Author: NewseDay

  • गणेश उत्सव पर अनोखी कलाकृति: केवल 70 मिलीग्राम वजन में तैयार की गई गणेश जी के अष्टविनायक रूपों की सूक्ष्म प्रतिमा।

    गणेश उत्सव पर अनोखी कलाकृति: केवल 70 मिलीग्राम वजन में तैयार की गई गणेश जी के अष्टविनायक रूपों की सूक्ष्म प्रतिमा।

    नीमच
    इन दिनों भारत सहित दुनिया भर में लोग गणेश उत्सव की आस्था में सराबोर हैं. इसी बीच नीमच के जावद कस्बे से कला और अध्यात्म का एक अनोखा संगम सामने आया है. स्थानीय माइक्रो आर्टिस्ट राजेश सोनी ने चांदी धातु से भगवान गणेश के अष्टविनायक स्वरूपों की बेहद सूक्ष्म और बारीक कलाकृति तैयार की है. पूरी कलाकृति का आकार मात्र 6 मिलीमीटर है और इसका कुल वजन केवल 70 मिलीग्राम दर्ज किया गया है. यह अष्टविनायक इतने सूक्ष्म हैं कि इन्हें चावल के एक दाने या भगवान गणेश को प्रिय दूर्वा घास के पत्ते पर आसानी से रखा जा सकता है.

    आठों स्वरूपों को शामिल किया गया
    आर्टिस्ट राजेश सोनी द्वारा बनाई गई इस सूक्ष्म कलाकृति में भगवान गणेश के प्रसिद्ध आठों स्वरूपों को शामिल किया गया है. इनमें श्री मयूरेश्वर, श्री सिद्धिविनायक, श्री बल्लालेश्वर, श्री वरदविनायक, श्री चिंतामणि, श्री गिरजात्मज, श्री विघ्नेश्वर और श्री महागणपति के रूप प्रदर्शित किए गए हैं. इन नन्हीं मूर्तियों की सुंदरता बढ़ाने के लिए शुद्ध हल्दी, कुंकुम और अक्षत का प्रयोग किया गया है. हरी-भरी दूर्वा पर रखी गई यह कलाकृति देखने में काफी आकर्षक लगती है.

    इस तरह जोड़े गए 2 से 3 मिलीमीटर के हिस्से

    ऐसी सूक्ष्म कलाकृति का निर्माण बेहद जटिल और धैर्य मांगने वाला काम होता है. आर्टिस्ट राजेश ने बताया, "अष्टविनायक के प्रत्येक स्वरूप को तैयार करने के लिए 2 से 3 मिलीमीटर के अलग-अलग हिस्से बनाए गए. इसमें भगवान गणेश का सिर, सूंड, उदर, हाथ, पैर और सूप जैसे कान अलग से तैयार किए गए हैं. इसके बाद गैस की बेहद हल्की आंच पर इन सभी बारीक हिस्सों को आपस में जोड़ा गया. इस प्रक्रिया में सबसे बड़ी चुनौती आंच के तापमान को संतुलित रखना था, क्योंकि थोड़ी सी भी तेज आंच चांदी के बेहद पतले तार को तुरंत पिघला सकती थी."

    सूक्ष्म कला के क्षेत्र 
    सूक्ष्म कला के क्षेत्र में राजेश सोनी का यह पहला प्रयोग नहीं है. इससे पहले भी वे अपनी बारीक कारीगरी का प्रदर्शन राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कर चुके हैं. वे दुनिया का सबसे छोटा सोने का अफीम डोडा, क्रिकेट वर्ल्ड कप की ट्रॉफी और सूक्ष्म ताजमहल जैसी कलाकृतियां बना चुके हैं. इन अद्भुत रचनाओं के लिए उनका नाम विश्व रिकॉर्ड में भी दर्ज हो चुका है. नीमच जिले में बनी यह नई कलाकृति इन दिनों लोगों के बीच काफी चर्चा का विषय बनी हुई है.

     

  • देश विरोधी हिंसक गतिविधियों को अंजाम देने की साजिश में शामिल, हैकिंग टूल कर रहा था तैयार

    देश विरोधी हिंसक गतिविधियों को अंजाम देने की साजिश में शामिल, हैकिंग टूल कर रहा था तैयार

    लखनऊ

     योगी सरकार की अपराध और आतंकवाद के खिलाफ जीरो टॉलरेंस नीति के तहत यूपी एटीएस ने अलकायदा इन इंडियन सब-कॉन्टिनेंट (एक्यूआईएस) से जुड़े मॉड्यूल पर कार्रवाई करते हुए एक और आतंकी को गिरफ्तार किया है। यूपी एटीएस ने तमिलनाडु एटीएस के सहयोग से कोयंबटूर से मकसूद अली को गिरफ्तार किया। इससे पहले इसी मामले में मुख्य आतंकी मोहम्मद नबील को 12 सितंबर को आजमगढ़ से पकड़ा गया था। 

    लखनऊ लेकर आई यूपी एटीएस

    मकसूद अली (19) मूल रूप से सिद्धार्थनगर जिले के बांसी थाना क्षेत्र के मधवापुर गांव का रहने वाला है। वर्तमान में वह तमिलनाडु के कोयंबटूर में रह रहा था। यूपी एटीएस उसे ट्रांजिट रिमांड पर लेकर लखनऊ आई है, जहां संबंधित न्यायालय के समक्ष पेश कर अग्रिम विधिक कार्रवाई की जा रही है।

    सोशल मीडिया के जरिए युवाओं को बहकाने की कोशिश

    एटीएस के मुताबिक मूल रूप से यूपी के सिद्धार्थनगर का रहने वाला मकसूद अली सोशल मीडिया के विभिन्न प्लेटफॉर्म पर समूह बनाकर देश विरोधी गतिविधियों के लिए युवाओं को जोड़ रहा था। उन्हें कट्टरपंथी विचारधारा से प्रभावित कर मुजाहिद बनने और इसके लिए धन व आधुनिक हथियारों का प्रशिक्षण लेने की योजना से जोड़ा जा रहा था। जांच में इस मॉड्यूल के तार देश के अन्य राज्यों के साथ विदेशी लोगों से जुड़े होने की जानकारी भी सामने आई है।

    पाकिस्तान में मौजूद हैंडलरों के संपर्क में आने का दावा
    जांच के दौरान सामने आया कि मकसूद अली देश विरोधी हिंसक गतिविधियों को अंजाम देने की साजिश में शामिल होने के लिए पाकिस्तान के हैंडलरों के संपर्क में आया था। एटीएस के मुताबिक, वह पाकिस्तान के हैंडलरों से संपर्क कर ‘हैकिंग टूल’ तैयार कर रहा था। पूछताछ में उसने बताया कि पायथन, जावा, कोडिंग और हैकिंग की जानकारी उसने ऑनलाइन संसाधनों, इंस्टाग्राम, यूट्यूब, टेलीग्राम और विभिन्न व्हाट्सऐप ग्रुप्स के जरिए हासिल की।

