Author: NewseDay

  • महिलाओं-बच्चों के सर्वोत्तम हित पर जोर, डिजिटल अनुदान प्रक्रिया के लिए 230 प्रतिनिधि प्रशिक्षित

    महिलाओं-बच्चों के सर्वोत्तम हित पर जोर, डिजिटल अनुदान प्रक्रिया के लिए 230 प्रतिनिधि प्रशिक्षित

    अनुदान प्रक्रिया में डिजिटल पारदर्शिता की नई पहल

    230 प्रतिनिधियों को दिया गया पोर्टल संचालन का प्रशिक्षण

    महिलाओं और बच्चों का सर्वोत्तम हित सर्वोच्च प्राथमिकता : आयुक्त संदीप

    भोपाल 

    महिला एवं बाल विकास विभाग ने मिशन शक्ति और मिशन वात्सल्य से जुड़ी अशासकीय संस्थाओं को दिए जाने वाले अनुदान की प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी, सरल, जवाबदेह और समयबद्ध बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया है। विभाग द्वारा विकसित ‘अनुदान पोर्टल’ का ऑनलाइन शुभारंभ महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती निर्मला भूरिया ने 15 सितम्बर को किया था। पोर्टल के प्रभावी संचालन के लिए बुधवार को भोपाल के राष्ट्रीय होटल प्रबंधन संस्थान, शाहपुरा में प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिसमें करीब 230 प्रतिनिधियों और अधिकारियों ने सहभागिता की।

    नए डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से अशासकीय संस्थाएं अनुदान के लिए ऑनलाइन आवेदन से लेकर दस्तावेज अपलोड करने, प्रस्ताव परीक्षण, स्वीकृति, अनुदान वितरण और प्रगति की निगरानी तक की प्रक्रिया ऑनलाइन पूरी कर सकेंगी। इससे अनुदान प्रक्रिया में मानवीय हस्तक्षेप कम होने के साथ पारदर्शिता और जवाबदेही को बढ़ावा मिलेगा तथा भुगतान एवं स्वीकृति की प्रक्रिया को अधिक समयबद्ध बनाने में सहायता मिलेगी।

    महिलाओं और बच्चों के हित में संवेदनशीलता के साथ काम करें संस्थाएं

    आयुक्त महिला एवं बाल विकास संदीप जी.आर. ने कहा कि विभागीय योजनाओं की सफलता का वास्तविक आकलन उनके फील्ड स्तर पर दिखाई देने वाले प्रभाव से होता है। उन्होंने सभी अशासकीय संस्थाओं और विभागीय अधिकारियों से महिलाओं एवं बच्चों की सुरक्षा, संरक्षण, परामर्श और पुनर्वास को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए संवेदनशीलता और प्रभावशीलता के साथ दायित्वों का निर्वहन करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि क्षेत्रीय घटनाओं और उनके बदलते ट्रेंड का चिन्हांकन कर संवेदनशील क्षेत्रों की वास्तविक आवश्यकताओं के अनुरूप योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन किया जाना चाहिए। उन्होंने प्रतिभागियों से अनुदान पोर्टल का गंभीरता से अध्ययन कर उसका अधिकतम और सार्थक उपयोग करने तथा पोर्टल को और अधिक उपयोगी बनाने के लिए व्यावहारिक सुझाव देने को कहा।

    ऑनलाइन होगी अनुदान की पूरी प्रक्रिया

    प्रशिक्षण के दौरान मिशन वात्सल्य के राज्य नोडल अधिकारी डॉ. अमिताभ अवस्थी ने पोर्टल की उपयोगिता, विभिन्न मॉड्यूल और अशासकीय संस्थाओं द्वारा इसके उपयोग की प्रक्रिया की विस्तार से जानकारी दी। मिशन शक्ति की प्रभारी डॉ. प्रज्ञा अवस्थी ने पोर्टल के माध्यम से विभिन्न रिपोर्ट तैयार करने तथा आवश्यक सूचनाओं को अद्यतन रखने की प्रक्रिया समझाई। तकनीकी सत्र में पोर्टल संचालन, ऑनलाइन आवेदन, दस्तावेज अपलोड सहित विभिन्न तकनीकी प्रक्रियाओं का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया गया।

    मिशन शक्ति में 14 शक्ति सदन, मिशन वात्सल्य में 130 बाल देखरेख संस्थाएं

    प्रदेश में मिशन शक्ति अंतर्गत 13 जिलों में 14 शक्ति सदन संचालित हैं, जहां कठिन परिस्थितियों में जीवनयापन करने वाली महिलाओं को आश्रय, संरक्षण और पुनर्वास सहित विभिन्न सेवाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। विगत वर्ष 2,386 महिलाएं इन सेवाओं से लाभान्वित हुई हैं।

    मिशन वात्सल्य के अंतर्गत प्रदेश में 130 बाल देखरेख संस्थाएं संचालित हैं, जिनमें वर्तमान में 2,377 बच्चे निवासरत हैं। इनमें 79 अशासकीय बाल देखरेख संस्थाओं को वर्तमान में अनुदान प्रदान किया जा रहा है।

    प्रशिक्षण में मिशन शक्ति की 11 और मिशन वात्सल्य की लगभग 68 अशासकीय संस्थाओं के प्रतिनिधियों के साथ विभागीय अधिकारियों एवं डेवलपमेंट पार्टनर्स सहित लगभग 230 प्रतिभागियों ने सहभागिता की।

     

