Author: NewseDay

  • बिजली उपभोक्ता से ऊर्जा दाता बनने की ओर बढ़ते कदम

    बिजली उपभोक्ता से ऊर्जा दाता बनने की ओर बढ़ते कदम

    रायपुर

     देश में स्वच्छ और हरित ऊर्जा को बढ़ावा देने के साथ आम नागरिकों को ऊर्जा उत्पादन में सहभागी बनाने की दिशा में प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना महत्वपूर्ण पहल बनकर सामने आई है। योजना ने घरों की छतों को केवल मकान का हिस्सा नहीं रहने दिया, बल्कि उन्हें बिजली उत्पादन की छोटी इकाइयों में बदलने का रास्ता खोला है। रूफटॉप सोलर संयंत्र के माध्यम से परिवार अपनी बिजली की जरूरतें पूरी करने के साथ अतिरिक्त बिजली को निर्धारित प्रावधानों के अनुसार विद्युत ग्रिड में भेज सकते हैं। इस तरह बिजली का एक सामान्य उपभोक्ता ऊर्जा उत्पादन की प्रक्रिया में सहभागी बनकर ‘ऊर्जा दाता’ की भूमिका की ओर बढ़ रहा है।

    सूर्य की रोशनी से ऊर्जा आत्मनिर्भरता की नई राह

    भारत में सौर ऊर्जा की व्यापक संभावनाओं को देखते हुए घरों की खाली छतों का उपयोग बिजली उत्पादन के लिए करना स्वच्छ ऊर्जा की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना के तहत पात्र परिवार अपने घरों पर रूफटॉप सोलर संयंत्र स्थापित करा सकते हैं और निर्धारित प्रावधानों के अनुसार केंद्र एवं राज्य सरकार से वित्तीय सहायता प्राप्त कर सकते हैं।

    योजना के तहत मिलने वाली सब्सिडी से संयंत्र स्थापित करने की प्रारंभिक लागत का बोझ कम होता है। वहीं, सौर ऊर्जा से घर की बिजली जरूरतों की पूर्ति होने पर पारंपरिक बिजली पर निर्भरता और घरेलू बिजली खर्च में कमी आने की संभावना रहती है। आवश्यकता से अधिक बिजली उत्पादन होने पर अतिरिक्त बिजली ग्रिड में भेजने की व्यवस्था नागरिकों को ऊर्जा व्यवस्था से सीधे जोड़ती है।

    सरगुजा में योजना के प्रति बढ़ा उत्साह, लक्ष्य से अधिक आए आवेदन

    प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना को सरगुजा जिले में भी नागरिकों का अच्छा प्रतिसाद मिल रहा है। वर्ष 2025-26 के लिए जिले में 2,000 रूफटॉप सोलर संयंत्र स्थापित करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया था। इसके विरुद्ध 3,282 आवेदन प्राप्त हुए। इनमें से 3,222 आवेदनों में वेंडरों का चयन किया जा चुका है, जबकि 1,733 घरों में सोलर संयंत्र स्थापित किए जा चुके हैं।

    शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों में योजना की पहुंच बढ़ रही है। अम्बिकापुर शहर में 1,000 के लक्ष्य के विरुद्ध 2,158 आवेदन प्राप्त हुए और 1,360 घरों में संयंत्र स्थापित किए जा चुके हैं। वहीं अम्बिकापुर ग्रामीण क्षेत्र में 1,000 के लक्ष्य के विरुद्ध 1,124 आवेदन प्राप्त हुए तथा 373 घरों में सोलर संयंत्र स्थापित किए गए हैं।

    ये आंकड़े बताते हैं कि सरगुजा में नागरिक सौर ऊर्जा को अपनाने के लिए तेजी से आगे आ रहे हैं। योजना के प्रति बढ़ती रुचि यह भी दर्शाती है कि परिवार बिजली की जरूरत पूरी करने के साथ ऊर्जा उत्पादन में अपनी भागीदारी को लेकर भी जागरूक हो रहे हैं।

    विनोद कुमार राय की छत बनी ऊर्जा उत्पादन का माध्यम

    अम्बिकापुर के राजेंद्र प्रसाद वार्ड, दर्रीपारा निवासी श्री विनोद कुमार राय के परिवार का अनुभव इस बदलाव की तस्वीर प्रस्तुत करता है। सोलर संयंत्र स्थापित करने से पहले उनके घर का बिजली बिल कई बार 4 से 5 हजार रुपये प्रतिमाह तक पहुंच जाता था। इससे परिवार के मासिक बजट पर अतिरिक्त आर्थिक भार पड़ता था।

    प्रधानमंत्री सूर्य घर योजना की जानकारी मिलने के बाद श्री राय ने योजना का लाभ लेने के लिए आवेदन किया और अपने घर की छत पर रूफटॉप सोलर संयंत्र स्थापित कराया। लगभग 2 लाख रुपये की लागत वाले संयंत्र पर उन्हें केंद्र सरकार से 78 हजार रुपये तथा राज्य सरकार से 30 हजार रुपये की सब्सिडी मिली। इस तरह उन्हें कुल 1.08 लाख रुपये की अनुदान सहायता प्राप्त हुई।

    श्री राय ने सब्सिडी की राशि सोलर संयंत्र के लिए लिए गए बैंक ऋण में जमा की। अब उनके लिए सौर ऊर्जा केवल बिजली खर्च कम करने का माध्यम नहीं है, बल्कि बिजली उत्पादन में स्वयं की भागीदारी का अवसर भी है। कई बार उनके घर में सोलर संयंत्र से उत्पादित बिजली घरेलू खपत से अधिक हो जाती है। ऐसी स्थिति में अतिरिक्त बिजली ग्रिड में चली जाती है और निर्धारित नियमों के अनुसार उसका लाभ मिलता है।

    नीधि वर्मा के परिवार को बिजली खर्च में राहत

    अम्बिकापुर के मायापुर निवासी श्रीमती नीधि वर्मा ने भी प्रधानमंत्री सूर्य घर योजना के तहत अपने घर में सोलर बिजली संयंत्र स्थापित कराया। उनके अनुसार संयंत्र लगने से पहले घर का बिजली बिल लगभग 4 से 5 हजार रुपये प्रतिमाह आता था। सौर ऊर्जा से घरेलू बिजली की जरूरतें पूरी होने के बाद बिजली खर्च में उल्लेखनीय राहत मिली है।

    श्रीमती वर्मा को भी योजना के तहत लगभग 1.08 लाख रुपये की सब्सिडी मिली, जिसमें केंद्र सरकार की 78 हजार रुपये और राज्य सरकार की 30 हजार रुपये की सहायता शामिल है। उनका कहना है कि पहले उनका परिवार केवल बिजली का उपभोक्ता था, लेकिन अब घर की छत से बिजली का उत्पादन भी कर रहा है। अतिरिक्त बिजली ग्रिड में जाने से उनका परिवार ऊर्जा उत्पादन की प्रक्रिया में प्रत्यक्ष रूप से सहभागी बना है।

    स्मार्ट मीटर और ‘मोर बिजली’ ऐप से खपत पर नजर

    रूफटॉप सोलर व्यवस्था के साथ डिजिटल तकनीक भी बिजली उपयोग को अधिक समझने और नियंत्रित करने में मदद कर रही है। स्मार्ट मीटर और ‘मोर बिजली’ ऐप के माध्यम से उपभोक्ता अपने घर की बिजली खपत से संबंधित जानकारी देख सकते हैं।