    ‘कैप्टन एम नेटवर्क’ के जरिए गतिविधियों को आगे बढ़ाने की कोशिश

    मकसूद ने अपने मकसद को पूरा करने के लिए ‘कैप्टन एम नेटवर्क’ नाम का एक सेक्योर एप्लीकेशन भी तैयार किया था। इसका मोटो था, ‘एक प्लेटफॉर्म, एक मकसद: यूनिटी, प्लान एंड एक्शन’। जांच में सामने आया कि इसी माध्यम से नबील, मकसूद और अन्य लोग आपस में जुड़े थे। मकसूद के व्हाट्सऐप ग्रुप्स की भी जानकारी सामने आई है। इनमें यूयू एंट्री गेट, यूनाइटेड उम्माह, गजवा-ए-हिंद, टीम ब्लैक हैट और लश्कर-ए-महंदी जैसे समूह शामिल मिले। इन ग्रुप्स में पाकिस्तानी नंबरों वाले संदिग्ध समेत अन्य पाकिस्तानी हैकर भी जुड़े थे। इन ग्रुप्स के जरिए कट्टरपंथी और जिहादी विचारधारा का प्रचार किया जा रहा था।

    एक्यूआईएस से जुड़े होने के सबूत मिले
    मकसूद, मोहम्मद नबील द्वारा बनाए गए ‘ला गालिब-इल्लल्लाह’ नाम के व्हाट्सऐप ग्रुप से भी जुड़ा था। इस समूह में प्रतिबंधित आतंकी संगठन एक्यूआईएस से संबंधित साहित्य और बम बनाने से जुड़े वीडियो साझा किए जा रहे थे।

  • मध्यप्रदेश में बढ़ेगा पावर सेक्टर, सीमेंस एनर्जी की बड़ी निर्माण इकाई होगी स्थापित

    मध्यप्रदेश में बढ़ेगा पावर सेक्टर, सीमेंस एनर्जी की बड़ी निर्माण इकाई होगी स्थापित

    मध्यप्रदेश में स्थापित होगी सीमेंस एनर्जी इंडिया की बड़ी पॉवर ट्रांसफार्मर निर्माण इकाई

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सीमेंस कंपनी को सौंपा 60.49 एकड़ भूमि का आशय पत्र
    कंपनी ने दिया 2053 करोड़ रुपए का निवेश प्रस्ताव, 1500 से अधिक लोगों को मिलेगा रोजगार

    भोपाल

    मध्यप्रदेश को ऊर्जा उपकरण विनिर्माण के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल हुई है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मंत्रालय में सीमेंस एनर्जी इंडिया लिमिटेड को उज्जैन स्थित विक्रम उद्योगपुरी फेज-2 में 60.49 एकड़ भूमि का आशय पत्र (लेटर ऑफ इंटेंट) प्रदान किया। सीमेंस कंपनी द्वारा यहां एक बड़ी क्षमता के पॉवर ट्रांसफार्मर के निर्माण के लिए लगभग 2,053 करोड़ रुपए का निवेश करने का प्रस्ताव दिया गया है। कंपनी की यूनिट स्थापना से 1500 से अधिक लोगों को रोजगार मिलेगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सीमेंस कंपनी के प्रबंध निदेशक एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी गुइल्हर्मे मेंडोंका, मुख्य वित्तीय अधिकारी हरीश शेखर तथा हेड-रियल एस्टेट पुनीत बंसल को भूमि का आशय पत्र सौंपा। मध्यप्रदेश औद्योगिक विकास निगम लिमिटेड के प्रबंध संचालक चंद्रमौली शुक्ला भी मौजूद थे।

    इस अवसर पर मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश उद्योगों के लिए अनुकूल नीतियों, बेहतर कनेक्टिविटी, उपलब्ध भूमि बैंक, विश्वस्तरीय औद्योगिक अधोसंरचना और निवेशक अनुकूल वातावरण के कारण देश के अग्रणी निवेश गंतव्यों में तेजी से उभर रहा है। राज्य सरकार औद्योगिक निवेशों के त्वरित क्रियान्वयन तथा रोजगार सृजन के लिए हर संभव सहयोग प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि कंपनी की प्रस्तावित परियोजना मध्यप्रदेश को देश के उभरते ऊर्जा उपकरण एवं विद्युत अवसंरचना विनिर्माण केंद्र के रूप में स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। यह निवेश राज्य में उन्नत विनिर्माण, औद्योगिक विकास तथा कुशल रोजगार सृजन को नई गति प्रदान करेगा।

    कंपनी के बारे में

    सीमेंस एनर्जी इंडिया लिमिटेड ऊर्जा उत्पादन, ऊर्जा संचरण, औद्योगिक विद्युतीकरण, ऊर्जा भंडारण तथा डीकार्बोनाइजेशन समाधानों से जुड़ी अग्रणी कंपनी है। कंपनी का दक्षिण एशिया क्षेत्र में व्यापक परिचालन है और यह वैश्विक स्तर की इंजीनियरिंग एवं अनुसंधान क्षमताओं के लिए जानी जाती है। कंपनी की इस प्रस्तावित इकाई में बड़ी क्षमता के पावर ट्रांसफार्मरों का निर्माण किया जाएगा, जो देश की बढ़ती विद्युत अवसंरचना आवश्यकताओं, ट्रांसमिशन नेटवर्क विस्तार तथा ऊर्जा क्षेत्र के आधुनिकीकरण में योगदान देंगे। परियोजना से क्षेत्रीय औद्योगिक पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूती मिलेगी और सहायक उद्योगों, लॉजिस्टिक्स तथा सेवा क्षेत्र में भी नए अवसर भी उत्पन्न होंगे। परियोजना के क्रियान्वयन के साथ विक्रम उद्योगपुरी फेज-2 में औद्योगिक गतिविधियों को नई गति मिलेगी तथा उज्जैन और आसपास के क्षेत्र ऊर्जा उपकरण विनिर्माण के एक महत्वपूर्ण केंद्र के रूप में विकसित होंगे। कंपनी का यह निवेश मध्यप्रदेश की औद्योगिक प्रगति, आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य और ऊर्जा अधोसंरचना के सुदृढ़ीकरण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

     

  • भारत पर भारी टैरिफ का हथियार तैयार, अमेरिका के कदम से बढ़ी चिंता

    भारत पर भारी टैरिफ का हथियार तैयार, अमेरिका के कदम से बढ़ी चिंता

     नई दिल्ली

    अमेरिका अब भारत पर 100 फीसदी टैरिफ लगाने की तैयारी कर रहा है। खबर है कि रूसी प्रतिबंधों से जुड़े इस बिल पर मतदान होना है। दरअसल, इस विधेयक में एक संशोधन का भी प्रस्ताव दिया गया है, जिसमें भारत समेत कई देशों का नाम जोड़ने की बात कही गई थी। कहा जा रहा है कि बुधवार को इस पर मतदान होना है, जहां संभावनाएं जताई जा रही हैं कि यह बिल पास हो सकता है।

