Category: छत्तीसगढ़

  • बस्तर में पर्यटन संभावनाओं का नया अध्याय

    बस्तर में पर्यटन संभावनाओं का नया अध्याय

    रायपुर

    छत्तीसगढ़ का बस्तर अब अपनी नई पहचान गढ़ रहा है। कभी नक्सलवाद और हिंसा के संदर्भ में चर्चा में रहने वाला यह क्षेत्र आज अपनी प्राकृतिक सौंदर्य, समृद्ध जनजातीय संस्कृति, कला, परंपराओं और आतिथ्य के कारण पर्यटन के नए केंद्र के रूप में उभर रहा है। बदलते वातावरण के साथ बस्तर में पर्यटन, इको-टूरिज्म, ग्रामीण पर्यटन और स्थानीय उद्यमिता के नए अवसर आकार ले रहे हैं।
        
    बस्तर की सबसे बड़ी विशेषता यहां प्रकृति और संस्कृति का अद्भुत संगम है। चित्रकोट और तीरथगढ़ जलप्रपात, कांगेर घाटी राष्ट्रीय उद्यान, कुटुमसर एवं कैलाश गुफाएं, मां दंतेश्वरी मंदिर, दलपत सागर और बस्तर पैलेस जैसे स्थल पर्यटकों को प्रकृति, रोमांच, अध्यात्म और इतिहास का अनूठा अनुभव देते हैं। यहां आने वाला पर्यटक केवल दर्शनीय स्थल नहीं देखता, बल्कि स्थानीय जीवन, पारंपरिक खान-पान, हस्तशिल्प, लोकनृत्य और संगीत से भी जुड़ता है। यही कारण है कि बस्तर को केवल पर्यटन स्थल के रूप में नहीं, बल्कि अनुभव आधारित पर्यटन के एक विशिष्ट क्षेत्र के रूप में विकसित किया जा रहा है। 

    कनेक्टिविटी से खुल रहे विकास के नए रास्ते

    पर्यटन के विस्तार के लिए बेहतर कनेक्टिविटी महत्वपूर्ण आधार है। बस्तर में सड़क, रेल और हवाई संपर्क को मजबूत करने के प्रयास पर्यटन की संभावनाओं को नई गति दे रहे हैं। ‘बस्तर 2.0’ ब्लूप्रिंट में 228 नई सड़कों और 267 पुलों के निर्माण का प्रस्ताव दूरस्थ क्षेत्रों तक संपर्क बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है।

    जगदलपुर स्थित मां दंतेश्वरी एयरपोर्ट बस्तर को देश के अन्य हिस्सों से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। वर्तमान में रायपुर और हैदराबाद के लिए हवाई संपर्क उपलब्ध है। वहीं रावघाट-जगदलपुर रेल परियोजना जैसी योजनाएं भविष्य में क्षेत्रीय कनेक्टिविटी को और मजबूत करने की संभावनाएं रखती हैं। बेहतर कनेक्टिविटी का लाभ केवल पर्यटकों को ही नहीं मिलेगा। इससे स्थानीय उत्पादों को बाजार, ग्रामीण क्षेत्रों को बेहतर संपर्क और युवाओं को पर्यटन आधारित रोजगार के नए अवसर मिल सकते हैं।

    होमस्टे से गांवों तक पहुंचेगा पर्यटन का लाभ

    बस्तर में ग्रामीण और जनजातीय होमस्टे पर्यटन विकास की महत्वपूर्ण कड़ी बन है। छत्तीसगढ़ होमस्टे नीति 2025-30 के माध्यम से पर्यटकों को स्थानीय परिवारों के साथ रहकर ग्रामीण जीवन, जनजातीय संस्कृति, स्थानीय कला, हस्तशिल्प और पारंपरिक खान-पान का अनुभव देने की दिशा में प्रयास किए जा रहे हैं।

    होमस्टे की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि पर्यटन का आर्थिक लाभ सीधे स्थानीय परिवारों तक पहुंच रहा है। पर्यटकों के ठहरने के साथ भोजन, स्थानीय गाइड, परिवहन, हस्तशिल्प और सांस्कृतिक गतिविधियों के माध्यम से आसपास के अन्य परिवारों के लिए भी आय के अवसर बन रहे हैं।

    बस्तर में नए कमरे के निर्माण पर प्रति कमरा 1 लाख रुपये और पूर्व से निर्मित कमरे के नवीनीकरण पर प्रति कमरा 50 हजार रुपये की सहायता का प्रावधान है। न्यूनतम एक से अधिकतम नौ कमरों तक सहायता की व्यवस्था से ग्रामीण परिवार अपनी क्षमता के अनुसार पर्यटन गतिविधियों से जुड़ सकते हैं। वर्तमान में 85 हितग्राहियों को अनुदान हेतु बैंको को प्रस्ताव भेजी जा चुका है तथा 27 होमस्टे पूर्व से छत्तीसगढ़ पर्यटन बोर्ड के साथ पंजीकृत हैं। 

    संस्कृति बनी पर्यटन की सबसे बड़ी ताकत

    बस्तर की जनजातीय संस्कृति उसकी सबसे बड़ी विशिष्टताओं में शामिल है। बेलमेटल और धातु शिल्प, लकड़ी एवं बांस की कला, पारंपरिक आभूषण, नृत्य, संगीत और खान-पान देश-दुनिया के पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र हैं। बस्तर पंडुम जैसे आयोजन इस सांस्कृतिक विरासत को व्यापक मंच दे रहे हैं। वर्ष 2026 के बस्तर पंडुम में जनजातीय संस्कृति की 12 विधाओं को मंच मिला और लगभग 55 हजार आदिवासी लोगों की सहभागिता हुई। राष्ट्रपति मती द्रौपदी मुर्मु की उपस्थिति में आयोजित इस कार्यक्रम ने बस्तर की सांस्कृतिक पहचान को राष्ट्रीय स्तर पर सामने लाने का अवसर दिया। 

    आस्था से लेकर एडवेंचर तक पर्यटन की विविध संभावनाएं

    बस्तर में धार्मिक, सांस्कृतिक, इको और एडवेंचर पर्यटन की संभावनाएं एक साथ मौजूद हैं। मां दंतेश्वरी मंदिर और बस्तर दशहरा आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक पर्यटन को आधार देते हैं, वहीं कांगेर घाटी और धुड़मारास जैसे क्षेत्र प्रकृति एवं रोमांच आधारित पर्यटन के लिए नए अवसर प्रस्तुत करते हैं।

    धुड़मारास में एडवेंचर पर्यटन, ग्लास ब्रिज और कैनोपी वॉक जैसी सुविधाओं की योजना तथा गांव का यूएन टूरिज्म बेस्ट टूरिज्म विलेज डेवलपमेंट प्रोग्राम के लिए चयन ग्रामीण पर्यटन की संभावनाओं को नई पहचान दे रहा है। 

    पर्यटन से रोजगार और स्थानीय समृद्धि

    बस्तर के पर्यटन विकास का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि इसका लाभ स्थानीय समुदाय तक पहुंचे। होमस्टे संचालक, पर्यटन गाइड, स्थानीय ड्राइवर, भोजन सेवा, हस्तशिल्प विक्रेता, सांस्कृतिक कलाकार और साहसिक पर्यटन से जुड़े युवा इस नई पर्यटन अर्थव्यवस्था का हिस्सा बन रहे हैं।

    बस्तर के पर्यटन रोडमैप के अंतर्गत 45 युवाओं को पर्यटन प्रबंधन का प्रशिक्षण दिया गया है। यह संकेत है कि पर्यटन को केवल दर्शनीय स्थलों के विकास तक सीमित न रखकर स्थानीय कौशल, रोजगार और उद्यमिता से जोड़ने की दिशा में भी काम हो रहा है। 

    बस्तर की नई तस्वीर

    बस्तर का पर्यटन ऐसे मॉडल में से एक है, जिसमें प्रकृति सुरक्षित रहे, जनजातीय संस्कृति की मौलिकता बनी रहे और पर्यटन से पैदा होने वाली आय का लाभ स्थानीय समुदाय तक पहुंचे। सड़कें बस्तर को जोड़ रही हैं, हवाई संपर्क दूरी कम कर रहा है, रेल कनेक्टिविटी की संभावनाएं विस्तार पा रही हैं, होमस्टे गांवों को पर्यटन अर्थव्यवस्था से जोड़ रहे हैं और बस्तर पंडुम जैसे आयोजन इसकी सांस्कृतिक पहचान को देश के सामने ला रहे हैं। 

