Category: छत्तीसगढ़

  • शिक्षा के क्षेत्र में योगदान का सम्मान, मुख्यमंत्री शिक्षा गौरव समारोह में केदार कश्यप ने सम्मानित किए शिक्षक

    शिक्षा के क्षेत्र में योगदान का सम्मान, मुख्यमंत्री शिक्षा गौरव समारोह में केदार कश्यप ने सम्मानित किए शिक्षक

    मुख्यमंत्री शिक्षा गौरव अलंकरण समारोह- वन मंत्री केदार कश्यप ने सेवानिवृत्त शिक्षकों और शिक्षा दूतों को किया सम्मानित

    रायपुर
     शिक्षक दिवस के अवसर पर नारायणपुर के ए.जी. ऑडिटोरियम में मुख्यमंत्री शिक्षा गौरव अलंकरण सम्मान समारोह का आयोजन भव्य रूप से किया गया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में छत्तीसगढ़ शासन के वन एवं जलवायु परिवर्तन, परिवहन, सहकारिता तथा संसदीय कार्य मंत्री श्री केदार कश्यप और राज्य युवा आयोग के अध्यक्ष श्री विश्व विजय सिंह तोमर उपस्थित रहे।

    अनुशासन और संस्कारों से ही मिलती है सफलतारू केदार कश्यप

        वन मंत्री केदार कश्यप ने कहा कि अनुशासन, संस्कार, धैर्य और संकल्प के साथ शिक्षा के क्षेत्र में आगे बढ़ने से ही सफलता प्राप्त होती है। उन्होंने परिवार को पहली पाठशाला बताते हुए कहा कि माता-पिता और गुरुजनों का सम्मान करना हमारी संस्कृति का मूल आधार है। विद्यार्थियों से संवाद करते हुए उन्होंने मोबाइल फोन का उपयोग केवल पढ़ाई और ज्ञानवर्धक गतिविधियों के लिए करने तथा इसके दुरुपयोग से बचने की सलाह दी। उन्होंने बच्चों का उत्साहवर्धन करते हुए उनके साथ सेल्फी भी ली।

    पुस्तक विमोचन और शिक्षकों का सम्मान

           समारोह के दौरान लेखक श्री शिव कुमार पाण्डेय द्वारा अबूझमाड़ की संस्कृति पर आधारित लिखित पुस्तक ‘बस्तर के लोक जीवन में वनस्पतियां’ का विमोचन किया गया। उत्कृष्ट सेवाओं के लिए 15 सेवानिवृत्त शिक्षकों (श्री सुमेर सिंह मंडावी, श्रीमती उषा किरण बैस, श्री धनसिंह बघेल आदि) को शॉल एवं श्रीफल भेंट कर सम्मानित किया गया। विकासखंड स्तर पर 6 शिक्षकों को शिक्षा दूत पुरस्कार और जिला स्तर पर 3 शिक्षकों को ज्ञानदीप पुरस्कार से नवाजा गया।

            इस अवसर पर नगर पालिका अध्यक्ष श्री इंद्रप्रस्थ बघेल, जनपद अध्यक्ष श्रीमती पिंकी उसेंडी, कलेक्टर श्रीमती नम्रता जैन, पुलिस अधीक्षक श्री संदीप कुमार पटेल, डीएफओ डॉ. वेंकटेशा एमजी सहित बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधि, प्रशासनिक अधिकारी और शिक्षक-शिक्षिकाएं उपस्थित रही।

  • ओरछा, फरसगांव, खड़गवां, सोनहत, डौंडी, डोंगरगांव और धमधा में भी खुलेंगे लोक निर्माण विभाग के उप संभागीय कार्यालय

    ओरछा, फरसगांव, खड़गवां, सोनहत, डौंडी, डोंगरगांव और धमधा में भी खुलेंगे लोक निर्माण विभाग के उप संभागीय कार्यालय

    ओरछा, फरसगांव, खड़गवां, सोनहत, डौंडी, डोंगरगांव और धमधा में भी खुलेंगे लोक निर्माण विभाग के उप संभागीय कार्यालय

    कार्यों में गति लाने, विभागीय कसावट और कड़ी निगरानी के लिए दूरस्थ क्षेत्रों में भी कार्यालय शुरू कर रहा पीडब्ल्यूडी

    पुल-पुलियों के निर्माण में भी आएगी तेजी, बीजापुर, सुकमा, कोंडागांव, बालोद, सारंगढ़ और बैकुंठपुर जैसे दूरवर्ती जिलों में प्रारंभ होंगे सेतु उप संभागीय कार्यालय

    रायपुर. 
    सड़कों, भवनों और पुल-पुलियों के कार्यों में गति लाने तथा इनके निर्माण कार्यों में कड़ी निगरानी सुनिश्चित करने लोक निर्माण विभाग दूरस्थ क्षेत्रों में भी कार्यालय शुरू कर रहा है। राज्य शासन ने लोक निर्माण विभाग के 16 उप संभागीय, दो संभागीय और एक सेतु मंडल कार्यालय के साथ ही इन कार्यालयों के लिए सेट-अप की मंजूरी दे दी है। इनमें से ज्यादातर कार्यालय दूरस्थ क्षेत्रों में खोले जा रहे हैं। इनकी स्थापना से निर्माण कार्यों में तेजी के साथ ही विभागीय कामकाज में कसावट आएगी।

    राज्य शासन ने लोक निर्माण विभाग के सेतु परिक्षेत्र के अंतर्गत 9 नए कार्यालयों की स्वीकृति प्रदान की है। इनमें जगदलपुर में अधीक्षण अभियंता कार्यालय, रायपुर में कार्यपालन अभियंता कार्यालय सेतु संभाग क्रमांक-2, तथा बीजापुर, सुकमा, कोण्डागांव, बालोद, मुंगेली, सारंगढ़ और बैकुंठपुर में अनुविभागीय अधिकारी (सेतु उप संभाग) कार्यालय शामिल हैं।

    राज्य शासन ने भवन एवं सड़क निर्माण के लिए 10 नवीन कार्यालय भी मंजूर किए हैं। इनमें बैकुंठपुर में कार्यपालन अभियंता (कोरिया संभाग) कार्यालय तथा फरसगांव, ओरछा, डोंगरगांव, डौंडी, धमधा, आरंग, खड़गवां, सोनहत और बलौदाबाजार में अनुविभागीय अधिकारी (उप संभाग) कार्यालय शामिल हैं।

  • युक्तियुक्तकरण के बाद प्रदेश में अब एक भी स्कूल शिक्षकविहीन नहीं, शिक्षा में गुणवत्ता और नवाचार पर सरकार का विशेष जोर – मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय

