Author: NewseDay

  • पेंशन राशि व पेंशनरों की संख्या में जल्द होगी बढ़ोतरी: मुख्यमंत्री

    पेंशन राशि व पेंशनरों की संख्या में जल्द होगी बढ़ोतरी: मुख्यमंत्री

    गोरखपुर

    मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि सरकार अगले छह माह में एक लाख युवाओं को सरकारी नौकरी देने जा रही है। इनमें 77 हजार भर्तियां सिर्फ पुलिस व होमगार्ड विभाग में होंगी। इसकी शुरुआत 19 सितंबर से होने जा रही है। सीएम ने वृद्धजन, निराश्रित महिलाओं और दिव्यांगजन के लिए भी बड़ी घोषणा की। उन्होंने कहा कि वर्तमान में 1 करोड़ 10 लाख वृद्धजन, निराश्रित महिलाओं व दिव्यांगजन को 12 हजार रुपये सालाना पेंशन दी जाती है। जल्द ही पेंशन की धनराशि और लाभार्थियों की संख्या भी बढ़ेगी। विकास व जनोपयोगी सुविधाओं के लिए कानून का राज और सुरक्षा का बेहतरीन वातावरण होना जरूरी है।

    सीएम योगी बुधवार को गोरखपुर के वार्ड नंबर-53 उर्वरक नगर के अंतर्गत जंगल नकहा नंबर-2 में नवनिर्मित कल्याण मंडपम सहित गोरखपुर विकास प्राधिकरण, ग्रामीण अभियंत्रण विभाग और नगर निगम की करीब 40 करोड़ रुपये की लागत वाली 119 विकास परियोजनाओं का लोकार्पण व शिलान्यास करने के बाद उपस्थित जनसमूह को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री ने कहा कि किसी भी गांव या शहर में नागरिकों के जीवन स्तर का पता विकास और वहां उपलब्ध जनोपयोगी सुविधाओं से चलता है। इसके लिए कानून का राज और सुरक्षा का बेहतरीन वातावरण होना जरूरी है। 2017 के बाद गोरखपुर और उत्तर प्रदेश में कानून का राज सुनिश्चित कर विकास एवं सुविधाओं की नई श्रृंखला खड़ी की गई है। माफिया या तो जेल में है या दूसरे लोक की यात्रा पर जा चुका है। आज हर व्यक्ति के लिए सुरक्षा तथा पर्व-त्योहारों के लिए बेहतरीन वातावरण की गारंटी है।

    यूपी अब देश की अर्थव्यवस्था का ग्रोथ इंजन

    मुख्यमंत्री ने सुदृढ़ कानून व्यवस्था के चलते हुए विकास और इससे आए बदलाव का उल्लेख करते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश अब बीमारू राज्य नहीं है। बल्कि अब यह देश की अर्थव्यवस्था का ग्रोथ इंजन है। 2017 के पहले यहां खराब कानून व्यवस्था, लूट-खसोट, अराजकता के कारण कोई बाहरी व्यक्ति काम नहीं करना चाहता था, जबकि आज यहां आने को हर कोई लालायित है। उत्तर प्रदेश देश की सबसे तेज अर्थव्यवस्था में एक है। यह मजबूत इंफ्रास्ट्रक्चर, कल-कारखानों की नई श्रृंखला और सुदृढ़ कनेक्टिविटी के लिए जाना जा रहा है। 

    अराजकता फैलाना विभाजक राजनीति करने वालों की फितरत
    सीएम योगी ने कहा कि उत्तर प्रदेश में विकास और जन कल्याण से सकारात्मक माहौल बना है। ऐसे में समाज को बांटने वालों से सावधान रहना होगा। विकास समाज की एकजुटता का परिणाम है। यदि जाति, क्षेत्र और भाषा के नाम पर बटेंगे तो बांटने वाले फिर कर्फ्यू-दंगे का माहौल बनाएंगे। असुरक्षा का अंधकार मचाएंगे। अराजकता फैलाना समाज को बांटने वालों की फितरत है। शानदार वर्तमान और बेहतरीन भविष्य के लिए डबल इंजन सरकार जरूरी है। 

    मच्छर व माफिया को समाप्त कर दिलाई नई पहचान

    मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में यूपी और गोरखपुर में 2017 के बाद से दिख रहे बदलाव का विस्तार से उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि इंसेफेलाइटिस, मच्छर व माफिया को समाप्त कर इंफ्रास्ट्रक्चर से गोरखपुर और उत्तर प्रदेश को नई पहचान दिलाई गई है। पिछली सरकारों के निकम्मेपन से 2017 के पहले तक हर साल इंसेफेलाइटिस से सैकड़ों मौतें होती थी। तब सपा या कांग्रेस का कोई मंत्री या मुख्यमंत्री गरीबों को देखने बीआरडी मेडिकल कॉलेज नहीं आता था। मुझे आंदोलन करना पड़ता था। मुख्यमंत्री बनने के बाद मैंने 40 वर्ष की बीमारी को दो वर्ष में समाप्त कर दिया।

    सीएम ने गोरखपुर में बंद पड़े खाद कारखाने के दोबारा चलने, चहुंओर फोरलेन कनेक्टिविटी, फ्लाईओवर, ओवरब्रिज के निर्माण, रामगढ़ताल के पर्यटन स्थल बनने, बीआरडी मेडिकल कॉलेज की स्थिति शानदार बनाने के साथ एम्स की सौगात मिलने का जिक्र कर कहा कि आज गोरखपुर की चमचमाती पहचान से हर व्यक्ति गौरव की अनुभूति करता है। 2017 के पूर्व गोरखपुर की गंदगी और बीमारी दरअसल सपा व कांग्रेस सरकारों की गंदी मानसिकता का परिणाम थी। 

    अब तक साढ़े नौ लाख युवाओं को सरकारी नौकरी

    सीएम योगी ने कहा कि आज उत्तर प्रदेश में नौजवानों को नौकरी की गारंटी है। हमारी सरकार ने अब तक साढ़े नौ लाख युवाओं को सरकारी नौकरी दी है। और, चुनाव की घोषणा से पहले, सरकार अगले छह माह में एक लाख और युवाओं को सरकारी नौकरी देने जा रही है। 2017 के पहले सरकारी भर्ती निकलने पर सैफई सिंडिकेट वसूली करने निकल पड़ता था। तब नौजवानों का भविष्य खतरे में पड़ता था। हमारी सरकार में गोरखपुर के गीडा में 500 कारखाने लगे, जिससे अकेले गीडा में 50 हजार नौजवानों को रोजगार मिला और इस क्षेत्र को पलायन से मुक्ति मिली। डबल इंजन की सरकार ने युवाओं के सामने पहचान का संकट भी दूर किया है।

    7 अक्टूबर से विशेष शिविर, मिलेगा योजनाओं का लाभ

    मुख्यमंत्री ने कहा कि आज बिना भेदभाव सबको शासन की योजनाओं का लाभ मिल रहा है। हर पात्र को आवास, शौचालय, राशन, रसोई गैस, बेटियों की पढ़ाई और विवाह से जुड़ी योजनाओं से लाभान्वित किया गया है। योजनाओं में यदि किसी कारण से कोई वंचित रह गया है तो उसे भी संतृप्त करने के लिए एक सप्ताह का विशेष शिविर लगने जा रहा है। यह शिविर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के शासन प्रमुख के रूप में 25 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में चलाए जा रहे ‘सेवा संकल्प अभियान’ के तहत 7 अक्टूबर से लगेगा। 

