Author: NewseDay

  • पांडू पिंडारा में क्यों करते हैं पिंडदान? जानें पांडवों और पिंडतारक तीर्थ से जुड़ी मान्यता

    पांडू पिंडारा में क्यों करते हैं पिंडदान? जानें पांडवों और पिंडतारक तीर्थ से जुड़ी मान्यता

    जींद
    पांडू पिंडारा(पिंडतारक तीर्थ) का इतिहास महाभारत काल से जुड़ा हुआ है। मान्यता है, महाभारत युद्ध के बाद पांडवों ने भगवान श्री कृष्ण के कहने पर कौरवों और सैनिकों की आत्मा की शांति के लिए यहां पिंडदान किया था।

    यहां सोमवती अमावस्या की प्रतीक्षा करते हुए 12 वर्ष बिताए थे और पूर्ण विधान से पिंडदान किया था। पांडवों द्वारा यहां पिंडदान (तर्पण) किए जाने के कारण इस जगह का नाम पांडू पिंडारा और यहां के मुख्य कुंड का नाम पिंडतारक तीर्थ पड़ गया।

    माना जाता है, महाभारत काल से पिंडदान और श्राद्ध कर्म की परंपरा शुरू हुई। आज भी रिश्तों में चाहे कितने ही मतभेद क्यों न रहे हों, लोग मृत्यु के बाद अपने पितृों को ईश्वर से भी ऊपर का स्थान देते हैं। उनकी आत्मा की शांति के लिए पिंडदान और उनका श्राद्ध करते हैं।

    पांडवों ने किया था कौरवों का पिंडदान
    किंवदंती है, महाभारत युद्ध में जीत भले ही पांडवों की हुई, लेकिन उन्हें अपने ही परिवार के लोगों को खोने का गहरा दुख भी मिला। कौरव उनके शत्रु जरूर थे, लेकिन वे उनके भाई थे

    इसलिए धर्म का पालन करते हुए पांडवों ने सभी दिवंगत आत्माओं की शांति के लिए पिंडदान और श्राद्ध कर्म संपन्न किया था। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, पिंडारा में मौजूद इस कुंड का संबंध पितृ कर्म और मोक्ष से जोड़ा जाता है।

    यहां श्रद्धा और विधि-विधान से पिंडदान करने पर पूर्वजों को शांति प्राप्त होती है। यही कारण है, सालभर, विशेष रूप से पितृ पक्ष के दौरान, बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां पहुंचकर अपने पितरों का तर्पण करते हैं।

    ग्रंथों में भी पांडू पिंडारा तीर्थ का जिक्र
    कई हिंदू ग्रंथों जैसे महाभारत, वामन पुराण, पद्म पुरण में इस बात का विवरण मिलता है कि जींद जिले में मौजूद पांडू पिंडारा, जिसे पिंडतारक और सोम तीर्थ भी कहा गया है, वहां कौरवों द्वारा कौरवों का पिंडदान किया गया था।

    यहां कुंड में लोग सोमवती अमावस्या के दिन अपने पितृों का पिंडदान करने आते हैं। मान्यता है, इस स्थल पर पिंडदान करने से पितृों को मोक्ष प्राप्त होता है। सोमवती अमावस्या के दिन यहां बहुत बड़ा मेला भी लगता है।

  • IMF प्रशिक्षण में सार्वजनिक निवेश पर चर्चा, समयबद्ध प्रोजेक्ट और बेहतर परिणाम पर जोर

    IMF प्रशिक्षण में सार्वजनिक निवेश पर चर्चा, समयबद्ध प्रोजेक्ट और बेहतर परिणाम पर जोर

    जयपुर
    सार्वजनिक निवेश का बेहतर प्रबंधन, परियोजनाओं का समयबद्ध क्रियान्वयन और निवेश से अधिकतम परिणाम सुनिश्चित करने के उद्देश्य से अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) के दक्षिण एशिया क्षेत्रीय प्रशिक्षण एवं तकनीकी सहायता केंद्र (एसएआरटीटीएसी) द्वारा जयपुर में ‘पब्लिक इन्वेस्टमेंट मैनेजमेंट–इंडियन स्टेट्स’ विषय पर पांच दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम की सोमवार को शुरुआत हुई।

    उद्घाटन सत्र में मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास ने कहा कि देश में सार्वजनिक परियोजनाओं में बड़े स्तर पर निवेश हो रहा है। ऐसे में यह जरूरी है कि परियोजनाएं समय पर पूरी हों और उपलब्ध संसाधनों का बेहतर उपयोग करते हुए निवेश का अधिकतम लाभ आमजन और अर्थव्यवस्था को मिले।
    उन्होंने कहा कि प्रदेश में सार्वजनिक निवेश का असर केवल बड़े प्रोजेक्ट्स तक सीमित नहीं रहा है। जल एवं परिवहन जैसी बुनियादी सुविधाओं में लगातार निवेश से दूर-दराज के क्षेत्रों में कनेक्टिविटी बेहतर हुई है और लोगों को बाजारों एवं सार्वजनिक सेवाओं से जोड़ने में मदद मिली है।

    मुख्य सचिव ने कहा कि राइजिंग राजस्थान के तहत लगभग 35 लाख करोड़ रुपये के निवेश समझौते हुए हैं, जिनमें से करीब 9 लाख करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव धरातल पर उतर चुके हैं। उन्होंने कहा कि राजस्थान देश के प्रमुख नवीकरणीय ऊर्जा केंद्रों में तेजी से उभर रहा है। राइजिंग राजस्थान के तहत भी इस क्षेत्र में बड़े पैमाने पर निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं। उन्होंने भड़ला सौर पार्क का उल्लेख करते हुए कहा कि ऐसी परियोजनाएं बताती हैं कि सही दिशा में किया गया रणनीतिक निवेश आर्थिक विकास को गति देने के साथ ऊर्जा सुरक्षा और पर्यावरण संरक्षण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

    मुख्य सचिव ने जीएसटी सुधारों को महत्वपूर्ण परिवर्तन बताते हुए कहा कि इससे विभिन्न प्रक्रियाओं और दस्तावेजीकरण को अधिक सुव्यवस्थित करने में मदद मिली है। उन्होंने राज्य के साइबर कोषागार के माध्यम से वित्तीय लेन-देन में पारदर्शिता एवं जवाबदेही बढ़ने तथा एसएनए-स्पर्श के माध्यम से कोषागार आधारित भुगतान व्यवस्था में वास्तविक समय में भुगतान की दिशा में हुए बदलाव का भी उल्लेख किया।

    इस अवसर पर एसएआरटीटीएसी के निदेशक हेराल्ड फिंगर ने बताया कि एसएआरटीटीएसी अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ), दक्षिण एशिया के सदस्य देशों और विकास साझेदारों की सहयोगात्मक पहल है। इसका उद्देश्य सदस्य देशों की संस्थागत एवं मानव संसाधन क्षमता को मजबूत करना है, ताकि वे बेहतर व्यापक आर्थिक एवं वित्तीय नीतियां तैयार कर उनका प्रभावी क्रियान्वयन कर सकें। उन्होंने बताया कि एसएआरटीटीएसी में भारत के साथ बांग्लादेश, भूटान, मालदीव, नेपाल और श्रीलंका सदस्य देश हैं। यह आईएमएफ का ऐसा क्षेत्रीय केंद्र है, जहां प्रशिक्षण और तकनीकी सहायता दोनों को एक साथ उपलब्ध कराया जाता है।