    श्री विनोद कुमार राय बताते हैं कि स्मार्ट मीटर और ‘मोर बिजली’ ऐप से वे प्रतिदिन की बिजली खपत पर नजर रखते हैं। इससे परिवार को अनावश्यक रूप से चल रहे विद्युत उपकरणों को बंद करने और बिजली के जिम्मेदार उपयोग के प्रति जागरूकता मिली है।

    इस तरह प्रधानमंत्री सूर्य घर योजना केवल सोलर पैनल लगाने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह परिवारों में ऊर्जा बचत, स्मार्ट बिजली उपयोग और जिम्मेदार उपभोक्ता व्यवहार को भी बढ़ावा दे रही है।

    बिजली बिल में राहत के साथ पर्यावरण संरक्षण

    सौर ऊर्जा का महत्व केवल आर्थिक बचत तक सीमित नहीं है। सूर्य से प्राप्त ऊर्जा का उपयोग बिजली उत्पादन में करने से स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा मिलता है और पारंपरिक ऊर्जा स्रोतों पर निर्भरता कम करने में सहायता मिलती है। एक घर की छत पर स्थापित सोलर संयंत्र छोटी इकाई जरूर है, लेकिन जब हजारों और लाखों परिवार इससे जुड़ते हैं तो सामूहिक रूप से यह स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन का बड़ा माध्यम बन सकता है।

    प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना इसी जनभागीदारी को व्यापक स्वरूप देने का प्रयास है। योजना के माध्यम से परिवार अपनी ऊर्जा जरूरतों के प्रति अधिक आत्मनिर्भर बनने के साथ पर्यावरण संरक्षण में भी योगदान दे सकते हैं।

    उपभोक्ता से उत्पादक—ऊर्जा व्यवस्था में जनभागीदारी का नया आयाम

    परंपरागत व्यवस्था में आम नागरिक विद्युत ग्रिड से बिजली प्राप्त कर उसका उपयोग करता है और बिल का भुगतान करता है। रूफटॉप सोलर इस व्यवस्था में एक नया आयाम जोड़ता है। अब वही उपभोक्ता अपने घर की छत पर बिजली का उत्पादन कर सकता है, पहले अपनी जरूरत पूरी कर सकता है और परिस्थितियों के अनुसार अतिरिक्त बिजली ग्रिड को उपलब्ध करा सकता है।

    यही प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना की महत्वपूर्ण विशेषताओं में से एक है—ऊर्जा उत्पादन में नागरिकों की प्रत्यक्ष भागीदारी।

    हर छत बने ऊर्जा का स्रोत

    सरगुजा में प्राप्त आवेदनों और स्थापित सोलर संयंत्रों की संख्या यह संकेत देती है कि सौर ऊर्जा को लेकर नागरिकों की रुचि बढ़ रही है। शहरी क्षेत्रों के साथ ग्रामीण परिवार भी अपने घरों को सौर ऊर्जा से जोड़ने के लिए आगे आ रहे हैं।

    विनोद कुमार राय और नीधि वर्मा जैसे परिवारों के अनुभव इस बदलाव को जमीन पर साकार होते दिखाते हैं। जिन घरों में कभी बिजली बिल मासिक बजट का महत्वपूर्ण हिस्सा होता था, उन्हीं घरों की छतें अब बिजली उत्पादन का माध्यम बन रही हैं।

    सौर ऊर्जा से बिजली खर्च में राहत, अतिरिक्त बिजली से ग्रिड को सहयोग और स्वच्छ ऊर्जा के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण—प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना घर-घर को ऊर्जा आत्मनिर्भरता से जोड़ने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

    जब अधिक से अधिक परिवार सौर ऊर्जा अपनाएंगे, तो ऊर्जा उत्पादन में जनभागीदारी का दायरा भी बढ़ेगा। इस तरह देश की हर ऐसी छत, जिस पर सौर पैनल स्थापित है, स्वच्छ ऊर्जा के उत्पादन में अपना योगदान देते हुए ‘विकसित भारत, विकसित छत्तीसगढ़’ की ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में एक छोटी लेकिन महत्वपूर्ण इकाई बन सकती है।

  • मथुरा में यूपी राइज 2026: युवाओं को जॉब क्रिएटर बनाने की सार्थक पहल

    मथुरा में यूपी राइज 2026: युवाओं को जॉब क्रिएटर बनाने की सार्थक पहल

    मथुरा

     मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के 'आत्मनिर्भर यूपी' विजन को धरातल पर उतारने के लिए शुक्रवार को नेशनल हाइवे स्थित जीएलए विश्वविद्यालय में 'यूपी राइज 2026' कार्यक्रम का भव्य आयोजन किया गया। इस वृहद आयोजन में 800 से अधिक छात्र-छात्राओं ने भारी उत्साह के साथ प्रतिभाग किया। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य युवाओं की मानसिकता में बदलाव लाकर उन्हें केवल नौकरी तलाशने वाला न बनाकर, स्वयं का उद्यम स्थापित कर दूसरों को रोजगार देने वाला 'जॉब क्रिएटर' बनाना है।
    कार्यक्रम का शुभारंभ कुलाधिपति नारायण दास अग्रवाल, कुलपति प्रो. अनूप कुमार गुप्ता, चीफ फाइनेंस ऑफिसर डॉ. विवेक अग्रवाल, कुलसचिव अशोक कुमार सिंह और मुख्य अतिथि सीए पलक राठी व शांतनु गुप्ता ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्ज्वलित कर किया। 

    सरकारी योजनाओं और स्टार्टअप इकोसिस्टम पर मंथन

    राज्य सरकार प्रदेश में नवाचार (इनोवेशन) और स्टार्टअप इकोसिस्टम को मजबूत करने के लिए निरंतर धरातलीय कार्य कर रही है। कार्यक्रम के दौरान विशेषज्ञों ने युवाओं को मुख्यमंत्री युवा उद्यमी योजना, यूपी स्टार्टअप फंड, मुख्यमंत्री अभ्युदय निशुल्क कोचिंग योजना और यूपी स्किल मिशन जैसी महत्वाकांक्षी नीतियों की विस्तृत जानकारी दी। इसके अतिरिक्त, कन्या सुमंगला योजना, फ्री टैबलेट/स्मार्टफोन योजना और महिला सामर्थ्य योजना के माध्यम से मिलने वाली वित्तीय सहायता व सब्सिडी पर भी प्रकाश डाला गया, ताकि युवा आर्थिक बाधाओं को पार कर अपने बिजनेस मॉडल को सफल बना सकें।

    युवाओं के 8 बेहतरीन इनोवेशन ने किया प्रभावित

    यूपी राइज की थीम के अनुरूप आयोजन में कुल 25 स्टार्टअप आइडिया प्रस्तुत किए गए, जिनमें से 8 बेहतरीन आइडिया शॉर्टलिस्ट हुए। इनमें लॉजिस्टिक्स के लिए 'बुक माई सारथी', छात्रों के लिए कैंपस-फर्स्ट मार्केटप्लेस 'कैम्पोरा', एआई आधारित ट्रैवल सुपर-प्लेटफॉर्म 'नमस्ते एआई' और स्वदेशी ड्रोन एवियोनिक्स बनाने वाली 'क्वांटावर्स टेक्नोलॉजीज' ने खूब तालियां बटोरीं। वहीं, खदानों और सुरंगों जैसे खतरनाक माहौल में इंसानी जान बचाने के लिए 'दक्ष डायनामिक्स' द्वारा बनाया गया स्वदेशी 'रोबोडॉग' भी आकर्षण का केंद्र रहा, जो आत्मनिर्भर भारत की दिशा में एक बड़ा कदम है।

