Category: छत्तीसगढ़

  • पक्के आशियानों से संवर रही जिंदगी, खुशहाल जीवन का मिला नया आधार

    पक्के आशियानों से संवर रही जिंदगी, खुशहाल जीवन का मिला नया आधार

    रायपुर

    हर परिवार का सपना होता है कि उसका अपना ऐसा घर हो, जहां परिवार सुरक्षित वातावरण में रह सके और मौसम की चुनौतियों की चिंता न हो। आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए इस सपने को पूरा करने में प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। योजना के माध्यम से पात्र परिवारों को आवास निर्माण के लिए सहायता मिल रही है, जिससे कच्चे और असुरक्षित मकानों से निकलकर अनेक परिवार अपने पक्के आशियाने में पहुंच रहे हैं।

    शहरों में योजना से लाभान्वित परिवारों के अनुभव बताते हैं कि पक्का मकान मिलने से उनके रहन-सहन में सकारात्मक बदलाव आया है। कोरबा के पोड़ीबहार निवासी  आनंद राम लंबे समय से कच्चे मकान में रह रहे थे। बारिश के दिनों में टपकती छत, सीलन और जहरीले जीव-जंतुओं का डर परिवार की परेशानी बढ़ाता था। आवास स्वीकृत होने और किश्तों में सहायता प्राप्त होने के बाद उन्होंने निर्माण शुरू किया। आज उनका पक्का घर परिवार को सुरक्षा और सुकून दे रहा है। वे इसे अपने परिवार के बेहतर भविष्य की नींव बताते हैं।

    कोसाबाड़ी की मती ललिता रजक ने भी बरसों से पक्के घर का सपना संजोया था। खराब आर्थिक परिस्थितियों के कारण मकान निर्माण कठिन था। योजना के सहयोग से उनका यह सपना पूरा हुआ और परिवार को स्थायी आवास के साथ सुरक्षा, सुविधा एवं आत्मविश्वास का अनुभव मिला। वे अपने पक्के घर को परिवार की खुशियों और सुरक्षित भविष्य का आधार मानती हैं।

    काशीनगर निवासी मती गुंजा साहू का परिवार भी लंबे समय तक कच्चे मकान में रहा। बारिश के दौरान पानी टपकने और सीलन की समस्या के साथ सांप-बिच्छुओं का डर बना रहता था। पीएम आवास (शहरी) 2.0 के तहत उन्हें तीन किश्तों में लगभग 2.50 लाख रुपये की सहायता मिली। अपनी बचत राशि के साथ उन्होंने पक्के मकान का निर्माण पूरा किया। आज उनका परिवार सुरक्षित वातावरण में सुकून से रह रहा है।

    छुरीकला नगर पंचायत के  सुनील कुमार तिवारी के परिवार की कहानी भी आवास योजना से आए बदलाव को सामने रखती है। वे मिट्टी से बने दो कमरों के मकान में पत्नी और बेटी के साथ रहते थे। सीमित आय के बीच पक्का मकान बनाना कठिन था। प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत 2.26 लाख रुपये की स्वीकृत लागत में केंद्रांश और राज्यांश की सहायता प्राप्त हुई, जिसके बाद उनका पक्का घर तैयार हुआ। वे कहते हैं कि योजना ने उनके परिवार को सुरक्षित आवास के साथ बेहतर भविष्य की उम्मीद दी है।

    पथर्रीपारा निवासी  सनातन प्रसाद पाठक भी पहले कच्चे मकान में रहते थे। ठेका मजदूरी से परिवार का भरण-पोषण करने वाले  पाठक के लिए हर बारिश चिंता लेकर आती थी। योजना का लाभ मिलने के बाद उनका पक्का मकान तैयार हुआ और परिवार को मौसम की परेशानियों से राहत मिली। इसी क्षेत्र के  धरम लाल ध्रुव के परिवार ने भी योजना के सहयोग से अपना पक्का घर बनाया। उनका कहना है कि मजबूत छत और दीवारों वाले घर में अब परिवार सुरक्षित और सुकून से रह रहा है।

    लाभार्थी परिवारों ने प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय के प्रति योजना के संचालन तथा जरूरतमंद परिवारों तक इसका लाभ पहुंचाने के लिए आभार व्यक्त किया है। उनका कहना है कि आवास निर्माण के लिए मिली सहायता ने उनके वर्षों पुराने सपने को पूरा करने में महत्वपूर्ण सहयोग दिया है।

    प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) से नगरीय निकायों के आर्थिक रूप से कमजोर अनेक परिवारों को आवास निर्माण का सहारा मिल रहा है। किसी के लिए यह वर्षों पुराने सपने का पूरा होना है, तो किसी के लिए परिवार की सुरक्षा और स्थायित्व की नई शुरुआत। पक्के आशियाने के साथ इन परिवारों के जीवन में सुविधा, आत्मविश्वास और बेहतर भविष्य की नई उम्मीद जुड़ रही है।

  • रीजनल साइंस सेंटर में दो दिवसीय ‘द आर्ट ऑफ टीचिंग मैथमेटिक्स : फ्रॉम फीयर टू फैसिनेशन’ इंटरैक्टिव सत्र का आयोजन

    रीजनल साइंस सेंटर में दो दिवसीय ‘द आर्ट ऑफ टीचिंग मैथमेटिक्स : फ्रॉम फीयर टू फैसिनेशन’ इंटरैक्टिव सत्र का आयोजन