    इस अवसर पर एसएआरटीटीएसी के रेजिडेंट पब्लिक फाइनेंशियल मैनेजमेंट एडवाइजर स्टीफन टर्नबुल, नीति आयोग के वरिष्ठ सलाहकार अनुराग गोयल, विशेष शासन सचिव वित्त (बजट) श्रीमती शिवांगी स्वर्णकार तथा आईएमएफ के वित्तीय मामलों के विभाग के विशेषज्ञ रूई मोंटेइरो एवं मार्टिन डार्सी सहित अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।

     

  • बिहार में पंचायतों का नया परिसीमन, 20-40 साल से सरकारी जमीन पर रह रहे गरीबों को मिलेगा पर्चा

    बिहार में पंचायतों का नया परिसीमन, 20-40 साल से सरकारी जमीन पर रह रहे गरीबों को मिलेगा पर्चा

    पटना
    बिहार में अब पंचायत चुनाव परिसीमन के बाद ही होंगे। यह जानकारी खुद मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने एक कार्यक्रम के दौरान दी है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कहा है कि ग्राम पंचायतों के नये परिसीमन के बाद ही पंचायतों का चुनाव कराया जाएगा। उन्होंने कहा कि राज्य निर्वाचन आयोग परिसिमन का काम कर रहा है। इसी के साथ मुख्यमंत्री ने एक और अहम बात कही है कि सरकार अब जनप्रतिनिधियों से पूछेगी कि 5 साल में जीडीपी कितना बढ़ा? मुख्यमंत्री ने कहा कि अब जिला परिषद, प्रखंड प्रमुख और मुखिया से जिला, प्रखंड और ग्राम पंचायत के जीडीपी के बारे में पूछा जाएगा कि इनके कार्यकाल में पांच साल में कितनी बढ़ोतरी हुई। मुख्यमंत्री सोमवार को पटना के एक होटल में ग्राम संसद कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। इसी दौरान उन्होंने यह महत्वपूर्ण बातें कही।

    20-40 सालों से सरकारी जमीन पर रहने वालों को मिलेगा पर्चा
    इस मौके पर मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि गांवों में 20-40 सालों से जो गरीब सरकारी जमीन पर रह रहे हैं, उन्हें पूर्ण रूप से व्यवस्थित किया जाएगा। ऐसे गरीबों को सरकार पर्चा देगी। इसके लिए राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग को निर्देश दिया गया है।

    बिहार में 50 निजी विश्वविद्यालय स्थापित होंगे
    मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कहा है कि कम-से-कम 50 निजी विश्वविद्यालयों की स्थापना बिहार में करने का लक्ष्य है। उन्होंने कहा कि वर्ष 2030 के बाद बिहार को कोई व्यक्ति मजदूरी करने दूसरे राज्य में नहीं जाएगा। ऐसी व्यवस्था राज्य में स्थापित की जा रही है।

    पंचायती राज मंत्री ने चुनाव को लेकर दी थी जानकारी
    बता दें कि कुछ दिनों पहले बिहार सरकार के पंचायती राज मंत्री दीपक प्रकाश ने भी कहा था कि बिहार में त्रिस्तरीय ग्राम पंचायत चुनाव की तारीखों का ऐलान परिसीमन के बाद किया जाएगा। उन्होंने कहा कि निर्वाचन आयोग जल्द ही चुनाव की तारीखें घोषित कर सकता है। मंत्री दीपक प्रकाश ने यह भी कहा था कि त्रिस्तरीय ग्राम पंचायत चुनाव के लिए परिसीमन का काम आखिरी चरण में है।

    पंचायत में बनेगा मिनी सचिवालय
    मंत्री दीपक प्रकाश ने जानकारी दी थी कि बिहार की सभी पंचायतों में पंचायत सरकार भवन को मिनी सचिवालय के रूप में विकसित किया जा रहा है। इसका उद्देश्य ग्रामीणों को पंचायत स्तर पर मिलने वाली विभिन्न सरकारी सेवाएं एक ही भवन में उपलब्ध कराना है। यहां जनप्रतिनिधियों के साथ संबंधित कर्मियों की मौजूदगी भी सुनिश्चित की जाएगी।

  • पढ़ने-लिखने की ललक, 75 के जयराम और 71 की चंद्रो ने दी परीक्षा

    पढ़ने-लिखने की ललक, 75 के जयराम और 71 की चंद्रो ने दी परीक्षा

    हांसी.

    उम्र के जिस पड़ाव पर लोग पढ़ाई से दूरी बना लेते हैं, वहां बीड़ के 75 वर्षीय जयराम और 71 वर्षीय चंद्रो ने रविवार को परीक्षा केंद्र पहुंचकर नई मिसाल पेश की। उल्लास कार्यक्रम के पांचवें चरण की पढ़ने-लिखने और आसान गणना की परीक्षा में महिलाओं तथा बुजुर्गों ने उत्साह से भाग लिया।

    जिले में 425 निरक्षर लोगों की पहचान कर उनका पोर्टल पर पंजीकरण किया गया था। परीक्षार्थियों को घर के नजदीक सुविधा देने के लिए 277 स्कूलों को परीक्षा केंद्र बनाया गया। हांसी शहर में तीन केंद्रों पर परीक्षा रखी गई थी। दैनिक जागरण की टीम दोपहर एक बजे गवर्नमेंट हाई स्कूल और लाल सड़क स्थित राजकीय कन्या वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय पहुंची तो दोनों पर ताला लगा मिला। आसपास के लोगों ने बताया कि सुबह कुछ लोग परीक्षा देने आए थे, लेकिन बाद में स्कूल बंद कर दिया गया।

    नोडल अधिकारी राममेहर के अनुसार दोनों केंद्रों पर 15 लोगों को परीक्षा देनी थी। इनमें 11 ने परीक्षा दी, जबकि चार अनुपस्थित रहे। ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों ने बढ़-चढ़कर परीक्षा में भाग लिया। स्वयंसेवी शिक्षकों को पंजीकृत लोगों से संपर्क कर उन्हें केंद्र तक लाने और परीक्षा की प्रक्रिया समझाने की जिम्मेदारी दी गई थी।

  • कोर्ट परिसर सहित 4 स्कूलों को बम से उड़ाने की धमकी, मानसा में अलर्ट

    कोर्ट परिसर सहित 4 स्कूलों को बम से उड़ाने की धमकी, मानसा में अलर्ट

    मानसा.