    इसका नाम लिंडसे ओ ग्राहम सैंक्शनिंग रशिया एंड ईरान एक्ट है। अमेरिकी सीनेट में इसे 86-11 वोट से पास कर दिया गया था। अब अगर यह बिल प्रतिनिधि सभा यानी हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स में पास हो जाता है, तो अमेरिका के राष्ट्रपति को रूसी तेल खरीदने वाले देशों पर 100 फीसदी टैरिफ लगाने का अधिकार मिल जाएगा। खास बात है कि 3 नवंबर को मिड टर्म चुनाव होने हैं और सदन के महज 4 दिन ही बचे हैं।

    बिल में क्या
    इस विधेयक के जरिए अमेरिकी सरकार रूस के नेतृत्व और एनर्जी सेक्टर पर प्रतिबंध लगाना चाहती है। साथ ही उन जहाजों पर भी बैन लगाना चाहता है, जिनकी मदद से रूस तेल सप्लाई पर लगी पाबंदियों को दरकिनार कर आसानी से तेल आगे बढ़ाता है। इसे शैडो फ्लीट या गुप्त बेड़ा भी कहा जाता है। अमेरिका दावा करता रहा है कि रूस कच्चे तेल की मदद से ही यूक्रेन के खिलाफ युद्ध के लिए पैसा जुटा रहा है।

    इन देशों का नाम
    डेमोक्रेट सांसद स्टेनी होयर ने संशोधन पेश किया गया था, जिसमें देशों के नाम जोड़ने का प्रस्ताव था। इनमें चीन, भारत, तुर्किए, अजरबैजान, हंगरी, स्लोवाक गणराज्य, संयुक्त अरब अमीरात, सिंगापुर, कजाकिस्तान और किर्गिज रिपब्लिक को शामिल करने की मांग गई थी। इन देशों पर 100 फीसदी शुल्क लगाया जा सकता है। इसे प्रतिनिधि सभा में पारित किया जाना बेहद जरूरी है।

    इससे पहले जब इसे सीनेट में पास किया गया था, तब इसमें उन देशों के नाम शामिल नहीं किए गए थे। हालांकि, ऐसे 5 बड़े इम्पोर्टर्स के नामों को जोड़ा गया था, जो सबसे ज्यादा तेल और गैस खरीदते हैं।

    पहले भी बनाया भारत को निशाना
    खास बात है कि बीते साल भी अमेरिका ने भारत को रूसी तेल का हवाला कर निशाना बनाया था। तब भारत पर 25 और 25 फीसदी यानी कुल 50 प्रतिशत टैरिफ लगा दिया गया था। हालांकि, बाद में इसे कम किया गया। इतना ही नहीं अमेरिकी सरकार के कई नेताओं ने भारत की आपत्तिजनक शब्दों में आलोचना भी की थी। फिलहाल, दोनों देशों के बीच ट्रेड डील पर बातचीत चल रही है।

    कई नेता विरोध में भी
    खबरें हैं कि हकीम जेफ्रीज समेत कई डेमोक्रेटिक नेता इस बिल के विरोध में भी हैं। कुछ सांसदों की तरफ से बयान जारी किया गया था, 'प्रतिनिधि सभा में डेमोक्रेटिक सदस्य यूक्रेन के समर्थन में पूरी मजबूती से खड़े हैं लेकिन लिंडसे ओ ग्राहम सैंक्शनिंग रशिया एंड ईरान एक्ट से फायदा होने के बजाय नुकसान अधिक होगा।'

    उन्होंने कहा, 'यह विधेयक शुल्क लगाने के राष्ट्रपति के अधिकारों का बहुत अधिक विस्तार करेगा लेकिन रूस पर प्रतिबंध लगाना अनिवार्य नहीं बनाएगा। ये दोनों ही बातें अस्वीकार्य हैं। इन खामियों के कारण अमेरिकियों के लिए वस्तुएं महंगी होंगी और दीर्घकाल के लिहाज से यूक्रेन के लिए समर्थन कमजोर होगा।'

  • साइकिल, स्कूटी, लैपटॉप और गणवेश जैसी योजनाओं से मिल रहा है विद्यार्थियों को पढ़ाई के लिये प्रोत्साहन

    साइकिल, स्कूटी, लैपटॉप और गणवेश जैसी योजनाओं से मिल रहा है विद्यार्थियों को पढ़ाई के लिये प्रोत्साहन

    भोपाल 

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा किए जा रहे निरंतर नवाचारों और सुधारों का सकारात्मक असर भी प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था में दिखाई दे रहा है। पिछले 23 वर्षों में शिक्षा के क्षेत्र में किए गए बदलावों और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की वजह से प्राथमिक शालाओं में विद्यार्थियों की ड्रॉप आउट दर शून्य तक पहुंच गई है। प्रदेश के शासकीय स्कूलों में अध्ययनरत विद्यार्थियों को नवाचार के साथ गुणवत्तापूर्ण एवं समावेशी शिक्षा उपलब्ध कराने की दिशा में प्रदेश सरकार लगातार प्रयास कर रही है।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव के निर्देशानुसार विद्यार्थियों को शिक्षा से सतत जोड़े रखने और उनकी पढ़ाई को रूचिकर एवं आसान बनाने में विभाग द्वारा संचालित विभिन्न योजनाएं भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। साइकिल, स्कूटी, लैपटॉप, गणवेश और छात्रवृत्ति जैसी योजनाओं के माध्यम से विद्यार्थियों को आर्थिक संबल प्रदान कर शिक्षा के लिये प्रोत्साहन दिया जा रहा है। इन योजनाओं ने विद्यार्थियों की स्कूल तक पहुंच बढ़ाने के साथ ही उन्हें पढ़ाई में बेहतर प्रदर्शन के लिए प्रोत्साहित किया है। इन योजनाओं से विद्यार्थियों का शासकीय स्कूलों के प्रति रूझान बढ़ा है।

    स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के साथ नवाचार, तकनीक, बेहतर अधोसंरचना और विद्यार्थियों की आवश्यकताओं पर केंद्रित व्यवस्थाओं को प्राथमिकता दी जा रही है। पीएमएवं सांदीपनि विद्यालयों, ई-हॉस्टल मैनेजमेंट सिस्टम, गृह संपर्क अभियान और व्यावसायिक शिक्षा जैसे नवाचारों से शिक्षा व्यवस्था को नई दिशा मिल रही है।