    बस्तर अब केवल अतीत की कहानी नहीं है। यह संभावनाओं का नया अध्याय है, जहां जंगलों की हरियाली, जलप्रपातों की सुंदरता, जनजातीय संस्कृति की जीवंतता और स्थानीय लोगों की मेहमाननवाजी मिलकर छत्तीसगढ़ के पर्यटन को नई दिशा दे रही है। बस्तर की नई पहचान अब उसके अतीत से नहीं, बल्कि शांति, प्रकृति, संस्कृति, पर्यटन और स्थानीय विकास की नई संभावनाओं से लिखी जा रही है।

  • विकास कार्यों के लिए 5 करोड़ की घोषणा

    विकास कार्यों के लिए 5 करोड़ की घोषणा

    रायपुर

     उप मुख्यमंत्री तथा लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी, नगरीय प्रशासन एवं विकास मंत्री  अरुण साव ने आज सरायपाली के नई मंडी प्रांगण में आयोजित लोकार्पण एवं भूमिपूजन कार्यक्रम में सरायपाली नगर पालिका क्षेत्र के लिए 23 करोड़ 28 लाख 61 हजार रुपए के विभिन्न विकास कार्यों का लोकार्पण एवं 154 करोड़ 88 लाख रुपए की लागत के विकास कार्यों का भूमिपूजन किया। इस अवसर पर क्षेत्रवासियों को पेयजल, सामुदायिक भवन, अधोसंरचना और अमृत मिशन सहित विभिन्न विकास कार्यों की सौगात मिली। सांसद  रूपकुमारी चौधरी, विधायक  चातुरी नंद, छत्तीसगढ़ राज्य अनुसूचित जाति आयोग के अध्यक्ष  रामलाल चौहान और छत्तीसगढ़ शाकम्भरी बोर्ड के अध्यक्ष  राजेंद्र नायक भी कार्यक्रम में शामिल हुए।

    उप मुख्यमंत्री  साव ने कार्यक्रम में लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के जल जीवन मिशन अंतर्गत रेट्रो फिटिंग एवं एकल ग्राम योजना के कुल 24 ग्रामों में पेयजल सुविधा के लिए 1818. 61 लाख रुपये के कार्यों तथा 510 लाख रुपये के विभिन्न वार्डों में सामुदायिक भवनों एवं अन्य निर्माण कार्यों का लोकार्पण किया। उन्होंने एसटीपी निर्माण से संबंधित 10.21 करोड़ रुपये तथा जल प्रदाय अमृत मिशन 2.0 अंतर्गत 139.55 करोड़ रुपए के विकास कार्यों एवं 512 लाख रुपये के विभिन्न विकास एवं निर्माण कार्यों का भूमिपूजन भी किया।

    उप मुख्यमंत्री  अरुण साव ने लोकार्पण और भूमिपूजन कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि कोई भी शुभ कार्य होता है तो इंद्रदेव का आशीर्वाद मिलता है। आज वर्षा के रूप में भी हमें आशीर्वाद मिल रहा है। उन्होंने कहा कि हमारी सरकार विकास और जनसुविधाओं से जुड़े कार्यों को प्राथमिकता के साथ आगे बढ़ा रही है। मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय के नेतृत्व में प्रदेश में अभूतपूर्व विकास कार्य हो रहे हैं।
    उन्होंने कहा कि हमारी सरकार जिस कार्य का भूमिपूजन करती है, उसका लोकार्पण भी हमारी ही सरकार करती है। विकास कार्यों को समयबद्ध रूप से पूरा कर जनता को उसका लाभ पहुंचाना सरकार की प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ के माथे पर नक्सलवाद का कलंक था, जिसे प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में समाप्त करने की दिशा में महत्वपूर्ण सफलता मिली है। उन्होंने बताया कि लोक निर्माण विभाग द्वारा ढाई वर्ष में लगभग 12 हजार 666 करोड़ रुपये के विकास कार्य किए गए हैं।

    उप मुख्यमंत्री  अरुण साव ने कहा कि छत्तीसगढ़ के साथ-साथ अब सरायपाली का विकास भी तीव्र गति से हो रहा है। मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय के सुशासन की सरकार में लगातार विकास के काम हो रहे है। देश की दशा और दिशा बदलने का काम हमारी डबल इंजन की सरकार कर रही है। उन्होंने कहा कि सरायपाली के विकास के लिए पैसों की कोई कमी नही होगी। उप मुख्यमंत्री ने सांसद की मांग पर क्षेत्र के विकास के लिए 5 करोड़ रुपए देने की घोषणा की।

    सांसद  रूपकुमारी चौधरी ने कहा कि उप मुख्यमंत्री  अरुण साव द्वारा बिना भेदभाव के सभी क्षेत्रों में विकास कार्य कराए जा रहे हैं, जिसका लाभ आम जनता को मिल रहा है। उन्होंने कहा कि क्षेत्र की लंबे समय से चली आ रही रेल लाइन की मांग की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम आगे बढ़ा है और अब सर्वे का कार्य शुरू हो गया है। विधायक  चातुरी नंद ने अमृत मिशन 2.0 की स्वीकृति के लिए उप मुख्यमंत्री  अरुण साव का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि यह केवल पानी की योजना नहीं है, बल्कि हजारों परिवारों के जीवन से जुड़ी महत्वपूर्ण सौगात है। महानदी का पानी जब घर-घर पहुंचेगा, तो इसका लाभ बड़ी संख्या में लोगों को मिलेगा। उन्होंने मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय सहित इस कार्य से जुड़े सभी अधिकारियों का भी आभार व्यक्त किया। राज्य महिला आयोग की सदस्य  सरला कोसरिया, स्काउट गाइड संघ के जिलाध्यक्ष  ऐतराम साहू, नगर पालिका अध्यक्ष  सरस्वती चंद्र, उपाध्यक्ष  हेमंत प्रधान और कलेक्टर  विनय कुमार लंगेह सहित जनप्रतिनिधि, पार्षदगण, अधिकारी-कर्मचारी एवं बड़ी संख्या में नागरिक भी कार्यक्रम में मौजूद थे।

     

  • एसटीपी के लिए 82 करोड़, ओवरहेड टैंक एवं पाइपलाइन विस्तार के लिए 10 करोड़ और सड़क-नाली एवं खेल मैदान विकास के लिए 10 करोड़ रुपये की घोषणा

    एसटीपी के लिए 82 करोड़, ओवरहेड टैंक एवं पाइपलाइन विस्तार के लिए 10 करोड़ और सड़क-नाली एवं खेल मैदान विकास के लिए 10 करोड़ रुपये की घोषणा

    रायपुर

    विकसित भारत के संकल्प के अनुरूप विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण के लिए राज्य सरकार पूरी प्रतिबद्धता के साथ आगे बढ़ रही है। शहरों में आधुनिक अधोसंरचना के निर्माण के साथ नागरिक सुविधाओं का विस्तार किया जा रहा है, ताकि विकास का लाभ समाज के प्रत्येक वर्ग तक पहुंचे। हमारे प्रदेश की प्राकृतिक संपदा, मानव संसाधन और अपार संभावनाओं का उपयोग कर हम सब मिलकर एक समृद्ध, सशक्त और विकसित छत्तीसगढ़ का निर्माण करेंगे।
    मुख्यमंत्री साय ने आज रायपुर जिले के नगर निगम बीरगांव में आयोजित विकास कार्यों के लोकार्पण एवं भूमिपूजन कार्यक्रम को संबोधित करते हुए यह बात कही। 

    मुख्यमंत्री साय ने इस अवसर पर बीरगांव नगर निगम क्षेत्र को 135 करोड़ रुपये से अधिक के विभिन्न विकास कार्यों की सौगात दी। उन्होंने इन कार्यों का लोकार्पण एवं भूमिपूजन करने के साथ ही क्षेत्र की आवश्यकताओं को देखते हुए लगभग 110 करोड़ रुपये के नवीन विकास कार्यों की घोषणा भी की।