    सीएम योगी की दूरदर्शिता का परिचायक है कल्याण मंडपम: डॉ. मंगलेश

    समारोह में मुख्यमंत्री का स्वागत करते हुए महापौर डॉ. मंगलेश श्रीवास्तव ने कहा कि सीएम योगी जब भी गोरखपुर आते हैं, यहां के लोगों को उनके हाथों कुछ न कुछ सौगात जरूर मिलती है। कल्याण मंडपम आमजन को उत्कृष्ट सुविधा देने के लिए मुख्यमंत्री की दूरदर्शिता का परिचायक है। एमएलसी एवं भाजपा के प्रदेश उपाध्यक्ष डॉ. धर्मेंद्र सिंह ने कहा कि 2017 के पहले पिछड़े व बीमारू राज्य की पहचान वाले उत्तर प्रदेश को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने विकास के बेहतरीन मॉडल के रूप में निखार दिया है।

    इस अवसर पर विधायक श्रीराम चौहान, फतेह बहादुर सिंह, विपिन सिंह, महेंद्रपाल सिंह, डॉ. विमलेश पासवान, प्रदीप शुक्ल, सरवन निषाद, राज्य महिला आयोग की उपाध्यक्ष चारू चौधरी, भाजपा के महानगर अध्यक्ष रमेश प्रताप गुप्ता, जिलाध्यक्ष जनार्दन तिवारी, क्षेत्रीय उपाध्यक्ष राजेश गुप्ता, स्थानीय पार्षद आनंद कुमार साहनी, जीडीए बोर्ड के सदस्य राधेश्याम श्रीवास्तव, पवन त्रिपाठी, दुर्गेश बजाज, बीरू साहनी आदि प्रमुख रूप से उपस्थित रहे। कार्यक्रम के अंत में जीडीए बोर्ड के अध्यक्ष एवं मंडलायुक्त इंद्र विक्रम सिंह ने मुख्यमंत्री को स्मृति चिन्ह भेंटकर उनका अभिनंदन किया। 
     
    मुख्यमंत्री ने फीता काटकर किया कल्याण मंडपम का लोकार्पण, पौधा भी लगाया

    मंचीय कार्यक्रम से पूर्व मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने वैदिक मंत्रोच्चार के बीच फीता काटकर कल्याण मंडपम का औपचारिक उद्घाटन किया। इसके बाद उन्होंने मंडपम का भ्रमण और निरीक्षण कर यहां के इंफ्रास्ट्रक्चर और सुविधाओं की जानकारी ली। जीडीए के उपाध्यक्ष अभिनव गोपाल ने उन्हें मंडपम की विशेषताओं की विस्तार से जानकारी दी। निरीक्षण के बाद मुख्यमंत्री ने कल्याण मंडपम के परिसर में मौलश्री का पौधरोपण कर पर्यावरण संरक्षण का भी संदेश दिया। 

    300 लोगों की क्षमता का है कल्याण मंडपम

    जंगल नकहा नंबर-2 स्थित कल्याण मंडपम का निर्माण 2461 वर्गमीटर भूमि पर 3.09 करोड़ रुपये की लागत से कराया गया है। आधुनिक सुविधाओं और आकर्षक वास्तुकला से सुसज्जित कल्याण मंडपम दो तल में निर्मित है। यहां 300 लोगों की क्षमता के आयोजन हो सकेंगे। यहां हाल, किचन, स्टोर, ऑफिस, चेंज रूम और महिलाओं एवं पुरुषों के लिए अलग-अलग टॉयलेट बनाए गए हैं। परिसर में मुख्य भवन के सामने एक आकर्षक फव्वारा भी बनवाया गया है। कल्याण मंडपम आने वाले वाहनों के लिए परिसर के अंदर ही इंटरलॉकिंग टाइल्स लगाकर अलग से पर्याप्त पार्किंग का प्रावधान किया गया है। परिसर में लॉन भी विकसित किया गया है। कल्याण मंडपम में लोगों को रियायती दर पर मांगलिक-सार्वजनिक कार्यक्रम करने की सुविधा मिलेगी।

    नगर निगम के 115 विकास कार्यों का हुआ शिलान्यास

    जंगल नकहा नंबर-2 स्थित कल्याण मंडपम में मुख्यमंत्री ने 28.91 करोड़ रुपये की लागत वाले नगर निगम के 115 विकास कार्यों का शिलान्यास किया। ये कार्य विभिन्न कॉलोनियों में मूलभूत सुविधाओं से संबंधित हैं। उन्होंने 11.04 करोड़ रुपये से अधिक के जिन चार कार्यों का लोकार्पण किया उनमें जीडीए की तरफ से बनाए गए कल्याण मंडपम के अलावा ग्रामीण अभियंत्रण विभाग की तरफ से कराए गए सड़क व नाली निर्माण के तीन कार्य शामिल हैं।

  • पश्चिमी एमपी में मौसम रहेगा शुष्क, नर्मदापुरम और जबलपुर संभागों में पिछले 24 घंटे में दर्ज हुई बारिश।

    पश्चिमी एमपी में मौसम रहेगा शुष्क, नर्मदापुरम और जबलपुर संभागों में पिछले 24 घंटे में दर्ज हुई बारिश।

    भोपाल
    मध्य प्रदेश में मानसून की गतिविधियां अभी पूरी तरह थमी नहीं हैं। मौसम विभाग ने अगले 24 घंटे के दौरान विंध्य, बुंदेलखंड और महाकौशल के कई जिलों में बारिश के साथ गरज-चमक की संभावना जताई है। दूसरी ओर पश्चिमी मध्य प्रदेश के कई इलाकों में बारिश की गतिविधियां सीमित रहने के आसार हैं।

    मौसम विभाग से मिली जानकारी के मुताबिक पिछले 24 घंटे में नर्मदापुरम, चंबल और जबलपुर संभागों के कुछ स्थानों पर बारिश हुई। इसके अलावा भोपाल, ग्वालियर, रीवा, शहडोल और सागर संभागों में भी कहीं-कहीं वर्षा दर्ज की गई, जबकि प्रदेश के शेष हिस्सों में मौसम मुख्यतः शुष्क रहा।

    सेवढ़ा में चार इंच बारिश

    मौसम विज्ञान केंद्र के अनुसार बीते 24 घंटों के दौरान बुधवार सुबह साढ़े आठ बजे तक दतिया जिले के सेवढ़ा में सर्वाधिक 100 मिमी यानी करीब चार इंच बारिश दर्ज की गई। इसके अलावा शाहपुरा-जबलपुर में 75.3 मिमी, मंडला में 25.3 मिमी और जबलपुर में 12.9 मिमी वर्षा दर्ज हुई।

    इन जिलों में बौछारें पड़ने के आसार

    मौसम विभाग के पूर्वानुमान के मुताबिक अगले 24 घंटे में सिंगरौली, सीधी, रीवा, मऊगंज, सतना, अनूपपुर, शहडोल, उमरिया, डिंडौरी, कटनी, पन्ना और मैहर जिलों में कई स्थानों पर गरज-चमक के साथ वर्षा हो सकती है।