    प्रदेश सरकार का प्रयास है कि हर विद्यार्थी को समान अवसर, बेहतर शैक्षणिक वातावरण और आगे बढ़ने के पर्याप्त अवसर उपलब्ध हों। शासकीय विद्यालयों में शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने के साथ विद्यार्थियों को शिक्षा से जोड़े रखने और उनके सर्वांगीण विकास पर निरंतर काम किया जा रहा है।

    साइकिल योजना से 1 करोड़ से अधिक विद्यार्थी हुए लाभान्वित

    प्रदेश सरकार द्वारा वर्ष 2004-05 में शासकीय स्कूलों की कक्षा 6वीं एवं 9वीं की छात्राओं को स्कूल आने-जाने में आने वाली परेशानी को दूर करने के लिये साइकिल योजना शुरू की गई। योजना अंतर्गत अब तक 1 करोड़ से अधिक विद्यार्थी लाभान्वित हो चुके हैं। योजना पर प्रदेश सरकार द्वारा अब तक 2,942.63 करोड़ रुपये से अधिक की राशि व्यय की गई हैं।

    ड्रॉप आउट दर में आई उल्लेखनीय कमी

    प्रदेश के हर बच्चे को शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ने के निरंतर प्रयासों का परिणाम है कि ड्रॉप आउट दर में उल्लेखनीय कमी आई है। वर्ष 2002-03 में ड्रॉप आउट दर प्राथमिक स्तर पर 15% और माध्यमिक स्तर पर 24.70% थी। वर्ष 2025-26 में पहली बार प्राथमिक स्तर पर ड्रॉप आउट दर शून्य प्रतिशत हो गई है। माध्यमिक स्तर पर यह दर घटकर 6.2% और सेकंडरी स्तर पर 13.0% रह गई है।

    व्यावसायिक शिक्षा में मध्यप्रदेश देश में अग्रणी

    व्यावसायिक शिक्षा के क्षेत्र में मध्यप्रदेश देश में अग्रणी है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति- 2020 के अनुरूप विद्यार्थियों को रोजगारोंमुखी और कौशल विकास के लिये भी शिक्षा उपलब्ध कराई जा रही है। प्रदेश में कक्षा 9वीं से 12वीं तक व्यावसायिक शिक्षा पाठ्यक्रम संचालित करने वाले विद्यालयों की संख्या बढ़कर 3,367 हो गई है, जो देश में सर्वाधिक है। वर्ष 2024-25 में 4.06 लाख विद्यार्थियों एवं वर्ष 2025-26 में 5,98,452 विद्यार्थियों ने इन पाठ्यक्रमों में नामांकन कराया। पिछले दो वर्षों में 1,010 विद्यालयों में एग्रीकल्चर ट्रेड प्रारंभ किया गया है। विद्यार्थियों को शिक्षा के साथ रोजगार एवं स्वरोजगार के अवसरों से जोड़ने के उद्देश्य से जनवरी 2026 में प्रदेश के सभी हाई एवं हायर सेकंडरी विद्यालयों में कॅरियर सप्ताह एवं कॅरियर मेले का आयोजन भी किया गया।

    वर्ष 2003 की तुलना में चार गुना से अधिक बढ़ा शिक्षा बजट

    शासकीय स्कूलों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और अधोसंरचना विकास को प्राथमिकता देते हुए प्रदेश सरकार ने शिक्षा बजट में उल्लेखनीय वृद्धि की है। वर्ष 2002-03 में शिक्षा का बजट 2,456 करोड़ रुपये था, जो वर्ष 2026-27 में बढ़कर 9,623.12 करोड़ रुपये हो गया है। इस प्रकार वर्ष 2003 की तुलना में शिक्षा बजट में लगभग चार गुना वृद्धि हुई है।

    अब तक प्रदेश के 23,000 से अधिक विद्यार्थियों को मिल चुकी है स्कूटी

    प्रदेश सरकार द्वारा मेधावी विद्यार्थियों को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से वर्ष 2022-23 से मुख्यमंत्री स्कूटी योजना संचालित की जा रही है। कक्षा 12वीं में प्रथम प्रयास में 70% अंक के साथ स्कूल में प्रथम स्थान प्राप्त करने वाले शासकीय हायर सेकंडरी स्कूलों के नियमित विद्यार्थियों को योजना का लाभ मिलता है। प्रदेश सरकार द्वारा योजना शुरू होने से अब तक 23 हजार 487 विद्यार्थी लाभान्वित हो चुके हैं। योजना पर लगभग 246 करोड़ रुपये प्रदेश सरकार द्वारा व्यय किए जा चुके हैं। मोटराइज्ड स्कूटी के लिए अधिकतम 90 हजार रुपये और ई-स्कूटी के लिए अधिकतम 1.20 लाख रुपये की राशि प्रदान की जाती है।

    पहली बार एक अप्रैल से शुरू हुआ पाठ्यपुस्तक वितरण

    शासकीय स्कूलों में अध्ययनरत कक्षा 1 से 12वीं तक के विद्यार्थियों को निःशुल्क पाठ्यपुस्तकें प्रदान की जाती हैं। शैक्षणिक सत्र 2025-26 में पहली बार एक अप्रैल से निःशुल्क पाठ्य पुस्तकों का वितरण शुरू किया गया, जिससे विद्यार्थियों को सत्र की शुरुआत से ही पढ़ाई की सामग्री उपलब्ध हो सके। वर्ष 2026-27 में पुस्तकों की प्रिंटिंग, बाइंडिंग एवं पेपर की गुणवत्ता बेहतर करने के लिए एसओपी निर्धारित की गई है।

    बोर्ड परीक्षा परिणामों में हुआ उल्लेखनीय सुधार

    विगत वर्षों में हाई स्कूल एवं हायर सेकेंडरी के परीक्षा परिणामों में उल्लेखनीय सुधार दर्ज किया गया है। हाई स्कूल स्तर पर वर्ष 2025-26 में परीक्षा परिणाम 73.42 प्रतिशत रहा। इसी प्रकार हायर सेकंडरी में वर्ष 2025-26 में परीक्षा परिणाम 76.01 प्रतिशत रहा।

    स्थानीय परीक्षाओं की अंकसूचियां अब ऑनलाइन

    स्थानीय परीक्षाओं की अंकसूचियों की ऑनलाइन उपलब्धता सुनिश्चित की गई है। शैक्षणिक सत्र 2025-26 से विद्यार्थियों को स्थानीय परीक्षाओं की अंकसूचियां ऑनलाइन उपलब्ध कराई जा रही हैं। इससे विद्यार्थियों को अंकसूची प्राप्त करने में सुविधा के साथ ही प्रक्रिया में पारदर्शिता और डिजिटल व्यवस्था को बढ़ावा मिला है।