    युक्तियुक्तकरण के बाद प्रदेश में अब एक भी स्कूल शिक्षकविहीन नहीं, शिक्षा में गुणवत्ता और नवाचार पर सरकार का विशेष जोर – मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय

    AI के युग में शिक्षक बनें विद्यार्थियों के मार्गदर्शक, तकनीक के विवेकपूर्ण उपयोग की दें सीख : राज्यपाल डेका

    शिक्षक नई पीढ़ी के निर्माता, विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण में शिक्षा की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण : मुख्यमंत्री साय

    लोकभवन में राज्य स्तरीय शिक्षक सम्मान समारोह का गरिमामय आयोजन

    प्रदेश के 63 उत्कृष्ट शिक्षक राज्यपाल पुरस्कार से सम्मानित, चार शिक्षकों को मिला राज्य शिक्षक सम्मान स्मृति पुरस्कार

    युक्तियुक्तकरण के बाद प्रदेश में अब एक भी स्कूल शिक्षकविहीन नहीं, शिक्षा में गुणवत्ता और नवाचार पर सरकार का विशेष जोर – मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय

    रायपुर 
     राज्यपाल रमेन डेका और मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने शिक्षक दिवस के अवसर पर आज लोकभवन के छत्तीसगढ़ मण्डपम् में आयोजित राज्य स्तरीय शिक्षक सम्मान समारोह में शिक्षा के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान देने वाले शिक्षक-शिक्षिकाओं को सम्मानित कर उन्हें बधाई एवं शुभकामनाएं दीं। समारोह में वर्ष 2025-26 के लिए प्रदेश के 63 उत्कृष्ट शिक्षकों को राज्यपाल पुरस्कार से सम्मानित किया गया। चार उत्कृष्ट शिक्षकों को राज्य शिक्षक सम्मान स्मृति पुरस्कार प्रदान किए गए। इस अवसर पर स्कूल शिक्षा मंत्री गजेन्द्र यादव ने वर्ष 2026-27 के राज्य शिक्षक सम्मान के लिए चयनित 64 शिक्षकों के नामों की घोषणा भी की।

    समारोह के मुख्य अतिथि राज्यपाल रमेन डेका ने शिक्षक दिवस की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि तेजी से बदलती दुनिया में शिक्षा और शिक्षक की भूमिका भी व्यापक हो रही है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के इस दौर में शिक्षकों और विद्यार्थियों का नई तकनीकों से परिचित होना आवश्यक है, लेकिन उससे भी अधिक जरूरी तकनीक का विवेकपूर्ण, जिम्मेदार और मानवीय मूल्यों के अनुरूप उपयोग है। उन्होंने कहा कि AI हमारा सहायक बने, हमारा नियंत्रक नहीं। शिक्षक विद्यार्थियों को तकनीक का उपयोग ज्ञान अर्जित करने, नवाचार करने और अपने व्यक्तित्व को निखारने के लिए प्रेरित करें।

    राज्यपाल डेका ने कहा कि आज गूगल और डिजिटल तकनीक के माध्यम से हमारे पास सूचनाओं का विशाल संसार उपलब्ध है। इसके बावजूद हमें यह ध्यान रखना होगा कि तकनीक पर अत्यधिक निर्भरता स्वतंत्र चिंतन और बौद्धिक विकास को प्रभावित न करे। दुनिया के अनेक देशों में विद्यार्थियों द्वारा स्मार्टफोन और सोशल मीडिया के उपयोग को लेकर गंभीर विचार-विमर्श हो रहा है। तकनीक हमें जानकारी उपलब्ध करा सकती है, लेकिन संस्कार, संवेदना, अनुशासन, प्रेरणा और जीवन की सही दिशा गुरु से ही मिलती है। इसलिए बदलते समय में शिक्षक की भूमिका पहले से अधिक महत्वपूर्ण हो गई है।

    उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 ने देश की शिक्षा व्यवस्था को अधिक व्यावहारिक, कौशल आधारित, बहुभाषी और विद्यार्थी-केंद्रित बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण आधार तैयार किया है। आने वाले समय में शिक्षा के स्वरूप में व्यापक बदलाव देखने को मिलेंगे। ऐसे में शिक्षकों को निरंतर अपने ज्ञान और कौशल को अद्यतन करना होगा। साथ ही विद्यार्थियों की रुचि और प्रतिभा को पहचानकर उन्हें सही विषय और करियर चुनने में मार्गदर्शन देना होगा। विद्यार्थियों की काउंसलिंग भी शिक्षक की महत्वपूर्ण भूमिका का हिस्सा है।

    राज्यपाल ने कहा कि शिक्षण केवल एक नौकरी नहीं, बल्कि एक महान और गरिमामय दायित्व है। शिक्षक अपने ज्ञान के साथ-साथ अपने आचरण से भी विद्यार्थियों को शिक्षित करते हैं। बच्चे अपने शिक्षकों को आदर्श के रूप में देखते हैं, इसलिए शिक्षकों को अपने दायित्वों का पूरी निष्ठा, संवेदनशीलता और समर्पण के साथ निर्वहन करना चाहिए। प्रत्येक विद्यार्थी कैसे आगे बढ़े, उसकी प्रतिभा कैसे निखरे और उसका भविष्य कैसे बेहतर बने, यह शिक्षक की सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए।

    अपने विद्यार्थी जीवन की स्मृतियां साझा करते हुए राज्यपाल डेका ने कहा कि शिक्षक दिवस उन्हें प्राथमिक शिक्षा से लेकर उच्च शिक्षा तक की अपनी यात्रा की याद दिलाता है। पहले शिक्षक और विद्यार्थी के बीच आदर, आत्मीयता और विश्वास का अत्यंत गहरा संबंध होता था। सीमित संसाधनों के बावजूद शिक्षक पूरी सेवा भावना और समर्पण के साथ विद्यार्थियों का भविष्य संवारते थे। यही समर्पण और आत्मीयता शिक्षक-विद्यार्थी संबंध की वास्तविक शक्ति है।

    उन्होंने कहा कि शिक्षक और विद्यार्थी का संबंध केवल कक्षा तक सीमित नहीं होता। शिक्षक विद्यार्थी के व्यक्तित्व, सोच और भविष्य निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। शिक्षक अपने विद्यार्थियों की रुचि, क्षमता और विशेष प्रतिभा को पहचानें तथा उन्हें जीवन में सही दिशा चुनने के लिए प्रेरित करें।