  • UP की मेधावी बेटियों को बड़ा तोहफा, 40 हजार छात्राओं को मुफ्त स्कूटी के साथ हेलमेट-पेट्रोल भी

    UP की मेधावी बेटियों को बड़ा तोहफा, 40 हजार छात्राओं को मुफ्त स्कूटी के साथ हेलमेट-पेट्रोल भी

    लखनऊ
    यूपी में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले 40 हजार मेधावी छात्राओं के हाथ में स्कूटी की चाबी सौंपी जाएगी। उच्च शिक्षा विभाग की ओर से स्कूटी की खरीद के लिए टेंडर जारी कर दिया गया है। जनवरी में स्नातक की मेधावी छात्राओं को मुफ्त स्कूटी वितरित की जाएगी। मेधावी छात्राओं को मुफ्त स्कूटी वितरण के लिए विश्वविद्यालयों के स्तर पर भी तैयारियां तेज कर दी गई है। शैक्षिक सत्र 2025-26 में स्नातक उत्तीर्ण करने वाली छात्राओं में से टॉप पांच प्रतिशत की मेरिट जारी कर उनसे डाक्युमेंट लिए जा रहे हैं।

    रानी लक्ष्मीबाई स्कूटी योजना के तहत शैक्षिक सत्र 2025-26 में यूपी की मूल निवासी उन मेधावी छात्राओं को लाभ मिलेगा, जिन्होंने प्रदेश के राज्य विश्वविद्यालयों, निजी विश्वविद्यालयों तथा राज्य विश्वविद्यालयों से संबद्ध राजकीय, एडेड व निजी डिग्री कॉलेजों से स्नातक की पढ़ाई पूरी की है। यही नहीं उनके परिवार की सालाना आय 12 लाख रुपये तक होगी।

    उच्च शिक्षा विभाग की ओर से योजना के तहत पात्र छात्राओं को स्कूटी उपलब्ध कराने की बिड प्रकाशित की गई है। जिसका मूल्य करीब 320 करोड़ रुपये है। उच्च शिक्षा निदेशालय की ओर से 21 सितंबर को ऑनलाइन प्री बिड बैठक भी होगी। फिर आगे की प्रक्रिया पूरी कर जनवरी तक स्कूटी वितरण करेगा।

    दूसरी ओर विश्वविद्यालयों में अपने व संबद्ध महाविद्यालयों के डाटा एकत्र कर मेरिट के आधार पर स्नातक उत्तीर्ण टॉप पांच प्रतिशत छात्राओं की सूची तैयार की गई है। इसके अनुसार छात्राओं का आधार, निवास व आय प्रमाण पत्र महत्वपूर्ण दस्तावेज भी लेकर पोर्टल पर अपलोड किया जा रहा है। उच्च शिक्षा निदेशालय, जिला प्रशासन के सहयोग से इनका सत्यापन कराएगा।

    इन छात्राओं को मिलेगी स्कूटी
    योजना के अंतर्गत सरकारी विश्वविद्यलयों, निजी विश्वविद्यालयों, इन विश्वविद्यलयों से जुड़े कॉलेज, एडेड कॉलेज, स्ववित्त पोषित कॉलेज सभी को रखा गया है। इन संस्थान से पिछले साल यानी 2025-26 में ग्रेजुएशन करने वाली टॉप पांच प्रतिशत छात्राओं को स्कूटी मिलेगी। छात्राओं को यूपी का निवासी होना भी जरूरी किया गया है। छात्राओं की पारिवारिक आय 12 लाख रुपए तक होनी चाहिए। केवल निराश्रित, दिव्यांग और शहीद परिवारों की बेटियों की मेरिट नहीं देखी जाएगी। उन्हें प्राथमिकता के आधार पर स्कूटी दी जाएगी।

    रजिस्ट्रेशन और बीमा भी सरकार कराकर देगी
    सरकार की तरफ से स्कूटी के साथ ही आईएसआई मार्का वाला हेलमेट, एसेसरीज, पांच लीटर पेट्रोल भी मिलेगा। आरटीओ में रजिस्ट्रेशन और बीमा भी सरकार ही कराकर देगी। यानी स्कूटी हासिल करने वाली किसी छात्रा को कोई खर्च नहीं करना होगा।

  • राजस्थान में नशे के कारोबार पर बड़ा एक्शन, 730 करोड़ की ड्रग्स जब्त; 93 ड्रग किंगपिन गिरफ्तार

    राजस्थान में नशे के कारोबार पर बड़ा एक्शन, 730 करोड़ की ड्रग्स जब्त; 93 ड्रग किंगपिन गिरफ्तार

    सीकर
    राजस्थान में नशे के कारोबार पर शिकंजा कसने के लिए अब तीन साल की नई रणनीति तैयार होगी। अफीम, डोडा-पोस्त और एमडी की जब्ती में देश में पहले स्थान पर पहुंचे प्रदेश में सरकार नारकोटिक्स कंट्रोल विजन 2026-29 तैयार कर रही है।

    नारकोटिक्स विभाग का पूरा ध्यान मादक पदार्थ पकड़ने और तस्करों को गिरफ्तार करने तक नहीं रहेगा, विभाग की ओर से सिंथेटिक ड्रग के निर्माण, उसकी सप्लाई चेन, ड्रग की मांग कम करने और नशे की चपेट में आए लोगों को इलाज व पुनर्वास से जोड़ने पर भी रहेगा।