    कोर्ट कांप्लेक्स के अलावा चार सरकारी स्कूलों को बंब उड़ाने की मिली धमकी के बाद पुलिस प्रशासन अर्ल्ट हो गया है और कोर्ट कांप्लेक्स के अलावा स्कूलों में पुलिस बल तैनात करते जांच शुरू कर दी गई है।

    अदालत में जाने वाले हर व्यक्ति की तलाशी ली जा रही है और पुरी जांच के बाद ही अंदर जाने की अनुमति दी जा रही है। पुलिस ने मिले धमकी भरे पत्र को कब्जे में लेने के बाद आगे की कार्रवाई शुरू कर दी है। जिले के तीन गांवों खीवा, हीरो कलां और अतला के स्कूलों और मानसा शहर के गर्ल्स स्कूल के बाहर भी पुलिस तैनात कर दी गई है। इन सभी स्कूलों को खाली करवा दिया गया है। पुलिस द्वारा स्कूलों और कोर्ट परिसर में सर्च ऑपरेशन चलाया जा रहा है।

    थाना सिटी-2 की इंचार्ज बेअंत कौर ने बताया कि पुलिस पूरे मामले की जांच और सर्च कर रही है। पुलिस द्वारा स्कूलों और कोर्ट परिसर में सर्च ऑपरेशन चलाया जा रहा है। कोर्ट कॉम्प्लेक्स में आने वाले हर व्यक्ति की तलाशी ली जा रही है।

    4 स्कूलों और कोर्ट को उड़ाने की धमकी
    एक वायरल पत्र में लिखा है कि 21 तारीख को खीवा, हीरो कलां और अतला के स्कूलों को बम से उड़ाया जाएगा। इसके साथ ही मानसा कोर्ट और गर्ल्स स्कूल को भी निशाना बनाने की धमकी दी गई है। पत्र में धमकी भरे शब्दों के साथ लिखा है कि यह काम करके दिखाया जाएगा। फिलहाल पुलिस मामले की गंभीरता से जांच कर रही है।

  • कांग्रेस में भाई के जाने पर मंत्री खुशवंत साहेब का बयान, विभाजनकारी नीति का आरोप

    कांग्रेस में भाई के जाने पर मंत्री खुशवंत साहेब का बयान, विभाजनकारी नीति का आरोप

    रायपुर.

    छत्तीसगढ़ की सियासत में उस वक्त बड़ा उलटफेर हुआ, जब कैबिनेट मंत्री गुरु खुशवंत साहेब के बड़े ढाल दास ने कांग्रेस का हाथ थाम लिया. उनके कांग्रेस प्रवेश के बाद सियासी गलियारों में हलचल तेज हो गई. इस पर मंत्री गुरु खुशवंत साहेब ने कांग्रेस पर परिवार और समाज को बांटने की राजनीति करने का आरोप लगाया है.

    मंत्री गुरु खुशवंत साहेब ने कहा कि कांग्रेस की नीति हमेश से फूट डालो और राज करो की रही है. कांग्रेस आपस में लड़ाने का काम कर रही है. कांग्रेस एक परिवार, समाज और धर्म को एक-दूसरे से लड़ाने का काम कर रही है. लेकिन हम सभी दृढ़ संकल्पित हैं और राष्ट्र प्रथम, देश प्रथम की विचारधारा से जुड़े हुए हैं. हमारा लक्ष्य प्रदेश को विकसित बनाने का है.

    कांग्रेस में आपसी कलह
    पीसीसी चीफ बैज के कांग्रेस से सीएम उम्मीदवारों वाले बयान पर मंत्री खुशवंत साहेब ने निशाना साधा. उन्होंने कहा कि यह कांग्रेस का अंदरूनी मामला है. कांग्रेस में सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है. आपसी कलह साफ दिखाई दे रही है. उन्होंने कहा कि जनता ने कांग्रेस को पहले ही अपनी पसंद से हटा दिया है. कांग्रेस कितना भी प्रयास कर ले, जनता का विश्वास खो चुकी है.

    कांग्रेस के प्रशिक्षण शिविर पर तंज कसते हुए खुशवंत साहेब ने कहा कि प्रशिक्षण शिविर से कुछ नहीं होने वाला. कांग्रेस ग्राउंड में कितना भी मेहनत कर ले, वहां पैसों का खेल और भ्रष्टाचार चलता है. 20 निष्कासित नेताओं की कांग्रेस में वापसी को लेकर खुशवंत साहेब ने कांग्रेस पर निशाना साधा. उन्होंने कहा कि जितने भी अपराध होते हैं, उनमें कांग्रेस का नाम सामने आता है. कांग्रेस पहले निष्कासन का पत्र जारी करती है और फिर उसे वापस ले लेती है.

  • अब यूपी की पहचान ‘वन डिस्ट्रिक्ट वन माफिया’ नहीं, ‘वन डिस्ट्रिक्ट वन मेडिकल कॉलेज’ और ‘वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट’ है: सीएम

    अब यूपी की पहचान ‘वन डिस्ट्रिक्ट वन माफिया’ नहीं, ‘वन डिस्ट्रिक्ट वन मेडिकल कॉलेज’ और ‘वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट’ है: सीएम

    नकारात्मक ताकतें जाति के नाम पर समाज और महापुरुषों को बांटेंगी, हमें विभाजन नहीं होने देना है: मुख्यमंत्री

    व्यक्ति से बढ़कर दल और दल से बढ़कर देश, ‘राष्ट्र प्रथम’ के भाव के साथ कार्य करना है: सीएम योगी

    अब यूपी की पहचान ‘वन डिस्ट्रिक्ट वन माफिया’ नहीं, ‘वन डिस्ट्रिक्ट वन मेडिकल कॉलेज’ और ‘वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट’ है: सीएम

    जो 500 वर्षों में नहीं हो पाया, वह अयोध्या में भगवान राम के भव्य मंदिर के निर्माण के रूप में संभव हुआ

    शक्ति केंद्र प्रमुख हर बूथ की समीक्षा करें, पन्ना प्रमुखों का दायित्व तय करें और एक-एक परिवार की मैपिंग करें 

    कार्यकर्ताओं के परिश्रम और पसीने ने यूपी को फिर पहचान दी, विकास की नई बुलंदियों तक पहुंचाया

    मेरठ
     मुख्यमंत्री यो
    गी आदित्यनाथ ने कहा कि नकारात्मक ताकतें फिर से समाज को बांटने का काम करेंगी। वे जाति के नाम पर समाज को बांटेंगी और महापुरुषों को भी जातीय आधार पर बांटने का पाप करेंगी, लेकिन हमें इस विभाजन को नहीं होने देना है। महापुरुष पूरे समाज के होते हैं, उन्हें किसी जाति के दायरे में सीमित कर उनके महत्व को कम नहीं किया जा सकता। मुख्यमंत्री भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन की उपस्थिति में जनपद मेरठ में आयोजित भाजपा पश्चिम क्षेत्र के शक्ति केंद्र संयोजकों के सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे।