    'लिटिललिंगोस' ने जीता प्रथम पुरस्कार, 'फिटेड' व 'धृतम' बने उपविजेता

    प्रतियोगिता में हर टीम को अपना आइडिया प्रस्तुत करने के लिए 7 मिनट का समय दिया गया। जूरी के समक्ष अपनी शानदार प्रस्तुति देकर बच्चों के लिए एआई-पावर्ड इंग्लिश लर्निंग प्लेटफॉर्म 'लिटिललिंगोस' (LittleLingos) ने प्रथम स्थान हासिल कर 25,000 रुपये का मुख्य पुरस्कार जीता। वहीं, एआई पर्सनल स्टाइलिंग ऐप बनाने वाली टीम 'फिटेड'(Fitted) और तनाव व हार्ट रेट मापने वाला स्मार्ट अंडरगारमेंट (कवच एक्स) बनाने वाली टीम 'धृतम' (Dhritam) संयुक्त रूप से उपविजेता रहीं। इस दौरान कॉर्पोरेट विशेषज्ञ हर्षित देसाई, डॉ. मधुरिता गुप्ता और राधिका बजोरिया ने बतौर मेंटर छात्रों का मार्गदर्शन किया।

    विचारों तक सीमित न रहें, उन्हें धरातल पर उतारें: कुलाधिपति

    इस अवसर पर जीएलए विश्वविद्यालय के कुलाधिपति नारायण दास अग्रवाल ने कहा कि उत्तर प्रदेश सरकार युवाओं के लिए रोजगार, स्वरोजगार, कौशल विकास और स्टार्टअप के क्षेत्र में अनेक अवसर उपलब्ध करा रही है। आज का युवा केवल नौकरी तलाशने वाला नहीं, बल्कि अपने विचार और प्रतिभा के बल पर रोजगार देने वाला उद्यमी भी बन सकता है। उन्होंने विद्यार्थियों का आह्वान किया कि यदि उनके पास कोई नया इनोवेटिव आइडिया है, तो उसे केवल सोच विचार तक सीमित न रखें। जानकारी जुटाएं, विशेषज्ञों से मार्गदर्शन लें और उसे व्यावहारिक रूप देने का प्रयास करें।

    25 शहरों और 30 प्रमुख कॉलेजों तक पहुंचेगा 'यूपी राइज' का कारवां

    छात्रों को स्वरोजगार और नवाचार की संभावनाओं से रूबरू कराने वाला यह 'यूपी राइज' कार्यक्रम प्रदेश के 25 शहरों के 30 प्रमुख कॉलेजों में आयोजित किया जाएगा। जीएलए विश्वविद्यालय में इस सफल आयोजन के बाद, स्टार्टअप और उद्यमिता की अलख जगाने वाले इस अभियान का अगला पड़ाव 21 सितम्बर 2026 को बरेली स्थित इनवर्टिस विश्वविद्यालय में होगा।

  • ₹2,000 से ऊपर UPI पेमेंट पर MDR का प्रस्ताव, बिहार में कैश बढ़ने की आशंका

    ₹2,000 से ऊपर UPI पेमेंट पर MDR का प्रस्ताव, बिहार में कैश बढ़ने की आशंका

     पटना
     बिहार(Bihar News) के बड़े शहरों से लेकर ग्रामीण इलाकों तक डिजिटल लेनदेन( Bihar UPI Transaction) का चलन तेजी से बढ़ा है। नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) के हालिया आंकड़ों के मुताबिक, जून 2026 के दौरान राज्य में यूपीआई (UPI) के माध्यम से लगभग ₹70,130.89 करोड़ का डिजिटल भुगतान दर्ज किया गया।

    आंकड़ों की जुबानी बिहार का डिजिटल सफर
    जून 2026 में बिहार में करीब 50.28 करोड़ डिजिटल भुगतान हुए। इस दौरान यूपीआई के जरिए कुल ₹70,130.89 करोड़ का हस्तांतरण हुआ।

    प्रति ट्रांजैक्शन औसतन ₹1,395 का भुगतान हुआ, जो यह साबित करता है कि आम लोग किराना दुकान, सब्जी और रोजमर्रा की जरूरतों के लिए डिजिटल पेमेंट्स का इस्तेमाल कर रहे हैं। देश के कुल यूपीआई वॉल्यूम में बिहार की हिस्सेदारी 2.21% और कुल वैल्यू में 2.42% रही।

    MDR चार्ज का प्रस्ताव और बढ़ता विवाद
    डिजिटल इंडिया के इस दौर में अब एक नई चुनौती सामने खड़ी हो रही है। ₹2,000 से अधिक के चुनिंदा मर्चेंट यूपीआई लेनदेन पर 0.4% का मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) शुल्क लगाने का प्रस्ताव है। इस फीस के लागू होने की खबर से छोटे व्यापारियों और फुटकर विक्रेताओं के बीच चिंता बढ़ गई है।

    क्या दोबारा बढ़ेगा कैश का चलन?
    छोटे दुकानदारों का मानना है कि पहले से ही कम मार्जिन पर काम करने के बाद अतिरिक्त 0.4% का शुल्क उनकी कमाई को प्रभावित करेगा। यदि यह चार्ज व्यापारियों पर डाला गया, तो वे ग्राहकों से डिजिटल के बजाय नकद भुगतान की मांग कर सकते हैं। वहीं ग्राहकों को भी यह डर है कि व्यापारी इस शुल्क की भरपाई के लिए सामान के दाम बढ़ा सकते हैं।

    विशेषज्ञों का कहना है कि अगर ₹2,000 से ऊपर के भुगतान पर MDR शुल्क अनिवार्य किया गया, तो बिहार के ग्रामीण और छोटे शहरी इलाकों में लोग एक बार फिर कैश की तरफ रुख कर सकते हैं, जिससे डिजिटल ट्रांजैक्शन की रफ्तार धीमी हो सकती है।

  • प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी जी के उत्तम स्वास्थ्य एवं दीर्घायु की कामना के लिए संजय वास्तव ने प्रज्ज्वलित किया आशीर्वाद का दीप

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के उत्तम स्वास्थ्य एवं दीर्घायु की कामना के लिए संजय वास्तव ने प्रज्ज्वलित किया आशीर्वाद का दीप

    रायपुर

    छत्तीसगढ़ राज्य नागरिक आपूर्ति निगम के अध्यक्ष  संजय वास्तव ने आज अपने निवास पर आशीर्वाद का दीप प्रज्ज्वलित कर देश के यशस्वी प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी जी के दीर्घायु एवं उत्तम स्वास्थ्य की कामना की। उन्होंने ईश्वर से प्रार्थना की कि प्रधानमंत्री जी सदैव स्वस्थ एवं प्रसन्न रहें तथा देशसेवा के अपने संकल्प को निरंतर आगे बढ़ाते हुए राष्ट्र को विकास और प्रगति की नई ऊंचाइयों पर ले जाएं।

     संजय वास्तव ने कहा कि प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में देश निरंतर प्रगति के पथ पर आगे बढ़ रहा है। राष्ट्रहित, जनसेवा और देश के विकास के प्रति उनका समर्पण सभी के लिए प्रेरणादायी है। उनके उत्तम स्वास्थ्य एवं दीर्घायु के लिए आज आशीर्वाद का दीप प्रज्ज्वलित कर ईश्वर से मंगलकामना की गई है।