    प्रदेश में एक साल में अब तक करीब 730 करोड़ रुपए के मादक पदार्थ जब्त हो चुके हैं। एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स ने 93 ड्रग किंगपिन ( अवैध नशीले पदार्थों की तस्करी के बड़े नेटवर्क और संगठनों का मालिक या संचालक) गिरफ्तार किए हैं और एमडी ड्रग बनाने वाली 34 फैक्ट्रियों का भंडाफोड़ किया है।

    5,626 केस दर्ज, अब दोहराने वाले अपराधियों पर भी नजर
    मादक पदार्थों की तस्करी और बिक्री के खिलाफ एनडीपीएस एक्ट के तहत अब तक 5,626 मामले दर्ज किए जा चुके हैं। बार-बार अपराध करने वाले आरोपियों को चिन्हित कर उनके खिलाफ पीआईटी एनडीपीएस एक्ट ( प्रिवेंशन ऑफ इललिसिट ट्रैफिक इन नारकोटिक्स ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सब्सटेंस एक्ट 1988 ) के तहत कार्रवाई की जा रही है।

    प्रदेश में 73 करोड़ 64 लाख 64 हजार 948 रुपए की चल-अचल संपत्तियां कुर्क, फ्रीज और सीज की गई हैं। कार्रवाई में मकान, दुकान, कृषि भूमि, आवासीय भूखंड और कार, पिकअप, ट्रैक्टर व मोटरसाइकिल सहित विभिन्न संपत्तियां शामिल हैं। चित्तौड़गढ़ में 20.35 करोड़, बारां में 18.48 करोड़, झालावाड़ में 12.65 करोड़ और प्रतापगढ़ में 8.24 करोड़ रुपए की संपत्तियों पर कार्रवाई हुई है। नागौर, जोधपुर ग्रामीण व हनुमानगढ़ में भी 3.05 करोड़ रुपए की संपत्तियां कुर्क की गई हैं।

    चार मोर्चों पर चलेगा अभियान
    नए विजन में ड्रग के खिलाफ कार्रवाई को चार प्रमुख हिस्सों में रखा जाएगा। इसमें प्रवर्तन, आसूचना एवं अभियान, प्रिकर्सर व सिंथेटिक ड्रग नियंत्रण, मांग एवं हानि न्यूनीकरण,क्षमता निर्माण, समन्वय एवं निगरानी शामिल हैं। खासतौर पर एमडी (मेथिलीन डाइऑक्सी मेथैम्फेटामाइन) जैसी सिंथेटिक ड्रग के निर्माण में इस्तेमाल होने वाले प्रिकर्सर पदार्थों की निगरानी बढ़ाई जाएगी।

    इसके लिए प्रदेश के 12 सर्वाधिक संवेदनशील जिलों को विशेष निगरानी में रखा गया है। इन जिलों में नशामुक्ति शिविर लगाए जा रहे हैं और ड्रग हॉटस्पॉट पर निगरानी मजबूत की जा रही है। वहीं, शैक्षणिक संस्थानों के आसपास 500 मीटर के दायरे को ड्रग-फ्री बनाने के लिए भी अभियान चलाया जा रहा है।

    ड्रग पकड़ने के बाद वैज्ञानिक जांच जरूरी
    मादक पदार्थों के मामलों में फॉरेंसिक जांच को भी मजबूत किया जाएगा। ड्रग की पहचान, उसके स्रोत और नेटवर्क तक पहुंचने में वैज्ञानिक जांच को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। राज्य और जिला स्तर पर नार्को-कोऑर्डिनेशन सेंटर (एनकार्ड) की नियमित बैठकें कर पुलिस, स्वास्थ्य, शिक्षा, उद्योग सहित संबंधित विभागों के बीच सूचनाओं का आदान-प्रदान बढ़ाया जाएगा।

    इनका कहना है
    पुलिस की कार्रवाई केवल एक मामले में गिरफ्तारी तक सीमित नहीं रहेगी, ड्रग के कारोबार में लगातार सक्रिय रहने वालों पर लंबी अवधि तक शिकंजा कसा जाएगा।नशे का कारोबार करने वाले मुख्य सप्लायर और तस्करी करने वालों पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी। अभियान चलाकर नशे का उपभोग करने वालों को नशे के दुष्प्रभावों के प्रति जागरुक किया जाएगा।

  • बाढ़ नुकसान का आकलन करने बिहार पहुंची केंद्रीय टीम, हाजीपुर में ट्रैक्टर से लिया जायजा

    बाढ़ नुकसान का आकलन करने बिहार पहुंची केंद्रीय टीम, हाजीपुर में ट्रैक्टर से लिया जायजा

    हाजीपुर
    बिहार में बाढ़ से हुए नुकसान का आकलन करने के लिए केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान के नेतृत्व में एक टीम बिहार पहुंची. इस दौरान यह देखा गया कि हाजीपुर में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी, केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान और केंद्र की टीम के अन्य सदस्य ट्रैक्टर पर सवार होकर बाढ़ प्रभावित इलाकों का जायजा लेने के लिए निकल पड़े.

    शिवराज सिंह चौहान ने क्या कहा?

    बिहार में बाढ़ को लेकर केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा, जो कुछ भी बाढ़ की वजह से नुकसान हुआ है, उसे लेकर केंद्र सरकार सहायता करेगी. साथ ही मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कहा, बाढ़ प्रभावित इलाकों में रह रहे लोगों की मदद कैसे की जाए, इस पर लगातार चर्चा की जा रही है. फसल और सड़क की स्थिति को देखा गया है और लगातार मुआयना किया जा रहा है. दूसरे जिलों में भी जायजा लेने के लिए जायेंगे.