    सीएम योगी ने कहा कि भारत के इतिहास, क्रांति और अन्नदाताओं के सामर्थ्य की धरती मेरठ में भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष का सभी की ओर से हृदय से स्वागत और अभिनंदन है। राष्ट्रीय अध्यक्ष के दो दिवसीय प्रवास के क्रम में पश्चिम क्षेत्र के कार्यकर्ताओं को उनका सानिध्य और मार्गदर्शन मिल रहा है। शक्ति केंद्र सम्मेलन के माध्यम से कार्यकर्ताओं की शक्ति को जागृत करने और उस जागरण को पार्टी के लिए उपयोगी बनाने के साथ राष्ट्र प्रथम के भाव से प्रधानमंत्री के संकल्पों के अनुरूप आत्मनिर्भर एवं विकसित भारत में कार्यकर्ताओं की भूमिका के लिए आह्वान किया जा रहा है।

    ‘मुझे क्या’ कहना मंथरा बुद्धि का परिचय
    मुख्यमंत्री ने कहा कि व्यक्ति से बढ़कर दल और दल से बढ़कर देश है। भारतीय जनता पार्टी का भाव है कि मेरा सब कुछ देश के लिए होगा। जो लोग कहते हैं ‘मुझे क्या-मुझे क्या’, यह मंथरा बुद्धि है। ‘को नृप होई हमें का हानि’ का भाव पहचान का संकट खड़ा करता है, पलायन करवाता है, विकास को बाधित करता है और अन्नदाता किसान को आत्महत्या के लिए मजबूर करने वाली परिस्थितियां पैदा करता है। इसी भाव ने देश को नुकसान पहुंचाया और देश गुलाम हुआ तथा उसके सामने पहचान का संकट खड़ा हुआ।

    मोदी जी के नेतृत्व में नए भारत का दर्शन
    मुख्यमंत्री ने कहा कि 2014 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के सत्ता संभालने के बाद एक नए भारत का दर्शन हुआ। ऐसा भारत जो अपनी विरासत पर गर्व करता है और विकास के लिए गति के साथ आगे बढ़ रहा है। आज ऐसा भारत है जिसके सामने पहचान का संकट नहीं है। सीना तानकर चलता है और दुनिया की आंख में आंख डालकर बात करता है। कोई चुनौती देने का दुस्साहस करता है तो भारत मांद में घुसकर मारना भी जानता है। भारत की अर्थव्यवस्था बॉटम फाइव से टॉप फाइव में आ गई है। इसी देश में कभी सनातन और हिंदू परंपरा को कोसने तथा उसे गजनवी, गोरी, इब्राहिम लोदी, बाबर और औरंगजेब के समकक्ष ठहराने का प्रयास किया जाता था। अब नया भारत गुलामी की मानसिकता को समाप्त कर विरासत पर गौरव की अनुभूति कर रहा है। इसकी परिणति काशी विश्वनाथ धाम और अयोध्या में भगवान राम के भव्य मंदिर के रूप में सामने है। जो लोगों के लिए असंभव था, वह प्रधानमंत्री मोदी जी के नेतृत्व में संभव हुआ है।

    विरासत-सनातन को कोसने वालों ने रोकी थी कांवड़ यात्रा
    मुख्यमंत्री ने कहा कि मथुरा-वृंदावन सज-संवर रहा है। भागवत भूमि शुकतीर्थ के पुनरुद्धार की कार्ययोजना चल रही है और विदुर कुटी के लिए भी धनराशि आवंटित की गई है। विरासत-सनातन को कोसने वालों ने कांवड़ यात्रा पर रोक लगाई थी। लेकिन, भाजपा सरकार ने कहा कि कांवड़ यात्रा को कोई नहीं रोक सकता। यह धूमधाम से चलेगी। मैं स्वयं कांवड़ यात्रा में शामिल होता हूं और पुष्पवर्षा करता हूं। यह सनातन का प्रतीक है। अब कोई श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर रोक नहीं लगा सकता, मेरठ की क्रांति धरा को अपमानित नहीं कर सकता।

    कट्टा-बंदूक की राजनीति नहीं हो सकती मेरठ में
    मुख्यमंत्री ने कहा कि अब मेरठ में कट्टा-बंदूक की राजनीति नहीं हो सकती। युवाओं के सपनों को उड़ान देने के लिए भारत का सबसे बड़ा एयरपोर्ट नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट यहां से एक घंटे की दूरी पर बनकर तैयार हो गया है। मेरठ की बेटी पारुल चौधरी भारत के लिए ओलंपिक में गोल्ड मेडल लेकर आती है। उत्तर प्रदेश की पहली स्पोर्ट्स यूनिवर्सिटी मेजर ध्यानचंद के नाम पर मेरठ में बन रही है। दिल्ली-मेरठ के बीच 12 लेन का एक्सप्रेसवे और नमो भारत ट्रेन सफलतापूर्वक चल रही है। अब फिल्म सिटी बन रही है, मेडिकल डिवाइस पार्क बन रहा है और सेमीकंडक्टर की यूनिट लग रही है। इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र में भी बड़ा काम हुआ है। भारत में इलेक्ट्रॉनिक्स आइटम के 60 प्रतिशत कंपोनेंट और 55 प्रतिशत मोबाइल फोन उत्तर प्रदेश में बन रहे हैं।

    9.5 लाख युवाओं को सरकारी नौकरी
    सीएम योगी ने कहा कि प्रदेश में 9.5 लाख युवाओं को सरकारी नौकरी दी गई है। परंपरागत उद्यम फिर से पुनर्जीवित किया गया, जिसमें 3 करोड़ 25 लाख नौजवान रोजगार प्राप्त कर रहे हैं। दंगाइयों की कमर टूटने के कारण प्रदेश दंगा-कर्फ्यू मुक्त हुआ है तथा इसके कारण बड़े-बड़े रोजगार भी प्रदेश में आए हैं। अब उत्तर प्रदेश के सामने पहचान का संकट नहीं है। अब कोई यूपी वाला कहकर अपमानित नहीं करता। मेरठ, मुजफ्फरनगर, हापुड़, गाजियाबाद, बुलंदशहर, शामली, सहारनपुर या बिजनौर की पहचान बताने पर सम्मान की निगाह से देखा जाता है। यदि बाहर जाकर कोई कहता है कि वह यूपी से आया है तो सामने वाला उसे गले लगाने के लिए तैयार होता है।

    आने वाली पीढ़ी नहीं कहेगी-आपने क्या किया
    मुख्यमंत्री ने कहा कि पहले न बेटी सुरक्षित थी और न व्यापारी। हर ओर अराजकता थी, महीनों-महीनों कर्फ्यू रहता था, व्यापार तबाह होता था और नौजवान की नौकरी पर पहले ही डकैती पड़ जाती थी। उत्तर प्रदेश की पहचान वापस दिलाने में प्रधानमंत्री मोदी जी के नेतृत्व के साथ कार्यकर्ताओं के परिश्रम और पसीने का योगदान है। आने वाली पीढ़ी अब यह नहीं कहेगी कि आपने क्या किया। कार्यकर्ता आने वाली पीढ़ी को बता सकता है कि जब वह भाजपा के शक्ति केंद्र का प्रमुख था, तब 12 लेन का एक्सप्रेसवे बना था, नमो रैपिड रेल आई थी। इन उपलब्धियों को स्मृति के रूप में संजोकर रखें और भावी पीढ़ी को बताएं कि जो काम 500 वर्षों में नहीं हो पाया, वह प्रधानमंत्री मोदी जी के नेतृत्व में अयोध्या में भगवान राम के भव्य मंदिर के रूप में हुआ।