    पीएमएवं सांदीपनि विद्यालयों के प्रति विद्यार्थियों एवं अभिभावकों का बढ़ा रूझान

    पीएमएवं सांदीपनि विद्यालय गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और विश्वस्तरीय अधोसंरचना के केंद्र के रूप में अपनी पहचान बना रहे हैं। विद्यालयों में उपलब्ध बेहतर शैक्षणिक सुविधाओं और आधुनिक अधोसंरचना के कारण विद्यार्थियों एवं अभिभावकों का रुझान लगातार बढ़ा है। बेहतर शैक्षणिक प्रदर्शन की वजह से इन विद्यालयों को निजी विद्यालयों के समकक्ष और कई मामलों में बेहतर विकल्प के रूप में स्थापित किया है।

    प्रदेश में प्रथम चरण में आधुनिक भौतिक सुविधाओं से परिपूर्ण 368 सांदीपनि विद्यालयों का संचालन शुरू चुका है। इसमें 274 स्कूल शिक्षा विभाग और 94 जनजातीय विभाग के सांदीपनि विद्यालय हैं। प्रदेश में 799 पीएमविद्यालय संचालित हैं, जिनमें 4 लाख 80 हजार छात्र नामांकित हैं। सभी पीएमस्कूलों में शिक्षा मंत्रालय भारत सरकार से निर्धारित 21 इंडिकेटर पर प्रभावी क्रियान्वयन किया जा रहा है।

    ई-हॉस्टल मैनेजमेंट सिस्टम से छात्रावास संचालन में पारदर्शिता

    स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा छात्रावासों के प्रभावी संचालन के लिए पहली बार ई-हॉस्टल एडमिशन एवं मैनेजमेंट सिस्टम लागू किया गया है। इससे स्कूलों में प्रवेश एवं सीट आवंटन प्रक्रिया को सरल बनाने के साथ विद्यार्थियों के डिजिटल रिकॉर्ड का व्यवस्थित संधारण किया जा रहा है। विद्यालय एवं आवासीय कैचमेंट क्षेत्र की मैपिंग के साथ स्टोर, रसोई, उपस्थिति, वित्त एवं स्वास्थ्य जैसी विभिन्न गतिविधियों का भी डिजिटल प्रबंधन किया जा रहा है। इससे छात्रावास व्यवस्था अधिक पारदर्शी, सुगम एवं प्रभावी बनी है।

    गृह संपर्क अभियान से 3 लाख से अधिक बच्चे स्कूल लौटे

    आउट-ऑफ-स्कूल बच्चों को शिक्षा की मुख्यधारा से पुन: जोड़ने के लिए गृह संपर्क अभियान संचालित किया जा रहा है। अभियान अंतर्गत शिक्षक घर-घर जाकर सर्वेक्षण करते हैं और अप्रवेशित विद्यार्थियों की पहचान कर आवश्यकता के अनुसार मौके पर ही प्रवेश दिलाते हैं। विद्यार्थियों के घर पर उपलब्ध नहीं होने की स्थिति में उसके विद्यालय छोड़ने के कारणों को भी दर्ज किया जाता है। अभियान के माध्यम से अब तक तीन लाख से अधिक बच्चों को पुनः स्कूल से जोड़ा गया है।

    पीएम जनमन अंतर्गत 106 छात्रावास स्वीकृत

    प्रधानमंत्री जनजाति आदिवासी न्याय महाअभियान पीएम-जनमन अंतर्गत विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूह पीवीटीजी के विद्यार्थियों के लिए 106 छात्रावासों को स्वीकृति दी गई है। छात्रावासों की यह सुविधा जनजातीय क्षेत्रों के विद्यार्थियों को आवासीय एवं शैक्षणिक सुविधाएं उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

    धरती आबा अभियान के तहत 104 छात्रावास स्वीकृत

    धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान के अंतर्गत 104 छात्रावास स्वीकृत किए गए हैं। इन छात्रावासों के माध्यम से जनजातीय क्षेत्रों के विद्यार्थियों को बेहतर आवासीय एवं शैक्षणिक वातावरण उपलब्ध कराने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है।

    अब तक 6 लाख 47 हजार से अधिक प्रतिभाशाली विद्यार्थियों को लैपटॉप के लिए मिली 25 हजार रुपये की राशि

    प्रदेश में प्रतिभाशाली विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा के लिए प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से लैपटॉप प्रदान किये जा रहे है। वर्ष 2009-10 से संचालित योजना में माध्यमिक शिक्षा मंडल की हायर सेकेंडरी परीक्षा में 75 प्रतिशत या उससे अधिक अंक प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों को लैपटॉप क्रय करने के लिए 25 हजार रुपये की राशि उनके बैंक खाते में अंतरित की जाती है। प्रदेश सरकार द्वारा अब तक 6 लाख 47 हजार 599 विद्यार्थियों को लैपटॉप क्रय करने के लिए राशि प्रदान कर चुकी है।

    समेकित छात्रवृत्ति योजना से लाखों विद्यार्थियों को लाभ

    समेकित छात्रवृत्ति योजना से कक्षा पहली से 12वीं तक के विद्यार्थियों को विभिन्न छात्रवृत्ति योजनाओं का लाभ मिल रहा है। वर्ष 2013-14 से संचालित इस योजना में छह विभागों की लगभग 20 प्रकार की छात्रवृत्ति योजनाओं को शामिल किया गया है। छात्रवृत्ति की स्वीकृति एवं राशि का भुगतान शिक्षा पोर्टल से ऑनलाइन प्रक्रिया द्वारा सीधे विद्यार्थियों के बैंक खातों में किया जाता है। वर्ष 2024-25 में 63.72 लाख विद्यार्थियों को 352 करोड़ रुपये, जबकि वर्ष 2025-26 में 60.59 लाख विद्यार्थियों को 344 करोड़ रुपये की छात्रवृत्ति प्रदान की गई।

    सुपर 100 योजना में मेधावी विद्यार्थियों को करा रहे है प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी

    सुपर 100 योजना के माध्यम से शासकीय विद्यालयों के मेधावी विद्यार्थियों को प्रतियोगी परीक्षाओं की गुणवत्तापूर्ण तैयारी कराई जा रही है। कक्षा 10वीं में अध्ययनरत विद्यार्थियों का चयन परीक्षा के माध्यम से किया जाता है। चयनित विद्यार्थियों को कक्षा 11वीं एवं 12वीं में भोपाल के शासकीय सुभाष उत्कृष्ट उच्चतर माध्यमिक विद्यालय तथा इंदौर के शासकीय मल्हार आश्रम उच्चतर माध्यमिक विद्यालय में अध्ययन के साथ इंजीनियरिंग, मेडिकल एवं अन्य प्रतिष्ठित व्यावसायिक पाठ्यक्रमों में प्रवेश के लिए विशेष कोचिंग दी जाती है। वर्तमान में दोनों संस्थाओं में कुल 304 विद्यार्थियों को प्रवेश दिया जाता है।

