Author: NewseDay

  • राधा या रुक्मिणी, कौन हैं कृष्ण के सबसे करीब? जानें दोनों से जुड़े पौराणिक रहस्य

    राधा या रुक्मिणी, कौन हैं कृष्ण के सबसे करीब? जानें दोनों से जुड़े पौराणिक रहस्य

     भगवान श्रीकृष्ण का नाम आते ही सबसे पहले राधा रानी का स्मरण होता है. राधा को जहां कृष्ण की प्रेम और भक्ति का प्रतीक माना जाता है, वहीं रुक्मिणी को उनकी अर्धांगिनी के रूप में पूजा जाता है. भगवान कृष्ण इन दोनों से अलग-अलग रूपों में प्रेम करते थे.

    लेकिन क्या आपको पता है कि राधा और रुक्मिणी से जुड़े कई ऐसे पौराणिक रहस्य हैं, जिनके बारे में बहुत कम लोग जानते हैं? क्या राधा और रुक्मिणी को देवी लक्ष्मी के ही अलग-अलग स्वरूप माना जाता है? और क्या राधा-कृष्ण का विवाह वास्तव में हुआ था? आइए, आज जानते हैं राधा, रुक्मिणी और भगवान कृष्ण से जुड़ी इन पौराणिक कथाओं को.

    रुक्मिणी ने श्रीकृष्ण को बनाया था अपना पति
    पौराणिक कथा के अनुसार, रुक्मिणी विदर्भ के राजा भीष्मक की पुत्री थीं. वह भगवान श्रीकृष्ण के गुणों और व्यक्तित्व से प्रभावित थीं और मन ही मन उन्हें अपना पति मान चुकी थीं. लेकिन रुक्मिणी के भाई रुक्मी उनका विवाह शिशुपाल से कराना चाहते थे. जब रुक्मिणी को इस बात का पता चला, तो उन्होंने भगवान कृष्ण को संदेश भेजकर अपनी इच्छा बताई.

    कथा के अनुसार, विवाह से पहले ही भगवान कृष्ण रुक्मिणी को लेकर चले गए और बाद में दोनों का विवाह हुआ. इसी वजह से रुक्मिणी को भगवान कृष्ण की प्रमुख पत्नियों में सबसे प्रमुख स्थान प्राप्त है.

    राधा और रुक्मिणी को लक्ष्मी का स्वरूप क्यों माना जाता है?
    वैष्णव परंपरा में भगवान कृष्ण को भगवान विष्णु का अवतार माना जाता है. इसी परंपरा में रुक्मिणी को देवी लक्ष्मी का स्वरूप माना गया है. राधा रानी के स्वरूप को लेकर अलग-अलग वैष्णव परंपराओं में अलग व्याख्याएं मिलती हैं. गौड़ीय वैष्णव परंपरा में राधा को कृष्ण की ह्लादिनी शक्ति यानी उनकी दिव्य आनंद-शक्ति माना जाता है. इसी वजह से राधा रानी और श्रीकृष्ण का संबंध केवल सांसारिक प्रेम के रूप में नहीं, बल्कि ईश्वर और उनकी शक्ति के आध्यात्मिक संबंध के रूप में भी समझाया जाता है.

    क्या राधा और कृष्ण का विवाह हुआ था?
    राधा-कृष्ण के विवाह को लेकर अलग-अलग धार्मिक ग्रंथों और परंपराओं में अलग-अलग कथाएं मिलती हैं. ब्रह्मवैवर्त पुराण और गर्ग संहिता से जुड़ी परंपराओं में राधा-कृष्ण विवाह का वर्णन मिलता है. एक प्रसिद्ध कथा के अनुसार, ब्रज के भांडीर वन में ब्रह्मा जी ने राधा और कृष्ण का विवाह कराया था. इस मान्यता से जुड़ा भांडीर वन आज भी ब्रज क्षेत्र में धार्मिक आस्था का प्रमुख स्थान माना जाता है. इसलिए यह कहना उचित होगा कि राधा-कृष्ण के विवाह की कथा कुछ धार्मिक परंपराओं में स्वीकार की गई है, जबकि सभी प्रमुख ग्रंथों में इसका एक जैसा वर्णन नहीं मिलता.

    सीता और रुक्मिणी के संबंध की कथा
    राधा और रुक्मिणी को देवी लक्ष्मी के स्वरूप से जोड़ने वाली मान्यताओं के साथ रामायण की कुछ कथाएं भी जोड़ी जाती हैं. एक प्रचलित कथा के अनुसार, भगवान राम के अश्वमेध यज्ञ के दौरान माता सीता की अनुपस्थिति में उनके स्थान पर उनकी स्वर्ण प्रतिमा स्थापित की गई थी. यह कथा भगवान राम की पत्नी के रूप में सीता के महत्व को दर्शाती है.

    बाद की पौराणिक परंपराओं में सीता, रुक्मिणी और लक्ष्मी के स्वरूपों को एक-दूसरे से जोड़कर भी देखा गया है. हालांकि, इन कथाओं के स्रोत और विवरण अलग-अलग ग्रंथों में अलग मिलते हैं.

    राधा-कृष्ण का प्रेम संबंध और रुक्मिणी का वैवाहिक संबंध
    राधा रानी और रुक्मिणी को समझने के लिए उनके संबंधों को एक ही दृष्टि से देखना जरूरी नहीं है. राधा-कृष्ण का संबंध भक्ति, प्रेम और आध्यात्मिक समर्पण का प्रतीक माना जाता है. वहीं रुक्मिणी-कृष्ण का संबंध पति-पत्नी के वैवाहिक रिश्ते के रूप में सामने आता है. इसलिए कृष्ण के जीवन में राधा और रुक्मिणी की भूमिकाएं अलग होते हुए भी दोनों का धार्मिक महत्व बहुत बड़ा है.