    निरीक्षण के बाद की जाएगी समीक्षा-बैठक

    इस दौरान मीडिया के सामने सीएम सम्राट चौधरी ने यह भी कहा कि, बाढ़ प्रभावित इलाकों का जायजा लेने के बाद समीक्षा बैठक की जाएगी. राज्य सरकार की ओर से आर्थिक सहायता शुरू कर दिया गया है. साथ ही उन्होंने पीएम मोदी को केंद्र की विशेष टीम को बिहार भेजने के लिए धन्यवाद कहा. अन्य टीम भी बिहार में आयेंगे. बाढ़ का आकलन करेंगे और जो सहायता होगी, वह की जाएगी.

    बिहार के 15 जिलों के 49.74 लाख लोग प्रभावित

    बिहार में अलग-अलग नदियों के जलस्तर में बढ़ोतरी के कारण बाढ़ की स्थिति बनी हुई है. आपदा प्रबंधन विभाग के अनुसार राज्य के 15 जिलों पटना, भोजपुर, सारण, वैशाली, भागलपुर, मुजफ्फरपुर, बक्सर, समस्तीपुर, खगड़िया, बेगूसराय, दरभंगा, अररिया, पूर्णिया,मधेपुरा और कटिहार के 88 प्रखंडों की 575 ग्राम पंचायतों में 49.74 लाख आबादी बाढ़ से प्रभावित हुई है. सरकार की ओर से प्रभावित इलाकों में राहत और बचाव कार्य लगातार चलाए जा रहे हैं.

    खतरे के निशान से ऊपर नदियां

    केंद्रीय जल आयोग से प्राप्त सूचना के मुताबिक गंडक नदी मुजफ्फरपुर के डुमरिया घाट, कोसी खगड़िया के बलतारा और कुरसेला, जबकि गंगा गांधीघाट, हाथीदह, भागलपुर और कहलगांव में खतरे के निशान से ऊपर बह रही है. पुनपुन नदी श्रीपालपुर में और बागमती नदी बेनीबाद और सोनाखान में खतरे के निशान से ऊपर है.

     

  • जमीन की रजिस्ट्री के बाद भी नहीं हो रहा इंतकाल, पोर्टल की खामियों से रिकॉर्ड में गड़बड़ी

    जमीन की रजिस्ट्री के बाद भी नहीं हो रहा इंतकाल, पोर्टल की खामियों से रिकॉर्ड में गड़बड़ी

    कैथल
    प्रदेश के रेवेन्यू पोर्टल में आ रही तकनीकी कमी के कारण पूरे जमीन के 2,38,688 इंतकाल (म्यूटेशन) लंबित हैं। सरकार ने जमीन की रजिस्ट्री के बाद 11वें दिन अपने आप इंतकाल दर्ज होने वाली ऑटो-म्यूटेशन व्यवस्था शुरू की थी, ताकि लोगों को दफ्तरों के चक्कर न काटने पड़ें।

    इस व्यवस्था में सुधार लाने और साफ्टवेयर की कमियों को दूर करने के लिए प्रदेशभर के पटवारी और कानूनगो भी विरोध जता चुके हैं, लेकिन स्थिति में सुधार नहीं हुआ। रजिस्ट्री होने के बाद भी इंतकाल सिस्टम में उलझे है।

    प्रदेश में 2,07,560 इंतकाल पटवारियों की ओर से लंबित है। इनके अलावा 10,537 कानूनगो की तरफ से लंबित है। पटवारियों का तर्क है कि मंजूर करने के बाद भी लंबित दिखाई दे रहे हैं।

    इंतकाल नहीं हो रहा दर्ज: महेंद्र
    पट्टी अफगान के महेंद्र ने बताया कि दो माह पहले उसकी रजिस्ट्री हो गई थी, लेकिन अब इंतकाल नहीं हो रहा है। रकबा गलत उठा रहा है। इसकी कारण उसका इंतकाल नहीं हो रहा है। सोमवार को पूरा दिन पोर्टल नहीं चला, मंगलवार को पोर्टल तो चला, लेकिन गलत रकबा उठाने के कारण उसका इंतकाल नहीं हो रहा है।

    इंतकाल पौने एकड़ का दिखाया: वीरभान चौधरी
    पट्टी के वीरभान ने बताया कि उसके मां के नाम जमीन ली थी। उन्होंने एक एकड़ जमीन की खरीद की थी, लेकिन इंतकाल में पौना एकड़ दिखा रहा है।

    पटवारी का कहना है कि पोर्टल की खामियों के कारण ऐसा हो रहा है। वह एक माह से पटवारखाने के चक्कर लगा रहा है। राजस्व विभाग को इसके लिए कोई व्यवस्था करनी चाहिए। दी रेवेन्यू पटवार एवं कानूनगो एसोसिएशन के जिला प्रधान सुरेंद्र खटकड़ ने बताया कि साफ्टवेयर अब भी कुछ खामिया बची है, इसमें सुधार किया जा रहा है।सबसे ज्यादा दिक्कत पुराने इंतकाल वापस हो रहे हैं, रकबा गलत दिखा रहा है।

    जानिये, जिलों की स्थिति
    सोनीपत में 17,486 इंतकाल लंबित हैं। इसी तरह अंबाला में 14,486,भिवानी में 10,879, चरखी-दादरी में 5215, फरीदाबाद में 13,786, फतेहाबाद में 7663, गुरुग्राम में 12,603, हांसी में 5837, हिसार में 8484, झज्जर में 12,528, जींद में 13,856, कैथल में 10,255, करनाल में 9397, कुरुक्षेत्र में 10,461, महेंद्रगढ़ में 6826, नूंह में 9196, पलवल में 13,000, पंचकूला में 4225, पानीपत में 14,486, रेवाड़ी में 12,510, रोहतक में 7825 और सिरसा में 9574 इंतकाल लंबित हैं।