    कार्यकर्ताओं ने बनाया भाजपा को दुनिया का सबसे बड़ा दल
    मुख्यमंत्री ने कहा कि यह कार्यकर्ताओं का अधिकार है कि वे कहें- मुझे पहचान मिली है, मुझे मेरे राम मिले हैं, मुझे मेरे कृष्ण मिले हैं और मुझे भोले शंकर मिले हैं, बाबा विश्वनाथ का पवित्र धाम मिला है। यही हमारी पहचान है। प्रधानमंत्री मोदी जी और भाजपा अध्यक्ष नितिन नबीन जी के नेतृत्व में भाजपा को दुनिया के सबसे बड़े दल के रूप में स्थापित करने का श्रेय भी कार्यकर्ताओं को जाता है। उन्होंने कार्यकर्ताओं को इस यात्रा का सारथी बताते हुए कहा कि महाभारत के युद्ध में कृष्ण की भूमिका भी सारथी की थी। इतिहास ने शकुनि और मंथरा को सम्मान नहीं दिया, लेकिन कृष्ण जैसे सारथी को सम्मान दिया है। हर कार्यकर्ता कृष्ण जैसा सारथी बनने का भाव रखे।

    अब यूपी को कोई बीमारू नहीं कह सकता
    मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तर प्रदेश पहले बीमारू राज्य था, लेकिन आज कोई इसे बीमारू नहीं कह सकता। आज यूपी देश की टॉप-थ्री इकॉनमी में गिना जाता है। अब उत्तर प्रदेश की पहचान ‘वन डिस्ट्रिक्ट वन माफिया’ नहीं, बल्कि ‘वन डिस्ट्रिक्ट वन मेडिकल कॉलेज’ और ‘वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट’ है। इसके साथ ‘वन डिस्ट्रिक्ट वन कुजीन’ के माध्यम से स्थानीय खान-पान और उत्पादों को भी वैश्विक पहचान दिलाने का प्रयास हो रहा है। मेरठ की रेवड़ी, हापुड़ के पापड़ और मुजफ्फरनगर के गुड़ को भी इसमें शामिल किया गया है। हर जगह के खान-पान और उत्पादों की ब्रांडिंग की जा रही है, ताकि उन्हें वैश्विक पहचान दिलाई जा सके। पहले कट्टा-बम से यूपी की पहचान थी और लोग प्रदेश से दूरी बनाते थे, लेकिन अब वह स्थिति नहीं है।

    समाज को बांटने का प्रयास करेंगे कुछ लोग
    मुख्यमंत्री ने कहा कि इस बदलाव को कुछ लोग बर्दाश्त नहीं कर पाएंगे। जो लोग दंगा करवाते थे, दंगाइयों और माफियाओं के सामने घुटना टेकते थे, दंगाइयों को मुख्यमंत्री आवास में बुलाकर सम्मानित करते थे और वसूली में मस्त रहते थे, वे फिर से समाज को बांटने का काम करेंगे। वे जाति के नाम पर समाज को बांटेंगे और महापुरुषों को भी जातीय आधार पर बांटने का प्रयास करेंगे। महापुरुष किसी एक जाति के नहीं होते। कोतवाल धन सिंह गुर्जर भारत के स्वाधीनता आंदोलन के नायक हैं और हर भारतीय के लिए श्रद्धा एवं सम्मान के नायक हैं। महाराणा प्रताप, छत्रपति शिवाजी महाराज और गुरु गोविंद सिंह जी महाराज राष्ट्रनायक हैं। इन्हें जातीय दायरे में नहीं बांधा जा सकता। क्रांतिकारियों की सिरमौर और क्रांतिकारियों को प्रोत्साहित करने वाली दुर्गा भाभी सभी की आदर्श हैं। सरकार ने कोतवाल धन सिंह गुर्जर का मेरठ में भव्य स्मारक बनाया है। नकारात्मक ताकतें फिर से बंटवारा करना चाहती हैं- जाति के नाम पर, क्षेत्र के नाम पर और भाषा के नाम पर। इस विभाजन को नहीं होने देना है और इसकी जिम्मेदारी शक्ति केंद्र प्रमुखों पर है।

    सबको मतदान के लिए प्रेरित करना है
    मुख्यमंत्री ने शक्ति केंद्र प्रमुखों से प्रत्येक बूथ की समीक्षा करने, हर बूथ स्तर पर प्रभावी टीम का गठन करने और प्रत्येक पन्ना प्रमुख का उत्तरदायित्व निर्धारित करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि एक-एक परिवार की मैपिंग और सर्वे कर सबको मतदान के लिए प्रेरित करना है। बाबा साहेब डॉ. भीमराव आंबेडकर के संविधान ने हर नागरिक को अपने वोट का इस्तेमाल करने की बड़ी ताकत दी है। बाबा साहेब, सद्गुरु रविदास जी महाराज और महर्षि वाल्मीकि जी से जुड़े स्थानों, मंदिरों और मूर्तियों के सौंदर्यीकरण के लिए डबल इंजन सरकार ने धनराशि आवंटित की है। एक समय था जब समाजवादी पार्टी की सरकार बाबा साहेब के नाम पर बने मेडिकल कॉलेज का नाम बदल देती थी और सद्गुरु रविदास जी महाराज की पावन जन्मभूमि सीर गोवर्धन में होने वाले आयोजन को रोक देती थी।

    राम के नाम से चिढ़ने वालों को देना होगा जवाब
    सीएम योगी ने राम सेतु व भगवान राम के नाम को लेकर भी समाजवादी पार्टी पर तीखा राजनीतिक हमला बोला और कहा कि भगवान राम का नाम लेने से जिन लोगों को चिढ़ होती थी, उनको जवाब देने के लिए कार्यकर्ताओं को अपने शक्ति केंद्र को मजबूत रखना होगा। शक्ति केंद्र जितना सशक्त और मजबूत होगा, कार्यकर्ता उतने ही ताकतवर होकर आगे बढ़ेंगे और राष्ट्र प्रथम का मंत्र उतना ही प्रभावी होगा। उन्होंने पश्चिम क्षेत्र के शक्ति केंद्र संयोजकों की उपस्थिति और उत्साह की सराहना करते हुए 100 प्रतिशत गठन की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि शक्ति केंद्र के साथ-साथ बूथों के संयोजक, प्रभारी और पन्ना प्रमुखों के गठन की प्रक्रिया को प्रभावी ढंग से आगे बढ़ाते हुए एक-एक घर की स्क्रीनिंग करनी है। उन्होंने कार्यकर्ताओं से मेहनत करने और बूथ अध्यक्षों के सम्मेलन में शत-प्रतिशत उपस्थिति सुनिश्चित करने का आह्वान किया।