    19 लाख छात्राओं के बैंक खातों में सैनिटरी नैपकिन के लिए सीधे पहुंच रही राशि

    प्रदेश में बालिकाओं के स्वास्थ्य, स्वच्छता और विद्यालय में नियमित उपस्थिति को बढ़ावा देने के लिए सैनिटरी नैपकिन योजना संचालित की जा रही है। योजना अन्तर्गत कक्षा 7वीं से 12वीं तक अध्ययनरत सभी बालिकाओं को प्रतिवर्ष 300 रुपये की राशि डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (डीबीटी) से प्रदान की जाती है। सितंबर 2025 में शासकीय विद्यालयों में अध्ययनरत लगभग 19 लाख बालिकाओं के खातों में कुल 57 करोड़ रुपये की राशि अंतरित की गई।

    डिजिटल शिक्षा से स्मार्ट हुई स्कूलों की पढ़ाई

    प्रदेश में डिजिटल शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए प्रदेश के स्कूलों में स्मार्ट क्लास एवं आईसीटी लैब की सुविधा का विस्तार किया जा रहा है। वर्ष 2025-26 तक मिडिल स्कूलों में 4,163 स्मार्ट क्लास, जबकि कस्तूरबा गांधी बालिका शिक्षा छात्रावासों में शत-प्रतिशत स्मार्ट क्लास एवं आईसीटी लैब स्वीकृत की गई हैं। नेताजी सुभाषचंद्र बोस छात्रावासों में भी शत-प्रतिशत स्मार्ट क्लास स्वीकृत हैं। प्रदेश के 9,316 हाई स्कूल एवं हायर सेकेंडरी स्कूलों में 8,870 (95%) स्मार्ट क्लास स्वीकृत हैं, जिनमें 7,405 कार्यशील हैं। इसी तरह 8,754 (94%) स्कूलों में आईसीटी लैब स्वीकृत हैं, जिनमें 3,706 कार्यशील हैं।

    निःशुल्क गणवेश से विद्यार्थियों को मिली है मदद

    प्रदेश की शासकीय शालाओं में अध्ययनरत बालिकाओं को वर्ष 2004-05 से प्रारम्भ इस योजना में 2 जोड़ी निःशुल्क गणवेश की सुविधा प्रदान की गई। वर्ष 2011-12 से इस योजना में छात्रों को भी शामिल किया गया। वर्तमान में प्रदेश की शासकीय शालाओं में कक्षा 1 से 8 में अध्ययनरत लगभग 60 लाख विद्यार्थियों को प्रतिवर्ष 2 जोड़ी गणवेश के लिए 600 रुपये की राशि के मान से लगभग 360 करोड़ प्रतिवर्ष का व्यय किया जा रहा है।

     

  • उदयपुर के महासतिया में राजपरिवार का अंतिम संस्कार, भव्य छतरियां बताती हैं मेवाड़ का गौरव

    उदयपुर के महासतिया में राजपरिवार का अंतिम संस्कार, भव्य छतरियां बताती हैं मेवाड़ का गौरव

    उदयपुर
    मेवाड़ पूर्व राजपरिवार के सदस्य लक्ष्यराज सिंह मेवाड़ की मां और अरविंद सिंह मेवाड़ की पत्नी विजयराज कुमारी के देवलोकगमन के बाद एक बार फिर उदयपुर का 'महासतिया' स्थल चर्चा में है। दरअसल, यहां विजयराज कुमारी के पार्थिव शरीर को पारंपरिक रीति-रिवाजों और राजशाही सम्मान के साथ अंतिम संस्कार के लिए इसी ऐतिहासिक स्थान पर लाया गया। मेवाड़ के इतिहास और गौरवशाली परंपराओं को अपने आंचल में समेटे 'महासतिया' केवल एक मोक्ष स्थल नहीं, बल्कि स्थापत्य कला और पूर्व राजघरानों की अमर गाथाओं का एक जीवंत प्रतीक है।

    जानिए कहां है उदयपुर का 'महासतिया'
    महासतिया, उदयपुर शहर के प्राचीन आहड़ (आयड़) क्षेत्र में प्रसिद्ध गंगू कुंड के पास स्थित है। यह स्थान सदियों से मेवाड़ राजपरिवार का शाही श्मशान स्थल (शाही समाधि स्थल) रहा है। यहां राजपरिवार के सदस्यों, महाराणाओं, महारानियों और राजकुमारों के अंतिम संस्कार के बाद उनकी याद में भव्य और कलात्मक छतरियों (स्मारकों) का निर्माण कराया जाता है।

    सबसे पहले महाराणा अमर सिंह प्रथम का यह हुआ था अंतिम संस्कार
    इतिहास के पन्नों को पलटें और विद्वानों से मिली जानकारी के अनुसार तो उदयपुर की स्थापना के बाद शुरुआती दौर में महाराणाओं के समाधि स्थल अलग-अलग जगहों पर थे। लेकिन महासतिया में सबसे पहले महाराणा अमर सिंह प्रथम का अंतिम संस्कार किया गया था। महाराणा अमर सिंह प्रथम, महान योद्धा महाराणा प्रताप के पुत्र थे। वर्ष 1620 में जब महाराणा अमर सिंह प्रथम का निधन हुआ, तो उनका अंतिम संस्कार इसी स्थान पर किया गया। तभी से यह परंपरा लगातार चली आ रही है और राजपरिवार के सभी महाराणाओं और सदस्यों का दाह संस्कार इसी पावन और ऐतिहासिक परिसर में किया जाता है।

    हेरिटेज लुक और भव्य छतरियां है पहचान
    बताया जाता है कि महासतिया परिसर अपनी संगमरमर और बलुआ पत्थरों से बनी खूबसूरत छतरियों के लिए जाना जाता है। यहां लगभग 19 से अधिक महाराणाओं की भव्य छतरियों सहित सैकड़ों ऐतिहासिक छतरियां बनी हुई हैं, जो मेवाड़ की स्थापत्य शैली का अद्भुत नमूना पेश करती हैं। इनमें महाराणा अमर सिंह प्रथम, महाराणा संग्राम सिंह द्वितीय, महाराणा जगत सिंह प्रथम और महाराणा भीम सिंह जैसे महान शासकों की छतरियां बेहद आकर्षक और विशाल हैं।

    मेवाड़ की सदियों पुरानी परंपरा के अनुसार दी गई अंतिम विदाई
    लक्ष्यराज सिंह मेवाड़ की माता विजयराज कुमारी के निधन के बाद पूरी मर्यादा और मेवाड़ की सदियों पुरानी परंपरा के अनुसार महासतिया में ही उनका अंतिम संस्कार संपन्न किया गया। यह स्थान आज भी मेवाड़ के स्वर्णिम इतिहास, परंपरा और त्याग की मूक गवाही दे रहा है।

     

  • एक विचार और कार्यशैली की यात्रा गुजरात से विकसित भारत तक—संकल्प, निर्णय और जनभागीदारी