    रायपुर

     विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के प्रति रूचि, नवाचार और वैज्ञानिक दृष्टिकोण को बढ़ावा देने के उद्देश्य से राज्य में विभिन्न शैक्षणिक एवं जन-जागरूकता गतिविधियों को प्रोत्साहित किया जा रहा है। इसी क्रम में छत्तीसगढ़ रीजनल साइंस सेंटर, रायपुर द्वारा गणित शिक्षण को सरल, रूचिकर, गतिविधि-आधारित एवं रचनात्मक बनाने के उद्देश्य से 22 एवं 23 सितंबर को ‘द आर्ट ऑफ टीचिंग मैथमेटिक्स : फ्रॉम फीयर टू फैसिनेशन’ विषय पर दो दिवसीय इंटरैक्टिव सत्र का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का आयोजन उप मुख्यमंत्री एवं विज्ञान प्रौद्योगिकी मंत्री विजय शर्मा के मार्गदर्शन तथा विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के प्रमुख सचिव सोनमणि बोरा तथा छत्तीसगढ़ विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद एवं रीजनल साइंस सेंटर के महानिदेशक प्रशांत कविश्वर के नेतृत्व में किया गया।

    कार्यक्रम के प्रथम दिवस 22 सितंबर को रायपुर के चार विकासखंडों से विज्ञान एवं गणित विषय के लगभग 120 शिक्षकों ने ऑफलाइन सहभागिता की। रायपुर जिले के अन्य शिक्षकों के लिए सत्र का ऑनलाइन प्रसारण भी किया गया। प्रशिक्षण के दौरान शिक्षकों को गणित को केवल पाठ्यपुस्तक, सूत्रों और गणनाओं तक सीमित न रखते हुए गतिविधियों, प्रयोगों, अनुभवों तथा दैनिक जीवन से जोड़कर पढ़ाने की विभिन्न तकनीकों से परिचित कराया गया। हैंड्स-ऑन गतिविधियों के माध्यम से यह समझाया गया कि कठिन प्रतीत होने वाली गणितीय अवधारणाओं को भी सरल, रोचक और सहज तरीके से विद्यार्थियों तक पहुंचाया जा सकता है।

    कार्यक्रम के दूसरे दिन 23 सितंबर को बी.एड. एवं डी.एड. विद्यार्थियों के लिए विशेष इंटरैक्टिव सत्र आयोजित किया गया। इसमें एससीईआरटी के बी.एड. एवं डी.एड. विद्यार्थी, पंडित रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय के बी.एड. विद्यार्थी तथा आईटीईपी के विद्यार्थियों ने सहभागिता की। सत्र का उद्देश्य भावी शिक्षकों को गणित शिक्षण की नवीन, गतिविधि-आधारित एवं व्यावहारिक पद्धतियों से परिचित कराना रहा, ताकि वे भविष्य में कक्षा में गणित को अधिक प्रभावी एवं आनंददायक तरीके से प्रस्तुत कर सकें।

    इस अवसर पर छत्तीसगढ़ रीजनल साइंस सेंटर, रायपुर के परियोजना निदेशक प्रभारी डॉ. शैलेश कुमार सिंह ने कहा कि गणित को विद्यार्थियों के लिए केवल सूत्रों और गणनाओं का विषय न बनाकर सोचने, समझने, प्रश्न पूछने और समाधान खोजने का माध्यम बनाया जाना चाहिए। उन्होंने गतिविधि-आधारित एवं अनुभवात्मक शिक्षण को गणितीय अवधारणाओं को सहज रूप से समझाने का प्रभावी माध्यम बताते हुए भावी शिक्षकों को कक्षा में नवीन शिक्षण तकनीकों को अपनाने के लिए प्रेरित किया।

    ऑल इंडिया रामानुजन सोसाइटी के निदेशक एवं रामानुजन टैलेंट सर्च फाउंडेशन, बेंगलुरु के मैथ कोच बी. एन. राव ने प्रशिक्षण के दोनों दिवसों पर प्रतिभागियों के साथ संवाद करते हुए गणित शिक्षण की नवीन एवं गतिविधि-आधारित विधियों पर मार्गदर्शन दिया। उन्होंने हैंड्स-ऑन गतिविधियों, व्यावहारिक उदाहरणों, गणितीय खेलों और दैनिक जीवन से जुड़े उदाहरणों के माध्यम से बताया कि किस प्रकार गणितीय अवधारणाओं को सरल और आनंददायक बनाया जा सकता है। उन्होंने शिक्षकों से विद्यार्थियों को केवल उत्तर बताने के बजाय स्वयं सोचने, तर्क करने, प्रश्न पूछने और समाधान खोजने के लिए प्रेरित करने पर विशेष जोर दिया।

    सत्र के दौरान यह भी रेखांकित किया गया कि छोटे-छोटे प्रयोग, गतिविधियां, प्रश्नोत्तरी और रचनात्मक अभ्यास विद्यार्थियों में गणित के प्रति रुचि एवं जिज्ञासा विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। दो दिवसीय कार्यक्रम के माध्यम से वर्तमान शिक्षकों के साथ-साथ भावी शिक्षकों को भी गणित शिक्षण की नवीन पद्धतियों से जोड़ने का प्रयास किया गया। कार्यक्रम में इस बात पर विशेष जोर दिया गया कि गणित केवल अंकों और सूत्रों का विषय नहीं है, बल्कि यह विद्यार्थियों में तार्किक सोच, रचनात्मकता, जिज्ञासा एवं समस्या-समाधान की क्षमता विकसित करने का प्रभावी माध्यम है। कार्यक्रम के सफल आयोजन में छत्तीसगढ़ रीजनल साइंस सेंटर की टीम, संबंधित अधिकारियों एवं कार्यक्रम से जुड़े सभी सहयोगियों का महत्वपूर्ण योगदान रहा।

     

  • एम हेल्पलाइन बनी जनसमस्याओं के त्वरित निराकरण का माध्यम

    एम हेल्पलाइन बनी जनसमस्याओं के त्वरित निराकरण का माध्यम

    रायपुर

     मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय के नेतृत्व में शासन-प्रशासन तक आम नागरिकों की शिकायतों की पहुंच और उनके समयबद्ध निराकरण पर जोर दिया जा रहा है। इसी क्रम में सीएम हेल्पलाइन में प्राप्त एक शिकायत पर खनिज विभाग द्वारा त्वरित कार्रवाई करते हुए अवैध रेत परिवहन में संलिप्त 4 ट्रैक्टर वाहनों को जब्त किया गया है। 
    कलेक्टर  विजय दयाराम के. के निर्देशानुसार गौरेला पेन्ड्रा मरवाही जिले में अवैध रेत खनन एवं परिवहन के विरुद्ध खनिज विभाग द्वारा लगातार निगरानी और कार्रवाई की जा रही है। सीएम हेल्पलाइन में अवैध रेत परिवहन से संबंधित शिकायत प्राप्त होने पर खनिज विभाग की टीम ने तत्काल संज्ञान लेते हुए कोलबिर्रा, पथर्रा एवं मटियाडाड़ क्षेत्र में जांच एवं कार्रवाई की। कार्रवाई के दौरान अवैध रेत परिवहन में संलिप्त पाए गए 4 ट्रैक्टर वाहनों को जब्त किया गया।