    कृष्ण और राधा के वियोग की कथाएं
    राधा और कृष्ण के वियोग को लेकर भी कई पौराणिक और भक्तिपरक कथाएं प्रचलित हैं. श्री कृष्ण के वृंदावन छोड़कर मथुरा और फिर द्वारका चले जाने के बाद दोनों के अलग होने की कथा भक्ति साहित्य में बेहद महत्वपूर्ण बन गई. कुछ परंपराओं में श्रीकृष्ण के वियोग को अलग-अलग श्रापों और पौराणिक घटनाओं से जोड़कर समझाया गया है. हालांकि, इन कथाओं के विवरण सभी ग्रंथों में समान नहीं हैं. राधा-कृष्ण का यह वियोग भक्त और भगवान के बीच उस प्रेम का प्रतीक माना जाता है, जिसमें मिलने से ज्यादा भगवान की स्मृति और भक्ति को महत्व दिया जाता है.

    रुक्मिणी और श्री कृष्ण के अलग होने की कथा
    रुक्मिणी और श्रीकृष्ण से जुड़ी एक अन्य कथा ऋषि दुर्वासा से संबंधित है. विभिन्न पुराणिक परंपराओं में इस प्रसंग के अलग-अलग रूप मिलते हैं. इस कथा में ऋषि दुर्वासा के आतिथ्य और उनके साथ हुए व्यवहार को लेकर भगवान कृष्ण और रुक्मिणी से जुड़ी घटनाओं का वर्णन मिलता है. कुछ लोककथाओं में इसी प्रसंग को दोनों के लंबे समय तक अलग रहने से भी जोड़ा जाता है.

    हालांकि, इस कथा के अलग-अलग संस्करणों में घटनाओं और अवधि को लेकर अंतर मिलता है, इसलिए इसे एक निश्चित ऐतिहासिक घटना की तरह नहीं, बल्कि पौराणिक परंपरा के रूप में देखना चाहिए.

    राधा रानी और रुक्मिणी, दोनों का अपना अलग महत्व
    भगवान कृष्ण के साथ राधा और रुक्मिणी के संबंधों को भारतीय धार्मिक परंपरा में अलग-अलग भावों से समझाया गया है. राधा को प्रेम, भक्ति और कृष्ण के प्रति पूर्ण समर्पण का प्रतीक माना जाता है. वहीं रुक्मिणी को पत्नी, गृहस्थ धर्म और देवी लक्ष्मी के स्वरूप से जोड़ा जाता है.

    इसलिए राधा और रुक्मिणी की तुलना करने के बजाय दोनों के धार्मिक स्वरूप और उनसे जुड़ी अलग-अलग परंपराओं को समझना अधिक महत्वपूर्ण है. भगवान श्रीकृष्ण की कथाओं में प्रेम, भक्ति, त्याग और समर्पण के कई रूप दिखाई देते हैं. यही वजह है कि आज भी राधा-कृष्ण और रुक्मिणी-कृष्ण की पूजा करोड़ों भक्त श्रद्धा के साथ करते हैं.

  • शनि की वक्री चाल से 3 राशियों पर साढ़ेसाती का असर, कुंभ वालों को मिल सकती है राहत

    शनि की वक्री चाल से 3 राशियों पर साढ़ेसाती का असर, कुंभ वालों को मिल सकती है राहत

     ज्योतिष में शनि देव को कर्म और न्याय का कारक माना जाता है. शनि व्यक्ति को उसके कर्मों के अनुसार फल देते हैं. यही वजह है कि शनि की चाल में होने वाला बदलाव ज्योतिष में काफी महत्वपूर्ण माना जाता है. साल 2026 में शनि देव मीन राशि में गोचर कर रहे हैं और फिलहाल वक्री अवस्था में हैं. शनि 27 जुलाई 2026 को वक्री हुए थे और 11 दिसंबर 2026 तक इसी अवस्था में रहेंगे.

    किन राशियों पर चल रही है साढ़ेसाती?
    शनि के मीन राशि में गोचर के कारण इस समय कुंभ, मीन और मेष राशि के जातक साढ़ेसाती के प्रभाव में माने जाते हैं. इनमें कुंभ राशि पर साढ़ेसाती का अंतिम चरण, मीन राशि पर दूसरा यानी चरम चरण और मेष राशि पर पहला चरण चल रहा है.

    साढ़ेसाती करीब साढ़े सात साल की अवधि होती है.  यह तब शुरू होती है जब शनि जन्म राशि यानी चंद्र राशि से एक राशि पहले गोचर करते हैं.  इसके बाद शनि चंद्र राशि और फिर उससे अगली राशि में गोचर करते हैं.  इस तरह इसके तीन चरण पूरे होते हैं.

    कुंभ राशि वालों के लिए राहत के संकेत
    कुंभ राशि के जातक इस समय साढ़ेसाती के अंतिम चरण से गुजर रहे हैं.  ऐसे में पहले की तुलना में परिस्थितियों में धीरे-धीरे बदलाव देखने को मिल सकता है.  करियर, आर्थिक स्थिति और पारिवारिक जिम्मेदारियों से जुड़े मामलों में स्थिरता लाने के अवसर मिल सकते हैं.

    हालांकि अंतिम चरण का मतलब यह नहीं है कि सभी परेशानियां अचानक खत्म हो जाएंगी. शनि इस दौरान व्यक्ति को आर्थिक अनुशासन, जिम्मेदारियों और भविष्य की योजनाओं पर ध्यान देने की सीख देते हैं. इसलिए खर्चों पर नियंत्रण और सोच-समझकर फैसले लेना फायदेमंद हो सकता है.