    मुख्यमंत्री साय ने कहा कि बीरगांव तेजी से विकसित हो रहा शहरी क्षेत्र है। औद्योगिक गतिविधियों और बढ़ती आबादी के अनुरूप यहां सड़क, पेयजल, स्वच्छता, सीवरेज, खेल सुविधाओं और अन्य नागरिक अधोसंरचनाओं को मजबूत करने की आवश्यकता है। राज्य सरकार इन आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए योजनाबद्ध ढंग से कार्य कर रही है। पिछले ढाई वर्षों में बीरगांव नगर निगम क्षेत्र को 160 करोड़ रुपये से अधिक के विकास कार्यों की सौगात दी जा चुकी है।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि आज लोकार्पित और भूमिपूजन किए गए विकास कार्यों में नगर निगम से संबंधित 94 करोड़ रुपये से अधिक तथा लोक निर्माण विभाग के 38 करोड़ रुपये से अधिक के कार्य शामिल हैं। इसके साथ ही नगरोत्थान योजना के अंतर्गत लगभग 16 करोड़ रुपये के विकास कार्यों का भूमिपूजन किया गया है। इन कार्यों के पूरा होने से बीरगांव और आसपास के क्षेत्रों में सड़क, पेयजल, स्वच्छता, खेल अधोसंरचना सहित अनेक बुनियादी सुविधाओं का विस्तार होगा और नागरिकों के जीवन में सकारात्मक बदलाव आएगा।

    स्टेट कैपिटल रीजन से बीरगांव के विकास को मिलेगी नई दिशा

    मुख्यमंत्री साय ने कहा कि राज्य सरकार रायपुर, दुर्ग-भिलाई और आसपास के क्षेत्रों को सम्मिलित करते हुए स्टेट कैपिटल रीजन विकसित करने की दिशा में आगे बढ़ रही है। इसमें बीरगांव भी शामिल है। स्टेट कैपिटल रीजन के माध्यम से पूरे क्षेत्र के सुनियोजित, समन्वित और दीर्घकालीन विकास का रोडमैप तैयार किया जाएगा। इसका लाभ आने वाले वर्षों में बीरगांव को भी मिलेगा और यहां आधुनिक शहरी अधोसंरचना एवं नागरिक सुविधाओं के विकास को नई गति मिलेगी।

    उन्होंने कहा कि विकास का अर्थ केवल सड़क और भवन बनाना नहीं, बल्कि नागरिकों के दैनिक जीवन को आसान बनाना भी है। इसी सोच के साथ सरकार सुशासन और ईज ऑफ लिविंग की दिशा में लगातार सुधार कर रही है। तकनीक के माध्यम से सरकारी सेवाओं को सरल, पारदर्शी और सुविधाजनक बनाया जा रहा है।

    मुख्यमंत्री ने बताया कि बीरगांव में मॉडल रजिस्ट्री कार्यालय का निर्माण भी किया जाएगा। प्रदेश में 10 मॉडल रजिस्ट्री कार्यालय विकसित किए जा रहे हैं। ऑनलाइन रजिस्ट्री और स्वतः नामांतरण जैसी व्यवस्थाओं से भूमि संबंधी सेवाओं को सरल बनाया गया है। मॉडल रजिस्ट्री कार्यालय के निर्माण से बीरगांव और आसपास के नागरिकों को जमीन की रजिस्ट्री से संबंधित सेवाएं अधिक सुविधाजनक ढंग से उपलब्ध होंगी।

    बीरगांव में एसटीपी के लिए 82 करोड़ रुपये की बड़ी घोषणा

    मुख्यमंत्री साय ने बीरगांव के लिए अनेक महत्वपूर्ण विकास कार्यों की घोषणा की। उन्होंने नगर निगम क्षेत्र में सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) के निर्माण के लिए 82 करोड़ रुपये देने की घोषणा की। इससे क्षेत्र में सीवेज प्रबंधन की व्यवस्था को मजबूत करने और स्वच्छता के स्तर को बेहतर बनाने में मदद मिलेगी।

    मुख्यमंत्री ने ओवरहेड टैंक एवं पाइपलाइन विस्तार के लिए 10 करोड़ रुपये, अधोसंरचना मद से सड़क एवं नाली निर्माण के लिए 5 करोड़ रुपये तथा सरोरा में खेल मैदान के विकास के लिए 5 करोड़ रुपये देने की घोषणा की। उन्होंने बीरगांव में विद्यार्थियों और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले युवाओं के लिए आधुनिक अध्ययन सुविधाओं से युक्त नालंदा परिसर के निर्माण के लिए भी 5 करोड़ रुपये देने की घोषणा की।

    मुख्यमंत्री ने व्यास तालाब तिराहा से बीरगांव नाला तक स्ट्रीट लाइट लगाने के लिए एक करोड़ रुपये तथा बुधवारी बाजार बीरगांव से नगर निगम कार्यालय तक स्ट्रीट लाइट के लिए 50 लाख रुपये की घोषणा की। उन्होंने सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र रावांभाठा में विद्युतीकरण एवं मरम्मत के लिए 50 लाख रुपये, सर्व मांगलिक भवन निर्माण के लिए एक करोड़ रुपये और शासकीय महाविद्यालय में ई-लाइब्रेरी निर्माण के लिए 89 लाख रुपये प्रदान करने की घोषणा की।

    मुख्यमंत्री साय ने बीरगांव में छत्तीसगढ़ विद्युत मंडल का जोन कार्यालय प्रारंभ करने की भी घोषणा की। उन्होंने कहा कि इन सभी कार्यों का उद्देश्य बीरगांव के नागरिकों को बेहतर बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराना और क्षेत्र को भविष्य की आवश्यकताओं के अनुरूप विकसित करना है।

    सात क्षेत्रों में सर्वे के बाद पात्र परिवारों को मिलेंगे आवासीय पट्टे

    मुख्यमंत्री साय ने बीरगांव नगर निगम क्षेत्र के रावांभाठा, बंजारी नगर, शक्तिपारा, मठपारा, शीतलापारा, उरकुरा और मजदूर नगर सरोरा में सर्वेक्षण करवाकर पात्र लोगों को नियमानुसार आवासीय पट्टे वितरित करने की घोषणा की। उन्होंने कहा कि गरीब और जरूरतमंद परिवारों को आवासीय सुरक्षा उपलब्ध कराना सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है।

    गरीब, महिला, श्रमिक और जरूरतमंद परिवारों का कल्याण हमारी प्राथमिकता

    मुख्यमंत्री साय ने कहा कि राज्य सरकार गरीब, महिला, श्रमिक, किसान, युवा और जरूरतमंद परिवारों के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाने के लिए निरंतर कार्य कर रही है। प्रदेश में प्रतिदिन लगभग 1600 प्रधानमंत्री आवास बनाए जा रहे हैं। सरकार ने 18 लाख गरीब परिवारों को पक्का आवास उपलब्ध कराने का निर्णय लिया है।

    उन्होंने कहा कि महतारी वंदन योजना के माध्यम से प्रदेश की 68 लाख से अधिक माताओं-बहनों को नियमित आर्थिक सहायता प्रदान की जा रही है। योजना की 31 किस्तें जारी की जा चुकी हैं और अब तक 20 हजार करोड़ रुपये से अधिक की राशि माताओं-बहनों को प्रदान की गई है।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश के 5.60 लाख से अधिक भूमिहीन कृषि मजदूर परिवारों को सालाना 10 हजार रुपये की आर्थिक सहायता दी जा रही है। तेंदूपत्ता संग्रहण की दर बढ़ाने के साथ चरण पादुका योजना को फिर से प्रारंभ किया गया है। रामलला दर्शन योजना के माध्यम से अब तक 50 हजार से अधिक श्रद्धालु अयोध्या जाकर प्रभुरामलला के दर्शन कर चुके हैं।