    जब्त किए गए सभी वाहनों को कोटमी चौकी में सुरक्षित रखा गया है। मामले में संबंधित वाहन मालिकों के विरुद्ध खान एवं खनिज (विकास एवं विनियमन) अधिनियम के प्रावधानों के तहत नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। खनिज विभाग द्वारा अवैध खनन एवं परिवहन से जुड़े मामलों में नियमानुसार कार्रवाई की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है।

    सीएम हेल्पलाइन के माध्यम से प्राप्त शिकायत पर हुई इस त्वरित कार्रवाई से यह भी स्पष्ट होता है कि नागरिकों द्वारा दर्ज कराई गई शिकायतों को संबंधित विभागों तक पहुंचाकर उनके निराकरण की प्रक्रिया को प्रशासनिक स्तर पर आगे बढ़ाया जा रहा है। राज्य के आधिकारिक डिजिटल सेवा तंत्र में शिकायत पटल और आवेदन की स्थिति ट्रैक करने जैसी सुविधाएं उपलब्ध हैं, जिससे नागरिक शासकीय सेवाओं और शिकायतों से संबंधित प्रक्रिया की जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। 

    मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय द्वारा जनसमस्याओं के निराकरण को शासन की कार्यप्रणाली का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाने पर जोर दिया गया है। खनिज विभाग की इस कार्रवाई से अवैध रेत परिवहन पर निगरानी और शिकायतों के आधार पर त्वरित कार्रवाई की प्रक्रिया को बल मिला है। जिले में खनिज संसाधनों के अवैध उत्खनन एवं परिवहन पर प्रभावी नियंत्रण के लिए विभागीय स्तर पर कार्रवाई आगे भी जारी रहेगी।

  • अटारी स्थित बॉटनिकल गार्डन का होगा पुनर्विकास; पर्यटकों को मिलेंगी आधुनिक सुविधाएं और नए आकर्षण

    अटारी स्थित बॉटनिकल गार्डन का होगा पुनर्विकास; पर्यटकों को मिलेंगी आधुनिक सुविधाएं और नए आकर्षण

    रायपुर

    छत्तीसगढ़ सरकार राज्य की प्राकृतिक धरोहरों को संवारने और पर्यटन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से एक बड़ी परियोजना पर कार्य कर रही है। रायपुर के अटारी स्थित प्रसिद्ध नंदनवन को पीपीपी (सार्वजनिक-निजी भागीदारी) मॉडल के तहत नए और आकर्षक स्वरूप में विकसित किया जाएगा। इस कायाकल्प योजना पर लगभग 50 करोड़ रूपए की लागत आएगी।

    मुख्य सचिव  विकासशील की अध्यक्षता में आज यहां मंत्रालय महानदी भवन में एक उच्च स्तरीय बैठक के दौरान नंदनवन पुनर्विकास की प्रस्तावित परियोजना के प्रस्ताव का प्रस्तुतिकरण किया गया। जिसका नंदन वन पीपीपी समिति द्वारा अनुमोदन किया गया। बैठक में नंदनवन के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने और इसे पर्यावरण व पर्यटन के एक बड़े केंद्र के रूप में विकसित करने की दिशा में चर्चा की गई।

    पीपीपी मॉडल पर आधारित योजना के अंतर्गत नंदनवन को आधुनिक एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर के पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने के लिए सार्वजनिक-निजी सहभागिता ली जाएगी। बॉटनिकल गार्डन का पुनर्विकास, प्राकृतिक संतुलन और पर्यावरण संरक्षण को ध्यान में रखते हुए बॉटनिकल गार्डन को नए सिरे से संवारा जाएगा। परिसर में पर्यटकों के लिए विश्वस्तरीय बुनियादी ढांचा, स्वच्छ सुविधाएं और आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार किया जाएगा। बच्चों और परिवारों के मनोरंजन के लिए नए आकर्षण और गतिविधियां जोड़ी जाएंगी। सुशासन नीति के तहत राज्य सरकार छत्तीसगढ़ की प्राकृतिक संपदा का संरक्षण करते हुए पर्यटन के क्षेत्र को नई गति दे रही है। नंदनवन का यह पुनर्विकास प्रकृति, पर्यावरण और आधुनिक जन-सुविधाओं का एक बेहतरीन संगम साबित होगा, जिससे स्थानीय व बाहरी पर्यटकों के अनुभव में बड़ा सुधार आएगा।

    बैठक में वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग के अपर मुख्य सचिव  मनोज कुमार पिंगुआ, पीसीसीएफ  अरूण कुमार पांडेय, विधि एवं विधायी विभाग के प्रमुख सचिव  मनीष कुमार ठाकुर, नीति आयोग के सदस्य  आशीष भट्ट, वित्त विभाग सहित समीति के अन्य सदस्य एवं अन्य विभागों के प्रमुख अधिकारी शामिल हुए।

  • नेवता भोज में दिखी सामाजिक समरसता की मिसाल, एक साथ बैठे बैगा पुजारी, जनप्रतिनिधि और अधिकारी

    नेवता भोज में दिखी सामाजिक समरसता की मिसाल, एक साथ बैठे बैगा पुजारी, जनप्रतिनिधि और अधिकारी