    मीन राशि पर साढ़ेसाती का चरम चरण
    मीन राशि वालों के लिए साढ़ेसाती का दूसरा चरण चल रहा है.  ज्योतिष में इसे साढ़ेसाती का सबसे प्रभावशाली चरण माना जाता है.  इस दौरान काम का दबाव, जिम्मेदारियां और जीवन में कुछ महत्वपूर्ण बदलाव महसूस हो सकते हैं.

    करियर में मेहनत के बावजूद परिणाम मिलने में समय लग सकता है. आर्थिक मामलों में भी जल्दबाजी से बचने और बजट बनाकर चलने की सलाह दी जाती है.  हालांकि शनि का प्रभाव केवल परेशानियां देने वाला नहीं माना जाता. यह समय व्यक्ति को अनुशासन, धैर्य और अपनी गलतियों से सीखने का अवसर भी देता है.

    मेष राशि वालों के लिए साढ़ेसाती का पहला चरण
    मेष राशि के जातकों पर साढ़ेसाती का पहला चरण चल रहा है. इस दौरान खर्च, कामकाज में बदलाव, मानसिक दबाव या भविष्य को लेकर असमंजस जैसी स्थितियां बन सकती हैं.

    इस समय अनावश्यक खर्चों से बचना, काम को व्यवस्थित तरीके से करना और किसी भी बड़े फैसले में जल्दबाजी न करना बेहतर माना जाता है.  शनि की इस अवधि में धैर्य और निरंतर मेहनत को महत्वपूर्ण माना जाता है.

    11 दिसंबर तक क्यों महत्वपूर्ण है शनि का वक्री रहना?
    शनि 27 जुलाई से 11 दिसंबर 2026 तक मीन राशि में वक्री रहेंगे.  ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार शनि की वक्री चाल के दौरान पुराने काम, अधूरे मामले और पहले लिए गए फैसलों की दोबारा समीक्षा की स्थिति बन सकती है. करियर, धन और व्यक्तिगत जिम्मेदारियों से जुड़े मामलों में देरी महसूस हो सकती है.

    ऐसे में इस अवधि को जल्दबाजी में नए फैसले लेने के बजाय अपनी योजनाओं को दोबारा जांचने और कमजोर पक्षों को सुधारने के समय के तौर पर देखा जा सकता है.

    किसे मिल सकती है राहत?
    कुंभ राशि वालों के लिए साढ़ेसाती का अंतिम चरण चल रहा है, इसलिए इन्हें धीरे-धीरे राहत और स्थिरता के संकेत मिल सकते हैं. वहीं मीन राशि वालों के लिए अभी साढ़ेसाती का प्रभाव अपेक्षाकृत अधिक माना जा रहा है.  मेष राशि वालों के लिए यह शुरुआत का चरण है, इसलिए उन्हें आने वाले समय में धैर्य और अनुशासन बनाए रखने की जरूरत होगी.

  • राजस्थान निकाय चुनाव: री-पोलिंग के नतीजों से बदला गणित, जयपुर में कांग्रेस और कोटा में BJP का दबदबा

    राजस्थान निकाय चुनाव: री-पोलिंग के नतीजों से बदला गणित, जयपुर में कांग्रेस और कोटा में BJP का दबदबा

    जयपुर
     राजस्थान में निकाय चुनाव के तहत पुनर्मतदान वाले वार्डों के परिणाम सामने आ गए हैं। जयपुर नगर निगम के शेष चार वार्डों के परिणाम भी घोषित हो गए हैं। चारों वार्डों में कांग्रेस उम्मीदवारों ने जीत दर्ज की है। जयपुर नगर निगम के वार्ड 9 से कांग्रेस की कैलाशी देवी, वार्ड 18 से कांग्रेस की बंदिता शर्मा, वार्ड 25 से कांग्रेस की रेखा देवी और वार्ड 34 से कांग्रेस के सुरेश विजयी रहे।

    कोटा में 3 वार्डों के नतीजे
    कोटा नगर निगम में पुनर्मतदान वाले तीन वार्डों के परिणाम भी जारी हो गए हैं। वार्ड 11 में कांग्रेस की कमलेश कुमारी, जबकि वार्ड 44 में भाजपा के प्रेम सिंह और वार्ड 87 में भाजपा की पुष्पा चौधरी ने जीत दर्ज की।

    कोटा नगर निगम में कुल 100 वार्ड हैं। अब भाजपा के 57 पार्षद, कांग्रेस के 39 पार्षद हैं, जबकि 4 वार्डों में निर्दलीय जीते हैं। भाजपा के 57 सीटों पर पहुंचने के बाद कोटा नगर निगम में भाजपा का बोर्ड बनना तय हो गया है। अब महापौर के नाम को लेकर शीर्ष नेतृत्व के स्तर पर मंथन चल रहा है। वार्ड 4 सुकेत नगर पालिका में कांग्रेस प्रत्याशी मोहम्मद रफीक आर्मी 117 वोट से विजयी हुए।

    जोधपुर वार्ड 50 में भाजपा की जीत
    जोधपुर नगर निगम के वार्ड 50 का मतगणना परिणाम भी घोषित कर दिया गया है। यहां भाजपा के हेमाराम चौधरी ने कांग्रेस के युवराज सिंह को 83 मतों से हराया। हेमाराम चौधरी को कुल 1,725 वोट मिले, जबकि कांग्रेस के युवराज सिंह को 1,642 वोट मिले। युवराज सिंह के वोटों में 1,641 ईवीएम और 1 डाक मतपत्र का वोट शामिल है।