    उन्होंने प्रधानमंत्री स्वनिधि योजना का उल्लेख करते हुए कहा कि रेहड़ी-पटरी व्यवसायियों को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने और उनके व्यवसाय को आगे बढ़ाने के लिए सहायता दी जा रही है। केंद्र और राज्य सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं का उद्देश्य समाज के अंतिम व्यक्ति तक विकास का लाभ पहुंचाना और प्रत्येक परिवार को आगे बढ़ने के अवसर उपलब्ध कराना है।

    विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण में अब कोई बाधा नहीं : मुख्यमंत्री

    मुख्यमंत्री साय ने कहा कि लंबे समय तक नक्सलवाद छत्तीसगढ़ के विकास में एक बड़ी बाधा रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री के नेतृत्व, सुरक्षा बलों के अदम्य साहस तथा स्थानीय नागरिकों के सहयोग से नक्सलवाद के विरुद्ध निर्णायक सफलता मिली है। इससे विशेष रूप से उन क्षेत्रों में विकास के नए द्वार खुले हैं, जो लंबे समय तक बुनियादी सुविधाओं और अवसरों से वंचित रहे।

    उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ प्राकृतिक संसाधनों से भरपूर राज्य है। यहां प्रचुर खनिज और वन संपदा है, धरती उर्वर है और यहां के लोगों में अपार सामर्थ्य है। इन संसाधनों और क्षमताओं का बेहतर उपयोग कर प्रदेश को विकास की नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया जा सकता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वर्ष 2047 तक विकसित भारत के निर्माण का संकल्प लिया है। इस राष्ट्रीय संकल्प की सिद्धि में छत्तीसगढ़ को अग्रणी भूमिका निभानी है और इसके लिए हम सबको मिलकर विकसित छत्तीसगढ़ का निर्माण करना है।

    आयुर्वेद हमारी समृद्ध ज्ञान परंपरा का महत्वपूर्ण हिस्सा

    मुख्यमंत्री साय ने कार्यक्रम में राष्ट्रीय आयुर्वेद दिवस की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि आयुर्वेद भारत की प्राचीन और समृद्ध ज्ञान परंपरा की अमूल्य धरोहर है। केंद्र सरकार द्वारा आयुष मंत्रालय का गठन कर आयुर्वेद सहित भारतीय चिकित्सा पद्धतियों को प्रोत्साहित किया गया है। उन्होंने लोगों से स्वस्थ जीवनशैली अपनाने, आयुर्वेद के प्रति जागरूक रहने और इसके वैज्ञानिक एवं पारंपरिक ज्ञान का लाभ लेने का आग्रह किया।

    बीरगांव के विकास के लिए सरकार प्रतिबद्ध : उप मुख्यमंत्री अरुण साव

    उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि आज का दिन बीरगांव के लिए ऐतिहासिक और स्वर्णिम अवसर है। झमाझम बारिश के बीच बीरगांव में विकास की भी झमाझम बारिश हुई है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने क्षेत्र को 135 करोड़ रुपये से अधिक के विकास कार्यों की बड़ी सौगात दी है। इन कार्यों से बीरगांव को स्वच्छ, सुंदर, सुव्यवस्थित और सुविधायुक्त शहर बनाने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ने में मदद मिलेगी।

    उन्होंने कहा कि राज्य सरकार बीरगांव के सुनियोजित विकास के लिए योजनाबद्ध तरीके से कार्य कर रही है। विधायक मोतीलाल साहू भी क्षेत्र की आवश्यकताओं और विकास कार्यों को लेकर निरंतर प्रयासरत हैं। पिछले ढाई वर्षों में नगर निगम बीरगांव क्षेत्र को 160 करोड़ रुपये से अधिक के विकास कार्यों की सौगात मिली है, जिनमें लगभग 90 करोड़ रुपये के कार्य पूर्ण हो चुके हैं। आने वाले समय में भी अधोसंरचना और नागरिक सुविधाओं के विस्तार का यह क्रम जारी रहेगा।

    हितग्राहियों को मिला योजनाओं का लाभ, सफाई मित्रों और स्वच्छता दीदियों का सम्मान

    कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री साय ने प्रधानमंत्री आवास योजना के हितग्राहियों का गृह प्रवेश कराया। उन्होंने प्रधानमंत्री स्वनिधि योजना, मुख्यमंत्री गृह निर्माण सम्मान योजना और नोनी सुरक्षा योजना सहित विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं के हितग्राहियों को प्रोत्साहन राशि के डेमो चेक भी प्रदान किए।

    कार्यक्रम के शुभारंभ अवसर पर मुख्यमंत्री साय एवं जनप्रतिनिधियों ने सफाई मित्रों और स्वच्छता दीदियों के पांव धुलवाकर, तिलक लगाकर तथा आरती उतारकर उनकी सेवाओं के प्रति सम्मान व्यक्त किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारे सफाई मित्र और स्वच्छता दीदियां शहरों को स्वच्छ और सुंदर बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उनके श्रम और सेवा का सम्मान पूरे समाज का दायित्व है।

    मुख्यमंत्री साय ने बीरगांव नगर निगम को दो नए अग्निशमन वाहन भी समर्पित किए। इससे नगर निगम क्षेत्र में अग्निशमन एवं आपातकालीन सेवाओं की क्षमता और मजबूत होगी।

    मुख्यमंत्री ने शासकीय महाविद्यालय परिसर में ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान के अंतर्गत रुद्राक्ष का पौधा लगाकर पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया।

    इस अवसर पर सांसद बृजमोहन अग्रवाल, छत्तीसगढ़ राज्य औद्योगिक विकास निगम के अध्यक्ष राजीव अग्रवाल, चर्म शिल्पकार बोर्ड के अध्यक्ष ध्रुव कुमार मिर्धा, विधायक मोतीलाल साहू, विधायक अनुज शर्मा, विधायकमती भावना बोहरा, महापौर नंदलाल देवांगन, सभापति कृपाराम निषाद सहित अन्य जनप्रतिनिधि, अधिकारी एवं बड़ी संख्या में नागरिक उपस्थित थे।

  • नाबालिग बहनों से दुष्कर्म पर कोर्ट का बड़ा फैसला, आरोपी को उम्रकैद

    नाबालिग बहनों से दुष्कर्म पर कोर्ट का बड़ा फैसला, आरोपी को उम्रकैद

    बलौदा बाजार.

    दो नाबालिग सगी बहनों को शादी का प्रलोभन देकर ले जाने और बलात्संग कारित करने वाले आरोपी को अदालत ने आजीवन कारावास के साथ अर्थदंड लगाया है।

    विशेष लोक अभियोजक संजय बाजपेयी ने बताया कि मामला थाना सिमगा का है, जहाँ पीड़िता के पिता की रिपोर्ट पर सिमगा थाना पुलिस ने गुम इंसान दर्ज कर विवेचना के दौरान पीड़िता को नागपुर में बरामद किया। पीड़िता ने पूछताछ में आरोपी सनत साहू द्वारा उसे शादी का प्रलोभन देकर नागपुर भगाकर ले जाने और शारीरिक संबंध बनाने से गर्भवती होकर एक बालिका को जन्म देने और उसके बाद उसे छोड़कर वर्ष 2024 में उसकी छोटी बहन को भगाकर ले जाने व उसके साथ कहीं अलग जगह रहने की बात बताई।

    प्रकरण में तात्कालिक थाना प्रभारी डीएसपी योगिता खापर्डे, सहायक उपनिरीक्षक एसके कुरैशी एवं तत्कालिक एसडीओपी ऐश्वर्य चंद्राकर ने एक टीम बनाकर आरोपी की गिरफ्तारी एवं दोनों बहनों को नागपुर से बरामद कर सकुशल उनके परिजन को सौंपा गया। इसके साथ नाबालिग पीड़ितों के स्कूल के दाखिल खारिज रजिस्टर जप्त कर गवाहों के साक्ष्य लेखन कर न्यायालय के समक्ष आरोपी के विरुद्ध दोनों मामले में चलान पेश किया गया। अपर सत्र न्यायाधीश सतीश कुमार जायसवाल ने प्रकरण की गंभीरता एवं साक्ष्यों के परिशीलन करने बाद आरोपी द्वारा किया गया अपराध सिद्ध होना पाया और अपराध की गंभीरता को देखते हुए आरोपी को दोनों मामले में आजीवन कारावास एवं अर्थदण्ड से दंडित किया गया है, तथा सभी सजाएं साथ- साथ भुगताए जाने का आदेश दिया गया।