    एक विचार और कार्यशैली की यात्रा गुजरात से विकसित भारत तक—संकल्प, निर्णय और जनभागीदारी

    नरेंद्र मोदी के सरकार के शीर्ष नेतृत्व में 25 वर्ष केवल एक राजनीतिक यात्रा नहीं, बल्कि एक विकसित होती शासन-दृष्टि और कार्यशैली का परिचय हैं। 7 अक्टूबर 2001 को गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में शुरू हुई यह यात्रा आज विकसित भारत 2047 के संकल्प तक पहुँच चुकी है।

    गुजरात में जल संकट, सूखा और क्षेत्रीय असमानताओं जैसी चुनौतियों के बीच जल-संरक्षण, सिंचाई, कृषि, बिजली और बुनियादी ढाँचे को प्राथमिकता दी गई। SWAGAT जैसी व्यवस्थाओं के माध्यम से तकनीक, निगरानी और जवाबदेही को प्रशासन का हिस्सा बनाया गया।

    प्रधानमंत्री बनने के बाद यही सोच राष्ट्रीय स्तर पर जनधन, उज्ज्वला, स्वच्छ भारत, आवास, आयुष्मान भारत और जल जीवन मिशन जैसी योजनाओं में दिखाई दी। लक्ष्य रहा कि विकास का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुँचे और नागरिक के जीवन की गुणवत्ता बेहतर हो।

    डिजिटल इंडिया, UPI और DBT ने तकनीक को शासन का महत्वपूर्ण माध्यम बनाया, वहीं Make in India और आत्मनिर्भर भारत ने भारत को वैश्विक विनिर्माण और नवाचार का केंद्र बनाने की दिशा में प्रयासों को गति दी।

    GST, अनुच्छेद 370 से संबंधित संवैधानिक परिवर्तन, नई शिक्षा नीति और महिला आरक्षण जैसे निर्णयों ने राष्ट्रीय नीति-विमर्श को प्रभावित किया। इन पर समर्थन और आलोचना दोनों हुए, लेकिन कठिन विषयों पर निर्णय लेने की प्रवृत्ति मोदी की कार्यशैली की प्रमुख पहचान बनी।

    अब लक्ष्य विकसित भारत 2047 है—एक ऐसा भारत जो आर्थिक रूप से मजबूत होने के साथ शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, महिला भागीदारी, कृषि, तकनीक और नवाचार में भी सक्षम हो।

    25 वर्ष पीछे देखने का अवसर हैं, लेकिन 2047 आगे देखने का संकल्प है। नेतृत्व दिशा दे सकता है, लेकिन विकसित भारत का निर्माण जनता की सामूहिक भागीदारी से ही होगा।

    संकल्प से सिद्धि तक की यात्रा जारी है।

  • कार्य की अपेक्षित प्रगति न देख सीएम ने अफसरों को लगाई कड़ी फटकार

    कार्य की अपेक्षित प्रगति न देख सीएम ने अफसरों को लगाई कड़ी फटकार

    गोरखपुर

    मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बुधवार शाम एचएन सिंह चौक से हड़हवा फाटक होते हुए जगेसर पासी चौराहे तक बन रही टूलेन/फोरलेन सड़क का दो स्थानों पर निरीक्षण किया। इस दौरान निर्माण कार्य की अपेक्षित प्रगति न मिलने पर उन्होंने लोक निर्माण विभाग, जल निगम और सेतु निगम के अधिकारियों को कड़ी फटकार लगाते हुए चेतावनी दी और काम में तेजी लाने के लिए निर्देशित किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि आगामी त्योहारों से पहले सड़क को हरहाल में आवागमन योग्य बना दिया जाए।

    मुख्यमंत्री ने 495.24 करोड़ रुपये की लागत से हो रहे एचएन सिंह चौक-जगेसर पासी चौराहा सड़क चौड़ीकरण कार्य का स्मार्ट बाजार के सामने और हड़हवा फाटक के आगे रुककर निरीक्षण किया। उन्होंने कार्यदायी संस्था लोक निर्माण विभाग द्वारा प्रस्तुत लेआउट मॉडल को देखा और सड़क की लंबाई-चौड़ाई और अब तक निर्माण प्रगति की जानकारी ली। काम की गति तेज न होने को लेकर उन्होंने लोक निर्माण विभाग और जल निगम के अधिकारियों पर सख्त नाराजगी व्यक्त की। सड़क का निर्माण लोक निर्माण विभाग करा रहा है जबकि सीवर लाइन डालने का काम जल निगम द्वारा किया जा रहा है। हड़हवा फाटक पर ओवरब्रिज का निर्माण सेतु निगम करा रहा है। उन्होंने तीनों विभागों को काम में और तेजी लाने के निर्देश देते हुए कहा कि शिथिलता किसी भी दशा में बर्दाश्त नहीं की जाएगी। इस दौरान सीएम ने अफसरों से कहा कि ऐसी व्यवस्था बनाएं जिससे काम के दौरान आवागमन में कोई व्यवधान न हो और आगामी त्योहारों के पहले सड़क आवागमन योग्य बन जाए। उन्होंने जलनिकासी के लिए हेड टू टेल  व्यवस्था का भी निर्देश दिया।

  • सेवा संकल्प के तहत 17 सितंबर की शाम उज्जैन में शिप्रा के घाटों पर प्रज्वलित होंगे 25 लाख से अधिक दीप।

    सेवा संकल्प के तहत 17 सितंबर की शाम उज्जैन में शिप्रा के घाटों पर प्रज्वलित होंगे 25 लाख से अधिक दीप।

    उज्जैन 
     उज्जैन में 17 से 19 सितंबर तक राष्ट्रीय स्तर के धार्मिक, सांस्कृतिक, सामाजिक और संगठनात्मक आयोजन होंगे. तीन दिन तक देशभर से आए युवा, संत, धर्माचार्य, शिक्षाविद्, वैज्ञानिक, साहित्यकार, सामाजिक कार्यकर्ता और अलग-अलग क्षेत्रों के विशेषज्ञ शहर में मौजूद रहेंगे. राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सर संघचालक डॉ. मोहन भागवत, मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन, स्वामी अवधेशानंद गिरि महाराज, आचार्य पुंडरीक गोस्वामी, गीतकार मनोज मुंतशिर सहित कई प्रमुख हस्तियां उज्जैन पहुंचेंगी.

    24 राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों से 1600 से अधिक युवा 3 दिवसीय युवा धर्म संसद 2026 का हिस्सा होंगे. 17 सितंबर की शाम शिप्रा के श्री रामघाट सहित अन्य घाट क्षेत्र में सेवा संकल्प के तहत 25 लाख से अधिक दीप प्रज्जविलत होंगे. 