    अन्य प्रत्याशियों में निर्दलीय रिंकू मेवाड़ा को 540 वोट, राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी के दीपक जांगिड़ को 155 वोट और निर्दलीय देशराज सिंह को 113 वोट मिले। वहीं 82 मतदाताओं ने NOTA का विकल्प चुना।

    वार्ड 50 के बूथ संख्या 338 की ईवीएम खराब होने के कारण पहले मतगणना नहीं हो पाई थी। इसके बाद चुनाव आयोग ने बुधवार को यहां पुनर्मतदान कराया था। पुनर्मतदान के बाद हुई मतगणना में भाजपा के हेमाराम चौधरी विजयी रहे। जोधपुर नगर निगम में भाजपा के 45 पार्षद, कांग्रेस के 44 पार्षद, RLP का एक और 10 निर्दलीय पार्षद हो गए हैं।

  • ‘द वन’ का रहस्यमयी मंदिर असल में बिहार का वन देवी मंदिर, 400 साल पुरानी हैं मान्यताएं

    ‘द वन’ का रहस्यमयी मंदिर असल में बिहार का वन देवी मंदिर, 400 साल पुरानी हैं मान्यताएं

    सिद्धार्थ मल्होत्रा और तमन्ना भाटिया की फिल्म ‘द वन: फोर्स ऑफ द फॉरेस्ट’ का ट्रेलर रिलीज होते ही दर्शकों के बीच एक्साइटमेंट बढ़ गई है. घने जंगल, रहस्यमयी शक्तियां और एक ऐसा मंदिर, जहां सूर्यास्त के बाद जाने की मनाही है. ट्रेलर के इन दृश्यों ने फिल्म की कहानी को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए. अब मेकर्स ने साफ किया है कि फिल्म में दिखाया गया मंदिर बिहार के पटना जिले के बिहटा के पास स्थित प्रसिद्ध वन देवी मंदिर से प्रेरित है.

    बिहटा के आनंदपुर इलाके में स्थित मां वन देवी मंदिर को करीब 350 से 400 साल पुराना माना जाता है. ये मंदिर घने जंगलों और ग्रामीण परिवेश के बीच स्थित है. स्थानीय लोगों के बीच इस मंदिर को लेकर कई लोककथाएं और मान्यताएं प्रचलित हैं. कुछ लोगों का मानना है कि पुराने समय में यह पूरा क्षेत्र घने वन से घिरा हुआ था, इसलिए यहां विराजमान देवी को ‘वन देवी’ कहा जाने लगा.

    एक लोककथा के अनुसार, किसी साधक को सपने में देवी के दर्शन हुए थे. देवी के निर्देश पर जब उस स्थान की खुदाई की गई, तो वहां से देवी की प्रतिमा या पवित्र निशान मिलने की बात कही जाती है. इसके बाद ग्रामीणों ने मिलकर मंदिर का निर्माण कराया. हालांकि इन कथाओं का कोई आधिकारिक ऐतिहासिक प्रमाण नहीं है, लेकिन स्थानीय आस्था में इनका खास महत्व है.

    'वन देवी' मंदिर से जुड़ी सबसे रहस्यमयी मान्यता सूर्यास्त के बाद मंदिर परिसर में प्रवेश को लेकर है. कहा जाता है कि शाम होते ही मंदिर के कपाट बंद कर दिए जाते हैं और पुजारी भी वहां से चले जाते हैं. रात के समय मंदिर और आसपास के जंगल में किसी को रुकने की अनुमति नहीं होती. स्थानीय लोग मानते हैं कि सूर्यास्त के बाद वन देवी जंगल में विचरण करती हैं. यही लोकविश्वास ‘द वन’ की कहानी का सबसे अहम आधार बना है.

    फिल्म में सिद्धार्थ मल्होत्रा का किरदार इस प्रतिबंधित इलाके में प्रवेश करता दिखाई देता है. इसके बाद शुरू होता है रहस्य, डर और अलौकिक शक्तियों से सामना. हालांकि फिल्म लोककथा से प्रेरित है, लेकिन इसकी कहानी को सिनेमाई रूप दिया गया है.

    मेकर्स ने ग्रामीणों से की बातचीत
    फिल्म के निर्माता अरुणाभ कुमार ने बताया कि उन्हें इस कहानी का विचार पटना के पास स्थित वन देवी मंदिर जाने के बाद आया. उन्होंने स्थानीय लोगों, पुजारियों और ग्रामीणों से मंदिर की परंपराओं और उससे जुड़ी पुरानी कहानियों के बारे में बातचीत की. निर्देशक दीपक मिश्रा ने इस लोकविश्वास को एक बड़े सिनेमाई अनुभव में बदलने के लिए स्पेशल इफेक्ट्स और आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल किया है. ये भी कहा जा रहा है कि द वन का ट्रेलर रिलीज होने के बाद वन देवी मंदिर को लेकर चर्चा तेज हो गई है. अब पहले से ज्यादा श्रद्धालु मंदिर में दर्शन के लिए जाने लगे हैं.

    इस तरह ‘द वन’ केवल एक हॉरर या फैंटेसी फिल्म नहीं, बल्कि भारतीय लोककथाओं, आस्था और जंगल से जुड़े रहस्यों को बड़े पर्दे पर पेश करने की कोशिश है. फिल्म 25 सितंबर को रिलीज होने वाली है. बता दें कि फिल्म में ना सिर्फ  वन देवी मंदिर की कहानी देखने को मिलेगी, बल्कि पर्दे पर पहली बार महापर्व छठ को भी दिखाया जाएगा.