  • भगवान महावीर विकलांग सहायता समिति जयपुर, सकल जैन समाज एवं भारतीय जैन संगटना की पहल से दिव्यांगजनों को मिला सहारा

    भगवान महावीर विकलांग सहायता समिति जयपुर, सकल जैन समाज एवं भारतीय जैन संगटना की पहल से दिव्यांगजनों को मिला सहारा

    रायपुर

    जिन हाथों ने वर्षों से किसी का सहारा लिया, वही आज खुद गिलास उठाकर पानी पी रहे थे। जिन पैरों ने कभी साथ छोड़ दिया था, वही कृत्रिम पैर लगने के बाद बाइक चला रहे थे। कबीरधाम जिले के पीजी कॉलेज डोम कवर्धा में बुधवार को ये दृश्य सिर्फ एक शिविर की तस्वीर नहीं, बल्कि दिव्यांगजनों के जीवन में लौटती उम्मीद, बढ़ते आत्मविश्वास और आत्मनिर्भरता की नई शुरुआत रही। इस बदलाव के बीच उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा दिव्यांगजनों के बीच पहुंचे और निःशुल्क विशाल दिव्यांग उपकरण वितरण शिविर का शुभारंभ करते हुए हितग्राहियों को कृत्रिम अंग एवं सहायक उपकरण प्रदान किए। भगवान महावीर विकलांग सहायता समिति जयपुर, सकल जैन समाज एवं भारतीय जैन संगटना (छत्तीसगढ़) और जिला प्रशासन के सहयोग से आयोजित शिविर में करीब एक हजार दिव्यांगजनों का पंजीयन हुआ है।

    उपकरण नहीं, आत्मनिर्भर जीवन की शुरुआत

    उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा ने शिविर में दिव्यांगजनों से मुलाकात की और उन्हें कृत्रिम हाथ-पैर सहित विभिन्न सहायक उपकरण प्रदान किए। शिविर में कृत्रिम हाथ-पैर, कैलिपर्स, ट्राइसाइकिल सहित जरूरत के अनुसार अन्य उपकरण उपलब्ध कराए जा रहे हैं। उपकरण प्राप्त करने के बाद हितग्राहियों ने उनका उपयोग कर अपनी क्षमता का प्रदर्शन भी किया। एक हितग्राही ने कृत्रिम पैर की सहायता से बाइक चलाकर दिखया, वहीं एक अन्य दिव्यांगजन ने कृत्रिम हाथ से पानी पीकर बताया कि यह सुविधा उसके दैनिक जीवन को किस तरह आसान बना सकती है।

     उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा ने कहा कि दिव्यांगजनों के लिए आयोजित यह शिविर अद्भुत सेवा का उदाहरण है। जैन समाज सेवा कार्यों में हमेशा आगे रहा है। उन्होंने कहा कि कवर्धा में रहते हुए उन्होंने जैन समाज को बहुत करीब से देखा है। जैन समाज के जीवन में एक ओर समृद्धि और सामाजिक दायित्व है, तो दूसरी ओर त्याग और सेवा की प्रबल भावना भी है। यही संतुलन समाज को सेवा कार्यों के लिए प्रेरित करता है। उन्होंने बताया कि शिविर के लिए लगभग एक हजार दिव्यांगजनों का पंजीयन हुआ है। श्रवण, दृष्टि और अस्थि बाधित दिव्यांगजनों सहित जरूरत के अनुसार कैलिपर, कृत्रिम पैर, हाथ एवं अन्य सहायक उपकरण उपलब्ध कराए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि उपकरण केवल हाथ-पैर का सहारा नहीं हैं, बल्कि इनके मिलने के बाद व्यक्ति के जीवन में आने वाला बदलाव अधिक महत्वपूर्ण है।

    उप मुख्यमंत्री शर्मा ने एक दिव्यांगजन का उदाहरण देते हुए बताया कि बिजली के तार की चपेट में आने से उसके दोनों हाथ चले गए थे। शिविर में कृत्रिम हाथ मिलने के बाद उसने पहली बार अपने हाथ से पानी का गिलास उठाया। उन्होंने कहा कि उस समय उसके मन में क्या भाव रहे होंगे, इसे वही व्यक्ति समझ सकता है। कृत्रिम हाथ-पैर की कीमत से ज्यादा महत्वपूर्ण यह है कि इनके मिलने से दिव्यांगजन के जीवन में कितना बदलाव आता है और उसका आत्मविश्वास कितना बढ़ता है। उन्होंने कहा कि पिछले तीन-चार वर्षों से कवर्धा में इस तरह के सेवा कार्य लगातार हो रहे हैं। उन्होंने भारतीय जैन संगठन, भगवान महावीर विकलांग सेवा समिति, सकल जैन समाज और एनएसई फाउंडेशन के सहयोग की सराहना की। उन्होंने राजस्थान से आई विशेषज्ञ टीम द्वारा मौके पर ही कृत्रिम अंग तैयार करने की प्रक्रिया भी देखी।

    बस्तर में आईईडी विस्फोटों से दिव्यांग हुए लोगों तक भी पहुंचेगी सेवा

    उप मुख्यमंत्री ने बताया कि इसी तरह के शिविर जगदलपुर और दंतेवाड़ा में भी आयोजित किए जाएंगे। बस्तर में आईईडी विस्फोटों के कारण दिव्यांग हुए लोगों को चिन्हांकित कर कृत्रिम हाथ-पैर उपलब्ध कराने की योजना पर काम किया जा रहा है। ग्राम पंचायतों के माध्यम से ऐसे दिव्यांगजनों की जानकारी जुटाई जा रही है, ताकि उन्हें शिविर तक लाकर कृत्रिम अंग उपलब्ध कराए जा सकें। उन्होंने कहा कि बस्तर के अंदरूनी गांवों में आईईडी विस्फोटों से दिव्यांग हुए लोगों को कृत्रिम हाथ-पैर उपलब्ध कराने का प्रयास किया जा रहा है, ताकि वे दोबारा अपने पैरों पर खड़े हो सकें और आत्मनिर्भर जीवन की ओर बढ़ सकें। उप मुख्यमंत्री शर्मा ने कहा कि शिविर का लाभ अधिक से अधिक जरूरतमंद दिव्यांगजनों तक पहुंचे, इसके लिए सभी लोग इसकी जानकारी अपने स्तर पर साझा करें। उन्होंने समाज, संस्थाओं और आयोजन से जुड़े सभी लोगों को सेवा कार्य के लिए शुभकामनाएं दीं।

    दिव्यांगजन वित्त एवं विकास निगम के अध्यक्ष लोकेश कावड़िया ने कहा कि छत्तीसगढ़ में बड़ी संख्या में दिव्यांगजन हैं, जिन्हें आत्मनिर्भर बनाने के लिए सरकार लगातार प्रयास कर रही है। दिव्यांगजनों को केवल सहायक उपकरण उपलब्ध कराना ही नहीं, बल्कि उन्हें कौशल प्रशिक्षण, स्वरोजगार और रोजगार के अवसरों से जोड़ना भी जरूरी है। रायपुर में दिव्यांगजनों के लिए कौशल विकास केंद्र तैयार किया जा रहा है, जहां विभिन्न ट्रेड के साथ डिजिटल मार्केटिंग और वित्तीय प्रबंधन का प्रशिक्षण दिया जाएगा। उन्होंने बताया कि स्वरोजगार के लिए दिव्यांगजनों को कम ब्याज दर पर ऋण उपलब्ध कराने की व्यवस्था है तथा पात्र हितग्राहियों को ऋण पर अनुदान भी दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य दिव्यांगजनों को किसी पर निर्भर रहने वाला नहीं, बल्कि स्वाभिमान के साथ अपने परिवार और समाज को योगदान देने वाला बनाना है। 