    इस अवसर पर भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष एवं केंद्रीय मंत्री पंकज चौधरी, राष्ट्रीय मंत्री एवं उत्तर प्रदेश के सह-प्रभारी जगदीश पटेल, राष्ट्रीय मंत्री एवं सांसद डॉ. भोला सिंह,  प्रदेश संगठन महामंत्री धर्मपाल, प्रदेश महामंत्री और क्षेत्रीय प्रभारी राम प्रताप सिंह, क्षेत्रीय अध्यक्ष नवाब सिंह नागर व अन्य पदाधिकारीगण उपस्थित रहे। 

    इनसेट-
    शक्ति केंद्र भाजपा की रीढ़, 2027 में पश्चिमी यूपी के कार्यकर्ताओं के दम पर फिर बनेगी सरकार: पंकज चौधरी

    भाजपा प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी ने कहा कि शक्ति केंद्र भारतीय जनता पार्टी की रीढ़ हैं और उनके ऊपर बड़ी जिम्मेदारी है। राष्ट्रीय अध्यक्ष के उत्तर प्रदेश प्रवास के दौरान बार-बार शक्ति केंद्र के कार्यकर्ताओं से संवाद की इच्छा यह दर्शाती है कि संगठन में उनकी भूमिका कितनी महत्वपूर्ण है। शक्ति केंद्र प्रमुख अपने क्षेत्र के तीन से पांच बूथों की पूरी जानकारी रखे तो चुनाव से पहले ही अपने शक्ति केंद्र के परिणाम का आकलन कर सकता है। भाजपा में कार्यकर्ता सर्वोपरि है और कार्यकर्ताओं के लिए कुछ भी करने को वह सदैव तैयार हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार के जनकल्याणकारी कार्यों और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रदेश सरकार की उपलब्धियों को लेकर कार्यकर्ता जनता के बीच जाएं। 2017 से पहले पश्चिमी उत्तर प्रदेश की स्थिति और आज की स्थिति में बड़ा बदलाव आया है तथा डबल इंजन सरकार ने प्रदेश की पहचान बदलने का काम किया है। भाजपा कार्यकर्ता लक्ष्य और प्रत्याशी देखकर नहीं, बल्कि कमल खिलाने और सरकार बनाने के संकल्प के साथ काम करता है। उन्होंने विश्वास जताया कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कार्यकर्ता पूरी मेहनत और समर्पण के साथ काम करते हुए 2027 में उत्तर प्रदेश में फिर भाजपा की सरकार बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।

  • 25 करोड़ बच्चों के उज्ज्वल भविष्य का संकल्प, सेवा अभियान से शिक्षा और अवसरों को मिलेगी नई उड़ान

    25 करोड़ बच्चों के उज्ज्वल भविष्य का संकल्प, सेवा अभियान से शिक्षा और अवसरों को मिलेगी नई उड़ान

    रायपुर : विशेष लेख : सेवा संकल्प अभियान : 25 करोड़ बच्चों के सपनों का भारत

    हर बच्चों को अवसर, हर सपनों को उड़ान: विकसित भारत का संकल्प
         

    रायपुर

     किसी बच्चे की आंखों में देखें तो वहां केवल बचपन नहीं दिखाई देगा, बल्कि वहां आने वाले भारत की तस्वीर दिखाई देगी। किसी की आंखों में अंतरिक्ष तक पहुंचने का सपना है, कोई डॉक्टर बनकर गांव के लोगों की सेवा करना चाहता है, कोई वैज्ञानिक बनकर नई खोज करना चाहता है, तो कोई अपने गांव में ऐसा काम करना चाहता है जिससे उसके साथ दूसरे लोगों को भी रोजगार का अवसर मिले और भविष्य सुनिश्चित हो सके। वहीं किसी बच्चे का सपना खेल के मैदान से जुड़ा है तो किसी का खेत, तकनीक, शिक्षा, कला या उद्यमिता से। भारत के करोड़ों बच्चों की आंखों में पल रहे यही अनगिनत सपने मिलकर वर्ष 2047 के विकसित भारत की नींव रख रहे हैं।

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सार्वजनिक जीवन में सेवा और राष्ट्रनिर्माण के 25 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर आयोजित ‘सेवा संकल्प अभियान’ की दूसरी पहल ‘25 करोड़ बच्चों के सपनों का भारत’ इसी भविष्य को समझने और उसे आकार देने का संकल्प है। यह केवल एक अभियान नहीं, बल्कि उस पीढ़ी के प्रति विश्वास का संदेश है, जो वर्ष 2047 में विकसित भारत की जिम्मेदारी संभालेगी। आज जो बच्चे स्कूलों में पढ़ रहे हैं, वही कल भारत के वैज्ञानिक, चिकित्सक, इंजीनियर, शिक्षक, सैनिक, खिलाड़ी, उद्यमी, शोधकर्ता और नीति-निर्माता होंगे।
    विकसित भारत की यात्रा की शुरुआत इसलिए स्कूल की कक्षा से होती है। एक बच्चे के हाथ में किताब होती है, लेकिन उसी किताब के पन्नों में उसके भविष्य की पूरी दुनिया छिपी होती है। शिक्षा को केवल परीक्षा और डिग्री तक सीमित रखने के बजाय बच्चों में जिज्ञासा, रचनात्मकता, कौशल, तकनीकी समझ और नवाचार की भावना विकसित करने की दिशा में किए जा रहे प्रयास आने वाले भारत की तस्वीर बदल रहे हैं। पीएम स्कूल इसी बदलती सोच का उदाहरण हैं, जहां विद्यार्थियों को आधुनिक शिक्षा के साथ प्रयोग, खेल, कला, तकनीक और अनुभव के माध्यम से सीखने का वातावरण उपलब्ध कराने पर जोर दिया जा रहा है।

    लेकिन भारत के सपनों की असली ताकत तब सामने आएगी, जब विकास की रोशनी उन बच्चों तक भी पहुंचेगी, जिनके घर दूरस्थ गांवों, पहाड़ी क्षेत्रों और वनांचलों में हैं। छत्तीसगढ़ जैसे जनजातीय बहुल राज्य में यह जिम्मेदारी और भी महत्वपूर्ण हो जाती है। एकलव्य आवासीय विद्यालयों ने जनजातीय समाज के अनेक बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के नए अवसर दिए हैं। जिन बच्चों के लिए कभी बड़े शहरों में जाकर पढ़ाई करना दूर का सपना था, उनके लिए आवासीय विद्यालय शिक्षा और बेहतर भविष्य की नई राह बन रहे हैं।

    इन विद्यालयों की कक्षाओं में बैठा कोई बच्चा जब पहली बार बड़े लक्ष्य के बारे में सोचता है, तो उसके साथ केवल उसका अपना सपना नहीं होता। उसके पीछे माता-पिता की उम्मीदें होती हैं, परिवार की वर्षों पुरानी आकांक्षाएं होती हैं और पूरे समाज की बदलती तस्वीर होती है। एक बच्चे की सफलता उसके परिवार को यह विश्वास देती है कि परिस्थितियां चाहे कितनी भी कठिन क्यों न हों, प्रतिभा को अवसर मिले तो मंजिल हासिल की जा सकती है।