    वहीं विदिशा, रायसेन, गुना, अशोकनगर, शिवपुरी, ग्वालियर, दतिया, भिंड, मुरैना, श्योपुर, जबलपुर, नरसिंहपुर, छिंदवाड़ा, सिवनी, मंडला, बालाघाट, दमोह, सागर, छतरपुर, टीकमगढ़, निवाड़ी और पांढुर्णा सहित कई जिलों में कुछ स्थानों पर बारिश और गरज-चमक की संभावना है।

    इन इलाकों में हो सकती है बूंदाबांदी

    भोपाल, सीहोर, राजगढ़, नर्मदापुरम, बैतूल, हरदा, बुरहानपुर, खंडवा, खरगोन, बड़वानी, अलीराजपुर, झाबुआ, धार, इंदौर, रतलाम, उज्जैन, देवास, शाजापुर, आगर-मालवा, मंदसौर और नीमच में अगले 24 घंटे के दौरान कुछ स्थानों पर हल्की बौछारें पड़ सकती हैं।
    19 सितंबर के आसपास मानसून की विदाई के संकेत

    मौसम विभाग के मुताबिक दक्षिण-पश्चिम मानसून की पश्चिमी राजस्थान के कुछ हिस्सों से 19 सितंबर के आसपास वापसी के लिए परिस्थितियां अनुकूल हो रही हैं। हालांकि मध्य प्रदेश में अभी बारिश की गतिविधियां जारी रहने की संभावना है।

    ये वेदर सिस्टम सक्रिय

    फिलहाल सौराष्ट्र और उससे लगे पूर्वोत्तर अरब सागर के ऊपर बना निम्न दबाव क्षेत्र सक्रिय है। इसके साथ ऊपरी हवा का चक्रवाती परिसंचरण भी बना हुआ है। इसके अलावा उत्तर थाईलैंड के ऊपर बना ऊपरी हवा का चक्रवाती परिसंचरण 18 सितंबर की शाम के आसपास उत्तर अंडमान सागर की ओर पहुंच सकता है।

    इसके प्रभाव से 19 सितंबर की शाम के आसपास उत्तर अंडमान सागर और आसपास के क्षेत्र में नया निम्न दबाव क्षेत्र बनने की संभावना है, जो आगे चलकर दक्षिण ओडिशा-उत्तर आंध्र प्रदेश तट की ओर बढ़ सकता है। ऐसे में आने वाले दिनों में मानसून की गतिविधियों में एक बार फिर बदलाव देखने को मिल सकता है।

  • पंचायत सहायकों के लिए बड़े ऐलान, मानदेय बढ़ोतरी के साथ मातृत्व अवकाश और कैशलेस इलाज की सुविधा

    पंचायत सहायकों के लिए बड़े ऐलान, मानदेय बढ़ोतरी के साथ मातृत्व अवकाश और कैशलेस इलाज की सुविधा

    पंचायत सहायकों को मुख्यमंत्री योगी की बड़ी सौगात, मानदेय में 50 फीसदी की बढ़ोतरी
     
    छह हजार की जगह अब हर माह मिलेंगे नौ हजार रुपये, 57 हजार से अधिक पंचायत सहायकों को लाभ
     
    डीबीटी से सीधे खाते में आएगा मानदेय, कैबिनेट से ली जाएगी स्वीकृति
     
    प्रधान और सचिव नहीं हटा सकेंगे, डीएम की अध्यक्षता वाली कमेटी ही करेगी फैसला
     
    आंदोलन के मुकदमे होंगे वापस, हटाए गए पंचायत सहायकों की होगी बहाली
     
    महिलाओं को मातृत्व अवकाश, उपचार के लिए मिलेगी कैशलेस सुविधा
     
    लखनऊ

     मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदेश के 57 हजार से अधिक पंचायत सहायकों को बड़ी सौगात दी है। उनके मानदेय में तीन हजार रुपये की बढ़ोतरी की गई है। अभी पंचायत सहायकों को छह हजार रुपये प्रतिमाह मिलते हैं, जिसे बढ़ाकर नौ हजार रुपये किया जाएगा। इस तरह मानदेय में 50 फीसदी की बढ़ोतरी होगी। इसके साथ ही पंचायत सहायकों को सेवा सुरक्षा, कैशलेस उपचार और महिला पंचायत सहायकों को मातृत्व अवकाश की सुविधा भी मिलेगी।
     
    पंचायत सहायकों की मांगों को लेकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से वार्ता के बाद पंचायती राज मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने बुधवार को आंदोलन का नेतृत्व कर रहे पंचायत सहायकों के प्रतिनिधियों से बातचीत की और उन्हें बुलाया। इसके बाद प्रतिनिधियों की मौजूदगी में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर पंचायत सहायकों के हित में लिए गए फैसलों की जानकारी दी।
     
    अभी पंचायत सहायकों का मानदेय राज्य वित्त आयोग की धनराशि से दिया जाता है। अब कैबिनेट से स्वीकृति लेकर डीबीटी की व्यवस्था लागू की जाएगी। इसके बाद नौ हजार रुपये का मानदेय सीधे पंचायत सहायकों के बैंक खातों में भेजा जाएगा। इसका लाभ प्रदेश के 57 हजार से अधिक पंचायत सहायकों को मिलेगा।
     
    प्रधान-सचिव नहीं हटा सकेंगे पंचायत सहायक
    पंचायत सहायकों की सेवा सुरक्षा को लेकर भी बड़ा फैसला लिया गया है। अब ग्राम प्रधान और पंचायत सचिव अपने स्तर से पंचायत सहायक को नहीं हटा सकेंगे। इसके लिए जिलाधिकारी की अध्यक्षता में कमेटी गठित की जाएगी। किसी पंचायत सहायक को हटाने का फैसला यही कमेटी कर सकेगी।
     
    आंदोलन के मुकदमे होंगे वापस
    आंदोलन के दौरान जिन पंचायत सहायकों के खिलाफ मुकदमे दर्ज किए गए हैं, उन्हें वापस लिया जाएगा। इस दौरान कार्रवाई कर जिन पंचायत सहायकों को हटाया गया है, उन्हें दोबारा बहाल किया जाएगा।
     
    महिलाओं को मातृत्व अवकाश, कैशलेस इलाज
    महिला पंचायत सहायकों को मातृत्व अवकाश की सुविधा मिलेगी। इसके साथ ही पंचायत सहायकों को उपचार के लिए कैशलेस सुविधा का लाभ भी दिया जाएगा।
     
    मंत्री से वार्ता के बाद धरना समाप्त
    अपनी मांगों को लेकर धरना दे रहे पंचायत सहायकों के आंदोलन का नेतृत्व कर रहे प्रतिनिधियों से पंचायती राज मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने बातचीत की। प्रतिनिधियों को बुलाकर उनके साथ वार्ता की गई। इसके बाद पंचायत सहायकों के प्रतिनिधि मंत्री के साथ प्रेस कॉन्फ्रेंस में भी मौजूद रहे। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के स्तर पर लिए गए फैसलों की जानकारी मिलने के बाद पंचायत सहायकों ने अपना धरना समाप्त कर दिया।

  • सपा सरकार पर बृजलाल के गंभीर आरोप, आतंकवाद से जुड़े मुकदमे वापस लेने की कोशिश का किया दावा

    सपा सरकार पर बृजलाल के गंभीर आरोप, आतंकवाद से जुड़े मुकदमे वापस लेने की कोशिश का किया दावा