    उन्होंने प्रदेशवासियों एवं देशवासियों से आह्वान किया कि प्रधानमंत्री जी के उत्तम स्वास्थ्य, दीर्घायु एवं सुखमय जीवन की कामना के लिए अपने-अपने घरों में आशीर्वाद का दीप प्रज्ज्वलित करें और इस मंगलकामना में सहभागी बनें।

     वास्तव ने कहा कि दीप प्रज्ज्वलन हमारी आस्था, श्रद्धा और शुभकामनाओं का प्रतीक है। आइए, हम सभी मिलकर प्रधानमंत्री जी के स्वस्थ एवं दीर्घायु जीवन के लिए प्रार्थना करें और राष्ट्र निर्माण के संकल्प को और अधिक मजबूत बनाएं।

  • जापान, कोरिया, अमेरिका और स्वीडन के प्रतिनिधियों से की मुलाकात

    जापान, कोरिया, अमेरिका और स्वीडन के प्रतिनिधियों से की मुलाकात

    भोपाल 

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने नई दिल्ली के यशोभूमि स्थित सेमीकॉन इंडिया 2026 में मध्यप्रदेश पवेलियन का भ्रमण कर सेमीकंडक्टर एवं इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र की प्रमुख राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय कंपनियों के प्रतिनिधियों से मुलाकात की। उन्होंने मध्यप्रदेश में निवेश, तकनीकी सहयोग और सेमीकंडक्टर क्षेत्र के विस्तार की संभावनाओं पर उद्योग प्रतिनिधियों से चर्चा की।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश में निवेश के लिए अनुकूल वातावरण तैयार किया गया है। सेमीकंडक्टर, चिप डिजाइनिंग और इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे उभरते क्षेत्रों में निवेश की व्यापक संभावनाएं हैं। प्रदेश सरकार उद्योगों को आवश्यक सहयोग और सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है।

    मुख्यमंत्री ने पारस सेमीकंडक्टर्स, थॉमसन सेमीकंडक्टर्स, स्प्रिन्टोनिक्स एआई, एनएक्सपी इंडिया, मार्वल सेमीकंडक्टर्स, एल एंड टी सेमीकंडक्टर्स और स्वदेश आईसी सेमीकंडक्टर्स सहित विभिन्न कंपनियों के प्रतिनिधियों से संवाद किया।

    वैश्विक कंपनियों के प्रतिनिधियों से चर्चा

    मुख्यमंत्री ने इंटरनेशनल सेमीकंडक्टर इंडस्ट्री ग्रुप (आईएसआईजी) के प्रतिनिधिमंडल से भी मुलाकात की। प्रतिनिधिमंडल में जापान की एक्रेटेक, केनन और कैइजो, कोरिया की हनवा और जेनसेम इंक तथा अमेरिका की मेकडरमिड अल्फा के प्रतिनिधि शामिल थे। जापानी प्रतिनिधिमंडल में आक्साईड कार्पोरेशन, स्केल फोटोनिक्स और इम्प्यूट इंक के प्रतिनिधियों से भी चर्चा हुई।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि “सेमीकॉन इंडिया-2026" वैश्विक सेमीकंडक्टर उद्योग के साथ संवाद और सहयोग का महत्वपूर्ण मंच है। मध्यप्रदेश अपनी औद्योगिक क्षमता, निवेश की संभावनाओं और उपलब्ध संसाधनों के साथ इस क्षेत्र में नई साझेदारियों के लिए तैयार है।

    मुख्यमंत्री ने किष्किंधा इंटरनेशनल, डिजिकॉम, सिग्निटयूट, स्टेम्बो टेक्नोलॉजी, ट्रू-चिप सोल्युशन, बना सेमीकंडक्टर्स, वीएलएसआई एक्सपर्ट और न्यूजिमो सेमीकंडक्टर्स सहित चिप डिजाइनिंग एवं सेमीकंडक्टर क्षेत्र से जुड़ी कंपनियों के प्रतिनिधियों से भी मुलाकात की।

    मुख्यमंत्री ने मोहाली चिप डिजाइनिंग पेवेलियन और स्वीडिश पेवेलियन का भी अवलोकन किया। सेमीकॉन इंडिया-2026 के दौरान हुई इन बैठकों में मध्यप्रदेश में सेमीकंडक्टर, चिप डिजाइनिंग एवं इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र में निवेश और तकनीकी सहयोग की संभावनाओं पर संवाद हुआ।

    मध्यप्रदेश के इंदौर में 23-24 अक्टूबर को होगा बड़ा निवेशक सम्मेलन

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि सेमीकंडक्टर सेक्टर के क्षेत्र में मध्यप्रदेश में निवेश की व्यापक संभावनाएं हैं। राज्य सरकार लगातार देश और विदेश के निवेशकों को आकर्षित करने के लिए गंभीरतापूर्वक प्रयास कर रही है। नई दिल्ली के सेमिकॉन इंडिया-2026 में मध्यप्रदेश सरकार की ओर से एक स्टॉल लगाया गया है, जहां प्रदेश के अधिकारी विभिन्न क्षेत्रों के निवेशकों और कारोबारी प्रतिनिधियों से संवाद कर रहे हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में देश में सेमीकंडक्टर उद्योग को लेकर रुचि बढ़ी है। मध्यप्रदेश इस क्षेत्र में निवेश का प्रमुख केंद्र बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने शुक्रवार को नई दिल्ली के यशोभूमि द्वारका में हो रहे सेमीकॉन इंडिया-2026 में स्थापित मध्यप्रदेश पवेलियन के भ्रमण के उपरांत स्थानीय मीडिया प्रतिनिधियों से चर्चा में यह जानकारी दी।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि आगामी 23 और 24 अक्टूबर को इंदौर में एक बड़ा निवेशक सम्मेलन आयोजित किया जाएगा, जिसमें सेमीकंडक्टर इंडस्ट्री से जुड़े निवेशकों को मध्यप्रदेश में निवेश के अवसरों और राज्य की नीतियों से अवगत कराया जाएगा। इस सम्मेलन का उद्देश्य प्रदेश की निवेश संभावनाओं को राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर बढ़ावा देना है।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सेमीकंडक्टर सेक्टर में निवेश को लेकर राज्य सरकार अपनी नीतियों के आधार पर प्रतिबद्धता के साथ आगे बढ़ रही है। प्रदेश में सेमीकंडक्टर इंडस्ट्री के लिए सभी प्रकार से अनुकूल वातावरण तैयार किया जा रहा है। मध्यप्रदेश सरकार देश-विदेश में इस इंडस्ट्री को बढ़ावा देने के लिये निवेशकों को अपनी आकर्षक पॉलिसी के माध्यम से राज्य में इन्वेस्टमेंट के लिए मौका भी दे रही है। उन्होंने बताया कि ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट (जीआईएस-2025) के दौरान भी सेमीकंडक्टर सेक्टर से जुड़े निवेशकों को आमंत्रित किया गया था। कुछ निवेशकों ने इस दिशा में प्रभावी कदम भी उठाए हैं।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सेमीकंडक्टर इंडस्ट्री के विस्तार से मध्यप्रदेश के युवाओं के लिए रोजगार और कौशल विकास के नए अवसर उपलब्ध होंगे। कई कारोबारी समूह विदेशी कंपनियों के साथ साझेदारी कर अपने व्यवसाय का विस्तार करना चाहते हैं। इससे प्रदेश में नए उद्योगों और कारोबार का व्यापक इको सिस्टम विकसित हो सकता है। मध्यप्रदेश बिजनेस का एक बड़ा मॉडल स्टेट और निवेश कैपिटल बनकर उभरा है, लगभग हर क्षेत्र के निवेशक मध्यप्रदेश आना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे सभी निवेशकों से हमारी तरफ से संवाद जारी है।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश में निवेशकों के लिए अनुकूल नीतियां, पर्याप्त लैंड बैंक और स्किल डेवलपमेंट की बेहतर संभावनाएं मौजूद हैं। आने वाले समय में मध्यप्रदेश सेमीकंडक्टर सेक्टर में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। भोपाल और इंदौर मेट्रोपोलिटन एरिया में इसकी व्यापक संभावनाएं हैं। पर्याप्त लैंड बैंक और स्किल डेवलपमेंट के लिए भी मध्यप्रदेश में बहुत सम्भावनाएं है।