    राज्यपाल डेका ने शासकीय सेवा में स्थानांतरण को सामान्य प्रशासनिक प्रक्रिया बताते हुए कहा कि जहां भी दायित्व मिले, उसे सहजता से स्वीकार कर पूरी जिम्मेदारी और समर्पण के साथ कार्य करना चाहिए। उन्होंने सम्मानित सभी शिक्षक-शिक्षिकाओं को बधाई देते हुए विश्वास व्यक्त किया कि प्रदेश के शिक्षक अपने ज्ञान, अनुभव और समर्पण से छत्तीसगढ़ की नई पीढ़ी को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाएंगे।

    शिक्षा का उद्देश्य सक्षम नागरिक और श्रेष्ठ समाज का निर्माण : मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय

    समारोह की अध्यक्षता करते हुए मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने शिक्षक दिवस पर सभी गुरुजनों को शुभकामनाएं दीं और राज्य स्तरीय सम्मान प्राप्त करने वाले शिक्षक-शिक्षिकाओं को बधाई दी। उन्होंने कहा कि यह सम्मान शिक्षकों के समर्पण, कठिन परिश्रम, नवाचार और विद्यार्थियों के भविष्य निर्माण के लिए किए गए उत्कृष्ट कार्यों का सम्मान है। शिक्षक वास्तव में राष्ट्र और नई पीढ़ी के निर्माता हैं।

    मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने महान शिक्षाविद् एवं पूर्व राष्ट्रपति भारत रत्न डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन का पुण्य स्मरण करते हुए उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने कहा कि भारत की शिक्षा परंपरा अत्यंत समृद्ध और गौरवशाली रही है। हमारे यहां शिक्षा का उद्देश्य कभी केवल डिग्री या नौकरी प्राप्त करना नहीं रहा, बल्कि व्यक्ति को ज्ञानवान, संस्कारवान, सक्षम और जिम्मेदार नागरिक बनाना रहा है। ऐसी शिक्षा ही व्यक्ति को समाज और राष्ट्र के विकास में सार्थक योगदान देने के लिए तैयार करती है।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार और प्रत्येक बच्चे तक बेहतर शैक्षणिक अवसर पहुंचाने के लिए निरंतर कार्य कर रही है। पिछले ढाई वर्षों में शिक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ करने की दिशा में अनेक महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए हैं। युक्तियुक्तकरण के बाद प्रदेश में अब एक भी स्कूल शिक्षकविहीन नहीं है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 को लागू करते हुए शिक्षा को संस्कार, कौशल और रोजगार से जोड़ने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

    उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ की भौगोलिक, सामाजिक और भाषायी विविधता को ध्यान में रखते हुए शिक्षा व्यवस्था में स्थानीय आवश्यकताओं को भी महत्व दिया जा रहा है। बस्तर अंचल में बच्चों को उनकी स्थानीय बोली के माध्यम से प्रारंभिक शिक्षा देने की पहल की गई है। इससे बच्चों के लिए सीखने की प्रक्रिया अधिक सहज और प्रभावी बन रही है। शासकीय विद्यालयों में पैरेंट्स-टीचर मीट को बढ़ावा देकर अभिभावकों को भी बच्चों की शिक्षा और विद्यालय की गतिविधियों से सक्रिय रूप से जोड़ा जा रहा है।

    मुख्यमंत्री साय ने कहा कि प्रदेश के 341 विद्यालयों का चयन पीएम योजना के अंतर्गत किया गया है। इन विद्यालयों को आधुनिक सुविधाओं, बेहतर शैक्षणिक वातावरण और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के केंद्र के रूप में विकसित किया जा रहा है। इसके साथ ही स्वामी विवेकानंद के नाम पर 150 विद्यालय प्रारंभ किए जा रहे हैं। शिक्षकों की लंबे समय से लंबित पदोन्नतियों को भी सरकार ने प्राथमिकता के साथ पूरा किया है।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि बस्तर जैसे दूरस्थ और संवेदनशील क्षेत्रों के बच्चों को भी गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के समान अवसर उपलब्ध कराना सरकार की प्राथमिकता है। इसी उद्देश्य से ओरछा और जगरगुंडा में एजुकेशन सिटी विकसित की जा रही हैं। इन प्रयासों से दूरस्थ अंचलों के बच्चों को बेहतर शैक्षणिक वातावरण और आगे बढ़ने के नए अवसर मिलेंगे।

    मुख्यमंत्री साय ने कहा कि वर्ष 2047 तक विकसित भारत के साथ विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण का हमारा लक्ष्य है और इस लक्ष्य को प्राप्त करने में शिक्षा विभाग तथा हमारे शिक्षकों की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण होगी। आज जिन बच्चों को शिक्षक ज्ञान, संस्कार और कौशल दे रहे हैं, वही आने वाले वर्षों में छत्तीसगढ़ और देश के विकास का नेतृत्व करेंगे। इसलिए एक शिक्षक का योगदान केवल एक विद्यार्थी तक सीमित नहीं रहता, बल्कि उसका प्रभाव आने वाली पीढ़ियों और पूरे समाज पर पड़ता है।

    AI आधारित स्मार्ट स्कूलों के माध्यम से नवाचार को बढ़ावा : स्कूल शिक्षा मंत्री

    समारोह के विशिष्ट अतिथि स्कूल शिक्षा मंत्री गजेन्द्र यादव ने शिक्षक दिवस की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि राज्य सरकार शिक्षा में आधुनिक तकनीक और नवाचार के उपयोग को निरंतर बढ़ावा दे रही है। प्रदेश में AI आधारित स्मार्ट स्कूल विकसित किए जा रहे हैं। इसके साथ ही विद्यार्थियों में अच्छे संस्कार, रचनात्मकता और सामाजिक जिम्मेदारी की भावना विकसित करने के लिए विविध गतिविधियों को प्रोत्साहित किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि शिक्षा में नवाचार के क्षेत्र में छत्तीसगढ़ को अग्रणी राज्यों में शामिल करने के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं।

    स्कूल शिक्षा मंत्री यादव ने इस अवसर पर आगामी वर्ष 2026-27 के राज्य शिक्षक सम्मान के लिए चयनित 64 शिक्षक-शिक्षिकाओं के नामों की घोषणा की और उन्हें शुभकामनाएं दीं।

    चार शिक्षकों को राज्य शिक्षक सम्मान स्मृति पुरस्कार

    राज्य स्तरीय समारोह में चार उत्कृष्ट शिक्षकों को विशिष्ट राज्य शिक्षक सम्मान स्मृति पुरस्कार से सम्मानित किया गया। खैरागढ़-छुईखदान-गंडई जिले के राजेश कुमार प्रजापति को डॉ. पदुमलाल पुन्नालाल बख्शी स्मृति पुरस्कार, कोरबा जिले के कामता प्रसाद जायसवाल को डॉ. बलदेव प्रसाद मिश्र स्मृति पुरस्कार, दुर्ग जिले की श्रीमती प्रज्ञा सिंह को डॉ. मुकुटधर पाण्डेय स्मृति पुरस्कार तथा सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले की श्रीमती प्रियंका गोस्वामी को गजानन माधव मुक्तिबोध स्मृति पुरस्कार प्रदान किया गया।