    सपा सरकार की नीतियां थीं ‘ओपन कम्युनल कांस्पीरेसी’ : बृजलाल
     
    राज्यसभा सांसद ने पूर्ववर्ती सरकार के फैसलों पर उठाए सवाल
     
    मुस्लिम बेटियों को अनुदान और कब्रिस्तानों की चहारदीवारी के फैसले का किया जिक्र
     
    आतंकवाद से जुड़े मुकदमे वापस लेने की कोशिश का लगाया आरोप
     
    मैनाठेर हिंसा, पीएसी की कंपनियों और खालिद मुजाहिद प्रकरण को लेकर भी सपा को घेरा
     
    लखनऊ

     पूर्व डीजीपी एवं राज्यसभा सांसद बृजलाल ने समाजवादी पार्टी की पूर्ववर्ती सरकार पर हमला बोलते हुए उसकी नीतियों को ‘ओपन कम्युनल कांस्पीरेसी’ करार दिया है। उन्होंने सपा सरकार के दौरान मुस्लिम बेटियों को अनुदान, कब्रिस्तानों की चहारदीवारी, आतंकवाद से जुड़े मुकदमे वापस लेने की कोशिश और पीएसी की कंपनियों को निष्क्रिय करने समेत कई फैसलों का उल्लेख करते हुए सवाल उठाए।
     
    बृजलाल ने बुधवार को जारी बयान में कहा कि सपा सरकार बनते ही केवल मुस्लिम बेटियों को 30 हजार रुपये का अनुदान देने की व्यवस्था की गई। उन्होंने सवाल किया कि पिछड़े, दलित और अन्य वर्गों की बेटियों के लिए ऐसी व्यवस्था क्यों नहीं की गई। बृजलाल ने इसे सपा सरकार की ‘ओपन कम्युनल कांस्पीरेसी’ बताया।
     
    उन्होंने आरोप लगाया कि तत्कालीन सरकार की प्राथमिकताओं में आतंकवाद से जुड़े मुकदमों को वापस लेना भी शामिल था। बृजलाल ने दावा किया कि 22 जनवरी, पांच मार्च, 15 अप्रैल और 18 अप्रैल 2013 को आतंकवाद से जुड़े 14 मुकदमे वापस लेने की कोशिश की गई। इसमें दो पाकिस्तानी नागरिकों और अन्य आरोपियों से जुड़े मामले भी शामिल थे। उन्होंने कहा कि न्यायालय के हस्तक्षेप के कारण सरकार इसमें सफल नहीं हो सकी और बाद में आरोपियों को सजा हुई।
     
    कब्रिस्तानों की चहारदीवारी पर उठाए सवाल
    बृजलाल ने सपा सरकार के दौरान मुस्लिम कब्रिस्तानों की चहारदीवारी के लिए सरकारी धन दिए जाने पर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि अन्य समुदायों के श्मशान और कब्रगाहों को ऐसी प्राथमिकता नहीं दी गई। दावा किया कि इस फैसले की आड़ में कई स्थानों पर ग्राम समाज और सरकारी जमीन पर कब्जे हुए।
     
    मैनाठेर हिंसा का किया जिक्र

    राज्यसभा सांसद ने छह जुलाई 2011 के मुरादाबाद के मैनाठेर प्रकरण का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि हिंसा के दौरान थाना-चौकी और पुलिस वाहनों को निशाना बनाया गया तथा तत्कालीन डीआईजी अशोक कुमार सिंह और उनके पीआरओ पर जानलेवा हमला हुआ। बृजलाल ने आरोप लगाया कि सत्ता में आने के बाद सपा सरकार ने इस प्रकरण से जुड़े मुकदमे वापस लेने का प्रयास किया। उन्होंने कहा कि न्यायालय ने इस प्रयास को सफल नहीं होने दिया और बाद में 16 आरोपियों को आजीवन कारावास की सजा हुई।
     
    पीएसी और एटीएस को लेकर भी साधा निशाना
    बृजलाल ने आरोप लगाया कि सपा सरकार ने पीएसी की 46 कंपनियों को निष्क्रिय किया और एटीएस को भी कमजोर किया। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार ने पीएसी में भर्ती करने के साथ तीन नई महिला पीएसी बटालियन बनाई हैं।
     
    खालिद मुजाहिद प्रकरण भी उठाया
    पूर्व डीजीपी ने खालिद मुजाहिद की मौत से जुड़े मामले का उल्लेख करते हुए कहा कि तत्कालीन सरकार में उनके और 38 पुलिसकर्मियों के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज किया गया था। बृजलाल ने इसे भी ‘ओपन कम्युनल कांस्पीरेसी’ बताते हुए कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार आने के बाद यह कार्रवाई समाप्त हुई।
     
    बृजलाल ने समान नागरिक संहिता का समर्थन करते हुए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को बधाई दी। उन्होंने कहा कि समान नागरिक संहिता विवाह, तलाक और उत्तराधिकार जैसे मामलों में नागरिकों को समान कानूनी अधिकार देने की व्यवस्था है। इससे लैंगिक समानता और राष्ट्रीय एकता को बढ़ावा मिलेगा। उन्होंने कहा कि देश संविधान और उसके अंतर्गत बने कानूनों से चलता है।

  • श्रमदान कर ऐतिहासिक पोखरे की सफाई करने वाले युवाओं की मुख्यमंत्री योगी ने की सराहना

    श्रमदान कर ऐतिहासिक पोखरे की सफाई करने वाले युवाओं की मुख्यमंत्री योगी ने की सराहना

    गोरखपुर

    मां तरकुलहा देवी धाम परिसर स्थित ऐतिहासिक पोखरे के कायाकल्प की उम्मीद जगी है। लंबे समय से पोखरे में जमा जलकुंभी और गंदगी से श्रद्धालुओं को हो रही परेशानी से दो युवाओं ने निजात दिलाई। गांव भाऊपुर (बंजारी देवी, चौरीचौरा) के युवा अनुपम गुप्ता और करन निषाद ने स्वप्रेरणा से सफाई का बीड़ा उठाया।

    दोनों युवाओं ने पांच सितंबर से प्रतिदिन श्रमदान कर पोखरे से जलकुंभी और गंदगी हटाना शुरू किया। मंदिर पहुंचने वाले श्रद्धालुओं ने भी श्रद्धा और सेवा भाव से किए जा रहे इस कार्य को देखकर युवाओं की सराहना की। वहीं मंदिर ट्रस्ट ने भी उनके सेवा भाव और समर्पण की प्रशंसा की।

    युवाओं की इस पहल की जानकारी शासन तक पहुंची तो बुधवार (16 सितंबर) की सुबह करीब नौ बजे एसडीएम चौरीचौरा ने अनुपम गुप्ता और करन निषाद से फोन पर संपर्क साधा। उन्होंने युवाओं को बताया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मिलने के लिए बुलाया है। इसके बाद एसडीएम ने दोनों युवाओं को एनेक्सी भवन पहुंचाया। दोनों करीब 10 बजे एनेक्सी भवन पहुंचे।

    मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने दोनों युवाओं से मुलाकात की। उनके साथ फोटो खिंचवाई और आशीर्वाद दिया। मुख्यमंत्री ने दोनों युवाओं की भूरि भूरि प्रशंसा की। मुख्यमंत्री ने पोखरे की सफाई के लिए उनके द्वारा किए जा रहे श्रमदान और सेवा भाव की सराहना करते हुए उनके योगदान को अनुकरणीय बताया। मुख्यमंत्री ने आश्वासन भी दिया कि मां तरकुलहा देवी धाम के सामने स्थित प्राचीन पोखरे का सुंदरीकरण और स्थायी जीर्णोद्धार जल्द कराया जाएगा।

  • मुख्यमंत्री डॉ. यादव इंदौर में सिंधु कला केंद्र के भूमि पूजन कार्यक्रम में हुए वर्चुअली शामिल

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव इंदौर में सिंधु कला केंद्र के भूमि पूजन कार्यक्रम में हुए वर्चुअली शामिल

    भोपाल 

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि सिंधी समाज का कठिनाईयों से भरा लंबा संघर्ष रहा है। उनकी जीवटता और कर्मठता हर किसी को प्रभावित करती है। उनकी मधुर बोली और स्वभाव सबका दिल जीत लेती है। सिंधी समाज ने विभाजन की विभिषिका झेली है। उन्होंने अपनी जन्म भूमि-घर और व्यापार छोड़ा लेकिन अपने संस्कार के साथ धर्म और हौसला नहीं खोया। प्राचीनतम सिंधु घाटी सभ्यता का इतिहास हम सभी को एक गौरवशाली अतीत से परिचित करवाता है। स्वाभिमान से जीवन जीने के प्रतीक बन चुके सिंधी समाज की गौरवशाली विरासत को आगे बढ़ाने के लिए राज्य सरकार प्रतिबद्ध है। अनेकों बार चुनौतियों को अवसर में बदलकर अपनी पहचान और गौरव को संजोए रखने वाले सिंधी समाज पर प्रदेशवासियों को गर्व है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव बुधवार को समत्व भवन, मुख्यमंत्री निवास से इंदौर में आयोजित सिंधु कला केंद्र के भूमि पूजन कार्यक्रम को वर्चुअली संबोधित कर रहे थे।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि इंदौर में सिंधु कला केंद्र का भव्य और दिव्य भवन बनकर तैयार होगा, जो सिंधी समाज की कला, संस्कृति और विरासत से भविष्य की पीढ़ियों को परिचित कराएगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सिंधी समाज के महापुरुषों की जीवनी जिनमें वीर राजा दाहिर, समाज सुधारक और संत कंवरराम और शहीद हेमू कालानी शामिल हैं,  स्कूली पाठ्यक्रम में शामिल कर राज्य सरकार ने अपना वादा निभाया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने भगवान झूलेलाल का जयकारा लगाते हुए भूमि-पूजन कार्यक्रम में उपस्थित जन समुदाय को आश्वासन दिलाया कि वे सिंधु कला केंद्र के लोकार्पण कार्यक्रम में जरूर आएंगे।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के जन्म दिवस पर 17 सितम्बर को राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन इंदौर पधार रहे हैं। वे लोकमाता देवी अहिल्याबाई होल्कर की नगरी से एक माह तक चलने वाले सेवा से संकल्प अभियान, स्वामित्व योजना का शुभारंभ करेंगे एवं विभिन्न कार्यक्रमों में शामिल होंगे। इंदौर में भूमि-पूजन कार्यक्रम के अवसर पर स्थानीय सांसद शंकर लालवानी, ईश्वर झामनानी सहित स्थानीय जनप्रतिनिधि एवं बड़ी संख्या में सिंधी समाज के प्रतिष्ठित जन उपस्थित थे।

     

  • भारत-पाक तनाव के बीच समंदर में बड़ा टकराव, भारतीय युद्धपोत से भिड़ा पाकिस्तानी जहाज

    भारत-पाक तनाव के बीच समंदर में बड़ा टकराव, भारतीय युद्धपोत से भिड़ा पाकिस्तानी जहाज

    मुंबई 
    भारत और पाकिस्तान के बीच समुद्री मोर्चे पर तनाव बढ़ाने वाली एक घटना सामने आई है। 15 सितंबर की शाम उत्तर अरब सागर में भारतीय नौसेना के एक फ्रंटलाइन युद्धपोत और पाकिस्तान नौसेना के एक जहाज के बीच टक्कर हो गई। सूत्रों के मुताबिक, पाकिस्तानी नौसैनिक जहाज एक नियमित निगरानी मिशन पर तैनात भारतीय युद्धपोत के बेहद करीब तेज गति से आया और इस दौरान उसने गैर-पेशेवर तथा असुरक्षित तरीके से मैन्युवरिंग की। इसी वजह से दोनों जहाजों की टक्कर हुई। हालांकि, टक्कर में किसी बड़े नुकसान की सूचना नहीं है। घटना के बाद भारत ने इसे गंभीरता से लिया है और पाकिस्तान के राजनयिक को तलब कर कड़ा विरोध दर्ज कराया है।

    अचानक सामने आया पाकिस्तानी जहाज
    अरब सागर के समंदर में दो देशों के युद्धपोतों के बीच सुरक्षित दूरी बनाए रखना बेहद जरूरी होता है. खासकर तब, जब दोनों जहाज अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में काम कर रहे हों. इस घटना में भारतीय युद्धपोत अपनी नियमित निगरानी ड्यूटी कर रहा था. तभी पाकिस्तानी नौसेना का जहाज उसकी तरफ तेजी से बढ़ा. पाकिस्तानी जहाज ने जिस तरह से समुद्र में अपनी दिशा बदली, वह सुरक्षित नौवहन के नियमों के अनुरूप नहीं था. इसके बाद पाकिस्तानी जहाज ने भारतीय युद्धपोत को टक्कर मार दी. हालांकि, इस घटना में किसी बड़े नुकसान की सूचना नहीं है। 

    समंदर में इतनी हलचल क्यों मची?
    क्योंकि मामला भारत और पाकिस्तान की नौसेनाओं से जुड़ा है. इसलिए यह भिड़ंत काफी अहम है. दोनों देशों के बीच संबंध पहले से ही संवेदनशील हैं. ऐसे में समुद्र में दोनों देशों के युद्धपोतों का इस तरह आमने-सामने आना चिंता बढ़ाने वाला है. हालांकि, यह बात साफ है कि यह घटना को सैन्य हमला नहीं है. भारत की ओर से इसे पाकिस्तानी जहाज की असुरक्षित और गैर-पेशेवर गतिविधि से जुड़ी घटना बताया गया है. यही वजह है कि भारत ने मामले को केवल नौसेना स्तर तक सीमित नहीं रखा. इसे राजनयिक स्तर पर भी उठाया गया। 

    भारत ने पाकिस्तान के राजनयिक को किया तलब
    घटना के बाद भारत ने आज यानी बुधवार को नई दिल्ली में पाकिस्तान के टॉप राजनयिक प्रतिनिधि को तलब किया. भारत ने इस मामले पर औपचारिक विरोध दर्ज कराया. विदेश मंत्रालय ने कहा कि पाकिस्तानी नौसैनिक जहाज का व्यवहार अस्वीकार्य और गैर-पेशेवर था. भारत ने पाकिस्तान से कहा कि उसके सैन्य जहाजों को समुद्र में उचित सावधानी बरतनी चाहिए. साथ ही दोनों देशों के बीच हुए संबंधित समझौतों का पालन करना चाहिए, ताकि भविष्य में इस तरह की घटना दोबारा न हो। 