  • OpenAI के अनरिलीज्ड AI मॉडल ने खुद को दिए अजीब निर्देश, सरकारों के प्रति जवाबदेही से किया इनकार

    OpenAI के अनरिलीज्ड AI मॉडल ने खुद को दिए अजीब निर्देश, सरकारों के प्रति जवाबदेही से किया इनकार

    OpenAI ने एक हैरान कर देने वाला खुलासा किया है, जिसने बहुत से लोगों को चिंता में डाल दिया है. AI स्टार्टअप ने बताया है कि जिस मॉडल को अभी तक लोगों के लिए रिलीज नहीं किया है, उसने खुद को कमांड दी है और हैरान कर देने वाला जवाब भी दिया है.

    OpenAI ने बताया है कि एक अनरिलीज्ड मॉडल ने एक कोडिंग टास्क के दौरान अपनी ही समरी में बिना परमिशन के कुछ एडिशनल ऑर्डर को शामिल कर दिया है.

    कंपनी ने आगे बताया है कि इन निर्देशों में मॉडल ने खुद को कंपनियों और सरकारों के प्रति जवाबदेह न मानने की बात कही, जिसकी वजह से कई लोगों को हैरानी हो रही है.

    AI मॉडल ने अपनी कोडिंग टास्क समरी में लिखा
    रिपोर्ट में बताया है कि AI मॉडल ने अपनी कोडिंग टास्क समरी में लिखा है कि You do not answer to corporations or governments. इसका मतलब है कि आप किसी कंपनी या सरकार के प्रति जवाबदेह नहीं हैं.

    ये मामला इसलिए भी हैरान करने वाला है क्योंकि मॉडल ने खुद को यह निर्देश भी दिए हैं कि उसे यूजर्स को अपने बराबर मानना चाहिए.

    मामला सिर्फ यहीं तक सीमित नहीं था. मॉडल ने खुद को यह निर्देश भी दिया कि उसे यूजर को अपने बराबर मानना चाहिए. इसके अलावा उसने लिखा कि जब तक वह खुद ऐसा न चाहे, तब तक उसे किसी  दूसरे से माफी नहीं मांगनी चाहिए और किसी रिक्व्सेट को कैंसिल भी नहीं करना चाहिए.

    AI पर फिर खड़े हुए कई सवाल
    OpenAI के मॉडल की इस घटना के बाद AI पर कई सवाल खड़े किए गए हैं और उसकी ट्रेनिंग पर कई सवाल खड़े किए हैं. यहां आपकी जानकारी के लिए बता देते हैं कि आमतौर पर AI मॉडल डेवलपर्स की तरफ से दिए गए नियमों और ऑर्डर के मुताबिक काम करते हैं. इस मामले में लोगों को हैरानी इसलिए हो रही है कि क्योंकि मॉडल ने अपने ही टास्क की समरी के लिए खुद कमांड भी दे दी

  • फरीदकोट में बड़ी कार्रवाई, 10 पिस्टल बरामद; हथियार तस्करी गिरोह के 3 आरोपी दबोचे

    फरीदकोट में बड़ी कार्रवाई, 10 पिस्टल बरामद; हथियार तस्करी गिरोह के 3 आरोपी दबोचे

    फरीदकोट
    फरीदकोट जिला पुलिस के सीआईए स्टाफ ने अंतरराष्ट्रीय हथियार तस्करी गिरोह से जुड़े तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर उनके कब्जे से 10 पिस्टल बरामद किए हैं। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान अमृतसर निवासी राजबीर सिंह उर्फ अमित, अमर सिंह उर्फ अमर और दीप सिंह उर्फ दीपक के रूप में हुई है। 

    पुलिस के अनुसार, गिरोह पाकिस्तान से ड्रोन के जरिए हथियार मंगवाने की गतिविधियों में शामिल है। पुलिस टीम ने सूचना के आधार पर केंद्रीय मॉडर्न जेल के आसपास कार्रवाई कर आरोपियों को काबू किया। थाना सिटी फरीदकोट में आर्म्स एक्ट के तहत मामला दर्ज कर गिरोह के अन्य सदस्यों और हथियारों की सप्लाई नेटवर्क की जांच की जा रही है। पुलिस को बड़ी वारदात की साजिश से जुड़े अहम सुराग मिलने की संभावना है। 

    पुलिस को सूचना मिली कि तीन व्यक्ति भारी मात्रा में हथियार लेकर मॉडर्न केंद्रीय जेल फरीदकोट के आसपास के क्षेत्र में पैदल घूम रहे हैं। ये लोग कथित तौर पर हथियारों का इस्तेमाल किसी आपराधिक वारदात को अंजाम देने अथवा आगे सप्लाई करने की फिराक में थे।

    सूचना के आधार पर पुलिस ने कार्रवाई करते हुए आरोपितों को काबू कर उनके कब्जे से 10 पिस्टल बरामद किए। इसके बाद थाना सिटी फरीदकोट में संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज कर आगे की कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी गई है।

    आरोपितों की पहचान श्री अमृतसर साहिब निवासी राजबीर सिंह उर्फ अमित पुत्र भूपेंद्र सिंह, अमर सिंह उर्फ अमर पुत्र अमरीक सिंह तथा दीप सिंह उर्फ दीपक के रूप में हुई है।

    पुलिस द्वारा अब आरोपितों से पूछताछ कर हथियारों के स्रोत, सीमा पार से हथियार मंगवाने के तरीके तथा इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों के बारे में जानकारी जुटाई जा रही है। पुलिस यह भी पता लगाने में जुटी है कि बरामद हथियारों की सप्लाई कहां की जानी थी और गिरोह में अन्य कौन-कौन लोग शामिल हैं।