    इसके साथ ही प्रधान पाठक, व्याख्याता, व्याख्याता एल.बी., शिक्षक एल.बी., सहायक शिक्षक तथा सहायक शिक्षक एल.बी. संवर्ग के कुल 63 उत्कृष्ट शिक्षकों को राज्यपाल पुरस्कार से सम्मानित किया गया। सम्मानित शिक्षकों के योगदान और नवाचारी प्रयासों की सराहना करते हुए अतिथियों ने उनसे प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था को और बेहतर बनाने में निरंतर योगदान देने का आह्वान किया।

    समारोह में स्कूल शिक्षा विभाग के सचिव डॉ. कमलप्रीत सिंह ने स्वागत उद्बोधन दिया। संचालक लोक शिक्षण ऋतुराज रघुवंशी ने आभार प्रदर्शन किया।

    इस अवसर पर उच्च शिक्षा मंत्री टंक राम वर्मा, राज्यपाल के सचिव डॉ. सी.आर. प्रसन्ना, स्कूल शिक्षा विभाग के विशेष सचिव संतोष देवांगन सहित विभागीय अधिकारी, प्रदेश के विभिन्न जिलों से आए शिक्षक-शिक्षिकाएं एवं अन्य गणमान्यजन उपस्थित थे।

  • सूचनाओं के महासागर में विवेक और जीवन-मूल्यों की राह दिखाता शिक्षक

    सूचनाओं के महासागर में विवेक और जीवन-मूल्यों की राह दिखाता शिक्षक

    सीपत

    सब धरती कागद करूँ, लेखनी सब बनराय।
    सात समुद्र की मसि करूँ, गुरु गुण लिखा न जाय॥”

    संत कबीरदास की ये पंक्तियाँ गुरु की महिमा को शब्दों में बाँधने की असमर्थता व्यक्त करती हैं। सच ही है, शिक्षक के योगदान को किसी एक दिवस या कुछ शब्दों में समेट पाना संभव नहीं। शिक्षक केवल ज्ञान देने वाला नहीं, बल्कि विद्यार्थी के व्यक्तित्व, संस्कार और चरित्र को आकार देने वाला सच्चा शिल्पकार है।

    बचपन में विद्यालय में गाई जाने वाली पंक्तियाँ—“शिक्षक नई सुबह का सूरज, नई रोशनी का निर्माता, वह पारस मणि है, जिसको छूकर लोहा कंचन बन जाता है”—तब केवल गीत की पंक्तियाँ हुआ करती थीं। समय और जीवन के अनुभवों ने बाद में इन शब्दों के गहरे अर्थ समझाए और यह अनुभूति कराई कि शिक्षक वास्तव में वह प्रकाश है, जो अनेक जीवनों को दिशा देता है।

    आज ज्ञान हर दिशा से बरस रहा है। तकनीक के माध्यम से मोबाइल और इंटरनेट पर सूचनाओं का विशाल संसार हर समय उपलब्ध है। ऐसे समय में शिक्षक की भूमिका और भी महत्वपूर्ण हो जाती है, क्योंकि तकनीक जानकारी दे सकती है, लेकिन क्या ग्रहण करना है और क्या छोड़ देना है—इसका विवेक एक सच्चा शिक्षक ही विकसित करता है।

    शिक्षक केवल पाठ्यक्रम पूरा नहीं करता, वह जीवन को समझने की दृष्टि देता है। विद्यार्थियों की क्षमताओं और आवश्यकताओं को समझते हुए वह ज्ञान के साथ व्यवहारिकता, मानवीय संवेदना, संस्कार और जीवन जीने की कला सिखाता है।

    प्रकृति भी हमारी महान शिक्षिका है। माँ वसुंधरा से धैर्य, गगन से विशालता, अग्नि से तेज, जल से निर्मलता और वायु से स्वतंत्रता की सीख मिलती है। उसी प्रकार शिक्षक भी अपने आचरण और मार्गदर्शन से विद्यार्थियों के भीतर जीवन के अनेक मूल्यों का संचार करता है।

    शिक्षक की सबसे बड़ी सफलता यह नहीं कि विद्यार्थी कितना जानता है, बल्कि यह है कि वह अपने ज्ञान के साथ कितना अच्छा मनुष्य बनता है।
    शिक्षक दिवस पर भारत के पूर्व राष्ट्रपति एवं महान शिक्षाविद् डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन को नमन करते हुए उन सभी गुरुजनों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करना आवश्यक है, जिन्होंने अपने ज्ञान, संस्कार और स्नेह से अनगिनत जीवनों को दिशा दी।
    क्योंकि शिक्षक वह दीप है, जो स्वयं जलकर भी दूसरों के जीवन में प्रकाश भरता रहता है।

    लेखिका : बीना निगम
    शिक्षिका, बाल भारती पब्लिक स्कूल, सीपत

  • नई लेदरी में गूंजा नंदलाल के जन्म का उल्लास, 12 दिनों तक श्री राधा-कृष्ण मंदिर में सजेगा आस्था और भक्ति का ब्रजधाम

    नई लेदरी में गूंजा नंदलाल के जन्म का उल्लास, 12 दिनों तक श्री राधा-कृष्ण मंदिर में सजेगा आस्था और भक्ति का ब्रजधाम

    नई लेदरी में गूंजा नंदलाल के जन्म का उल्लास, 12 दिनों तक श्री राधा-कृष्ण मंदिर में सजेगा आस्था और भक्ति का ब्रजधाम

    मनेन्द्रगढ़/एमसीबी

    नई लेदरी के हृदय स्थल गांधी चौक स्थित श्री राधा-कृष्ण मंदिर इन दिनों भक्ति, आस्था और उल्लास के रंगों से सराबोर है। भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव को लेकर मंदिर परिसर में ऐसा आध्यात्मिक वातावरण निर्मित हुआ है, मानो नई लेदरी की धरती पर स्वयं वृंदावन उतर आया हो। श्री राधा-कृष्ण मंदिर समिति के तत्वावधान में इस वर्ष भी श्रीकृष्ण जन्माष्टमी महापर्व पूरे श्रद्धा और भव्यता के साथ मनाया जा रहा है।
    मंदिर समिति के सचिव ने बताया कि यहां भगवान श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव केवल एक दिन नहीं, बल्कि पूरे बारह दिनों तक श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया जाता है। इन बारह दिनों के दौरान प्रतिदिन विभिन्न रंगारंग एवं धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। अंतिम चरण में हवन और भंडारे के साथ इस महापर्व का विधिवत समापन होता है। यही कारण है कि जन्माष्टमी के इन बारह दिनों में श्री राधा-कृष्ण मंदिर श्रद्धालुओं के लिए आस्था का केंद्र ही नहीं, बल्कि साक्षात वृंदावन की अनुभूति कराने वाला पवित्र धाम बन जाता है।

