुविधा तक सीमित नहीं रहेगा। परियोजना के माध्यम से स्थानीय युवाओं और महिलाओं को आतिथ्य सेवा, स्थानीय व्यंजन, पर्यटक गाइड, परिवहन, हस्तशिल्प तथा अन्य पर्यटन सेवाओं से जोड़ने की संभावनाएं विकसित होंगी। पर्यटकों की संख्या बढ़ने के साथ स्थानीय उत्पादों, पारंपरिक खान-पान और हस्तशिल्प की मांग में भी वृद्धि हो सकती है। इस प्रकार पर्यटन गतिविधियां गांवों में रोजगार और आय के अनेक सहायक अवसरों को जन्म देंगी।

    जनजातीय संस्कृति और स्थानीय आजीविका को पर्यटन से जोड़ना सरकार की प्राथमिकता-पर्यटन मंत्री  राजेश अग्रवाल

    पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल ने कहा कि छत्तीसगढ़ की जनजातीय और ग्रामीण संस्कृति प्रदेश की विशिष्ट पहचान है और सरकार का प्रयास है कि इस विरासत को संरक्षित करते हुए स्थानीय समुदायों को पर्यटन से प्रत्यक्ष आर्थिक लाभ मिले।

    उन्होंने कहा कि जशपुर प्राकृतिक सौंदर्य, समृद्ध जनजातीय संस्कृति और विशिष्ट लोक परंपराओं से समृद्ध क्षेत्र है। प्रधानमंत्री जनजातीय उन्नत ग्राम अभियान के तहत स्वीकृत यह क्लस्टर होमस्टे परियोजना पर्यटन को गांवों तक पहुंचाने और स्थानीय परिवारों को इसके आर्थिक लाभ से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। हमारा लक्ष्य है कि पर्यटक जब जशपुर आएं तो वे यहां की प्रकृति के साथ-साथ जनजातीय जीवन, संस्कृति और परंपराओं को भी करीब से अनुभव करें।

    मंत्री अग्रवाल ने कहा कि स्थानीय युवाओं और महिलाओं को पर्यटन से जुड़ी विभिन्न गतिविधियों में अवसर मिलने से रोजगार के नए रास्ते खुलेंगे। उन्होंने कहा कि स्थानीय समुदाय की भागीदारी से विकसित पर्यटन मॉडल न केवल ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करेगा, बल्कि जशपुर की सांस्कृतिक पहचान को देश-दुनिया तक पहुंचाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

    पर्यटन का लाभ गांव और स्थानीय परिवारों तक पहुंचे-सौमिल रंजन चौबे

    छत्तीसगढ़ टूरिज्म बोर्ड के प्रबंध संचालक सौमिल रंजन चौबे ने कहा कि पर्यटन का लाभ केवल बड़े पर्यटन स्थलों अथवा होटल व्यवसाय तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि गांव और स्थानीय परिवारों को भी इसका सीधा भागीदार बनाया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि जशपुर का यह होमस्टे क्लस्टर स्थानीय संस्कृति, प्रकृति और आजीविका को एक साथ जोड़ने वाला मॉडल बनेगा। इससे पर्यटकों को प्रामाणिक छत्तीसगढ़ी अनुभव मिलेगा और जनजातीय परिवारों के लिए स्थायी आय के नए अवसर विकसित होंगे।

    जशपुर को जनजातीय एवं ग्रामीण पर्यटन का प्रमुख केंद्र बनाने की दिशा में कदम

    क्लस्टर होमस्टे परियोजना के माध्यम से जशपुर में पर्यटन का विस्तार प्रमुख पर्यटन स्थलों से आगे आसपास के गांवों तक होने की उम्मीद है। इससे पर्यटकों को स्थानीय जीवन का अनुभव मिलेगा और ग्रामीण समुदाय पर्यटन मूल्य-श्रृंखला का सक्रिय हिस्सा बनेगा।

    प्राकृतिक सौंदर्य, जनजातीय संस्कृति, स्थानीय खान-पान, हस्तशिल्प और ग्रामीण जीवन को एक साथ जोड़ने वाली यह पहल आने वाले समय में जशपुर को छत्तीसगढ़ के प्रमुख जनजातीय एवं ग्रामीण पर्यटन गंतव्य के रूप में स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित होगी।