    असली मालिकों के नाम गायब
    कई इंतकालों में प्रिंट निकालने पर वे खाली आ रहा हैं या रजिस्ट्री में दर्ज जमीन की मात्रा कम दिखाई दे रही है। साफ्टवेयर के झोल के कारण कुछ जमीनों के रिकार्ड से असली मालिकों के नाम ही गायब हो गए हैं।

    पुराने इंतकाल वापस हो रहे हैं। पटवारी मंजूर करता है तो, एक खेवट में एक इंतकाल है। लोगों ने बताया कि सोमवार को पूरा दिन साइट नहीं चली। इस कारण इंतकाल में हिस्से गलत हो रहे हैं। नए साफ्टवेयर में दस पेज की कमांड देते है तो दो पेज का रिकार्ड मिलता है, रिकार्ड अधूरा मिल रहा है।

     

  • देश में पहली बार झारखंड में लागू होगा नया स्वास्थ्य मॉडल, 5 राष्ट्रीय कार्यक्रम होंगे एक साथ

    देश में पहली बार झारखंड में लागू होगा नया स्वास्थ्य मॉडल, 5 राष्ट्रीय कार्यक्रम होंगे एक साथ

    रांची
    झारखंड में कैंसर, मधुमेह, उच्च रक्तचाप और हृदय रोग जैसी बीमारियों से निपटने के लिए अब अलग-अलग योजनाओं की जगह एकीकृत व्यवस्था के तहत उपचार और रोकथाम की पहल होगी. राज्य सरकार की ओर से तैयार एकीकृत मॉडल को केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने मंजूरी दे दी है. इसके साथ ही झारखंड देश में इस मॉडल को लागू करने वाला पहला राज्य बनने जा रहा है.

    समय पर पहचान, जांच और रोकथाम पर रहेगा जोर
    नयी व्यवस्था में बीमारी होने के बाद इलाज के साथ उसकी समय पर पहचान, जांच और रोकथाम पर विशेष जोर रहेगा.

    नयी दिल्ली के कर्तव्य भवन में हुई उच्चस्तरीय बैठक में केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की अपर सचिव सह मिशन निदेशक आराधना पटनायक ने मॉडल को मंजूरी देते हुए झारखंड में इसे लागू करने का निर्देश दिया.

    पहले चरण में होगी राज्य स्तरीय कार्यशाला
    पहले चरण में राज्य स्तरीय कार्यशाला आयोजित होगी. इसमें स्वास्थ्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारी, विशेषज्ञ, तकनीकी संस्थान और संबंधित प्रतिनिधि शामिल होंगे. सफल क्रियान्वयन के बाद मॉडल का मूल्यांकन कर इसे देशभर में लागू करने की दिशा में आगे बढ़ाया जायेगा.

    केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के एनसीडी प्रभाग के डीडीजी डॉ एल स्वास्तिचरण ने मॉडल की रूपरेखा और तकनीकी व्यवस्था के बारे में जानकारी दी.

    निजी संस्थाओं को भी जोड़ा जायेगा
    सरकारी व्यवस्था के साथ ही इसमें जनप्रतिनिधियों, स्वयंसेवी संस्थाओं और सार्वजनिक उपक्रमों को भी अभियान से जोड़ने की तैयारी है. इसका उद्देश्य खासकर ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं और जागरूकता की पहुंच को बढ़ाना है.

    पांच योजनाएं होंगी एक साथ
    नयी व्यवस्था में पांच प्रमुख राष्ट्रीय कार्यक्रमों को साथ लाने की योजना है. इनमें एनपी-एनसीडी, राष्ट्रीय मुख स्वास्थ्य कार्यक्रम, राष्ट्रीय तंबाकू नियंत्रण कार्यक्रम, राष्ट्रीय उपशामक देखभाल कार्यक्रम और राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम शामिल है.

    मरीजों को सेवाओं के लिए भटकना नहीं पड़ेगा
    मरीजों को नये मॉडल में अलग-अलग योजनाओं और सेवाओं के लिए भटकना नहीं पड़ेगा. शुरुआती जांच, इलाज, रेफरल और निगरानी को एक व्यवस्था से जोड़ा जायेगा. मरीजों को अलग-अलग सेवाओं के लिए भटकना नहीं पड़ेगा. कैंसर, मधुमेह, उच्च रक्तचाप, हृदय रोग, तंबाकू सेवन और मानसिक स्वास्थ्य को एक साथ जोड़ा जायेगा. कैंसर की शुरुआती पहचान पर विशेष जोर होगा.