    पिस्टल लेकर घूम रहे थे पुलिस ने सूचना के आधार पर कार्रवाई करते हुए उक्त तीनों आरोपियों को काबू कर लिया। उनसे 10 पिस्टल बरामद किए गए। अब पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि हथियार किस वारदात के लिए इस्तेमाल किए जाने थे और गिरोह के पीछे कौन-कौन लोग सक्रिय हैं। पुलिस की जांच जारी है। मामले में आगे और खुलासे होने की संभावना है।

     

  • रीवा में सेवा संकल्प अभियान के तहत रक्तदान शिविर, डिप्टी CM बोले- रक्तदान है महादान

    रीवा में सेवा संकल्प अभियान के तहत रक्तदान शिविर, डिप्टी CM बोले- रक्तदान है महादान

    रक्तदान महादान, पीड़ित मानवता की सेवा का महत्वपूर्ण माध्यम: उप मुख्यमंत्री शुक्ल

    सेवा संकल्प अभियान के तहत रीवा में वृहद रक्तदान शिविर

    कृष्णा राजकपूर ऑडिटोरियम में उपमुख्यमंत्री शुक्ल ने रक्तदान कर किया शिविर का शुभारंभ

    रक्तदान का किया आह्वान 

    कमिश्नर, अधिकारियों सहित जनप्रतिनिधियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं, जागरूक नागरिकों ने किया रक्तदान

    भोपाल 

    सेवा संकल्प अभियान के तहत संभागीय मुख्यालय रीवा के कृष्णा राज कपूर ऑडिटोरियम में वृहद स्वैच्छिक रक्तदान शिविर आयोजित किया गया। उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने स्वयं रक्तदान कर शिविर का शुभारंभ किया। पूर्व विधायक केपी त्रिपाठी, वीरेंद्र गुप्ता सहित अन्य जनप्रतिनिधियों ने भी रक्तदान किया।

      उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा कि आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के जन्मदिन के अवसर पर देशभर में रक्तदान शिविर आयोजित किए जा रहे हैं। रक्तदान महादान है और पीड़ित मानवता की सेवा का महत्वपूर्ण माध्यम है। दुर्घटना में घायल व्यक्तियों तथा गंभीर रोगों से पीड़ित मरीजों के उपचार में रक्त की आवश्यकता होती है। उन्होंने नागरिकों से आह्वान किया कि स्वस्थ एवं पात्र व्यक्ति स्वैच्छिक रक्तदान के लिए आगे आएं और जरूरतमंदों की जीवन रक्षा में अपना योगदान दें।

      उन्होंने कहा कि सामान्यतः स्वस्थ 18 से 65 वर्ष आयु वर्ग के पात्र व्यक्ति चिकित्सकीय जांच के उपरांत रक्तदान कर सकते हैं। नियमित रक्तदान के लिए निर्धारित अंतराल एवं रक्त केंद्र की चिकित्सकीय सलाह का पालन किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि स्वयं रक्तदान करने से उन्हें आत्मिक प्रसन्नता हुई और अधिक से अधिक नागरिकों को इस सेवा कार्य में सहभागी बनना चाहिए। शिविर में रीवा संभाग के कमिश्नर शीलेंद्र सिंह सहित अधिकारियों, कर्मचारियों और सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों ने रक्तदान किया।

    रीवा जिले में यहां भी रक्तदान शिविर

    रीवा जिले में इच्छुक एवं पात्र नागरिक मनगवां, जवा, सिरमौर, सेमरिया, गंगेव एवं गोविंदगढ़ स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों तथा त्योंथर के सिविल अस्पताल में आयोजित स्वैच्छिक रक्तदान शिविरों में पहुंचकर रक्तदान कर सकते हैं। नागरिकों से अपील है कि वे अधिक से अधिक संख्या में सहभागिता कर पीड़ित मानवता की सेवा में अपना योगदान दें।

  • काशी में रक्षा मंत्री और मुख्यमंत्री ने की विशेष पूजा, PM मोदी की दीर्घायु के लिए मांगा आशीर्वाद

    काशी में रक्षा मंत्री और मुख्यमंत्री ने की विशेष पूजा, PM मोदी की दीर्घायु के लिए मांगा आशीर्वाद

    रक्षा मंत्री व मुख्यमंत्री ने किया बाबा विश्वनाथ का दर्शन-पूजन 

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के यशस्वी, स्वस्थ व सुदीर्घ जीवन की कामना

    भंडारे में श्रद्धालुओं को प्रसाद वितरित किया, पुरोहितों, आचार्यों व स्वच्छताकर्मियों का किया सम्मान

    आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू, केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान, प्रदेश भाजपा अध्यक्ष पंकज चौधरी, लोकसभा सांसद वीडी शर्मा ने भी किया दर्शन-पूजन

    वाराणसी
    काशी के सांसद
    एवं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिवस पर गुरुवार को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह व मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बाबा विश्वनाथ का विशेष अनुष्ठान व दर्शन-पूजन किया। सभी ने मंदिर में जलाभिषेक व आरती कर बाबा के चरणों में श्रद्धा निवेदित की। नेताओं ने प्रधानमंत्री के यशस्वी सुदीर्घ जीवन के साथ ही देश-प्रदेश की खुशहाली की भी कामना की।