     

  • रेलवे कर्मचारियों की बैठक में बोनस से लेकर भत्तों तक मुद्दे गूंजे, 5600 पदों पर भर्ती की मांग

    रेलवे कर्मचारियों की बैठक में बोनस से लेकर भत्तों तक मुद्दे गूंजे, 5600 पदों पर भर्ती की मांग

     धनबाद
    रेल कर्मचारियों के दुर्गापूजा बोनस का भुगतान पुराने सीलिंग हटा कर नये सीलिंग के आधार पर करने की मांग रेलवे बोर्ड चेयरमैन तक पहुंच गई है। आल इंडिया रेलवेमेंस फेडरेशन-एआइआरएफ और रेलवे बोर्ड चेयरमैन समेत बोर्ड के शीर्ष अधिकारियों के साथ हुई स्थाई वार्ता तंत्र की बैठक में फेडरेशन ने नये सीलिंग के साथ बोनस की मांग की है।

    पर्यवेक्षकों के नये 5600 पद सृजित किये गये हैं। बैठक में सृजित पदों पर शीघ्र बहाली की भी सिफारिश की है। फेडरेशन के जोनल सचिव ओपी शर्मा और ईस्ट सेंट्रल रेलवे कर्मचारी यूनियन धनबाद मंडल के मीडिया प्रभारी एनके खवास ने बैठक की जानकारी दी

    दोनों ने बताया कि एआइआरएफ के राष्ट्रीय महामंत्री शिव गोपाल मिश्रा की मौजूदगी में हुई बैठक में रेलवे को सबसे ज्यादा राजस्व अर्जित कर देने वाले पूर्व मध्य रेलवे में खाली पदों को जल्द भरने, सुरक्षा कैटेगरी के रिक्त पदों पर जल्द बहाली, ट्रैकमैन के पेट्रोलिंग बीट को 12 किमी करने सहित वेतन आयोग से संबंधित मुद्दों को उठाया गया।

    लंबित यात्रा भत्ता का मुद्दा बैठक में गूंजाजिसमें बताया गया कि यात्रा भत्ता बंद होने से रेलकर्मियों मे काफी रोष है। कई विभागों में रेलवे बोर्ड से 2022 में जारी आदेश को अब तक लागू नहीं किया जा सका है।

    बढ़े हुए और नये कार्यों के लिए नये पद सृजित करने, ओवरटाइम भत्ता, सीटीए आदि के लिए क्षेत्रीय रेलों को पर्याप्त धनराशि आवंटित करने, लोको पायलट एवं सहायक लोको पायलट को किलोमीटर भत्ते के बकाये राशि का भुगतान करने की मांगों पर बैठक में वकालत की गई।

    सीबीटी परीक्षा की उत्तर-पत्रक तत्काल प्रकाशित करने, रेलवे क्वार्टर की मरम्मत एवं रखरखाव के लिए पर्याप्त धनराशि आवंटित करने, जर्जर रेलवे क्वार्टर में रहने वालों को नये क्वार्टर आवंटित करने, क्षेत्रीय रेल एवं मंडलों की आवश्यकता के अनुसार रिक्त पद भरे जाने, कैडर पुनर्गठन समिति की रिपोर्ट शीघ्र प्रकाशित करने जैसी मांगों से अवगत कराया गया।

    कर्मचारियों की स्वास्थ्य सेवाओं के लिए रेलवे से अनुबंधित रेफरल अस्पतालों को भुगतान न होने के कारण कर्मचारियों को कैशलेश उपचार में आ रही समस्याओं का समाधान तथा हर स्वास्थ्य केंद्र पर अनुबंधित प्राइवेट अस्पतालों की सूची लगाने का भी सुझाव दिया गया।

  • ऑस्कर 2026 में भारत की दावेदारी पेश करेगी ‘गोंधल’, 14 सदस्यीय समिति ने चुनी फिल्म

    ऑस्कर 2026 में भारत की दावेदारी पेश करेगी ‘गोंधल’, 14 सदस्यीय समिति ने चुनी फिल्म

    पटना
    ऑस्कर 2026 में भारत की आधिकारिक प्रविष्टि के तौर पर मराठी फिल्म ‘गोंधल’ का चयन किया गया है। फिल्म फेडरेशन ऑफ इंडिया (FFI) की चयन समिति ने फिल्म को अंतरराष्ट्रीय फीचर फिल्म श्रेणी में भारत का प्रतिनिधित्व करने के लिए चुना है। इसकी जानकारी फिल्म फेडरेशन ऑफ इंडिया और इम्पा के अध्यक्ष अभय सिन्हा ने दी।

    मराठी सिनेमा के लिए बड़ा पल
    ‘गोंधल’ के चयन के बाद मराठी फिल्म उद्योग में उत्साह का माहौल है। अभय सिन्हा ने फिल्म की पूरी टीम को शुभकामनाएं देते हुए इसे मराठी सिनेमा के साथ-साथ भारतीय
    फिल्म उद्योग के लिए गौरव का क्षण बताया।

    उन्होंने उम्मीद जताई कि ‘गोंधल’ अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारतीय सिनेमा की प्रतिभा और रचनात्मकता को मजबूती से प्रस्तुत करेगी। फिल्म के ऑस्कर सफर को लेकर अब दर्शकों की नजर आगे की प्रक्रिया पर है।

    14 सदस्यीय समिति ने किया चयन
    ऑस्कर के लिए भारत की आधिकारिक प्रविष्टि चुनने के लिए फिल्म फेडरेशन ऑफ इंडिया ने 14 सदस्यीय चयन समिति गठित की थी। प्रसिद्ध फिल्मकार पी. शेषाद्री इस समिति के अध्यक्ष थे।

    समिति में फिल्म उद्योग के अलग-अलग क्षेत्रों से जुड़े निर्देशक, अभिनेता, निर्माता, सिनेमैटोग्राफर, संपादक और अन्य अनुभवी सदस्य शामिल थे। इसी समिति ने ऑस्कर के लिए भेजी गई फिल्मों में से ‘गोंधल’ का चयन किया।
    33 फिल्मों में से चुनी गई ‘गोंधल’

    इस वर्ष ऑस्कर की आधिकारिक प्रविष्टि के लिए फिल्म फेडरेशन ऑफ इंडिया को कुल 33 फिल्मों की प्रविष्टियां मिली थीं। इनमें 14 हिंदी फिल्मों के अलावा अलग-अलग भारतीय भाषाओं की फिल्में भी शामिल थीं।

    करीब दो घंटे की अवधि वाली मराठी फिल्म ‘गोंधल’ को इन्हीं प्रविष्टियों में से चयनित किया गया। हालांकि घोषणा के दौरान फिल्म की कहानी से जुड़ी विस्तृत जानकारी साझा नहीं की गई।