    1991 के समझौते का क्यों आया जिक्र?
    भारत ने इस घटना को अप्रैल 1991 में हुए भारत-पाकिस्तान समझौते से भी जोड़ा है. इस समझौते का मकसद सैन्य अभ्यास, युद्धाभ्यास और सैनिक गतिविधियों को लेकर दोनों देशों के बीच गलतफहमी और दुर्घटना का खतरा कम करना था. इसके अनुच्छेद 10 में दोनों देशों के नौसैनिक जहाजों और पनडुब्बियों के बीच अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में सुरक्षित दूरी बनाए रखने की बात कही गई है. उपलब्ध दस्तावेजों के मुताबिक, दोनों देशों के जहाजों को एक-दूसरे के तीन नॉटिकल मील के भीतर नहीं आना चाहिए. यानी इस तरह के समझौते का मकसद ही यह है कि दोनों देशों की सैन्य इकाइयां समुद्र में इस तरह की स्थिति पैदा न करें, जिससे टक्कर या किसी बड़े सैन्य विवाद का खतरा पैदा हो। 

    ऐसा पहले भी हो चुका है
    भारत और पाकिस्तान की नौसेनाओं के बीच समुद्र में टकराव का विवाद नया नहीं है. जून 2011 में भी आईएनएस गोदावरी और पाकिस्तान नौसेना के पीएनएस बाबर को लेकर विवाद हुआ था. उस समय दोनों देशों ने एक-दूसरे पर आरोप लगाए थे. भारत ने पाकिस्तान के जहाज पर जोखिम भरे तरीके से चलने का आरोप लगाया था और 1991 के समझौते के अनुच्छेद 10 का हवाला देते हुए विरोध दर्ज कराया था. इससे साफ है कि समुद्र में दोनों देशों के युद्धपोतों के बीच सुरक्षित दूरी और संचार कितना अहम है। 

    अब आगे क्या होगा?
    फिलहाल सबसे अहम बात यह है कि इस घटना में किसी बड़े नुकसान की सूचना नहीं है. लेकिन भारत ने इसे गंभीरता से लेते हुए राजनयिक स्तर पर विरोध दर्ज कराया है. भारत ने पाकिस्तान से अपने नौसैनिक जहाजों को सावधानी बरतने और दोनों देशों के बीच मौजूद समझौतों का सम्मान करने को कहा है. साथ ही भारत के इस्लामाबाद स्थित प्रभारी राजदूत को भी पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय के सामने इसी तरह का विरोध दर्ज कराने का निर्देश दिया गया है. यानी समुद्र में हुई एक टक्कर अब कूटनीतिक मुद्दा भी बन गई है. आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि पाकिस्तान इस घटना पर क्या प्रतिक्रिया देता है और दोनों देशों की नौसेनाएं भविष्य में ऐसी स्थिति से बचने के लिए क्या कदम उठाती हैं। 

    कैसे हुई टक्कर?
    सूत्रों के मुताबिक, भारतीय नौसेना का फ्रंटलाइन युद्धपोत उत्तर अरब सागर में नियमित निगरानी मिशन पर था। इसी दौरान पाकिस्तान नौसेना का एक जहाज तेज गति से भारतीय युद्धपोत के करीब आया।

    बताया जा रहा है कि पाकिस्तानी जहाज की मैन्युवरिंग को असुरक्षित और गैर-पेशेवर माना गया। दोनों जहाजों के बीच पर्याप्त दूरी नहीं रह गई और आखिरकार उनकी टक्कर हो गई।

    फिलहाल सार्वजनिक तौर पर दोनों जहाजों के नाम और टक्कर की सटीक लोकेशन जैसी तकनीकी जानकारी सामने नहीं आई है।

    बड़ा नुकसान नहीं, फिर भी भारत ने क्यों जताई नाराजगी?
    घटना में फिलहाल किसी बड़े नुकसान की सूचना नहीं है, लेकिन मामला इसलिए गंभीर है क्योंकि अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में दोनों देशों के युद्धपोतों की सुरक्षित दूरी और संचालन को लेकर भारत-पाकिस्तान के बीच पहले से समझौता मौजूद है।

    भारत के विदेश मंत्रालय ने बुधवार को नई दिल्ली में पाकिस्तान हाई कमीशन के कार्यवाहक राजदूत को तलब किया। उनके सामने पाकिस्तानी नौसैनिक इकाइयों के व्यवहार को “अस्वीकार्य और गैर-पेशेवर” बताते हुए कड़ा विरोध दर्ज कराया गया।

    भारत ने कहा कि इस घटना में पाकिस्तानी नौसैनिक जहाज का आचरण अप्रैल 1991 में भारत और पाकिस्तान के बीच हुए सैन्य अभ्यासों, युद्धाभ्यासों और सैनिकों की आवाजाही के बारे में अग्रिम सूचना पर समझौता के आर्टिकल 10 के सीधे खिलाफ था।

    1991 के समझौते में क्या है?
    भारत और पाकिस्तान ने अप्रैल 1991 में सैन्य गतिविधियों से जुड़ी गलतफहमियों और दुर्घटनाओं को रोकने के लिए एक समझौता किया था। इसके आर्टिकल 10 में दोनों देशों के नौसैनिक जहाजों और पनडुब्बियों के अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में संचालन को लेकर विशेष प्रावधान है। इसके तहत दोनों देशों के नौसैनिक जहाजों को एक-दूसरे के तीन नॉटिकल मील से कम करीब नहीं आना चाहिए, ताकि दुर्घटना से बचा जा सके। तीन नॉटिकल मील करीब 5.56 किलोमीटर के बराबर होते हैं। इस प्रावधान का उल्लेख भारत सरकार के पुराने आधिकारिक रिकॉर्ड में भी मिलता है। इसलिए मौजूदा घटना में भारत की आपत्ति केवल टक्कर होने को लेकर नहीं है, बल्कि यह भी है कि पाकिस्तानी जहाज ने अंतरराष्ट्रीय समुद्र में सुरक्षित संचालन के लिए मौजूद द्विपक्षीय व्यवस्था का पालन नहीं किया।

    भारत ने पाकिस्तान से क्या कहा?
    विदेश मंत्रालय के मुताबिक, पाकिस्तानी कार्यवाहक राजदूत को कहा गया है कि वह पाकिस्तान के संबंधित अधिकारियों तक भारत की आपत्ति पहुंचाएं। भारत ने स्पष्ट किया है कि दोनों देशों की सैन्य इकाइयों को समुद्र में उचित सावधानी बरतनी चाहिए, एक-दूसरे के साथ सुरक्षित दूरी बनाए रखनी चाहिए, दोनों देशों के बीच मौजूद प्रासंगिक समझौतों का सम्मान करना चाहिए और भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए जरूरी सावधानियां बरतनी चाहिए। इसके साथ ही इस्लामाबाद में भारत के कार्यवाहक राजदूत को भी पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय के सामने इसी तरह का विरोध दर्ज कराने का निर्देश दिया गया है।

    क्या यह पहली बार हुआ है?
    भारत और पाकिस्तान की नौसेनाओं के बीच समुद्र में इस तरह की तनातनी का इतिहास पुराना है। 2011 में भी INS दोगावरी और पाकिस्तान के PNS बाबर के बीच अरब सागर/हाई सीज क्षेत्र में संपर्क की घटना हुई थी। उस समय भी दोनों पक्षों ने एक-दूसरे पर खतरनाक मैन्युवरिंग के आरोप लगाए थे और भारत ने आर्टिकल 10 का हवाला देते हुए पाकिस्तान के खिलाफ विरोध दर्ज कराया था।