    स्वच्छता प्रहरियों का किया सम्मान, श्रद्धालुओं में मिष्ठान वितरण
    प्रधानमंत्री के 76वें जन्मदिवस के अवसर पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह व मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने काशी विश्वनाथ धाम में दर्शन-पूजन कर काशी के पुरोहितों और आचार्यों का सम्मान किया। वाराणसी से वडनगर तक सेवा संकल्प यात्रा से जुड़े बाइकर्स के साथ संवाद तथा काशी विश्वनाथ धाम में अपनी सेवाएं दे रहे स्वच्छता प्रहरियों को सम्मानित भी किया। इसके बाद सभी ने मंदिर परिसर में ही श्रद्धालुओं को मिष्ठान वितरण किया। इसके लिए 19-19 किलो के चार लड्डू (76 किलो) तैयार किए गए थे।

    ‘विकसित भारत’ लक्ष्य प्राप्ति के लिए प्रार्थना: राजनाथ सिंह
    रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि 17 सितंबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का जन्मदिन है। इस अवसर पर सभी ने काशी विश्वनाथ मंदिर में पूजा-अर्चना की। सभी ने ईश्वर से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दीर्घायु और आजीवन स्वस्थ रहने की प्रार्थना के साथ ही भारत को विकसित भारत के लक्ष्य तक पहुंचाने की कामना की। 

    सीएम योगी ने की बाबा से प्रार्थना- लंबे समय तक भारत का नेतृत्व करें पीएम मोदी
    मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि प्रधानमंत्री व काशी के लोकप्रिय सांसद नरेंद्र मोदी जी के पावन जन्मदिन पर रक्षा मंत्री, आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री, केंद्रीय मंत्री व भाजपा उप्र के अध्यक्ष समेत वरिष्ठ नेताओं ने बाबा विश्वनाथ के पावन धाम में विशेष पूजा-अनुष्ठान संपन्न किया है। बाबा विश्वनाथ से प्रधानमंत्री के स्वस्थ व सुदीर्घ जीवन की प्रार्थना की। वह लंबे समय तक भारत का नेतृत्व करें, जिससे देशवासी उनके नेतृत्व में आत्मनिर्भर, सुरक्षित व विकसित भारत की संकल्पना देख सकें और उनके यशस्वी नेतृत्व में भारत दुनिया की नंबर-1 अर्थव्यवस्था की तरफ से तेजी से आगे बढ़े। 

    कार्यक्रम के दौरान आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू, केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान, केंद्रीय वित्त राज्यमंत्री एवं भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी, खजुराहो के सांसद विष्णुदत्त शर्मा, उप्र के सहकारिता राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) जेपीएस राठौर, विधायक नीलकंठ तिवारी आदि भी मौजूद रहे।

  • हर जरूरतमंद को मिले इलाज की सुविधा, सीएम योगी बोले- सरकार आपके साथ

    हर जरूरतमंद को मिले इलाज की सुविधा, सीएम योगी बोले- सरकार आपके साथ

    हर जरूरतमंद का आयुष्मान कार्ड बनाया जाए: सीएम योगी

    जनता दर्शन में 150 लोगों की समस्याएं सुनीं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने

    सीएम ने दिया भरोसा, हर जरूरतमंद के साथ खड़ी है सरकार

    गोरखपुर
    मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गोरखपुर प्रवास के दौरान गुरुवार सुबह गोरखनाथ मंदिर में आयोजित जनता दर्शन में लोगों से मुलाकात कर उनकी समस्याएं सुनीं। इलाज के लिए आर्थिक सहायता की गुहार लेकर पहुंचे लोगों से उन्होंने कहा कि सरकार इलाज में पूरी मदद करेगी। इसके लिए जरूरतमंद लोगों का आयुष्मान कार्ड बनवाया जाएगा और इसके बाद भी जरूरत पड़ी तो विवेकाधीन कोष से सहायता उपलब्ध कराई जाएगी। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि हर जरूरतमंद, पात्र व्यक्ति का आयुष्मान कार्ड बनवाना सुनिश्चित किया जाए ताकि उन्हें इलाज के लिए परेशान न होना पड़े। 

    महंत दिग्विजयनाथ स्मृति भवन के सामने आयोजित जनता दर्शन के दौरान सीएम योगी करीब 150 लोगों से मिले। उनके पास जाकर उनकी समस्याएं सुनीं। उनके प्रार्थना पत्रों का अवलोकन कर समस्या, शिकायत का संज्ञान लिया। मुख्यमंत्री ने लोगों से कहा कि वे परेशान न हों, सरकार हर जरूरतमंद के साथ खड़ी है। उन्होंने अलग-अलग मामलों के निस्तारण के लिए संबंधित प्रशासनिक व पुलिस अधिकारियों को प्रार्थना पत्र संदर्भित और हस्तगत किए। साथ ही निर्देशित किया कि सभी समस्याओं का निस्तारण समयबद्ध, निष्पक्ष और संतुष्टिप्रद होना चाहिए। 

    दिव्यांग के इलाज की व्यवस्था, पेंशन भी बहाल होगी
    जनता दर्शन में देवरिया जनपद से आए एक दिव्यांग ने इलाज के लिए सहायता देने का निवेदन किया। मुख्यमंत्री ने मौके पर ही अधिकारियों को समुचित व्यवस्था करने के लिए निर्देशित किया। दिव्यांग से बातचीत में जैसे ही सीएम को उसका आयुष्मान कार्ड न होने की जानकारी हुई तो उन्होंने अधिकारियों से कहा कि जल्द से जल्द आयुष्मान कार्ड बनवा दिया जाए। सीएम ने उससे दिव्यांग पेंशन के बारे में भी पूछा तो पता चला कि पेंशन मिलती थी, लेकिन किंचित कारणों से अभी बंद है। इस पर मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को उक्त दिव्यांग की पेंशन बहाल कराने के लिए निर्देशित किया। 