    छत्तीसगढ़ में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में प्रयास आवासीय विद्यालय भी विद्यार्थियों के सपनों को नई दिशा देने का काम कर रहे हैं। स्कूली शिक्षा के साथ प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी का अवसर मिलने से आर्थिक रूप से कमजोर और दूरस्थ क्षेत्रों के प्रतिभाशाली बच्चों के सामने उच्च शिक्षा के नए रास्ते खुल रहे हैं। जेईई, नीट, क्लैट जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए मार्गदर्शन और तैयारी का वातावरण इन विद्यार्थियों को बड़े सपने देखने का आत्मविश्वास देता है। यह बदलाव केवल शिक्षा व्यवस्था का परिवर्तन नहीं है, बल्कि यह उस सोच का विस्तार है जिसमें बच्चे की प्रतिभा को उसके गांव, परिवार या आर्थिक स्थिति से नहीं, बल्कि उसकी क्षमता और मेहनत से पहचाना जाता है।
    वर्ष 2047 के भारत की तस्वीर केवल ऊंची इमारतों, आधुनिक शहरों और नई तकनीकों से नहीं बनेगी। उसकी असली पहचान उस बच्चे के आत्मविश्वास से होगी, जो कह सके कि मैं अपने सपने को पूरा कर सकता हूं। विकसित भारत का अर्थ तब और व्यापक होगा, जब देश का युवा रोजगार की तलाश करने के साथ रोजगार पैदा करने की क्षमता भी रखेगा। शिक्षा के साथ कौशल, नवाचार, उद्यमिता और तकनीकी दक्षता युवाओं को अपने पैरों पर खड़े होने और दूसरों के लिए भी अवसर पैदा करने की शक्ति देगी।

    आज का विद्यार्थी कल का केवल नौकरी तलाशने वाला युवा नहीं, बल्कि नया विचार देने वाला शोधकर्ता, नई तकनीक बनाने वाला नवाचारी, अपना व्यवसाय खड़ा करने वाला उद्यमी और समाज की समस्याओं का समाधान खोजने वाला परिवर्तनकारी नागरिक बन सकता है। यही वह सोच है जो विकसित भारत के संकल्प को व्यापक अर्थ देती है।

    ‘25 करोड़ बच्चों के सपनों का भारत’ इसलिए केवल बच्चों के भविष्य की बात नहीं करता, यह पूरे देश के भविष्य की बात करता है। आज किसी स्कूल की प्रयोगशाला में प्रयोग करता बच्चा, किसी एकलव्य विद्यालय में पढ़ता जनजातीय विद्यार्थी, प्रयास आवासीय विद्यालय में प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी करता युवा और अपने गांव में भविष्य का कोई नया रास्ता तलाशता विद्यार्थी-ये सभी 2047 के भारत की बदलती तस्वीर के गवाह होंगे।
    इन बच्चों के सपनों को अवसर देना ही राष्ट्रनिर्माण की सबसे बड़ी जिम्मेदारियों में से एक है। क्योंकि किसी देश की वास्तविक शक्ति उसके संसाधनों में नहीं, उसकी नई पीढ़ी की कल्पनाशक्ति और सामर्थ्य में होती है। जब करोड़ों बच्चों को अच्छी शिक्षा मिलेगी, उनके भीतर सवाल पूछने की हिम्मत होगी, प्रयोग करने की स्वतंत्रता होगी और आगे बढ़ने के अवसर मिलेंगे, तब भारत की विकास यात्रा और अधिक मजबूत होगी।
    वर्ष 2047 का विकसित भारत आज से ही बनना शुरू हो चुका है। उसकी नींव आज की कक्षाओं में रखी जा रही है, उसकी उम्मीदें बच्चों की आंखों में पल रही हैं और उसकी दिशा युवाओं के सपनों से तय होगी। इसलिए जरूरी है कि देश का कोई बच्चा अवसर के अभाव में अपने सपने को छोटा न करे। उसके सपनों की उड़ान जितनी ऊंची हो, भारत का आकाश उतना ही खुला हो।

    क्योंकि 25 करोड़ बच्चों के सपने केवल 25 करोड़ व्यक्तिगत सपने नहीं हैं। ये 25 करोड़ संभावनाएं हैं, 25 करोड़ नई दिशाएं हैं और 25 करोड़ ऐसे भविष्य हैं, जिनसे मिलकर भारत का नया अध्याय लिखा जाएगा। जब इन सपनों को शिक्षा, अवसर, कौशल और सही दिशा का सहारा मिलेगा, तब वर्ष 2047 का विकसित भारत केवल एक लक्ष्य नहीं रहेगा, बल्कि करोड़ों बच्चों की आंखों में दिखाई देने वाला साकार सपना होगा। यही ‘सेवा संकल्प अभियान’ बच्चों के सपनांे के भारत का वास्तविक भाव है।

     डॉ. ओम प्रकाश डहरिया

       सहायक जनसम्पर्क अधिकारी

  • पुलिस-राजस्व की शिकायतों पर सीएम योगी सख्त, अफसरों को दिए त्वरित कार्रवाई के निर्देश

    पुलिस-राजस्व की शिकायतों पर सीएम योगी सख्त, अफसरों को दिए त्वरित कार्रवाई के निर्देश

    लखनऊ
    मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोमवार को अधिकारियों से कहा कि समाज में वैमनस्यता फैलाने वाले लोग मामूली घटनाओं को बड़ा बनाना चाहते हैं। ऐसे में जनपदों में हर छोटी से छोटी घटना पर जिलाधिकारी और एसपी स्वयं नजर रखें। तत्काल घटनास्थल पर पहुंचकर पीड़ितों की सुनवाई करें और दोषियों पर नियमानुसार कार्रवाई कर मामलों को खत्म कराएं। उन्होंने चेतावनी दी कि छोटी-छोटी घटनाओं में भी उदासीनता और लापरवाही बर्दाश्त नहीं होगी। सीएम योगी जनता दर्शन में विभिन्न जिलों से आए लोगों से मुलाकात कर उनकी समस्याएं सुनने के बाद प्रार्थना पत्रों को लेकर अफसरों को कई निर्देश भी दिए।

    मुख्यमंत्री ‘जनता दर्शन’ में कुर्सियों पर बैठे हर पीड़ित से मिले। उनकी समस्याओं और शिकायतों को सुना। मुख्यमंत्री ने प्रशासन, पुलिस, राजस्व, विद्युत आदि से जुड़ी शिकायतों का प्रार्थना पत्र लेते हुए कहा कि सरकार साढ़े 9 साल से बिना भेदभाव हर पीड़ित की उचित समस्या का समाधान करा रही है। अधिकारी संवेदनशील होकर जनशिकायतों का समयबद्ध निस्तारण सुनिश्चित करें। पात्र व्यक्ति को जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ दिलाएं, मरीजों के इलाज की व्यवस्था कराएं और भूमाफिया/दबंगों पर कठोरतम कार्रवाई करें।