    रायपु

    सेवा संकल्प अभियान के अंतर्गत गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले में सामाजिक सहभागिता और समरसता को बढ़ावा देने के उद्देश्य से ‘नेवता भोज’ का आयोजन किया गया। प्रधानमंत्री पोषण शक्ति निर्माण योजना के तहत मल्टीपर्पस स्कूल पेंड्रा के असेंबली हॉल में आयोजित नेवता भोज में आयुर्वेद दिवस पर आयोजित स्वास्थ्य शिविर एवं कार्यशाला में शामिल बैगा पुजारियों, ग्रामीणजनों, जनप्रतिनिधियों और प्रशासनिक अधिकारियों ने एक साथ बैठकर सामूहिक रूप से भोजन किया। सामूहिक भोज के इस आयोजन ने समानता, अपनत्व और सामाजिक एकजुटता का सकारात्मक संदेश दिया।

    नेवता भोज के दौरान जनप्रतिनिधियों, प्रशासनिक अधिकारियों, बैगा पुजारियों और ग्रामीणों ने एक साथ भोजन कर सामाजिक सहभागिता की भावना को मजबूत किया। एक ही पंक्ति में साथ बैठकर भोजन करने की यह पहल सामाजिक दूरी को कम करने और समाज के विभिन्न वर्गों के बीच संवाद एवं आत्मीयता बढ़ाने का माध्यम बनी।

    कार्यक्रम में विधायक  प्रणव कुमार मरपच्ची, जिला पंचायत अध्यक्ष सु समीरा पैकरा, जिला पंचायत उपाध्यक्ष राजा उपेंद्र बहादुर सिंह, कलेक्टर  विजय दयाराम के., पुलिस अधीक्षक  मनोज खिलारी, वनमंडलाधिकारी  कुमार निशांत, जिला पंचायत सीईओ  मुकेश रावटे सहित जनप्रतिनिधिगण, अधिकारी-कर्मचारी, बैगा पुजारी एवं बड़ी संख्या में ग्रामीणजन शामिल हुए।

    नेवता भोज की विशेषता यह रही कि इसमें समाज के विभिन्न वर्गों ने बिना किसी भेदभाव के एक साथ बैठकर भोजन किया। इससे आपसी अपनत्व और सामुदायिक भावना को बढ़ावा देने के साथ यह संदेश भी गया कि सामूहिक सहभागिता से सामाजिक समरसता को और मजबूत किया जा सकता है।

    कार्यक्रम के दौरान बैगा पुजारियों एवं ग्रामीणजनों की सहभागिता ने आयोजन को स्थानीय सामाजिक और सांस्कृतिक संदर्भ से भी जोड़ा। जनप्रतिनिधियों एवं अधिकारियों के साथ उनके सामूहिक रूप से भोजन करने से संवाद और सहभागिता का वातावरण बना। इस अवसर पर उपस्थित लोगों ने सामाजिक सद्भाव और एकजुटता को मजबूत करने वाले ऐसे आयोजनों को महत्वपूर्ण बताया।

    प्रधानमंत्री पोषण शक्ति निर्माण योजना के अंतर्गत आयोजित नेवता भोज का उद्देश्य सामुदायिक सहभागिता की भावना को बढ़ावा देना है। सेवा संकल्प अभियान के साथ आयोजित इस कार्यक्रम ने इस उद्देश्य को सामाजिक संवाद और सामूहिक सहभागिता के माध्यम से सामने रखा।

    नेवता भोज के माध्यम से यह संदेश भी दिया गया कि समाज की वास्तविक शक्ति आपसी सहयोग, सम्मान, समानता और सहभागिता में निहित है। जब जनप्रतिनिधि, अधिकारी, बैगा पुजारी और ग्रामीण एक साथ बैठकर भोजन करते हैं, तो यह केवल भोजन का आयोजन नहीं रहता, बल्कि आपसी विश्वास और सामाजिक जुड़ाव को मजबूत करने का अवसर बन जाता है।

    सेवा संकल्प अभियान के अंतर्गत आयोजित यह नेवता भोज सामाजिक समरसता, सामुदायिक भावना और जनभागीदारी को बढ़ावा देने वाली पहल के रूप में सामने आया। सामूहिक भोज में सभी वर्गों की सहभागिता ने ‘साथ चलें, साथ बढ़ें’ की भावना को मजबूत करते हुए समानता, अपनत्व और सामाजिक एकजुटता का संदेश दिया।

     

  • महतारी वंदन योजना की राशि बचाकर खरीदा स्मार्टफोन, अब दूसरों की भी कर रहीं मदद

    महतारी वंदन योजना की राशि बचाकर खरीदा स्मार्टफोन, अब दूसरों की भी कर रहीं मदद

    रायपुर

     दंतेवाड़ा जिले के बचेली की निवासी कुमारी के पास पहले अपना स्मार्टफोन नहीं था। सरकारी योजनाओं और अन्य जरूरी जानकारी के लिए उन्हें दूसरों की मदद लेनी पड़ती थी। महतारी वंदन योजना के तहत हर माह मिलने वाली राशि में से कुछ हिस्सा नियमित रूप से बचाकर उन्होंने अपने लिए स्मार्टफोन खरीदा। अब वे इससे नई नई जानकारियां हासिल करने के साथ आसपास के लोगों के साथ साझा करने और विभिन्न समस्याओं के निराकरण में मदद करती हैं।

    सीमित संसाधनों के कारण कुमारी के लिए नया फोन खरीदना कठिन था। महतारी वंदन योजना की सहायता राशि मिलने पर उन्होंने थोड़ी-थोड़ी बचत शुरू की। कुछ महीनों बाद जमा रकम से स्मार्टफोन खरीदा और उसका उपयोग करना सीखा। अब वे मोबाइल पर देश-दुनिया की खबरें देखती हैं और सरकारी योजनाओं तथा डिजिटल सेवाओं के बारे में जानकारी जुटाती हैं।