     इस दौरान जिला पंचायत अध्यक्ष ईश्वरी साहू, नगर पालिका परिषद कवर्धा के अध्यक्ष चंद्रप्रकाश चंद्रवंशी, जिला पंचायत उपाध्यक्ष कैलाश चंद्रवंशी, कलेक्टरमती तुलिका प्रजापति, पुलिस अधीक्षक जितेन्द्र यादव, जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी अभिषेक अग्रवाल, भारतीय जैन संगटना राष्ट्रीय सचिव पंकज लूकड़, प्रदेश अध्यक्ष विजय गंगवाल, प्रदेश महासचिव सीए विकास गोलछा, सकल जैन संघ कवर्धा के अध्यक्ष नेमीचंद गोलछा, जैन श्वेतांबर मूर्तिपूजक संघ कवर्धा के अध्यक्ष खुशाल टाटिया, सकल जैन संघ कवर्धा के सचिव अतुल देशलहरा तथा स्वास्थ्य एवं शिविर प्रोग्राम के प्रदेश प्रमुख डॉ. अतुल जैन सहित जनप्रतिनिधि, सामाजिक संगठनों के पदाधिकारी एवं अधिकारी उपस्थित रहे।

    23 से 26 सितंबर तक चलेगा शिविर

     शिविर में राजस्थान से आई विशेषज्ञ टीम द्वारा मौके पर ही कृत्रिम अंग तैयार कर जरूरत के अनुसार उनका परीक्षण और फिटिंग की जा रही है। इससे हितग्राहियों को उनकी शारीरिक आवश्यकता के अनुरूप उपकरण उपलब्ध कराने में सुविधा मिल रही है। शिविर में श्रवण, दृष्टि एवं अस्थि बाधित दिव्यांगजनों सहित विभिन्न श्रेणी के दिव्यांग हितग्राहियों ने पंजीयन कराया है। बड़ी संख्या में पहुंचे हितग्राहियों की जरूरत के अनुसार कृत्रिम अंग एवं अन्य सहायक उपकरण उपलब्ध कराए जा रहे हैं। चार दिवसीय शिविर में 23 से 26 सितंबर तक दिव्यांगजनों को आवश्यकतानुसार उपकरण प्रदान किए जाएंगे।

  • छत्तीसगढ़ में किसी सहकारी शक्कर कारखाने को पहली बार इस श्रेणी में मिला नेशनल अवॉर्ड

    छत्तीसगढ़ में किसी सहकारी शक्कर कारखाने को पहली बार इस श्रेणी में मिला नेशनल अवॉर्ड

    रायपुर

    कवर्धा के भोरमदेव सहकारी शक्कर कारखाने को लगातार दो पेराई सत्रों—2024-25 और 2025-26—के लिए ‘हाइएस्ट शुगर रिकवरी–अदर एरिया’ श्रेणी में राष्ट्रीय पुरस्कार मिला है। नेशनल को-ऑपरेटिव शुगर फेडरेशन ने नई दिल्ली के डॉ. आंबेडकर इंटरनेशनल सेंटर में आयोजित शुगर फैक्ट्री एफिशिएंसी अवॉर्ड समारोह में कारखाने को सम्मानित किया।

     समारोह में केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने यह पुरस्कार प्रदान किया। इस अवसर पर केंद्रीय सहकारिता राज्य मंत्री कृष्ण पाल गुर्जर भी उपस्थित रहे। छत्तीसगढ़ के सहकारिता मंत्री केदार कश्यप समारोह में विशिष्ट अतिथि के रूप में शामिल हुए।  छत्तीसगढ़ के लिए यह विशेष गौरव का अवसर है कि राज्य में पहली बार किसी सहकारी शक्कर कारखाने को इस श्रेणी में राष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्त हुआ है।

    सहकारिता मंत्री केदार कश्यप ने इस उपलब्धि पर कारखाने से जुड़े गन्ना उत्पादक किसानों और कारखाना प्रबंधन को बधाई देते हुए कहा कि किसानों द्वारा गुणवत्तापूर्ण गन्ने की आपूर्ति, कारखाने की तकनीकी दक्षता और बेहतर प्रबंधन से यह उपलब्धि हासिल हुई है। उन्होंने कहा, यह सम्मान किसानों की मेहनत और सहकारिता व्यवस्था की सामूहिक शक्ति का सम्मान है।

    सहकारिता मंत्री कश्यप ने कहा कि मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में 'सहकार से समृद्धि’ के संकल्प के अनुरूप सहकारी व्यवस्था को मजबूत किया जा रहा है। राज्य सरकार सहकारी संस्थाओं को किसानों की आर्थिक प्रगति और ग्रामीण विकास का मजबूत माध्यम बनाने के लिए काम कर रही है। हमारा प्रयास है कि संस्थाएं आधुनिक, पारदर्शी, जवाबदेह और किसान हितैषी बनें तथा उनके काम का सीधा लाभ किसानों तक पहुंचे। उन्होंने कहा कि सहकारिता को गांवों की अर्थव्यवस्था से अधिक प्रभावी ढंग से जोड़ने पर जोर दिया जा रहा है।

    सहकारिता मंत्री कश्यप ने कहा कि सहकारिता विभाग में डिजिटलीकरण, प्राथमिक कृषि साख समितियों (पैक्स) के कम्प्यूटरीकरण और आधुनिक बैंकिंग सुविधाओं के विस्तार पर काम किया जा रहा है। इससे सहकारी संस्थाओं की कार्यप्रणाली को अधिक पारदर्शी बनाने में मदद मिलेगी। उन्होंने कहा कि ‘भोरमदेव सहकारी शक्कर कारखाने की सफलता प्रदेश की अन्य सहकारी संस्थाओं को भी बेहतर प्रदर्शन के लिए प्रेरित करेगी।

    लगातार दो वर्षों के लिए मिला राष्ट्रीय सम्मान
    समारोह में भोरमदेव सहकारी शक्कर कारखाना, कवर्धा को दो पेराई सत्रों वर्ष 2024-25 एवं 2025-26 के लिए “हाईएस्ट शुगर रिकवरी इन अदर एरिया” का नेशनल अवॉर्ड प्राप्त हुआ। कारखाने की ओर से यह पुरस्कार आयुक्त सहकारिता रमेश शर्मा, विभागीय अधिकारियों और कारखाना प्रबंधन के द्वारा  संयुक्त रूप से ग्रहण किया गया।

  • रायपुर में रोजगार मेले का आयोजन, 8 हजार से ज्यादा पदों पर मिलेगा अवसर

    रायपुर में रोजगार मेले का आयोजन, 8 हजार से ज्यादा पदों पर मिलेगा अवसर

    राज्य स्तरीय रोजगार मेला 7 एवं 8 अक्टूबर को रायपुर में

    8 हजार से अधिक पदों पर मिलेंगे रोजगार के अवसर

    अधिकाधिक युवाओं की सहभागिता सुनिश्चित करने और व्यापक प्रचार-प्रसार के निर्देश

    रायपुर 
    प्रदेश के युवाओं को रोजगार के अधिकाधिक अवसर उपलब्ध कराने के उद्देश्य से कौशल विकास, तकनीकी शिक्षा एवं रोजगार विभाग द्वारा राज्य स्तरीय रोजगार मेले का आयोजन 7 एवं 8 अक्टूबर 2026 को राजधानी रायपुर स्थित बलबीर सिंह जुनेजा इंडोर स्टेडियम में किया जाएगा। यह आयोजन मुख्यमंत्री  श्री विष्णु देव साय के मुख्य आतिथ्य में होगा। रोजगार मेले में तकनीकी एवं गैर-तकनीकी क्षेत्रों के 8 हजार से अधिक पदों की रिक्तियां में रोजगार के अवसर उपलब्ध होंगे ।

    कौशल विकास, तकनीकी शिक्षा एवं रोजगार विभाग द्वारा रोजगार मेले में प्रदेश के वृहद उद्योगों एवं निजी प्रतिष्ठानों को शामिल कर अधिक से अधिक रिक्त पद युवाओं के लिए उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं। इच्छुक युवा ई-रोजगार पोर्टल पर उपलब्ध रिक्तियों की जानकारी प्राप्त करने के साथ ही रोजगार मेले के लिए अपना पंजीयन भी करा सकते हैं।

    राज्य एवं जिला स्तरीय रोजगार मेलों में चयनित आवेदकों को कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री के करकमलों से ऑफर लेटर वितरित किए जाने की भी तैयारी है। इसके लिए जिलों से चयनित अभ्यर्थियों की सूची 01 अक्टूबर 2026 तक प्रेषित करने के निर्देश दिए गए हैं।