    पुलिस से संबंधित शिकायतों पर हुए सख्त
    सीएम योगी आदित्यनाथ के सामने पुलिस और राजस्व से जुड़ीं शिकायतें अधिक रहीं। इस पर मुख्यमंत्री सख्त हो गए। उन्होंने कहा कि पुलिस कमिश्नर, एडीजी, आईजी, डीआईजी, एसएसपी स्तर के अधिकारी नियमित रूप से जनसमस्याओं का जनपदों में निराकरण कराएं। यदि किसी मातहत द्वारा लापरवाही की शिकायत मिले तो उस पर भी कार्रवाई करें। सीएम ने राजस्व और कानून व्यवस्था से जुड़े मामलों के शीघ्र निस्तारण के निर्देश दिए।

    बच्चे से पूछा- कैसे हो, कहां पढ़ते हो
    ‘जनता दर्शन’ में मां के साथ आए नन्हे बच्चे से मुख्यमंत्री ने हालचाल पूछा। फिर पढ़ाई के बारे में भी जानकारी ली। मुख्यमंत्री ने उसकी तरफ चॉकलेट बढ़ाई तो उसने झट से चॉकलेट ले ली। फिर सीएम ने चॉकलेट वापस मांगी तो बच्चे ने मना कर दिया। इस पर पूरा हॉल खिलखिला उठा। मुख्यमंत्री ने सुखद भविष्य का आशीर्वाद देते हुए बच्चे से मन लगाकर पढ़ाई करने को कहा।

    सीएम योगी मेरठ रवाना, एनएच-58 पर भारी वाहनों की नो-एंट्री
    लखनऊ में जनता दर्शन के बाद सीएम योगी मेरठ रवाना हो गए हैं। योगी वहां भाजपा अध्यक्ष नितिन नवीन के साथ कई बैठकों और सम्मेलन में हिस्सा लेंगे। मेरठ में वीवीआईपी मूवमेंट के दौरान एनएच-58 पर भारी वाहनों की आवाजाही पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगी। ट्रैफिक पुलिस ने लोगों से अपील की है कि जरूरी न हो तो इस मार्ग का इस्तेमाल न करें।

    एसपी यातायात राजेश कुमार श्रीवास्तव ने बताया कि दिल्ली-गाजियाबाद की ओर से मेरठ आने वाले वाहन चालक एनएच-58 से बचते हुए वैकल्पिक मार्ग अपनाएं। मोदीपुरम फ्लाईओवर, कंकरखेड़ा फ्लाईओवर, रोहटा रोड फ्लाईओवर और बागपत रोड फ्लाईओवर की ओर भी यातायात व्यवस्था पर विशेष निगरानी रहेगी। वाहन चालकों से अपील की है कि वीवीआईपी कार्यक्रम के दौरान अनावश्यक यात्रा से बचें और निर्धारित वैकल्पिक मार्गों का प्रयोग करें, ताकि शहर की यातायात व्यवस्था सुचारू बनी रहे।

  • स्व सहायता समूह से जुड़कर आत्मनिर्भर बनीं मीना दीदी

    स्व सहायता समूह से जुड़कर आत्मनिर्भर बनीं मीना दीदी

    कहानी बदलाव की

    स्व सहायता समूह से जुड़कर आत्मनिर्भर बनीं मीना दीदी

    पशुपालन और तार फेसिंग सहित विभिन्न गतिविधियों से बढ़ी आमदनी, बनीं लखपति दीदी

    अनूपपुर
     ग्रामीण क्षेत्र की महिलाओं के लिए आजीविका मिशन के स्व सहायता समूह अवसर उपलब्ध कराने का माध्यम बन रहे हैं। अनूपपुर जिले के विकासखण्ड जैतहरी के ग्राम सिवनी की मीना दीदी ने स्व सहायता समूह से जुड़कर अपनी आजीविका को आगे बढ़ाया। समूह से मिले सहयोग और ऋण के माध्यम से उन्होंने पशुपालन के साथ तार फेसिंग,धान कटाई मशीन और ईंट निर्माण जैसी गतिविधियों को भी आगे बढ़ाया।

    समूह से जुड़कर मिली आगे बढ़ने की राह

    मीना दीदी बताती हैं कि पहले परिवार की आर्थिक स्थिति सीमित थी। पति की आय से घर का खर्च और बच्चों की पढ़ाई सहित अन्य जरूरतें पूरी करना चुनौतीपूर्ण था। इसी दौरान वे मध्यप्रदेश डे-राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन से जुड़ीं और 12 अन्य महिलाओं के साथ मिलकर गायत्री स्व-सहायता समूह का गठन किया। समूह से जुड़ने के बाद उन्हें बचत, बैंकिंग और ऋण के माध्यम से अपनी आजीविका गतिविधियां शुरू करने का अवसर मिला। उन्होंने अलग-अलग अवसरों पर लगभग 5 लाख रुपये का आजीविका ऋण लेकर विभिन्न गतिविधियों में निवेश किया।

    पशुपालन से नियमित आमदनी

    मीना दीदी ने पशुपालन को अपनी प्रमुख आजीविका गतिविधि के रूप में आगे बढ़ाया। वर्तमान में उनके पास 25 गाय, 20 बछड़े और 5 भैंसें हैं। प्रतिदिन लगभग 50 से 60 लीटर दूध का उत्पादन होता है, जिसकी बिक्री मोजर बेयर कंपनी को की जाती है। इसके साथ ही वे तार फेसिंग सहित अन्य गतिविधियों से भी आय अर्जित कर रही हैं। अपनी आजीविका गतिविधियों के संचालन में वे स्थानीय स्तर पर 8 मजदूरों को रोजगार भी उपलब्ध करा रही हैं। वर्तमान में उनकी मासिक आय लगभग 35 से 40 हजार रुपये तक पहुंच गई है।

    आत्मनिर्भरता की ओर बढ़े कदम

    मीना दीदी कहती हैं कि स्वयं सहायता समूह से जुड़ने के बाद उन्हें अपनी आजीविका को आगे बढ़ाने का अवसर मिला। समूह से प्राप्त सहयोग और ऋण ने उन्हें अपने स्तर पर काम शुरू करने का हौसला दिया। वे अपनी आजीविका गतिविधियों को आगे बढ़ाने के साथ समूह से प्राप्त ऋण की अदायगी भी कर रही हैं।
    महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने की दिशा में किए जा रहे प्रयासों के लिए उन्होंने प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के प्रति आभार व्यक्त किया।

    आज मीना दीदी अपने परिवार की आर्थिक जरूरतों में सहयोग देने के साथ अन्य लोगों के लिए रोजगार का माध्यम भी बन रही हैं। पशुपालन, तार फेसिंग और अन्य आजीविका गतिविधियों के माध्यम से आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ती मीना दीदी की कहानी ग्रामीण महिलाओं के लिए बदलाव और आगे बढ़ने की प्रेरणा देती है।