    एक मंच पर देशभर के युवा, संत और विशेषज्ञ

    सेवाज्ञ संस्थानम् द्वारा आयोजित युवा धर्म संसद 2026 अवंतिका को लेकर मध्य प्रदेश युवा आयोग के अध्यक्ष प्रवीण शर्मा ने ETV भारत को बताया "24 राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों से 1600 से अधिक युवा विद्यार्थी शिक्षक और अलग-अलग क्षेत्र में काम करने वाले प्रतिभागी शामिल होंगे, जिन्होंने दो माह पहले ही रजिस्ट्रेशन करवा लिया है. उज्जैन के लगभग 100 युवा शामिल होंगे."

    साल 2019 में काशी, 2022 में अयोध्या, 2023 में मथुरा, 2024 में हरिद्वार, 2025 में कांचीपुरम युवा धर्म संसद हो चुकी है. अब 2026 के लिए उज्जैन को चुना गया है. आयोजन का उद्देश्य युवाओं को धर्म, भारतीय संस्कृति, ज्ञान परंपरा, जीवन दृष्टि, चरित्र निर्माण और सामाजिक एवं राष्ट्रीय उत्तरदायित्व जैसे विषयों से जोड़ना है. तीनों दिन व्याख्यान, संवाद, युवा पंचायत, सांस्कृतिक कार्यक्रम, पुस्तक मेला, कला प्रदर्शनी और जनजातीय मेला सहित कई गतिविधियां होंगी.

    ये हस्तियां भी युवा धर्म संसद में आएंगी

    आचार्य मिथिलेशनन्दिनीशरण ने बताया "आयोजन में सद्विद्यानंद, प्रो. श्रीनिवास वरखेड़ी, जे. नंद कुमार, विष्णु प्रकाश त्रिपाठी, प्रो. हिमांशु राय, पद्मभूषण रामबहादुर राय, डॉ. इंदुमति काटदरे, प्रो. आनंद रंगनाथन, प्रो. सच्चिदानंद मिश्र, डॉ. बलराम शुक्ल, अमृत अभिजात, राम तिवारी, निशा उरांव, बृजेश कुमार सहित अनेक संत, विद्वान, शिक्षाविद, वैज्ञानिक, लेखक और सामाजिक क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञ शामिल होंगे."

    बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष का दौरा

    17 सितंबर को पुस्तक मेला, युवा पंचायत, संघ की गतिविधियां और 25 लाख दीपों का आयोजन होना है. 18 सितंबर को डॉ. मोहन भागवत युवा धर्म संसद का उद्घाटन करेंगे. 19 सितंबर को ऋषि, कृषि, संस्कृति से आस्था और धर्म स्थलों तक विमर्श कर मुख्यमंत्री समापन करेंगे. भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन 17 सितंबर को इंदौर पहुंचने के बाद उज्जैन आएंगे. वह शाम को शिप्रा आरती और श्रीराम घाट पर आयोजित दीप उत्सव में शामिल होंगे. वह 18 सितंबर की सुबह भगवान महाकाल की भस्म आरती में शामिल होकर इंदौर होते हुए पंजाब रवाना हो जाएंगे.

    3000 से ज्यादा पुलिसकर्मी संभालेंगे सुरक्षा

    उज्जैन एसपी प्रदीप शर्मा ने बताया "उज्जैन पुलिस ने सुरक्षा व्यवस्था बढ़ाई है. रिहर्सल करवा कर 3000 से अधिक पुलिसकर्मियों की तैनाती चप्पे-चप्पे पर की गई है. कार्यक्रम स्थलों पर वीआईपी रूट और घाट क्षेत्र में सुरक्षा के साथ भीड़ नियंत्रण पर विशेष ध्यान रखा गया. दीपोत्सव के दौरान यातायात व्यवस्था संभालने के लिए करीब 450 पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई है. घाट क्षेत्र में अतिरिक्त सुरक्षा बल और महिला पुलिसकर्मियों की तैनाती रहेगी." 

  • पंचायत सहायकों की मांगों पर सरकार का बड़ा फैसला, मानदेय में ₹3 हजार बढ़ोतरी

    पंचायत सहायकों की मांगों पर सरकार का बड़ा फैसला, मानदेय में ₹3 हजार बढ़ोतरी

    लखनऊ
    प्रदेश सरकार ने पिछले कुछ दिनों से अपनी मांगों को लेकर धरना दे रहे पंचायत सहायकों के लिए कई अहम निर्णय लेने की तैयारी कर ली है। वर्तमान में 6000 रुपये प्रतिमाह मानदेय पाने वाले पंचायत सहायकों का मानदेय बढ़ाकर 9000 रुपये किया जाएगा।

    साथ ही मानदेय का भुगतान सीधे बैंक खाते में डीबीटी के माध्यम से करने, महिला पंचायत सहायकों को नियमानुसार मातृत्व अवकाश देने और पंचायत सहायकों को रखने व हटाने से जुड़े मामलों में जिलाधिकारी की भूमिका सुनिश्चित करने की बात कही गई है। आंदोलन और मांगों से जुड़े मुकदमों की समीक्षा कर नियमानुसार उन्हें वापस लेने की कार्रवाई भी होगी।

    पंचायती राज मंत्री ओमप्रकाश राजभर की अध्यक्षता में पंचायत सहायकों के प्रतिनिधिमंडल के साथ हुई बैठक में इन मांगों पर सकारात्मक निर्णय लिए गए। मानदेय में तीन हजार रुपये की मासिक बढ़ोतरी होने से पंचायत सहायकों को प्रत्यक्ष आर्थिक लाभ मिलेगा।

    डीबीटी की व्यवस्था होगी लागू
    प्रदेश में 57 हजार से अधिक पंचायत सहायक हैं। अभी पंचायत सहायकों का मानदेय राज्य वित्त आयोग की धनराशि से दिया जाता है। अब कैबिनेट से स्वीकृति लेकर डीबीटी की व्यवस्था लागू की जाएगी।

    बैठक में यह भी तय किया गया कि ग्राम प्रधान स्तर से मनमाने ढंग से सेवा समाप्ति की शिकायतों के समाधान के लिए पंचायत सहायकों की नियुक्ति और सेवा समाप्ति से संबंधित मामलों में जिलाधिकारी की भूमिका व अधिकार सुनिश्चित किए जाएंगे।

    महिला पंचायत सहायकों को शासन के नियमों के अनुसार मातृत्व अवकाश का लाभ मिलेगा। पंचायत सहायकों के आंदोलन व उनकी मांगों से संबंधित दर्ज मुकदमों की समीक्षा कर विधिक प्रक्रिया के तहत वापसी की कार्रवाई की जाएगी।

    मंत्री ने कहा कि पंचायत सहायक पंचायती राज व्यवस्था की महत्वपूर्ण कड़ी हैं और उनकी समस्याओं का समाधान सरकार की प्राथमिकता है। पंचायतीराज मंत्री की वार्ता के बाद धरना दे रहे पंचायत सहायकों ने अपना धरना समाप्त कर दिया है।