    श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के पावन अवसर पर प्रातःकाल से ही मंदिर में श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा। हाथों में पूजा की थाली, हृदय में भक्ति और आंखों में कान्हा के दर्शन की लालसा लिए भक्त मंदिर पहुंचे। भगवान श्रीकृष्ण की मनमोहक झांकी के दर्शन कर श्रद्धालुओं ने सुख, शांति, समृद्धि और खुशहाल जीवन की कामना की। मंदिर परिसर में गूंजते भजन और जयकारों ने वातावरण को पूरी तरह कृष्णमय कर दिया।

    इस अवसर पर श्री राधा-कृष्ण महिला रामायण समिति वार्ड क्रमांक-04 द्वारा संगीतमय रामायण एवं भजनों की मनमोहक प्रस्तुति दी गई। भक्ति से ओत-प्रोत इन प्रस्तुतियों ने उपस्थित श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया। वहीं नन्हे-मुन्ने बच्चों ने श्री राधा-कृष्ण की मनमोहक झांकी प्रस्तुत कर सभी का मन जीत लिया। बच्चों द्वारा भगवान श्रीकृष्ण की विभिन्न बाल लीलाओं का रंगारंग चित्रण देखकर श्रद्धालुओं के चेहरों पर खुशी और वात्सल्य के भाव साफ दिखाई दिए।
    जैसे-जैसे रात गहराती गई, श्रद्धालुओं का उत्साह और बढ़ता गया। घड़ी की सुइयां जैसे ही रात्रि 12 बजे के करीब पहुंचीं, पूरा मंदिर परिसर “नंद के घर आनंद भयो, जय कन्हैया लाल की” के जयघोष से गूंज उठा। आतिशबाजी और पटाखों की गूंज के बीच भगवान श्रीकृष्ण के जन्म का उल्लास चरम पर पहुंच गया। जन्मोत्सव के पश्चात भगवान की भव्य आरती की गई। महिलाओं ने बधाई गीत और सोहर गाकर नंदलाल के जन्म की खुशियां मनाईं।

    अंत में श्रद्धालुओं के बीच भगवान श्रीकृष्ण का प्रसाद वितरित किया गया। प्रसाद ग्रहण करते हुए भक्तों के चेहरों पर श्रद्धा और संतोष की झलक दिखाई दी। जन्माष्टमी का यह आयोजन केवल धार्मिक उत्सव नहीं, बल्कि नई लेदरी की सामाजिक और सांस्कृतिक एकता की सुंदर तस्वीर भी प्रस्तुत करता है, जहां हर उम्र के लोग मिलकर भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव को प्रेम, भक्ति और उल्लास के साथ मनाते हैं।
    बारह दिनों तक चलने वाला यह महापर्व आने वाले दिनों में भी श्रद्धालुओं को भक्ति, संगीत, संस्कृति और धार्मिक आस्था से जोड़ता रहेगा। श्री राधा-कृष्ण मंदिर में उमड़ता जनसैलाब यही संदेश दे रहा है कि जहां श्रद्धा होती है, वहां भगवान की अनुभूति स्वयं होने लगती है और जहां भगवान कृष्ण का नाम गूंजता है, वहां जीवन में आनंद और उम्मीद की नई रोशनी जन्म लेती है।

  • CGPSC State Service Mains 2025 Result को लेकर स्थिति स्पष्ट, आयोग ने दी जानकारी

    CGPSC State Service Mains 2025 Result को लेकर स्थिति स्पष्ट, आयोग ने दी जानकारी

    सीजीपीएससी ने राज्य सेवा मुख्य परीक्षा-2025 के परिणाम को लेकर स्थिति की स्पष्ट

    795 के स्थान पर 608 अभ्यर्थी ही साक्षात्कार के लिए चिन्हांकित, न्यूनतम अर्हकारी अंक नहीं पाने के कारण संख्या हुई कम

    पुनर्मूल्यांकन और पुनर्गणना का प्रावधान नहीं, सोशल मीडिया पर प्रसारित भ्रामक जानकारियों से बचने की अपील

    रायपुर
    छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग ने राज्य सेवा मुख्य परीक्षा-2025 के माध्यम से साक्षात्कार के लिए चिन्हांकित अभ्यर्थियों की संख्या को लेकर सोशल मीडिया पर फैल रही भ्रांतियों को स्पष्ट किया है। आयोग ने कहा है कि राज्य सेवा परीक्षा-2025 में निर्धारित संख्या से कम अभ्यर्थियों का चिन्हांकन किसी त्रुटि के कारण नहीं, बल्कि निर्धारित न्यूनतम अर्हकारी अंक प्राप्त नहीं करने के कारण हुआ है।

    आयोग के अनुसार, राज्य सेवा परीक्षा-2025 के विज्ञापन की कंडिका 3 (iv) एवं छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग प्रक्रिया नियम की कंडिका 7 के तहत प्रत्येक प्रश्न-पत्र में अनारक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों के लिए न्यूनतम 33 प्रतिशत तथा आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों के लिए न्यूनतम 23 प्रतिशत अंक प्राप्त करना अनिवार्य है। परीक्षा में कुछ अभ्यर्थियों द्वारा निर्धारित अर्हकारी अंक प्राप्त नहीं किए जाने के कारण साक्षात्कार के लिए चिन्हांकित अभ्यर्थियों की संख्या वांछित संख्या से कम हो सकती है। राज्य सेवा मुख्य परीक्षा-2025 में भी इसी कारण 795 अभ्यर्थियों के स्थान पर कुल 608 अभ्यर्थियों को साक्षात्कार के लिए चिन्हांकित किया गया है।

    पुनर्मूल्यांकन और पुनर्गणना का प्रावधान नहीं

    आयोग ने स्पष्ट किया है कि विज्ञापन की कंडिका 11 (V) के अनुसार आयोग द्वारा आयोजित परीक्षाओं में पुनर्मूल्यांकन तथा पुनर्गणना का कोई प्रावधान नहीं है। इसलिए किसी भी प्रश्न-पत्र के संबंध में पुनर्मूल्यांकन अथवा पुनर्गणना की प्रक्रिया नहीं की जा सकती।