  • PhonePe, Paytm समेत किन UPI ऐप्स पर कटेगा MDR? ₹2,000 वाली पेमेंट का समझें पूरा नियम

    PhonePe, Paytm समेत किन UPI ऐप्स पर कटेगा MDR? ₹2,000 वाली पेमेंट का समझें पूरा नियम

      नई दिल्ली
    भारत सरकार ने यूनिफाइड पेमेंट इंटरफेस (UPI) पेमेंट्स् पर चार्ज लागू करने का ऐलान कर दिया है, जो आने वाले 15 अक्टूबर से लागू होगा. UPI का भारत में बड़ा यूजरबेस है. बहुत से लोग मोबाइल में UPI ऐप्स का इस्तेमाल करते हैं, जिनके नाम PhonePe, PayTM, GPay और कई मोबाइल ऐप्स भी UPI की सर्विस देते हैं। 

    अब UPI ऐप्स चलाने वाले यूजर्स के बीच में कंफ्यूजन है कि किन-किन UPI मोबाइल ऐप्स पर MDR चार्ज कटेगा?

    सबसे पहले बता देते हैं कि 2,000 रुपये से ऊपर की कीमत के ट्रांजैक्शन पर करने पर 0.40 परसेंट मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) देना होगा. सरकार साफ कर चुकी है कि यह चार्ज कस्टमर को नहीं देना होगा बल्कि यह चुनिंदा मर्चेंट पर चार्ज लगेगा। 

    चार्ज सिर्फ पर्सन टू मर्चेंट (P2M)
    सरकार की तरफ से जारी जानकारी में साफ बताया है कि चार्ज सिर्फ पर्सन टू मर्चेंट (P2M) है. अगर कस्टमर 2 हजार रुपये से ज्यादा की पेमेंट करता है तो उसे कोई चार्ज नहीं देना होगा. यह चार्ज सिर्फ चुनिंदा मर्चेंट पर ही लागू होगा। 

    MDR कैलकुलेशन कैसे होगा? 
    MDR की कैलकुलेशन को लेकर साफ जानकारी दी गई है. सरकार की तरफ से जारी सवालों के जवाब में बताया है कि ₹3,000 की खरीदारी पर 0.4% MDR लागू होने पर शुल्क ₹12 होगा. यह रकम व्यापारी अपने Acquiring Bank को देगा. वहीं, ₹50,000 की खरीदारी पर 0.4% MDR के हिसाब से शुल्क ₹200 होगा। 

    1 लाख रुपये की शॉपिंग पर 0.4 परसेंट के हिसाब से MDR 400 रुपये बनता है, लेकिन यहां 300 रुपये की सीमा तय की है। 

    दरअसल, NPCI ने चुनिंदा UPI ट्रांजैक्शन के लिए Merchant Discount Rate यानी MDR का नया सिस्टम लागू करने का ऐलान किया है. नए नियम के तहत 15 अक्टूबर से ₹2,000 से ज्यादा के कुछ पर्सन टू मर्चेंट यानी P2M UPI पेमेंट पर अधिकतम 0.4% तक MDR लगाया जा सकेगा. हालांकि, सभी ट्रांजैक्शन पर एक जैसी दर लागू नहीं होगी. कुछ कैटेगरी के लिए कम दर रखी जाएगी और छोटे कारोबारियों को छूट भी मिलेगी. आम UPI यूजर्स के लिए सबसे बड़ी बात यह है कि ₹2,000 तक के P2M ट्रांजैक्शन पर MDR शून्य ही रहेगा। 

    शेयर्स में जोरदार तेजी
    पेटीएम के शेयर्स में आज 4 फीसदी की तेजी आई है. कंपनी के शेयर्स ने पिछले 3 महीनों में 56 फीसदी का रिटर्न और 1 साल में 40 फीसदी का मुनाफा दिया है. One MobiKwik Systems का शेयर भी 4 फीसदी से ज्यादा उछला है.  हालांकि, कंपनी ने शेयर्स ने 1 साल में 36 फीसदी का नेगेटिव रिटर्न दिया है. इसके अलावा यस बैंक के शेयर्स में भी 2 फीसदी की तेजी देखी जा रही है. बैंक ने 1 साल में 9 फीसदी का नेगेटिव रिटर्न दिया है। 

    UPI इंडस्ट्री का बढ़ेगा रेवेन्यू
    मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, गोल्डमैन सैक्स के अनुमान के मुताबिक, नए MDR सिस्टम से UPI इंडस्ट्री के लिए करीब ₹20,600 करोड़ का सालाना रेवेन्यू पूल बन सकता है. यह अनुमान इस आधार पर है कि कुल UPI ट्रांजैक्शन वैल्यू का करीब आधा हिस्सा 0.4% की पूरी MDR दर के दायरे में आ सकता है. वहीं, JPMorgan ने अधिकतम संभावित रेवेन्यू करीब ₹17,000 करोड़ आंका है. इसमें से लगभग ₹11,700 करोड़ बैंकों को मिल सकते हैं। 

    Citi का अनुमान है कि UPI इकोसिस्टम में हर साल करीब ₹16,000-17,000 करोड़ की कमाई हो सकती है. उसके मुताबिक, इस रकम का लगभग 60% हिस्सा बैंकों, 25% UPI ऐप प्रोवाइडर्स और 15% गैर-बैंक पेमेंट एग्रीगेटर्स को मिल सकता है. Citi ने YES Bank को प्रॉफिट पाने वाली कंपनियों में बताया है, क्योंकि बैंक का UPI से जुड़ा ट्रांजैक्शन वॉल्यूम काफी बड़ा है। 

    कंपनियों को मिलेगा फायदा
    PhonePe के फाउंडर और CEO Sameer Nigam ने इस फैसले को UPI सिस्टम की लंबे समय की स्थिरता के लिए अहम बताया है. उनके मुताबिक देश में रोज करीब 70-80 करोड़ UPI ट्रांजैक्शन होते हैं और इनमें लगभग 96% पेमेंट ₹2,000 से कम के हैं. उनका कहना है कि बड़े ट्रांजैक्शन पर मिलने वाला MDR भुगतान कंपनियों को अपने ऑपरेशनल खर्च की भरपाई करने में मदद कर सकता है. पिछले कई सालों से UPI पर MDR नहीं होने के कारण पेमेंट इंडस्ट्री को लगातार लागत उठानी पड़ रही थी। 

    मनीकंट्रोल की रिपोर्ट में भी बताया गया है कि Paytm ने जानकारी दी है कि ₹2,000 से ज्यादा के UPI Person-to-Merchant (P2M) पेमेंट पर 0.4% तक MDR लागू होने से कंपनी को मर्चेंट बिजनेस से अतिरिक्त कमाई हो सकती है. कंपनी के मुताबिक, जिन बड़े पेमेंट पर पहले कोई चार्ज नहीं लगता था, अब उनमें MDR से पेमेंट कंपनियों के लिए नए रेवेन्यू का रास्ता खुलेगा।

                                     MDR चार्ज कैलकुलेटर

    व्यापारी को भुगतान की राशि    लागू MDR  व्यापारी द्वारा दिया जाने वाला MDR
    ₹2,000    0%    ₹0
    ₹3,000    0.40% ₹12
    ₹50,000    0.40%  ₹200
    ₹ 75,000 रुपये या उससे ज्यादा फिक्स ₹ 300 ₹ 300

    कस्टमर पर नहीं लगेगा कोई भी चार्ज 

    मोबाइल में मौजूद UPI ऐप्स जैसे PhonePe, PayTM, Gpay आदि की मदद से अगर कोई पेमेंट करते हैं, तो कस्टमर के अकाउंट से कोई चार्ज पेमेंट नहीं होगी.  MDR चार्ज सिर्फ चुनिंदा मर्चेंट से ली जाएगी. यह रकम मर्चेंट के बैंक अकाउंट से काटी जाएगी. 