    गांव की पृष्ठभूमि में बुनी संगीतमय कहानी
    FFI के उपाध्यक्ष निशांत उज्ज्वल ने बताया कि ‘गोंधल’ महाराष्ट्र के एक सुंदर गांव की पृष्ठभूमि पर आधारित आकर्षक संगीतमय कहानी है। उन्होंने कहा कि फिल्म की कहानी और उसकी प्रस्तुति प्रभावशाली है।

    उन्होंने उम्मीद जताई कि चयन समिति द्वारा भारत की आधिकारिक ऑस्कर प्रविष्टि के रूप में चुनी गई ‘गोंधल’ देश के लिए ऑस्कर का गौरव लेकर आएगी।

    ऑस्कर चयन में बिहार का भी कनेक्शन
    ‘गोंधल’ के ऑस्कर चयन से जुड़े इस महत्वपूर्ण मौके पर बिहार के दो लोगों की भी अहम भूमिका है। फिल्म फेडरेशन ऑफ इंडिया के अध्यक्ष अभय सिन्हा हैं, जबकि पटना के निशांत उज्ज्वल संस्था के उपाध्यक्ष हैं।

    निशांत उज्ज्वल ने फिल्म के चयन पर खुशी जताते हुए कहा कि उन्हें उम्मीद है कि ‘गोंधल’ अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत का प्रतिनिधित्व करते हुए देश के लिए गौरव हासिल करेगी।

    FFI की टीम में ये पदाधिकारी भी शामिल
    फिल्म फेडरेशन ऑफ इंडिया की टीम में धर्मेंद्र मेहरा सचिव, रवि कोटरकर सदस्य, संग्राम शिर्के कोषाध्यक्ष, टी. पी. अग्रवाल संरक्षक और हिराचंद उपाध्यक्ष के पद पर हैं।

    ऑस्कर चयन समिति की अध्यक्षता पी. शेषाद्री ने की। समिति के सामने आई 33 फिल्मों में से ‘गोंधल’ का चयन अब मराठी सिनेमा के लिए एक अहम उपलब्धि के रूप में देखा जा रहा है।

    अब आगे क्या होगा?
    भारत की आधिकारिक प्रविष्टि चुने जाने के बाद ‘गोंधल’ का अगला पड़ाव ऑस्कर की आगे की प्रक्रिया होगी। फिल्म के चयन ने भारतीय दर्शकों की उत्सुकता बढ़ा दी है।

    मराठी सिनेमा की यह फिल्म अब अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारतीय सिनेमा की कहानी और रचनात्मकता को सामने रखने की कोशिश करेगी। नजर इस बात पर रहेगी कि ऑस्कर की आगे की प्रक्रिया में ‘गोंधल’ कितना आगे जाती है।

     

  • छत्तीसगढ़ टूरिज्म बोर्ड द्वारा पर्यटन इकाइयॉं लीज़ पर देने की तैयारी, निवेशकों के लिए खुलेगा नया अवसर

    छत्तीसगढ़ टूरिज्म बोर्ड द्वारा पर्यटन इकाइयॉं लीज़ पर देने की तैयारी, निवेशकों के लिए खुलेगा नया अवसर

    रायपुर

     छत्तीसगढ़ में पर्यटन क्षेत्र में निवेश की संभावनाओं को बढ़ावा देने और छत्तीसगढ़ टूरिज्म बोर्ड की विभिन्न पर्यटन इकाइयों को लीज़ पर दिए जाने की प्रक्रिया को निवेशकों के लिए सरल एवं सुगम बनाने के उद्देश्य से ‘एक्सप्लोर, इनवेस्ट, ट्रांसफार्म’ थीम पर प्री-एनआईटी (नोटिस इनवाइटिंग टेंडर) कॉन्फ्रेंस का आयोजन किया गया। कॉन्फ्रेंस में निवेशकों और स्टेकहोल्डर्स को पर्यटन बोर्ड की विभिन्न प्रॉपर्टीज, लीज़ एवं टेंडर प्रक्रिया, उपलब्ध सरकारी प्रोत्साहनों, पीपीपी मॉडल तथा डिजिटल तकनीक के उपयोग से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी दी गई। साथ ही पर्यटन क्षेत्र में निजी क्षेत्र की भागीदारी बढ़ाकर पर्यटक सुविधाओं के विस्तार और हॉस्पिटैलिटी सेक्टर को नई गति देने की संभावनाओं पर विस्तार से विचार-विमर्श किया गया।

    पर्यटन बोर्ड की प्रॉपर्टीज में निवेश के अवसरों की दी जानकारी

    कार्यक्रम की शुरुआत छत्तीसगढ़ टूरिज्म बोर्ड के प्रबंध संचालक श्री सौमिल रंजन चौबे के प्रस्तुतीकरण से हुई। उन्होंने उपस्थित निवेशकों एवं स्टेकहोल्डर्स को बोर्ड के विभिन्न होटल, मोटल, रिसॉर्ट एवं पर्यटन इकाइयों की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने प्रॉपर्टीज की लोकेशन, उपलब्ध सुविधाओं, प्रमुख विशेषताओं तथा पर्यटन एवं हॉस्पिटैलिटी क्षेत्र में उनके विकास की संभावनाओं से अवगत कराया।

    श्री चौबे ने बताया कि छत्तीसगढ़ टूरिज्म बोर्ड की कई प्रॉपर्टीज प्रमुख पर्यटन स्थलों और आकर्षक लोकेशन पर स्थित हैं। निजी क्षेत्र की विशेषज्ञता एवं निवेश के माध्यम से इन इकाइयों में पर्यटकों के लिए बेहतर सुविधाओं का विकास किया जा सकता है। उन्होंने लीज़ एवं टेंडर प्रक्रिया से जुड़े विभिन्न पहलुओं की जानकारी देते हुए निवेशकों और स्टेकहोल्डर्स की जिज्ञासाओं एवं प्रश्नों का समाधान भी किया।

    उन्होंने कहा कि बोर्ड का प्रयास है कि निवेशकों को लीज़ प्रक्रिया से संबंधित सभी आवश्यक जानकारियां स्पष्ट, पारदर्शी और सुगम तरीके से उपलब्ध कराई जाएं, ताकि अधिक से अधिक योग्य निवेशक इसमें भाग ले सकें और पर्यटन इकाइयों का बेहतर संचालन एवं विकास सुनिश्चित हो सके।

    पर्यटन क्षेत्र में निवेश की संभावनाओं को मिल रही नई दिशा

    पर्यटन एवं संस्कृति सचिव डॉ. एस. भारतीदासन ने निवेशकों एवं स्टेकहोल्डर्स को संबोधित करते हुए कहा कि केंद्र सरकार एवं राज्य नेतृत्व के मार्गदर्शन में पर्यटन उद्योग को उद्योग का दर्जा मिलने के बाद छत्तीसगढ़ स्पष्ट रणनीति के साथ पर्यटन विकास की दिशा में आगे बढ़ रहा है। राज्य में पर्यटक सुविधाओं के विस्तार और हॉस्पिटैलिटी क्षेत्र को मजबूत करने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं।

    उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ में पर्यटन की अपार संभावनाएं हैं। राज्य की प्राकृतिक सुंदरता, समृद्ध जनजातीय   संस्कृति, ऐतिहासिक विरासत और विविध पर्यटन स्थलों को बेहतर सुविधाओं से जोड़कर पर्यटन गतिविधियों का विस्तार किया जा सकता है। उन्होंने बताया कि राज्य में सुरक्षा एवं परिस्थितियों में सुधार के साथ पर्यटन गतिविधियों में भी बढ़ोतरी हुई है और निवेशकों की रुचि पर्यटन क्षेत्र में बढ़ रही है।

    उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के मार्गदर्शन में राज्य में पर्यटन क्षेत्र को निवेश के लिए अनुकूल बनाने की दिशा में कार्य किया जा रहा है। छत्तीसगढ़ पर्यटन मंडल के रिसॉर्ट्स और अन्य प्रॉपर्टीज की आकर्षक लोकेशन निजी क्षेत्र के निवेशकों के लिए महत्वपूर्ण अवसर प्रस्तुत करती हैं।

    पर्यटन को अनुभव और रोजगार से जोड़ने पर जोर

    छत्तीसगढ़ पर्यटन मंडल के अध्यक्ष श्री नीलू शर्मा ने कहा कि छत्तीसगढ़ प्राकृतिक, सांस्कृतिक और ऐतिहासिक विविधताओं से समृद्ध राज्य है। यहां के पर्यटन स्थल केवल भ्रमण के केंद्र नहीं हैं, बल्कि राज्य की संस्कृति, परंपराओं,   प्राकृतिक विरासत और स्थानीय जीवन को जानने-समझने का अवसर भी प्रदान करते हैं।

    उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ पर्यटन मंडल के होटल एवं रिसॉर्ट अपनी आकर्षक लोकेशन के कारण पर्यटकों के लिए विशेष महत्व रखते हैं। बोर्ड का प्रयास है कि इन प्रॉपर्टीज का विकास इस तरह किया जाए कि वे पर्यटकों को बेहतर सुविधाएं देने के साथ छत्तीसगढ़ के पर्यटन अनुभव को भी और समृद्ध बनाएं।

    श्री शर्मा ने कहा कि पर्यटन के विकास के साथ स्थानीय स्तर पर रोजगार और आर्थिक गतिविधियों के अवसर भी बढ़ते हैं। राज्य की प्राकृतिक, सांस्कृतिक और ऐतिहासिक विरासत को पर्यटन से जोड़कर स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में कार्य किया जा रहा है।

    सिंगल विंडो से निवेश प्रक्रिया होगी आसान

    कॉन्फ्रेंस में निवेशकों के लिए प्रक्रिया को सरल और सुगम बनाने पर विशेष जोर दिया गया। निवेशकों को विभिन्न विभागों और प्रक्रियाओं के लिए अलग-अलग स्थानों पर जाने की आवश्यकता कम हो, इसके लिए सिंगल विंडो सिस्टम के माध्यम से निवेश प्रक्रिया को सुविधाजनक बनाने की दिशा में जानकारी साझा की गई।

    इस व्यवस्था का उद्देश्य विभिन्न प्रक्रियाओं एवं आवश्यक अनुमतियों को सरल बनाना तथा पर्यटन परियोजनाओं के क्रियान्वयन में तेजी लाना है। इससे निवेशकों को आवश्यक जानकारी एक ही स्थान पर उपलब्ध कराने और परियोजनाओं की प्रक्रिया को अधिक व्यवस्थित बनाने में सहायता मिल सकती है।

    सब्सिडी और सरकारी प्रोत्साहनों की जानकारी

    कार्यक्रम में सीएसआईडीसी के उप संचालक श्री अमेय त्रिपाठी ने छत्तीसगढ़ में पर्यटन एवं संबंधित क्षेत्रों में निवेश के लिए उपलब्ध सब्सिडी, प्रोत्साहन एवं अन्य सरकारी सुविधाओं की जानकारी दी। प्रस्तुतीकरण के माध्यम से पात्र परियोजनाओं, निवेश सुविधाओं तथा विभिन्न प्रकार की सहायता और प्रोत्साहन योजनाओं से संबंधित जानकारी साझा की गई।

    पीपीपी मॉडल से पर्यटन विकास को नई गति देने पर चर्चा

    अर्नेस्ट एंड यंग के पार्टनर एवं पीपीपी एक्सपर्ट श्री अंकुर गर्ग ने पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप यानी पीपीपी मॉडल पर विस्तृत प्रस्तुतीकरण दिया। उन्होंने पीपीपी मॉडल की संरचना, सरकारी एवं निजी क्षेत्र की भूमिका, निवेश, परियोजना संचालन और राजस्व मॉडल सहित विभिन्न पहलुओं की जानकारी दी।

    उन्होंने पर्यटन परियोजनाओं में निजी क्षेत्र की विशेषज्ञता एवं निवेश का उपयोग करते हुए सुविधाओं के विकास और संचालन को बेहतर बनाने की संभावनाओं पर भी चर्चा की। कॉन्फ्रेंस में पीपीपी मॉडल को पर्यटन क्षेत्र में निवेश और अधोसंरचना विकास के एक संभावित माध्यम के रूप में समझाया गया।

    डिजिटल पहचान सत्यापन से पर्यटन सेवाओं को सुगम बनाने पर जोर

    कार्यक्रम में यूआईडीएआई दिल्ली के डायरेक्टर लेफ्टिनेंट कर्नल प्रवीण चौधरी ने आधार आधारित डिजिटल एवं ऑफलाइन वेरिफिकेशन व्यवस्था की उपयोगिता के संबंध में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि डिजिटल पहचान सत्यापन की व्यवस्था पर्यटन क्षेत्र के साथ-साथ पुलिस एवं अन्य सरकारी विभागों के लिए भी उपयोगी हो सकती है।

    उन्होंने सिक्योर क्यूआर कोड के माध्यम से दस्तावेजों की प्रामाणिकता जांचने की प्रक्रिया की जानकारी दी। इससे अधिकृत संस्थाओं को पहचान एवं दस्तावेजों के सत्यापन की प्रक्रिया को तेज और व्यवस्थित बनाने में सहायता मिल सकती है। उन्होंने बताया कि ऐसी डिजिटल व्यवस्था का उपयोग संबंधित संस्था के पंजीकरण, लागू नियमों और वैध उद्देश्य के अनुरूप किया जाना आवश्यक है।

    ‘एक्सप्लोर, इनवेस्ट, ट्रांसफार्म’ से पर्यटन निवेश को नई दिशा

    ‘एक्सप्लोर, इनवेस्ट, ट्रांसफार्म’ थीम पर आयोजित प्री-एनआईटी कॉन्फ्रेंस का मुख्य उद्देश्य छत्तीसगढ़ में पर्यटन निवेश की संभावनाओं को निवेशकों के सामने प्रस्तुत करना और टूरिज्म बोर्ड की विभिन्न होटल, मोटल एवं रिसॉर्ट इकाइयों को लीज़ पर देने की प्रक्रिया को अधिक स्पष्ट एवं सुगम बनाना रहा। कॉन्फ्रेंस में सरकारी प्रोत्साहनों, सिंगल विंडो सुविधा, पीपीपी मॉडल, हॉस्पिटैलिटी सेक्टर, पर्यटक सुविधाओं के विस्तार और डिजिटल तकनीक के उपयोग पर व्यापक चर्चा हुई।

    कार्यक्रम के माध्यम से छत्तीसगढ़ को पर्यटन निवेश के लिए संभावनाशील गंतव्य के रूप में प्रस्तुत करने के साथ राज्य की प्राकृतिक, सांस्कृतिक और ऐतिहासिक पर्यटन संपदा को निवेश, रोजगार और स्थानीय आर्थिक गतिविधियों से जोड़ने की दिशा में संवाद को आगे बढ़ाया गया।