  • कंचन, कामिनी और कीर्ति से नहीं मिलेगा सच्चा सुख, जानें जीवन की वास्तविक शांति का मार्ग

    कंचन, कामिनी और कीर्ति से नहीं मिलेगा सच्चा सुख, जानें जीवन की वास्तविक शांति का मार्ग

    संसार जिसे प्राप्त करके प्रसन्न होता है, ज्ञानी उसी के पार जाने का मार्ग खोजता है। कंचन शरीर को सुख दे सकता है, कामिनी मन को आकर्षित कर सकती है और कीर्ति संसार में नाम दे सकती है, लेकिन इनमें से कोई भी मृत्यु, मोह, भय और अंतहीन असंतोष से मुक्ति नहीं दे सकता।

    यदि कंचन, कामिनी और कीर्ति में ही जीवन का सच्चा सुख छिपा होता, तो फिर गौतम बुद्ध और भगवान महावीर जैसे राजकुमारों ने इन सबका त्याग क्यों किया होता। गौतम बुद्ध के पास कपिलवस्तु का राजपाट था, यशोधरा जैसी रूपवती और गुणवती पत्नी थीं, राहुल जैसा फूल-सा सुंदर पुत्र था और पिता महाराज शुद्धोदन की अर्जित हुई अपार प्रतिष्ठा भी थी। जीवन में भौतिक सुख-सुविधाओं की कोई कमी नहीं थी, फिर भी उनके भीतर एक प्रश्न लगातार उठता रहा, क्या यही जीवन का अंतिम सत्य है। एक रात वे यशोधरा और राहुल को सोता हुआ छोड़कर महल से निकल पड़े। उन्होंने अपने भीतर संकल्प लिया कि जब तक जीवन के दुःख का कारण और उसके निवारण का मार्ग नहीं खोज लेंगे, तब तक कपिलवस्तु वापस नहीं लौटेंगे।

    धन आदि जीवन को सुख-सुविधाएं तो दे सकते हैं, लेकिन मन को स्थायी शांति नहीं दे सकते, वास्तविक सुख बाहर की वस्तुओं में न होकर भीतर के संतोष, और आत्मबोध में छिपा है। कंचन अर्थात धन-वैभव, कामिनी अर्थात सांसारिक प्रेम और आकर्षण तथा कीर्ति अर्थात यश-प्रतिष्ठा, ये तीनों मनुष्य को संसार में सुखी होने का भ्रम दे सकते हैं, लेकिन आत्मा को वह शांति नहीं दे सकते।

    सुख प्राप्ति का सम्भवतः एक दूसरा भी उपाय है, कि हम सुख और दुःख में संतुलित रहना सीखें। सुख प्राप्त करने के लिए मानसिक शांति आवश्यक है। यह संसार एवं जीवन द्वंदात्मक है, सुख-दुःख, निन्दा-स्तुति, जय-पराजय, लाभ-हानि, जन्म-मृत्यु, संयोग-वियोग आदि, यानि सृष्टि ही द्वंदात्मक है।

  • ‘हनुमान अंश’ का बॉक्स ऑफिस पर जलवा कायम, 40वें दिन भी कमाए 8.25 करोड़

    ‘हनुमान अंश’ का बॉक्स ऑफिस पर जलवा कायम, 40वें दिन भी कमाए 8.25 करोड़

    हनुमान अंश’ की कमाई देखकर ऐसा लग रहा है कि फिल्म अभी थिएटर छोड़ने के मूड में नहीं है. आमतौर पर रिलीज के 40 दिन बाद फिल्मों के शो और कमाई दोनों काफी कम हो जाते हैं, लेकिन यहां कहानी कुछ और ही है. फिल्म ने 40वें दिन भी करोड़ों रुपये की कमाई कर अपनी पकड़ बनाए रखी है. इतना ही नहीं, फिल्म 200 करोड़ का आंकड़ा भी काफी पीछे छोड़ चुकी है. अब जानते हैं फिल्म का टोटल कलेक्शन कहां पहुंच गया है.

    हनुमान अंश बॉक्स ऑफिस रिपोर्ट, फोटो- Sacnilk
    इंडस्ट्री ट्रैकर सैकनिल्क के मुताबिक, ‘हनुमान अंश’ ने 40वें दिन भारत में 8.25 करोड़ रुपये नेट कमाए हैं. इस दिन फिल्म के देशभर में 9,175 शो चले थे. 40वें दिन 8 करोड़ से ज्यादा की कमाई अपने आप में बड़ी बात है, क्योंकि इस समय तक ज्यादातर फिल्मों की कमाई काफी नीचे आ जाती है.

    फिल्म की इस कमाई के बाद इसका इंडिया नेट कलेक्शन 231.13 करोड़ रुपये हो गया है. वहीं भारत में फिल्म का ग्रॉस कलेक्शन 272.90 करोड़ रुपये पहुंच गया है.
    दुनिया भर में 250 करोड़ के पार पहुंची फिल्म

    भारत के अलावा विदेशों में भी ‘हनुमान अंश’ को दर्शक मिल रहे हैं. फिल्म ने अब तक ओवरसीज में 18.50 करोड़ रुपये कमाए हैं. इसके बाद फिल्म का वर्ल्डवाइड ग्रॉस कलेक्शन 291.40 करोड़ रुपये हो गया है.

    यानी करीब 2 करोड़ रुपये के बजट में बनी इस फिल्म ने अब तक कमाई का बहुत बड़ा आंकड़ा पार कर लिया है.

    ‘धुरंधर’ और ‘पठान’ से भी आगे निकली ‘हनुमान अंश’
    ‘हनुमान अंश’ की 40वें दिन की कमाई की तुलना कुछ बड़ी फिल्मों से भी की जा रही है. ‘धुरंधर’ ने 40वें दिन 2.60 करोड़ रुपये, जबकि ‘पठान’ ने 2.55 करोड़ रुपये कमाए थे.

    वहीं ‘छावा’ ने 40वें दिन 1.40 करोड़ रुपये और ‘उरी: द सर्जिकल स्ट्राइक’ ने 1.38 करोड़ रुपये का कलेक्शन किया था. इन आंकड़ों को देखें तो 40वें दिन ‘हनुमान अंश’ की 8.25 करोड़ रुपये की कमाई काफी ज्यादा है.