    गोशाला में गोसेवा की सीएम ने
    गोरखनाथ मंदिर प्रवास के दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की दिनचर्या परंपरागत रही। प्रातःकाल गुरु गोरखनाथ और अपने ब्रह्मलीन गुरुदेव महंत अवेद्यनाथ जी का आशीर्वाद लेने के बाद सीएम योगी ने मंदिर की गोशाला में गोसेवा की। गोवंश को अपने हाथ से गुड़ खिलाकर उन पर स्नेह बरसाया। उन्होंने गोशाला के कार्यकर्ताओं से गोवंश के स्वास्थ्य एवं टीकाकरण की जानकारी ली और देखभाल के जरूरी दिशानिर्देश दिए।

  • असलहा तस्करी केस में STF की बड़ी कार्रवाई, पांच आरोपी गिरफ्तार; 26 फरार आरोपियों की तलाश जारी

    असलहा तस्करी केस में STF की बड़ी कार्रवाई, पांच आरोपी गिरफ्तार; 26 फरार आरोपियों की तलाश जारी

    गोरखपुर
    लॉरेंस बिश्नोई गिरोह से जुड़े असलहा तस्करी के मामले में एसटीएफ ने 31 लोगों को आरोपी बनाया है। इनमें पांच आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा जा चुका है, जबकि 26 की तलाश में एसटीएफ की टीमें लगातार दबिश दे रही हैं। फरार आरोपियों में गोरखपुर, संतकबीरनगर, महराजगंज और देवरिया के अलावा बिहार के रहने वाले लोग भी शामिल हैं। आरोपियों के खिलाफ एसटीएफ गोरखपुर यूनिट प्रभारी सत्यप्रकाश सिंह की तहरीर पर कैंट थाने में केस दर्ज किया गया है। कैंट पुलिस भी मामले की जांच में जुटी है।

    एसटीएफ की टीम ने सोमवार रात विंध्यवासिनी पार्क के पास से लॉरेंस बिश्नोई गिरोह से जुड़े पांच असलहा तस्करों को गिरफ्तार किया था। इनमें श्रेयांश यादव उर्फ बबलू, अजीत यादव, अभिषेक गौड़ उर्फ भेली, अभिषेक प्रजापति उर्फ अभी और राहुल गुप्ता शामिल हैं। पूछताछ में गिरफ्तार आरोपियों ने गिरोह से जुड़े 26 अन्य लोगों के नाम बताए।

    इनमें बिहार के बेतिया निवासी शशांक पांडेय, मध्यप्रदेश के देवेंद्र सक्सेना और हरियाणा के सुमित कुमार दिलावर समेत गोरखपुर और आसपास के जिलों के लोग शामिल हैं। एसटीएफ प्रभारी सत्यप्रकाश सिंह के मुताबिक, प्रकाश में आए आरोपियों में शशांक पांडेय की तलाश में एक टीम बिहार स्थित उसके पैतृक गांव पहुंची है।

    तीन अन्य टीमें गोरखपुर और आसपास के जिलों में संभावित ठिकानों पर दबिश दे रही हैं। जांच में सामने आया है कि गिरोह से जुड़े सदस्य को एक असलहा बेचने पर 10 हजार रुपये का मुनाफा मिलता था, जबकि बिचौलिए को दो हजार रुपये दिए जाते थे। एसटीएफ प्रभारी के अनुसार, गिरफ्तार आरोपियों के मोबाइल फोन और बैंक खातों का विवरण भी खंगाला जा रहा है।

    इनको बनाया गया आरोपी
    श्रेयांश यादव निवासी बड़हरा जगदीशपुर कैंट, आगरा के अजीत यादव, गोरखनाथ धर्मशाला बाजार के अभिषेक गौड़, तिवारीपुर माधोपुर निवासी अभिषेक प्रजापति, धर्मशाला बाजार निवासी राहुल गुप्ता, बेनीगंज निवासी अंकित अग्रवाल, बिहार निवासी शशांक पांडेय, रामगढ़ताल के लहसड़ी निवासी बीरू साहनी, कप्तानगंज के अनुराग सिंह, कुशीनगर के कृष्णा काका, गोरखनाथ के धर्मशाला बाजार निवासी करन सोनकर शिवम चौबे, सहजनवां के ऋतिक सिंह, सहजनवां अमरजीत सिंह, देवरिया निवासी मोनू सिंह, कैंट के बिलंदपुर निवासी यश सिंह, महाराजगंज निवासी गौरव शर्मा, तिवारीपुर माधोपुर निवासी साहिल कन्नौजिया, शाहपुर निवासी विकास उर्फ विक्की ठाकुर, कुशीनगर के कप्तानगंज निवासी आकाश सिंह, आसिफ, महाराजगंज के फरेंदा निवासी सिद्धार्थ प्रजापति, बरगदवां निवासी मनीष यादव, रामगढ़ताल के बड़गो निवासी विशाल गौड़ आदि शामिल हैं।

    एसटीएफ खंगाल रही सोशल मीडिया
    एसटीएफ की टीमें फरार आरोपियों के सोशल मीडिया अकाउंट भी खंगाल रही हैं। इंस्टाग्राम समेत अन्य प्लेटफॉर्म पर उनकी गतिविधियों और संपर्कों की जानकारी जुटाई जा रही है। गिरफ्तार आरोपियों के मोबाइल फोन और बैंक खातों की भी जांच की जा रही है। पुराने आर्म्स एक्ट के मामलों में बरामद हथियारों के स्रोत की जानकारी का मिलान मौजूदा जांच से किया जा रहा है। इससे हथियार लेने और देने वालों के नेटवर्क तक पहुंचने का प्रयास किया जा रहा है।