    श्रीमती कुमारी अपने आसपास के लोगों, विशेषकर बुजुर्गों को भी जरूरत पड़ने पर जानकारी खोजने में मदद करती हैं। किसी योजना की जानकारी हो या कोई अन्य जरूरी सूचना, वे मोबाइल के माध्यम से उसे उपलब्ध कराने का प्रयास करती हैं। अपनी जरूरत के लिए खरीदा गया स्मार्टफोन अब उनके लिए दूसरों के काम आने का माध्यम भी बन गया है।

  • लखपति दीदी पहल से मिली नई उड़ान, पशुपालन और सब्जी उत्पादन बना आय का जरिया

    लखपति दीदी पहल से मिली नई उड़ान, पशुपालन और सब्जी उत्पादन बना आय का जरिया

    प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की लखपति दीदी पहल से निधि को मिली नई उड़ान, मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में निधि बनी आत्मनिर्भर

    बिहान से जुड़कर पशुपालन और सब्जी उत्पादन को बनाया आय का जरिया, सालाना आय ढाई लाख रुपये तक पहुंची

    रायपुर 
     लगन, मेहनत और सही अवसर मिल जाए तो ग्रामीण महिलाएं अपने परिवार की आर्थिक स्थिति को मजबूत करने के साथ आत्मनिर्भरता की नई मिसाल कायम कर सकती हैं। पेण्ड्रा विकासखंड के ग्राम अमरपुर की श्रीमती निधि तिवारी की कहानी इसी बदलाव की प्रेरक मिसाल है। पशुपालन और सब्जी बाड़ी के जरिए उन्होंने अपनी आय के नए स्रोत विकसित किए और अब उनकी वार्षिक आय करीब ढाई लाख रुपये तक पहुंच गई है।

    श्रीमती निधि तिवारी जून 2023 से दीप महिला स्व सहायता समूह से जुड़ी हैं और वर्तमान में समूह की अध्यक्ष हैं। स्व सहायता समूह से जुड़ने के महज तीन महीने बाद उन्होंने चक्रिय निधि (आरएफ) से प्राप्त 10 हजार रुपये की सहायता से जर्सी नस्ल की गाय खरीदी। उनकी गाय से प्रतिदिन लगभग 15 लीटर दूध का उत्पादन होता है, जिससे उन्हें नियमित आय का स्रोत मिला।

    इसके छह महीने बाद निधि को सामुदायिक निवेश निधि (सीआईएफ) से 60 हजार रुपये की सहायता प्राप्त हुई। उन्होंने इस राशि में अपनी बचत और अन्य संसाधन जोड़कर सब्जी- बाड़ी का काम शुरू किया। इसके बाद उन्होंने मौसम के अनुसार अलग-अलग सब्जियों की खेती को अपनी आजीविका का महत्वपूर्ण आधार बनाया।

    टमाटर की खेती से बढ़ी आमदनी

    निधि तिवारी ने मार्च माह में अपने खेत में टमाटर की फसल लगाई। फसल तैयार होने के बाद उन्होंने टमाटर की बिक्री शुरू की। उन्हें लगभग 40 रुपये प्रति किलो की दर से टमाटर बिक्री करने से अच्छी आमदनी हो रही है। पशुपालन के साथ सब्जी उत्पादन ने उनकी आय को विविध बनाया और परिवार की आर्थिक स्थिति को मजबूत करने में मदद की।

    निधि बताती हैं कि राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन ‘बिहान’ से जुड़ने के बाद उन्हें अपने काम को आगे बढ़ाने के लिए वित्तीय सहायता, समूह का सहयोग और नई दिशा मिली। उन्होंने कहा कि आज वे अपने परिवार की जरूरतों को पूरा करने के साथ अपने सपनों को भी आगे बढ़ा पा रही हैं।

    महिला स्व सहायता समूहों से आजीविका को मिल रहा आधार

    निधि तिवारी का अनुभव उस व्यापक ग्रामीण आजीविका ढांचे से जुड़ा है, जिसमें स्व सहायता समूहों के माध्यम से महिलाओं को वित्तीय समावेशन, कौशल, आजीविका और उद्यमिता के अवसर उपलब्ध कराने पर जोर दिया जाता है। केंद्र सरकार का दीनदयाल अंत्योदय योजना-राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन इसी उद्देश्य से ग्रामीण महिलाओं को स्व सहायता समूहों से संगठित करता है। ‘लखपति दीदी’ पहल इसी मिशन का परिणाम है, जिसमें महिलाओं की टिकाऊ वार्षिक आय कम से कम एक लाख रुपये तक पहुंचाने पर जोर है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार ने ग्रामीण महिलाओं की आय और आर्थिक भागीदारी बढ़ाने के लिए स्व सहायता समूह आधारित आजीविका मॉडल, वित्तीय समावेशन और महिला उद्यमिता पर विशेष जोर दिया है। 

    मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में बिहान से महिलाओं को मिल रहा मंच

    छत्तीसगढ़ में ‘बिहान’ के माध्यम से ग्रामीण महिलाओं को स्व सहायता समूहों से जोड़कर आजीविका गतिविधियों के लिए अवसर उपलब्ध कराए जा रहे हैं। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने महिला स्व सहायता समूहों और ग्रामीण महिला उद्यमिता को आत्मनिर्भरता से जोड़ने पर जोर दिया है। 2026 में आयोजित ‘लखपति दीदी संवाद’ में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने स्वावलंबन, उद्यमिता और नवाचार के माध्यम से महिलाओं के आगे बढ़ाने की बात कही थी। 

    परिवार के सपनों को पूरा करने की राह पर निधि

    निधि तिवारी कहती हैं कि मेहनत के साथ यदि सही अवसर और सहयोग मिले तो गांव में रहकर भी परिवार की आर्थिक स्थिति को मजबूत किया जा सकता है। स्व सहायता समूह से मिली सहायता ने उन्हें पशुपालन और सब्जी- बाड़ी को व्यवस्थित रूप से आगे बढ़ाने का अवसर दिया। आज दूध उत्पादन और टमाटर सहित मौसमी सब्जियों की खेती से होने वाली आय उनके परिवार के सपनों को पूरा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।