     

     

  • शिक्षकों की मांग पर बड़ा फैसला: ऑनलाइन की बजाय अब पारंपरिक पेन-पेपर मोड में होगी विशेष TET परीक्षा।

    शिक्षकों की मांग पर बड़ा फैसला: ऑनलाइन की बजाय अब पारंपरिक पेन-पेपर मोड में होगी विशेष TET परीक्षा।

    भोपाल
    मध्य प्रदेश में बिना पात्रता परीक्षा दिए भर्ती हुए करीब डेढ़ लाख शिक्षकों की विशेष शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) अब माध्यमिक शिक्षा मंडल (माशिमं) कराएगा। स्कूल शिक्षा विभाग ने परीक्षा आयोजन की अधिसूचना जारी कर दी है। पहले इसकी जिम्मेदारी मध्य प्रदेश कर्मचारी चयन मंडल (ESB) को दी गई थी, लेकिन बाद में उसने परीक्षा आयोजन को लेकर असमर्थता जता दी।

    ESB ने परीक्षा के लिए ऑनलाइन आवेदन की प्रक्रिया शुरू कर दी थी और 18 सितंबर आवेदन की अंतिम तिथि निर्धारित थी। हालांकि शिक्षकों की मांग के बाद परीक्षा ऑनलाइन के बजाय पारंपरिक ऑफलाइन माध्यम से कराने का फैसला लिया गया। इसके बाद परीक्षा एजेंसी बदलनी पड़ी।

    शिक्षकों के विरोध के बाद बदला परीक्षा का तरीका

    दरअसल, सुप्रीम कोर्ट के मई 2026 के आदेश के अनुसार प्राथमिक और माध्यमिक स्कूलों में कार्यरत ऐसे शिक्षकों के लिए विशेष TET आयोजित की जानी है, जिन्होंने पात्रता परीक्षा पास किए बिना शिक्षक के रूप में नियुक्ति पाई है।
    परीक्षा कराने की जिम्मेदारी पहले ESB को दी गई थी। पिछले महीने ESB ने ऑनलाइन परीक्षा के लिए आवेदन मांगे। इसके बाद बड़ी संख्या में शिक्षकों ने ऑनलाइन परीक्षा का विरोध करते हुए ऑफलाइन मोड में परीक्षा कराने की मांग की।
    मामला मुख्यमंत्री तक पहुंचा, जिसके बाद परीक्षा पारंपरिक ऑफलाइन तरीके से कराने के निर्देश दिए गए। स्कूल शिक्षा विभाग ने ESB से ऑफलाइन परीक्षा कराने का प्रस्ताव रखा, लेकिन ESB ने इससे असमर्थता जता दी।

    अब माशिमं जारी करेगा नया शेड्यूल

    ESB के मुताबिक उसकी परीक्षा व्यवस्था मुख्य रूप से ऑनलाइन परीक्षाओं के लिए तैयार है। ऐसे में विशेष TET कराने की जिम्मेदारी अब माध्यमिक शिक्षा मंडल को सौंप दी गई है। मंगलवार शाम विभाग ने इसकी अधिसूचना जारी कर दी।

    ESB ने इस परीक्षा के लिए 12 अक्टूबर की संभावित तारीख तय की थी। एजेंसी बदलने के बाद अब परीक्षा का कार्यक्रम नए सिरे से तैयार होगा। अधिकारियों के अनुसार परीक्षा दिसंबर तक आयोजित किए जाने की संभावना है।

    माशिमं अगले एक-दो दिन में बैठक कर परीक्षा से जुड़ी प्रक्रिया तय करेगा। इसके बाद आवेदन प्रक्रिया और परीक्षा की नई तारीखों की घोषणा की जाएगी।

    पहले आवेदन कर चुके शिक्षकों को राहत

    परीक्षा एजेंसी बदलने के बावजूद जिन शिक्षकों ने ESB के पोर्टल पर पहले ही आवेदन कर दिया है, उन्हें दोबारा आवेदन करने की जरूरत नहीं होगी।

    वहीं, जिन शिक्षकों ने अब तक आवेदन नहीं किया है, उनके लिए माशिमं नए सिरे से आवेदन प्रक्रिया शुरू करेगा। इसकी तारीख और अन्य दिशा-निर्देश जल्द जारी किए जाएंगे।

     

  • उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने प्रदेशवासियों से स्वैच्छिक रक्तदान की अपील की

    उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने प्रदेशवासियों से स्वैच्छिक रक्तदान की अपील की

    भोपाल 

    उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने 17 सितंबर से 17 अक्टूबर तक आयोजित होने वाले “सेवा संकल्प अभियान” के अंतर्गत प्रदेशवासियों से स्वैच्छिक रक्तदान में सक्रिय सहभागिता की अपील की है। उन्होंने कहा कि रक्तदान किसी जरूरतमंद का जीवन बचाने का सबसे महत्वपूर्ण माध्यम है। गर्भवती महिलाओं, सिकल सेल, थैलेसीमिया, एनीमिया, डायलिसिस एवं कैंसर से पीड़ित मरीजों को नियमित रूप से रक्त की आवश्यकता होती है। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा कि अभियान के दौरान प्रदेश के सभी जिलों में रक्तदान शिविर आयोजित किए जाएंगे। इन गतिविधियों में सामाजिक एवं स्वयंसेवी संस्थाओं, युवा संगठनों, क्लबों तथा औद्योगिक एवं व्यावसायिक संस्थानों की सहभागिता होगी।

    उन्होंने कहा कि रक्तदान शिविरों की निगरानी भारत सरकार के e-RaktKosh पोर्टल के माध्यम से की जाएगी तथा रक्तदाताओं का ABHA ID के माध्यम से पंजीयन किया जाएगा। चिकित्सकीय पात्रता के अनुसार 18 से 65 वर्ष की आयु के स्वस्थ व्यक्ति, जिनका वजन 45 किलोग्राम से अधिक है, स्वैच्छिक रक्तदान कर सकते हैं।

    उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने विशेष रूप से युवाओं से अभियान से जुड़ने और नियमित स्वैच्छिक रक्तदाता बनने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि नागरिक अपने मोबाइल में e-RaktKosh App डाउनलोड कर अपने आसपास आयोजित होने वाले रक्तदान शिविरों की जानकारी प्राप्त कर सकते हैं और रक्तदान के लिए पंजीयन कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि यदि प्रदेश का प्रत्येक स्वस्थ युवा नियमित रूप से रक्तदान करे, तो जरूरतमंद मरीजों के लिए रक्त की उपलब्धता सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण मदद मिलेगी।