    सिर्फ 10 लाख से हुई थी शुरुआत
    सबसे दिलचस्प बात फिल्म की शुरुआत है. ‘हनुमान अंश’ ने भारत में सिर्फ 10 लाख रुपये की ओपनिंग की थी. बताया जा रहा है कि फिल्म करीब 2 करोड़ रुपये के बजट में बनी है.

    शुरुआत में शायद किसी ने नहीं सोचा होगा कि इतनी कम ओपनिंग वाली फिल्म आगे चलकर 200 करोड़ रुपये से ज्यादा कमा लेगी. लेकिन धीरे-धीरे दर्शकों की संख्या बढ़ती गई और फिल्म की कमाई भी ऊपर जाती रही.

    नीब करौरी बाबा की कहानी ने पकड़ी दर्शकों की नजर
    ‘हनुमान अंश’ की कहानी नीब करौरी बाबा की जिंदगी के एक हिस्से पर आधारित है. फिल्म में शोभिनव सत्या ने लक्ष्मण दास यानी नीब करौरी बाबा का किरदार निभाया है. वहीं चंदन आनंद भी अहम भूमिका में नजर आए हैं. फिल्म का निर्देशन विशाल चतुर्वेदी ने किया है.

    फिल्म की कहानी भक्ति से जुड़ी है और माना जा रहा है कि यही इसकी लंबी थिएट्रिकल रन की एक बड़ी वजह है. फिल्म को लेकर लोगों के बीच बात आगे बढ़ी और धीरे-धीरे नए दर्शक इसे देखने थिएटर पहुंचते रहे.

    ‘मिर्जापुर द मूवी’ और ‘हैवान’ के बीच भी जारी है कमाई
    अब थिएटर में नई फिल्मों की एंट्री हो चुकी है. ‘मिर्जापुर द मूवी’ और ‘हैवान’ जैसी फिल्मों के बीच भी ‘हनुमान अंश’ की कमाई जारी है. फिल्म का हिंदी थिएट्रिकल रन काफी लंबा रहा है.

    अब फिल्म 11 सितंबर को दुनियाभर में रिलीज हो चुकी है. ऐसे में आने वाले दिनों में इसकी कमाई कहां तक पहुंचती है, यह देखना बाकी है.

  • श्रम जगत में बेहतर काम पर मिलेगा सम्मान, ‘श्रम यशस्वी पुरस्कार’ के लिए आवेदन शुरू

    श्रम जगत में बेहतर काम पर मिलेगा सम्मान, ‘श्रम यशस्वी पुरस्कार’ के लिए आवेदन शुरू

    श्रमिक सुरक्षा और उत्कृष्ट कार्य को मिलेगा सम्मान, 2 लाख रुपये का ‘श्रम यशस्वी पुरस्कार’

    श्रम जगत में उत्कृष्ट कार्य करने वाले श्रमिक एवं संस्थाएं 5 अक्टूबर तक कर सकेंगे आवेदन

    श्रमिकों और संस्थाओं को उत्कृष्ट कार्य के लिए प्रशस्ति पत्र सहित मिलेगा पुरस्कार

    रायपुर, 
    छत्तीसगढ़ शासन के श्रम विभाग ने श्रम के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने वाले श्रमिकों एवं संस्थाओं को प्रोत्साहित करने के लिए स्व. रामानुज प्रताप सिंहदेव स्मृति श्रम यशस्वी पुरस्कार-2025-26 के लिए आवेदन आमंत्रित किए हैं। इस पुरस्कार के तहत चयनित श्रमिक अथवा संस्था को 2 लाख रुपये की पुरस्कार राशि एवं प्रशस्ति पत्र प्रदान किया जाएगा।

    यह पुरस्कार उन श्रमिकों एवं संस्थाओं को प्रदान किया जाएगा, जिन्होंने 1 अप्रैल 2025 से 31 मार्च 2026 की अवधि में श्रम के क्षेत्र में उल्लेखनीय एवं उत्कृष्ट कार्य किया हो। विशेष रूप से ऐसे कार्यों को प्राथमिकता दी जाएगी, जिनसे मजदूरों की सुरक्षा एवं स्वास्थ्य के लिए प्रभावी उपाय किए गए हों और जिनके परिणामस्वरूप पूरे वर्ष में कोई गंभीर दुर्घटना न हुई हो।

    इसके साथ ही कार्यस्थल पर सुरक्षा नियमों के व्यापक प्रचार-प्रसार तथा सुरक्षित कार्य वातावरण को बढ़ावा देने की दिशा में उल्लेखनीय योगदान करने वाले श्रमिकों एवं संस्थाओं को भी पुरस्कार के लिए चयनित किया जाएगा। ऐसे प्रयास, जिनसे प्रदेश का नाम श्रम जगत में गौरवान्वित हुआ हो, पुरस्कार के लिए महत्वपूर्ण आधार होंगे।

    5 अक्टूबर तक कर सकते हैं ऑनलाइन आवेदन

    श्रम विभाग द्वारा पात्र श्रमिकों एवं संस्थाओं से 5 अक्टूबर 2026 तक ऑनलाइन आवेदन आमंत्रित किए गए हैं। निर्धारित तिथि के बाद प्राप्त आवेदनों पर विचार नहीं किया जाएगा।