    निधि तिवारी की कहानी बताती है कि स्व सहायता समूह, वित्तीय सहायता, स्थानीय संसाधनों और मेहनत के समन्वय से ग्रामीण महिलाएं अपनी आजीविका को मजबूत कर सकती हैं। पशुपालन से शुरू हुआ उनका सफर सब्जी बाड़ी तक पहुंचा और अब वे लखपति दीदी की पहचान के साथ अपने परिवार के लिए आर्थिक आत्मनिर्भरता की राह तैयार कर रही हैं।

  • FRA एवं डुबान क्षेत्रों में कृषि भूमि की डिजिटल पहचान और मैपिंग होगी सुदृढ़

    FRA एवं डुबान क्षेत्रों में कृषि भूमि की डिजिटल पहचान और मैपिंग होगी सुदृढ़

    रायपुर

    छत्तीसगढ़ में धान की खेती के क्षेत्रफल के सटीक, वैज्ञानिक एवं तकनीक आधारित आकलन की दिशा में राज्य शासन ने महत्वपूर्ण पहल की है। खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण संचालनालय, छत्तीसगढ़ तथा छत्तीसगढ़ विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद (CGCOST) के मध्य आज एक महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए। इसके अंतर्गत प्रदेश में सैटेलाइट इमेजरी, रिमोट सेंसिंग और भौगोलिक सूचना प्रणाली (GIS) जैसी आधुनिक तकनीकों का उपयोग कर धान की खेती के क्षेत्रफल की मैपिंग और सत्यापन किया जाएगा।इस अवसर पर प्रमुख सचिव, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग श्री सोनमणि बोरा, सचिव, खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग श्रीमती रीना बाबा साहेब कंगाले, संचालक, खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग डॉ. फरिहा आलम तथा संचालक, छत्तीसगढ़ विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद (CGCOST) श्री कवीश्वर उपस्थित थे।

    इस समझौते का उद्देश्य प्रदेश में धान की खेती के वास्तविक क्षेत्रफल के आकलन को अधिक सटीक और विश्वसनीय बनाना है। तकनीक आधारित इस व्यवस्था से भू-अभिलेखों, डिजिटल क्रॉप सर्वे और सैटेलाइट आधारित फसल सत्यापन के बीच बेहतर समन्वय स्थापित होगा। इससे धान उपार्जन से संबंधित प्रक्रियाओं में डेटा की शुद्धता बढ़ाने के साथ ही पारदर्शिता को और मजबूत करने में सहायता मिलेगी।

    FRA एवं डुबान क्षेत्रों की तैयार होगी GIS आधारित डिजिटल मैपिंग

    समझौते के अंतर्गत विशेष रूप से वन अधिकार अधिनियम (FRA) तथा डुबान क्षेत्रों में स्थित ऐसे कृषि भू-भागों की पहचान एवं मैपिंग पर विशेष ध्यान दिया जाएगा, जिनका विवरण वर्तमान में जियो-रेफरेंस्ड स्वरूप में उपलब्ध नहीं है। ऐसे कृषि क्षेत्रों की GIS आधारित पॉलीगॉन लेयर तैयार की जाएगी, जिससे संबंधित भू-भाग की डिजिटल भौगोलिक पहचान सुनिश्चित हो सकेगी।

    इन क्षेत्रों में सैटेलाइट इमेजरी एवं रिमोट सेंसिंग तकनीक के माध्यम से धान की खेती वाले क्षेत्रफल का आकलन किया जाएगा। इससे ऐसे क्षेत्रों में भी फसल की वास्तविक स्थिति और कृषि रकबे के संबंध में अधिक सटीक भू-स्थानिक जानकारी उपलब्ध हो सकेगी, जहां पारंपरिक भू-अभिलेखों के आधार पर डिजिटल सत्यापन में व्यावहारिक कठिनाइयां आती रही हैं।

    Latitude-Longitude का सैटेलाइट इमेजरी से होगा मिलान

    प्रदेश के अन्य जियो-रेफरेंस्ड कृषि क्षेत्रों में उपलब्ध भूमि खंडों के Latitude-Longitude का सैटेलाइट इमेजरी के साथ मिलान किया जाएगा। इसके आधार पर संबंधित भू-खंड पर धान की फसल की उपस्थिति का तकनीकी सत्यापन किया जा सकेगा। इस प्रक्रिया से डिजिटल रिकॉर्ड और खेत की वास्तविक स्थिति के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने में सहायता मिलेगी।

    सैटेलाइट इमेजरी के माध्यम से प्राप्त आंकड़ों और GIS आधारित मैपिंग के उपयोग से धान के रकबे के आकलन में मानवीय निर्भरता कम होगी तथा बड़े भौगोलिक क्षेत्र में फसल की स्थिति का अधिक व्यवस्थित एवं वैज्ञानिक विश्लेषण संभव हो सकेगा।

    डिजिटल क्रॉप सर्वे के लिए मजबूत होगा भू-स्थानिक आधार

    खाद्य संचालनालय और CGCOST के इस तकनीकी सहयोग से प्रदेश में डिजिटल क्रॉप सर्वे के लिए आवश्यक भू-स्थानिक आधार को भी मजबूती मिलेगी। विशेष रूप से FRA एवं डुबान क्षेत्रों की डिजिटल पहचान और मैपिंग होने से इन क्षेत्रों से संबंधित कृषि डेटा को अधिक व्यवस्थित तरीके से डिजिटल प्रणाली से जोड़ा जा सकेगा।

    इसके माध्यम से भूमि संबंधी डिजिटल जानकारी, फसल सर्वेक्षण तथा सैटेलाइट आधारित सत्यापन को एक-दूसरे के पूरक के रूप में उपयोग किया जा सकेगा। इससे भविष्य में फसल क्षेत्रफल के आकलन और कृषि संबंधी डेटा के विश्लेषण के लिए अधिक विश्वसनीय आधार उपलब्ध होगा।