    वेबसाइट पर उपलब्ध होगी मेरिट सूची और कट ऑफ

    आयोग ने बताया कि चयन परिणाम जारी होने के बाद प्रारंभिक एवं मुख्य परीक्षा में अभ्यर्थियों के प्राप्तांकों की मेरिट सूची तथा मुख्य परीक्षा की कट ऑफ आयोग की वेबसाइट पर जारी की जाती है। इसके अतिरिक्त अभ्यर्थी सूचना का अधिकार अधिनियम के तहत प्रारंभिक परीक्षा की ओएमआर उत्तर पत्रक तथा मुख्य परीक्षा की प्रश्न सह उत्तर पुस्तिका की प्रति प्राप्त कर अपने परीक्षा परिणाम के संबंध में जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।

    प्रश्नवार और पहचान रहित मूल्यांकन प्रक्रिया

    आयोग ने कहा कि सभी लिखित परीक्षाओं का मूल्यांकन विषय विशेषज्ञों के माध्यम से गंभीरता और निष्पक्षता के साथ कराया जाता है। राज्य सेवा मुख्य परीक्षा में प्रश्नवार मूल्यांकन की प्रक्रिया अपनाई जाती है, जो पूरी तरह पहचान रहित होती है। इससे मूल्यांकन कार्य में शामिल किसी भी व्यक्ति के लिए यह जानना संभव नहीं होता कि संबंधित उत्तर पुस्तिका किस अभ्यर्थी की है।

    आयोग के अनुसार, प्रत्येक अभ्यर्थी की उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन में बड़ी संख्या में विषय विशेषज्ञ मूल्यांकनकर्ता शामिल होते हैं। निर्धारित प्रक्रिया, नियमों एवं निर्देशों के माध्यम से मूल्यांकन की शुचिता, गोपनीयता और निष्पक्षता सुनिश्चित की जाती है।

    भ्रामक जानकारी से प्रभावित न होने की अपील

    छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग ने अभ्यर्थियों से अपील की है कि वे सोशल मीडिया एवं अन्य माध्यमों से प्रसारित की जा रही भ्रामक जानकारियों से प्रभावित न हों। आयोग ने कहा कि राज्य सेवा मुख्य परीक्षा-2025 के माध्यम से साक्षात्कार के लिए अभ्यर्थियों के चिन्हांकन की प्रक्रिया निर्धारित नियमों एवं निर्देशों के अनुरूप पूर्णतः सही ढंग से की गई है।

  • भगवान श्रीकृष्ण का जीवन धर्म और लोककल्याण के मार्ग पर चलने की सीख देता है: सीएम साय

    भगवान श्रीकृष्ण का जीवन धर्म और लोककल्याण के मार्ग पर चलने की सीख देता है: सीएम साय

    भगवान श्रीकृष्ण का जीवन हमें धर्म, कर्तव्य और लोककल्याण के मार्ग पर चलने की देता है प्रेरणा – मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय

    भगवान श्रीकृष्ण और राधारानी के दर्शन कर मुख्यमंत्री ने किया शंख अभिषेक, प्रदेशवासियों की सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना

    श्रीकृष्ण जन्माष्टमी महा-महोत्सव में शामिल हुए मुख्यमंत्री, भक्तों के साथ किया हरे कृष्ण महामंत्र का घोष

    रामलला दर्शन और मुख्यमंत्री तीर्थ दर्शन योजना से श्रद्धालुओं की तीर्थ यात्रा की अभिलाषा हो रही पूरी

    प्रदेश के प्रमुख धार्मिक एवं आस्था केंद्रों को भव्य स्वरूप देने की दिशा में तेजी से हो रहा कार्य

    रायपुर
    मुख्यमंत्री विष्णु देव साय आज राजधानी रायपुर के टाटीबंध स्थित इस्कॉन रायपुर के राधा रासबिहारी जी मंदिर में आयोजित श्रीकृष्ण जन्माष्टमी महा-महोत्सव में शामिल हुए। भक्तिमय वातावरण के बीच मुख्यमंत्री साय ने भगवान श्रीकृष्ण और राधारानी के दर्शन कर विधि-विधान से पूजा-अर्चना एवं शंख अभिषेक किया और प्रदेशवासियों के सुख-समृद्धि, खुशहाली और मंगलमय जीवन की कामना की।

    मुख्यमंत्री साय ने श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के पावन अवसर पर प्रदेशवासियों और उपस्थित श्रद्धालुओं को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि भगवान श्रीकृष्ण का संपूर्ण जीवन मानव समाज को धर्म, कर्तव्य और लोककल्याण के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है। श्रीमद्भगवद्गीता के माध्यम से भगवान श्रीकृष्ण ने कर्मयोग का जो संदेश दिया, वह आज भी मानवता को जीवन की चुनौतियों के बीच अपने कर्तव्य पथ पर दृढ़तापूर्वक आगे बढ़ने की दिशा दिखाता है।

    मुख्यमंत्री साय ने कहा कि जन्माष्टमी केवल भगवान श्रीकृष्ण के प्राकट्य का उत्सव नहीं, बल्कि उनके जीवन-दर्शन और आदर्शों को आत्मसात करने का भी अवसर है। भगवान श्रीकृष्ण ने अपने जीवन के माध्यम से अन्याय के विरुद्ध खड़े होने, धर्म की रक्षा करने और समाज के कमजोर वर्ग के साथ खड़े रहने का संदेश दिया। उनके विचार युगों-युगों से भारतीय समाज को प्रेरित करते आ रहे हैं।

    इस अवसर पर मंदिर परिसर ‘हरे कृष्ण, हरे कृष्ण, कृष्ण कृष्ण, हरे हरे’ के महामंत्र से गुंजायमान रहा। मुख्यमंत्री साय ने भी भक्तवृंद के साथ हरे कृष्ण महामंत्र का घोष किया और वृंदावन बिहारीलाल के प्राकट्य उत्सव पर उनका आशीर्वाद प्राप्त किया। मंदिर में बड़ी संख्या में उपस्थित श्रद्धालुओं के उत्साह और भक्तिभाव से पूरा वातावरण कृष्णमय हो गया।

    छत्तीसगढ़ की धार्मिक विरासत हमारी अमूल्य धरोहर

    मुख्यमंत्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ की धरती प्राचीन काल से ही धर्म, अध्यात्म और संस्कृति की पुण्यभूमि रही है। यह माता कौशल्या का मायका और प्रभु श्रीराम का ननिहाल है। हमारे गांवों, नगरों, मंदिरों, तीर्थों और लोक परंपराओं में हमारी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत जीवंत है। इस गौरवशाली धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान को सहेजना, उसका संवर्धन करना तथा नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ना राज्य सरकार की प्राथमिकता है।

    उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ में भोरमदेव, गंधेश्वर महादेव, मधेश्वर महादेव और कुलेश्वर महादेव जैसे प्रसिद्ध शिवधाम हैं, वहीं मां बमलेश्वरी, रतनपुर की मां महामाया, माता दंतेश्वरी और मां चंद्रहासिनी जैसे शक्तिपीठ एवं आस्था केंद्र प्रदेश की आध्यात्मिक पहचान को समृद्ध करते हैं। राज्य सरकार इन धार्मिक स्थलों पर श्रद्धालुओं के लिए बेहतर सुविधाएं विकसित करने और उन्हें भव्य स्वरूप देने की दिशा में निरंतर कार्य कर रही है।

    मुख्यमंत्री साय ने कहा कि ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व के भोरमदेव मंदिर क्षेत्र को प्रसाद योजना के अंतर्गत लगभग 150 करोड़ रुपए की लागत से विकसित किया जा रहा है। इसके माध्यम से धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा मिलने के साथ ही स्थानीय स्तर पर रोजगार और आजीविका के नए अवसर भी सृजित होंगे।

    हर श्रद्धालु को तीर्थ दर्शन का अवसर देने का प्रयास

    मुख्यमंत्री साय ने कहा कि आस्था हमारे समाज की बड़ी शक्ति है। आर्थिक अथवा अन्य कारणों से कोई श्रद्धालु तीर्थ दर्शन की अपनी अभिलाषा से वंचित न रहे, इस भावना के साथ राज्य सरकार विभिन्न योजनाओं का संचालन कर रही है।

    उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में अयोध्या में भव्य श्रीराम मंदिर में रामलला के विराजमान होने के बाद छत्तीसगढ़ के लोगों में अपने आराध्य के दर्शन को लेकर अपार उत्साह है। राज्य सरकार की श्रीरामलला दर्शन योजना के माध्यम से प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों से श्रद्धालुओं को अयोध्याधाम की यात्रा कराई जा रही है। अब तक 50 हजार से अधिक श्रद्धालु इस योजना के माध्यम से प्रभु श्रीरामलला के दर्शन कर चुके हैं।

    मुख्यमंत्री साय ने कहा कि इसी प्रकार मुख्यमंत्री तीर्थ दर्शन योजना के अंतर्गत प्रदेश के वृद्धजनों को देश के प्रमुख तीर्थ स्थलों के दर्शन का अवसर उपलब्ध कराया जा रहा है। जीवन के इस पड़ाव पर तीर्थ दर्शन की उनकी अभिलाषा पूरी होते देखना सरकार के लिए भी संतोष का विषय है।

    मुख्यमंत्री साय ने कहा कि धार्मिक और सांस्कृतिक पर्यटन के विकास से हमारी विरासत का संरक्षण तो होता ही है, साथ ही स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलती है। धार्मिक स्थलों पर सुविधाओं के विस्तार से पर्यटन बढ़ता है और स्थानीय युवाओं, स्व-सहायता समूहों, छोटे व्यवसायियों तथा कारीगरों के लिए रोजगार और आय के नए अवसर निर्मित होते हैं। सरकार का प्रयास है कि छत्तीसगढ़ के प्रमुख आस्था केंद्र राष्ट्रीय स्तर पर अपनी विशिष्ट पहचान बनाएं।

    भक्ति और उल्लास के साथ मनाया जा रहा महा-महोत्सव

    उल्लेखनीय है कि इस्कॉन रायपुर के 26वें वर्ष में प्रवेश के उपलक्ष्य में 03 से 05 सितम्बर तक श्रीकृष्ण जन्माष्टमी महा-महोत्सव का आयोजन किया जा रहा है। महोत्सव के दौरान भगवान श्रीकृष्ण की आराधना, भजन-कीर्तन और विभिन्न धार्मिक अनुष्ठानों का आयोजन किया जा रहा है। बड़ी संख्या में श्रद्धालु महोत्सव में शामिल होकर भगवान श्रीकृष्ण और राधारानी के दर्शन एवं आशीर्वाद प्राप्त कर रहे हैं।

    इस अवसर पर राजस्व मंत्री टंकराम वर्मा, विधायक पुरन्दर मिश्रा, इस्कॉन रायपुर के पदाधिकारीगण, संतजन एवं बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित थे।

  • मंत्री  लक्ष्मी राजवाड़े की संवेदनशील पहल: आवेदन के 48 घंटे के भीतर दिव्यांग विष्णु लाल यादव को मिली इलेक्ट्रिक स्कूटी

    मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े की संवेदनशील पहल: आवेदन के 48 घंटे के भीतर दिव्यांग विष्णु लाल यादव को मिली इलेक्ट्रिक स्कूटी

    रायपुर

    महिला एवं बाल विकास तथा समाज कल्याण मंत्री  लक्ष्मी राजवाड़े ने दिव्यांगजन की समस्या पर त्वरित संवेदनशीलता दिखाते हुए आवेदन के महज 48 घंटे के भीतर सहायता उपलब्ध कराई। सूरजपुर जिले के ग्राम तेलईकछार निवासी दिव्यांग श्री विष्णु लाल यादव को उनकी आवश्यकता को देखते हुए विशेष तीन पहिया इलेक्ट्रिक स्कूटी उपलब्ध कराई गई।

    श्री विष्णु लाल यादव ने मंत्री  लक्ष्मी राजवाड़े को दिए आवेदन में बताया था कि पिछले वर्ष रायपुर जाते समय वे बस दुर्घटना का शिकार हो गए थे। दुर्घटना में गंभीर रूप से घायल होने के बाद वे दिव्यांग हो गए। घर से अस्पताल की दूरी अधिक होने के कारण इलाज और अन्य जरूरी कार्यों के लिए आवागमन में उन्हें काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा था। आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण वे स्वयं स्कूटी खरीदने में सक्षम नहीं थे।

    मंत्री  राजवाड़े के संज्ञान में मामला आते ही उन्होंने तत्काल सहायता के निर्देश दिए। निर्देशों के बाद संबंधित विभाग द्वारा आवश्यक कार्रवाई करते हुए महज दो दिनों में विष्णु लाल यादव को तीन पहिया इलेक्ट्रिक स्कूटी उपलब्ध करा दी गई।

    स्कूटी मिलने से विष्णु लाल यादव को अब अस्पताल जाने, उपचार कराने तथा रोजमर्रा के आवश्यक कार्यों के लिए आवागमन में सुविधा मिलेगी। उन्होंने सहायता के लिए मंत्री  लक्ष्मी राजवाड़े के प्रति आभार व्यक्त किया।