    रोजगार मेले में अधिकाधिक युवाओं की भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए सभी जिलों में ग्राम पंचायतों एवं नगरीय निकायों के माध्यम से व्यापक प्रचार-प्रसार करने को कहा गया है। साथ ही जिला एवं राज्य स्तरीय रोजगार मेलों में चयनित युवाओं की कार्यक्रम में उपस्थिति सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए गए हैं।शासन ने इस महत्वपूर्ण आयोजन को सफल बनाने तथा प्रदेश के अधिकाधिक युवाओं को रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने के लिए जिला स्तर पर विशेष प्रयास करने को कहा गया है।

  • छात्रावास की व्यवस्थाओं का जायजा, महिला आयोग अध्यक्ष ने दिए समस्या समाधान के निर्देश

    छात्रावास की व्यवस्थाओं का जायजा, महिला आयोग अध्यक्ष ने दिए समस्या समाधान के निर्देश

    रायपुर : राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष डॉ. ममता साहू ने किया कन्या छात्रावास का औचक निरीक्षण

    छात्राओं से संवाद कर जानी समस्याएं, शीघ्र निराकरण के दिए निर्देश    

    रायपुर

    छत्तीसगढ़ राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष डॉ. ममता साहू ने राज्य महिला आयोग की टीम के साथ शंकर नगर, रायपुर स्थित राज्य स्तरीय पोस्ट मैट्रिक पिछड़ा वर्ग कन्या छात्रावास का औचक निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने छात्रावास में रह रही छात्राओं से संवाद कर उनकी समस्याएं, आवश्यकताएं और सुझाव सुने तथा छात्रावास की व्यवस्थाओं का जायजा लिया।
        डॉ. ममता साहू ने छात्राओं से उनकी पढ़ाई, आवासीय सुविधाओं सहित अन्य आवश्यक व्यवस्थाओं के संबंध में जानकारी ली। छात्राओं द्वारा बताई गई समस्याओं और सुझावों को गंभीरता से लेते हुए उन्होंने संबंधित अधिकारियों को समस्याओं के शीघ्र निराकरण तथा आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि छात्राओं को सुरक्षित, सुविधाजनक और सकारात्मक वातावरण उपलब्ध कराना प्राथमिकता है, ताकि वे निर्बाध रूप से अपनी पढ़ाई जारी रखते हुए आगे बढ़ सकें।
        निरीक्षण के दौरान राज्य महिला आयोग की ओर से श्रीमती मंजू थदानी एवं श्रीमती रश्मी तिवारी, सखी वन स्टॉप सेंटर रायपुर की संरक्षण अधिकारी श्रीमती प्रीति पांडेय सहित महिला एवं बाल विकास विभाग के अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित रहे।

  • छत्तीसगढ़ पर्यटन को लेकर प्रतिनिधिमंडल की मंत्री राजेश अग्रवाल से मुलाकात

    छत्तीसगढ़ पर्यटन को लेकर प्रतिनिधिमंडल की मंत्री राजेश अग्रवाल से मुलाकात

    छत्तीसगढ़ ट्रेवल एंड टूरिज्म एसोसिएशन के प्रतिनिधिमंडल ने पर्यटन मंत्री राजेश अग्रवाल से की सौजन्य भेंट, विश्व पर्यटन दिवस समारोह के लिए किया आमंत्रित

    रायपुर
     छत्तीसगढ़ में पर्यटन को बढ़ावा देने, पर्यटन गतिविधियों के विस्तार और प्रदेश की पर्यटन संभावनाओं को देश-दुनिया के मानचित्र पर और अधिक प्रभावी ढंग से स्थापित करने के उद्देश्य से छत्तीसगढ़ ट्रेवल एंड टूरिज्म एसोसिएशन (CTTA) के प्रतिनिधिमंडल ने आज पर्यटन, संस्कृति एवं धर्मस्व मंत्री राजेश अग्रवाल से सौजन्य भेंट की। इस अवसर पर प्रतिनिधिमंडल ने अग्रवाल को 27 सितंबर को आयोजित होने वाले विश्व पर्यटन दिवस कार्यक्रम के लिए आमंत्रित किया और कार्यक्रम की रूपरेखा एवं उद्देश्यों की जानकारी दी।

    प्रतिनिधिमंडल ने राजेश अग्रवाल के साथ छत्तीसगढ़ में पर्यटन विकास की संभावनाओं पर विस्तार से चर्चा की। इस दौरान प्रदेश में पर्यटन को बढ़ावा देने, पर्यटकों के लिए सुविधाओं के विस्तार, पर्यटन स्थलों के प्रभावी प्रचार-प्रसार तथा पर्यटन क्षेत्र से जुड़े हितधारकों की सहभागिता बढ़ाने से संबंधित विभिन्न सुझाव भी साझा किए गए।

    राजेश अग्रवाल ने प्रतिनिधिमंडल के सदस्यों से पर्यटन क्षेत्र के विकास को लेकर विचार-विमर्श करते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ में प्राकृतिक, सांस्कृतिक, धार्मिक, ऐतिहासिक और जनजातीय पर्यटन की अपार संभावनाएं हैं। प्रदेश के पर्यटन स्थलों को बेहतर सुविधाओं, प्रभावी प्रचार-प्रसार और निजी क्षेत्र की सक्रिय सहभागिता के माध्यम से देश-विदेश के पर्यटकों के बीच और अधिक लोकप्रिय बनाया जा सकता है।

    उन्होंने कहा कि पर्यटन केवल भ्रमण का माध्यम नहीं है, बल्कि यह स्थानीय स्तर पर रोजगार और स्वरोजगार के अवसरों के साथ-साथ ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने का महत्वपूर्ण माध्यम भी है। पर्यटन से जुड़े विभिन्न क्षेत्रों में स्थानीय युवाओं, महिलाओं, कारीगरों, कलाकारों, होम-स्टे संचालकों और छोटे व्यवसायियों को आर्थिक अवसर उपलब्ध कराए जा रहे हैं।

    मंत्री अग्रवाल ने कहा कि सरकार और पर्यटन क्षेत्र से जुड़े संगठनों के बीच निरंतर संवाद एवं समन्वय से छत्तीसगढ़ में पर्यटन विकास को नई गति दी जा सकती है। उन्होंने पर्यटन उद्योग से जुड़े प्रतिनिधियों के सुझावों और अनुभवों को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि सामूहिक प्रयासों से प्रदेश की पर्यटन क्षमता को और अधिक प्रभावी रूप से सामने लाया जा सकता है।

    इस अवसर पर छत्तीसगढ़ ट्रेवल एंड टूरिज्म एसोसिएशन के प्रतिनिधिमंडल ने 27 सितंबर को विश्व पर्यटन दिवस के अवसर पर आयोजित होने वाले कार्यक्रम में राजेश अग्रवाल की सहभागिता का आग्रह किया। अग्रवाल ने आमंत्रण सहर्ष स्वीकार करते हुए कार्यक्रम में उपस्थित रहने का आश्वासन दिया।

    विश्व पर्यटन दिवस के आयोजन को लेकर प्रतिनिधिमंडल ने बताया कि यह अवसर छत्तीसगढ़ की पर्यटन संभावनाओं, विविध सांस्कृतिक विरासत और प्राकृतिक सौंदर्य को व्यापक स्तर पर प्रदर्शित करने के साथ-साथ पर्यटन क्षेत्र से जुड़े विभिन्न पक्षों के बीच संवाद और सहयोग को मजबूत करने का महत्वपूर्ण मंच होगा।

    प्रतिनिधिमंडल ने पर्यटन मंत्री राजेश अग्रवाल द्वारा प्रदेश में पर्यटन के विकास के लिए दिए जा रहे मार्गदर्शन एवं सहयोग के प्रति आभार व्यक्त किया। प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि पर्यटन विभाग, पर्यटन व्यवसाय से जुड़े संगठनों और स्थानीय हितधारकों के समन्वित प्रयासों से छत्तीसगढ़ को देश के प्रमुख पर्यटन गंतव्यों में स्थापित करने की दिशा में सकारात्मक परिणाम प्राप्त किए जा सकते हैं।