    तकनीक और डेटा आधारित होगी धान उपार्जन व्यवस्था

    छत्तीसगढ़ में धान उपार्जन एक व्यापक प्रशासनिक व्यवस्था है। ऐसे में धान की खेती के वास्तविक क्षेत्रफल की सटीक जानकारी उपार्जन व्यवस्था को प्रभावी बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। नई तकनीकी व्यवस्था से धान के रकबे के सत्यापन में सैटेलाइट एवं भू-स्थानिक डेटा का उपयोग बढ़ेगा और उपार्जन से संबंधित निर्णयों के लिए अधिक प्रमाणिक डेटा उपलब्ध हो सकेगा।

    यह पहल राज्य में धान उपार्जन व्यवस्था को आधुनिक तकनीक और डेटा आधारित प्रणाली से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। भू-अभिलेख, डिजिटल क्रॉप सर्वे, GIS मैपिंग और सैटेलाइट आधारित फसल सत्यापन के बेहतर समन्वय से धान के रकबे के आकलन में सटीकता बढ़ेगी तथा पूरी व्यवस्था में पारदर्शिता और विश्वसनीयता को और सुदृढ़ किया जा सकेगा।

  • छत्तीसगढ़ में धान उत्पादन की निगरानी को लेकर MoU, तकनीक से होगा सत्यापन

    छत्तीसगढ़ में धान उत्पादन की निगरानी को लेकर MoU, तकनीक से होगा सत्यापन

    छत्तीसगढ़ में धान की खेती के सटीक एवं तकनीकी सत्यापन के लिए हुआ एमओयू

    रायपुर
    छत्तीसगढ़ शासन द्वारा प्रदेश में धान की खेती के क्षेत्रफल का सटीक, पारदर्शी और तकनीक-आधारित आकलन करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। आज यहाँ मंत्रालय महानदी भवन में खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण संचालनालय तथा छत्तीसगढ़ विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद के मध्य एक महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए। यह समझौता सेटेलाइट-आधारित मैपिंग, डिजिटल क्रॉप सर्वे और भू-स्थानिक डेटा के बेहतर समन्वय से राज्य की धान उपार्जन व्यवस्था को और अधिक पारदर्शी एवं सुदृढ़ बनाने के उद्देश्य से किया गया है। गैर-जियो-रेफरेंस्ड क्षेत्रों की मैपिंग  विशेष रूप से वन अधिकार अधिनियम के तहत आबंटित भू-भागों और डुबान क्षेत्रों में स्थित ऐसे कृषि क्षेत्रों की पहचान कर उनकी जीआईएस आधारित पॉलीगॉन लेयर तैयार की जाएगी, जो वर्तमान में डिजिटल रूप से मैप नहीं हैं। 

    खरीफ विपणन वर्ष 2026-27 के लिए आकलन तैयार पॉलीगॉन लेयर और भू-स्थानिक डेटा के आधार पर आगामी खरीफ विपणन वर्ष 2026-27 में धान की फसल के वास्तविक रकबे का सटीक आकलन किया जाएगा। सेटेलाइट इमेजरी से सत्यापन अन्य जियो-रेफरेंस्ड क्षेत्रों में भूमि खंडों (खसरों) के अक्षांश-देशांतर का सेटेलाइट इमेजरी से मिलान कर धान की फसल की डिजिटल उपस्थिति की पुष्टि की जाएगी। इस तकनीकी पहल से दूरस्थ और दुर्गम क्षेत्रों एफआरए एवं डुबान क्षेत्र की कृषि भूमि की डिजिटल पहचान मजबूत होगी तथा डिजिटल क्रॉप सर्वे के लिए एक मजबूत आधार ढाँचा तैयार होगा। 

    इस दौरान विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के प्रमुख सचिव सोनमणि बोरा, खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग की सचिव सुरीना बाबा साहेब कंगाले, खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग की संचालक डॉ. फरिहा आलम एवं संचालक, छत्तीसगढ़ विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद कवीश्वर उपस्थित रहे।

  • सेवा से संकल्प और संकल्प से विकसित भारत की यात्रा, जनभागीदारी से मजबूत होगा राष्ट्र निर्माण

    सेवा से संकल्प और संकल्प से विकसित भारत की यात्रा, जनभागीदारी से मजबूत होगा राष्ट्र निर्माण

    रायपुर

    किसी गरीब मां के लिए वह क्षण कितना बड़ा होता होगा, जब उसके घर के चूल्हे पर धुएं के बजाय गैस की नीली लौ जलती है। किसी पिता के लिए वह कितनी बड़ी राहत होगी, जब उसे यह चिंता न हो कि आज बच्चों के लिए भोजन कहां से आएगा। बस्तर के किसी दूरस्थ गांव में रहने वाले जनजातीय परिवार के लिए वह कितनी बड़ी खुशी होगी, जब कठिन रास्तों को पार कर राशन उसके गांव तक पहुंचता है। वास्तव में सेवा का अर्थ इन्हीं छोटे-छोटे लेकिन अनमोल क्षणों में दिखाई देता है।

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सार्वजनिक जीवन में सेवा के 25 वर्ष पूर्ण होने का अवसर हमें इसी व्यापक अर्थ में सेवा को देखने का अवसर देता है। यह यात्रा केवल पद और दायित्व की यात्रा नहीं, बल्कि समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचने के संकल्प की यात्रा भी रही है। ‘सेवा संकल्प अभियान’ के माध्यम से हम प्रधानमंत्री जी के प्रति आभार व्यक्त करने के साथ-साथ यह संकल्प भी लें कि विकसित भारत के निर्माण में हमारा अपना योगदान क्या होगा।

    सेवा का भाव किसी एक व्यक्ति या संस्था तक सीमित नहीं होता। जब कोई व्यक्ति रक्तदान करता है, किसी जरूरतमंद की मदद करता है, स्वच्छता के लिए श्रमदान करता है, नदी या घाट की सफाई में अपना समय देता है अथवा अपने आसपास के लोगों को स्वच्छता के लिए प्रेरित करता है, तब राष्ट्र निर्माण की एक छोटी लेकिन महत्वपूर्ण ईंट रखी जाती है।