  • ’पीएम किसान सम्मान निधि की बचत से खरीदी पहली गाय, आज 10 गायों के साथ आत्मनिर्भर बने 75 वर्षीय परशुराम गुप्ता’

    ’पीएम किसान सम्मान निधि की बचत से खरीदी पहली गाय, आज 10 गायों के साथ आत्मनिर्भर बने 75 वर्षीय परशुराम गुप्ता’

    रायपुर

    प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में किसानों की आय बढ़ाने और उन्हें आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के उद्देश्य से संचालित प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना कई किसानों के लिए नई संभावनाओं का आधार बन रही है। ग्राम पंचायत महापल्ली के 75 वर्षीय किसान  परशुराम गुप्ता ने भी योजना के तहत प्राप्त राशि को केवल दैनिक जरूरतों में खर्च करने के बजाय बचत कर गौ-पालन की शुरुआत की और आज वे सफलतापूर्वक अपना व्यवसाय संचालित कर रहे हैं। 
              
    परशुराम गुप्ता ने वर्ष 2020 में प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के तहत मिलने वाली दो-दो हजार रुपए की किस्तों को बचाकर लगभग 10 हजार रुपए की पूंजी जुटाई। इसी राशि से उन्होंने पहली गाय खरीदी और गौ-पालन की शुरुआत की। इसके बाद उन्होंने धीरे-धीरे अपनी आय और संसाधनों को बढ़ाते हुए एक-एक कर गायों की संख्या में वृद्धि की। आज उनके पास 10 गाय हैं और वे नियमित रूप से दूध उत्पादन कर रहे हैं। वर्तमान में  गुप्ता प्रतिदिन लगभग 100 लीटर दूध बेचते हैं। वे दूध को स्थानीय डेयरी में 40 रुपए प्रति लीटर की दर से विक्रय करते हैं। इससे उनके गौ-पालन व्यवसाय का मासिक कारोबार लगभग 1 लाख 20 हजार रुपए तक पहुंच रहा है। खर्च निकालने के बाद होने वाली आय ने उनके परिवार की आर्थिक स्थिति को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
              
    75 वर्ष की आयु में भी  परशुराम गुप्ता पूरी लगन के साथ गौ-सेवा और गौ-पालन से जुड़े हुए हैं। वे बताते हैं कि बचपन से ही उन्हें पशुपालन का शौक था और गायों की सेवा उनके जीवन का अभिन्न हिस्सा रही है। प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि से प्राप्त राशि ने उन्हें अपने इस अनुभव और रुचि को आय के बेहतर माध्यम में बदलने की प्रारंभिक पूंजी उपलब्ध कराई।  गुप्ता कहते है कि शासकीय योजनाओं से मिलने वाली छोटी-छोटी आर्थिक सहायता का योजनाबद्ध उपयोग कर ग्रामीण क्षेत्र के किसान आत्मनिर्भरता की दिशा में मजबूत कदम बढ़ा सकते हैं। प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि की राशि से शुरू हुआ उनका छोटा प्रयास आज एक सफल गौ-पालन व्यवसाय के रूप में विकसित हो चुका है। यदि अनुभव, मेहनत और उपलब्ध संसाधनों का सही दिशा में उपयोग किया जाए तो उम्र कभी भी आत्मनिर्भर बनने की राह में बाधा नहीं बनती।

  • उफनती नदी में चट्टान पर फंसे ग्रामीण का डीडीआरएफ टीम ने किया सुरक्षित रेस्क्यू सूरजपुर में बड़ा हादसा टला

    उफनती नदी में चट्टान पर फंसे ग्रामीण का डीडीआरएफ टीम ने किया सुरक्षित रेस्क्यू सूरजपुर में बड़ा हादसा टला

    रायपुर

     उफनती नदियों में फंसे लोगों और ग्रामीणों के सुरक्षित रेस्क्यू के कई ऐसे मामले सामने आए हैं जहाँ प्रशासन, सेना और एसडीआरएफ (SDERF/SdRF) की टीमों ने जान जोखिम में डालकर लोगों की जान बचाई। सूरजपुर जिले के ओड़गी थाना क्षेत्र अंतर्गत ग्राम माढर में जिला प्रशासन और डीडीआरएफ (डिस्ट्रिक्ट डिजास्टर रिस्पांस फोर्स) की टीम ने त्वरित कार्रवाई करते हुए एक व्यक्ति की जान बचा ली। मछली पकड़ने के दौरान उफनती नदी के तेज बहाव में बहकर चट्टान पर फंसे ग्रामीण को घंटों की कड़ी मशक्कत के बाद सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया।

    ’मछली पकड़ने के दौरान बहाव की चपेट में आया ग्रामीण’        

    जानकारी के अनुसार, सूरजपुर जिले के ओड़गी के ग्राम माढर निवासी अशोक सोनपाकर नदी में मछली पकड़ने गए थे। इसी दौरान नदी का जलस्तर अचानक बढ़ गया और वे तेज बहाव की चपेट में आ गए। खुद को संभालते हुए वे नदी के बीचों-बीच स्थित एक चट्टान पर जाकर फंस गए। घटना की जानकारी मिलते ही भैयाथान एसडीएम ने तत्काल जिला प्रशासन को सूचित किया।

    ’विपरीत परिस्थितियों में चलाया गया रेस्क्यू ऑपरेशन’  

    सूचना मिलते ही जिला सेनानी संजय गुप्ता के निर्देश पर डीडीआरएफ की संयुक्त टीम तुरंत मौके पर पहुंची। उफनती नदी और विपरीत परिस्थितियों के बावजूद बचाव दल ने सूझबूझ और समन्वय के साथ जोखिम भरा रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया और अशोक सोनपाकर को सुरक्षित बाहर निकालकर सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया।

    ’बचाव टीम की महत्वपूर्ण भूमिका’    

    इस सफल रेस्क्यू अभियान में डीडीआरएफ संयुक्त टीम प्रभारी हवलदार बीरबल गुप्ता, आनंद चौबे, धनश्य नेताम, हंसलाल, देवनारायण, त्रिनेत्र सिंह, शिवनारायण सिंह, सिद्धू सिंह, रिकेश कुमार एवं विदेश सिंह की सराहनीय भूमिका रही।

    ’प्रशासन की नागरिकों से अपील’      

    सफल रेस्क्यू के बाद जिला प्रशासन ने आम नागरिकों से अपील की है कि लगातार हो रही भारी बारिश के कारण नदी-नालों का जलस्तर बढ़ा हुआ है। ऐसे में जल स्रोतों और तेज बहाव वाले क्षेत्रों के समीप जाने से बचें, सुरक्षा निर्देशों का कड़ाई से पालन करें और किसी भी आपात स्थिति में तुरंत प्रशासनिक अमले को सूचित करें।