    राजेश अग्रवाल ने प्रतिनिधिमंडल को विश्व पर्यटन दिवस कार्यक्रम के लिए शुभकामनाएं देते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ की पर्यटन क्षमता को नई पहचान दिलाने के लिए सभी संबंधित पक्षों को मिलकर कार्य करना होगा। उन्होंने कहा कि सामूहिक सहभागिता, बेहतर सुविधाएं और प्रभावी प्रचार-प्रसार के माध्यम से प्रदेश के पर्यटन को नई ऊंचाइयों तक ले जाने के लिए निरंतर प्रयास किए जाएंगे।

  • संघर्ष से कक्षाओं तक: कैसे आस्था गुरुकुल दंतेवाड़ा में जीवन का पुनर्निर्माण कर  रहा है

    संघर्ष से कक्षाओं तक: कैसे आस्था गुरुकुल दंतेवाड़ा में जीवन का पुनर्निर्माण कर रहा है

    दंतेवाड़ा

     एक ऐसा क्षेत्र जो दशकों की हिंसा और विघटन से गुज़रा है, जवांगा का एजुकेशन सिटी में एक आवासीय स्कूल बच्चों को वयस्क बनने की राह पर एक अलग मार्ग प्रदान कर रहा है – शिक्षा, स्थिरता और एक ऐसे जीवन की संभावना के माध्यम से, जो उनके बचपन को आकार देने वाली परिस्थितियों से
    बहुत दूर है । आस्था विद्या मंदिर, जिसे आस्था गुरुकुल के नाम से भी जाना जाता है, वर्तमान में कक्षा 1 से 12 तक के लगभग 1,300 छात्रों का घर है ।

    दंतेवाड़ा जिले के जवांगा में एजुकेशन सिटी में स्थित यह आवासीय स्कूल उन समुदायों केबच्चों के लिए एक महत्वपूर्ण शैक्षणिक संस्थान बन गया है, जिन्होंने लंबे समय से चल रहे संघर्ष का खामियाजा भुगता है । अनुमान है कि इसके आधे से अधिकछात्र प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से वामपंथी उग्रवाद (एलडब्ल्यूई) से जुड़ी हिंसा से प्रभावित हुए हैं ।
    यह स्कूल ऐसी हिंसा के कारण अनाथ हुए बच्चों, उन बच्चों को जिनके माता-पिता विद्रोह में शामिल थे और प्रभावित क्षेत्रों, विशेष रूप से दंतेवाड़ा और व्यापक बस्तर क्षेत्र के छात्रों को प्राथमिकता देता है । कुछ छात्रों पर संघर्ष का प्रभाव कक्षा में प्रवेश करने से पहले ही पड़ जाता है ।
    प्राचार्य रवींद्र पाणिग्राही ने कहा कि स्कूल विशेष प्राथमिकता मानदंडों के

    तहत बच्चों को दाखिला देते समय आधिकारिक दस्तावेज़ों पर निर्भर करता है । पुलिस-प्रमाण, जो यह पुष्टि करता है कि छात्र का इलाका एलडब्ल्यूई गतिविधि
    से प्रभावित हुआ है और किसी परिवार के सदस्य की मृत्यु से संबंधित एफआईआर रिकॉर्ड उन दस्तावेजों में शामिल हैं, जिन पर विचार किया जाता है ।

    यद्यपि, इसका उद्देश्य आवास और स्कूली-शिक्षा तक पहुँच प्रदान करने से परे है । स्कूल ने एक ऐसा वातावरण बनाने का प्रयास किया है, जहां हिंसा के
    बीच पले-बढ़े बच्चे उबर सकें, सीख सकें और उन परिस्थितियों से परे एक भविष्य की कल्पना कर सकें जो उन्हें विरासत में मिली हैं । श्री पाणिग्राही ने कहा, "जो बच्चे हिंसा से प्रभावित हुए हैं, उन्हें विशेषज्ञों द्वारा परामर्श दिया जाता है । आईएएस अधिकारियों जैसे कुशल व्यक्ति भी विशेष व्याख्यान देते हैं और छात्रों को प्रेरित करने के लिए उनसे बातचीत करते हैं ।”

    स्कूल सीबीएसई पाठ्यक्रम का अनुसरण करता है, जबकि शिक्षण में प्रौद्योगिकी को शामिल करने के लिए क्लासरूम स्मार्ट-स्क्रीन सिस्टम से सुसज्जित हैं । दूर दराज के गांवों से आने वाले छात्रों के लिए, जिनमें से कुछ ने लंबे समय तक संघर्ष का अनुभव किया है और जिनकी पहुँच सीमित शैक्षिक बुनियादी ढांचे तक थी, ये सुविधाएं उनके सीखने के माहौल में एक महत्वपूर्ण बदलाव का प्रतिनिधित्व करती हैं ।

    “एजुकेशन सिटी में स्कूल का परिचालन एनएमडीसी सीएसआर द्वारा वित्त-पोषित है और प्रशासन राज्य सरकार के पास है । अत्याधुनिक तकनीक का उपयोग करके छात्रों को पढ़ाने के लिए कक्षाएँ स्मार्ट-स्क्रीन सिस्टम से सुसज्जित हैं ।” श्री पाणिग्राही ने बताया ।

    आस्था गुरुकुल 2013 में शुरू किया गया था, जिसमें एनएमडीसी ने इसके बुनियादी ढांचे के विकास के लिए सीएसआर सहायता प्रदान की थी । परिसर में लड़कों और लड़कियों के लिए अलग-अलग आवासीय भवन और 1,000 से अधिक छात्रों की क्षमता वाला एक सभागार शामिल है ।

    वित्तीय प्रतिबद्धता निर्माण के बाद भी जारी है । एनएमडीसी का सीएसआर वित्त-पोषण स्कूल संचालन में सहायता करता है, जिसमें वार्षिक परिचालन व्यय अकेले लगभग 3.5 करोड़ रुपये है । इस व्यवस्था ने एक पब्लिक-कारपोरेट मॉडल बनाया है, जिसमें स्कूल राज्य सरकार द्वारा संचालित संस्थान है, जबकि एनएमडीसी का सीएसआर वित्त-पोषण इसके बुनियादी ढांचे और निरंतर संचालन में सहायता करता है ।

    एक बच्चे के लिए, जिसने हिंसा के कारण अपने माता-पिता को खो दिया है, संघर्ष में फँसे गाँव में पला-बढ़ा है अथवा उग्रवाद से प्रभावित परिवार में पैदा हुआ है, आवासीय विद्यालय का महत्व शिक्षा से कहीं अधिक है । परिसर एक संरचित वातावरण, औपचारिक स्कूली-शिक्षा, परामर्श और

    लोगों व अवसरों से परिचिति कराता है, जो अन्यथा बस्तर के दूर-दराज के बच्चों के लिए पहुँच से दूर होते हैं । अपनी शुरुआत के एक दशक से अधिक समय बाद, आस्था गुरुकुल शिक्षा के माध्यम से संघर्ष के परिणामों को निपटने के एक व्यापक प्रयास का हिस्सा बन गया है । इसके क्लासरूम अब सीबीएसई पाठ्यक्रम के तहत अध्ययन करने वाले बच्चों से भरे हुए हैं, इसके आवासीय भवनों में पूरे क्षेत्र के छात्र रहते हैं, और इसका परिसर दैनिक दिनचर्या प्रदान करता है, जो उनके कई परिवारों को प्रभावित करने वाली हिंसा से बहुत दूर है । दंतेवाड़ा में, जहां संघर्ष के परिणामों को अक्सर जीवन-हानि और समुदायों के उजड़ने से मापा जाता है, स्कूल का दीर्घकालिक प्रभाव अंततः तब दिखता है जब इसके छात्र जावंगा छोड़ने के बाद कुछ करने में सक्षम होते हैं – और यह शिक्षा उन्हें ऐसा भविष्य चुनने की स्वतंत्रता देती है, जो यह परिभाषित नहीं करती है कि वे कहां से आए हैं, बल्कि इस बात से तय होता है कि वे कहाँ जाना चाहते हैं ।