    इच्छुक श्रमिक एवं संस्थाएं श्रम विभाग की वेबसाइट shramevjayate.cg.gov.in/alankaran.aspx के माध्यम से ऑनलाइन आवेदन प्रस्तुत कर सकते हैं। पुरस्कार से संबंधित नियम, पात्रता, प्रक्रिया एवं आवेदन प्रपत्र भी इसी वेबसाइट से डाउनलोड किए जा सकते हैं।

    सुरक्षित कार्य संस्कृति को मिलेगा प्रोत्साहन

    ‘श्रम यशस्वी पुरस्कार’ श्रम के क्षेत्र में उत्कृष्टता, श्रमिक सुरक्षा और स्वस्थ कार्य संस्कृति को प्रोत्साहित करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है। पुरस्कार के माध्यम से उन श्रमिकों एवं संस्थाओं के प्रयासों को सार्वजनिक पहचान मिलेगी, जो कार्यस्थल पर सुरक्षा मानकों को मजबूत करने, श्रमिकों के स्वास्थ्य की रक्षा करने और सुरक्षित कार्य वातावरण के निर्माण में उल्लेखनीय योगदान दे रहे हैं।

  • बीआइटी सिंदरी के हैकाथॉन में 45 टीमें अगले चरण के लिए होंगी चयनित

    बीआइटी सिंदरी के हैकाथॉन में 45 टीमें अगले चरण के लिए होंगी चयनित

    धनबाद
    धनबाद हैकाथॉन एंड कोडिंग क्लब (एचएनसीसी), बीआइटी सिंदरी ने इंस्टीट्यूशन्स इनोवेशन काउंसिल (आइआइसी 9.0) के सहयोग से 15 सितंबर को स्मार्ट इंडिया हैकाथॉन (एसआइएच) 2026 के लिए आंतरिक हैकाथॉन का आयोजन किया. इसमें 105 टीमों के कुल 648 विद्यार्थियों ने हिस्सा लिया. प्रतिभागियों में 184 छात्राएं और 464 छात्र शामिल रहे. आयोजन का उद्देश्य विद्यार्थियों को वास्तविक जीवन की समस्याओं के तकनीकी समाधान विकसित करने के लिए मंच उपलब्ध कराना था.

    आंतरिक हैकाथॉन में प्रथम वर्ष से लेकर अंतिम वर्ष तक के विद्यार्थियों ने भाग लिया. प्रतिभागियों ने सॉफ्टवेयर और हार्डवेयर से जुड़े विभिन्न समस्या विवरणों पर काम करते हुए अपने विचार और तकनीकी समाधान प्रस्तुत किये.

    ‘स्वदेशी फॉर आत्मनिर्भर भारत’ रही केंद्रीय थीम

    इस वर्ष के आयोजन की केंद्रीय थीम “स्वदेशी फॉर आत्मनिर्भर भारत” रही. इसके तहत विद्यार्थियों ने विभिन्न तकनीकी समस्याओं पर काम किया. टीमों ने रचनात्मकता, तकनीकी ज्ञान और समस्या-समाधान क्षमता का इस्तेमाल करते हुए अपने प्रोजेक्ट तैयार किये.

    आयोजन के दौरान विद्यार्थियों को टीमवर्क के साथ वास्तविक समस्याओं को समझने और उनके व्यावहारिक समाधान विकसित करने का अवसर मिला. संस्थान के अनुसार, इस तरह के आयोजनों से विद्यार्थियों में नवाचार और तकनीकी प्रयोग की संस्कृति को बढ़ावा मिलता है.

    अनुभवी मार्गदर्शकों ने किया सहयोग

    कार्यक्रम का आयोजन डॉ. ख़ुश्तर अंसारी, प्रोफेसर-इन-चार्ज, एचएनसीसी एवं एसपीओसी, एसआइएच 2026, बीआइटी सिंदरी के मार्गदर्शन में किया गया. आयोजन टीम और मार्गदर्शकों में डॉ. एससी दत्ता, डॉ. राहुल कुमार, विजय कुमार बेसरा, जितेंद्र कुमार, विकास कुमार सिंह, डॉ. मुकेश चंद्र, संजय पाल, डॉ. प्रवीण कुमार साहू, इज़हार हुसैन और डॉ. सुमित कुमार शर्मा शामिल रहे.

    मार्गदर्शकों ने प्रतिभागी टीमों को समस्या की पहचान, समाधान की रूपरेखा और तकनीकी प्रस्तुति से जुड़े पहलुओं पर सहयोग दिया.

    45 टीमों का अगले चरण के लिए चयन

    बीआइटी सिंदरी के निदेशक प्रो. पंकज राय कार्यक्रम में विशेष अतिथि के रूप में मौजूद रहे. वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी बीडी यादव भी उपस्थित रहे. उन्होंने प्रतिभागियों का उत्साहवर्धन किया और नवाचार आधारित गतिविधियों में विद्यार्थियों की भागीदारी को प्रोत्साहित किया.

    आंतरिक हैकाथॉन के प्रदर्शन के आधार पर 45 टीमों का एसआइएच 2026 के अगले चरण के लिए चयन किया जायेगा, जबकि पांच टीमों को प्रतीक्षा सूची में रखा जायेगा. चयनित टीमों को एसआइएच पोर्टल पर पंजीकरण की प्रक्रिया पूरी करनी होगी. इसके बाद वे राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिता के अगले चरण में बीआइटी सिंदरी का प्रतिनिधित्व करेंगी.

    संस्थान के इस आयोजन में बड़ी संख्या में विद्यार्थियों की भागीदारी से परिसर में नवाचार, कोडिंग, तकनीकी प्रयोग और टीम आधारित समस्या-समाधान को लेकर सक्रियता देखने को मिली.