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वच्छता को इसी जनभागीदारी से जोड़ा। स्वच्छ भारत अभियान ने यह संदेश घर-घर तक पहुंचाया कि स्वच्छता केवल सफाई कर्मी या सरकार की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक का कर्तव्य है। इसी तरह गंगा और देश की अन्य नदियों की स्वच्छता के लिए नमामि गंगे जैसे प्रयासों ने नदी, घाट और पर्यावरण को लेकर समाज की भागीदारी को व्यापक बनाया। सेवा का यह स्वरूप हमें बताता है कि राष्ट्र के प्रति प्रेम केवल शब्दों में नहीं, बल्कि हमारे कर्मों में दिखाई देना चाहिए।

    गरीब कल्याण के क्षेत्र में भी सेवा का सबसे संवेदनशील रूप दिखाई देता है। प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना ने करोड़ों गरीब परिवारों की महिलाओं को धुएं से राहत देते हुए स्वच्छ ईंधन की सुविधा से जोड़ा। एक रसोई में जलती गैस की लौ को केवल एक सरकारी योजना का परिणाम मानना पर्याप्त नहीं होगा। उसके पीछे एक महिला का बदला हुआ जीवन, उसके समय की बचत और सम्मान के साथ भोजन बनाने का अवसर भी जुड़ा है।

    खाद्य सुरक्षा के क्षेत्र में प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना और सार्वजनिक वितरण प्रणाली ने यह सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है कि गरीब और जरूरतमंद परिवारों की थाली तक खाद्यान्न पहुंचे। इस भावना को बहुत करीब से महसूस करने की बात है कि शासन की किसी भी योजना की सफलता का सबसे बड़ा पैमाना यह है कि उसका लाभ अंतिम छोर पर खड़े व्यक्ति तक कितनी सहजता से पहुंचा।

    छत्तीसगढ़ में सार्वजनिक वितरण प्रणाली केवल राशन वितरण की व्यवस्था नहीं, बल्कि लाखों परिवारों के जीवन में खाद्य सुरक्षा का आधार है। उचित मूल्य की दुकानों के माध्यम से चावल और आवश्यक खाद्यान्न जब किसी जरूरतमंद परिवार के घर तक पहुंचता है, तब शासन की संवेदनशीलता धरातल पर दिखाई देती है। सरकार की कोशिश भी यही है कि पात्र व्यक्ति योजना से वंचित न रहे और व्यवस्था में पारदर्शिता तथा जवाबदेही बनी रहे।

    बस्तर का संदर्भ इस सेवा भावना को और गहरा करता है। दूरस्थ एवं जनजातीय अंचलों में भौगोलिक परिस्थितियां अनेक बार सुविधाओं की राह कठिन बनाती हैं। ऐसे क्षेत्रों में नियद नेल्लानार जैसी पहल के माध्यम से शासन की सुविधाओं को उन गांवों और परिवारों तक पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है, जो लंबे समय तक मुख्यधारा की सुविधाओं से दूर रहे। जब ऐसे किसी गांव के परिवार को उसके नजदीक राशन की सुविधा मिलती है, तो वह केवल खाद्यान्न का वितरण नहीं होता – वह शासन और नागरिक के बीच विश्वास का सेतु बनता है।

    प्रदेश में पीडीएस प्रणाली की सबसे मानवीय पक्ष यही है कि प्रदेश में कोई पात्र परिवार भूखा न रहे। राशन की दुकान पर पहुंचने वाला प्रत्येक परिवार केवल एक राशनकार्ड संख्या नहीं है। वह एक परिवार है, जिसकी अपनी आवश्यकताएं, उम्मीदें और भविष्य हैं। किसी मां के चेहरे की चिंता कम होना और बच्चों की थाली में भोजन पहुंचना ही सरकार की काम की वास्तविक सार्थकता है।

    ‘सेवा मेरा योगदान’ की भावना इसलिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि विकसित भारत का निर्माण केवल सरकार नहीं कर सकती। सरकार योजनाएं बना सकती है, संसाधन उपलब्ध करा सकती है और व्यवस्थाएं खड़ी कर सकती है; लेकिन उन्हें जनआंदोलन बनाने की शक्ति समाज की सहभागिता से आती है। रक्तदान करने वाला व्यक्ति, स्वच्छता के लिए आगे आने वाला युवा, नदी-घाट की सफाई करने वाला नागरिक, किसी जरूरतमंद को सरकारी योजना की जानकारी देने वाला व्यक्ति-हर कोई विकसित भारत के निर्माण में अपनी भूमिका निभा सकता है।

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सार्वजनिक जीवन में सेवा के 25 वर्ष पूर्ण होने पर हमें केवल पीछे मुड़कर देखने की आवश्यकता नहीं है। यह आगे बढ़ने और अपने हिस्से की जिम्मेदारी स्वीकार करने का भी अवसर है। आइए, हम संकल्प लें कि अपने गांव, अपने शहर, अपने समाज और अपने प्रदेश के लिए हम कुछ न कुछ अवश्य करें।

    क्योंकि राष्ट्र निर्माण हमेशा बड़े कामों से नहीं होता। कई बार वह उस छोटी-सी रसोई से शुरू होता है, जहां गरीब मां निश्चिंत होकर चूल्हा जलाती है। उस राशन की दुकान से शुरू होता है, जहां जरूरतमंद परिवार को खाद्यान्न मिलता है। उस स्वच्छ घाट से शुरू होता है, जहां नागरिक अपने हाथों से सफाई करते हैं। और उस रक्तदान शिविर से शुरू होता है, जहां कोई अनजान व्यक्ति किसी अनजान जीवन को बचाने का माध्यम बनता है। सेवा से संकल्प और संकल्प से विकसित भारत-यही वह यात्रा है, जिसमें सरकार के साथ प्रत्येक नागरिक की भागीदारी आवश्यक है।