  • बिहार में ईंट-भट्ठों के पुराने बकाये का होगा निपटारा, ब्याज में मिलेगी ₹85 करोड़ तक छूट

    बिहार में ईंट-भट्ठों के पुराने बकाये का होगा निपटारा, ब्याज में मिलेगी ₹85 करोड़ तक छूट

    पटना
     ईंट-भट्ठा संचालकों के लिए खान एवं भूतत्व विभाग ने बड़ी राहत दी है। वर्ष 2024-25 तक की बकाया राशि के एकमुश्त समाधान के लिए वन टाइम सेटलमेंट योजना लागू की गई है।

    इसके तहत बकाया राशि जमा करने वाले ईंट-भट्ठा संचालकों को ब्याज में 85 करोड़ रुपये तक की छूट दी जाएगी। योजना की अवधि 21 सितंबर से 20 दिसंबर 2026 तक रहेगी।

    खान एवं भूतत्व मंत्री डॉ. प्रमोद कुमार ने शुक्रवार को अपने कार्यालय कक्ष में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में यह जानकारी दी।

    पेंडिंग था 316.66 करोड़ का राजस्व
    मंत्री ने कहा कि सरकार का उद्देश्य पुराने बकाये का समाधान कर राजस्व वसूली को आसान बनाना है। विभाग के अनुसार, ईंट-भट्ठों से कुल 316.66 करोड़ रुपये की राशि राजस्व संग्रह के लिए लंबित थी।

    इसमें से 27.28 करोड़ रुपये की वसूली हो चुकी है। अभी 289.38 करोड़ रुपये की राशि जमा होनी बाकी है। निर्धारित समय सीमा में एकमुश्त समाधान राशि जमा करने पर बकाया में शामिल ब्याज की राशि माफ कर दी जाएगी।

    विभाग के अनुसार, जिन ईंट-भट्ठों के खिलाफ 31 अगस्त 2026 तक बकाया स्वामित्व राशि नहीं जमा करने के कारण नीलाम पत्र वाद दर्ज हो चुका है, वे भी योजना के दायरे में आएंगे।

    एकमुश्त राशि जमा करने के साथ जिला खनिज फाउंडेशन, आयकर और अन्य करों का भुगतान करना जरूरी होगा। इसके बाद संबंधित खनन पदाधिकारी नीलाम पत्र पदाधिकारी को रिपोर्ट देंगे।

    इसके आधार पर नीलाम पत्र वाद का निस्तारण किया जा सकेगा। योजना के लिए सभी खनिज विकास पदाधिकारियों को आवश्यक प्रशिक्षण भी दिया गया है

  • योगी सरकार शनिवार को 818 अभ्यर्थियों को देगी नौकरी की सौगात, मुख्यमंत्री देंगे नियुक्ति पत्र

    योगी सरकार शनिवार को 818 अभ्यर्थियों को देगी नौकरी की सौगात, मुख्यमंत्री देंगे नियुक्ति पत्र

    लखनऊ

    योगी सरकार प्रदेश के युवाओं को रोजगार और सरकारी सेवाओं से जोड़ने की दिशा में शनिवार को एक और महत्वपूर्ण कदम उठाने जा रही है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ शानिवार को लोकभवन सभागार में आयोजित नियुक्ति पत्र वितरण कार्यक्रम में विभिन्न विभागों में चयनित 21 अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र प्रदान करेंगे जबकि शेष 797 अभ्यर्थियों को विभाग द्वारा नियुक्ति पत्र दिया जाएगा, कुल 818 अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र दिया जाएगा। 19 सितंबर को आयोजित होने वाले नियुक्ति पत्र वितरण कार्यक्रम में व्यावसायिक शिक्षा, कौशल विकास एवं उद्यमशीलता विभाग, उत्तर प्रदेश उद्योग निदेशालय, चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सेवाएं एवं आयुष विभाग से जुड़े विभागों के अभ्यर्थी शामिल होंगे। 

    व्यावसायिक शिक्षा, कौशल विकास एवं उद्यमशीलता विभाग के 48 नव चयनित अभ्यर्थियों को दिया जाएगा नियुक्ति पत्र
    नियुक्ति पत्र पाने वाले अभ्यर्थियों में व्यावसायिक शिक्षा, कौशल विकास एवं उद्यमशीलता विभाग के तहत विभिन्न ट्रेडों के अनुदेशक भी शामिल हैं। इस श्रेणी में कुल 48 अभ्यर्थियों का चयन हुआ है। इनमें मैकेनिक (ट्रैक्टर), पेंटर (सामान्य), सर्वेयर, मैकेनिकल मेडिकल इलेक्ट्रॉनिक्स, लेदर गुड्स मेकर, वायरमैन और प्लंबर जैसे पद शामिल हैं। प्लंबर के पद पर चयनित अभ्यर्थियों की संख्या 31 है, जबकि मैकेनिक (ट्रैक्टर) के छह, वायरमैन के चार और पेंटर (सामान्य) के चार अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र दिया जाएगा। इसके अलावा सर्वेयर, मैकेनिकल मेडिकल इलेक्ट्रॉनिक्स, लेदर गुड्स मेकर के एक-एक अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र दिया जाएगा। इन नियुक्तियों से विभिन्न प्रशिक्षण संस्थानों में तकनीकी शिक्षा एवं प्रशिक्षण से जुड़ी गतिविधियों को मजबूती मिलेगी। वहीं अलग-अलग ट्रेडों में अनुदेशकों की नियुक्ति से प्रशिक्षण प्राप्त करने वाले युवाओं को संबंधित क्षेत्रों में बेहतर मार्गदर्शन मिलेगा। 

    स्वास्थ्य विभाग में 357 एक्सरे-टेक्नीशियन को मिलेगा नियुक्ति पत्र
    कार्यक्रम में उद्योग विभाग के भी चयनित अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र दिया जाएगा। उत्तर प्रदेश उद्योग निदेशालय, कानपुर के तहत सहायक सांख्यिकीय अधिकारी के नौ पदों पर चयनित अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र प्रदान किया जाएगा। इन सहायक सांख्यिकीय अधिकारियों की नियुक्ति से विभागीय स्तर पर आंकड़ों के संकलन, विश्लेषण और विभिन्न औद्योगिक गतिविधियों से संबंधित सांख्यिकीय कार्यों को गति मिलेगी। इसके साथ ही चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सेवाएं विभाग के 357 एक्सरे-टेक्नीशियन के पदों पर चयनित अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र दिया जाएगा। इसके अलावा आयुष विभाग में होम्योपैथिक फार्मासिस्ट के 361, होम्योपैथिक प्रोफेसर के चार, आयुर्वेद प्रोफेसर के पांच, आयुर्वेद रीडर के 22, यूनानी प्रोफेसर के एक, यूनानी रीडर के एक और यूनानी लेक्चरर के 10 पदों पर चयनित कुल 404 अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र प्रदान किया जाएगा।

    एक नजर में नियुक्तियां

    –  व्यावसायिक शिक्षा, कौशल विकास एवं उद्यमशीलता विभाग के विभिन्न ट्रेडों में अनुदेशक : 48
    – उद्योग विभाग में सहायक सांख्यिकीय अधिकारी : 9
    – चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सेवाओं में एक्सरे-टेक्नीशियन : 357
    – होम्योपैथिक, आयुर्वेदिक और यूनानी समेत विभिन्न पद : 404